Home Blog Page 178

तीन से नौ महीने के बीच गर्भ में शिशु ये हरकतें करता है?

शादी भले ही किसी भी महिला के अस्तित्व को पूरा करती है, लेकिन वो सम्पूर्ण तभी होती है जब वह अपनी संतान को इस दुनिया में लाती है, और प्रकृति ने भी यह नियम केवल महिलाओ को ही दिया है की वि नौ महीने तक शिशु को गर्भ में रखकर एक शिशु को जन्म देती है, माँ बनने का अहसास महिला को उस दिन से ही होने लग जाता है जब उसे पता चलता है की वो माँ बनने वाली है, और समय के साथ शिशु भी गर्भ में हरकतें करके अपने होने का अहसास अपनी माँ को दिलाता है, और यह अनुभव महिला के लिए दुनिया का सबसे ख़ास और अनोखा अनुभव होता है, विशेषज्ञों का भी कहना है की जब शिशु थोड़ा बड़ा हो जाता है तो उसमे सुनने की क्षमता विकसित हो जाती है, और वह बाहर से सुनाई देने वाली सभी आवाज़ को अपनी यादों से जोड़ लेता है।

इन्हें भी पढ़ें:- जुड़वाँ बच्चा क्यों और कैसे होता है? पूरी जानकारी

garbh

और जन्म के बाद भी उसे उन आवाज़ की पहचान होती है, यदि आप शिशु को गर्भ में कोई गाना सुनाती है, तो जन्म के बाद उसके रोने पर यदि आप वो उसे सुनाएँ तो वो चुप हो जाता है, इसके अलावा बच्चे को स्वाद का अनुभव भी होने लगता है, पांचवे महीना तक शिशु गर्भ में थोड़ा घूमने भी लग जाता है, हाथ पैर मारता है जिसका अनुभव माँ को होने लगता है, गर्भ के चौबीसवें हफ्ते में शिशु मुस्कुराना भी सीख जाता है, इसके अलावा और भी ऐसी बहुत सी हरकतें है जो शिशु गर्भ में करता है, तो आइये अजा हम आपको माँ द्वारा लिए जाने वाले इस खास अनुभव को आपसे शेयर करते हैं, और आपको बताते हैं की शिशु गर्भ में क्या क्या हरकतें करता है।

सात से पंद्रह सफ्ताह तक बच्चा करता है गर्भ में ये हरकतें:-

जैसे ही बच्चे के दिल की धड़कन आती है, उसके बाद बच्चा धीरे धीरे विकसित होने लगता है, और कुछ ऐसी हरकतें करने लगता है, जिनका आप अनुभव तो नहीं कर सकती हैं, परन्तु बच्चा गर्भ में ये सब करता है, जैसे की आठवें हफ्ते तक आपका बच्चा मुड़ना व् चौंकना शुरू कर देता है, नौवे हफ्ते में शिशु हिचकी लेना शुरू कर देता है, दसवें हफ्ते तक आते आते आपका बच्चा अपने जबड़े को खोल सकता है, अपना सिर घुमा सकता है, ग्यारह से चौदह हफ्ते के बीच वो अंगड़ाई लेना शुरू कर देता है, अपनी आँखों को भी घुमा सकता है, जब आप तीसरे महीने के लिए अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए जाते है, तो कई बार आपका बच्चा हरकरते कर रहा होता है, और आप उसे स्कैनिंग के जरिये देख सकते है।

इन्हें भी पढ़ें:- प्रेगनेंसी में इन चीजों को खाएं! बच्चा हष्ट पुष्ट और बुद्धिमान होगा

चौथे या पांचवे महीने में बच्चा हिलना शुरू कर देता है:-

पांचवे महीने की शुरुआत में या चौथे महीने के आखिर में आप बच्चे के हिलने डुलने वाली हरकत का भी अनुभव कर सकते है, इस समय बच्चा हमेशा नहीं परन्तु शाम को या सुबह उसके हिलने का और घूमने का अनुभव कर सकती है, बच्चे को घूमने में आसानी इसीलिए होती है, क्योंकि एमनियोटिक थैली में इतना द्रव्य होता है की आपका बच्चा आसानी से घूम सकता है, साथ ही जब आप कहीं तेज आवाज़ में या अचानक से चौंक जाती हैं तो इसका आभास भी आपके बच्चे को होता है, और वो भी चौंक जाता है और हिलने लगता है, इसीलिए प्रेगनेंसी में जितना हो सकें आपको शोर वाले स्थान से दूर रहना चाहिए।

छठे और सातवें महीने में शिशु करता है यह हरकतें:-

shishu

इस समय पर बच्चा मुस्कुराना भी सीख जाता है, कई बच्चे तो माँ के गर्भ में अंगूठा भी चूसते है, साथ ही इस समस्य पर बच्चे की सुनने की क्षमता और भी तेजी से बढ़ती है, साथ ही आपके गर्भ में माध्यम से उन्हें तेज रौशनी का भी आभास होने लगता है, इस समय पर महिलाओ को जितना हो सकें अपने गर्भ में पल रहे शिशु से बातें करनी चाहिए, उन्हें पौराणिक कहानियां सुनानी चाहिए, बच्चे इन सब चीजों को जन्म के बाद तक याद रखते है, इसके अलावा इस समय तक बच्चे के अंगो का पूर्ण विकास भी हो चुका होता है, जिसके कारण वह और तेजी से और दिन भर में ज्यादा समय के लिए घूमना शुरू कर देते है।

आठवें और नौवें महीने में बच्चे की हरकतें:-

इस समय बच्चे का वजन तेजी से बढ़ रहा होता है, क्योंकि आपकी डिलीवरी का समय पास आने वाला होता है, और साइज बढ़ने के कारण बच्चे के पास घूमने के लिए कम जगह होती है, जिसके कारण वो बाहर आने के लिए और हरकतें करने लगता है, इसीलिए आठवें महीने में आपको अधिक सावधानी बरतनी चाहिए, नौवे महीने में बच्चा अपनी पोजीशन बदलने लगता है, उसका सिर नीचे की तरफ और टाँगे ऊपर की और होने लगती है, और नौवें महीने में बच्चे के हिलने डुलने का अनुभव आपको होता ही रहता है, और यह सुखद अहसास और बजी बढ़ जाता है, जब वो शिशु जन्म लेकर आपकी गोद में आता है, और आप असलियत में उसकी हरकतों का अनुभव लेते है।

गर्भवती महिला के लिए ध्यान देने योग्य बातें:-

महिला को जितना हो सकें नशीले पदार्थ, ज्यादा शोर, से दूर रहना चाहिए यह बच्चे के ऊपर बुरा प्रभाव डालते हैं, साथ ही आपको बीस से चौबीस हफ्ते के बीच में भी यदि बच्चे के हिलने डुलने का कोई आभास नहीं होता है तो इस बारे में आपको डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि बच्चे की किसी तरह की मोमेंट का न होना गलत होता है, साथ ही आपको अपने आहार अपने स्वास्थ्य से सम्बंधित भी किसी तरह की लापवाही नहीं बरतनी चाहिए।

तो ये है वो हरकतें जो शिशु गर्भ में होने पर करता है, इसके अलावा महिला को तनाव नहीं लेना चाहिए क्योंकि शिशु अपनी माँ की परेशानी का अहसास कर सकता है,जिससे उसके विकास में समस्या आती है, बच्चों के गर्भ में होने पर आपको उन्हें अच्छी अच्छी कहानियां सुनानी चाहिए, उसे खुश रखने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि आपका बच्चा स्वस्थ और हैल्थी हो।

इन्हें भी पढ़ें:- गर्भवती महिलाओ को मातृत्व का अहसास ऐसे होने लगता है!

सुबह नाश्ता देरी से करने पर गर्भ में शिशु को यह होता है

नाश्ता दिन का सबसे अहम खाना होता है क्योंकि यह दिन का सबसे पहला आहार होता है। और दिन का पहला आहार यदि अच्छा हो तो पूरा दिन ही अच्छा होता है। साथ ही गर्भवती महिला के लिए तो नाश्ता बहुत ही अहम होता है। क्योंकि यदि गर्भवती महिला अपना नाश्ता अच्छे से करती है। तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को पूरा दिन एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है साथ ही दिनभर होने वाली परेशानियों को भी कम किया जा सकता है।

इसके अलावा गर्भ में पल रहा शिशु भी अपनी माँ पर ही पूरी तरह से निर्भर करता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला के लिए नाश्ता अहम होता है तो बच्चे के लिए भी होता है। इसीलिए यदि गर्भवती महिला को नाश्ता स्किप करने या देरी करने से परेशानियां होती है तो बच्चे को भी थोड़ी समस्या हो सकती है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको सुबह नाश्ता देरी से करने पर गर्भ में शिशु को क्या होता है उस बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भ में शिशु रहता है सुस्त

दिन का पहला आहार यदि प्रेग्नेंट महिला समय लेती है तो ऐसा करने से महिला को एनर्जी मिलती है और जब महिला एक्टिव रहती है तो बच्चा भी एक्टिव रहता है। लेकिन नाश्ता स्किप करने की वजह से प्रेग्नेंट महिला को सुस्त महसूस हो सकता है और जब महिला सुस्त महसूस करती है तो गर्भ में बच्चा भी एक्टिव महसूस नहीं करता है। जिसके कारण हो सकता है की आपको शिशु की हलचल कम महसूस हो।

शिशु का विकास हो सकता है प्रभावित

वैसे तो गर्भ में शिशु अपनी जरूरतों को माँ के शरीर से पूरा कर लेता है। लेकिन फिर भी जब महिला की रात के बाद लिया जाने वाला पहला आहार यानी सुबह का नाश्ता देरी से लेती है तो इसकी वजह से महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। जिसके कारण हो सकता है शिशु के विकास के लिए जरुरी पोषक तत्व भी शिशु तक न पहुंचें। ऐसे में बच्चे को यदि पोषक तत्व भरपूर मात्रा में नहीं मिलते हैं। तो इसकी वजह से बच्चे के विकास में कमी आ सकती है।

समय से पहले बच्चे के जन्म का रहता है खतरा

ऐसा माना जाता है की यदि महिला सुबह का नाश्ता समय से नहीं लेती है तो इसके कारण समय से पहले बच्चे के जन्म का खतरा बढ़ जाता है। क्योंकि रात के खाने और नाश्ते में कम से कम दस से बारह घंटे का गैप हो जाता है जो की गर्भवती महिला और बच्चे दोनों के लिए सही नहीं होता है। ऐसे में बच्चे का जन्म समय से पहले होने के कारण बच्चे के वजन में कमी व् अन्य शारीरिक परेशानियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आप अपना नाश्ता समय से नहीं लेती है या स्किप कर देती हैं। तो आपको भी अपना नाश्ता समय से लेना चाहिए। ताकि आप और आपका बच्चा दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

5 दिन से ज्यादा पीरियड्स होने की समस्या से बचने के घरेलू इलाज

0

पीरियड्स का मासिक चक्र अठाइस दिन का होता है लेकिन कुछ महिलाओं या लड़कियों को यह दो चार दिन आगे पीछे हो जाते हैं। और ऐसा होने पर परेशान होने की जरुरत नहीं होती है क्योंकि ऐसा होना आम बात होती है। साथ ही पीरियड्स महिला को तीन से पांच दिन तक होते हैं और शुरूआती दो दिनों में ब्लीडिंग की समस्या ज्यादा होती है। लेकिन कुछ महिला को पांच दिन से ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। साथ ही ब्लीडिंग भी ज्यादा होती है ऐसे में इस परेशानी को अनियमित माहवारी कहते हैं।

यदि किसी महिला को यह परेशानी होती है तो महिला को इसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि अनियमित माहवारी की समस्या के कारण महिला के शरीर में बहुत ज्यादा कमजोरी आती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको अनियमित माहवारी की समस्या से बचने के कुछ आसान नुस्खे बताने जा रहे हैं। और यदि महिला या लड़की इन बातों का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

पीरियड्स ज्यादा दिन तक होने के कारण

  • बॉडी में हार्मोनल असंतुलन होना।
  • गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन।
  • गर्भपात के बाद महिला को यह दिक्कत हो सकती है।
  • किसी शारीरिक बिमारी से ग्रसित होने के कारण, इसके कारण पीरियड्स मिस भी हो सकते हैं।
  • तनाव से ग्रसित महिला को भी यह परेशानी होने की सम्भावना अधिक होती है।
  • पीरियड्स के दौरान आराम करने की बजाय बॉडी पर अधिक दबाव डालने के कारण।

ज्यादा दिन तक पीरियड्स होने की समस्या से बचने के आसान तरीके

यदि कोई महिला ज्यादा दिन तक पीरियड्स होने की समस्या से परेशान है तो कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है। तो आइये अब ऐसे ही कुछ टिप्स के बारे में विस्तार से जानते हैं।

तनाव लेने से बचें: महिला या पीरियड्स के दौरान मानसिक रूप से बहुत अधिक परेशान रहती है तो इसके कारण ज्यादा दिनों तक ब्लीडिंग होने के साथ ब्लड फ्लो की परेशानी भी ज्यादा होती है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए मानसिक रूप से रिलैक्स रहें।

सम्बन्ध बनाएं: यदि किसी शादीशुदा महिला को यह परेशानी है तो उस महिला को पीरियड्स के दौरान सम्बन्ध बनाना चाहिए। ऐसा करने से पीरियड्स जल्दी खत्म हो जाते हैं साथ ही पीरियड्स के दौरान होने वाली दर्द आदि की समस्या से भी महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

व्यायाम करें: नियमित रूप से व्यायाम करने के साथ पीरियड्स आने पर भी महिला को हल्का फुल्का व्यायाम करते रहना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से बॉडी की सभी क्रियाओं की नियमित रूप से काम करने में मदद मिलती है। और पीरियड्स ज्यादा दिनों तक आने की परेशानी से भी राहत मिलती है।

विटामिन सी युक्त आहार: ज्यादा दिन पीरियड्स आने की परेशानी से बचने के लिए विटामिन सी युक्त आहार को अपनी डाइट में महिला को शामिल करना चाहिए। क्योंकि विटामिन सी बॉडी में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन की मात्रा को कम कर देता है। साथ ही विटामिन सी गर्भाशय की अंदरूनी सतह को जल्दी तोड़ने में मदद करता है जिससे पीरियड्स जल्दी खत्म होते हैं। लेकिन महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की विटामिन सी का भरपूर सेवन करने के साथ महिला को पानी का भी भरपूर सेवन करना चाहिए।

सौंफ: एंटीस्पास्मोडिक तत्व से भरपूर सौंफ का सेवन पीरियड्स से एक हफ्ता पहले या पीरियड्स के दौरान करने से पीरियड्स से जुडी हर समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

खाने की चीजों का ध्यान रखें: चाय, कॉफ़ी, ठंडी चीजें, मसालेदार खाना आदि का सेवन अधिक मात्रा में न करें। बल्कि अपनी डाइट में पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करें। ऐसा करने से भी पीरियड्स को नियमित करने में मदद मिलती है।

पपीते का जूस: पपीते के जूस का सेवन करने से पीरियड्स को नियमित करने व् ज्यादा दिन तक ब्लीडिंग की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

डॉक्टर से मिलें: ज्यादा दिनों तक पीरियड्स होने की समस्या को महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए। और जितना हो सके इस परेशानी से बचने के लिए व् अपने आप को फिट रखने के लिए डॉक्टर से मिलें।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिनका ध्यान रखने से महिला को अनियमित माहवारी की परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। यदि आपको भी यह दिक्कत है तो आप भी इन आसान टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है।

क्या दांतों में ठंडा गर्म लगता है? ये हैं रोकने के तरीके!

दांतों में ठंडा गर्म लगना, सेंसिटिविटी का इलाज, सेंसिटिविटी के घरेलू उपचार, सेंसिटिविटी के लिए क्या करें, दांतों में ठंडा गर्म लगने पर क्या करें, सेंसिटिविटी होने पर क्या करें और क्या नहीं, सेंसिटिविटी के घरेलू इलाज, दांतों में ठंडा गर्म लगने के घरेलू इलाज, सेंसिटिविटी को दूर करने के तरीके, दांतों में ठंडा गर्म क्यों लगता है, सेंसिटिविटी के कारण, सेंसिटिविटी का उपचार, सेंसिटिविटी कैसे ठीक करें और क्या कारण है

दांतों को हमारी खूबसूरती माना जाता है। लेकिन अगर हमारे इन्ही दांतों में कुछ परेशानी आ जाए तो कितनी समस्या होती है। इन्हीं समस्यायों में से एक है डेंटन में ठंडा गर्म लगना। जी हां, सामान्यतौर पर ये एक आम समस्या लगती है लेकिन दांतों में होने वाली इस समस्या से सभी तौबा करते है।

क्योंकि जिन लोगों के दांतों में ठंडा गर्म लगता है वे न तो ठीक तरह से खा पाते है और न ही ठीक से पी पाते है। हर गर्म या ठंडी चीज उनके दांतों में दर्द या झनझनाहट पैदा करती है। जिसका मुख्य कारण है हमारा खान पान।thnda grm lagna

दरअसल हमारे दांतों के ऊपर एक परत होती है जिसे इनेमल कहते है। उसे दांतों का सुरक्षा कवच भी कहा जा सकता है क्योंकि वे दांतों को कठोर से कठोर चीजों से बचाने का काम करता है। लेकिन लगातार जोर-जोर से टूथब्रश करने और खान पान का ध्यान न रखने की वजह से वह परत घिस जाती है। जिसके चलते हमारे दांतों में हर चीज लगने लगती है।

दांतों पर से इनेमल के हट जाने से किसी भी ठंडी या गर्म चीज का सेवन करने पर दांतों में टीस मचती है। आप चाहे तो इसे महसूस कर सकते है, अपना मुंह खोले और जोरो से साँस लें। दांतों में सेंसिटिविटी आज के समय की आम समस्या बनता जा रहा है। विशेषकर बच्चों में।

खान पान के अतिरिक्त इसका एक कारण मुंह में मौजूद बैक्टीरिया और प्लेग भी होते है। जो दांतों पर से इनेमल हटाने का काम करते है। अगर आपके दांतों में भी ठंडा गर्म लगता है तो इसके लिए नीचे बताये घरेलू उपायों का प्रयोग करके देखें।

इसे भी पढ़े : दांत में कीड़ा लगने के घरेलू उपचार!

दांतों में ठंडा गर्म लगने के उपचार :-

1. टूथपेस्ट :

आजकल बाजार में ऐसे बहुत से ब्रांड है जो सेंसिटिव दांतों के लिए स्पेशल टूथपेस्ट बनाते है। आप उन टूथपेस्ट का इस्तेमाल कर सकते है। साधारण टूथपेस्ट की जगह इन्हीं टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें। व्हाइटनर वाले टूथपेस्ट का प्रयोग करने से बचें, यह दांतों को कमजोर करता है जिससे तकलीफ बढ़ सकती है। लेकिन, टूथपेस्ट चुनते वक्त ब्रांड का ध्यान रखें।

2. सॉफ्ट ब्रश :

हमारे ब्रश का प्रकार भी दांतों की इनेमल को प्रभावित करता है। जी हां, अगर आपका टूथब्रश बहुत अधिक हार्श हुआ तो ये आपके दांतों के लिए उपयुक्त नहीं है। सेंसिटिव दांतों के लिए ही नहीं बल्कि सामान्य स्थिति में भी सॉफ्ट ब्रिसेल्स वाले टूथब्रश का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा ब्रश हमेशा हलके हाथों से करें। जोर जोर से करने से नुक्सान आपका ही होगा।

3. फ्लोराइड माउथवाश और टूथपेस्ट :

फ्लोराइड दांतों की सड़न को दूर करने और टूथ इनेमल को डैमेज होने से बचाता है। और सेंसिटिव दांतों के lie यह बहुत जरुरी है। इसके लिए आप ऐसे माउथवाश और टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें जिसमे फ्लोराइड सम्मिलित हो। ये आपके दांतों को अधिक कमजोर होने से बचाएगा।

4. सफाई :brush

दांतों में किसी भी प्रकार की समस्या होने का मुख्य कारण साफ़ सफाई का ध्यान नहीं रखना होता है। अगर आपको लगता है की समस्या सफाई न रखने के कारण हुई है। तो अभी से सतर्क हो जाए। रोजाना दिन में दो बार ब्रश करें और रात को सोने से पहले ब्रश जरूर करें। साथ ही दिन में एक बार फ्लॉस भी करें। ये आपके दांतों की उम्र बढ़ने में मदद करेगा।

5. विटामिन की व् खट्टी चीजों का सेवन :

अगर आपके दांतों में पिछले काफी समय से सेंसिटिविटी है तो कोशिश करें की बहुत अधिक गर्म व् बहुत अधिक ठंडी चीजों का सेवन नहीं करें। बहुत अधिक चीनी वाले या मीठे पदार्थों का सेवन करने से बचें। क्योंकि इस तरह की चीजें दांतों में बहुत जोरो से लगती है। साथ ही खट्टी चीजों को खाने से भी बचें। इनमे मौजूद विटामिन की दांतों की इनेमल को नुकसान पहुंचाता है।

6. एसिडिक खाद्य पदार्थ और पेय :कोल्ड ड्रिंक पीने से होते है ये नुकसान

इसे पढ़े : दांतों की देखभाल करने के सही तरीके

खट्टे फलों का रस, बहुत ठंडा पानी, रेड वाइन, कोल्ड ड्रिंक्स, सिरका, चाय, आइस क्रीम, और खट्टे फल जैसे टमाटर, सलाद की ड्रेसिंग और अचार आदि का सेवन तुरंत बंद कर दें। क्योंकि ये सभी खाद्य पदार्थ और पेय आपके दांतों को नुकसान पहुंचा सकते है। इनका खट्टा पान और इनका एसिडिक नेचर आपके दांतों की इनेमल को नुकसान पहुंचाता है। इसीलिए इन सभी खान पान से बचें।

7. नमक और पानी :

दांतों से जुडी समस्या के लिए इस उपचार का सदियों से प्रयोग किया जाता आ रहा है। सेंसिटिविटी के लिए भी आप इसका इस्तेमाल कर सकते है। प्रयोग के लिए हलके गर्म पानी में 2 चम्मच नामक मिलाएं। अब इस घोल से सुबह और शाम को सोने जाने से पूर्व कुल्ला करें। यह एक तरह का आयुर्वेदिक उपचार है जिसके कोई दुष्परिणाम नहीं है।

8. सरसों तेल और सेंधा नमक :brush

इसका प्रयोग भी हमारे पूर्वज किया करते है। आज भी गावों में दांतों की समस्या के लिए इस उपाय का प्रयोग किया जाता है। प्रयोग के लिए 1 चम्मच सरसों के तेल में 1 छोटा चम्मच सेंधा नमक । अब इस मिश्रण से अपने दांतों और मसूड़ों को हलके हलके रगड़ें। 5 मिनट की मसाज के बाद कुल्ला करके मुंह साफ़ कर लें।

9. काले तिल :

दिन में दो बार एक-एक चम्मच काले तिल को चबाने से भी सेंसिटिविटी खत्म हो जाती है। सेंसिटिविटी दूर करने का यह तरीका भी काफी प्रभावी है।

10. खाने के बाद कुल्ला :

हमेशा खाना खाने के 20 मिनट बाद कुल्ला कर लें। क्योंकि अगर आप तुरंत कुल्ला करते है तो खाने में मौजूद पार्टिकल्स मुंह से बाहर निकल जाएंगे और दांतों को पोषण नहीं दे पाएंगे जिससे वे कमजोर होने लगेंगे। इसीलिए खाना खाने के 20 मिनट बाद ही कुल्ला करें।

डिलीवरी के बाद सम्बन्ध कब बनाएं? और किन बातों का ध्यान रखें

डिलीवरी के बाद गर्भवती महिला और उनके पार्टनर को कब सम्बन्ध बनाना सेफ होता है इसके बारे में बहुत से कपल जानना चाहते हैं, क्योंकि डिलीवरी के बाद महिला शारीरिक व् मानसिक रूप से थोड़ी कमजोर हो जाती है। और महिला को वापिस से स्वस्थ होने में थोड़ा समय लग सकता है। साथ ही कुछ महिलाओं की डिलीवरी नोर्मल होती है तो कुछ महिलाएं सिजेरियन डिलीवरी से शिशु को जन्म देती हैं, ऐसे में डिलीवरी के बाद महिला यदि स्वस्थ नहीं होती है और अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाती है तो इसके कारण महिला की दिक्कतें बढ़ सकती है। और नोर्मल डिलीवरी में जहां महिला को स्वस्थ होने के लिए कम समय लगता है वहीँ सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को अधिक समय लग सकता है। ऐसे में डिलीवरी के बाद कब सम्बन्ध बनाना चाहिए इसके बारे में जानकारी होना बहुत जरुरी होता है। तो आइये आज हम आपको डिलीवरी के बाद महिला को अपने पार्टनर के साथ कब सम्बन्ध बनाना चाहिए इसके बारे में कुछ बातें बताने जा रहे हैं।

नोर्मल डिलीवरी के बाद कब बनाएं सम्बन्ध

नोर्मल डिलीवरी के बाद महिला को कम से छह से आठ हफ्ते के बाद सम्बन्ध बनाने के बारे में सोचना चाहिए। क्योंकि कुछ महिलाओं को नोर्मल डिलीवरी के दौरान टाँके लगाएं जाते हैं, साथ ही महिला को तीन से चार हफ्ते तक ब्लीडिंग भी हो सकती है। ऐसे में नोर्मल डिलीवरी के बाद यदि आप एक महीने के अंदर ही सम्बन्ध बनाने लग जाते हैं तो इसके कारण महिला को संक्रमण होने की समस्या होने के साथ महिला को पेट में दर्द जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए कम से कम डेढ़ से दो महीने के बाद ही नोर्मल डिलीवरी के बाद कपल को सम्बन्ध बनाने के बारे में सोचना चाहिए। और इससे बेहतर यह हैं की आप इसके लिए एक बार डॉक्टर से राय लें, की महिला को अब सम्बन्ध बनाने से किसी तरह की शारीरिक परेशानी तो नहीं होगी।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद सम्बन्ध

नोर्मल डिलीवरी के बाद महिला जहां दो महीने तक लगभग पूरी तरह स्वस्थ हो सकती है वहीँ सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को ज्यादा समय लग सकता है। और सिजेरियन डिलीवरी के दौरान महिला को टाँके भी जरूर लगते हैं, ब्लीडिंग भी नोर्मल डिलीवरी की अपेक्षा अधिक हो सकती है, शारीरिक परेशानियां अधिक हो सकती है, आदि। ऐसे में सिजेरियन डिलीवरी के बाद जब तक डॉक्टर आपसे न कहे की अब महिला स्वस्थ है, टांकों के घाव भर चुके हैं, तब तक डिलीवरी के बाद महिला को अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। और समय की बात की जाए तो ढाई से तीन महीने तक महिला को समय देना चाहिए, बाकी एक बार डॉक्टर से राय लेना ज्यादा सही हो सकता है।

डिलीवरी के बाद सम्बन्ध बनाते समय किन बातों का ध्यान रखें

यदि आप प्रसव के बाद पहली बार अपने पार्टनर से सम्बन्ध बनाने जा रहे हैं, और ऐसे में सम्बन्ध बनाने में आपको किसी भी तरह की दिक्कत न हो। तो इस परेशानी से बचाव के लिए आपको डिलीवरी के बाद सम्बन्ध बनाते समय बहुत सी बातों का ध्यान रखना जरुरी है, और खासकर पुरुष को, ताकि सम्बन्ध बनाने के कारण महिला या पुरुष को किसी भी तरह की कोई दिक्कत न हो। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की डिलीवरी के बाद सम्बन्ध बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

टाँके: डिलीवरी के दौरान सिजेरियन के साथ नोर्मल डिलीवरी वाली महिलाओं को भी टाँके लग सकते हैं, ऐसे में आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की यदि अभी टांको के घाव नहीं भरे हैं। तो आपको अपने पार्टनर के साथ गलती से भी सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए, और यदि टांके ठीक होने के बाद आप पहली बार सम्बन्ध बना रहे हैं तो भी थोड़ा सतर्क रहना चाहिए।

ब्लीडिंग: डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग होना आम बात होती है और डिलीवरी के बाद यदि आप अपने पार्टनर से सम्बन्ध बनाने जा रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें की उन्हें ब्लीडिंग आनी पूरी तरह से बंद हो गई हो। क्योंकि ब्लीडिंग में ही सम्बन्ध बनाने से महिला को संक्रमण का खतरा हो सकता है।

सुरक्षा: डिलीवरी के बाद सम्बन्ध बनाते समय पुरुष को सुरक्षा का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए, ताकि अनचाही प्रेगनेंसी और संक्रमण के खतरे से महिला और पुरुष दोनों को बचे रहने में मदद मिल सके।

परेशानी: यदि सम्बन्ध बनाते समय महिला को किसी भी तरह की दिक्कत का अनुभव हो रहा है तो आपको सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए ताकि महिला को ज्यादा परेशानी न हो, साथ ही महिला को यदि कोई दिक्कत लगे तो उसी समय अपने पार्टनर को बताना चाहिए ताकि इस परेशानी का हल निकालने में आपको मदद मिल सके।

इमोशन पर कण्ट्रोल रखे: डिलीवरी के बाद सम्बन्ध बनाते समय हो सकता है की महिला शारीरिक या मानसिक रूप से आपका साथ न दे, ऐसे में आपको अपने इमोशन पर कण्ट्रोल रखना चाहिए। और महिला को मानसिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश करनी चाहिए, और ऐसा जरुरी नहीं है की डिलीवरी के बाद पहली बार सम्बन्ध बनाने पर ही सब कुछ हो जाये। इसे एक नई शुरुआत की तरह लें, और फिर से धीरे धीरे नई शुरुआत की तरह ट्राई करें।

सूखापन: डिलीवरी के बाद महिला को प्राइवेट पार्ट में सूखापन होने के कारण दर्द की समस्या सम्बन्ध बनाते समय हो सकती है। ऐसे में महिला को और पुरुष को इस बता का थोड़ा ध्यान रखना चाहिए।

डॉक्टर की राय: डिलीवरी के बाद सम्बन्ध बनाने के कारण महिला को किसी भी तरीके की दिक्कत न हो इससे बचने के लिए हो सके तो एक बार डॉक्टर से राय भी जरूर लें।

तो यह है डिलीवरी के बाद सम्बन्ध बनाने से जुड़े कुछ खास टिप्स, ऐसे में महिला और पुरुष दोनों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि महिला को होने वाली हर समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके, और डिलीवरी के बाद एक बार फिर से आप अपनी लाइफ को मज़ेदार तरीके से जी सके।

प्रेगनेंसी का दूसरा महीना

प्रेगनेंसी का दूसरा महीना

दूसरे महीने में पीरियड्स मिस होना प्रेगनेंसी का खास लक्षण होता है। अगर आपको पीरियड्स नहीं आएं हैं तो पीरियड्स मिस होने की डेट के दस दिन बाद आप प्रेगनेंसी टेस्ट किट की मदद से घर पर टेस्ट कर सकती हैं की गर्भधारण हुआ या नहीं। टेस्ट किट के इस्तेमाल की पूरी प्रक्रिया प्रेगनेंसी टेस्ट किट के पैकेट पर दी होती है। सही परिणाम के लिए सुबह का सबसे पहले यूरिन से टेस्ट करना सबसे होता है क्योंकि इस समय शरीर में HCG हॉर्मोन का लेवल ज्यादा होता है जिसके कारण सही परिणाम आने के चांस बढ़ जाते हैं। अगर आपका टेस्ट पॉजिटिव आता है तो आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए।

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने के लक्षण

  • मॉर्निंग सिकनेस की समस्या।
  • पाचन क्रिया सम्बंधित परेशानी जैसे की कब्ज़, एसिडिटी, सीने में जलन महसूस होना, आदि।
  • बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होना।
  • बॉडी में हार्मोनल बदलाव के कारण इस दौरान कुछ महिलाएं चीजों की गंध से भी परेशान हो सकती है।
  • उल्टी, जी मिचलाना की समस्या।
  • पेट में हल्का दर्द
  • कुछ महिलाओं को पीरियड्स की तारीख के आस पास खून की हल्के धब्बे भी लग सकते हैं, लेकिन इसे अनदेखा न करें।
  • भूख अधिक लगना या भूख में कमी आना भी प्रेगनेंसी के दूसरे महीने के लक्षणों में से ही एक है।

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में शिशु का विकास

गर्भवस्था के दूसरे महीने में शिशु का दिल धड़कने लगता है, मस्तिष्क का निर्माण होना शुरू हो जाता है, लिवर, कान, हाथ, होंठ, आँखे, सिर, रीढ़ की हड्डी, तंत्रिका तंत्र की आकृतियां बनना शुरू हो जाती हैं। इस समय भ्रूण की लम्बाई लगभग एक इंच तक हो जाती है।

गर्भवस्था के दूसरे महीने में शिशु का वजन

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में शिशु का वजन लगभग 14 ग्राम तक हो सकता है, लेकिन इसके बाद महीने दर महीने शिशु का विकास तेजी से बढ़ने लगता है।

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं

इस दौरान खान पान को समय से लेने, और आहार में भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों को शामिल करने से गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलने साथ शिशु के विकास को भी तेजी से बढ़ने में मदद मिलती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं।

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में क्या खाना चाहिए?

फोलेट: फोलेट का सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए क्योंकि इसके सेवन गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को तेजी से होने में मदद मिलने साथ बीमारियों से सुरक्षित रखने में भी मदद मिलती है। और फोलेट के लिए महिला बीन्स, राजमा, छोले, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, आदि का भरपूर सेवन कर सकती है।

आयरन और फोलिक एसिड: आयरन और फोलिक एसिड से भरपूर चीजों को भी महिला को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। और इससे बॉडी में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बनाये रखने में मदद मिलती है जिससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। और इसके लिए महिला को पालक, चुकंदर, ब्रोकली, अनार, गाजर, टमाटर, एवोकाडो, बीन्स, दालें, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

एनर्जी: बॉडी में हार्मोनल बदलाव होने के कारण इस दौरान महिला को कमजोरी व् थकान की समस्या हो सकती है ऐसे में महिला को अपनी डाइट में ऐसी चीजों को शामिल करना चाहिए, जिससे महिला को भरपूर एनर्जी मिल सके। और इसके लिए महिला आलू, उबले अंडे, फलों का रस, केला, आदि का सेवन कर सकती है।

कैल्शियम: कैल्शियम का भरपूर सेवन महिला को हड्डियों को मजबूती देने के साथ गर्भ में शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद करता है ऐसे में महिला को कैल्शियम युक्त आहार का भी भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। और इसके लिए महिला दूध व् दूध से बनी चीजों को अपनी डाइट में शामिल कर सकती है।

दालें: प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, जैसे मिनरल्स से भरपूर दालों का सेवन भी गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में जरूर करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में क्या नहीं खाना चाहिए?

क्रीम वाला दूध: क्रीम से बने दूध व् उस दूध से बनी चीजों को खाने के लिए गर्भवती महिला को इस्तेमाल में नहीं लाना चाहिए क्योंकि इसके कारण गर्भपात व् समयपूर्व प्रसव का खतरा बना रहता है।

कच्चा मांस व् कच्चे अंडे: कच्चे मांस व् कच्चे या अधपके अंडे का सेवन भी प्रेगनेंसी के दूसरे महिला ने करने से बचना चाहिए क्योंकि इसमें मौजूद बैक्टेरिया गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।

अल्कोहल: इस दौरान महिला को शराब का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इस दौरान शिशु के दिमाग का विकास होता है। और किसी भी तरह का नशा गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु के विकास में समस्या खड़ी कर सकता है।

मर्क्युरी युक्त मछली: समुद्री मछलियां जिनमे मर्करी की मात्रा अधिक होती है उसे खाने से बचें। क्योंकि मर्क्युरी की अधिक मात्रा गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को बाधित कर सकती है साथ ही इसके कारण गर्भपात का खतरा भी बना रहता है।

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में क्या करें क्या नहीं

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में गर्भवती महिला को खान पान के साथ हर एक छोटी से छोटी बात का ध्यान रखना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की दूसरे महीने में प्रेग्नेंट महिला को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।

गर्भावस्था के दूसरे महीने में क्या करना चाहिए

  • प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही सबसे पहले आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए, और अपनी जांच करवानी चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही सही ट्रीटमेंट शुरू हो सके और आपको किसी भी तरह की परेशानी न हो।
  • मैडिटेशन करें, क्योंकि इससे आपको शांत रहने में मदद मिलती है जिससे तनाव जैसी समस्या से आराम मिलता है।
  • प्रेगनेंसी में होने वाली किसी भी परेशानी के कारण असहज महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से बात करें।
  • डॉक्टर द्वारा बतानी गई सभी दवाइयों का सेवन समय से करें और किसी भी दवाई को डॉक्टर से बिना पूछें न लें।
  • खान पान, सोने का, उठने बैठने का अच्छे से ध्यान रखें।
  • तरल पदार्थ जैसे की पानी, नारियल पानी, निम्बू पानी, फलों का रस का भरपूर सेवन करें क्योंकि बॉडी का हाइड्रेट रहना बहुत जरुरी होता है।

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में क्या न करें

  • इस दौरान खाली पेट नहीं रहना चाहिए क्योंकि इसके कारण सिर में दर्द, चक्कर, जी मिचलाना, जैसी समस्या हो सकती है।
  • जंक फ़ूड, ज्यादा मसालेदार पदार्थ, चाइनीज़ फ़ूड आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • सीढ़ियां नहीं चढ़नी चाहिए।
  • ज्यादा तेज वॉक नहीं करनी चाहिए।
  • यात्रा नहीं करनी चाहिए।
  • ज्यादा देर खड़े रहकर काम करने से बचना चाहिए।
  • पेट पर दबाव पड़ने वाले या पेट पर जोर पड़ने वाले काम को करने से बचना चाहिए।

तो यह है प्रेगनेंसी के दूसरे महीने की पूरी जानकारी, ऐसे में यदि आप भी गर्भवती है तो आपको भी इन सभी बातों का प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों से बचे रहने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके।

उंगलियों का कालापन दूर करने के घरेलू उपाय

How To Get Rid Of Dark Finger Joints 

उंगलियों का कालापन दूर करने के उपाय, How To Get Rid Of Dark Finger Joints, Hindi Tips to clear dark finger joints, ungliyo ka kalapan thik karne ki tips 

महिलाओं की सुंदरता में उनके हाथ भी उतनी ही भूमिका निभाते है जितना की उनका फेस। उसके बाद भी चेहरे की देखभाल तो सभी करती है लेकिन हाथों की देखभाल को अनदेखा कर देती है। ऐसा वे जान बूझकर नहीं करती बल्कि रोजमर्रा के काम काज और भाग दौड़ के बीच हाथों के लिए समय निकालना काफ़ी मुश्किल हो जाता है। और जब उन्हें समय मिलता है तो सबसे पहले वे अपने फेस के बारे में ही सोचती है।

जिसके चलते हाथों की देखभाल में निरंतर लापरवाही होने लगती है। और लापरवाही के चलते वे अजीब, रूखे, काले और फटे हुए से दिखने लगते है। जो न तो देखने में अच्छे लगते है और न ही हाथ मिलाने में। घरेलू महिलाओं की बात अलग है लेकिन बाहर जाकर काम काज करने वाली महिलाओं के लिए अपने हाथों पर ध्यान देना बेहद जरुरी होता है।

Read more : Hand Care tips in Winters!

क्योंकि उन्हें कब किस्से हाथ मिलाना पड़े कोई नहीं जानता। और वैसे भी बिज़नेस और कॉर्पोरेट जॉब्स में अक्सर लोगों से मिलते समय हाथ ही मिलाये जाते है। ऐसे में अगर आपके हाथ और उंगलियां काली और रूखी हुई तो इसका प्रभाव सीधे आपकी पर्सनालिटी पर पड़ेगा। ऐसे में जरुरी है की आप अपनी उंगलियों और हाथों की सही देखभाल करना प्रारंभ कर दें।उंगलियों का कालापन दूर करने के उपाय

नेल पेंट लगवाने के बाद आपका ध्यान भी अक्सर आपकी उंगलियों के जॉइंट पर जाता होगा की वह कितनी डार्क है। लेकिन आप इसे सामान्य समझकर छोड़ देती है। जबकि ऐसा करना आपकी सबसे बड़ी गलती है। अगर आपकी स्किन का कलर फेयर है और आपकी उंगलियों का कलर डार्क है तो ये देखने में काफी अजीब लग सकता है। ऐसे में सबसे पहले आपको उन्हें ठीक करने के बारे में सोचना चाहिए। यहाँ हम आपको उंगलियों के कालेपन को दूर करने की कुछ टिप्स बता रहे है। जिनकी मदद से आप इन जॉइंट्स के कालेपन को आसानी से दूर कर पाएंगी। तो आइये जानते है इन उपायों के बारे में –

उंगलियों का कालापन दूर करने के उपाय :- 

1. नहाते समय :

अगर आप अपनी उंगलियों के जॉइंट्स को गोरा और खूबसूरत बनाना चाहती है तो उसके लिए नहाते समय हमेशा अपनी उंगलियों पर स्क्रब करें। स्क्रब करने के बाद उनपर क्रीम और लोशन भी लगाएं। अन्यथा वे ड्राई हो सकती है। स्क्रबिंग के लिए आप लूफा (Loofah) का इस्तेमाल कर सकती है।

2. नींबू :

स्किनके रंग को डार्क करने के लिए आप स्किन पर नींबू का इस्तेमाल कर सकते है। क्योंकि उसमे बहुत से एंटी ऑक्सीडेंट और ब्लीचिंग गुण होते है जो स्किन की रंगत को निखारने में मदद करते है। इसके लिए रोजाना नींबू की एक स्लाइस से अपनी उंगलियों को रगड़े। 5 से 8 मिनट तक रगड़े। रोजाना इस उपाय का इस्तेमाल करने से उंगलियों का रंग हलका हो जाएगा।

3. चीनी और नींबू :

इस उपाय के लिए नींबू के रस में थोड़ी सी चीनी मिलाएं और उसका घोल तैयार कर लें। अब इस मिश्रण को अपनी उंगलियों के डार्क जॉइंट्स पर लगाकर रगड़ें। कुछ देर तक रगड़ने के बाद उंगलियों को साफ़ कर लें। यदि आप रोजाना इसका इस्तेमाल करेंगी तो आपकी उंगलियां गोरी हो जाएगी।

4. दूध की मलाई :

दूध की मलाई भी स्किन संबंधी बहुत सी परेशानियों को दूर करने में मदद करती है। ये न केवल स्किन को पोषण प्रदान करती है बल्कि उसे निखारने में भी मदद करती है। इसके प्रयोग के लिए अपनी उंगलियों पर दूध की मलाई से मसाज करें। और उसे 9 से 10 मिनट तक लगाए रखे। फिर उनपर नींबू को रगड़ें और फिर ठंडे पानी से धो लें। इसके बाद हाथों पर मॉइस्चराइज़र अवश्य लगाएं।

5. ब्रेड :

अगर अआप्के घर में थोड़ी ब्रेड रखी हुई है और आप उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रही है तो उसे फेंके नहीं। क्योंकि ये भी आपके हाथों के लिए स्क्रबर के रूप में कार्य कर सकती है। इसके लिए ब्रेड को दूध में डुबोएं और अपनी काली त्वचा पर उसका इस्तेमाल करें। धीरे धीरे आपकी उंगलियां चमकने लगेंगी।

6. नमक :

नींबू और नमक का यूज करके भी आप अपनी उंगलियों के जॉइंट्स के कालेपन को दूर कर सकती है। चूँकि नींबू के इस्तेमाल से स्किन ड्राई हो सकती है इसलिए मिश्रण में ग्लिसरीन अवश्य मिला लें। प्रयोग के लिए नींबू और नमक का घोल बनाकर उन्हें उंगलियों पर लगाएं और कुछ देर रखने के बाद साफ़ कर लें। हाथ धोने के बाद मॉइस्चराइज़र लगाना नहीं भूलें।

7. छाछ :

गर्मियों में ठंडक पाने के लिए तो छाछ का प्रयोग सभी करते है लेकिन क्या आप जानती है की इसकी मदद से आप अपनी उंगलियों के कालेपन को भी दूर कर सकती है। इसके लिए छाछ में नींबू की कुछ बूंदें डालकर उसे उंगलियों पर लगाएं। 10 से 15 मिनट रखें और उसके बाद गर्म पानी से साफ़ कर लें। उंगलियों का रंग साफ़ हो जाएगा।

तो ये थे कुछ आसान और सस्ते घरेलू उपाय जिनकी मदद से आप अपनी उंगलियों के कालेपन को दूर कर सकती है।लेकिन इनके इस्तेमाल के साथ साथ आपको उनकी विशेष देखभाल भी करनी होगी यानी सोने से पहले हाथों पर क्रीम लगाना, धुप में हाथों को ढक कर रखना, ज्यादा गर्म या ठंडे पानी का इस्तेमाल नहीं करना आदि।

नोर्मल डिलीवरी होने के लक्षण

प्रेगनेंसी के नौ महीने गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है लेकिन गर्भवती महिला उन परेशानियों के होने के बावजूद भी उस पल का बेसब्री से इंतज़ार करती है की कब उसका शिशु जन्म लेगा। साथ ही डिलीवरी का समय पास आने के बाद महिला के मन में डिलीवरी को लेकर भी सवाल आते रहते हैं की उनकी डिलीवरी कब होगी, कैसे होगी, आदि। और अधिकतर महिलाएं चाहे वो पहली बार माँ बन रही हो या दूसरी बार माँ बन रही हो वो हमेशा यही चाहती है की उनकी डिलीवरी नोर्मल तरीके से हो।

क्योंकि नोर्मल डिलीवरी के बाद महिला को फिट होने में कम समय लगता है। लेकिन डिलीवरी किस तरीके से होगी यह तो महिला के स्वास्थ्य पर ही निर्भर करता है ऐसे में डिलीवरी किस तरीके से होगी इसे समझना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। परन्तु यदि महिला की डिलीवरी नोर्मल होने वाली है तो महिला को बॉडी में कुछ लक्षण जरूर महसूस होते हैं। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको यदि आपकी नोर्मल डिलीवरी होने वाली है तो डिलीवरी का समय पास आने पर बॉडी में कौन से लक्षण महसूस हो सकते हैं उस बारे में बताने जा रहे हैं।

पेट के निचले हिस्से में दबाव अधिक महसूस होना

यदि गर्भवती महिला को पेट और सीने में हल्कापन महसूस हो रहा है लेकिन पेट के निचले हिस्से में अधिक दबाव महसूस हो रहा है, पीठ में ज्यादा दर्द महसूस हो रहा है तो यह लक्षण इस बात की और इशारा करता है की महिला का प्रसव सामान्य होगा।

पेट से जुडी समस्या होना

यदि गर्भवती महिला को पेट में ऐंठन, दर्द, दस्त जैसी समस्या डिलीवरी का समय पास आने पर ज्यादा हो जाती है। तो यह लक्षण भी इस बात की और इशारा करता है की महिला का प्रसव सामान्य होगा।

शिशु का अपनी सही पोजीशन में आना

यदि गर्भ में शिशु डिलीवरी का समय पास आने पर अपनी सही पोजीशन में आ जाता है तो यह भी महिला की नोर्मल डिलीवरी होने का लक्षण होता है। और शिशु अपनी सही पोजीशन में जब आ जाता है तो महिला की पेल्विक एरिया में जोर महसूस होता है। क्योंकि शिशु का सिर नीचे की तरफ होने पर पेल्विक एरिया पर अधिक दबाव महसूस होता है।

बहुत ज्यादा यूरिन पास करने की इच्छा होना

यदि डिलीवरी का समय पास आने पर प्रेग्नेंट महिला की बहुत ज्यादा यूरिन पास करने की इच्छा हो रही है तो यह लक्षण भी इस बात की और संकेत करता है की महिला की डिलीवरी नोर्मल होगी। क्योंकि शिशु के सिर नीचे होने पर नीचे की तरफ दबाव अधिक बनता है जिससे यूरिन पास करने की इच्छा में वृद्धि होती है।

प्राइवेट पार्ट से स्त्राव होना

गर्भवती महिला को डिलीवरी का समय पास आने पर यदि प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद चिपचिपा पदार्थ निकलता है, या खून के धब्बे, गुलाबी या अन्य रंग का स्त्राव होता है। तो यह भी इस बात की और इशारा करता है की महिला की डिलीवरी नोर्मल होने वाली है क्योंकि यह स्त्रावित पदार्थ एमनियोटिक फ्लूड होता है।

ब्रेस्ट में सूजन महसूस होना

यदि डिलीवरी का समय पास आने पर गर्भवती महिला को ब्रेस्ट में सूजन व् भारीपन अधिक महसूस होता है। तो यह लक्षण इस बात की और इशारा करता है की महिला का प्रसव सामान्य होने के चांस हैं।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो यदि डिलीवरी का समय पास आने पर यदि गर्भवती महिला के शरीर में नज़र आ रहे हैं तो यह इस बात की और संकेत करते हैं की महिला की डिलीवरी नोर्मल होने वाली है।

गर्भवती महिला को शरीर में ये लक्षण महसूस हो तो हो जाये सावधान

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की कोई भी दिक्कत ज्यादा होने पर भी आप उसे अनदेखा करें। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान ऐसे कुछ लक्षण होते हैं जो यदि बॉडी में महसूस हो तो यह माँ के साथ बच्चे के लिए भी हानिकारक होते हैं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में बॉडी में महसूस होने वाले कुछ लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं जो यदि आपको महसूस हो तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

ब्लीडिंग होना

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को पीरियड्स की तरह ब्लीडिंग हो तो भी प्रेग्नेंट महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह गर्भपात का संकेत होता है।

पेट में दर्द

प्रेगनेंसी के किसी भी महीने में महिला को पेट में तेज दर्द हो तो इसे भी प्रेग्नेंट महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह महिला के गर्भपात, एक्टोपिक प्रेगनेंसी, समय से पहले बच्चे का जन्म, डिलीवरी होने आदि का संकेत होता है।

पीठ व् पेल्विक एरिया में दर्द

प्रेगनेंसी के दौरान यदि गर्भवती महिला को पीठ या पेट के निचले हिस्से में बहुत अधिक दर्द महसूस हो तो यह गर्भपात या समय से पहले महिला की डिलीवरी होने का संकेत होता है। ऐसे में इस लक्षण को भी प्रेग्नेंट महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

सफ़ेद पानी अधिक आना

गर्भावस्था के दौरान थोड़ा बहुत सफ़ेद पानी आना बहुत आम बात होती है लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला को सफ़ेद पानी अधिक आये। सफ़ेद पानी गिरने के साथ बदबू आदि भी महसूस हो तो यह प्राइवेट पार्ट में संक्रमण के कारण होता है ऐसे में इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि संक्रमण के कारण तो महिला को दिक्कत होती है, लेकिन सफ़ेद पानी अधिक गिरने से महिला को थकान व् कमजोरी की समस्या भी अधिक होती है।

वजन न बढ़ना

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में तो नहीं लेकिन प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही से गर्भवती महिला का वजन लगातार बढ़ता है। लेकिन यदि आपको ऐसा लगा रहा है की आपका वजन नहीं बढ़ रहा है, पेट का आकार नहीं बढ़ रहा है तो इसे भी गर्भवती महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि यह लक्षण गर्भ में शिशु के विकास में कमी की और इशारा करता है।

थकान व् कमजोरी अधिक महसूस होना

प्रेग्नेंट महिला को बिना कुछ काम किये ही थकान, कमजोरी, सिर दर्द, चक्कर, बॉडी पेन आदि की समस्या अधिक हो तो इसे भी गर्भवती महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह शरीर में खून की कमी होने का संकेत होता है जो माँ व् बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है।

बुखार या खांसी जुखाम अधिक होना

बॉडी का तापमान बढ़ना, खांसी, जुखाम, जैसी परेशानी होना होना फ्लू या किसी संक्रमण के कारण होता है। ऐसे में गर्भवती महिला को यदि ऐसा महसूस हो तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।

सूजन की समस्या बढ़ना

प्रेगनेंसी के दौरान पैरों में सूजन आना आम बात होती है लेकिन गर्भवती महिला को यदि सूजन की समस्या बढ़ जाएँ साथ ही पैरों के साथ हाथ, मुँह व् शरीर के अन्य हिस्सों पर भी सूजन आये तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह लिवर व् किडनी से सम्बंधित समस्या का संकेत होता है।

यूरिन के रंग में परिवर्तन व् बदबू आना

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला का यूरिन थोड़ा पीला आ सकता है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला को यूरिन के रंग में ज्यादा बदलाव, यूरिन के साथ ब्लड, यूरिन करते समय जलन या यूरिन में से बहुत बदबू आती है तो यूरिन इन्फेक्शन का संकेत होता है। इसीलिए गर्भवती महिला को यदि यह लक्षण महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से मिले ताकि माँ व् बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को इसके कारण कोई दिक्कत न हो।

बच्चे की हलचल कम होना

प्रेगनेंसी के पांचवें महीने में बच्चा गर्भ में हलचल करना शुरू कर देता है। शुरुआत में यह हलचल थोड़ी कम लेकिन बच्चे का विकास बढ़ने के साथ हलचल भी बढ़ने लगती है। लेकिन कभी यदि प्रेग्नेंट महिला को ऐसा लगे की गर्भ में बच्चे को हलचल किये एक या डेढ़ घंटे से ज्यादा हो गया है तो यह गर्भ में बच्चे को खतरे का संकेत होता है ऐसे में बच्चे की हलचल न होने के लक्षण को गर्भवती महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में एमनियोटिक फ्लूड निकलना या पेट में तेज दर्द

गर्भावस्था की आखिरी तिमाही में यदि महिला को ऐसा महसूस हो की प्राइवेट पार्ट से यूरिन की तरह सफ़ेद पानी निकल रहा है या पेट में बहुत ज्यादा दर्द महसूस हो तो इसे महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के सैंतीसवें हफ्ते से पहले ऐसा होना समय से पहले बच्चे के जन्म का संकेत होता है। लेकिन यदि ऐसा सैंतीसवें हफ्ते के बाद होता है तो यह महिला की डिलीवरी का लक्षण होता है। दोनों ही स्थिति में आपको बिना देरी किये तुरंत डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो यदि प्रेग्नेंट महिला को महसूस हो तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह लक्षण प्रेगनेंसी के दौरान महिला व् बच्चे दोनों के लिए परेशानी खड़ी करते हैं। साथ ही आपको डॉक्टर द्वारा नियमित जांच करवाते रहना चाहिए। ताकि आपको अपनी व् बच्चे की सेहत की सही जानकारी मिलती रहे।

पीरियड से पहले वाइट डिस्चार्ज होने के कारण व् उपाय

0

सफ़ेद पानी को ल्यूकोरिया व् वाइट डिस्चार्ज भी कहा जाता है और महिला को प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद पानी आना बहुत आम बात होती है। साथ ही सफ़ेद पानी का निकलना महिला को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। क्योंकि सफ़ेद पानी बॉडी से डेड सेल्स और हानिकारक बैक्टेरिया को बाहर निकालने में मदद करता है। साथ ही सफ़ेद पानी का आना महिला को संक्रमण से सुरक्षित रखने में भी मदद करता है।

लेकिन सफ़ेद पानी का जरुरत से ज्यादा आना सेहत के लिए सही नहीं होता है इसीलिए सफ़ेद पानी कितना आ रहा है इसे महिला को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। साथ ही कुछ महिलाओं को पीरियड्स से पहले सफ़ेद पानी आता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम पीरियड्स से पहले सफ़ेद पानी आने के क्या कारण होते हैं और किस तरह महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

मासिक धर्म आने से पहले सफ़ेद पानी आने का कारण

  • जो महिलाएं या लडकियां अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान नहीं रखती है उन्हें यह परेशानी होती है।
  • प्राइवेट पार्ट के लिए ज्यादा केमिकल युक्त या खुशबूदार चीजों का इस्तेमाल करने के कारण।
  • यदि महिला किसी ऐसे व्यक्ति के साथ सम्बन्ध बनाती है जो प्राइवेट पार्ट से जुडी किसी बीमारी से ग्रसित होता है तो महिला को यह परेशानी हो सकती है।
  • महिला को प्राइवेट पार्ट में संक्रमण होने के कारण।
  • पीरियड्स आने से पहले महिला यदि तनाव में हैं या किसी चीज को लेकर महिला के मन में घबराहट है तो इस कारण भी महिला को पीरियड्स से पहले सफ़ेद पानी की समस्या अधिक हो सकती है।
  • यदि महिला का गर्भपात हुआ है तो उसके बाद जब महिला को पीरियड्स आते हैं तो महिला को यह परेशानी हो सकती है।
  • गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने वाली महिलाओं को पीरियड्स आने से पहले यह दिक्कत हो सकती है।

पीरियड्स से पहले सफ़ेद पानी की समस्या से निजात पाने के आसान टिप्स

यदि किसी महिला को पीरियड्स आने से पहले सफ़ेद पानी आने की दिक्कत अधिक होती है। तो ऐसे में महिला इस परेशानी से बचने के लिए कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है। तो आइये अब जानते हैं की वो आसान टिप्स कौन से हैं।

प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई

मासिक धर्म से पहले सफ़ेद पानी आने की परेशानी से बचने के लिए महिला को अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। जैसे की अंडरवियर रोजाना बदलें, नहाते समय अच्छे से प्राइवेट पार्ट को साफ करें, आदि। इसके अलावा महिला को ज्यादा खुशबूदार चीजों व् केमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल प्राइवेट पार्ट के लिए करने से बचना चाहिए।

संक्रमण होने पर सम्बन्ध बनाने से बचें

यदि आपको या आपके पार्टनर किसी को भी प्राइवेट पार्ट से जुड़ा संक्रमण है तो ऐसे में आपको सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए। और संक्रमण का इलाज करवाना चाहिए ताकि आपको ऐसी परेशानी न हो।

अदरक का पानी

एक लीटर पानी के अदरक के कुछ टुकड़ें डालकर अच्छे से उबाल लें। और पानी जब आधा रह जाये तो इस पानी को छान लें और पीरियड्स आने से एक हफ्ते पहले दिन में दो से तीन बार इस पानी का सेवन करें ऐसा करने से आपको पीरियड्स से पहले सफ़ेद पानी आने की परेशानी से निजात पाने में मदद मिलेगी।

संक्रमण से बचें

यदि पीरियड्स से पहले सफ़ेद पानी आने के साथ आपको उसमे बदबू आदि भी महसूस होती है तो यह संक्रमण के कारण होता है। ऐसे में संक्रमण व् सफ़ेद पानी की समस्या से बचने के लिए रोजाना नहाते समय फिटकरी को पानी में उबालकर फिर उस पानी को ठंडा करके प्राइवेट पार्ट को साफ़ करें, सेब के सिरके में पानी मिलाकर प्राइवेट पार्ट को साफ़ करें, नीम के पत्तों को पानी में उबालकर उस पानी को ठंडा करके उससे प्राइवेट पार्ट को साफ़ करें, मेथी के पानी से प्राइवेट पार्ट को साफ़ करें, इन तरीको का इस्तेमाल करने से प्राइवेट पार्ट का संक्रमण दूर होता है। जिससे महिला को पीरियड्स से पहले सफ़ेद पानी से की समस्या से बचने में मदद मिलती है।

खान पान का ध्यान रखें

बॉडी में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण भी महिला को यह परेशानी होती है। ऐसे में महिला को अपनी डाइट में पोषक तत्वों को भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए। जैसे की गाजर, चुकंदर, संतरा, आंवला आदि का जूस पीना चाहिए, ऐसा करने से बॉडी में पोषक तत्वों की कमी पूरी होती है जिससे महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

डॉक्टर को दिखाएं

यदि महिला को सफ़ेद पानी आने की समस्या है, पीरियड्स से पहले सफ़ेद पानी महिला को बहुत ज्यादा आता है, कमजोरी थकान, सिर दर्द, चक्कर, आदि की परेशानी ज्यादा होती है तो ऐसे में इस परेशानी को अनदेखा नहीं करना चाहिए। और डॉक्टर से मिलकर इस परेशानी का समाधान करना चाहिए। ताकि महिला को सफ़ेद पानी आने के कारण कोई दिक्कत न हो।

तो यह हैं पीरियड्स आने से पहले सफ़ेद पानी की समस्या से बचने के कुछ आसान टिप्स यदि आपको भी यह परेशानी है तो आप भी इन आसान टिप्स का इस्तेमाल करके आसानी से इस परेशानी से निजात पा सकते हैं।