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प्रेगनेंसी में पालक पनीर खाने के फायदे

गर्भवती महिला को पालक और पनीर का सेवन करने की सलाह प्रेगनेंसी के दौरान दी जाती है क्योंकि इनका अलग अलग सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। लेकिन आप चाहे तो इनके फायदे को दुगुना कर सकती है यानी जब पालक और पनीर को मिला दिया जाये तो इसके फायदे दुगुने हो जाते हैं जिससे माँ व् बच्चे दोनों को दुगुना फायदा मिलता है।

ऐसे में पालक पनीर की सब्ज़ी बनाकर प्रेग्नेंट महिला को उसका सेवन जरूर करना चाहिए या फिर महिला इसका सूप भी बना सकती है। ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है साथ ही महिला की जीभ के स्वाद को सही करने में भी मदद मिलती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में पालक पनीर का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं।

आयरन

पनीर और पालक दोनों ही आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं। ऐसे में पालक पनीर का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। व् खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से माँ व् बच्चे को बचे रहने में मदद मिलती है।

फोलिक एसिड

पालक और पनीर में फोलिक एसिड भी मौजूद होता है ऐसे में दोनों को साथ मिलाने से फोलिक एसिड की मात्रा भी दुगुनी हो जाती है। जो गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बहुत फायदेमंद होती है जिससे गर्भ में पल रहे शिशु की दिमागी विकास व् रीढ़ की हड्डी के बेहतर विकास में मदद मिलती है। साथ ही जन्म के समय शिशु को होने वाली परेशानियों से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

कैल्शियम

पालक और पनीर दोनों ही कैल्शियम का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं। ऐसे में पालक पनीर का सेवन करने से गर्भवती महिला की हड्डियों को दुगुनी मजबूती मिलने के साथ बच्चे की हड्डियों व् दांतों के विकास को भी दुगुनी तेजी से होने में मदद मिलती है।

फाइबर

पालक पनीर दोनों में ही फाइबर भी मौजूद होता है जो गर्भावस्था के दौरान महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो प्रेग्नेंट महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु को पालक पनीर का सेवन करने से मिलते हैं। ऐसे में माँ व् बच्चे को मिलने वाले इन दुगुने फायदों के लिए महिला को पालक पनीर का सेवन जरूर करना चाहिए। लेकिन इस बात का ध्यान रखें की पालक को अच्छे से धोने के बाद ही खाने के लिए प्रयोग में लाएं और पनीर भी अच्छी क़्वालिटी का इस्तेमाल करें।

प्रेगनेंसी के तीसरे महीने तक इन 10 चीजों को नहीं खाएं

प्रेगनेंसी जैसे ही कन्फर्म होती है वैसे ही हर कोई आपको प्रेगनेंसी में क्या करना चाहिए क्या नहीं, क्या खाना चाहिए क्या नहीं, आदि की सलाह देने लग जाता हैं। क्योंकि प्रेगनेंसी के नौ महीने महिला के लिए बहुत अहम होते हैं और इस दौरान महिला के गर्भ में एक नन्ही जान पल रही होती है जो पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करती है। ऐसे में माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें और दोनों को किसी भी तरह की परेशानी न हो इसके लिए इन सभी बातों का ध्यान रखना भी जरुरी होता है।

वैसे तो प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने बहुत अहम होते हैं लेकिन प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने महिला के लिए बहुत ज्यादा अहम होते हैं। क्योंकि इस समय प्रेगनेंसी की शुरुआत होती है, तेजी से बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को शारीरिक परेशानियां भी अधिक होती है, बच्चे के अंगो की आकृतियां बन रही होती हैं, आदि। ऐसे में महिला यदि किसी भी तरह की लापरवाही करती है तो इसका सबसे ज्यादा बुरा असर गर्भ पर पड़ता है।

ऐसे में जरुरी होता है की प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला अपना बहुत ज्यादा ध्यान रखें। तो आइये इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे आहार के बारे में बताने जा रहे हैं जो प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को नहीं खाने चाहिए क्योंकि इससे बच्चे को नुकसान पहुँच सकता है।

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीनों में क्या नहीं खाएं?

गर्भावस्था के पहले तीन महिलाओं में महिला को कुछ ऐसे आहार है जिनका सेवन करने से गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास पर बुरा असर पड़ने के साथ गर्भपात का भी खतरा होता है। तो ऐसे में उन खाद्य पदार्थों का सेवन गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए आइये अब जानते हैं की वो खाद्य पदार्थ कौन से हैं।

जंक फ़ूड

जंक फ़ूड को बनाने के लिए बहुत से ऐसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है जो पेट में बच्चे के विकास में रुकावट पैदा कर सकते हैं। साथ ही इसमें किसी भी तरह के पोषक तत्व नहीं होते हैं ऐसे में जंक फ़ूड का सेवन महिला को नहीं करना चाहिए।

कच्चे अंडे व् कच्चा मास

साल्मोनेला, लिस्टेरिया व् अन्य बहुत से बैड बैक्टेरिया कच्चे अंडे व् कच्चे मास में मौजूद होते हैं। जो प्रेग्नेंट महिला को डायरिया व् इन्फेक्शन जैसी परेशानी से ग्रसित कर सकते हैं साथ ही यह बैक्टेरिया बच्चे विकास को रोक सकते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को कच्चे अंडे व् मास का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

मर्करी युक्त मछली

मर्करी युक्त मछली या अन्य किसी चीज जैसे की चाइनीज़ फ़ूड का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि मर्करी युक्त भोजन का सेवन करने से बच्चे के विकास पर बुरा प्रभाव पड़ता है जिससे बच्चे के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी आ सकती है।

डिब्बाबंद खाना

काफी दिनों तक डिब्बाबंद आहार सही रहे इसके लिए उन्हें बनाने के लिए तरह तरह के केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है। और केमिकल युक्त आहार का सेवन करना प्रेग्नेंट महिला के लिए नुकसानदायक हो सकता है। साथ ही यह केमिकल बच्चे के लिए भी बहुत खतरनाक होता है।

कच्चा या पका पपीता

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में गर्भवती महिला को कच्चा या पका कोई भी पपीता नहीं खाना चाहिए। क्योंकि इसमें लेटेक्स की मात्रा मौजूद होती है जो महिला के गर्भापत का कारण बनती है।

नशीले पदार्थ

प्रेगनेंसी के तीसरे महीने तक किसी भी तरह के नशीले पदार्थ जैसे की अल्कोहल, तम्बाकू आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इनका सेवन करने से महिला का गर्भपात हो सकता है।

ड्राई फ्रूट्स

ड्राई फ्रूट्स की तासीर गर्म होती है और गर्म चीजों का सेवन करने से गर्भपात होने का खतरा रहता है। ऐसे में ड्राई फ्रूट्स व् अन्य खाद्य पदार्थ जिनकी तासीर गर्म होती है उनका सेवन प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए।

कच्ची अंकुरित चीज़ें न खाएं

गर्भावस्था की में कच्ची अंकुरित चीज़ें खाने से बचना चाहिए। क्योंकि कच्ची अंकुरित दालों में साल्मोनेला, लिस्टेरिया, ई कोलाई जैसे बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जिससे फ़ूड प्वॉयज़निंग, उल्टी या दस्त की शिकायत हो सकती है और मां के साथ साथ शिशु की सेहत को भी नुकसान पहुंच सकता है।

क्रीम दूध या उससे बना पनीर न खाएं

प्रेग्नेंट महिला को क्रीम वाला दूध व् उससे बने पनीर को नहीं खाना चाहिए। क्योंकि इसमे लिस्टेरिया नाम का बैक्टीरिया मौजूद होता है। और इस बैक्टीरिया के कारण गर्भपात और समय से पहले बच्चे के जन्म का खतरा बढ़ सकता है।

बिना धुले हुए सब्ज़ियां और फल न खाएं

बिना धुली हुई सब्ज़ी, फल आदि में टॉक्सोप्लाज़्मा नाम का बैक्टीरिया मौजूद हो सकता है, जिससे शिशु के रुकावट आती है। ऐसे में गर्भवती महिला को किसी भी फल या सब्ज़ी का सेवन करने से पहले उसे जरूर धोना चाहिए।

तो यह हैं कुछ आहार जिनका सेवन प्रेग्नेंट महिला को पहले तीन महीनों में नहीं करना चाहिए। क्योंकि इनका सेवन करने से बच्चे पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन गर्भवती महिला को उन खाद्य पदार्थों का सेवन भरपूर करना चाहिए जो माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

कम उम्र में माँ बनने से होती हैं ये समस्या?

माँ बनना किसी भी महिला के लिए दूसरे जन्म जैसा होता है, क्योंकि इस दौरान वो जिंदगी के नए अनुभवों से गुजरने के साथ शरीर में भी तेजी से हो रहे बदलाव को भी देखती है, ऐसे में यदि माँ बनने में बारे में बात की जाएँ तो हर महिला की इस बारे में अपनी अलग अलग राय है, कुछ महिलाओ का मानना है की शादी के बाद जितना जल्दी बच्चा हो जाये तो उतना अच्छा है, लेकिन कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो तीस वर्ष के बाद माँ बनने के बारे में सोचना शुरू करती हैं, देखा जाएँ तो माँ बनने की सही उम्र जो की डॉक्टर्स के अनुसार भी बताई गई है, वो है तेईस से सताइस साल, लेकिन जो महिला तीस में शादी करेगी या अठारह वर्ष में शादी करेगी तो उसे प्रेगनेंसी भी उसी अनुसार ही होगी।

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और ये बात भी बिलकुल सच है की जितनी परेशानी आपको अधिक उम्र में माँ बनने से होती है उतनी ही आपको कम उम्र में माँ बनने पर भी होती है, क्योंकि माँ बनने के लिए आपका शारीरिक रूप से तैयार होना बहुत जरुरी होता है, लेकिन यदि आप अठारह में शादी करके उन्नीस साल में माँ बनने पर विचार कर रहीं है, तो आपका शरीर उस समय अच्छे से परिपक्व नहीं होता है, उसके बाद आप बच्चे को जन्म दे तो देती है, लेकिन इसका असर कई बार आपके बच्चे पर पड़ता है, और आप में तो कमजोरी आ ही जाती है, साथ ही बच्चे को संभालना ऐसे में कई महिलायें तनाव में भी आ जाती है, तो आइये जानते है की कम उम्र में माँ बनने पर कौन कौन सी समस्या हो सकती है।

शरीर में कमजोरी होने लगती है:-

शरीर में प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले हॉर्मोन के बदलाव, व् प्रेगनेंसी में होने वाली समस्या के कारण वैसे भी आपका शरीर कमजोर हो जाता है, ऊपर से कम उम्र में माँ बनने पर आपके शरीर के परिपक्व न होने के कारण आपको प्रेग्नेंसी में और बाद में भी हमेशा कमजोरी व् थकान महसूस होती है, इससे बचने के लिए आपको प्रेगनेंसी के समय और बाद में अपने शरीर पर अधिक ध्यान देना पड़ता है, नहीं तो आप और कमजोर हो जाते है।

डिप्रेशन हो सकता है:-

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महिलाएं कम उम्र में माँ बनने पर इतनी तेजी से हो रहे बदलाव को लेकर कई बार बहुत परेशान हो जाती है, जिसके कारण उन्हें डिप्रेशन हो सकता है, और उसके स्वाभाव में भी परिवर्तन आता है, कई बार चिड़चिड़ापन, गुस्सा आदि भी महिलायें करने लगती है, और बच्चा होने के बाद अपना ध्यान रखा जाएँ या बच्चे का इस चक्कर में वो न तो अपना ध्यान रख पाती है और न हो बच्चे का जिससे दोनों को ही परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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बच्चे के विकास पर असर पड़ता है:-

कम उम्र में माँ बनने पर महिला का शरीर पूरी तरह परिपक्व नहीं होता है, जिससे महिला के शरीर में पोषक तत्वों की भी कमी होती है, और गर्भ में पल रहा शिशु पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है, और यदि महिला ही पुरु तरह से फिट नहीं होती है, तो इसका असर शिशु पर भी पड़ता है, जिसके कारण कई बार बच्चे का विकास कम होता है, जैसे की जन्म के बाद बच्चे का वजन कम होता है, इसीलिए महिला को बच्चे को जन्म देने से पहले अपने शरीर की जांच अच्छे से करवानी चाहिए जिससे पता चल सकें की महिला शारीरिक रूप से बच्चे को जन्म देने के लिए तैयार है या नहीं।

बच्चे के पालन पोषण में आ सकती है समस्या:-

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कम उम्र में माँ बनने के कारण कई बार बच्चे को उस तरह से पालन पोषण नहीं मिल पाता है, और उतने अच्छे से बच्चे की केयर नहीं हो पाती है जितनी की होनी चाहिए, जिसका असर शिशु पर पड़ता है, और यदि उसे समय पर दूध नहीं मिलता है, या माँ क दूध से पेट नहीं भर पाता है तो बच्चे बहुत रोता है, चिड़चिड़ा हो जाता है, साथ ही बच्चे के लिए यदि साफ़ सफाई का ध्यान न रखा जाएँ तो उसे इन्फेक्शन की समस्या भी हो सकती है, ऐसे में कम उम्र में माँ बनने का निर्णय तभी लेना चाहिए जब शारीरिक रूप से फिट होने के साथ आप शिशु की परवरिश भी अच्छे से कर सकती हों।

शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है:-

कम उम्र में माँ बनने के कारण वैसे भी आपका शरीर अच्छे से तैयार नहीं होता है, इसके अलावा कई बार आपका आहार ढंग से न लेना, अच्छे से अपनी केयर न करना, तनाव में रहने के कारण आपके शरीर को अच्छे से पोषण नहीं मिल पाता है जिसके कारण आपके शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है, इसीलिए यदि आप कम उम्र में माँ बनने के बारे में सोच भी रहीं है तो ऐसे में आपको अपने खान पान, अपने पोषण में किसी भी तरह की कोई न तो कमी रखनी चाहिए और न ही किसी तरह की लापवाही करनी चाहिए।

माँ बनने से पहले इन बातों का ध्यान जरूर रखें:-

  • जब तक आप मानसिक व् शारीरिक रूप से बच्चे को जन्म देने के लिए फिट न हो तब तक इस फैसले को नहीं लेना चाहिए।
  • माँ बनने के लिए एक उम्र होती है इसीलिए माँ बनने के लिए न तो कम उम्र का चुनाव करें और न ही बहुत ज्यादा क्योंकि दोनों ही तरीको से आपको नुकसान होता है।
  • जब भी आप माँ बनने का फैसला लें, तो उस समय आपको अपने शरीर की जांच जरूर करवानी चाहिए, ताकि आपको प्रेगनेंसी के दौरान कोई समस्या न आए।
  • माँ बनने के बारे में विचार करने से पहले इस बात का भी आपको ध्यान रखना चाहिए की क्या आप शिशु की परवरिश अच्छे से कर सकती हैं या नहीं।
  • इस विषय में पति और पत्नी दोनों को मिलकर विचार करना चाहिए।
  • आप चाहे तो इस विषय पर एक बार डॉक्टर का भी परामर्श ले सकते है।

तो ये कुछ परेशानियां है जो आपको कम उम्र में माँ बनने के कारण हो सकती है, इसीलिए जब तक आप मानसिक व् शारीरिक रूप से तैयार न हो, डॉक्टर से जांच न करवाई हो, और इसके अलावा आपको इस बारे में भी विचार करना चाहिए की क्या आप शिशु की देखभाल अच्छे से कर सकती हैं, या नहीं उसके बाद ही आपको माँ बनने का निर्णय लेना चाहिए।

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हैरान हो जाएंगे नारियल खाने के फायदे जानकर

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नारियल का इस्तेमाल भारतीय संस्कृति में पूजा के लिए किया जाता है, और इसे श्रीफल के नाम से भी जाना जाता है, परन्तु इसका पूजा में जितना महत्व है, क्या आप जानते हैं की इसे खाने से भी आपको बहुत फायदे होते है, नारियल में विटामिन, पोटैशियम, मग्नेशियम, फाइबर, कैल्शियम और भी बहुत से खनिज बहुत अधिक मात्रा में पायें जाते है, जिससे आपको सेहत सम्बन्धी बहुत से फायदे होते है, इसका सेवन करने से आपके शरीर को बीमारियों से निजत पाने में मदद मिलती है, ये केवल बडो के लिए ही नहीं बल्कि बच्चों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है, इसीलिए आपको बच्चो को भी इसका सेवन करवाना चाहिए।

नारियल ही नहीं बल्कि नारियल के पानी का सेवन करने से भी आपको बहुत से फायदे होते है, और ये भी कहा जाता है, की यदि गर्भवती महिला नारियल का सेवन करती है, तो इसका सेवन करने से बच्चे का रंग भी गोरा होता है, जो महिलाएं मोटापे की समस्या से परेशान होती है उनकी वजन से हदी समस्या को हल करने में भी ये मदद करता है, इसकी तासीर ठंडी होती है इसीलिए जिन बच्चों या बडो को नकसीर की समस्या होती है, उससे भी ये निजात दिलाने में मदद करता है, ऐसे बहुत से फायदे हैं, जो नारियल का सेवन करने से होते है, तो आइये अब विस्तार से जानते है की नारियल का सेवन करने से क्या क्या फायदे होते है।

महिलाओं को अश्वगंधा खाने के फायदे

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अश्वगंधा को आयुर्वेद में एक औषधि मानते है। अश्वगंधा का पौधा कई बीमारियों को जड़ से ख़त्म करता है।

आयुर्वेद में अश्वगंधा की जड़ो और पत्तियों से चूर्ण की गोलियां और कैप्सूल्स बनाये जाते है।

आम भाषा में अश्वगंधा को इंडियन जिनसेंग और इंडियन चेरी भी कहते है।

अश्वगंधा से महिलाओं को मिलने वाले लाभ

अभी तक हमने पढ़ा है के अश्वगंधा खाने से पुरुषों को बहुत फायदा मिलता है, लेकिन आज हम जानेंगे अश्वगंधा के सेवन से महिलाओं को भी बहुत से फायदे मिलते है।

यौन शक्ति व यौन रोग

  • आमतौर ये सुनने में आता है के अश्वगंधा पुरुषों की यौन शक्ति को बढ़ाने के काम आता है,  परन्तु ऐसा नहीं है ये महिलाओं की भी यौन शक्ति को बढ़ाता है।
  • अश्वगंधा के सेवन से महिलाओं को कई यौन रोगों में भी लाभ होता है।
  • महिलाओं में सफ़ेद पानी आना बहुत आम रोग है, अश्वगंधा औषधि के सेवन से इस रोग से निजात मिलती है।

कैंसर का उपचार

  • कैंसर जैसी बीमारी में भी अश्वगंधा बहुत असरकारी है।
  • एक रिसर्च में सामने आया है, अश्वगंधा एंटी ट्यूमर गुणों से भरपूर है।
  • अश्वगंधा का सेवन कीमोथेरपी के दौरान होने वाले दुष्परिणामों से भी बचाता है।

मानसिक तनाव या स्ट्रेस

  • अश्वगंधा एंटीस्ट्रेस गुणों से युक्त है।
  • आजकल लोग ज्यादा मानसिक तनाव से ग्रस्त रहते है। ऐसे में अश्वगंधा का सेवन बहुत लाभदायक है।

जवां दिखना

  • किस महिला को शोक नहीं होता अपनी उम्र से काम दिखने का, अश्वगंधा आपकी झुर्रियों को कम करता है।
  • अश्वगंधा का सेवन हमारे शरीर में बनने वाले कोर्टिसोल नामक होर्मोनेस के उत्पादन को कम करता है, जिससे झुर्रियां कम होती है।
  • अश्वगंधा में एंटीऑक्सीडेंट उच्च स्तर पर होता है, जो की हमारी त्वचा के कालेपन, दाग, धब्बे और लाइन्स को कम करता है।

मीनोपॉज

  • मीनोपॉज के दौरान महिलाएं अक्सर तनाव और चिंता से ग्रस्त हो जाती है।
  • एक रिसर्च में यह बताया गया है की अश्वगंधा मीनोपॉज में एक प्रभावी जड़ी बूटी है।

डायबिटीज

  • आयुर्वद में अश्वगंधा को डायबीटीज के इलाज में एक रामबाण औषधि माना गया है।
  • इसका पत्ते और चूर्ण कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करते है।
  • इसका नियमित सेवन डायबिटीज की बीमारी से छुटकारा दिला सकता है।

थाइरोइड

  • थाइरोइड, शरीर में होर्मोनेस इम्बैलेंस के कारण होता है।
  • अश्वगंधा होर्मोनेस का संतुलन ठीक करता है, जिससे थाइरोइड से निजात मिल सकती है।

इम्युनिटी बढ़ाना

  • अश्वगंधा महिलाओं की इम्युनिटी भी बढ़ाता है।
  • इसके उपयोग से महिलाओं की रोगों से लड़ने कि शक्ति बढ़ जाती है।

हाइपरटेंशन

  • अश्वगंधा ब्लड को प्यूरीफाय करता है।
  • रेड व वाइट ब्लड सेल्स का उत्पादन करता है।
  • रक्त संचार को सही करता है। जिससे हाइपरटेंशन और बी पी  जैसी समस्या से निजात मिलती है।

बालों की खूबसूरती

  • अश्वगंधा का प्रयोग जड़ो में रक्त संचार को बढ़ाता है।
  • बालों को पर्याप्त पोषण भी देता है, जिससे बाल जड़ो से मजबूत होते है।
  • डैंड्रफ को भी काम करता है।
  • स्कैल्प सायरोसिस जैसी समस्याओं से भी निजात दिलाता है।
  • अश्वगंधा के नियमित इस्तेमाल से खूबसूरत व स चमकदार बाल मिलते है।

तो हमने देखा अश्वगंधा से पुरुषो को ही नहीं महिलाओं को भी बेहद लाभ मिलते है।

परन्तु किसी भी चीज की अति हमे नुक्सान दे सकती है। इसीलिए अश्वगंधा का सेवन किसी भी बीमारी के लिए करने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर परामर्श ले।

प्रेग्नेंट होते ही अपनी इन 15 आदतों को छोड़ दें

प्रेगनेंसी गर्भवती महिला के लिए बहुत ही बेहतरीन समय होता है लेकिन साथ ही इस दौरान महिला को बहुत सी चीजों का ध्यान भी रखना पड़ता है। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके व् बच्चे का विकास भी प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही बेहतर तरीके से हो। इस दौरान महिला को अपनी आदतों में बदलाव, दिनचर्या में बदलाव, खाने पीने के तरीके में बदलाव आदि भी करने पड़ते हैं। साथ ही आपकी कुछ ऐसी आदतें और काम भी होते जो आपको गर्भवती होते ही छोड़ देने चाहिए। क्योंकि उसके कारण महिला व् बच्चे को नुकसान होता है। तो आइये अब जानते हैं की ऐसी कौन सी आतें हैं जिन्हे महिला को प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही छोड़ देना चाहिए।

सुबह देरी से उठना

यदि आप सुबह देरी से उठती है तो प्रेग्नेंट होने पर आपको अपनी इस आदत में बदलाव करना चाहिए। क्योंकि देरी से उठने के कारण आपकी दिनचर्या पर बुरा प्रभाव पड़ता है। जो गर्भवती महिला के लिए सही नहीं होता है।

खाली पेट चाय पीना

अधिकतर महिलाओं की सुबह उठते ही खाली पेट चाय पीने की आदत होती है लेकिन प्रेग्नेंट होते ही आपको अपनी इस आदत में बदलाव करना चाहिए। क्योंकि खाली पेट चाय पीने से महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियां अधिक हो सकती है।

पेन किलर का सेवन

बॉडी के किसी भी हिस्से में दर्द होते ही यदि आपकी पेन किलर लेने की आदत है तो आपको अपनी इस आदत में भी बदलाव करना पड़ेगा। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान बिना डॉक्टरी परामर्श के किसी भी दवाई का सेवन बच्चे के विकास को नुकसान पहुंचा सकता है।

जंक फ़ूड

ज्यादा लोगो की खाने में पहली पसंद जंक फ़ूड ही होता है लेकिन प्रेग्नेंट होते ही आपको जंक फ़ूड, बाहर का खाना, स्ट्रीट फ़ूड, ज्यादा तेल मसाले वाला आहार सबको छोड़ना होगा, क्योंकि यह महिला की सेहत व् बच्चे के विकास दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है।

स्मोकिंग अल्कोहल

यदि आपकी धूम्रपान या शराब पीने की आदत है तो गर्भधारण के बाद आपको अपनी इस आदत को छोड़ना होगा। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान नशीले पदार्थों का सेवन माँ व् बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचाता है।

बासी या कटी पड़ी चीजों का सेवन करने

कई बार ऐसा होता है की भूख लगने पर जो भी फ्रिज में रखना सामान या वैसे घर में रखी कोई भी चीज आपके सामने होती है। तो आप उसे खा लेती है ऐसे में गर्भधारण के बाद आपको अपनी इस आदत में बदलाव करना चाहिए। क्योंकि ऐसे रखी किसी भी चीज का सेवन, बासी भोजन आपकी सेहत व् बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।

किसी भी शादी पार्टी में चले जाना

घर में जब भी किसी शादी या पार्टी का इनविटेशन आने पर यदि आप तुरंत उस प्रोग्राम में जाने के लिए तैयार हो जाती हैं। तो आपको अपनी इस आदत में बदलाव करना चाहिए क्योंकि प्रेग्नेंट होने पर भीड़भाड़ या शोरशराबे वाली जगह पर जाना बच्चे के विकास पर बहुत बुरा असर डाल सकता है।

ज्यादा मीठा खाना

ज्यादा मीठा खाना भी गर्भावस्था के दौरान बहुत ही हानिकारक होता है क्योंकि इसके कारण वजन बढ़ना, गेस्टेशनल डाइबिटीज़ जैसी परेशानी हो सकती है। इसीलिए गर्भधारण होते ही आपको ज्यादा मीठे के सेवन से भी परहेज करना चाहिए।

ज्यादा नमक खाना

यदि आपकी तेज नमक खाने की आदत है तो प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही आपको अपनी इस आदत में बदलाव करना चाहिए। क्योंकि ज्यादा नमक खाने से गर्भवती महिला को है ब्लड प्रैशर की समस्या होती है, साथ ही ज्यादा मिर्च का सेवन करने से पेट से सम्बंधित परेशानियां भी बढ़ सकती है।

जिम करना

फिट रहने के लिए यदि आप जिम, एरोबिक्स, कार्डियो आदि करती हैं तो गर्भधारण के तुरंत बाद आपको इन सब्जी को बंद कर देना चाहिए। क्योंकि इसके कारण आपको परेशानी हो सकती है।

डाइट करना

वजन कम करने के लिए यदि आप डाइट कर रही हैं तो आपको गर्भधारण के तुरंत बाद अपनी इस आदत में बदलाव करना होगा। और डाइट करने की बजाय पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए ताकि माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

तनाव लेना

यदि आपकी छोटी छोटी बातों को पर टेंशन लेने की आदत है तो गर्भधारण होते ही आपको इस आदत को बदलना होगा। और टेंशन लेने की बजाय खुश कैसे रहे इसके बारे में सोचना होगा।

छोटी छोटी दिक्कत को अनदेखा करना

कई बार होता है की यदि आपको बॉडी में कहीं दर्द होता है या अन्य कोई शारीरिक परेशानी होती है तो आप जल्दी से डॉक्टर के पास नहीं जाते हैं। लेकिन गर्भधारण करते ही बॉडी में कोई भी समस्या होते ही आपको एक बार डॉक्टर से मिलने जरूर जाना पड़ेगा।

जल्दी जल्दी काम करना

कुछ महिलाओं की आदत होती है की वो अपने काम को बहुत जल्दी जल्दी करती हैं। लेकिन गर्भधारण के बाद आपको कोई भी काम करते समय बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है क्यों थोड़ी सी भी लापरवाही आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।

रात को देरी से सोना

रात को देरी से सोना सेहत के लिए बहुत हानिकारक होता है ऐसे में यदि आपकी यह आदत है तो गर्भधारण के बाद तुरंत अपनी इस आदत को आपको बदलना होगा। और रात को समय से सोने के साथ भरपूर नींद लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ आदतें जिनमे महिला को प्रेग्नेंट होते ही बदलाव कर देना चाहिए। क्योंकि इन आदतों के कारण गर्भवती महिला को परेशानी हो सकती है। साथ ही गर्भ में शिशु के विकास में भी दिक्कत हो सकती है। ऐसे में आपकी प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स न आएं इसके लिए गर्भवती महिला को अपनी इन आदतों में बदलाव करना चाहिए।

क्या आपको पता है? ग्रीन टी कब कब नहीं पीनी चाहिए

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ग्रीन टी का सेवन आज के समय में लोग बहुत अधिक कर रहे है, कुछ लोग इसका सेवन अपने स्वास्थ्य को सही रखने के लिए, तो कुछ लोग अपने वजन को कम करने के लिए, तो कुछ अपनी त्वचा को खूबसूरत बनाने के लिए भी इसका इस्तेमाल करते है, साथ ही इसके इस्तेमाल से आपको बालों को भी स्वस्थ और सूंदर बनाया जा सकता है, परंतु क्या आप जानते है की यदि आप ग्रीन टी का सेवन यदि आप अधिक और गलत समय पर करते है तो ये आपके लिए नुकसानदायक भी हो सकता है।

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ग्रीन टी में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स जहां आपकी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकते है, जैसे की आपका वजन घटाने, आपको रोगो से लड़ने के लिए सक्षम बनाने के लिए, आपकी मेमोरी को बढ़ाने के लिए आपके बाली को घना बनाने के लिए, आपकी त्वचा को खूबसूरत बनाने के लिए, साथ ही ये आपकी रक्तचाप को सही करती है, दिल किडनी और दांतों के रोगो के नियंत्रित करने में भी आपकी ये बहुत मदद करती है, परंतु इसका सेवन दिन में दो से तीन कप ही बहुत होता है,

परंतु यदि आप इसका सेवन दिन में पांच या चाह या उससे ज्यादा बार करते है, तो ये आपके लिए नुकसानदायक भी हो सकता है, क्योंकि इसके कारण आपको अनिद्रा, चिंता, चिड़चिड़ापन और शरीर में आयरन की कमी जैसी समस्या हो सकती है, इसके अलावा आपको ग्रीन टी का सेवन कुछ ऐसे पदार्थ है जिनके बाद बिलकुल भी नहीं करना चाहिए, तो आइये आपको बताते है की किन किन चीजों के बाद आपको ग्रीन टी का सेवन नहीं करना चाहिए।

गर्भावस्था के समय गर्भवती महिला न करे ग्रीन टी का सेवन:-

गर्भवती महिलाओ को ग्रीन टी का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए, क्योंकि ग्रीन टी में कैफीन और टॉनिक एसिड होता है, जो की गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।

खाली पेट नहीं करें ग्रीन टी का सेवन:-

ग्रीन टी का सेवन कभी भी खाली पेट नहीं करना चाहिए, क्योंकि यदि आप ग्रीन टी का सेवन खाली पेट करते है तो इसके कारण आपको एसिडिटी की समस्या हो सकती है. इसीलिए जितना हो सकें खाली पेट ग्रीन टी का सेवन करने की बजाय सौंफ को पानी उबाल कर उसका सेवन करें।

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भोजन के तुरंत बाद न करें ग्रीन टी का सेवन:-

जो लोग अपना वजन घटाना चाहते है और अपने आप को फिट रखना चाहते है वो भी खाना खाने के तुरंत बाद ग्रीन टी का सेवन करते है, परंतु क्या आप जानते है की खाना खाने के तुरत बाद ग्रीन टी का सेवन करने से आपको फायदा नहीं तो नहीं परंतु नुकसान जरूर होता है, क्योंकि इसके कारण आपकी पाचन शक्ति, और भोजन के पोषक तत्व अवशोषित हो जाते है, जिसके कारण शरीर को जरुरी मिनरल्स नहीं मिलते है।

देर रात न करें इसका सेवन:-

कई लोग जो रात को सोने से पहले ग्रीन टी का सेवन करते है, उन्हें भी ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से ग्रीन टी में मौजूद कैफीन होने के कारण आपकी नींद के भाग जाने की समस्या उत्त्पन्न हो जाती है, साथ ही इसके कारण कई बार अचानक से नींद न आने के कारण सिर में भी दर्द शुरू हो जाता है।

किसी भी दवाई के सेवन के बाद:-

यदि आप किसी भी दवाई का सेवन करते है चाहे वो आपकी बिमारी से सम्बंधित हो या आपने सिर दर्द के लिए कोई पेन किलर लिए हो उसके बाद आपको ग्रीन टी का सेवन नहीं करना चाहिए, ये आपकी सेहत को प्रभावित कर सकता है।

ज्यादा स्ट्रांग न हो:-

ज्यादा स्ट्रांग ग्रीन टी का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यदि आप ज्यादा स्ट्रांग ग्रीन टी यानि ज्यादा कड़वी और तेज ग्रीन टी का सेवन करते है, तो इसके कारण आपको पेट की खराबी, चक्कर, और रात को नींद न आने जैसी समस्या हो जाती है, इसीलिए ज्यादा स्ट्रांग ग्रीन टी का सेवन नहीं करना चाहिए।

उबाल कर न पीएं:-

आपको कभी भी उबलते पानी में ग्रीन टी नहीं डालनी चाहिए, क्योंकि इसके सेवन से आपको एसिडिटी की समस्या हो जाती है, यदि आपको ग्रीन टी का सेवन करना ही है, तो इसके लिए आपको पानी को अच्छे से उबाल कर नीचे रख कर उसके टी बैग या ग्रीन टी की पत्तियां डाल कर उसके बाद छान कर इस चाय का सेवन करना चाहिए।

तो ये कुछ चीजें है जिनके बाद आपको ग्रीन टी का सेवन नहीं करना चाहिए, कोई भी चीज सही समय पर आपके लिए जितना फायदा करती है, यदि आप उसे असमय लेते है तो वो आपके लिए नुकसान दायक भी हो सकती है, इसीलिए आपको ग्रीन टी पीने से पहले इन बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए, इसके अलावा ग्रीन टी से मिलने वाले फायदों को आप भी आप उठा सकते है यदि आप इसका सेवन सही समय पर करते है।

चेहरे के कालेपन को कैसे दूर करें ?

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आजकल के दौर में सुन्दर कौन नहीं बनना चाहता। अच्छे नयन नक्श के साथ यदि चमकती हुई त्वचा हो तो सुंदरता में चार चाँद लग जाते है।

सुंदरता एक इंसान की पर्सनालिटी को बहुत ही प्रभावित करता है।

पुरुष हो या महिला अच्छी पर्सनालिटी तो सभी को प्रभावित करती है। अच्छी पर्सनालिटी से सेल्फ कॉन्फिडेंस भी बढ़ता है।

अच्छी पर्सनालिटी में अगर कोई रूकावट आ सकती है तो वो है आपके चेहरे का कालापन। त्वचा का काला पड़ना एक बहुत ही आम समस्या है।

चेहरे के कालेपन के कारण

तो आइये सबसे पहले देखते है के चेहरे की त्वचा का काला पड़ जाने के क्या कारण हो सकते है ?

  • जो लोग अक्सर धुप में घर से बहार निकलते है, वह धुप से निकलने वाली यु वि रेज़ के कारण काले हो जाते है। यु वि रेज़ आपकी त्वचा को बहुत नुक्सान पहुंचाती है।
  • आजकल वातावरण इतना प्रदूषित हो चूका है के शुद्ध हवा ना के बराबर ही है। प्रदुषण हमारे कालेपन का मुख्य कारण है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान हार्मोनल चैंजेस होने से भी चेहरे की त्वचा काली पड़ जाती है।
  • कई बार जरुरत से ज्यादा ब्यूटी प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने से भी त्वचा काली पड़ जाती है।
  • त्वचा की सही देखभाल ना करने से भी त्वचा काली पड़ जाती है।
  • एक उम्र के बाद हार्मोनल बदलाव से भी चेहरे की त्वचा काली पड़ने लगती है।
  • लम्बी बिमारी के कारण भी त्वचा काली पड़ जाती है।

कालापन दूर करने के घरेलु उपाय

कालेपन के कारण जानने के बाद हमे अपनी त्वचा को ठीक करना होगा। चेहरे के कालेपन को दूर करने के लिए कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स से बेहतर है घरेलू उपाय।

चलिए देखते है कुछ आसान से उपाय जिन्हे अपनाकर हम अपने चेहरे के कालेपन को दूर कर सकते है।

  • घर से बाहर निकलते समय सन स्क्रीन लोशन का जरूर इस्तेमाल करें। जिससे यु वि रेज़ सीधा आपकी त्वचा पर ना पड़े।
  • अपने फेस को अच्छे से कवर करके ही घर से बाहर निकले।
  • घर वापस आकर फेस को गुलाब जल से साफ़ करें, इससे चेहरे की धूल मिट्टी निकल जाएगी।
  •  निम्बू के रस और पानी को बराबर मात्रा में मिलाकर चेहरे पर 20 मिनट तक लगाने से कालापन दूर होता है।
  •  कदूकस किया हुआ आलू और शहद का फेसपैक लगाने से कालापन दूर किया जा सकता है।
  • बेसन, शहद, दही या दूध का फेसपैक, धुप से आये हुए कालेपन को साफ़ करने में बहुत ही मददगार होता है।
  • रात को सोने से पहले चेहरा धो कर मॉइस्चरीज़ करना न भूले।
  • निम्बू, खीरा और गुलाब जल का फेसपैक लगाने से भी त्वचा की रंगत साफ़ हो जाती है।
  •  पपीते और शहद का फेसपैक भी चेहरे के कालेपन को दूर करता है।

तो आपने देखा घर बैठे ही कैसे आप अपनी त्वचा की रंगत कैसे वापस पा सकते है।

इनमे से आप कोई भी एक पैक का इस्तेमाल हर एक दिन छोड़कर एक दिन कर सकते है।

लेकिन जो लोग रोजाना बाहर आते जाते है, उन्हें इन उपायों के अतिरिक्त माह में एक बार ब्लीच और फेशियल भी जरूर करवाना चाहिए।

प्रेगनेंसी में दूध और केला खाना चाहिए या नहीं

दूध और केला खाना चाहिए या नहीं, प्रेगनेंसी के दौरान कुछ भी खाने या पीने से पहले उसकी अच्छे से जानकारी लेनी चाहिए। ताकि आपको अपने आहार के कारण प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। तो लीजिये आज हम प्रेगनेंसी के दौरान दूध व् केले का सेवन करना चाहिए या नहीं इस बारे में बात करने जा रहे हैं। क्योंकि ज्यादातर लोग ऐसा ही मानते हैं की दूध व् केले को साथ लेने से बॉडी को बहुत फायदा मिलता है। लेकिन प्रेग्नेंट महिला के लिए यह सही होता है या नहीं इसे जानना जरुरी होता है।

क्या प्रेग्नेंट महिला को दूध व् केले का सेवन करना चाहिए?

  • दूध में प्रोटीन, कैल्शियम, विटमिन्स आदि भरपूर होते है लेकिन विटामिन सी, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट आदि की मात्रा दूध में कम होती है।
  • केले में विटामिन सी, कार्बोहाइड्रेट, पोटैशियम, बायोटिन आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
  • ऐसे में दूध व् केले को मिलाने से आपको सभी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिल तो जाते हैं।
  • लेकिन सच तो यह हैं दूध व् केले का सेवन एक साथ करने से स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने का खतरा भी रहता है।
  • इसीलिए जितना हो सके गर्भवती महिला को दूध व् केले का सेवन एक साथ करने से बचना चाहिए।
  • हाँ लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला चाहे तो दूध व् केले का अलग अलग सेवन कर सकती है।
  • क्योंकि दूध व् केला दोनों पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद भी होते हैं।

दूध व् केले का सेवन साथ करने से होने वाले नुकसान

यदि प्रेग्नेंट महिला दूध व् केले का सेवन एक साथ करती है। तो इसके कारण महिला को बहुत सी स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को दूध व् केले का सेवन साथ करने से कौन सी दिक्कतें हो सकती है।

दूध और केला खाने से होती है पाचन तंत्र से जुडी समस्या

  • दूध व् केले का सेवन साथ करने से पाचन तंत्र पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है।
  • जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को उल्टियां, दस्त जैसी समस्याएँ हो सकती है।

दूध और केला खाने से होता है गले में इन्फेक्शन

  • दूध व् केले का सेवन साथ में करने से साइनस से जुडी समस्या हो सकती है।
  • जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को खांसी, कफ, सर्दी जैसी समस्या से परेशान होना पड़ सकता है।

दूध और केला खाने से पड़ता है दिमाग पर असर

  • यदि प्रेग्नेंट महिला दूध व् केले का सेवन एक साथ करती है।
  • तो इसके कारण प्रेग्नेंट महिला को शरीर में भारीपन महसूस हो सकता है।
  • जिसका असर मस्तिष्क पर भी देखने को मिल सकता है।
  • जिसके कारण मस्तिष्क की क्रियाएं धीमी पड़ सकती है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान केले व् दूध के सेवन से जुड़े कुछ टिप्स। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और प्रेगनेंसी के दौरान केले व् दूध का सेवन एक साथ करने की सोच रहें हैं। तो आपको ऐसा करने से बचना चाहिए, ताकि आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से बचे रहने में मदद मिल सके।

गर्भवती महिला को सोते समय पैरों में दर्द और ऐंठन की समस्या

प्रेगनेंसी में पैरों में दर्द

गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले बहुत से बदलाव व् परेशानियों से गुजरती है। और उन परेशानियों मे से पैरों में दर्द व् ऐंठन का होना आम बात होती है। यह समस्या ज्यादातर महिलाओं को प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में शुरू होने के बाद डिलीवरी के समय तक रहती है। क्योंकि जैसे जैसे शिशु का आकार बढ़ता है, महिला के शरीर का वजन बढ़ता है वैसे वैसे पैरों पर दबाव बढ़ने लगता है जिसके कारण दर्द व् ऐंठन की समस्या हो सकती है, कई महिलाएं प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में पैरों में सूजन की समस्या से भी परेशान रहती है। पैरों में दर्द व् ऐंठन की समस्या गर्भवती महिला को रात को सोते समय अधिक हो सकती है। और कई बार तो दर्द अधिक होने के कारण गर्भवती महिला को रात को सोने में भी परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है।

गर्भवती महिला को पैरों में दर्द व् ऐंठन होने के कारण

  • महिला के गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण दिल से पैरों तक जाने वाली मांसपेशियों में रक्त का संचार अच्छे न होने के कारण महिला को पैरों में दर्द, ऐंठन व् सूजन आदि की समस्या हो सकती है।
  • प्रेग्नेंट महिला का वजन बढ़ने के कारण पैरों पर दबाव पड़ता है जिसके कारण महिला को इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • बॉडी में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण भी गर्भवती महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान पानी का भरपूर सेवन नहीं करती है तो इसके कारण डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है जिसके कारण भी पैरों में दर्द व् ऐंठन की समस्या हो सकती है।
  • एनीमिया यानी की शरीर में खून की मात्रा पर्याप्त न होने के कारण भी गर्भवती महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान यदि गर्भवती महिला ब्लड प्रैशर की दवाइयों का सेवन करती है तो गर्भवती महिला को इस परेशानी का अनुभव होना आम बात है।
  • यदि गर्भवती महिला पूरा दिन पैरों के भार काम करती रहती है, या पैरों को लटकाकर बैठी रहती है, तो ऐसे में रात को सोते समय प्रेग्नेंट महिला को पैरों में दर्द का अहसास हो सकता है।
  • बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला थकान और कमजोरी का अधिक अनुभव कर सकती है जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को यह परेशानी हो सकती है।

प्रेगनेंसी में रात को सोते समय पैरों में होने वाले दर्द को कम करने के उपाय

गर्भवती महिला को पैरों में दर्द की समस्या यदि अधिक होती है, तो ऐसे में घर में कुछ आसान तरीको का इस्तेमाल करके आप इस दर्द से निजात पा सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की पैरों में होने वाले दर्द को कम करने के लिए महिला को क्या करना चाहिए।

गर्म पानी

नियमित रात को सोने से पहले दस से पंद्रह मिनट के लिए पैरों को गर्म पानी में रखें, इससे पैरों की सिकाई होती है साथ ब्लड फ्लो को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को रात को होने वाले पैरों में दर्द व् ऐंठन की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

सेंधा नमक

सेंधा नमक में मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में होता है, यदि गर्म पानी में सेंधा नमक मिलाकर सिकाई की जाएँ तो पैरों की मांसपेशियों को बहुत जल्दी आराम पहुंचाने में मदद मिलती है जिससे गर्भवती महिला को रात को होने वाले पैरों में दर्द व् ऐंठन को कम करने में फायदा मिलता है।

मालिश

रात को सोने से गुनगुने तेल से पैरों की अच्छे से मालिश करें, इससे ब्लड फ्लो बढ़ता है, पैरों की मांसपेशियों को आराम मिलने में मदद मिलती है। मालिश के लिए आप किसी भी तेल का इस्तेमाल कर सकती है।

स्ट्रेचिंग

स्ट्रेचिंग भी पैरों में होने वाले दर्द व् ऐंठन से निजात पाने का एक बेहतरीन उपाय है। ऐसे में रात को सोने से पहले थोड़ी देर पैरों की स्ट्रेचिंग जरूर करें, ऐसा करने से आपको आराम मिल सकता है। साथ ही अपनी पैरों की उँगलियों को भी अच्छे से दबाएं, क्योंकि पैरों की उँगलियों को दबाने से भी आपको आराम महसूस हो सकता है।

पंजो के बल खड़ी रहे थोड़ी देर

यदि आपको रात में सोते समय पैरों में अधिक दर्द व् ऐंठन का अहसास होता है तो इस परेशानी से बचने के लिए दिन में तीन से चार बार दो से तीन मिनट के लिए पंजो के बल खड़ी हो जाएँ। ऐसा नियमित करने से आपको इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।

पोजीशन बदलती रहें

दिन भर पैरों के भार न खड़ी रहें, पैरों को लटकाकर न बैठें, अपने बैठने की पोजीशन को चेंज करती रहे, क्योंकि पूरा दिन एक ही पोजीशन में रहने के कारण रात को सोते समय पैरों में दर्द का अहसास हो सकता है।

पानी

शरीर में पानी की कमी होने के कारण भी गर्भवती महिला को पैरों में होने वाले दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए गर्भवती महिला को दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए, पानी के साथ जूस, नारियल पानी आदि का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है।

पोटैशियम

गर्भवती महिला यदि पोटैशियम युक्त आहार का सेवन भरपूर मात्रा में करती है तो प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली पैरों में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। और पोटैशियम की मात्रा को बॉडी में भरपूर रखने के लिए संतरा, केला, दही, टमाटर, पालक, आलू आदि का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है।

व्यायाम

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही से ही गर्भवती महिला को थोड़ी देर वॉक, हलके फुल्के व्यायाम की आदत डाल लेनी चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी की दूसरी व् तीसरी तिमाही में होने वाली पैरों में दर्द व् ऐंठन की समस्या से बचने में मदद मिल सके।

आराम करें

यदि गर्भवती महिला अपने शरीर को आराम नहीं देती है, तो इसके कारण भी रात को सोते समय गर्भवती महिला को पैरों में दर्द, ऐंठन की समस्या हो सकती है ऐसे में इस समस्या से बचने के लिए गर्भवती महिला जब भी थकावट महसूस हो तो अपने शरीर को आराम जरूर देना चाहिए, और नींद भी भरपूर लेनी चाहिए।

चप्पल का ध्यान रखें

प्रेग्नेंट महिला यदि ऊँची सैंडल पहनती है तो इसके कारण भी गर्भवती महिला को पैरों में दर्द व् ऐंठन की समस्या हो सकती है, और इसका अधिक अहसास रात के समय अधिक होता है। इसीलिए यदि गर्भवती महिला इस समस्या से निजात पाना चाहती है तो जितना हो सके गर्भवती महिला को ऊँची हील के सैंडल पहनने से परहेज रखना चाहिए।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला को रात को सोते समय होने वाले पैरों में दर्द व् ऐंठन की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके अलावा यदि महिला को दर्द अधिक हो तो इससे निजात पाने के लिए घर पर दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए, बल्कि दर्द के बढ़ने पर एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।