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चेहरे के काले दाग़ धब्बे ऐसे हो सकते हैं दूर!! 

स्वस्थ, सुंदर और बेदाग़ त्वचा की चाहत किसे नहीं होती!! त्वचा पर अगर काले दाग़ धब्बे हों तो गोरी त्वचा भी काली नज़र आने लगती है। और भारत जैसे देश में तो गोरे रंग को ही सुंदरता का पैमाना माना जाता रहा है। लड़के की शादी करनी हो तो दुल्हन ढूँढते वक़्त लड़के वालों की पहली माँग यही हुआ करती थी कि लड़की गोरी होनी चाहिए। हालाँकि की समय के साथ साथ लोगों की सोच में बदलाव होने लगा है, अब लोग गोरे रंग की अपेक्षा गुणों को महत्व देने लगे हैं, फिर भी दिल में कहीं ना कहीं ये चाहत अवश्य होती है कि गुणों के साथ साथ गोरा रंग भी हो तो सोने पे सुहागा। लड़कियों में गोरे रंग के प्रति काफ़ी रुझान देखा गया है, बाज़ार में उपलब्ध तरह तरह के क्रीम पाउडर का इस्तेमाल करके वो बेदाग़ त्वचा और गोरी रंगत पाना चाहती हैं। लड़कियाँ ही नहीं अब तो लड़के भी अपने रूप रंग के प्रति काफ़ी सजग हो गए हैं। बाज़ार में मौजूद महँगे क्रीम पाउडर का इस्तेमाल कर सब गोरा होना चाहते हैं। परंतु इन सब कृत्रिम उत्पादों के कुछ ना कुछ प्रतिकूल प्रभाव भी होते हैं, जो हमें समय रहते पता नहीं चलते और ये सब कृत्रिम उत्पाद कुछ समय बाद असर दिखाना भी बंद कर देते हैं। इसलिए बेहतर है कि हम घरेलू उपाय अपनाएँ और अपनी त्वचा को केमिकल के नुक़सान से बचाएँ। घरेलू उपचार सस्ते व आसान भी होते हैं और इनका कोई प्रतिकूल प्रभाव भी नहीं होता।

सुंदर, स्वस्थ, गोरी और बेदाग़ त्वचा पाने के लिए सिर्फ़ बाहरी उपचार ही काफ़ी नहीं होते, और भी कई चीज़ें हैं जो त्वचा के स्वास्थ्य पर असर डालती हैं। जैसे कि –

पानी – 

दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी ज़रूर पीना चाहिए। पानी अधिक पीने से त्वचा में नमी बनी रहती है और शरीर में मौजूद हानिकारक और विषैले तत्व बाहर निकलते रहते हैं। इससे हमें सुंदर, सुडौल और बेदाग़ त्वचा मिलती है, मुहाँसे नहीं होते और मुँहासों के निशान नहीं पड़ने से त्वचा का रंग हल्का बना रहता है और कालापन नहीं आता।

नारियल पानी

नारियल पानी में भी कई सारे पोषक तत्व जैसे ऐंटीआक्सिडंटस, अमीनो ऐसिडस और सॉल्ट्स होते हैं, जो त्वचा को सुंदर और स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। इसलिए दिन में एक बार नारियल पानी ज़रूर पिएँ।

तली हुई चीज़ों से दूर रहें – 

त्वचा को क़ुदरती तौर पर सुंदर, स्वस्थ और बेदाग़ रखने के लिए सबसे पहले तले हुए और मसालेदार भोजन से दूरी बना लें। ऐसे भोजन से त्वचा पर मुँहासों में वृद्धि होती है और ठीक होने पर भी ये मुँहासे अपने निशान छोड़ ही जाते हैं, जिससे त्वचा पर काले दाग़ बन जाते हैं।

संतुलित आहार लें

अपने भोजन में दालें, अनाज, दूध, दही, अंडे, ताज़े फल व रेशेदार सब्ज़ियों को शामिल करें। ऐसे फल अधिक खाएँ जिनमे विटामिन सी अधिक होता है, जैसे आँवला, संतरा, मोसंबी, निम्बू, अमरूद इत्यादि। विटामिन सी चेहरे के दाग़ धब्बों को दूर करता है और त्वचा की रंगत को हल्का करता है।

पर्याप्त नींद लें – 

नींद पूरी न होने से आपकी त्वचा कांतिहीन नज़र आती है व आँखों के नीचे काले घेरे बन जाते हैं। इससे त्वचा कुरूप व काली नज़र आने लगती है। इसका उपाय है कि आप रोज़ाना आठ घंटे की नींद ज़रूर लें।

व्यायाम – 

व्यायाम करने से हमारे शरीर से पसीना निकलता है और पसीने के साथ ही शरीर से विषैले पदार्थ भी निकल जाते हैं। इससे क़ुदरती रूप से त्वचा में निखार आता है।

अधिक धूप से बचें – 

दोपहर के समय बाहर धूप में ना निकलें और अगर जाना बहुत ही ज़्यादा ज़रूरी हो तो सनस्क्रीन का प्रयोग अवश्य करें। क्यूँकि सूर्य की रोशनी में विद्यमान अल्ट्रा वॉइलेट किरणों के सम्पर्क में आते ही त्वचा में मेलेनोजीनीसिस हो जाता है, जिसका मतलब है त्वचा की टैनिंग। टैनिंग से त्वचा का रंग काला नज़र आने लगता है, त्वचा पर काले रंग के पैचेज़ बन जाते हैं।

प्रदूषण से बचें – 

सड़क पर गाड़ियों के धुएँ से होने वाला प्रदूषण या किसी फ़ैक्टरी/कारख़ाने से निकलने वाले धुएँ के सम्पर्क में आने से बचें। धुएँ में निकलने वाली कार्बन हमारी त्वचा पर हानिकारक प्रभाव डालती है व त्वचा को काला बनाती है।

इन काले दाग़ धब्बों से निजात पाने के लिए अनेक प्रकार के कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट (cosmetic treatment) हैं, लेकिन कुछ घरेलू उपायों के द्वारा भी आप अपनी सुंदरता को निखार सकते हैं – 

निम्बू – 

नींबू सबसे अच्छा ब्लीचिंग एजेंट होता है, जो चेहरे में निखार लाने में बहुत मदद करता है। नींबू में जो एसकॉर्बिक एसिड (ascorbic acid) या विटामिन सी होता है, वह एन्टी-ऑक्सिडेंट्स के रूप में काम करता है और त्वचा के दाग-धब्बों को दूर करके रौनक लाने में मदद करता है। निम्बू के रस को सीधा चेहरे पर अन्य कुछ चीज़ों के साथ मिला कर इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे –

  • एक कटोरी में आधा निम्बू का रस निचोड़कर, उसमें रूई भिगोकर दाग वाली जगह पर लगाएँ। या आप सीधे निम्बू को काटकर दाग पर रगड़ सकती हैं। एक घंटे तक रस को सूखने के लिए छोड़ दें और उसके बाद पानी से धो लें। याद रहे कि निम्बू का रस लगाने के बाद धूप में न जाएँ।
  • एक कटोरी में तीन छोटा चम्मच निम्बू का रस लेकर, उसमें एक छोटा चम्मच हल्दी का पाउडर मिक्स करके एक पैक बना सकते हैं। इस पैक को चेहरे पर लगाएँ और सूखने दें। फिर चेहरा साफ़ पानी से धो दें।
  • दो चम्मच आलू का रस लें, इसमें दो चमच्च निम्बू का रस मिला लें। अब इस मिश्रण को चेहरे व गर्दन पर अच्छे से मलें। कम से कम पाँच मिनट तक मसाज करें और फिर आधे घंटे के लिए लगा रहने दें। आधे घंटे बाद साफ़ पानी से चेहरा धो लें। नियमित रूप से निम्बू और आलू के मिश्रण को लगाने से टैनिंग की असर कम हो जाता है, सनबर्न ठीक होता है, चेहरे के दाग़ धब्बे ग़ायब हो जाते हैं व रंग गोरा होता है।
  • एक टमाटर लें, उसका गूदा निकालें व उसमें एक चम्मच निम्बू का रस मिला लें। अब इस मिश्रण को चेहरे व गर्दन पर अच्छे से मलें। आधा घंटा इसे लगा रहने दें, फिर चेहरा धो लें। इस पैक से टैनिंग, सनबर्न ठीक होते हैं, चेहरे की रंगत हल्की होती है।
  • खीरे और नींबू का रस निकालकर उसे भी चेहरे पर लगा सकते हैं। इस विधि से आप त्वचा के दाग़ धब्बे, मुँहासे तथा सनबर्न को दूर कर सकते हैं।

संतरा – 

निम्बू की तरह ही संतरे के रस में भी ब्लीचिंग के गुण होते हैं, जो दाग-धब्बों को दूर करने में मदद करते हैं। संतरे को भी अलग अलग तरीक़े से इस्तेमाल करके चेहरे की रौनक़ बढ़ाई जा सकती है। जैसे –

  • एक कटोरी में दो बड़े चम्मच संतरे का रस लें और उसमें एक चुटकी हल्दी पाउडर डालकर अच्छी तरह से मिला लें। इस पेस्ट को रात को सोने से पहले चेहरे पर अच्छी तरह से लगा लें और अगली सुबह गुनगुने पानी से धो लें।
  • दो चमच्च चंदन पाउडर लें, उसमें संतरे का रस मिला कर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे व गर्दन पर अच्छे से लगाएँ। सूख जाने पर साफ़ पानी से धो दें। इस पैक को लगाने से मुँहासों से मुक्ति मिलती है, दाग़ धब्बे दूर होते हैं व रंगत निखरती है।

शहद – 

शहद बहुत ही गुणकारी होता है। इसमें ऐंटीआक्सिडंटस, अमीनो ऐसिड, मिनरल और विटामिन पाए जाते हैं। इसमें ज़ख़्मों, फोड़े फुंसियों, जली हुई त्वचा इत्यादि को ठीक करने के गुण होते हैं। अमीनो ऐसिड और विटामिन C मिलकर त्वचा में स्वस्थ टिशू के निर्माण को बढ़ावा देते हैं। शहद को यूँ ही लगाएँ या दूसरी किसी चीज के साथ पेस्ट बनाकर लगाएँ, ये त्वचा की मृत कोशिकाओं (dead cells) को निकालकर रौनक लाने में मदद करता है। जैसे –

  • एक चम्मच शहद में कुछ बूंदें नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाएँ व 15 मिनट बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो दें। निम्बू में प्राकृतिक रूप से ब्लीचिंग के गुण होते हैं, ये चेहरे के दाग़ों को हल्का करता है तथा शहद से त्वचा साफ़ और कोमल हो जाती है।
  • पपीते को अच्छे से मसलें व उसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर पेस्ट बना लें व चेहरे पर लगाएँ। सूख जाने पर चेहरा धो लें। नियमित रूप से ये उपाय करने पर आप ख़ुद फ़र्क़ महसूस करेंगे।
  • शहद और कच्चा दूध एक समान मात्रा में मिलाकर चेहरे पर लगाएं व तीस मिनट बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो दें| यह प्रक्रिया सप्ताह में 3 बार अवश्य दोहराएँ।

आलू – 

आलू में विटामिन C, पोटेशियम , विटामिन B6 प्रचुर मात्रा में होते हैं। इसके अलावा आलू में मैग्नेशियम , फास्फोरस , आयरन और ज़िंक भी होता है। आलू से हमें कार्बोहाईड्रेट स्टार्च के रूप में मिलता है जिसका कुछ हिस्सा फाइबर की तरह काम करता है। आलू में कई प्रकार के ऐंटीआक्सिडंटस भी पाए जाते हैं, जो की फ्री रेडिकल से होने वाले नुकसान से बचाते हैं।

  • एक आलू लेकर उसे बीच से काट दें और उसे पूरे चेहरे पर रगड़ें। आधे घंटे बाद चेहरा धो दें। हफ़्ते में एक दो बार ये उपाय ज़रूर करें, इससे आपके चेहरे के दाग़ धब्बे हल्के होंगे और आपका चेहरा निखर उठेगा।
  • आलू का गूदा रोज़ाना दाग़ धब्बों पर लगाने से वह धीरे धीरे कम हो जाते हैं। ये प्रक्रिया 1 महीने तक रोज़ करें, दाग़ धब्बे मिट जाएंगे और आपकी त्वचा बेदाग़ और गोरी हो जाएगी।
  • दो चम्मच आलू का रस लें, इसमें दो चमच्च निम्बू का रस मिला लें। अब इस मिश्रण को चेहरे व गर्दन पर अच्छे से मलें। कम से कम पाँच मिनट तक मसाज करें और फिर आधे घंटे के लिए लगा रहने दें। आधे घंटे बाद साफ़ पानी से चेहरा धो लें।
  • एक चम्मच आलू का रस, दो चम्मच निम्बू का रस और दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी लेकर इनका पेस्ट बनाएँ। अब ये पेस्ट अपने चेहरे पर लगा लीजिए और पूरा सूखने पर ठंडे पानी से चेहरा धो लीजिए। ये मास्क चेहरे के दाग़ धब्बे और निशानों को दूर करने में मदद करता है।

इन सब घरेलू नुस्ख़ों के साथ आप अपनी स्वस्थ, सुंदर और बेदाग़ त्वचा की चाहत को पूरा कर सकते हैं। साथ ही साथ सही खान पान से आप अपनी ख़ूबसूरती प्राकृतिक रूप से बढ़ा सकते हैं व अच्छी सेहत पा सकते हैं।

विकलांग बच्चे होने के क्या क्या कारण होते हैं

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हर गर्भवती महिला चाहती है की उसके गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ हो, और गर्भ में शिशु के विकास में भी किसी तरह की कमी न आए। और इसके लिए लिए जरुरी होता है की गर्भवती महिला अपना अच्छे से ध्यान रखें, भरपूर पोषक तत्वों का सेवन करें, छोटी छोटी गलतियों से बचें, किसी भी तरह की लापरवाही न करें, आदि। क्योंकि शिशु को पोषण गर्भवती महिला के द्वारा ही मिलता है, ऐसे में महिला द्वारा की गई लापरवाही का असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है, और कई शिशु जन्म से ही विकलांग भी हो सकते हैं। तो लीजिये आज हम गर्भवती महिला को बताने जा रहे हैं की महिला को कौन कौन सी गलतियां गर्भावस्था के दौरान नहीं करनी चाहिए जिससे गर्भ में पल रहा शिशु विकलांग हो।

खून की कमी

गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की लिए ही बॉडी में पर्याप्त मात्रा में खून का होना बहुत जरुरी होता है। इसीलिए यदि आप शिशु प्लान करती है तो आपको तीन महीने पहले से ही फोलिक एसिड का सेवन शुरू कर देना चाहिए। और यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो भी आपको ऐसे पदार्थो का सेवन करना चाहिए जिसमे आयरन भरपूर हो। ताकि शिशु के गर्भ में हो रहे विकास में किसी भी तरह की कमी न आए। और यदि महिला के शरीर में खून की कमी हो जाती है तो इसके कारण शिशु के शारीरिक विकास में कमी आ सकती है जिसके कारण शिशु विकलांग भी हो सकता है।

प्रदूषण के कारण

प्रदूषण का बुरा प्रभाव पड़ने के कारण भी गर्भ में पल रहे शिशु की सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है, और जब शिशु कुछ सुन ही नहीं पाता है, तो इसके कारण उसके बोलने पर भी असर पड़ सकता है। इसका कारण ध्वनि प्रदूषण हो सकता है, जिसके कारण आपके गर्भ में पल रहा शिशु गूंगा व् बहरा हो सकता है।

भीड़भाड़ में जाने के कारण

गर्भवती महिला यदि भीड़भाड़ या शिरगुल वाली जगह पर अधिक रहती है तो इसके कारण वायरल इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है, जो शिशु को शारीरिक रूप से प्रभावित कर सकता है। और इसके कारण भी शिशु के विकलांग होने के साथ सुनने व् बोलने की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

जंक फ़ूड के कारण

गर्भावस्था में महिला के जीभ के स्वाद का बदलना आम बात होती है, लेकिन ऐसे में भी महिला को जंक फ़ूड का सेवन नहीं करना चाहिए, न ही रोड पर लगे चाट पकौड़े आदि का सेवन करना चाहिए। क्योंकि इनके कारण हानिकारक बैक्टेरिया आपके शरीर में प्रवेश कर सकता है जिसके कारण शिशु के विकास में कमी आ सकती है। साथ ही इनमे पोषक तत्व भी नहीं होते हैं, जबकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों का सेवन करने की सलाह दी जाती है।

तनाव

प्रेगनेंसी के दौरान तनाव बहुत ही नुकसानदायक हो सकता है, इसके कारण न केवल गर्भवती महिला बुरी तरह प्रभावित होती है, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के भी शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी आ सकती है। इसीलिए महिला को शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जितना हो सके प्रेगनेंसी के दौरान तनाव से बचना चाहिए और खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए।

कोल्ड ड्रिंक और बाहर का जूस

कोल्ड ड्रिंक, डिब्बा बंद जूस, या रोड पर मिलने वाले जूस आदि का सेवन भी गर्भवती महिला के लिए नुकसानदायक हो सकता है। क्योंकि इसके कारण हानिकारक बैक्टेरिया बॉडी में पहुँच जाता है, साथ ही इनमे तरह तरह के प्रेज़रवेटिव भी मिले होते हैं जो शिशु के विकास को धीमा कर सकते है। और इसके कारण भी शिशु को विकलांगता हो सकती है ऐसे में गर्भवती महिला को घर में निकले हुए ताजे जूस का ही सेवन करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भ में पल रहे शिशु के विकलांग होने की समस्या हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। और प्रेगनेंसी के दौरान बिल्कुल भी लापरवही नहीं करनी चाहिए। साथ ही अपने खान पान का बेहतर तरीके से ध्यान रखना चाहिए ताकि गर्भवती महिला को गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

यूट्यूब विडिओ –

गर्भ में शिशु की ग्रोथ नहीं होने की ये वजन होती है। गर्भवती महिला की किन आदतों से शिशु में विकलांगता होती है? शिशु के दुबले विकलांग और कमजोर होने के कारण।

घर में काजल बनाने के तरीके

घर में काजल बनाने के तरीके, आँखों की सुंदरता को बढ़ाने के लिए काजल का इस्तेमाल करना सबसे आसान और बेहतरीन तरीका होता है। साथ ही ऐसा भी माना जाता है की यदि जन्म के बाद शिशु को नियमित रूप से आँखों में काजल लगाया जाता है। तो इससे शिशु की आँखों को मोटी करने, पलकों को घनी करने में मदद मिलती है। आज कल मार्किट में अलग अलग कंपनी के काजल मिल जाते हैं, जिन्हे बनाने के लिए केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन पुराने समय में लोग अपने घरों में काजल को बनाते थे।

और उस काजल को अपनी और बच्चों की आँखों में लगाते हैं। घर के बने काजल में न तो कोई केमिकल होता था, और न ही यह आँखों को कोई नुकसान पहुंचाते थे। बल्कि यह आँखों के लिए बहुत फायदेमंद होता था। आज इस आर्टिकल में हम आपको घर में काजल बनाने के लिए आप किन तरीको का इस्तेमाल कर सकते हैं उस बारे में बताने जा रहे हैं। तो आइये अब जानते हैं की घर में आप काजल किस तरह बना सकते हैं।

कपूर का इस्तेमाल करें

  • इस तरीके का इस्तेमाल करने के लिए एक प्लेट में कपूर को रखें।
  • उसके बाद कपूर को जलाएं और उसके आस पास छोटी छोटी प्लेट या कटोरी कुछ इस तरह लगाएं की कपूर का धुंआ उन पर लगे।
  • और जैसे जैसे कपूर का धुंआ उन कटोरी या प्लेट पर लगेगा।
  • तो वहां कालिख जमना शुरू हो जाएगी।
  • कपूर के पूरी तरह जल जाने के बाद आप इस कालिख को उतारकर एक डिब्बी में इक्कठी कर लें।
  • यह घर में बना काजल ही होता है।

घर में काजल बनाने के लिए इस्तेमाल करें कैस्टर ऑयल

  • एक दीपक में कैस्टर ऑयल को डालें और एक बत्ती को डुबोकर जलाएं।
  • उसके बाद इस बत्ती के आस पास कटोरी या प्लेट रख दें जिस पर बत्ती का धुंआ लगे।
  • इस धुंए के लगने से उस बर्तन पर आपको कालिख दिखाई देगी।
  • दीये के पूरी तरह जल जानें के बाद इस कालिख प्लेट या कटोरी पर से इक्कठी कर लें।
  • उसके बाद इसे डिब्बी में बंद करके रख लें।
  • और नियमित इसे अपनी आँखों पर लगाएं ताकि आपकी आँखों की ख़ूबसूरती को बरकरार रहने में मदद मिल सके।
  • ज्यादा काजल बनाने के लिए आप बड़े दीए में पूरी रात के लिए लौ को जले रहने दें।
  • साथ कैस्टर ऑयल के अलावा आप बादाम तेल, सरसों के तेल आदि का इस्तेमाल करके भी काजल बना सकते हैं।

तो यह हैं कुछ तरीके जिनका इस्तेमाल करने से आप अपने घर पर अपनी आँखों के लिए अपने आप काजल बना सकते है। यदि आप भी घर में काजल बनाना चाहते हैं तो आप भी इनमे से किसी भी तरीके का इस्तेमाल कर सकते हैं। और आसानी से घर में आँखों के लिए काजल बना सकते हैं।

सिर दर्द के 10 घरेलू उपाय

आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है फिर चाहे वो मानसिक परेशानी हो या शारीरिक। इन्हीं परेशानियों में से एक है सिर दर्द, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। सिर दर्द आज कल की आम बीमारी बनता जा रहा है। जिसका मुख्य कारण बढ़ता तनाव और अव्यवस्थित खान पान है। पहले ये समस्या बड़ी उम्र के लोगों में देखने को मिलती थी लेकिन आजकल छोटे बच्चों को भी सिर दर्द होने लगता है।

अक्सर हमें यही लगता है की दिमाग में चल रहा तनाव और चिंता के कारण सिर दर्द होता है जबकि ये समस्या हमारे नर्वस सिस्टम और गर्दन से जुडी हुई है। सिर दर्द होने पर व्यक्ति का दिमाग ठीक तरह से काम नहीं कर पाता। उसका किसी भी काम में मन नहीं लगता जिसके कारण उसकी दिनचर्या में बहुत समस्याएं उत्पन्न होती है।

ऐसे तो बाजार में सिर दर्द की बहुत सी दवाएं मौजूद है लेकिन हर छोटी-छोटी समस्या के लिए दवा खाना भी उचित नहीं। क्योंकि कर बार ये दवाएं भी हमारे लिए नुकसानदेह सिद्ध हो जाती है। ऐसे में घरेलू उपायों का इस्तेमाल करना बेहतर होगा। इसीलिए आज हम आपको सिर दर्द के कुछ ऐसे आसान घरेलू उपायों के बारें में बताने जा रहे है जिन्हे आजमाकर आप सिर दर्द से राहत पा सकते है।

सिर दर्द के घरेलू उपचार :-

1. एक्यूप्रेशर :

बिना पैसे खर्च किये सिर दर्द की समस्या से छुटकारा पाने का ये तरीका सबसे सरल और फायदेमंद होता है। सिर दर्द होने पर अपनी दोनों हथेलियों को सामने ले आये। अब अपने एक हाथ के अंगूठे से दूसरे हाथ की अनामिका ऊँगली और अंगूठे के बीचे की जगह पर हलके हाथों से मसाज करें। इस प्रक्रिया को दोनों हाथों में 4 मिनट तक दोहराएं। आपके सिर दर्द में आराम मिलेगा।

2. पानी :

कई बार सिर दर्द का कारण शरीर में डिहाइड्रेशन भी हो सकता है। इस स्थिति में अधिक से अधिक पानी पीना आपके लिए लाभकारी रहेगा। इसके लिए थोड़ी-थोड़ी देर में 1-1 घूंट पानी पियें। आप चाहे तो इसमें ग्लूकोस आदि घोलकर भी पी सकते है। जूस भी डिहाइड्रेशन कम करने का बेहतर उपाय है।

3. लौंग :

लौंग भी आपके सिर दर्द को खत्म करने में काफी लाभकारी हो सकती है। इसके लिए तवे पर लौंग को अच्छी तरह से गर्म कर लें। अब इन कलियों को एक रुमाल में गर्म ही बांध लें। थोड़ी-थोड़ी देर के अंतराल में इस पोटली को सूंघते रहे, सिर दर्द में आराम मिलेगा।

4. तुलसी :

तेज सिर दर्द होने पर लोग चाय की मांग करते है। लेकिन इसकी जगह यदि तुलसी की पत्तियों की चाय बनायीं जाए तो वे आपके सिर दर्द को काफी हद तक कम करने में मदद करेगी। इसके लिए तुलसी की कुछ पत्तियों को पानी में अच्छे से उबाल लें और इसका सेवन करें। लाभ मिलेगा।

5. लहसुन :

लहसुन भी सिर दर्द में राहत देने में मदद करता है। इसके लिए लहसुन की कुछ कलियां लीजिए। अब उन कलियों को छीलकर उनका रस निकाल लें। दर्द होने पर एक चम्मच इस रस का सेवन करें। यह आपके दर्द में पेनकिलर का काम करेगा।

6. दालचीनी :dalchini ke gun

सिर दर्द की समस्या से छुटकारा पाने के लिए दालचीनी एक बेहतर और असरदार उपाय है। इसके लिए दालचीनी को पीसकर इसका पाउडर बना लें। अब इसे पानी में मिलाएं और पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को अपने सिर पर लगाएं। कुछ ही देर में सिर दर्द में आराम मिल जाएगा।

7. सेब :

अगर आपको अक्सर सिर दर्द की समस्या रहती है तो उसके लिए रोजाना सुबह एक सेब में नमक लगाकर खाएं। और इसके बाद गर्म दूध या पानी का सेवन करें। 10 दिनों तक लगातार सेब खाने से आपके सिर दर्द की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

8. धनिया, जीरा और अदरक :

अगर आपके सिर में तेज दर्द हो रहा है तो इसके लिए धनिया पत्ती, जीरा और अदरक से बनी चाय का सेवन करें। ये तेज दर्द में काफी आराम देता है। इसके लिए सभी समाग्रियों को पानी में डालकर 5 मिनट तक उबाल लें। और उसके बाद इसका सेवन करें। दिन में 2 बार पीने से आपका दर्द गायब हो जाएगा।

9. नारियल तेल :

सिर दर्द होने पर तेल मालिश भी काफी आराम पहुंचाती है। इसके लिए आप नारियल या सरसों के तेल का इस्तेमाल कर सकते है। नारियल तेल से 10 से 15 मिनट तक सिर की मसाज करें। आराम मिलेगा। और यदि यह दर्द गर्मी के दिनों में हो रहा है तो ये आपको ठंडक पहुँचाने में भी मदद करेगा।

10. चंदन :

चंदन भी सिर दर्द को ठीक करने में मदद करता है साथ ही सिर में आराम भी पहुंचाता है। इसके लिए चंदन का लेप अपने माथे पर लगाएं।

तो ये थे कुछ उपाय जिनकी मदद से आप सिर दर्द की समस्या से राहत पा सकते है। लेकिन यदि समस्या अति गंभीर हो और सिर में असहनीय दर्द हो रहा हो तो ऐसे परिस्थिति में डॉक्टरी परामर्श लेना ही बेहतर रहेगा।

गर्भावस्था में उल्टी और गैस की समस्या से निजात पाने के टिप्स

गर्भावस्था में उल्टी और गैस की समस्या से निजात पाने के टिप्स:-

गर्भावस्था के समय महिला को कई सारे नए अनुभव का सामना करती हैं, ऐसे में महिला के साथ कई तरह की परेशानियां लगी रहती हैं, जैसे की उल्टी और गैस की परेशानी हो जाती हैं, जिसके कारण महिला को बहुत सी परेशानी हो जाती हैं, अब आप यदि नार्मल हालात में होते हैं, तो ही आपको यदि गैस या उल्टी की परेशानी होती है, तो आप कितने परेशान हो जाते है, तो सोचिये यदि आप माँ बनाने वाली हैं और तब आपको ये परेशानी हो तो आप और भी ज्यादा परेशान भी हो जाते हैं, इसीलिए जरुरी हैं की आप इस समस्या का इलाज़ करें।

तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसे ही नुस्खे बताने जा तरह हैं, जिससे आप गर्भावस्था के दौरान होने वाली उल्टी और गैस की समस्या से निजात पा सकते है, और आपको यदि ये परेशानी ज्यादा हो, तो आपको लापरवाही न बरतते हुए, जल्द से जल्द से डॉक्टर को संपर्क करना चाहिए, क्योंकि इससे आपके पेट पर सीधा असर पड़ता हैं, और यदि कही इस समस्या के ज्यादा न हो, बाकी इस समस्या से बचने के हम आपको कुछ आसान से टिप्स भी बताने जा रहें हैं, जिससे आपको प्रेगनेंसी के समय होने वाली उल्टी और गैस की समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है।

गर्भावस्था के दौरान होने वाली उल्टी की समस्या से निजात पाने के टिप्स:-

अदरक का इस्तेमाल करें:-

ginger

अदरक का इस्तेमाल करने से भी आपको गर्भावस्था के दौरान होने वाली उल्टी की समस्या से आराम दिलाने में आपकी मदद हो सकती हैं, आप इसके लिए इसकी चाय बनाकर भी पी सकते है, इसके अलावा आप इस समस्या से बचने के लिए अदरकके तेल का इस्तेमाल भी कर सकते है, इसीलिए यदि आपको प्रेगनेंसी में उल्टी आएं, तो आप अपने हाथ पर या रुमाल पर अदरक के तेल को लगाकर उसे सूंघते हैं, तो भी आपको प्रेगनेंसी में होने वाली उल्टी से राहत मिलती है।

चने या चने के सत्तू का इस्तेमाल करें:-

यदि आपको गर्भावस्था के समय उल्टी आती है, तो आप रात के समय काले चने भिगोकर पानी में रखें, और सुबह उठकर आप उस पानी का सेवन करें, या फिर भुने हुए चने का सत्तू पानी में घोल कर उसमे स्वाद के अनुसार नमक या पानी मिलाकर उसका सेवन करें, इसके सेवन से भी आपको प्रेगनेंसी में आने वाली उल्टी की समस्या से निजात मिल जाता है, और साथ ही आप इसका सेवन सुबह उठकर भी कर सकते है।

अजवाइन का सेवन करें:-

अजवाइन का सेवन करने से भी आपको प्रेगनेंसी में होने वाली उल्टी की समस्या से निजात मिल जाता है, इसके लिए आप खाना खाने के बाद यदि थोड़ी सी अजवाइन लेकर उसका पानी के साथ सेवन करें, ऐसा करने से आपको प्रेगनेंसी में होने वाली उल्टी के साथ खाने को भी अछि तरह से पचाने में मदद मिलती है, इसीलिए इस समस्या से बचने के लिए आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए।

आंवले के मुरब्बे का सेवन करना चाहिए:-

आंवले के मुरब्बे का सेवन करने से आपको स्वास्थ्य सम्बंधित बहुत से लाभ होते है, और गर्भवती महिला को यदि उल्टी जैसी समस्या होती है तो यदि वो दिन में दो से तीन बार आंवले के मुरब्बे का सेवन करते है, तो आपको गर्भावस्था में होने वाली उल्टी की समस्या से निजात मिलता है, आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए।

तुलसी और शहद का इस्तेमाल करें:-

tulsi

तुलसी को एक आयर्वेदिक औषधि के रूप में माना जाता है, और शहद भी स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदे मंद होता है, और यदि आपको गर्भावस्था के समय उल्टी की समस्या होती है, तो आप तुलसी के रस में शहद डाल कर उसे चाटें, आपको तुरंत ही इस समस्या से राहत मिलेगी, और आपको जब भी ऐसा महसूस होता है की आपको उल्टी आने वाली है तो आप इसका इस्तेमाल कर इस समस्या से राहत पा सकते है। यदि आप सिर्फ तुलसी के रस का सेवन भी करते है तो भी आपको ये बहुत फायदा करता है, इसीलिए आपको इस आसान उपाय को इस समस्या के लिए जरूर इस्तेमाल करना चाहिए।

नीबू और शहद का सेवन करें:-

गर्भवती महिला यदि नीबू के रस में शहद डाल कर उसका सेवन करती है, तो भी महिला को गर्भावस्था के दौरान होने वाली उल्टी की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है, आप चाहे तो खाली नीबू का रस और शकर मिलाकर उसका भी सेवन कर सकते है, ये भी उल्टी की समस्या से राहत दिलाने में आपकी बहुत मदद करता है, और इसके अलावा आप नीबू पर काली मिर्च या नमक लगाकर उसे चूसते है तो भी इससे उल्टी को रोकने में मदद मिलती है, तो आप नीबू का कई तरह से इस्तेमाल करके उल्टी की समस्या से बहुत आसानी से निजात पा सकते है।

गर्भावस्था के दौरान उल्टी की समस्या को रोकने के अन्य उपाय:-

  • अदरक में धनिये का रस मिलाकर पीने से भी आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • तुलसी के रस में शहद मिलाकर उसका सेवन करने से भी आपको आराम महसूस होता है।
  • मौसंबी का रस पीने से भी आपको इस समस्या से राहत मिलती है।
  • एक कप पानी में शहद मिलाकर उसका सेवन करने से भी आपको उल्टी की समस्या से राहत मिलती है।
  • अनार के दानों का रस थोड़ा थोड़ा करके चूसने से भी उल्‍टी में बहुत लाभ होता है।
  • नारियल पानी भी आपको इस अवस्था में उल्टी से राहत दिलाता है।

गर्भावस्था के समय गैस की समस्या से राहत पाने के टिप्स:-

मैथी के दानो का इस्तेमाल करें:-

गर्भावस्था में गैस की समस्या से राहत पाने के लिए आप मैथी के दानो का इस्तेमाल करके आप गैस की समस्या से राहत पा सकती है, इसके लिए आप रात के समय मैथी के दानो को भिगो कर रख दें, और सुबह उठ कर आप इसे छान कर इस पानी का सेवन करें, ऐसा करने से आपको गर्भावस्था के दौरान होने वाली गैस की समस्या से राहत मिलती है।

तरल पदार्थो का सेवन अधिक मात्रा में करें:-

पानी की कमी होने के कारण भी आपको गर्भावस्था के समय गैस की परेशानी हो सकती है, इससे बचने के लिए आपको तरल पदार्थो का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए, जैसे की आपको पानी के साथ ताजे फलो का सेवन भी करना चाहिए, और साथ ही ऐसे फल खाने चाहिए जिसमे पानी की मात्रा अधिक होती है, लेकिन खाना कहते समय आपको पानी नहीं पीना चाहिए, क्योंकि इससे पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे गैस की समस्या उत्त्पन्न हो सकती है, इसीलिए ऐसा नहीं करना चाहिए।

हलकी फुलकी एक्सरसाइज करें:-

गर्भावस्था के दौरान हल्का फुल्का व्यायाम भी करना आपके लिए लाभदायक होता है, इससे आपके पाचन क्रिया को अच्छा रहने में मदद मिलती है, जैसे आपको थोड़ी बहुत वॉक आदि करनी चाहिए, खास कर आपको खाना खाने के बाद जरूर घूमना चाहिए, ताकि खाना आसानी से पच सकें और आपको गैस की समस्या से राहत पाने में मदद मिल सकें, आप चाहे तो अपने घर में ही या फिर पार्क में भी घूमने भी जा सकते है, ज्यादा कड़ा व्यायाम नहीं करना चाहिए, जिससे पेट पर दबाव पढ़ें, ये आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है।

भरपूर और नियमित रूप से आहार लें:-

कई महिलाएं एक बार में ही इतना खा लेती है, और उसके बाद आहार में बहुत लंबा अंतराल रखती है, साथ ही बाहर के खाने का भी सेवन करती है, जिससे गैस की समस्या खड़ी हो जाती है, और यदि आप इस समस्या से बचना चाहते है तो भोजन को स्वस्थ व् पोष्टिक, तथा थोड़ा थोड़ा और थोड़े थोड़े समय के बाद खाना चाहिए, साथ ही भोजन को अच्छे से चबाकर खाना चाहिए, इससे भोजन को पचने में आसानी होती है, और साथ ही गैस की समस्या से भी राहत मिलती है।

  • गर्भावस्था के दौरान गैस की समस्या से बचने के अन्य उपाय:-
  • पानी के सेवन को भरपूर मात्रा में करना चाहिए।
  • ऐसे भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए जिससे गैस बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है।
  • आहार में चावल, गाजर, हरी सब्जियों आदि का सेवन करें।
  • प्याज़ सेम गोभी ब्रोकली आदि सब्जियों का सेवन ज्यादा मात्रा में न करें, ये गैस की समस्या को बढ़ा देते है।
  • पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें।
  • तनाव या टेशन न लें, कई बार इसके कारण भी पेट में ऐंठन हो जाती है।

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दांत का दर्द ठीक करने के घरेलु इलाज

दांत का दर्द एक बहुत ही साधारण सी समस्या है, यह कभी भी किसी भी उम्र के इंसान को हो सकता है। दांत के दर्द में जब भी आप कुछ गर्म या ठंडा खाते है तो यह आपका दर्द और भी बढ़ जाता है। कई बार तो दांत का दर्द इतना बढ़ जाता है के पानी पीना भी मुश्किल हो जाता है। दांत का दर्द मुख्यतः दांतो की एनामेल नाम की परत हटने से होता है। यह परत हमारे दांतो की सुरक्षा परत होती है इसके हटते ही दांत बहुत सेंसिटिव हो जाते है। इसके अतिरिक्त दांतो की अच्छे से देखभाल ना करने से भी दांतो की दुर्दशा हो जाती है जैसे की समय पर ब्रश ना करना या फिर बहुत टाइट हाथो से ब्रश करना आदि।

आपके दांतो का दर्द जब हद से ज्यादा बढ़ जाए और आप जल्द से जल्द आराम चाहते है तो अपनाये यह आसान से घरेलु उपाय।

लहसुन

दांत दर्द को ठीक करने के लिए लहसुन एक बेहतरीन उपाय है। लहसुन एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर है। लहसुन में एल्लीसिन नामक केमिकल मिलता है जो के बैक्टीरिया को कम करने के काम आता है। जब बैक्टीरिया कम होता है तब दर्द भी कम होता चला जाता है। जिस दांत में दर्द हो उसमे लहसुन को थोड़ा सा पीस कर लगा लें जैसे ही उसमे से एल्लीसिन निकलेगा धीरे धीरे दर्द कम हो जायेगा।

लोंग

लोंग और लोंग के तेल को प्राकृतक रूप से दांत के दर्द को खत्म करने के लिए जाना जाता है। लोंग को तब भी दांत के दर्द को ठीक करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है जब साइंस ने इसके गुणों की खोज भी नहीं की थी। लोंग एंटीक्सेप्टिक गुणों से भरपूर है। इसके यही गुण इन्फेक्शन को खत्म कर दर्द को भी ख़त्म करते है। लोंग को और इसके तेल को सीधा दांतो पर लगाने से कैविटी और कई तरह के दर्द से भी छुटकारा मिलता है। ध्यान रखिये एक बार में एक लोंग का ही इस्तेमाल करे और अगर इसके तेल का उपयोग कर रहे है तो 1 या 2 बुँदे ही लगाए। लोंग बहुत तेज मसाला होता है इसलिए जरुरत से ज्यादा इसका इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है।

नमक और काली मिर्च

नमक और काली मिर्च को दांत के दर्द के लिए सदियों से इस्तेमाल किया जाता है। बराबर मात्रा में नमक और काली मिर्च ले और मिक्स करने के लिए कुछ पानी की बुँदे मिलाये। इस पेस्ट को आप अपने दांतो पर इस्तेमाल करे और कुछ देर तक लगाए रखे। इस उपाय से आपके दांत के दर्द में बहुत आराम मिलेगा।

अमरुद की पत्तियां

अमरुद के पेड़ की ताज़ी पत्तियां एंटीमाइक्रोबियल और एनाल्जेसिक गुणों से भरपूर है। इसके यही गुण दांत के दर्द को ठीक करने के काम आता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए अमरुद की पत्तियों को दांतो से चबाये जब तक दर्द में आराम न मिले तब तक आराम आराम से पत्तियों को चबाये। इसके अतिरिक्त पत्तियों को पानी में उबाल कर अच्छे से पानी को छान और इस पानी से गरारे करे।

ग्रीन टी

ग्रीन टी बहुत ही सेहतमंद होती है और साथ ही दांतो के दर्द को ठीक करने में बहुत ही कारागार होती है। ग्रीन टी की पत्तियां ठंडी तासीर की होती है। ग्रीन टी एसिड टैनिक, कैटेचिन और फ्लोरल गुणों का स्रोत है। इसके उपयोग से दांतो को मजबूती भी मिलती है। ग्रीन टी की ताज़ी पत्तियों को धो कर चबा लें। इस उपाय को दिन में 2 से 3 बार इस्तेमाल कर सकते है।

खीरा

दांत के दर्द के लिए खीरा बहुत ही ही लाभदायक होता है। इसकी तासीर ठंडी होती है और यह मसूड़ों के जख्मो को ठीक करने के बहुत काम आता है। ताजे खीरे के छोटे छोटे टुकड़े कर इसका सेवन करें यह आपको जख्मो को धीरे धीरे ठीक कर देगा। ध्यान रखियें फ्रीज़ में रखे हुए खीरे का इस्तेमाल न करे।

बेकिंग सोडा

सभी जानते है के आजकल बेकिंग सोडा का इस्तेमाल बालों, त्वचा और सेहत के लिए किया जाता है। आपको यह जानकार हैरानी होगी की बेकिंग सोडा को दांत के दर्द को ठीक करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। एक कॉटन को पानी में भीगो कर कॉटन में बेकिंग सोडा लगाए और जिस दांत में दर्द हो लगाए। आप चाहें तो बराबर मात्रा में गर्म पानी और बेकिंग सोडा मिलाये और इस मिक्सचर का माउथ वाश की तरह इस्तेमाल करें।

गर्म पानी और नमक

सभी उपाय में सबसे आसान तरीका है गर्म पानी और नमक का इस्तेमाल। एक ग्लास गर्म पानी में दो छोटी चम्मच नमक मिलाये। अब इस मिश्रण को माउथ वाश की तरह इस्तेमाल करते हुए गरारे करें। यह उपाय दांत को दर्द को खत्म करने का सबसे बेहतरीन और सस्ता उपाय है। इस उपयोग से दांतो की सेंस्टिविटी भी कम होती है। इसके इस्तेमाल से दांतो और मसूड़ों की सूजन में भी आराम मिलता है।

कच्चा प्याज

प्याज में एंटीसेप्टिक और एंटीमाइक्रोबियल गुणों की भरपूर मात्रा पायी जाती है। यह दांत के दर्द को नियंत्रण करने के बहुत काम आता है। कैविटी और कीटाणुओं के कारण होने वाले दांतो के दर्द में प्याज का इस्तेमाल से छुटकारा पाया जा सकता है। दर्द को कम करने के लिए कच्चे प्याज को कुछ देर तक चबाये।

हल्दी

दांत के दर्द को ठीक करने के लिए हल्दी ओर शहद को बराबर मात्रा में मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें। आप इस पेस्ट को दर्द वाले दांत पर लगाए। हल्दी किसी भी प्रकार के बैक्टीरिया को खत्म करके दर्द करने के काम आता है। हल्दी और शहद दोनों ही सेप्टिक को ठीक करते है।

आलू

आलू में बहुत से नुट्रिएंट्स तत्व पाए जाते है। आलू का इस्तेमाल अच्छी सेहत के लिए तो किया ही जाता है और साथ ही आप इसका इस्तेमाल दांत के दर्द को भी खत्म करने के लिए कर सकते है। इसका इस्तेमाल करने के लिए आलू को छोटे छोटे टुकड़ो में काटे और थोड़ा सा नमक लगाकर चबाये। इसके प्रयोग से आपको दांत के दर्द बहुत ही आराम मिलेगा।

इनमे से कोई भी उपाय आप अपनी सुविधा के अनुसार अपना सकते है पर फिर भी अगर आपको आराम ना मिले तो ज्यादा देर ना करे अपने डॉक्टर से जरूर मिले।

प्रेगनेंसी के कौन-कौन से महीने में घर का काम नहीं करें

प्रेगनेंसी में घर का काम

गर्भावस्था के दौरान महिला को छोटी छोटी बातों का अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के नौ महीने महिला के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं ऐसे में गर्भवती महिला और शिशु को हर परेशानी से सुरक्षित रहने के लिए महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना जरुरी होता है। बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान यह सवाल करती है की गर्भवती महिला को घर का काम करना चाहिए या नही? ऐसे में इस सवाल के जवाब के लिए सबसे पहले प्रेग्नेंट महिला की शाररिक स्थिति को समझना जरुरी होता है। क्योंकि यदि प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स हैं, महिला को बहुत ज्यादा शारीरिक परेशानियां हैं, शिशु से सम्बंधित कोई समस्या है, वजन बढ़ने पर, आदि के होने पर डॉक्टर्स आपको घर का काम न करने की सलाह दे सकते हैं। और साथ ही प्रेगनेंसी में कुछ ऐसे महीने भी होते हैं जहां महिला को घर का काम करने से बचना चाहिए।

प्रेगनेंसी में घर का काम कौन से महीने में न करें

गर्भवती महिला को घर का काम काज करने में सावधानी बरतने के साथ प्रेगनेंसी के कुछ ऐसे महीने भी होते हैं जब घर का काम करने से परहेज करना चाहिए। और बॉडी को पूरा आराम देना चाहिए ताकि गर्भधारण में और प्रेगनेंसी के दौरान प्रेग्नेंट महिला को किसी भी तरह की समस्या न हो। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के कौन कौन से महीने में गर्भवती महिला को काम नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी का पहला महीना

गर्भावस्था के पहले महीने में महिला को पता भी नहीं होता है की उसका गर्भ ठहरा है या नहीं, लेकिन यदि आप गर्भधारण की कोशिश कर रही है। तो भी आपको घर का काम करने से बचना चाहिए। क्योंकि हो सकता है आपके अधिक घर का काम करने के कारण निषेचन या प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में किसी तरह की कोई समस्या आ जाए। जिससे महिला को गर्भधारण में परेशानी हो।

प्रेगनेंसी का दूसरा महिला

यदि आपके पीरियड्स मिस हो गए हैं और आपने घर पर चेक किया है और आपका परिणाम पॉजिटिव आया है। तो भी आपको घर का काम काज करने से परहेज करना चाहिए। क्योंकि इस दौरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव बहुत तेजी से होते हैं जिसके कारण महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियां हो सकती है। ऐसे में महिला को बहुत ज्यादा थकान व् कमजोरी का अनुभव हो सकता है। और ऐसे में यदि महिला घर का काम काज करती है तो इससे ब्लीडिंग होने का डर रहता है, इसीलिए प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद गर्भवती महिला को घर का काम काज करने से बचना चाहिए।

गर्भावस्था का तीसरा महीना

प्रेगनेंसी का तीसरा महीना भी बहुत अहम होता है क्योंकि इस दौरान शिशु के अंग बन रहे होते हैं। ऐसे में घर का काम काज अधिक करने या किसी तरह की लापरवाही बरतने के कारण शिशु के अंगो के विकास में कमी आ सकती है साथ ही गर्भपात का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में शिशु के अंगो के बेहतर विकास के लिए और अंगो की सरंचना को बेहतर तरीके से होने के लिए प्रेग्नेंट महिला को घर का काम काज करने से बचना चाहिए।

प्रेगनेंसी सातवां महीना

गर्भवती महिला इस महीने में चाहे तो थोड़ा बहुत घर का काम कर सकती है लेकिन जिस काम करने में झुकना पड़े, पेट में जोर पड़े, ज्यादा अधिक देर तक खड़े रहना पड़े, मेहनत अधिक हो और थकावट महसूस हो, उन काम को करने से गर्भवती महिला को बचना चाहिए। क्योंकि इस दौरान महिला का पेट का आकार बढ़ा हुआ होता है, ऐसे में पेट पर दबाव पड़ने के कारण गर्भवती महिला को दिक्कत होने के साथ गर्भ में शिशु भी असहज महसूस कर सकता है। इसके अलावा इस महीने में यदि महिला पेट पर जोर पड़ने वाले किसी काम को अधिक करती है तो इसके कारण समय पूर्व प्रसव जैसी परेशानी महिला को हो सकती है।

प्रेगनेंसी का आठवां महीना

इस महीने में सातवें महीने से ज्यादा अपनी देखभाल करने की जरुरत होती है क्योंकि इस महीने में यदि घर में कोई काम करते समय दिक्कत हो जाए और समय पूर्व जैसी परेशानी हो तो इसके कारण शिशु को बहुत अधिक ख़तरा हो सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के आठवें महीने में भी घर का काम काज करने से बचना चाहिये।

प्रेगनेंसी में घर का काम करते समय महिला को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

  • सबसे पहले तो गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की यदि डॉक्टर ने प्रेग्नेंट महिला को आराम करने की सलाह दी है तो गर्भवती महिला को घर का काम करने से बचना चाहिए।
  • प्रेगनेंसी में किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स या काम करने में किसी भी तरह की दिक्कत हो तो भी महिला को काम नहीं करना चाहिए।
  • जिस काम को करने में महिला के पेट पर जोर या दबाव महसूस हो तो गर्भवती महिला को उस काम को करने से बचना चाहिए।
  • घर का काम करते समय किसी भी तरह के केमिकल के इस्तेमाल से बचना चाहिए जैसे की झाडू पोछा लगाते समय फ्लोर क्लीनर का इस्तेमाल करना।
  • घर में पालतू जानवर आदि के काम को करने से बचना चाहिए।
  • यदि घर का काम करते समाय थकान महसूस हो तो थोड़ा आराम करना चाहिए।
  • एक ही जगह पर खड़े होकर अधिक देर तक काम करने से बचना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान कौन से महीने में घर का काम नहीं करना चाहिए इससे जुड़े कुछ टिप्स, ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को ऊपर दिए गए टिप्स को प्रेगनेंसी के दौरान जरूर याद रखना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला और गर्भ में शिशु को हर तरह की दिक्कत से बचे रहने में मदद मिल सके। साथ ही आप चाहे तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से भी जरूर राय लेनी चाहिए।

यूरिन की बूंदों से घर पर प्रेगनेंसी चेक कैसे करें?

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पीरियड्स मिस होने के बाद आप प्रेग्नेंट है या नहीं यह जानने के लिए आपको उल्ट्रासाउंड कराने की आवश्यकता नहीं हैं? क्योंकि आप खुद घर पर ही अपने यूरिन की कुछ बूंदों से प्रेग्नेंसी टेस्ट कर सकती हैं। बदलते जमाने के साथ विज्ञान ने भी बहुत तरक्की कर ली हैं। आजकल बहुत से तरीके हैं जिनकी मदद से घर पर ही प्रेगनेंसी टेस्ट किया जा सकता है। लेकिन बहुत ही कम लोग हैं तो इस तरीके के बारे में जानते हैं आज हम आपको इस आर्टिकल में यूरिन की बूंद से घर पर प्रेग्नेंसी टेस्ट कैसे करें? इस बारे में बता रहे हैं।

यूरिन से करें प्रेगनेंसी टेस्ट

यूरिन की बूंद से किये जाने वाले प्रेग्नेंसी टेस्ट से शरीर में मौजूद HCG हॉर्मोन के स्तर का पता लगाया जाता है। क्योंकि महिलाओं में HCG हॉर्मोन की मौजूदगी और गैर-मौजूदगी से ही पता चलता है की वह माँ बनने वाली हैं या नहीं? दरअसल जब कोई महिला गर्भवती होती है तो गर्भधारण के लगभग 10-14 दिन बाद महिला के यूरीन और खून में एचसीजी हार्मोन स्रावित होता है। इस हार्मोन के कारण ही महिला प्रेगनेंसी किट का प्रयोग करके घर पर ही गर्भावस्था का पता लगा सकती हैं।

प्रेग्नेंसी टेस्ट कब करना चाहिए?

संबंध बनाने के बाद स्पर्म को अंडे से मिलकर निषेचन क्रिया करने में 7 से 10 दिन का समय लग जाता है। और गर्भधारण होने के 10-14  दिन बाद महिला के यूरिन में एचसीजी हार्मोन बढ़ने लगता है। इस हिसाब से पीरियड्स मिस होने पर 1 से 2 हफ्ते बाद का समय घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट के लिए सही माना जाता है।

यूरिन से प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे करें?

यूरिन से प्रेग्नेंसी जाँच करने के लिए बाजार से प्रेग्नेंसी टेस्ट किट ले आएं। ये आपको किसी भी मेडिकल स्टोर पर 50 से 60 रूपए की कीमत पर आसानी से मिल जाएगी।

ऐसे तो आप दिन के किसी भी समय यूरिन से प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती हैं लेकिन सही और सटीक परिणाम जानने के लिए सुबह का पहला यूरिन सबसे बेस्ट होता है। इसके लिए आप सुबह के पहले यूरिन को ड्रॉपर की मदद से लें और उसकी कुछ बूंदें किट के खांचे में डालें और 5 मिनट इंतजार करें।

  • अगर किट में 1 गहरी लाल लाइन दिखाई दे तो इसका मतलब है प्रेगनेंसी नहीं है। यानी प्रेगनेंसी टेस्ट नेगेटिव है। नेगेटिव प्रेगनेंसी टेस्ट
  • अगर किट में 2 गहरी लाल लाइन दिखाई दे तो इसका मतलब है गर्भधारण हो गया है यानी प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव हैं। पॉजिटिव प्रेगनेंसी टेस्ट
  • लेकिन अगर किट में एक गहरी और एक हलकी लाल लाइन दिखाई दे तो टेस्ट नेगेटिव ही समझें परंतु ऐसा होने पर आप दूसरे दिन फिर से भी चेक करें। इस तरह से आप बड़ी ही आसानी से अपने यूरिन से घर पर ही प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती हैं। नेगेटिव प्रेग्नेंसी टेस्ट
  • नोट : यहाँ बताया गया तरीका केवल सामान्य प्रेग्नेंसी टेस्ट किट के लिए हैं जिसमे यूरिन की बूंदे ड्रॉपर की मदद से किट में डाली जाती है। डिजिटल या दूसरे तरीकों की प्रेगनेंसी किट के लिए पैकेट पर लिखे दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ें।

क्या यूरिन से किये प्रेग्नेंसी टेस्ट सटीक होते हैं?

अगर आप किट के साथ दिए गए निर्देशों का सही तरीके से पालन करती हैं, तो घर पर की जाने वाली गर्भावस्था जांच सटीक होती है। लेकिन कई बार यूरिन में HCG हॉर्मोन का स्तर नहीं बढ़ने के कारण भी प्रेग्नेंसी टेस्ट नेगेटिव आ जाते है जबकि गर्भधारण हो चुका होता है। ऐसी स्थिति में कुछ दिन बाद फिर से गर्भावस्था जाँच करनी चाहिए।

यूरिन से प्रेगनेंसी टेस्ट करते समय इन बातों का जरूर ध्यान रखें

  • प्रेग्नेंसी टेस्ट करने के लिए सुबह के पहले यूरिन का नमूना ही लें।
  • प्रेग्नेंसी टेस्ट करने से पहले प्रेग्नेंसी टेस्ट किट पर दिए गए सभी निर्देशों को ध्यान से पढ़ लें। क्योंकि कुछ किट में उत्तर (+) और (-) में होता है जबकि डिजिटल किट में यह “प्रेग्नेंट” और “नॉन प्रेग्नेंट” के रूप में लिखा होता है।
  • जाँच से ठीक पहले अधिक मात्रा में पानी, चाय या कॉफ़ी का सेवन नहीं करें। ये टेस्ट के रिजल्ट को प्रभावित कर सकते हैं।
  • प्रेग्नेंसी टेस्ट किट का इस्तेमाल करने से पहले उसकी इस्तेमाल की अंतिम तारीख जरूर चेक कर लें। और किट का पैकट खोलने के 10 घंटों के भीतर उसका इस्तेमाल कर लें।

विडिओ घर पर प्रेग्नेंसी चेक कैसे करें?

योग से क्या लाभ होते है? क्या हमे भी योग करनी चाहिए

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योग आपको न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी फिट रखने की एक कला है, इसे आंशिक रूप से समझा जा सकता है, परन्तु इसे शारीरिक रूप से करने पर भी आप इसका फायदा उठा सकते है, हर व्यक्ति चाहता है, की वो स्वस्थ रहें, बीमारियों से दूर रहें, उसके मन को शांति मिलें, मानसिक रूप से आराम मिलें, सूंदर दमकती हुई त्वचा मिलें, और इन सबको आप केवल एक चीज को अपनी दिनचर्या में शामिल करके प् सकते है, और वो है योग जो आपको हर तरह से केवल फायदा ही फायदा पहुंचाता है।

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योग के सम्पूर्ण फ़ायदे क्या है

 

गलत दिनचर्या और जीवनशैली, आपकी जिंदगी में किसी भी चीज का व्यवस्थित न होना, आपको केवल नुकसान ही पहुंचाता है, लेकिन आप यदि योग करते है तो धीरे धीरे सब कुछ व्यवस्थित होने लग जाता है, और आपको इसके लाभ मिलने शुरू हो जाते है, आप नकारत्मकता से दूर जाते है, और सकारात्मकता आपके करीब आती है, आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, कांतिमय शरीर और दमकती ह्युई त्वचा मिलती है, हमेशा रिलैक्स महसूस करते है, परन्तु ऐसा तभी होता है जब आप इसे करते है, इसे करने के लिए आप सुबह समय से उठे और प्रकृति के करीब जाएँ, और नियमित केवल आधा घंटा इसे दें, धीरे धीरे आपको अपनी जिंदगी में खुद ही परिवर्तन दिखाई देने लगेगा, और साथ ही आप इसके फायदों को भी जान्ने लगेंगे, तो आइये अब हम आपको बताते है की योग करने से आपको कौन कौन से फायदे होते है।

योग करने के फायदे:-

आपके वजन को सही रखते है:-

ज्यादा वजन न केवल व्यक्ति की लुक को खराब करता है, बल्कि शारीरिक रूप से भी उन्हें बीमारियों के पास लेकर जाता है, और योग आपकी इस समस्या का समाधान करता है, इसके लिए आप सूर्य नमस्कार और कपालभाति प्राणायाम योग आपके वजन को नियंत्रित करने मे आपकी मदद करते है, इसके अतिरिक्त नियमित रूप से योगाभ्यास करने से आपके खाने का भी एक समय निश्चित होता है, आपको भूख लगती है, जिससे आपकी दिनचर्या में सुधार आता है, और आपको अपने वजन पर नियंत्रण रखने में सहायता मिलती है।

आपके सम्पूर्ण स्वास्थ्य को सही रखता है:-

स्वस्थ होने का केवल ये मतलब नहीं होता है की आपको कोई बिमारी नहीं है, बल्कि आप सम्पूर्ण रूप से स्वस्थ तब होते है, जब आप ऊर्जा से भरपूर होते है, तनाव से दूर होते है, खुश रहते है, तब आप पूरी तरह स्वस्थ होते है, और योग करने से आपको मानसिक रूप से शारीरिक रूप से राहत मिलती है, साथ ही आपकी बॉडी को फिट रहने में मदद मिलती है, और शरीर में होने वाली कोशिकाओं की मरम्मत करने में भी योग आपकी मदद करता है, इसीलिए आपको इसे जरूर करना चाहिए।

चिंता से राहत दिलाने में मदद करता है:-

आज कल मानसिक रूप से हर व्यक्ति किसी न किसी बात को लेकर परेशान रहता है, परन्तु आपका कुछ मिनट का योग आपको सभी चिंता से निजात दिलाने में आपकी मदद करता है, क्योंकि योग करने से आपकी नेगिटिविटी दूर जाती है, जिसके कारण आपको हर समस्या का समाधान करके उसे सुलझाने में मदद मिलती है, इसीलिए आपको इसका सहारा जरूर लेना चाहिए, ताकि आपको मानसिक रूप से राहत पाने में मदद मिल सकें।

इन्हे भी पढ़ें:- योग क्या होता है? और योग के क्या-क्या फ़ायदे होते है?

प्रतिरोधक क्षमता में सुधार आता है:-

व्यक्ति का शरीर संयुक्त रूप से शरीर, मन और आत्मा से बना हुआ है, और शरीर में कोई भी अनियमितता मन को प्रभावित करती है, जिससे मन में निराशा और थकान शरीर में रोग का कारण बनता है, योगासन आपके अंगो को सामान्य स्तिथि में स्थिति में रखता है, और प्राणायाम आपके मन को शांत करता है, तो वहीँ ध्यान तनाव को दूर करते है, जिससे आप बीमारियों के आस पास भी नहीं जाते है, और आपकी प्रतिरोधक क्षमता में सुधार आने में मदद मिलता है।

मन को शांत करने में मदद मिलती है:-

हर व्यक्ति अपने मन को शांत करने के लिए घूमना पसंद करता है, प्रकृति से रिश्ता जोड़ना पसंद करता है, परन्तु जब आप ये देखेंगे की वो शांति आपके मन में है, तो आप किसी भी समय अपने आप को मानसिक रूप से राहत दिलवा सकते है, और आपको ये फायदा भी योग करने से मिलता है, यदि आप नियमित योग करते है तो इसके कारण आपको मन से शांति मिलती है, जिसके कारण आपको राहत का अहसास होता है।

आपके सम्बन्धो में सुधार आते है:-

अब आप ये सोच रहे होंगे की योग करने से सम्बन्धो में सुधार कैसे आ सकता है, योग और ध्यान करने से आपके मन को एकाग्र और शांत रहने के साथ खुश रहने में भी मदद मिलती है, जिसके कारण आप सभी से प्यार से और खुश होकर मिलते है, ऐसा करने से आपके साथी और सम्बन्धियों को पॉजिटिव एनर्जी मिलती है, जिसके कारण वो आपके करीब आते है, और आपको अपने सम्बन्धो को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

आपका अंतर्ज्ञान बेहतर होता है:-

योग करने से आपका मन एकाग्र रहता है, जिसके कारण आपका अंतर्ज्ञान बेहतर होता है, और आपको हर एक काम को करने से पहले पता चल जाता है की कोई काम कब कैसे और किस तरह से करना है, ऐसा करने से आप हर एक काम को बेहतर तरीके से कर पाते है, और आपको उसके सकारात्मक परिणाम भी मिलते है, और आप नियमित इसका जितना अभ्यास करते है, उतना ही आपको इससे लाभ मिलता है, इसीलिए इसके और आधी सकारात्मक परिणाम के लिए आपको योग को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करना चाहिए।

आपके अंदर ऊर्जा को बढ़ाता है:-

दिन भर काम और किसी न किसी चीज की परेशानी आपको बहुत जल्दी थकान का अहसास करवाती है, परन्तु कुछ दी मिनट का योग करने से आपको पूरा दिन ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद करता है, साथ ही आप सारा दिन तरोताजा भी महसूस करते है, इसीलिए चाहे महिला हो या पुरुष या बुजुर्ग हमेशा ऊर्जा से भरपूर रहने के लिए आपको योग जरूर करना चाहिए।

जीने के तरीके में बदलाव आता है:-

योगा करने से आपके मन के विचारों में परिवर्तन आता है, क्योंकि आपका मन हमेशा बीते हुए कल और आज के बीच में झूलता रहता है, और योग करने के कारण आप भूतकाल को छोड़ वर्तमान में जीने लगते है, और आपका ध्यान अपने लक्ष्य पर केंद्रित होता है, और साथ ही आप हमेशा खुश और तनाव रहित महसूस करते है, और आपको इसके कारण जिंदगी में हमेशा आगे बढ़ने में मदद मिलती है।

क्या आपको योग करना चाहिए:-

यदि आप जाना चाहते है की आपको योग करना चाहिए तो आप इसके फायदे पढ़कर ये जान सकते है की आपको इनसे कौन कौन से फायदे मिल रहें है, आज कल के इस भीड़भाड़ वाले समय में भी योग करने से आपने अपने मन को शांत रख सकते है, बीमारियों से बचें रह सकते है, तनाव से राहत पा सकते है, शारीरिक रूप से फिट रहने के साथ बीमारियों से बच सकते है, और साथ ही अपनी सुंदरता को भी बढ़ा सकते है, तो आपको योग जरूर करना चाहिए, और आप इसके लिए बाहर न जाना चाहे तो अपने घर की छत पर ही नियमित सुबह उठकर आधा घंटा योग कर सकते है।

तो ये कुछ फायदे है जो आपको योग करने से होते है, और इसीलिए आपको अपनी जीवनशैली को सही करने और अपने आप को नियमित करने के लिए योग जरूर करना चाहिए, ऐसा करने से आपको हमेशा खुश रहने में भी मदद मिलेगी और इसका असर आपको खुद ही दिखाई देगा, और आपके अंदर आने वाले बदलाव को भी आप खुद महसूस करेंगे, और आपको इसके लिए दूसरों को भी प्रेरित करना चाहिए, और अब तो यह दिन विश्व भर में उत्सव की तरह मनाया जाता है, यह दिन हर साल 21 जून को मनाया जाता है।

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दूसरा बेबी प्लान करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें

दूसरा बेबी प्लान करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें, माँ बनना हर महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन लम्हा होता है। लेकिन जब बात दूसरी बार माँ बनने की हो तो महिला को यह फैसला थोड़ा सोच समझ कर लेना चाहिए। क्योंकि हो सकता है की कई बार जल्दबाज़ी में, दबाव में, गलती से महिला दुबारा प्रेग्नेंट हो जाती है। लेकिन बाद में आपको उसके कारण परेशानी हो सकती है। ऐसे में एक बार माँ बनने के बाद दूसरी प्रेगनेंसी को लेकर महिला को बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए। तो आइये आज इस आर्टिकल में कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं। जिनका ध्यान महिला को दूसरी प्रेगनेंसी से पहले जरूर रखना चाहिए।

शादी के बाद कितना समय हुआ है

  • बहुत से ऐसे कपल होते हैं जो शादी के तुरंत बाद ही बच्चा प्लान कर लेते हैं।
  • और यह अच्छी बात भी होती है लेकिन उसके बाद दूसरे बच्चे की प्लानिंग में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए।
  • क्योंकि शादी के पहले तीन साल में ही यदि आप दो बच्चे कर लेती है तो इसके बाद आपको और आपके पार्टनर को साथ में समय नहीं मिल पाता है।
  • साथ ही दोनों बच्चों के साथ आपको समस्या आने लगती है।
  • और दोनों बच्चों की परवरिश को लेकर आप न तो अपना ख्याल रख पाती है और न ही उन बच्चों का, ऐसे में दूसरे बच्चे के लिए कम से कम चार से पांच साल का गैप जरूर रखना चाहिए।
  • ताकि आपको अपने पार्टनर के साथ थोड़ा समय मिल सके साथ ही आपके बच्चे की देखभाल भी अच्छे से हो सके।

दूसरा बेबी प्लान करने से पहले अपने शरीर पर ध्यान दें

  • दूसरे बच्चे के जन्म से पहले महिला को अपने शरीर पर भी ध्यान देना चाहिए।
  • की क्या महिला शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट है या नहीं।
  • क्योंकि यदि महिला शारीरिक रूप से तैयार नहीं होती है।
  • तो इसके कारण दूसरी प्रेगनेंसी में महिला को दिक़्कतें आ सकती है।

सिजेरियन डिलीवरी तो नहीं हुई है

  • नोर्मल डिलीवरी के बाद महिला थोड़ी जल्दी फिट हो जाती है लेकिन यदि महिला की सिजेरियन डिलीवरी हुई है।
  • तो महिला को अपने आप को नोर्मल डिलीवरी से थोड़ा ज्यादा समय देना चाहिए।
  • ताकि सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को अच्छे से स्वस्थ होने में मदद मिल सके।

पहले बच्चे की उम्र का ध्यान रखें

  • दूसरे बच्चे को इस दुनिया में लाने से पहले अपने पहले बच्चे की उम्र का ध्यान रखें।
  • जैसे की यदि आपका पहला बच्चा अभी एक साल का हुआ है और आप दूसरा बेबी प्लान कर रही हैं।
  • तो इस चक्कर में हो सकता है आपके पहले बच्चे की केयर अच्छे से न हो सके और आपको भी प्रेगनेंसी और छोटे बच्चे दोनों को हैंडल करने में दिक्कत हो।
  • इसीलिए जब भी आप दूसरे बच्चे लिए सोचें तो ध्यान रखें की आपके पहले बच्चे की उम्र तीन या पांच साल हो।

आपका पहला बच्चा स्पेशल चाइल्ड तो नहीं है

  • कई बार ऐसा होता है की आपका पहला बच्चा स्पेशल चाइल्ड होता है।
  • ऐसे में दूसरे बच्चे के लिए सोचने से पहले आपको एक बात का ध्यान रखना चाहिए की अभी आपके पहले बच्चे को आपकी जरुरत है।
  • और यदि आप दूसरा बच्चा करने जा रही हैं तो इस फैसले को करने से पहले आपको बहुत ज्यादा सोच विचार करने की जरुरत होती है।

दूसरा बेबी प्लान करने से पहले ध्यान रखें की परिवार वालों के दबाव में न आएं

  • एक बच्चा होने के बाद कई बार परिवार वाले आप पर दबाव डाल सकते हैं की एक और बच्चा कर लो फिर आराम हो जायेगा।
  • लेकिन इस बात का ध्यान रखें की यह फैसला आपका होना चाहिए।
  • परिवार वालों के दबाव में आकर दूसरा बच्चा प्लान न करें।
  • अच्छे से सभी बातों का ध्यान करें उसके बाद ही फैसला लें।

आर्थिक स्थिति को भी देखें

  • एक बच्चे के होने के बाद उसकी जरूरतों का खर्चा पूरा करना ही बहुत मुश्किल हो सकता है।
  • ऐसे में दूसरे बच्चे का फैसला लेने से पहले आपको इस बात का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है।
  • की क्या आप दूसरे बच्चे के लिए आर्थिक रूप से तैयार हैं या नहीं।
  • और केवल एक दिन का ही नहीं बल्कि आगे भविष्य तक के बारे में सोचकर यह फैसला लें।

टाइम मैनेजमेंट

  • यदि आप नौकरी करती हैं और आपका एक बेबी है।
  • तो दूसरे बेबी को करने से पहले अपने टाइम को मैनेज करके देखें।
  • की क्या आप जॉब के साथ अपने घर, अपने दोनों बच्चों को संभाल सकती हैं या नहीं।
  • साथ ही आपको जॉब से इतनी लम्बी छुट्टी मिलेगी या नहीं।
  • यदि आप इन सभी चीजों को लेकर अपना टाइम मैनेज तभी आपको दूसरा बच्चा प्लान करना चाहिए।

दूसरा बेबी प्लान करने से पहले अपनी लाइफ को भी देखें

  • एक बार माँ बनने के बाद आपको अपनी लाइफ में बदलाव देखने को मिले होंगे।
  • ऐसे में बच्चे के थोड़ा बड़े होने के बाद आपको अपनी लाइफ को थोड़ा एन्जॉय करने का मन करता है।
  • लेकिन ऐसे में यदि आप दूसरे बच्चे को प्लान करने के बारे सोच रहीं हैं।
  • तो इस बात का ध्यान रखें की क्या आप अपनी लाइफ को उसी तरह एडजस्ट करने के लिए तैयार हैं या नहीं।

पार्टनर का सपोर्ट भी है जरुरी

  • यदि आप दूसरा बच्चा प्लान कर रही हैं तो इस बात का ध्यान रखें की क्या आपका पार्टनर भी दूसरे बच्चे के लिए पूरी तरह से तैयार है।
  • यदि हाँ, तो ही दूसरा बच्चा प्लान करें, क्योंकि इस दौरान आपको सबसे ज्यादा उसी के सपोर्ट की जरूरत पड़ेगी।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका ध्यान महिला को दूसरी प्रेगनेंसी से पहले जरूर रखना चाहिए। ताकि महिला व् उनके पार्टनर को बाद में इसके कारण कोई परेशानी न हो। और पहले बच्चे की केयर अच्छे से हो सके और आप उसे अपना पूरा टाइम दें।