Home Blog Page 214

आंखो की गुहेरी हटाने के उपाय

अंजनहारी, गुहेरी, स्टाई, गुहेरी का इलाज, अंजनहारी का इलाज, गुहेरी के घरेलू इलाज, गुहेरी ठीक करने के उपाय, गुहेरी कैसे ठीक करें, आँखों का इन्फेक्शन, आँखों की गुहेरी दूर करने के उपाय, अंजनहारी में फायदेमंद है ये नुस्खे, अंजनहारी के घरेलू नुस्खे, कैसे ठीक करें गुहेरी, गुहेरी क्यों होती है, आंख की गुहेरी, आंख की गुहेरी का सफल इलाज, आंख की गुहेरी के टोटके, गुहेरी ठीक करने के टोटके  

कई बार हमारे चेहरे या शरीर के कुछ हिस्सों में ऐसी समस्याएं हो जाती है जिनके कारण बहुत सी समस्यायों का सामना करना पड़ता है। जैसे की चेहरे पर पिंपल होना या शरीर में घमौरियां हो जाना। इन्ही कुछ समस्यायों में से एक है आँखों की गुहेरी। जी हां, दिखने में बहुत छोटी लेकिन इसके कारण होने वाले परेशानी किसी के लिए भी असहनीय होती है। दरअसल यह आंख की ऊपरी या निचली परत पर एक हलके लाल रंग के दाने के रूप में उभरती है।

कहने को यह कोई रोग नहीं है लेकिन इसके कारण बहुत परेशानी होती है। परन्तु घबराने की बात नहीं है। क्योंकि यह एक आम समस्या है जो किसी को भी हो सकती है।

ऐसे तो इस समस्या से निजात पाने के लिए नानी दादी कई टोटके बताती है जो काफी कारगर भी होते है लेकिन उनके अलावा भी कुछ घरेलू उपाय है जिनकी मदद से इस समस्या का इलाज घर बैठे किया जा सकता है। और आज हम आपको उन्ही कुछ घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे है।

आंख की गुहेरी हटाने के घरेलू उपाय :-

1. गुहेरी के कारण :

आंखों की दोनों पलकों के किनारों पर बालों की जड़ों में जो फुंसियां निकलती है उन्हें ही गुहेरी कहा जाता है। यह कोई रोग नहीं बल्कि एक आम समस्या है जो संक्रमण से फैलती है। गुहेरी को अंजनहारी भी कहा जाता है। इस समस्या के होने पर आँखों में तेज़ खुजली और जलन होती है जो बाद में मवाद से भरे दाने का रूप ले लेती है। लेकिन जरुरी नहीं की हर बहार इसमें मवाद भरे। डॉक्टरों की माने तो गुहेरी विटामिन A और D की कमी से होती है। लेकिन कभी कभार कब्ज से पीड़ित व्यक्ति को भी इसकी शिकायत हो सकती है।

2. लौंग :

कहने को यह एक मसाला है लेकिन इसकी मदद से कई समस्यायों को दूर किया जा सकता है। यह गुहेरी के कारण हो रहे दर्द और त्वचा की जलन को कम करती है। इस समस्या के लिए इसे बेहतर औषधि माना जाता है। अपने एंटी बैक्टीरियल गुणों के कारण यह आँखों के संक्रमण को रोकने में भी मदद करती है। गुहेरी होने पर लौंग को पानी के साथ घिसकर लेप बना लें और इसे अंजनहारी पर लगाएं। थोड़ी देर में जलन में आराम आयेगा। उपाय में दिन में 2-3 बार प्रयोग करें।

3. अमरुद के पत्ते :Amrud

प्राकृतिक चिकित्सा के रूप में अमरुद के पत्ते बेहद लाभकारी होते है। इसलिए इन्हे गुहेरी के घरेलू इलाज के लिए प्रयोग में लाया जाता है। इसमें मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पालक की सूजन और लाली को कम करने में मदद करते है। प्रयोग के लिए गर्म पानी में दो से तीन अमरुद के पत्तों को धो लें। अब इस पानी में साफ़ कपडे को डुबोकर निचोड़ लें। अब अमरुद के पत्तों को गर्म कपड़ें में रखकर अच्छी तरह लपेट लें। और हल्का ठंडा होने दें। उसके बाद उसमे से एक पत्ता निकाल कर उसे प्रभावित हिस्से पर लगाएं। पांच मिनट लगायें रखने के बाद हटा दें और अन्य पत्तियों के साथ भी ऐसा ही करें। तीन से चार दिनों तक दिन में दो बार प्रयोग करने से समस्या दूर हो जाएगी।

4. कैस्टर आयल :

कैस्टर आयल में रिसिनोलेइक नामक एसिड पाया जाता है जो त्वचा के लिए एंटी इंफ्लेमेटरी एजेंट के रूप में कार्य करता है। जिसके फलस्वरूप यह तेल दर्द और सूजन को प्रभावी ढंग से कम करने में मदद करता है। प्रयोग के लिए आंख के प्रभावित हिसे को बेबी शैंपू और गुनगुने पानी से धो लें। उसके बाद पांच मिनट तक प्रभावित पलक पर गर्म सेक करें। अब रुई की मदद से पलक पर कैस्टर आयल लगाएं। कुछ ही दिनों के लगातार प्रयोग से समस्या पूर्णतः दूर हो जाएगी।

5. टैनिक वाली ग्रीन टी :Green Tea ke benefits

ग्रीन टी में बहुत से एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पार जाते है जो अंजनहारी में होने वाले दर्द और सूजन को कम करने में मदद करते है। इसमें मौजूद तनिक एसिड इन्फेक्शन को दूर रखने में भी मदद करता है। इसके अतिरिक्त इसमें मौजूद पोषक तत्व और एंटी ऑक्सीडेंट्स चिकित्सा और राहत में योगदान देते है। प्रयोग के लिए गर्म पानी में कुछ देर के लिए ग्रीन टी को दिप करें। अब उस टी बैग को पानी से निकालकर अतिरिक्त पाने निचोड़ लें। और अपनी आंखे बंद करके पालक के ऊपर भीगी हुई टी बैग को रखें। पांच मिनट रखने के बाद हटा दें। कुछ दिनों तक इस उपाय का प्रयोग करें फायदा मिलेगा।

आप खुद से ऐसे जान सकते है बेबी गर्भ में स्वस्थ है या नहीं

गर्भावस्था के दौरान हर महिला अपने आने वाले शिशु के लिए सपने बुनती रहती है। इन नो महीनो में गर्भवती महिला अपना खाना पीना यहाँ तक के अपना सोना भी अपने भूर्ण को ध्यान में रखते हुए करती है। शिशु को कहीं किसी चीज से नुक्सान ना पहुँचे इस चीज को ध्यान में रखकर बहुत सी अपनी पसंदीदा चीजों को भी त्याग देती है। बस इसी इंतजार में के प्रेगनेंसी का यह समय सही निकल जाए और जन्म से ही शिशु पूर्ण रूप से स्वस्थ हो।

भूर्ण पूरी तरह स्वस्थ है या नहीं इसके लिए डॉक्टर भी समय समय पर जाँच करवाते रहते है। प्रेगनेंसी के शुरुआती पांच महीनो में हम डॉक्टरों द्वारा करवाए गए टेस्ट के आधार पर ही शिशु के स्वास्थ्य के बारे में जान सकते है। डॉक्टर बच्चे की धड़कन चेक करके आपको बताते है बच्चे हार्ट रेट नार्मल है या नहीं। अल्ट्रासाउंड करवाने पर बच्चे के वजन और शारीरिक संरचना के बारे में भी आपको पूरी जानकारी मिलती है। प्रेगनेंसी के दौरान एक लेवल दो का अल्ट्रासाउंड होता है जिसमे डॉक्टर आपके बच्चे की हाथो और पैरों की उँगलियाँ तक देख सकते है और गईं पाते है। इसके अतिरिक्त और भी कई ब्लड टेस्ट होते है जिनके आधार पर बच्चे का मेन्टल लेवल भी चेक कर पाते है। यह सभी टेस्ट पांच से छः महीनो के अंदर अंदर हो जाते है। इन्हीं के आधार पर आपके डॉक्टर आपको खाने पीने की सलाह भी देते है।

डॉक्टर द्वारा किये गए टेस्ट के अलावा आपके वजन और खाने पीने की आदतों से भी आप अपने शिशु की सेहत का अंदाजा लगा सकते है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के छठे महीने में बच्चे के मूवमेंट्स आपको महसूस भी होने लगती है। इस समय में आपको भूख भी अच्छे से लगने लगती है। धीरे धीरेड समय के साथ साथ शिशु में घूमना भी शुरू कर देता है। कभी वह आपको लात मारता जिसे आप अपने पेट पर हाथ रखकर महसूस भी कर पाते है। खाना खाने के बाद यह मूवमेंट्स अलग से ही महसूस की जाती है। हर दो घंटे में कुछ न कुछ खाइये और देखिये आपके पेट में कुछ हलचल हुई या नहीं, अगर आप बेबी को घूमते हुए, लात मारते हुए महसूस करेंगे तो आपको खुद ही समझ आ जायेगा की आपका शिशु स्वस्थ है।

इसके अतिरिक्त जब जब आपको खाना खाने में देर हो जाएगी तब तब पेट से हल्की हलचल भी होने लगेगी खाने के लिए इसका मतलब होता है शिशु को भूख लगी है। गर्भवास्था के आंठवे महीनें में तो डॉक्टर भी आपको सलाह देते की अब आपको बेबी की मूवमेंट्स को गिनना है क्योंकि यह वो समय होता है जब गर्भाशय में शिशु को घूमने के लिए जगह कम पड़ने लगती है। इस समय में खाना खाने के बाद बेबी की कम से कम 8 से 10 मूवमेंट्स या हरकत जरूर होनी चाहिए। प्रेगनेंसी के आठंवे माह में अगर आपको शिशु को मूवमेंट्स महसूस ना हो तो तुरंत अपने डॉक्टर को बताये।

आप अपने शिशु के स्वास्थ्य के बारे में कितना जान पाते है यह पूरी तरह आप पर निर्भर करता है। हो सकता है गर्भ में आपका बेबी थोड़ा सुस्त हो इसीलिए कम हिले डुले या हल्की मूवमेंट्स करें। आपको अपने व्यस्त समय से उसके लिए समय निकाल कर उन मूवमेंट्स को महसूस करना होगा तभी आप अपने बेबी के स्वास्थ्य के बारे में जान पाएंगे।

गर्भ में स्वस्थ शिशु की पहचान यह है

गर्भावस्था के दौरान महिला के मन में यह जानने की उत्सुकता हमेशा रहती है की गर्भ में पल रहा बच्चा स्वस्थ है या नहीं। क्योंकि महिला के पेट में पल रही नन्ही जान पूरी तरह से महिला पर निर्भर करती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला यदि महिला थोड़ी सी भी गलती करती है तो इससे बच्चे के विकास पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। लेकिन गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ है या नहीं इसे प्रेग्नेंट महिला जान सकती है और इसे जानने के लिए महिला को अपनी बॉडी व् अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना पड़ता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला किस तरह से पहचान कर सकती है की गर्भ में शिशु स्वस्थ है।

बच्चे की धड़कन

प्रेगनेंसी के पांचवें हफ्ते तक बच्चे का हदय काम करने लगता है और बच्चे के दिल की धड़कन शुरू हो जाती है। इस दौरान यदि डॉक्टरी जांच में बच्चे की धड़कन चल रही होती है तो इसका मतलब यह होता है की आपका बच्चा स्वस्थ है।

अल्ट्रासॉउन्ड रिपोर्ट

गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में महिला का अल्ट्रासॉउन्ड किया जाता है और इस अल्ट्रासॉउन्ड में बच्चे का वजन, आकार आदि के बारे में बताया जाता है। ऐसे ही पांचवें महीने में अल्ट्रासॉउन्ड होता हैं जिसमे शिशु के अंगों के विकास के बारे में भी अच्छे से बताया जाता है, यदि इन सभी अल्ट्रासॉउन्ड की रिपोर्ट नोर्मल आती है। इसका मतलब बच्चे का वजन, आकार, अंगो का विकास सब सही होता है तो इसका मतलब यह होता है की आपका बच्चा स्वस्थ है।

शिशु की हलचल

प्रेगनेंसी के पांचवें महीने तक शिशु गर्भ में हलचल करने लगता है। यदि गर्भ में पल रहे शिशु की हलचल महिला को सही तरीके से महसूस होती है। तो शिशु की हलचल भी महिला को यह संकेत देती है की आपका बच्चा बिल्कुल स्वस्थ है।

वजन

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन लगातार बढ़ता है, और महिला का वजन सही तरीके से बढ़ना स्वस्थ प्रेगनेंसी का संकेत देता है। ऐसे में यदि प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला का वजन सही तरीके से बढ़ता है। तो यह इस बात का संकेत देता है की गर्भ में पल रहा शिशु बिल्कुल स्वस्थ है।

पेट का आकार

जैसे जैसे गर्भ में शिशु का विकास बढ़ता है वैसे वैसे गर्भाशय का आकार बढ़ने के साथ महिला का पेट बाहर की तरफ आने लगता है। और यदि महिला के पेट का आकार सही तरीके से बढ़ता है तो यह भी इस बात की और इशारा करता है की आपके बच्चे का विकास अच्छे से हो रहा है।

शिशु का सही पोजीशन में आना

डिलीवरी का समय पास आने पर यदि आपको शिशु का भार नीचे की तरफ अधिक महसूस होता है तो इसका मतलब यह होता है की शिशु जन्म लेने की सही पोजीशन में आ रहा है। यदि ऐसा होता है तो यह भी इस बात की और संकेत करता है की गर्भ में शिशु स्वस्थ है।

तो यह हैं कुछ पहचान जिन्हे देखकर प्रेग्नेंट महिला यह जान सकती है की की उनका बच्चा गर्भ में स्वस्थ है या नहीं। इसके अलावा यदि गर्भ में शिशु की मूवमेंट कम हो, महिला का वजन या पेट का आकार न बढ़े, तो ऐसे में पेट में शिशु अस्वस्थ हो सकता है। और इन लक्षणों को प्रेग्नेंट महिला को अनदेखा न करते हुए एक बार डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।

बिना मेकअप खूबसूरत दिखने के तरीके

सुंदर खूबसूरत व् आकर्षक दिखना हर महिला का ख्वाब होता है, और अपनी ख़ूबसूरती को बढाने के लिए वो क्रीम. पाउडर, फेस वाश, फाउंडेशन, साबुन, कंडीशनर और भी पता नहीं किन किन चीजो का इस्तेमाल करती है, और ऐसा करना भी चाहिए क्योंकि इसके कारण आपको ख़ूबसूरती को बढाने में मदद मिलती है, इसके अलावा महिलाएं अपने आप को खूबसूरत दिखाने के लिए मेकअप का इस्तेमाल करती है, परन्तु क्या आप जानती है इसमें मौजूद केमिकल आपकी स्किन को बहुत अधिक प्रभावित करता है, और जब आप इसका ज्यादा इस्तेमाल चेहरे पर करते है, तो इसके कारण आपके चेहरे की प्राकृतिक चमक भी कम होने लगती है, यदि आपको ऐसा लगता है की बिना मेकअप के आप खूबसूरत नहीं लग सकती है, तो ये आपकी बिलकुल गलत सोच है।

इन्हें भी पढ़ें:- फाउंडेशन क्या है? और कौन से कलर का फाउंडेशन कौन सी त्वचा पर लगाना चाहिए?

दमकती और चमकदार त्वचा पाने के लिए क्या करें

 

चेहरे की ख़ूबसूरती सिर्फ मेकअप करने से ही नहीं बढती है, और न ही आपकी खूबसूरती, बल्कि आप कितने अच्छे से अपनी स्किन की केयर करते है, किस तरह अपने चेहरे को प्रदूषण से बचाते है, अपने हाथों, पैरों का ख्याल कैसे रखते है, अपने बालों की केयर कैसे करते है, दांत आदि को कैसे साफ रखते है, अपने कपड़ो को किस तरह पहनते है, इस बात पर भी निर्भर करता है, यहाँ तक की आपका खान पान भी आपकी ख़ूबसूरती को बढाने में आपकी मदद करता है, अच्छी और गहरी नींद लेने के बाद सुबह समय से उठकर थोडा व्यायाम व् योगासन करने से भी आपके चेहरे में काह्मक आती है, आपकी बॉडी को फिट रहने में मदद मिलती है, इसीलिए जरुरी नहीं है की आप केवल रोजाना मेकअप करके ही अपनी ख़ूबसूरती को बढायें, बल्कि प्राकृतिक ख़ूबसूरती से बेहतर और कुछ भी नहीं होता है, तो आइये अब विस्तार से जानते है की वो कौन से टिप्स है जो आपकी ख़ूबसूरती को बढाने में आपकी मदद करते है।

डेड स्किन को साफ़ करें:-

धूल मिट्टी और प्रदूषण के कारण आपकी स्किन डल होने लगती है, जिसके कारण आप उसमे निखार लाने के लिए आप मेकअप का इस्तेमाल करते है, बल्कि आपको हफ्ते में दो बार अच्छे से प्राक्रतिक तरीके जैसे की एलोवेरा के गुद्दे, शहद, निम्बू आदि का इस्तेमाल करके अपनी डेड स्किन को रेमोवे करना चाहिए, और अपनी स्किन को आकर्षक बनाना चाहिए, आपको अपने हाथों पैरों की डेड स्किन को भी अच्छे से साफ़ करना चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें:- गर्दन और पीठ की डार्क स्किन के लिए 10 घरेलु उपाय!

डार्क सर्कल न आने दें:-

dark circle

नींद पूरी न होना के कारण, शरीर में पोषण की कमी, और तनाव होने के कारण आपकी आँखों के नीचे डार्क सर्कल होने लगते है, जिसके कारण आपके चेहरे की रौनक कम हो जाती है, इससे बचने के लिए आप aअप अपनी आँखों के ऊपर खीरे की स्लाइसेस काटकर उन्हें फ्रिज में रखने के बाद उन्हें अपनी आँखों पर रखें, नियमित ऐसा करें, इससे आपकी आँखों को आराम मिलेगा, साथ ही आपकी ख़ूबसूरती को भी बढ़ावा मिलने में मदद मिलती है,साथ ही अपनी नींद को भी भरपूर लें, और तनाव न लें।

स्किन की ख़ूबसूरती के लिए प्राकृतिक पैक का इस्तेमाल करें:-

स्किन के लिए ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल करने से भी आपकी ख़ूबसूरती कम होने लगती है, इसीलिए आप अपनी स्किन के लिए प्राकृतिक फेस पैक का इस्तेमाल करना चाहिए जैसे की आप स्किन के लिए मुल्तानी मिट्टी, नीम, तुलसी, शहद, चन्दन, बेसन, और हल्दी के पैक का इस्तेमाल कर सकती है, इन प्राकृतिक तरीको का इस्तेमाल करने से आपकी स्किन की चमक बढ़ने के साथ आपको बिना मेकअप खूबसूरत दीखने में मदद मिलती है।

फाइन लाइन्स और झुर्रियों की समस्या से बचें:-

समय के साथ और स्किन के अच्छे से केयर न करने के कारण आपको फाइन लाइन्स और झुर्रियों की समस्या से बचने में मदद मिलती है, इसीलिए आपको अपनी स्किन का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, समय से पहले फाइन लाइन्स और झुर्रियों का होना आपको बूढा बना सकता है, इसीलिए इससे बचने के लिए आप अंडे के सफ़ेद तरल भाग को प्याज़ के रस को हफ्ते में दो बार अच्छे से मिक्स करके अपनी त्वचा पर लगाएं, आपको फाइन लाइन्स और झुर्रियों की समस्या से बचने में मदद मिलती है।

होंठों का ध्यान रखें:-

अपनी ख़ूबसूरती को बढाने के लिए आपको अपने होंठों का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि गुलाबी और कोमल होंठ आपकी ख़ूबसूरती को दुगुना कर देते है, और साथ ही आपकी मुस्कराहट को भी बेहतर बनाने में मदद करते है, इसके लिए आप अपने होंठों पर अपनी जीभ को बार बार न लगाएं, न ही अपने होंठ चबाएं, और हमेशा अपने होंठों की कोमलता को बनाने के लिए लिप बाम का किस्तेमल करें।

बालों की ख़ूबसूरती का भी ध्यान रखें:-

hair

लम्बे घने और सिल्की बाल हमेशा दूसरों को आपकी और आकर्षित करते है, इसीलिए आपको अपने बालों की साफ़ सफाई का ध्यान रखना चाहिए, यदि आपके बाल छोटे है तो इनके लिए एक अच्छे से हेयर कट का चुनाव करना चाहिए, लम्बे बाल है तो उन्हें हमेशा सुलझा कर छोटी बनाकर रखनी चाहिए, ऐसा करने से आपके बालों की अच्छे से केयर होती है, और आपके बालों को आपकी लुक को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

दांतों का भी ध्यान रखें:-

दांतों की अच्छे से सफाई न होने के कारण दांत पीले होने लगते है, जिसके कारण आपका लुक तो खराब होता ही है, बल्कि आपको दूसरों के सामने हास्य का विषय भी बनना पड़ता है, साथ ही आपके दांत में दर्द मुह से बदबू आदि की समस्या भी हो जाती है, इसीलिए इससे बचने के लिए आप अपने दांतों को दिन में दो बार ब्रश से, और खाना खाने के बाद कुल्ला करने से आपको अपने दांतों की साफ़ सफाई करने में मदद मिलती है।

बेहतर हेयर स्टाइल का चुनाव करें, और एक अच्छी ड्रेस पहने:-

यदि आप अपनी ख़ूबसूरती को बढ़ाना चाहती है तो आपको इसके लिए अपने बालों की अच्छे से केयर करनी चाहिए, एक अच्छा सा हेयर स्टाइल बनाना चाहिए, और साथ ही आपको ऐसी ड्रेस पहननी चाहिए, जिसके कारण आपकी लुक को बेहतर बनने में मदद मिलें, और साथ ही आप उस ड्रेस में आरामदायक महसूस करें, ऐसा करने से भी आपको अपनी ख़ूबसूरती को बिना मेकअप के बढाने में मदद मिलती है।

इन्हें भी पढ़ें:- लम्बे बालों की चाह रखते है? तो अपनाएँ ये एक आसान नुस्खा

बिना मेकअप खूबसूरत दीखने के घरेलू तरीके:-

पानी का भरपूर सेवन करें:-

पानी का भरपूर सेवन करने से आपकी स्किन के ग्लो को बरकरार रहने में मदद मिलती है, आपकी त्वचा की नमी बरकरार रहती है, आपकी स्किन को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है, साथ ही इसका सेवन करने से आपके शरीर में मौजूद टॉक्सिन को यूरिन के रास्ते बाहर निकलने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपकी स्किन की चमक को बढाने और आपकी खूबसरती को कायम रखने में मदद मिलती है।

व्यायाम व् योगासन करें:-

yogaaaa

नियमित सुबह उठकर व्यायाम व् योगासन करने से न केवल आपकी स्किन में चमक आती है, बल्कि आपकी बॉडी को फिट होने, और आपको सही शेप में आने में मदद मिलती है, साथ ही इससे आपका बीमारियों से भी बचाव होता है, और आपकी ख़ूबसूरती को बिना मेकअप के ही बढाने में मदद मिलती है, इसीलिए आपको अपनी सेहत को सही रखनें और अपनी ख़ूबसूरती को बढाने के लिए व्ययाम्व योगासन जरुर करना चाहिए।

स्वस्थ, संतुलित व् पोष्टिक आहार का सेवन करें:-

स्वस्थ संतुलित आहार का सेवन करने से केवल आप शारीरिक रूप से ही फिट नहीं रहती है, बल्कि इसके कारण आपके चेहरे की चमक को भी बढाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप नियमित हरी सब्जियों, फलों, फलों के रस आदि का सेवन करें, क्योंकि इसमें इनमें प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट होता है जो सुंदर दिखने के लिए आपकी काफी मदद करता है, इसीलिए आपको अपनी सेहत को सही और अपनी सुन्दरता को बढाने के लिए इसका सेवन जरुर करना चाहिए।

नींद भरपूर लें:-

भरपूर नींद न केवल आपके शरीर के अंगो को आराम देती है, बल्कि इसके कारण आपकी स्किन भी आराम महसूस करती है, जिससे आपके चेहरे पर निखार आता है, इसके अलावा नींद को भरपूर न लेने से आँखों के नीचे डार्क सर्कल जैसी समस्या हो जाती है, जिसके कारण आपकी ख़ूबसूरती कम होने लगती है, इसीलिए आपको अपनी नींद को भरपूर लेना चाहिए।

ड्रिंकिंग स्मोकिंग जैसी लत से दूरी बनाएं:-

गलत आदतें न केवल आपके शरीर को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि इसके कारण आप कई बार समय से पहले बूढ़े, लगने लग जाते है, इसीलिए इससे बचने के लिए आपको इनका सेवन नहीं करना चाहिए, ऐसा करने से आपको फिट रहने के साथ अपनी सुन्दरता को भी बढाने का मौक़ा मिलता है।

ये कुछ टिप्स है जिनका इस्तेमाल करके आप अपनी ख़ूबसूरती को बढ़ा सकते है, और वो भी बिना मेकअप के, और देखा जाएँ तो बिना मेकअप के खूबसूरत दीखना भी एक कला है, परन्तु ये इतना मुश्किल भी नहीं है जितना आप सोचते है, बल्कि कुछ दिन तक नियमित इन टिप्स का इस्तेमाल करने से आपको अपनी ख़ूबसूरती को बढाने में मदद मिलती है, जिससे आपकी ख़ूबसूरती बिन मेकअप के भी निखर कर सामने आती है।

इन्हें भी पढ़ें:- घर पर बनाएं ये फेस पैक और दिखें जवान और पाएं खूबसूरत त्वचा

गर्भवती महिला खाली पेट सो जाये तो क्या होता है?

प्रेगनेंसी में खाने में लापरवाही

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान संतुलित व् पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि बेहतर खान पान गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करता है। प्रेगनेंसी में महिला के शरीर में लगातार हॉर्मोन बदलाव होते है जिसके कारण गर्भवती महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे में खान पान के प्रति किसी भी तरह की लापरवाही गर्भवती महिला के स्वास्थ्य के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर भी बुरा असर डाल सकती है। गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को थोड़े थोड़े समय (दो से तीन घंटे) के बाद कुछ न कुछ पौष्टिक जरूर खाना चाहिए इससे प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी को हमेशा एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है, लेकिन गर्भवती महिला का खाली पेट रहना या खाली पेट सो जाना गर्भवस्था के दौरान होने वाली परेशानियों को बढ़ा सकता है।

प्रेगनेंसी में खाली पेट सो जाने पर हो सकती हैं यह परेशानियां

यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान बिना खाना खाये सो जाती है, तो उठने के बाद महिला को बहुत सी दिक्कतें आ सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला खाली पेट सो जाये तो इसके कारण क्या समस्या हो सकती है।

कमजोरी

खाली पेट सो जाने के कारण प्रेग्नेंट महिला को कमजोरी महसूस हो सकती है, क्योंकि ऐसा करने से बॉडी को पोषण नहीं मिलता है। जिसके कारण जब आप सोकर उठती है तो आपको बॉडी थकी हुई और कमजोरी का अनुभव हो सकता है।

सिर दर्द व् चक्कर

यदि गर्भवती महिला खाली पेट सो जाती है तो इसके कारण सिर में भारीपन, सिर दर्द, चक्कर जैसी समस्या का भी गर्भवती महिला को सामना करना पड़ सकता है।

एसिडिटी

प्रेगनेंसी के दौरान खाली पेट रहना गर्भवती महिला के लिए एसिडिटी जैसी समस्या का कारण बन सकता है। और पेट में गैस बनने के कारण जी मिचलाना, खट्टी डकारें, पेट में दर्द जैसी परेशानी को भी बढ़ा सकता है, और गैस बनने के कारण जब महिला सोकर उठती है तो महिला को उल्टी आने जैसा अहसास भी हो सकता है।

बॉडी पेन

सोने के कारण बॉडी को रिलैक्स महसूस होने में मदद मिलती है, लेकिन गर्भवती महिला यदि कुछ खाएगी नहीं तो इसके कारण बॉडी में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। जिसके कारण गर्भवती महिला को सोकर उठने के बाद शरीर के अंग जैसे की कमर, टांगो, व् बॉडी के अन्य अंगो में दर्द की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

आलस

भूखे पेट सो जाने के बाद जब आप सोकर उठती है तो न तो आपकी नींद पूरी होती है, न ही आपकी बॉडी को आराम मिलता है, बल्कि थकान और कमजोरी के साथ आलस्य बढ़ता है जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक होता है।

नींद में कमी

भूखे पेट सोने के कारण महिला को अच्छी नींद भी नहीं आती है, जिसके कारण बॉडी को भरपूर आराम नहीं मिलता है और प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों का महिला को ज्यादा सामना करना पड़ सकता है, इसीलिए गर्भवती महिला को अच्छी और गहरी नींद लेने के लिए खाना खाने के बाद ही सोना चाहिए।

शिशु का विकास

गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए सभी जरुरी पोषक तत्व गर्भवती महिला के शरीर से ही शिशु लेता है, ऐसे में यदि महिला खाली पेट सो जाती तो शिशु को भी पर्याप्त मात्रा में पोषण नहीं मिलता है जिसके कारण शिशु के विकास में कमी जैसी परेशानी भी महिला को हो सकती है।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जो गर्भवती महिला को खाली पेट सोने के कारण हो सकती हैं। ऐसे में इन परेशानियों से बचने के लिए और गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए महिला को अपने खान पान के प्रति बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला इन 5 बदलाव को इग्नोर नहीं करें

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में बहुत से बदलाव होते हैं साथ ही प्रेग्नेंट महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे में इन परेशानियों के कारण घबराना प्रेग्नेंट महिला की दिक्कतों को बढ़ा सकता है लेकिन दिक्कत ज्यादा हो तो अनदेखा करना और ज्यादा गर्भवती महिला की दिक्कत बढ़ा सकता है। प्रेगनेंसी के दौरान पेट में हल्का दर्द रहना, सूजन की समस्या होना, बॉडी के तापमान में फ़र्क़ आना, बॉडी पेन, सिर में दर्द रहना, आदि आम बात होती है।

लेकिन गर्भवती महिला को बॉडी में होने वाली किसी परेशानी या बदलाव के कारण महिला को दिक्कत हो रही हो तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना माँ व् बच्चे दोनों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। तो आइये अब जानते हैं की ऐसे कौन से 5 बदलाव हैं जिन्हे प्रेग्नेंट महिला को इग्नोर नहीं करना चाहिए।

पेट में अधिक दर्द रहना

गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट के आस पास की मांसपेशियों में खिंचाव आता है साथ ही जैसे जैसे वजन बढ़ता है वैसे वैसे पेट के निचले हिस्से में भार महसूस होता है। जिसकी वजह से पेट में हल्का फुल्का पेट में दर्द रहना बहुत आम बात होती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला को पेट में तेज दर्द महसूस हो, या पेट में अधिक दर्द रहता हो और ब्लीडिंग भी हो तो इसे प्रेग्नेंट महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में पेट में अधिक दर्द का होना एक्टोपिक प्रेगनेंसी, गर्भपात का लक्षण हो सकता है जबकि प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही या तीसरी तिमाही की शुरुआत में यह समय से पहले बच्चे होने का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में जब भी पेट में इतना दर्द हो रहा हो की आपसे सहन ही नहीं हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

सूजन की समस्या

प्रेग्नेंट महिला का पूरा वजन पैरों पर पड़ने के कारण, पेट के आकार के बढ़ने के कारण पैरों तक ब्लड फ्लो सही न होने की वजह से अधिकतर प्रेग्नेंट महिला पैरों में सूजन की परेशानी का सामना कर सकती है। लेकिन यदि पैरों के साथ हाथ, मुँह आदि पर भी सूजन होने लगे और ज्यादा हो जाये तो इसे प्रेग्नेंट महिला को इग्नोर नहीं करना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान सूजन की समस्या का बढ़ना प्रेग्नेंट महिला के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

बच्चे की हलचल न महसूस होना

गर्भ में बच्चे की हलचल महसूस होना प्रेग्नेंट महिला के लिए प्रेगनेंसी का सबसे बेहतरीन लम्हा होता है। लेकिन यदि कभी प्रेग्नेंट महिला को ऐसा महसूस हो की बच्चा गर्भ में हलचल नहीं कर रहा है। तो इस बदलाव को गर्भवती महिला को कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि बच्चा यदि गर्भ में हलचल न करे तो इसका मतलब होता है की गर्भ में बच्चे को खतरा है। और यदि आपको लगे की बच्चे को एक घंटे से ज्यादा हो गया है तो आपको जल्दी डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए।

बुखार होना

गर्भावस्था के समय बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। जिसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान सर्दी, खांसी, फ्लू आदि होने का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को इन सभी से बचकर रहना चाहिए। यदि फिर गर्भवती महिला के शरीर का तापमान बढ़ जाता है, यानी की प्रेग्नेंट महिला को बुखार हो जाता है। तो ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को बुखार से बचने के लिए घर में किसी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए। और तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि प्रेग्नेंट महिला की बॉडी का तापमान अधिक बढ़ना भी माँ व् बच्चे के लिए अच्छी बात नहीं होती है।

खुजली की समस्या होना

गर्भावस्था के दौरान स्किन में खिंचाव बढ़ने व् स्किन में सूखापन आने के कारण प्रेग्नेंट महिला को खुजली की समस्या हो सकती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला को खुजली की समस्या अधिक हो जाये और स्किन पर रैशेस, लाल दाने महसूस होने लगे तो प्रेग्नेंट महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि खुजली की समस्या का अधिक होना लिवर से जुडी परेशानी का कारण हो सकता है। और इससे माँ व् बच्चे दोनों की सेहत को नुकसान हो सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को खुजली की समस्या होने पर बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं वो बदलाव जिनके बॉडी में महसूस होने पर गर्भवती महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। यदि प्रेग्नेंट महिला इन सभी बातों का ध्यान रखती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

सर्दियों की 10 आयुर्वेदिक औषधियां आपके बेहतर स्वास्थ्य के लिए

0

10 Herbs For Good Health In Winters

सर्दियों की 10 आयुर्वेदिक औषधियां आपके स्वास्थ्य के लिए, 10 Winter Herbs, 10 Herbs For Good Health In Winters, ठंड के लिए आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां व मसालें

सर्दियों का मौसम सभी को बहुत अच्छा लगता है क्योंकि पुरे साल भर में केवल एक यही समय होता है जब आप अपने वास्तविक साइज से मोटे लगते है और अपने मनपसंद की चीजों का सेवन कर सकते है। सर्दियों में खिली खिली धुप में बैठना सभी को अच्छा लगता है। इसके साथ ही इस मौसम में आने वाले तरह तरह के फ़ूड भी सभी को अच्छे लगते है। परन्तु बदलते पर्यावरण के साथ आने वाले इन्फेक्शन्स, सर्दी, जुखाम और एलर्जी भी किसी से छुपी नहीं है।

थोड़ी सी ठंड आते है सबकी नाक जाम होने लगती है बच्चों में खांसी की समस्या बड़ों में शरीर दर्द और हड्डियों में जकड़न की समस्याएं होने लगती है। ऐसे में सर्दियों का पूरा मजा किरकिरा हो जाता है। लेकिन कुछ आयुर्वेदिक औषधियां है जिनसे आप अपनी सभी बिमारियों को पीछे छोड़ शरीर की इम्युनिटी बढ़ा सकते है और सर्दियों का पूरा मजा उठा सकते है। यहाँ हम आपको उन्ही आयुर्वेदिक औषधियों और जड़ी बूटियों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है। तो आइये जानते है उनके बारे में –

सर्दियों में बेहतर स्वास्थ्य के लिए 10 आयुर्वेदिक औषधियां :-

1. काली मिर्च :

भारतियों घरों में प्रयोग होने वाला यह मसाला सर्दियों के मौसम में आपको स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा उपाय है। और खांसी में होने वाले कफ की समस्या से निजात पाने के लिए किसी भी दवाई से बेहतर है। क्योंकि इसके लिए आपको कहीं जाने की भी आवश्यकता नहीं होगी और न ही बहुत पैसे खर्च करने पड़ेंगे।

प्रयोग :black pepper

सर्दियों में इसके सेवन के लिए आप इसे अपने टोस्ट और अंडे, Chicken Broth या तली हुई चीजों पर बुरख कर खा सकते है।

2. दालचीनी :

भारतीय व्यंजनों को सजाने और उसमे नया स्वाद लाने के लिए भारतीय रसोइयों में इसका प्रयोग किया जाता है। क्योंकि इसकी गर्म तासीर सर्दियों में स्वास्थ्य को बिगड़ने से बचाने में मदद करती है। साथ ही रोजाना इसके इस्तेमाल से सर्दियों में शरीर को गर्म भी रखा जा सकता है। और फ्लू व् कोल्ड की समस्या में ये कफ से भी आराम दिलाती है।

प्रयोग :dalchini ka prayog

इसके लिए अपने हॉट चॉकलेट में एक चुटकी दालचीनी का पाउडर मिलाएं और पी लें। यह आपको सर्दियों में अर्ली मॉर्निंग होने वाली क्लासेस में कंसंट्रेशन बनाने में मदद करेगी और आपको वार्म रखेगी।

3. अदरक :

खान पान की अधिकतर चीजों में प्रयोग होने वाली अदरक वाकई सर्दियों में स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होती है। इसके अलावा बुखार में भी इसका सेवन करना बहुत अच्छा होता है। गले में खराश, खांसी और जुखाम में भी अदरक की चाय लाभ पहुंचाती है।

प्रयोग :tea

सर्दियों में ठंड से बचने के लिए अपनी चाय में कुटी हुई अदरक डालें। इसके अलावा आप इसे अपने सलाद में भी प्रयोग कर सकते है। लेकिन ध्यान रहे इसके अधिक सेवन से पेट से सम्बंधित बीमारियां या गैस भी हो सकती है। इसीलिए सीमित मात्रा में सही तरीके से इसका सेवन करे।

4. अजवाइन की पत्तियां (Oregano) :

ये एक तरह की इटैलियन औषधि है जिसका सेवन बच्चे पिज़्ज़ा पर सीज़निंग के रूप में करना पसंद करते है। लेकिन क्या आप जानते है की इसमें कई एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते है जो कफ और सर्दी की समस्या को दूर करने में मदद करते है।

प्रयोग :Oregano

उबले हुए अंडे या अंडे की भुर्जी में कुछ oregano flakes मिलाएं। ये न केवल अपने खाने के स्वाद को बढ़ाने का काम करती है अपितु आपकी लिए बेहतर Immunity booster भी है।

5. हल्दी :

भारतीय रसोइयों में सबसे अधिक प्रयोग होने वाला यह मसाला हर खाने का मुख्य हिस्सा माना जाता है। इसके रंग और रूप के कारण ही नहीं अपितु इसकी एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण यह आयुर्वेद की जानी मानी औषधियों में से एक है। दरअसल इसमें एक, Curcumin नामक एक तत्व पाया जाता है जो इसे उत्कृष्ट प्राकृतिक एंटी बायोटिक बनाता है।

प्रयोग :haldi

सामान्यतौर पर सभी अपनी दाल सब्जी में इसका प्रयोग मुख्य मसाले के रूप में कार्य करते है। लेकिन कच्ची हल्दी खाने के भी कई फायदे होते है। इससे आप अस्थमा और साइनस जैसी समस्यायों को भी दूर कर सकते है। इसके अलावा गर्म पानी या गर्म दूध में कच्ची हल्दी मिलाकर पीने के भी कई लाभ होते है।

6. पुदीना :

इसका प्रयोग अक्सर जूस, चटनी और खाने को स्वाद कर फ्रेश बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते है की यह fresh खुशबु देने वाली औषधि आपके स्वास्थ्य के लिए कितनी लाभकारी होती है? केवल फ्लू ही नहीं बल्कि इससे जुडी हर समस्या को दूर करने की क्षमता पुदीने में है। इसमें मौजूद मेंथोल नामक तत्व बंद नाक को खोलने में मदद करता है।

प्रयोग :

फ्लू के कारण शरीर में घुसे वायरस को खत्म करने के लिए पुदीने की हर्बल चाय का सेवन करें। इसके लिए पानी में पुदीने की कुछ पत्तियां डालकर उबाल लें और उससे कुछ देर तक भाप ले।हफ्ते में एक बार इसका प्रयोग करें।बुखार और फ्लू दोनों अपने आप दूर हो जाएगा।

7. रोजमैरी :

इसमें मौजूद cineol and camphene रोजमैरी को एक बेहतर आयुर्वेदिक औषधि बनाते है। यह तत्व मांसपेशियों के दर्द और ऐंठन को दूर करके इम्युनिटी बूस्टर का काम कर्त यही और साथ ही सर्कुलेटरी सिस्टम को भी बेहतर बनाता है।

प्रयोग :

अपनी चाय और सूप में रोजमैरी की कुछ पत्तियों को मिलाएं। जुखाम आदि से आराम पाने के लिए रोजमैरी एसेंशियल आयल की कुछ बूंद पानी में डालकर उसकी भाप लें। समस्या दूर हो जाएगी।

8. Eucalyptus :

जुखाम आदि में विक्स का प्रयोग सभी करते है लेकिन क्या आप जानते है की Eucalyptus भी इस कार्य को करने में सक्षम है। क्योंकि यह पौधा जुखाम में प्रयोग होने वाली OTC Chest Ointments का मुख्य इंग्रीडिएंट होता है। इससे बेहतर तो यही है की आप इसका सीधा ही प्रयोग करें।

प्रयोग :Eucalyptus

इसके लिए Eucalyptus एसेंशियल आयल की कुछ बुँदे उबलते हुए पानी में डालें। और उसकी भाप लें। यह आपको पंसलियों से जुडी समस्यायों में आराम देने में मदद करेगा और साथ ही एलर्जी और wheezing (जुखाम) से भी आराम दिलाएगा।

9. लहसुन :

इस आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग पिछले 5,000 वर्षों से खाना बनाने और कई हीलिंग ailments में किया जा रहा है। जिसका कारण इसमें मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी बैक्टीरियल गुण है जो हर प्रकार की बीमारी को दूर करने की क्षमता रखते है।

प्रयोग :lehsun ke fayde

लहसुन की कुछ ताज़ी कलियों को छीलकर उन्हें मसल लें और उसका सेवन जुखाम और कफ की समस्या में करें। क्योंकि जब लहसुन को पीसा जाता है तो उसमे से एक विशेष प्रकार का तत्व ‘Allicin’ निकलता है जो कोल्ड और फ्लू को दूर करने की क्षमता रखता है। खांसी होने पर आप लहसुन की कुछ कलियों को भूनकर और छीलकर भी खा सकते है।

10. लौंग :

चावल, सब्जी और चाय में प्रयोग होने वाले लौंग को सभी भली भांति जानते है। जुखाम हो या गले में दर्द, खांसी हो या बुखार सभी में यह औषधि अपना कमाल दिखा देती है। जिसका कारण है इसकी एंटी वायरल प्रकृति को जुखाम और इन्फेक्शन्स को दूर करने की भी क्षमता रखती है।

प्रयोग :laung

श्वसन से संबंधित समस्यायों के लिए अपने beverage में लौंग का इस्तेमाल करें। गले में खराश होने पर दांतों से लौंग की कलियों को चबा चबा कर खाएं। खांसी होने पर लौंग डालकर चाय का सेवन करें बहुत लाभ होगा।

पुरुष की लटकती छाती को कैसे ठीक करें

पुरुष की लटकती छाती को कैसे ठीक करें, पुरुष की छाती की चर्बी को कम करने के टिप्स, पुरुष के बढे हुए चेस्ट का इलाज, पुरुष के ब्रैस्ट की चर्बी कम करने के टिप्स

पुरुषो के लिए लटके हुए स्तन की समस्या को यदि समय से कण्ट्रोल नहीं किया जाये तो यह ज्यादा बढ़ने लगते है। जिसके कारण पुरुषो की पर्सनैल्टी खराब होने के साथ कई बार दूसरों के सामने वह मज़ाक के विषय भी बन जाते हैं। पुरुषो के ब्रैस्ट के लटकने के बहुत से कारण हो सकते हैं, जैसे की मोटापा आना, बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव, डाइट का ध्यान न रखना, आदि। क्या आप भी इस समस्या से परेशान हैं और आपको समझ नहीं आ रहा है की किस तरह से इस समस्या से निजात पाया जाए। तो लीजिये आज हम आपको इस परेशानी से बचाव के कुछ आसान टिप्स बताने जा रहे हैं जिनके नियमित इस्तेमाल से पुरुषो को अपनी लटकी हुई छाती की समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है।

पुरुष के लटके हुए ब्रैस्ट के कारण

  • पोषण की कमी के कारण पुरुषो की स्किन ढीली हो सकती है।
  • जो पुरुष आवश्यकता से अधिक खाते हैं, उससे बॉडी में कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है जिसके कारण पुरुषो को इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • बॉडी में हो रहे हार्मोनल असंतुलन के कारण ऐसा हो सकता है।
  • नशे का अधिक अधिक सेवन जैसे की धूम्रपान, अल्कोहल का अधिक सेवन करने से भी आपके ब्रैस्ट के लटकने की समस्या का सामना आपको करना पड़ सकता है।

अपनी डाइट का ध्यान रखें

बॉडी के स्वस्थ रहने के लिए बॉडी में पर्याप्त मात्रा में कैलोरी का सेवन करना बहुत जरुरी होता है। लेकिन यदि आप एक्स्ट्रा कैलोरी का सेवन करते हैं, और अपनी डाइट का ध्यान नहीं रखते हैं तो इससे आपको परेशानी भी हो सकती है। ऐसे में आपको अपनी डाइट का बेहतर तरीके से ध्यान रखना चाहिए और पर्याप्त मात्रा में ही कैलोरी युक्त आहार का सेवन करना चाहिए।

दौड़ लगाएं

यह एक ऐसा व्यायाम है जो आपकी पूरी बॉडी को शेप में लाने में मदद करता है। यदि आप लटकी हुई छाती की समस्या से परेशान है तो नियमित बीस से तीस मिनट तक दौड़ लगाएं। ऐसा करने से आपके शरीर में मौजूद एक्स्ट्रा कैलोरी बर्न होगी, वसा का जमाव नहीं होगा, शरीर के भागों पर जमी अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद मिलेगी। और धीरे धीरे आपकी बॉडी शेप में आने लगेगी जिससे आपको लटकी हुई छाती की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

पुश अप्स

छाती के लटकने की समस्या से निजात पाने के लिए पुश अप्स सबसे बेहतरीन उपाय है, क्योंकि यह बाजू के आस पास की चर्बी को कम करने के साथ आपको फिट रखने में भी मदद करता है। और छाती का फैट कम करने के लिए आप एक दिन में कम से कम बीस पुश अप्स जरूर करें, लेकिन पहली बार में पांच उसके बाद दस और फिर आगे आगे बढ़ाने चाहिए, क्योंकि एक दम से बॉडी पर जोर पड़ने के कारण आपको परेशानी हो सकती है।

सर्जरी

यदि आप कम समय में और आसानी से इस समस्या का समाधान करना चाहते हैं तो आप सर्जरी का सहारा ले सकते है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें की अच्छी जगह से और डॉक्टर के बारे में अच्छे से जानने के बाद ही आप ऐसा करें।

तो यह हैं कुछ कारण और उपचार जिनका इस्तेमाल करके पुरुष इस समस्या से निजात पा सकते हैं। लेकिन आपको इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की आप इन्हे नियमित इस्तेमाल करें क्योंकि एक दिन करने से आपको इस समस्या से निजात नहीं मिलता है।

प्रेगनेंसी का पांचवां महीना बेहतरीन और सातवां महीना खतरनाक क्यों होता है?

गर्भावस्था के कुछ समय बहुत बेहतरीन होता है तो कुछ समय में महिला को बहुत सी परेशानियों का अनुभव भी करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला जितना बेहतरीन समय में एन्जॉय करती है महिला को उतना ही अन्य महीनों में महिला को अपना ध्यान भी रखना चाहिए। ताकि माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रह सकें। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दो महीनों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिनमे से एक महीना महिला के लिए थोड़ा खुशनुमा होता है तो एक महीने में महिला को थोड़ी परेशानी का अनुभव भी हो सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी का पांचवां महीना महिला के लिए बेहतरीन और सातवां महीना परेशानी से भरा क्यों होता है।

प्रेगनेंसी का पांचवा महीना क्यों होता है बेहतरीन?

वैसे तो प्रेगनेंसी का हर पल थोड़ा अच्छा और थोड़ा परेशान भरा हो सकता है। लेकिन पांचवां महीना महिला के लिए सबसे यादगार होता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी का पांचवां महीना बेहतरीन क्यों होता है।

शिशु की हलचल

गर्भावस्था के पांचवें महीने में महिला शिशु की हलचल का अनुभव कर सकती है। कुछ महिलाओं को यह हलचल प्रेगनेंसी के पांचवें महीने की शुरुआत तो कुछ को आखिर में महसूस हो सकती है। जो महिलाएं दूसरी बार माँ बन रही होती है उन्हें इस हलचल की समझ पहली बार माँ बन रही महिलाओं की अपेक्षा जल्दी समझ आ जाती है। ऐसे में आप यह कह सकते हैं की इस समय शिशु की हलचल महसूस होने के कारण महिला अपने बच्चे को करीब से अनुभव करती है और उसके होने के अहसास को महसूस करती है इसीलिए प्रेगनेंसी का पांचवा महीना महिला के लिए बहुत खास होता है।

भूख बढ़ती है

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की भूख में कमी हो सकती है। लेकिन ऐसा जरुरी नहीं है की ऐसा हर महिला के साथ हो, कई महिलाओं की भूख इस दौरान बढ़ जाती है। लेकिन जिन महिलाओं का कुछ खाने का मन नहीं करता है उन महिलाओं के लिए यह बेहतरीन समय होता है क्योंकि बच्चे के विकास के बढ़ने के साथ महिला की खाने पीने की इच्छा में भी वृद्धि होती है।

शारीरिक परेशानियां कम होती है

पांचवें महीने में पहली तिमाही की अपेक्षा महिला की शारीरिक परेशानियां कम होने लगती है। जिसके कारण महिला को खुश रहने में मदद मिलती है और परेशानियों को भूल महिला अपनी प्रेगनेंसी को एन्जॉय करती है।

थोड़ा पेट निकल जाता है

पहली तिमाही में महिला का पेट नहीं निकलता है लेकिन चौथे पांचवे महीने में महिला का पेट थोड़ा सा आगे निकल जाता है। और पहली बार माँ बन रही महिलाएं इसे लेकर बहुत उत्साहित होती है। इसीलिए गर्भवती महिलाओं के लिए पांचवां महीना बहुत बेहतरीन होता है।

शिशु की दिनचर्या

पांचवें महीने में शिशु की दिनचर्या भी थोड़ी बहुत बनने लगती है जैसे की गर्भ में भी शिशु के सोने उठने का समय हो जाता है। जिससे महिला को भी थोड़ा रिलैक्स रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी का सातवां महीना क्यों होता है खतरनाक?

जिस तरह प्रेगनेंसी का पांचवां महीना महिला के लिए बेहतरीन होता है उसी तरह प्रेगनेंसी का सातवां महीना महिला के लिए थोड़ा परेशानी भरा हो सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी का सातवां महीना महिला के लिए खतरनाक क्यों होता है।

पेट बाहर निकल जाता है

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में गर्भवती महिला का पेट बाहर की तरफ निकल जाता है, जिसके कारण महिला को चलने फिरने, उठने बैठने, में दिक्कत हो सकती है साथ ही पेट के निचले हिस्से पर दबाव पड़ने के कारण दर्द भी महसूस सकता है।

पीठ में दर्द

पेट के बाहर निकलने के कारण पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ सकता है। जिसके कारण महिला को पीठ में दर्द की परेशान अधिक हो सकती है, और जिन महिलाओं को पहले से ही पीठ में दर्द की परेशानी होती है उन्हें ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

कब्ज़ की समस्या

पेट के निचले हिस्से पर दबाव पड़ने के कारण महिला की पाचन क्षमता कमजोर पड़ सकती है। जिसकी वजह से गर्भवती महिला को कब्ज़, गैस आदि की समस्या का अधिक सामना करना पड़ सकता है।

बार बार यूरिन पास करने की इच्छा

प्रेगनेंसी के दौरान जैसे जैसे बच्चे का विकास बढ़ता है वैसे वैसे गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण बार बार महिला की यूरिन पास करने की इच्छा हो सकती है। और वजन बढ़ने का कारण, पेट बाहर आने के कारण बार बार बाथरूम में जाने की वजह से महिला को परेशानी का अधिक अनुभव हो सकता है।

सूजन की परेशानी

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में कुछ महिलाओं को हाथों, पैरों में सूजन भी अधिक महसूस हो सकती है। और यदि कुछ महिलाओं को सूजन के साथ दर्द भी महसूस हो सकता है। जिसके कारण सातवें महीने में महिला की दिक्कतें बढ़ सकती है।

ब्रेस्ट से जुडी समस्या

ब्रेस्ट में भारीपन, स्तन में स्त्राव होना, दर्द महसूस होना आदि की समस्या प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला अधिक महसूस कर सकती है। जिसकी वजह से प्रेग्नेंट महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

तनाव

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में बच्चे के विकास को लेकर, शारीरिक परेशानियों को लेकर, डिलीवरी को लेकर डर के कारण प्रेग्नेंट महिला को तनाव महसूस हो सकता है। और इस दौरान महिला का तनाव लेना खतरनाक हो सकता है।

समय पूर्व प्रसव का भय

गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी के सातवें महीने में अपनी केयर अच्छे से नहीं करती है। तो इसके कारण प्रेग्नेंट महिला के साथ बच्चे को भी दिक्कत हो सकती है, क्योंकि महिला द्वारा बरती गई लापरवाही के कारण समय से पहले ही शिशु का जन्म हो सकता है। जिसके कारण माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है। इसीलिए इन्ही कारणों की वजह से सातवां महीना प्रेग्नेंट महिला के लिए खतरनाक हो सकता है।

तो यह है प्रेगनेंसी के पांचवें महीने के बेहतरीन और सातवें महीने के खतरनाक होने का कारण ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। और यदि आप प्रेगनेंसी की शुरुआत में ही इन बातों को समझ लेते हैं तो आपको प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले बदलाव के कारण परेशान होने व् शारीरिक परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

Eleven day Challenge in Pregnancy

प्रेगनेंसी महिला के लिए बहुत ही बेहतरीन समय होता है और महिला यदि चाहती है की इस दौरान महिला स्वस्थ रहे और उसके बच्चे का विकास अच्छे से हो। तो इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। साथ ही महिला को उन सभी कामों को न करने की सलाह दी जाती है जो प्रेग्नेंट महिला और बच्चे को नुकसान पहुँचाते हैं। लेकिन महिला तब तक प्रेगनेंसी के दौरान फिट नहीं रहती है जब तक महिला का एक सही रूटीन सेट नहीं होता है।

और इसके लिए कई महिलाएं रूटीन बनाने की ट्राई भी करती है लेकिन वो केवल बनता ही है फॉलो नहीं होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल में हम आपको एक ऐसे चैलेंज के बारे में बताने जा रहे हैं जो यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला लेती है तो महिला को अपने रूटीन को सही रखने में मदद मिल सकती है। और वो चैलेंज है एलेवेन डे चैलेंज इन प्रेगनेंसी, आइये अब इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या है एलेवेन डे चैलेंज इन प्रेगनेंसी?

यह चैलेंज ग्यारह दिन के लिए लगातार प्रेग्नेंट महिला को लेना होता है। यानी की महिला को एक लिस्ट बनानी होती है की ग्यारह दिन तक महिला कब खाएंगी, क्या खाएंगी, कब पानी पीयेंगी, कब सोयेंगी, कब उठेंगी, कब सैर करेंगी, किस समय योगासन करेंगी, दवाइयां कब लेंगी आदि। और जब महिला इस ग्यारह दिन के चैलेंज को पूरा करती है तो महिला को सब याद हो जाता है और महिला को उन सभी चीजों की आदत भी पड़ जाती है। और जब महिला का रूटीन सेट हो जाता है तो इससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फिट रहने में मदद मिलती है।

कैसे करें एलेवेन डे चैलेंज इन प्रेगनेंसी को फॉलो

  • सबसे पहले आप एक लिस्ट बनाएं जिसमे आप लिखें की आपने कब कौन सा काम करना है।
  • उसके बाद अपने फ़ोन में अलार्म सेट करने की आदत डालें ताकि यदि आप भूल जाये तो भी आपका फ़ोन आपको याद दिलाता रहे की आपको क्या करना है।
  • पहली बात आपको अपने सोने और उठने के समय को सही करना है जैसे की आपको रात को आठ से नौ के बीच सोना है तो सोना है, सुबह पांच से छह बजे के बीच उठना है तो उठना है।
  • उठने के बाद एक गिलास गुनगुना पानी पीना है।
  • फिर आपको थोड़ी देर व्यायाम या योगासन करना है तो करना है चाहे दस मिनट के लिए करें।
  • जब आप सोकर उठते हैं तो उसके एक से डेढ़ घंटे के भीतर नाश्ता करना ही है।
  • गर्भवती महिला को एक दिन में आठ से दस गिलास पानी पीने चाहिए तो हर एक से डेढ़ घंटे बाद का अलार्म लगाएं और पानी पीते रहें।
  • लिस्ट बनाएं की आपको नाश्ते में क्या खाना है और जो चीज खानी है वो खानी है जैसे की एक दिन फ्रूट्स खाने हैं, एक दिन पोहा उत्तपम ओट्स या अन्य कोई साबुत अनाज खाना है, और उसी लिस्ट के अनुसार नाश्ता लें।
  • चैलेंज में लिखे की रोजाना आपको लंच या डिनर में एक कटोरी दाल पीनी ही है।
  • एक दिन में दो से तीन गिलास दूध पीने हैं तो पीने हैं।
  • नाश्ते या लंच में कटोरी दही को शामिल करना है तो करना है।
  • एक गिलास जूस या एक समय फ्रूट्स खाने हैं तो खाने ही है।
  • दिन में एक बार आपको उबला हुआ खाना खाना है तो खाना है।
  • एक टाइम की सब्ज़ी में हरी सब्ज़ी खानी है तो खानी है।
  • दवाई का एक समय बनाएं उस समय दवाई लेनी है तो लेनी है।

ध्यान रखें:

तो यह हैं एलेवेन डे प्रेगनेंसी चैलेंज से जुड़े कुछ टिप्स, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इस चैलेंज को जरूर लेना चाहिए। क्योंकि इससे आपको फिट रहने में मदद मिलेंगी। और एक बात, सच तो यह है की ग्यारह दिनों में आपका रूटीन अच्छे से सेट नहीं होती है कुछ चीजों की आदत हो जाती है, लेकिन कुछ चीजों की आदत नहीं होती है। लेकिन इक्कीस दिन का चैलेंज लेने से आपको इन चीजों की आदत अच्छे से पड़ जाती है। तो आपको इक्कीस दिन तक आपको अपने रूटीन की जरूर फॉलो करना है। ताकि आपको और आपके बच्चे को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

Eleven day Challenge in Pregnancy