लहसुन केवल आपके खाने का स्वाद बढ़ाने में ही मदद नहीं करता है बल्कि इसमें बहुत से पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो आपको बहुत सी बिमारियों से सुरक्षित रहने में भी मदद मिलती है। लेकिन जब बात प्रेगनेंसी की हो तो गर्भवती महिला को लहसुन खाना चाहिए या नहीं? लहसुन का सेवन कितना और कैसे करना चाहिए? इन बातों के बारे में जानना भी जरुरी होता है। ताकि लहसुन का सेवन करने से किसी भी तरह की दिक्कत गर्भवती महिला या बच्चे को न हो। तो आइये अब प्रेगनेंसी में लहसुन का सेवन करने के बारे में विस्तार से जानते हैं।
प्रेगनेंसी में लहसुन का सेवन करना चाहिए या नहीं?
लहसुन में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते है और वह पोषक तत्व माँ व् बच्चे दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला लहसुन का सेवन कर सकती है। लेकिन कच्चा लहसुन, जरुरत से ज्यादा लहसुन का सेवन गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। साथ ही जिन गर्भवती महिलाओं को लहसुन खाने से एलर्जी है या लहसुन खाने से बाद खुजली या अन्य कोई परेशानी होती है तो महिला को लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए।
गर्भावस्था में कब और कितना करें लहसुन का सेवन?
एक दिन में दो से चार कली लहसुन का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है। और यह लहसुन महिला सब्ज़ी में डालकर खा सकती है। लेकिन ध्यान रखें की केवल लहसुन की चटनी पीसकर खाने से भी बचें। साथ ही प्रेगनेंसी की तीनों तिमाहीं में गर्भवती महिला लहसुन का सेवन कर सकती है। इसके लिए कोई खास समय नहीं है की प्रेगनेंसी के इसी महीने में आपको लहसुन का सेवन करना चाहिए।
प्रेगनेंसी में लहसुन खाने के फायदे
गर्भावस्था के दौरान यदि महिला लहसुन का सेवन करती है तो ऐसा करने से महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं। जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फिट रखने में मदद करते हैं। जैसे की:
इम्युनिटी बढ़ती है
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है जिस वजह से गर्भवती महिला को संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन लहसुन का सेवन करने से गर्भवती महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे दोनों बिमारियों व् संक्रमण से बचें रहते हैं।
हाई ब्लड प्रैशर से बचाव
गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाएं हाई ब्लड प्रैशर की समस्या से ग्रसित हो जाती है। जिसका बुरा असर माँ के साथ बच्चे की सेहत पर पड़ने का खतरा भी रहता है। ऐसे में लहसुन का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि लहसुन का सेवन करने से ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने के साथ लहसुन का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल में रहने में भी मदद मिलती है और हदय को स्वस्थ रहने में भी मदद मिलती है।
समय से पहले बच्चे के जन्म का खतरा होता है कम
गर्भावस्था के दौरान लहसुन का सेवन करने से समय से पहले बच्चे के जन्म होने के खतरे को कम करने के साथ जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी परेशानी से भी निजात मिलता है।
तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेगनेंसी के दौरान लहसुन का सेवन करने से मिलते हैं। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी लहसुन का सेवन जरूर करें ताकि आपको और आपके बच्चे को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
हर गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान केवल एक ही बात को लेकर परेशान रहती है की गर्भ में शिशु का विकास बेहतर तरीके से हो रहा है या नहीं। क्योंकि उस दौरान महिला के लिए वही सबसे महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में शिशु के बेहतर विकास के लिए महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, और ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहिए जिससे पेट पर जोर पड़े या शिशु को किसी भी तरह का नुकसान हो। ऐसे में शिशु को लेकर महिला को खाने पीने को लेकर थोड़ी परेशानी हो सकती है खासकर जो महिला पहली बार माँ बनती है वो हर खाने की चीज के बारे में सबसे सलाह ले सकती है। ऐसे की कई गर्भवती महिलाओं का प्रेगनेंसी के दौरान शकरगंद यानी स्वीट पोटैटो खाने का मन कर सकता है। तो आपको बिल्कुल भी सोचने की जरुरत नहीं है क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान शकरगंद का सेवन गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होता है।
प्रेगनेंसी में शकरकंद खाने के फायदे
विटामिन ए, विटामिन सी, आयरन, पोटैशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर शकरगंद का सेवन यदि गर्भवती महिला करती है तो इससे गर्भवती महिला और शिशु दोनों को फायदा मिलता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को शकरगंद का सेवन करने से कौन कौन से फ़ायदे मिलते हैं।
आयरन
आयरन की मात्रा यदि गर्भवती महिला के शरीर में पूरी होती है तो इससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। और आयरन शकरगंद में भरपूर मात्रा में शामिल होता है जिससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ एनीमिया जैसी परेशानी से भी बचने में मदद मिलती है, और शिशु का विकास भी सही से होता है।
विटामिन ए
प्रेग्नेंट महिला यदि शकरगंद का सेवन करती है तो इसमें मौजूद विटामिन ए गर्भवती महिला के स्वास्थ्य को बेहतर रखने और गर्भ में शिशु के विकास में भी मदद करता है। साथ विटामिन ए भी एक एंटी ऑक्सीडेंट की तरह काम करता है जो गर्भवती महिला को सूजन की समस्या से बचाने के साथ आँखों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
फाइबर
शकरगंद में फाइबर भी प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता है। और गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पाचन क्रिया के धीमे पड़ने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला शकरगंद का सेवन करती है तो महिला को कब्ज़, पेट में गैस से निजात मिलने के साथ पाचन क्रिया को सही तरीके से काम करने में मदद मिलती है।
पोटैशियम
गर्भवती महिला यदि शकरगंद का सेवन करती है तो इसके कारण गर्भवती महिला की बॉडी में पोटैशियम की मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है। जो प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड शुगर लेवल और ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने में मदद करती है।
विटामिन सी
विटामिन सी न केवल गर्भवती महिला के लिए बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी बहुत जरुरी होता है। क्योंकि इससे गर्भवती महिला के इम्यून सिस्टम को मजबूत रहने में मदद मिलती है, साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में शिशु के विकास को भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। इसके अलावा विटामिन सी बॉडी में आयरन को भरपूर मात्रा में अवशोषित करने में भी मदद करता है।
विटामिन बी6
विटमिन b6 की मात्रा यदि गर्भवती महिला के शरीर में पूरी होती है तो इससे गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। साथ ही यह बॉडी में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण करने में मदद करती है जिससे प्रेगनेंसी के समय बॉडी में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बनाए रखने में मदद मिलती है।
शकरकंद खाने के नुकसान
प्रेगनेंसी में हर चीज का सेवन पर्याप्त मात्रा में ही करना चाहिए क्योंकि जरुरत से ज्यादा किसी भी चीज का सेवन गर्भवती महिला की सेहत के साथ गर्भ में शिशु के विकास पर भी असर डाल सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को शकरगंद का सेवन अधिक मात्रा में करने से कौन से नुकसान हो सकते हैं।
यदि प्रेग्नेंट महिला जरुरत से ज्यादा शकरगंद का सेवन करती है, तो इसके कारण समय पूर्व प्रसव, गर्भपात, जैसी परेशानी का सामना महिला को करना पड़ सकता है।
इसके अधिक सेवन के कारण महिला को पथरी जैसी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।
शकरगंद का अधिक सेवन करने के कारण गर्भवती महिला को पेट में दर्द, गैस व् दस्त जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
यदि आपका वजन अधिक है या आप शुगर की मरीज़ है तो भी प्रेगनेंसी के दौरान इसके सेवन से बचना चाहिए।
तो यह हैं कुछ फायदे और नुकसान जो गर्भवती महिला को शकरगंद का सेवन करने से हो सकते हैं। ऐसे में शकरगंद के फायदे उठाने के लिए गर्भवती महिला को इसका पर्याप्त मात्रा में सेवन करना चाहिए ताकि इसके कारण गर्भवती महिला या शिशु के विकास पर किसी भी तरह का बुरा असर न पड़े।
गर्भावस्था में सीने में जलन होने के कारण, प्रेगनेंसी महिला के लिए एक सुखद अहसास होता है। लेकिन साथ ही इस दौरान प्रेग्नेंट महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। जैसे की उल्टी, जी मिचलाना, पेट में दर्द, बॉडी पार्ट्स में दर्द, थकान, कमजोरी, कब्ज़, एसिडिटी, सीने में जलन आदि। तो आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेग्नेंट महिला सीने में होने वाली जलन से जुडी बातें करने जा रहें हैं। की गर्भवती महिला को सीने में जलन क्यों होती है? इसके लक्षण क्या हैं? और प्रेग्नेंट महिला इस समस्या से बचाव के लिए क्या कर सकती है? तो आइये सबसे पहले जानते हैं की सीने में जलन क्या होती है।
प्रेगनेंसी के दौरान सीने में जलन
गर्भावस्था के दौरान सीने में जलन होना बहुत आम बात होती है। और बहुत सी महिलाएं एसिडिटी को ही सीने में जलन समझ लेती है। लेकिन यह दोनों अलग अलग होती है। पाचन तंत्र में खाने को हज़म करने के लिए जब ज्यादा एसिड बनने लगता है। तो इसके कारण एसिडिटी की समस्या हो जाती है। और जब यह एसिड भोजन नली में वापिस आता है तो इसके कारण सीने में जलन का अनुभव हो सकता है। और यदि खाना अच्छे से नहीं पचता है तो इसके कारण भी महिला को सीने में जलन का अनुभव हो सकता है।
प्रेगनेंसी में सीने में जलन होने के कारण
गर्भवती महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण सीने में जलन की समस्या हो सकती है।
खाने के अच्छे से हज़म न होने के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
वजन बढ़ने के कारण महिला की पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है जिसके कारण सीने में जलन का अनुभव हो सकता है।
कैफीन, खट्टे फल, मसालेदार भोजन, अल्कोहल, ज्यादा तेल युक्त आहार, ठंडा व् बासी भोजन खाने के कारण भी प्रेग्नेंट महिला को सीने में जलन की समस्या हो सकती है।
बहुत सी लड़कियों और महिलाओं में अनियमित माहवारी (पीरियड) सही टाइम पर न आने की एक आम समस्या होती है और इसलिए वह तनाव में आ जाती है।लेकिन इस समस्या से आप अकेली नहीं है,आप ही की तरह लाखो महिलाये इस समस्या से जूझ रही है। इसलिए आपको टेंशन या परेशान होने की कोई आवश्यकता नहीं है। बल्कि इस समस्या का सही इलाज करने से आपकी यह समस्या ठीक हो सकती है। हम आपको सही समय पर पीरियड आने के ऐसे सरल उपाय और घरेलू नुस्खे बतायेगे जिनका उपयोग करके आप पीरियड की इस समस्या से निजात पा सकते है।
मासिक धर्म का नियमित न होने या कभी जल्दी या कभी देर से होना और खून के थक्को के साथ आना ऋतुस्त्राव का अनियमित होना कहलाता है। मासिक धर्म हर एक २८ दिन के अंतराल में लगभग ४५ से ५० वर्ष की उम तक होता रहता है। यह 3 दिनों से लेकर ६ दिनों तक के समय के लिए होता है।महिलाओ को अनेक रोगो के साथ कमर में बहुत पीड़ा सिर दर्द व उलटी आदि लक्षण होते है। मासिक धर्म में अनिमियता आना तब तक एक सामान्य बात माना जाता है जब आपके पीरियड चालू होने वाले होते है। क्योकि शुरूआती पीरियड मिस हो जाते है जिसका कारण हार्मोनल इम्बैलेंस होता है। यह अनिमियता कुछ साल तक यूँ ही बनी रहती है लेकिन थोड़े समय बाद यह स्वयं ठीक हो जाती है।
मासिक धर्म नियमित रूप से न होना कोई बड़ी समस्या नहीं है और ज्यादातर ऐसा होने पर आपको कोई नुकसान भी नहीं होता। लेकिन डॉक्टर की सही सलाह लेना अनिवार्य है क्योकि कई बार ऐसा होने के पीछे कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या हो सकती है।
मासिक धर्म सही समय पर न होने के कारण
मानसिक तनाव या ज्यादा चिंता करने पर।
वजन घटना या बढ़ जाना।
खानपान सही न होना।
ज्यादा सफर करने से।
नियमित रूप से पोषक तत्वों को अपने भोजन में शामिल न करना।
हार्मोन्स इम्बैलेंस होने के कारण।
कॉफी,स्मोकिंग या अन्य प्रकार के नशो का सेवन करना।
प्रेग्नेंसी के समय ,बच्चे के जन्म के बाद या गर्भपात होने पर।
धूम्रपान और नशीली चीजों का सेवन न करे।
अगर आप ज्यादा दवाइयों का भी सेवन करते है तो आप मासिक धर्म में परेशानी होती है।
स्वास्थ्य सम्बन्थी समस्याये जैसे लिवर की खराबी, शुगर व् एनीमिया होने पर।
इन कारणों के आलावा पोएसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम जो की एक स्वास्थ्य समस्या है, इसके लिए आप डॉक्टर की सलाह ले सकते है। यह समस्या हमारी खराब जीवनशैली के कारण उतपन्न होती है। यह न केवल मासिक धर्म को अनियमित करती है बल्कि हार्ट प्रोब्लेम्स,डायबिटीज,थॉयरड बाँझपन आदि समस्या को भी जन्म देती है।गुप्तांगो में होने वाले रोग भी मासिक धर्म में देरी या मिस होने का मुख्य कारण होते है। इसलिए डॉक्टर की सलाह से इस समस्या का पूर्ण निदान करवाना चाहिए।
पीरियड अनियमित होने के कारण
शरीर में बहुत ज्यादा आलस्य,खून की कमी, माहवारी के समय ठंडी चीजों का सेवन, पानी में देर तक रहना,ज्यादा घूमना,ठण्ड लगना,मानसिक उद्वेग व मासिक धर्म के समय खाने-पीने में असावधानी आदि। इन सभी कारणों से मासिक धर्म रुक जाता है या समय पर नहीं होता। जिसके कारण आप अक्सर तनाव में रहते है।
पीरियड अनियमित होने की पहचान कैसे करे
अगर आपको निम्नलिखित समस्याएं रहती है तो आप समझिये की आपको माहवारी नियमित नहीं होगी
गर्भाशय या पेडू में दर्द होना
उलटी, स्तनों में दर्द, कब्ज
दूध कम निकलना
भूख न लगना
दिल का ज्यादा धड़कना
साँस लेने में तकलीफ होना
कान में तरह तरह की आवाजे सुनाई देना।
ठीक से नींद न आना।
आपको शरीर में जगह -जगह दर्द का अनुभव होना।
मानसिक तनाव में जल्दी आ जाना।
यह सभी कारण मासिक धर्म के अनियमित होने के कुछ प्रमुख लक्षण है। इनके द्वारा आप मासिक धर्म अनियमित होने के कारणों का पता लगा सकते है।
मासिक धर्म को ठीक व नियमित करने के कुछ नुस्खे
२-३ ग्राम कालीमिर्च का चूरन शहद के साथ सेवन करने से मासिक धर्म ठीक होता है।
दुब के रस का सेवन एक चम्मच रोज सुबह करने से रुकी हुई माहवारी ठीक होती है।
केसर के दूध का सेवन करने से मासिक धर्म अच्छे से आना शुरू हो जाता है।
शिलाजीत के उपयोग से मासिक धर्म ठीक होता है।
गाजर का सेवन करने से मासिक धर्म ठीक तो होता है है लेकिन इसके साथ-साथ आपकी सेहत भी दरुस्त रहती है।
दालचीनी,शहद और यष्टिमधु का सेवन करने से माहवारी में आराम होता है।
बथुए के बीज का चूरन सोंठ के साथ लेने से मासिक धर्म ठीक होता है।
शहद के साथ पुदीने का चूरन लेने से आपको आराम मिलेगा।
अखरोट,अंजीर,पालक और चकुंदर का प्रयोग करने से मासिक धर्म ठीक होता है।
१० ग्राम टिल,२ ग्राम कालीमिर्च,दो छोटी पीपल तथा थोड़ी सी शक्कर लेकर इसका काढ़ा बनाकर पीने से मासिक धर्म अच्छे से होता है।
कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर खाने से मासिक धर्म में आराम मिलता है।
एलोवेरा का रस दो चम्मच खली पेट पीने से मासिक धर्म में देरी होने वाली समस्या से छुटकारा मिलता है।
३ ग्राम तुलसी की जड़ का चूरन शहद के साथ सेवन करने से मासिक धर्म ठीक होता है।
५० ग्राम सॉंठ,५० ग्राम गुड़,५ ग्राम बायबिडंग और ५ ग्राम जौ को लेकर इन सब को मोटा पीस ले। एक गिलास पानी लेकर इन सब को पानी में डालकर उबाल ले, जब पानी आधा रह जाये तब आप इस पानी को पी ले। इसके सेवन से मासिक धर्म खुल कर आता है।
बरगद की जटा,मेथी और कलोंजी को ३ ग्राम लेकर मोटा व दरदरा पीस ले। आधा किलो पानी में डालकर इसका काढ़ा बनाये। जब पानी आधा रह जाये तब इसे छानकर पी ले। ऐसा करने से आपके मासिक धर्म में कोई रूकावट नहीं होगी।
प्याज का सूप एक कप ले उसमे थोड़ा सा गुड़ डालकर इसे पी ले। इसका सेवन करने से आपका रुका हुआ मासिक धर्म ठीक हो जाएगा।
आपको क्रोध, तनाव , भय व अधिक भूखे-प्यासे रहने से बचना चाहिए। ताकि मासिक धर्म आपको नियमित रूप से आये।
मासिक धर्म के दौरान सफाई आदि का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
अगर आप सम्पूर्ण आहार नहीं लेते तो आपका शरीर स्वस्थ नहीं रहता और उसमे कई प्रकार की बीमारिया होने लगती है। इस प्रकार जब महिलाये अपने व्यस्त सेडुल के कारण पूरा आहार नहीं लेती है तो भी उनको ये परेशानी हो सकती है। क्योकि यदि आपके आहार में पौष्टिक तत्वों की कमी होगी और जंक फ़ूड ज्यादा होग़ा तो भी आपको संपूर्ण आहार नहीं मिल पायेगा। इसलिए जैसा आपका आहार होगा वैसे ही आपका शरीर होग़ा, इसलिए पौष्टिक तत्वों का सेवन करने से आपका स्वास्थ्य अच्छा और स्वस्थ रहेगा।
इन घरेलू नुस्खों से आपकी मासिक धर्म की समस्या ठीक हो जायेगी और आप की सेहत में भी सुधार होगा जोकि एलोपैथिक मेडिसिन्स लेने से नहीं होता। इनका कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता इसलिए आप इन्हे आसानी से उपयोग कर सकते है। ताकि आप अपनी मासिक धर्म की इस समस्या से छुटकारा पा सके।
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डिलीवरी के बाद के 24 घंटे शिशु के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते है। डिलीवरी के तुरंत बाद ही हार्मोन्स बहुत तेजी से बदलने लगते है और उसी के साथ महिला का इमोशनल होना भी इस समय में स्वभाविक हो जाता है। एक छोटे से नन्हे से प्यारे से शिशु की देखभाल बहुत ही जिम्मेदारी भरा और प्यारा काम होता है।
इस नन्हे से शिशु का जिसका नो महीनो का इंतज़ार होता है उसकी बहुत ही ध्यानपूर्वक देखभाल का समय आ गया है। डिलीवरी के शुरूआती समय में बेबी को अच्छे से पकड़ना, उठाना, दूध पिलाना आदि का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। आइये जानते है के शिशु का किस प्रकार रखें ध्यान जिससे शिशु की सेहत अच्छी बने रहें।
गर्भनाल की देखभाल
गर्भावस्था के दौरान पुरे नो महीने तक गर्भनाल ही आपके और आपके शिशु के बीच की जीवनदायनी होती है, इसी गर्भनाल के द्वारा आपका प्यार, जरुरी पोषक तत्व, ऑक्सीजन आदि शिशु तक पहुँचता है। जब बेबी दुनिया को देखने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाता है तब इस गर्भनाल को काट दिया जाता है और इसकी जरुरत नहीं रहती है। इसी गर्भनाल का कुछ हिस्सा शिशु के पेट पर रह जाता है। शिशु के जन्म के बाद से एक सप्ताह से लेकर एक महीने तक गर्भनाल का यह हिस्सा खुद पर खुद ही झड़ जाता है। गर्भनाल की जड़ गिरने के बाद शिशु की धुनि बहुत ही नरम दिखती है हो सकता है यह आपको कुछ खून की धब्बे भी दिखे पर घबराइए मत यह एक साधारण सी प्रक्रिया है।
गर्भनाल की देखभाल का सवाल इसलिए उठता है के शिशु को गर्भनाल को साफ़ और सुखाकर रखें। और कभी भी इसे खींच कर मत निकालिये, सामान्य प्रक्रिया द्वारा ही अपने आप इसके झड़ने का इंतज़ार करे।
स्तनपान
नवजात शिशु के लिए स्तनपान बहुत ही जरुरी है, साथ ही शिशु को स्तनपान करवाना एक बहुत ही संघर्षपूर्ण कार्य है जिसे करते समय आप चिड़चिड़े, परेशान और गुस्सा भी हो सकते है। माँ का दूध शिशु के लिए सबसे जरुरी और पोषक तत्वों से भरपूर होता है और स्तनपान करवाना सिर्फ शिशु की सेहत के लिए ही जरुरी नहीं बल्कि माँ की सेहत के लिए भी जरुरी है। बच्चे के जन्म से दो घंटे के अंदर अंदर बच्चे को पहला स्तनपान करवाना चाहिए। शुरुआत माँ का दूध गाढ़ा और पीला होता है, यह गाढ़ा और पीला दूध सभी जरुरी नुट्रिएंट्स से भरपूर होता है इसीलिए इसे कोलोस्ट्रम भी कहते है।
यह पहला दूध या कोलोस्ट्रम एंटीऑक्सीडेंट तत्वों और प्रोटीन से भरपूर शिशु के लिए बहुत ही जरुरी होता है। दूध पिलाते समय अपनी कमर को अच्छे से सहारा दे और आरामदायक स्थिति में बैठे। ज्यादातर माँ ब्रैस्ट को शिशु की तरह लेकर जाती है पर ऐसा न करें बल्कि शिशु को अपनी तरह लाये। शिशु का पेट मुट्ठी भर होता है जल्द ही भर जाता है और जल्द ही खाली भी हो जाता है। ऐसे में जरुरी है के दो घंटे के अंतराल में शिशु को स्तनपान करवाएं।
डकार
शिशु को स्तनपान करवाने के बाद डकार जरूर दिलवाये। माना जाता है के दूध पीते समय शिशु के अंदर हवा भी चली जाती है जिससे उनके पेट में हवा भी भर जाती है डकार लेने से हवा बाहर निकल जाती है। यदि हवा बाहर ना निकले गैस के कारण शिशु को पेट में दर्द और जलन भी हो सकती है। जिसके कारण दूध भी नहीं पचता और दूध वापस बहार आ जाता है।
डकार दिलवाने के लिए शिशु को दूध पिलाने के बाद कंधे से लगाकर बेबी की कमर को सहलाये इससे शिशु को दस से पंद्रह मिंट तक डकार आ जाती है।
वजन
नवजात शिशु के वजन का ध्यान रखना बहुत ही जरुरी होता है क्योंकि वजन से बेबी की सही ग्रोथ का पता चलता है। ज्यादातर नवजात शिशुओं का वजन से 2 से 4 किलों के बीच होता है। डॉक्टरों के अनुसार पहले सप्ताह के अंत शिशु का वजन कम हो जाता है क्योंकि इस समय में बेबी के शरीर में बहुत सा फ्लूइड कम हो जाता है। लेकिन दूसरे सप्ताह से बेबी का वजन बढ़ने लगता है।
बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए सही वजन का बढ़ना बहुत जरुरी है। इसीलिए अपने शिशु के वजन का हर सप्ताह रिकॉर्ड जरूर लिखे। अगर आपको लगे के शिशु का वजन सहीं तरीके से नहीं बढ़ रहा है तो अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें। वह बच्चे का अच्छे चेक अप कर के बताएंगे और साथ डाइट में जरुरी पोषक तत्व को शामिल करने के लिए कहेंगे जिससे शिशु का सही वजन बढ़े।
नींद
बच्चे के जन्म के बाद आप अपनी नींद को भूल जाइये क्योंकि आप देखेंगे की शिशु पूरा समय जागता रहता है, जब आप चाहेंगे की शिशु सोये तो वह जागेगा और जब आप सोचेंगे की जागे तभी वह अपनी नींद लेगा। हो सकता है बेबी की नींद की प्रक्रिया आपको बुरी तरह से तंग कर दे पर यही तो हिस्सा है माँ बनने का। बच्चा जब चाहेगा तभी सोयेगा। अगर आपका शिशु पूरी नींद नहीं ले रहा तो हो सकता है के वह किसी तकलीफ में हो बच्चे का डायपर चेक करें, भूखा न हो दूध पिलाये कही पेट में गैस ना बनी हो देखे की कही शिशु का पेट ज्यादा टाइट तो नहीं हो रहा है। धीरे धीरे आप अपने शिशु के नींद की प्रक्रिया को खुद ही समझ जायेंगे।
शिशु को नहलाना
जन्म के शुरूआती 3 या 4 दिनों में शिशु का ना नहलाये क्योंकि शिशु के लिए बाहर का तापमान बहुत ही अलग होता है। इसीलिए सॉफ्ट कपड़ा या कॉटन की मदद से बच्चे को साफ़ करें। आजकल बाजार में शिशु के सॉफ्ट वेट टिश्यू भी मिलते है जो बच्चे की स्पॉन्ज करने के काम आते है। ना नहलाने का मतलब ये नहीं होना चाहिए के शिशु गन्दगी में रहे, बेबी की साफ़ सफ़ाई का विशेष ध्यान रखे। हर बार डायपर चेंज करते समय हल्के गर्म पानी का इस्तमाल करें शिशु को साफ़ करने के लिए।
शिशु को जब भी नहलाये हल्के गर्म पानी से ही नहलाये। बहुत से लोग बेबी को रोजाना नहलाते है, आप चाहें तो शिशु सप्ताह में तीन बार भी नहला सकते है। ऐसा इसलिए बताया जा रहा है क्योंकि शिशु की स्किन बहुत ही सॉफ्ट होती है ज्यादा साबुन या पानी के इस्तेमाल से शिशु की स्किन पर एलर्जी या रैश भी पड़ सकते है। बेबी के बालों को भी रोजाना धोने की जरुरत नहीं है सप्ताह में दो या तीन बार बालों को धोना बहुत होता है।
आशा यह सभी चीजे आपको आपके शिशु की देखभाल में काम आएंगी।
प्रेगनेंसी किसी भी महिला के जीवन का वो पल होता है जहां केवल वो अकेली ही खुश नहीं होती है बल्कि उससे जुड़े हर व्यक्ति की ख़ुशी का ठिकाना नहीं होता है। लेकिन कुछ महिलाओं की यह ख़ुशी ज्यादा समय तक नहीं रहती है क्योंकि कुछ कारणों की वजह से तीसरे महीने में ही महिला का गर्भपात हो जाता है। और तीसरे महीने में महिला का गर्भपात होने का कोई एक कारण नहीं होता है। बल्कि ऐसे कई कारण होते हैं जिनकी वजह से महिला का गर्भपात हो जाता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में गर्भपात होने के क्या कारण होते हैं।
अपने आप ही ब्लीडिंग शुरू होना
कुछ केस में महिला को समझ ही नहीं आता है और महिला को ब्लीडिंग होनी शुरू हो जाती है। ऐसे केस में महिला को समझ ही नहीं आता है की आखिर क्यों महिला का गर्भपात हो गया है।
हार्मोनल असंतुलन
प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव तेजी से होते हैं लेकिन यदि किसी कारण जैसे की तनाव, डर, PCOS आदि की वजह से महिला की बॉडी में हार्मोनल असंतुलन हो जाता है। तो इस कारण महिला का गर्भपात हो जाता है।
गर्भाशय से जुडी समस्या
यदि महिला को गर्भाशय से जुडी कोई समस्या जैसे की इन्फेक्शन, गर्भाशय का कमजोर होना जैसी परेशानियां होती है। तो इस कारण भी महिला का गर्भपात हो जाता है।
इम्युनिटी कमजोर होना
प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण इम्युनिटी कमजोर हो जाती है, लेकिन यदि महिला की इम्युनिटी बहुत ज्यादा कमजोर हो जाती है। तो इस कारण भी महिला का गर्भ ज्यादा दिन तक ठहर नहीं पाता और महिला का गर्भपात हो जाता है।
उम्र
यदि गर्भधारण करने वाली महिला की या तो उम्र बहुत कम या बहुत ज्यादा होती है तो इस कारण भी महिला का गर्भधारण मुश्किल से होने के साथ गर्भपात होने का खतरा भी ज्यादा होता है।
पहले भी हुआ हो गर्भपात
यदि महिला का पहले भी कभी गर्भपात हुआ हो तो भी महिला का दूसरी बार गर्भपात होने का खतरा अधिक रहता है। इसीलिए दूसरी बार गर्भधारण करने के लिए महिला को पूरी तरह फिट होने की सलाह दी जाती है।
भागदौड़ करना
यदि तीसरे महीने में महिला बहुत ज्यादा भागदौड़ करती है, ट्रैवेलिंग करती है, बहुत ज्यादा घूमती फिरती है, सीढ़ियां बहुत अधिक चढ़ती है और तेजी से चढ़ती है, तो इस कारण भी महिला का गर्भपात हो जाता है।
पेट पर जोर पड़ना
प्रेगनेंसी का कोई सा भी महीना हो उसमे महिला को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे महिला के पेट पर जोर पड़े। क्योंकि इसके कारण महिला का गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है। जैसे की पेट के पल खड़े होकर काम करना, झुककर काम करना, भारी वजन उठाना या सरकाना, पैरों के बल बैठकर काम करना आदि, इन सभी कामों को करने से महिला का गर्भपात होने के चांस बढ़ जाते हैं।
संक्रमण
यदि प्रेग्नेंट महिला के प्राइवेट पार्ट, गर्भाशय आदि में संक्रमण होता है तो इस कारण भी गर्भपात होने के चांस बढ़ जाते हैं।
शारीरिक बिमारी
यदि महिला को थायरॉयड, शुगर या अन्य कोई भी शारीरिक बिमारी होती है तो इस कारण भी महिला का गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है।
दवाइयों का सेवन
प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद से ही महिला को डॉक्टर से बिना पूछें किसी भी दवाई का सेवन न करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि वह दवाइयां गर्भ पर बुरा असर डालती है। ऐसे में गर्भवती महिला यदि डॉक्टर से बिना पूछें दवाइयों का सेवन करती रहती है तो इसके कारण भी महिला का गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है।
नशीले पदार्थों का सेवन
यदि गर्भवती महिला किसी भी नशीले पदार्थ जैसे की धूम्रपान, शराब आदि का सेवन करती है तो इससे भी बच्चे के विकास पर बुरा असर पड़ता है। साथ ही महिला का गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है।
सम्बन्ध
प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में डॉक्टर्स भी सम्बन्ध न बनाने की सलाह देते हैं क्योंकि सम्बन्ध बनाते समय यदि तेजी की जाये तो इसके कारण गर्भाशय पर चोट लग सकती है। जिसके कारण महिला का गर्भपात हो जाता है।
तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से तीसरे महीने में महिला का गर्भपात होने के चांस बढ़ जाते है, इसीलिए पहली तिमाही में महिला को बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है ताकि गर्भवती महिला को ऐसी कोई भी परेशानी न हो।
How to remove Dead Skin : उम्र बढ़ने के साथ-साथ त्वचा में तरह-तरह की समस्याएं होने लगती है जिसके कारण त्वचा पर मृत कोशिकाएं (डेड स्किन) जमने लगती हैं। त्वचा पर डेड सेल्स के होने से त्वचा बेजान और सांवली दिखने लगती है, इसके साथ ही त्वचा में फाइन लाइन्स भी दिखने लगती है। वास्तव में डेड स्किन, त्वचा का वो हिस्सा होता है जो पूरी तरह खराब हो चुका होता है और अगर उसे सही समय पर साफ़ ना किया जाए तो यह वास्तविक खूबसूरती को भी प्रभावित कर सकती है।
यूँ तो हम सभी सुबह / शाम मुंह धोते है, फेस वाश आदि लगाते है, लेकिन डेड स्किन इन सब तरीकों से नहीं हटती। बल्कि इसे हटाने के लिए एक्फोलिएशन किया जाता है जिसे स्क्रबिंग भी कहते है। स्क्रबिंग की मदद से डेड स्किन तो निकलती ही है साथ-साथ त्वचा कोमल और मुलायम भी होती है।
एक्सफोलिएशन की क्रिया में मॉइस्चराइज़र त्वचा की भीतरी सतह तक पहुंचता है जिससे रक्त संचरण में भी सुधार आता है। यह हर प्रकार की स्किन (ऑयली, ड्राई और संवेदनशील) के लिए लाभकारी होता है। और इसके लिए आपको किसी बाहरी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को यूज करने की आवश्यकता भी नहीं है, क्योंकि हम आपको कुछ ऐसे घरेलू पदार्थों के बारे में बता रहे हैं जिनकी मदद से घर बैठे एक्सफोलिएशन किया जा सकता है।
घर पर डेड स्किन हटाने के तरीके : Home Remedies to Remove Dead Skin
बेसन – बेसन डेड स्किन को निकालने में बहुत मदद करता है और इसके इस्तेमाल से त्वचा में निखार भी आता है। इसकी मदद से कील-मुहांसे आदि की समस्या से भी बचा जा सकता है।
प्रयोग : डेड स्किन निकालने के लिए 2 चम्मच बेसन और थोड़ा सा गुलाबजल या पानी लें। दोनों को मिलाकर एक मुलायम पेस्ट बना लें और उस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगायें। कुछ देर तक रखें और जब पेस्ट पूरी तरह सूख जाए तो उँगलियों को गीला करके पेस्ट को रगड़ते हुए हटाएं। अंत में चेहरा पानी से धो लें। हफ्ते में 1 से 2 बार इस उपाय का इस्तेमाल करने से त्वचा निखर जाएगी।
संतरे का छिलका – संतरे के छिलके में एक्सफोलिएशन गुण पाए जाते है जो डेड स्किन हटाने के साथ-साथ फेस की अशुद्धियों को भी साफ करता है। इसमें मौजूग विटामिन सी त्वचा में ग्लो लाने में भी मदद करता है।
प्रयोग – मृत त्वचा को साफ़ करने के लिए ३ चम्मच संतरे के छिलके का पाउडर और 3 चम्मच दही लें। दोनों को अच्छे से मुलायम और मिश्रण को अपनी गर्दन और चेहरे पर लगाएं। 15 से 20 मिनट तक रखें और फिर गीले हाथों से पेस्ट को चेहरे पर रगड़ें। कुछ देर रगड़ने के बाद पानी से चेहरा धो लें और किसी सॉफ्ट टॉवल से साफ़ कर लें। हफ्ते में एक बार इस्तेमाल करने से त्वचा साफ़ हो जाएगी।
कॉफ़ी – कॉफ़ी डेड स्किन को निकालने में काफी मददगार होती है और इसके प्रयोग से त्वचा में नए सेल्स का निर्माण होता है। कॉफ़ी में मौजूद तत्व त्वचा की खूबसूरती को बढ़ाने का काम करते हैं।
प्रयोग – इसके लिए 3 चम्मच कॉफ़ी, 1 चम्मच जैतून का तेल, 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच चीनी लें। अब इन सभी को अच्छे से मिलाकर एक पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे, गर्दन, घुटने और कोहनी पर लगाएं और कुछ मिनट तक मसाज करते रहें। मसाज के बाद 5 से 10 मिनट तक ऐसे ही रहने दें और उसके बाद गर्म पानी से स्किन साफ़ कर लें। हफ्ते में एक बार इस स्क्रब का इस्तेमाल करें त्वचा खिल उठेगी।
ग्रीन टी – ग्रीन टी का सेवन सभी करते है लेकिन उसकी पत्तियों में एक्सफोलिएशन गुण होते है जो डेड स्किन और अशुद्धियों को साफ़ करने में मदद करते है।
प्रयोग – फेस के लिए 1 या 2 ग्रीन टी बैग, 2 / 3 चम्मच शहद और 1 चम्मच बेकिंग सोडा लें। सबसे पहले ग्रीन टी के बैग से अंदर की टी लीव्स निकाल लें और उन्हें कटोरी में डाल दें। अब इसमें शहद और बेकिंग सोडा भी मिला दें। उसके बाद उस मिश्रण को पुरे चेहरे पर अच्छे से लगाएं। 10 मिनट तक पैक को फेस पर रखें और फिर स्क्रबिंग करते हुए हटा दें। हफ्ते में एक बार प्रयोग करने से त्वचा से डेड स्किन निकल जाएगी।
ओट्स – ओट्स स्किन के लिए प्राकृतिक एक्सफोलिएटर की तरह काम करता है। इसमें मौजूद गुण त्वचा की अशुद्धियों को साफ़ करने में मदद करते हैं। यह स्किन की नमी को भी बनाए रखने में मदद करता है।
प्रयोग – डेड स्किन हटाने के लिए 2 चम्मच ओट्स, 2 चम्मच दही और 1 चम्मच शहद ले। फिर तीनों सामग्रियों को एक साथ मिलाकर पेस्ट बना लें। पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और कुछ देर फेस मसाज करें। फेस मसाज के बाद 10 से 15 मिनट तक पेस्ट ऐसे ही लगे रहने दें और उसके बाद चेहरे को ठंडे पानी से साफ़ कर लें। हफ्ते में एक या दो बार इस उपाय का इस्तेमाल करें त्वचा से डेड स्किन निकल जाएगी।
दूध और पपीता – दूध में क्लींजिंग गुण होते है जबकि पपीते में एक तरह का एंजाइम पाया जाता है जो डेड स्किन निकालने में मदद करता है। यह चेहरे के दाग-धब्बों को दूर करने में भी मदद करता है।
प्रयोग – त्वचा की मृत कोशिकाएं निकालने के लिए दूध में पपीते के गूदे को अच्छे से मिक्स कर लें। अब इसे अपने फेस और गर्दन पर लगाएं। आप इसका इस्तेमाल शरीर के अन्य हिस्सों पर भी कर सकते है। पैक लगाकर 2 मिनट तक फेस की मसाज करें और फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें। फेस में ग्लो आ जाएगा और डेड स्किन भी निकल जाएगी।
तो ये थे, कुछ उपाय और उनके प्रयोग जिनकी मदद से त्वचा से डेड स्किन को निकाला जा सकता है। अगर आपकी स्किन भी मुरझाई ही सी दिखने लगी है तो आप इन उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये पूरी तरह सेफ है।
लम्बे बाल हर किसी को पसंद होते है, और पुरुष भी महिलाओ के लम्बे बाल देखकर उनकी तरफ बहुत जल्दी आकर्षित होते है, परन्तु जब आप अपने बालों की अच्छे से केयर नहीं करते है, उनके लिए ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल करते है, उन्हें अच्छे से पोषण नहीं देते है, तो इसके कारण आपके बाल बेजान हो जाते है, जिसके कारण वो टूटना और झड़ना शुरू हो जाते है, कई बार कोई शारीरिक परेशानी या किसी बिमारी के होने के कारण भी बालों से जुडी इस समस्या का सामना आपको करना पड़ सकता है।
बालों को यदि आप अच्छे से केयर देते है, उनमे तेल लगाते है, उनकी साफ सफाई का ध्यान रखते है, ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल नहीं करते है, तो आपके बालों को पोषण मिलता है, जिसके कारण आपको बालों से सम्बंधित समस्या का सामना करना पड़ता है, आज कल मार्किट में भी ऐसे बहुत से प्रोडक्ट आ गये है जो आपके बालों को लम्बा करने में मदद करते है, परन्तु ये काफी महंगे तो होते ही है, और कई बार इसके इस्तेमाल से आपके बालों को फायदा नहीं नुकसान होता है, परन्तु यदि आप अपने बालों को लम्बा करने के लिए प्राकृतिक तरीको का इस्तेमाल करते है तो इसके कारण न तो आपके बालों पर किसी तरह का कोई दुष्प्रभाव पड़ता है, बल्कि आपके बालों को लम्बा होने के साथ इनकी प्राकृतिक चमक को भी बरकरार रखने में मदद मिलती है, तो आइये जानते है की बालों को लम्बा करने के लिए आप कौन कौन से प्राकृतिक तरीको का इस्तेमाल कर सकती है।
अंडे क इस्तेमाल करें:-
बालों की ग्रोथ के लिए प्रोटीन बहुत ही अहम होता है, जो की अंडे में भरपूर पाया जाता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक अंडे की जर्दी यानी की अंडे के तरल भाग में से सफ़ेद भाग को अलग कर लें, उसके बाद उसमे दो चम्मच ओलिव आयल मिलाएं, उसके बाद इसे अच्छे से मिक्स करें, और तेल की तरह अपने बालों में और जड़ो में लगाएं, और इसे आधे घंटे के लिए बालों में छोड़ दें, और उसके बाद अपने बालों को अच्छे से धो दें, इस तरीके का इस्तेमाल नियमित हफ्ते में कम से कम दो बार करें, आपको बालों को लम्बा करने के साथ सिल्की बनाने में भी मदद मिलेगी।
प्याज़ के रस का इस्तेमाल करें:-
प्याज़ के रस का इस्तेमाल करने से आपको बालों से जुडी बहुत सी परेशानी का समाधान करने में मदद मिलती है, इसके कारण न केवल आपके बाल लम्बे होते है, बल्कि इसका इस्तेमाल करने से यदि आपको गंगे पान की समस्या है तो उससे भी निजात पाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप प्यास को क्रश करके उसका रस निकाल लें, आप अपने बालों के हिसाब से प्याज़ का रस निकालें, उसके बाद इसे अच्छे से अपने बालों की जड़ों में लगाएं, और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें, कम से कम आधा घंटा रहने के बाद अपने बालों को शैम्पू की मदद से धो लें, कुछ ही दिनों तक इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपको इसका फायदा अपने आप दिखने लगेगा।
आंवला बालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, बालों को लम्बा करने के लिए आप आंवले का सेवन करने के साथ अपने बालों में लगाने वाले तेल में थोडा सा आंवला पाउडर मिलाकर उसे गुनगुना करें, उसके बाद हलके हाथों से अपने स्कैल्प पर मसाज़ करें, और उसके बाद इसे रात भर के लिए छोड़ दें, और सुबह उठकर शैम्पू की मदद से अच्छे से अपने बालों को धो लें, इस तरीके को हफ्ते में कम से कम दो बार जरुर करें, ऐसा करने से आपको खुद ही थोड़े दिनों में फर्क दिखाई देने लगेगा, और आपके बालों को लम्बा होने में मदद मिलेगी।
मसाज़ करें:-
मसाज़ एक प्राकृतिक तरीका है जिससे बालों से जुडी हर परेशानी को खत्म करने के साथ बालों को घना, और लम्बा बनाने में भी मदद मिलती है, और जैतून तेल से मसाज़ करने पर आपको बहुत फायदा मिलता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप जैतून के तेल को गुनगुना करके अच्छे से अपने स्कैल्प की मसाज़ करें, उसके बाद एक तोलिये को गरम पानी में भिगोकर अच्छे से निचोड़ लें, और मालिश करने के बाद पन्द्रह से बीस मिनट के लिए अपने बालों को सर को अच्छे से उसकी मदद से ढक लें, और उसके बाद अपने बालों को पानी की मदद से अच्छे से धो लें, इस तरीका का इस्तेमाल करने से आपको बालों को तेजी से लम्बा करने में मदद मिलती है।
आलू का इस्तेमाल करें:-
आलू में पाए जाने वाले विटामिन आपके बालों को तेजी से लम्बा करने में आपकी मदद करते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप आलू का रा निकाल लें, और नहाने से बीस मिनट से आधा घंटा पहले इस रस को अच्छे से अपने स्कैल्प पर मसाज़ करें, और आधे घंटे के बाद बालों को साफ़ पानी से धो दें, इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपके बालों को अच्छे से पोषण मिलता है, जिसके कारण उनकी लम्बाई बढती है।
मेथी का इस्तेमाल करें:-
इस तरीके का इस्तेमाल करने के लिए आप सबसे पहले मेथी के कुछ दानो को पीस लें, उसके बाद अच्छे से इसमें पानी मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार करें, और उसके बाद इस पेस्ट को अच्छे से अपने स्कैल्प पर लगाएं, और आधे घंटे के लगभग इसे अपने बालों में रहने दें, उसके कुछ देर बाद अपने बालों को शैम्पू की मदद से धो लें, इस तरीके का इस्तेमाल करने से बालों के लम्बे होने के साथ बालों में होने वाली रुसी की समस्या से निजात पाने में भी आपको मदद मिलती है।
खीरे का इस्तेमाल करें:-
खीरे में सल्फ़र और सिलिकॉन की मात्रा अधिक होती है, जो की आपके बालों को तेजी से लम्बा करने में आपकी मदद करती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप खीरे के रस को अच्छे से अपने स्कैल्प पर लगाएं, और मसाज़ करें, उसके बाद उसे कुछ देर के लिए छोड़ दें,और फिर साफ़ पानी की मदद से अपने बालों को धो लें, इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपके बालों को तेजी से लम्बा होने में मदद मिलती है, साथ ही यदि आप अपने आहार में पालक, खीरा और गाजर का जूस शनील करते है, तो भी आपके बालों को लम्बा होने में मदद मिलती है।
बालों को तेजी से लम्बा करने के अन्य तरीके:-
एलोवेरा और शहद का मिश्रण बालों में लगाएं और कुछ देर बाद अपने बालों को धो दें, आपको फायदा मिलेगा।
बालों को धोने के बाद कुछ देर तक सिर को नीचे की और झुकाकर रखें, ऐसा करने से आपके स्कैल्प में रक्त का परिसंचरण अच्छे से होता है, जिसके कारण बालों की लम्बाई को बढ़ने में मदद मिलती है।
अपने बालों की साफ़ सफाई का ध्यान रखने के लिए हफ्ते में दो बार आयल लगाने के बाद अपने बालों को जरुर धोएं।
बादाम के तेल से अपने स्कैल्प की मसाज़ करें, इससे भी आपके बालों को लम्बा होने में मदद मिलती है।
नारियल का दूध पीने और उससे अपने बालों में मसाज़ करने से आपको अपने बालों को लम्बा करने में मदद मिलती है।
दो से तीन महीने के अंतराल में अपने बालों को ट्रिम जरुर करवाएं, ऐसा करने से आपके दोमुहें बाल निकल जाते है, और आपके बालों को तेजी से लम्बा होने में मदद मिलती है।
यदि आप चाहते है की आपके बालों की ग्रोथ अच्छे से हो तो इसके लिए आपको अपने खान पान का भी ध्यान रखना चाहिए इससे भी आपके बालों को बेहतर होने में मदद मिलती है।
बालों के लिए ज्यादा केमिकल और मशीन जैसे ड्रायर आदि का इस्तेमाल कम करें।
तो ये कुछ उपाय है जिनका इस्तेमाल करने से आपको अपने बालों को लम्बा करने में मदद मिलती है, इसके अलावा आपका खान पान, आपके बाल धोने का ढंग, आदि भी आपके बालों को घना और आकर्षित बनाने में मदद करते है, यदि आप भी चाहते है की आपके बाल लम्बे हो तो आप इनमे से किसी भी तरीके का इस्तेमाल नियमित करें थोड़े ही दिनों में आपको इसका असर दिखने लगता है, और आपके बालों को लम्बा और घना होने के साथ सिल्की और सॉफ्ट होने में भी मदद मिलती है।
गर्भावस्था में पीठ और कमर के दर्द से कैसे निजात पाए:-
गर्भावस्था में महिलाओं के शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं| जिनके कारण उन्हें कई बार शरीर से जुड़े दर्द का भी सामना करना पड़ता हैं| गर्भावस्था के समय वैसे तो उल्टी का आना, सर दर्द की समस्या होना, मन का न लगना, चक्कर आना, चिड़चिड़ापन होना, आदि| ये सब कुछ बातें हैं जो कई महिलाओं में गर्भावस्था के समय आ जाती हैं| और जो सबसे बड़ी समस्या गर्भावस्था के समय महिलाओं में आती हैं| वो हैं पेट के दर्द की समस्या, कमर के दर्द की समस्या, ये सबसे ज्यादा महिलाओं को गर्भावस्था के समय परेशान करती हैं|
कई महिलाये तो पीठ और कमर दर्द के कारण बहुत ज्यादा परेशान रहती हैं| ये समस्या जैसे जैसे गर्भावस्था के समय आगे बढ़ता जाता हैं| वैसे ही महिलाओं का वजन भी बढ़ता जाता हैं| जिसके कारण कई बार महिलाओं को उठने बैठने में भी परेशानी हो जाती हैं| पेट के दर्द की समस्या कई महिलाओं को तो पुरे नौ महीने रहती हैं| इस समस्या से कई महिलाये बचने के लिए दवाई का सहारा लेती हैं| जो की गलत हैं| ऐसा करने से वो भी गर्भावस्था में आपके बच्चे वे आपके लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता हैं| इसीलिए ऐसा करते समय अपने डॉक्टर की राय जरूर ले|
कई बार तो ऐसा होता हैं कई महिलाये जो शादी से पहले कमर के दर्द से परेशान रहते हैं| वो जैसे ही प्रेगनेंसी होती हैं तो उनका कमर का दर्द कम होना शुरू हो जाता हैं| कमर दर्द के कारण बहते से हो सकते हैं, जैसे की आपके आहार में लापरवाही, भारी सामान को उठाने की वजह से ( जो की प्रेगनेंसी में हानिकारक हो सकता हैं), शादी से पहले या गर्भावस्था से पहले भी आपके कमर या पेट में दर्द रहता हैं, आदि| ये सब कुछ कारण हो सकते हैं कमर दर्द की समस्या के| कई बार कमर दर्द का कारण आपका वजन बदन भी हो सकता हैं|
कमर का दर्द होने का कारण ज्यादातर डिस्क जिससे की कमर जुडी हुई होती हैं, उसके कारण या फिर शरीर में नसों और मासपेशियो के खिंचाव के कारण होती हैं| और ज्यादातर जैसे जैसे दिन के खत्म होता हैं| दर्द और अधिक तेज हो जाता है| लंबे समय तक खड़े रहने के कारण भी यह दर्द बढ़ता है|क्योंकि ऐसा आपकी मांसपेशियों में थकान और आपके शरीर एवं शिशु का वजन पड़ने से होने वाले हल्के खिंचाव के कारण होता है| जो गर्भावस्था ख़तम होने के साथ ख़तम हो जाता हैं| और आपके दर्द का कारण बिना आहार लिए सारा दिन काम करने की वजह से भी हो सकता हैं|
कमर दर्द के कारण कई बार गर्भावस्था के समय पैरो की सूजन की समस्या भी आ जाती हैं| इसका कारण ये होता हैं की आपके कमर की मांसपेशिया आपके पैरो तक जुडी हुई होती हैं| तो आइये जानते हैं की आप गर्भावस्था में आइये इस परेशानी से कैसे छुटकारा पा सकते हैं| परंतु आपको इस समस्या के कारण कुछ ऐसा भी नहीं करना हैं जो आपके और आपके बच्चे के लिए हानिकारक हो| और जिसके कारण आपको बाद में कोई समस्या से गुजरना पड़े| तो ये हैं कुछ तरीके जिनसे आप गर्भावस्था में होने वाले कमर दर्द और पेट दर्द की समस्या से निजात पा सकते हैं|
कमर दर्द और पीठ दर्द की समस्या से छुटकारा पाने के तरीके:-
व्यायाम करे कमर दर्द और पीठ की समस्या से बचने के लिए:-
व्यायाम किसी भी अवस्था में आपके शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता हैं| और गर्भ में जब बच्चा होता हैं तब तो व्यायाम आपके साथ आपके बच्चे को भी स्वस्थ रखने में मदद करता हैं| कमर और पेट के व्यायाम आपकी पीठ पर पड़ने वाले दबाव को कम कर सकते हैं| अपने हाथों और घुटनों के बल आ जाएं और अपनी पीठ को बिलकुल सीधा रखे| और सांस अंदर लें और सांस बाहर छोड़ते समय अपनी अपनी कमर पर पूरा दबाव डाले| पांच से 10 सैकंड तक बिना अपनी सांस रोके और बिना अपनी कमर ऐसा करती रहें| व्यायाम के अंत में अपनी मांसपेशियों को थोड़ा आराम दें| इससे आपको आराम मिलेगा|
मालिश करे कमर दर्द और पीठ के दर्द से आराम पाने के लिए:-
मालिश करने से हमारे शरीर की सभी थकावट दूर हो जाती हैं, और साथ ही दर्द से भी आराम मिलता हैं| इसीलिए आप जब गर्भावस्था में हैं तब भी मालिश कर सकती हैं| परंतु अपने पीठ हो ज्यादा न रगड़े| एक कुर्सी की पीठ के ऊपर से आगे की ओर झुकें| या फिर करवट लेकर लेट जाएँ| अपने पति या माँ, बहिन कोई भी हो उससे पीठ के निचले हिस्से और रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ चलने वाली मांसपेशियों पर आराम से मालिश करने के लिए कहें| इससे आपको जरूर आराम मिलेगा|
ज्यादा तंग कपडे न पहने:-
गर्भावस्था के दौरान आपको अपने पहनावे पर भी विशेष ध्यान चाहिए| ऐसी अवस्था में ज्यादा तंग कपड़े नहीं पहनने चाहिए| ये आपके लिए परेशानी पैदा कर सकते है| क्योकि ज्यादा तंग कपडे पहनने की वजह से आपके ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ता है| जिससे रक्त का प्रवाह सही ढंग से शरीर मन नहीं हो पाता हैं| इसीलिए आपको इस बात कज ध्यान रखना चाहिए| और बहुत कसे हुए कपड़े पहनने से आपकी मांस-पेशियों के दर्द रहने लगता है| इसीलिए ज्यादा तंग कपडे नहीं पहनने चाहिए|
ज्यादा भारी सामान उठाना भी बनता हैं कमर व् पीठ दर्द का कारण:-
गर्भावस्था की स्थिति में भारी सामान उठाना गरभवती महिला के लिए बाहत हानिकारक हो सकता हैं| इसीलिए गर्भावस्था के दौरान किसी भी भारी समान को उठाने की गलती बिल्कुल ना करे|यदि आपको कुछ काम हैं तो आप इसके लिए आप किसी की मदद ले ले |ज्यादा भारी समान उठाने से आपके शरीर पर बल पड़ने लगता है| और जिसके कारण मासपेशियो में खिंचाव आने लग जाता हैं| जो कमर दर्द या पीठ के दर्द का कारण बनता है| इसीलिए आपको ऐसा नहीं करना चाहिए|
अच्छा और स्वस्थ आहार ले:-
गर्भावस्था का समय ऐसा होता हैं जब महिला अकेली नहीं होती हैं| उसके अंदर एक नन्हा मेहमान होता हैं| जिसके कारण उसे दो के हिसाब से आहार लेना चाहिए| क्योंकि बच्चा अपनी जरूरते माँ के शरीर से ही पूरी करता हैं| इसीलिए आपको इस बात का ध्यान देना चाहिए| खाना खाने में कोई लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए| इसके साथ आपको दिन में तीनो समय आहार लेना चाहिए| इससे आपके शरीर में कमजोरी भी नहीं आएगी| और आपको कमर व् पीठ के दर्द से छुटकारा भी मिलेगा| इसीलिए गर्भावस्था के समय आपको इन सब बातो का ध्यान रखना चाहिए|
पूरी नींद ले:-
यदि आम व्यक्ति की भी नींद कभी पूरी न हो तो वो सारा दिन परेशान रहता हैं| इसी प्रकार गर्भवती महिला को तो पुरे आराम की जरुरत होती हैं| और गर्भावस्था के समय में सोने की मुद्रा पर भी ध्यान देना चाहिए| और अगर आप कमर व् पीठ दर्द की समस्या से बचना चाहती हैं तो एक तरफ से कम से कम एक घुटने को मोड़ कर सोना चाहिए| सोते समय एक तकिया अपने घुटनों के बीच में, और दूसरे तकिये को अपने पेट के नीचे लगाए| कभी भी दोनों पैरों को सीधा खींच कर मत सोएं| सोने का ज्यादा ध्यान आखिरी के तीन महीनो में देना चाहिए| क्योकि वजन बढ़ने के साथ मासपेशियो के खिंचाव की समस्या भी उन्ही दिनों में आती हैं|
तो ये सब कुछ बाते हैं जिनका ध्यान रखकर आप गर्भावस्था में होने वाले पीठ व् कमर के दर्द से छुटकारा पा सकते हैं| इसीलिए आपको इन बातो का ध्यान रखना चाहिए| इसके आलावा गर्भावस्था में बिना डॉक्टर के परामर्श के ज्यादा दवाइओ का सेवन नहीं करना चाहिए| इसके साथ यदि आपको ज्यादा परेशानी हो ही रही हैं तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए| नहीं तो आपको बाद में किसी परेशानी का सामना करना पड सकता हैं| ज्यादा दवाइओ का सेवन करने से गर्भावस्था में आपके बच्चे पर हानिकारक प्रभाव पड सकता हैं|
इसके आलावा गर्भावस्था में ज्यादा ऊँचे सैंडल या चप्पल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए| कई बार ज्यादा ऊँचे सैंडल व् चप्पल डालने के कारण आपको कमर दर्द व् पीठ के दर्द का सामना करना पड सकता हैं| ज्यादा ऊँचे हील पहनने के कारण मासपेशियो में खिंचाव होता हैं जिसके कारण आपको इस समस्या का सामना करना पड सकता हैं| इसीलिए आप कोशिश करे की आप ऐसा कोई कम न करे जिससे आपको कमर व् पीठ के दर्द का गर्भावस्था में सामना करना पड़े| तो आपको इन सब बातो का ध्यान रखना चाहिए| जिससे आप प्रेगनेंसी में स्वस्थ रह सके|
गर्भावस्था में कैसे पाएं पीठ और कमर दर्द से आराम, पीठ और कमर दर्द से गर्भावस्था में पाएं छुटकारा, कैसे पाएं गर्भावस्था में पीठ और कमर दर्द से आराम, गर्भावस्था में पीठ और कमर दर्द का इलाज़, Garbhavastha me kaise payen kamar va peeth dard se aaram, problem of back pain and hip pain during pregnancy, hip and back pain problem,
प्रेगनेंसी के दौरान खान पान को लेकर प्रेग्नेंट महिला बहुत परेशान हो सकती है, खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है उन्हें तो बहुत दिक्कत हो सकती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान कितने आहार का सेवन किया जाए या जो आप खा रही है उसमे कितने पोषक तत्व हैं इन बातों का ध्यान रखने के साथ यह जानना भी जरुरी होता है। की क्या प्रेगनेंसी के दौरान जो आप खा रही है वो गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु के लिए सेफ है या नहीं? तो लीजिये आज हम एक ऐसे ही खाद्य पदार्थ की बात करने जा रहे हैं की जो स्वाद में मीठा होने के साथ पोषक तत्वों से भरपूर भी होता है। और वो खाद्य पदार्थ है खजूर, केवल स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान इसका सेवन करना चाहिए या नहीं इसके बारे में जानने के बाद ही गर्भवती महिला को इसका सेवन करना चाहिए।
प्रेगनेंसी में खजूर खाना चाहिए या नहीं?
कैल्शियम, फोलेट, आयरन, फाइबर, कैलोरी व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर खजूर का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला कर तो सकती है। लेकिन इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है जैसे की खजूर की तासीर गर्म होने के कारण पहली तिमाही में खजूर के सेवन से गर्भवती महिला को बचना चाहिए। क्योंकि गर्म तासीर वाली चीजों का सेवन प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में भ्रूण पर नकारात्मक असर डाल सकता है। लेकिन दूसरी या तीसरी तिमाही में गर्भवती महिला इसका सेवन कर सकती है, लेकिन उस दौरान भी एक दिन में तीन से चार खजूर का सेवन ही करें।
और इसके कारण आपको कोई दिक्कत न हो इसके लिए एक या दो खजूर सुबह और एक या दो शाम को खाएं। ताकि आपको इसके फायदे ही मिलें किसी तरह का नुकसान न हो, और खजूर का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करने से डिलीवरी के बाद माँ के स्तनों में शिशु के लिए दूध को भी अच्छे से उतरने में मदद मिलती है। जिससे शिशु के विकास को जन्म के बाद भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। इसके अलावा खजूर का सेवन करने से गर्भवती महिला और शिशु को और भी बहुत से फायदे मिलते हैं।
खजूर का सेवन प्रेगनेंसी में करने के फायदे
गर्भवती महिला यदि खजूर का सेवन करती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला और भ्रूण को कौन -कौन से फायदे मिलते हैं आइये विस्तार से जानते हैं।
कैलोरी: खजूर में कैलोरी की मात्रा भरपूर मौजूद होती है ऐसे में गर्भवती महिला को खजूर का सेवन करने से बॉडी में ऊर्जा को भरपूर बनाएं रखने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को थकान व् कमजोरी जैसी परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।
आयरन: आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होने के कारण खजूर न केवल बॉडी में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है बल्कि इससे बॉडी में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। और बॉडी में खून की मात्रा सही होने के कारण महिला को डिलीवरी के दौरान आने वाली समस्या से बचे रहने, थकान व् कमजोरी की समस्या से बचने रहने के साथ शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।
फाइबर: खजूर में फाइबर की मात्रा भी मौजूद होती है जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के साथ गर्भवती महिला को कब्ज़ जैसी परेशानी से प्रेगनेंसी के दौरान निजात दिलाने में भी मदद करती है।
कैल्शियम: गर्भवती महिला की हड्डियों की मजबूती के लिए और गर्भ में शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास के लिए गर्भवती महिला को अपनी डाइट में कैल्शियम युक्त आहार को शामिल करने की सलाह दी जाती है। और खजूर में कैल्शियम की मात्रा मौजूद होती है, ऐसे में कैल्शियम की मात्रा को बॉडी में बनाएं रखने के लिए गर्भवती महिला खजूर का सेवन कर सकती है।
फोलेट: गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास के साथ शिशु को जन्म दोष, शिशु के वजन में कमी की समस्या से बचाव आदि के लिए गर्भवती महिला को अपनी डाइट में फोलेट को भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए। ऐसे में फोलेट के लिए गर्भवती महिला चाहे तो खजूर का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान कर सकती है क्योंकि खजूर में फोलेट मौजूद होता है।
तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेगनेंसी के दौरान खजूर का सेवन करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को मिलते हैं। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खजूर का सेवन जरूर करना चाहिए, और खजूर का सेवन और कितना किया जा सकता है इसके लिए आप एक बार अपनी डॉक्टर से भी राय ले सकती हैं।