गर्भावस्था में स्वस्थ रहने के लिए जिस तरह खाना पीना जरुरी है उसी तरह बेहतर और अच्छी नींद लेना भी बहुत जरुरी है। लेकिन गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आराम की नींद लेने में भी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की बॉडी पार्ट्स पीठ, पेट, में दर्द का अनुभव होना, मांसपेशियों में खिंचाव का अनुभव होना, वजन का बढ़ना, आदि। इसके कारण महिला को एक जगह आराम से सोने में भी परेशानी हो सकती है। और नींद पूरी न होने के कारण महिला को ज्यादा परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है।
प्रेगनेंसी में आराम की नींद लेने के कुछ टिप्स
गर्भवस्था के दौरान आराम की नींद लेने के लिए गर्भवती महिला कुछ आसान टिप्स को ट्राई कर सकती है। जो गर्भवती महिला को सोते समय होने वाली परेशानी से बचाने में मदद करने के साथ आराम की नींद लेने में मदद करते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में आराम की नींद लेने के लिए आप कौन से टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है।
सोने के लिए आरामदायक गद्दे का इस्तेमाल
प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला पीठ व् कमर में दर्द की समस्या से परेशान हो सकती हैं, और जैसे जैसे महिला का वजन बढ़ता है वैसे वैसे महिला की दिक्कत भी बढ़ सकती है। ऐसे में पीठ दर्द की समस्या से राहत के लिए महिला को उस गद्दे का इस्तेमाल करना चाहिए जो की नरम हो, ताकि महिला को सोने में किसी तरह की परेशानी न हो। क्योंकि यदि महिला टाइट गद्दे पर सोती है तो इससे महिला को सोने में परेशानी होने के साथ पीठ के दर्द की दिक्कत भी बढ़ सकती है।
रौशनी और शोर न हो
अच्छीं नींद लेने के लिए महिला को इस बात का ध्यान देना चाहिए की कमरे में किसी तरह का शोर न हो, रौशनी न हो, यदि महिला को हल्की लाइट में सोने की आदत है तो कमरे में हल्की लाइट हो, आप फ़ोन का इस्तेमाल न करें, टीवी न चलाएं, ऐसा करने से भी महिला को आराम की नींद लेने में मदद मिल सकती है।
सिरहाने का इस्तेमाल
गर्भावस्था के दौरान आराम की नींद लेने के लिए गर्भवती महिला को सिरहानों का इस्तेमाल करना चाहिए। और इसके लिए महिला को अपने सिर के नीचे तकिया रखने के साथ पीठ के नीचे, टांगो के बीच में तकिया लगाकर सो सकती है। क्योंकि पीठ के नीचे तकिया लगाने से महिला की पीठ को आराम महसूस होता है, वहीँ टांगो के बीच में तकिया रखने से पेट के निचले हिस्से में महिला को आराम महसूस होता है। यदि महिला सोते समय इन टिप्स का इस्तेमाल करती है तो भी महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आराम की नींद लेने में मदद मिलती है।
करवट लेकर सोएं
सोने के लिए महिला को एक बात का ध्यान रखना चाहिए की गर्भवती महिला हमेशा करवट लेकर और अपने घुटनो को मोड़कर सोए। क्योंकि इससे गर्भवती महिला को सोते समय किसी तरह की दिक्कत से बचे रहने के साथ गर्भ में शिशु को भी कोई दिक्कत नहीं होती है। अगर आप चाहे तो थोड़ी थोड़ी देर बाद करवट बदल सकती है। लेकिन आरामदायक नींद के लिए गर्भवती महिला का बाईं और करवट लेकर सोना सबसे बेहतरीन पोजीशन होता है।
तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल यदि गर्भवती महिला करती है तो इससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को आराम की नींद लेने में मदद मिलती है। और यदि महिला की नींद पूरी होती है तो इससे महिला को स्वस्थ रहने और फ्रेश व् रिलैक्स महसूस होने में मदद मिलती है।
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हर एक लड़की को लगभग बारह से पचास वर्ष की उम्र तक पीरियड्स होते हैं, हो सकता है किसी को पहले शुरू हो जाए और बाद में खत्म हो। ऐसे में जब आपकी बेटी को पहला पीरियड हो एक माँ ही अपनी बेटी की दोस्त बनकर पीरियड्स से जुडी बातें बता सकती है। क्योंकि पहले पीरियड के दौरान शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव और रक्तस्त्राव को देखकर हो सकता है आपकी बेटी को समझ ही न आए यह क्या हो रहा है, और यदि उसे पेट में अधिक दर्द होता है तो भी वो बहुत परेशान हो सकती है। साथ ही पहला पीरियड होने पर लड़की हो सकता है शर्म या हीं महसूस करें लेकिन उसे कहें की इसमें डरने की कोई बात नहीं होती है। ऐसे में आपको अपनी बेटी को क्या क्या बताना चाहिए जिससे उसे पीरियड्स को लेकर कोई उलझन न रहे आइये जानते हैं।
पीरियड्स है सामान्य
सबसे पहले तो आपको अपनी बेटी को बताना चाहिए की पीरियड्स हर एक लड़की को होता है ऐसे में घबराने वाली कोई भी बात नहीं होती है। यह बिलकुल सामान्य होता है और हर महीने ऐसा होता है, यह बिलकुल अपनी नियमित क्रियाओ की तरह होता है जिस तरह फिट रहने के लिए आपका खाना पीना और सोना जरुरी है उसी तरह शरीर की क्रिया को सही चलने के लिए लड़कियों को पीरियड्स होना भी जरुरी होता है।यह हर लड़की हो होता है किसी को बारह तो किसी को दस वर्ष की तो किसी को सोलह वर्ष की उम्र में होता है, ऐसा हर लड़की के साथ होना एक सामान्य बात होती है।
शर्म न करें
लडकियां कई बार इस बात को लेकर शर्म करती है ऐसे में अपनी बेटी की दोस्त बनकर कहें की वो शर्म न करें। यदि उन्हें किसी तरह की परेशानी है या कोई दिक्कत है तो उसके बारे में खुलकर कहें। और और यह कोई बिमारी या कोई और दिक्कत नहीं है जिसे लेकर वो हैं महसूस करें।
वजह भी जरूर बताएं
पहली बार पीरियड्स होने के बाद लड़कियों के मन में जरूर चलता है की पीरियड्स के होने का क्या कारण है। तो ऐसे में ज्यादातर महिलाएं ऐसा कहती है की यह हर लड़की को होता है इसीलिए तुम्हे भी हो रहा है। लेकिन आज के इस समय में बच्चों से कुछ भी नहीं छुपाना चाहिए और आपको पीरियड्स के पीछे का वैज्ञानिक कारण बताना चाहिए जो की प्रेगनेंसी है जिससे आपकी बेटी को बहुत सी चीजों के बारे में अच्छे से पता चल सके।
कुछ गलत नहीं हो रहा है
पहले पीरियड किसी डरावने सच की तरह होता है ऐसे में कई बार हो सकता लड़की बहुत परेशान हो जाए। तो माँ को चाहिए की उसे समझाएं और बताएं की यह नार्मल है उसके साथ कुछ गलत नहीं हो रहा है, और न ही यह किसी तरह की कोई बिमारी है।
क्या क्या हो सकता है यह भी बताएं
पीरियड्स के दौरान पेट में दर्द, कमर में दर्द, जांघो में खिंचाव आदि होना बहुत आम बात होती है। इस दौरान कई बार कम और कई बार ज्यादा ब्लीडिंग होती है, और पहले पीरियड के समय कई बार शुरुआत में भूरे रंग का चिपचिपा पदार्थ भी निकलता है। इस बारे में भी महिला को अपनी बेटी को बताना चाहिए ताकि उसे दर्द आदि ही तो वो घबराए नहीं और आराम करें।
साफ़ सफाई रखने के लिए कहें
वैसे भी शरीर की साफ़ सफाई रखनी चाहिए लेकिन पीरियड्स के दौरान ज्यादा साफ़ सफाई रखनी चाहिए। क्योंकि इस दौरान प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई न रखने के कारण इन्फेक्शन का खतरा होता है। ऐसे में उन्हें पैड का इस्तेमाल कैसे करना है, कितने समय बाद पैड बदलना चाहिए, इस दौरान खान पान का कैसे ध्यान रखना चाहिए, प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई कैसे रखनी चाहिए उसे इस बारे में अच्छे से बताना चाहिए। ताकि उन्हें पीरियड्स के दौरान किसी भी तरह की समस्या न हो।
तो यह हैं कुछ खास टिप्स जो आपको अपनी बेटी को पहली बार पीरियड्स होने के दौरान बताने चाहिए। इसके अलावा आपको इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की पहले पीरियड का ध्यान रखने में आप उसकी मदद करें, ताकि उसे अपने आप को सँभालने में और पीरियड्स से किसी तरह से परेशानी से बचने में मदद मिल सके।
गर्भावस्था के दौरान आम खाना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें कैलोरी, फोलेट, पोटैशियम, विटामिन ए, विटामिन सी, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन बी 6, जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में शामिल होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने व् गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद करते हैं। लेकिन यदि आम का सेवन सही तरीके से न किया जाये तो इसका बुरा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ सकता है। तो आइये अब जानते हैं की आम का सेवन गर्भवती महिला को कब नहीं करना चाहिए, ताकि गर्भ पर इसका बुरा असर न पड़े।
कच्चा आम
प्रेग्नेंट महिला को कच्चे आम का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण महिला को पेट दर्द, दस्त, उल्टी जैसी परेशानियां हो सकती है। साथ ही यह स्वाद में बहुत अधिक खट्टा होता है जिसके कारण डीहाइड्रेशन की समस्या गर्भवती महिला को हो सकती है। और इनके कारण गर्भ में शिशु भी परेशान होता है।
बिना मौसम का आम
यदि आम का मौसम नहीं है तो भी प्रेग्नेंट महिला को आम नहीं खाना चाहिए। क्योंकि बिना मौसम में आम को पकाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है जिससे गर्भ में शिशु को नुकसान पहुँचता है।
गला सड़ा आम
यदि घर में रखे आम गल सड़ गए हैं तो भी प्रेग्नेंट महिला को उन आम का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि गले सड़े आम में हानिकारक बैक्टेरिया पनपता है जिससे शिशु को नुकसान पहुँचता है।
केमिकल वाला आम
आम को खरीदते समय इस बात का ध्यान रखें की कहीं वो केमिकल द्वारा पकाया हुआ तो नहीं है। यदि आपको ऐसा लगा रहा है की आम केमिकल से पकाया हुआ है तो उसका सेवन न करें। क्योंकि केमिकल द्वारा पकाये गए आम का सेवन करने से गर्भ में शिशु को नुकसान होता है।
बिना धोया हुआ आम
कोई भी सब्ज़ी या फल हो गर्भवती महिला को उसे अच्छे से धोने के बाद ही प्रयोग में लाना चाहिए। ऐसे ही गर्भवती महिला को बिना धोये आम का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि बिना धोये आम का सेवन करने से आम पर मौजूद कीटाणु गर्भ में पहुँच जाते हैं जो गर्भ में शिशु को नुकसान पहुंचाते हैं।
खट्टा आम
ज्यादा खट्टे आम का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि खट्टे आम करने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। जिसकी वजह से बच्चे को नुकसान पहुँचता है।
आधा पका हुआ आम
अच्छे से यदि आम पका हुआ नहीं है या आधा कच्चा और आधा पका हुआ है तो उसका सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसे आम का सेवन करने से महिला को उल्टी दस्त जैसी परेशानी होती है और शरीर में पानी की कमी हो जाती है जिससे गर्भ में शिशु को दिक्कत महसूस होती है।
तो गर्भवती महिला को आम का सेवन करते हुए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे दोनों की सेहत को किसी भी तरह का नुकसान न हो।
पीरियड्स भी अन्य शारीरिक क्रियाओं की तरह ही होती है, जो महिलाओं को हर महीने अठाइस दिन के चक्र के बाद आती है। यह दो दिन पहले या बाद में भी आ सकती है, कम से कम और ज्यादा से ज्यादा तीन दिन तक महिलाओं को यह होती है। पीरियड्स के दौरान महिला के प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंग होती है। कई महिलाएं पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या से परेशान होती है, और महिला को ब्लीडिंग पांच या सात दिन से ज्यादा हो सकती है, ऐसे में इसे अनियमित पीरियड्स कहते है। और महिलाओं को इसे अनदेखा न करते हुए डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए। जहां कुछ महिलाएं पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग से परेशान होती है, वहीँ कुछ महिलाओं को ब्लीडिंग कम होने की परेशानी भी होती है।
पीरियड्स में ब्लीडिंग कम होने के कारण
पीरियड्स के दौरान ब्लड का कम आना किसी एक कारण की वजह से नहीं होता है, बल्कि इसके कई कारण हो सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की पीरियड्स में ब्लीडिंग कम होने के क्या कारण होते हैं।
ब्लड में कमी
पीरियड्स के दौरान रक्तस्त्राव में कमी का पहला कारण बॉडी में पर्याप्त मात्रा में खून का न बनना हो सकते हैं। जिसके कारण पीरियड्स के दौरान ब्लड फ्लो में कमी आती है।
हार्मोनल इम्बैलेंस
शरीर में हार्मोनल संतुलन होने बहुत जरुरी होता है ताकि शरीर की सभी प्रक्रियाओं को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिल सके। लेकिन यदि किसी कारण महिला की बॉडी में हार्मोनल इमबैलेंस की समस्या हो जाती है तो इसके कारण महिला को पीरियड्स के दौरान खून में कमी या अधिकता जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
वजन
जो महिला बहुत अधिक वजन की समस्या से ग्रसित होती है, तो वजन के कारण उनका मासिक चक्र प्रभावित हो सकता है। और मासिक चक्र प्रभावित होने के साथ महिला को पीरियड्स के दौरान ब्लड फ्लो में कमी जैसी परेशानी भी सकती है, साथ ही यदि महिला का वजन बहुत कम होता है तो भी महिला को यह परेशानी हो सकती है। क्योंकि कम वजन हो या अधिक वजन हो इसके कारण बॉडी में हार्मोनल इम्बैलेंस हो सकता है जो की मासिक चक्र को प्रभावित कर सकता है।
गलत खान पान
आहार में लारपरवाही, ज्यादा तेलीय, मसालेदार, पोषक तत्वों से रहित आहार का सेवन करने से बॉडी पर नकारात्मक असर पड़ता है जिसके कारण शरीर में होने वाली क्रियाओं पर बुरा असर पड़ सकता है। जिसमे से पीरियड्स भी एक है, ऐसे में गलत खान पान के कारण भी पीरियड्स के दौरान खून के कम प्रवाह की परेशानी हो सकती है।
ब्रेस्टफीडिंग
जो महिलाएं शिशु के जन्म के बाद स्तनपान करवाती है, और उन्हें पीरियड्स आने शुरू हो जाते हैं। ऐसे में उन महिलाओं को भी पीरियड्स के समय कम ब्लड फ्लो हो सकता है, और इसमें किसी भी तरह की घबराने की बात नहीं होती है।
स्ट्रेस
स्ट्रेस भी पीरियड्स के दौरान ब्लड फ्लो में कमी का एक कारण हो सकता है। क्योंकि तनाव के कारण शरीर पर बुरा असर पड़ता है, और कई बार इसके कारण मासिक चक्र के अनियमित होने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
गर्भनिरोधक गोलियां
जो महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती है, तो उसका असर भी पीरियड्स पर पड़ सकता है। जिसके कारण महिला को यह समस्या हो सकती है।
उम्र
पीरियड्स के दौरान खून की कमी का एक कारण उम्र भी हो सकता है, क्योंकि जैसे जैसे महिला की उम्र बढ़ती है। और महिला मेनोपॉज़ के करीब पहुँचती है तो हो सकता है की महिला को ब्लड फ्लो में कमी जैसी परेशानी हो।
किसी बिमारी के होने के कारण
यदि महिला किसी गंभीर बिमारी से जूझ रही है, जैसे की थायरॉइड या दवाइयों का सेवन अधिक करती है। तो इसके कारण भी बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो सकती है। जिसके कारण महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के कारण बॉडी में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं जिसके कारण वजन का बढ़ना, चेहरे पर मुहांसे निकलना व् अनचाहे बालों का निकलना, प्रजनन क्षमता में कमी आदि समस्याएं हो सकती है। साथ ही इसके कारण पीरियड्स के दौरान खून में कमी या पीरियड्स न आने जैसी समस्या भी खड़ी हो सकती है।
अधिक व्यायाम
जो लडकियां या महिलाएं बहुत अधिक शारीरिक श्रम करती है, और शारीरिक श्रम अनुसार बॉडी को एनर्जी के लिए आहार नहीं देती है। तो इसके कारण भी महिलाओं को पीरियड्स के दौरान खून में कमी जैसी समस्या हो सकती है।
इन्फेक्शन
यदि महिला किसी तरह की इन्फेक्शन की समस्या से परेशान है, या प्राइवेट पार्ट में किसी तरह का इन्फेक्शन है। तो इसके कारण भी पीरियड्स प्रभावित हो सकते हैं, जिसके कारण महिला को यह परेशानी हो सकती है।
पीरियड्स के दौरान खून की कमी की समस्या से बचने के उपाय
पीरियड्स के दौरान ब्लड फ्लो में कमी महिला के लिए परेशानी का विषय हो सकता है ऐसे में महिला को चाहिए की इसके लिए डॉक्टर से एक बार जांच जरूर करवाए। इसके अलावा इस समस्या से बचने के लिए आज हम भी आपको कुछ आसान उपाय बताने जा रहे हैं, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की वो उपाय कौन से हैं।
दिनचर्या बनाएं
दिनचर्या को सही बनाकर उस रूटीन का पालन करने से महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। जैसे की खाने का सही समय, आहार में पोषक तत्वों को भरपूर शामिल करना, भरपूर नींद, भरपूर मात्रा में पानी का सेवन, योगासन व् व्यायाम ( लेकिन अधिक शारीरिक श्रम करने से बचें ) आदि करने से इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।
गर्म तासीर की चीजें
यदि पीरियड्स खुलकर नहीं आते हैं तो पीरियड्स के दौरान ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए जिससे पीरियड्स को खुलकर आने में मदद मिलती है। जैसे की ड्राई फ्रूट, अदरक और इलायची की चाय, आदि का सेवन करने से पीरियड्स को खुलकर आने में मदद मिलती है।
कच्चा प्याज
नियमित अपने आहार के साथ एक या दो कच्चे प्याज का सेवन करने से भी महिला को पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग के कम होने की परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।
हींग
एक गिलास पानी में थोड़ी सी हींग डालकर अच्छे से उबाल लें, उसके बाद पानी के आधा रहने के बाद इसका सेवन करें, ऐसा करने से भी मासिक धर्म को खुलकर आने में मदद मिलती है।
दालचीनी
दालचीनी को पीसकर पाउडर के रूप में तैयार कर लें, और नियमित दो से तीन ग्राम दालचीनी पाउडर को एक गिलास पानी के साथ लें, इस उपाय को थोड़े दिन करने से मासिक धर्म को सही होने में मदद मिलती है।
तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से पीरियड्स के दौरान खून कम आता है, साथ ही पीरियड्स के दौरान खून कम आने की समस्या से बचने के कुछ उपाय। ऐसे में यदि आपको केवल ब्लीडिंग का दाग लगता है और ब्लीडिंग खुलकर नहीं आती है, तो हो सकता है की आप गर्भवती हो। इसके लिए आपको एक बार डॉक्टर से जांच जरूर करवानी चाहिए।
हिन्दू धर्म में गाय का माता का स्थान दिया गया है। इसीलिए इसके गोबर और मूत्र दोनों को भी पवित्रता की नजरों से देखा गया है। आयुर्वेद में भी गौमूत्र के प्रयोग से कई तरह की दवाइयां भी तैयार की जाती है।
ऐसे तो कई लोग गौमूत्र का नाम सुनकर नाक-भौं सिकुड़ जाती है। क्योंकि वे ये नहीं जानते की गौमूत्र के नियमित सेवन से बड़े से बड़े रोग भी दूर हो जाते है। गाय के मूत्र का स्वाद गर्म, कसैला और कड़क लगता है। जो विषनाशक, जीवाणु नाशक, शक्ति से भरपूर और जल्द पचने वाला होता है। इसमें कई तरह के पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, कॉपर, फॉस्फेट, यूरिक एसिड, पोटैशियम, यूरिक एसिड, क्लोराइड और सोडियम पाया जाता है।
माना जात अहै गौमूत्र से लगभग 108 रोगों को ठीक किया जा सकता है। दावा किया गया है की गर्भवती गाय का मूत्र सबसे अच्छा होता है क्योंकि उसमें कई विशेष हॉर्मोन और खनिज पाए जाते है। गौमूत्र दर्दनिवारक, पेट के रोग, चर्म रोग, श्वास रोग, आंत्रशोथ, पीलिया, मुख रोग, नेत्र रोग, अतिसार, मुत्रघात आदि के उपचार के लिए प्रयोग में लाये जाता है।
इतना ही नही आज के समय की बड़ी-बड़ी बीमारियाँ जैसे हार्ट संबंधी समस्याएं, डायबिटीज, कैंसर, टीबी, माइग्रेनऔर एड्स आदि की समस्या में भी गौमूत्र काफी लाभकारी होता है। गाय के दूध से मिलने वाले दही, मट्ठा, घी आदि के फ़ायदे तो सभी जानते है। लेकिन गौमूत्र के फ़ायदों से बहुत कम लोग परिचित है। पहले के समय के सभी लोग इसके बारे में जानते है लेकिन आजकल की पीढ़ी इस चमत्कारिक देन को भूलती ही जा रही है। जबकि ये हमारे स्वास्थ्य के साथ-साथ हमारे शरीर के लिए भी काफी लाभकारी है।
आज हम आपको गौमूत्र के फायदें बताने जा रहे है जिन्हें जानकर आप भी इस देन का प्रयोग करने के बारे में अवश्य सोचेंगे! तो देर किस बात की आईये जानते है गौ माता के मूत्र यानी गौमूत्र के चमत्कारिक फायदें!
किस गाय का गौमूत्र नहीं पीना चाहिए?
बूढी, अस्वस्थ और गाभिन गाय का मूत्र नहीं लेना चाहिए। गौमूत्र को कांच या मिट्टी के बर्तन में लेकर साफ़ सूती कपडें की आठ तहों से छानकर चौथाई कप खाली पेट सेवन करना चाहिए।
गौमूत्र के क्या-क्या फ़ायदे है?
स्वास्थ्य के लिए गौमूत्र के फ़ायदे :-
1. गौमूत्र में वात और कफ से जुड़े सभी रोगों को खत्म करने की शक्ति होती है। पित्त के रोग को भी इसकी मदद से दूर किया जा सकता है यदि इसका सेवन अन्य औषधियों के साथ किया जाए तो।
2. वात, कफ और पित्त के कुल 148 रोग है। और उन सभी रोगों को खत्म करने के लिए गौमूत्र का इस्तेमाल लाभकारी हो सकता है। ये वात, पित्त, कफ तीनों को सम अवस्था में लाने के लिए सबसे ज्यादा मदद करता है।
3. सुबह खाना खाने के 1 घंटे पहले आधा कप गौमूत्र पीने से बवासीर/बादी और खूनी, फिस्टुला, भगन्दर, अर्थराइटिस, जोड़ों का दर्द, उक्त रक्त दबाव, हृदयघात, कैंसर आदि रोगों को ठीक करने में मदद मिलती है।
4. वैज्ञानिक परीक्षणों का मानना है की गौमूत्र में मिट्टी में पाए जाने वाले 18 गुण पाए जाते है। शरीर की बिमारियों को ठीक करने के लिए जितने घटकों की आवश्यकता होती है वे सभी गौमूत्र में पाए जाते है।
5. गौमूत्र से कई हड्डी रोगों को भी ठीक किया जा सकता है। खांसी, सर्दी, जुखाम, दमा, टी बी और अस्थमा जैसी बिमारियों में गौमूत्र रामबाण का काम करता है। गौमूत्र के प्रयोग से ठीक हुई टी बी वापस नहीं आती। ये शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करता है जिससे बीमारियाँ हमसे कोसो दूर रहती है।
6. टी बी की समस्या में डॉट्स की दवाओं के साथ गौमूत्र का सेवन करने से 2 से 3 महीने में अच्छे परिणाम सामने आने लगते है। जबकि केवल डॉट्स की गोलियों के साथ टी बी ठीक होने में 9 महीने का समय लगता है।
7. गले के कैंसर, आहार नली के कैंसर और पेट के कैंसर सभी में गौमूत्र काफी असरदार होता है।
8. शरीर में करक्यूमिन नामक तत्व की कमी होने पर कैंसर का रोग बढ़ता है। और गौमूत्र में इस तत्व की अच्छी मात्रा पाई जाती है और पीने के बाद यह तुरंत पच भी जाता है।
9. हरड़, पानी में घिसकर देने से कम लाभ करती है और यदि इसे गौमूत्र में घिसा जाए तो क्या कहने? ये अत्यंत लाभकारी होती है।
10. गौमूत्र का सेवन हमेशा सुबह ही करना चाहिए। अधिक बीमार व्यक्ति 100 ग्राम तक पी सकता है। आ चाहे तो आधा आधा कप करके भी पी सकते है। स्वास्थ्य लोगों को 50 ग्राम अच्छा रहता है। बंधी हुई गाय का मूत्र इतना उपयोगी नहीं होता। जर्सी गाय के मूत्र में सिर्फ तीन पोषक तत्व ही पाए जाते है।
11. आँखों से जुड़े सभी रोग कफ के कारण होते है। मोतियाबिंद (कैटरेक्टर), ग्लुकोमा, रैटिनल डिटैचमेन्ट जैसी बड़ी बिमारियों के अलावा आँखों का लाल होना, आँखों से पानी निकलना, आँखों में जलन होना जैसी छोटी बीमारियाँ गौमूत्र के प्रयोग से ठीक हो जाती है। इसके लिए सूती कपडे की आठ परत में छानकर 1-1 बूंद आँखों में डाल लें। 6 महीने में आँखों का चश्मा उतर जाएगा।
12. रोजाना सुबह एक-एक बूंद इसका सेवन करें कोई भी बीमारी 3 से 4 दिन में ठीक हो जाएगी। जिन बच्चों की पसलियाँ कफ की वजह से दुखती है उन्हें एक चम्मच गौमूत्र पिलाने से तुरंत आराम मिलता है। ऐसा बड़े लोग भी कर सकते है लेकिन मात्र आधा कप बढ़ा दें।
13. मूत्र पिंड से जुड़े सभी रोग जैसे किडनी फ़ैल होने और किडनी की दूसरी तकलीफों को ठीक करने के लिए रोज सुबह आधा कप गौमूत्र का सेवन करें।
14. पेशाब से संबंधित हर समस्या के लिए रोज सुबह खाली पेट आधा कप गौमूत्र का सेवन करें।
15. कब्ज की समस्या में 3 से 4 दिन तक रोज सुबह आधा कप गौमूत्र का सेवन करें, समस्या ठीक हो जाएगी।
16. पित्त के रोग में गौमूत्र के साथ देसी गाय के घी का सेवन भी करें। पित्त के रोगी गौमूत्र और पानी की बराबर मात्रा का मिलाकर इस्तेमाल करने से एसिडिटी, हाईपर एसिडिटी, अल्सर, पेप्टिक अल्सर, पेट में घाव आदि को ठीक करने में मदद मिलती है।
17. साफ़ सुथरे वातावरण में रहने वाली, अच्छा चारा खाने वाली और नियमित रूप से घुमने वाली गाय का मूत्र पीना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। अगर ऐसी गाय न मिलें तो किसी भी देसी गाय का गौमूत्र ले लें।
शोध बताते है देसी गाय के गौमूत्र के कोई साइड इफ़ेक्ट नही है। अधिक गौमूत्र का सेवन करने पर ये पेशाब के रस्ते बाहर निकल जाते है। तो इससे कोई नुकसान नहीं पहुँचता। एक बात का ध्यान रखें जिस गाय का मूत्र आप ले रहे है वो पूरी तरह देसी हो और वो बीमार या गर्भवती न हो।
18. गौमूत्र में गेंदे के फूल की चटनी बनाकर उबाल लें और उसमे थोड़ी हल्दी मिलाकर प्रयोग करें। ये कैंसर में बहुत आराम देता है।
19. हैपेटाइटिस परिवार (A, B, c, D, E, F) की बीमारियाँ जैसे पीलिया आदि बीमारियाँ को दूर करने के लिए गौमूत्र काफी लाभकारी होता है।
20. गौमूत्र का सेवन अपनी आयु के अनुसार ही करें। इसके लिए आप डॉक्टर या वैद्य की मदद ले सकते है।
21. सर्दी, खांसी, जुखाम, डायरिया आदि बिमारियों के लिए भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।
22. गाय का मूत्र जीवराशी रहित होता है इसीलिए जैन लोग भी इसका सेवन कर सकते है। गौमूत्र यदि 2 से 3 दिन पुराना है तो उसमे पानी जरुर मिलाएं।
त्वचा के लिए :-
23. गौमूत्र का सेवन करने से त्वचा संबंधी रोग जैसे सोराइसिस, एक्जिमा, खुजली, खाज, दाद आदि रोग ठीक होते है।
24. गौमूत्र की मालिश करने से त्वचा के सफ़ेद धब्बे ठीक हो जाते है।
25. खुजली, खाज, दाद, आदि समस्या में रोज गौमूत्र से मालिश करने से वे ठीक हो जाते है।
26. आँखों के नीचे काले धब्बे होने पर रोज सुबह गौमूत्र लगायें, सभी धब्बे चले जायेंगे। अगर गौमूत्र न मिले तो उसके अर्क का इस्तेमाल कर सकते है। अर्क 1 चम्मच से अधिक नहीं लेना चाहिए, और हां अर्क का इस्तेमाल आंख में डालने के लिए बिलकुल न करें।
कुछ बातों का रखें ध्यान :-
गौमूत्र हमेशा निश्चित तापमान पर ही रखा जाना चाहिए।
गौमूत्र के सेवन की मात्रा ऋतू पर निर्भर करती है। क्योंकि इसकी प्रकृति गर्म होती है इसीलिए गर्मियों में इसकी कम मात्रा का ही सेवान करना चाहिए।
8 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं को गौमूत्र के अर्क का सेवन वैद्य की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
गौमूत्र को मिट्टी, कांच या स्टील के बर्तन में ही रखें।
बाल लम्बे और घने बनाने के लिए क्या लगाये, बालों को लम्बा करने के उपाय, बालों को घना कैसे बनाये, बालों को लम्बा और कैसे बनाये, How to get long hair, Ways to get long and heavy hair
सुंदर दिखना सभी को बहुत पसंद है। चाहे लड़का हो या लड़की है सभी की खूबसूरती उनके बालों से होती है। लड़कियों और महिलाओं के बाल लम्बे और घने हो तो उनकी खूबसूरती में चार चाँद लग जाते है।
पर आजकल के वातावरण में प्रदूषण की मात्रा ज्यादा होने से बहुत कम लोगों के बाल ही लम्बे और घने होते है। प्रदूषण के कारण बाल झड़ते भी बहुत ज्यादा है ऐसे में बाल घने नहीं रह पाते। अपने बालों को लम्बा और घना करने के लिए बहुत से लोग महंगे पार्लर जाकर प्रोटीन स्पा का ट्रीटमेन्ट भी लेते है। पर फिर भी निराशा के अलावा कुछ भी हाथ नहीं लगता।
बालों को लम्बा और घना बनाने के उपाय
आइये जानते है हम अपने बालों को किन किन तरीको से लम्बा और घना बना सकते है।
केले :
2 केले और एक चम्मच निम्बू का रस लेकर मैश कर ले।
केलो की अच्छे से पेस्ट बनाकर बालों के जड़ो में लगाये।
30 से 40 मिंट के बाद बालों को हल्के गुनगुने पानी से धो लें।
इस उपाय को हफ्ते में एक बार जरूर करे।
नियमित रुप से यह उपाय करने से आपको जल्द ही फर्क दिखने लगेगा।
कैस्टर आयल :
कैस्टर आयल फैटी एसिड्स और विटामिन इ से भरपूर होता है।
सप्ताह में दो बार कास्टर आयल की जड़ो में मसाज करें।
ऐसा करने से कुछ ही समय में आपको अंतर दिखेगा।
प्याज का रस :
प्याज को घियाकस करके, उसका रस निकाल लीजिये।
रस को अपने जड़ो में लगाये।
15 से 20 मिनट बाद बालो को किसी भी माइल्ड शैम्पू से धो ले।
यह हफ्ते में सप्ताह में एक या दो बार अपनाये।
एलोवेरा :
एलोवेरा के पेड़ से इसकी टहनी काट ले।
टहनी से बीचो बीच कट मारकर जेल निकाले।
इस ताजा जेल को अपनी जड़ो पर लगाए।
30 मिनट बाद बालों को धो ले।
इस उपाय को सप्ताह में एक बार करें।
सेब का सिरका :
सेब के सिरका त्वचा और बालों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।
अपने बालों की लम्बाई के अनुसार सिरका ले।
सिरका और पानी बराबर मात्रा के मिला ले।
बालों को शैम्पू से धोने के बाद, पानी और सिरके के मिश्रण से बालों को धोइये।
यह मिश्रण हफ्ते में दो बार इस्तेमाल कर सकते है।
सेब का सिरका बालों को अच्छे से साफ़ करके उन्हें लम्बा और घना होने में मदद करता है।
अदरक का रस :
अदरक को घीयाकस करके उसका रस निचोड़ लीजिये।
इस रस जड़ो में लगाए।
25 से 30 मिनट बाद शैम्पू से धो ले।
अदरक का रस हमारे रक्त प्रवाह के संचरण को सहीं करता है जिससे बालों को लम्बा होने में मदद मिलती है।
इस उपाय को सप्ताह में एक बार इस्तेमाल कर सकते है।
आँवले का रस :
आँवले के रस और निम्बू के रस को बराबर मात्रा में मिला ले।
अब इस मिश्रण को बालों की जड़ो में लगाए।
20 मिनट बाद बाल धो ले।
आवला विटामिन से और एंटीऑक्सीडेंट तत्वों से भरपूर होता है।
यह हमारे बालों को लम्बा और घना बनाता है।
चावलों का पानी :
एक बर्तन में एक बाऊल चावल ले और दुगनी मात्रा के पानी में भिगो दे।
आधे घंटे से लेकर 1 घंटे तक भिगोने के बाद चावल के पानी को छान ले।
अब इस पानी से अपनी जड़ो की मसाज करें।
30 मिनट बाद बालों को शैम्पू से धो ले।
चावलों के पानी में कार्बोहाइड्रेट्स और एमिनो एसिड होता है।
यह बालों को लम्बा और मुलायम भी बनाता है।
शहद और नारियल तेल :
बराबर मात्रा में शहद और नारियल ले।
अब इस मिक्सचर को अपने बालों और जड़ो में लगाए।
अच्छे से मसाज करने के आधे घंटे बाद पानी से धो ले।
शहद एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है।
नारियल का तेल हमारी त्वचा और बालों दोनों के लिए अच्छा माना जाता है।
इस तरीको को सप्ताह में दो बार करने से आपके पतले बाल घने हो जायेंगे।
इन सभी उपाय को अलावा लम्बे और घने बालों के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार की अहम भूमिका होती है। सुंदर और मजबूत बाल पाने के लिए हरी सब्जियां, फल, दूध, दहीं, पनीर, अंडे आदि अपनी भोजन में जरूर शामिल करे।
जिस तरह गर्भवस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, वैसे ही शिशु के जन्म के बाद भी महिला को रिकवर होने में समय लगता है। यदि महिला की डिलीवरी नोर्मल होती है तो फिर भी महिला जल्दी फिट हो जाती है, लेकिन सिजेरियन डिलीवरी होने के बाद महिला को कम से कम तीन से छह महीने लग जाते हैं। ऐसे में महिला को डिलीवरी के बाद शिशु की देखभाल के साथ अपनी देखभाल का भी पूरा ख्याल रखना चाहिए ताकि कोई भी परेशानी न हो। डिलीवरी के बाद महिला की दिनचर्या, बॉडी, मानसिक रूप से आए बदलाव के कारण कुछ महिलाएं तनाव में भी आ जाती है जो डिलीवरी के बाद उनकी मुश्किलों को बढ़ाने के साथ शिशु की सेहत पर भी बुरा असर डाल सकता है। तो आइये आज हम आपसे इसी विषय में कुछ बातें करने जा रहे हैं जिनका ध्यान डिलीवरी के बाद महिला को जरूर रखना चाहिए।
प्रसव के बाद महिला एक महीने तक अपना ख्याल ऐसे रखें
प्रसव होने के बाद कम से कम एक महीने तक महिला को बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है, क्योंकि ऐसा माना जाता है की डिलीवरी के बाद केवल शिशु का ही जन्म नहीं होता है बल्कि यह महिला का भी दूसरा जन्म होता है। और महिला का शरीर इस दौरान काफी कमजोर होता है जिसके कारण महिला को डिलीवरी के बाद अपनी सेहत के प्रति ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। तो आइये अब विस्तार से जानते है की डिलीवरी के बाद महिला को कौन कौन सी सावधानी बरतनी चाहिए।
खाने पीने का ध्यान
पोषक तत्वों से भरपूर खान पान शरीर में एनर्जी को बढ़ाने के साथ जल्दी रिकवर होने में भी मदद करता है। ऐसे में महिला को हर दो से तीन घंटे में कुछ न कुछ हैल्दी जरूर खाना चाहिए जिससे महिला को पर्याप्त एनर्जी मिलने के साथ शिशु के लिए दूध का उत्पादन भी बेहतर तरीके से हो सके। खाने में महिला को सभी पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए, जैसे की दूध व् दूध से बने आहार, ड्राई फ्रूट, हरी सब्जियां व् फल, जूस, सूप, सलाद, आदि। हो सके तो डिलीवरी के बाद क्या क्या खाना चाहिए इसके लिए आप अपने डॉक्टर से भी डाइट चार्ट बनवा सकती है।
नींद
डिलीवरी के बाद एक महीने तक आपका भरपूर नींद लेना भी बहुत जरुरी होता है। क्योंकि भरपूर नींद बॉडी को आराम पहुंचाती है, जिससे जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है, और आप हमेशा फ्रैश और एनर्जी से भरपूर महसूस करती है। शिशु की देखभाल के साथ एक ही बार में भरपूर नींद लेना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन जब भी शिशु सोये उसके साथ सोकर अपनी नींद को पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए।
मदद के लिए किसी को रखें साथ
शिशु के जन्म के बाद शरीर में आई कमजोरी के कारण कभी भी आपको दिक्कत होने के चांस होते है, या कभी भी किसी भी चीज की जरुरत पड़ सकती है। ऐसे में अकेले न रहे कम से कम एक महीने तक अपनी मदद के लिए किसी न किसी को अपने पास जरूर रखें।
आराम करें
प्रसव होने के बाद कम से कम एक महीने तक महिला को पूरी तरह से बेड रेस्ट करना चाहिए, क्योंकि जितना महिला बॉडी को रेस्ट देती है उतनी ही जल्दी बॉडी को रिकवर होने में मदद मिलती है। साथ ही एक महीने तक किसी भी तरह का घर का काम करने, भारी सामान उठाने, पेट के बल काम करने, व्यायाम आदि करने से बचना चाहिए क्योंकि डिलीवरी के बाद ऐसे काम करने के कारण आपको परेशानी हो सकती है।
थोड़ा चलें
आराम करने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है की आप सारा दिन बेड पर रहे, डिलीवरी के एक से डेढ़ हफ्ते बाद आप खाना खाने के बाद थोड़ा चले। इससे मांसपेशियों को आराम मिलता है जिससे बॉडी में ऊर्जा का संचार होता है, लेकिन ज्यादा तेजी से वॉक आदि न करें।
तनाव न लें
डिलीवरी के बाद आने वाली शरीर में कमजोरी, शिशु के जन्म के बाद जिम्मेवारी बढ़ने के कारण कई बार महिला तनाव में आ सकती है। लेकिन डिलीवरी के बाद तनाव लेना केवल महिला को ही सेहत सम्बन्धी समस्या से ग्रसित नहीं करता है बल्कि इसके कारण शिशु की सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है ऐसे में महिला को चाहिए की वो अपने दिमाग को शांत रखे और धैर्य से काम ले, ताकि कोई भी दिक्कत न हो।
फिटनेस के बारे में न सोचें
कई महिलाएं डिलीवरी एक बाद बढ़ते वजन को लेकर परेशान हो जाती हैं, लेकिन वजन घटाने के बारे में डिलीवरी के कम से कम एक महीने बाद में सोचना चाहिए। क्योंकि शिशु के जन्म के बाद शरीर काफी कमजोर हो जाता है ऐसे में व्यायाम करने से महिला को सेहत सम्बन्धी समस्या होने के साथ शिशु के विकास पर भी असर पड़ सकता है, इसीलिए व्यायाम आदि करने से डिलीवरी के बाद थोड़े समय के लिए परहेज करना चाहिए।
संक्रमण से बचाव
यदि आपकी सिजेरियन डिलीवरी हुई है तो इस दौरान महिला को टाँके लगाए जाते है, कई बार नोर्मल डिलीवरी के दौरान भी महिला को टाँके आते हैं। ऐसे में महिला को टांको की अच्छे से देखभाल करनी चाहिए, क्योंकि यदि टांको की साफ़ सफाई न रखी जाए, या उन पर पानी ज्यादा लगाया जाए तो इसके कारण महिला को संक्रमण के कारण परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। इसके अलावा टांको की जांच करवाते रहना चाहिए और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाई को नियमित टांको पर लगाना चाहिए ताकि महिला को संक्रमण से बचाव और घाव को जल्दी भरने में मदद मिल सके।
उठने बैठने में सावधानी
केवल खान पान में ही नहीं बल्कि डिलीवरी के बाद महिला को उठने बैठने में भी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि कई बार अचानक उठने या बैठने के कारण महिला की कमर में दर्द, टांगो में दर्द या अचानक से घाव में दर्द जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में जब भी महिला उठना या बैठना चाहे इसके लिए या तो महिला को किसी चीज का सहारा लेना चाहिए और यदि आप लेटी हुई हैं तो फिर करवट लेकर उठना चाहिए, ऐसे झटका आदि नहीं लगता है और महिला आराम से उठ बैठ सकती है।
शिशु के लिए भी रखे ध्यान
डिलीवरी के बाद महिला अकेली नहीं होती है बल्कि जन्म के बाद भी शिशु कम से कम छह महीने तक अपनी जरूरतों के लिए अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। ऐसे में महिला को शिशु के बेहतर विकास के लिए और उसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए हर वो चीज खानी चाहिए जिससे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके।
तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान डिलीवरी के बाद महिला को रखना चाहिए, क्योंकि महिला जितनी अच्छे से अपनी केयर करती है उतना ज्यादा महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है। साथ ही महिला का जल्दी स्वस्थ होना शिशु के विकास को बढ़ाने में भी मदद करता है।
आज जब हर जगह कोरोना वायरस का खतरा मंडरा रहा है, हर हॉस्पिटल में संक्रमित मरीज़ है ऐसे में किसी आम बिमारी के इलाज के लिए भी लोग हॉस्पिटल में जाने या डॉक्टर से मिलने में घबरा रहे हैं। क्योंकि कोरोना वायरस एक छूत के रोग की तरह है जो छूने से भी फ़ैल रहा है। ऐसे में यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो यह महिला के लिए और भी परेशानी भरा समय हो सकता है।
लेकिन यह परेशानी प्रेग्नेंट महिला ही दूर कर सकती है। इसके अलावा यदि वैसे भी किसी कारण की वजह से यदि आप डॉक्टर के पास नहीं जा पा रही हैं और आप प्रेग्नेंट हैं तो भी अपना और अपने बच्चे का ध्यान रख सकते हैं। अब आप यह सोच रहे होंगे की कैसे, तो आइये अब हम इस आर्टिकल में प्रेग्नेंट महिला को कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं जिनसे बिना डॉक्टर को दिखाएं प्रेग्नेंट महिला अपना व् होने बच्चे का ख्याल रख सकती है।
डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का सेवन करें
प्रेग्नेंट महिला यदि किसी कारण डॉक्टर के पास नहीं जा पा रही है तो पूरी प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर द्वारा बताये गए मल्टीविटामिन का सेवन गर्भवती महिला को करते रहना चाहिए। क्योंकि मल्टीविटामिन का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में आयरन, कैल्शियम व् अन्य पोषक तत्वों की मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है। साथ ही प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है व् बच्चे का विकास अच्छे से होता है।
विटामिन सी व् अन्य पोषक तत्वों से युक्त आहार लें
खान पान का गर्भवती महिला को अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। जैसे की विटामिन सी युक्त आहार लेना चाहिए जिससे बॉडी के सभी अंगो तक आयरन को अच्छे से पहुँचने के साथ प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद मिल सके। इसके अलावा कैल्शियम, प्रोटीन, आयरन, फोलिक एसिड आदि युक्त आहार का भरपूर सेवन करना चाहिए। यदि गर्भवती महिला अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखती है, अपने आहार को समय से लेती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला फिट रहती है और बच्चे को भी भरपूर पोषक तत्व मिलते हैं जिससे बच्चे का शारीरिक व् मानसिक विकास बेहतर तरीके से होता है।
अपने हाथों को धोते रहें और साफ़ सफाई का ध्यान रखें
प्रेगनेंसी के दौरान संक्रमण व् बिमारियों से बचने लिए प्रेग्नेंट महिला को समय समय पर हाथ धोते रहना चाहिए, नाख़ून काटकर रखने चाहिए। इससे हाथों में जर्म्स नहीं रहते हैं जिससे प्रेग्नेंट महिला को और बच्चे को बिमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही नियमित रूप से महिला को नहाना भी चाहिए इससे शरीर की साफ़ सफाई होती है जिससे प्रेग्नेंट महिला को बिमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला को अपने आस पास की साफ़ सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए, ताकि महिला व् बच्चा स्वस्थ रहे।
रिस्क न करें
गर्भवती महिला को किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहिए, जैसे की यदि तबियत खराब हो रही है तो जब तक पूरी तबियत खराब न हो तब तक डॉक्टर से संपर्क न करना, खान पान में लापरवाही करना, अपनी दवाइयों के सेवन या जांच में देरी करना आदि। यदि प्रेग्नेंट महिला इस तरह के रिस्क लेती है तो इससे महिला व् बच्चे को रिस्क हो सकता है लेकिन यदि महिला तबियत खराब होने पर डॉक्टर से संपर्क करती है, खान पान नींद आदि में लापरवाही नहीं करती है, जांच समय से करवाती है तो इससे महिला व् बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
भरपूर आराम करें
भरपूर आराम करने से न केवल गर्भवती महिला और बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, बल्कि इससे प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी भी बढ़ती है। ऐसे में बिना डॉक्टर को दिखाएं महिला अपने आप को स्वस्थ रखने के लिए व् बच्चे के बेहतर विकास के लिए महिला को अपने आराम में लापरवाही नहीं करनी चाहिए ।
डॉक्टर के संपर्क में रहें
यदि आप किसी कारण डॉक्टर के पास नहीं जा रहे हैं लेकिन फ़ोन के माध्यम से हमेशा डॉक्टर के साथ संपर्क में रहे और अपने स्वास्थ्य का हाल डॉक्टर को जरूर बताएं। ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।
तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान रखने से कोरोना वायरस के चलते प्रेग्नेंट महिला डॉक्टर से बिना मिलें अपना और अपने बच्चे का ध्यान रख सकती है। इसके अलावा समय समय पर डॉक्टर से आपको बात करते रहना चाहिए और अपनी हालत के बारे में बताते रहना चाहिए।
आज के समय में सभी को अपने स्वास्थ्य के प्रति बहुत अलर्ट रहना चाहिए। क्योंकि सेहत के प्रति की गई थोड़ी सी लापवाही आपको बड़ी परेशानी यानी की किसी बिमारी के चपेट में ला सकती है। ऐसे ही बीमारियों में थायरॉइड भी एक समस्या बनी हुई है, यह समस्या इतनी गंभीर होती है की इससे महिलाओ को गर्भधारण में भी समस्या आती है। साथ ही यह समस्या महिलाओं में पुरुषो की अपेक्षा अधिक होती है। थायरॉइड के होने पर व्यक्ति का वजन या तो बहुत अधिक बढ़ने लग जाता है या बहुत कम हो जाता है। तो आइये अब हम आपको विस्तार से बताते हैं की थायरॉइड क्या होता है।
थायरॉइड क्या होता है:-
आपके गले के सामने वाले हिस्से में स्वरयंत्र के नीचे एक हॉर्मोन ग्रंथि होती है जिसे थायरॉइड ग्रंथि कहा जाता है। इसका आकार तितली के जैसा होता है और इसके दो भाग होते हैं जो आपके श्वसन नली से लिपटे हुए होते हैं। यह ग्रंथि तीस ग्राम से भी कम वजन की होती है। थायरॉइड एंडोक्राइन प्रणाली का हिस्सा होती है। यह प्रणाली कई अंगों और ऊतकों से मिलकर बनी है जो हार्मोन यानी रासायनिक पदार्थों को पैदा करते हैं और उसके बाद इकठ्ठा करके और रक्त में भेजते है।
थायरॉइड के प्रकार:-
थायरॉइड दो प्रकार का होता है हाइपरथायराइडिज्म और हाइपोथायराइड।
हाइपरथायराइडिज्म क्या होता है:-
इस तरह के थायरॉइड के होने के कारण वजन में बहुत जल्दी कमी आती है। और जब यह थायरॉइड होता है तो आपको चिड़चिड़ापन होना, मासिक धर्म अनियमित होना, तनाव होना, बालों का झड़ना व् टूटना, अनिंद्रा, बार बार यूरिन पास करने की इच्छा आदि लक्षण होते हैं।
हाइपोथायराइड क्या होता है:-
थायरॉइड की अवस्था में वजन तेजी से बढ़ने लगता है। कब्ज़ होना, आवाज़ भारी होना, यादाश्त कमजोर होना, ठण्ड का बर्दाश न होना, शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोरी का होना हाइपोथायराइड होने के आम लक्षण हैं।
थायरॉइड के क्या लक्षण होते हैं:-
पाचन क्रिया कमजोर होने लगती है, कब्ज़ की परेशानी हो सकती है। साथ ही इससे मेटाबोलिज्म भी धीमा होना लगता है।
बॉडी में ऊर्जा की कमी होने लगती है, बहुत जल्दी थकावट व् कमजोरी का अहसास होने लगता है।
बालों के झड़ने की समस्या हो जाती है यहां तक की आइब्रो के बाल भी झड़ने लगते है।
महिलाओं को आँखों में खुजली या सूजन की समस्या भी हो सकती है।
पीरियड्स का अनियमित होना भी थायरॉइड का ही लक्षण होता है।
हाथों पैरों में सूजन का अनुभव भी होने लगता है।
वजन बहुत तेजी से कम या ज्यादा होने लगता है।
आवाज़ में भारीपन, गले में सूजन आदि की समस्या भी हो सकती है।
मस्तिष्क से जुडी परेशानी जैसे की सोचने की शक्ति का कमजोर होना, यादाश्त पर असर पड़ना आदि की समस्या हो जाती है।
नाखूनों के रंग में भी बदलाव आने लगता है।
हार्टबीट तेज होना अधिक पसीना आना भी थायरॉइड का ही लक्षण होता है।
थायरॉइड होने के क्या कारण होते है:-
ज्यादा दवाइयों का सेवन:-
यदि आप बहुत अधिक पेन किलर का सेवन करते हैं तो इसके कारण थायरॉइड ग्रंथि पर बुरा प्रभाव पड़ता है जिसके कारण आपो थायरॉइड की समस्या से जूझना पड़ सकता है।
अधिक तनाव:-
ज्यादा टेंशन या परेशान होने के कारण थायरॉइड ग्रंथि बहुत ज्यादा प्रभावित होती है। और यह हॉर्मोन बहुत तेजी से स्त्रावित होना शुरू करते है जिसके कारण आपको इस समस्या का सामना करवाना पड़ सकता है।
आयोडीन की कमी या ज्यादा होना:-
शरीर के फिट रहने के लिए पोषक तत्वों को शरीर में होना जरुरी होता है। ऐसे ही शरीर में आयोडीन की मात्रा का सही होना भी बहुत जरुरी होता है। और साथ ही आयोडीन का अधिक मात्रा में होना और कम होना दोनों ही आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक होते है। इसके कारण भी आप थायरॉइड की समस्या से परेशान हो सकते है।
सोया का अधिक सेवन करने के कारण:-
कई लोग सोया पाउडर का सेवन प्रोटीन के रूप में करते है जो आपकी सेहत पर बुरा प्रभाव डालती है। और इसके कारण भी आपको थायरॉइड की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
अनुवांशिक भी हो सकता है थायरॉइड:-
थायरॉइड की समस्या अनुवांशिक भी हो सकती है, इसका मतलब होता है यदि पहले से ही आपके परिवार में किसी को यह समस्या होती है तो हो सकता है की आपको भी इस समस्या से जूझना पड़े।
प्रदूषण व् बदलती जीवनशैली:-
प्रदूषण व् बदलती जीवनशैली का प्रभाव भी आपकी सेहत पर पड़ता है। जिसके कारण आपको इस समस्या से परेशान होना पड़ सकता है। क्योंकि इसके कारण भी आपकी थायरॉइड ग्रंथि प्रभावित होती है।
प्रेगनेंसी के दौरान:-
प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव एक साथ होते हैं जिसके कारण आपकी थायरॉइड ग्रंथि प्रभावित हो सकती है ऐसे में इस समय थायरॉइड होने की सम्भावना महिला को ज्यादा होती है।
थायरॉइड से बचने के उपाय:-
थायरॉइड की समस्या के दौरान यदि अपना अच्छे से ध्यान रखा जाएँ, और सुरक्षा बरती जाए तो आपको इस समस्या से बचाव हो सकता है, ऐसे में आइये आज हम आपको इस समस्या से बचाव के लिए कुछ टिप्स बताने जा रहे है।
थायरॉइड की समस्या से बचने के लिए रोगी को भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए जिससे उसके शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ बाहर निकल सकें, और उसे स्वस्थ होने में मदद मिलें।
विटामिन ए का सेवन थायरॉइड के रोगी को भरपूर मात्रा में करना चाहिए। इसके लिए हरी सब्जियों, गाजर व अन्य विटामिन ए युक्त पदार्थो का सेवन करना चाहिए। इससे आपके थायरॉइड को कण्ट्रोल में रहने में मदद मिलती है।
नशीले पदार्थो का सेवन जैसे की धूम्रपान, शराब, तम्बाकू आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। जितना हो सकें इन चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
सफ़ेद नमक की जगह अपने आहार में सेंधा नमक का इस्तेमाल करना चाहिए।
हफ्ते में दो से तीन बार नारियल पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।
नियमित सुबह उठकर दो चम्मच तुलसी के पत्तों का रस और आधा चम्मच एलोवेरा जूस का सेवन करने से आपको इस रोग से बचने में मदद मिलती है।
रोजाना सुबह खाली पेट लौकी के जूस का सेवन करें इससे भी आपके थायरॉइड की कण्ट्रोल करने के साथ हमेशा के लिए इस समस्या से छुटकारा पाने में मदद मिलती है।
ताजे हरे धनिये को पीस कर उसकी चटनी बनाएं अब एक चम्मच चटनी को ताजे पानी में घोल कर पी जाएँ ऐसा करने से आपको थायरॉइड की समस्या से बचने में आराम मिलता है।
आयोडीन का न तो अधिक और न ही कम सेवन करें, क्योंकि आयोडीन का अधिक या कम मात्रा में सेवन आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है।
लाल प्याज को काटकर रात को सोने से पहले अपने गले की मसाज करें और उसे साफ़ न करें और सो जाएँ इस उपाय को नियमित करें इससे भी आपको थायरॉइड से बचने में मदद मिलती है।
हल्दी वाले दूध का सेवन भी नियमित रूप से करने से आपको थायरॉइड में फायदा होता है।
डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए, और समय समय अपने थायरॉइड की जांच करवाते रहना चाहिए।
तो यह है थायरॉइड से जुडी कुछ बातें, और इसके क्या कारण होते है। थायरॉइड से बचने के बहुत से उपाय आयुर्वेद में भी दिए गए हैं ऐसे में आप इस समस्या से बचने के लिए ऊपर दिए गए टिप्स का भी इस्तेमाल कर सकते है। इसके अलावा यदि आपको कभी थायरॉइड के लक्षण अपनी बॉडी में दिखाई दें तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। बल्कि आपको इससे बचने के उपाय करने चाहिए, या एक बार डॉक्टर से जरूर चेक करवाना चाहिए।
प्रेगनेंसी के आठवें महीने के लिए टिप्स, प्रेगनेंसी टिप्स, प्रेगनेंसी के आठवे महीने में भूलकर भी न करें यह काम, प्रेगनेंसी के लिए टिप्स, Tips for Pregnancy, Pregnancy eighth month tips
वैसे तो प्रेगनेंसी का पूरा समय यानी की पूरे नौ महीने महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए, लेकिन आठवे महीने में थोड़ा अधिक सावधान रहने की जरुरत होती है। क्योंकि यदि इस दौरान आप किसी तरह की लापरवाही करती हैं तो इसके कारण पेट पर दबाव पड़ने या झटका आदि लगने के कारण आपको परेशानी हो सकती है। साथ ही इससे समय से पहले डिलीवरी होने के चांस होते हैं जिससे की बच्चे और महिला दोनों पर ही बुरा असर पड़ता है। तो आइये अब आठवे महीने में आपको प्रेगनेंसी के दौरान किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए विस्तार से जानते हैं।
यात्रा करने से बचें
इस समय लम्बी यात्रा करने से बचना चाहिए, और इस समय जितना हो सके आपको आराम करना चाहिए। यदि आप अधिक यात्रा करती है तो इसके कारण आपको परेशानी जैसे की पेट में दर्द आदि की समस्या हो सकती है, पेट पर जोर पड़ता है, साथ ही आठवे महीने में महिला का वजन भी सही होता है जिसके कारण उसे चलने फिरने में भी अधिक दिक्कत हो सकती है।
पेट पर न डाले जोर
ऐसा कोई भी काम न करें जिससे की आपके पेट पर जोर पड़े इससे गर्भाशय में चोट आदि लग सकती है, जिसके कारण समय से पहले प्रसव होने के चांस बढ़ जाते हैं। इसके अतिरिक्त आपको भारी वजन नहीं उठाना चाहिए, झुककर काम नहीं करना चाहिए, पैरों के बल अधिक देर तक नहीं बैठना चाहिए। ज्यादा देर तक खड़े भी नहीं रहना चाहिए इससे भी पेट पर दबाव पड़ता है। जिसके कारण आपको अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
ज्यादा सीढ़ियां न चढ़ें
प्रेगनेंसी के आठवे महीने में जितना हो सके आपको सीढ़ियां चढ़ना व् उतरना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे आपको थकान आदि हो सकती है। साथ ही पैर फिसल सकता है, जिसके कारण आपको आपको दिक्कत हो सकती है, ऐसे में ऐसी कोई परेशानी न हो हो इसके लिए जितना हो सके आठवे महीने में में इससे परहेज करना चाहिए।
खान पान का विशेष ध्यान रखें
आठवे नौवें महीने में यदि आप अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखते हैं तो इससे शिशु को बहुत फायदा होता है, और उसका विकास और बेहतर तरीके से होता है। साथ ही गर्भवती महिला को भी एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है, इस दौरान आपको पौष्टिक तत्वों से भरपूर आहार खाना चाहिए, पेय पदार्थो का भरपूर सेवन करना चाहिए, ताकि आपको फिट रहने में मदद मिलें साथ ही किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो। और थोड़ी थोड़ी देर बाद कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए।
नींद भरपूर लें
थकान की समस्या से बचने व् बॉडी को आराम देने के लिए इस दौरान आपको अपनी नींद का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस समय आपको रात को भरपूर नींद लेने के साथ दिन में भी थोड़ा आराम करना चाहिए इससे आपको फिट रहने के साथ फ्रैश महसूस करने में भी मदद मिलती है।
थोड़ा एक्टिव भी रहें
खाने के बाद हलकी वॉक, सुबह के समय थोड़ा योगासन आदि करना चाहिए। लेकिन बॉडी पर ज्यादा जोर नहीं डालना चाहिए, ऐसा करने से बॉडी में ब्लड फ्लो को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। जिससे आपको फिट रहने में मदद मिलती है।
डॉक्टर से ले राय
आठवे महीने में होने वाली छोटी से छोटी परेशानी को भी नज़रअंदाज़ न करें, क्योंकि थोड़ी सी भी लापरवाही यदि आप करते हैं और बाद में वो बढ़ जाती है तो इसके कारण समय से पहले प्रसव होने के चांस होते हैं। ऐसे में आपको डॉक्टर से राय लेनी चाहिए और कोई भी दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से चेक करवाना चाहिए।
तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान आपको प्रेगनेंसी के आठवे महीने में रखना चाहिए ताकि आपको किसी भी तरह से होने वाली परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके। और साथ ही ऐसा करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह से होने वाली परेशानी से बहाव करने में मदद मिलती है।
विडिओ प्रेग्नेंसी के आठवें महीने में इन बातों का ध्यान रखें