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अधिकतर प्रेग्नेंट महिलाएं मीठा खाने के बाद क्यों करती हैं ब्रश

प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी के दौरान यदि अपनी छोटी से छोटी आदत का ध्यान रखती है, बुरी आदतों को बदलती है, अच्छी आदतों को अपने रूटीन में शामिल करती है तो इससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ बच्चे को भी हर तरह की परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। और ऐसी ही एक आदत है मीठा खाने के बाद ब्रश करने की, अधिकतर महिलाएं मीठा खाने के बाद ब्रश नहीं तो कुल्ला जरूर करती है। लेकिन यदि आप गर्भवती हैं और आप ऐसा नहीं कर रही है तो इसके कारण आपको और आपके बच्चे को दिक्कत हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की अधिकतर गर्भवती महिलाएं मीठा खाने के बाद ब्रश क्यों करती हैं।

दाँतों में होता है बैड बैक्टेरिया

मीठा खाने के बाद यदि आप कुल्ला या ब्रश नहीं करती हैं तो इसके कारण दांतों में बैड बैक्टेरिया का जमाव हो जाता है। और फिर जब आप कुछ भी खाती या पीती हैं तो वह बैड बैक्टेरिया आपके पेट में चला जाता है। जिसका असर बच्चे तक भी पहुँचता है जिससे माँ व् बच्चे की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

मसूड़ों व् दांतों से जुडी परेशानी का होता है खतरा

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेग्नेंट महिला के दांत, मसूड़े बहुत सेंसिटिव हो जाते हैं। ऐसे में यदि दांतों व् मुँह की साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान न रखा जाए तो प्रेग्नेंट महिला को दांतों में दर्द, मसूड़ों में सूजन, मसूड़ों से खून आना, जैसी परेशानियां हो जाती है। इसीलिए गर्भवती महिला को मीठा खाने के बाद ब्रश करने की सलाह दी जाती है ताकि प्रेग्नेंट महिला को दांतों से जुडी परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकें।

समय पूर्व प्रसव का खतरा हो कम

डॉक्टर्स के अनुसार जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान दांतों की समस्या से पीड़ित होती है उन महिलाओं को समय से पहले डिलीवरी होने का खतरा होता है। साथ ही जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी परेशानी भी हो सकती है। इसीलिए गर्भावस्था के दौरान अधिकतर महिलाएं अपने दांतो की साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला मीठा खाने के बाद ब्रश जरूर करती है। इसके अलावा गर्भवती महिला को ब्रश करते समय ज्यादा तेजी नहीं करनी चाहिए और प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में दांतों से जुड़ा कोई ट्रीटमेंट भी नहीं करवाना चाहिए। साथ ही प्रेगनेंसी की किसी भी तिमाही में महिला को दातों का एक्स रे भी नहीं करवाना चाहिए। क्योंकि इसके कारण बच्चे के विकास पर बुरा असर पड़ता है।

पेशाब का रंग पीला होना प्रेगनेंसी में कारण और उपाय

बार बार यूरिन आना, यूरिन के रंग में बदलाव आना यह भी प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षणों में से एक होता है। ऐसे में इसमें घबराने की कोई भी बात नहीं होती है। लेकिन यदि गर्भावस्था के दौरान यूरिन के रंग में ज्यादा बदलाव महसूस हो, और ज्यादा दिनों तक हो तो इसे अनदेखा भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि पेशाब के रंग का ज्यादा पीला होना प्रेगनेंसी के दौरान परेशानी का कारण भी हो सकता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान यूरिन का रंग पीला होने के क्या कारण होते हैं और किस तरह इस परेशानी से निजात पाया जा सकता है उस बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था के दौरान यूरिन के रंग में बदलाव आने के कारण

  • यूरिन के रंग में बदलाव आना प्रेगनेंसी का लक्षण हो सकता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण व् नई कोशिकाओं के निर्माण के कारण पेशाब का रंग सामान्य से ज्यादा पीला हो सकता है।
  • डॉक्टर्स द्वारा प्रेगनेंसी के दौरान दिए गए विटामिन्स व् दवाइयों का सेवन करने के कारण भी ऐसा हो सकता है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला को बुखार हो गया है तो बॉडी का तापमान बढ़ने के कारण भी ऐसा हो सकता है
  • प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में पानी की कमी होने के कारण भी यूरिन का रंग पीला हो जाता है।
  • गर्भावस्था के समय बहुत सी महिलाएं शरीर में खून की कमी की समस्या से ग्रसित हो सकती है और जिन महिलाओं के शरीर में खून की कमी होती है उन महिलाओं के यूरिन के रंग में बदलाव आता है।
  • प्रेग्नेंट महिला को यदि पथरी या किडनी से जुडी कोई समस्या हो तो भी महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पीले रंग का पेशाब आ सकता है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला को यूरिन इन्फेक्शन हो जाता है तो भी महिला के यूरिन का रंग पीला हो जाता है ऐसे में यूरिन के रंग में बदलाव आने के साथ ही यूरिन करते समय महिला को जलन, दर्द आदि की समस्या भी हो सकती है।

प्रेगनेंसी में यूरिन के रंग के पीले होने की समस्या से बचने के आसान उपाय

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला के यूरिन के रंग में थोड़ा बदलाव आता है तो ऐसा होना बहुत आम बात होती है। लेकिन यदि यूरिन का रंग बहुत ज्यादा पीला होता है तो महिला को क्या करना चाहिए आइये जानते हैं।

पानी पीएं भरपूर

प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचने के लिए पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि पानी का भरपूर सेवन करने से बॉडी को हाइड्रेट रहने में मदद मिलने के साथ बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थ को बाहर निकालने में भी मदद मिलती हैं। जिससे गर्भवती महिला को शरीर में पानी की कमी पूरा करने और यूरिन इन्फेक्शन से निजात पाने में मदद मिलती है। जिससे यूरिन के रंग में आये बदलाव के कारण होने वाली दिक्कत से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

आयरन युक्त आहार खाएं

खून की कमी को पूरा करने के लिए गर्भवती महिला को उन चीजों का भरपूर सेवन करना चाहिए जिनमे आयरन व् विटामिन सी की मात्रा अधिक होतो है। ऐसे में महिला के शरीर में जैसे जैसे खून की कमी पूरी होती है वैसे वैसे महिला को यूरिन के रंग में आने वाले बदलाव को दूर करने में मदद मिलती है। और आयरन की कमी को पूरा करने के लिए प्रेग्नेंट महिला हरी सब्जियां खासकर पालक, चुकंदर, आंवला, संतरा, सेब, अनार, गाजर, टमाटर आदि का सेवन कर सकती है।

डॉक्टर से मिलें

यूरिन के रंग के ज्यादा पीले होने पर आपको इसकी जांच करवाने के लिए एक बार डॉक्टर से भी मिलना चाहिए। क्योंकि यदि ऐसा यूरिन इन्फेक्शन होने के कारण तो इन्फेक्शन का अधिक बढ़ना माँ व् बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है। और डॉक्टर आपकी इस परेशानी का इलाज करने में आपकी मदद करेंगे ताकि आपको और बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान यूरिन के रंग के पीला होने के कारण व् उपाय। तो यदि ऐप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी शरीर में महसूस होने वाले बदलाव को लम्बे समय तक अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि बाद में यह आपके लिए ज्यादा बड़ी परेशानी कड़ी कर सकते हैं।

स्मार्ट (आकर्षक) कैसे बनें?

Smart Kaise Bane : Akrshak Banne ki Tips पुराने समय के मुताबिक आज का युग काफी बदल गया है। आजकल लोग जितना अपनी पर्सनालिटी और गुड लुकिंग पर ध्यान देने लगे है उतना शायद ही किसी और चीज पर देते होंगे। क्योंकि आजकल व्यक्ति का परिचय उसकी काबिलियत से ज्यादा उसकी पर्सनालिटी देती है। आजकल बाकी चीजें बाद में देखी जाती है पहले व्यक्ति की पर्सनालिटी और उसका बिहेवियर देखा जाता है।

इसलिए आजकल हर कोई खुद को स्मार्ट बना चाहते है। लेकिन आज के युग में स्मार्ट होने की परिभाषा कुछ बदल सी गयी है। आज हर क्षेत्र में स्मार्ट लोगों की जरूरत होती है फिर चाहे वो कॉर्पोरेट ऑफिस हो या कोई सामान्य जॉब। यहाँ स्मार्टनेस का अर्थ शारीरिक बनावट और खूबसूरती से नहीं है। वो जमाना कुछ और था जब लोगों की खूबसूरती को ही उनकी स्मार्टनेस माना जाता है।

आज के अनुसार, स्मार्टनेस का अर्थ – बुद्धिमान, फुर्तीला, तीव्रबुद्धि, चुस्त, अप टू डेट, वेल मेन्टेन और साफ़ सुथरा होना है। स्मार्टनेस का आपकी खूबसूरती और आपके रंग से कोई लेना देना नहीं होता। स्मार्ट का सीधा मतलब होता है की साफ़ सुथरा अच्छे कपडे पहना हुआ सतर्क, जागरूक और एक्टिव इन्सान जो सभी काम बिना थकावट के कर सके।

वास्तव में स्मार्ट वो व्यक्ति नहीं होता जो सिर्फ दिखने में सुंदर होता है, बल्कि स्मार्ट होना आपकी अच्छी आदतों, अच्छी सोच और कार्य करने के सही तरीके से जुड़ा है। लेकिन सभी को इसके बारे में उतना पता नहीं होता। इसलिए आज हम आपको स्मार्ट बनने और स्मार्ट दिखने की कुछ टिप्स दे रहे है। जिनकी मदद से आप भी अपने व्यक्तित्व में बदलाव ला सकते है। तो आइये जानते है स्मार्ट कैसे बनें या स्मार्ट कैसे बना जा सकता है?

स्मार्ट कैसे बनें (आकर्षक बनने की टिप्स)?

स्मार्ट और आकर्षक बनने के लिए आपको कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होगा। नीचे हम आपको उन्ही के बारे में बता रहे है :

How to Be Attractive – आत्मविश्वास से भरपूर रहें :

स्मार्ट व्यक्ति की सबसे पहली पहचान उसका आत्मविश्वास होती है। अगर आपमें आत्मविश्वास की कमी है तो आप लोगों के बीच खुद को डिफाइन नहीं कर पायेंगे जिसके कारण लोग आपको कम आंकने लगेंगे। जबकि अगर आप आत्मविश्वास से भरपूर रहेंगे तो इसका प्रभाव आपके फेस और आपके काम दोनों में समान रूप से दिखाई देगा।

उठने बैठने और चलने में सुधार :

वैसे तो इन तीनों के लिए सभी का अपना-अपना तरीका होता लेकिन अगर आप आकर्षक और स्मार्ट बनना चाहते है तो उसके लिए आपको इनमे थोड़े से बदलाव लाने होंगे। क्योंकि आपके चलने, उठने और बैठने का ढंग आपकी शारीरिक स्मार्टनेस को बढाने का काम करता है।

कपड़ों पर ध्यान दें :

स्मार्ट व्यक्ति की सबसे पहली निशानी यही होती है की वह हमेशा साफ़-सुथरे और अच्छे कपड़े पहनते है। क्योंकि आपका फर्स्ट इम्प्रैशन आपके कपड़ों से भी पड़ता है। अगर आप बिना प्रेस किये हुए गंदे कपडे पहनकर कहीं बाहर जाते है तो सामने वाला आपसे बात करने में भी हिचकिचाएगा जबकि अगर आप साफ़ महकदार और अच्छे कपडे पहने हुए है तो हर कोई आपको वेल मैनटैनड ही समझेगा।

सोच-समझकर कर बोलें :

आपका बोलना भी आपकी पर्सनालिटी को प्रभावित करता है। अगर आप ज्यादा बोलते है तो लोग आपकी बातों पर ध्यान नहीं देंगे जबकि अगर आप कम और अच्छा बोलते है तो लोगों आपकी बात सुनेंगे। बहस करने बचें, लेकिन जहाँ जरूरत हो वहां बोले। अच्छे वक्ता बनने की बजाय अच्छे श्रोता बनें। ये आपकी पर्सनालिटी को अलग तरीके से बढाने का काम करेगा।

शरीर की साफ़-सफाई :

लड़के हो चाहे लड़कियां स्मार्ट बनने के लिए आपको अपने शरीर की साफ़-सफाई पर भी खास ध्यान देना होगा। इसके लिए लड़के नियमित रूप से शेविंग करें, नाख़ून और बाल ठीक रखें, दांतों की सफाई पर ध्यान दें, अगर आपके शरीर से पसीने की दुर्गन्ध आती है तो उसके लिए लेमन या मिंट सोप और साथ ही डियोड्रेंट / परफ्यूम आदि का इस्तेमाल करें। जूते, सैंडल, चप्पल को हमेशा साफ़ रखें अगर उनपर पोलिश होती है तो पोलिश करके यूज करें। मोजों को हमेशा बदल बदलकर पहनें रोज एक ही मोजा नहीं पहनें। रोजाना नहायें।

दिमाग से फैसले लें :

दोस्तों, स्मार्ट बनने में आपके माइंड का भी बड़ा योगदान होता है। क्योंकि वास्तव में स्मार्ट तो माइंड से ही बना जाता है। अगर आप हर काम सोच समझकर और सही करेंगे वो कोई उसे गलत नहीं कह सकेगा फिर चाहे आप कैसे भी दिखते हो। लेकिन अगर आप दिखने में खूबसूरत हो और आप काम हमेशा उल्टा ही करते है तो कोई आपकी परवाह नहीं करेगा। इसलिए अपने माइंड को चलायें और हमेशा मैच्युरिटी और समझदारी वाले डिसिज़न लें।

How to Become Smart – फिट रहना भी है जरुरी :

स्मार्ट बनने के लिए बाकी चीजों के साथ-साथ हेल्थ होना भी जरुरी है। क्योंकि अगर किसी व्यक्ति की हेल्थ अच्छी हो तो उसकी पर्सनालिटी का डबल इम्प्रैशन पड़ता है। इसलिए अच्छे दिमाग के साथ-साथ अपनी हेल्थ और फिटनेस पर भी ध्यान दें। रोजाना व्यायाम करें और हेल्थी चीजें खाएं ना की बाहर की।

स्माइल करते रहें :

अच्छे कपडे पहनकर, तैयार होकर आप अपनी शारीरिक खूबसूरती को तो बढ़ा लेंगे लेकिन अगर चेहरे पर ही स्माइल नहीं होगी तो इस खूबसूरती का कोई लाभ नहीं होगा। इसलिए हमेशा खुश रहें, इससे आपके आस पास का माहौल भी खुशनुमा हो जाएगा। अपने साथ साथ दूसरों को भी खुश रखने का प्रयास करें। यकीन मानिए स्माइल करते हुए सभी बहुत खुबसूरत और स्मार्ट लगते है।

स्मार्ट बनने के अन्य उपाय :-

ऊपर बताई गई टिप्स के अलावा भी कुछ टिप्स है जिनकी मदद से आप आप स्मार्ट बन सकते है।

  • भगवान पर भरोसा रखें।
  • अपने साथ के लोगों को प्रेरित करें और अच्छी चीजों से खुद भी सीखें।
  • सहयोग की भावना रखें।
  • किसी के प्रति मन में द्वेष न रखें।
  • जितना पोसिबल हो झूठ बोलने से बचें।
  • किसी के भी सामने झूठा दिखावा ना करें।
  • दूसरों को हमेशा सम्मान दें फिर चाहे वो छोटा हो या बड़ा।
  • मुस्कुराते रहे। परेशान न रहें।
  • टेंशन से बचें।
  • जोर जोर से चिल्लकर बातें न करें।
  • अपने आप को फिट रखें जिससे आपकी पर्सनालिटी भी बेहतर हो।
  • तो ये थी कुछ सामान्य टिप्स जिनकी मदद से आप स्मार्ट बन सकते है।

स्वप्न क्यों और कैसे आता है? बुरे सपने से कैसे बचें ?

स्वप्न एक परिचय:- मनुष्य एक जटिल यंत्र है।हमारे शरीर इतना जटिल है कि इस पर हज़ारों वर्षों के अध्ययन और शोध के बावजूद भी इसके जटिल प्रक्रिया को अभी तक समझा नही जा सका है। सपने को समझने के लिए हमारे महाऋषियों और मनोवैज्ञानिकों ने जो भी खोज की है वह सपने के रहस्यों पर से पर्दा उठाने में काफी हद तक सफल भी रहा है। आज हम कह सकते हैं कि स्वप्न एक मानसिक जटिल प्रक्रिया है। जो हमारे जीवन के अंतः पटल में बैठी हुई वास्तविक घटनाओं को क्षद्म (बदला हुआ) रूप में सुषुप्त अवस्थाओं में दिखती है।

मोटे तोर पर हम कह सकते हैं कि जब हम स्वप्न देखते हैं तो बहुत सारी ऐसी दृश्य एवं घटनाएं देखते हैं जिससे हमारा दुर-दूर एक कोई रिश्ता नहीं होता है। उदाहरणार्थ हम देखते हैं कि हम एक बहुत पुरानी नाव में बैठे  सुनसान भयावह नदी में , जो जंगल के बीच मे है ,से गुजर रहे हैं। मन काफी विचलित भी हो रहा है। एक अनजाना सा डर हमे घेरे हुए है।जोर से किसी की चीखने की आवाज आती है। और हम बिछावन पर अपने आप को पसीने से तर-बतर पाते हैं। दूसरी ओर इसके विपरीत कुछ लोग ये भी देखते हैं कि फ़िज़ा में अजीब सी शांति फैली है और वो कलकल बहती नदी की कंचन धारा में छोटी-छोटी खूबसूरत रंगीन मछलियों को खाना दे रहे हैं। हवाओं की ठंढक से रोम-रोम सिहर उठा है।इसी बीच पक्षियों के कलरव ने शांति भंग करते वृक्षों की डालियों पर अपना शयन अशरा ढूढने में मगन है। दोनों तरह के स्वप्न मनुष्य के जीवन मे हो रही घटनाओं की झलक दिखती है।

अब प्रश्न उठता है कि स्वप्न में इतनी भिन्नता क्यों है? एक इंसान भयानक स्वप्न देखता है दूसरी ओर प्रशन्नता से ओत-प्रोत सपने?
स्वप्न में हम अजीव-अजीव घटनाएं,व्यक्ति क्यूँ देखते हैं? और कभी-कभी जिंदगी की वास्तविक घटनाएं, व्यक्ति को प्रत्यक्ष दिखाई देती है? क्या हम बुरे सपने से बच सकते हैं?
यह आर्टिकल हमें इन सवालों के जवाब पाने में मदतगार साबित हो सकता है।
स्वप्न क्यों और कैसे आता है?

स्वप्न का रहष्य मन के विभिन्न परतों में छुपा होता है।
पहली परत(चेतन अवस्था):- स्वप्न हमारे अंतर्मन से जुड़ा होता है। हम जागकर सपने नहीं देख सकते। वो तो मात्र कल्पना होती है। स्वप्न हमारे आंतरिक दुनिया से संबंध रखते हुए भी हमारी बाहरी दुनिया को ही प्रतिबिंबित करती है। ये हमारी जिंदगी में हो रही घटनाओं से ही पैदा होती है। मन की अवस्थाओं को समझे बिना स्वप्न के रहष्य समझा नही जा सकता। चेतन मन हमारे मन की वो अवस्था है जब हम होशपूर्वक घटनाओं, वस्तुओं, व्यक्तियों को देख रहे होते हैं।यह मन की जागृत अवस्था है।शायद हमें इस बात की भान नहीं है कि हमारा चेतन मन भी वीडियो कैमरा की तरह आस-पास हो रही घटनाओं को रिकॉर्ड करता रहता है। और हमारे मन के तह में जमा करता रहता है। यही हमारा बाहरी मन होता है। जिसे हम लोग केवल मन के रूप में जानते हैं।

दूसरी परत(अवचेतन अवस्था) :-
जब हमारे चेतन मन की बातों, घटनाओं, चीजों के ऊपर एक परत चढ़ जाती है तो हम उसे भूल जाते हैं। वह अंदर दब जाती है।जिसे ध्यान से याद करने पर याद आ जाती है। कहीं पर वो पड़ी रहती है। कुछ घटनाएं जो हमारे मन पर गहरा प्रभाव डाला हो वो आसानी से स्वप्न देखते वक्त बाहर आ जाती है जैसे आप नदी में करीब-करीब डुब ही गये थे पर एक इंसान ने आपको बचा लिया। आपकी कंपनी दिवालिया हो गयी औऱ आप सड़क पे आ गए इत्यादि। वो सारी बातें जिससे आप बेचैन हो जाते हैं या फिर भागना चाहते है; आपके स्वप्न में क्षद्म रूप में यानी रूप बदलकर आती है। ऐसा इसलिए होता है क्यूंकि एक विचार के साथ बहुत सी विचारधारा जुड़ी होती है। और कौन कहाँ से  आएगा; सोये हुए दिमाग को ये पता नही होता है। मन की अवचेतन अवस्था ही स्वप्न देखते वक्त जागृत हो उठती है।

तीसरी परत(अचेतन अवस्था) :-
मन जब किसी चीज को रिकॉर्ड करता है तो यह नही देखता कि यह जरूरी वह गैरजरूरी वह बस रिकार्ड करता है। पहले चेतन में फिर दबकर अवचेतन में और अंत में सबसे गहरी परत अचेतन में चली जाती है। जब अचेतन में जाती है तो वहाँ से निकल पाना बहुत ही मुश्किल होता है। बड़ी घटनाएं, बातें तो निकल भी सकती है पर आम बातें निकलना असंभव होता है। उदाहरण के रूप में जब तो बच्चे थे बगल वाली शर्मा आंटी ने आपको क्या कहा आप बिल्कुल नहीं बता सकते। पर दो साल के उम्र में आप सीढ़ियों से लुढ़क गए थे। शायद याद न होगा। यदि याद भी होगा तो बस धुंधला सा। और हाँ अचेतन मन की बातें भी आपके गहरे सपनों में आ सकती है।

स्वप्न की घटना कैसे घटित होती है?
न की तीनों परतों में ही स्वप्न की उत्पत्ति छुपी होती है। मनोविज्ञान के अनुसार सपने किसी भी पूर्व घटना को सूचित नहीं करता बल्कि जो घटनाएं घट चुकी है और घट रही है उसी से पैदा होती है। हाँ अगर आप कल्पना में खोए रहते है। ख्याली पुलाव पकाते रहते है तो आपको भविष्य की चीजें नज़र आएगी। परंतु उसका कोई मोल नहीं होता।

स्वप्न के समय हम होस में नहीं रहते हैं यानि हमारा चेतन मन सोया रहता है और अवचेतन मन काफी सक्रिय। आप काफी उथल-पुथल भरा जिंदगी जी रहे हैं तो आपका अचेतन मन भी स्वप्न का हिस्सेदार बन जायेगा। जब हम सोते हैं तो दबी हुई बातें घटनाएं जग जाती है जिसे हमारा बाहरी मन देखा होता है। और घटनाएं तेजी से हमारे दिमाग मे बिना श्रृंखला के आती जाती है। जैसे कोई बिना एडिटिंग के फ़िल्म देख रहे हों। सपनों में आने वाली वस्तु, घटना, या फिर बातें सांकेतिक होती है। कई सारी छोटी-छोटी घटनाएं मिलकर एक स्वप्न भी तैयार कर सकती है। इसलिए अक्सर स्वप्न समझ नहीं आता है। परंतु अगर आपके साथ कोई बड़ी बात हो गयी हो तो वह दिमाग मे गहरा स्थान बना लेती है और स्वप्न उसी रूप में देखने को मिलता है। आप चाहें तो अपने सपनों का विश्लेषण भी कर के देख सकते है। सुबह नींद खुलते ही स्वप्न को यादकर उसका वास्तविक जीवन की घटनाओं से मिलान करके देख सकते हैं। ऐसा मैने कई बार किया और हर बार सही पाया।

एक बार एक आदमी अपने सपने से काफी परेशान था वो हमेशा देखता था कि तीन काले-काले बक्से उसका पीछा करते है। और वह उससे जान बचा के भागते रहता था। जब वह काफी परेशान हो गया तो वह एक मनोचिकित्सक के पास गया और अपने भयावह सपने से छुटकारा पाने का उपाय पूछा। उस मनोचिकित्सक ने उसके जीवन मे हो रही घटनाओं का जानकारी इकट्ठा किया तो पाया कि उसके मरीज ने तीन शादी कर रखी थी। पहला शादी माता-पिता की मर्जी से एक कुरूप औरत से कर लिया था। और उस औरत से उसको नफरत हो गयी थी। फिर उस व्यक्ति ने अपनी मर्जी से एक सुंदर औरत से विवाह कर लिया पर वह औरत दिल से बहुत बुरी थी। इसका जिंदगी और भी बदत्तर हो गया। अब इसने एक और बड़ी गलती कर बैठा। उसने तीसरी शादी एक सुंदर और सुशील लड़की से कर लिया। पर तीनों औरतों का बोझ उससे सहा नहीं गया। अब वह तीनों को छोड़कर भागने को सोचने लगा। परन्तु भाग नहीं पाया।

स्वप्न में दिखने वाली तीन बक्से जिससे वह छुटकारा चाहता था दरअसल वो उसकी तीन पत्नियां थी। बक्से यहाँ पर क्षद्म रूप है उसके पत्नियों के ।स्वप्न में बक्से इसलिए आया क्योंकि उसे बक्से पसन्द नहीं थे। बक्से काले इसलिए थे क्योंकि काला रंग जिंदगी के दुख का परिचायक है।

बुरे सपनों से छुटकारा कैसे मिले?
उस मनोचिकित्सक ने उस व्यक्ति को बताया कि अगर तुम तीनों बक्से से छुटकारा चाहते हो तो दो रास्ते हैं।पहला अपनी तीनों पत्नियों को दिल से स्वीकार कर लो। दूसरा तलाक लेकर अलग हो जाओ। इस घटना से यह प्रमाणित होता है कि बुरे सपने से छुटकारा का सिर्फ एक मार्ग है कि अपने वर्तमान जीवन को सही दिशा दो।कहा जाता है कि आप वही बन जाते हैं जो आप सोचते है और जैसा सोचते हैं वैसा ही करते है और जैसा करते हैं वही आपके सपनों का आधार बनता है।

स्वप्न के सांकेतिक चिन्ह:-
सपनों में आनेवाली बेतुकी बातों का अर्थ होता है जैसे-

1.भागने की कोशिश परन्तु बार-बार गिर जाना मतलब सफलता की चाहत पर बार -बार असफल हो जाना दिखाता है।
2.हवा में उड़ना मतलब ख्याली पुलाव पकाना।
3.सीढ़ी पर चढ़ना मतलब सफल होना।
4.सांप देखना मतलब पुरूष के गुप्तांग।
5. नाव मतलब स्त्री के गुप्तांग।
6.घटनाएं हूबहू देखना मतलब आपके साथ बड़ी घटना हो चुका है। क्रमशः……….

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गर्भावस्था में थकान के कारण और उपाय

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिनमे से थकान का होना भी आम बात है खासकर पहली तिमाही यानी पहले तीन महीने में यह परेशानी ज्यादा होती है। क्योंकि इस दौरान बॉडी में बहुत तेजी से बदलाव होता है और इसका कारण हॉर्मोन्स का बदलाव होता है। दूसरी तिमाही में यह परेशानी थोड़ी कम हो जाती है, लेकिन तीसरी तिमाही में जैसे जैसे वजन बढ़ता हैं, पेट बाहर आता है वैसे ही यह समस्या आपको दुबारा परेशान करती है। तो आइये आज हम आपको विस्तार से बताते हैं की प्रेगनेंसी में थकान के होने के क्या क्या कारण होते हैं और आप किस तरह इससे आराम पा सकते हैं।

प्रेगनेंसी में थकान होने के कारण

  • शरीर में तेजी से हार्मोनल बदलाव का होना थकान का सबसे अहम कारण होता है।
  • नींद की कमी यानी यदि आप भरपूर नींद नहीं लेते हैं तो भी आपको यह परेशानी हो सकती है।
  • ब्लड प्रैशर की समस्या का होना भी थकान की वजह होता है।
  • वजन का बढ़ना थकान का कारण होता है।
  • पोषक तत्वों की कमी के कारण शरीर में कमजोरी होने लगती है जिसके कारण गर्भवती महिला थकान का अनुभव कर सकती है।
  • आयरन की कमी होने के कारण भी आपको यह समस्या हो सकती है।

प्रेगनेंसी में थकान की समस्या को दूर करने के टिप्स

गर्भावस्था के दौरान थकान के साथ और भी बहुत सी परेशानियां जैसे की उल्टी, पेट के निचले हिस्से में दर्द, कमजोरी, मूड स्विंग्स होना आम बात होती है। तो आज हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली थकान की समस्या से निजात पाने के लिए कुछ टिप्स बताने जा रहें हैं।

तनाव न ले खुश रहें

प्रेगनेंसी में बहुत से बदलाव मानसिक व् शारीरिक रूप से बॉडी में देखने को मिलते हैं। ऐसे में इन बदलाव को देखकर अपने ऊपर ध्यान न देना या चिंता करना थकन का सबसे बड़ा कारण होता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान थकान से बचने के लिए प्रेगनेंसी के हर लम्हे हर पल को खुलकर एन्जॉय करना चाहिए। इससे आपको स्वस्थ रहने में और थकान को दूर करने में मदद मिलती है। और खुश रहने के लिए आप अकेले न रहे बल्कि अपनों के साथ समय बिताएं, बुक्स पड़े, योगासन करे आदि।

पौष्टिक तत्वों से भरपूर आहार

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में हो रहे बदलाव के कारण कई बार भूख की कमी भी होने लगती है, जिसके कारण बॉडी में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। ऐसे में शरीर में कमजोरी आने लगती है जिसके कारण थकान का अनुभव होना आम बात होती है, इसीलिए इस समस्या को दूर करने के लिए आपको भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों का सेवन करना चाहिए ताकि कमजोरी न हो और आपको इस परेशानी से राहत मिल सकें।

आयरन की कमी को पूरा करें

बहुत सी महिलाओं में खून की कमी होने के कारण एनीमिया की समस्या प्रेगनेंसी के दौरान हो जाती है। जिसके कारण थकावट का होना आम बात होती है और इससे बचने के लिए आपको अपने आहार में आयरन से भरपूर चीजों को सम्मिलित करना चाहिए। ताकि आपके बॉडी में आयरन की कमी को पूरा करके इस समस्या से निजात पाया जा सके।

थोड़ा व्यायाम करें

प्रेगनेंसी होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं होता है की आप सारा दिन आराम करें बल्कि इससे आपकी थकान बढ़ती है। प्रेगनेंसी के दौरान सुबह शाम थोड़ी देर वॉक करना, हल्का व्यायाम करना न केवल बॉडी में ब्लड फ्लो को बढ़ाता है बल्कि मानसिक रूप से भी आपको रिलैक्स महसूस करवाने में मदद करता है। जिससे आपको थकान जैसी समस्या से दूर रहने में मदद मिलती है। ऐसे में आपको थोड़ी देर व्यायाम जरूर करना चाहिए।

नींद ले भरपूर

नींद की कमी का होना भी थकावट का एक कारण होता है, ऐसे में आपको भरपूर नींद लेनी चाहिए। और यदि आपकी रात को नींद पूरी नहीं होती है तो थोड़ी देर दिन में आराम करना चाहिए। ऐसा करने से आपकी बॉडी को आराम मिलता है जिससे आपको थकावट जैसी समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करके आप प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली थकान की समस्या को दूर करके फिट रह सकते हैं। साथ ही ऐसा करने से प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु को भी कोई परेशानी नहीं होती है बल्कि उसके बेहतर विकास में आपको मदद मिलती है।

डिलीवरी के बाद कितने दिनों तक आराम करना चाहिए

डिलीवरी के बाद कितने दिनों तक आराम करना चाहिए, डिलीवरी के बाद फिट होने में कितना समय लगता है, डिलीवरी के बाद के लिए केयर टिप्स

प्रसव महिला के लिए एक ऐसा समय होता है जिसमें महिला को बहुत ज्यादा थकावट होने के साथ बॉडी में बहुत से बदलाव आ जाते हैं। तभी कहा जाता है की डिलीवरी के बाद केवल एक शिशु ही जन्म नहीं लेता है बल्कि वह महिला के लिए भी नया जन्म होता है। नोर्मल डिलीवरी के दौरान जहां महिला को असहनीय दर्द सहन करना पड़ता है, वहीँ सिजेरियन डिलीवरी के समय महिला की बॉडी से रक्त बहुत ज्यादा मात्रा में निकलता है, और टाँके लगाए जाते हैं। ऐसे में डिलीवरी के बाद महिला का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है, और साथ ही महिला पर शिशु की बेहतर केयर की जिम्मेवारी भी आ जाती है, जिसके कारण महिला को डिलीवरी के बाद फिट होने में थोड़ा समय लग सकता है। तो आइये अब जानते हैं की डिलीवरी के बाद महिला को कितने दिनों तक आराम करना चाहिए।

नोर्मल डिलीवरी के बाद महिला कब तक करें आराम

नोर्मल डिलीवरी के बाद महिला को फिट होने में कम समय लगता है, लेकिन फिर भी महिला को चालीस से पैंतालीस दिन तक अच्छे से आराम करना चाहिए। और महिला को पूरी तरह से फिट होने के लिए और शिशु के बेहतर विकास के लिए अपने खान पान में भरपूर मात्रा में न्यूट्रिएंट्स युक्त पदार्थों को शामिल करना चाहिए।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला कब तक करें आराम

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला के शरीर को फिट होने में नोर्मल डिलीवरी से ज्यादा समय लगता है, क्योंकि शुरुआत में न तो महिला घी आदि का सेवन नहीं कर सकती है। क्योंकि ऐसा करने से सिजेरियन डिलीवरी के दौरान लगने वाले टांको को ठीक होने में ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे में महिला का शरीर फिट होने में थोड़ा ज्यादा समय लेता है। इसीलिए सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को कम से कम दो महीने से ज्यादा का समय पूरी तरह से फिट होने के लिए लगता है, और शुरुआत में तो महिला को उठने बैठने में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

डिलीवरी के बाद केयर के लिए कुछ खास टिप्स

  • खान पान में शामिल करें भरपूर मात्रा में पोषक तत्व।
  • पर्याप्त नींद लें, इससे आपको आराम मिलेगा और जल्दी फिट होने में मदद मिलती है।
  • हमेशा अपने आस पास किसी को रखें ताकि यदि कोई चीज चाहिए हो तो उसके लिए आपको परेशान न होने पड़े।
  • सिजेरियन डिलीवरी के बाद टांको के कारण उठने बैठने में ज्यादा परेशानी होती है, ऐसे में आपको बेल्ट का इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे आपको आराम मिलता है।
  • सारा दिन लेटे न रहें इसके कारण कमर दर्द बढ़ सकता है ऐसे में पांच से सात मिनट के लिए डिलीवरी के कम से कम दस दिन बाद थोड़ा वॉक करें।
  • उठने बैठने में तेजी से काम न लें, इसके कारण आपको परेशानी हो सकती है, बल्कि आराम से करवट लेकर उठें।
  • ज्यादा बात न करें, और मिलने जुलने वालों के साथ ज्यादा देर न बैठें इसके कारण आपको परेशानी हो सकती है, साथ ही इससे इन्फेक्शन का खतरा भी रहता है।
  • इसके अलावा शिशु के लिए भरपूर दूध की मात्रा रखने के लिए महिला को अपने खान पान में थोड़ी सी भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनसे आप जान सकते हैं की नार्मल डिलीवरी के बाद महिला को फिट होने में कितना समय लग सकता है।

सात दिनों में अंडरआर्म्स को गोरा करें!!

क्या आप अंडरआर्म्स के कालेपन से परेशान हैं? जिस तरह आपके चेहरे की सुंदरता लोगो को आपकी और आकर्षित करती है, उसी तरह अंडरआर्म्स का कालापन आपको लोगो के बीच शर्मिंदा करवा सकता है, बहुत सी महिलायें इस समस्या से परेशान होती है, क्योंकि कई बार उन्हें स्लीवलेस टॉप पहनने पर काले अंडरआर्म्स के कारण अपनी बांह को ऊपर उठाते हुए भी डर लगता है, लेकिन यह कोई ऐसी समस्या नहीं है की जिसका कोई समाधान न हो, तो आइये आज हम आपको अंडरआर्म्स कालेपन को दूर भगाने के लिए कुछ टिप्स बताते हैं, और वो भी सिर्फ सात दिनों में, जिससे आपकी अंडरआर्म्स की स्किन साफ़ हो जाएगी, और आप अच्छे से अपनी पसंद की टॉप या ड्रेस को पहन पाएंगे।

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आलू का इस्तेमाल करें:-

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आलू हर एक घर में बहुत ही आसानी से मिल जाता है, और यदि आप इसका इस्तेमाल अपने अंडरआर्म्स के लिए करते हैं तो इससे भी आपको फायदा मिलता है, इसके लिए आप आलू की स्लाइसेस को काटकर अच्छे से नहाने से बीस मिनट पहले अपने अंडरआर्म्स पर रगड़ें, और पांच मिनट सूखने दें, ऐसा नियमित करने से आपको फायदा मिलेगा क्योंकि इसमें पाया जाने वाला मैलिक अम्ल और स्टार्च आपकी रंगत को निखारने में आपकी मदद करता है।

केले के छिलके का प्रयोग करें:-

केले को छील कर उसका छिलका आप अपने पास रखें, उसके बाद उसे पीस के पेस्ट के रूप में या सीधा अपने अंडरआर्म्स पर अच्छे से पांच से दस मिनट के लिए रगड़ें, उसके बाद इसे थोड़ी देर सूखने के लिए छोड़ दें, और फिर साफ़ पानी से धो लें, एक हफ्ते तक नियमित करने से आपको इसका असर साफ़ दिखाई देगा।

निम्बू का प्रयोग करें:-

निम्बू में विटामिन और एल्फा हाइड्रॉक्सिल अम्ल उच्च मात्रा में होता है जो की आपकी स्किन को गोरा करने में आपकी मदद करता है, साथ ही इसमें एस्कॉर्बिक एसिड की मात्रा भी आदिक होती हैं, जो आपकी स्किन में कोलेजन की मात्रा को बढ़ाने में मदद करती है, इसके लिए आपन निम्बू के रस से अपने अंडरआर्म्स की अच्छे से मसाज करें, और उसके बाद बाद इसे जब तक अपने अंडरआर्म्स पर रहने दे जब तक की आपकी स्किन इसे अच्छे से सोख न ले, आपको इसका असर जरूर दिखाई देगा।

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संतरे के छिलको का इस्तेमाल करें:-

संतरे के सेवन के बाद जिन छिलको को को आप फेंक देते है उसका इस्तेमाल बहुत से सौंदर्य उत्पाद के लिए किया जाता है, और यह आपकी चेहरे का निखार बढ़ाने, आपकी आँखों के नीचे काले घेरे की समस्या को खत्म करने के साथ आपके अंडरआर्म्स के कालेपन को दूर करने में भी आपकी मदद करता है, इसके लिए आप संतरे के छिलको को धूप में सुखाकर उसका पाउडर तैयार करें, उसके बाद एक कटोरी में दो चम्मच संतरे के छिलके का पाउडर लें, और उसके दूध और गुलाबजल बराबर मात्रा में मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, उसके बाद इस पेस्ट को अपने अंडरआर्म्स पर पैक की तरह लगाएं, और सूखने के लिए छोड़ दें, सूखने के बाद साफ़ पानी से धो लें, आपको इसका असर दिखाई देगा।

टमाटर के रस का प्रयोग करें:-

टमाटर के रस का नियमित अपने अंडरआर्म्स के लिए इस्तेमाल करने से आपके अंडरआर्म्स के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है, इसके लिए आप टमाटर को बीच में से काटकर अच्छे से अपने अंडरआर्म्स की मसाज करें, और उसके बाद इसे बीस मिनट के लिए छोड़ दें, और उसके बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल अपने अंडरआर्म्स को धोने के लिए करें।

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करें:-

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बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करने से भी आपकी स्किन के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है, इसके लिए आप बेकिंग सोडा को पानी में मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, और उसके बाद इसका इस्तेमाल अपने अंडरआर्म्स के लिए करें, और बीस मिनट के लिए इसे सूखने के लिए छोड़ दें, इससे आपको अंडरआर्म्स के कालेपन के साथ अंडरआर्म्स की दुर्गन्ध को भी दूर करने में मदद मिलती है, और जब यह सूख जाएँ दो साफ़ पानी से इसे धो दें, हफ्ते में दो या तीन बार के इस्तेमाल से ही आपको इसका असर दिखाई देगा।

एलोवेरा जैल का इस्तेमाल करें:-

एलोवेरा जैल स्किन के कालेपन को दूर करने के साथ उसकी नमी को भी बरकरार रखने में आपकी मदद करता हैं, इसके लिए आप एलोवेरा के ताजे पत्ते को तोड़ कर उसके गुद्दे को निकाल लें, और उसके बाद अच्छे से अपने अंडरआर्म्स की मसाज करें, और बीस मिनट इसे अपनी स्किन पर छोड़ने के बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल अपनी स्किन को धोने के लिए करें, नियमित दो बार इसका प्रयोग करने से आपको इस फायदा दिखाई देगा।

नारियल तेल का इस्तेमाल करें:-

स्किन को साफ़, सूंदर, और कोमल बनाने के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल बहुत ही फायदेमंद होता है, साथ ही इसमें पाए जाने वाले विटामिन ई, प्रोटीन, संतृप्त वसा और कैप्रियलिक अम्ल आपके अंडरआर्म्स के कालेपन को दूर करने में आपकी मदद करते है, इसके लिए आप नियमित रात को सोने से पहले अपने दोनों अंडरआर्म्स पर नारियल तेल की मसाज करें, और रातभर के लिए छोड़ दें, सुबह नहाने के समय इस साफ़ कर लें, आपको फायदा मिलेगा।

अंडरआर्म्स के कालेपन को दूर करने के अन्य उपाय:-

  • खीरे का पेस्ट बनाकर इससे अपने अंडरआर्म्स पर नियमित मसाज करें, और थोड़ी देर के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दे ऐसा करने से आपके अंडरआर्म्स के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।
  • अंडरआर्म्स के बालों के लिए किसी क्रीम या रेजर का इस्तेमाल करने की बजाय वैक्सिंग का सहारा लें, क्योंकि इससे बालों की ग्रोथ कम होने के साथ आपकी स्किन के कालेपन को भी दूर किया जा सकता है।
  • दो चम्मच बेसन, एक चम्मच दही, एक चुटकी हल्दी, और कुछ बूंदे निम्बू के रस की मिलाकर एक पैक तैयार करें, उसके बाद इसे अच्छे से मिक्स करके अपने अंडरआर्म पर लगाएं, और सूखने के लिए छोड़ दें, हफ्ते में तीन से चार बार इस उपाय को करें आपको फायदा मिलेगा।
  • कच्चे दूध को रुई की मदद से दिन में तीन से चार बार अपने अंडरआर्म्स पर लगाएं, इससे भी आपके अंडरआर्म्स के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।
  • निम्बू का रस या नारियल के तेल के साथ चीनी को मिलाकर अपने अंडरआर्म्स की मसाज करें, इससे भी आपके अंडरआर्म्स के कालेपन को दूर करने में फायदा मिलता है।
  • ज्यादा टाइट कपडे पहनने के कारण भी आपको ये समस्या हो सकती है, इसीलिए अंडरआर्म्स की साइड से अधिक टाइट कपडे न पहने।

तो ये हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करके आप अपने अंडरआर्म्स के कालेपन को दूर कर सकते है, इसके अलावा कई महिलाएं अंडरआर्म्स के लिए रेजर का इस्तेमाल करती है, ऐसा भी नहीं करना चाहिए ऐसा करने से अंडरआर्म्स काले पड़ते हैं, इन्फेक्शन का डर रहता है, और बालों में भी वृद्धि होती है।

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जानें आजकल क्यों नहीं बढ़ रही बच्चों की हाइट और क्या है हाइट बढ़ाने का तरीक़ा! 

आज के इस दौर में जहाँ सीरत से ज़्यादा सूरत को तवज्जो दी जाती है, हर आदमी चाहता है कि उसकी लम्बाई अच्छी हो। स्त्री हो या पुरुष, अच्छी हाइट दोनोंकी सुंदरता और व्यक्तित्व में निखार लाती है। क्योंकि लम्बाई जीन्स पर निर्भर करती है, इसलिए कुछ लोग सोचते हैं कि लम्बाई बढ़ा पाना मुमकिन नहीं होता।लेकिन आपको यह जानकर खुशी होगी कि कुछ ऐसे  तरीके हैं, जिनको अपनाकर आप अपनी लम्बाई बढ़ा सकते हैं। जिन लोगों की हाइट कम होती है, वेलोग अपने व्यक्तित्व (personality) में कुछ कमी-सी महसूस करते हैं।

यूँ तो किसी भी तरह के व्यक्ति की क्षमताओं को महज़ उनके बाहरी व्यक्तिव कोदेखकर कम नहीं समझा जा सकता, परंतु ये सत्य भी हम सभी जानते हैं कि अच्छी हाइट वाले इंसान अक्सर ध्यान का केंद्र बन जाते हैं और उसी स्थान पर कईबार कम हाइट के लोग मजाक का पात्र बन जाते हैं। अक्सर देखा गया है कि कम हाइट वाले लोगों को अपने जीवन में अन्य लोगों के मुकाबले कुछ पहलुओं मेंअधिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।

इन्ही हँसी मजाक और कठिनाईयों का सामना करते हुए, कई बार कम कद वालों के मन में विश्वास की कमीआ जाती है और वह हीन भावना से भर जाते हैं। कुछ लड़के-लड़कियाँ अपनी इस हीन भावना को दूसरों से छिपाने के लिए लम्बी हील्स वाली सैंडल और जूतेका इस्तेमाल करते हैं, जिसका उनके स्वास्थ्य पर काफी बुरा असर पड़ता है। इस तरह से हाइट बढ़ाने से अच्छा है कि आप कुछ ऐसे नुस्ख़े आज़माएँ, जिनसेआपकी हाइट सचमुच में बढ़ जाए।

इस आर्टिकल में हम आपको बताएँगे कि किन वजहों से हाइट नहीं बढ़ती है और क्या तरीक़े हैं जिनसे आप हाइट बाधा सकते हैं।

हाइट ना बढ़ने की वजहें –

आनुवंशिक –

हाइट ना बढ़ने का पहला मुख्य कारण आनुवंशिकता होता है, यानि कि माता पिता की लम्बाई पर ही मुख्यतः बच्चे की लम्बाई निर्भर करतीहै। एक शोध में पाया गया है कि व्यक्ति की लम्बाई के पीछे सबसे बड़ा कारण उसके शरीर के जीन्स ( Genes ) होते हैं और ये जीन्स बच्चा अपने मातापिता से प्राप्त करता है। इसीलिए बच्चे की लम्बाई का पहला कारण उनके माता पिता की लम्बाई को माना जाता है।

पौष्टिक तत्वों की कमी –aise badhayen height

अगर बच्चे के माता पिता की लम्बाई अच्छी होने के बाद भी बच्चे की लम्बाई कम है तो इसका कारण उसके आहार में पोषकतत्वों की कमी हो सकता है।

Pituitary gland –

anterior pituitary gland हमारे ख़ून में कुछ हॉर्मोन को छोड़ती है, जैसे Adrenocorticotropic हॉर्मोन, जो की adrenal gland कोsteroid hormones छोड़ने के लिए प्रेरित करता है, ख़ास करके  cortisol हॉर्मोन। ये एक ग्रोथ हॉर्मोन है, जो की हमारे शरीर की ग्रोथ, मेटाबोलिजम औरहमारे शरीर के गठन को प्रभावित करता है। लेकिन अगर हमारी pituitary gland सही तरीक़े से काम ना करे तो ग्रोथ हॉर्मोन के उत्पादन पर इसका प्रभावपड़ता है।

विकास में देरी –

कुछ बच्चे जन्म के समय लम्बाई और वज़न में सामान्य होते हैं परंतु पहले साल में ही उनका विकास होना धीरे धीरे कम हो जाता है,शायद किन्हीं ज़रूरी तत्वों की कमी से ऐसा हो जाता है। ऐसे बच्चों में तीन साल से लेकर यौवन अवस्था आने तक लम्बाई सामान्य रूप से कम ही बढ़तीहै।

Malnutrition यानि कुपोषण –

विकास में रुकावट का सबसे बड़ा कारण कुपोषण माना जाता है। कुपोषण यानि की सही आहार ना मिल पाना, इससेबच्चों में ज़रूरी विटामिन, मिनरल इत्यादि की कमी आ जाती है और शरीर का विकास रुक जाता है। कुपोषण न सिर्फ कद बल्कि पूरे शरीर के विकास कोरोकता है। इससे बच्चे के शरीर में अनेक तरह की कमियाँ आ जाती हैं, जिसकी वजह से उसके शरीर का विकास रुक जाता है।

बीमारी व विकार –

जीर्ण रोगों, शरीर के अंगों व विभिन्न प्रणालियों, जैसे तंत्रिका तंत्र, वाहिका तंत्र व पाचन तंत्र इत्यादि में विकार आ जाने से विकास परविपरीत असर पड़ता है। लिवर, किडनी व लंग्स सम्बंधित बीमारियाँ भी विकास पर प्रभाव डालती हैं।

सिंड्रोम –

जेनेटिक सिंड्रोम जैसे Turner syndrome और Down syndrome में भी शरीर के विकास पर असर पड़ता है।

थाइरॉइड –

थाइरॉइड हॉर्मोन की कमी वजह जो बीमारी होती है, जिसे हाइपोथाइरॉडिज़म (hypothyroidism) कहा जाता है, इसमें ग्रोथ हॉर्मोन की कमीहो जाती है और नतीजतन विकास पर प्रभाव पड़ता है।

Achondroplasia –

बौनेपन का मुख्य कारण Achondroplasia होता है। ये एक जेनेटिक विकार है। इससे पीड़ित व्यक्ति की लम्बाई महज़ 131 सेमी(पुरुषों में) और 123 सेमी (स्त्रियों में) होती है।

लम्बाई बढ़ाने के उपाय या नुस्ख़े :- 

ये सब तो वजहें थी लम्बाई ना बढ़ने की, अब हम जानेंगे की लम्बाई बढ़ाने के उपाय या नुस्ख़े क्या हो सकते हैं।

1. स्वस्थ और पोषक आहार –

पौष्टिक भोजन में मौजूद विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम, जिंक, मैग्नीशियम और फास्फोरस लम्बाई बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिकानिभाते हैं। इसलिए स्वस्थ और पोषक आहार लें। कार्बोनेटेड पेय, संतृप्त वसा और अधिक चीनी लेने से परहेज करें, क्योंकि ये आपका मोटापा बढ़ा करआपकी लम्बाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। पेय जैसे दूध, जूस तथा गाजर, मछली, चिकन, अंडे, सोयाबीन, दलिया, आलू, बीन्स और हरी सब्जियांअपने भोजन में शामिल करें। साथ ही बादाम और मूंगफली जैसे नट्स तथा सेब और केले जैसे फल भी आपकी लम्बाई बढ़ाने में मददगार होते हैं।

2. पर्याप्त नींद –height-1

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि लम्बाई जीन्स पर निर्भर करती है। लेकिन इस बात को भी नहीं नकारा जा सकता कि पर्याप्तनींद और स्वस्थ जीवनशैली, शरीर के सम्पूर्ण विकास के लिए सबसे अच्छा उपाय है। न सोने या कम नींद लेने का प्रतिकूल प्रभाव हमारे पूरे शरीर परपड़ता है। पर्याप्त नींद यह सुनिश्चित करती है कि आपकी लम्बाई और वजन ठीक रहे। क्योंकि नींद के दौरान शरीर में ऊतकों का विकास और निर्माणहोता है। साथ ही पर्याप्त नींद लेने से लम्बाई को नियंत्रण करने वाले हार्मोन की वृद्धि होती है। इसलिए, एक दिन में कम से कम 7 घंटे की नींद लेना जरूरीहोता है।

3. धूप –

विटामिन-D हड्डियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है, और सूरज की रोशनी विटामिन-D का सबसे अच्छा प्राकृतिक स्रोत है। बस तेज धूप में नजाएँ, इसका अधिकतम लाभ पाने के लिए सुबह या शाम के समय की धूप में बाहर जाएँ और उसका पूरा लाभ लें।

4. व्यायाम करे और हाइट बढ़ाएँ –

व्यायाम करने के फायदे तो आपने सुने ही होंगे। व्यायाम हमारे शरीर को एक अच्छा शेप देते हैं और साथ ही हमें स्वस्थभी रखते हैं। व्यायाम करके आप अपनी लम्बाई भी बढ़ा सकते हैं। अपने व्यायाम में swimming, cycling, योगा तथा अन्य exercise को शामिल करें।

5. योगासन –

जिन लोगों की हाइट कम होती है। वे लोग अपने पर्सनैलिटी में कुछ कमी सी महसूस करते हैं। परफेक्ट पर्सनैलिटी पाने के लिए लंबा कद होनाबहुत जरूरी है। लंबाई कम होने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण रोल आनुवांशिक गुण अदा करते हैं, लेकिन यदि आप चाहते हैं किआपकी हाइट बढ जाए तो इसमें योग आपकी निश्चित रूप से सहायता कर सकता है। माना जाता है कि प्रोटीन युक्त भोजन करने से व नियमित रूप सेदस मिनट योगासन करने से हाइट बढ़ती है। निम्नलिखित योगासनों से आप आपनी हाइट निश्चित रूप से बढ़ा सकते हैं –

-> ताड़ासन (Tadasan) –tadasana

ताड़ासन के नियमित अभ्यास से कमर आकर्षक बनती है। हाइट बढ़ती है व शरीर स्वस्थ रहता है।

विधि – सबसे पहले जमीन पर सीधे खड़े हो जाएं। अपने दोनों पैर को आपस में मिलाकर और दोनों हाथों को भी सामान्य अवस्था में रखें। पूरे शरीर कोस्थिर करें। उसके बाद दोनों हथेलियों की उंगलियों को मिलाकर सिर के ऊपर ले जाएं। हथेलियों को सीधी रखें फिर साँस भरते हुए अपने हाथों को ऊपरकी ओर खींचिए, जिससे आपके कंधों और छाती में भी खिंचाव आएगा। इसके साथ ही पैरों की एड़ी को भी ऊपर उठाएँ और पैरों की उंगलियों पर शरीरका संतुलन बनाए रखिए। इस स्थिति में कुछ देर रहें। कुछ देर रुकने के बाद साँस छोड़ते हुए हाथों को वापस सिर के ऊपर ले आएँ। इस आसन कोप्रतिदिन 10-12 बार करें।

-> शीर्षासन (Shirshasana) –shirshasana

सिर के बल किए जाने की वजह से इसे शीर्षासन कहते हैं।

 

विधि – दोनों घुटने जमीन पर टिकाते हुए फिर बाजु की कोहनियाँ जमीन पर टिकाएँ। फिर हाथों की अंगुलियों को आपस में मिलाकर ग्रिप बनाएं, तब सिरको ग्रिप बनी हथेलियों के पास भूमि पर टिका दें। इससे सिर को सहारा मिलेगा। फिर घुटने को जमीन से ऊपर उठाकर पैरों को लंबा कर दें। फिर धीरे-धीरे पंजे टिके दोनों पैरों को पंजों के बल चलते हुए शरीर के करीब अर्थात माथे के नजदीक ले आएं। फिर पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए उन्हें धीरे से ऊपरउठाते हुए सीधा कर दें।

इसके बाद पूरी तरह सिर के बल शरीर को टिका लें। कुछ देर इसी अवस्था में रहने के बाद पुन: उसी अवस्था में आने के लिएपहले पैर घुटने से मोड़ते हुए धीरे-धीरे घुटनों को पेट की तरफ लाते हुए पंजों को भूमि पर रख दें। फिर माथे को भूमि पर टिकाकार कुछ देर इसी स्थिति मेंरहने के बाद सिर को भूमि से उठाते हुए वज्रासन में बैठकर पूर्व स्थिति में आ जाएँ।

-> त्रिकोणासन (Trikonasana) –trikonasana

त्रिकोणासन हाइट बढ़ाने के साथ साथ भूख, पाचन और रक्त परिसंचरण में सुधार कर, एसिडिटी, पेट फूलना आदि रोगोंसे राहत दिलवाता है। इस आसन में शरीर का आकार एक त्रिकोण के समान बन जाता है। इसलिए इसे त्रिकोणासन कहते हैं।

 

विधि – दोनों पैरों को दो फुट की दूरी पर रखकर सीधे खड़े हो जाइए। फिर दोनों हाथों को कंधो की समरेखा में सीधे फैलाएं। अब आपकी भुजाएं जमीनके बिल्कुल समानान्तर होनी चाहिए। धीरे-धीरे दाईं ओर झुकें। बायाँ घुटना सीधा और तना हुआ रहे। अब दाएँ पैर के अंगूठे को दाएँ हाथ की उंगलियों सेस्पर्श करें। गर्दन को थोडा-सा दाईं ओर झुकाएँ। अब बाईं भुजा को ऊपर की ओर फैलाएँ। इस स्थिति में 2-3 मिनट रहें व धीरे-धीरे साँस लें। इसी प्रकारबाईं ओर भी इस प्रक्रिया को दोहराएँ।

-> हलासन (Halasana) –halasana

हलासन में शरीर का आकार हल जैसा बनता है, इसलिए इसे हलासन कहते हैं। हलासन हमारे शरीर को लचीला बनाने के लिएमहत्वपूर्ण है। इससे हमारी रीढ़ हमेशा जवान बनी रहती है और लम्बाई बढ़ती है।

 

विधि – इसे करने के लिए पीठ के बल जमीन पर सीधे लेट जाएँ। दोनों हाथों को किनारे पर रखें और उनकी सहायता से हिप्स और पैरों को ऊपर उठाएँ।सहायता के लिए दोनों हाथों को हिप्स से टिकाएँ। अब दोनों पैरों से माथे के नीचे की जमीन छूने की कोशिश करें। इस दौरान गहरी साँस लें और पैरों कोफिर साँस छोड़ते हुए सीधा करें। धीरे-धीरे पैरों को जमीन पर लाएँ और सीधे लेट जाएँ। इसके नियमित अभ्यास से बाल नहीं गिरते, कब्ज, गैस व एसिडिटीजैसी समस्याएँ दूर रहती हैं। दमा, कफ और दूसरे विकार भी दूर होते हैं व हाइट बढ़ती है।

-> सर्वांग आसन (Sarvangasana) –Sarvangasana

सर्वांग आसन एक संपूर्ण आसन है। ये ना सिर्फ़ हाइट बढ़ाता है बल्कि एक साथ कई लाभ पहुँचा सकता है। इससेतनाव थकावट दूर होती है, भूख बढ़ती है, सिरदर्द, आँखो के दर्द से राहत मिलती है। पेट से जुड़ी सारी समयाएँ खत्म हो जाती हैं। इसके अलावा सर्वांगआसन चेहरे की सुंदरता को बढ़ाता है और आपकी याद्दाश्त भी तेज करता है।

विधि –  चटाई बिछाकर पीठ के बल एकदम सीधे लेट जाएँ। पैर और शरीर तना हुआ रहेगा। साँस खींचकर पहले धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाएँ, फिरकमर को और फिर चेस्ट तक के भाग को ऊपर उठाएँ। दोनों हाथों को कोहनी से मोड़कर कमर पर लगाकर कमर को थामकर रखें। इस स्थिति में पूरेशरीर का भार कंधों पर रहना चाहिए। साथ ही कंधे से कोहनी तक के भाग को फर्श से सटाकर रखें तथा ठुड्डी (chin) को चेस्ट से लगाने की कोशिश करें।इस स्थिति में 30 सेकंड तक रहें और सामान्य रूप से साँस लेते और छोड़ते रहें। धीरे-धीरे इसका अभ्यास बढ़ाकर आसन की स्थिति में 3 मिनट तक रहसकते हैं। शरीर को ढीला छोड़कर घुटनों को मोड़कर धीरे-धीरे शरीर को हथेलियों के सहारे से सामान्य स्थिति में ले आएं।10 सेकंड तक आराम करें औरपुन: इस आसन को करें। इस क्रिया को कम से कम तीन बार करें।

किसी भी तरह के व्यायाम या फिर योगासन को करने से पहले किसी विशेषज्ञ से ज़रूर सलाह लें। इसके अलावा अपने आहार में प्रोटीन, कैल्शियम, मिनरलयुक्त भोजन ज़्यादा से ज़्यादा लें। भरपूर नींद लें। तनाव व तमाम तरह के नशीले पदार्थों से दूर रहें। ख़ुद को कभी हीन भावना से ग्रस्त ना होने दें, “जो प्राप्त है वोपर्याप्त है”, के मंत्र को अपनाएँ। सिर्फ़ हाइट ही अच्छी पर्सनैलिटी की परिचायक नहीं होती, इसलिए लम्बाई बढ़ाने के प्रयासों के साथ साथ अपने व्यक्तित्व कोअन्य पहलुओं की कसौटी पर भी निखारने का प्रयत्न करें।

पेशाब खुलकर न आना और बार बार पेशाब लगने के कारण

बॉडी की फिटनेस के लिए जरुरी होता है की शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ बाहर निकल जाएँ। और पेशाब के माध्यम से ही आपके शरीर की अशुद्धियों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। हमारे शरीर में दो गुर्दे होते है जो लगातार ब्लड को साफ़ करने का काम करते हैं। जो यूरिया और यूरिक एसिड जैसे कई अवशिष्ट पदार्थो को बाहर निकालते है, और दिन में कई बार ब्लड गुर्दे से होकर गुजरता है। इसके अलावा गुर्दे बॉडी में सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, पानी की उचित मात्रा को बनाएं रखने में भी मदद करते हैं। और ऐसे ही गुर्दे से यूरिन भी मूत्र नलिकाओं की मदद से निकलकर पेशाब की थैली में इक्कट्ठा होता रहता है।

और उसके बाद ब्लैडर से मूत्र यूरेथ्रा की मदद से उसे शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। आपके प्रत्येक गुर्दे में लगभग दस लाख न्यूरॉन्स होते है जो की विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद करते हैं। लेकिन कई बार शरीर में पानी की कमी होने के कारण, या फिर संक्रमण के कारण आपको यूरिन से सम्बंधित परेशानी हो सकती है जैसे की पेशाब का बार बार आना, रुक रुक कर आना, पेशाब करते समय जलन होना, पेशाब के रंग का बदलना जैसे की अधिक पीला या गुलाबी होना, पेशाब के साथ मवाद या खून का आना आदि। तो आज हम आपको पेशाब के बार बार आने और खुलकर न आने के कारण के बारे में बात करेंगे और इसके कारण और उपाय भी जानेंगे।

पेशाब खुलकर न आने के कारण:- पेशाब का खुलकर आना आपके शरीर के फिट रहने के लिए बहुत जरुरी होता है, लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है तो इसके कारण आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये जानते हैं पेशाब खुलकर न आने के क्या कारण होते हैं।

  • यूरिन में इन्फेक्शन होने के कारण आपको पेशाब से जुडी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • जो लोग अधिक नशा करते हैं उन्हें भी पेशाब रुक रुक कर या खुलकर न आने की समस्या से परेशान होना पड़ता है।
  • ब्लैडर में इन्फेक्शन होने के कारण भी आपको यह परेशानी हो सकती है।
  • यदि आप पथरी (गुर्दे या ब्लैडर में) से परेशान हो तो भी आपको यूरिन से जुडी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • प्राइवेट पार्ट में यदि इन्फेक्शन हैं तो भी आपको पेशाब खुलकर न आने की परेशानी हो सकती है।

बार बार पेशाब आने के कारण:- बार बार पेशाब आने के कारण व्यक्ति बहुत परेशान हो जाता है। ऐसे में कई बार पेशाब कण्ट्रोल न कर पाने के कारण बीच में निकल सकता है। तो आइये जानते है की पेशाब बार बार आने के क्या कारण होते है।

  • यदि प्रोटेस्ट ग्रंथि बढ़ने लगती है तो आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • यूरिनल ट्रैक्ट इन्फेक्शन के कारण भी आपको बार बार पेशाब आने की समस्या उत्त्पन्न हो सकती है।
  • गुर्दे में संक्रमण होने के कारण बार बार यूरिन आना आम बात होती है, इसीलिए बार बार पेशाब आने पर एक बार डॉक्टर से जरूर दिखाना चाहिए।
  • शुगर से परेशान रोगियों को भी यह परेशानी होती है। और यदि आपके रक्त में शुगर की मात्रा लगातार बढ़ती रहती है तो आपको ज्यादा परेशानी भी होती है।
  • यदि आपके मूत्राशय की सक्रियता अधिक होती है तो भी आपको बार बार पेशाब आता है।

पेशाब से जुडी परेशानी से बचने के लिए कुछ आसान उपाय:- पेशाब से जुडी किसी भी समस्या को ठीक करने का सबसे अच्छा उपचार होता है की बॉडी में पानी की मात्रा को सही रखना। क्योंकि इससे आपको यूरिन इन्फेक्शन से जुडी परेशानी का समाधान मिलता है, और साथ ही यदि आपको ज्यादा परेशानी हो तो इसे अनदेखा भी नहीं करना चाहिए। तो आइए अब जानते हैं की पेशान से जुडी परेशानी के समाधान के लिए आप क्या क्या कर सकते है।

पालक है फायदेमंद:- पालक का सेवन करने से आपको बार बार पेशाब आने और पेशाब खुलकर न आने दोनों ही समस्याओं का समाधान मिलता है। पेशाब खुलकर न आने की समस्या है तो नियमित सुबह पालक का रस और नरियल पानी को बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से फायदा होता है। और वैसे यदि आप पालक को नियमित किसी भी रूप में जैसे की सब्ज़ी, सूप या जूस आदि के रूप में लेते हैं तो आपको बार बार पेशाब आने की समस्या से भी निजात मिलता है।

अंगूर है फायदेमंद:- अंगूर को खाने से या फिर इसके जूस को पीने से भी आपको यूरिन से जुडी परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। क्योंकि अंगूर में मौजूद गुण आपके गुर्दे को मजबूत करते हैं जिससे आपको यूरिन से जुडी समस्या का समाधान करने में मदद मिलती है।

प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान:- ब्लैडर में इन्फेक्शन का कारण आपका अपने प्राइवेट पार्ट की साफ सफाई का ध्यान न रखना होता है। ऐसे में इस समस्या से राहत के लिए आपको प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान रखना चाहिए जिसके कारण आपको ब्लैडर के इन्फेक्शन से बचने में मदद मिल सकें। और यदि इन्फेक्शन नहीं होगा तो आपको बार बार यूरिन आने और खुलकर न आने की समस्या का समाधान मिलेगा।

प्याज़ का इस्तेमाल करें:- इस उपाय को करने से आपको यूरिन के खुलकर न आने की समस्या का समाधान मिलता है। इसके लिए आप पचास ग्राम प्याज़ को एक लीटर पानी में डालकर अच्छे से उबाल लें, उसके बाद इस पानी के गुनगुना रहने पर इसे छानकर इसमें शहद मिलाएं और दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करें इसके सेवन आपको यूरिन खुलकर आने लगेगा और पेशाब में जलन आदि की समस्या से भी निजात पाने में मदद मिलेगी।

सूखे आंवले का इस्तेमाल करें:- सूखे आंवले को पीसकर इसका चूर्ण तैयार करें। अब इसमें गुड़ मिलाकर दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करें ऐसा नियमित करने से आपको बार बार पेशाब आने की समस्या का समाधान करने में मदद मिलती है।

मूली का रस:- मूली के रस को पीने से भी आपको यूरिन खुलकर आने लगता है, और आप यदि इसके रस को नहीं पीना चाहते हैं वैसे की सलाद के रूप में मूली और शलगम का भरपूर सेवन करें इससे आपको पेशाब खुलकर आता है। आप चाहे तो दिन में दो से तीन बार मूली का एवं कर सकते है।

अनार के छिलके का इस्तेमाल करें:- अनार खाने के बाद उसके छिलके आपके लिए बहुत फायदेमंद होते है। क्योंकि यह आपको बार बार यूरिन आने की समस्या से बचाव करने में मदद करते हैं। इसके लिए आप अनार के छिलको को सुखाकर उसका चूर्ण तैयार करें। और उसके बाद दिन में दो बार एक एक चम्मच चूर्ण का सेवन पानी के साथ करें।

गुनगुना पानी है फायदेमंद:- यूरिन से जुडी किसी भी परेशानी का हल करने के लिए आपको भरपूर पानी का सेवन करना चाहिए। और यदि आपको बार बार यूरिन की समस्या है या पेशाब खुलकर नहीं आता है तो आपको दिन में तीन से चार बार गुनगुने पानी का सेवन करना चाहिए। यदि आप ऐसा करते हैं तो आपको यूरिन से जुडी इस परेशानी का समाधान करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से आपको पेशाब से जुडी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा यदि आपको यूरिन से सम्बंधित समस्या ज्यादा परेशान करती है या फिर आपको समस्या गंभीर लगती है। तो आपको इसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। और जितना जल्दी हो सके इस समस्या का उपचार करना चाहिए। ताकि आपको इस परेशानी से निजात मिल सकें।

जब महिला गर्भवती हो तो पुरुष की इन बातों को नहीं मानना चाहिए

जब महिला गर्भवती हो तो पुरुष की इन बातों को नहीं मानना चाहिए, गर्भवती महिलाएं न माने अपने पार्टनर की यह बातें, गर्भवती महिलाओं के लिए टिप्स, प्रेगनेंसी के दौरान महिलाएं इन बातों का ध्यान रखें

गर्भावस्था एक महिला के लिए सबसे खास समय होता है, और यदि उनका पार्टनर भी उनके साथ इस लम्हे को महसूस करे तो यह और भी प्यारा हो जाता है। हर गर्भवती महिला चाहती है की प्रेगनेंसी के दौरान उनका पार्टनर उनका भरपूर साथ दे, ताकि उन्हें शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी फिट रहने में मदद मिल सके। और पुरुषो को भी चाहिए की इस समय वो अपनी गर्भवती पत्नी का अच्छे से ध्यान रखें। लेकिन महिलाओं को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की प्रेगनेंसी के दौरान यदि आपका पति कुछ ऐसा कहे या करे जिससे आपको या शिशु को परेशानी हो तो ऐसी बातों को नहीं मानना चाहिए। क्योंकि इस दौरान की गई लापरवाही आपके लिए और शिशु के के लिए नुकसानदायक हो सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की जब महिला गर्भवती हो तो पुरुष की किन बातों को नहीं मानना चाहिए।

बाहर घूमने जाने के लिए

गर्भावस्था के दौरान यदि आपके पति आपसे बाहर पार्टी करने के लिए कहते हैं, या कहीं बाहर घूमने जाने के लिए कहते हैं तो आपको अपने पति की इन बातों को नहीं मानना चाहिए। क्योंकि लम्बी यात्रा, ज्यादा शोर आदि में जाने के लिए महिला के स्वास्थ्य के साथ शिशु को भी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा बाहर जाने पर प्रदूषण आदि होने के कारण आपकी परेशानी ज्यादा बढ़ सकती है, और शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है।

बाहर का खान पान

हो सकता है की आपका पार्टनर आपको प्रेगनेंसी में खुश रखने के लिए या आपके मूड को बदलने के लिए आपको बाहर खाना खाने के लिए ले जाए। लेकिन आपको अपने पति को समझाना चाहिए की बाहर का खान पान आपके और शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसीलिए आपको जितना हो सके अपने पति के साथ बाहर खाना खाने के लिए भी मना करना चाहिए, बल्कि घर पर ही दोनों को मिलकर या आपके पति को आपके लिए कुछ ख़ास बनाना चाहिए जिसमे पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में हो, और आपको साथ रहने का आनंद भी मिल सके।

व्यायाम के लिए

कुछ पति ऐसे हो सकते हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान भी फिट रहने के लिए भी अपनी पत्नी को व्यायाम या जिम आदि जाने की सलाह दे सकते हैं। यदि आपके पति भी उनमे से एक हैं तो आपको अपने पति की इस बात को नहीं मानना चाहिए। और जितना हो सके थोड़ा योगासन या वॉक आदि करना चाहिए, क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान अधिक व्यायाम शिशु और गर्भवती महिला दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

बिना सुरक्षा सम्बन्ध बनाने के लिए

स्वस्थ प्रेगनेंसी के दौरान भी कपल आराम से सम्बन्ध बना सकता है। लेकिन इस दौरान आपको सुरक्षा का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। यदि आपका पार्टनर आपसे बिना सुरक्षा के सम्बन्ध बनाने के लिए कहता है तो आपको अपने पार्टनर की इस बात को नहीं मानना चाहिए।

नई पोजीशन ट्राई करने के लिए

प्रेगनेंसी के दौरान आप यदि सम्बन्ध बनाते समय कोई भी नया एक्सपेरिमेंट करते हैं तो ऐसा करने के कारण न केवल महिला को दिक्कत हो सकती है, बल्कि इसके कारण गर्भ में पल रहा शिशु भी असहज महसूस कर सकता है। इसीलिए यदि आपका पार्टनर सम्बन्ध बनाने के दौरान आपको कोई नई पोजीशन ट्राई करने के लिए कहता है तो आपको उनकी यह बात बिल्कुल भी नहीं माननी चाहिए।

डॉक्टर से मिलने में देरी

गर्भावस्था के दौरान समय समय पर डॉक्टर से जांच करवाते रहना चाहिए ताकि आपको किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो। ऐसे में यदि आपका पार्टनर कभी आपको डॉक्टर से जांच में थोड़ा देरी करने के लिए कहे या आपसे कहे की कल चलेंगे तो आपको इन बातों को भी नहीं मानना चाहिए। पति के साथ नहीं तो घर के किसी अन्य सदस्य के साथ जाकर ही अपनी जांच जरूर करवानी चाहिए।

तो यह हैं कुछ बातें जो प्रेगनेंसी के दौरान यदि आपका पार्टनर आपसे करने के लिए कहता है तो आपको नहीं करना चाहिए। और उन्हें प्यार से समझाना चाहिए की आप ऐसा क्यों नहीं कर रही है ताकि उन्हें भी अच्छे से समझ आये और प्रेगनेंसी के दौरान वो आपका भरपूर साथ दे सकें।