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प्रेगनेंसी में सुबह की चाय से पहले इन कामों को जरूर करें

प्रेगनेंसी के दौरान चाय का सेवन सुरक्षित होता है या नहीं इस बारे में अक्सर गर्भवती महिलाएं पूछती है। क्योंकि कुछ महिलाओं के दिन की शुरुआत ही चाय से होती है। तो इसका जवाब है हाँ, प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला चाय पी सकती है लेकिन महिला को सिमित मात्रा में ही चाय का सेवन करना चाहिए। साथ ही यदि प्रेग्नेंट महिला की सुबह उठते ही चाय पीने की आदत है तो सुबह की पहली चाय से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यदि गर्भवती महिला सुबह उठते ही सबसे पहले खाली पेट चाय का सेवन करती है तो इसके कारण महिला सेहत सम्बन्धी परेशानियां हो सकती है।

प्रेगनेंसी में सुबह खाली पेट चाय पीने के कारण होने वाली परेशानियां

  • पेट में गैस की समस्या होना।
  • कब्ज़, सीने में जलन की समस्या का अधिक होना।
  • पेट खराब होना जैसे की दस्त लगना।
  • उल्टी, जी घबराना जैसी दिक्कतें होना।
  • भूख कम लगना।
  • वैसे चाय पीने से ज्यादातर महिलाएं यही समझती है की चाय पीने से सुस्ती दूर होती है लेकिन गर्भवती महिला को खाली पेट चाय पीने से आलस ज्यादा महसूस होता है।
  • चाय में कैफीन की मात्रा मौजूद होती है ऐसे में खाली पेट कैफीन का सेवन करने से गर्भ पर भी बुरा असर पड़ता है।

प्रेग्नेंट महिला को सुबह चाय का सेवन करने से पहले क्या करना चाहिए

प्रेग्नेंट महिला की यदि सुबह चाय पीने की आदत है तो महिला को अपनी इस आदत को बदलने की जरुरत नहीं है। लेकिन महिला को चाय पीने से पहले कुछ कामों को जरूर करना चाहिए क्योंकि खाली पेट चाय पीने से गर्भवती महिला को दिक्कत हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को सुबह चाय पीने से पहले क्या करना चाहिए।

ब्रश करें

सुबह उठते ही चाय पीने से पहले ब्रश जरूर करें। क्योंकि सुबह के समय बिना ब्रश किये मुँह में बैड बैक्टेरिया हो सकता है जो की चाय पीने के साथ महिला के शरीर में प्रवेश करता हैं जो माँ व् बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में ब्रश करने से मुँह फ्रैश हो जाता है और बैक्टेरिया भी खत्म हो जाता है।

खाली पेट चाय न पीएं

गर्भवती महिला को खाली पेट चाय नहीं पीनी चाहिए क्योंकि खाली पेट चाय पीने से महिला को सिर दर्द, घबराहट, उल्टी, पेट से जुडी समस्या आदि होने का खतरा रहता है। ऐसे मे या तो चाय का सेवन करते समय कुछ खाएं या फिर कुछ खाने के बाद ही चाय का सेवन करें। ताकि प्रेग्नेंट महिला को इन सेहत सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।

सुबह उठकर ऐसी चाय न पीएं

काली चाय, अजवायन डालकर चाय, ग्रीन टी आदि का सेवन न करें। क्योंकि इनमे कैफीन की बहुत ज्यादा अधिकता होती है जिसके कारण महिला व् बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है।

ज्यादा चाय का सेवन नहीं करें

सुबह सुबह गर्भवती महिला का यदि चाय पीने का मन है तो प्रेग्नेंट महिला चाय पी सकती है। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है की महिला गिलास भर कर चाय पीने लग जाये। क्योंकि ज्यादा चाय पीने से प्रेग्नेंट महिला को पेट दर्द, पेट में गैस जैसी परेशानी अधिक हो सकती है। ऐसे में सुबह उठकर एक छोटा कप चाय का पीना सही होता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान सुबह उठकर चाय का सेवन करने से जुड़े कुछ टिप्स, ऐसे में आप चाहते हैं की आपकी दिन की शुरुआत अच्छी हो और आपको सेहत सम्बन्धी कोई दिक्कत न हो। तो इससे बचने के लिए आपको खाली पेट चाय का सेवन नहीं करना चाहिए।

डिलीवरी के लिए हॉस्पिटल जाने की तैयारी ऐसे करें

प्रेगनेंसी के नो महीने जैसे जैसे पुरे होने लगते है वैसे वैसे हमे डिलीवरी की चिंता बढ़ती जाती है। गर्भावस्था का नोवा महीना शुरू होते ही घर परिवार के सभी लोगों की चिंता भी बढ़ जाती है सभी लोग नन्हे बेबी के आने का बेसब्री से इंतज़ार करते है और घर के बड़े हमे डिलीवरी की तैयारी करने की भी सलाह देते है। जो गर्भवती महिलाए पहली बार माँ बनने जा रही है उन्हें इस तैयारी का मतलब नहीं समझ आएगा, पर जो महिलाये पहले ही इस स्थिति से गुजर चुकी है उन्हें बहुत अच्छे से पता होता है के खुद को कैसे और क्या क्या चीजे डिलीवरी से पहले हॉस्पिटल लेकर जाने के लिए तैयार करनी पड़ती है।

आज हम आपको इस लेख में यही बताने वाले है के डिलीवरी के लिए हॉस्पिटल जाने के लिए ऐसे करे तैयारी।

हॉस्पिटल बैग पैक

जब आपको डिलीवरी के लिए हॉस्पिटल जाना होता है तो आपको बहुत से सामान की जरुरत पड़ती है। आपके परिवार वालों को बार बार हॉस्पिटल से घर के चक्कर ना लगाने पड़े, इसके लिए पहले से ही एक बैग तैयार करे जिसमे आप वो सब सामान डाले जिसकी आपको हॉस्पिटल में जरुरत पड़ सकती है। आपको उन सभी चीजों के बारे में सोचना है जिनकी आपको डिलीवरी के समय हॉस्पिटल में जरुरत होगी। आप अपने बैग में नीचे दी गयी लिस्ट के हिसाब से समान रख सकते है।

  • सबसे पहले अपना मेडिकल बिमा कार्ड रखे। अगर आपकी डिलीवरी मेडिकल बीमे के द्वारा होने वाली है तो अपने बीमे से संबंधित कार्ड और पेपर्स बैग में जरूर रखें जिनकी आपको हॉस्पिटल में पहुंचते ही जरुरत पड़ेगी।
  • अगर आपकी डिलीवरी बिमा के द्वारा नहीं होने वाली तो प्रयाप्त मात्रा में नगद का इंतजाम कर अपने पास रखे।
  • अपने बैग में अपने लिए जरुरी कपड़े रखे। अपने कपड़ो में अंडरगारमेंट्स रखना ना भूले हो सके तो एक्स्ट्रा पेअर ही रखें।
  • डिलीवरी के बाद जिन चीजों की आपको जरुरत हो वह सामान पहले से ही खरीद कर जरूर रखे जैसे की पैड आदि।
  • इसके अतिरिक्त अपने लिए फीडिंग ब्रा भी जरूर लेकर रखे। इससे शिशु को स्तनपान करवाते समय आपको आसानी रहेगी।
  • आपके शिशु को होते ही बेड शीट और कपड़ो की जरुरत पड़ेगी, उसका भी ध्यान रखे। वैसे तो कई हॉस्पिटल्स में बेबी को हॉस्पिटल की ही बेड शीट में लपेटते है पर अगर आप चाहते है के आपका शिशु आपके लाये हुए कपड़े और चादर पहने तो उस समान का इंतज़ाम कर अपने डिलीवर बैग में रखे।
  • बेबी के लिए डाइपर और छोटे छोटे कपड़े और बेबी के लिए मुलायम तौलिया जरूर रखे।
  • डिलीवरी के बाद जब आप पहली बार नहायेंगी तो आपको तोलिये की जरुरत पड़ेगी, हॉस्पिटल टॉवल का प्रयोग करने से अच्छा आप अपने घर से साफ़ तोलिये लेकर जाए।

वैसे तो हो सकता है यह सभी चीजे आपको हॉस्पिटल में भी मिल जाए पर आपके पास विकल्प पहले से ही मौजूद होना चाहिए। अगर आप हॉस्पिटल्स से मिली चीजों को इस्तेमाल नहीं करना चाहती और उनकी क्वालिटी आपको पसंद ना हो तो अपनी लायी हुई चीजों का इस्तेमाल बिना झिझक के कर सकती है।

कब क्या करें?

ध्यान रखिये अपने डिलीवरी बैग पैक करने के लिए डिलीवरी के समय के आने का इंतज़ार मत कीजिये। माना जाता है के प्रेगनेंसी का नोवा महीना शुरू होते ही डिलीवरी कभी भी हो सकती है इसलिए आप भी नोवा महीना शुरू होती ही अपना डिलीवरी बैग तैयार कर रख दीजिए। ताकि लास्ट समय में आपको सामान के लिए भागना न पड़े।

डिलीवरी बैग तैयार होने से आपको बहुत राहत मिलेगी क्योंकि लेबर पैन शुरू होते ही समान इकट्ठा करने की होड़ में ना पड़कर बस बैग उठाकर हॉस्पिटल जाना है। इससे आपको और आपके परिवार के लिए भी आसानी होगी।

बिमा एजेंट

यदि आपका कोई बिमा एजेंट है जिसके द्वारा आपने अपना बिमा करवाया था तो पहले से ही उससे भी बात कर के रखे जिस से डिलीवरी के बाद हॉस्पिटल में बिल पेमेंट में कोई समस्या ना आये। अगर आपका बिमा कॉर्पोरेट यानि आपके ऑफिस द्वारा करवाया गया है तो अपने एच् आर डिपार्टमेंट से भी पहले ही बात कर के उन्हें जानकारी दे दें।

हॉस्पिटल डेस्क

अपनी डिलीवरी डेट को ध्यान में रखते हुए पहले ही हॉस्पिटल के फ्रंट डेस्क पर बात कर के रखे जिससे की लास्ट समय में बेड ना मिलने की कोई समस्या ना हो। हालांकि इसके बारे में आपके डॉक्टर भी आपको पहले से ही जानकारी दे देंगे। फिर अपनी और से पहले ही फॉर्मलिटीज पूरी कर के रखना सुरक्षित रहता है। बहुत से हॉस्पिटल में प्री रजिस्ट्रेशन करवाया जाता है, जिससे आपके लिए बेड बुक हो जाता है डिलीवरी यह करवाना सबसे उत्तम विकल्प होता है।

तनाव

ऐसा देखने में आता है के जैसे जैसे डिलीवरी का समय नजदीक आता है वैसे वैसे गर्भवती महिला को स्ट्रेस बढ़ने लगता है। इस समय में जरुरी है के आप खुद को स्ट्रेस से दूर रखे। स्ट्रेस को दूर रखने के लिए अच्छे से नींद ले और अच्छे से भोजन का सेवन करे। प्रेगनेंसी के लास्ट समय में तनाव मुक्त होने के लिए अपने बेबी के बारे अच्छा अच्छा सोचे और शिशु के आने के लिए तैयारियां करे चाहे तो शॉपिंग के लिए भी जा सकते है। इससे आपको ख़ुशी महसूस होगी और डिलीवरी का कम स्ट्रेस होगा। इसके अतिरक्त स्ट्रेस कम करने के लिए अपना पसंदीदा भोजन खाये, मैडिटेशन, ध्यान और योग की मदद भी ले सकते है।

प्रीनेटल क्लास

अपने डिलीवरी प्रक्रिया को समझने के लिए और खुद को डिलीवरी के लिए तैयार करने के लिए प्रीनेटल क्लास लेना बहुत जरुरी होता है। इन क्लासेज में आपको डिलीवरी से संबंधित पूरी जानकारी दी जाती है और बताया जाता है के लेबर पैन शुरू होते ही क्या करना सही होता है। आजकल बहुत से डॉक्टर भी इन क्लासेज को लेने की सलाह देते है। इन प्रीनेटल क्लास में आपको अपने शिशु को कैसे संभालना है यह भी बताया जाता है। अब सवाल उठता है के प्रीनेटल क्लास कब लेनी किये। वैसे तो समय आने पर इसके लिए आपको आपके डॉक्टर ही बता देती है। पर फिर भी यह क्लासेज प्रेगनेंसी के 20 से 25 सप्ताह में शुरू कर देना उचित रहता है।

आशा करते है के इस लेख से आपको अपने आपको डिलीवरी के लिए तैयार करने के लिए बहुत मदद मिलेगी।

पीरियड्स लेट व् मिस होने के कारण

पीरियड्स

जिस तरह बॉडी में लगातार शारीरिक प्रक्रियाएं चलती रहती हैं, उसी तरह पीरियड्स का आना भी महिलाओं के शरीर में एक शारीरिक प्रक्रिया की तरह होता है। जो हर महीने महिला को आते है, इस दौरान महिला को रक्तस्त्राव, पेट, कमर, पेट के निचले हिस्से में दर्द की समस्या हो सकती है। पीरियड्स को कई लोग माहवारी, मासिक धर्म, एमसी के नाम से भी जानते हैं। हर महिला को पीरियड्स का आना बहुत जरुरी होता है क्योंकि इसके न होने के कारण महिला को बहुत सी शारीरिक समस्या हो सकती है। साथ ही कुछ महिलाओं को पीरियड्स से जुडी समस्याएँ भी हो सकती है जैसे की पीरियड्स का लेट आना, पीरियड्स का मिस हो जाना, पीरियड्स के दौरान ब्लड का अधिक या कम मात्रा में आना, तीन से कम या एक हफ्ते से ज्यादा पीरियड्स का होना, आदि यह सब अनियमित माहवारी के लक्षण होते हैं।

मासिक धर्म के लेट होने या मिस होने के कारण

कुछ महिलाएं पीरियड्स के लेट होने की समस्या से परेशान हो सकती हैं, और पीरियड्स के लेट होने का कोई एक कारण नहीं होता है। बल्कि यह महिला के बॉडी में होने वाले बदलाव, महिला की सेहत, महिला के स्वास्थ्य आदि पर निर्भर करता है। तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की मासिक धर्म के लेट होने के क्या क्या कारण हो सकते हैं।

पीरियड्स की शुरुआत में

यदि आपको अभी -अभी पीरियड्स आना शुरू हुआ है तो शुरुआत में पीरियड्स का लेट होना बहुत ही आम बात होती है। ऐसे में इसे लेकर घबराने की बिल्कुल भी जरुरत नहीं होती है, क्योंकि यह धीरे धीरे अपने आप ही सही हो जाते हैं।

एक्सरसाइज

जरुरत से ज्यादा शारीरिक श्रम करने के कारण शरीर की गतिविधियों पर बुरा असर पड़ सकता है जिसके कारण पीरियड्स के लेट होने जैसी परेशानी हो सकती है। इसके आलावा जो महिलाएं डांसर होती है, खिलाड़ी होती है, बहुत ज्यादा व्यायाम आदि करती है उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि अधिक शारीरिक श्रम करने के कारण एस्ट्रोजन हॉर्मोन की बॉडी में कमी होने लग जाती है जिसके कारण मासिक धर्म चक्र प्रभावित हो सकता है।

मोटापा

जरुरत से ज्यादा वजन का होना भी पीरियड्स के लेट होने का कारण हो सकता है। क्योंकि वजन बढ़ने के कारण बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो सकती है जिसके कारण महिला को पीरियड्स देरी से आ सकते हैं। और मासिक धर्म के साथ अन्य शारीरिक परेशानियों के कारण महिला को परेशान होना पड़ सकता है, ऐसे में महिला को फिट रहने के लिए और पीरियड्स से जुडी इस समस्या से निजात पाने के लिए अपने वजन को नियंत्रित रखने की कोशिश करनी चाहिए।

वजन में कमी

मोटापे के कारण ही नहीं बल्कि जिन महिलाओं का वजन सामान्य से बहुत कम होता है। उन महिलाओं के शरीर एस्ट्रोजन का उत्पादन अच्छे तरीके से नहीं हो पाता है जिसके कारण पीरियड्स में देरी या पीरियड्स मिस होने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

थायरॉइड

जो महिलाएं थायरॉइड की समस्या से ग्रसित होती है उनकी बॉडी में भी हार्मोनल का असंतुलन होने के कारण पीरियड्स के लेट या पीरियड्स के मिस होने जैसी परेशानी हो सकती है। ऐसे में महिला को इस समस्या का डॉक्टरी इलाज करवाना चाहिए ताकि पीरियड्स से जुडी परेशानी से महिला को निजात पाने में मदद मिल सके।

PCOS

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यह भी एक शारीरिक समस्या है जिससे अधिक वजन वाली महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। और यदि किसी महिला को यह समस्या है तो इसके कारण भी महिला को पीरियड्स लेट होने या मिस होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और इस समस्या का इलाज केवल डॉक्टर द्वारा ही किया जा सकता है।

दवाइयां

जो महिलाएं किसी शारीरिक समस्या से बहुत लम्बे समय से परेशान होती है और उनसे निजात पाने के लिए नियमित दवाइयों का सेवन करती हैं। उन महिलाओं को भी पीरियड्स से जुडी इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन दवाइयों का सेवन छोड़ने के बाद महिला को इस परेशानी से निजात पाने में भी मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी

शादी के बाद किसी भी महिला को पीरियड्स न आने पर वह सबसे पहले यही सोचती है की कहीं उसका गर्भ तो नहीं ठहर गया है। जो की हो सकता है क्योंकि पीरियड्स मिस होने का एक कारण प्रेगनेंसी भी हो सकती है, ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी किट की मदद से चेक करके जरूर देखना चाहिए की कहीं उसका गर्भ तो नहीं ठहर गया है।

ब्रेस्टफीडिंग

जो महिलाएं डिलीवरी के बाद शिशु को स्तनपान करवाती है उन्हें भी पीरियड्स देरी से आने की समस्या हो सकती है। और इसमें बिल्कुल भी घबराने की जरुरत नहीं होती है।

गर्भनिरोधक दवाइयां

गर्भनिरोधक दवाइयों का सेवन शादी के बाद अक्सर महिलाएं करती हैं ताकि उनका गर्भ न ठहरे, और यह दवाइयां मासिक धर्म चक्र पर बुरा असर डाल सकती है। जिसके कारण हो सकता है की महिला को पीरियड्स में देरी जैसी समस्या का सामना करना पड़े।

तनाव

जो महिलाएं मानसिक तनाव की समस्या से परेशान होती है उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि महिला के तनाव लेने के कारण बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो सकती है जिसके कारण मासिक धर्म चक्र प्रभावित हो सकता है।

नशा

धूम्रपान, शराब व् अन्य किसी भी तरह के नशे का सेवन यदि महिला करती है तो इसके कारण भी पीरियड्स की अनियमिता जैसी परेशानी का सामना महिला को करना पड़ सकता है। जिसके कारण महिला को पीरियड्स में देरी या मिस होने जैसी समस्या भी हो सकती है।

बदलती दिनचर्या

आपकी दिनचर्या भी मासिक धर्म चक्र को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि यदि आप बहुत ज्यादा यात्रा करती है, खाना में लापरवाही करती है, भरपूर नींद नहीं लेती है, तो इन सब चीजों का असर भी पीरियड्स पर पड़ता है जिसके कारण पीरियड्स में देरी की समस्या हो सकती है।

डाइटिंग

कुछ महिलाएं वजन घटाने के लिए डाइटिंग शुरू कर देती है, इससे आपका वजन तो कम हो जाता है। लेकिन शरीर की क्रियाओं पर बुरा असर पड़ता है, जैसे की डाइटिंग अधिक करने के कारण बॉडी में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जिसके कारण महिला को पीरियड्स चक्र पर इसका बुरा असर पड़ता है और आपको पीरियड्स में देरी या मिस होने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

मेनोपॉज़

यदि किसी महिला को मेनोपॉज़ शुरू होने वाला होता है तो उससे पहले कुछ समय तक महिला को पीरियड्स में देरी होना या पीरियड्स का मिस होना प्रीमेनोपॉज का ही एक लक्षण होता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला को पीरियड्स के मिस होने या पीरियड्स के लेट होने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को अपनी सेहत, स्वास्थ्य, दिनचर्या सबका अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि पीरियड्स से जुडी इस समस्या से निजात पाने में मदद मिल सके।

वेज या नॉनवेज प्रेगनेंसी में क्या है फायदेमंद गर्भ में पल रहे शिशु के लिए

गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने के लिए और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए खान पान का बेहतर तरीके से ध्यान देने की सलाह दी जाती है। लेकिन अक्सर देखने की मिलता है की महिलाएं खान पान को लेकर दुविधा में रहती है की उन्हें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, महिला को किन चीजों का सेवन करने से फायदा मिलता है और किन चीजों को खाने से से नुकसान होता है? क्या महिला को पूरी तरह से वेज खाने का सेवन करना चाहिए या पूरी तरह से नॉन वेज का सेवन करना चाहिए? या फिर दोनों का सेवन ही फायदेमंद होता है? ऐसे ही कुछ खान पान से जुड़े सवाल गर्भवती महिला के मन में उथल पुथल कर रहे होते है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला चाहे तो खान पान के लिए डॉक्टर से भी राय ले सकती है, तो लीजिये आज हम भी आपको प्रेगनेंसी के दौरान वेज और नॉनवेज खाने को लेकर कुछ बातें बताने जा रहें हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान वेज या नॉन वेज

गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के लिए और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए खाने में वेज और नॉन वेज दोनों को आप शामिल कर सकते हैं। हां लेकिन यह भी सच है की नॉन वेज खाने में सब्जियों व् फलों की तुलना में अधिक आयरन पाया जाता है। मछली में मौजूद प्रोटीन और ओमेगा 3 फैटी एसिड शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। ऐसे में जो महिलाएं नॉन वेज नहीं खाती है उनके गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए सभी जरूरते वेज खाने से भी पूरी की जा सकती है, ऐसा नहीं है की उनके लिए नॉन वेज खाना जरुरी होता है। और जो महिलाएं नॉन वेज खाती है वो वेज का सेवन भी कर सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के लिए वेज या नॉन वेज में से किसी एक का चुनाव करना गलत होता है।

गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए वेज खाना या नॉन वेज खाना क्या है बेहतर

गर्भ में शिशु के विकास के लिए जरुरी पोषक तत्व जैसे आयरन, प्रोटीन, ओमेगा 3 फैटी एसिड, आदि पोषक तत्वों की जरुरत होती है जो की नॉनवेज खाने के साथ वेज खाने में भी मिल जाते हैं। ऐसे में आप जो भी आहार ले वह पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए, और यदि आप नॉन वेज भी खाना चाहते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है की आप इसे नियमित खाएं बल्कि हफ्ते में दो या तीन बार इसका सेवन कर सकते हैं। ऐसे में बाकी दिन शाकाहारी आहार का सेवन करने से ही गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु की सभी जरूरतों को पूरा किया जा सकता है, इसीलिए गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए केवल वेज या सिर्फ नॉन वेज खाने को सही कहना गलत बात होगी, साथ ही खाने को लेकर महिला को बस एक बात का ध्यान रखना चाहिए की आपके आहार में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व हो और शिशु को उससे किसी तरह का नुकसान न हो।

नॉन वेज या वेज का सेवन करते हुए रखें इन बातों का ध्यान

बासी, ठंडा, अधपका, बहुत देर तक बिना ढके हुए पड़े आहार का सेवन नहीं करना चाहिए। जो भी खाएं उसमे ज्यादा तेल और मसालों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मछली का सेवन करते हुए ध्यान रखें की उसमे मर्करी की मात्रा नहीं होनी चाहिए। हरी सब्जियों का सेवन करने से पहले उन्हें अच्छे से धोना चाहिए, कच्ची सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए, आदि। ऐसा करने से प्रेगनेंसी के दौरान पेट से सम्बंधित होने वाली परेशानियों से बचाव के साथ इन्फेक्शन की समस्या से बचने में भी मदद मिलती है।

तो यह है प्रेगनेंसी में खान पान से जुड़े कुछ टिप्स, ऐसे में यह महिला की इच्छा पर निर्भर करता है की उसे क्या खाना चाहिए, किसी एक चीज का सेवन ही उत्तम हो ऐसा सही नहीं होता है। इसीलिए महिला प्रेगनेंसी में वेज और नॉन वेज दोनों का सेवन कर सकती है, बस इतना ध्यान रखने की जरुरत होती है की जिस भी चीज का महिला सेवन करे उसमे पोषक तत्व भरपूर होने चाहिए।

Hindi Video : Pregnancy Me Non-Veg Khayen ya Nahi?

Non-Veg During Pregnancy

आँख में यदि कचरा या कीड़ा चला जाये तो क्या करें ?

अचानक आँख में उड़ता हुआ कीड़ा या कचरा आये और आपकी आँख में गिर जाये, तो आप क्या करेंगीं?गर्मी हो, बरसात हो ऐसे में अचानक मौसम में बदलाव आता है। और वातावरण में कई कीट पतंगे हो जाते हैं। कीट पतंगे इतने छोटे -छोटे होते हैं की हमे वो दिखाई भी नहीं देते। ऐसे में कई बार वह उड़ते हुए हमारे आँख में, ये कीट पतंगे चले जाते हैं हमारे शरीर क सबसे महत्वपूर्ण अंगो में से होता हैं आँख। छोटी से छोटी चीज़े परेशान कर देती हैं अगर आँख में चली जाये तो। अगर कोई चोट से छोटा कीड़ा भी आंख में आ जाये तो इंसान बहुत परेशान हो जाता है। तो आइए इस आर्टिकल के जरिए जानते है कि अगर आँख में कोई कीड़ा चला जाये तोउसे कैसे निकले और क्या उपाय करें।

तुरंत मारें पानी की छीटें

जब भी कभी अचानक से आपकी आँख में कोई कीड़ा चले जाये, तो आप क्या करेंगे ? आप अपनी आँख में ठन्डे पानी की छींटे मारें। छींटे मारने से कीड़ा और कचरा निकल जायेगा और पानी के बहाव लगने से आँख से बहार आ जायेगा। और आपकी आँख को भी तुरंत आराम मिलेगा। लेकिन ये याद रखे की पानी हमेशा साफ़ और ठंडा ही ले। ऐसा न हो की जल्दबाज़ी में देखे बिना ही आप गन्दा पानी अपनी आँखों में डाल लें और आपकी परेशानी और बढ़ जाएं।

आँख को मसले नहीं

जब भी आँख में कीड़ा जाये तो कभी भी आप जल्दी में अपनी आँख को नहीं मसले। ऐसा करने से कीड़ा मर जाता है और आँख के अंदर ही रह जाता हैं। जिसके कारण आँख लाल हो जाती हैं। आँख मे दर्द होने लगता हैं। इसके लिए हमे एक सूती कपडे को पानी में भिगो कर अपनी आंख में से उस कीड़े को सावधानी पूर्वक बाहर निकलने का प्रयास करने चाहिए । इस बात का जरूर ध्यान रखे की कपड़ा हमेशा साफ़ सुथरा ही लें। गंदे कपडे से आँखों में जल्दी इंफक्शन हो जाता है। तो इसके लिए आप हमेशा साफ़ और कोमल कपडा इस्तेमाल करें। ताकि आँखो को कोई नुकसान नहीं हो और कीड़ा भी निकल जाये।

गुलाबजल आँख में डालें

आँख में जब कीड़ा चला जाये तो आप गुलाबजल का भी प्रयोग कर सकती हैं। उससे भी कीड़ा निकल जाता हैं। इसके लिए आप एक कटोरी में थोड़ा सा गुलाबजल लें। और उसमे थोड़ी सी रुई को भिगो लें। उसके बाद उससे ही आप अपनी आँख मे से डाल कर धीरे-धीरे से उस कीड़े को निकलने की कोशिश करें। इस तरह से भी आपकी आँख के अंदर गया हुआ कीड़ा आसानी से निकल जायेगा। और गुलाब जल आपकी आँखों को भी ठंडक देगा। जिससे आपको आराम मिलेगा।

सोने के बाद भी कीड़ा निकल जाता है

कई बार ऐसा होता है दिन भर परेशान करने के बाबजूद भी कीड़ा नहीं निकलता। अगर आप रात में सो जाते हैं वो भी आँख में पड़ा हुआ कीड़ा निकल जायेगा।

कोई भी उपाय करने से पहले ध्यान रखें आँख बहुत ही नाजुक होता है। इसलिए ध्यान पूर्वक करें। और ज्यादा परेशानी होने पा आप कोई भी उपाय को नहीं माने सीधे डॉक्टर से संपर्क करें।

पुरुष में शुक्राणु कब तक निकलता है?

पुरुष के शुक्राणु

प्रेगनेंसी के लिए जिस तरह महिला के अंडाणु में रखे अंडे का हेल्दी होना जरुरी होता है, उसी तरह पुरुष के शुक्राणु का हेल्दी होना भी जरुरी होता है। और जैसे एक उम्र के बाद महिला के अंडाशय में अंडे बनने की प्रक्रिया बंद हो जाती हैं, महिला को पीरियड आना बंद हो जाता है, यानी महिला को मेनोपोज़ हो जाता है तो उसके बाद महिला गर्भधारण नहीं कर पाती है। वैसे ही कभी आपने सोचा है की क्या पुरुषो को भी ऐसा कुछ होता है? जैसे की एक उम्र के होने के बाद पुरुष के शुक्राणु में कमी आती है? या शुक्राणु बनने की प्रक्रिया खत्म हो जाती है? आदि। जैसे की कई बार पुरुषों में यह कमी सामने आती है की पुरुषों के शुक्राणु की गुणवत्ता की कमी के कारण महिला का गर्भधारण नहीं हो रहा है। तो क्या कभी ऐसा भी हो सकता है की पुरुष के शुक्राणु निकलने बंद हो जाये? यदि नहीं, तो आइये आज पुरुष के शुक्राणु से जुड़े कुछ तथ्य विस्तार से जानते हैं।

पुरुष के शुक्राणु निषेचन की प्रक्रिया के लिए कितने समय तक जीवित रहता हैं?

गर्भधारण के लिए जब महिला और पुरुष का मिलन होने के बाद जब पुरुष के शुक्राणु निकलते हैं तो वो एक या दो नहीं बल्कि लाखो करोडो हो सकते हैं, लेकिन उसमे से कुछ ऐसे होते है जो पैदा होते ही खत्म हो जाते हैं। तो कुछ अंडे तक पहुँच नहीं पाते, लेकिन जो शुक्राणु हेल्दी होते हैं वो अंडे तक पहुँच पाते हैं। और महिला के अंडकोष में पुरुष के शुक्राणु एक से चार दिन तक जीवित रह सकते हैं। लेकिन ऐसा कोई जरुरी भी नहीं होता है क्योंकि यदि महिला के शरीर में यदि शुक्राणु को उनके जीवित रहने के अनुकूल माहौल नहीं मिलता है तो वह नष्ट भी हो जाते हैं। लेकिन यदि महिला के शरीर में शुक्राणु के लिए माहौल अनुकूल होता है तो वह तीन से चार दिन तक जीवित भी रह सकता है। और इस बीच यदि महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु के बीच मिलना हो जाता है तो महिला का गर्भ ठहर भी सकता है।

पुरुष में शुक्राणु की कमी होने के कारण?

कुछ पुरुष शुक्राणु की कमी जैसी समस्या का शिकार भी होते हैं, और इसका पता तब चलता है जब बहुत कोशिश करने के बाद भी पुरुष महिला का गर्भधारण नहीं करवा पाता है। और पुरुष में शुक्राणु की कमी का कोई एक ही कारण हो ऐसा भी कोई जरुरी नहीं होता है। क्योंकि ऐसे बहुत से कारण होते हैं जिनकी वजन से पुरुष को इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की पुरुष में शुक्राणु की कमी होने के कौन से कारण होते हैं।

  • यदि पुरुष किसी यौन संचारित समस्या से परेशान है तो पुरुष के शुक्राणु की गुणवत्ता व् संख्या में कमी आ सकती है।
  • किसी बड़ी शारीरिक बिमारी जैसे की कैंसर से ग्रसित होने के कारण।
  • जो पुरुष किसी बिमारी से जुडी एंटी बायोटिक दवाइयों का सेवन अधिक मात्रा में करता है तो भी पुरुष के शुक्राणु में कमी आ सकती है।
  • शुक्राणु वाहिनी यानी जिस रास्ते से शुक्राणु बाहर निकलते हैं उसमे कोई समस्या होने पर।
  • जो पुरुष हानिकारक रसायन या धातुओं के संपर्क में आते हैं तो उससे भी शुक्राणु से जुडी समस्या हो सकती है।
  • रेडिएशन के सम्पर्क में आने के कारण।
  • बहुत ज्यादा साइकिल चलना, लैपटॉप को गोद में रखकर काम करना, हॉट बाथ अधिक लेना, आदि तो इसके कारण हिट की समस्या हो सकती है जिसके कारण शुक्राणु की संख्या में कमी आ सकती है।
  • तनाव अधिक लेने के कारण बॉडी में हार्मोनल असंतुलन होने की वजह से भी पुरुष के शुक्राणु बनने की प्रक्रिया पर बुरा असर पड़ता है।
  • नशीली दवाइयों का सेवन करने से भी यह समस्या पुरुषो को हो सकती है।
  • अधिक मोटापा होने के कारण भी बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो सकती है जिसके कारण शुक्राणु की संख्या में कमी हो सकती है।
  • धूम्रपान, शराब, तम्बाकू, गुटखा जैसी नशीली चीजों का सेवन भी पुरुष में होने वाली इस समस्या का कारण हो सकता है।
  • सर्जरी करवाने पर।
  • यदि पुरुष नसबंदी करवाता है तो भी पुरुष के शुक्राणु पर असर पड़ सकता है।

क्या पुरुष का शुक्राणु पूरी तरह निकलना कभी बंद होता है?

एक शोध के अनुसार वैसे तो पुरुष के अंडकोष में शुक्राणु बनने की प्रक्रिया हमेशा चलती रहती है, लेकिन यदि ऊपर दिए गए किसी कारण की वजह से पुरुष को यह समस्या है तो उसे ठीक भी किया जा सकता है। जैसे की कुछ आहार होते है जिनके सेवन से इस परेशानी को दूर किया जा सकता है। लेकिन यदि पुरुष हमेशा बुरी आदतों का शिकार रहता है, किसी संक्रमण से ग्रसित रहता है, या उसका सम्बन्ध बनाने में कोई रूचि नहीं होती है तो इसके कारण धीरे धीरे शुक्राणु की गुणवत्ता में कमी आ सकती है। लेकिन कभी पुरुष के शुक्राणु पूरी तरह निकलने बंद हो जाये ऐसा अभी तक किसी रिसर्च में सामने नहीं आया है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से पुरुष के शुक्राणु बनने की प्रक्रिया में कमी आ सकती है। ऐसे में इस समस्या के इलाज के लिए आप डॉक्टर से भी राय ले सकते हैं, क्योंकि शुक्राणु में कमी या शुक्राणु की गुणवत्ता का बेहतर न होना पुरुष के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

पेट में लड़का है या लड़की ऐसे जान सकते हैं

माँ बनने की ख़ुशी सिर्फ माँ बाप के लिए ही नहीं बल्कि परिवार के हर एक सदस्य के लिए बहुत ही बहुत ख़ास होती है, ऐसे में यदि महिला पहली बार माँ बन रही होती है, तो सभी यह सोचते है की लड़का होना चाहिए, परन्तु जैसा आप सोचते हैं वैसा हो ऐसा भी जरुरी नहीं है, लेकिन बड़े बुजुर्ग कई बार महिला के लक्षणों को देखकर अंदाजा लगा लिया करते थे की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है लड़की? लेकिन ऐसा भी नहीं होता की हमेशा उनके द्वारा बताई गई बात ही सच हो, तो आइये आज हम भी आपको ऐसे ही कुछ लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे आप पता कर सकते हैं की आपके गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है लड़की।

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पेट में लड़का होने के लक्षण:-

मतली आती है:-

वैसे तो यह प्रेगनेंसी में आम बात होती है लेकिन यदि आपके गर्भ में लड़का है तो आपको उल्टियां बहुत अधिक आती है, खासकर सुबह होते ही, और जिन महिलाओ के पेट में लड़का होता है, उन्हें पूरे नौ महीने तक इस परेशानी का सामना करना पड़ता है।

पेट ज्यादा निकलने लगता है:-

यदि गर्भ में लड़का होता है तो आपका पेट अधिक निकलता है, परन्तु आपके शरीर पर चर्बी नहीं जमती है, जबकि गर्भ में यदि लड़की हो तो आपके शरीर पर फैट जमने लगता है।

खट्टा खाने का मन करता है:-

गर्भ में पल रहा शिशु यदि लड़का होता है तो महिला का अधिक खट्टा खाने का मन करता है, इसके अलावा महिला को मीठे खाने का मन नहीं करता है।

हार्ट बीट से:-

ऐसा कहा जाता है की यदि गर्भ में पल रहे शिशु की हार्टबीट 140 से अधिक होती है, तो इसका मतलब होता है की होने वाली संतान लड़की होगी परन्तु यदि हीट बीट सामान्य रहती है तो यह लड़का होने के संकेत होते है।

पसंद पर भी करता है निर्भर:-

ऐसा भी माना जाता है की यदि कोई गर्भवती महिला लड़के की चाह रखती है तो उसे लड़की होने के चांस ज्यादा होते है, और यदि कोई लड़की की चाह रखती है तो उसको लड़का होने के चांस ज्यादा होते है।

पैरों के बाल बढ़ना:-

वैसे पैरों के बाल बढ़ना आम बात है, लेकिन प्रेगनेंसी के समय यदि महिला के पैरों के बाल तेजी से बढ़ते हैं, तो इसका मतलब भी यही होता है की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का होता है।

पति का वजन बढ़ने लग जाएँ:-

ऐसा भी कहा जाता है की यदि प्रेगनेंसी के समय स्त्री का वजन सामान्य ही रहे और पति का वजन बढ़ने लगे तो इसका मतलब ये होता है, की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का होता है।

महिला का मुड यदि तेजी से बदलता है:-

यदि प्रेगनेंसी में समय महिला का स्वभाव अधिक मुड़ी जैसे की महिला अधिक नखरे वाली हो जाती है, तो इसका मतलब होता है की लड़का होने वाला है।

स्तन के साइज़ और निप्पल के रंग को देखकर:-

यदि महिला का ब्रैस्ट साइज़ असामान्य यानी महिला को ऐसा लगे की उसके स्तन का साइज़ अलग अलग सा लग रहा हो, और साथ ही निप्पल का रंग भी अधिक काला होने लग जाए तो इसका मतलब भी यही होता है की लड़का होगा।

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पेट में लड़की होने के लक्षण:-

चेहरे पर निखार आने लगता है:-

यदि गर्भ में पाक रहा शिशु लड़की होती है, तो महिला के गाल गुलाबी होने लगते है, चेहरे पर निखार आने लगता है, साथ ही स्किन भी खिली खिली लगती है।

वजन बढ़ता है:-

वजन भी गर्भ में लड़की के होने पर तेजी से बढ़ता है, साथ ही शरीर के भागो पर चर्बी भी जमने लगती है, जबकि गर्भ में लड़का होने पर ऐसा नहीं होता है।

मीठा खाने का दिल करता है:-

मीठे को खाने का शौक महिला को अधिक होता है, यदि गर्भ में पल रहा शिशु लड़की होती है तो, ऐसे में महिला नमकीन चीजो को कम और मीठी चीजो को खाना ज्यादा पसंद करती है।

पेशाब के रंग का बदलना:-

यदि गर्भवती महिला को गाढे पीले रंग का पेशाब अधिक आता है, तो यह भी इस बात का संकेत होता है की गर्भ में पल रहा शिशु लड़की होती है, जबकि यदि हल्का पीला होता है तो गर्भ में लड़के के होने के चांस ज्यादा होते है।

तो ये है कुछ लक्षण जिनसे आप पता कर सकते है की आपके गर्भ में लड़का है या लड़की लेकिन ये ऐसा भी नहीं है की ये बिलकुल सच है, यह केवल जानकारी के लिए है, इन लक्षणों को देखकर आप केवल अंदाजा लगा सकते है, क्योंकि ज्यादातर महिलाओ के गर्भ में लड़का या लड़की होने के दौरान ये देखें जाते है।

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गर्भवती महिला के पेट पर डार्क लाइन आने का क्या मतलब होता है?

प्रेगनेंसी में स्किन में होने वाले बदलाव

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को केवल शारीरिक या मानसिक रूप से ही बदलाव का अनुभव नही होता है। बल्कि इस दौरान प्रेग्नेंट महिला अपनी स्किन में भी तरह तरह के बदलाव का अनुभव कर सकती है। और यह बदलाव सबसे ज्यादा महिला के पेट के आस पास की त्वचा पर मसहूस हो सकते हैं। क्योंकि गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट और पेट के आस पास की स्किन में खिंचाव होता है। जिसके कारण पेट पर हल्के स्ट्रेचमार्क्स की समस्या, पेट पर लाइन का आना, आदि आम बात होती है। इसके अलावा महिला के चेहरे की स्किन ग्लोइंग भी हो सकती है या कुछ महिलाओं को दाग धब्बे जैसी परेशानी भी हो सकती है। और यह बदलाव डिलीवरी के बाद धीरे धीरे अपने आप ठीक होने लग जाते हैं, लेकिन यदि स्ट्रेचमार्क्स का इलाज न किया जाए तो कुछ महिलाओं को डिलीवरी के बाद भी यह पेट पर नज़र आ सकते हैं।

प्रेगनेंसी में पेट पर लाइन

गर्भावस्था के दौरान नाभि से लेकर नीचे तक एक डार्क लाइन बनने लगती है जिसे लाइन्‍स नाइग्रा कहा जाता है। इस लाइन का प्रेग्नेंट के दौरान होना आम बात होती है क्योंकि इस दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोन, मेलेनिन का उतपादन बढ़ जाता है। जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को पेट पर यह लाइन दिखाई दे सकती है, और यह लाइन प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के आस पास दिख सकती है। और जैसे जैसे पेट का आकार बढ़ता है वैसे वैसे यह लाइन डार्क दिखाई देने लग सकती है। लेकिन डिलीवरी के बाद धीरे धीरे यह लाइन अपने आप की दिखनी बंद हो जाती है।

पेट पर दिखने वाली लाइन से कैसे पता चलता है की लड़का है या लड़की

पुराने जमाने में लोग महिला की बॉडी में होने वाले बदलाव को देखकर अंदाजा लगा लेते थे की गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहा शिशु नन्हा राजकुमार है या प्यारी सी परी। लेकिन यह अंदाज़ा पूरी तरह से सही हो ऐसा कोई जरुरी नहीं होता था। वैसे ही गर्भवती महिला के पेट पर दिखने वाली लाइन को देखकर भी यह बताया जाता था की गर्भ में लड़का है या लड़की। जैसे की यदि पेट पर होने वाली लाइन नाभि से होती हुई बिल्कुल सीधी नीचे की तरफ जाती थी तो इसका मतलब होता है की गर्भ में पल रहे शिशु लड़का है और यदि पेट पर दिखने वाली लाइन थोड़ी सी भी तिरछी होती थी तो इसका मतलब होता था की गर्भ में पल रहा शिशु लड़की है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान पेट पर दिखने वाली लाइन से जुडी कुछ बातें, ऐसे में पहली बार माँ बनने वाली महिलाओं को इसे देखकर घबराना नही चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान स्किन में इस तरह के परिवर्तन का होना आम बात होती है।

फेस योगा : ब्यूटी पार्लर के झंझट से आजादी

Yoga Exercise to Get Glowing and Flawless Skin

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सुन्दर और खूबसूरत दिखना हर महिला की चाह होती है। सभी खुद को और अपने चेहरे को बेस्ट बनाने के प्रयासों में लगी रहती है की वे सबसे आकर्षक दिखे। कोई इसके लिए हजारों रूपए खर्च करके ब्यूटी पार्लर ट्रीटमेंट करवाती है तो कोई महंगे महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती है। परंतु इन सभी चीजों से आप कुछ समय के लिए तो अपना फेस सुन्दर और आकर्षक बना सकती है लेकिन थोड़े दिनों बाद ये वापस से फीका और बेजान पड़ने लगेगा।

जिसका कारण होता है अनुचित देखभाल और प्रोडक्ट्स यूज करने में की जाने वाली लापरवाही। जी हां, कई बार आप अपने ब्यूटी प्रोडक्ट्स चुनने में ऐसी गलतियां कर बैठती है जिसका भुगतान आपके फेस को भरना पड़ता है। सुंदर दिखने के लिए आपने ब्यूटी पार्लर में तो बहुत से पैसे खर्च किये होंगे। लेकिन क्या कभी इस खर्चे से बचने के बारे में सोचा है। शायद नहीं!

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अगर गौर किया जाए, तो आप फ्री में भी अपने फेस पर वो रौनक और चमक ला सकती है। जो बड़े से बड़े फेशियल से भी कई अधिक होगी। और इस चमक को पाने के लिए आपको ज्यादा कुछ करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी। बस रोजाना थोड़ा सा समय निकालना होगा और थोड़ी मेहनत करनी होगी। यहाँ हम फेस योगा की बात कर रहे है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आपने बहुत से योगासन किये होंगे लेकिन क्या कभी फेस योगा के बारे में सोचा है।

जी हां, शरीर की तरह फेस को स्वस्थ और जवां बनाए रखने के लिए भी बहुत से योगासन किये जाते है। जिनकी मदद से न केवल फेस में ग्लो आता है अपितु झुर्रियां और मुहांसे जैसी कई समस्याएं भी दूर हो जाती है। और आज हम आपको उन्ही फेस योगा के बारे में बताने जा रहे है। तो आइये जानते है कौन सी है वे फेस योगा जिनसे फेस को हमेशा के लिए यंग बनाया जा सकता है।

आकर्षक चेहरा पाने के लिए फेस योगा टिप्स :-

अन्य सर्जरी और फेस ट्रीटमेंट्स की तुलना में फेस योगा कुछ धीरे कार्य कर सकती है लेकिन यह एक परफेक्ट प्राकृतिक, बिना दर्द देने और लंबे समय तक चलने वाला उपाय है। जिससे आप 3 महीने के भीतर अपने फेस को बेहतर बना सकते है –

1. सिंह मुद्रा
2. जीभ बाधा
3. ठुड्डी बाधा
4. मछली की तरह फेस
5. माउथवाश टेक्निक
6. गालों को ऊपर उठाएं
7. ठुड्डी को ऊपर उठाएं
8. गर्दन घुमाएं
9. होठों को खींचे
10. जबड़ों की कसरत
11. आई फोकस
12. हवा फेंकें

1. सिंह मुद्रा :Lion Pose Yoga

इस योगासन को करने से आपके चेहरे की मासपेशियां अच्छे तरह से मूव होती है। साथ ही उनमे रक्त संचरण भी बेहतर होता है। इसके लिए आप घुटनों के बल बैठ जाएं। अब अपनी जीभ को बाहर निकालकर नीचे की तरफ लटकाएं। अब मुंह से सांस लेते हुए बाहर निकालें और अपने गले से चिंघाड़ने की आवाज निकालें। इस योगा को 2 से 5 बार दोहराएं और रोजाना करें। यह फेस योगा सबसे बेस्ट योगासनों में से एक है।

2. जीभ बाधा :locked tongue pose

यह योगा आपके फेस को ठीक करके आपके जबड़े की शेप को बेहतर बनाता है। साथ ही आपके चेहरे की मांसपेशियों को सुधारता है। इसके लिए सबसे पहले लोटस पोजीशन में बैठ जाएं। अब अपने हाथों को अपनी गोदी में रखें। अब अपनी जीभ को मुंह के ऊपर वाले हिस्से पर लगाएं जैसे आप अपने मुंह को जीभ से बंद कर रहे हो। इसके बाद अपना पूरा मुंह खोले और अपने गले और गर्दन को स्ट्रेच करें। कुछ समय तक इस योगा को करते रहे और अपनी नाक से सांस लेते रहे।

3. ठुड्डी बाधा :chin lock yoga

यह योगासन डबल चिन से परेशान लोगों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। यह फेस की शेप को बेहतर बनाने और डबल चिन को ठीक करने में मदद करती है। इसके लिए लोटस पोजीशन में बैठ जाएं। गहरी सांस लें और अपने हाथों को अपने घुटनों पर रखें। अब अपने कन्धों को ऊपर नीचे करते रहे। इस बीच अपनी ठुड्डी को चेस्ट पर इस तरह छुआएं की आपकी ग्रास नाली पूरी तरह छुप जाए। जितना हो सके अपनी सांस रोके और फिर छोड़ दें। लगातार इस योगा को करते रहे फायदा होगा।

4. मछली की तरह फेस :Fish Face yoga

यह आसान आपके गालों की मांसपेशियों को स्ट्रेच और टोन करने में मदद करता है साथ ही अपने गालों को उभरा हुआ और flabby बनाता है। इसके लिए गालों को मुंह के अंदर खींचे और अपने होंठों से टॉफ़ी बनाएं। कुछ देर तक ऐसे ही रखें और फिर हंसने का प्रयत्न करें। कुछ देर करने के बाद आराम करें और फिर दोहराएं।

5. माउथवाश टेक्निक :mouthwash techique

यह फेस योगा आपके गालों को ठीक करके डबल चिन की समस्या को दूर करती है। इसके लिए अपने मुंह में हवा भरे और इस हवा को एक गाल से दूसरे गाल में ट्रांसफर करें जैसे की आप कुल्ला कर रहे हो। कुछ मिनट तक इस योगा को करें। थोड़ी देर रुकें और फिर दोहराएं फायदा होगा।

6. गालों को ऊपर उठाएं :cheek uplift

ये योगा आपके चीकबोन्स को अच्छा बनाकर फेस से मोटापा घटाने में मदद करती है। साथ ही आप जवां और अच्छे भी दिखेंगे। इसके लिए आराम से बैठ जाएं और जितनी बड़ी स्माइल कर सके करें। अब अपनी इंडेक्स और मिडल फिंगर को जोड़कर अपने गालों पर रखे और उँगलियों की मदद से अपने गालों को आँखों की तरफ ऊपर की ओर पुश करें। कुछ सेकंड तक रखें और फिर छोड़ें। 3-4 बार दोहराएं और फिर आराम करें।

7. ठुड्डी को ऊपर उठाएं :chin lift

ये योगासन आपको डबल चिन की समस्या से आजादी दिलाता है और साथ ही आपके जॉ, गले और गर्दन को स्ट्रेच भी करता है। इस योगा को करने के लिए आराम से बैठ या खड़े हो जाएं। अब अपने सिर को ऊपर और नीचे की तरफ up-down करें आँखों के साथ भी ऐसा ही करें। अपने होंठों की इस तरह से खींचे की आप अपने होंठों से छत को चूमने का प्रयत्न कर रहे है। कुछ सेकंड रुके और फॉयर छोड़ दें। कई बार इस योगा को दोहराएं।

8. गर्दन घुमाएं :Neck roll

डबल चिन की समस्या से छुटकारा पाने के लिए ये सबसे बेस्ट योगासन है। ये आपकी गर्दन, ठुड्डी और jawlines की माँसपेशियों को अच्छा बनाता है। और साथ ही स्किन को टाइट करके झुर्रियों की समस्या से निजात दिलाता है। इसके लिए आराम से बैठ जाएं और अपने सिर को सीधी दिशा में रखें। अब अपनी गर्दन को गोलाई में क्लॉक वाइज और एंटी क्लॉक वाइज घुमाएं। कुछ देर तक करते रहे और फिर आराम करें।

9. होठों को खीचें :Lip Pull Yoga

इस योगा को करने से आके फेस की मसल्स अच्छी होती है और आपके चीकबोन्स ऊँचे होते है और साथ ही jawlines भी बेटर होती है। जिससे आप जवां दिखती है। इसके लिए आराम से खड़े हो जाएं या बैठ जाएं। अपने फेस को सीधा और स्थिर रखें। अब अपने lower lip को बाहर की तरफ जितना खिंच करें खीचें। ये ऐसा होना चाहिए की आपकी ठुड्डी भी स्ट्रेच हो। कुछ सेकंड तक इसी पोस्चर में रहे, आराम करें और फिर इसे दोहराएं।

10. जबड़ों की कसरत :jaw release

इससे आपके जबड़े अच्छे सुंदर और शार्प होते है। परफेक्ट jawlines के लिए ये बेहतर योगा है। इसके लिए आराम से बैठें और अपने जबड़ों को इस तरह से हिलाएं जैसे आप खाना खा रहे हो। इस बीच अच्छी तरह सांस लेते रहे। इसके बाद जितना हो सके अपना मुंह खोलें और अपनी जीभ को अपने नीचे के दांतों पर रखें। कुछ सेकंड तक रुकें और उसके बाद दोबारा से स्ट्रेच करके इस योगा को करें।

11. आई फोकस :eye focus yoga

ये योगा आपकी आइब्रो को बेहतर बनाता है। इसके लिए अपनी आंखों को जितना हो सके उतना चौड़ा करें। ध्यान रहे इस बीच आपकी आइब्रो में रिंकल न आए। कुछ दुरी पर जाएं और एक फोकस पॉइंट पर फोकस करते रहे। इस पोजीशन को कम से कम 10 सेकंड तक रहें और फिर रिलैक्स करके 4 बार दोहराएं।

12. हवा फेकें :blowing air

ये योगा फेस और गर्दन की मांसपेशियों के लिए कार्य करती है। यह डबल चिन को कम करके आपके फेस को प्राकृतिक तौर पर अच्छा करता है। इसके लिए अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा करें और अपने सिर को पीछे की तरफ झुकाएं। ध्यान रहे इस समय आपकी आंखें छत की ओर देख रही हो। अब अपने होठों को बाहर की तरफ निकालें और हवा छोड़ें। 10 सेकंड तक ऐसा करें और फिर छोड़ें। अब 10 बार इसे दोहराएं।

तो ये थी कुछ योगासन जिनकी मदद से आप अपने फेस को नैचुरली अच्छा और सुंदर बना सकती है और वो भी बिना पैसे खर्च किये। तो देर किस बात की, जाइए और आज ही से अपने काम पर लग जाइये।

हर एक महीने में गर्भवती महिला का वजन कितना बढ़ना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान सही तरीके से वजन का बढ़ना बहुत अच्छी बात होती है क्योंकि यह गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास की तरफ इशारा करता है। इसीलिए गर्भवती महिला जब भी डॉक्टर के पास जाती है तो डॉक्टर उनके वजन की जांच जरूर करते हैं। क्योंकि वजन का सामान्य रूप से बढ़ना ही प्रेगनेंसी के दौरान सही होता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ जाता है या जरुरत से कम हो जाता है। तो दोनों के कारण ही माँ व् बच्चे को दिक्कत हो सकती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ने की सम्पूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं।

गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान महिला की शारीरिक गतिविधियों व् शारीरिक बनावट में फ़र्क़ आता है, इसका कारण गर्भ में नवजात का विकास होना होता है। ऐसे में गर्भ में शिशु के बढ़ते विकास की वजह से और महिला की शारीरिक गतिविधियों में आये बदलाव के कारण महिला का वजन बढ़ता है।

गर्भावस्था में महिला का वजन कितना बढ़ता है?

प्रेग्नेंट महिला का वजन महिला की लम्बाई व् प्रेगनेंसी की शुरुआत में महिला का वजन कितना है उसके ऊपर निर्भर करता है। ऐसे में महिला का प्रेगनेंसी शुरू होने के दौरान जितना वजन है उससे 11 से 16 किलो तक महिला का वजन बढ़ता है। और यदि महिला के गर्भ में एक से ज्यादा शिशु है है तो लगभग 18 किलो तक महिला का वजन बढ़ सकता है।

प्रेगनेंसी की हर तिमाही में महिला का वजन कितना बढ़ना चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन बढ़ता है यह तो सभी जानते हैं लेकिन प्रेगनेंसी की हर तिमाही में महिला का वजन कितना बढ़ना जरुरी होता है। आइये यह जानते हैं:

गर्भावस्था की पहली तिमाही में महिला का वजन

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला का वजन लगभग ढाई किलों तक बढ़ता है। क्योंकि शुरुआत में महिला के अन्दर शारीरिक बदलाव होते हैं। लेकिन बच्चे का वजन अभी उतना नहीं बढ़ता है। लेकिन कुछ महिलाओं को इस दौरान शारीरिक परेशानियों के ज्यादा होने के कारण वजन कम होने जैसी दिक्कत हो सकती है। ऐसे में घबराना नहीं चाहिए क्योंकि ऐसा बहुत सी महिलाओं के साथ होता है। लेकिन दूसरी तिमाही की शुरुआत के बाद से ही आपका वजन सही तरीके से बढ़ना शुरू हो जाता है।

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में महिला का वजन

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में महिला का वजन 6 से 7 किलों तक बढ़ सकता है और यदि अंदाजा लगाया जाए तो एक हफ्ते में महिला का वजन 500 से 700 ग्राम तक जरूर बढ़ना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला का तीसरी तिमाही में वजन कितना बढ़ना चाहिए

प्रेग्नेंट महिला का तीसरी तिमाही में वजन हर हफ्ते के हिसाब से 600 से 700 ग्राम तक बढ़ सकता है। और लगभग 7 से 8 किलो तक महिला का वजन बढ़ सकता है। कुछ महिलाओं का वजन इस दौरान कम भी हो सकता है ऐसे में घबराने की कोई बात नहीं होती है, बल्कि आपको शारीरिक परेशानियों के होने के बाद भी अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी में वजन ज्यादा बढ़ने के नुकसान

  • गर्भवती महिला का वजन ज्यादा बढ़ने के कारण महिला को हाई ब्लड प्रैशर, गेस्टेशनल डाइबिटीज़, समय से पहले बच्चे का जन्म, डिलीवरी के दौरान परेशानी जैसी दिक्कतें होती है।
  • स्ट्रेचमार्क्स की समस्या ज्यादा होती है।
  • महिला को थकावट, सांस फूलना जैसी परेशानी अधिक होना।
  • डिलीवरी के बाद वजन बढ़ने के कारण ज्यादा दिक्कत होना।

प्रेग्नेंट महिला का वजन कम होने से होती है यह परेशानियां

  • प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स अधिक होना।
  • शिशु के विकास में कमी।

प्रेगनेंसी के दौरान वजन सही रखने के टिप्स

  • अपने खान पान में पोषक तत्वों से भरपूर आहार को शामिल करें, लेकिन जितनी जरुरत हो उतना ही खाएं जरुरत से ज्यादा किसी भी चीज का सेवन न करें।
  • पानी का भरपूर सेवन करें।
  • तनाव नहीं लें।
  • व्यायाम करें।
  • आराम भरपूर करें।
  • मीठा व् नमक कम खाएं।
  • खाने के उन चीजों को शामिल करें जिन्हे पचाने में महिला को कोई दिक्कत न हो।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के वजन बढ़ने से जुड़े कुछ टिप्स, ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी में वजन बढ़ने से जुडी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान माँ या बच्चे दोनों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो।