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सावन के महीने में प्रेग्नेंट महिला को क्या-क्या ध्यान रखना चाहिए?

सावन यानी श्रावण का महिला बहुत ही पावन होता है और इसका बहुत अधिक महत्व भी होता है। क्योंकि सावन माह भोलेबाबा को समर्पित होता है ऐसे में इस माह भोलेबाबा का ध्यान करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। साथ ही सावन माह में थोड़ा बहुत गर्मी से भी राहत मिलती है क्योंकि इस मौसम में बरसात होने लगती है।

ऐसे में गर्भावस्था के दौरान यदि सावन का महीना चल रहा होता है तो इस मौसम का महत्व गर्भवती महिला के लिए भी होता है साथ ही इस दौरान महिला को बहुत सी बातों का ध्यान रखना भी जरुरी होता है ताकि महिला को किसी तरह की परेशानी नहीं हो। तो आइये अब इस आर्टिकल सावन के महीने में गर्भवती महिला को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।

सावन के महीने में गर्भवती महिला क्या करें?

भगवान का ध्यान करें: सावन का महिला बहुत ही धार्मिक महीना होता है ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को सावन के महीने में पूजा पाठ की तरफ ध्यान देना चाहिए। क्योंकि ऐसा करना महिला और शिशु के लिए फायदेमंद होता है। पूजा पाठ करने से महिला का मन शांत रहता है, महिला अच्छा महसूस करती है, महिला को स्ट्रेस से राहत मिलती है आदि। और जब महिला को फायदे मिलते हैं तो इसका असर शिशु पर भी पड़ता है और शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

इम्युनिटी बढ़ाने वाली डाइट लें: सावन के महीने में बीमारियां व् संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है ऐसे में महिला को ऐसी डाइट लेनी चाहिए जिससे महिला की इम्युनिटी मजबूत रहे। और महिला को संक्रमण व् बिमारियों के खतरे से बचे रहने में मदद मिल सकें।

तरल पदार्थ ले भरपूर: बरसात के मौसम में थोड़ी ठंडक होने के कारण महिला को पानी पीने की इच्छा में कमी हो सकती है। लेकिन महिला को इस दौरान पानी का सेवन भरपूर करना चाहिए ताकि महिला के शरीर में पानी की कमी नहीं हो जिससे महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

श्रावण के महीने में गर्भवती महिला क्या नहीं करें?

सावन के महीने में महिला को बहुत सी छोटी छोटी बातों का ध्यान रखने की जरुरत होती है क्योंकि यह मौसम जितना फायदेमंद होता है उतना ही इस दौरान यदि सेहत के साथ लापरवाही की जाये तो यह नुकसानदायक भी हो सकता है। तो आइये अब जानते हैं की महिला को सावन के महीने में क्या क्या ध्यान रखना चाहिए।

खान पान में साफ़ सफाई में लापरवाही नहीं बरतें

सावन के मौसम में फलों व् सब्जियों को अच्छे से धोने के बाद ही खाने में प्रयोग में लाना चाहिए क्योंकि इस मौसम में कीड़े आदि होने की सम्भावना अधिक होती है। ऐसे में यदि महिला साफ़ सफाई का ध्यान रखती हैं तो इससे महिला को शारीरिक बिमारियों के होने का खतरा होता है।

बाहर का खाना खाने से बचें

बरसात के मौसम में महिला को बिल्कुल भी बाहर का खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इस समय बाहर का खाना खाने से महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियां होने का खतरा अधिक होता है। ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि इस दौरान मक्खी मच्छर बढ़ जाते हैं जो बाहर के खाने को दूषित कर सकते हैं खासकर स्ट्रीट फ़ूड आदि, ऐसे में महिला को गलती से भी बाहर का खाना नहीं खाना चाहिए।

ज्यादा तला भुना नहीं खाएं

बरसात के मौसम में तला भुना खाने की इच्छा बढ़ जाती है और गर्भवती महिला को भी बरसात के मौसम में तला भुना खाने की क्रेविंग हो सकती है। ऐसे में महिला को अपनी इच्छा को थोड़ा कण्ट्रोल करना चाहिए क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला की पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। और तले भुने आहार का सेवन करने से महिला को उसे हज़म करने में दिक्कत हो सकती है जिससे महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में जितना हो सके महिला को ज्यादा तले भुने आहार का सेवन नहीं करना चाहिए।

बारिश में कहीं नहीं जाएँ

बरसात के मौसम में हर जगह पानी भरने व् कीचड़ होने के कारण आने जाने में दिक्कत हो सकती है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला कहीं बाहर जाती है तो महिला के गिरने का खतरा रहता है और यदि महिला गिर जाती है तो इसकी वजह से माँ और बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है। ऐसे में महिला को गलती से भी बारिश में बाहर जाने का नहीं सोचना चाहिए।

नहीं नहाएं बारिश में

प्रेग्नेंट महिला को बारिश में बिल्कुल नहीं नहाना चाहिए क्योंकि ऐसा करने के कारण महिला के गिरने का खतरा होता है साथ इम्युनिटी कमजोर होने के कारण महिला को खांसी, जुखाम जैसी दिक्कतें भी जल्दी होने का खतरा होता है।

मक्खी मच्छर से रखें बचाव

गर्भवती महिला को इस दौरान पूरी बाजू के कपडे पहनने चाहिए जिससे महिला को मच्छर नहीं काटें, साथ ही खिड़कियाँ बंद ही रखनी चाहिए जिससे मक्खी मच्छर घर में नहीं आएं ताकि महिला को मक्खी मच्छर के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ बातें जो गर्भवती महिला को सावन के महीने में ध्यान रखनी चाहिए, यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो इससे महिला को सावन के महीने में होने वाली दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिलती है।

प्रेग्नेंट महिला के लिए धूप में बैठना क्यों जरुरी होता है?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के स्वस्थ रहने के लिए सबसे जरुरी होता है की महिला के शरीर में किसी भी पोषक तत्व की कमी नहीं हो। जिससे गर्भवती महिला को शारीरिक परेशानियों से बचे रहने और फिट रहने में मदद मिल सके साथ ही गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए जरुरी सभी पोषक तत्व शिशु को मिल सके।

पोषक तत्वों के अलावा महिला को थोड़ा बहुत व्यायाम योगा आदि भी करना चाहिए, मैडिटेशन करनी चाहिए, वॉक करनी चाहिए, थोड़ी धूप भी लेनी चाहिए, आदि। क्योंकि यह सब करना भी माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान धूप लेना क्यों जरुरी होता है और इससे कौन से फायदे गर्भवती महिला और बच्चे को मिलते हैं उसके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में धूप लेना क्यों जरुरी होता है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में सभी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होने चाहिए ताकि माँ और बच्चे दोनों को फिट रहने में मदद मिल सके। और इन पोषक तत्वों में विटामिन डी भी एक अहम पोषक तत्व होता है जो माँ और बच्चे दोनों के लिए जरुरी होता है। और विटामिन डी की कमी को पूरा करने का सबसे बेहतरीन तरीका होता है की महिला को थोड़ी देर धूप में बैठना चाहिए। इससे महिला के शरीर में विटामिन डी की कमी पूरी होती है जिससे गर्भवती महिला हेल्दी रहती है और शिशु का विकास अच्छे तरीके से होने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में धूप में बैठने के कौन से फायदे मिलते हैं?

गर्भवती महिला यदि धूप में बैठती हैं तो इससे महिला और शिशु दोनों को सेहत सम्बन्धी फायदे मिलते हैं। तो आइये अब जानते हैं की धूप में बैठने से कौन से फायदे मिलते हैं।

हड्डियों के लिए है फायदेमंद

धूप में बैठने से गर्भवती महिला को विटामिन डी मिलता है जो गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है। साथ ही इससे गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में मदद मिलती है जिससे शिशु का शारीरिक विकास बेहतर तरीके से होता है।

इम्युनिटी बढ़ती है

प्रेगनेंसी के दौरान महिला की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है जिसकी वजह से महिला को संक्रमण व् बिमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में महिला यदि धूप में बैठती है तो इससे महिला की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिससे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान संक्रमण व् बिमारियों के खतरे से बचे रहने में मदद मिलती है।

पाचन क्रिया रहती है दुरुस्त

गर्भावस्था के दौरान धूप में बैठने से गर्भवती महिला की पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पेट सम्बन्धी समस्याओं से बचे रहने में मदद मिलती है।

बेहतर नींद आने में मिलती है मदद

बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान अनिंद्रा की समस्या से परेशान हो सकती है ऐसे में धूप में बैठना उनके लिए फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि धूप में बैठने से हमारे शरीर में एक हॉर्मोन रिलीज़ होता है जो आपको बेहतर नींद लेने में मदद करता है।

शिशु का विकास होता है बेहतर

प्रेग्नेंट महिला यदि धूप लेती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में भी मदद मिलती है। साथ ही शिशु की आँखों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

धूप में बैठने पर गर्भवती महिला को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

प्रेग्नेंट महिला यदि धूप में बैठ रही है और सर्दियों का मौसम है तो महिला थोड़े ज्यादा समय के लिए महिला धूप में बैठ सकती है। लेकिन महिला को ध्यान रखना चाहिए की महिला सुबह से लेकर शाम तक ही धूप में बैठें क्योंकि इसकी वजह से शरीर के तापमान में फ़र्क़ आ सकता है। जिसके कारण महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

साथ ही महिला बिल्कुल सूरज के सामने मुँह करके नहीं बैठें। इसके अलावा यदि गर्मी का मौसम है तो महिला को सुबह की आती हुई धूप में थोड़ी देर यानी की दस से पंद्रह मिनट धूप में बैठना चाहिए इसके अलावा महिला को तेज धूप में जाने से बचना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान महिला को धूप लेना क्यों जरुरी है व् किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उससे जुड़े कुछ टिप्स, यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो आपको भी इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए साथ ही थोड़ी देर धूप में जरूर बैठना चाहिए।

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क्या प्रेगनेंसी में लीची खा सकते हैं?

प्रेगनेंसी के दौरान खान पान का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान गलत खान पान, जरुरत से ज्यादा मात्रा में खाना माँ और बच्चे दोनों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान ऐसी बहुत सी चीजें होती है जिन्हे खाने की महिला को क्रेविंग होती है लेकिन उन चीजों का सेवन करने की प्रेगनेंसी के दौरान मनाही होती है। आज इस आर्टिकल में हम ऐसे ही एक फल की बात करने जा रहे हैं जिसे खाने की क्रेविंग प्रेग्नेंट महिला को हो सकती है। और वो फल है लीची, तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला लीची का सेवन कर सकती है या नहीं।

गर्भावस्था के दौरान लीची का सेवन करें या नहीं?

खाने में मीठी और रसीली होने के साथ लीची में डायट्री फाइबर, पोटैशियम, विटामिन सी, एंटी ऑक्सीडेंट्स जैसे पोषक तत्व भी लीची में भरपूर होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला चाहे तो सिमित मात्रा में लीची का सेवन कर सकती है। सिमित मात्रा में यदि गर्भवती महिला लीची का सेवन करती है तो इससे महिला को बहुत से सेहत सम्बन्धी फायदे मिलते हैं।

प्रेगनेंसी में लीची खाने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान यदि सिमित मात्रा में प्रेग्नेंट महिला लीची का सेवन करती है तो इससे महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं। जिससे महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। तो आइये अब उन फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

कब्ज़ से राहत

लीची डायट्री फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत होती है ऐसे में यदि महिला लीची का सेवन करती है। तो इससे महिला के मेटाबोलिज्म रेट को सही करने को पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को कब्ज़ व् अन्य पाचन सम्बन्धी परेशानियों से राहत पाने में मदद मिलती है।

इम्युनिटी मजबूती होती है

विटामिन सी से भरपूर लीची का सेवन करने से गर्भवती महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है जिससे गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बिमारियों व् संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।

बॉडी रहती है हाइड्रेट

लीची में पानी की मात्रा की भी अधिकता होती है जिससे गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। और यदि गर्भवती महिला हाइड्रेट रहती है तो इससे प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली बहुत सी परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

वजन रहता है कण्ट्रोल

पानी से भरपूर होने के साथ लीची डायट्री फाइबर का भी बेहतरीन स्त्रोत होती है जिससे महिला के पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है। और यदि महिला का शरीर हाइड्रेट रहता है और पाचन तंत्र भी दुरुस्त रहता है तो इससे महिला के वजन को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर रहता है कण्ट्रोल

पोटैशियम से भरपूर लीची का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रहने में भी मदद मिलती है। साथ ही पोटैशियम दिल की धड़कन को सही रहने में भी मदद करता है।

एनर्जी मिलती है

लीची में विटामिन बी काम्प्लेक्स भी मौजूद होता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है और थकान व् कमजोरी जैसी समस्या महिला को नहीं होती है।

कितनी मात्रा में करें लीची का सेवन?

गर्भावस्था के दौरान एक दिन में एक या दो लीची का सेवन बहुत होता है इसके अलावा आप चाहे तो इसके बारे में एक बार डॉक्टर से भी राया ले सकते हैं। क्योंकि जरुरत से ज्यादा लीची खाने के कारण प्रेग्नेंट महिला को नुकसान भी पहुंच सकता है।

प्रेगनेंसी में लीची खाने के नुकसान

  • जरुरत से ज्यादा लीची खाने की वजह से ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ सकता है जिसकी वजह से महिला को जेस्टेशनल डाइबिटीज़ की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • कुछ महिलाओं को लीची खाने की वजह से एलर्जी जैसी समस्या भी हो सकती है।
  • लीची की तासीर थोड़ी गर्म होती है ऐसे में जरुरत से ज्यादा लीची खाने के कारण शरीर में गर्मी बढ़ सकती है जिसकी वजह से ब्लीडिंग जैसी समस्या भी महिला को हो सकती है।
  • जरुरत से ज्यादा लीची का सेवन करने से समय से पहले डिलीवरी होने के खतरा भी हो सकता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान लीची का सेवन करने से जुड़े कुछ टिप्स, ऐसे में गर्भवती महिला को जितना हो सके सिमित मात्रा में ही लीची का सेवन करना चाहिए। ताकि माँ और बच्चे को लीची का सेवन करने के बेहतरीन फायदे मिल सके और किसी भी तरह के सेहत सम्बन्धी नुकसान नहीं हो।

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दस्त (Loose Motion) की समस्या से बचने के घरेलू उपाय

दस्त एक ऐसी समस्या है जो यदि किसी को हो जाये तो उठने, बैठने, में दिक्कत होने के साथ बार बार बाथरूम में जाकर व्यक्ति परेशान हो जाता है। साथ ही दस्त होने के साथ ही कुछ खाने का मन नहीं करता है क्योंकि खाने के तुरंत बाद ही बाथरूम में जाना पड़ता है।

इसके अलावा बार बार बाथरूम जाने से शरीर में कमजोरी, पानी की कमी, आदि की समस्या हो जाती है। उसके बाद यदि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान नहीं किया जाये तो हॉस्पिटल जाने तक की नौबत आ सकती है। ऐसे में जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान होना जरुरी है ताकि आपको ज्यादा दिक्कत नहीं हो।

लूज मोशन होने के कारण

  • जंक फ़ूड का अधिक सेवन करने के कारण यह समस्या हो सकती है।
  • ज्यादा मसालेदार तेलीय खाना खाने के कारण भी यह दिक्कत होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • बासी, खराब, अच्छे से न पका हुआ, खाना खाने के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
  • शरीर में गर्मी बढ़ जाने के कारण भी यह परेशानी हो सकती है।
  • गन्दा पानी पीने के कारण भी यह दिक्कत हो सकती है।

लूज मोशन होने के कारण क्या- क्या दिक्कत हो सकती है?

  • दस्त होने के साथ उल्टियां भी लग सकती है।
  • बार बार बाथरूम जाने के कारण थकान व् कमजोरी अधिक हो जाती है।
  • पेट में दर्द, ऐंठन, मरोड़े उठना आदि की समस्या भी हो जाती है।
  • दस्त होने की वजह से कई बार रोगी को बुखार तक आ जाता है।

दस्त की समस्या से बचने के घरेलू उपाय

अधिकतर छोटी छोटी शारीरिक समस्याओं का समाधान आपको आपके घर की रसोई में ही मिल जाता है। और यह घरेलू नुस्खे आसान होने के साथ असरदार भी होते हैं और आपको जल्दी से जल्दी आपकी समस्या से बचाने में मदद करते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की दस्त की समस्या से बचे रहने के लिए आप कौन- कौन से घरेलू नुस्खे ट्राई कर सकते हैं।

केला

केले का सेवन करने से दस्त की समस्या को दूर करने में मदद करते हैं क्योंकि केले में पोटैशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। और पोटैशियम शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करता है। जिससे दस्त को कण्ट्रोल करने व् दस्त के कारण शरीर में होने वाली कमी को भी पूरा करते हैं।

निम्बू का रस

दस्त की समस्या होने पर दो तीन बार एक कप पानी में थोड़ा नमक और निम्बू का रस मिलाकर पीएं इससे भी दस्त की समस्या को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है। साथ ही यदि दस्त की वजह से पेट में दर्द होता है तो उससे बचे रहने में भी मदद मिलती है।

जीरे का पानी

रसोई घर में मौजूद जीरे का इस्तेमाल करने से भी दस्त की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सकती है। इसके लिए आप एक लीटर पानी में एक चम्मच जीरा डालकर अच्छे से उबाल लें और पानी को तब तक उबालें जब तक यह आधा नहीं रह जाएँ। उसके बाद इस पानी को छानकर ठंडा करें और इसका सेवन करें। आप दिन में तीन चार बार इस पानी को पीएं आपको जरूर फ़र्क़ महसूस होगा।

नमक चीनी का घोल

दस्त की समस्या को दूर करने के लिए एक गिलास पानी में थोड़ा नमक और थोड़ी चीनी मिलाकर एक घोल बनाएं। उसके बाद इस पानी को घर एक से दो घंटे में ताजा बनाकर पीते रहें ऐसा करने से आपको लूज मोशन की समस्या से बचे रहने के साथ शरीर में आई कमजोरी को दूर करने में भी मदद मिलेगी। आप चाहे तो नमक चीनी के साथ थोड़ा निम्बू का रस भी मिला सकते हैं।

नारियल पानी

जी हाँ, नारियल पानी का सेवन करने से भी दस्त की समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है। क्योंकि नारियल पानी में पोटैशियम, सोडियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं। जो शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं जिससे दस्त में आराम मिलता है। साथ ही दस्त के कारण होने वाली डीहाइड्रेशन की समस्या से बचने के लिए भी नारियल पानी मदद करता है। लेकिन ध्यान रखें की ताजा नारियल पानी मगाकर ही पीएं।

धनिया

एक चम्मच धनिया के बीजों को एक लीटर पानी में उबाल लें और जब तक इसे उबालते रहें जब तक की पानी आधा न रह जाए। उसके बाद इस पानी को छानकर ठंडा होने के लिए रख दें फिर थोड़ा थोड़ा करके इसे थोड़ी थोड़ी देर में पीते रहें। ऐसा करने से भी दस्त की समस्या में आराम मिलता है।

अनार के पत्ते पीसकर पीएं

यदि आपके घर के आस पास अनार का पेड़ है तो उसके पांच से पत्ते लाकर पीस लें अब इन पत्तों के मिश्रण को पानी में मिलाएं। अच्छे से मिक्स होने के बाद इसका सेवन करें ऐसा करने से दस्त की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

चावल का पानी

तीन चार चम्मच चावल को एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें और एक घंटे बाद उस पानी को छान लें। पानी को छान लेने के बाद उसमे थोड़ी सी मिश्री मिलाएं और उसका सेवन करें। ऐसा करने से भी दस्त में आराम मिलता है।

सौंठ और अजवाइन

सौंठ और अजवाइन को बराबर मात्रा में पीसकर एक चूर्ण बनाएं और दिन में दो तीन बार उस चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ लेकर उसका सेवन करें। ऐसा करने से भी लूज मोशन में आराम मिलता है। आप चाहे तो अजवाइन और अदरक को साथ में पीसकर उसका सेवन भी कर सकते हैं लेकिन हर बार थोड़ा सा ताजा अदरक पीसें ताकि जल्दी फायदा मिल सकें।

इलायची

पांच छह इलायची को दो से तीन गिलास पानी में मिलाकर तब तक उबालें जब तक की पानी आधा न रह जाएँ फिर इसे छान लें। अब इस पानी का तीन से चार बार सेवन करें। ऐसा करने से भी आपको दस्त में आराम पाने में मदद मिलती है।

कच्चा पपीता

पांच छह कच्चे पपीते के टुकड़ों को काट लें उसके बाद इसे पानी में उबाल लें। पानी में उबालने के बाद आप इसका सेवन करें ऐसा करने से भी आपको दस्त की समस्या से आराम मिलता है। ध्यान रखें की पका पपीता नहीं खाएं इससे आपकी समस्या बढ़ सकती है।

दही का सेवन करें

दही में एंटी बैक्टेरियल गुण मौजूद होते हैं ऐसे में दस्त की समस्या से बचे रहने के लिए आप दही का सेवन भी कर सकते हैं। दही के फायदे को बढ़ाने के लिए आप इसमें काली मिर्च, काला नमक आदि डालकर इसका सेवन करें।

अदरक का पाउडर

एक गिलास दूध में आधा चम्मच अदरक का पाउडर डालकर उबाल लें, उसके बाद गुनगुना रहने पर सिप सिप करके इस दूध को पीएं। ऐसा करने से भी दस्त की समस्या से आराम मिलता है क्योंकि अदरक में एंटी बैक्टेरियल, एंटी फंगल गुण मौजूद होते हैं। साथ ही इस दूध को पीने से दस्त के दौरान होने वाली पेट दर्द की समस्या से बचने में भी मदद मिलती है।

पानी उबालकर पीएं

दस्त लगने का कारण कई बार पानी भी होता है ऐसे में दस्त लगने पर इस बात का ध्यान रखें की आप फ़िल्टर किये हुए पानी को भी अच्छे से उबाल लें। उसके बाद ठंडा होने पर पानी का सेवन करें और ध्यान रखें की शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें।

दस्त लगने पर क्या खाना चाहिए?

खिचड़ी, दलिया का सेवन करना फायदेमंद होता है क्योंकि दस्त होने पर पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है और यह खाना हल्का होता है जिसे पचाने में कोई दिक्कत नहीं होती है। इसके अलावा आप चाहे तो सब्जियां उबालकर भी उसका सेवन कर सकते हैं साथ ही ब्रेड को दूध में डालकर उसे भी खा सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें दस्त की समस्या ठीक होने के दो चार दिन बाद तक भी आपको ऐसा ही खाना खाना चाहिए ताकि पाचन क्रिया पूरी तरह से ठीक हो सकें।

तो यह हैं कुछ उपाय जिन्हे ट्राई करने से दस्त की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा यदि आपको दस्त बहुत ज्यादा हो रहे हैं और उसके साथ उल्टी, बुखार आदि की समस्या भी अधिक है तो आपको इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। ताकि डॉक्टर आपको दवाई देकर इस समस्या का समाधान कर सकें।

Home remedies to get rid of loose motion

खांसी होने पर गर्भ को कितनी तकलीफ होती है जानिए?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहा शिशु पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। इसीलिए गर्भवती महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। क्योंकि जितना अच्छे से महिला अपना ध्यान रखती है उतना ही ज्यादा गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास होने में और शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

लेकिन यदि महिला को कोई सेहत सम्बन्धी समस्या हो जाती है तो इसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ने का खतरा रहता है। जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को यदि खांसी की समस्या हो जाती है तो इसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ सकता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की गर्भवती महिला को खांसी की समस्या होने पर गर्भ में पल रहे शिशु पर क्या असर पड़ता है।

शिशु चौंक जाता है

गर्भवती महिला जब खांसी करती है तो इसके कारण गर्भ में शिशु चौंक सकता है, घबरा सकता है, आदि। और जब गर्भ में शिशु चौंक या घबरा जाता है तो इसकी वजह से गर्भ में शिशु की मूवमेंट भी एक दम से ज्यादा बढ़ जाती है।

पेट पर झटका लग सकता है

खांसी होने के कारण पेट को झटका लगता है जिसकी वजह से पेट में दर्द की समस्या होने के साथ झटका भी लगता है। खासकर जब एक दम से खांसी ज्यादा होने लग जाये। और पेट में झटका लगने के कारण गर्भ में शिशु को असहज महसूस हो सकता है।

ब्लीडिंग का खतरा होता है

प्रेग्नेंट महिला को खांसी होने पर पेट या पेट के निचले हिस्से पर जोर महसूस हो सकता है जिसकी वजह से दबाव बढ़ने लग जाता है। ऐसे में महिला को ब्लीडिंग होने का खतरा रहता है खासकर प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को यह दिक्कत अधिक होने की सम्भावना होती है। और ब्लीडिंग अधिक होने पर गर्भपात या समय से पहले डिलीवरी होने का खतरा अधिक होता है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो प्रेग्नेंट महिला को खांसी की समस्या होने पर शिशु को हो सकते हैं। ऐसे में इन नुकसान से बचे रहने के लिए और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए गर्भवती महिला को खांसी की समस्या का जल्द से जल्द इलाज करना चाहिए। ताकि महिला या शिशु को किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो।

प्रेगनेंसी के दौरान शकरकंदी खाने के फायदे?

गर्भावस्था के दौरान महिला को पर्याप्त पोषण की जरुरत होती है और यदि महिला पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेती है। तो इससे गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं होती है जिससे गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए जरुरी पोषक तत्व भी शिशु को मिलते हैं। साथ ही इस दौरान खान पान में की गई थोड़ी सी लापरवाही माँ के साथ बच्चे की सेहत पर भी बुरा असर डाल सकती है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान खान पान को लेकर गर्भवती महिला थोड़ी परेशान रहती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी में शकरकंदी के सेवन के बारे में बात करने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में शकरकंदी का सेवन करना चाहिए या नहीं?

विटामिन सी, आयरन, फोलेट, कैल्शियम, स्वस्थ फैट जैसे कई पोषक तत्व शकरकंदी में भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए भी बहुत जरुरी होते हैं। इसके अलावा यह पोषक तत्व प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली बहुत सी परेशानियों को भी कम करने में मदद करते हैं। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान सिमित मात्रा में शकरकंदी का सेवन करने से गर्भवती महिला को किसी तरह का नुकसान भी नहीं होता है। इसीलिए यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आपका शकरकंदी खाने का मन है तो आप भी शकरकंदी का सेवन कर सकती है।

गर्भावस्था में शकरकंदी खाने से कौन से फायदे मिलते हैं?

गर्भवती महिला यदि शकरकंदी का सेवन करती है तो इससे महिला को एक नहीं बल्कि कई फायदे मिलते हैं साथ ही शकरकंदी का सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु को भी फायदा मिलता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में शकरकंदी का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं।

फोलेट

शकरकंदी में फोलेट प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला शकरकंदी का सेवन करती है तो इससे महिला के शरीर में फोलेट भरपूर रहता है। जिससे शिशु तक फोलेट पर्याप्त मात्रा में पहुँचता है और शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलने के साथ शिशु को जन्म दोष की समस्या से सुरक्षित रहने में भी मदद मिलती है।

आयरन

शकरकंदी में आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खून की कमी व् खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से बचाएं रखने में मदद करता है।

कैल्शियम

कैल्शियम से भरपूर शकरकंदी का सेवन करने से गर्भवती महिला की हड्डियों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है इसके अलावा गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों और दांतों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

विटामिन ए

शकरकंदी विटामिन ए का बेहतरीन स्त्रोत होती है जो गर्भवती महिला की आँखों को सुरक्षित रखने के साथ शिशु के आँखों के बेहतर विकास में भी मदद करती है। इसके अलावा शिशु के बेहतर विकास के लिए भी विटामिन ए फायदेमंद होता है।

मेटाबोलिज्म होता है बेहतर

प्रेगनेंसी के दौरान अधिकतर महिलाएं पेट सम्बन्धी परेशानियों का सामना करती है। ऐसे में इस समस्या से निजता पाने के लिए गर्भवती महिला शकरकंदी का सेवन कर सकती है। क्योंकि शकरकंदी में मौजूद विटामिन ए गर्भवती महिला के मेटाबोलिज्म को बेहतर रखने में मदद करता है।

प्रेग्नेंट महिला शकरकंदी का सेवन करते समय यह सावधानियां बरतें

  • शकरकंदी का सेवन करने से पहले उसे अच्छे से धोएं उसके बाद उबालें।
  • ताज़ी व् बिना गली सड़ी शकरकंदी का सेवन करें।
  • जरुरत से ज्यादा शकरकंदी का सेवन नहीं करें।
  • उबालने के बाद शकरकंदी को काटने से पहले चेक कर लें उसके से स्मेल तो नहीं आ रही है क्योंकि यह उसके खराब होने की निशानी होती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे को शकरकंदी का सेवन करने से मिलते है। ऐसे में यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आप भी स्नैक्स के रूप में शकरकंदी की चाट बनाकर खा सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान रोजाना खाएं यह 5 चीजें?

गर्भावस्था हर महिला के लिए बहुत ही खुशनुमा समय होता है। क्योंकि अब महिला अकेली नहीं होती है बल्कि उसकी जिंदगी में शामिल होने के लिए एक नन्हा मेहमान उसके गर्भ में पल रहा होता है। इसीलिए तो जैसे ही बच्चा जन्म लेता है वैसे ही महिला प्रेगनेंसी के नौ महीने और डिलीवरी के दौरान होने वाली तकलीफ को भूल अपने बच्चे को देख ख़ुशी से फूली नहीं समाती है।

साथ ही गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान हर वो काम करती है जिससे गर्भ में शिशु को फायदा पहुँच सकें। और महिला को ऐसा करना भी चाहिए क्योंकि जितना ज्यादा महिला अपना ध्यान रखती है उतना ज्यादा ही प्रेगनेंसी और डिलीवरी को आसान बनाने में भी मदद मिलती है। प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए सबसे ज्यादा जरुरी होता है की महिला अपने खान पान का ध्यान रखें।

क्योंकि जितना ज्यादा महिला अपने खान पान का ध्यान रखती है उतना ही ज्यादा महिला के शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा सही रहती है। जिससे माँ व् बच्चे दोनों को ही फायदा मिलता है। तो आज इस आर्टिकल में हम ऐसी पांच फायदेमंद चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन हर गर्भवती महिला को रोजाना करना चाहिए। आइये अब उन चीजों के बारे में जानते हैं।

फल

गर्भावस्था के दौरान हर महिला को रोजाना किसी न किसी एक फल का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि फलों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। जो माँ व् बच्चे के लिए फायदेमंद होते हैं। इसके अलावा फल खाने में भी स्वादिष्ट होते है जिससे महिला के जीभ के स्वाद को सही रहने में भी मदद मिलती है और महिला को भूख में कमी जैसी समस्या से भी बचे रहने में मदद मिलती है।

डेयरी प्रोडक्ट्स

महिला को नियमित रूप से डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन जरूर करना चाहिए। जैसे की दिन भर में दो तीन गिलास दूध, एक कटोरी दही या छाछ आदि जरूर लेना चाहिए। क्योंकि डेयरी प्रोडक्ट्स कैल्शियम, प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं जो माँ व् बच्चे दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।

दालें

नियमित रूप से एक समय की डाइट में महिला को किसी न किसी दाल का सेवन भी जरूर करना चाहिए क्योंकि दाल आयरन, प्रोटीन, कैल्शियम, व् अन्य खनिजों से भरपूर होती है। जो माँ व् बच्चे दोनों की सेहत को सही रखने में मदद करती है।

पोषक तत्वों से भरपयर सब्जियां खाएं

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को रोजाना किसी न किसी हेल्दी सब्ज़ी का सेवन जरूर करना चाहिए और सर्दी का मौसम चल रहा है तो एक समय किसी न किसी हरी सब्ज़ी को जरूर खाना चाहिए। क्योंकि सब्जियां पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और एक सब्ज़ी में एक से ज्यादा पोषक तत्व मौजूद होते हैं ऐसे में महिला को सब्ज़ी का सेवन जरूर करना चाहिए। लेकिन ध्यान रखें की कौन सी सब्ज़ी ज्यादा फायदेमंद होती है और रोजाना सब्ज़ी को बदल बदल कर उनका सेवन करें।

भरपूर पानी

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को रोजाना आठ से दस गिलास पानी जरूर पीना चाहिए क्योंकि इससे शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है। और शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा सही रहने से गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने के साथ प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली बहुत सी शारीरिक परेशानियों जैसे की पेट से जुडी समस्या, सिर दर्द, आदि से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं वो पांच चीजें जो गर्भवती महिला को नियमित रूप से अपनी डाइट में जरूर लेनी चाहिए क्योंकि इन्हे अपनी डाइट में शामिल करने से महिला को भरपूर पोषक तत्व मिलते हैं। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

Eat these 5 things daily during pregnancy

जन्माष्टमी 2022 कब है? प्रेग्नेंट महिला जन्माष्टमी के दिन इस बात का ध्यान रखें

जन्माष्टमी का त्यौहार हर साल की भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के रोहिणी नक्षत्र में मनाया जाता है क्योंकि इस दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था इसीलिए हर वर्ष इस दिन उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है। साल 2022 में भी अब जन्माष्टमी का त्यौहार अब आने ही वाला है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम जानते हैं की जन्माष्टमी कब है और प्रेग्नेंट महिला को इस दिन किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उसके बारे में भी जानते हैं।

कब है जन्माष्टमी 2022?

जन्माष्टमी 2022 में 18 अगस्त दिन गुरूवार को है। अष्टमी तिथि 18 अगस्त दिन गुरूवार को शाम 09 बजकर 21 मिनट से प्रारंभ होगी, और 19 अगस्त दिन शुक्रवार को रात 10 बजकर 59 मिनट पर समाप्त होगी।

जन्माष्टमी व्रत रखते समय ध्यान रखने योग्य बातें?

  • व्रत रखने पर सुबह समय से उठकर नहा धोकर तैयार हो जाना चाहिए।
  • घर के मंदिर में साफ़ सफाई करने के बाद दीप जलाना चाहिए यदि आपके घर में लड्डू गोपाल है तो उन्हें मंदिर में बैठना चाहिए और पूजा करनी चाहिए।
  • इस दिन लड्डू गोपाल को झूला झुलाना चाहिए।
  • जन्माष्टमी के दिन रात के समय लड्डू गोपाल की पूजा का सबसे ज्यादा महत्व होता है क्योंकि उनका जन्म रात के समय हुआ था।
  • ऐसे में रात के समय गोपाल जी को पंचतत्वों से स्नान करवाना चाहिए और उन्हें तैयार करके नए वस्त्र पहनाकर उन्हें माखन मिश्री का भोग भी लगाना चाहिए।
  • लड्डू गोपाल की आरती करनी चाहिए।
  • इस दिन जितना हो सके लड्डू गोपाल का ध्यान रखना चाहिए और जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके उनकी सेवन करनी चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला जन्माष्टमी के दिन इन बातों का ध्यान रखें

हर गर्भवती महिला चाहती है की उसका होने वाला शिशु सूंदर, बुद्धिमान, नटखट और बिल्कुल नन्हे लड्डू गोपाल की तरह हो। इसीलिए अधिकतर महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान भी जन्माष्टमी का व्रत रखना चाहती है। ऐसे में जन्माष्टमी का व्रत रखते समय प्रेग्नेंट महिला को किन किन बताओं का ध्यान रखना चाहिए आइये उसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

डॉक्टर से लें राय

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान कोई भी व्रत रखने से पहले एक बार डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए और उसके बाद यदि डॉक्टर आपको व्रत रखने की सलाह देते हैं तो आप व्रत रखें नहीं तो नहीं।

परेशानियां होने पर व्रत रखने से बचें

यदि गर्भवती महिला को शुगर, एसिडिटी, उल्टी आदि की समस्या रहती है तो महिला को बिल्कुल भी व्रत नहीं करना चाहिए क्योंकिं व्रत रखने पर महिला को दिक्कत ज्यादा होने का खतरा होता है।

पानी पीएं भरपूर

वैसे कुछ लोग जन्माष्टमी का व्रत निर्जला रखते हैं लेकिन गर्भवती महिला को निर्जला उपवास बिल्कुल नहीं रखना चाहिए बल्कि दिन भर में भरपूर पानी पीना चाहिए। ताकि शरीर में पानी की कमी बिल्कुल भी नहीं हो।

फलों का सेवन करें

महिला दिन भर मे फलों का सेवन भी करती रहे ताकि महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिल सकें हो सके तो रसदार फलों का सेवन करें।

थोड़ी देर आराम भी जरूर करें

व्रत रखने पर महिला आराम करना बिल्कुल नहीं भूलें क्योंकि यदि महिला आराम नहीं करेगी तो इससे महिला को थकावट, कमजोरी, बॉडी पेन जैसी समस्या हो सकती है। जिस्सकी वजह से महिला को यह परेशानियां उठानी पड़ सकती है।

भीड़भाड़ में जाने से बचें

जन्माष्टमी के दिन मंदिरों में अन्य जगह पर कान्हा के बड़े बड़े पंडाल लगाए जाते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को उन जगहों पर जाने से बचना चाहिए क्योंकि भीड़भाड़ में जाने के कारण महिला को इन्फेक्शन, धक्का लगने के कारण दिक्कत हो सकती है।

तो यह हैं जन्माष्टमी कब है व् प्रेग्नेंट महिला को जन्माष्टमी के दिन किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उससे जुड़े टिप्स, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए।

Krishna Janmashtami 2022 Tips for Pregnant women

प्रेगनेंसी में उल्टी क्यों होती है? और कब तक रहती है

गर्भावस्था का समय महिला के लिए किसी जंग से कम नहीं होता है क्योंकि इस दौरान महिला के शरीर में आंतरिक व् बाहरी रूप से बहुत से बदलाव होते हैं। साथ ही इस दौरान महिला के शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव भी हो रहे होते हैं। जिसके कारण महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है जैसे की पेट दर्द, कमर दर्द, जी मिचलाना, सूजन, कब्ज़, उल्टी आदि की समस्या। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली उल्टी की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में उल्टी होने के कारण

गर्भावस्था के दौरान उल्टी होने का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि ऐसे बहुत से कारण हो सकते हैं जिसकी वजह से महिला को उल्टी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की:

हार्मोनल बदलाव: प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में लगातार हार्मोनल बदलाव हो रहे होते हैं और इन्ही हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को उल्टी जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

गैस की समस्या होने के कारण: जिन गर्भवती महिला को पेट में गैस की समस्या अधिक रहती है उन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान उल्टी की समस्या अधिक हो सकती है।

सीने में जलन: प्रेग्नेंट महिलाओं को यदि सीने में जलन, खट्टी डकार जैसी परेशानी भी अधिक रहती है तो इस कारण भी महिला को उल्टी की समस्या अधिक हो सकती है।

अनुवांशिक कारण: गर्भावस्था के दौरान उल्टी अधिक आना अनुवांशिक कारण भी हो सकता है यानी की यदि आपकी माँ या बहन इस समस्या से प्रेगनेंसी के समय परेशान रहती थी। तो आपको भी यह समस्या हो सकती है।

तनाव: ऐसा माना जाता है जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान स्ट्रेस की समस्या अधिक होती है उन्हें यह समस्या अधिक होती है। क्योंकि स्ट्रेस के कारण बॉडी में हार्मोनल अंसतुलन का खतरा अधिक होता है जिसकी वजह से महिला को उल्टी के साथ अन्य शारीरिक परेशानियां भी अधिक हो सकती है।

ज्यादा उम्र में प्रेगनेंसी: ऐसा ज्यादातर केस में देखने को मिलता है जो महिला तीस के बाद गर्भधारण करती है उन्हें उल्टी की समस्या अधिक हो सकती है।

खान पान के कारण: बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेग्नेंट महिला की पाचन क्रिया थोड़ा धीमे काम करती है। जिसकी वजह से खाना हज़म करने में महिला को दिक्कत हो सकती है। ऐसे में यदि महिला खान पान का अच्छे से ध्यान नहीं रखती है जैसे की कुछ गलत खा लेती है, जरुरत से ज्यादा खा लेती है तो महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

गर्भावस्था के दौरान कब तक उल्टी की समस्या रहती है?

प्रेगनेंसी के दौरान उल्टी आना बहुत आम बात होती है लेकिन यह बता पाना की महिला को कब तक उल्टी होती है यह मुश्किल होता है। क्योंकि हर महिला की गर्भावस्था अलग अलग होती है। जैसे की कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में उल्टी की समस्या अधिक होती है तो कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने इस समस्या से परेशान रहती है।

इसके अलावा कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान केवल सुबह के समय यह समस्या होती है तो कुछ महिला दिन रात इस समस्या से परेशान रहती है। और कुछ महिलाएं ऐसी भी होती है जिन्हे यह समस्या न के बराबर होती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कब तक उल्टी होती है यह बताया नहीं जा सकता है।

उल्टी की समस्या से राहत के लिए टिप्स

  • थोड़ा थोड़ा करके खाएं ताकि खाना अच्छे से हज़म हो सके और पेट में गैस की समस्या नहीं हो।
  • उन खाद्य पदार्थों का सेवन करें जिससे उल्टी को कण्ट्रोल रहने में मदद मिल सके।
  • ऐसा सोचना बंद करें की आप जो भी खाएंगे उसे खाने के बाद आपको उल्टी आ जाएगी।
  • प्रेगनेंसी के दौरान अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखें ताकि बॉडी में हार्मोनल बैलेंस बना रहे जिससे उल्टी की समस्या को कम करने में मदद मिल सके।
  • साफ़ सफाई का ध्यान रखें जिससे संक्रमण का खतरा नहीं हो क्योंकि संक्रमण होने पर भी महिला को यह दिक्कत अधिक हो सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान उल्टी की समस्या अधिक होने पर डॉक्टर से कब मिलें?

गर्भावस्था के दौरान महिला को यदि कुछ भी खाने पीने के बाद उल्टी आ रही हो, उल्टी के साथ बुखार हो, उल्टी के साथ पेट दर्द हो, उल्टी में खून आये, आदि। ऐसे कुछ केस में उल्टी को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे बॉडी में पानी की कमी होने के कारण माँ व् बच्चे को होने वाली दिक्कतें बढ़ सकती है। ऐसे में आपको जल्द से जल्द डॉक्टर के पास जाना चाहिए। साथ ही उल्टी रोकने के लिए बिना डॉक्टरी परामर्श के किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान उल्टी आने के कारण, उल्टी की समस्या से बचने के टिप्स, साथ ही प्रेगनेंसी में उल्टियां कब तक होती है उससे जुडी जानकारी। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन सभी बातों के बारे में पता होना चाहिए ताकि आपको भी जब उल्टी के कारण कोई दिक्कत हो तो आप समझ सके की कब यह सही है और कब इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

Causes and remedies of vomiting in during Pregnancy

महिलाओं को यूरिन में जलन होने के कारण

यूरिन में जलन महसूस होना एक ऐसी समस्या है जो की किसी को भी हो सकती है खासकर महिलाओं को यह समस्या होने का अधिक खतरा होता है। क्योंकि महिलाओं का प्राइवेट एरिया बहुत सेंसिटिव होता है जिसकी वजह से महिला को दिक्कत होने का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा जब यूरिन पास करते समय जलन इतनी होने लगती है की ऐसा लगता है जैसे यूरिन नहीं बल्कि आग बाहर की तरफ निकल रही है। और जलन अधिक होने के कारण कई बार यूरिन पास करने का मन भी नहीं करता है। लेकिन ऐसा क्यों होता है? क्या आप इसके बारे में जानना चाहते हैं तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको महिलाओं को यूरिन में जलन होने के कारण व् यूरिन कम क्यों आता है इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

क्या यूरिन में जलन होना खतरनाक होता है?

कोई भी शारीरिक समस्या होने पर यदि आप उसे लम्बे समय तक अनदेखा करते हैं तो वो समस्या उतना ही ज्यादा शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालती है साथ ही उसका इलाज़ भी लम्बे समय तक चलता है। वैसे ही यदि यूरिन में जलन होने की समस्या को अनदेखा किया जाये तो यह भी बढ़ सकती है जिसकी वजह से बाद में आपको ज्यादा दिक्कत महसूस हो सकती है ऐसे में आपको यूरिन में जलन होने पर इसका सही कारण प्र करके जल्द से जल्द उपचार करना चाहिए ताकि आपको किसी तरह की दिक्कत नहीं हो।

यूरिन में जलन महसूस होने के कारण?

महिलाओं को यदि यूरिन पास करते समय जलन महसूस होती है तो इस समस्या के होने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे की:

यूटीआई (Urinary tract infection)

यूटीआई एक ऐसी समस्या है जिसमे महिला को जिस रास्ते यूरिन आता है उस रास्ते में संक्रमण हो जाता है जिसकी वजह से यूरिन पास करते समय जलन होना, यूरिन के सतह हल्का ब्लड आना, पीठ में दर्द, पेट में दर्द आदि की समस्या भी हो सकती है।

पानी की कमी

शरीर में पानी की कमी का होना बहुत सी बिमारियों का कारण बनता है इसीलिए स्वस्थ रहने के लिए पानी का भरपूर सेवन करना बहुत जरुरी होता है। लेकिन यदि महिला पानी का भरपूर सेवन नहीं करती है तो इसकी वजह से महिला को यूरिन पास करते समय जलन महसूस होने के साथ यूरिन कम आने की समस्या भी हो जाती है।

प्राइवेट पार्ट की साफ सफाई नहीं रखने के कारण

यदि महिला अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई नहीं रखती है तो इसकी वजह से प्राइवेट पार्ट में बाद बैक्टेरिया बढ़ जाता है। जिसके कारण प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन हो जाता है और इन्फेक्शन के बढ़ने की वजह से ही खुजली, जलन की समस्या हो जाती है और उसके बाद धीरे धीरे इन्फेक्शन ज्यादा बढ़ने लगता है इसीलिए यूरिन पास करते समय भी जलन महसूस होने लगती है।

किडनी स्टोन

यदि आपको किडनी में स्टोन की समस्या है तो भी आपको यूरिन में जलन महसूस हो सकती है क्योंकि किडनी से यूरिन का सीधा संपर्क होता है ऐसे में जब भी आपको यूरिन पास करते हैं तो आपको जलन महसूस हो सकती है।

खुशबू वाली चीजों का अधिक इस्तेमाल करने के कारण

यदि महिलाएं प्राइवेट पार्ट के लिए ज्यादा खुशबू वाली चीजों का इस्तेमाल करती है तो इसकी वजह से प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है जिसकी वजह से महिला को यूरिन में जलन आदि की समस्या भी हो सकती है।

यूरिन में जलन की समस्या से बचाव के उपाय

  • यदि आपको यूरिन करते समय जलन महसूस होती है तो आपको यूटीआई की जांच करवानी चाहिए और उसका इलाज करवाना चाहिए।
  • जिन महिलाओं को किडनी में स्टोन होने के कारण यह परेशानी होती है तो उन महिलाओं को किडनी में स्टोन होने की समस्या का इलाज करवाना चाहिए।
  • शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें ताकि आपको इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकें।
  • प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का खास ध्यान रखें ताकि आपको यूरिन में जलन की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सकें।
  • ज्यादा खुशबूदार चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं यूरिन में जलन होने के कारण व् इस परेशानी से बचे रहने के कुछ उपाय, तो यदि आपको भी ऐसी कोई परेशानी होती है तो इसे अनदेखा नहीं करें। क्योंकि यदि यह समस्या बढ़ती है तो इसकी वजह से आपको ज्यादा दिक्कत हो सकती है ऐसे में जल्द से जल्द इस समस्या का इलाज़ करवाएं।

Causes of burning and painful urination in women