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प्रेग्नेंट हैं तो इन 8 काम से दूरी बना लें

गर्भावस्था के पूरे नौ महीने महिला को अपनी सेहत व् स्वास्थ्य का बहुत अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। क्योंकि महिला द्वारा बरती गई थोड़ी सी लापरवाही प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स को बढ़ा सकती है। जिसके कारण माँ व् बच्चे दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कुछ ऐसे काम है जिन्हे प्रेग्नेंट महिला को बिल्कुल नहीं करना चाहिए। क्योंकि उन्हें करने से प्रेग्नेंट महिला की सेहत व् बच्चे के विकास से जुडी समस्या होने का खतरा बढ़ता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की ऐसे कौन से काम है जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को नहीं करने चाहिए।

गर्म पानी से नहाना

यदि आप माँ बनने वाली हैं और गर्म पानी से नहा रहा है, तो थोड़ा ठहर जाइये, क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान गर्म पानी से नहीं नहाना चाहिए। हम ऐसा इसीलिए कह रहे हैं क्योंकि गर्म पानी से नहाने से बॉडी का तापमान बढ़ जाता है और ब्लड प्रैशर गिर जाता है। और यदि ऐसा हो जाता है तो इसके कारण बच्चे तक ऑक्सीजन व् अन्य पोषक तत्व नहीं पहुँच पाते हैं। जिससे बच्चे को दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा महिला को टंकी के गर्म पानी से नहाने से भी बचना चाहिए।

पेट के पल, ज्यादा देर खड़े रहकर काम करना

ऐसा कोई भी काम जिससे पेट पर दबाव पड़े जैसे की झुककर काम करना, पैरों के बल बैठकर काम करना, पोछा लगाना, किचन में पेट के बल खड़े रहकर काम करना आदि महिला को नहीं करने चाहिए। इन कामों को करने के लिए आप घर के किसी अन्य सदस्य से कहें, साथ ही प्रेग्नेंट महिला को उस काम को भी नहीं करना चाहिए जिसमे ज्यादा देर एक ही जगह पर खड़े रहना पड़े। यदि आप किचन में खड़े होकर काम कर रही हैं तो वहां एक कुर्सी रखें और बीच बीच में उस पर बैठती रहें। क्योंकि इन सभी कामों को करने से प्रेग्नेंट महिला की मुश्किलें बढ़ सकती है।

भारी सामान उठाना

भारी सामान चाहे उठाना हो चाहे सरकाना हो प्रेग्नेंट महिला को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसे कामों को करने से पेट पर जोर पड़ता है जिसके कारण महिला और बच्चे को दिक्कत हो सकती है।

वाशरूम साफ़ करना

गर्भवती महिला को वाशरूम साफ़ नहीं करना चाहिए। क्योंकि वाशरूम को साफ़ करने के लिए केमिकल का इस्तेमाल होता है, महिला को झुककर व् पैरों के बल बैठकर काम करना पड़ता है, महिला को बहुत ज्यादा थकावट हो सकती है, आदि। और इन सभी के कारण महिला को इन्फेक्शन, कमजोरी, जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में महिला को वाशरूम अपनी कामवाली या घर के किसी अन्य सदस्य से साफ़ करवाना चाहिए।

पीठ के बल सोना

पहले तीन महीनों में तो नहीं लेकिन जैसे जैसे महिला का पेट बाहर की तरफ निकलने लगता है वैसे ही महिला को पीठ के बल गलती से भी नहीं सोना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से बॉडी का सारा वजन रीढ़ की हड्डी पर आ जाता है जिसकी वजह से कमर दर्द की समस्या महिला को ज्यादा होती है। इसके साथ पीठ के बल सोने से पैरों तक बॉडी का प्रभाव अच्छे से नहीं हो पाता है जिसकी वजह से पैरों में सूजन, उठते समय चक्कर, पैरों में दर्द आदि की समस्या महिला को हो सकती है।

स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए। क्योंकि इन्हे बनाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है और जब आप इन्हे अपनी स्किन के लिए इस्तेमाल करते हैं। तो यह केमिकल आपकी स्किन द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है। और फिर बॉडी में पहुंचकर इन्फेक्शन व् बच्चे के विकास से जुडी समस्या खड़ी कर सकता है।

भीड़भाड़ में जाना

भीड़भाड़ में भी प्रेग्नेंट महिला को नहीं जाना चाहिए क्योंकि भीड़भाड़ में जाने से गर्भवती महिला संक्रमित लोग के संपर्क में आ सकती है जिससे माँ व् बच्चे को संक्रमण का खतरा रहता है, ज्यादा शोरगुल में जाने से शिशु की सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है, ऐसे में जितना हो सके प्रेग्नेंट महिला को भीड़ भाड़ में जाने से बचना चाहिए।

घर में पालतू जानवर का काम करना

गर्भवती महिला को घर के पालतू जानवर का काम करने से भी बचना चाहिए और उसके आस पास भी नहीं जाना चाहिए। क्योंकि पालतू जानवर का काम करने से और उसके संपर्क में आने से प्रेग्नेंट महिला को संक्रमण होने का खतरा रहता है।

तो यह हैं कुछ काम जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करने चाहिए, यदि गर्भवती महिला इन टिप्स का ध्यान रखती है तो इससे माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। साथ ही प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स भी नहीं बढ़ती है।

डिलीवरी के बाद पीरियड कब आता है

शिशु के जन्म के बाद महिला के शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं, ऐसे में महिला अपनी बॉडी शेप, शिशु की केयर आदि को लेकर परेशान हो सकती है। इसके अलावा पीरियड्स को लेकर भी महिला के मन में तरह तरह के प्रश्न आते हैं। क्योंकि प्रसव के बाद महिला को दो से तीन हफ्ते तक ब्लीडिंग होती है। ऐसे में उसके बाद मासिक धर्म कब आएगा, समय से पहले आएगा, समय के बाद आएगा, क्या पीरियड्स न आने का मतलब महिला का प्रेग्नेंट होना तो नहीं है, इस बारे में महिला सोचती रहती है। तो लीजिये आज हम आपको डिलीवरी के बाद पीरियड्स से जुड़े कुछ सवालों के जवाब देने जा रहे हैं।

डिलीवरी के बाद कब आता है पीरियड

डिलीवरी के बाद महिला को पीरियड आना और शिशु को स्तनपान करवाना दोनों में सम्बन्ध होता है। क्योंकि महिला शिशु को स्तनपान करवा रही है, कम करवा रही है या ज्यादा करवा रही है, या नहीं करवा रही है, इससे ही पीरियड्स का पता चलता है। क्योंकि यदि महिला शिशु को स्तनपान नहीं करवाती है या बहुत कम करवाती है तो डिलीवरी के बाद जब ब्लीडिंग खत्म होती है उससे चार या छह हफ्तों के बीच ही महिला को पीरियड्स आ सकते हैं।

लेकिन यदि महिला शिशु को बेहतर तरीके से स्तनपान करवाती है तो पीरियड्स को आने में छह महीने तक का समय लग सकता हैं, या हो सकता है इससे पहले भी आ जाए। ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि प्रोलैक्टिन हॉर्मोन जो की दुग्ध उत्पादन के लिए जिम्मेवार होता है वो ओवुलेशन को रोक देता है। ऐसे में आप यह कह सकते हैं की जो महिलाएं शिशु को स्तनपान करवाती है उन्हें डिलीवरी के बाद पीरियड आने में समय लगता है।

प्रसव के बाद पीरियड्स में बदलाव आता है या नहीं

यह हर महिला के बॉडी में होने वाले बदलाव पर निर्भर करता है क्योंकि हो सकता है की आपके पीरियड में बदलाव आये यानी की रक्तस्त्राव ज्यादा या कम हो या फिर पीरियड्स दो तीन दिन आगे पीछे हो जाये, दर्द व् ऐंठन कम या अधिक हो आदि। और ऐसा भी हो सकता है की आपको पहले जैसे आये और किसी भी तरह का परिवर्तन न हो। प्रसव के बाद गर्भाशय के आकार में भी बदलाव आता है इसके कारण हो सकता है आपको थोड़ा बदलाव लगे, उसके बाद जैसे जैसे गर्भाशय अपने सही आकार में आता है वैसे वैसे पीरियड्स भी नियमित होने लगते है।

क्या प्रसव के बाद पीरियड आने से पहले महिला गर्भवती हो सकती है

जी हाँ, ऐसा बिल्कुल हो सकता है यदि आप प्रसव के बाद ब्लीडिंग के खत्म होने पर सम्बन्ध बनाते हैं तो इस दौरान भी आप गर्भवती हो सकती है। क्योंकि उस दौरान भी ओवुलेशन पीरियड होता है और प्रजनन क्षमता भी अधिक होती है, ऐसे में महिला को थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। लेकिन साथ ही गर्भनिरोधक गोलियों आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से शिशु के दूध उत्पादन में कमी आ सकती है। क्योंकि गर्भनिरोधक गोलियों में एस्ट्रोजन का स्तर अधिक होता है।

तो यह हैं डिलीवरी के बाद पीरियड्स से जुडी बातें, ऐसे में यदि आपको पीरियड्स न आए, पीरियड्स बहुत ज्यादा आए, दर्द का अनुभव या या कोई भी असहज लक्षण महसूस हो तो एक बार डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए।

डिलीवरी के बाद स्तनों में दूध आने में कितना समय लगता है

डिलीवरी के बाद स्तनों में दूध उतरने में कितना समय लगता है, पहली बार माँ बन रही महिलाओं के मन में शिशु के जन्म के बाद दूध कब बनेगा इसे लेकर सवाल आ सकता है। और इस सवाल का जवाब देने के लिए ही आज हम इस आर्टिकल में आपसे चर्चा करने जा रहे हैं। गर्भधारण के बाद जैसे ही शरीर में हार्मोनल बदलाव शुरू होते हैं। वैसे ही ब्रेस्ट में भी दुग्ध उत्पादन ग्रंथिया अपना काम करना शुरू कर देती हैं। यानी की शिशु के जन्म से पहले ही दूध बनने की प्रक्रिया स्तनों में शुरू हो जाती हैं। तो आइये अब स्तन में दूध बनने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानते हैं।

स्तन में दूध कैसे बनता है

महिला के गर्भधारण के बाद से ही ब्रेस्ट में दूध बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। और ब्रेस्ट में दूध का उत्पादन बढ़ाने का काम प्रोलैक्टिन हॉर्मोन करता है। जिसका स्तर पूरी प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ता जाता है। ताकि शिशु के जन्म के बाद शिशु के बेहतर विकास के लिए शिशु को माँ के दूध से पर्याप्त पोषण मिल सके।

डिलीवरी के बाद स्तनों में दूध कब आना शुरू होता है

शिशु के जन्म के तुरंत बाद ही माँ का दूध शिशु को पिलाया जाता है। यह दूध गाढ़ा पीला हो सकता है इसे कोलेस्ट्रम कहा जाता है। और माँ का यह गाढ़ा पीला दूध शिशु के लिए बहुत फायदेमंद होता है। उसके बाद जैसे जैसे शिशु स्तनपान करने लगता है। अच्छे से स्तन को मुँह में लेकर निप्पल को चूसने की कोशिश करता है।

वैसे वैसे दूध का उत्पादन बढ़ने के साथ शिशु को पर्याप्त मात्रा में पोषण भी मिलने लगता है। शुरुआत में शिशु के दूध पीने पर महिला को ब्रेस्ट में दर्द महसूस हो सकता है लेकिन धीरे धीरे यह ठीक हो जाता है। और डिलीवरी के बाद ब्रेस्ट में दूध सही आने में दो से चार दिन का समय लग सकता है। लेकिन शिशु के जन्म के तुरंत बाद ही स्तन में दूध आने लगता है।

क्या प्रेगनेंसी से पहले भी स्तन में दूध आ सकता है?

जी हाँ, प्रेगनेंसी के दौरान कई बार महिला को स्तन में गाढ़ा पीला द्रव रिसता हुआ महसूस हो सकता है। और इसे लेकर महिला को घबराना नहीं चाहिए। क्योंकि यह कोलेस्ट्रम हो सकता है। और शिशु के जन्म के बाद शिशु यदि कोलेस्ट्रम को पीता है तो यह शिशु के विकास के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

डिलीवरी के बाद स्तनों में दूध देरी से आने या न आने के कारण

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला का अधिक तनाव में रहना।
  • यदि किसी कारण समय से पहले सिजेरियन डिलीवरी करवानी पड़ती है तो इसके कारण स्तन में दूध उतरने में दो से चार दिन का समय लग सकता है।
  • यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान या वैसे भी शुगर से जुडी समस्या का सामना कर रही होती है तो भी महिला के स्तन में दूध आने में देरी हो सकती है।

तो यह है शिशु के जन्म के बाद स्तन में दूध कब उतरता है उससे जुडी कुछ बातें। इसके अलावा यदि आप डिलीवरी के बाद कम दूध उतने की वजह से परेशान है तो आपको मेथी दाना, लहसुन, जीरा, सौंफ, डेयरी प्रोडक्ट्स आदि को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। ताकि स्तन में दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिल सके।

अगर एक महीने में दो बार पीरियड्स हो तो इसका क्या मतलब होता है

पीरियड्स महिलाओ को हर महीने में होने वाली एक आम समस्या है, लेकिन कुछ महिलाएं पीरियड्स में होने वाली समस्या के कारण परेशान रहती हैं, जैसे की कुछ महिलाओ को इस समय पर पेट कमर में बहुत अधिक दर्द होता है, अनियमित माहवारी के कारण, बहुत अधिक ब्लीडिंग की समस्या होने पर, मासिक चक्र में होने वाली गड़बड़ी के कारण, या कुछ महिलाएं ऐसी भी होती है जिन्हे एक महीने में दो बार पीरियड्स की समस्या हो जाती है, इन समस्या के होने के बहुत से कारण होते है, लेकिन जिन महिलाओ को एक महीने में दो बार पीरियड्स की समस्या होती है, उनके शरीर में कमजोरी होने के साथ संक्रमण का खतरा भी उतना ही रहता है, और यदि वो पीरियड्स खत्म होने के बाद शारीरिक सम्बन्ध बनाते हैं तो इससे उनके प्रेग्नेंट होने की संभावना भी ज्यादा रहती है, तो आइये जानते है की महिलाओ को एक महीने में दो बार पीरियड्स होने के क्या कारण होते है।

इन्हें भी पढ़ें:- पीरियड्स में साफ़ सफाई का ध्यान ऐसे रखें! और इन्फेक्शन से बचें

हार्मोनल बदलाव होने के कारण:-

शरीर में हमेशा हार्मोनल बदलाव चलते रहते हैं, लेकिन पीरियड्स के समय यह बदलाव काफी तेजी से होते है और कई बार इनमे असंतुलन होने के कारण आपको पीरियड्स से जुडी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

बार बार गर्भपात होने के कारण:-

बार बार गर्भपात होने के कारण आपका मासिक चक्र बहुत तेजी से प्रभावित होता है, और यदि आपको गर्भपात हुआ है तो इसके बाद पीरियड्स से जुडी परेशानी होना आम बात होती है, लेकिन धीरे धीरे यह रेगुलर हो जाते है।

मेनोपॉज़:-

यह भी एक अवस्था होती है जो की महिलाओ में एक उम्र के बाद आती है, और इस दौरान भी बॉडी में तेजी से हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसके कारण आपको कभी तो पीरियड रूककर आता है, तो कभी एक महीने में दो बार भी हो जाता है।

पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के कारण:-

पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यह भी शरीर में होने वाली एक अवस्था है जिससे आपके गर्भाशय में होने वाले बदलाव के कारण आपको एक महीने में दो बार पीरियड्स होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

इन्हें भी पढ़ें:- पीरियड्स के आलावा वजाइनल से ब्लीडिंग के कारण व् उपाय

प्राइवेट पार्ट में संक्रमण होने के कारण:-

कई बार महिलाओ को प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन की समस्या हो जाती है, जिसके कारण बैक्टेरिया के बुरे असर के कारण भी आपका मासिक चक्र प्रभावित होता है और आपको एक महीने में दो बार पीरियड्स होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

वजन का अचानक से अधिक बढ़ना या कम होना:-

आपका वजन का अचानक से बढ़ना या कम होना भी आपके मासिक चक्र को प्रभावित कर सकता है, यदि आपका वजन कभी अचानक से बढ़ जाता है या कम हो जाता है तो भी आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

बर्थ कण्ट्रोल पिल्स का अधिक सेवन करना:-

प्रेगनेंसी से बचने के लिए जो महिलाएं बर्थ कण्ट्रोल पिल्स का सेवन अधिक मात्रा में करती हैं उन्हें भी इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि इससे आपके शरीर में हार्मोनल असंतुलन होता है जिसके कारण आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

तनाव के कारण:-

तनाव होने के कारण मानसिक रूप से साथ महिला शारीरिक रूप से भी प्रभावित होती है, और इसके कारण हॉर्मोन्स पर भी असर पड़ता है, जिसके कारण आपको कई बार मासिक धर्म से जुडी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

नशे की लत के कारण:-

शराब और धूम्रपान का सेवन अधिक मात्रा में करने पर भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि ये भी आपके शरीर पर बुरा असर डालती हैं, जिनके कारण महिलाओ को पीरियड्स से जुडी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।

डॉक्टर से संपर्क कब करें:-

पीरियड्स समय पर आना जहां स्वस्थ महिला की निशानी हैं, वहीँ यदि आपके पीरियड्स अनियमित हो, महीने में एक से अधिक बार आएं, तो आपको इस समस्या के समाधान के लिए डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए, तो आइये अब हम आपको बताते हैं की आपको पीरियड्स से जुडी कौन सी परेशानी होने पर डॉक्टर से मिलना चाहिए।

  • यदि आपको मासिक धर्म महीने में एक से अधिक बार मासिक धर्म आता है तो आपको डॉक्टर से जरूर चेक करवाना चाहिए।
  • यदि आपको पीरियड्स सात या आठ दिन के लिए रहता है।
  • आपको बहुत अधिक ब्लीडिंग हो तो आपको दिन में चार से पांच पैड बदलने पड़े, तो भी आपको परेशानी हो सकती है।
  • और इन परेशानियों से निजात पाने के लिए आपको खुद दवाई नहीं लेनी चाहिए बल्कि जितना हो सकें आपको इस बारे में डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

तो ये हैं कुछ कारण जिनकी वजह से आपको एक महीने में दो बार पीरियड्स होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, तो महिलाओ को पीरियड्स से जुडी समस्या को लेकर शर्माना नहीं चाहिए बल्कि इस बारे में डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें:- अगर पीरियड्स समय पर न आएं और आगे पीछे आएं तो ये करें

हिप्स को पतला करने के उपाय

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हर किसी को सुंदर और सुडौल दिखना अच्छा लगता है। अक्सर हम सभी की बढ़ती उम्र के साथ वजन भी बढ़ने लगता है। बढ़ते वजन का असर हमारी कमर और हिप्स पर होता है। ऐसे में अतिरिक्त फैट के कारण हैवी हिप्स से हमारा शरीर बहुत खराब दिखने लगता है।

हैवी हिप्स के कारण ना सिर्फ बॉडी की शेप खराब होती बल्कि उठने और बैठने में भी परेशानी आने लगती है। जरुरी है के समय रहते हम अपने हिप्स के फैट को कम करें।

कैसे करें हिप्स को पतला ?

आइये जानते है हिप्स के फैट को खत्म करने के लिए उपाय।

ज्यादा पानी :

  • अपने हिप्स को पतला करने के लिए 1 से 2 लीटर ज्यादा पानी पिए।
  • पानी हमारे शरीर की कैलोरी बर्न करता है।
  • एक रिसर्च में यह प्रमाणित हुआ है के रोजाना 2 लीटर अतिरिक्त पानी पिने से 2 से 4 किलों वजन कम होता है।

व्यायाम :

  • हिप्स को पतला करने के लिए स्क्वाट्स एक्सरसाइज बहुत जरुरी है।
  • स्क्वाट्स में दोनों पैरों के बिच गैप बनाकर, दोनों हाथो का क्रॉस बनाते हुए कंधो पर रखें।
  • घटने मोड़ते हुए कुर्सी की पोजीशन बनाये। तीन सेकंड तक यह पोजीशन होल्ड करें।
  • इसी तरह स्क्वाट्स को 15 से 20 बार करें एक बार में करें।
  • हिप्स कम करने के लिए अप – डाउन की एक्सरसाइज बहुत फायदेमंद होती है।

सीढ़िया :

  • सीढ़िया चढ़ना-उतरना भी एक व्यायाम होता है।
  • कभी भी लिफ्ट का प्रयोग न करें।
  • सीढ़िया चढ़ने से भी हिप्स का फैट कम होता है।

निम्बू और शहद :

  • वर्कआउट के अलावा सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में निम्बू और शहद मिलाकर पिए।
  • ऐसा करने से आपके शरीर का फैट खत्म होगा और हिप्स पतले होंगे।
  • निम्बू और शहद को आप खाने के बाद भी ले सकतें है।

समुंद्री नमक :

  • आप अपने खाने के नमक को समुंद्री नमक से बदल सकते है।
  • समुंद्री नमक में मिनरल्स होते है जो शरीर के फैट को कम करता है।
  • यह आपको हाइड्रेट रखता है।
  • समुंद्री नमक को गर्म पानी में मिलाकर नहाने से भी फैट घटता है।

सेब का सिरका :

  • सेब का सिरका हिप्स पर फैट जमने से रखता है।
  • यह हमारे शरीर के फैट को भी खत्म करता है।
  • सेब के सिरके में नारियल का तेल मिलाकर हिप्स पर मसाज करे।
  • आधे घंटे बाद गर्म पाने से धो लें।
  • यह प्रक्रिया सप्ताह में दो से तीन बार करें।

ग्रीन टी :

  • हिप्स के फैट को खत्म करने के लिए रोजाना ग्रीन टी पिए।
  • ग्रीन टी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते है।
  • यह हमारे शरीर के विषाक्त प्रदार्थो को निकलता है।
  • खाने के बाद ग्रीन टी के सेवन से हमारे शरीर का फैट खत्म होता है।

फ़ास्ट फ़ूड :

  • अगर आपको अपने हिप्स को पतला करना है तो फ़ास्ट फ़ूड से दुरी बना लें।
  • फ़ास्ट फ़ूड एक्स्ट्रा आयल और सोडियम से भरपूर होता है।
  • यह हमारे शरीर में फैट की मात्रा को बढ़ाता है।
  • इसीलिए अगर शरीर का फैट खत्म करना है तो फ़ास्ट फ़ूड छोड़ना ही बेहतर है।

इन सभी उपाय को अपनाकर आप अपने हिप्स को पतला कर सकते है। इन सभी उपाय के साथ साथ योग, एक्सरसाइज, स्विमिंग, जॉगिंग और हैल्थी फ़ूड भी बहुत जरुरी है।

आजकल प्रेग्नेंट महिलाये कैसे रखें अपना ख्याल ?

हम सभी जानते है के आजकल पूरी दुनिया में कोरोना वायरस फैला हुआ है। जिसे हम COVID -19 के नाम से भी जानते है। हाल ही में वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन ने इसे महामारी का नाम दिया है। इस समय में सभी लोगों को इस वायरस से बचने की जरुरत है। बहुत सी प्रेगनेंट महिलायें भी अपने और अपने होने वाले शिशु के लिए इस वायरस के कारण चिंतित है।

गर्भावस्था और कोरोना वायरस

जैसा की आप सभी जानते है, अगर कोरोना वायरस से इन्फेक्टेड लोगो छींकते है या खाँसते है, उस समय जो उनके द्वारा निकले हुए ड्रॉप्लेट्स हवा में मिल जाते है उसी से वायरस फैलता है। इसके अलावा इन्फेक्टेड पर्सन को छूने से भी वायरस फैलता है।

कोरोना वायरस सभी लोगों को बच्चे, बड़े, आदमी और औरतों को हो रहा है। इन्फेक्टेड पर्सन के टच में आने से यह वायरस फैलता ही है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं के लिए कोरोना वायरस का खतरा बढ़ जाता है। क्योंकि गर्भावस्था में महिलाओं की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। कमजोर इम्युनिटी के कारण कोई भी बीमारी आसानी से लग सकती है।

गर्भवती महिलायें, कोरोना से कैसे करें बचाव

इस वायरस से बचने के लिए जरुरी है के गर्भवती महिलायें अपनी सांफ सफाई का अच्छे से ध्यान रखे। खासतौर पर अपने हाथों की सफाई का विशेष ध्यान रखें। हर 2 घंटे के अंतराल पर हाथों को साबुन से 20 सेकंड तक धोये। अगर हो सके तो बीच बीच में हैंड सैनिटाइज़र का भी इस्तेमाल करें। अपनी आँखों, नाक और कान को छूने से बचें। भीड़भाड़ वाले स्थान पर ना जाए। कोरोना वायरस से बचने के लिए समाजिक दुरी बनाये रखना बहुत जरुरी है। कोशिश करके अपना सारा समय घर पर ही व्यतीत करें और कम से कम लोगों से मिले। गर्भावस्था में यात्रा तो बिलकुल ही ना करें। अच्छे से पानी का सेवन करें और पूरा आराम करें ताकि आपकी इम्युनिटी स्ट्रांग हो सके। यदि आपको खांसी या जुकाम हो तो रुमाल की जगह टिशू का ही इस्तेमाल करें, टिशू को इस्तेमाल के तुरंत बाद कूड़ेदान में फेंक दें।

गर्भवती महिलाओं पर इस वायरस के असर के बारे में अभी तक कुछ पुख्ता नहीं किया जा सकता है। पर फिर भी और देशों में जहाँ गर्भवती महिलाओं को यह वायरस हुआ था, उनके भूर्ण पर इसका असर नहीं हुआ है। यह कहाँ जा सकता है के गर्भाशय तक कोरोना वायरस नहीं पहुंचा है। पर फिर भी अपनी सुरक्षा हमारे खुद के हाथ है इसीलिए सभी लोग ऊपर बताई गयी सभी बातों का विशेष ध्यान रखें।

प्रसव (डिलीवरी) के लिए जा रहे है हॉस्पिटल? तो ये सामान जरूर लेकर जाएँ साथ

प्रसव (डिलीवरी) के लिए जा रहे है हॉस्पिटल? तो ये सामान जरूर लेकर जाएँ साथ, प्रसव टिप्स:-

ही आपको नौवा महीना लगता हैं, वैसे ही आपकी ख़ुशी के दिन करीब आने लगते हैं| क्योंकि आपको किसी भी समय त जिसका ध्यान रखना चाहिए वो ये की आपका जैसे ही नौवा महीना लगता हैं| तो आपको दो बैग को पैक कर लेना चाहिए| एक उस सामान के लिए जो आपको आपकी डिलीवरी से पहले चाहिए| और एक वो सामान जो आपको डिलीवरी के बाद चाहिए|प्रसव टिप्स हॉस्पिटल के लिए

डिलीवरी के लिए आपको ऐसे कपड़ो का चुनाव करना चाहिए| जो की आपको बिलकुल भी टाइट न हो, और कोशिश करे उनकी बाजू भी न हो, और यदि हो भी तो बहुत छोटी हो, और साथ ही ऐसा बहुत सा सामान हो सकता हैं जिसकी जरुरत आपको प्रसव से पहले या बाद में पड सकती हैं| हम आपको सामान को पहले पैक करने की राय इसीलिए दे रहे हैं, क्योंकि ऐसा जरुरी नहीं हैं की जो आपको डॉक्टर ने तारीख दी हैं, आपको उसी समय बच्चा हो, ये तो आपको नौवा लगने के बाद किसी भी समय हो सकता हैं|

तो आइये जानते हैं वो कौन सा सामान हैं जो आपको प्रसव से पहले ही हॉस्पिटल ले जाने के लिए तैयार कर लेने चाहिए, वो सब सामान कुछ इस प्रकार हैं|

प्रसव के समय हॉस्पिटल ले जाने वाला जरुरी सामान, प्रसव टिप्स :-

कपड़े लेकर जाएँ:-

प्रसव से पहले भी ओर बाद मे भी हॉस्पिटल मे कपड़ो की ज़रूरत पड़ती हैं| प्रसव से पहले ओर बाद मे आपको उन कपड़ो को पहनना चाहिए, जिसमे आप आरामदायक महसूस कर सके| यदि आप ज़्यादा टाइट या फिर ज़्यादा भारी कपड़े पहनेगी तो आपको अच्छा महसूस नही होगा| कोशिसक करे की आप ऐसे कपड़ो का चुनाव करे, जिसमे बाजू ना हो, या फिर हो भी तो छोटी होने के साथ खुली भी हो| ताकि आप आराम महसूस कर सके|

वैसे तो हॉस्पिटल वाले अपने कपड़े देते हैं, लेकिन कई महिलाएँ अपने खुद के कपड़े पहनना पसंद करती हैं| इसीलिए वो कपड़ो को खुद अपने घर से ही लेकर जाती हैं| ओर इसमे हॉस्पिटल वालो को भी कोई परेशानी नही होती हैं| तो आप आवश्य की प्रसव के लिए इनको तैयार कर ले| ओर कम से कम 5 जोड़े तो ले ही ले|

अपनी सारी रिपोर्ट्स रख ले:-

प्रसव के लिए जब भी आप जाती हैं, तो एक बात का आवश्य ही ध्यान रखे की आप अपने पहले की सारी रिपोर्ट्स साथ लेकर जाएँ| जिससे की आपके इलाज़ मे किसी भी तरह की कोई परेशानी ना आए, ओर यदि आपको गर्भधारण से पहले कोई परेशानी आई है तो इस बारे मे भी सारी रिपोर्ट्स को लेकाए जाना चाहिए| आपको इस बात का ध्यान इसीलिए भी रखना चाहिए क्योंकि आपको गर्भावस्था के समय क्या परेशानी आई हैं इस बारे मे भी आपका डॉक्टर अच्छे से जान सके|

खाने-पीने के लिए पोष्टिक आहार:-

आपको गर्भावस्था के बाद जब भी प्रसव पीड़ा हो, ओर आपको हॉस्पिटल जाना पड़े, तो आप अपने खाने पीने के लिए पोष्टिक आहार साथ ले जाएँ| इससे साथ आपको प्रसव पीड़ा से पहले भी स्वस्थ का ध्यान रखना चाहिए| जिससे की आपको किसी भी तरह की समस्या ना हो सके| हो सके तो प्रसव पीड़ा होने के दौरान भी आपको कुछ ना कुछ खाते रहना चाहिए|

बच्चे के लिए भी ज़रूरी समान की लिस्ट तैयार कर ले:-

प्रसव के बाद होने वाले बच्चे के लिए भी बहुत सारे सामान की आवश्यकता होती हैं| इसके लिए ज़रूरी हैं की आप किसी भी तरह की कोई चीज़ को छोड़ ना दे इसीलिए पहले से ही उसकी लिस्ट तैयार कर ले| ओर बाकछे के लिए भी कपड़े लेकर जाना ना भूले| इससे आपको ही आसानी होगी| बाकी बच्चे के पैदा होने के बाद आपको किस चीज़ की ज़रूरत होती हैं| वो आपको डॉक्टर द्वारा बता दिया जाता है|

पहचान संबंधी कागज लेकर जाना नही चाहिए:-

आपके लिए सबसे ज़रूरी है की आप अपना पहचान पत्र, अपने पति का पहचान पत्र ओर भी वो कागज जो आपकी पहचान ओर हॉस्पिटल के आधार के कारण आपके पास होने चाहिए| उन सभी पहचान की चीज़ो को अपने साथ लेकर जाएँ, क्योंकि आज के समय मे हॉस्पिटल वाले बिना पहचान के अड्मिट भी नही कर सकते हैं|

पैसे ज़रूर लेकर जाएँ:-

आपके लिए ज़रूरी हैं, की आप जब भी प्रसव के लिए जा रहे हो, तो किसी कार्ड को साथ लेकर जाने के साथ, आपको नकद ज़रूर साथ रखना चाहिए| आपको प्रसव के समय डॉक्टर द्वारा कुछ भी लाने के लिए कहा जा सकता हैं| इसके लिए आपको ज़रूरी हैं की आप नकद रखे, क्योकि कुछ जगह ऐसी भी होती हैं जहा कार्ड नही चलता हैं|

प्रसव के दौरान रखे हॉस्पिटल ले जाने वाले इस सामान का ध्यान:-

प्रसव के दौरान आपको इन सब समान को भी ज़रूर हॉस्पिटल साथ लेकर जाना चाहिए| जिसके साथ होने के कारण आपको किसी भी प्रकार की कोई परेशानी ना हो|

  • यदि आपको चश्मा लगा हुआ हैं तो आप चश्मा ज़रूर साथ लेकर जाएँ|
  • यदि आपके पास कोई स्वास्थ्य बीमा हैं तो उसके कागज भी साथ लेकर जाएँ|
  • बेहतर होगा की आप अपने लिए तकिया घर से ही साथ लेकर जाएँ|
  • आप अपना मन बहलाने के लिए गाने सुनने के लिए भी कुछ ना कुछ साथ लेकर जा सकते हैं|
  • आप अपने साथ एक ऐसी चीज़ भी लेकर जाएँ जिसमे आप अपने इन यादगार पलो को क़ैद कर सके|

तो ये सब कुछ सामान है जो आपको प्रसव के दौरान आपको जरुरत पड सकती हैं| वैसे आज कल के समय में हॉस्पिटल वाले ये सब सामान दे देते हैं, परंतु फिर भी कई औरते अपने ही सामान को प्रयोग करना सही समझती हैं| इसीलिए आपको इन सब बातो का ध्यान रखना चाहिए| और जैसे ही आप बच्चे को घर लेकर जा रहे हो वैसे ही बच्चे की सारी जरुरत के बारे में डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए| इससे आपको बच्चे की देखरेख में मदद मिलती हैं| और आपका बच्चा स्वस्थ रहता हैं|

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गर्भावस्था के अंतिम महीने में क्या नहीं खाना चाहिए

प्रेगनेंसी का नौवां महीना

नौवां महीना प्रेगनेंसी का आखिरी महीना होता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की इस दौरान गर्भवती महिला अपनी सेहत के प्रति किसी भी तरह करें। क्योंकि इस दौरान महिला का वजन बढ़ा हुआ होता है जिसके कारण महिला को उठने, बैठने, सोने में परेशानी का अनुभव हो सकता है, शिशु का विकास भी तेजी से हो रहा होता है, प्रसव किसी भी समय हो सकता है, शारीरिक परेशानियां महिला की बढ़ सकती है आदि। ऐुसे में इस दौरान महिला को अपना ज्यादा ध्यान रखना चाहिए ताकि डिलीवरी में किसी तरह की परेशानी न हो, और शिशु को कोई दिक्कत न हो। और इसके लिए सबसे जरुरी है की महिला स्वस्थ रहे और स्वस्थ रहने के लिए महिला को अपने खान पान के साथ छोटी छोटी चीजों का अच्छे से ध्यान रखें।

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में क्या नहीं खाएं

गर्भावस्था के नौवें महीने में भी महिला को अपने खान पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। प्रेग्नेंट महिला को इस समय पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए। वहीँ कुछ ऐसे आहार भी है जिनके सेवन से गर्भवती महिला को परहेज करना करना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को नौवें महीने में किन- किन चीजों का सेवन नही करना चाहिए।

जंक फ़ूड

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में गर्भवती महिला को जंक फ़ूड, बाहर के मसालेदार खाने से परहेज करना चाहिए। क्योंकि ऐसे आहार का यदि गर्भवती महिला सेवन करती है तो इससे पाचन क्रिया पर बुरा असर पड़ता है। जिससे महिला को कब्ज़, गैस, सीने में जलन की परेशानी हो सकती है।

कैफीन

चाय, कॉफ़ी, कैफीन युक्त चॉकलेट का सेवन यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में अधिक मात्रा में करती है तो इससे शिशु को परेशानी का अनुभव हो सकता है। ऐसे में जितना हो सके महिला को प्रेगनेंसी के नौवें महीने में कैफीन युक्त चीजों का कम सेवन करना चाहिए।

क्रीम से बनी चीजें

क्रीम के दूध व् क्रीम के दूध से बनी चीजें भी गर्भवती महिला को नहीं खानी चाहिए। क्योंकि इसमें मौजूद बैक्टेरिया के कारण प्रेग्नेंट महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु को संक्रमण का खतरा रहता है।

कच्चे अंडे

कच्चे अंडे के सेवन से भी प्रेग्नेंट महिला को परहेज करना चाहिए क्योंकि कच्चे अंडे का सेवन करने के कारण शिशु के विकास में कमी होने के साथ महिला को डायरिया जैसी परेशानी हो सकती है।

नॉन वेज व् मछली

अधपका नॉन वेज, बासी नॉन वेज, मर्क्युरी युक्त मछली के सेवन से भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे शिशु के विकास में कमी आने के साथ महिला को सेहत सम्बन्धी समस्या हो सकती है। साथ ही इसके कारण शिशु को जन्म दोष होने का खतरा भी रहता है।

अधिक मीठा

प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में महिला को अधिक मीठे का सेवन करने से भी परहेज करना चाहिए क्योंकि इससे शुगर के कारण होने वाली दिक्कत बढ़ सकती है। साथ ही महिला की यदि मीठा खाने की इच्छा होती भी है तो मीठे का फलों का सेवन महिला भरपूर मात्रा में कर सकती है।

नमक

प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में महिला को नमक का अधिक सेवन करने से भी परहेज करना चाहिए क्योंकि इससे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है जो न केवल डिलीवरी के समय महिला बल्कि शिशु के लिए भी परेशानी खड़ी कर सकती है।

ठंडी चीजें

गर्भावस्था के आखिरी महीने में महिला का वजन ज्यादा बढ़ चूका होता है, ऐसे में वजन बढ़ने के कारण कुछ महिलाएं पैरों में सूजन की समस्या से परेशान हो सकती है। और इसके साथ यदि महिला ठंडी चीजों का सेवन अधिक मात्रा में करती है तो इसके कारण महिला की यह परेशानी बढ़ सकती है।

नशा

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में गर्भवती महिला को किसी भी तरह का नशा जैसे की अल्कोहल व् धूम्रपान का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके सेवन से गर्भ में पल रहे शिशु के मानसिक विकास में कमी आने के साथ, शिशु को जन्मदोष होने का खतरा रहता है साथ ही समय पूर्व प्रसव जैसी परेशानी भी गर्भवती महिला को हो सकती है।

तो यह हैं कुछ आहार जिनके सेवन से प्रेग्नेंट महिला को नौवें महीने में परहेज करना चाहिए ताकि गर्भवती महिला और शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। साथ ही डिलीवरी के दौरान किसी भी तरह की परेशानी न हो।

सिल्की ओर लम्बे बाल करने के कुछ घरेलू उपाय

हर किसी का सपना होता है की उसके बाल काले,सिल्की,लंबे और घने हो। अच्छे बाल जहां हमारी सुंदरता को बढ़ाते है वहीँ हमें आकर्षित भी बनाते है।सुन्दर बालो से जहाँ आप सुन्दर देखते हे वही आपमें आत्मविश्वास भी   उभरता है,किन्तु बाल स्वस्थ  व सुन्दर न होने के कारण  वही आत्मविश्वास कमजोर पड़ जाता है। अतः हमें अपने चहरे की सुंदरता के साथ-साथ अपने बालो को भी उचित पोषण देना चाहिए ताकि हमारे बाल स्वस्थ व सुंदर देखे।

बालो को सुन्दर, सिल्की व आकर्षित बनाने के लिए आजकल बाजार में न जाने कितने प्रोडक्ट मिल जाते हे।  जिन्हें हम बिना सोचे समझये इस्तेमाल करते है यह  न केवल मंहगे होते है बल्कि इनमे केमिकल होने के कारण  बालो को हानि भी पहुंचाते  है। इसलिए हम आपको कुछ घरेलू उपाय बताने जा रहे है जो आपके बालो को लंबा,घना  व सिल्की बनायेगे।

सिल्की ओर लम्बे बाल करने के कुछ घरेलू उपाय

आँवला

आँवला  से न केवल शरीर को विटामिन सी  पर्याप्त मात्रा में मिलता है बल्कि यह बालो के लिए भी वरदान है। आँवले में कैरोटिनॉइड होने के कारण बालो को बढ़ने में मदद  मिलती है| बालो को काला करने के लिए रात को आँवला पाउडर भिगोकर सुबह लगाने से बाल काले होते है। प्रतिदिन आँवले के सेवन से त्वचा के साथ-साथ बालो का भी उचित पोषण होता है।

एलोवेरा

एलोवेरा में विटामिन व अन्य पोषक तत्व होने  के कारण यह न केवल बालो को संक्रमण से बचाता है बल्कि उन्हें स्वस्थ व मजबूत भी करता है।

 अंडा

अंडे में प्रचुर मात्रा  में प्रोटीन, ज़िंक और सल्फर  होता है जो हमारे बालो को पोषण देने के साथ-साथ उन्हें सिल्की भी बनाता है। अंडे में प्रोटीन की मात्रा सर्वाधिक होने के कारण यह बालो के लिए वरदान है, जिसके  कारण यह आपके बालो को लंबा करने में भी फायदेमंद है।

शहद

शहद प्राकर्तिक AUSHIDHI होने के कारण बालो को  चमकदार बनाता है। शहद का प्रयोग अंडे के साथ १०-१५ दिन में बालो पर करने से बालो को पर्याप्त पोषण मिलता है  बाल मजबूत व लंबे होते है।

प्याज

प्याज का रस बालो की समस्याओं को दूर करने और बालो को उचित पोषण देने में सहायक होता है। प्याज का रस बालो को झड़ने से बचाने के साथ-साथ उन्हें अपने प्राकर्तिक रूप में रखता है। प्याज के रस में औषधि गुण होने के कारण यह बालो की अनेक प्रकार से होने वाले संक्रमण से सुरक्षा करता है।

 आलू व टमाटर

आलू व टमाटर जहाँ सब्ज़ी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है वहीँ आलू व टमाटर का रस बालो में १५ से २० मिनट तक हफ्ते में लगाने से बालो के बढ़ने में मदद मिलती है। बाल लंबे व मजबूत होते है।

 खीरा

खीरे का प्रयोग  जहाँ  त्वचा को निखरता है वहीँ खीरे  में सिलिकन ओर सल्फर की मात्रा अधिक होने के कारण इसके प्रयोग से बाल तेजी से बढ़ते है।

सेब

सेब के रस से बाल  धोने से बालो में कोमलता आती है बाल चमकदार बनते है।

मेहंदी

आजकल बालो के असमय सफ़ेद होने के कारण हम बाजार में आये तरह-तरह के डाई का इस्तेमाल करते है।जिससे न केवल हमारे बाल रूखे व बेजान होते है बल्कि आँखों पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है। मेहंदी बालो में एक नेचुरल कंडीशनर का काम करती है। एक कटोरी मेहँदी में थोड़ा सा दही व मेथी पाउडर मिलाकर लगाने से बाल चमकदार होते है।

मेथी व दही

मेथी पाउडर में एक कप दही को मिलाकर बालो में लगाने से बालो में रुसी खत्म होती  है साथ ही साथ बालो के बढ़ने में भी फायदेमंद है।

बीयर

बीयर में प्रोटीन की मात्रा अधिक होने के कारण यह बालो को पोषण देने में काफी लाभदायक है। बीयर भी बालो के लिए एक अच्छा कंडीशनर है।  शैम्पू करने के बाद बीयर को बालो की  जड़ो में धीरे-धीरे  लगने के बाद बालो को धो ले। ऐसा करने से आपके बाल काले,घने व चमकदार हो जायेगे।

गुलाब

गुलाब प्राकर्तिक तौर से हमारी त्वचा को कोमलता प्रदान करता है वहीँ इसमे मौजूद पोषक तत्व हमारे बालो को भी कोमलता प्रदान कर  चमकदार बनाते है। गुलाब की पंखुड़ियॉ को पीसकर पेस्ट बना ले,इसमे एक अंडा व शहद मिलाकर एक -दो घंटे तक बालो पर लगाकर छोड दे,थोड़ी देर बाद शैम्पू  कर ले। ऐसा करने से आपके बाल लंबे,सिल्की व चमकदार बनेगे।

बालो को सुन्दर, लम्बा  व घना करने के लिए कुछ जरूरी बाते

  • बालो की चमक कायम रहने के लिए बालो में अच्छे शैम्पू का  ही प्रयोग करे। शैम्पू करने के बाद बालो को अच्छी तरह धो ले ताकि ज़रा सा शैम्पू भी बालो के बीच में न रहे क्योंकि यह स्कैल्प को नुकसान  पहुँचता है। इसके बाद कंडीशनर करे ।
  • बालो की अच्छी ग्रोथ के लिए बालो को समय समय पर ट्रिमिंग करवाना भी फायदेमंद होता है।
  • बालो की सफाई के लिए सही व कोमल दांतो वाले ब्रश का ही प्रयोग करे ताकि बालो को नुकसान न पहुंचे।
  • अत्यधिक रासायनिक प्रोडक्ट्स का प्रयोग जैसे (कलरिंग, स्ट्रेटिंग,पमिंग आदि ) कराने  से बचे। क्योकि  इनके अधिक उपयोग से बाल रूखे व बेजान हो जाते हे।
  • तेल बालो की ग्रोथ के लिए जरूरी है, आप नारियल तेल,आलमंड आयल या ओलिव आयल अंगुलिऔ के पोरो पर  लगाकर सिर पर धीरे-धीरे से मालिश करे,आधे घने बाद बालो को धो ले। ऐसा करने से बालो की चमक बरक़रार रहती है व बालो को पूरा पोषण मिलता है। अतः नियमित रूप से बालो में गुनगुने तेल की मसाज करने से बालो की जड़े मजबूत होती है व मस्तिष्क को आराम पहुँचता है।
  • अगर आप घर या ऑफिस से निकलकर सीधे गर्मी  में जाते है  तो इचिंग और डॉयनेस के कारण डैन्ड्रफ होने का खतरा रहता है। ऐसे में आप एंटी डैन्ड्रफ शैम्पू और बालो में रूखापन हो तो हाइड्रेटिंग शैम्पू का इस्तेमाल कर सकते है।
  • अपने शरीर को हमेशा हाइड्रेड रहे  ताकि आपके बालो को पूरा पोषण  मिले। इससे आपके बाल लम्बे व घने होंगे। सारे दिन में कम से कम ८-१० गिलास पानी जरूर पिए।
  • बालो को स्वस्थ व सुन्दर देखने के लिए अपने भोजन में पौष्टिक  तत्वों जैसे ( विटमिंटन ा, स, आयरन ज़िंक,प्रोटीन आदि) को शामिल करे। इससे न केवल आपका स्वस्थ बल्कि आपके बाल भी मजबूत होंगे।

गर्भावस्था में अख़रोट खाने के फायदे – Benefits of Eating Walnut during Pregnancy

जब एक महिला को पता चलता है के वह गर्भवती है तब वह अपने खाने और अपने आप के लेकर बहुत ही जागरूक हो जाती है। गर्भावस्था के दौरान हर महिला छोटी और बड़ी बात का ध्यान रखती है जैसे की क्या खाना है क्या नहीं खाना है। अक्सर प्रेगनेंसी में घर के बड़े सूखा मेवा खाने की भी सलाह देते है। सूखे मेवों में अख़रोट (Walnut) खाने के अलग ही फायदे है।

क्या अख़रोट खाना गर्भावस्था के दौरान सहीं है ? Is Walnut Safe to eat during Pregnancy?

जी हाँ प्रेगनेंसी के दौरान अख़रोट का सेवन पूरी तरह से सेहतमंद और सेफ है।

अख़रोट खाने से प्रेगनेंसी में किसी को भी कोई नुक्सान नहीं होगा जब तक की वह पहले से अख़रोट से एलर्जिक नहीं है।

प्रेगनेंसी के दौरान अख़रोट खाने के क्या क्या फायदे है? What are the benefits of eating Walnuts in Pregnancy?

आइये जानते है गर्भावस्था में अख़रोट खाने के फायदे।

  • अख़रोट के अंदर का हिस्सा, जिसे हम खाते है, सिर्फ हमारे दिमाग के आकर से मिलता जुलता ही नहीं बल्कि हमारे दिमाग का विकास भी करता है।
  • इसमें में ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होता है, जो की गर्भवती महिला के बच्चे के दिमाग को विकसित करने बहुत ही सहायक होता है।
  • अख़रोट का सेवन गर्भवती महिला के खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकता है।
  • शुरुआती महीनो में गर्भवती महिला का ब्लड प्रेशर भी घटता और बढ़ता रहता है, अख़रोट खाने से ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
  • अख़रोट, प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्तोत्र है। दोनों ही चीजे एक प्रेग्ननेंट महिला के बहुत जरुरी है।
  • अख़रोट में पाया जाने वाला कॉपर, भूर्ण के पूर्ण विकास के लिए बहुत ही सहायक होता है।
  • रोजाना नियमित मात्रा में अख़रोट खाने से गर्भावस्था के शुरुआती 3 महीनों में होने वाली घबराहट से भी छुटकारा पाया जा सकता है।
  • मैंगनीज एक बहुत ही जरुरी पोषक तत्व है जो के बच्चे के हड्डियों को मजबूत बनता है। गर्भवती महिला को मैंगनीज तत्व को पाने के लिए अख़रोट का सेवन जरूर करना चाहिए।
  • रोजाना एक अख़रोट खाने से गर्भवस्था में होने वाला तनाव भी दूर होता है।

तो आपने देखा यह सभी गुण एक अख़रोट में होते है। गर्भावस्था में इसे खाने से और भी कई बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है।

गर्भावस्था में किसी भी चीज की एक नियमित मात्रा का सेवन ही करना चाहिए।

किसी भी चीज की अति उसके गुणों के जगह हमे नुक्सान भी पहुंचा सकती है।