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गर्दन के कालेपन को दूर करने के उपाय

हर लड़की चाहती है की वे सुन्दर और खुबसूरत दिखे, जिसके लिए वे काफी मेहनत भी करती है। लेकिन कई बार देखभाल करते रहने के बावजूद भी कोई न कोई कमी रह ही जाती है। स्किन की बात करें तो फेस और हाथ पैरों की स्किन के लिए तो सभी कुछ न कुछ करती रहती है। लेकिन हमारे शरीर के कई ऐसे हिस्से भी है जिनपर हमारा ध्यान ही नहीं जाता। और गर्दन उन्ही हिस्सों में से एक है। जी हां, फेस की खुबसूरती के लिए तो हम सभी तरह तरह के उपाय करते रहते है लेकिन गर्दन के बारे में बहुत ही कम लड़कियां सोचती है। जबकि गर्दन उनकी खुबसूरती का अभिन्न हिस्सा मानी जाती है।gardan ka kalapan

शायद आप नहीं जानती, लेकिन गर्दन की खुबसूरती भी आपके लुक्स को काफी प्रभावित करती है। जहां एक तरफ सुन्दर और साफ़ सुथरी गर्दन आपके लुक्स को बेहतर बनाती है, वहीं काली गर्दन आपकी सुन्दरता को खराब करती है। पहले के समय का तो पता नहीं लेकिन आजकल बहुत से लोग अपनी काली गर्दन को लेकर परेशान रहते है। जिसके बहुत से कारण हो सकते है।

गर्दन के काली होने के क्या कारण होते है?

गर्दन के काली होने का सबसे बड़ा कारण पिगमेंटेशन को माना जाता है जो अक्सर धुप के अधिक समपर्क में रहने से होता है। इसके अलावा बढती उम्र, मधुमेह, अनुवांशिक और त्वचा की ठीक तरह से साफ़ सफाई न करना भी गर्दन के कालेपन का कारण होते है। जिससे परेशान होकर बहुत से लोग महंगे ट्रीटमेंट की मदद लेने लगते है जो सीधे तौर पर स्किन को और अधिक नुकसान पहुंचा देते है। ऐसे में इनका प्रयोग करना ठीक नहीं।

शायद आप नहीं जानते, लेकिन महंगे ट्रीटमेंट के अतिरित्क भी और बहुत से ऐसे उपाय और तरीके है जिनकी मदद से स्किन के कालेपन को बड़ी आसानी से दूर किया जा सकता है। और आज हम आपको उन्ही उपायों के बारे में बताने जा रहे है।

गर्दन का कालापन दूर करने के घरेलू उपाय 

1. ओट्स :

ओट्स, स्किन के लिए एक बेहतर स्क्रबर के रूप में कार्य करता है। जो न केवल डेड स्किन को साफ़ करता है अपितु उस हिस्से के कालेपन को भी दूर करता है। गर्दन के कालेपन को दूर करने के लिए भी आप इस उपाय का इस्तेमाल कर सकते है। प्रयोग के लिए 2 चम्मच ओट्स पाउडर लें और उसमे थोड़ी सी टमाटर की प्यूरी मिला लें।

अच्छे से मिलाकर इस पेस्ट को गर्दन पर लगायें और 20 मिनट के लिए रहने दें। 20 मिनट बाद स्किन को हलके हाथों से स्क्रब करें। बाद में ठंडे पानी से साफ़ कर लें और पोंछ लें। धोने के बाद मोइस्चराइज़र लगाना न भूलें। सप्ताह में दो बार इस उपाय का इस्तेमाल करें। कुछ ही प्रयोगों में समस्या दूर हो जाएगी।

2. आलू :

आलू में ब्लीचिंग गुण पाए जाते है जो न केवल स्किन को साफ करता है अपितु गर्दन के कालेपन को भी दूर करने में मदद करता है। प्रयोग के लिए एक या दो आलुओं को घिस लें और उसका रस निकाल कर अलग रख लें। अब इस रस का इस्तेमाल अपनी गर्दन पर करें। 15 मिनट तक ऐसे ही रहने दें और उसके बाद ठंडे पानी से स्किन साफ़ कर लें। आप चाहे तो आलू के रस में नींबू का रस भी मिला सकते है।

3. एलोवेरा :

एलोवेरा स्किन संबंधी समस्यायों को दूर करने के साथ-साथ उसके रंग को निखारने में भी मदद करता है। जी हां, इसमें मौजूद गुण न केवल स्किन को मोइस्चराइज़ करते है अपितु त्वचा के रंग को भी हल्का करते है। इसके अलावा इसमें कई एंटी ओक्सिडेंट भी पाए जाते है जो त्वचा के सेल्स को रिपेयर करने में मदद करते है।

प्रयोग के लिए एलोवेरा के पत्तों से जेल निकाल लें और उसे अपनी गर्दन पर लगाकर 20 मिनट तक मसाज करें। 20 मिनट बाद पानी से साफ़ कर लें। प्रतिदिन इस प्रक्रिया को दोहराएँ स्किन का कलर अपने आप ही बेहतर होने लगेगा।

4. नींबू :

नींबू स्किन के लिए कितना फायदेमंद होता है यह बताने की आवश्यकता नहीं। इसमें एंटी ओक्सिडेंट से लेकर एंटी बैक्टीरियल और ब्लीचिंग के गुण भी पाए जाते है जो न केवल स्किन को तरह तरह की परेशानियों से बचाते है अपितु स्किन के कलर को भी हल्का करते है। अगर आप भी अपनी गर्दन के कालेपन से परेशान है तो नींबू का इस्तेमाल करके देखें।nimbu

प्रयोग के लिए, नींबू के रस को रुई में लेकर अपनी स्किन पर रगड़ें। (ध्यान रहे अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है तो नींबू के रस में हलका पानी मिला लें।) थोड़ी देर रगड़ने के बाद 20 मिनट के लिए स्किन को ऐसे ही रहने दें। उसके बाद ठंडे पानी से गर्दन साफ़ कर लें। लेकिन एक बात ध्यान रखें, नींबू के इस्तेमाल के बाद धुप के सीधे सम्पर्क से आने से बचें अन्यथा उपाय का उल्टा रिएक्शन हो सकता है। वैसे आप चाहे तो नींबू के रस में बराबर मात्रा का गुलाबजल मिलाकर भी प्रयोग में ला सकते है।

5. बेसन :

बेसन सभी की रसोई में मिलने वाला सामान्य खाद्य पदार्थ है। लेकिन क्या आप जानते है की इसकी मदद से भी आप अपनी गर्दन के कालेपन को दूर कर सकते है। जी हां, यह स्किन के लिए स्क्रबर के साथ-साथ एक ग्लोइंग फेस पैक के रुप में कार्य करता है। और इसका इस्तेमाल हमेशा हल्दी मिलकर किया जाता है जिसमे एंटी सेप्टिक गुण होते है।

प्रयोग के लिए 2 चम्मच बेसन में 1 चुटकी हल्दी मिलाएं और थोडा पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को गर्दन के काले हिस्से पर लगायें और 20 म्मिनत ऐसे ही रहने दें। सूखने के बाद पानी का छींटा मारते हुए रगड़कर इसे साफ़ कर लें। थोड़े थोड़े दिनों के गैप पर इस उपाय का इस्तेमाल करें स्किन पहले की तरह हो जाएगी।

6. खीरा :

शायद आप नहीं जानते लेकिन खीरे का इस्तेमाल स्किन के कालेपन को दूर करने के लिए भी किया जा सकता है। जी हां, इसमें मौजूद गुण स्किन को नमी देकर डेड सेल्स को हटाने में मदद करते है जिससे नए सेल्स स्किन का ग्लो दिखने लगता है।

प्रयोग के लिए खीरे को घिसकर उसका रस निकाल लें और उसे अपनी गर्दन पर लगायें। 10 मिनट तक रखने के बाद हलके हाथों से स्क्रब करते हुए ठंडे पानी से साफ़ कर लें। आप चाहे तो खीरे के रस में नींबू का रस मिलाकर उसे अपनी गर्दन पर भी लगा सकते है।

7. संतरा :

संतरे में विटामिन सी और ब्लीचिंग दोनों के गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते है जो स्किन को स्क्रब करने के साथ साथ निखारने में भी मदद करता है। गर्दन के कालेपन को दूर करने के लिए आप संतरे के छिलके की मदद ले सकते है। इसके लिए संतरे के छिलकों को धुप में सुखा लें।

अच्छी तरह सूखने के बाद इन्हें थोडा दरदरा पीस लें। अब इसमें बराबर मात्रा में दूध मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को गर्दन पर लगायें और सूखने तक इन्तजार करें। सूखने के बाद ठंडे पानी से साफ़ कर लें। आप चाहे तो संतरे के छिलकों को पीसकर उनमे संतरे के रस को मिलाकर भी इस्तेमाल कर सकते है।

8. बेकिंग सोडा :

स्किन के काले दाग-धब्बों को हटाना हो या स्किन की भीतरी सफाई करनी हो दोनों के लिए बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करना बहुत ही लाभकारी होता है। यह दागों को हल्का करके उस जगह को निखारने में भी मदद करता है।

प्रयोग के लिए, तीन भाग बेकिंग सोडा में 1 भाग पानी मिलकर एक गाढ़ा मिश्रण तैयार कर लें। अब इस मिश्रण को अपनी गर्दन पर लगायें और सूखने का इन्तजार करें। सूखने के बाद ठंडे पानी से साफ़ कर लें। कुछ ही हफ्तों के प्रयोग में आपकी गर्दन पहले से साफ़ और गोरी हो जाएगी।

तो ये थे कुछ घरेलू उपाय जिनकी मदद से आप अपनी गर्दन के कालेपन को आसानी से दूर कर सकते है। लेकिन ध्यान रहे ये सभी उपाय पूरी तरह से घरेलू और नेचुरल प्रोडक्ट्स पर निर्भर है जिनके कोई साइड इफेक्ट्स नहीं है। परन्तु अगर आपको इनमे से किसी से भी एलर्जी है तो उसका इस्तेमाल करने से पहले स्किन स्पेसिलिस्ट से सलाह अवश्य लें लें।


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स्तनपान ही नहीं बल्कि इन वजहों से भी खो देते है! आप ब्रैस्ट की सुन्दरता

महिलाओ की सुंदरता को बढ़ाने में उनका हर एक अंग मदद करता है, और ये कहा जाता है की ब्रैस्ट महिला अट्रैक्शन को बढ़ाने में सबसे ज्यादा मदद करता है, परन्तु महिलाओ के ब्रैस्ट का आकार सही न होने के कारण उनकी ख़ूबसूरती कही न कही फीकी पड़ जाती है, ज्यादातर महिलाओ का ये मानना होता है की स्तनपान करवाने की वजह से उनके ब्रैस्ट का आकार खराब हो गया है, परन्तु ये सच नहीं है, महिलाओ के ब्रैस्ट के आकार के खराब होने के और भी कई कारण होते है।

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ब्रैस्ट के साइज का ज्यादा होना, कम होना, ब्रैस्ट में ढीलापन आना, ये महिलाओ के ब्रैस्ट की सुंदरता को खराब कर देता है, हर महिला अपने फिगर के हिसाब से परफेक्ट ब्रैस्ट शेप की इच्छा रखती है, परन्तु ये सभी महिलाओ के लिए संभव नहीं हो पाता है, इसका कारण महिलाओ की उम्र का बढ़ना, भी हो सकता है और यह एक नेचुरल है जिसके कारण आपकी बॉडी समय के साथ अपनी इलास्टिसिटी खो देती है, इसके अलावा कई महिलाएं ये भी सोचती है की यदि वो शिशु को सतपान करवाती है तो इसके कारण उनके ब्रैस्ट ढीले या आकार में बड़े हो जाते है ये सही नहीं है, बल्कि स्तनपान करवाने से महिला की बॉडी को फिट रहने में मदद मिलती है, महिलाओ के स्तन में दूध आने के बाद स्तन में बदलाव आता है, परन्तु जैसे ही बच्चा शिशु स्तनपान करना बंद करता है, वैसे ही ब्रैस्ट अपने सही शेप में आ जाता है, तो आइये आज हम आपको बताते है की महिलाओ के ब्रैस्ट के साइज के खराब होने के और क्या क्या कारण हो सकते है।

प्रेगनेंसी में होने वाले बदलाव के कारण:-

गर्भावस्था के शरीर में बहुत बदलाव आते है और कुछ बदलाव शारीरिक होते है, जैसे की वजन का बढ़ना, ब्रैस्ट में खिंचाव होना, या ढीलापन आना, तो इस कारण भी आपके ब्रैस्ट की शेप खराब हो सकती है।

मेनोपॉज़ की अवस्था में:-

मेनोपॉज़ एक ऐसी अवस्था है जो एक उम्र के बाद महिलाओ में आती है, इसके कारण बॉडी में खिंचाव नहीं रहता है, और स्किन भी धीरे धीरे ढीली पड़ने लगती है, जिसके कारण आपके ब्रैस्ट में भी ढीलापन आ जाता है, और आपके ब्रैस्ट का शेप खराब हो जाता है।

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बहुत तेजी से जब वजन घटा है, या बढ़ता है:-

शरीर में चर्बी जमने के कारण इसका असर आपके ब्रैस्ट पर भी पड़ता है, जिसके कारण ब्रैस्ट की त्वचा ढीली हो जाती है, उसके बाद जब आप तेजी से वजन घटाने की सोचते है तो भी इसका असर आपके ब्रैस्ट पर पड़ता है, वो ये की आपके ब्रैस्ट की त्वचा ढीली हो जाती है, जिसके टाइट न होने के कारण आपके ब्रैस्ट का शेप खराब हो जाता है।

शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण:-

शरीर में पोषण तत्वों की कमी का असर आपके पूरे शरीर पर दिखने लगता है, जिसके कारण आपकी स्किन में खिंचाव नहीं रहता है, और न ही अच्छे से अंगो का विकास हो पाता है, इसके कारण शरीर या तो ब्रैस्ट का आकार छोटा रह जाता है, या फिर त्वचा ढीली पड़ने लग जाती है।

अपनी फिटिंग की ब्रा न पहनने के कारण:-

ज्यादातर महिलाओ की ब्रैस्ट शेप ख़राब होने का सबसे बड़ा कारण होता है की वो अपने साइज की ब्रा नहीं पहनती है, या तो वो अपने साइज से बड़ी ब्रा का चुनाव करती है, या फिर छोटी ब्रा पहनती है, जिसके बुरा असर उनके ब्रैस्ट शेप पर पड़ता है, और आपको ये जानकार हैरानी होगी की ज्यादातर महिलाओ को अपने सही ब्रैस्ट के साइज का ही पता नहीं होता है, इसीलिए यदि आप अपने ब्रैस्ट शेप को सही करना चाहते है, तो सबसे पहले आपको अपने ब्रैस्ट के साइज की ब्रा का ही चुनाव करना चाहिए।

ब्रैस्ट कैंसर या ट्यूबरक्लोसिस जैसी बीमारियों के कारण भी ब्रैस्ट पर प्रभाव पड़ता है:-

जो महिलाएं ब्रैस्ट कैंसर या ट्यूबरक्लोसिस जैसी बीमारियों के कारण पीड़ित होती है, उन्हें भी खराब ब्रैस्ट शेप की परेशानी से गुजरना पड़ता है, यदि आपको भी ऐसी कोई समस्या है, तो इसके ठीक होने के बाद आप अपने ब्रैस्ट को सही शेप में ला सकती है।

नशीले पदार्थो व् धूम्रपान का सेवन करने के कारण:-

नशीले पदार्थो का सेवन करने और धूम्रपान के कारण भी त्वचा ढीली पड़ने लगती है, और इसका असर आपकी त्वचा पर झुर्रियों के रूप में भी साफ़ दिखाई देता है, और इसीलिए इसके कारण आपके ब्रैस्ट के शेप पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है, तो यदि आप अपने ब्रैस्ट शेप को सही करना चाहते है तो आपको नशीले पदार्थो का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो ये कुछ अन्य कारण है जिनके कारण आपके ब्रैस्ट के शेप पर बुरा प्रभाव पड़ता है, और आपके स्तन की शेप खराब हो जाती है, तो जो महिलाएं अपने ब्रैस्ट शेप के खराब होने के डर से अपने शिशुओं को स्तनपान करवाना बंद कर देती है, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि माँ का दूध नवजात शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार है, और इससे शिशु के विकास के साथ महिला को भी फिट रहने में मदद मिलती है।

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प्रेगनेंसी में मांसाहारी भोजन खाने के फायदे

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प्रेगनेंसी के दौरान खान पान को लेकर महिला को बहुत ज्यादा ध्यान देना बढ़ता है, की इस समय उसे क्या खाना चाहिए। महिला को ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिसमे भरपूर पोषक तत्व हो, जिससे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके, साथ ही महिला को भी स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान मांसहारी भोजन को लेकर महिलाएं चिंता में रहती है की क्या उन्हें प्रेगनेंसी के दौरान इसका सेवन करना चाहिए या नहीं। और इसका जवाब यह है की किसी भी चीज का सेवन यदि जरुरत के अनुसार और पर्याप्त मात्रा में किया जाए तो उसका कोई नुकसान नहीं होता है।

साथ ही यह भी सच है की प्रेगनेंसी में आपको हरी सब्जियों या फल खाकर उतना आयरन, प्रोटीन, फैटी एसिड व् मिनरल्स नहीं मिलते हैं जितना मांसहारी भोजन खाकर मिलते हैं। लेकिन खाने से पहले आप एक बार डॉक्टर से पूछ लें की इस दौरान को कितना और क्या क्या खा सकते हैं। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान मांसहारी भोजन का सेवन केवल महिला के लिए ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करता है। तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की आप प्रेगनेंसी के दौरान मांसहारी भोजन में क्या क्या खा सकते हैं।

प्रेगनेंसी में अंडा खाने के फायदे

अंडे में भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है जो शिशु के विकास को बेहतर करने में मदद करता है, इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने और साथ ही उच्च मात्रा में कैलोरी से भरपूर होने के कारण गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करता है। गर्भवती महिला और भ्रूण के लिए अंडे का सेवन बहुत ही फायदेमंद होता है लेकिन अंडे कच्चे नहीं खाने चाहिए, और जब भी खाने को तो ताजे उबालकर या ऑमलेट बनाकर इसका सेवन करें।

फिश का सेवन करने के फायदे

फिश में ओमेगा फैटी एसिड और प्रोटीन भरपूर होते हैं जो शिशु के मस्तिष्क के बेहतर विकास में मदद करते हैं। साथ ही यह प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले दमा के खतरे से भी शिशु और भ्रूण दोनों को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। लेकिन आपको कुछ खास किस्म की मछलियों का ही सेवन करना चाहिए जैसे की सालमन, ट्राउट आदि, और इन्हे भी हफ्ते में एक बार ही खाना चाहिए क्योंकि एक बार खाने से भी यह आपको बहुत फायदा देते हैं।

प्रेगनेंसी में चिकन खाने के फायदे

आयरन, कैल्शियम, विटामिन से भरपूर चिकन खाने से भी प्रेगनेंसी के दौरान बहुत से फायदे होते हैं। लेकिन इसे न तो अधिक मात्रा में खाना चाहिए, और न ही बासी खाना चाहिए, न ही अधपका खाना चाहिए। आप पंद्रह से बीस दिन में एक बार चिकन का सेवन कर सकते हैं। साथ ही आपको किसी अच्छी जगह से इसे लेकर खाना चाहिए।

तो यह हैं कुछ मांसहारी आहार जिनका सेवन आप प्रेगनेंसी के दौरान कर सकते हैं। और ऐसा इसके सेवन से गर्भवती महिला और शिशु को भरपूर पोषक तत्व मिलेंगे। साथ ही एक बात का और ध्यान रखें की आप जो भी डिश खाएं वो ताज़ी बनी हुई हो, अधपकी न हो क्योंकि इसके कारण परेशानी हो सकती है।

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गर्भावस्था में मांसाहारी भोजन खाने के फायदे

घर पर बनाए स्क्रब और चमकाएँ अपना चेहरा

ख़ूबसूरत दिखना हर औरत की तमन्ना होती है, जिसके लिए वो तरह तरह के जतन करती रहती हैं, कभी चेहरा सँवार कर तो कभी बाल सँवार कर। सिर्फ़ मेकअप करके ख़ूबसूरत नहीं बना जा सकता, मेकअप करके अपनाई गई ख़ूबसूरती कुछ समय बाद नक़ली और बेजान लगने लगती है। अगर सच में ख़ूबसूरत बनना है तो हमें अपनी त्वचा का बहुत ध्यान रखना चाहिए। त्वचा की देखभाल के लिए बाज़ार में बहुत से उत्पाद उपलब्ध हैं, पर ये महँगे होने के साथ साथ त्वचा के लिए हानिकारक भी हो सकते हैं, क्यूँकि इनमें केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। त्वचा की सही देखभाल के लिए हमें घरेलू उपचारों को अपनाना चाहिए। घरेलू उपचार सस्ते होने के साथ साथ प्राकृतिक होने के कारण फ़ायदेमंद भी होते हैं। चेहरे की देखभाल के लिए आज कितने ही तरह के उपाय इस्तेमाल में आने लगे हैं, क्लींज़िंग, स्क्रब, फ़ेशल, ब्लीचिंग, फ़ेसपैक इत्यादि।बिना साबुन के चेहरा साफ कैसे करें

जैसे ही सर्दियां शुरु होती हैं उसके साथ-साथ त्वचा से सम्बंधित ऐसी बहुत सी परेशानियाँ हमारे सामने आने लगती हैं। सर्दियों में अक्सर लड़कियां अपनी त्वचा को कोमल बनाए रखने के लिए कई तरह की क्रीमों का प्रयोग करती हैं। जिसके कारण हमारी त्वचा पर डेड स्किन जमा होने लगती है। ऐसे में इस डेड स्किन को अगर आप नहीं हटाते हैं तो आपकी त्वचा को कई तरह के नुकसान हो सकते हैं।

डेड स्किन या मृत त्वचा से मुक्ति पाने के लिए आज हम आपको स्क्रब के बारे में बताने जा रहे हैं। स्क्रबिंग खूबसूरत त्वचा पाने के लिए एक ज़रूरी प्रक्रिया है, जिसे सभी को नियमित रूप में अपनाना चाहिए। अपनी त्वचा के हिसाब से हफ़्ते में एक या दो बार त्वचा को ज़रूर स्क्रब करना चाहिए, ताकि चेहरे पर जमी हुई धूल, गंदगी व तेल साफ़ हो जाए। स्क्रब करना इसलिए भी आवश्यक है क्यूँकि त्वचा अपनी पुरानी कोशिकाओं को त्यागकर चेहरे पर नयी कोशिकाएं उत्पन्न करती है। मृत कोशिकाएं त्वचा के ऊपरी भाग में होती हैं। इन मृत कोशिकाओं को एक्सफोलिएशन प्रक्रिया के द्वारा निकाला जा सकता है।

इस प्रक्रिया के अंतर्गत हम त्वचा की ऊपरी मृत सतह को साफ़ करते हैं। इस प्रक्रिया को स्क्रब्स की सहायता से किया जाता है। स्क्रब्स शरीर से मृत कोशिकाएं निकालते हैं। अगर ये कोशिकाएं नहीं निकाली जाएँ तो त्वचा की रौनक कम हो जाती है तथा चेहरे पर रंजकता आ जाती है। इसकी वजह से त्वचा में मुँहासे तथा अन्य त्वचा सम्बंधी बीमारियाँ भी हो सकती हैं। इसीलिए शरीर और त्वचा का एक्सफोलिएशन आवश्यक है। अब हम आपको कुछ घरेलू स्क्रब्स के बारे में बताएँगे –

चमकदार त्वचा के लिए घरेलू स्क्रब :- 

1. टमाटर और चीनी का स्क्रब – एक मीडीयम साइज़ का टमाटर लें और उसे कद्दूकस कर लें। अब इसमें थोड़ी चीनी मिलाएँ। दो मिनट तक इसे ऐसे ही छोड़ दें, फिर इस तैयार मिश्रण से करीब 4 से 5 मिनट तक गोलाकार मुद्रा में त्वचा पर स्क्रब करें। हफ्ते में कम से कम दो बार इस विधि का प्रयोग करने से ही आप पाएंगे कि आपके चेहरे से मृत कोशिकाएँ निकल गईं हैं और आपकी त्वचा की गुणवत्ता में काफी सुधार आया है। टमाटर ना सिर्फ आपकी त्वचा को साफ़ करते हैं, बल्कि तेज़ी से उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को भी रोकते हैं।

2. कॉफ़ी स्क्रब – आधा चम्मच चीनी, 1 चम्मच कॉफ़ी पाउडर और एक चम्मच बादाम या जैतून के तेल को एक बर्तन में डालें और अच्छे से मिक्स कर लें। इस मिश्रण को ना सिर्फ चेहरे के स्क्रब के रूप में, बल्कि पूरे शरीर की एक्सफोलिएशन के लिए हफ्ते में एक बार ज़रूर प्रयोग करें। कॉफ़ी में एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ बनाते हैं। इसका नियमित इस्तेमाल करने से त्वचा में चमक आ जाती है।

3. चावल के आटे का स्क्रब – एक चुटकी बेकिंग सोडा और दो चम्मच चावल का आटा लें। इन दोनों पदार्थों को अच्छे से मिलाएं और त्वचा पर 3 से 4 मिनट तक मसाज करें। इसके बाद इसे दस मिनट तक चेहरे पर छोड़ दें और फिर पानी से धो लें। जब आप इस स्क्रबर का प्रयोग करेंगे तो आपके चेहरे से मृत और बेजान त्वचा निकलेगी और नई त्वचा सामने आएगी। इससे त्वचा में एक बेहतरीन चमक आती है। यह स्क्रब हर प्रकार की त्वचा के लिए काफी अच्छा है, चाहे वो तैलीय त्वचा हो, सामान्य हो या ख़ुश्क हो।

4. अखरोट का स्क्रब – स्क्रबिंग के लिए अखरोट को सबसे बेहतर माना जाता है। अखरोट स्क्रब बनाने के लिए दो चम्मच पिसा हुआ अखरोट , एक चम्मच शहद और आधा चम्मच निम्बू का रस लें और अच्छी तरह से मिक्स कर लें। अब इस मिश्रण से चेहरे और गर्दन पर हल्के हाथों से पाँच मिनट तक मसाज करें। इस स्क्रब के इस्तेमाल से रूखी, मृत और बेजान त्वचा चेहरे से निकल जाती है व नई चमकती हुई कोमल त्वचा सामने आ जाती है।

5. नारियल तेल और चीनी स्क्रब – चीनी और नारियल तेल को मिक्‍स करें। इसमें आप किसी भी प्रकार का तेल जैसे, बादाम, रोजमेरी, जोजोबा या ऑलिव ऑयल का भी प्रयोग कर सकती हैं। इस मिश्रण से अपने चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें। रूखी त्वचा के लिए ये स्क्रब ज़्यादा फ़ायदेमंद है। इसके इस्तेमाल से मृत कोशिकाएँ तो निकलेंगी ही, साथ ही रूखी त्वचा को पोषण भी मिलेगा।

6. चंदन स्क्रब – दो चम्मच चंदन पाउडर लें, उसमें थोड़ा सा दूध और चीनी मिक्‍स करें। स्‍क्रब तैयार करें और चेहरे पर हल्के हाथ से रगड़ें। कुछ देर तक इसे चेहरे पर लगा रहने दें और फिर चेहरा धो दें। इससे त्‍वचा साफ होगी, दाग़ धब्बे हल्के होंगे और त्वचा चमकेगी भी।

7. बादाम स्क्रब – आठ दस बादाम को रातभर पानी में भिगोएं, सुबह पीस कर पेस्‍ट बनाएं। फिर इसमें थोड़ी चीनी और बादाम तेल की कुछ बूँदें मिला कर स्क्रब तैयार कर लें। इस तैयार स्‍क्रब से चेहरे पर मसाज करें और कुछ देर बाद चेहरा धो दें। इस स्क्रब से आपकी त्वचा को पोषण मिलेगा और चेहरा चमक उठेगा।

8. निम्बू-शहद फ़ेस स्क्रब – दो चम्मच शहद, एक चम्मच निम्बू का रस, एक चम्मच ज़ैतून का तेल और थोड़ी सी चीनी लेकर मिक्स कर लें। अब इस मिश्रण से अपने चेहरे, गर्दन और अगर चाहें तो पूरे शरीर पर मसाज करें। कुछ मिनटों के बाद साफ़ पानी से धो दें। नर्म, मुलायम व चमकदार त्वचा पाने के लिए ये स्क्रब बहुत ही लाभदायक है।

9. केले का स्क्रब – कई पोषक तत्वों वाला केला स्क्रबिंग के लिए बहुत अच्छा होता है। एक पका हुआ केला, एक या दो चम्मच चीनी लेकर अच्छे से मिला कर पेस्ट बना लें, इस पेस्ट से चेहरे की अच्छी तरह से मसाज करें, स्क्रबिंग करें और दस से पंद्रह मिनट तक ये पैक लगा रहने दें, उसके बाद गर्म पानी से धो लें। आपकी त्वचा में प्राकृतिक निखार आ जाएगा। ये पैक स्किन टाइटनिंग के लिए भी बहुत फ़ायदेमंद है।

10. पपीते का स्क्रब – आप पके हुए पपीते से मृत कोशिकाएं निकालने वाला एक बेहतरीन मास्क बना सकती हैं। एक स्वादिष्ट फल होने के साथ ही यह आपकी त्वचा को चमकदार और दमकती हुई बना देगा। पपीते से ना सिर्फ फेस मास्क बल्कि एक प्रभावी स्क्रब भी बनाया जा सकता है। थोड़ा सा पका हुआ पपीता लेकर अच्छी तरह मसल लें, उसमें एक चम्मच शहद, एक चम्मच चीनी और एक चम्मच बादाम का तेल मिला लें।

इसे अच्छी तरह से मिलाएं और अपने चेहरे के ऊपर इसे लगाएं। आप त्वचा की मृत कोशिकाएं निकालने के लिए इससे मसाज भी कर सकती हैं। इसका प्रयोग फेस मास्क के तौर पर भी किया जा सकता है। दस से पंद्रह मिनट तक लगाने के बाद इसे गुनगुने पानी से धो दें।

स्क्रबिंग का सही समय –

स्क्रबिंग का सही समय रात को सोने से पहले का होता है। रात में स्क्रबिंग करने से आपकी त्वचा पर मौजूद दिनभर की धूल-मिट्टी साफ हो जाती है और आपके चेहरे के रोम छिद्र भी खुल जाते हैं। रात को स्क्रबिंग करने आपके चेहरे पर दोबारा किसी भी तरह के धूल नहीं जम पाती है और इससे आपकी त्वचा को पर्याप्त मात्रा में हवा मिलती है। वैसे ज्यादातर लोग सुबह के समय में ही स्क्रबिंग करते हैं पर ऐसा नहीं करना चाहिए। सुबह के समय स्क्रबिंग करने से एक तो जब आप बाहर जाएँगी तो धूल मिट्टी चेहरे के रोम छिद्रों में भर जाएगी, जिस से मुँहासे होने का ख़तरा होता है, दूसरा सूरज से निकलने वाली अल्ट्रा वॉयलेट किरणों के कारण हमारी त्वचा काली होने लगती है। तो अच्छा होगा कि आप अपनी त्वचा को रात में ही स्क्रब करें।

  • हर रोज स्क्रबिंग करने से त्वचा को नुकसान पहुंचता है। अगर आपकी रुखी त्वचा है तो आपको महीने में कम से कम तीन बार स्क्रबिंग करनी चाहिए और अगर आपकी त्वचा ऑयली है तो आप महीने में केवल दो ही बार स्क्रब का प्रयोग करें। इससे आपकी त्वचा साफ भी हो जाएगी और उसे किसी भी तरह का नुकसान भी नहीं होगा।
  • होंठों को भी स्क्रबिंग की जरुरत होती है। इससे हमारे होठों पर मौजूद डेड स्किन साफ हो जाती है। लेकिन होंठों पर स्क्रबर का प्रयोग करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आप जब भी स्क्रबर का प्रयोग करें तो हल्के हाथों से ही करें।
  • नाक और चिन के आसपास के क्षेत्र में आमतौर पर डेड स्किन जमा हो जाती है। ऐसी जगह के लिए भी स्क्रबर की जरुरत होती है।
  • इसके लिए आप अपनी नाक और चिन के आसपास तब तक स्क्रबिंग करे जब तक की वो आपको कोमल ना लगने लगे। इससे आपकी नाक और चिन से कील मुँहासे और मृत त्वचा साफ हो जाएंगे।
  • चेहरे की स्क्रबिंग करते समय कान के पीछे की हिस्से पर भी ध्यान दें और हल्के हाथ से मसाज करें।
  • नेकलाइन पर भी स्क्रबिंग का प्रयोग करना चाहिए, इससे आपकी नेकलाइन साफ हो जाएगी।

स्क्रबिंग के फ़ायदे –

  • स्‍क्रबिंग से चेहरा एकदम से साफ हो जाता है और उस पर से गंदगी, तेल और पसीना निकल जाता है।अंडे से बने फेस पैक से निखारे आपकी त्वचा
  • चेहरे पर मृत्‍य कोशिकाओं की परत देखने में बहुत ही खराब लगती हैं। स्क्रबिंग करने से मृत कोशिकाओं से मुक्ति मिलती है और बेजान त्वचा निखर जाती है।
  • स्‍क्रब करने से चेहरे की त्वचा साफ़ सुथरी होके दमकने लगती है और चेहरा ग्‍लो करने लगता है।
  • जब चेहरे पर स्‍क्रबिंग नहीं की जाती तो चेहरे पर डार्क रंग के पैच दिखने लगते हैं। इससे चेहरा काला दिखने लगता है। अगर आप चेहरे की नियमित रूप से स्‍क्रबिंग करेंगी तो आपको इन डार्क पैचेज़ से मुक्ति मिलेगी। अखरोट के स्क्रब से आप घुटने, कोहनियां और गर्दन की गंदगी साफ कर सकती हैं।
  • निम्बू व शहद मिश्रित पैक लगाने से आपको मुँहासों के दाग़ों से मुक्ति मिलती है और आपकी त्वचा कोमल हो जाती है।

ये थे कुछ घरेलू स्क्रब जो आप घर पे उपलब्ध चीज़ों से आसानी से बना सकती हैं और अपना चेहरा चमका सकती हैं।

गर्भवती महिला को अंगूर खाना चाहिए या नहीं

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प्रेगनेंसी के दौरान खान पान को लेकर हर कोई अलग अलग सलाह देता है। इस दौरान क्या खाना चाहिए क्या नहीं इस बात का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा आहार लेने की सलाह दी जाती है, जिसमे पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर होनी चाहिए। क्योंकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु का विकास के लिए महिला का बेहतर आहार लेना बहुत जरुरी होता है। ऐसे में कच्चा पपीता, शराब, अनानास आदि का सेवन न करने की सालाह दी जाती है। और इसी को लेकर गर्भवती महिलाएं सवाल करती है की क्या प्रेगनेंसी के दौरान अंगूर खाना चाहिए या नहीं। तो लीजिये आज हम आपको बताने जा रहे है की प्रेगनेंसी के दौरान अंगूर का सेवन करना चाहिए या नहीं।

प्रेगनेंसी के दौरान अंगूर का सेवन करना चाहिए या नहीं

अंगूर में फाइबर, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फोलिक एसिड व् अन्य मिनरल्स आदि भरपूर मात्रा में होते हैं। जो की प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की किस चीज की मात्रा आपके लिए पर्याप्त है, ऐसे में आप प्रेगनेंसी के दौरान अंगूर का सेवन कर सकते हैं, लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान अंगूर खाने से क्या फायदे मिलते हैं और क्या नुकसान होते हैं।

प्रेगनेंसी ने अंगूर खाने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला यदि अंगूर का सेवन करती है तो यह फायदेमंद भी होता है, लेकिन इसका सेवन पर्याप्त मात्रा में करना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में अंगूर का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

एनीमिया से बचाव

आयरन की मात्रा भरपूर होने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान एनीमिया की समस्या से बचाव करने के लिए अंगूर का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। साथ ही यह बॉडी में आयरन की कमी को पूरा करने में भी मदद करता है।

पानी की कमी को पूरा करता है

अंगूर में पानी की मात्रा भरपूर होती हैं, ऐसे में अंगूर का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी को हाइड्रेट रखने में मदद करता है, और प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में होने वाली पानी की कमी को पूरा करने में मदद करता है।

कब्ज़ से राहत

यदि पर्याप्त मात्रा में अंगूर का सेवन किया जाता है तो इसके मौजूद फाइबर प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ से राहत दिलाने में मदद करता है। साथ ही इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाने में मदद करता है।

शिशु के लिए है फायदेमंद

अंगूर का सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बहुत फायदेमंद होता है, यह शिशु के नर्वस सिस्टम को बेहतर बनाएं रखने के साथ शिशु की आँखों के लिए भी फायदेमंद होता है।

अंगूर खाने के नुकसान

गर्भवती महिला यदि बहुत अधिक मात्रा में किसी भी चीज का सेवन करती है तो हो सकता है की वो उसकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो, तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में अंगूर खाने से क्या नुकसान होते हैं।

समय से पहले डिलीवरी

अंगूर को अधिक मात्रा में खाने से पेट में गर्मी बढ़ जाती है, जिसके कारण पेट से सम्बंधित समस्या हो सकती है। खासकर अंतिम तिमाही में इसका अधिक सेवन समय से पहले डिलीवरी और शुरूआती दिनों में इसका अधिक सेवन गर्भपात का कारण भी बन सकता है।

प्रेगनेंसी के दौरान मुश्किलें बढ़ जाती हैं

रेसर्विट्रॉल की मात्रा अंगूर में बहुत अधिक होती है, गर्भवती महिला के शरीर में यदि यह हॉर्मोन असंतुलित हो जाता है। तो इस रसायन के असंतुलित होने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ज्यादा परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है।

पाचन तंत्र कमजोर होता है

काले अंगूर का छिलका पेट में जाकर आसानी से पचता नहीं है, जिसके कारण पेट में दर्द, भूख कम लगना, जैसी परेशानियों का सामना महिला को करना पड़ सकता है। जिसके कारण महिला का पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है।

डायरिया

अधिक अंगूरों का सेवन पेट के तापमान को बढ़ा देता है जिसके कारण पेट में दर्द, पेट खराब होने जैसी परेशानी हो सकती है। और ऐसा होने के कारण उल्टी, दस्त जैसी समस्या बढ़ सकती है जिसके कारण डायरिया होने के चांस भी बढ़ जाते हैं।

एसिडिटी

अम्लीय, और स्वाद में खट्टे होने के कारण यदि गर्भ गर्भवती महिला इसका सेवन अधिक मात्रा में करती है तो इसके कारण सीने में जलन, गैस, जैसी समस्या हो सकती है। और ऐसा होने के कारण भी महिला को उल्टी व् चक्कर जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

शुगर

यदि गर्भवती महिला अंगूर का सेवन अधिक करती है तो इसके मौजूद शुगर महिला को प्रेगनेंसी के दौरान गेस्टेशनल शुगर जैसी समस्या से ग्रसित कर सकता है। ऐसे में जितना हो सके प्रेगनेंसी के दौरान इससे परहेज करना सही होता है यदि आप पहले से ही शुगर की समस्या से ग्रसित हैं तो।

तो यह हैं गर्भवती महिला के लिए टिप्स की प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अंगूर का सेवन करना चाहिए या नहीं। इसके अलावा यदि आपको अंगूर खाने से किसी तरह की दिक्कत पहले से ही होती है तो आपको इसके सेवन से परहेज करना चाहिए।

जानिए 6 माह में शिशु गर्भ के भीतर क्या करता है

जानिए 6 माह का शिशु गर्भ के भीतर क्या करता है, छठे महीने में शिशु गर्भ में क्या करता है, शिशु की गर्भ में हलचल, गर्भावस्था का छठा महीना, प्रेगनेंसी का छठा महीना

माँ बनना किसी भी महिला के लिए इस दुनिया का सबसे खास अनुभव होता है, और यह और भी खास बन जाता है जब गर्भ में शिशु की हलचल को गर्भवती महिला महसूस कर सकती है। प्रेगनेंसी की शुरुआत में गर्भ में शिशु के अंग बनने लगते हैं और धीरे धीरे शिशु हरकते करना शुरू करता है। जैसे की सर घुमाना, हिचकी लेना, चौंकना, आँखे घूमना, हाथ पैर हिलाना, आदि, लेकिन शिशु में शिशु का आकार इतना बड़ा नहीं होता है की आप गर्भ में शिशु की हलचल को महसूस कर सकें, लेकिन चौथे या पांचवे महीने के दौरान आप गर्भ में शिशु की हलचल को थोड़ा थोड़ा महसूस कर सकती है।

शुरुआत में यह थोड़ा कम जैसे की सुबह या शाम के समय महसूस हो सकती है, लेकिन जैसे जैसे शिशु का आकार बढ़ता है, वैसे वैसे आप इसे अधिक समय के लिए और ज्यादा तेजी से अनुभव कर सकती है। प्रेगनेंसी के दौरान हर महीने हर दिन शिशु कुछ न कुछ नया करता है, कुछ नया सीखता है, और हर दिन उसके विकास में बढ़ोतरी होती है। तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं की प्रेगनेंसी के छठे महीने में गर्भ में शिशु क्या क्या करता है।

शिशु की बढ़ती है हलचल

छठे महीने शिशु का वजन भी थोड़ा बढ़ जाता है, और वह गर्भ में ज्यादा घूमने लगता है, ऐसे में आप अपने शिशु की गर्भ में हलचल को आसानी से पहचान सकती है। इस दौरान शिशु अपनी कलाबाजियों द्वारा गर्भ में ज्यादा समय के लिए मूवमेंट करता है। और महिला को अपने अनुभव को ज्यादा बेहतर तरीके से एन्जॉय करने में मदद मिलती है।

आवाज़ सुन सकता है

गर्भ में शिशु इस दौरान आपकी सभी बातों को सुन सकता है, और यदि कभी तेज आवाज़ होती है, या आप अधिक रौशनी आदि में जाती है। तो शिशु इसे महसूस कर सकता है और उछलने लगता है, इसका मतलब यह होता है की आप इस दौरान जब भी अपने शिशु से बात करना चाहे कर सकती है, क्योंकि उसकी सुनने की क्षमता बढ़ने लगती है जिससे माँ और शिशु के बीच के रिश्ते को गर्भ से ही गहरा होने में मदद मिलती है।

अंगूठा चूस सकता है

गर्भ में शिशु इस समय आसानी से अपने हाथ को अपने यह में ले सकता है और अपने हाथ की उँगलियों या अंगूठे को भी चूसना शुरू कर देता है।

आसानी से गर्भ में घूम सकता है

छठे महीने में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा भी बढ़ने लगती है, जिसके कारण शिशु आसानी से गर्भ में मूव कर पाता है, और थोड़ी थोड़ी देर बाद अपनी पोजीशन को बदल सकता है। और जितना शिशु गर्भ में ज्यादा घूमने लगता है उतना ज्यादा आप गर्भ में शिशु की हलचल को महसूस कर सकती है।

तो यह हैं कुछ अनुभव जो इस दौरान गर्भ में शिशु कर रहा होता है, लेकिन आपको शिशु की हलचल को बार बार महसूस करने के लिए ज्यादा पेट पर हाथ आदि नहीं फेरना चाहिए। और इस दौरान यदि आपको चौबीस से अड़तालीस घंटे तक गर्भ में शिशु की हलचल महसूस न हो तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए और जितना जैसी हो सके डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

यूट्यूब विडिओ –

छह से नौ महीने का शिशु गर्भ में क्या करता है? छठे महीने के बाद शिशु गर्भ में क्या-क्या एक्टिविटी करता है? शिशु की मूवमेंट और उसकी प्रतिक्रियाएं।

प्रेगनेंसी में फिट रहने के लिए 10 टिप्स

प्रेगनेंसी के दौरान महिला अकेली नहीं होती है क्योंकि अब एक नन्ही जान उसके गर्भ में पल रही होती है। और गर्भ में बच्चा अपने विकास के लिए पूरी तरह से महिला पर ही निर्भर करता है। ऐसे में हर कोई डॉक्टर हो चाहे घर का कोई सदस्य, आपका दोस्त हो या रिश्तेदार सभी आपको प्रेगनेंसी के दौरान अपना दुगुना ध्यान रखने की सलाह देते है। ताकि माँ व् बच्चे दोनों को प्रेगनेंसी के दौरान कोई भी समस्या न हो। तो आइये आज हम इस आर्टिकल में प्रेग्नेंट महिला के लिए ऐसे 10 टिप्स बताने जा रहे हैं जिनका ध्यान रखने से प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही मिलें डॉक्टर से

पीरियड्स मिस होने के बाद घर पर टेस्ट करने के बाद यदि आपकी प्रेगनेंसी पॉजिटिव आती है तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। उसके बाद डॉक्टर भी यदि प्रेगनेंसी टेस्ट को पॉजिटिव बताता हैं, तो उसके बाद शुरुआत से ही अपनी सभी जांच समय से करवाएं। प्रेगनेंसी के दौरान कोई बात समझ न आएं, बॉडी में कोई लक्षण असहज महसूस हो, कोई शारीरिक परेशानी अधिक हो तो डॉक्टर से बात करें। ऐसा करने से आपको प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली हर परेशानी से बचे रहने और फिट रहने में मदद मिलती है।

अपना सही रूटीन बनाएं

यदि आपका रूटीन सही होता है तो इससे आपके सभी काम समय से होते हैं। जिससे बॉडी भी फिट रहती है, क्योंकि खान पान सही समय से होता है, नींद सही से पूरी होती है, व्यायाम सही होता है, आदि। और जितना गर्भवती महिला का रूटीन सही होता है उतना ही प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने में मदद मिलती है।

खान पान में शामिल करें भरपूर पोषक तत्व

पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन प्रेग्नेंट महिला को रोजाना करना चाहिए। इससे प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने के लिए सभी जरुरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं। और यह पोषक तत्व बच्चे के विकास को भी बेहतर करने में मदद करते हैं। इसके लिए रोजाना समय से अपनी डाइट का सेवन गर्भवती महिला को करना चाहिए। खाने के साथ तरल पदार्थों का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को भरपूर करना चाहिए। क्योंकि खाना तो यदि गर्भवती महिला सही से लेती है लेकिन पानी की कमी महिला के शरीर में होती है तो इससे भी महिला की मुश्किलें बढ़ती है। ऐसे में गर्भवती महिला को फिट रहने के लिए आहार सही से लेने के साथ तरल पदार्थों का सेवन भी भरपूर करना चाहिए।

मल्टीविटामिन्स लें

प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर्स कुछ मल्टीविटामिन्स का सेवन करने की सलाह देते हैं। यह मल्टीविटामिन्स शरीर में होने वाली पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने के लिए नियमित समय से इन मल्टीविटामिन्स का सेवन करना चाहिए।

नकारात्मकता से रहे दूर

गर्भावस्था के दौरान हर कोई आपसे अपनी प्रेगनेंसी के एक्सपीरियंस को शेयर करता है। इसमें से कुछ अच्छे होते हैं तो कुछ बुरे, लेकिन गर्भवती महिला के दिमाग में बुरे वाले एक्सपीरियंस घर कर लेते हैं। ऐसे में नकारात्मकता से गर्भवती महिला को बिल्कुल दूर रहना चाहिए। क्योंकि इससे महिला व् बच्चे दोनों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है साथ ही महिला तनाव से ग्रसित हो जाती है। ऐसे में यदि महिला चाहती है की प्रेगनेंसी के दौरान उसे ऐसी कोई परेशानी न हो तो महिला को इन सब बातों के बारे में सोचने की बजाय अपनी प्रेगनेंसी को एन्जॉय करना चाहिए और जितना हो सके खुश रहना चाहिए।

योगासन, मैडिटेशन, व्यायाम जरूर करें

गर्भावस्था के दौरान फिट रहने के लिए महिला को अपने आप को एक्टिव रखना चाहिए और महिला को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि दिमागी रूप से भी अपने आप को एक्टिव रखना चाहिए। और इसके लिए महिला को थोड़ा देर योगासन, मैडिटेशन या व्यायाम जरूर करना चाहिए।

अपनी ख़ुशी का ध्यान रखें

प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहने के लिए महिला को अपने आप को खुश रखना चाहिए। और इसके लिए महिला को हर वो काम करना चाहिए जिससे महिला को ख़ुशी मिलती है। लेकिन इस बात का ध्यान भी रखना चाहिए की आप ऐसा कोई काम न करें जिससे बच्चे पर बुरा असर पड़े।

पेट पर दबाव न पड़े इस बात का ध्यान रखें

गर्भवती महिला और बच्चे को प्रेगनेंसी के दौरान कोई परेशानी न हो और महिला बिल्कुल फिट रहे इसके लिए महिला को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे महिला के पेट पर दबाव पड़े। जैसे की महिला को पेट के बल सोना नहीं चाहिए, सम्बन्ध बनाते समय सावधानी बरतनी चाहिए, पैरों के बल बैठकर काम नहीं करना चाहिए, झुककर काम नहीं करना चाहिए, आदि।

किसी तरह की लापरवाही न करें

प्रेगनेंसी के दौरान हर छोटी से छोटी बात का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि गर्भावस्था के दौरान बरती गई थोड़ी सी लापरवाही माँ व् बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में महिला को किसी भी तरह की लापरवाही प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करनी चाहिए। जैसे की जंक फ़ूड का सेवन नहीं करना चाहिए, सीढ़ियां अधिक नहीं चढ़नी चाहिए, ट्रैवेलिंग नहीं करनी चाहिए, बहुत ज्यादा व्यायाम नहीं करना चाहिए, डाइट नहीं करनी चाहिए, ज्यादा देर एक जगह पर खड़े नहीं रहना चाहिए, एक ही पोजीशन में ज्यादा देर तक नहीं बैठना चाहिए, आदि। यदि प्रेग्नेंट महिला इन सभी बातों का ध्यान रखती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने में मदद मिलती है।

नींद ले भरपूर

भरपूर आराम करना भी गर्भवती महिला को फिट रखने में मदद करता है। इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को दिन में दस घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। क्योंकि जितना गर्भवती महिला आराम करती है उतना ही बॉडी की सभी क्रियाओं को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है जिससे माँ व् बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिनका ध्यान रखने से प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में और बच्चे के विकास को बेहतर करने में मदद मिलती है। यदि आप भी माँ बनने वाली या या माँ बनने की सोच रही है तो आपको प्रेगनेंसी के दौरान इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रखने व् हेल्दी रखने के लिए क्या करें?

प्रेगनेंसी के दौरान हर गर्भवती महिला अपनी दुगुनी केयर करने के साथ पूरी सावधानी बरतती है। ताकि गर्भ में बच्चे का विकास अच्छे से हो सके और बच्चे को किसी भी तरह की परेशानी न हो। माँ के गर्भ में बच्चा गर्भाशय में बच्चा एक द्रव में रहता है जिसे एमनियोटिक फ्लूड कहा जाता है। ये द्रव बच्चे के लिए बहुत जरुरी होता है क्योंकि यह द्रव बच्चे को गर्भ में पूरी तरह सुरक्षित रखने व् बच्चे के बेहतर विकास में मदद करता है।

लेकिन इस द्रव की मात्रा का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि द्रव की मात्रा कम हो या ज्यादा हो दोनों ही बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है। तो लीजिये आज इस आर्टिकल में हम प्रेग्नेंट महिला एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रखने व् हेल्दी रखने के लिए क्या कर सकती है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

खान पान: एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रखने के लिए सबसे पहले आपको अपने खान पान को सही रखना चाहिए। खान पान में पोषक तत्वों को भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए। यदि प्रेग्नेंट महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को एमनियोटिक द्रव की मात्रा को सही रखने में मदद मिलती है।

तरल पदार्थ ले भरपूर: यदि प्रेग्नेंट महिला अपने शरीर में तरल पदार्थों की कमी नहीं होने देती है तो ऐसा करने से भी गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है।

योगासन: योगासन करने से बॉडी की सभी क्रियाओं को सुचारु रूप से काम करने में मदद मिलती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को सुबह या शाम को थोड़ा समय निकालकर योगासन जरूर करना चाहिए, यदि प्रेग्नेंट महिला ऐसा करती है तो ऐसा करने से भी एमनियोटिक द्रव की मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है।

डॉक्टर से जांच: डॉक्टर से समय समय पर प्रेग्नेंट महिला को जांच करवाते रहना चाहिए ताकि अपनी शारीरिक स्थिति की सही जानकारी के बारे में महिला को पता चल सके। ऐसा करने से भी गर्भाशय से जुडी यदि कोई परेशानी होती भी है तो महिला को उसे हल करने में मदद मिलती है। इसके अलावा महिला को डॉक्टर से बिना पूछें किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके कारण महिला को दिक्कत हो सकती है।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका ध्यान रखने से प्रेग्नेंट महिला को गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

घरेलू मक्खियों से परेशान हैं तो यह करें

घरेलू मक्खियों की परेशानी

गर्मी या बरसात का मौसम आते ही घर में मक्खियां भिनभिनाना शुरू का देती है। और यह केवल परेशान ही नहीं करती है बल्कि खाने पीने के सामान जैसे फल, सब्जियों व् अन्य खाने पीने के सामान पर बैठकर बीमारियां फैलाना शुरू कर देती है। और इसके कारण बच्चों के साथ बड़ो को भी इन्फेक्शन की समस्या या अन्य बिमारी होने का खतरा रहता है। इसीलिए इस परेशानी से राहत के लिए इनसे छुटकारा पाना बहुत जरुरी होता है। ताकि इनके कारण होने वाली परेशानियों से राहत मिल सके।

घरेलू मक्खियों को भगाने के टिप्स

घर से घरेलू मक्खियों को भगाना कोई मुश्किल काम नहीं होता है, बल्कि कुछ आसान से टिप्स का इस्तेमाल करके आप इस परेशानी से राहत पा सकते हैं। तो आइये आज हम आपको ऐसे ही कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं जो आपको इस परेशानी से राहत पाने में मदद करेंगे।

साफ़ सफाई

मक्खियां उस जगह पर सबसे ज्यादा आती है जहां गंदगी, पानी का जमाव आदि हो। ऐसे में मक्खियों से सुरक्षित रहने के लिए सबसे पहले अपने घर के साथ घर के आस पास भी साफ़ सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए। पानी आदि का जमाव नहीं होने देना चाहिए ताकि मक्खियां इक्कठी न हो।

पौधे लगाएं

कुछ ऐसे पौधे होते हैं जिनके घर में होने से उनकी खुशबू के कारण घर में मक्खियां नहीं आती है। ऐसे में आपको उन पौधों को घर में लगाना चाहिए और वो पौधे हैं टकसाल, गेंदा, तुलसी आदि। आप इनमे से कोई भी एक पौधा घर के बाहर, खिड़की के आस पास लगा दें जिससे मक्खियां आपके घर में न आ सकें।

खीरा

खीरा भी मक्खियों को भगाने के लिए एक आसान और असरदार उपाय होता है ऐसे में इसके इस्तेमाल के लिए खीरे की स्लाइसेस काट लें। और उसे उस जगह पर रख दें जहां मक्खियां सबसे ज्यादा आती है, आपको खुद इसका असर दिखाई देगा। इससे मक्खियां उस जगह पर अंडे भी नहीं देती है। कूड़े के डिब्बे पर भी खीरे का एक पीस काटकर जरूर रखना चाहिए।

तेल का इस्तेमाल

लेमन ग्रास, पुदीना, नील गिरी आदि के तेल में थोड़ा पानी मिलाकर एक स्प्रे बॉटल में डाल लें। अब इस तेल से घर में छिड़काव करें, इन तेल की तेज गंध के कारण भी मक्खियां दूर भागने लगती है, और आपको घरेलू मक्खियों को भगाने में मदद मिलती है।

कपूर

कपूर की गंध से भी घर में आने वाली मक्खियों को दूर भगाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक कपूर को जलाएं और उसे पूरे घर में घुमाएं। जैसे जैसे कपूर की गंध फैलेगी। वैसे वैसे आपको इस परेशानी से निजात मिलने में मदद मिलती है।

लौंग

एक सेब में पंद्रह बीस लौंग डालकर दबा दें, अब इस लौंग को घर में उस स्थान पर रखें जहां पर सबसे ज्यादा मक्खियां आती है। आप खुद देखेंगी की मक्खियां उस जगह से दूर भागने लगती है, क्योंकि वह लौंग की तेज गंध को बर्दाश्त नहीं कर पाती है।

पंखा

मक्खियों को भगाने का सबसे आसान उपाय होता है पंखा आप जिस स्थान पर बैठे हैं वहां का पंखा ऑन कर दें। पंखे की हवा के कारण मक्खियां आपको परेशान नहीं करेंगी और उस जगह से दूर भागने लगेंगी।

रौशनी

यह भी मक्खियों को भगाने का एक असरदार नुस्खा है, मक्खियां उस स्थान पर सबसे ज्यादा रहती है जहां रौशनी अधिक होती है। ऐसे में घर की लाइट्स बंद करके खिड़कियाँ दरवाज़े दस मिनट के लिए खोल दें, जब मक्खियां बाहर निकल जाए तो सब बंद कर लें।

सिरका

सेब का सिरके को दो चम्मच लेकर उसमे थोड़ा पानी और सर्फ मिलाएं, उसके बाद एक खुले बर्तन में डालकर घर के उस स्थान पर रखें जहां मक्खियां बहुत ज्यादा परेशान करती है। फिर देखिएगा की मक्खियां इस मिश्रण की तरफ कैसे आकर्षित होती है, और इसमें डूबकर खत्म हो जाती है।

दालचीनी

दालचीनी की तेज गंध से भी मक्खियां दूर भागती है, ऐसे में घर के कोनो पर, खिड़की के आस पास, दालचीनी का एक टुकड़ा रख दें, इससे भी मक्खियां घर में नहीं आएँगी और दूर भागेंगी।

यू वी ट्रैप

यह एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है, जो मच्छर और मक्खियों को मारने के काम आता है। आप इसका इस्तेमाल भी घर से मक्खियों को, मच्छर को दूर रखने के लिए कर सकते है। यह काफी आसान होता है और आपको बहुत जल्दी इस परेशानी से निजात दिलाने में मदद करता है।

लाल मिर्च स्प्रे

लाल मिर्च स्प्रे में थोड़ा पानी मिलाकर एक स्प्रे बोतल में भर लें, उसके बाद पूरे घर में जहां भी मक्खियां रहती है वहां इसका छिड़काव करें। ऐसा करने से मक्खियां उस जगह से दूर भागने लगती है। लेकिन इस उपाय को करते समय अपने मुँह पर भी मास्क पहन लें ताकि आपको किसी तरह की कोई परेशानी न हो।

तो यह हैं कुछ खास उपाय जिनका इस्तेमाल करने से घरेलू मक्खियों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। गर्मी का मौसम आ ही गया है यदि आप भी मक्खियों से परेशान हैं तो आप भी ऊपर दिए गए किसी भी टिप्स का इस्तेमाल करके इस परेशानी से निजात पा सकते है।

कमर दर्द से छुटकारा पाने के तरीके

आज के समय में आवश्यकता से अधिक कार्य करना लोगों की आदत बनता जा रहा है। कोई अपनी मज़बूरी तो कोई अधिक पैसे कमाने के लिए अपनी क्षमता से अधिक कार्य करता है। लेकिन उनकी इस अव्यवस्थित दिनचर्या के चलते उनके शरीर को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिनमे से एक है कमर दर्द। आज के समय में कमर दर्द होना आम होता जा रहा है। जिसे देखो वही अपनी कमर दर्द से परेशान है।

पहले के समय में ये समस्या 40 से अधिक उम्र के लोगों में देखने को मिलती थी लेकिन आजकल के नौजवान भी इस समस्या से पीड़ित दिखाई देते है। जिसका मुख्य कारण है बदलती जीवनशैली। जिसमे लोगों का खान-पान तो प्रभावित होता ही है साथ-साथ उनके शरीर को भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

शुरुआत में कमर दर्द केवल कमर के हिस्से में ही होता है लेकिन यदि उसका समय पर इलाज न किया जाए तो धीरे-धीरे ये दर्द बढ़कर कूल्हे और पैरों में भी जा सकता है। ऐसे तो घरेलु इलाजों और कुछ योगासनों के जरिए आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते है लेकिन यदि समस्या गंभीर है तो ऐसे में डॉक्टरी परामर्श लेना बेहतर होगा।

इसीलिए आज हम आपको कमर दर्द के कुछ घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप इस समस्या से घर बैठे राहत पा सकते है।

कमर दर्द के कारण :-

  • मानसिक तनाव
  • भारी वजन उठा लेना
  • शरीर की क्षमता से ज्यादा काम लेना
  • शरीर का वजन अधिक होना
  • मोबाइल कंप्यूटर का अधिक प्रयोग
  • गलत तरह से सोना
  • सही गद्दों का उपयोग ना करना
  • औरतों में मासिक धर्म के दौरान कमर दर्द होता है
  • लम्बे समय तक ड्राइविंग करना
  • किसी अन्य बीमारी से ग्रसित होना
  • शरीर में कमजोरी होना
  • निकोटिन का अधिक प्रयोग
  • शारीरिक कार्य जैसे excercise, घूमना फिरना ना करना
  • एक ही तरह से लम्बे समय तक बैठे रहना
  • हाई हील्स सैंडल पहनना

कमर दर्द के घरेलु इलाज :-

इसे भी पढ़े : सिर दर्द के घरेलू इलाज!

कमर दर्द की समस्या कभी भी हो सकती है। ऐसे में हर बार दवा का प्रयोग करना नुकसानदेह हो सकता है इसीलिए आज हम आपको कमर दर्द के कुछ घरेलु उपाय बताने जा रहे है।

1. गर्म पानी की सिकाई :

कमर दर्द की समस्या में गर्म पानी की सिकाई से बहुत राहत मिलती है। इससे मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है। जिससे दर्द में आराम मिलता है। इसके लिए आप वाटर बैग या इलेक्ट्रिसिटी से चलने वाली सिकाई की मशीन का इस्तेमाल कर सकते है। सिकाई अधिक देर तक न करें 20 मिनट की सिकाई से आपको आराम मिलेगा।

2. बर्फ का सेक :

अगर आपकी कमर में चोट लगी है और दर्द उसके कारण हो रहा है तो ऐसे में चोट पर बर्फ का सेक बहुत आराम देता है। बर्फ को दर्द के लिए पेनकिलर भी कहा जाता है। इसके लिए बर्फ के टुकड़ों को छोटा छोटा काटकर एक कपडे में भर लें। अब इस कपडे से कमर की सिकाई करें। 20 मिनट तक सिकाई करते रहे। आराम मिलेगा।

3. मसाज :

किसी भी प्रकार के दर्द में मालिश बहुत आराम देती है। कमर दर्द में ये रामबाण का काम करती है। इसके लिए आप बाजार में मौजूद दर्द निवारक तेल का इस्तेमाल कर सकते है। आप चाहे तो घर में मौजूद नारियल/सरसों के तेल और लहसुन को मिलाकर तेल बना लें और उससे मालिश करें। ये दर्द में आराम देगा।

4. सोने के लिए बेड :

कमर दर्द का एक कारण गलत तरीके और गलत गद्दे पर सोना भी होता है। यानी जमीन पर सोने और कड़क गद्दे पर सोने से भी कमर में दर्द हो जाता है। तो अगर आपकी कमर में दर्द है तो उसके लिए आरामदायक और मुलायम गद्दे पर सोएं। बेहतर होगा बेड पर ही सोएं। जमीन पर सोने से दर्द बढ़ सकता है।

5. बैठने का तरीका :

बैठने के गलत पोस्चर से भी आपकी कमर में दर्द हो सकता है। लैपटॉप कंप्यूटर आदि पर काम करने वाले लोगों के साथ ये समस्या इसीलिए भी दिखाई देती है क्योंकि वे कई घंटों तक लगातार कंप्यूटर पर बैठते है। लेकिन वे सही पोस्चर का इस्तेमाल नहीं करते। इसीलिए हमेशा बैठने का सही पोस्चर चुने। सीधे बैठे, झुककर बैठना अवॉयड करें।

6. लहसुन : 

शरीर के किसी भी भाग मे दर्द होने पर लहसुन का प्रयोग सबसे अधिक किया जाता है, क्योकि लहसुन मांसपेशियो मे से दर्द खीचने का काम करता है। इसलिए यदि आपके कमर मे दर्द है तो भोजन में लहसुन का प्रयोग करें। लहसुन के प्रयोग से पुराना कमर दर्द भी ख़त्म हो जाता है।

7. गूगल : 

इसका प्रयोग अक्सर पूजा आदि मे किया जाता है लेकिन ये दर्द के लिए भी एक उपयोगी पदार्थ है। इसका सेवन करने से कमर दर्द मे राहत मिलती है। यदि आपके कमर मे दर्द है तो आधा चम्मच गूगल का सुबह शाम गर्म पानी के साथ सेवन करें।

8. काढ़ा : 

कमर दर्द मे काढ़ा पीने से भी बहुत फायदा मिलता है। लेकिन इस काढ़े की सामग्रिया थोड़ी भिन्न होती है। इसके लिए 5 कालीमिर्च के दाने, 5 लौंग के दाने और सुखी अदरक के पाउडर की आवश्यकता होती है। सबसे पहले इन तीनो सामग्रियो को एक साथ पीस ले और चाय की तरह काढ़ा बनाकर दिन मे दो बार पियें। ऐसा करने से कमरदर्द मे राहत मिलेगी।

9. दालचीनी : 

कमर दर्द मे दालचीनी का प्रयोग भी बहुत लाभकारी होता है। इसके लिए 2 ग्राम दालचीनी मे एक चम्मच शहद मिलाकर दिन मे दो बार इसका सेवन करे। ऐसा करने से आपके कमर का दर्द धीरे धीरे कम होने लगेगा।

10. दूध :milk 1

दूध में कैल्शियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है जिससे हड्डियों को मजबूती मिलती है। अगर आपकी कमर में भी अक्सर दर्द रहता है तो रोजाना एक ग्लास दूध का सेवन करना शुरू कर दें। ये हड्डियों को मजबूत करके दर्द में आराम दिलाएगा। आप चाहे तो इसमें शहद भी डाल सकते है। लेकिन ध्यान रहे दूध गर्म ही पीना है, ठंडे दूध से फायदा नहीं होगा।

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