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प्रेगनेंसी में खीरा खाने के माँ और शिशु के लिए फायदे

गर्मियों के समय में शरीर को ठंडा रखने का सबसे आसान उपाय है खीरा। खीरा एक कम कैलोरी का फ्रूट है जो असमय लगने वाली भूख के लिए बेस्ट ऑप्शन होता है। खीरे को एक फ्रूट सलाद के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके गुणों को वेट कम करने के लिए खासतौर पर जाना जाता है।

खीरे को खाने के और भी कई फायदे होते है। गर्भावस्था में खीरे का सेवन माँ और शिशु दोनों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। फिर भी गर्भावस्था में खीरे का सेवन छोटी मात्रा में ही करना चाहिए। खीरे के फायदों को डिटेल्स में जानने यह लेख जरूर पढ़े।

पानी के मात्रा

खीरे में 96 परसेंट पानी की मात्रा होती है। प्रेगनेंसी में अक्सर शरीर में पानी की कमी हो जाती है। जिसके लिए गर्भावस्था में डॉक्टर भी तरल मात्रा के अधिक सेवन की सलाह देते है। प्रेगनेंसी के दौरान खीरे के नियमित सेवन से शरीर में पानी की कमी पूरी होती है।

गर्भावस्था में खीरे के सेवन से हमारी त्वचा हाइड्रेट रहती है। गर्मियों के दिनों में इसके सेवन से बहुत फायदा मिलता है। पर ध्यान रखिये इसके सेवन के तुरंत बाद पानी का सेवन ना करें।

कम कैलोरी

खीरा एक कम कैलोरी वाला फ्रूट सलाद होता है। प्रेगनेंसी में इसके सेवन से ऑबेसिटी की प्रोब्लेम्स नहीं होती है। गर्भावस्था के दौरान कई बार बहुत एक्सेस वेट बढ़ जाता है। प्रेगनेंसी में जरुरी है के एक सहीं वेट बढ़े। इसके लिए आपको खीरे का सेवन जरूर मदद करेगा। खीरे के सेवन से आपका खराब कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल रहेगा जिससे गर्भावस्था में एक सही वेट बढ़ाने में मदद मिलती है।

विटामिन्स बी

खीरे में बहुत से मल्टी विटामिन्स बी पाए जाते है। विटामिन्स बी से हमारा मूड़ अच्छा होता है। प्रेगनेंसी में इसके सेवन से स्ट्रेस भी दूर रहता है। खीरे के सेवन से तनाव भी कम हो जाता है। प्रेगनेंसी में मूड़ स्विंग्स होना बहुत ही साधारण बात है। जिसके कारण कई बार गर्भवती महिलाओं का स्ट्रेस भी बढ़ जाता है।

गर्भावस्था में खीरे खाने से हमारा मूड़ अच्छा होकर हमारा स्ट्रेस भी कम हो जाता है।

फाइबर

खीरा एक अच्छा सॉल्युबल और इनसॉल्युबल फाइबर का स्रोत है। सॉल्युबल फाइबर की मदद से शरीर का कोलेस्ट्रॉल लेवल नियंत्रण में रहता है। और साथ ही ब्लड शुगर भी सही रहता है। इनसॉल्युबल फाइबर कब्ज का इलाज भी करता है।

गर्भावस्था में कब्ज की परेशानी बहुत आम हो जाती है क्योंकि इस दौरान हमारी पाचन शक्ति बहुत धीमी पड़ जाती है। ऐसे में खीरे का सेवन हमारे लिए बहुत लाभकारी होता है।

माइक्रोन्यूट्रिएंट्स

खीरे में बहुत से न्यूट्रिएंट्स पाए जाते है जैसे की विटामिन सी, बीटा कैरोटीन, मैंगनीज, एंटीऑक्सीडेंट्स तत्व आदि। इन सभी तत्वों के मदद से हमारी बॉडी की इम्युनिटी पावर भी बढ़ती है। खीरे के सेवन से इन्फेक्शन जल्दी से हमारी बॉडी को नहीं पकड़ पाता है।

खीरे में इन तत्वों के अलावा कैल्शियम, पोटैशियम, जिंक, मैग्नीशियम, कॉपर, आयोडीन, सल्फर आदि तत्व भी पाए जाते है। यह सभी तत्व माँ और शिशु के विकास के लिए बहुत ही आवश्यक होते है। खीरे के सेवन से शिशु को जन्म के समय होने वाली परेशानियों से भी सुरक्षा मिल जाती है।

कूलिंग

खीरा एक प्राकृतिक कूलर के रूप में कार्य करता है। खीरा खाने से शरीर को ठंडक मिलती है। गर्मियों में प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए खीरे का सेवन बहुत ही फायदेमंद होता है। क्योंकि इसके सेवन से हमारी त्वचा ठंडी रहती है और साथ ही हमारी पानी की कमी भी पूरी हो जाती है।

गर्भावस्था के दौरान गर्मियों में हमे बहुत से परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस समय में खीरे का सेवन हमे बहुत से परेशानियों से दूर रखता है। हमे ठंडक पहुंचाने के साथ साथ हमारे शरीर को जरुरी पोषक तत्व भी प्रदान करता है।

इसमें मौजूद विटामिन सी, बी भ्रूण का विकास करने में मदद भी करते है और साथ ही हमारी हड्डियों का मजबूत बनाकर मसल्स को भी स्ट्रांग बनाते है।

इन सभी फायदों के अतिरिक्त गर्भावस्था में इसके अधिक सेवन से शरीर में कुछ इन्फेक्शन, पेट में गैस, पाचन क्रिया से संबधित परेशानियाँ भी हो सकती है। इसीलिए इसका सेवन एक नियमित मात्रा में ही किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त आपको कभी भी खीरे के सेवन से कुछ परेशानी हो तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह ले।

घर में प्रेगनेंसी टेस्ट करते समय इन बातों का ध्यान रखें

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आज कल महिला गर्भवती है या नहीं इसके लिए महिला को डॉक्टर के पास जाने की जरुरत नहीं होती है, क्योंकि घर में ही प्रेगनेंसी किट के माध्यम से गर्भवती महिला आसानी से पता कर सकती है की वो प्रेग्नेंट है या नहीं। लेकिन घर में प्रेगनेंसी किट का इस्तेमाल करते हुए आपको कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए जिससे आपको सटीक परिणाम मिल सके, प्रेगनेंसी टेस्ट को घर पर करने के लिए पीरियड्स मिस होने के बाद एक से दो हफ्ते के बीच का समय सबसे सही होता है। तो आइये अब जानते हैं की घर में प्रेगनेंसी टेस्ट करते हुए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी किट पर लिखे निर्देश पढ़े

सबसे पहले तो प्रेगनेंसी किट की डेट को ध्यान में रखना चाहिए की कहीं वो एक्सपाइरी तो नहीं है, यदि उसकी डेट निकल चुकी है तो हो सकता है की वो गलत परिणाम दे। इसीलिए आपको सही डेट की किट का इस्तेमाल करना चाहिए, इसके अलावा टेस्ट किट पर लिखे सभी निर्देश अच्छे से पड़ें की टेस्ट को कैसे करना है।

सुबह के सबसे पहले यूरिन का इस्तेमाल करें

प्रेगनेंसी टेस्ट के सबसे बेहतर परिणाम के लिए आपको सुबह के सबसे पहले यूरिन का इस्तेमाल करना चाहिए। क्योंकि इसमें HCG हॉर्मोन का लेवल सबसे सही होता है जो आपको सही परिणाम बताता है। और यदि आप सुबह के यूरिन से टेस्ट नहीं कर पाएं तो टेस्ट करने के लिए आप चार से पांच घंटे तक यूरिन न करें, और उसके बाद टेस्ट करें इससे भी आपको टेस्ट का सही परिणाम मिल सकता है।

प्रेगनेंसी किट को सूखी जगह पर रखें

किट पर दिए गए निर्देश के अनुसार जब आप यूरिन की बूंदो को किट में डालते हैं तो आपको किट को समतल और सूखी जगह पर रख देना चाहिए। ताकि आपको सटीक और सही परिणाम मिल सके।

इंतज़ार करें

प्रेगनेंसी किट में यूरिन की बुँदे डालने के बाद आपको पांच से दस मिनट तक इंतज़ार करना चाहिए, क्योंकि कई बार आपको पांच से दस मिनट बाद ही सही रिजल्ट मिलता है। ऐसे में आपको जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए।

प्रेगनेंसी टेस्ट किट का इस्तेमाल कैसे करें

  • ज्यादातर टेस्ट किट में दो कोनों पर C और T का निशान होता है। C कंट्रोल यानी नियंत्रण को दर्शाता है। और टेस्ट करते समय यह लाइन हमेशा स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए क्योंकि यह तुलना रेखा होती है जबकि T टेस्ट सैम्पल को दर्शाता है।
  • यदि टेस्ट करने के पांच से दस मिनट के बाद जिस जगह पर C निशान है, यदि वहां पर सिर्फ़ एक गुलाबी या बैंगनी लाइन दिखे तो इसका मतलब है कि प्रेगनेंसी के लिए टेस्ट नकारात्मक है।
  • लेकिन यदि C के साथ T में भी लाइन दिखाई दें, तो यह प्रेगनेंसी टेस्ट सकारात्मक है यानी की आप गर्भवती हैं।
  • और यदि टेस्ट किट में कोई भी लाइन नहीं दिखाई देती है तो इसका मतलब होता है की टेस्ट सही तरीके से नहीं हुआ है। और आप इस टेस्ट को 72 घंटे बाद नए किट से दुबारा करें।
  • यदि T के निशान पर बनी लाइन धुंधली दिखाई दे रही हो तो यह HCG हार्मोन के निम्न स्तर के कारण ऐसा हो सकता है।
  • यदि धुंधली लाइन दिखाई देती है तो 72 घंटे के बाद नई किट से यह टेस्ट दुबारा करें। और यदि टेस्ट पॉजिटिव आता है तो जितना जल्दी हो सके आपको डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल आपको घर में प्रेगनेंसी किट का इस्तेमाल करते समय करना चाहिए, यदि प्रेगनेंसी किट का इस्तेमाल करने के बाद भी आपकी रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ताकि आपको पीरियड्स न आने के कारण का पता चल सके, साथ ही प्रेगनेंसी किट आपको आसानी से किसी भी मेडिकल स्टोर पर मिल जाती है।

प्रेग्नेंट महिला को सुबह उठकर सबसे पहले ब्रश क्यों करना चाहिए?

आपने यह तो सुना ही होगा की यदि दिन की शुरुआत अच्छी हो तो पूरा दिन अच्छा ही गुजरता है। तो दिन की अच्छी शुरुआत के लिए सुबह उठकर सबसे पहले वो काम करना चाहिए जिससे आप फ्रेश महसूस करें। खासकर गर्भवती महिला को तो ऐसा जरूर करना चाहिए, क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना रूटीन बनाना सबसे मुश्किल हो जाता है, साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानी के कारण महिला बहुत थका हुआ सा महसूस करती है।

ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को ऐसा क्या करना चाहिए जिससे प्रेग्नेंट महिला को पूरा दिन रिलैक्स रहने में मदद मिल सके और महिला फ्रैश फील करें । तो इसका जवाब है की प्रेग्नेंट महिला को सुबह उठते ही ब्रश करना चाहिए। अब आप सोच रहे होंगे की आखिर क्यों गर्भवती महिला को सुबह उठकर सबसे पहले ब्रश करना चाहिए इससे क्या होता है? तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को सुबह उठकर ब्रश करने से क्या होता हैं।

फ्रैश फील होता है

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण, रात के आहार के कारण सुबह उठकर महिला को जीभ में कड़वाहट व् कई बार मुँह से हल्की स्मैल जैसी महसूस हो सकती है। लेकिन ब्रश करने से जीभ की कड़वाहट व् बदबू दोनों को दूर करने में मदद मिलती है जिससे महिला फ्रैश महसूस करती है।

रूटीन होता है सेट

सुबह जितना जल्दी प्रेग्नेंट महिला ब्रश करती है उतना ही जल्दी महिला की नाश्ता करने की इच्छा होती है। और यदि सुबह का नाश्ता समय से होता है। तो उसके बाद धीरे धीरे सभी काम समय से होने लग जाते हैं। जिससे गर्भवती महिला की दिनचर्या बेहतर होती है और जितना महिला की दिनचर्या बेहतर होती है उतना ही महिला व् बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

बैक्टेरिया से होता है बचाव

रात के खाने के कारण, मुँह या दांतों से जुडी समस्या होने के कारण सुबह मुँह में से स्मैल आ सकती है साथ ही इसके कारण मुँह में बैड बैक्टेरिया का जमाव भी हो जाता है। ऐसे में महिला यदि सुबह उठकर बिना ब्रश किये ही कुछ खा या पी लेती है तो यह बैक्टेरिया पेट में जाता है जिससे महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानी हो सकती है। लेकिन सुबह उठकर सबसे पहले ब्रश करने से इस बैक्टेरिया को खत्म करने में मदद मिलती है जिससे महिला भी स्वस्थ रहती है।

तो यह हैं कुछ कारण व् फायदे जिनकी वजह से गर्भवती महिला को सुबह उठकर सबसे पहले ब्रश करना चाहिए, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी ऐसा जरूर करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करना प्रेगनेंसी के दौरान आपके व् आपके बच्चे के लिए फायदेमंद हो सकता है।

ग्रीन कॉफ़ी पीने के फायदे और नुकसान

चाय या कॉफ़ी पीना अधिकतर लोगो को पसंद होता है और कुछ लोगो के दिन की शुरुआत भी चाय या कॉफ़ी का सेवन करने से ही होती है। कुछ लोग चाय पीने पसंद करते हैं तो कुछ कॉफ़ी, तो कुछ लोग ग्रीन टी भी पीते हैं। लेकिन आज इस आर्टिकल में हम आपसे ग्रीन कॉफ़ी के बारे में बात करने जा रहे हैं। ग्रीन कॉफ़ी भी बहुत से लोगो की पसंद होती है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको ग्रीन कॉफ़ी क्या होती है? ग्रीन कॉफ़ी पीने के फायदे और नुकसान क्या होते हैं? इस बारे में बताने जा जा रहे हैं।

क्या होती है ग्रीन कॉफ़ी?

जब पौधें से कॉफी के बीजों को तोडा जाता है तो वो हरे रंग के होते हैं फिर उन्हें भूनकर और पीसकर आपके लिए ब्राउन यानी भूरे रंग की कॉफ़ी तैयार की जाती है। जबकि जब पौधे से तोड़े गए हरे बीजों को पीसकर ही कॉफ़ी तैयार की जाती है तो उसे ग्रीन कॉफ़ी कहते हैं। बीजों को भुनने और पीसने के बाद उसमे पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। जबकि हरी कॉफ़ी में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

ग्रीन कॉफ़ी पीने के फायदे

ग्रीन कॉफ़ी पोषक तत्वों से भरपूर होती है ऐसे में इसका सेवन करने से एक नहीं बल्कि बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की ग्रीन कॉफ़ी पीने के क्या फायदे होते हैं।

डाइबिटीज़ के लिए है फायदेमंद

जो लोग डाइबिटीज़ की समस्या से परेशान होते हैं उन लोगो के लिए ग्रीन कॉफ़ी का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें क्लोरोजेनिक एसिड होता है जो हाइपोग्लाइसेमिक और एंटीडायबिटिक गुणों से भरपूर होता है। जिससे शरीर में शुगर के स्तर को कण्ट्रोल में रखने में मदद मिलती है।

वजन कम

बहुत से लोग बढ़ते वजन के कारण परेशान होते हैं और वजन को कम करने के लिए पता नहीं क्या क्या करते हैं। ऐसे में ग्रीन कॉफ़ी का सेवन करना उनके लिए फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि ग्रीन कॉफ़ी का सेवन करने से शरीर में वसा का जमाव नहीं होता है, पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है, भूख को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है, जिससे वजन बढ़ने की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

ब्लड फ्लो होता है बेहतर

ग्रीन कॉफ़ी का सेवन करने से शरीर में ब्लड फ्लो बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती हैं जिससे शरीर के सभी अंगो तक ब्लड अच्छे से पहुँचता है। और जब शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है तो आपको बहुत सी बिमारियों से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

एंटी ऑक्सीडेंट्स से होती है भरपूर

ग्रीन कॉफ़ी एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होती है जो शरीर को संक्रमण, बिमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करती है। क्योंकि ग्रीन कॉफ़ी पीने से प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।

कैल्शियम

ग्रीन कॉफ़ी में कैल्शियम की अधिकता होती है ऐसे में सिमित मात्रा में यदि रोजाना ग्रीन कॉफ़ी का सेवन किया जाये। तो ऐसा करने से हड्डियों को मजबूती मिलती है जिससे आपको कमजोरी थकान जैसी परेशानी से बढ़ती उम्र में भी बचे रहने में मदद मिलती है।

एंटी एजिंग गुण

ग्रीन कॉफ़ी में एंटी एजिंग गुण मौजूद होते हैं जो आपकी स्किन की चमक को बरकरार रखने में मदद करते हैं। साथ ही झाइयां, स्किन का ढीलापन जैसी परेशानियों से भी स्किन को बचाएं रखने में मदद करते हैं। जिससे आपको बढ़ती उम्र में भी जवान रहने में मदद मिलती है।

बालों के लिए है फायदेमंद

लम्बे, घने, शाइनी बाल हर किसी की पसंद होते हैं और ग्रीन कॉफ़ी का सेवन करने से आपकी इस इच्छा को पूरी करने में मदद मिलती है। क्योंकि ग्रीन कॉफ़ी में मौजूद आयरन और विटामिन सी बालों के बेहतर ग्रोथ और उन्हें संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं।

ब्लड प्रैशर

बहुत से लोग ब्लड प्रैशर हाई या लौ होने की समस्या से परेशान होते हैं और इस परेशानी का बढ़ना बहुत ज्यादा नुकसानदायक भी होता है। लेकिन ग्रीन कॉफ़ी का सेवन करने से आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सकती है। क्योंकि ग्रीन कॉफ़ी में मौजूद गुण आपके रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं।

हदय स्वस्थ रहता है

ग्रीन कॉफ़ी में एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो हदय को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं साथ ही हदय रोगो से जुडी परेशानियों से बचाव करने के लिए भी फायदेमंद होते हैं। साथ ही ग्रीन कॉफ़ी का सेवन करने से बॉडी में कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल रहने में भी मदद मिलती है।

मूड होता है बेहतर

यदि आपको किसी बात को लेकर तनाव हो रहा है, आपका मूड खराब है तो ग्रीन कॉफ़ी का एक कप आपके मूड को बेहतर करने में मदद करता हैं।

ग्रीन कॉफ़ी पीने के नुकसान

दिन में एक कप ग्रीन कॉफ़ी पर्याप्त होती है यदि आप एक कप कॉफ़ी या कभी कभार दो कप कॉफ़ी का सेवन करती है। तो इससे कोई नुकसान नहीं होता है लेकिन यदि आप जरुरत से ज्यादा ग्रीन कॉफ़ी पीते हैं तो यह सभी फायदे उल्टे होने लगते हैं और आपके शरीर को ग्रीन कॉफ़ी पीने से नुकसान होने लगता है। जैसे की:

  • ज्यादा ग्रीन कॉफ़ी पीने से घबराहट, तनाव, बेचैनी, जैसी दिक्कत होती है।
  • शरीर में कैल्शियम की अधिकता बढ़ने के कारण यह यूरिन के माध्यम से बाहर निकलने लगता है जिसे हड्डियां कमजोर होने लगती है।
  • पेट खराब, उल्टी जैसी परेशानियां अधिक होने लगती है।
  • ग्रीन कॉफ़ी का सेवन ज्यादा करने से अनिंद्रा की समस्या भी हो जाती है।

तो यह है कुछ बेहतरीन फायदे जो आपको ग्रीन कॉफ़ी का सेवन करने से मिलते हैं। और यदि आप यह स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे चाहते हैं तो दिन में एक कप ग्रीन कॉफ़ी का जरूर पीएं लेकिन ध्यान रखें की जरुरत से ज्यादा भी इसका सेवन न करें।

Benefits and harmful effect of green coffee

गर्मियों का सुपरफूड प्रेगनेंसी में

गर्भावस्था में खान पान का ध्यान रखना कितना जरुरी होता है यह तो सब जानते हैं। लेकिन मौसम के बदलाव के साथ महिला को अपने खान पान का ध्यान रखना ज्यादा जरुरी होता है। जैसे की सर्दियों में जहां गर्म तासीर की चीजें थोड़ी बहुत खाई जा सकती है लेकिन गर्मियों में प्रेग्नेंट महिला को गर्म तासीर वाली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही गर्मी का मौसम बहुत ही परेशान कर देने वाला होता है।

जैसे की गर्मी में पसीना अधिक आना, धूप के कारण चुभन, बार बार प्यास लगना, बहुत ज्यादा आलस महसूस होना, आदि जैसी परेशानियां महिला को अधिक हो सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने और गर्मी से बचे रहने के लिए कुछ सुपरफूड हैं जिनका सेवन जरूर करना चाहिए। तो आइये इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला के लिए गर्मियों में सुपेरफ़ूड कौन कौन से होते हैं। इस बारे में बताने जा रहे हैं।

दही

दही तासीर में ठंडी होने के साथ प्रेगनेंसी के दौरान खाने में बहुत फायदेमंद भी होती है। दही में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन्स व् अन्य मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला को फायदा पहुंचाने में मदद करते हैं। जैसे की दही खाने से गर्मी से बचे रहने, कब्ज़ व् अन्य पेट की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। इसीलिए गर्मियों में प्रेग्नेंट महिला को दही का सेवन जरूर करना चाहिए।

रसदार फल

गर्भवती महिला गर्मियों में रसदार फल जैसे तरबूज, खरबूजा, संतरा, निम्बू आदि फलों का सेवन करना चाहिए। यह फल गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी को दूर करने के साथ गर्मी के कारण होने वाली परेशानी से निजात दिलाने में भी मदद करते है।

अंडा

गर्मियों में गर्भवती महिला को अंडे का सेवन भी जरूर करना चाहिए क्योंकि अंडे में प्रोटीन, वसा आदि होने के साथ यह प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करता है। साथ ही अंडे का सेवन बच्चे के विकास के लिए भी फायदेमंद होता है।

शकरकंद

गर्मी के मौसम में गर्भवती महिला को शकरकंद का सेवन भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि विटामिन ए से भरपूर होने के कारण यह गर्भवती महिला व् बच्चे दोनों की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है। जिससे माँ और बच्चे दोनों को गर्मी में भी बिमारियों से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

प्याज़

गर्मी में लू के कारण गर्भवती महिला के बीमार होने का खतरा बढ़ सकता है ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को कच्चा प्याज़ जरूर खाना चाहिए। क्योंकि कच्चा प्याज खाने से लू लगने के खतरे को कम करने में मदद मिलती है।

दालें

प्रोटीन, कैल्शियम व् अन्य मिनरल्स से भरपूर होने के कारण दालें गर्मियों में खाना बहुत फायदेमंद होता है। खासकर मूंग, काले चने, आदि, गर्मियों में दालें खाना सेहत के लिए फायदेमंद होने के साथ हज़म करने में भी आसानी होती है। ऐसे में रोजाना एक समय गर्भवती महिला को कोई न कोई दाल जरूर खानी चाहिए।

तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करें

गर्मी के मौसम में खाने के साथ पानी का भी गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। क्योंकि पानी का भरपूर सेवन करने से गर्भवती महिला को बॉडी को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है। जिससे गर्मी के कारण होने वाली परेशानी से प्रेग्नेंट महिला को बचे रहने में मदद मिलती है। इसके साथ फलों के रस, नारियल पानी, निम्बू पानी आदि का भी प्रेग्नेंट महिला को भरपूर सेवन करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ खाद्य पदार्थ जो गर्मियों में महिला के लिए सुपरफूड होते हैं। ऐसे में गर्मियों में इन खाद्य पदार्थों को गर्भवती महिला को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को फिट रहने के साथ गर्मी से बचे रहने में भी मदद मिल सके।

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प्रेगनेंसी के आठवें और नौवें महीने में पेट क्यों अकड़ जाता है और क्या हैं उपाय

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में ऐसे बहुत से लक्षण महसूस होते हैं जिनकी वजह से महिला को दिक्कत महसूस हो सकती है। जैसे की प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को पेट में अकड़न यानी पेट टाइट व् कठोर महसूस हो सकता है ऐसा गर्भ में शिशु का विकास बढ़ने के साथ ज्यादा होने लगता है। इसमें घबराने की तो कोई बात नहीं होती है लेकिन इसके कारण महिला को पेट में हल्के दर्द जैसी परेशानी हो सकती है। तो आइये अब जानते है की प्रेगनेंसी के आठवें नौवें महीने में पेट में अकड़न होने के क्या कारण होते है। और किस तरह महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है।

प्रेगनेंसी के आठवें नौवें महीने में पेट में अकड़न होने के कारण

  • गर्भाशय का आकार बढ़ने के साथ पेट का आकार भी बढ़ता है जिसके कारण कारण पेट में अकड़न महसूस होती है।
  • गर्भावस्था के आठवें नौवें महीने में बच्चे की वृद्धि और उसके मूवमेंट्स के कारण भी पेट टाइट होता है। क्योंकि बढ़ते बच्चे की वजह से पेट की पूरी जगह घिर जाती है और इसके कारण आंतरिक अंगों में भारीपन और खिंचाव होता है। जिससे त्वचा भी खिचती है और पेट अकड़ा हुआ महसूस होता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान अधिकतर गर्भवती महिलाएं यही सोचती है की उन्हें दो लोगो के लिए खाना है जबकि ऐसा नहीं होता है। बल्कि महिला को इस दौरान पोषक तत्वों से भरपूर आहार और सही मात्रा में अपनी डाइट लेनी चाहिए। ऐसे में यदि महिला जरुरत से ज्यादा खाती है तो इस कारण भी महिला को पेट में अकड़न होने लगती है।
  • गर्भावस्था के आठवें नौवें महीने में पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है जिस वजह से महिला को कब्ज़, पेट में गैस जैसी समस्या हो जाती है और पेट में अकड़न होती है।
  • डिलीवरी का समय पास आने पर भी महिला को यह समस्या होती है।
  • पेट में अकड़न का ज्यादा महसूस होना डिलीवरी का एक लक्षण भी होता है।
  • शरीर में पानी की कमी के कारण भी महिला को पेट में अकड़न महसूस होती है।

गर्भावस्था में पेट में अकड़न महसूस होने की समस्या से निजात पाने के तरीके

यदि प्रेग्नेंट महिला को पेट में अकड़न महसूस होती है तो कुछ आसान टिप्स का ध्यान रखकर प्रेग्नेंट महिला इस परेशानी से राहत पा सकती है। जैसे की:

खान पान का ध्यान रखें

गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचने के लिए अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। जैसे की जरुरत से ज्यादा नहीं खाना चाहिए, जंक फ़ूड नहीं खाना चाहिए, आदि। इसके अलावा महिला को फाइबर युक्त आहार खाना चाहिए जिससे पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिल सके। और कब्ज़, अपच जैसी परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सके। खान पान में इन बातों का ध्यान रखने से महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

पानी का भरपूर सेवन करें

पेट में अकड़न की समस्या से निजात पाने के लिए महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए। जितना महिला के शरीर में तरल पदार्थ भरपूर होते हैं उतना ही महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

मालिश

हल्के हाथों से पेट पर धीरे धीरे मसाज करें ऐसा करने से भी पेट में होने वाली अकड़न की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। लेकिन मालिश करने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

डॉक्टर से मिलें

यदि प्रेग्नेंट महिला को पेट में अकड़न बहुत ज्यादा महसूस हो रही है, दर्द हो रहा है, सांस लेने में तकलीफ हो रही है, तो ऐसे केस में महिला को एक बार डॉक्टर से बात करनी चाहिए। क्योंकि ऐसे लक्षणों को अंदेखा करने से आपकी परेशानी बढ़ सकती है।

पोजीशन बदलें

बहुत देर तक एक ही पोजीशन में बैठने के कारण भी प्रेग्नेंट महिला को पेट में अकड़न महसूस हो सकती है। ऐसे में महिला को अपनी पोजीशन को बदलते रहना चाहिए। ऐसा करने से भी महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान पेट में अकड़न होने के कारण व् इस समस्या से बचने के आसान टिप्स, यदि आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान यह दिक्कत हो रही है तो आप भी इन टिप्स का ध्यान रखें ताकि आपको इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

Causes and Remedies for Stomach Tightness in Pregnancy

क्या अपने अतीत के बारे में पति को बतानी चाहिए की नहीं ?

पति को क्या बताएं, इन बातों को शेयर नहीं करें अपने पति से, पति पत्नी के बिच सम्बन्ध खराब होने के कारन, क्या कारन होता है पति पत्नी के बिच दुरी हो जाती है, अतीत की बातें, शादी होने वाली है तो इन बातों का ध्यान रखें।

शादी के बाद पति को क्या बताएं क्या नहीं बताएं?

दोस्तों व्हाट इन इंडिया डॉट कॉम पर कई बहनें सर्च करती है, क्या अपने अतीत के बारे में अपने पति को बतानी चाहिए की नहीं? क्या शादी के पहले के रिश्ते को पति से शेयर करें की नहीं ? हो सकता है आप भी शादी के पहले किसी के यादों में खोई रहती होंगी, कुछ पुराने रिश्ते होंगे, कुछ खट्टी मीठी यादें होंगी। आपका लगता होगा की मेरे पति मुझे इतना प्यार करते हैं इतना इज्जत करते हैं इतना विश्वास करते हैं हम दोनों में कुछ अंतर नहीं है तो क्यों ना बता ही दें शायद पति से हमें कुछ भी छुपानी नहीं चाहिए? दोस्तों पहले आप इस आर्टिकल्स को पूरा पढ़ें और आप निष्कर्ष पर आएं की क्या सही है क्या गलत है और कितना बताएं और कितना नहीं बताएं?

होश सँभालने तक की गलतियां

बचपन का हृदय कोमल होता है, धड़कता भी बहुत जल्दी है किसी के लिए पर खुद नहीं धड़कता है धड़काया जाता है। मॉडर्न बनाने के चक्कर में।  कूल बनने के चक्कर में आपके मन मस्तिष्क में बीज बोया जाता है की प्यार करो, बॉयफ्रेंड बनाओ, तुम्हारे जितने ज्यादा बॉयफ्रेंड होंगे या जितने लड़के तुम्हारे पीछे होंगे तुम उतने ही कूल और डैशिंग होंगे। और मॉडर्न बनने का तरीका सबसे अलग दिखने का तरीका तभी होगा जब आप किसी और को अपनी जाल में फंसा कर रखोगे। पर धीरे धीरे जब आप एक के  बाद एक गलतियों में फंसती चली जाती हैं और आप खुद ही अपने जाल और आपके दोस्तों के बनाये जाल में फंस जाते है। कई लड़की को ये बहुत पहले ही समझ आ जाता है और कई को देर हो जाती है इस बात को समझते समझते। भूल कर भी नहीं बताएं अपने पति को इन बातों को, मैं बाद में बताउंगी क्या दिक्कत होगी आपके लिए।

जवानी की गलतियाँ

कई बार कुछ बातें देर से शुरू होती है। अगर आपने स्कूल समय में कुछ नहीं किया तो जब आप घर से बाहर जाने लगते हैं चाहे कॉलेज हो या ऑफिस हो तब कुछ ऐसी चीजें शुरू होती है। जब आपको लगने लगता है मुझे भी दोस्त बनानी चाहिए मॉडर्न दिखनी चाहिए! तो दोस्त तो होना जरुरी है। क्यों की उस समय लोग हो सकता है आपको बहन जी टाइप कहेंगे और आप भी फ़्रस्ट्रेशन में आकर जमाने के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के चक्कर में आपके कदम लड़खड़ा जाये।

दोस्तों 100 में से सिर्फ 2 रिश्ते ही कामयाब होते हैं बाकी बाद तो आपको जिल्लत ही झेलनी होती है। क्यों की ऐसे समय में शारीरिक अट्रैक्शन ज्यादा हो जाता है और बात आगे तक बढ़ जाती है। पर शायद आपको नहीं पता जिस रिश्ते को आप पवित्र मान रही थी। सामने वाले के डिक्शनरी में एक नाम और जुड़ गया होगा की आप छठी लड़की थी जिसके साथ उसने सम्बन्ध बनाया।  और फिर वो दूसरी लड़की के तरफ चल पड़ेगा। हो सकता है आपके साथ रिश्ते थोड़े दिन ज्यादा चले पर इसका ये मतलब नहीं की रिश्ता पवित्र ही था। आप अपने मन के मालकिन है दूसरों के नहीं क्या पता वो सिर्फ आपके शारीरिक रिश्ता ही जोड़ना चाह रहा हो। मैं ये भी नहीं कह रही हु की जो आप कर रही हैं गलत है। यहाँ ये बात है की क्या इन बातों को पति से शेयर करें की नहीं ?

कभी किसी मज़बूरी में की गई गलतियां

दोस्तों कई बार हालात सभी का साथ नहीं देता है। तभी तो इतने सारे लोग मसाज पारलर में, पब में अलग अलग जगहों पर काम करती है और अपने आप को बचा नहीं पाती है,और कुछ भी हो जाता है। या कोई लड़की गलत दिशा में ही है? आजकल आपने पढ़ा होगा अपने रॉयल खर्चे को पूरा करने के लिए कुछ भी कर रही होती हैं।  यहाँ पर किसी का प्रोफेशन है किसी की मज़बूरी है।  जैसा  की 20 साल की उम्र में एक मसाज पारलर में काम करने वाली लड़की पुरुषों का मसाज करती थी। क्या ये बात कोई अपने पति से शेयर करेगा? नहीं आप मज़बूरी में किये गए वैसे काम को भी आप शेयर नहीं करेंगी अपने पति से।

दोस्तों कई बार सुनने को और पढ़ने को मिलता है की शादी की पहली रात को ही पति पूछने लगते हैं पुराने रिश्ते के बारे में, बॉय फ्रेंड के बारे में, और वादा भी करते हैं कुछ नहीं होगा। बस मैं जानना चाहता हु। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हु।  बला बला बला

क्या होगा बता देने पर

दोस्तों आप किसी भी हालात में, किसी भी लोभ में, किसी भी कसम के चक्कर में, किसी भी प्यार के वास्ता देने पर। हरगिज भी कोई बात को, पुरानी गलतियों को, पुराने दोस्त को, चाहे मजाक में हो ये सच में हो, मज़बूरी में हो या डैशिंग बनने के चक्कर में, चाहे बचपन की हो या जवानी की हो। आप नहीं बताएं। …. आप नहीं बताएं। ……. आपको एहसास नहीं है आप ज़िंदगी भर के लिए आपने एक मुसीबत मोल ले ली है। ये मुसबित ताउम्र आपसे चिपट कर रहेगी और आप सोच नहीं सकतीं है आपको कितनी जिल्लत झेलनी पड़ेगी। और हो सकता है आपकी शादी भी टूट सकती हैं। या आपकी गलतियों को आपके रिस्तेदार के पास भी ये बात पहुंच जाएगी वो भी आपके पति के द्वारा ही। वो आपको जलील करने का एक भी मौक़ा नहीं छोड़ेगा। हो सकता है ये रोज रोज ना हो पर हां आपको हरेक ३ महीने में एक बार एक बात सामने आएगी और सोच लीजिये ज़िंदगी कितनी बड़ी है।

भले आपके पति कितने खराब हों, आप ये नहीं कह सकती हैं की तुम भी तो किये था। …….. तुम कौन से दूध के धुले हो। ….. कभी भी नहीं कहें अपनी पुरानी बात को।

आजकल तो हालत ऐसा है की इकीसवीं गर्लफ्रेंड बनाने वाला लकड़ा अपने नयी गर्ल फ्रेंड से पूछता है क्या तुम वर्जिन हो अगर नहीं होती है तो लड़का उस लड़की को गर्ल फ्रेंड भी नहीं बनाता है भले तो 20 इसके पहले बना चूका है। और वो तार तार हो चूका है पर चाहिए उसको एकदम अलग। ये पुरुष मानसिकता है।

दोस्तों अगर आप शादी शुदा हैं या आपकी शादी होने वाली है। तो अपनी ज़िंदगी को नए तरीके से जियें। नयी ज़िंदगी शुरू करें, पुराने को भूल जाएँ जैसे की आप रद्दी अखवार को कबाड़ी बाले को बेचने के बाद भूल जाती हैं। अपने घर के कूड़े को फेकने के बाद भूल जाती हैं वैसे ही अपनी पुराने सम्बन्ध को भूल जाएँ शेयर करने से।

आप अपने पति से या होने वाले पति से बहुत प्यार करें। आप उनको अपनी ज़िंदगी बनायें, बहुत अच्छी दोस्त बने, प्यार करें, खुश रहें पर ध्यान रहे ये सब तभी संभव हो सकेगा जब पुराणी बातों को शेयर नहीं करेंगी।

इसलिए दोस्तों आप अपनी बीती बातों को कभी भी नहीं बताएं। इस आर्टिकल्स को शेयर करें अपने दोस्तों को ताकि वो भी समझ सके की क्या सही है क्या गलत हैं।

अगर आपके मन में कुछ चल  रहा है या आप किसी ऐसी मुसीबत में हैं। तो अपनी बात शेयर करें।  कृपया दूसरों का भी मार्गदर्शन करें।

ग्वार की फली के फायदे प्रेगनेंसी में

प्रेगनेंसी के समय अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना गर्भवती महिला के लिए बहुत जरुरी होता है। क्योंकि यदि महिला अपनी डाइट में पोषक तत्वों से भरपूर आहार को शामिल करती है। तो इससे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में और शिशु का विकास महीने दर महीने बेहतर होने में मदद मिलती है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपसे एक ऐसी ही सब्ज़ी की बात करने जा रहे हैं। जो प्रेग्नेंट महिला व बच्चे के लिए फायदेमंद हो सकती है। और वो सब्ज़ी है ग्वार की फल जिसे की क्लस्टर बीन्स के नाम से भी जाना जाता है।

प्रेगनेंसी में क्यों करना चाहिए ग्वार की फली का सेवन?

गर्भवती महिला को हर वो चीज अपनी डाइट में शामिल करनी चाहिए जो न केवल पोषक तत्वों से भरपूर हो बल्कि माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद भी हो। और ग्वार की फली में फाइबर, आयरन, पोटैशियम, विटामिन्स, फॉस्फोरस, कैल्शियम, फोलिक एसिड व अन्य पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। इसीलिए ग्वार की फली को प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खाने की सलाह दी जाती है।

प्रेगनेंसी में ग्वार की फली खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि ग्वार की फली को अपनी डाइट का हिस्सा बनाती है तो इसे केवल गर्भवती महिला और बच्चे को बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं प्रेगनेंसी में क्लस्टर बीन्स खाने के कौन से फायदे होते हैं।

पोषक तत्व मिलते है भरपूर

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भरपूर पोषक तत्वों से युक्त आहार खाने की सलाह दी जाती है और ग्वार की फली पोषक तत्वों से भरपूर होती है। जैसे की इसमें विटामिन्स, आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम व अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने और बच्चे के बेहतर विकास में मदद करते हैं।

मजबूत हड्डियां

ग्वार की फली में कैल्शियम, फॉस्फोरस, विटामिन के मौजूद होता है जो हड्डियों को मजबूत करने में मदद करता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला ग्वार की फली का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूती मिलने के साथ बच्चे की हड्डियों व दांतों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

दिल को रखता है स्वस्थ

पोटैशियम, फोलेट, डाइट्री फाइबर जैसे पोषक तत्व हदय को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। और यह पोषक तत्व ग्वार की फली में मौजूद होते हैं ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला यदि ग्वार की फली का सेवन करती है। तो इससे गर्भवती महिला को ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने, हदय को स्वस्थ रखने, कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है।

खून की कमी को करता है पूरा

ग्वार की फली में आयरन भी मौजूद होता है जो बॉडी में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला यदि सिमित मात्रा में ग्वार की फली का सेवन करती है। तो इससे महिला को एनीमिया की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

शुगर को करता है कण्ट्रोल

हाइपोग्लाइसेमिक और हाइपोलिपिडेमिक गुण ग्वार की फली में मौजूद होते हैं। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला ग्वार की फली का सेवन करती है। तो इससे गेस्टेशनल डाइबिटीज़ से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही यदि कोई गर्भवती महिला शुगर से पीड़ित है तो उसके शुगर को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

फोलिक एसिड

गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास के लिए और उसे बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए बच्चे को पर्याप्त मात्रा में फोलिक एसिड मिलना चाहिए। और ग्वार की फली में फोलिक एसिड की मात्रा मौजूद होती है ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला ग्वार की फली का सेवन करती है तो इससे बच्चे को फोलिक एसिड खाने के रूप में पहुँचता है जो बच्चे के बेहतर विकास में मदद करता है।

विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है

ग्वार की फली में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स बॉडी से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने व बैड बैक्टेरिया को बाहर निकालने में मदद करते हैं। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ व बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

वजन

डाइट्री फाइबर ग्वार की फली में मौजूद होते हैं जो प्रेग्नेंट महिला के मेटाबोलिज्म को बढ़ाने, खाने को अच्छे से हज़म करने, पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला यदि ग्वार की फली का सेवन करती है तो इससे पेट सम्बंधित समस्या से निजात पाने के साथ वजन कम करने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी की परेशानियां होती है कम

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियां हो सकती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला ग्वार की फली का सेवन करती है। तो महिला को इन परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है। क्योंकि ग्वार की फली में मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करते हैं जिससे प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

ब्लड फ्लो होता है बेहतर

ग्वार की फली का सेवन करने से लाल रक्त कोशिकाओं में ब्लड व ऑक्सीजन के फ्लो को बेहतर होने में मदद मिलती है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को ग्वार की फली का सेवन जरूर करना चाहिए ताकि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में ब्लड फ्लो को बेहतर होने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ फायदे जो ग्वार की फली का सेवन करने से गर्भवती महिला व बच्चे को मिलते हैं। तो यदि आप प्रेग्नेंट हैं या प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं तो आपको अपनी डाइट में क्लस्टर बीन्स को जरूर शामिल करना चाहिए।

अंगूर खाने से पहले जानें इन बातों को प्रेगनेंसी में

अंगूर खाने से पहले जानें इन बातों को प्रेगनेंसी में, प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाना चाहिए क्या नहीं इसे लेकर गर्भवती महिलाएं बहुत परेशान हो सकती है। खासकर जब महिला ने पहली बार गर्भधारण किया हो। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को हर कोई खान पान के प्रति थोड़ी सी भी लापरवाही न बरतने की सलाह दे सकता है। क्योंकि महिला द्वारा लिया गया आहार केवल महिला के लिए ही नहीं होता है बल्कि वह माँ के पेट में पल रहे बच्चे को भी मिलता है।

ऐसे में महिला का गलत खान पान शिशु पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। इसीलिए गर्भवती महिलाएं कुछ भी खाने से पहले एक बार यह जरूर सोचती हैं की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को वह चीज खानी चाहिए या नहीं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम अंगूर के बारे में बात करने जा रहे हैं की अंगूर खाने से पहले प्रेग्नेंट महिला को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

अंगूर खाने से पहले स्वाद जरूर चखें

  • अंगूर को खरीदने से पहले अंगूर का स्वाद जरूर चखें।
  • क्योंकि यदि अंगूर खट्टे होते हैं और प्रेग्नेंट महिला उनका सेवन करती है।
  • तो इसके कारण महिला को एसिडिटी, सीने में जलन, चक्कर, उल्टी जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
  • ऐसे में महिला का यदि अंगूर खाने का मन है तो महिला को स्वाद में मीठे अंगूरों को ही खरीदना चाहिए।

खुले हुए अंगूर न लें

  • जब भी अंगूर खरीदने के लिए जाएँ तो ध्यान रखें की गुच्छे से अलग हुए अंगूरों को नहीं खरीदें।
  • क्योंकि ऐसे अंगूर गंदे, बदबूदार व् गले सड़े हो सकते हैं जो प्रेग्नेंट महिला की सेहत के लिए सही नहीं होते हैं।

गले सड़े अंगूर न खाएं

  • अंगूर जब भी खाएं तो ध्यान रखें की अंगूर कहीं से कटे या गले सड़े न हो।
  • क्योंकि गले सड़े अंगूर पर बैक्टेरिया का जमाव हो सकता है।
  • जो प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पहुंचकर महिला व् शिशु की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता हैं।

अंगूर खाने से पहले ध्यान रखें की बिना मौसम के अंगूर न हो

  • मौसम में आई चीज खाने से जितना फायदा मिलता है उतना ही नुकसान बेमौसम की चीज खाने से हो सकता है।
  • ऐसे में यदि अंगूर का मौसम नहीं है तो प्रेग्नेंट महिला को अंगूर का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि बेमौसम अंगूर को पकाने व् मीठा करने के लिए इंजेक्शन लगाए जाते हैं जो प्रेग्नेंट महिला को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • साथ ही यह शिशु पर भी नकारात्मक असर डाल सकते हैं।

जरुरत से ज्यादा अंगूर न खाएं

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को किसी भी खाने की चीज का जरुरत से ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि जरुरत से ज्यादा ली गई कोई भी चीज प्रेग्नेंट महिला व् शिशु को नुकसान पहुंचा सकती है।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को भी जरुरत से ज्यादा अंगूर का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • क्योंकि जरुरत से ज्यादा अंगूर खाने से प्रेग्नेंट महिला को पेट में गर्मी हो सकती है जिसके कारण उल्टी, दस्त, डायरिया, शरीर में पानी की कमी जैसी परेशानी हो सकती है।
  • इसके अलावा अंगूर का ज्यादा सेवन करने से महिला की बॉडी में हार्मोनल असंतुलन, पेट में गैस जैसी समस्या हो सकती है।
  • साथ ही अंगूर का छिलका खासकर काले अंगूर का छिलका पचाने में प्रेग्नेंट महिला को दिक्कत हो सकती है जिसके कारण पाचन तंत्र से जुडी अन्य परेशानियों का सामना भी प्रेग्नेंट महिला को करना पड़ सकता है।

तो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अंगूर का सेवन करने से पहले इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि अंगूर का सेवन करने के बाद महिला को किसी भी तरह की दिक्कत न हो।

पहली बार माँ बन रही महिलाओं के लिए 10 टिप्स

माँ बनने अनुभव महिला को तभी महसूस होने लगता है। जब महिला पीरियड्स मिस होने के बाद घर में प्रेगनेंसी टेस्ट करती है, और परिणाम पॉजिटिव आता है। पहली बार माँ बन रही महिलाओं के लिए तो यह समय ख़ुशी के साथ डर से भरपूर भी होता है। क्योंकि यह खबर ही महिला की जिंदगी को बदल देती है। और महिला के मन में यह अहसास अपने आप ही होने लगता है की गर्भ में शिशु कैसा होगा। ऐसे में गर्भ में शिशु को किसी तरह की दिक्कत न हो। और पहली बार माँ बन रही महिलाओं को प्रेगनेंसी में हर दिक्कत से बचे रहने में मदद मिल सके। इसके लिए जरुरी है की पहली बार मन रही महिलाएं कुछ बातों का ध्यान रखें। तो आइये आज हम आर्टिकल में आपसे उन्ही बातों को शेयर करने जा रहे हैं।

पहली बार माँ बन रही महिलाएं सबसे पहले डॉक्टर से मिलें

  • पीरियड्स के मिस होने के बाद यदि आप घर में प्रेगनेंसी टेस्ट कर चुकी हैं और परिणाम पॉजिटिव आया है।
  • तो सबसे पहले आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए।
  • उसके बाद जितनी भी जरुरी जांचे हैं वो डॉक्टर द्वारा बताने पर करवानी चाहिए।
  • अपनी आखिरी पीरियड की तारीख को याद रखना चाहिए।
  • डॉक्टर से अपने मन में आ रहे सभी सवालों को पूछना चाहिए।
  • अपनी कोई पुरानी मेडिकल हिस्ट्री हो उसे भी शेयर करना चाहिए।
  • ताकि प्रेगनेंसी में आगे कोई दिक्कत न हो।
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी दवाइयों का सेवन करना चाहिए।

प्रेगनेंसी से जुडी जानकारी लें

  • पहली बार माँ बन रही महिलाओं की प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद महिला को प्रेगनेंसी से जुडी जानकारी इक्कठी करनी चाहिए।
  • महिला यह जानकारी इंटरनेट, प्रेगनेंसी से जुडी किताबों आदि से इक्कठी कर सकती है।
  • इसके अलावा घर में मौजूद बड़ो के एक्सपीरियंस से भी आप कुछ न कुछ जान सकती हैं।
  • जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए आदि।
  • ताकि आपको प्रेगनेंसी के हर बदलाव, हर अनुभव, सेहत सम्बन्धी जानकारी आदि सभी के बारे में पता चल सके।

भरपूर आहार लें

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए।
  • और यदि आपकी पहली प्रेगनेंसी है तो खाने का ध्यान रखने के साथ इस बात का भी ध्यान रखें।
  • की गर्भवती महिला व् शिशु के लिए क्या खाना सही होता है और क्या नहीं।
  • क्योंकि गलत खान पान प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों को बढ़ा सकता है।

पहली बार माँ बन रही महिलाएं का ध्यान रखें

  • यदि आप पहली बार माँ बन रही है तो वजन बढ़ने पर वजन को कम करने के लिए व्यायाम व् डाइट न करें।
  • क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान ग्यारह से सोलह किलोग्राम तक महिला का वजन बढ़ सकता है।
  • साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान किस तरह व्यायाम करना सही होता है इसके लिए जिम ट्रेनर से राय लेनी चाहिए।

पानी का भरपूर सेवन करें

  • बॉडी में पानी की मात्रा का सही होना प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने में मदद करता है।
  • साथ ही इससे शिशु जिस द्रव में गर्भ में रहता है उसकी मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है।
  • और गर्भवती महिला की बॉडी का हाइड्रेट रहना गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करता है।
  • प्रेग्नेंट महिला को पानी के साथ जूस, नारियल पानी आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

तनाव

  • यदि आप पहली बार माँ बन रही हैं तो हो सकता है बॉडी में होने वाले बदलाव व् शारीरिक परेशानी के कारण महिला तनाव में आ जाए।
  • ऐसे में महिला को कोई भी दिक्कत होने पर घर के बड़ों या डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।
  • लेकिन तनाव लेने से बचना चाहिए।
  • क्योंकि प्रेग्नेंट महिला का तनाव लेना गर्भवती महिला के साथ शिशु पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है।।

पहली बार माँ बन रही महिलाएं अकेले न रहें

  • यदि आपकी पहली प्रेगनेंसी है तो कोशिश करें की आप अकेली न रहें।
  • क्योंकि पहली प्रेगनेंसी में धीरे धीरे ही हर अनुभव का पता चलता है।
  • ऐसे में बॉडी में होने वाले बदलाव या किसी शारीरिक परेशानी के कारण यदि आपको कोई दिक्कत हो तो आपके पास हमेशा कोई न कोई होना चाहिए।
  • ताकि आपको हर तरह की मदद मिल सके।

डरें नहीं

  • जैसे जैसे आपकी प्रेगनेंसी की खबर किसी को पता चलती है।
  • वैसे वैसे हर कोई आपसे अपनी प्रेगनेंसी के एक्सपीरियंस को शेयर करता है।
  • ऐसे में कुछ अच्छी बातें बताते हैं तो कुछ केवल प्रेगनेंसी में होने वाली दिक्कतों के बारे में ही बातें करते हैं।
  • ऐसे में आपको इन बातों पर कम ही ध्यान देना चाहिए और डरना नहीं चाहिए।
  • क्योंकि ऐसा जरुरी नहीं है की जैसा उनके साथ हुआ है वैसा आपके साथ भी हो।
  • यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान अपने अच्छे से ध्यान रखते हैं तो इससे महिला व् शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

पहली बार माँ बन रही महिलाएं रखें कपड़ों का ध्यान

  • पहली प्रेगनेंसी के दौरान महिला को केवल खान पान का ही नहीं बल्कि अपने पहनावें का भी खास ध्यान रखना पड़ता है।
  • जैसे की महिला को अपने ब्रेस्ट साइज से के बढ़ने के साथ उसी साइज की ब्रा पहननी चाहिए।
  • खुले, आरामदायक, सूती कपडे पहनने चाहिए।
  • वजन बढ़ने के बाद दो तीन मैक्सी खरीद लेनी चाहिए ताकि आपको अपने कपड़ो के कारण किसी तरह की दिक्कत न हो।

बेबी का नाम

  • पहली बार माँ बन रही महिला को अपनी प्रेगनेंसी के हर पल और खूबसूरत और यादगार बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
  • और इसके लिए महिला एक काम कर सकती है की महिला को एक लिस्ट तैयार करनी चाहिए।
  • जिसमे महिला को अपने आने वाले नन्हे मेहमान के लिए कुछ नाम सोचने चाहिए।
  • साथ ही महिला को अपने कमरे में कुछ गोलू मोलू बच्चों के फोटो लगाने चाहिए।
  • ऐसा करने से महिला को अपने पहली बार माँ बनने वाले अनुभव को एन्जॉय करने में मदद मिलती है।

प्रसव से जुडी जानकारी

  • डिलीवरी की एक अनुमानित तिथि डॉक्टर द्वारा पहले ही बता दी जाती है।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को प्रसव का समय पास आने पर प्रसव की सारी जानकारी इक्कठी कर लेनी चाहिए।
  • क्योंकि प्रसव की जानकारी होने से प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है।
  • साथ ही प्रसव के लक्षणों के बारे में भी जानना चाहिए।
  • ताकि बॉडी में यदि कोई भी बदलाव मसहूस हो तो आपको पता लग सके की यह प्रसव का लक्षण है या नहीं।
  • और हर दिक्कत से बचे रहने में मदद मिल सके।
  • इसके अलावा प्रसव के लिए दी गई तारीख पर भी यदि महिला को बॉडी में प्रसव का कोई लक्षण न महसूस हो।
  • तो इसके लिए भी एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ बातें जो पहली बार माँ बन रही महिलाओं को याद रखनी चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके। साथ ही शिशु का विकास भी शुरुआत से ही बेहतर होने में मदद मिल सके।