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सिगरेट पीने के नुकसान

सिगरेट पीने के नुकसान, सिगरेट पीने से होते हैं यह नुकसान, स्मोकिंग के दुष्प्रभाव, धूम्रपान करने के हानिकारक प्रभाव, सिगरेट पीने से स्वास्थ्य को होते हैं यह नुकसान, Harmful effect of Smoking

धूम्रपान करना स्वास्थ्य के लिए कभी भी फायदेमंद नहीं होता है, और यह जिस सिगरेट को आप पीते हैं उसी के पैकेट पर लिखा होता है। जब कोई चीज आपको नुकसान कर रही है तो उससे दुरी बना लेना ही सही होता है। कुछ लोग सिगरेट शौक के लिए, कुछ लोग दिखावा करने के लिए तो कुछ लोगो को इसकी बुरी लत होने के कारण वो इसका सेवन करते हैं। केवल पीने वाले को ही नहीं जहां कोई सिगरेट पीता है उस जगह पर रहने वाले लोगो के लिए भी यह नुकसानदायक ही होता है। यह केवल आपको शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी रोगी बना देता है। और इसके दुष्प्रभाव जानने के लिए बहुत सी स्टडी भी की गई है। तो लीजिये आज हम आपको सिगरेट पीने से कौन कौन से नुकसान होते हैं इस बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

सांस लेने से जुडी समस्या हो सकती है

सिगरेट पीने से उसमे मौजूद कार्बन मोनो ऑक्साइड ब्लड में प्रवेश कर जाती है, जिसके कारण बॉडी में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। और बॉडी को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिल पाने के कारण खांसी, कफ, सांस लेने में परेशानी आदि समस्या होने लगती है। और यदि यह समस्या बढ़ जाए तो इसके कारण अस्थमा, तपेदिक आदि की समस्या भी हो सकती है।

शुगर की समस्या

बॉडी में ग्लूकोस की मात्रा को असंतुलित करके टाइप 2 शुगर होने की समस्या को बढ़ाने में सिगरेट का सबसे ज्यादा योगदान होता है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला इसका सेवन करती है तो इससे महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, और साथ ही जन्म के बाद शिशु को भी इस शुगर होने के चांस बढ़ जाते हैं।

आँखों के लिए है नुकसानदायक

सिगरेट के धुएं में आर्सेनिक, फार्मलाडिहाइड, अमोनिया, आदि रसायन होते हैं, और यदि आप इसका सेवन करते हैं तो यह आपके खून में पहुंचकर आँखों के उत्तको तक पहुँच जाते हैं, जिससे रेटिना को नुकसान पहुँचता है और आपकी आँखों के देखने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।

घाव भरने में समय लगता है

यदि आपको कभी चोट आदि लग जाती है, और आपको घाव बन जाता है, और आप सिगरेट का सेवन करते हैं तो इसके कारण आपके घाव को भरने में समय लग सकता है। क्योंकि निकोटीन, नाइट्रिक ऑक्साइड, हाइड्रोजन साइनाइड, कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे रसायन सिगरेट के धुंए में होते हैं जो घाव को भरने में देरी का कारण बनते हैं।

दिल के लिए है खतरा

धूम्रपान करने से हदय सम्बन्धी समस्या जैसे स्ट्रोक आदि आने के चांस बढ़ जाते हैं। क्योंकि इसमें मौजूद निकोटिन व् अन्य जहरीले पदार्थ आपके हदय को नुकसान पहुंचाते हैं। और स्ट्रोक की समस्या के साथ पैरालिसिस, आंशिक अंधापन, बोलने की शक्ति में कमी आदि की समस्या भी आपको हो सकती है।

गठिया का खतरा

धूम्रपान करने वाले लोगो में गठिया रोग की समस्या होने के चांस भी बढ़ जाते हैं, जिसके कारण व्यक्ति को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

फेफड़ों के लिए है नुकसानदायक

सिगरेट का अधिक सेवन व्यक्ति के लिए फेफड़ों में होने वाली कैंसर जैसी समस्या का कारण बन सकता है। और महिलाएं यदि इसका सेवन अधिक करती हैं तो पुरुषो के मुकाबले महिला को जल्दी यह समस्या हो सकती है।

उम्र बढ़ती है

हर कोई हमेशा जवान रहना चाहता है लेकिन यदि आप सिगरेट का सेवन करते हैं तो ऐसा करने से आपको स्किन से जुडी समस्या जैसे की स्किन का ढीला होना, झुर्रियों की समस्या होना, आदि परेशानी हो सकती है। जिसके कारण कम उम्र में ही आप अधिक उम्र के लगने लगते हैं, इसीलिए हमेशा जवान दिखने और फिट रहने के लिए आपको सिगरेट का सेवन नहीं करना चाहिए।

प्रजनन क्षमता पर पड़ता है बुरा असर

महिलाएं और पुरुष दोनों को ही प्रजनन क्षमता में कमी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, साथ ही इसके कारण शुक्राणु में कमी जैसी समस्या भी हो सकती है, यदि आप सिगरेट का सेवन करते हैं तो। महिलाओं में जहां ओवुलेशन प्रक्रिया पर इसका असर पड़ता है वहीँ पुरुषो के शुक्राणु की गुणवत्ता में कमी आने के साथ उनकी संख्या में कमी आ सकती है।

दिमाग पर पड़ता है बुरा असर

स्टडीस के अनुसार सिगरेट का अधिक सेवन करने से दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ता है, क्योंकि इसके सेवन से दिमाग की कोशिकाएं सिकुड़ने लगती है, जिसके कारण आपकी सोचने, समझने, निर्णय लेने की क्षमता में कमी आती है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो आपको सिगरेट का सेवन करने से होते है, इसीलिए जितना हो सके इनके सेवन से परहेज करना चाहिए, और यदि आपके आस पास भी कोई सिगरेट पीता है तो उसे उसका सेवन करने से रोकना चाहिए, या उसके संपर्क में आने से बचना चाहिए। ताकि आपको सिगरेट के कारण होने वाली हर तरह की शारीरिक और मानसिक दिक्कत से बचाव करने में मदद मिल सके।

फेशियल चुनते समय अपनी त्वचा के प्रकार का ध्यान रखें

चेहरे की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने के लिए जरुरी है, की आप अपने चेहरे की साफ़ सफाई का खास ध्यान रखें, क्योंकि आपके चेहरे पर धूल मिट्टी के जमने के कारण डेड स्किन इकट्ठी हो जाती है, ब्लैक हेड्स हो जाते है, जिससे त्वचा डल पड़ने लगती है, और इस समस्या से राहत के लिए महिलाएं ब्यूटी ट्रीटमेंट का सहारा लेती है, जैसे की फेशियल स्क्रब आदि, परन्तु यदि आप अपने चेहरे पर फेशियल करवाती है, या घर पर करती है, तो आपको अपनी स्किन टाइप के अनुसार ही फेशियल का चुनाव करना चाहिए, क्योंकि यदि आप सही फेशियल को नहीं चुनती है तो इसके कारण आपकी स्किन पर गलत प्रभाव पड़ता है।

इन्हें भी पढ़ें:- फेशियल करवाने के बाद कभी न करें ये गलती!

जैसे कई बार आपकी स्किन तो ऑयली होती है लेकिन फेशियल आप वो करवा लेते है जो की ड्राई स्किन के लिए होता है, आज कल पार्लर में हर तरह के फेशियल मिल जाते है जो आपके चेहरे को क्लीन करने में आपकी मदद करते है, लेकिन जब आपको अपनी स्किन के बारे में पता नहीं होता है, तो आप नाम सुनकर किसी भी फेशियल का चुनाव कर लेती है, शायद वो फेशियल उस समय तो आपके चेहरे पर ग्लो लाता है, लेकिन बाद में आपकी स्किन पर गलत प्रभाव भी छोड़ देता है, तो आइये अब हम आपको बताते है की किस प्रकार आप अपने लिए फेशियल का चुनाव कर सकते है।

ऑयली स्किन के लिए फेशियल टिप्स:-

ऑयली स्किन वालों को कभी भी मॉइस्चराइजर और क्रीम वाला फेशियल नहीं करवाना चाहिए, क्योंकि उनकी स्किन पर अधिक धूल मिट्टी का जमाव होने के कारण उनकी स्किन के लिए उन्हें पहले स्‍क्रब के साथ क्‍लींजिंग और फिर टोनिंग वाले फेशियल का चुनाव करना चाहिए, यदि आपकी स्किन पर पोर्स अधिक बड़े हैं तो आप चाहे तो पर्ल या सिल्वर फेशियल का चुनाव कर सकते है, ऐसा करने से आपके पोर्स की समस्या का समाधान भी होगा, और यह आपकी स्किन को भी सूट करेगा।

इन्हें भी पढ़ें:- ब्लीच और फेशियल क्यों किया जाता हैं? और कैसे किया जाता हैं

रूखी व् बेजान त्वचा के लिए:-

रूखी व् बेजान त्वचा पर अच्छे से फेशियल करने के लिए जरुरी होता है की पहले आपकी स्किन को मॉइस्चराइजर की मदद से अच्छे से पोषित किया जाए, और मसाज की जाएँ और उसके बाद आप फेशियल करवाएं, वैसे जो रूखी व् बेजान स्किन के लिए सबसे अच्छे फेशियल होते है, वो होते हैं क्‍लासिक और दूसरा प्‍लांट स्‍टेम फेशियल यह इस तरह की स्किन को सबसे ज्यादा सूट करते है।

कॉम्‍बिनेशन स्‍किन के लिए करवाएं ये फेशियल:-

इस तरह की त्वचा को दुगुनी केयर की जरुरत होती है, क्योंकि इस तरह की स्किन ऑयली और रूखी दोनों तरह के बेजान टिशू से बनी होती है, इसीलिए इस तरह की स्किन के लिए सबसे पहले आपको रूखी त्वचा को अच्छे से क्लीन करके मसाज करवानी चाहिए, और उसके बाद स्किन को टोन करने के लिए आइस पैक का इस्तेमाल करना चाहिए, ऐसा करने से आपकी स्किन को अच्छे से पोषण मिलता है, और बेहतर केयर होती है, इसके लिए आप प्‍लेटिनम फेशियल और जेमस्‍टोन थैरेपी फेशियल करवा सकते है, क्योंकि यह इस तरह की स्किन पर सबसे अच्छे रिजल्ट देते है।

तो ये है कुछ ख़ास टिप्स महिलाओ के लिए जिनसे उन्हें अपनी स्किन के हिसाब से फेशियल चुनने में मदद मिलती है,और उनकी स्किन की अच्छे से केयर भी होती है, हर महिला को अपने चेहरे की साफ़ सफाई के लिए फेशियल जरूर करवाना चाहिए इनसे उनकी स्किन को पोषण मिलता है, जिससे वो हमेशा स्वस्थ और निखरी हुई रहती है।

इन्हें भी पढ़ें:- फेशियल करने का तरीका और इन प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना

प्रेगनेंसी में कच्चा नारियल खाना चाहिए या गोला?

प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाएं क्या नहीं, इसे लेकर पहली प्रेगनेंसी में ज्यादातर महिलाएं परेशान रहती है। और हर खाने पीने की चीज को लेकर उनका यही सवाल होता है की क्या इसे प्रेगनेंसी में खा सकते हैं, इसे खाने से शिशु को कोई नुकसान तो नहीं होगा। और खान पान का ध्यान रखना प्रेगनेंसी के दौरान सही भी है क्योंकि इस दौरान महिला अकेली नहीं होती है बल्कि गर्भ में पल रहा शिशु भी पूरी तरह से महिला पर ही निर्भर करता है। ऐसे में यदि खान पान में लापरवाही की जाये तो न केवल महिला के स्वस्थ पर बल्कि शिशु के विकास पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। तो लीजिये आज हम प्रेगनेंसी के दौरान कौन सा नारियल खाना चाहिए सूखा या फिर जो नारियल होता है इसे लेकर कुछ बातें बताने जा रहे हैं। जिनसे आपको इसे जानने में मदद मिलेगी की प्रेगनेंसी में कौन सा नारियल खाना सबसे सही होता है।

प्रेगनेंसी में कौन सा नारियल खाना चाहिए सूखा नारियल यानी गोला या फिर नारियल

गर्भावस्था के दौरान ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए जो न केवल पोषक तत्वों से भरपूर हो बल्कि जिनका सेवन करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को फायदा भी मिलें। तो नारियल कुछ ऐसे ही आहार में शामिल है चाहे फिर वो सूखा नारियल हो, खाने वाले नारियल हो या फिर नारियल पानी पानी यह सभी प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं। क्योंकि इसमें फाइबर, विटामिन सी, मैग्नीशियम, कैल्शियम जैसे सभी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। ऐसे में यदि गर्भवती महिला को नारियल खाना पसंद है तो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को इसका सेवन भरपूर करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में नारियल खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी में नारियल का सेवन करती है तो उसे बहुत से स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान नारियल का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

इम्यून सिस्टम: नारियल में एंटी बैक्टेरियल, एंटी फंगल, एंटी वायरल तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को शिशु दोनों की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में मदद करते हैं। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला और शिशु दोनों को रोगो से बचे रहने में मदद मिलती है।

फाइबर: ज्यादातर गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव और वजन बढ़ने के कारण पाचन सम्बन्धी समस्याओं से परेशान हो सकती है। ऐसे में नारियल का सेवन करने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है क्योंकि नारियल में फाइबर प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है।

सोडियम: सोडियम की कमी बॉडी में होने के कारण गर्भवती महिला की प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियां बढ़ सकती है। साथ ही सोडियम की कमी के कारण शिशु का विकास भी प्रभावित होता है ऐसे में यदि गर्भवती महिला नारियल का सेवन करती है तो इससे महिला को सोडियम की कमी के कारण होने वाली परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है। क्योंकि नारियल में प्राकृतिक रूप से सोडियम मौजूद होता है।

कोलेस्ट्रॉल: बॉडी में बेड कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने के कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियां हो सकती है। लेकिन यदि महिला नारियल का सेवन करती है तो इससे महिला को इस परेशानी से बचने में में मदद मिलती है। क्योंकि नारियल में जीरो कोलेस्ट्रॉल होने के साथ यह वसा रहित भी होता है जो बॉडी में गुड़ कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है।

मूड स्विंग्स: बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेगनेंसी के दौरान महिला के स्वाभाव में भी फर्क का सकता है। जिसके कारण महिला को चिड़चिड़ापन, तनाव जैसी दिक्कतें हो सकती है लेकिन नारियल का सेवन करने से महिला को खुश रहने, चिड़चिड़ापन दूर करने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में सूखा नारियल खाने के फायदे

सूखे नारियल का सेवन यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान करती है तो इसके सेवन से भी महिला को और शिशु को बहुत से लाभ मिलते हैं। तो आइये अब उन फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में सूखा नारियल खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

ब्रेस्ट मिल्क: शिशु के जन्म से पहले ही महिला के स्तनों में दूध बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है ताकि जन्म के बाद भी शिशु को भरपूर पोषण मिल सके। ऐसे में दूध का उत्पादन बढ़ाने के साथ दूध में पोषक तत्वों की मात्रा को भरपूर रखने के लिए गर्भवती महिला को सूखे नारियल का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान जरूर करना चाहिए।

आयरन: सूखा नारियल आयरन का एक बेहतरीन स्त्रोत होता है जो गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करने के साथ खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से बचाने में मदद करता है। साथ ही इससे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

पोषक तत्व: सूखे नारियल में मैग्नीशियम, फाइबर, सेलेनियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ गर्भवती महिला को थकान, कमजोरी जैसी समस्या से सुरक्षित रखने में भी मदद करते हैं, साथ ही इससे गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों को मजबूत रहने में भी मदद मिलती है।

फाइबर: सूखे नारियल में फाइबर भी प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पेट सम्बन्धी समस्या से बचाने के साथ पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता है। जिससे कब्ज़ एसिडिटी जैसी परेशानियों से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

सूजन: बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान हाथों पैरों में सूजन की समस्या से भी परेशान रहती है। ऐसे में सूखे नारियल का सेवन करने से महिला को इस समस्या से निजात पाने में भी मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को नारियल का सेवन करने से मिलते हैं फिर चाहे वो कोई सा भी हो। तो इन फायदों के लिए गर्भवती महिला चाहे तो प्रेगनेंसी के दौरान नारियल का सेवन कर सकती है।

गर्भावस्था में पानी की कमी से यह समस्या हो सकती है

गर्भावस्था में पानी की कमी से यह समस्या हो सकती है, प्रेगनेंसी में पानी की कमी होने के नुकसान, गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन क्यों करना चाहिए, प्रेगनेंसी में पानी की कमी के कारण हो सकती हैं यह परेशानी

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में भरपूर पोषक तत्वों का होना जितना जरुरी है, उतना ही पानी का होना भी जरूरी है। डॉक्टर्स के अनुसार भी प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में पानी व् तरल पदार्थो को लेने की सलाह दी जाती है। क्या अपने कभी सोचा है ऐसा क्यों होता है? तो आइये आज हम आपको इस बारे में कुछ बातें बताते हैं। प्रेगनेंसी के दौरान पानी की कमी से महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है जिसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में इन परेशानियों से बचने के लिए और शिशु के बेहतर विकास के लिए पानी का भरपूर सेवन करने की सलाह दी जाती है। तो आइये अब जानते हैं की यदि गर्भवती महिला भरपूर मात्रा में पानी का सेवन नहीं करती है और शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो इसके कारण कौन कौन सी परेशानियां हो सकती है।

इन्फेक्शन

पानी का भरपूर मात्रा में सेवन करने से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद मिलती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी समस्याओं से बचे रहने में मदद मिलती है। लेकिन पानी की कमी होने के कारण इम्युनिटी कमजोर पड़ने लगती है जिसके कारण आपको इन्फेक्शन होने की समस्या का खतरा रहता है, खासकर पानी की कमी के कारण यूरिन इन्फेक्शन की समस्या गर्भवती महिला को बहुत जल्दी हो जाती है।

बॉडी में दर्द

गर्भवती महिला का वजन बढ़ने के कारण बॉडी में मांसपेशियों में खिंचाव होने लगता है, जिसके कारण प्रेगनेंसी में बॉडी में दर्द होना आम बात होती है। लेकिन पानी का भरपूर मात्रा में सेवन गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचाव करने में मदद करता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में यदि पानी की कमी होती है, तो इसके कारण शरीर में अंगो में दर्द होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

कब्ज़ की समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान अधिकतर महिलाएं कब्ज़ की समस्या से परेशान रहती है, लेकिन पानी का भरपूर सेवन इस समस्या को कम करने में मदद करता है। और यदि महिला के शरीर में पानी की कमी होती है तो प्रेग्नेंट महिला की समस्या बढ़ भी सकती है।

एनर्जी की कमी होती है

भरपूर मात्रा में पानी का सेवन बॉडी में एनर्जी को बरकरार रखने में मदद करता है, लेकिन यदि गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी होती है तो इसके कारण बॉडी में एनर्जी की कमी होने लगती है। जिसके कारण कमजोरी, थकान, चक्कर, घबराहट होना आदि आम बात होती है।

सूजन की समस्या

गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी के कारण पैरों, हाथों में सूजन की समस्या हो सकती है। लेकिन यदि सूजन के साथ दर्द हो और मुँह व् शरीर के अन्य हिस्सों पर भी सूजन आने लगे तो इसे नज़रअंदाज़ न करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

स्किन से जुडी समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान पानी की कमी के कारण महिला की ख़ूबसूरती भी कम हो सकती है, क्योंकि बॉडी के हाइड्रेट न रहने के कारण स्किन में सूखापन, स्किन का फटना आदि समस्या हो सकती है। साथ ही इससे शिशु की त्वचा पर भी बुरा असर पड़ता है क्योंकि उसे पूरी तरह से नमी नहीं मिल पाती है जिसके कारण शिशु की त्वचा सिकुड़ने लगती है।

शिशु के विकास में आती है कमी

एमनियोटिक द्रव जिसमे शिशु पूरे नौ महीने तक रहता है उसके लिए बॉडी में पानी की मात्रा का पर्याप्त होना बहुत जरुरी होता है। साथ ही शिशु को भरपूर पोषण देने के लिए भी बॉडी में पानी का होना बहुत जरुरी होता है। ऐसे में पानी की कमी होने के कारण शिशु को भरपूर पोषण नहीं मिल पाता है जिसके कारण शिशु के विकास में कमी आ सकती है।

प्रेगनेंसी में पानी की कमी को पूरा करने के टिप्स

  • पानी की कमी को पूरा करने के लिए दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन जरूर करें।
  • ऐसे फल खाएं जिसमे पानी की अधिकता होती है इससे भी शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।
  • नारियल पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें यह न केवल बॉडी में पानी की कमी को पूरा करता है। बल्कि इससे शिशु और गर्भवती महिला को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व भी मिलते हैं।
  • दिन में दो या तीन गिलास दूध का सेवन जरूर करें, लेकिन याद रखें की कच्चे दूध और मलाई वाले दूध का सेवन न करें, क्योंकि इससे आपको पेट सम्बन्धी समस्या हो सकती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पानी की कमी के कारण होने वाली परेशानियां, साथ ही पानी की कमी को पूरा करने के लिए कुछ टिप्स, ऐसे में गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के लिए और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए गर्भवती महिला को इन टिप्स का ध्यान रखना चाहिए। और भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए।

महिलाओं को दाढ़ी मूँछ होने के क्या कारण होते हैं?

महिलाओं को दाढ़ी मूँछ होने के क्या कारण होते हैं, महिलाएं अपनी ख़ूबसूरती को बरकरार रखने के लिए कुछ न कुछ करती ही रहती है। खासकर अपने चेहरे के लिए, क्योंकि चेहरे की ख़ूबसूरती महिला को और अधिक आकर्षक बनाने में मदद करती है। साथ ही महिला अपने चेहरे की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने के लिए तरह तरह के कास्मेटिक, क्रीम, फेस वॉश व् अन्य ब्यूटी ट्रीटमेंट भी लेती हैं। लेकिन फिर भी कई बार कुछ ऐसी समस्या हो जाती है जिससे न केवल महिला के चेहरे की सुंदरता कम हो जाती है।

बल्कि महिला का चेहरा भद्दा भी लगने लग जाता है। और वह समस्या होती है की महिला के चेहरे पर दाढ़ी मूँछ का उगना, पुरुषों में ऐसा होना आम बात है। लेकिन महिलाओं के लिए यह बहुत ज्यादा खराब होता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में कुछ ऐसे कारणों की चर्चा करने जा रहे हैं जिनकी वजह से महिला को दाढ़ी मूँछ की समस्या हो जाती है।

महिलाओं को दाढ़ी मूँछ होने का कारण है हार्मोनल बदलाव

  • बॉडी में हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं लेकिन यदि उन हॉर्मोन्स का संतुलन बिगड़ जाता है।
  • और बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो जाती है।
  • तो इसके कारण कई बार बॉडी के कई हिस्सों पर अनचाहे बाल उगने लगते हैं।
  • जैसे की ब्रेस्ट, पीठ, चेहरे पर दाढ़ी मूँछ आदि।
  • तो इसका मतलब यह हैं की महिला को दाढ़ी मूँछ होने का एक कारण महिला की बॉडी में होने वाला हार्मोनल असंतुलन है।
  • महिला के तनाव लेने के कारण, बहुत अधिक व्यायाम करने के कारण, स्टेरॉयड का सेवन करने के कारण भी बॉडी में हार्मोनल असंतुलन हो सकता है जिसके कारण महिला को यह समस्या हो सकती है।

अनुवांशिक कारण

  • महिला को दाढ़ी मूँछ होने का एक कारण अनुवांशिक भी हो सकता है।
  • इसका मतलब यह होता है की यदि आपके घर में आपकी मम्मी, बहन, दादी या किसी अन्य महिला को यह समस्या है।
  • तो ऐसा आपके साथ भी हो सकता है।

महिलाओं को दाढ़ी मूँछ होने का कारण है दवाइयां

  • यदि आप किसी बिमारी से जुडी दवाइयों का सेवन कर रही हैं।
  • तो हो सकता है की उन दवाइयों के सेवन के कारण बॉडी में एंड्रोजन हॉर्मोन का उत्पादन बढ़ने लग जाए।
  • यदि ऐसा होता है तो बॉडी में एंड्रोजन हॉर्मोन के बढ़ने के कारण भी महिला को यह समस्या हो सकती है।

मेनोपॉज़

  • हर महिला एक उम्र में बाद मेनोपॉज़ की समस्या का सामना करती है।
  • और इस दौरान महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं।
  • और इन्ही हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को चेहरे पर दाढ़ी मूँछ उगने की समस्या हो सकती है।

गर्भावस्था

  • प्रेगनेंसी भी एक ऐसा समय होता है जहां महिला के शरीर में तेजी से हार्मोनल बदलाव होते हैं।
  • ऐसे में बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव या हार्मोनल असंतुलन के कारण महिला के चेहरे पर दाढ़ी मूँछ की समस्या हो जाये।

चेहरे पर दाढ़ी मूँछ की समस्या से बचने के लिए महिलाएं यह करें

निम्बू और चीनी: निम्बू के रस में चीनी डालकर अच्छे से गर्म करें। उसके बाद इस मिक्सचर को चेहरे पर लगाकर आधे घंटे के लिए छोड़ दें। उसके बाद साफ़ पानी से चेहरे को धो दें।

केला और ओटमील: केले के टुकड़े और बराबर मात्रा में ओटमील को डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। उसके बाद इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं। और आधे घंटे इस पेस्ट के चेहरे पर रहने के बाद इसे साफ़ कर दें।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला को दाढ़ी मूँछ की समस्या हो सकती है। ऐसे में महिला को इसे लेकर घबराना नहीं चाहिए बल्कि इनका उपचार करना चाहिए। ताकि महिला के चेहरे की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने में मदद मिल सके।

गर्भ में शिशु अपने सिर नीचे की तरफ कब करता है

गर्भ में शिशु अपने सिर नीचे की तरफ कब करता है, गर्भ में शिशु की पोजीशन, प्रसव से पहले गर्भ में शिशु अपना सिर नीचे की तरफ कब करता है

प्रेगनेंसी के समय गर्भ में शिशु का विकास लगातार होता रहता हैं ऐसे में पांचवें महीने में आप शिशु को महसूस करना भी शुरू कर देते हैं। क्योंकि गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव होने के कारण शिशु गर्भ में शिशु जब मूवमेंट में करता है तो वह आपको महसूस होने लगती है, और जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है, वैसे वैसे शिशु और ज्यादा हलचल करने लगता है। और शिशु की हलचल बेहतर होना गर्भ में पल रहे एक स्वस्थ शिशु की निशानी होती है। उसके बाद जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है वैसे वैसे शिशु गर्भ में अपनी सही पोजीशन में आने लगता है। जिसमे उसका सिर नीचे की तरफ होता है

गर्भ में शिशु का सिर नीचे की तरफ का करता है

गर्भावस्था के नौवें महीने में शिशु अपने सिर नीचे की तरफ कर लेते हैं, लेकिन यदि आप पहली बार माँ बन रही है और गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से होता है तो आठवें महीने के आखिरी से ही वो अपने सिर को नीचे की तरफ करना शुरू कर देता है। इसका कारण यह होता है की पहली बार माँ बनने में गर्भाशय की मांसपेशियां बहुत मजबूत होती है जिसके कारण शिशु को स्पोर्ट मिलता है।

और यदि उसके बाद आप दूसरे या तीसरे बच्चे को जन्म देती है तो मांसपेशियों का इतना ज्यादा स्पोर्ट न होने के कारण शिशु नौवें महीने की शुरुआत में अपनी सही पोजीशन में आना शुरू कर देते हैं। सभी शिशु एक ही समय में और एक ही जैसी पोजीशन के साथ गर्भ में हो ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है, क्योंकि यह शिशु के गर्भ में विकास पर निर्भर करता हैं। वैसे ज्यादातर शिशु आठवें से नौवें महीने या 30 से 34 हफ्ते के बीच में अपना सिर नीचे की तरफ कर लेते हैं।

ब्रीच पोजीशन

यदि किसी शिशु का गर्भ में अच्छे से विकास नहीं होता है जिसके कारण वो अपनी सही पोजीशन नहीं ले पाता है, या फिर महिला से जुडी किसी परेशानी के कारण जैसे प्रेगनेंसी में किसी कॉम्प्लीकेशन्स के कारण, यदि वो अपनी सही पोजीशन में नहीं आ पाता है तो उसे ब्रीच पोजीशन कहा जाता है इसमें शिशु का सिर ऊपर और कूल्हे नीचे की तरफ होते हैं, और ऐसा होने के कारण महिला की सिजेरियन डिलीवरी होती है।

तो यह हैं शिशु गर्भ में कब से अपने जन्म की तैयारी शुरू कर देता है यानी अपना सिर नीचे की तरफ कर लेता है, जूसी कुछ खास जानकारी जिससे आप यदि प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी पता हल सकता है की गर्भ में शिशु का सिर नीचे की तरफ कब आता है।

ये 25 सुपरफूड हैं स्तनपान करवाने वाली महिला के लिए बहुत जरुरी

शिशु के जन्म के बाद स्तनपान को ही शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार माना गया है। साथ ही छह महीने तक शिशु को केवल माँ का दूध ही देने के लिए डॉक्टर्स कहते हैं, इसके अलावा पानी तक का सेवन शिशु को नहीं करवाना चाहिए। ऐसे में बहुत जरुरी होता है की माँ का दूध पर्याप्त मात्रा में शिशु को मिले जिससे शिशु का शारीरिक विकास बेहतर तरीके से हो। और कई महिलाएं इस बात को लेकर चिंता में भी रहती हैं की शिशु का पेट भर रहा है या नहीं, कहीं स्तनपान करने के बाद भी शिशु भूखा तो नहीं है। ऐसे में स्तनपान करवाने वाली महिला को इस बात पर ध्यान देना जरुरी होता है की उसका दूध स्तन में अच्छे से बने।

और इसके लिए सबसे जरुरी होता है महिला का खान पान, क्योंकि महिला जितने हेल्दी आहार का सेवन करती है, उतना ही दूध बेहतर तरीके से उतरता है। और शिशु की शारीरिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है जिससे नवजात के विकास में किसी तरह की कोई कमी नहीं आती है। खासकर माँ का पहले गाढ़ा पीला दूध पीने से शिशु को हर तरह की बिमारी से लड़ने के लिए सक्षम बनाने में मदद मिलती है। तो आइये आज हम आपको ऐसे की कुछ सुपरफूड के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन यदि स्तनपान करवाने वाली महिला करती है तो इससे महिला को फिट रहने के साथ दूध उत्पादन में भी वृद्धि करने में मदद मिलती है।

सौंफ

सौंफ का सेवन करने से गर्भवती महिला को दूध का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही दूध के जरिये सौंफ के फायदे शिशु को भी मिलते हैं, जिससे शिशु को पेट में गैस या दर्द जैसी परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।

मेथी के बीज

ओमेगा 3, वसा विटामिन से भरपूर मेथी के बीज का सेवन करने से स्तनपान करवाने वाली माँ को स्वस्थ रहने के साथ दूध की आपूर्ति को बढ़ाने में मदद मिलती है। और इसका सेवन करने से शिशु के शारीरिक के साथ मानसिक विकास को भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है, क्योंकि ओमेगा 3 शिशु के मस्तिष्क विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। साथ ही मेथी के साग में बीटा कैरोटीन, विटामिन बी, आयरन, कैल्श्यिम, आदि भरपूर मात्रा में होते है

जीरा

कैल्शियम, राइबोफ्लेविन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर जीरे का सेवन करने से भी स्तनपान करवाने वाली महिला को बहुत फायदा मिलता है। क्योंकि शिशु के लिए दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ महिला या नवजात को होने वाली कब्ज़, पेट फूलने, जैसी समस्या से निजात दिलाने के साथ यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में भी मदद करता है। आप सब्जी बनाने में इसका इस्तेमाल करने के साथ इसे भूनकर इसका पाउडर तैयार करके रख सकती है, और उसके बाद सब्जी, सलाद, फलों, दही, आदि में डालकर भी इसका सेवन कर सकती है।

लहसुन

लहसुन का सेवन भी यदि शिशु को दूध पिलाने वाली माँ करती है तो इससे दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलती है। लेकिन लहुसन का अधिक सेवन करने से दूध के स्वाद में शिशु को थोड़ा फर्क महसूस हो सकता है। ऐसे में महिला को बहुत ज्यादा मात्रा में इसके सेवन से बचना चाहिए।

तुलसी

औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी का सेवन करने से भी स्तन में दूध का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही इससे भूख भी बढ़ने लगती है, ऐसे में इसके इस्तेमाल के लिए आप तुलसी की चाय का सेवन कर सकते हैं।

दालें

दालों में कैल्शियम, प्रोटीन व अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं जो डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी फिट करने के साथ स्तन में दूध की आपूर्ति को पूरा करती है। जिससे शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में भी मदद मिलती है, खासकर मूंग दाल, मसूर दाल को दूध उत्पादन के लिए बेहतरीन माना गया है।

घीया तौरी जैसी सब्जियां

ऐसा माना जाता है घीया, तौरी, टिंडे जैसी सब्जियां भी स्तन में दूध की वृद्धि को बढ़ाने में मदद करती हैं। यह सब्जियां न केवल पचाने में आसान होती है बल्कि डिलीवरी के बाद महिला को फिट रखने में भी मदद करती है।

तिल के बीज

तिल के बीज का सेवन करने से भी डिलीवरी के बाद महिला के स्तन में पर्याप्त मात्रा में दूध को उतरने में मदद मिलती है। साथ ही इसमें मौजूद पोषक तत्व महिला के साथ शिशु के लिए भी बहुत ज्यादा फायदेमंद होते हैं। इसके सेवन के लिए आप इसके लड्डू बनाकर, या अपनी सब्जियों में डालकर भी इसका सेवन कर सकती है।

हरी सब्जियां

पोषक तत्वों से भरपूर हरी सब्जियों का सेवन करने से भी ब्रेस्ट में दूध का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। क्योंकि इसमें आयरन, कैल्शियम, फोलेट जैसे खनिजों के साथ बीटा कैरोटीन, राइबोफ्लेविन जैसे विटामिन भी भरपूर मात्रा में होते हैं जो दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसीलिए डिलीवरी के बाद एक महिला को एक टाइम के आहार में इन्हे जरूर शामिल करना चाहिए।

ड्राई फ्रूट्स

बादाम, काजू, जैसे ड्राई फ्रूट्स भी पोषक तत्वों की खान होते हैं, साथ ही डिलीवरी के बाद यह महिला को जल्दी रिकवर करने के साथ दूध का उत्पादन बढ़ाने में भी मदद करते हैं। ऐसे में हलवा, खीर, दूध आदि में डालकर या वैसे ही इनका सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

ब्राउन राइस

एक शोध के अनुसार ब्राउन राइस डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी फिट करने, पाचन क्रिया को मजबूत करने के साथ ब्रेस्ट मिल्क को बढ़ाने में भी मदद करते हैं। ऐसे में महिला चाहे तो इनका सेवन भी कर सकती है।

ओट्स मील

फाइबर से भरपूर ओट्स मील डिलीवरी के बाद महिला के लिए एक बेहतरीन नाश्ता हैं, जो न केवल महिला के पेट को भरने में मदद करता है बल्कि इससे महिला को ऊर्जा भी मिलती है। साथ ही ऐसे हेल्दी नाश्ते का सेवन करने से शिशु के लिए भी भरपूर मात्रा में आहार तैयार करने में मदद मिलती है।

संतरा

संतरे में पानी भरपूर मात्रा में होता है और साथ ही विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी, कैल्शियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, जैसे पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में होते हैं। ऐसे में यदि महिला शिशु को स्तनपान करवाने से पहले संतरे के रस या संतरे का सेवन करती है तो इससे दूध के उत्पादन में वृद्धि होती है। और साथ ही डिलीवरी के बाद यह महिला का वजन घटाने के साथ हाइड्रेटेड रहने में भी मदद करता है।

खसखस

खसखस डिलीवरी के बाद महिला को फिट रखने के साथ ब्रेस्ट मिल्क को बढ़ाने में भी मदद करती है, ऐसे में महिला को सब्जी, चटनी आदि बनाकर इसका सेवन भी जरूर करना चाहिए। साथ ही यह डिलीवरी के बाद महिला को मानसिक रूप से आराम पहुँचाने में भी लाभदायक होती है।

गाजर

गाजर में विटामिन ए की मात्रा पर्याप्त होती है जो ब्रेस्ट मिल्क को बढ़ाने के लिए एक बेहतरीन स्त्रोत है। इसीलिए स्तनपान बढ़ाने के लिए डिलीवरी के बाद महिला इसका सेवन कर सकती है। इसके सेवन के लिए सालदम सब्ज़ी, सूप, जूस आदि के रूप में इसका सेवन किया जा सकता है।

कच्चा प्याज

नई माँ यदि अपने भोजन के साथ कच्चे प्याज का सेवन करती है तो इससे भी स्तन में दूध का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। इसीलिए महिला को डिलीवरी के बाद सलाद के रूप में खाने के साथ इसे जरूर शामिल करना चाहिए।

सोयाबीन

सोयाबीन का सेवन करने के साथ सोयाबीन का दूध पीने से भी ब्रेस्ट मिल्क को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसीलिए यदि किसी महिला का डिलीवरी के बाद दूध अच्छे से न उतर रहा हो तो महिला इस उपाय का इस्तेमाल कर सकती है।

एप्रिकोट

फाइबर व कैल्शियम से भरपूर एप्रिकोट का सेवन यदि दूध पिलाने वाली माँ करती है, तो इससे महिला को ब्रेस्ट मिल्क को बढ़ाने में मदद मिलती है, जिससे शिशु के लिए पर्याप्त मात्रा में ब्रेस्ट में दूध का उत्पादन होता है।

डेरी प्रोडक्ट्स

डेरी प्रोडक्ट्स का सेवन भी जितना दूध पिलाने वाली माँ करती है उससे दूध का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके लिए महिला दूध, दही, पनीर, व दूध से बनी अन्य चीजों का सेवन भरपूर मात्रा में कर सकती है।

शकरगन्दी

कार्बोहाइड्रेट्स से भरपूर स्वीट पोटैटो का सेवन करने से भी डिलीवरी के बाद महिला को बहुत फायदा मिलता है क्योंकि इससे महिला को शारीरिक रूप से फिट होने के साथ, शिशु को भी फायदा पहुंचाने में मदद मिलती है।

हल्दी

ब्रेस्ट मिल्क को बढ़ाने के लिए हल्दी भी एक बेहतरीन उपाय है, और यह हर घर में आसानी से मिल भी जाती है, क्योंकि सब्जियों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में इसके सेवन का सबसे बेहतरीन उपाय होता है हल्दी वाला दूध, साथ ही सब्जियों में भी आप इसका भरपूर मात्रा में इस्तेमाल कर सकते हैं।

अजवाइन

अजवाइन का सेवन भी यदि दूध पिलाने वाली माँ भरपूर मात्रा में करती है तो इससे ब्रेस्ट मिल्क को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए अजवाइन का पानी, पराठे, सब्जियों आदि में डालकर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

पेय पदार्थ

पानी, जूस, दूध, नारियल पानी जैसे पेय पदार्थो का सेवन भी दूध पिलाने वाली माँ को भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि इससे दूध की मात्रा बढ़ाने के साथ महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है। खासकर जब आप शिशु तो दूध पिलाने जा रही है उससे पहले कुछ न कुछ जरूर पीना चाहिए, क्योंकि इससे दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलती है।

फल

सब्जियों के साथ फलों में भी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, ऐसे में ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने के लिए महिला अपनी डाइट में फलों को भी भरपूर मात्रा में शामिल कर सकती है।

करी पत्ता

करी पत्ता भी ब्रेस्ट में दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है, इसका इस्तेमाल सब्जियों में भरपूर मात्रा में करके इसका सेवन किया जा सकता है।

तो यह हैं वो कुछ आहार जिनका सेवन यदि स्तनपान करवाने वाली महिला करती है तो इससे दूध का उत्पादन बढ़ाने के साथ शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में भी मदद मिलती है। इसीलिए स्तनपान करवाने वाली महिला को इन आहार को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। और फिर भी यदि किसी कारण ब्रेस्ट में दूध का उत्पादन नहीं हो रहा है तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए।

प्रेगनेंसी में एक से नौ महीने तक ऐसे रहें फिट

गर्भावस्था का समय महिला के लिए उतार चढ़ाव और बहुत से बदलाव से भरा हुआ होता है। लेकिन प्रेगनेंसी में चाहे कोई भी दिक्कत हो महिला को अपनी सेहत के प्रति सावधानी बरतनी बहुत जरुरी होती है। क्योंकि महिला यदि थोड़ी सी भी लापरवाही बरतती है तो इसके कारण प्रेग्नेंट महिला के साथ भ्रूण की सेहत पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के दौरान कोई दिक्कत न हो और महिला को फिट रहने के साथ भ्रूण का विकास बेहतर तरीके होने में मदद मिल सके। इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को कुछ टिप्स का ध्यान रखना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फिट रहने के लिए किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

डॉक्टर से जाँच

  • प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद से लेकर डिलीवरी होने तक आपको डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए।
  • कोई भी जांच हो, टीकाकरण हो समय से करवाएं आनाकानी नहीं करें।
  • डॉक्टर के पास रूटीन चेकअप के लिए जाएँ।
  • यदि प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में महसूस होने वाला लक्षण से असहजता महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
  • यदि गर्भवती महिला इन सब चीजों का प्रेगनेंसी में ध्यान रखती है तो इससे महिला को फिट रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में फिट रहने के लिए लें मल्टी विटामिन

  • डॉक्टर द्वारा बताए गए मल्टी विटामिन का नियमित रूप से प्रेगनेंसी के दौरान सेवन करें।
  • इसके अलावा अलग से अपने आहार में भी पोषक तत्वों के रूप में विटामिन्स व् अन्य मिनरल्स को शामिल करें।
  • मल्टी विटामिन का सेवन करने से भी प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने में मदद मिलती है।
  • साथ ही भ्रूण का विकास भी बेहतर होने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी से जुडी जानकारी इक्कठी करें

  • गर्भावस्था को आसान बनाने के लिए और उसे समझने के लिए प्रेगनेंसी व् प्रसव से जुडी पूरी जानकारी इक्कठी करें।
  • जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, क्या खाना चाहिए क्या नहीं, क्या सही है क्या गलत है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला को इन सब चीजों का पता होता है तो यह सब चीजें प्रेग्नेंट महिला को फिट रखने में मदद करती है।

पोषक तत्वों से भरपूर लें आहार

  • खान पान का अच्छे से ध्यान रखना प्रेगनेंसी के दौरान बहुत जरुरी होता है।
  • क्योंकि इससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के साथ भ्रूण के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।
  • जैसे की कैल्शियम, प्रोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, फाइबर, व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर आहार का यदि महिला सेवन करती है।
  • तो इससे महिला को फिट और ऊर्जा से भरपूर रहती है साथ ही इससे भ्रूण के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में फिट रहने के लिए न होने दें शरीर में पानी की कमी

  • प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहने के लिए गर्भवती महिला को बॉडी में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए।
  • यदि महिला हाइड्रेटेड रहती है तो इससे महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने, प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने, भ्रूण के लिए गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रखने में मदद मिलती है।

थोड़ा व्यायाम भी है जरुरी

  • प्रेगनेंसी एक ऐसी अवस्था है जहां महिला को भरपूर आराम करना चाहिए।
  • लेकिन यह कोई बिमारी नहीं है की महिला को व्यायाम नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि यदि प्रेग्नेंट महिला व्यायाम नहीं करती है तो इससे महिला बीमार पड़ सकती है।
  • क्योंकि इसके कारण महिला की बॉडी में ब्लड फ्लो से जुडी समस्या हो सकती है जिससे महिला की दिक्कतें बढ़ सकती है।
  • ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला को थोड़ा व्यायाम, योगासन या मैडिटेशन जरूर करनी चाहिए।

तनाव न लें खुश रहें

  • प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहने के लिए महिला को केवल शारीरिक रूप से नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।
  • क्योंकि प्रेग्नेंट महिला यदि तनाव लेती है।
  • तो इसके कारण केवल गर्भवती महिला की फिटनेस पर ही नहीं बल्कि भ्रूण के विकास पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
  • इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को जितना हो सके तनाव से बचना चाहिए और खुश रहना चाहिए।

प्रेगनेंसी में फिट रहने के लिए रखें भरपूर नींद का ध्यान

  • गर्भवती महिला को खान पान के साथ भरपूर नींद का भी प्रेगनेंसी के दौरान ध्यान रखना चाहिए।
  • बल्कि गर्भवती महिला को दिन में आठ से ज्यादा घंटे की नींद लेनी चाहिए।
  • क्योंकि जितनी बेहतर महिला नींद लेती है उतना ही महिला को फिट व् स्वस्थ रहने में मदद मिलती है ।

एन्जॉय करें अपनी प्रेगनेंसी को

  • प्रेगनेंसी एक ऐसा समय होता है जहां महिला अपनी जिंदगी के बेहतरीन लम्हो का आनंद लेती है।
  • जो एक महिला ही महसूस कर सकती है।
  • ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहने के लिए आपको प्रेगनेंसी के इन लम्हो को एन्जॉय करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान रखने से प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान किसी भी दिक्कत या असहज लक्षण के महसूस होने पर डॉक्टर से बात करें। ताकि आपको प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की दिक्कत से बचे रहने में मदद मिल सके।

गर्मियों में नारियल पानी क्यों जरुरी है प्रेगनेंसी में

नारियल पानी बहुत से गुणों का भंडार जाना जाता है और इसमें प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइटस भी पाए जाते है। नारियल पानी में बहुत अधिक मात्रा में पोटैशियम, क्लोराइड और मैग्नीशियम पाया जाता है। यह तीनो इलेक्ट्रोलाइटस ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करते है और साथ ही हार्ट को सही तरीके से काम करने में मदद करते है। कई रिसर्च द्वारा यह बात साबित होती है के नियमित रूप से रोजाना नारियल पानी का सेवन करने से ब्लड प्रेशर कम हो जाता है।

यह एक रिफ्रेशिंग पेय प्रदार्थ के रूप में भी जाना जाता है। इसमें मौजूद पी एच् बैलेंस और हमारे खून में पाए जाने वाले पी एच् बैलेंस बिलकुल एक समान है। इसीलिए इसके प्रयोग से हमे कोई नुक्सान नहीं होता। नारियल पानी में वसा और कोलेस्ट्रॉल बिलकुल भी नही होती है। गर्भवस्था में इसके प्रयोग से बहुत सी परेशानियों बचा जा सकता है।

गर्भवती महिला को अक्सर थकान और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो जाती है। शरीर में बहुत से बदलावों के कारण ऐसा होता है। इन्ही बदलावों के कारण रोजाना घर के या ऑफिस के काम करने में परेशानी आने लगती है। गर्भवती महिला को अपने रोजाना के कार्य करने के लिए अच्छे पौष्टिक आहार और तरल प्रदार्थों की भरपूर मात्रा की जरुरत पड़ती है। नारियल पानी गर्भवती महिला के लिए इन सभी से छुटकारा दिलवाने वाला है। नारियल पानी सभी नुट्रिएंट्स से भरपूर होता है। आइये जानते है के गर्भावस्था के नारियल पानी पीना क्यों जरुरी है।

इम्युनिटी

ताजे और कच्चे नारियल के पानी में एंटीओक्सिडेंट तत्व, जरुरी विटामिन्स और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते है, जो की हमारी इम्युनिटी यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते है। हम सभी जानते है के गर्भवस्था में महिला की इम्युनिटी पावर कमजोर हो जाती है ऐसे में इम्युनिटी बढ़ाने के लिए नारियल पानी का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।

नारियल पानी में लॉरिक एसिड और एक मध्यम चैन का फैटी एसिड भी पाया जाता है। यह दोनों एसिड हमारे शरीर में जाकर बहुत मजबूत एंटीमाइक्रोबियल कंपाउंड बनाते है। जिससे हमारे शरीर में नुकसानदायक बैक्टीरिया, वायरस और फ्लू आदि टिक नहीं पाता है।

कब्ज

पाचन क्रिया का धीमा पड़ जाना और कब्ज जैसी परेशानियां गर्भावस्था बहुत सामान्य मानी जाती है। खाने के ना पचने से गैस, सीने में जलन, पेट में जलन होने लगती है। नारियल पानी को डाइटरी फाइबर का एक अच्छा स्रोत माना जाता है। इसके नियमित सेवन से पाचन क्रिया से जुड़ी सभी समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है। इसके अतिरिक्त नारियल पानी हमारे शरीर के पी एच् बैलेंस का लेवल अच्छा करके शरीर के सारी गन्दगी से भी छुटकारा दिलवाता है।

नारियल पानी का रोजाना सेवन करने से पेट से संबंधित परेशानियों से तो छुटकारा मिलेगा ही साथ ही गर्भवती महिला को उलटी, जी घबराना, मिचली आदि से भी निजात दिलवाएगा।

डिहाइड्रेशन

डिहाइड्रेशन यानी की शरीर में पानी की कमी हो जाना, वैसे तो गर्मियों में अक्सर सभी को इस परेशानी से गुजरना पड़ता है। लेकिन गर्भावस्था के यह परेशानी ज्यादातर महिलाओं को हो जाती है डिहाइड्रेशन की स्थिति गर्भवती महिला के लिए बहुत हानिकारक भी हो सकती है। नारियल पानी एक हल्का, ठंडा और रिफ्रेशिंग पेय प्रदार्थ है जो की इलेक्ट्रोलाइटस कंटेंट से भरपूर है।

गर्भवस्था में नारियल पानी के सेवन से डिहाइड्रेशन की प्रॉब्लम का सामना नहीं करना पड़ेगा और यदि पानी की कमी हो भी गयी है तो भी नारियल पानी पीने से पानी की कमी पूरी हो जायेगी। इसके सेवन से गर्भवती महिला को थकान और चिड़चिड़ेपन से भी छुटकारा मिलेगा। नारियल पानी गर्भावस्था आपके शरीर के लिए एक एनर्जी ड्रिंक की तरह काम करेगा। नारियल पानी एनर्जी के साथ साथ फ्रेशनेस यानि ताजगी का भी आनंद मिलेगा।

कम शुगर

गर्मियों में अक्सर हम लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए तरह तरह के पेय प्रदार्थों का प्रयोग करते है जैसे कोल्डड्रिंक्स, फलों का रस, शरबत और निम्बू पानी आदि। पर इन सभी चीजों का प्रयोग करते समय हम यह भूल जाते है के इनमे शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है। जिस कारण कई लोगों का शुगर लेवल बढ़ जाता है। और गर्भवती महिला का शुगर कई बार हार्मोनल बदलावों के कारण भी बढ़ जाता है।

सभी फलों के रस और एनर्जी ड्रिंक्स में से एकमात्र नारियल पानी में सभी कम प्राकृतक शुगर पायी जाती है। इसके नियमित सेवन से गर्भावस्था में प्यास भी बुझती है, शुगर होने का खतरा भी कम होता है और साथ ही हमारी एनर्जी लेवल भी बढ़ता है। नारियल पानी एक प्राकृतिक ठंडा पेय प्रदार्थ होता है जो हमारे शरीर को भी ठंडा करता है।

भ्रूण विकास

नारियल पानी का नियमित सेवन सिर्फ गर्भवती महिला को ही बिमारियों से दूर नहीं रखता बल्कि उसके भ्रूण को भी विकास में मदद करता है। इसमें मौजूद जरुरी विटामिन्स और मिनरल्स शिशु के विकास में बहुत ही फायदेमंद होते है। नारियल पानी में मौजूद प्राकृतिक कैल्शियम शिशु की हड्डियों को विकसीत होने और मजबूत बनने में मदद करता है।

पैरों में क्रैम्प्स

गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं को पोटैशियम की कमी हो जाती है जिसके परिणाम स्वरूप कई बार टांगो में क्रैम्प्स से पड़ने लगते है यानी की एक तीखा सा दर्द जो कभी भी गर्भवती महिला को सता सकता है। 330 मिली नारियल पानी में 670 mg पोटैशियम की मात्रा पायी जाती है। संतुलित आहार के साथ नारियल पानी का नियमित सेवन इस लेग क्रैम्प्स से छुटकारा दिलवाएगा।

 ब्लड प्रेशर

गर्भावस्था में अक्सर महिलाओं का ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। बहुत ज्यादा ब्लड प्रेशर होने से हार्ट रेट पर भी असर पड़ता है। नारियल पानी के नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर भी कण्ट्रोल में रहता है और हार्ट भी सुचारु रूप से काम कर सकता है। इसके अतरिक्त नारियल पानी पूरी तरीके से कोलेस्ट्रॉल से मुक्त होता है जिस वजह से इसके सेवन से गर्भवती महिला के शरीर में ज्यादा खराब कोलेस्ट्रॉल भी नहीं जा पाता। इससे गर्भवती महिला को एक सेहतमंद वेट बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

एमनीओटिक फ्लूइड

गर्भवस्था के आखिरी तीन महीनों में एमनीओटिक फ्लूइड का लेवल अच्छा होना चाहिए जिससे डिलीवरी के समय कोई परेशानी ना आये। नारियल पानी के नियमित सेवन से फ्लूइड का लेवल भी सहीं बना रहता है और साथ ही ब्लड सर्कुलेशन भी अच्छा हो जाता है।

नारियल पानी का सेवन गर्भावस्था के सम्पूर्ण समय के लिए ही फायदेमंद है। फिर भी अगर आप पूरे नो महीने नारियल पानी ना पी सके तो गर्मियों के समय में इसका सेवन जरूर करें।

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने गर्भवती महिला नाश्ते में खाएं यह चीजें

आपने यह तो सुना ही होगा सुबह का नाश्ता यानी दिन का पहला आहार ऐसा होना चाहिए जो दिन भर के लिए आपको एनर्जी दे, और आप उसे खाने के बाद रिफ्रैश व् ऊर्जा से भरपूर महसूस करें। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को तो अपने दिन के पहले आहार का सबसे अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि इस दौरान महिला अकेली नहीं होती है बल्कि वो जो भी करती है उसका फायदा या नुकसान उसके बच्चे को भी मिलता है साथ ही महिला को भरपूर ऊर्जा की जरुरत होती है।

इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला अपने नाश्ते का अच्छे से ध्यान रखती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने के साथ बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। तो आइये इस आर्टिकल में आज हम आपको प्रेग्नेंट महिला को नाश्ते में क्या खाना चाहिए उस बारे में बताने जा रहे हैं। और प्रेगनेंसी की हर तिमाही में महिला को अपनी डाइट में थोड़ा थोड़ा बदलाव करते रहना चाहिए।

प्रेगनेंसी के 1 से 3 महीने तक गर्भवती महिला नाश्ते में करें इन चीजों को शामिल

  • गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में गर्भवती महिला को नाश्ते में फ्रूट्स जैसे की सेब, केला, अनार, तरबूज आदि की चाट बनाकर उसका का सेवन करना चाहिए। फलों के साथ महिला चाहे तो फलों के घर पर निकले ताजे रस का सेवन भी कर सकती है।
  • दूध व् दूध से बनी चीजों का सेवन जैसे की एक गिलास दूध, एक कटोरी दही का सेवन भी कर सकती है। लेकिन ध्यान रखें की फल खाएं हैं तो कम से कम आधे घंटे बाद दूध पीएं, दूध पी रही हैं तो दही का सेवन न करें क्योंकि इससे महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी हो सकती है।
  • सुबह के नाश्ते में गर्भवती महिला पराठे लेकिन ज्यादा तले हुए नहीं का सेवन दही के साथ कर सकती है।
  • गर्भवती महिला को सुबह नाश्ता खत्म होने के बाद या पहले भीगे हुए बादाम का सेवन भी करना चाहिए।
  • नाश्ते में गर्भवती महिला सब्जियों के बने सूप का सेवन भी कर सकती है।
  • प्रेग्नेंट महिला रोजाना नाश्ते में इन में से अलग अलग चीजों का सेवन कर सकती है ऐसे में यदि कभी महिला का कुछ अलग खाने का मन करें तो प्रेग्नेंट महिला सैंडविच बनाकर भी खा सकती है उसमे महिला एक पनीर का टुकड़ा, टमाटर, खीरा घर पर बनी हुई सॉस आदि का इस्तेमाल करके स्वादिष्ट व् हेल्दी नाश्ता बना सकती है।

प्रेगनेंसी के 4 से 6 महीने तक गर्भवती महिला नाश्ते में करें इन चीजों को शामिल

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में गर्भवती महिला उन सभी चीजों का सेवन तो कर सकती है जो महिला प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में खा रही थी लेकिन साथ ही महिला को कुछ अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन भी शुरू कर देना चाहिए। क्योंकि इस समय बच्चे का शारीरिक विकास बढ़ रहा होता है। तो आइये जानते हैं की दूसरी तिमाही में गर्भवती महिला नाश्ते में किन चीजों को शामिल कर सकती है:-

  • अंडे पोषक तत्वों की खान होते हैं, ऐसे में दूसरी तिमाही में महिला को नाश्ते में अंडे का सेवन जरूर करना चाहिए। महिला उबले हुए अंडे, भुर्जी, ऑमलेट किसी भी तरीके से अंडे का सेवन कर सकती है। लेकिन ध्यान रखें की कच्चे अंडे का सेवन न करें।
  • दूसरी तिमाही में भरपूर ऊर्जा के लिए महिला सब्जियों का इस्तेमाल करके पोहा, दलिया, ओट्स आदि बनाकर भी उनका सेवन कर सकती है।
  • इसके साथ नाश्ते में नारियल पानी, जूस दूध आदि में से भी किसी न किसी चीज को जरूर शामिल करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के 7 से 9 महीने तक गर्भवती महिला नाश्ते में करें इन चीजों को शामिल

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में गर्भवती महिला उन सभी चीजों का सेवन तो कर सकती है जो महिला प्रेगनेंसी की पहली और दूसरी तिमाही में खा रही थी साथ ही अब महिला को कुछ अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन भी शुरू कर देना चाहिए। क्योंकि इस समय महिला को और ज्यादा एनर्जी की जरुरत होती हैं और साथ ही इस दौरान बच्चे का विकास भी और ज्यादा तेजी से होता है और शिशु के अंग भी काम करना शुरू कर रहे होते हैं। तो आइये जानते हैं की तीसरी तिमाही में गर्भवती महिला नाश्ते में किन चीजों को शामिल कर सकती है:-

  • केले का सेवन प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में नाश्ते में जरूर करना चाहिए क्योंकि यह फाइबर व् ऊर्जा का बेहतरीन स्त्रोत होता है।
  • दालों का सेवन भी गर्भवती महिला प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में नाश्ते में कर सकती है।
  • सब्जियों के पराठे बनाकर दही के साथ महिला उनका सेवन कर सकती है।
  • सफ़ेद की जगह ब्राउन ब्रेड व् राइस का सेवन प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला कर सकती है।
  • प्रेग्नेंट महिला नाश्ते में एक से दो चम्मच देसी घी का सेवन भी जरूर करें।

तो यह हैं कुछ आहार से जुड़े टिप्स जो प्रेग्नेंट महिला को पूरे नौ महीने तक अपने नाश्ते में शामिल करने चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला को पूरा दिन एनर्जी से भरपूर रहने, प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स को कम करने, बच्चे के शारीरिक व् मानसिक विकास को बेहतर करने में मदद मिल सके।