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क्या प्रेगनेंसी में पीरियड होता है?

प्रेगनेंसी में पीरियड आते है या नहीं?

ज्यादातर महिलाएं यही जानती हैं की जब महिला गर्भवती होती है तो महिला को पीरियड्स नहीं होते हैं, ऐसे में यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कभी खून के धब्बे दिखाई देते हैं। तो इसे देखकर महिला घबरा सकती है। लेकिन प्रेगनेंसी में हल्के फुल्के रक्त के धब्बे लगना बहुत ही आम बात होती है। और ऐसा किसी एक महिला के साथ नहीं बल्कि बहुत सी गर्भवती महिलाओं के साथ हो सकता है। क्योंकि यदि आप गर्भवती हैं तो आपको मासिक धर्म की तरह ब्लीडिंग नहीं हो सकती है, और यदि ऐसा होता है तो इसका मतलब है की आप गर्भवती नहीं है। लेकिन यह भी सच हैं, की प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को खून के धब्बे लग सकते हैं। और प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को खून के धब्बे लगते हैं तो इसका कोई एक नहीं बल्कि कई कारण हो सकते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खून के धब्बे लगने के कौन से कारण हो सकते हैं।

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होने के कारण

यदि आप गर्भवती हैं और आपको प्राइवेट पार्ट से निकलते हुए खून के धब्बे नज़र आ रहे हैं, तो ऐसे में इन खून के धब्बों के लगने के कारण के बारे में जानना गर्भवती महिला के लिए बहुत जरुरी होता है ताकि महिला इसे देखकर घबरा न जाएँ।

इम्प्लांटेशन

महिला के अंडाशय में रखे अंडे और पुरुष के शुक्राणु जब आपस में मिलते हैं, तो निषेचन की क्रिया होने के बाद भ्रूण को गर्भाशय में प्रत्यारोपित करने की प्रक्रिया शुरू होती है। और जब भ्रूण को गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है तो इसे इम्प्लांटेशन कहा जाता है, ऐसे में इस दौरान महिला को हल्के फुल्के खून के धब्बे नज़र आ सकते है।

गर्भाशय की परत

गर्भाशय में शिशु के प्रत्यारोपण के बाद गर्भाशय की परत में फैलाव होना भी शुरू हो जाता है। और जब गर्भाशय की परत का फैलाव होता है तो भी गर्भवती महिला को प्राइवेट पार्ट से थोड़ी ब्लीडिंग हो सकती है, लेकिन यह मासिक धर्म के दौरान होने वाली ब्लीडिंग नहीं होती है।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी

जिन महिलाओं को एक्टोपिक प्रेगनेंसी यानि की भ्रूण गर्भाशय में प्रत्यारोपित होने के बजाय फैलोपियन ट्यूब में ही बढ़ने लगता है, उन महिलाओं को भी प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग के साथ पेट के निचले हिस्से में बहुत अधिक दर्द की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में महिला को इसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

संक्रमण

यदि गर्भवती महिला के प्राइवेट पार्ट या गर्भाशय में किसी तरह का संक्रमण हो जाता है तो भी गर्भवती महिला को ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।

गर्भपात

कई बार पहली तिमाही के दौरान महिला को बहुत अधिक ब्लीडिंग की समस्या हो जाती है, साथज ही मासिक धर्म की तरह पेट में तेजी से दर्द होने की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को इसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह गर्भपात का लक्षण हो सकता है।

तो यदि आप भी गर्भवती है और आपको भी ब्लीडिंग का हल्का फुल्का दाग लग रहा है तो इसे देखकर बिल्कुल भी घबराएं नहीं। साथ ही ब्लीडिंग की समस्या होने पर पूरा आराम करें, भारी चीजों को न उठायें, पेट के बल किसी काम को न करें आदि। यदि आप इन टिप्स का ध्यान रखते हैं तो प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली ब्लीडिंग की समस्या से निजात पाने में आपको मदद मिलती है। लेकिन यदि ब्लीडिंग बहुत अधिक होती है तो आपको डॉक्टर से मिलने में बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए।

नोर्मल डिलीवरी के लिए गर्भवती महिला को क्या-क्या करना चाहिए

नोर्मल डिलीवरी

प्रेगनेंसी का समय जैसे जैसे आगे बढ़ता है वैसे हर महिला चाहे वो पहली बार माँ बनने का अनुभव ले रही हो या दूसरी बार लेकिन उसके मन में एक सवाल जरूर आता है की उसकी डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन। ज्यादातर महिलाएं और यहां तक की डॉक्टर्स भी यही कोशिश करते हैं की प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की समस्या न हो जिससे गर्भवती महिला की नोर्मल डिलीवरी के होने के चांस को बढ़ाने में मदद मिल सके। लेकिन यदि प्रेगनेंसी में महिला को किसी तरह की परेशानी हो या गर्भ में शिशु को कोई भी दिक्कत हो तो डॉक्टर्स भी सिजेरियन डिलीवरी की सलाह देते हैं। ऐसे में प्रेगनेंसी की शुरुआत में यह सोच लेना की डिलीवरी किस तरीके से होगी यह बता पाना थोड़ा मुश्किल होता है।

नोर्मल डिलीवरी के लिए आसान टिप्स

यदि महिला चाहती है की वो नोर्मल डिलीवरी की मदद से शिशु को जन्म दे तो पूरे नौ महीने तक महिला को अपनी केयर में थोड़ी सी भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। जिससे गर्भवती महिला और शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके और नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ाने में मदद मिल सके। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की नोर्मल डिलीवरी के लिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

डॉक्टर का चुनाव

प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की दिक्कत न हो इसके लिए सबसे पहले महिला को एक अच्छे से डॉक्टर का चुनाव करना चाहिए। जो गर्भवती महिला की प्रेगनेंसी की स्थिति के बारे में अच्छे से समझ सके और आपको सही राय दे सके। इसीलिए यदि आप नोर्मल डिलीवरी चाहती है तो एक अनुभवी डॉक्टर को चुने।

डिलीवरी की जानकारी

डिलीवरी को लेकर प्रेग्नेंट महिला के मन में आ रहे प्रश्नों को लेकर महिला परेशान हो सकती है। ऐसे में परेशान होने की बजाय आपको किताबो से, अपने घर के बड़े सदस्यों से, सहेलियों से, इंटरनेट से डिलीवरी से जुडी सारी जानकारी इक्कठी करनी चाहिए। ताकि प्रसव से जुड़े जितने भी सवाल आपको परेशान कर रहे है आपको उनका जवाब मिल सके और डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सके।

खान पान

पोषक तत्वों जैसे की आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, फाइबर आदि से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए। क्योंकि बॉडी में पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने में मदद करती है। जिससे नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है। खासकर महिला को आयरन की कमी को बॉडी में नहीं होने देना चाहिए क्योंकि इसके कारण डिलीवरी के दौरान मुश्किलें बढ़ सकती है। और डिलीवरी का समय पास आने पर महिला को ड्राई फ्रूट, देसी घी आदि का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए क्योंकि यह गर्भाशय में संकुचन को बढ़ाने में मदद करते हैं जिससे नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

तरल पदार्थ

नोर्मल डिलीवरी के लिए बॉडी का हाइड्रेट रहना भी बहुत जरुरी होता है। ऐसे में इसके लिए गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में पानी, जूस, नारियल पानी आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

व्यायाम

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में गर्भवती महिला को हल्का फुल्का व्यायाम आदि भी करते रहना चाहिए। क्योंकि इससे बॉडी में ब्लड फ्लो को बेहतर होने, महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने, तनाव मुक्त रहने में मदद मिलती है, मांसपेशियों को आराम मिलता है, आदि। और यह सब लक्षण महिला की नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद करते हैं।

पेट के निचले हिस्से की मालिश

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में पेट के निचले हिस्से की हल्के हाथों से मालिश करनी चाहिए। क्योंकि इसे प्रसव को आसानी से होने में मदद मिलती है।

तनाव

प्रेग्नेंट महिला को डिलीवरी के बारे में सोच सोच कर मानसिक रूप से परेशानी नहीं होना चाहिए, अपने दिमाग में नकारात्मक सोच नहीं लानी चाहिए, क्योंकि यह आपकी डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने की बजाय बढ़ा सकता है।

वजन

वजन पर नियंत्रण रखना भी गर्भवती महिला के लिए बहुत जरुरी होता है ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में वजन को अधिक नहीं बढ़ाना चाहिए। क्योंकि यदि महिला का वजन जरुरत से ज्यादा हो जाता है तो इससे भी नोर्मल डिलीवरी में समस्या आ सकती है। और यदि महिला का वजन सही रहता है तो नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

डॉक्टर के संपर्क में रहे

प्रेगनेंसी की आखिरी महीने में लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए, और इस दौरान कोई भी असहज लक्षण महसूस हो या किसी भी तरह की परेशानी हो तो डॉक्टर से तुरंत मिलना चाहिए। ताकि डिलीवरी के दौरान आने वाली हर परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके।

अपना ध्यान रखें

प्रेग्नेंट महिला को अपने उठने, बैठने, सोने, खाने, घूमने आदि का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि किसी भी तरह की समस्या से महिला को बचने में मदद मिल सके। और डिलीवरी में किसी भी तरह की परेशानी न हो। साथ ही इस दौरान महिला को भावनात्मक रूप से मजबूत रहने के लिए अकेले नहीं रहना चाहिए बल्कि घर वालों के साथ रहना चाहिए, और घर का कोई एक सदस्य हमेशा आपके पास जरूर होना चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो गर्भवती महिला के नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद करता है। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और चाहती है की आपकी नोर्मल डिलीवरी हो तो आपको इन टिप्स का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही नोर्मल डिलीवरी के लिए बॉडी पर अधिक जोर नहीं डालना चाहिए क्योंकि इसके कारण हो सकता है की आपकी परेशानी घटने की बजाय बढ़ जाए, ऐसे में अपने स्वास्थ्य का जितना बेहतर तरीके से आप ध्यान रख सकती है उतना रखे क्योंकि गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु जितना स्वस्थ रहते हैं उतना ही नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

गर्भधारण के पहले महीने में क्या होता है

गर्भधारण के पहले महीने में क्या होता है, प्रेगनेंसी के पहले महीने शरीर में आते हैं यह बदलाव, प्रेगनेंसी का पहला महीना, प्रेगनेंसी के पहले महीने में बॉडी में दिखाई देने लगते हैं ये लक्षण

गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए बेहद ही खास और अनोखा अनुभव होता है। लेकिन इस दौरान आने वाले शरीर में बदलाव, हार्मोनल बदलाव के कारण होने वाली परेशानी के कारण महिला तनाव में आ सकती है। ऐसे में आज हम आपको प्रेगनेंसी के पहले महीने में क्या होता है इस बारे में कुछ बातें बताने जा रहें हैं। जैसे ही गर्भाशय में निषेचन की प्रक्रिया पूरी होती है और महिला का गर्भ ठहर जाता हैं, वैसे ही महिला का शरीर बहुत से संकेत देने लगता है। हर महिला के शरीर में एक ही तरह के बदलाव हो ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है, क्योंकि यह हर महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करता है। यह बदलाव शारीरिक होने के साथ आपके स्वाद, मूड से जुड़े भी हो सकते है। शुरुआत में किसी भी महिला के यह समझ पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन जैसे ही महिला के पीरियड्स मिस होते हैं उसके एक हफ्ते बाद घर पर या डॉक्टर केपास जाकर चेक करवा सकती हैं की कहीं आप गर्भवती तो नहीं है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के पहले महीने में क्या होता है।

मॉर्निंग सिकनेस

प्रेगनेंसी के दौरान सुबह उठने में दिक्कत का होना, उल्टी, जी मिचलाना आदि महसूस होना, सिर का भारी महसूस होना, चक्कर आना, अदि प्रेगनेंसी के शुरुआत होने का लक्षण हो सकता है।

थकान व् कमजोरी का अनुभव होना

हो सकता है की बिना कुछ काम किये ही आपको थकान व् कमजोरी का अनुभव हो, इसका कारण बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं।

ब्रेस्ट में बदलाव

ब्रेस्ट का कड़ा महसूस होना, निप्पल के रंग में बदलाव आना, सूजन महसूस होना भी भी आपके प्रेग्नेंट होने के लक्षण होता है जो की प्रेगनेंसी के पहले महीने में आपको महसूस हो सकता है।

मूड में बदलाव

व्यवहार में बदलाव, मूड का बदलना, कभी रोने का मन करना, तो कभी बहुत गुस्सा आना, चिड़चिड़ापन महसूस होना, आदि, भी प्रेगनेंसी के पहले महीने में होने वाला एक आम बदलाव है। इसका कारण बॉडी में लगातार और तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं।

रक्तस्राव और ऐंठन

यदि आपका गर्भ ठहर गया है तो अंडे के निषेचित होने के बाद आपको अगले पीरियड्स के आने से पहले रक्त का धब्बा लगना या ऐंठन का अधिक महसूस होना आम बात होती है। इसे लेकर महिला को ज्यादा घबराना नहीं चाहिए।

बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होना

गर्भवती महिला को इस दौरान बार बारे यूरिन पास करने की इच्छा भी हो सकती है, इसका कारण शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ना हो सकता है।

पसंद में बदलाव

कई बार महिलाओं को खाने में अलग अलग चीजे खाने का मन करने लगता है, जो चीजे महिला को पसंद नहीं होती है महिला उनकी तरफ आकर्षित होने लगती है, ऐसा होना प्रेगनेंसी के दौरान बहुत ही आम बात होती है।

कब्ज़ और सीने में जलन

बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण कब्ज़ की समस्या का होना, और साथ ही सीने में जलन महसूस होना बहुत ही आम बात होती है। लेकिन यदि सीने में अधिक जलन महसूस हो तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

सूंघने की क्षमता बढ़ना

इस दौरान कुछ महिलाओं की सूंघने की क्षमता में भी वृद्धि हो जाती है, और उनके कई चीजों की सुगंध बहुत ज्यादा अच्छी लगने लगती है।

पेट के निचले हिस्से में दर्द महसूस होना

भ्रूण के गर्भाशय में प्रत्यारोपित होने के कारण महिला को पेट के निचले हिस्से में दर्द भी महसूस हो सकता है, साथ ही कुछ महिलाओं को पीठ में दर्द की समस्या हो सकती है। इस दौरान ऐसा होना आम बात होती है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो आपको प्रेगनेंसी के पहले महीने में बॉडी में दीकही देने लगते हैं, और पीरियड्स के मिस होने के बाद आप घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट किट लाकर चेक कर सकते हैं की कहीं आप गर्भवती तो नहीं है। यदि ऐसा होता है तो उसके बाद आप बिना देरी किये एक अच्छे से डॉक्टर का चुनाव करें और उसके बाद सभी टेस्ट करवाएं, और प्रेगनेंसी के इस खास लम्हे को भरपूर तरीके से एन्जॉय करें।

दांतों में ठंडा गरम लगने के क्या कारण होते है और उपाय?

Tips and Causes of Sensitive Teeth

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दांतों को हमारे चेहरे की खुबसूरती का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। इसीलिए तो सभी इनकी चमक और सेहत को लेकर काफी सजग रहते है। लेकिन कई बार निरंतर प्रयास करने के बाद भी दांतों में समस्याएं होने ही जाती है। और इन्ही समस्यायों में से एक है दांतों में ठंडा गरम लगना यानी सेंसिटिविटी। जी हां, कई बार दांतों की नियमित और सही देखभाल करने के बावजूद भी सेंसिटिविटी की समस्या हो जाती है। जिसके बहुत से कारण होते है।

ये बात तो हम सभी भली-भांति जानते है की हमारे द्वारा खाया या पीया जाने वाला प्रत्येक पदार्थ हमारे दांतों से होकर गुजरता है। और पुरे दिन भर में हम न जाने ऐसी कितनी ही हानिकारक चीजों का सेवन करते है जो सीधे तौर पर हमारे दांतों को नुकसान पहुंचाती है।

सेंसिटिविटी क्या होती है?दांतों में ठंडा गरम लगने के उपाय

कुछ भी ठंडा या गरम, खाने-पीने पर दांतों में एक झंझनाहट महसूस होती है जिसे सेंसिटिविटी कहा जाता है। और यह तब होती है जब दांतों पर लगा सुरक्षा कवच यानी इनेमल घिस जाती है। टूथ इनेमल को दांतों का सुरक्षा कवच इसीलिए भी कहा जाता है क्योंकि यह उन्हें हर तरह की कठोर चीजों से बचाने का काम करती है। लेकिन बहुत से लोग खट्टी और एसिडिक प्राकृति वाली चीजों का सेवन करते है, और ब्रश करते समय दांतों को तेज तेज रगड़ते है जिसके कारण यह इनेमल घिस जाती है। और परिणामस्वरूप आपको दांतों में ठंडा गरम महसूस होने लगता है।

सेंसिटिविटी होने के बाद व्यक्ति जब भी कोई ठंडी या गर्म चीज खाता है तो दांतों में बहुत तेज टीस मचती है। अगर आप इसे महसूस करना चाहते है तो मुंह खोल कर मुंह से साँस लेकर देखिये।

दांतों में ठंडा गरम लगने के क्या कारण होते है?

दांतों में होने वाली सेंसिटिविटी का मुख्य कारण दांतों में मौजूद बैक्टीरिया और प्लेग आदि होते है। ये दांतों की इनेमल को हानि को पहुंचाकर उन्हें खोखला कर देते है जिसके परिणामस्वरूप दांतों में कीड़ा लगने जैसी समस्याएं होने लगती है। परन्तु इसके अलावा भी और बहुत से कारण है जो दांतों की सेंसिटिविटी के लिए जिम्मेदार होते है। यहाँ हम आपको उन्ही के बारे में बता रहे है। इसके अलावा हम आपको दांतों में ठंडा गरम लगने के कुछ उपाय भी बतायेंगे। जिनकी मदद से सेंसिटिविटी को कम किया जा सकता है। लेकिन उससे पहले उसके कारणों को जान लें –

1. दांतों को जोर-जोर से रगड़ कर ब्रश करना।
2. खाना खाने के बाद कुल्ला नहीं करना।
3. बहुत अधिक एसिडिक प्रकृति यानी कोल्ड ड्रिंक आदि का सेवन करना।
4. शराब, इत्यादि का सेवन।
5. नियमित रूप से धुम्रपान करना।
6. खट्टी चीजों या खट्टे फलों का अधिक सेवन करना (जैसे संतरा मौसंबी नींबू आदि)।
7. माउथवाश का अधिक इस्तेमाल करना।
8. दांतों की ठीक प्रकार से साफ़ सफाई नहीं करना।
9. हार्ड टूथब्रश का इस्तेमाल करना।
10. चाय-काफ़ी का अधिक सेवन। आदि।

ये सभी कुछ ऐसी गलतियाँ है जिन्हें आप सभी सामान्य जीवन में रोजाना करते है। जिनकी वजह से आपके दांतों में सेंसिटिविटी की समस्या हो जाती है। परेशानी का कारण जानने के बाद बारी आती है उसके उपाय जानने की तो आइये अब दांतों में ठंडा गरम लगने के उपायों के बारे में जान लेते है।

दांतों में ठंडा गरम लगने के उपाय :-

1. दांतों की उचित देखभाल करें –

सेंसिटिविटी का एक कारण दांतों की ठीक तरह से देखभाल नहीं करना होता है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान है तो अभी भी देर नहीं हुई है आपको अपने दांतों की देखभाल की ओर ध्यान देना शुरू करना होगा। इसके लिए रोजाना दांत साफ़ करें और केमिकल की बजाय नेचुरल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें।

2. खान पान की आदतों में करना होगा बदलाव –drinking cold drink

शायद आप नहीं जानते लेकिन आपके खान पान की आदतें भी आपके दांतों को नुकसान पहुंचा सकती है। अर्थात ऐसे पेय पदार्थ जिनमे सिट्रिक एसिड की अधिक मात्रा पाई जाती है उनके सेवन से बचना होगा। (जैसे- टमाटर, संतरा, नींबू आदि का जूस, सोडा और सोफ़ ड्रिंक) क्योंकि ये सभी दांतों की इनेमल को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाते है। इसके अलावा नियमित रूप से अधिक मसालेदार खाने और अधिक मीठे का सेवन करना भी दांतों को हानि पहुंचाता है। इसीलिए इस तरह के चीजों से परहेज करें। बेहतर होगा अगर आप संतुलित और सही भोजन का सेवन करें। हाई फाइबर वाले फूड्स का सेवन करें। इसके लिए आप खजूर, किशमिश, ताजे फल और हरी सब्जियों आदि खा सकते है। ये आपके दांतों के लिए सेफ है।

3. कैल्शियम का सेवन –

दांतों को स्वस्थ रखने के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है। और डेरी प्रोडक्ट्स में कैल्शियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो दांतों को तो मजबूत करते ही है साथ साथ हड्डियों को भी मजबूत बनाने में मदद करते है। इसके अलावा आप चाहे तो हरी पत्तेदार सब्जियों और ड्राई फ्रूट्स आदि के सेवन से भी कैल्शियम की आवश्यकता को पूरा कर सकते है।

4. पानी का भरपूर सेवन करें –

शरीर के प्रत्येक अंग को ठीक तरह से कार्य करने और स्वस्थ रखने के लिए पानी की आवश्यकता होती है। इसलिए पानी की भरपूर मात्रा का सेवन करें। इसके लिए खाना खाने के बाद पानी का सेवन जरुर करें। इससे दांतों में लगा हुआ खाना साफ़ हो जाता है और उनमे प्लाक नहीं जमता।

5. नर्म टूथब्रश का इस्तेमाल करें –

दांतों में होने वाली समस्यायों का एक कारण गलत ब्रश का इस्तेमाल करना भी होता है। इसलिए हमेशा सॉफ्ट और हलके ब्रिस्स्ल वाले टूथब्रश का इस्तेमाल करें। यह दांतों को नुकसान पहुंचाएं बिना उन्हें साफ़ करने में मदद करेगा।

6. ब्रश करने का तरीका –

बहुत से लोग दांतों को जोर-जोर से ब्रश करते है जिसकी वजह से इनेमल जल्दी खराब हो जाती है। जबकि दांतों को साफ़ करने का ये तरीका बिलकुल गलत है। दांतों को रगड़ना नहीं चाहिए। ऐसा करने से दांतों की चमक पर भी प्रभाव पड़ता है। इसके लिए सॉफ्ट टूथब्रश से हलके हाथों से अपने दांतों पर ब्रश करें।

7. दांतों की पिसने की आदत –

बहुत से लोगों ने दांतों को पीसने की आदत होती है, लेकिन क्या आप जानते है की आपकी यह आदत आपके दांतों के लिए कितना हानिकारक होती है। जी हां, ऐसा करने से दांतों की सुरक्षा परत हटने लगती है जिससे सेंसिटिविटी की समस्या होने लगती है। इसके अलावा दांत पीसना किसी ख़ास बीमारी की वजह भी होती है इसलिए इसकी डॉक्टरी जाँच अवश्य कराएँ।

8. कुल्ला अवश्य करें –

खाना खाने या किसी भी अन्य खाद्य पदार्थ का सेवन करने के बाद दांतों में कुल्ला अवश्य करें। ये आपके दांतों में मौजूद खाने के पार्टिकल्स को साफ़ करता है। जिससे दांतों में सडन की समस्या भी नहीं होती।

तो ये थे कुछ दांतों में ठंडा गरम लगने के कुछ कारण और उपाय। जिनकी मदद से आप भी इस समस्या से छुटकारा पा सकते है।

गर्भधारण के बाद सेब खाने के फायदे

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गर्भावस्था के दौरान हर महिला चाहती हैं की वो स्वस्थ रहे, साथ ही उसके गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से हो। ऐसे में महिला को अपनी अच्छे से केयर करने के साथ अपने खान पान का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। तो आज हम आपको एक ऐसे फल के बारे में बताने जा रहें हैं जिसे यदि आप प्रेगनेंसी में खाते हैं, तो इससे महिला को स्वस्थ रहने के साथ शिशु को भी बहुत से फायदे होते हैं। और वो फल सेब हैं, जो प्रेगनेंसी के दौरान न केवल आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता हैं, बल्कि फाइबर, कैल्शियम, आयरन, विटामिन, क्लोरीन, फोलिक एसिड आदि की मात्रा भरपूर होने के कारण यह आपको शारीरिक रूप से भी फिट रखने में मदद मिलती हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान सेब खाने से कौन कौन से फायदे होते हैं।

आयरन की कमी को पूरा करता हैं

प्रेगनेंसी में आयरन की कमी के कारण महिला को एनीमिया के साथ डिलीवरी के समय भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता हैं। साथ ही इसका शिशु के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता हैं। ऐसे में यदि आप नियमित एक सेब का सेवन करती हैं तो इससे ब्लड की मात्रा को बढ़ने में मदद मिलती हैं जिसेस महिला के साथ शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती हैं।

पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है

सेब का सेवन करने से आपके मेटाबोलिज्म को बेहतर करने में मदद मिलती हैं, जिससे आपकी पाचन क्रिया बेहतर होती हैं, और प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली कब्ज़ व् एसिडिटी जैसी समस्या से भी आपको निजात पाने में मदद मिलती हैं। और ऐसा इसीलिए होता हैं क्योंकि सेब में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता हैं।

प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता हैं

विटामिन सी की मात्रा अधिक होने के कारण सेब का सेवन करने से गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की रोगो से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने में भी मदद मिलती हैं।

एनर्जी मिलती हैं

प्रेगनेंसी के दौरान कमजोरी व् थकान का होना आम बात होती हैं, ऐसे में सेब आपके लिए पावर फ़ूड का काम करता हैं। और हमेशा आपको एनर्जी से भरपूर रखने और फ्रैश महसूस करवाने में मदद करता हैं। साथ ही आपकी कमजोरी व् थकान की समस्या को दूर करने में भी मदद मिलती हैं।

ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल करता हैं

गर्भधारण के बाद कई महिलाओं को ब्लड प्रैशर ज्यादा या कम होने की सम्भावना अधिक होती हैं ऐसे में सेब का सेवन करने से आपके ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल करके आपको फिट रहने में मदद मिलती हैं।

कैल्शियम मिलता हैं

शिशु के बेहतर विकास खासकर हड्डियों की मजबूती के लिए बॉडी में कैल्शियम की मात्रा का भरपूर होना बहुत जरुरी होता हैं। और सेब का सेवन करने से महिला को भरपूर कैल्शियम मिलता हैं जो महिला को फिट रखने के साथ शिशु के लिए भी फायदेमंद होता हैं।

विषैले तत्वों को बाहर निकालता हैं

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर से विषैले तत्व खासकर मरकरी शिशु के लिए बहुत नुकसानदायक होती हैं, ऐसे में सेब का सेवन बॉडी से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर शिशु को स्वस्थ रखने में मदद करता हैं।

दमा यानि अस्थमा की सम्भावना को कम करता हैं

गर्भवस्था में यदि महिला सेब का सेवन नियमित करती हैं तो इससे महिला को दमा की सम्भावना से बचाने में मदद मिलती हैं, साथ ही इसके सेवन से शिशु को भी बड़ा होने के बाद भी इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता हैं।

अनिंद्रा की समस्या दूर करता हैं

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हो रहे बदलाव व् परेशानियों के कारण महिला को नींद नहीं आती हैं, जो की महिला और शिशु की सेहत पर बुरा असर डाल सकता हैं। और सेब का सेवन करने से आपको नींद से जुडी इस परेशानी का समाधान करने में भी मदद मिलती हैं और आपको यही अच्छी नींद मिलती हैं।

तो यह है हैं कुछ खास फायदे जो प्रेगनेंसी के दौरान सेब खाने से आपको मिलते है, तो आपको नियमित एक सेब का सेवन जरूर करना चाहिए। ताकि आपको प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली इन परेशानियों से निजात पाने में मदद मिल सके। साथ ही ने फलों का सेवन भी भरपूर करना चाहिए।

यूट्यूब विडिओ –

गर्भावस्था में सेब खाने के फायदे

गर्भ में स्वस्थ शिशु की निशानी गर्भवती महिला पर

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प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहा शिशु गर्भवती महिला के द्वारा ही अपने बेहतर विकास के लिए पोषक तत्वों को लेता है, गर्भनाल से जुड़े रहने के कारण शिशु की हर जरुरत को गर्भवती महिला द्वारा ही पूर्ण किया जाता है, और महिला द्वारा ही शिशु द्वारा किये गए मल को भी बाहर निकाला जाता है, यहां तक की ऐसा भी कहा जाता है की गर्भवती महिला ही गर्भ में पल रहे शिशु के लिए सांस भी लेती है, आदि। ऐसे में जब गर्भ में पल रहे शिशु का विकास गर्भवती महिला पर निर्भर करता है तो गर्भ में शिशु स्वस्थ है या नहीं इसका पता भी गर्भवती महिला को देखकर पता लगाया जा सकता है। तो आइये आज हम आपको ऐसे कुछ टिप्स बताने जा रहें हैं जिससे आप गर्भवती महिला को देखकर पता लगा सकती है की गर्भ में शिशु स्वस्थ है या नहीं।

महिला का वजन

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के वजन को पहले तीन महीनो के बाद निरंतर बढ़ते हुए देखा जाता है। और यदि ऐसे में यदि गर्भवती महिला का वजन या तो कम होने लगे या बहुत ज्यादा बढ़ने लगे दोनों ही ऐसे में परेशानी का कारण हो सकते हैं। इसीलिए यदि प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला का वजन सही तरीके से बढ़ता है तो इसका मतलब होता है की गर्भ में शिशु का विकास बेहतर तरीके से हो रहा है और गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ है।

खून की मात्रा

गर्भवती महिला के शरीर में होने वाली खून की कमी के कारण न केवल गर्भवती महिला को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बल्कि इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर भी बुरा असर पड़ता है। और प्रेगनेंसी के दौरान महिला का ब्लड टेस्ट भी करवाया जाता है, यदि आपके शरीर में खून की मात्रा भरपूर होती है, और साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान यदि आप भरपूर मात्रा में आयरन युक्त आहार का सेवन करती है तो यह भी गर्भ में स्वस्थ शिशु की निशानी होती है।

पेट का आकार

पेट का आकार महिला की लम्बाई पर भी निर्भर करता है, यदि महिला ही लम्बाई ज्यादा है तो पेट आगे कम निकलता है, क्योंकि लम्बाई होने के कारण ऊपर की तरफ शिशु आराम से मूव कर सकता है, लेकिन लम्बाई कम होने के कारण महिला का ज्यादा पेट दिखाई दे सकता है। ऐसे में यदि महिला का पेट प्रेगनेंसी के दौरान महीने के अनुसार कम दिखाई देता है, तो यह शिशु के कमजोर होने का लक्षण हो सकता है। और यदि महिला का पेट सही आकार में बढ़ता है तो इसका मतलब गर्भ में शिशु का विकास सही हो रहा है।

महिला का स्वास्थ्य

आपने यह तो सुना होगा की स्वस्थ माँ के गर्भ में स्वस्थ शिशु का निवास होता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला खान पान के प्रति लापरवाही नहीं करती है, शरीर में पानी की कमी नहीं होने देती है, पोषक तत्वों का सेवन भरपूर मात्रा में करती है, भरपूर नींद लेती है, खुश रहती है, आदि तो यह प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने के साथ गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद करता है। ऐसे में यदि महिला स्वस्थ रहती है तो शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से होता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला के बेहतर स्वास्थ्य को देखकर भी अंदाजा लगाया जा सकता है की शिशु कैसा होगा।

गर्भ में शिशु की हलचल

सोलह से बीस हफ़्तों के बीच गर्भ में शिशु की मूवमेंट शुरू हो जाती है, शिशु की गर्भ में बेहतर हलचल भी गर्भ में पल रहे शिशु के स्वस्थ होने की निशानी होती है। ऐसे में यदि कभी आपको ऐसा महसूस हो की काफी समय तक शिशु ने गर्भ में हलचल नहीं की है तो ऐसे में आपको अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ निशानियां जिन्हे यदि आप गर्भवती महिला में देखते हैं तो यह गर्भ में पल रहे शिशु के स्वस्थ होने की निशानी होती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना बेहतर तरीके से ध्यान रखना चाहिए ताकि शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में किसी भी तरह की कमी न आए। साथ ही यदि किसी भी तरह की कोई समस्या होती है तो उसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से राय लेना चाहिए।

ब्रा खरीदने से पहले ये जरूर ध्यान दें, कैसी होनी चाहिए आपकी ब्रा?

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Bra Selection Guide

ब्रा की सही फिटिंग नहीं होने की वजह से अक्सर महिलाओं को पार्टी, मीटिंग या किसी और फंक्शन में अनकंफर्टेबल महसूस होने लगता है। दुनिया में लगभग हर महिला ब्रा पहनती हैं, लेकिन फिर भी वे अपने लिए सही ब्रा का चुनाव नहीं कर पाती। जी हां, एक सर्वे के मुताबिक दुनिया में लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं गलत साइज की ब्रा पहनती हैं। इसी वजह से जब वो कहीं जाती है तो उन्हें असहज महसूस होता है। जो बिलकुल भी ठीक नहीं है। बहुत ज्यादा टाइट ब्रा पहनने से ब्लड सर्कुलेशन सुचारु रूप से नहीं हो पता। जबकि ढीली ब्रा पहनने से ब्रेस्ट सुडौल नहीं रह पाते।

ब्रेस्ट हमारे शरीर का सब आकर्षक हिस्सा होता है। और ब्रा उसकी सुंदरता को बढ़ाने का काम करती हैं। बहुत ज्याद टाइट या लूज ब्रा पहनने से आउटफिट और शरीर की खूबसूरती बिगड़ सकती है। ऐसे में जरुरी है की सही फिटिंग की ब्रा पहनें। आज हम आपको बता रहे हैं की ब्रा खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

ब्रा खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?

कहां से खरीदें?

ब्रा हमेशा ब्रांडेड लॉन्जरी स्टोर से ही खरीदें। उनके पास प्रोफेशनल होते हैं, जो आपको सही ब्रा का चुनाव करने में मदद करेंगे। स्टोर्स में एक्सपायर, डिफेक्टिव और लोकल ब्रा नहीं होती, आप वहां जिस भी ब्रा का चुनाव करेंगी वो आपके लिए बेहतर ही होगी।

कैसी ब्रा खरीदें?

ब्रा खरीदते समय हमेशा ध्यान रखें, की ब्रा आपके वैस्ट और बस्ट के अनुसार ही होनी चाहिए। ज्यादा बड़ी या छोटी ब्रा खरीदने से आपको असहजता महसूस हो सकती है। ब्रा हमेशा सही साइज की होनी चाहिए। इसके अलावा आपको ब्रा के डिजाइन का भी ध्यान रखना चाहिए।

बैंड साइज

हर महिला का शरीर अलग-अलग होता है इसलिए जो ब्रा आपको सूट करती है वही ब्रा दूसरों को भी फिट हो ऐसा जरुरी नहीं। ब्रा की फिटिंग अच्छी हो इसके लिए आपको ब्रा का सही साइज पता होना चाहिए। इसके लिए आप खुद नाप लें। कोई ऐसी ब्रा पहनें जिसकी फिटिंग आपको सबसे सही आती है और पैडेड ना हो। अब मेजरिंग टेप से वैस्ट के नीचे लपेटकर माप लें। जो नंबर आएगा उसमे 5 जोड़ दीजिये। आपका बैंड साइज पता चल जाएगा।

ब्रेस्ट साइज

ब्रेस्ट साइज को जानने के लिए टेप को अपनी ब्रेस्ट के चारो ओर घुमाएं। नाप वहां से लें जहाँ ब्रेस्ट का साइज सबसे बड़ा है। अब जो संख्या आपको मिलेगी वही आपका ब्रेस्ट साइज होगा। अगर नाप डेसिमल में आता है तो राउंड ऑफ़ ले लें। जैसे – 32.7 आता है तो 33 ब्रेस्ट साइज होगा। अगर 32.4 आता है तो 32 ब्रेस्ट साइज होगा।

कप साइज

अपनी ब्रा का कप साइज जानने के लिए अपनी बैंड साइज और ब्रेस्ट साइज के फर्क को नापिये आपको कप साइज पता चल जाएगा। अगर दोनों में 1 इंच का फर्क है तो कप साइज A है। अगर 2 इंच का फर्क है तो B, 3 इंच का फर्क है तो C, 4 इंच का फर्क है तो D कप साइज होगा।

लास्ट हुक का ध्यान रखें

थोड़े दिन यूज करने के बाद ब्रा का बैंड लूज हो जाता है। ऐसे में अगर आप ढीली ब्रा ले लेती हैं तो आपको आगे चलकर परेशानी हो सकती है। इसीलिए पहले ही चेक कर लें की ब्रा का लास्ट हुक सही से फिट हो रहा है या नहीं। ताकि अगर जब ब्रा थोड़ी ढीली हो जाए तो लास्ट हुक का यूज करके लंबे समय तक ब्रा यूज कर सकती हैं।

सही कपडे पहनकर जाएं

हर ब्रा की फिटिंग अलग-अलग होती है। इसीलिए ब्रा खरीदते समय बिलकुल सही फिटिंग की टी-शर्ट या कुर्ता पहनकर जाएं। इससे आपको ब्रा की सही फिटिंग पता चलेगी।

दो उँगलियों का रूल

अगर आप अपने लिए नई ब्रा खरीद रही हैं तो उसे पहनकर देखें। ध्यान रखें की ब्रा बैंड और शोल्डर स्ट्रैप्स के नीचे दो उँगलियाँ आसानी से अगर जानी चाहिए। ऐसी ब्रा पहनकर आप ज्यादा देर तक कंफर्टेबल रहेंगी।

किसके लिए क्या बेस्ट है?

जिन महिलाओं की ब्रेस्ट हैवी है उन्हें छोटी साइज की ब्रा पहनने की बजाए मिनिमाइजर ब्रा पहननी चाहिए। यह ब्रेस्ट को सपोर्ट देने के साथ-साथ उसे कवर करके छोटा दिखाने में मदद करती है। छोटे ब्रेस्ट वाली महिलाओं को बड़े साइज की ब्रा पहनने की बजाए पैडेड, मैक्सिमाइजर, पुश-अप ब्रा ट्राई करनी चाहिए।

इन बातों का भी ध्यान रखें

ब्रा स्ट्रेप के लिए

ब्रा खरीदते समय स्ट्रेप पर ध्यान दें। कलर और डिजाइन की बजाए, स्ट्रेप की सॉफ्टनेस पर ध्यान देना चाहिए। क्यूंकि स्ट्रेप ही ब्रा को रोकती है। स्ट्रेप में हमेशा सॉफ्ट और फ्लैट होनी चाहिए ताकि शोल्डर पर किसी तरह की समस्या न हो। ज्यादा टाइट स्ट्रेप पहनने से कंधे में समस्या हो सकती है। इसीलिए ब्रा स्ट्रेप पर खास ध्यान दें।

साइज और शेप के अनुसार

ब्रा खरीदने से पहले आप अपना साइज और शेप जान लें। इसके लिए आप ऊपर बताए गए तरीके का प्रयोग कर सकती हैं। भले ही बाजार में कितनी ही डिजाइनर और फैशनेबल ब्रा के ऑप्शंस मौजूद है लेकिन सभी आपके लिए ठीक हो ऐसा जरुरी नहीं। इसलिए आप अपनी बॉडी की बनावट के अनुसार ही ब्रा का चुनाव करें।

ब्रा की फिटिंग

कोई भी नई ब्रा खरीदने से पहले ये चेक कर लें की उसकी फिटिंग ठीक है या नहीं। अपने हाथों को उठाकर देखें, ब्रेस्ट का कोई हिस्सा बाहर तो नहीं निकल रहा। अगर हां, तो ये ब्रा आपके लिए नहीं है। आप दूसरी ब्रा चुनें। इसीलिए ब्रा लेने से पहले ये भी चेक कर लें।

ड्रेस के अनुसार

Bra Design
ब्रा डिज़ाइन

ब्रा खरीदते समय हमेशा ध्यान रखें, की हरेक ब्रा हरेक ड्रेस पर नहीं जचती। इसलिए आपके पास हर तरह की ब्रा होनी चाहिए। वेस्टर्न ड्रेस के लिए अलग और इंडियन ड्रेस के साथ पहनने के लिए अलग ब्रा होनी चाहिए। एक ही ब्रा दोनों पर नहीं पहनी जा सकती। टी शर्ट ब्रा का फैब्रिक बाकी ब्रा से अलग होता है। इसलिए इसे आप टी शर्ट के साथ-साथ उन कपड़ों पर भी पहन सकती हैं जिनपर हैवी डिजाइन बनें हो।

ब्रा की एक्सपायरी

हर सामान की तरह ब्रा की भी एक्सपायरी डेट होती है। बहुत सी महिलाऐं सोचती हैं की महंगी ब्रा है तो यह लंबे समय तक खराब नहीं होगी। जबकि ऐसा नहीं है। ब्रा कपडे और लास्टिक से बनती है। और एक साधारण सा कपडा भी पड़े-पड़े खराब हो जाता है और लास्टिक ढीली होजाती है। और ये तो ब्रा है जिसे आप रोज पहन रही हैं। इसलिए जब भी लगे की ब्रा की फिटिंग खराब हो रही है या लास्टिक लूज हो गयी है तो उसे तुरंत बदल दें। और अपने साइज के हिसाब से नई ब्रा ले आएं।

तो दोस्तों, अब आप अच्छी तरह समझ गयी होंगी की आपको ब्रा खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? इन टिप्स की मदद से आप आसानी से अपने साइज और पसंद के अनुसार ब्रा का चयन कर सकती है।

गर्भावस्था के दौरान स्तन में दूध कब आता है?

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प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में बहुत से बदलाव आते हैं और यह बदलाव शरीर के अंगो में भी देखा जाता है। जैसे की ब्रेस्ट में, ब्रेस्ट में बदलाव आने का कारण शिशु के जन्म के बाद उसके भरण पोषण के लिए उसके आहार का तैयार होना होता है। क्योंकि जैसे की अंडे का निषेचन होता है वैसे ही बॉडी में शिशु के लिए दूध बनना तैयार हो जाता है। और यह बदलाव प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तक बॉडी में देखने को मिलते हैं। और स्तन में आने वाले यह बदलाव महिला को भी महसूस होते हैं क्योंकि बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण स्तन में कसाव का आना, स्तन से चिपचिपा पदार्थ निकलना, ब्रेस्ट में भारीपन महसूस होना आम बात होती है।

कब बनता हैं प्रेगनेंसी में ब्रेस्ट में दूध

  • जैसे ही अंडा निषेचित होता है वैसे ही ब्रेस्ट में रक्त का संचार तेजी से होने लग जाता है, और ब्रेस्ट में दुग्ध उत्पादन करने वाली कोशिकाएं भी बढ़ने लग जाती हैं।
  • उसके बाद दूसरे महीने में ब्रेस्ट की कोशिका सरंचना में बदलाव आने लगता है, जिसके कारण दुग्ध उत्पादन की मात्रा बढ़ने लगती है, और निप्पल में भी उभार आने लगता है, और इसका कारण ब्रेस्ट में प्‍लीसेंटल लैक्‍टोजन्‍स और एस्ट्रोजन की मात्रा का बढ़ना होता है।
  • उसके बाद महिलाओं को चौथे से पांचवे महीने में ब्रेस्ट से हल्का चिपचिपा द्रव निकलता महसूस हो सकता है, जरुरी नहीं है की ऐसा सभी महिलाओं के साथ हो। यह हल्का पीला हो सकता है जिसे कोलेस्ट्रम भी कहा जाता है, कई बार इसमें रक्त की बुँदे भी दिखाई देती है, और यदि ऐसा होता है तो इसके लिए एक बार आपको डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
  • सातवे महीने में अधिकर महिलाओं के ब्रेस्ट से हल्का द्रव निकलता है जो की ब्रेस्ट में दुग्ध ग्रंथियों द्वारा विस्तारित किया जाता है, और इसका मतलब शिशु के लिए दूध का ब्रेस्ट में तैयार होना होता है। क्योंकि यह बदलाव प्रेगनेंसी का पूरा समय ब्रेस्ट में चलते रहते हैं जिसके कारण ऐसा होता है।
  • उसके बाद जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है कुछ महिलाओं को यह ज्यादा महसूस होने लगता है, और इस दौरान कोलेस्ट्रम हल्का पीला और रंगहीन हो जाता है क्योंकि अब शिशु का जन्म होने वाला होता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान स्तनों में दूध बनने की प्रक्रिया यह धीरे धीरे हफ्ते दर हफ्ते ब्रेस्ट में चलती रहती है, जैसे जैसे शिशु का विकास होता है वैसे वैसे शिशु के लिए ब्रेस्ट में दूध भी तैयार होता रहता है। और ऐसा हर महिला के साथ हो यह भी जरुरी नहीं होता है क्योंकि यह हर महिला की बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करता है।

बचना चाहते हैं मुहांसे से तो इन्हे कहें बाय बाय

साफ़, चमकदार और निखरा हुआ चेहरा आपकी पर्सनैलिटी को बढ़ाने में मदद करता है, लेकिन यदि आपके चेहरे पर किसी भी तरह के दाग धब्बे, या मुहांसे की समस्या हो जाती है, तो इसके कारण आपकी सुंदरता फीकी पड़ जाती हैं, चेहरे पर मुहांसे होने के बहुत से कारण हो सकते हैं, जैसे की चेहरे की साफ़ सफाई का ध्यान न रखना, कब्ज़ की समस्या होना, हॉर्मोन का असंतुलन होना, ऑयली स्किन आदि इन सभी के कारण आपको मुहांसे का सामना करना पड़ता है, इससे निजात पाने के लिए महिलाएं तरह तरह की क्रीम आदि का इस्तेमाल करती है, लेकिन कई बार वो आपकी स्किन पर सूट नहीं होती है, जिसके कारण आपको और भी परेशानी हो सकती है, क्या आप भी मुहांसे की से परेशान हैं और इस समस्या से बचना चाहते हैं यदि हाँ तो आइये जानते है की आपको मुहांसे की समसयस से कैसे निजात मिल सकता है।

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अपने हाथों को बार बार अपने चेहरे पर न लगाएं:-

मुहांसे का सबसे बड़ा कारण आपके हाथों का बार बार चेहरे पर लगाना होता है, इसीलिए जितना हो सकें इससे बचना चाहिए, क्योंकि यदि आप अपने चेहरे पर बार बार हाथ लगाते हैं तो इसके कारण आपके हाथों पर होने वाले जीवाणु और बैक्टेरिया आपके चेहरे की स्किन के संपर्क में आता है जिससे आपकी स्किन पर बुरा असर पड़ता है, और आपको मुहांसे की समस्या हो सकती है।

दूध से बनी चीजों का सेवन कम करें:-

यदि आपके चेहरे पर बार बार मुहांसे होते हैं और आप इससे बचना चाहते है तो इससे बचने के लिए आपको दूध या दूध से बनी चीजों का सेवन काम करना चाहिए इससे भी आपके चेहरे पर होने वाली मुहांसे की समस्या से बचाव होने में मदद मिलती है।

प्रदूषण व् धूप से अपनी स्किन का बचाव करें:-

स्किन पर मुहांसे होने का एक कारण आपकी स्किन का अधिक प्रदूषण के संपर्क में आना या फिर धूप की किरणों का दुष्प्रभाव भी हो सकता है, इसीलिए आपको मुहांसे से बचने के लिए हो सकें तो धूप और प्रदूषण से बचाव करना चाहिए इसके लिए आप बाहर जाने से पहले चेहरे पर सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें, और बाहर निकलने से पहले अच्छे से अपने चेहरे को ढक कर निकलें।

ज्यादा तला हुआ खाना न खाएं:-

अधिक वसा युक्त आहार का सेवन नियमित करने से भी आपको स्किन पर मुहांसे की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है, और यह केवल आपके चेहरे के लिए ही नहीं बल्कि आपकी सेहत के लिए भी हानिकारक होता है, इसीलिए इससे बचने के लिए आपको जितना हो सकें आपको स्वस्थ संयुलित व् पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए।

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स्किन प्रोडक्ट्स का ध्यान रखें:-

स्किन के लिए ज्यादा कास्मेटिक का इस्तेमाल नियमित रूप से करना, या फिर अच्छी क़्वालिटी के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल नहीं करना, अपनी स्किन के हिसाब से कास्मेटिक का इस्तेमाल नहीं करने पर भी आपको चेहरे पर दाग धब्बे और मुहांसे की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, इसीलिए अपने चेहरे की सुंदरता को बरकरार रखने के लिए आपको अपने चेहरे के लिए अच्छे कॉस्मेटिक का इस्तेमाल करना चाहिए।

अपने चेहरे की साफ़ सफाई का ध्यान रखें:-

मुहांसे से बचने के लिए आपको अपने चेहरे की साफ़ सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए इसके लिए आपको दिन में दो बार अच्छे से फेस वाश से अपने चेहरे को साफ़ करना चाहिए कहीं भी बाहर से आने के बाद साफ़ पानी से अपने चेहरे को साफ़ करना चाहिए, ऐसा करने से भी आप अपने चेहरे को मुहांसे से बचा सकते है।

पेट की साफ़ सफाई का ध्यान रखें:-

कब्ज़ या पेट की अच्छे से साफ़ सफाई अच्छे से न होने के कारण भी आपको चेहरे पर होने वाले मुहांसे की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, यदि आप चाहते है की आपके चेहरे को मुहांसे से बचाव मिल सकें तो इसके लिए जरुरी है की आप अपने पेट को साफ़ रखें।

नीम, टमाटर और पुदीने का पैक इस्तेमाल करें:-

यदि आप मुहांसे से बचना चाहते हैं तो इससे बचने के लिए आप घर पर ही पैक तैयार कर सकते है, जिससे आपको मुहाँसे के साथ चेहरे पर होने वाले अन्य दाग धब्बो से भी निजात पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप एक कटोरी में पांच से छह नीम की पत्तियां अच्छे से पीस लें, और उसके बाद इसमें एक चम्मच मुल्तानी मिट्टी का पाउडर, एक चम्मच टमाटर का रस और एक ही चम्मच पुदीने का रस मिलाकर एक पाउडर तैयार करें, उसके बाद अच्छे से इसे अपने चेहरे पर लगाएं और सूखने के बाद धो दें, ऐसा हफ्ते में तीन बार करें आपको फायदा मिलेगा।

मुहांसे से बचने के अन्य उपाय:-

  • चेहरे की साफ़ सफाई का ध्यान रखें, इसके लिए दिन में दो से तीन बार अच्छे से अपने चेहरे को धोएं।
  • अपने खान पान का ध्यान रखें गलत खान पान के कारण भी आपको ये समस्या हो सकती है।
  • ऑयली स्किन वालों को खासकर अपनी स्किन के लिए अच्छे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • पानी का भरपूर सेवन करें, इससे आपकी स्किन हाइड्रेट रहती है जिससे आपको चेहरे पर होने वाले मुहांसे की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • शराब व् तमबाकू का सेवन करने से भी आपको ये समस्या हो सकती है, इसीलिए इनसे भी परहेज रखें।
  • अपनी नींद को भी भरपूर मात्रा में लें।
  • गुलाब जल से नियमित अपने चेहरे को रुई पर लगाकर साफ़ करना चाहिए, इससे चेहरे पर जमी धूल मिट्टी हट जाती है, जिससे आपको इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।

तो ये हैं कुछ उपाय जिनका इस्तेमाल करने से आपको मुहांसे की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है, इसके अलावा आप अपनी स्किन को धुप में निकलने से पहले अच्छे से मॉइस्चराइज करना न भूलें, और हो सकें तो अपने चेहरे को अच्छे से कवर करके बाहर निकले, इससे भी आपकी स्किन को खूबसूरत बने रहने में मदद मिलती है।

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प्रेग्नेंसी में कोल्ड ड्रिंक्स पीने से क्या होता है? जानिए

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Soft Drinks During Pregnancy Safe or Not?

क्या आपको भी गर्भावस्था के दौरान कोल्ड ड्रिंक्स पीने की इच्छा होती है? क्या आपका मन भी सोडा वाटर पीने को करता है? अगर हां, तो आपको ये आर्टिक्ल जरूर पढ़ना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान मूड स्विंग्स के कारण गर्भवती महिलाओं की जीभ का स्वाद बदल जाता है। और हमेशा उन्हें कुछ अलग खाने का मन करता है। ऐसे में कई बार महिलाएं कोल्ड ड्रिंक्स पीने की इच्छा रखती हैं। पर क्या गर्भवती महिला को कोल्ड ड्रिंक्स या सोडा वाटर पीना चाहिए? आज हम आपको उसी के बारे में बता रहे हैं।

प्रेग्नेंसी में कोल्ड ड्रिंक्स पीना सही या गलत?

गर्भावस्था के दौरान कोल्ड ड्रिंक्स पीना ना केवल गर्भवती महिला के लिए बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी नुकसानदेह होता है। आप लोग नहीं जानती लेकिन कोल्ड ड्रिंक्स और सोडा वाटर में कैफीन बहुत अधिक मात्रा में होता है जो गर्भवती महिला के लिए सेफ नहीं होता।

प्रेग्नेंसी में कोल्ड ड्रिंक्स पीने के नुकसान

गर्भावस्था के दौरान कोल्ड ड्रिंक्स पीने से बहुत नुकसान होते हैं। वे नुकसान निम्नलिखित हैं –

कैफीन के नुकसान

ज्यादातर कोल्ड ड्रिंक्स में कैफीन होता है जो गर्भनाल से होते हुए गर्भ में शिशु तक पहुंचता है। कैफीन के सेवन से रक्त का प्रवाह तेज हो जाता है जो गर्भवती महिला के लिए ठीक नहीं। कैफीन गर्भवती महिला के केंद्रीय तंत्रिका प्रणाली को भी प्रभावित करता है। ज्यादा मात्रा में कोल्ड ड्रिंक्स पीने से शरीर में पानी की कमी भी हो जाती है।

अप्राकृतिक शुगर के नुकसान

कोल्ड ड्रिंक्स में आर्टिफिशल कलर, अप्राकृतिक मीठा, फ्लेवर और प्रिजर्वेटिव्स होते है। जो गर्भवती महिला के लिए बहुत नुकसानदेह होते हैं। आर्टिफिशल शुगर आपके वजन को बढ़ा सकती है जिसे गर्भावस्था के दौरान और गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में परेशानियां हो सकती हैं। इसमें इस्तेमाल किये जाने वाले कलर शिशु में एलर्जी का कारण बन सकते हैं।

ठंडे पेय पदार्थ

गर्भवती महिला के पेट का तापमान बहुत संवेदनशील होता है। ऐसे में ठंडे बर्फ वाले पेय पदार्थों का सेवन करने से ब्लड सेल्स संकुचित हो जाती है जिससे गर्भ में शिशु को परेशानी हो सकती है। कोल्ड ड्रिंक पीने से भूख कम होना, अपच, पेट में ऐंठन, और गर्भ को नुकसान पहुँचने की संभावना बढ़ सकती है।

कैलोरी की मात्रा

गर्भावस्था के दौरान महिला को अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है जिसके लिए उचित मात्रा में भोजन करना आवश्यक होता है। कोल्ड ड्रिंक्स का ज्यादा सेवन करने से शरीर में कैलोरी की मात्रा कम हो जाती है और यह शिशु के ग्रोथ को भी प्रभावित करती है। ज्यादा कैलोरी लेने से ओवर वेट शिशु होने की संभावनाएं बढ़ जाती है।

कार्बोनेट वाटर

सॉफ्ट ड्रिंक्स में कार्बन-डाइऑक्साइड बुलबुले होते हैं। गर्भावस्था के दौरान महिला का शरीर बहुत सेंसिटिव होता है। ऐसे में कार्बोनिक एसिड सीने में जलन, अपच और पेट संबंधी अन्य समस्यायों का कारण बन सकता है।

आर्टिफिशल फ्लेवर

कोल्ड ड्रिंक्स में इस्तेमाल की जाने वाली आर्टिफिशल फ्लेवरिंग में फॉस्फोरिक एसिड होता है जो हड्डियों से कैल्शियम कम करने का काम करता है। शरीर में कैल्शियम की कमी के कारण गर्भवती महिला को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

क्या गर्भवती महिला को कोल्ड ड्रिंक्स पीनी चाहिए?

बिलकुल भी नहीं। गर्भवती महिला को कोल्ड ड्रिंक्स या सोडा वाटर का सेवन बिलकुल भी नहीं करना चाहिए। क्यूंकि गर्भधारण के बाद शिशु का विकास पूरी तरह आपके खान-पान पर निर्भर करता है ऐसे में अगर आप आर्टिफिशल फ्लेवर, कलर, कैफीन और कार्बन डाइऑक्साइड वाले पेय पदार्थों का सेवन करती हैं तो इसका प्रभाव सीधा आपके गर्भ पर पड़ेगा।

ज्यादा मात्रा में कोल्ड ड्रिंक्स पीने से भ्रूण के विकास पर असर पड़ सकता है। इसलिए कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन ना ही करें तो बेहतर होगा। इसकी बजाए आप छाछ, दही की लस्सी, फ्रूट जूस, सब्जियों का जूस, नींबू का शर्बत, नारियल पानी, दूध आदि का सेवन कर सकती हैं। यह आपके शरीर में पोषक तत्वों की जरूरतों को पूरा करेगा और आपके जीभ के स्वाद को भी बदल देगा।