हर महिला जीवन में माँ बनने का अनुभव लेना चाहती है। यह अनुभव जितना खास होता है उतना ही गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ज्यादातर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान पेट से सम्बंधित समस्या जैसे की कब्ज़, पेट में ऐंठन, पेट में गैस जैसी समस्या से परेशान हो सकती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान पेट में गैस की समस्या क्यों होती है, इस बारे में बताने जा रहें हैं।
प्रेगनेंसी में पेट में गैस होने के कारण
गर्भवती महिला को पेट में गैस होने का कोई एक कारण नहीं होता है। बल्कि गर्भवस्था के दौरान कई कारणों की वजह से महिला को यह दिक्कत हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को पेट में गैस होने के क्या कारण हो सकते हैं।
प्रेगनेंसी में गैस बनने का कारण होता है हॉर्मोन के स्तर में बदलाव
प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव होने के कारण प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन का स्तर बढ़ने लगता है।
जिसके कारण पाचन शक्ति कमजोर पड़ सकती है।
और पाचन क्रिया के धीमे पड़ने के कारण प्रेग्नेंट महिला को पेट में गैस की समस्या हो सकती है।
कब्ज़ होने के कारण
वजन बढ़ने के कारण, बॉडी में हार्मोनल बदलाव होने के कारण अधिकतर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ से परेशान हो सकती है।
कब्ज़ की समस्या होने के कारण आपके द्वारा लिया गया आहार आँतों में बहुत देर तक रहता है।
जिसके कारण पेट में गैस बनने की समस्या हो सकती है।
बैक्टेरियल असंतुलन
पाचन क्रिया धीमी पड़ने के कारण पेट में बैक्टेरियल असंतुलन हो सकता है।
जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को पेट में गैस की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
प्रेगनेंसी में गैस बनने का कारण होता है बढ़ता वजन
प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला का वजन बढ़ता है।
जिसके कारण महिला की खाने की इच्छा में बढ़ावा होता है, साथ ही पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है।
जिसके कारण खाने को हज़म करने में दिक्कत हो सकती है।
और महिला को पेट में गैस की समस्या हो सकती है।
खाने में लापरवाही
कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं जिनका सेवन करने से गर्भवती महिला को पेट में गैस की समस्या हो सकती है।
जैसे की यदि महिला खाने में जंक फ़ूड, स्ट्रीट फ़ूड, ज्यादा मसाले वाले आहार का सेवन करती है।
तो इसे पचाने में महिला को दिक्कत हो सकती है।
जिसके कारण महिला को पेट में गैस जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
प्रेगनेंसी में पेट में गैस की समस्या से बचने के आसान टिप्स
गर्भवती महिला को उन आहार का सेवन करने से बचना चाहिए जिनका सेवन करने से गैस बनती है।
तरल पदार्थों का भरपूर मात्रा में सेवन करें।
थोड़ा थोड़ा खाएं, अच्छे से चबाकर खाएं, धीरे धीरे खाएं ताकि खाने को हज़म करने में आसानी हो सके।
अधिक मसालेदार खाने का सेवन न करें अपनी डाइट में हल्के व् पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें।
फाइबर युक्त आहार जैसे हरी सब्जियां, दालें, फल आदि का भरपूर सेवन करें।
तरल पदार्थ को पीने के लिए स्ट्रॉ का इस्तेमाल नहीं करें।
थोड़ा बहुत व्यायाम भी जरूर करें, ज्यादा नहीं तो नियमित सैर तो जरूर करें।
तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान पेट में गैस बनने के कारण व् इस समस्या से बचने के कुछ आसान उपचार, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं। और आप भी पेट में गैस बनने की समस्या से परेशान हैं तो इन आसान टिप्स का इस्तेमाल करके आप भी इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।
सर्दी और बारिश के मौसम में सबसे बड़ी परेशानी तबियत खराब होने की ही होती है। बदलता मौसम शरीर और मन को तो सुकून दे देता है लेकिन यही मौसम शरीर को तकलीफ भी देता है। बदलते मौसम की वजह से सर्दी, जुखाम, बुखार, गले में दर्द जैसी समस्याएं होने लगती है। इन सभी में सबसे अधिक तकलीफ गला खराब होने और गले में दर्द होने की होती है। जिसकी वजह से व्यक्ति ना तो ठीक से कुछ खा पाता है और ना ही पी पाता है।
गले में दर्द की समस्या तब तक नहीं जाती जब तक जुखाम और बुखार पूरी तरह ठीक ना हो जाए। गले में दर्द का एक कारण गले का संक्रमण भी होता है जो अधिकतर बारिशों के मौसम में होता है। अगर आपका गले में दर्द हो रहा है और कई उपाय करने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा, तो यहाँ हम कुछ घरेलू उपचार बता रहे हैं जिनकी मदद से गला खराब होने में राहत मिल सकती है।
नमक के पानी के गरारे
गुनगुने पानी में नमक मिलाकर गरारे करने से गले में दर्द की समस्या से राहत मिलती है। गला खराब होने पर भी नमक के पानी के गरारे करने चाहिए। दरअसल नमक में एंटी बायोटिक गुण होते हैं जो गले में पहुंचकर दर्द पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म कर देते है और खराश में आराम देते हैं।
तेजपत्ते की चाय
पानी को गैस पर उबालकर उसमे चायपत्ती, चीनी और तेजपत्ता डालकर अच्छे से खौला लें। अब इस पानी को छान लें और फिर इसमें दूध मिलाएं। गला खराब होने पर इस चाय का सेवन करें गले के दर्द में आराम मिलेगा और जल्द ही गला ठीक हो जाएगा।
लौंग, काली मिर्च और शहद
इस उपाय के लिए एक ग्लास पानी में एक चुटकी काली मिर्च पाउडर, एक चुटकी पीसी हुई लौंग और एक चम्मच शहद मिलाकर काढ़ा बना लें और गला ठीक होने तक रोज सुबह इस काढ़े को पीएं। गला बिलकुल ठीक हो जाएगा।
मेथी के दाने
पानी में थोड़े से मेथी के दाने डालकर उसे गर्म कर लें। अब इस पानी को छान उससे गरारे करें। ऐसा करने से संक्रमण जल्दी ठीक होगा और दर्द में भी आराम मिलेगा।
तुलसी
तुलसी में बहुत से एंटीसेप्टिक गुण होते है जो हर प्रकार के संक्रमण को ठीक करने में सक्षम होते हैं। आप इसकी चाय बनाकर या माउथवाश बनाकर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। ये गले को ठंडक पहुँचाने के साथ-साथ संक्रमण को भी ठीक करती है।
अदरक
गले में बहुत दर्द होने या खराश होने पर अदरक का रस पीने से बहुत लाभ मिलता है। इसके लिए आप अदरक को पीसकर उसका रस बना लें और उसमे थोड़ा सा शहद मिलाकर गर्म कर लें। हल्का सहने योग्य होने पर इसका सेवन करें। गले में आराम मिलेगा।
मुलेठी
गला खराब होने पर मुलेठी का छोटा सा टुकड़ा मुंह में रख कर चबाएं और उसके रस का सेवन करें। इससे गले के दर्द में आराम मिलेगा।
प्याज का रस
सर्दी के कारण गले में दर्द होने पर प्याज का रस निकाल लें और उसका सेवन करें। आप चाहे तो इसमें थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं।
सिरका
गले में खराश होने पर गुनगुने पानी में थोड़ा सिरका मिलाकर गरारे करने से भी फायदा होता है।
मिश्री
गला बैठ जाने पर मिश्री और काली मिर्च को मुंह में रखकर चबाएं और उसका रस चूसते रहें बैठा हुआ गला ठीक हो जाएगा।
लहसुन
गले में तेज खराश होने के साथ-साथ यदि खांसी हो तो लहसुन की कुछ कलियों को गैस पर काला होने तक भून लें और उसके बाद छीलकर चबाकर खाएं। दर्द और खांसी में आराम मिलेगा।
अंजीर
गला खराब होने पर पानी में 5 अंजीर डालकर उबाल लें। उसके बाद छाने और पानी को गर्म गर्म सुबह और शाम पियें। ऐसा करने से खराब गले में आराम मिलेगा।
इन चीजों से परहेज करें
उपाय के साथ साथ कुछ परहेज भी करने होंगे – जैसे
गले में दर्द होने पर ठंडा पानी का सेवन नहीं करें।
बर्फ आदि के सेवन से बचें।
बहुत ज्यादा मसालेदार भोजन को खाने से बचें।
बाहर का खाना बिलकुल ना खाएं।
दही और दूसरी ठंडी चीजों का सेवन ना करें।
जितना हो सके गर्म खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
पानी भी उबालकर पियें।
यदि आप इन सभी बातों का ध्यान रखने के साथ साथ ऊपर बताये गए उपायों का इस्तेमाल करेंगे तो निश्चित रूप से आपके गले का दर्द ठीक हो जाएगा।
आज कल की भागती दौड़ती जिंदगी में लोग अपनी दिनचर्या का अच्छे से ख्याल नहीं रख पाते हैं। नतीजा बहुत सी शारीरिक परेशानियां, बीमारियां, आदि से सामना करना पड़ता है। ऐसी ही एक समस्या है बालों का असमय सफ़ेद होना, कम उम्र में बालों के सफ़ेद होने के कारण आपके ही उम्र क लोग आपको अंकल आंटी कहना शुरू कर देते हैं। साथ ही आपके दोस्त तो आपका मज़ाक भी उड़ाते हैं।
यदि आपकी शादी नहीं हुई है तो बाल सफ़ेद होने के कारण आपको रिश्ता मिलने में भी परेशानी हो सकती है, कम उम्र में ही आप बुजुर्गो की गिनती में आने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं की असमय बालों के सफ़ेद होने का कोई एक कारण नहीं होता है। बल्कि ऐसे बहुत से कारण होते हैं जिनकी वजह से यह परेशानी हो सकती है। तो आइये जानते हैं की असमय बालों के सफ़ेद होने के क्या क्या कारण होते हैं।
कम उम्र में बाल सफ़ेद होने के कारण
प्रदूषित वातावरण: आजकल प्रदूषण इतना ज्यादा है की सांस लेना तक मुश्किल होता है, ऐसे में प्रदूषित वातावरण का बुरा असर बालों पर भी पड़ता है जिसके कारण बाल उम्र से पहले ही सफ़ेद होने लगते हैं।
गलत आदतें: यदि कोई महिला या पुरुष धूम्रपान अधिक करते हैं तो यह भी आपके बालों पर बुरा असर डालते हैं जिसके कारण बाल सफ़ेद होते हैं।
केमिकल का इस्तेमाल: बालों की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए आज कल तरह तरह के केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स मार्किट में मौजूद हैं। यदि आप इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं तो थोड़े समय के लिए तो यह आपके बालों को खूबसूरत बना देते हैं लेकिन बाद में इसके कारण आपको बालों से जुडी समस्या जैसे की बालों का कमजोर होना, बालों का रुखा होना, बालों का सफ़ेद होना जैसी समस्या होती है।
तनाव: यदि आप मानसिक रूप से बहुत अधिक तनाव लेते हैं तो इसके कारण भी आपके बाल समय से पहले सफ़ेद हो सकते हैं।
हार्मोनल असंतुलन: यदि किसी बिमारी के कारण, गलत आदतों के कारण आपकी बॉडी में हार्मोनल असंतुलन होता है तो इसके कारण भी कम उम्र में बाल सफ़ेद हो सकते हैं।
विटामिन बी 12 की कमी: यदि आपके शरीर में विटामिन बी 12 की कमी होती है। तो इस विटामिन की कमी के कारण बालों की ग्रोथ में कमी के साथ बालों के असमय सफ़ेद होने की समस्या हो जाती है। इसके अलावा विटामिन डी 3 की कमी के कारण भी बाल सफ़ेद हो जाते हैं।
खान पान में गड़बड़ी: यदि आप अपने खान पान का अच्छे से ध्यान नहीं रखते है और जंक फ़ूड आदि का सेवन अधिक करते हैं। तो इसके कारण बॉडी में जरुरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जिसके कारण बालों के लिए जरुरी पोषण में भी कमी आ जाती है। जिसके कारण बाल सफ़ेद हो सकते हैं।
अनुवांशिक कारण: यदि आपके भाई, बाप, माँ या घर के किसी अन्य सदस्य को यह समस्या है तो ऐसा आपके साथ भी हो सकते हैं।
बालों में पोषण की कमी: यदि आप अपने बालों की साफ़ सफाई का ध्यान नहीं रखते हैं, बालों को पोषण पहुंचाने के लिए तेल आदि से मसाज नहीं करते हैं तो इसके कारण भी बालों पर बुरा असर पड़ सकता है।
बालों के सफ़ेद होने की समस्या से बचने के उपाय
बालों का असमय सफ़ेद होना जरूर एक समस्या है लेकिन यह कोई ऐसी परेशानी नहीं है जिसका कोई इलाज न हो बल्कि ऐसे बहुत से आसान टिप्स है जिन्हे ट्राई करने से आप बालों के असमय सफ़ेद होने की समस्या से बचाव करके बालों को काला कर सकते हैं। तो आइये आज हम आपको बालों को असमय सफ़ेद होने से बचने के कुछ आसान और असरदार नुस्खे बताने जा रहे हैं।
प्याज़ का रस
एक प्याज़ को क्रश करके उसका रस निकाल लें, अब इस रस को बालों की जड़ व् बालों में अच्छे से लगाएं और आधे घंटे के लिए छोड़ दें। उसके बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके बालों को धो दें, ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें, इससे बालों को सफ़ेद से काला होने के साथ बालों से जुडी अन्य परेशानियों से निजात पाने में भी मदद मिलेगी।
मेहँदी और कॉफ़ी पाउडर
मेहँदी में कॉफ़ी पाउडर मिलाकर लगाने से भी सफ़ेद बालों को काला करने में मदद मिलती है। कम से कम पंद्रह दिनों में एक बार इस तरीके का इस्तेमाल जरूर करें।
आंवला
एक कप नारियल के तेल में तीन चार आंवलों के छोटे छोटे पीस काटकर पकाएं, और जब तक आंवले काले न हो जाये तब तक इसे पकाते रहें। उसके बाद इस तेल को छानकर एक बोतल में भरकर रख दें, और फिर इसे दो या तीन दिन बाद अपने बालों में लगाएं। और आधे से एक घंटे तक बालों को तेल में रहने के बाद सिर धो लें। ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें, धीरे धीरे आपको इसका फायदा जरूर मिलेगा। आंवले का बालों के लिए इस्तेमाल करने के साथ इसे अपनी डाइट में शामिल करने से भी आपको बालों से जुडी परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।
करी पत्ता
करी पत्ता भी सफ़ेद बालों को काला करने का एक बेहतरीन उपाय है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक पैन में एक कप नारियल का तेल गर्म करें उसके बाद इसमें बारह से पंद्रह पत्तिया करी पत्ते की डाल दें। और जब तक पत्तियां काली न हो जाएँ तब तक इसे पकाते रहें, अब इस तेल के ठंडा होने पर इसे छान लें। एक हफ्ते में दो से तीन बार इस तेल से मसाज करें। और रातभर बालों में तेल रहने के बाद बालों को धो लें। इसके अलावा करी पत्ते को अपनी सब्जियों आदि में डालकर इसका सेवन भी करें। ऐसा करने से भी आपको कम उम्र में बालों के सफ़ेद होने की समस्या से निजात पाने में आपको मदद मिलती है।
नारियल तेल और निम्बू
दो चम्मच नारियल तेल को गर्म करके इसमें थोड़ा सा निम्बू का रस मिलाकर बालों में लगाएं और एक घंटे बाद बालों को धो लें। ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें आपको फायदा मिलेगा।
अरंडी और सरसों का तेल
अरंडी और सरसों का तेल दो चम्मच सरसों का तेल और एक चम्मच अरंडी का तेल मिलाकर हल्का गर्म करें और बालों में लगाएं। और उसके आधे घंटे बाद बालों को शैम्पू से धो लें। बेहतर परिणाम के लिए ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें।
तुरई
एक एयर टाइट कंटेनर में एक कप नारियल का तेल लें और उसमे सूखी कटी हुई तुरई (एक दिन पहले काटकर धूप में सूखा लें) डालें। उसके बाद इस कंटेनर को बंद कर चार से पांच दिन के लिए छोड़ दें। अब इसके बाद जब आपने तेल लगाना हो तब दो चम्मच तेल कंटेनर से निकालें और हल्का गर्म करें। अब तेल से मसाज करें और आधे घंटे के लिए बालों में छोड़ दें उसके बाद बालों को धो दें। ऐसा हफ्ते में दो-तीन बार करें आपको जरूर फायदा मिलेगा।
मेथी के बीज
तीन से चार चम्मच मेथी के बीज लें और इन बीजों को रातभर के लिए पानी में भिगोकर रख दें। उसके बाद सुबह पानी के साथ मिलाकर इसका एक पतला पेस्ट तैयार करके बालों व् बालों की जड़ में अच्छे से लगाएं और एक घंटे के लिए बालों में छोड़ दें। उसके बाद शैम्पू का इस्तेमाल कर बालों को धो दें, ऐसा हफ्ते में दो बार जरूर करें आपको बहुत जल्दी फायदा मिलेगा।
बालों को काला करने के अन्य टिप्स
धूप में ज्यादा देर नंगे सिर खड़े न हो।
अपने बालों को प्रदूषण से बचाकर रखें।
ज्यादा केमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल बालों के लिए न करें।
तनाव से बचे।
बालों की हर दो से तीन दिन में मसाज करें।
अपनी दिनचर्या को सही रखें।
नशीले पदार्थों के सेवन से बचें।
आयरन, विटामिन्स, से भरपूर आहार को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। यदि आप पोषक तत्वों से भरपूर डाइट का सेवन करते हैं तो इससे शरीर के सभी अंगो के साथ बालों के लिए जरुरी पोषक तत्व भी मिलते हैं जिससे बालों के काले रंग को बरकरार रहने में मदद मिलती है।
तो यह हैं कम उम्र में बालों के सफ़ेद होने के कुछ कारण व् इस परेशानी से बचने के कुछ आसान उपाय, तो यदि आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो आपको भी इन टिप्स का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको बालों के असमय सफ़ेद होने की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके।
खूबसूरत बाल किसकी चाहत नहीं होती। आपने बालों को सुन्दर बनाने के लिए हम तरह- तरह के उपाय करते हैं। महंगे शैम्पू ,महॅंगे हेयर आयल , और कई तरह के कलर का प्रयोग करना। इन चीज़ों के इस्तेमाल करने से कई बार दोमुंहे बालों की समस्या हो जाती है। ये समस्या क्यों आती हैं ?आइए जानते है इसके कारण
पोषण के कारण
शारीरक पोषण की कमी के कारण हमारे बाल दोमुंहे हो जाते हैं। ठीक से खान पान न करना और अपने खाने में कुछ ऐसे खाने का इस्तेमाल करना जो हमारे बालों की ठीक से पोषित न करे बालों के दोमुंहे होने का कारण बन जाता है।
इलेक्ट्रिक चीज़ो का प्रयोग करना
कई बार समय की कमी के कारण हम अपने बालों पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं जैसे हेयर ड्रॉयर का उपयोग करना। उसके इस्तेमाल से हमारे बालों पर भी बुरा असर पड़ता है। जिसके कारण बाल दोमुहे हो जाते हैं।
अनुवांशिक कारण होना
कुछ लोगो में अनुवांशिक कारण की वजह से भी इस समस्या का होना आम बात है। इसमे बालों की जड़ें अंदर से पतली और बहार से मोटी होती हैं। जिसके कारण बाल जल्दी टूटते हैं और बेजान होने के साथ-साथ दोमुँहे भी हो जाते हैं।
रिबॉन्डिंग करने के कारण
हम अपने बालों को सुन्दर दिखाने के लिये आजकल रिबॉन्डिंग करवाने लगे हैं। जिससे बालों में केमिकल लगाने से बाल ख़राब हो जाते हैं। रूखे और बेजान हो जाते हैं। ये भी एक कारण है बालों के दोमुंहे होने का।
सही शैम्पू का इस्तैमाल न करना
कई बार हम लोगो की बातों में आकर वह शैम्पू इस्तेमाल कर लेते हैं जो महँगे होते हैं लेकिन वह हमारे बालो के लिए बिलकुल भी ठीक नहीं होते। हमारे बालों को सूट नहीं करते। और हम बिना उसके फायदे जाने उसका उपयोग करते जाते हैं। ये भी कारण है बालों के दोमुंहे होने का।
सही से बालों का रख रखाव न करना
अपने बालों की देखभाल ठीक से न करना भी एक मुख्य कारण है बालों की समस्या का। बालों को जोर से झाड़ना, ठीक से कंघी न करना , बालों की ठीक से सफाई न करना। ये सब भी कारण होते हैं जिनसे बाल दोमुंहे हो जाते है। जल्दी टूटने लगते है बेजान और रूखे दिखाई देने लगते हैं।
आज कल की भागदौड़ भरी जिन्दगी में हर कोई व्यक्ति परेशान है, फिर चाहे वो कितना अम्रीर हो या गरीब, किसी न किसी बात को लेकर तनाव लगा ही रहता है, और इसके कारण व्यक्ति का स्वभाव तो बदलता ही है, परन्तु व्यक्ति धीरे धीरे शारीरिक रूप से भी परेशान रहने लगता है, तनाव के कई कारण हो सकते है, जैसे की आपकी दिनचर्या का सही नहीं होना, परेशानी का हल ढूंढने की बजाय उसे अपने दिमाग पर हावी कर लेना, ऐसे ही कुछ कारण आपको डिप्रेस करते है।
अब आपकी दिनचर्या से जुडा एक उदाहरण आपको देते है, अब आप सोचिये की रात को आप देर तक टीवी देख रहे थे, तो सुबह उठने में देरी हो गई, परन्तु आपको ऑफिस जल्दी पहुंचना था, और जल्दी के चक्कर में न तो आपके खाना ढंग से खाया, शेव कर रहे थे तो वहां छील गया, बाहर निकलते ही याद आया की आप अपने फ़ोन तो घर पर ही भूल गये है, फ़ोन लेने के लिए गए उसके बाद ऑफिस के लिए लेट हो गए, जो काम आपको बारह बजे तक ख़त्म करना था, वो दो बजे हुआ, इस चक्कर में अपने खाना भी नहीं खाया, ऐसा करने से आपकी साड़ी दिनचर्या अस्त व्यस्त हो गई, जिसके कारण आपको दिमागी रूप से बहुत परेशानी हुई, और आपको तनाव होने लगा, परन्तु यदि आप समय से सो गए होते, तो ऐसा कुछ भी नहीं होता, इसीलिए तनाव से राहत के लिए सबसे जरुरी की आप अपनी जीवनशैली और दिनचर्या में परिवर्तन लाएं, तो आइये जानते है की तनाव और चिंता से निजात पाने के लिए आप क्या क्या कर सकते है।
तनाव का कारण पता करें:-
जब भी आप डिप्रेस महसूस करें तो आपको सबसे पहले ओचना चाहिए की उसका कारण क्या है, यदि आप समस्या का पता लगा लेंगे तो आपको उसका समाधान करने में आसानी होगी, इसके लिए आपको शांत रहकर दस मिनट तक सोचना चाहिए की आज आपने ऐसी क्या गलती की जिससे आपको ये परेशानी हुई, जब आपको उस परेशानी का पता चल जाएगा, तो आपको उसे दूर करना चाहिए, ताकि आपके दिमाग को राहत मिलें, और आपको तनाव से बचने में आसानी हो।
अपने जीवन में व्यवस्था लाएं:-
तनाव का सबसे बड़ा कारण होता है आपका अव्यवस्थित रहना, क्योंकि जब आपको कोई चीज समय पर नहीं मिलेगी, तो उसके कारण आपको परेशानी होगी, इसकी शुरुआत आपको अपने रोमार्रा के सामान से करनी चाहिए, जैसे की अपने पर्स, किताबे, लैपटॉप या अन्य सामना जो आपको रोजाना चाहिए होता है, उसके बाद अपने खान पान, अपने सोने आदि को भी व्यवस्थित करें, धीरे धीरे आपको लाइफस्टाइल बेहतर होगा और जिसके कारण आपको तनाव से दूर रहने में मदद मिलेगी।
आपने ये तो सुना ही होगा की की यदि दिन की शुरुआत अच्छी होती है तो आपका पूरा दिन ही अच्छा जाता है, तो सुबह जल्दी उठने से आपका सबी काम समय से होंगे, ऐसा करने से आप कभी अपने काम के लिए लेट नहीं होंगे, अपना खाना अच्छे से खा सकेंगे, आपको पूरे दिन फ्रेश फील करने में मदद मिलेगी, और सुबह जड़ी उठने के लिए जरुरी है की आप रात को भी समय से सोयें, क्योंकि सुबह उठने के साथ ये भी जरुरी है की आप अपनी नींद को भरपूर लें, हो सकता है कुछ दिन आपको इसमें परेशानी हो, परन्तु धीरे धीरे आपको इसकी आदत हो जायेगी, और साथ ही इससे मिलने वाले लाभ का अनुभव भी आप करेंगे।
मल्टीटास्किंग न करें:-
इसका मतलब होता है की एक ही वक़्त पर आप बहुत से काम न करें, जैसे की कंप्यूटर करता है, कई व्यक्ति होते है जो ऑफिस का काम कर रहें होते है, और दिमाग में घर की बातें चल रही होती है, और तीसरा चल रहा होता है की किस तरह तरक्की करें, यदि आप अपने दिमाग पर एक ही समय पर इतना जोर डालते है, तो इसके कारण न केवल आपका कोई काम होता है, बल्कि इसके कारण आप परेशान रहने लगते है, और तनाव में आ जाते है, इसीलिए पहले एक काम को खत्म करें, उसके बाद दूसरे के बारे में सोचें, इससे आपके काम को भी आसानी से होने में मदद मिलेगी, और आपको तनाव से भी राहत मिलेगी।
कई लोग काम में इतने व्यस्त होते है, की उनके पास अपने लिए ही समय नहीं होता है, इसीलिए वो हमेशा तनाव में रहते है, और यही उनकी चिंता का विषय भी होता है, क्योंकि न तो उनके खाने न सोने का कोई समय होता है, इसीलिए यदि आप तनाव से बचने चाहते है तो आपको अपने लिए कुछ समय निकालना चाहिए, जिसमे आप केवल शांत मन से अपने लिए सोच सकें, और साथ ही इस समय में आप कुछ ऐसा करें जो आपको पसंद हो, जैसे की किताबे पड़ना, लिखना, गेम्स खेलना ताकि आपके दिमाग को आराम मिल सकें, और आपको तनाव से दूर रहने में मदद मिल सकें।
व्यायाम व् योगासन करें:-
सुबह समय से उठने के बाद आपको कम से कम आधा घंटा व्यायाम व् योगासन करना चाहिए, ऐसा करने से आपको न केवल शारीरिक रूप से आराम मिलेगा, बल्कि मानसिक रूप से भी आराम मिलने में मदद मिलेगी, साथ ही इसे आपको बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है, और सारा दिन आपका शरीर और दिमाग दोनों ही तरोताजा महसूस करते है, इसीलिए आपको सुबह उठकर नियमित व्यायाम व् योगासन करना चाहिए, और हमेशा अपने शरीर की एनर्जी को भरपूर रखना चाहिए।
भरपूर नींद लें:-
तनाव का एक कारण आपकी नींद का पूरा न होना भी हो सकता है, क्योंकि यदि आपकी नींद पूरी नहीं होती है, तो इसके कारण आप सारा दिन सुस्त महसूस करते है, आपको थकान होने लगती है, आपका किसी काम में मन नहीं लगता है, और आपको हमेशा सर भारी महसूस होता है, जबकि एक व्यक्ति को दिन में कम से कम आठ घंटे नींद जरुर लेनी चाहिए, इसके कारण न केवल शरीर को बल्कि दिमाग को भी आराम मिलता है, जिसके कारण आपको तनाव से बचाव करने में मदद मिलती है, इसीलिए आपको भरपूर नींद जरुर लेनी चाहिए।
दूसरों पर नियंत्रण करने की न सोचें:-
कई लोगो की आदत होती है की वो हमेशा दूसरों को अपने नीचे रखना चाहते है, या उन पर नियंत्रण करना चाहते है, जो की यदि नहीं हो पाता है, तो वो दिमागी रूप से परेशान रहने लगते है, ऐसा बिलकुल भी जरुरी नहीं होता है की आप जैसा चाहते है हमेशा वैसा ही हो, बल्कि आपके और सभी के काम करने के, रहने सहने के तरीको में गर्क होता है, इसीलिए आपको कभी भी इस बारे में नहीं सोचना चाहिए की आप दूसरों पर नियंत्रण करें, बल्कि आपको हमेशा दूसरों से सेख लेनी चाहिए, ताकि आपको हमेशा कामयाबी मिलें, और दूसरों से कभियो ये अपेक्षण न रखें की वो आपके हिसाब से चलें।
तनाव व् चिंता से दूर रहने के ने टिप्स:-
स्वस्थ संतुलित व् पोष्टिक आहार का सेवन करें, और समय से अपने हार को लें, और चबा चबा कर भोजन का सेवन करें, ऐसा करने से आपके शरीर की उर्जा बनी रहती है और आपको हमेशा खुश रहने में मदद मिलती है।
टालमटोल करने की आदत छोड़ दें, क्योंकि इसके कारण हमेशा आपको दबाव में ही आना पड़ता है।
कुछ क्रिएटिव करें, या अपनी मनपसंद के कुछ काम करें जिसके कारण आपके दिमाग को फ्रेश होने में मदद मिल सकें।
किसी भी समस्या के होने पर उसका समाधान करें, इस बारे में अपने दोस्तों और अपने परिवार वालो से शेयर करें, परन्तु उसे अपने दिमाग पर हावी न होने दें।
थोडा समय निकल कर फ़ोन से दूरी बनाकर घूमने के लिए जाएँ इससे भी आपके दिमाग को फ्रेश फील होने में मदद मिलती है।
जितना हो सकें मुश्किलों से दूर रहने की कोशिश करें, कभी भी किसी की फ़ालतू बात में टांग न डालें, और उससे दूर रहने की कोशिश करें।
हमेशा तेजी करना ठीक नहीं होता है,तेजी हमेशा आपके काम को बिगाडती है, इसीलिए आपको हमेशा जो भी काम करें, उसे समय से और ढंग से करने के लिए आराम से करें।
यदि आपको किसी की मदद करने के मौक़ा मिलें तो पीछे न हटें, इससे आपको मानसिक रूप से शांति मिलती है।
अपनी सोच को कभी भी नकारात्मक न रखें क्योंकि वो हमेशा आपको तनाव में ले जाती है, आपको हमेशा अपनी सोच को पॉजिटिव बनाएं रखना चाहिए।
बुरी आदतों से दूर रहें, क्योंकि कई लोग परेशानी से बचने के लिए इनका सहारा लेते है, जबकि ये आपकी समस्या को ख़त्म नहीं करते है, बल्कि बढ़ा देते है।
तो ये कुछ तरीके है जिनका इस्तेमाल करके आप तनाव और चिंता से निजात पा सकते है, साथ ही आपको यदि कोई परेशानी है तो आपको उसका समाधान करने के लिए सोचना चाहिए, न की उसे अपने दिमाग पर हावी होने देना चाहिए, ऐसा करने से भी आपको तनाव से राहत मिलने में मदद मिलती है, और आपको मानसिक रूप से आराम महसूस होता है।
शरीर की सही शेप का न होना आपकी ख़ूबसूरती पर धब्बा बन सकता है, इसके कारण कई लोग अपने फिगर को शेप में लाने के लिए तरह तरह के जुगाड़ को ढूंढते रहते है, जिसके कारण उन्हें मोटापे से छुटकारा मिल सकें, क्या आप भी ऐसी ही कोई तरकीब ढूंढ रहे है, जिसके कारण आपके शरीर को शेप में लाने में मदद मिल सकें?, यदि हां तो आइये आज हम आपको अपनी बॉडी को शेप में लाने के लिए कुछ टिप्स देने जा रहे है।
हर कोई चाहता है की उसकी बॉडी परफेक्ट शेप में हो, और खास कर लड़कियां अपने फिगर को लेकर बहुत परेशान रहती है, क्योंकि गलत खान पान, और गलत दिनचर्या के कारण आपको मोटापे की समस्या से परेशान होना पड़ता है, जिसके कारण आपका शरीर मोटापे के साथ उसके कारण होने वाली बीमारियों से भी दोस्ती कर लेता है, इसके अलावा कई बार लोगो के सामने कई लोग अपने मोटापे को छुपाने के लिए अपनी सांस को अंदर खींचते हुए दिखाई देते है, क्या आपने भी कभी ऐसा किया है, यदि हां और अब आप इस परेशानी से निजात पाना चाहते है, तो आपको सबसे पहले अपनी दिनचर्या में परिवर्तन लाना चाहिए।
इसके लिए सबसे पहले तो आपको अपनी सभी गलत आदतों में सुधार करना चाहिए, जैसे की अपनी नींद को भरपूर मात्रा में लेना चाहिए, सुबह समय से उठ कर कुछ देर व्यायाम करना चाहिए, ज्यादा तली भुनी और मसालेदार चीजों से जितना हो सकें परहेज रखना चाहिए, ज्यादा मात्रा में न तो मीठा और न ही नमक का सेवन करना चाहिए, ग्रीन टी का सेवन करना चाहिए, भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए, एरोबिक्स, आदि को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए, तो आइये अब हम आपको विस्तार से बताते है, की आपको अपने फिगर को सही शेप में लाने के लिए क्या क्या करना चाहिए।
सुबह समय से उठ कर व्यायाम करें:-
मोटापे का सबसे बड़ा कारण होता है की आप अपने शरीर को पुश नहीं करते है, यदि आप अपने आप को शेप में लाना चाहते है, तो सबसे पहले अपनी दिनचर्या में व्यायाम को शामिल करें, क्योंकि व्यायाम करने आपके शरीर को काम मिलता है, जिसके कारण आपके शरीर से पसीना निकलता है, और जितना अधिक पसीना निकलता है, उतना ही आपका फैट बर्न होता है, जिसके कारण आपको शेप में आने में मदद मिलती है।
एरोबिक्स करना चाहिए:-
एरोबिक्स क्लास आज कल हर एक शहर में है, ये भी एक प्रकार की एक्सरसाइज ही होती है, इसके कारण आपका मनोरंजन भी होता है, और आपके शरीर में जमे एक्स्ट्रा फैट को कम करके आपको शेप में लाने में भी मदद मिलती है, यदि आप नियमित रूप से एरोबिक्स करते है, तो आपको थोड़े ही दिनों में आपको इसका असर दिखने लगता है, और आपको अपने आपको शेप में लाने में मदद मिलती है।
ग्रीन टी का सेवन करें:-
ग्रीन टी का सेवन करने से भी आपको अपनी बॉडी पर जमे एक्सट्रा फैट को कम करने में मदद मिलती है, और यदि आप दिन में तीन से चार बार इसका सेवन करते है, तो इसके कारण आपके शरीर में मेटाबोलिज्म को सही होने में मदद मिलती है, और आपकी चर्बी भी कम होने लगती है, साथ ही आपके शरीर में होने वाली बीमारियों पर रोकथाम लगाने के साथ आपकी त्वचा में भी निखार लाने में मदद करता है, और हो सकें तो रात को खाना खाने के बाद इसका सेवन आपको जरूर करना चाहिए।
पानी का भरपूर सेवन करें:-
पानी किसी औषधि से कम नहीं होती है, भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करने से आपके शरीर से सभी टॉक्सिन्स यूरिन के रास्ते बाहर निकल जाते है, और इसके कारण आपकी चर्बी को भी घटने में मदद मिलती है, यदि आप दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन नियमित रूप से करते है, तो इसके कारण आपको एक्टिव रहने में मदद मिलती है, साथ ही आपका वजन भी कम होने लगता है, और यदि आप दिन में तीन से चार बार खास कर खाना खाने के बाद गरम पानी का सेवन करते है, तो आपको इसके कारण बहुत जल्दी चर्बी को कम करने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपकी बॉडी को शेप में आने में मदद मिलती है।
क्या एक बार सम्बन्ध बनाने से लड़की प्रेग्नेंट हो जाती है, कितनी बार सम्बन्ध बनाने से होते हैं प्रेग्नेंट, प्रेगनेंसी के लिए टिप्स, क्या एक बार सम्बन्ध बनाने से गर्भ ठहर जाता है
ज्यादातर लोग ऐसा ही मानते है की लड़का और लड़की ने यदि एक बार सम्बन्ध बना लिए तो इसके कारण लड़की प्रेग्नेंट हो जाएगी। जो की बिल्कुल गलत सोच है क्योंकि प्रेगनेंसी होने के लिए बहुत सी चीजों का होना जरुरी होता है, जैसे की यदि आपने सम्बन्ध बना लिए लेकिन उस दौरान आपके प्रजनन अंग उतने उत्तेजित नहीं थे, या पुरुष के शुक्राणु अच्छे से निर्मित नहीं हुए तो प्रेगनेंसी होने के चांस न के बराबर होते हैं। प्रेगनेंसी होने के लिए सबसे जरुरी होता है की दोनों बेहतर ओर्गास्म को प्राप्त करें। एक रिसर्च के अनुसार एक महीने में कम से कम तेरह बार बेहतर सम्बन्ध बनाने से महिला के प्रेगनेंसी के चांस बढाए जा सकते है।
एक बार सम्बन्ध बनाने से भी हो सकते हैं प्रेग्नेंट
यदि महिला का ओवुलेशन पीरियड चल रहा है, और लड़का और लड़की के बीच बेहतर सम्बन्ध बने हैं, और निषेचन की क्रिया भी सफल हो गई है, तो एक सर्वे के अनुसार केवल पांच प्रतिशत लडकियां ही ऐसी होती है जो की पहली बार सम्बन्ध बनाने से ही प्रेग्नेंट हो जाती है। इसके अलावा ज्यादातर महिलाएं एक से ज्यादा बहार सम्बन्ध बनाने के बाद ही प्रेग्नेंट होती है। क्योंकि फर्टिलिटी बेहतर होना आसान बात नहीं होती है क्योंकि यह पूरी तरह से आपकी जीवनशैली, आपके स्वास्थ्य, और आपकी आदतों पर निर्भर करती है बेहतर फर्टिलिटी के लिए इन तीनो का बेहतर होना जरुरी होता है।
प्रेग्नेंट होने के कुछ आसान टिप्स
ओवुलेशन के दौरान बनाएं बेहतर और मज़ेदार सम्बन्ध।
उत्तेजना भी है जरुरी।
स्वास्थ्य रूप से भी हो पूरी तरह फिट।
सम्बन्ध बनाने के बाद न करें यूरिन पास और एक दम से न उठें।
नशे धूम्रपान की आदतों का करें त्याग।
एक दूसरे को करें स्पोर्ट ताकि सम्बन्ध बनें बेहतर।
सम्बन्ध बनाने के बाद न करें प्राइवेट पार्ट साफ़।
तो यह है की ऐसा हो सकता है की लड़का और लड़की के एक बार सम्बन्ध बनाने के बाद लड़की प्रेग्नेंट हो जाएँ लेकिन ऐसा बहुत कम चांस होता है। इसके अलावा यदि आप प्रेग्नेंट होना चाहती है तो आपको ऊपर दिए गए टिप्स का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।
गर्भावस्था के पहले तीन महीने बहुत ही अहम होते हैं। क्योंकि इस दौरान बॉडी में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला बहुत परेशान हो सकती है। लेकिन इन दिक्कतों के बाद भी प्रेग्नेंट महिला को अपना अच्छे से ख्याल रखने की सलाह दी जाती है। प्रेग्नेंट महिला के स्वस्थ के रहने के लिए और भ्रूण के शुरुआत से ही बेहतर विकास के लिए खान पान का ध्यान रखना जरुरी होता है। और इस दौरान न केवल समय से खाना जरुरी होता है बल्कि इस दौरान अपनी डाइट में पोषक तत्वों से भरपूर आहार को शामिल करना जरुरी होता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे 10 फ़ूड के बारे में बताने जा रहे हैं जो एक से तीन महीने तक प्रेग्नेंट महिला को जरूर खाने चाहिए।
एक से तीन महीने की प्रेगनेंसी में खाएं पालक
पालक आयरन, फोलेट, फाइबर, विटामिन सी, विटामिन इ, विटामिन ए जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में विद्यमान होते हैं।
फोलेट गर्भ में पल रहे शिशु के तंत्रिका तंत्र, मस्तिष्क के बेहतर विकास के साथ शिशु को जन्म दोष से सुरक्षित रखने में मदद करता है।
आयरन बॉडी में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है।
फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर काम करने में मदद करता है।
विटामिन सी प्रेग्नेंट महिला को संक्रमण से बचाव करने में मदद करता है।
इसके अलावा प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में पालक का सेवन करने से और भी फायदे मिलते हैं ऐसे में महिला को पालक का सेवन जरूर करना चाहिए।
दाल
प्रोटीन, फाइबर जैसे पोषक तत्वों से भरपूर दालों का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में जरूर करना चाहिए।
क्योंकि प्रोटीन शिशु की मांसपेशियों के बेहतर विकास में मदद करता है।
फाइबर महिला की पाचन क्रिया से सम्बंधित समस्या को दूर करने में मदद करता है।
इसके अलावा दाल में मौजूद अन्य पोषक तत्व प्रेग्नेंट महिला और शिशु के लिए फायदेमंद होते हैं।
केला
केले में विटामिन बी 6 मौजूद होता है जो प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में होने वाली मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से प्रेग्नेंट महिला को निजात दिलाने में मदद करता है।
इसके अलावा केले का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में भी मदद मिलती है।
एवोकाडो
फोलेट, फाइबर, प्रोटीन, एंटीऑक्सिडेंट जैसे पोषक तत्व एवोकाडो में भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
जो भ्रूण के मस्तिष्क और ऊतक विकास में सहायता करने के लिए मदद करते हैं।
इसके अलावा यह गर्भवती महिला को हदय सम्बन्धी समस्या, मॉर्निंग सिकनेस जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद करते हैं।
एक से तीन महीने की प्रेगनेंसी में खाएं शकरकंद
शकरकंद में विटामिन सी, फोलेट, फाइबर, विटामिन बी 6, पोटेशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
जो प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भवती महिला व भ्रूण के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।
लहसुन
गर्भावस्था के दौरान बहुत सी महिलाएं हाई ब्लड प्रैशर व् गेस्टेशनल डाइबिटीज़ जैसी समस्या से परेशान हो सकती हैं।
ऐसे में इन परेशानियों से बचाव के लिए गर्भावस्था की शुरुआत से ही लहसुन का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
लहसुन का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को इन दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिलती है।
संतरा
प्रेगनेंसी की शुरुआत में बॉडी में हार्मोनल बदलाव बहुत तेजी से होते हैं जिसके कारण प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है।
संतरे में विटामिन सी जो की एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट हैं मौजूद होता है।
जो प्रेग्नेंट महिला को इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है जिससे प्रेग्नेंट महिला को संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।
अंडे
अंडे में कैल्शियम, प्रोटीन आदि होने के साथ choline नामक पोषक तत्व होता है।
जो प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ भ्रूण के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करता है।
दूध
कैल्शियम, प्रोटीन जैसे पोषक तत्व दूध में भरपूर मात्रा में होते है।
जिनकी जरुरत प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने के साथ भ्रूण के बेहतर विकास के लिए भी होती है।
ऐसे में गर्भवती महिला को दूध का सेवन प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में जरूर करना चाहिए।
एक से तीन महीने की प्रेगनेंसी में खाएं बादाम
पोषक तत्वों से भरपूर बादाम का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में जरूर करना चाहिए।
क्योंकि बादाम में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं जो गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ भ्रूण के बेहतर विकास में भी फायदेमंद होते हैं।
तो यह हैं वो आहार जो प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में जरूर खाने चाहिए। ताकि गर्भवती महिला महिला को स्वस्थ रहने के साथ भ्रूण के बेहतर विकास में मदद मिल सकें।
आयुर्वेद में ऐसे बहुत से उपाय दिए गए हैं जो आपको स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद करते हैं क्योंकि आयुर्वेद का सिद्धांत ही यही है रोगी का इलाज करना और व्यक्ति को स्वस्थ रखना। और इन्ही उपाय में से एक उपाय है पंचकर्म, इस प्रक्रिया में अलग अलग तरीको से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकाला जाता है। जिससे आपके शरीर के हर एक अंग को स्वस्थ होने में फायदा होता है। आयुर्वेद में बताई गई इस चिकित्सा विधि से तीनों शारीरिक दोषों वात, पित्त और कफ को सामान्य अवस्था में लाया जाता है और इन्हें शरीर से बाहर किया जाता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की पंचकर्म क्रिया क्या होती है।
पंचकर्म क्रिया क्या होती है?
शरीर में चलने वाली क्रियाओं के सुचारु रूप से काम न करने के कारण शरीर में विषैले पदार्थों का जमाव हो जाता है। ऐसे में शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने के लिए, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए, शरीर में सभी क्रियाओं को बेहतर तरीके से काम करने के लिए, पंचकर्म क्रिया का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे की पंचकर्म का नाम ही बताता है की यह पांच क्रियाओं का जोड़ होता है, जिसमे वमन, विरेचन, नस्य, वस्ति और रक्तमोक्षण नामक पांच क्रियाएं होती है। इन सभी क्रियाओं को करने का अपना एक तरीका होता है। जिसकी मदद से यह आपके शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालते हैं। तो आइये अब जानते हैं की पंचकर्म क्रियाएं किस तरह से काम करती हैं।
पंचकर्म क्रिया से पहले क्या करते हैं?
जब भी पंचकर्म क्रिया की जाती है तो उससे पहले दो काम करने बहुत जरुरी होते हैं पहला हैं ओयलेशन या स्नेहन और दूसरा है फॉमेंटेशन या स्वेदन।
ओयलेशन या स्नेहन: इस प्रक्रिया में व्यक्ति के पूरे शरीर पर तेल से मालिश की जाती है या फिर केवल उसी अंग की मालिश की जाती है जिसका इलाज करना है। ओयलेशन करने से बॉडी में मौजूद कठोर विषैले पदार्थों को नरम करने में मदद मिलती है।
फॉमेंटेशन या स्वेदन: इस प्रक्रिया में आपके शरीर से पसीना निकाला जाता है जैसे की स्टीम बॉक्स का इस्तेमाल करके, ऐसा करने से ओयलेशन के बाद जो विषैले पदार्थ नरम हो जाते हैं उन्हें आपके शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
पंचकर्म की पाँचों क्रिया किस तरह से काम करती है
पंचकर्म की सभी क्रियाएं अलग अलग तरीके से काम करती है और अलग अलग बिमारियों के उपचारा के लिए इन्हे इस्तेमाल किया जाता है। तो आइये अब जानते हैं की यह क्रियाएं किस तरह से काम करती है और किन किन बिमारियों के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है।
वमन
इस प्रक्रिया में शरीर के ओयलेशन और फॉमेंटेशन की क्रिया से गुजरने के बाद शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों के इक्कठा होने के बाद उन्हें उल्टी करवाकर शरीर से बाहर निकाला जाता है। ऐसे में उल्टी करने के लिए आपको किसी तरह की दवाई दी जाती है या फिर किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल करके आपको उल्टी करवाई जाती है। इस विधि से खांसी, अस्थमा, मोटापा, डायबीटीज, एनीमिया, पीलिया, मुंह से जुड़े रोग, ट्यूमर आदि कस इलाज किया जाता है। लेकिन गर्भवती महिला, शारीरिक रूप से बेहद कमजोर इंसान आदि को इस तरीके से इलाज नहीं करवाना चाहिए।
विरेचन
इस प्रक्रिया में भी आपको ओयलेशन और फॉमेंटेशन की क्रिया से गुजरने के बाद मलत्याग करके विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर निकाला जाता है। इस प्रक्रिया के लिए आपको तरह तरह की जड़ी बूटियां खिलाई जाती हैं ताकि आपकी बॉडी से विषैले पदार्थों को बाहर निकाला जा सके। विरेचन की प्रक्रिया उन लोगो के लिए बहुत फायदेमंद होती है जिन्हे पित्त की समस्या अधिक होती है। इसके अलावा विरेचन की क्रिया से सिरदर्द, बवासीर, भगंदर, गुल्म, रक्त पित्त आदि का इलाज करवाया जाता है। और टीवी, एड्स, बुखार से पीड़ित लोगो को भी इस प्रक्रिया से इलाज नहीं करवाना चाहिए।
नस्य
नस्य की प्रक्रिया में नाक में ड्राप डालकर मस्तिष्क से विषैले पदार्थों को बाहर निकाला जाता है। नाक में ड्राप डालने के साथ इस प्रक्रिया में सिर व् कन्धों की अच्छे से मालिश की जाती है। इस प्रक्रिया का इस्तेमाल करने से माइग्रेन, सिर दर्द, बालों से जुडी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।
वस्ति
वस्ति में दो तरह की प्रक्रिया होती है आस्थापन या निरुह वस्ति और अनुवासन वस्ति, इस प्रक्रिया में व्यक्ति को औषधियों से बने काढ़े को पिलाकर शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकाला जाता है। वात की समस्या से परेशान लोगो के लिए यह उपाय बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा प्रजनन सम्बन्धी समस्या, प्राइवेट पार्ट से जुडी परेशानियों के लिए, शुक्राणु से जुडी समस्या के लिए यह उपाय बहुत फायदेमंद होता है। लेकिन कमजोर लोगो को, खांसी दमा से पीड़ित लोगो को इस तरीके से इलाज न करवाने की सलाह दी जाती है।
रक्तमोक्षण
रक्तमोक्षण की प्रक्रिया में खून में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। खराब खून से शरीर से बाहर निकाला जाता है जिससे आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। स्किन से जुडी परेशानियों को दूर करने के लिए इस प्रक्रिया का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है।
पंचकर्म के फायदे
इससे आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है।
दिमाग तेज होता है।
पाचन क्रिया, हड्डियों, उत्तकों, मांसपेशियों को मजबूत होने में मदद मिलती है।
बीमारियों से बचाव होता है।
बढ़ती उम्र को रोकने में मदद मिलती है क्योंकि इससे आप फिट रहते हैं।
किन लोगो को पंचकर्म की क्रिया को उपयोग में नहीं लाना चाहिए
मोटापे से ग्रसित या दुबले व्यक्ति को।
संक्रमित या बीमार व्यक्ति को।
प्रेग्नेंट महिलाओं को भी इस क्रिया का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को भी पंचकर्म नहीं करवाना चाहिए।
दिल के मरीज़, फेफड़ों के मरीज़, एड्स के मरीज़, हाई ब्लड प्रैशर के मरीज़ को भी पंचकर्म नहीं करवाना चाहिए।
पीरियड्स के दौरान भी इस प्रक्रिया को करना करवाना चाहिए।
पंचकर्म की क्रिया के बाद बरते यह सावधानियां
गुनगुना पानी पीएं, गुनगुने पानी से नहाएं।
सम्बन्ध बनाने से बचें।
दिन में नहीं सोएं देर रात तक न जगें।
खाने पीने में बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें।
ज्यादा तापमान वाली जगह पर जाने से बचें।
ऐसे आहार का सेवन बिल्कुल नहीं करें जिसे पचाने में आपको किसी तरह की परेशानी हो।
तो यह है पंचकर्म क्रिया से जुडी जानकारी लेकिन पंचकर्म क्रिया उम्र, शरीर, प्रतिरोधक क्षमता, ताकत, स्वास्थ्य आदि पर निर्भर करती है। इसीलिए एक बार चिकित्सक की राया लेने के बाद ही पंककर्म की क्रिया करवानी चाहिए।
मासिक धर्म का चक्र अठाइस दिन का होता है लेकिन ऐसा जरुरी नहीं होता है की सभी महिलाओं में यह एक जैसा हो। क्योंकि हो सकता है किसी महिला को पीरियड्स दो तीन दिन लेट आए या हो सकता है पहले ही आ जाए। ऐसे में घबराने की बात नहीं होती है। लेकिन शादी के बाद यदि ऐसा होता है तो पीरियड्स के मिस होने के बाद जो सबसे पहला ख्याल मन में आता है वो होता है की कहीं महिला प्रेग्नेंट तो नहीं हो गई है। लेकिन ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है की पीरियड्स के मिस होने का मतलब प्रेगनेंसी ही हो। पीरियड्स लेट होने के और भी बहुत से कारण हो सकते है।
पीरियड्स लेट होने के कारण:-पीरियड्स का आना भी महिला के शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव पर भी निर्भर करता है, ऐसे में पीरियड्स के लेट होने का कारण सीधा हार्मोनल असंतुलन से जुड़ा होता है। इसके अलावा और भी कई कारण हो सकते हैं जिसकी वजह से महिला को पीरियड्स आने में देरी हो सकती है। तो आइए अब विस्तार से जानते हैं की पीरियड्स में देरी होने के कौन कौन से कारण होते हैं।
पीरियड्स की शुरुआत में होता है ऐसा:-यदि आपको पहली बार पीरियड्स आए है तो हो सकता है की आपको अगले महीने या तीन चार महीने तक पीरियड्स न हो। क्योंकि पीरियड्स की शुरुआत में ऐसा हो सकता है या फिर थोड़ी देरी से आते हैं। ऐसे में आपको घबराना नहीं चाहिए क्योंकि उसके बाद जब पीरियड्स हर महीने आने लग जाते है तो सब सही हो जाता है।
मोटापा भी है पीरियड्स में देरी का कारण:-मोटापा अकेला कभी भी आपके शरीर में नहीं आता है बल्कि यह आपके शरीर में तरह तरह की समस्या को लेकर आता है। मोटापा होने के कारण भी आपके शरीर में हार्मोनल असंतुलन हो जाता है। जिसके कारण आपको पीरियड्स में देरी जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
वजन का कम होना भी है समस्या:- जो महिलाएं बहुत तेजी से वजन कम करती है, या दुबलेपन का शिकार होती हैं उन्हें भी इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इससे न तो बॉडी को पर्याप्त पोषण मिल पाता है। और न ही एस्ट्रोजेन का निर्माण अच्छे से हो पाता है। जिसके कारण पीरियड मिस होने या पीरियड्स के देरी से होने की समस्या का सामना आपको करना पड़ता है।
अधिक व्यायाम करने के कारण:- अपनी फिटनेस को बरकरार रखने के लिए कुछ महिलाएं अधिक व्यायाम करती है। जिसके कारण उनके शरीर की क्रियाएं भी प्रभावित होती है। और महिला की बॉडी में पर्याप्त मात्रा में एस्ट्रोजन का निर्माण नहीं हो पाता है, जिसके कारण महिला को पीरियड्स देरी से होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
गर्भनिरोधक गोलियों का अधिक सेवन करने के कारण:- जो महिलाएं अधिक मात्रा में गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती हैं। तो इसके कारण भी उनका मासिक चक्र प्रभावित होता है, जिसके कारण कई बार उन्हें पीरियड्स के देरी से होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
पोलिस्टिक ओवरी सिंड्रोम होने पर:- यह एक तरीके की बिमारी हो होती है जिसके कारण महिला के शरीर में हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो जाती है। जिसके कारण आपको पीरियड्स के लेट या मिस होने की समस्या का सामना करना पड़ता हैं और इसका इलाज आपको डॉक्टर के पास जाकर ही करवाना चाहिए।
थायरॉइड होने पर:- जो महिलाएं थायरॉइड की समस्या से जूझ रही होती है उन्हें भी पीरियड्स से जुडी इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही इसके कारण महिला को गर्भधारण करने में भी समस्या आती है, ऐसे में आपको एक बार डॉक्टर से चेक जरूर करवाना चाहिए और यदि ऐसा है तो इसका इलाज भी करवाना चाहिए।
मेनोपॉज़ की उम्र होने पर:-जिन महिलाओं की उम्र मीनोपॉज की होने वाली होती है, ऐसे में उन्हें भी पूरी तरह से मेनोपॉज़ होने पर पहले कई बार पीरियड्स देरी से या लेट होने की समस्या हो सकती है।
अधिक दवाइयों का सेवन करने के कारण:-यदि कोई महिला अधिक मात्रा में दवाइयों का सेवन जैसे की थायरॉइड, कीमोथेरपी, आदि का करती है, तो इसके कारण भी उनके शरीर में हार्मोनल बदलाव होते है जिसके कारण आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
तनाव होने पर:- मानसिक रूप से परेशान होने पर आपका मस्तिष्क प्रभावित होता है, और मस्तिष्क ही आपके शरीर में होने वाली प्रतिक्रिया को नियंत्रित भी करता है। ऐसे में मानसिक तनाव होने के कारण भी शरीर में हार्मोनल इम्बैलेंस होना आम बात होती है जिसके कारण आपको पीरियड्स जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही यदि महिला किसी मानसिक परेशानी से भी जूझ रही होती है तो भी महिला का मासिक चक्र प्रभावित हो सकता है।
रूटीन चेंज होने के कारण:- आपका रूटीन चेंज होना जैसे खान पान में देरी, नींद की कमी, काम की परेशानी, यात्रा, आदि करने के कारण भी आपको मानसिक रूप से परेशानी का अनुभव होता है। जिसके कारण भी आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
कोई बिमारी होने के कारण:-कई बार शरीर में कुछ ऐसी बिमारी हो जाती है जो खत्म नहीं होती है बल्कि लम्बे समय तक चलती है। ऐसे में शारीरिक समस्या होने के कारण भी आपको पीरियड्स में होने वाली देरी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से आपको पीरियड्स में होने वाली देरी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को अपनी फिटनेस को स्वास्थ्य दोनों का ध्यान अच्छे से रखना चाहिए। ताकि बॉडी में हार्मोनल बैलेंस को बनाएं रखने में मदद मिल सके, और यदि आपको पीरियड्स बहुत ज्यादा देरी से आते हैं तो एक बार आपको इसके बारे में डॉक्टर से भी राय लेनी चाहिए। क्योंकि ऐसा भी हो सकता है शरीर में किसी बिमारी के पनपने के कारण आपको यह परेशानी हो रही हो, तो ऐसे में इसे बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।