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शादी की ज्वेलरी खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें

शादी में दुल्हन का श्रृंगार गोल्ड ज्वेलरी के बिना अधूरा सा रहता है, आज कल वैसे लड़कियां आर्टिफिशियल ज्वेलरी पहनती है, परंतु लड़कियों को गोल्ड दिया जाता है, जो की उनकी ख़ूबसूरती को बढ़ाने में मदद करता है, क्योंकि ये भी हमारी भारतीय संस्कृति का हिस्सा है, और सोना खरीदने के लिए आपकी खून पसीने की बहुत कमाई लगती है, और इसके लिए आप जोड़ते भी है तो ऐसे में आपको शादी में गोल्ड की ज्वेलरी खरीदते समय बहुत सी बातों का ध्यान भी रखना चाहिए, ताकि आप सही दाम और सही चीज को परख कर ले सकें।

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शादी में हर कोई गोल्ड लेता है लड़की वाले लड़की और अपने दामाद के लिए तो लड़के वाले अपनी होने वाली बहु के लिए, सोना कोई छोटी चीज नही होती है, क्योंकि इसका दाम भी ज्यादा होता है, वे साथ ही कई लोग अपनी बेटी की शादी के लिए सारी जिंदगी की कमाई को जोड़ते है ताकि वो अपनी बेटी को कुछ अच्छा दे सकें, ऐसे में आपको सोना खरीदते समय बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे की सोना कितने कैरेट का है, दो चार अच्छे अच्छे ज्वैलर से दाम पूछने के बाद, आपके कितने वजन का सोना लेना है, सोने की शुध्दता का ध्यान रखना चाहिए, तो आइये आपको विस्तार से बताते है की आपको कौन कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए जब भी आप शादी के लिए सोना खरीदने के लिए जाते है।

सबसे पहले सोने का भाव पता करें:-

सोना खरीदते समय आपको ध्यान रखना चाहिए की सबसे पहले आप उसका भाव पता करें, की आपके शहर में सोने का क्या दाम चल रहा है, और एक ही दूकान से नहीं बल्कि आपको कम से कम तीन से चार दूकान से सोने के भाव का पता करना चाहिए, इसके कारण आपको सोने के असली भाव या उसकी औसत का पता चल जाएगा।

अपने विश्वास या अपने पुराने ज्वैलर से पता करें:-

यदि आप किसी गांव आदि में रहते है तो आपको अपने आस पास या किसी भी दूकान से सोना नहीं खरीदना चाहिए, बल्कि आपको अपने विश्वास की या किसी ऐसी दूकान से सोना लेना चाहिए जो आपका पुराना ज्वैलर हो, क्योंकि यदि आपके विश्वास की या कोई अछि दूकान होगी तो वह आपको सोने की गुणवत्ता भी अच्छी मिलेगी।

मेकिंग चार्जस का भी ध्यान रखें:-

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सोने की खरीदारी में सबसे अहम बात होती है, उसका मेकिंग चार्ज, इंडियन बुलियन एसोसिएशन के द्वारा देश भर में सोने का क्या भाव होगा इसे यही एसोसिएशन तय करता है। इसलिए हर शहर में सोने के भाव में थोड़ा बहुत या रुपए कम ज्यादा रहते है, लेकिन सच तो यह है की ज्यादातर शहर में सोने के भाव एक ही रहता है सोने का भाव उसके मेकिंग चार्ज व अन्य टैक्सेस की वजह से आपको अलग लग सकता है, इसीलिए सोने के भाव के साथ आपको उसके मेकिंग चार्ज का भी ध्यान रखना चाहिए।

हॉलमार्क का रखें ध्यान:-

सोना खरीदते समय आपको सोने की गुणवत्ता का पता करने के लिए उसके हाल मार्क का ध्यान रखना चाहिए, साथ ही ये इस बात का भी पता करता है की आप जो सोना खरीद रहे है वो असली है या नकली, इसीलिये कभी भी आप बिना हाल मार्क का सोना न ख़रीदे।

सोने का टेस्ट भी कर सकते है:-

सोने के बने बनाएं डिजाईन भी मार्किट में मिल जाते है, परंतु याद रखें की हर पीली चीज सोना नहीं होती है, इसीलिए आपको यदि सोने का टेस्ट करना है तो आप वो भी कर सकते है, इसके लिए एक एसिड टेस्ट होता है, यदि इसमें सोने के रंग में ज्यादा बदलाव आता है, तो इसका मतलब होता है, की सोने में कोई धातु ज्यादा मात्रा में मिलाई गई है, इसीलिए आपको सोना खरीदते समय ध्यान रखना चाहिए।

सोने के कैरेट का ध्यान रखें:-

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सोने को अच्छे से सेट करने के लिए उसमे थोड़ी सी धातु को मिक्स करना पड़ता है, वैसे तो सोना 24 कैरेट, 22 कैरेट, और 18 कैरेट का मिल जाता है, और ज्यादातर लोग २२ कैरेट का सोना ही लेते है, इसके अलावा यदि आपके पास पैसो को लेकर थोड़ी समस्या है तो आप १८ कैरेट का भी इसे खरीद सकते है, इसमें धातु की मिलावट ज्यादा होती है, और जो भी आप सोना खरीदते है उस पर लिखा हुआ भी होता है, की आप जो सोना ले रहे है की वो कितने कैरेट का है, जिसके कारण कभी यदि आपको इसका विक्रय भी करना हो तो आपके पास होना चाहिए की आपका गोल्ड कितने कैरेट का है।

वजन और डिजाईन का भी ध्यान रखें:-

सोना खरीदते समय आपको डिजाईन और वजन का भी ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि कई बार आपको जो डिजाईन आपको पसंद होता है, उसका वजन ज्यादा होता है, और आप चाहे तो अपने ज्वैलर को कह कर अपने अनुसार भी डिजाईन और वजन भी ले सकते है, इसके अलावा आप अपनी पसंद के डिजाईन का भी गोल्ड बना सकते है, और आप अपने ज्वैलर को ये भी बता सकते है की आपको कितने वजन में और कैसा डिजाईन चाहिए, उसके बाद ज्वैलर आपको इसके बारे में सही राय दे सकता है।

गोल्ड की स्कीम के बारे में पता करें:-

यदि आप शादी के लिए सोना लेने जा रहे है और आप अपने बोझ को थोड़ा कम करना चाहते है तो आज कल, कई बड़े ज्वैलर्स आपको कुछ अच्छी स्कीम का भी ऑफर देते है, इसके अनुसार आप 25 से 27 हजार रुपए तक का सोना 20 से 22 हजार रुपए में ही खरीद सकते है, इसके लिए आपको जब आपको सोने की जरुरत है उससे कुछ समय पहले से ही थोड़ा थोड़ा पैसा इन्वेस्ट करना शुरू कर दें, जिसके कारण आपको सोने के दाम में कमी मिलती है, और सोना भी अच्छा मिलता है, इसके बारे में अच्छे से जानकारी लेने के लिए आप किसी ज्वैलर से भी संपर्क कर सकते है।

तो ये कुछ टिप्स है जिनका इस्तेमाल आप शादी में गोल्ड लेने से पहले कर सकते है, इनके कारण आप अच्छे से सोना खरीदने से पहले जांच कर सकते है, क्योंकि सोना भी किसी निवेश से कम नहीं होता है, ये भी आपके अच्छे समय के साथ बुरे समय में भी काम आता है, और साथ ही अपने जीवन की कमाई को देने से पहले आपको इस बारे में अच्छे से जांच पड़ताल करनी चाहिए, ताकि आपको इसका फायदा मिल सकें।

गाड़ी चलाना सीखने के पहले इन बातों का जरूर रखें ध्यान

आजकल गाडी चलाना भी एक कला हो गया है. क्यों की शहरो की सड़के अब सुरक्षित नहीं नहीं ड्राइविंग के लिए, ये जरुरी नहीं की सिर्फ आपकी गलती की वजह से ही दुर्धटना होती है, आप दूसरे की गलती से भी आप दुर्घटनाग्रस्त हो सकते है. इसलिए आपको ड्राइविंग के साथ साथ आपको अपना प्रजेंस ऑफ़ माइंड का इस्तेमाल करना पड़ेगा. ताकि दूसरे की गलतियों से भी बचा जा सकता है. तो आज हम आपको बताने जा रहे है की कैसे आप एक अच्छे ड्राइवर बन सकता है और सुरक्षित गाडी चला सकते है.

सही ड्राइविंग स्कूल चुनें फॅमिली कार को अवॉयड करें
कभी भी आप अपने घर के गाडी से ड्राइविंग नहीं सीखे, या तो लोग कभी कभी अपने दोस्तों रिस्तेदारों से गाडी चलाना सिख लेते है. पर अगर किसी अच्छे ड्राइविंग स्कूल से ड्राइविंग का ट्रेनिंग लेते है तो आपको बहूत सारे गाड़ी चलाने के नियम के बारे में बताया जाता है. यहाँ तक की आजकल बड़ी कंपनिया भी ड्राइविंग स्कूल चलाती है. आप अपने नजदीकी गाड़ियों के शोरूम में भी जाकर पता कर सकते है शायद वो भी आपको ये सुविधा ऑफर करेंगे.

प्रशिक्षक अनुभवी होना चाहिए
किसी भी अच्छे ड्राइविंग स्कूल की खासियत यह होती है कि वहां के प्रशिक्षक खुद कार चलाने में माहिर और सिखाने में अनुभवी होते हैं। यह देखना भी जरूरी है कि प्रशिक्षक के पास प्रफेशनल ड्राइवर ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर का लाइसेंस है या नहीं।

सही ड्राइविंग कोर्स
आप जब भी कभी ये सुविधा लेने जा रहे है तो आप सही ड्राइविंग कोर्स चुनना चुने। कार, कमर्शल वाहन, एसयूवी हर तरह की गाड़ी चलाने के लिए अलग तरह के टिप्स और ट्रिक्स की जरूरत पड़ती हैं। इसलिए एक ही तरह से कार सीखकर हर तरह की गाड़ियां नहीं आजमानी चाहिए।

ट्रैफिक निशानों को जानें और ध्यान रखे
आपने देखा होगा की सड़क पर तरह तरह के ट्रैफिक निशान लगे होते है. ये आपको बताते है की क्या करना है आपको, आगे सड़क कैसी है. कितनी तेज आप यहाँ पर गाडी चला सकते है. आगे रोड चौड़ा है या सँकरा, तो आपको इन निशानों के बारे में आपको अच्छी जानकारी होनी चाहिए नहीं तो दुर्घटना होने की संभावनाएं हो जाती है या तो आप पर यातायात पुलिस से चालान भी मिल सकता है. इसलिए ये बहूत ही जरुरी है. आप ट्रैफिक नियम के निशान को समझने. पर चलने के लिए यातायात सुरक्षा से संबंधित कई चिह्न और नियम बनाए गए हैं। सड़क पर हर चिह्न और रंग का अलग-अलग मतलब होता है। गाड़ी चलाने वाले को इन चिह्नों और नियम के बारे में मालूम होना चाहिए

इमर्जेंसी पड़ने पर
गाड़ी चलाने वाले को यह मालूम होना चाहिए कि सड़क पर हादसे या आपात स्थिति में क्या उपाय किये जाने चाहिए। जैसे कि टायर फट जाए या गाड़ी में आग जाए तो हमें सबसे पहले क्या करना चाहिए। किसी भी अच्छे ड्राइविंग स्कूल में यह सारी बातें बताई जाती हैं।

प्रेगनेंसी में केला खाना चाहिए या नहीं

प्रेगनेंसी में केला खाना चाहिए या नहीं, प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अपने आप को स्वस्थ रखने के लिए और अपने पेट में पल रहे बच्चे के बेहतर विकास के लिए अपना अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। खासकर खान पान में बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है। क्योंकि महिला यदि पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेती है जो प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होता है। तो महिला व् शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

जबकि महिला यदि कुछ ऐसे आहार का सेवन करती है जो प्रेगनेंसी में फायदेमंद नहीं होता है। तो इसके कारण महिला के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है। तो आइये आज हम प्रेगनेंसी में केले के सेवन की बात करने जा रहे हैं जो पोषक तत्वों से भरपूर तो होता है। लेकिन प्रेगनेंसी में केले का सेवन फायदेमंद होता है या नहीं आइये जानते हैं।

प्रेगनेंसी में केला खाना चाहिए या नहीं

यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आपकी केला खाने की इच्छा हो रही है, तो प्रेगनेंसी के दौरान आप केले का सेवन कर सकती है। क्योंकि केले में पोषक तत्व जैसे की आयरन, फाइबर, फोलिक एसिड, कैल्शियम, आदि भरपूर मात्रा में होते हैं। जो गर्भवती महिला के साथ माँ के पेट में पल रहे बच्चे के लिए भी फायदेमंद होते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में केला खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

आयरन

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में खून की कमी महिला व् शिशु दोनों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है।
  • लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला केले का सेवन करती है तो महिला व् शिशु दोनों को इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • क्योंकि केले में आयरन की मात्रा मौजूद होती है जो गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है।

प्रेगनेंसी में केला खाने से मिलता है फोलिक एसिड

  • केले में फोलिक एसिड की मात्रा भी मौजूद होती है जो पेट में पल रहे शिशु के लिए बहुत फायदेमंद होती है।
  • फोलिक एसिड शिशु के दिमाग, रीढ़ की हड्डी के बेहतर विकास में मदद करता है।
  • साथ ही इससे महिला को शिशु को जन्म दोष से बचाने व् समय पूर्व प्रसव के खतरे से बचे रहने में मदद मिलती है।

फाइबर

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिलाएं पाचन क्रिया के धीमे पड़ने के कारण कब्ज़ व् पेट से जुडी अन्य समस्याओं का सामना कर सकते हैं।
  • ऐसे में यदि महिला केले का सेवन करती है तो महिला को इन सभी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सकती है।
  • क्योंकि केले में फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता है।

प्रेगनेंसी में केला खाने से मिलता है विटामिन सी

  • केले में विटामिन सी मौजूद होता है जो की एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट है।
  • जो प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला व् शिशु को हर तरह के संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।

एनर्जी मिलती है

  • केले में सुक्रोज़, फ्रक्टोज़, ग्लूकोज़ की मात्रा मौजूद होती है।
  • जो प्रेग्नेंट महिला को थकान, कमजोरी जैसी समस्या से बचाव करने में मदद करती है।
  • जिससे गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेगनेंसी में केले का सेवन करने से मिलते हैं। लेकिन ध्यान रखें न तो गले सड़े केले का सेवन करें और न ही अधिक कच्चे केले का सेवन करें। और एक दिन में दो केले से ज्यादा न खाएं। ताकि प्रेग्नेंट महिला को केले का सेवन करने के फायदे मिल सकें और किसी भी तरह की परेशानी न हो। साथ ही यदि केले का सेवन करने से आपको किसी भी तरह की एलर्जी आदि होती है। तो आपको केले का सेवन करने से बचना चाहिए।

दांतो का कालापन दूर करने के लिए अपनाएं ये टिप्स

दांतो का कालापन दूर करने के लिए अपनाएं ये टिप्स:-

दांत आपकी मुस्कान को और भी बेहतर बनाने में मदद करते है, सोचिये यदि आपके दांत यदि काले या पीले हो तो आप सोचिये की आप किस तरह से मुस्कुरायेंगे! और जब आप किसी से बात करते है तो क्या आप खुल कर बात कर सकते है, दांतो की साफ़ सफाई ढंग से न की जाएँ या नशीले पदार्थो का सेवन ज्यादा करने से आपको दांतो में होने वाले कालेपन की समस्या से जूझना पड़ता है, इसके साथ जो लोग धूम्रपान ज्यादा मात्रा में करते है, उनके साथ भी दातो में होने वाले कालेपन की समस्या हो जाती है।

शरीर का कोई भी अंग आपको खूबसूरत और आपको आकर्षित दिखने में बहुत मदद करता है, उसी प्रकार दांत भी आपकी आपके चेहरे की रौनक को बढ़ाने में भी आपकी मदद करता है, इसीलिए जिस प्रकार चेहरे पर कोई भी दाग धब्बा अच्छा नहीं लगता है, उसी प्रकार आपके दांतो का कालापन भी आपकी खूबसूरती को ख़राब कर सकता है, तो इसलिए आपको अपने दांतो के साथ कोई भी खिलवाड़ नहीं करना चाहिए, बल्कि इन्हें सोने जैसा चमकते हुए रखना चाहिए।

तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसे ही टिप्स देने जा रहें है जो यदि आपके दांतो में कालापन है तो इस परेशानी को ख़त्म करने में आपकी मदद करता है, परंतु इसके साथ ये भी जरुरी है की आप पहले से ही अपने दांतो का ध्यान रखें और इन्हें खूबसूरत और चमकदार बने रहने में मदद मिलें, और साथ ही आपकी प्यारी सी मुस्कराहट को किसी की नज़र भी न लगें, तो ये है वो टिप्स जो आपकी इस परेशानी का समाधान करने में आपकी मदद करेगा, और इन्हें नियमित रूप से भी करें, ऐसा करने से धीरे धीरे आपकी ये समस्या भी ख़त्म हो जाएगी ।

दांतो का कालापन दूर करने के लिए अपनाएं ये टिप्स:-

सेब का सेवन करें:-

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सेब एक प्रकृति स्क्रब का काम करती है, रोजाना के से दो सब को खूब अच्छे से चबा चबा कर उसका सेवन करने से आपके दांतो की साफ़ सफाई में मदद मिलती है, साथ ही दांतो का कालापन और पीलापन दूर करने में मदद मिलती है, इसी तरह यदि आप गाजर और खीरे का भी यूडी सेवन खूब चबा कर करते है तो आपको आइस परेशानी से निजात मिल जाता है, परंतु इसे नियमित रूप से अपने जीवन में शामिल करें, जिससे आपको दांतो के कालेपन की समस्या से निजात मिल सकें।

तुलसी के पत्तो का इस्तेमाल करें:-

तुलसी के पत्तो का इस्तेमाल करने से भी आपको इस समस्या का समाधान मिल जाता है, क्योंकि इसमें बहुत से एंटी बैक्टेरियल गुण होते है जो आपके दांतो को चमकदार बनाने में मदद मिलती है। तुलसी के पत्तो को सुखाकर अच्छे से पीस कर आप उसे सरसो के तेल में मिलाकर अपने दांतो पर लगाएं, इसके अलावा आप केवल पाउडर का इस्तेमाल भी अपने दांतो के लिए कर सकते है, इसके अलावा आप संतरे के छिलके को छील उसे तुलसी के पाउडर में मिलाकर दांतो पर ब्रश करने से भी आपको दांतो का कालापन दूर करने में मदद मिलती है। और आप तुलसी के किसी भी तरीके का इस्तेमाल इस समस्या के लिए नियमित रूप से कर सकती है।

नीबू का इस्तेमाल करें:-

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नीबू का इस्तेमाल भी कई तरह से करके आप दांतो का कालापन दूर कर सकते है, यदि आप अपने दांतो पर नीबू को रगड़ते है, और खाना खाने के बाद इस उपाय को जरूर करते है, इसका इस्तेमाल कभी कभी ही करना चाहिए, इससे आपको इस समस्या से निजात मिलता है, इसके अलावा आप नीबू के रस को पानी में मिलाकर उससे कुल्ला भी कर सकते है, और यदि आप अपने दातुन को रात भर के लिए नीबू के रस में थोड़ा पानी मिलाकर छोड़ दें, और उसके बाद आप अच्छे से अपने दांतो पर सुबह उठकर करें, थोड़े ही दिनों में आपको इस परेशानी से निजात मिलेगा, और साथ ही आप हफ्ते में दो से तीन बार भी इस उपाय को कर सकते है।

मसालो का इस्तेमाल करें:-

क्या आप जानते है की आपकी रसोई में मौजूद मसालो से भी आपको इस समस्या का समय मिल सकता है, इसके लिए आप यदि सरसो के तेल में नमक मिलाकर उससे ब्रश करते है, तो भी आपको इस परेशानी से निजात मिलता है, इसके अलावा तेज पत्ते को अच्छे से पीस कर हर दूसरे से तीसरे दिन यदि आप इसका मंजन करते है, तो भी आपको इस परेशानी से निजात मिलता है, इसके अलावा हल्दी, सरसों, का तेल और नमक मिलाकर मंजन करें, और इससे आपके दांत मजबूत होंगें और आपके दांतो का कालापन दूर करने में आपको मदद मिलेगी।

सेब के सिरके का इस्तेमाल करें:-

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सेब के सिरके का इस्तेमाल करने से आपको दांतो पर जमे कालेपन की समस्या से निजात मिलता है, और इसमें मौजूद निकोटीन, कैफीन के प्रभाव को ख़त्म करके आपके दांतो को सफ़ेद और चमकदार बनाने में मदद करता है, इसके लिए बस आपको सेब के सिरके में डुबो कर रखें, फिर इससे ब्रश करें, इससे आपके दांतो में मौजूद एसिड ख़त्म हो जायेगा, और आपके दांतो को मजबूत करने में मदद मिलेगी, और आप चाहे तो ब्रश के बाद सेब के सिरके से कुल्ला भी करें, आपको थोड़े ही दिनों में इसका असर दीखने लगेगा।

संतरे के छिलके का इस्तेमाल करें:-

संतरे के छिलके का इस्तेमाल करने से भी आपको दांतो की साफ़ सफाई में मदद मिल सकती है, इसके लिए आप संतरे के छिलके के अंदर के हिस्से को आप अच्छे से अपने दांतो पर रगड़ें, ऐसा करने से भी आपके दांतो के कालेपन को दूर करने में मदद मिलेगी, साथ ही आप संतरे के छिलको को सुखाकर उसे अच्छे से पीस कर उससे ब्रश करें, आपको थोड़े ही दिनों में इसका असर दीखने लगेगा, और आप चाहे तो नियमित रूप से भी दांतो को चमकदार व् खूबसूरत बनाने के लिए इस तरीके का इस्तेमाल कर सकती है।

पानी का इस्तेमाल करें:-

पानी आपके दांतो को हाइड्रेट रखने में मदद करता है, और साथ ही पानी के फायदे आपकी सेहत के लिए भी बहुत से है, पानी से समय पर कुल्ला करने व् उसका सेवन करने से दांतों पर अम्लता का असर कम हो जाता है। पानी आपके दांतो पर जमी अल्कोहल और पिगमेंट खाद्य पदार्थ के कारण गन्दी परत को हटा कर उन्हें काफी सुंदर और आकर्षक रूप देना का काम भी करता है। और यदि आप इसका सेवन करने से आपको दांतो का कालापन दूर करने में भी मदद मिलती है।

दांतो को चमकदार व् खूबसूरत बनायें रखने के लिए टिप्स:-

  • पानी में नीबू का रस मिलाकर अच्छे से इस पानी से कुल्ला करें, ऐसा नियमित रूप से करने से दांत का कालापन दूर हो जायेगा, साथ ही सास में आने वाली दुर्गंध से भी राहत मिलेगी।
  • बेकिंग सोडा से ब्रश करने से भी आपकी इस परेशानी का समाधान हो सकता है, आप पेस्ट में भी बेकिंग सोडा मिलाकर उससे ब्रश कर सकते है।
  • नीम एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-सेप्टिक गुणों से भरपूर होता है, रोजाना नीम के दातून से दांत साफ करने पर दांतों के रोग नहीं होते और साथ ही दांतो का कालापन भी दूर हो जाता है।
  • गाजर भी आपकी इस समस्या का समाधान करता है, इसके अलावा खाना खाने के बाद गाजर का सेवन करने से इसमें मौजूद रेशे दांतों की अच्छे से सफाई कर देते हैं।
  • संतरे के छिलके और तुलसी के पत्ते को सुखाकर अच्छे से पीस कर एक पाउडर तैयार कर लें, इसके बाद आप रोजाना इससे ब्रश करे, थोड़े ही दिनों में आपके दांत मोती जैसे चमकने लग जायेंगे।
  • नमक और सरसो के तेल को मिलाकर अच्छे से ब्रश करने से भी दांतो को साफ़ करने में मदद मिलती है, साथी ही दांत चमकदार होते है।
  • तुलसी के पत्तो को सुखाकर एक पाउडर तैयार करके उससे ब्रश करने से भी आपको दांतो की साफ़ सफाई में मदद मिलती है।
  • स्ट्रॉबेरी को पीस कर उसमे बेकिंग सोडा मिलाकर उससे अपने दांतो पर लगाने से भी आपको दांतो को चमकदार बनाया जा सकता है, क्योंकि इसमें पाया जाने वाला मैलिक एसिड आपकी इस समस्या का समाधान करता है।
  • आपको साथ ही नसीले पदाथो के सेवन से बचना चाहिए, ये केवल आपके दांतो को ही नहीं, बल्कि आपके शरीर को भी नुक्सान पहुचातें है।

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साबूदाना कैसे बनता है? और साबूदाना के क्या फायदे होते है

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साबूदाना एक खाद्य पदार्थ है, भारत में साबूदाने का प्रयोग पापड, खीर, खिचड़ी, आदि बनाने के लिए किया जाता है, खासकर इसका सेवन व्रत के दिनों में लोग सबसे ज्यादा करते है, साथ ही इसका इस्तेमाल सूप को बनाने व् किसी भी खाद्य पदार्थ को गाढा करने के लिए भी किया जाता है, साबूदाने की कई किस्मे आज बाज़ार में मिल जाती है, जिसमे से अरारोट भी एक है इसका प्रयोग भी खाने की चीजो में किया जाता है, साथ ही आप इसका सेवन मीठे व् नमकीन दोनों ही रूप में कर सकते है, इससे आपको पोषण भी मिलता है, और साथ ही आपको स्वाद भी मिलता है, और आप इसका सेवन केवल व्रत में ही नहीं बल्कि आम दिनों में भी कर सकते है, आइये जानते की साबूदाना किस प्रकार बनता है, और इसके सेवन से आपको कौन कौन से फायदे होते है, तो आइये जानते है साबूदाने से जुडी कुछ अहम बातें।

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साबूदाना कैसे बनता है:-

भारत में साबूदाने का सबसे पहला उत्पादन तमिनाडु में स्थित सेलम में हुआ था, यह सैगो पाम नामक पेड़ के तने के गूदे से बनता है, और सागो दिखने में, ताड़ की तरह का एक पौधा होता है, जो की मूलरूप से पूर्वी अफ़्रीका का में पाया जाता है, और पकने के बाद यह हल्का पारदर्शी, नर्म और स्पंजी हो जाता है, और यह छोटे छोटे सफ़ेद मोतियों की तरह गोल गोल होते है, साबूदाने में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत अधिक होती है, साथ ही इसमें कैल्शियम और विटामिन सी भी अधिक मात्रा में होता है, जो की आपके शरीर के लिए फायदेमंद होता है, तो आइये जानते है अब इसके कुछ फायदों के बारे में, जो की आपके स्वास्थ्य से लेकर आपकी ख़ूबसूरती को बढाने के लिए भी है।

साबूदाने से होने वाले फायदे:-

गर्मी से राहत दिलाता है:-

यदि आप चावल के साथ साबूदाने का सेवन करते है, तो यह आपको गर्मी से निजात दिलाने में मदद करती है, और साथ ही इसके सेवन से आप गर्मी में भी तरोताजा महसूस करते है, और आप चाहे तो बच्चों को भी इसका सेवन करवा सकते है, क्योंकि यह बच्चों के लिए भी बहुत फायदेमंद होते है।

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ब्लड प्रैशर की समस्या से राहत दिलाता है:-

साबूदाने का सेवन करने से आपकी बॉडी में रक्त संचार को अच्छे से होने में मदद मिलती है, और इसका कारण होता है की साबूदाने में पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है, जिससे आपके ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल में रहने में मदद मिलती है, साथ ही इसके सेवन से आपकी मांसपेशियों को भी अच्छे से पोषण मिलने में मदद मिलती है।

दस्त से राहत दिलाता है:-

साबूदाने हो हलके आहार की तरह माना जाता है, जो आपको फायदा करने के साथ पोषण भी देता है, इसीलिए यदि आप दस्त की समस्या से परेशान है तो इससे निजात पाने के लिए आप साबूदाने की खिचड़ी बनाकर इसका सेवन करें, और या आप बिना दूध वाली साबूदाने की खीर का सेवन करें ये भी आपको तुरंत आराम देगी, दिन में दो बार इसे खाएं आपको जरूर फायदा मिलेगा, और बच्चों को तो इसका सेवन जरूर करवाना चाहिए।

पाचन क्रिया को सही करता है:-

यदि आपको पेट से जुडी कोई भी परेशानी है, जैसे की अपज, गैस, या पेट दर्द से जुडी कोई समस्या हो, तो भी साबूदाने का सेवन करने से आपको पेट से जुडी हर परेशानी का समाधान करने में मदद मिलती है, क्योंकि इसके सेवन से आपकी पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है।

एनर्जी देता है:-

साबूदाना आपके शरीर में लिए किसी एनर्जी बूस्टर से कम नहीं होता है, यदि आप इसका सेवन करते है, तो ऐसा करने से आपके शरीर को कमजोरी या थकान जैसी समस्या नहीं होती है, क्योंकि इसके कारण आपकी बॉडी में एनर्जी हमेशा बनी रहती है।

गर्भावस्था के समय में करता है फायदा:-

प्रेगनेंसी में समय यदि आप साबूदाने का सेवन करते है, तो यह गर्भ में पाक रहे शिशु के लिए बहुत लाभदायक होता है, क्योंकि इसमें फोलिक एसिड और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो की गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में बहुत मदद करता है।

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हड्डियों को मजबूत करने में मदद मिलती है:-

साबूदाने में आयरन, कैल्शियम, विटामिन, भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो की आपके शरीर के विकास में बहुत योगदान करती है, इसके सेवन से आपके शरीर को पोषक तत्व तो मिलते ही है, परन्तु इसके साथ आपकी हड्डियों को भी मजबूती मिलने में मदद मिलती है।

दुबलेपन की समस्या से राहत दिलाता है:-

साबूदाने का सेवन करने से आपको दुबलेपन की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, साबूदाना उनके लिए फायदेमंद होता है, जिन्हें खाने पीने से जुडी परेशानी होती है, जिनके कारण उनका वजन कम रहता है, परन्तु यदि वेह नियमित अपने खाने में साबूदाने का सेवन करते है तो उन्हें अपने वजन को बढाने में मदद मिलती है।

थकान की समस्या से निजात दिलाता है:-

उम्र अधिक होने पर, या शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने पर आपको बहुत जल्दी थकान का अनुभव होता है, लेकिन यदि आप साबूदाने का सेवन करते है, तो ऐसा करने से आपको अपनी शरीर में एनर्जी को कायम रखने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपको थकान व् कमजोरी जैसी समस्या से राहत मिलने में मदद मिलती है।

त्वचा को खूबसूरत बनाने में मदद करता है:-

शरीर से जुडी समस्या के साथ साबूदाने का इस्तेमाल करने से आपकी स्किन की सुन्दरता को भी बढाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप साबूदाने का फेस मास्क बनाकर अपने चेहरे के लिए इस्तेमाल कर सकते है, ऐसा करने से आपका चहरा खिलखिला उठता है, और साथ ही इसके इस्तेमाल से आपकी स्किन पर होने वाली झुर्रियों की समस्या से भी राहत पाने में मदद मिलती है।

तो ये कुछ फायदे है जो आपको साबूदाने का सेवन करने से होते है, इसीलिए अपनी बॉडी को फिट रखने के लिए और अपनी शारीरिक समस्या से निजात पाने के लिए आपको इनका सेवन जरुर करना चाहिए, साथ ही प्रेगनेंसी में महिलाओ और विकास कर रहे बच्चों को तो इसका सेवन जरुर करना चाहिए, क्योंकि उनके लिए यह बहुत फायदेमंद होता है।

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प्रेगनेंसी में नाशपाती खाने के फायदे

गर्भावस्था महिला के लिए बहुत ही नाजुक समय होता है ऐसे में महिला को इस दौरान कोई परेशानी न हो और बच्चे का विकास भी अच्छे से हो। इसके लिए महिला को अपनी डाइट में पोष्टित्व व् पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को अपनी डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है। और आज इस आर्टिकल में हम नाशपाती के बारे में बात करने जा रहे हैं।

यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आपका नाशपाती खाने का मन कर रहा है तो आप बिना किसी टेंशन के नाशपाती का सेवन कर सकती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान नाशपाती का सेवन करना सेफ होता है और यह प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद भी होता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में नाशपाती का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं।

फोलिक एसिड

नाशपाती में फोलिक एसिड मौजूद होता है जो गर्भ में पल रहे बच्चे के शारीरिक विकास को बेहतर करने के साथ शिशु के नर्वस सिस्टम के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

विटामिन बी 6

विटामिन बी 6 एक ऐसा पोषक तत्व हैं जिसकी कमी के कारण शिशु को जन्म दोष होने का खतरा होता है। लेकिन गर्भवती महिला यदि नाशपाती का सेवन करती है तो विटामिन बी 6 को शिशु तक पहुंचाने में मदद मिलती है। जिससे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलने के साथ शिशु को जन्म दोष के खतरे से बचाने में भी मदद मिलती है। साथ ही विटामिन बी 6 प्रेग्नेंट महिला को उल्टी जी मिचलाना जैसी समस्या से बचाने में मदद करता है।

Vitamin A

नाशपाती में विटामिन ए भी प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भवती महिला की इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही विटामिन ए गर्भ में पल रहे शिशु की आँखों, श्वसन तंत्र, आदि अंगो के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

विटामिन सी

नाशपाती में विटामिन सी भी मौजूद होता है और विटामिन सी गर्भवती महिला के शरीर में सभी में आयरन को अच्छे से अवशोषित करने में मदद करता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को खून की कमी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही विटामिन सी एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट होता है जो माँ व् बच्चे दोनों को प्रेगनेंसी के दौरान बिमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करता है।

फाइबर

नाशपाती में फाइबर भी मौजूद होता है। जो गर्भवती महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करता है। साथ ही यदि महिला नाशपाती का सेवन करती है तो इससे महिला को कब्ज़, अपच, भूख में कमी जैसी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।

कैलोरी

गर्भावस्था के दौरान महिला को शरीर में अतिरिक्त कैलोरी की जरुरत होती है। ताकि महिला को प्रेगनेंसी के दौरान एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिल सके। साथ ही गर्भ में बच्चे का विकास भी अच्छे से हो सके। और नाशपाती में कैलोरी मौजूद होती है ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला नाशपाती का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

पोटैशियम

नाशपाती में पोटैशियम की मात्रा भी मौजूद होती है और पोटैशियम गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे के हदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है। साथ ही इससे गर्भवती महिला के ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल में रहने, पेट व् पैरों में ऐंठन की समस्या से निजात पाने में भी मदद मिलती है।

मैग्नीशियम

मैग्नीशियम युक्त डाइट का सेवन करने से गर्भवती महिला की मांसपेशियों व् हड्डियों को मजबूत रहने के साथ बच्चे की हड्डियों को भी फायदा मिलता है। ऐसे में मैग्नेसियम के लिए प्रेग्नेंट महिला नाशपाती का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान कर सकती है।

आयरन

खून की कमी का होना प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत बड़ी परेशानी होती है। क्योंकि इसके कारण प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ने के साथ बच्चे के विकास में कमी आ सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी में खून की कमी शरीर में न हो इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को नाशपाती का सेवन करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो प्रेग्नेंट महिला को नाशपाती का सेवन करने से मिलते हैं। लेकिन ध्यान रखें की ताजा और अच्छे से धुली हुई नाशपाती का सेवन करें। साथ ही खाली पेट और दूध के साथ नाशपाती का सेवन न करें क्योंकि इसके कारण आपको पेट सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा होता है।

शिशु को उल्टी दस्त होने के क्या कारण होते हैं?

शिशु को उल्टी दस्त की समस्या

छोटे बच्चों की केयर में बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि इनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण यह आसानी से किसी भी रोग की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में शिशु के लिए इस्तेमाल की गई हर चीज में साफ़ सफाई का ध्यान रखने के साथ उसके आस पास आने वाले लोगो को भी साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखने की जरुरत होती है। क्योंकि शिशु जिन चीजों को हाथ में पकड़ते हैं जैसे की खिलोने आदि, जो भोजन खाते हैं उसमे यदि साफ़ सफाई का ध्यान न रखा जाये, गंदे हाथ से शिशु को भोजन खिलाया जाये तो हाथ या खाने के माध्यम से यह कीटाणु शिशु की बॉडी में प्रवेश कर जाते हैं। जिसके कारण शिशु की उल्टी दस्त जैसी समस्या हो सकती है। जिसके कारण शिशु काफी कमजोर भी हो सकता है।

शिशु को उल्टी दस्त होने के कारण

छोटे बच्चों को उल्टी दस्त की समस्या के होने का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि ऐसे बहुत से कारण हैं जिनकी वजह से शिशु को यह समस्या हो सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की शिशु को उल्टी व् दस्त की समस्या के होने के कौन कौन से कारण हो सकते हैं।

माँ का दूध

जो शिशु माँ का दूध पीते हैं उन्हें दूध के जरिये माँ के खान पान वाले भोजन के पोषक तत्व ही पहुंचाएं जाते हैं। ऐसे में यदि कई बार महिला कुछ ऐसा आहार खा लेती है जो की अच्छे से पका नहीं होता है, जिसे खाने से गैस की समस्या होती है, बासी या ठंडे आहार का यदि महिला सेवन कर लेती है, ज्यादा मसालें वाले आहार का यदि महिला सेवन करती है, आदि। तो ऐसे भोजन को पचाने में शिशु को परेशानी हो सकती है जिसके कारण शिशु को गैस, पेट में दर्द, उल्टी, दस्त जैसी परेशानी हो सकती है।

संक्रमण

छोटे बच्चे जिस भी चीज को देखते हैं उसे मुँह में लेने की कोशिश करते हैं, ऐसे में शिशु के आस पास साफ़ सफाई का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। लेकिन यदि कई बार गंदे खिलोने को मुँह में लेने से गंदे हाथों से खाना खाने से उसके कीटाणु बॉडी में पहुँच जाते हैं। जिसके कारण शिशु को पेट में संक्रमण की समस्या हो सकती है। और शिशु उल्टी व् दस्त के कारण परेशान हो सकता है।

मीठा

बच्चों को अधिक मीठी चीजों का सेवन करवाने या फल और जूस को बहुत अधिक मात्रा में देने के कारण भी शिशु को उल्टी व् दस्त की समस्या हो सकती है। क्योंकि इसमें फ्रुक्टोज और सुक्रोज की मात्रा अधिक होती है, और हर शिशु की पाचन क्षमता अलग अलग होती है, ऐसे में जो शिशु इसे आसानी से हज़म नहीं कर पाते हैं उन्हें उल्टी व् दस्त की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

गर्मी का मौसम

अधिकतर शिशु गर्मी के मौसम में इस समस्या से परेशान हो सकते हैं। क्योंकि अधिक गर्मी के कारण शिशु के बॉडी के तापमान में फर्क आने के कारण ऐसा हो सकता है। ऐसे में शिशु को इस परेशानी से बचाने के लिए आपको शिशु के शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए साथ ही शिशु को गर्मी से बचाकर रखना चाहिए।

दवाइयां

शिशु के जन्म के बाद उसे कुछ एंटीबायोटिक दवाइयां देने के लिए डॉक्टर कह सकता है। कई बार इन्ही दवाइयों के कारण शिशु को उल्टी व् दस्त की दिक्कत हो सकती है ऐसे में यदि आपको लगे की दवाई के कारण यह परेशानी हो रही है तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए।

दूध

जो शिशु माँ का दूध नहीं पीते हैं उन्हें डिब्बे वाला दूध पानी में मिलाकर दिया जाता है। लेकिन यदि पानी साफ़ न हो या बोतल अच्छे से धुला हुआ न हो तो इसके कारण पानी में मौजूद कीटाणु या बोतल में मौजूद कीटाणु बॉडी में पहुँच जाते हैं। जिसके कारण शिशु को उल्टी दस्त की समस्या हो सकती है।

दांत निकलते समय

बहुत से शिशु में यह परेशानी दांत निकलते समय देखी जाती है, ऐसा इसीलिए होता है जब शिशु के दांत निकल रहे होते है तो शिशु हर एक चीज को मुँह में लेता है। ऐसे में बेड बैक्टेरिया के बॉडी में प्रवेश कर जाने के कारण शिशु को यह परेशानी हो सकती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से शिशु को उल्टी दस्त की परेशानी हो सकती है। ऐसे में शिशु को इस परेशानी से बचाने के लिए खाने पीने के साथ खिलोने व् शिशु के लिए इस्तेमाल की जाने वाली हर चीज में साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। साथ ही इसके लिए एक बार डॉक्टर से भी राय लेनी चाहिए ताकि शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में नमक खाना कितना जरुरी होता है

नमक का इस्तेमाल सब्जी के जायके को बढ़ाने के लिए किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं की सब्ज़ी का जायका बढ़ाने के साथ नमक का सेवन करने से बॉडी में होने वाली बहुत सी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। और प्रेगनेंसी के दौरान यदि गर्भवती महिला नमक का सेवन जरुरत के अनुसार करती है तो इससे गर्भवती महिला को बहुत सी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से निजात पाने के साथ गर्भ में पल रहें शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। लेकिन नमक का सेवन प्रेग्नेंट महिला को जरुरत के अनुसार करने पर जितना फायदा मिलता है उतना ही नुकसान गर्भवती महिला को नमक अधिक सेवन करने से हो सकता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान नमक का सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखना बहुत जरुरी की नमक का सेवन कितनी मात्रा में करना प्रेगनेंसी के दौरान सही होता है।

प्रेगनेंसी में नमक का सेवन कितनी मात्रा में करना चाहिए?

सोडियम का सिमित मात्रा में सेवन करना गर्भवती महिला के लिए बहुत जरुरी होता है क्योंकि यदि जरुरत से ज्यादा या जरूरत से कम यदि नमक का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान किया जाए तो ये नुकसानदायक हो सकता है। गर्भवती महिला एक दिन में चार से छह ग्राम तक नमक का सेवन कर सकती है, यानी की लगभग एक चम्मच से थोड़ा कम। साथ ही यदि महिला हाई ब्लड प्रैशर की समस्या यदि प्रेगनेंसी के दौरान होती है या महिला इस समस्या से पहले से ही परेशान है तो महिला को नमक का सेवन और भी कम कर देना चाहिए।

प्रेगनेंसी में नमक का सेवन करने के फायदे

जिस तरह गर्भवती महिला को सभी पोषक तत्वों की जरुरत प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी को स्वस्थ रखने के लिए होती है उसी तरह सोडियम का भी गर्भवती महिला के शरीर में होना बहुत जरुरी होता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को नमक का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

मांसपेशियों को राहत: गर्भावस्था के दौरान महिला को मांसपेशियों में आई कमजोरी के कारण कमर व् बॉडी में अन्य पार्ट्स में दर्द की समस्या हो सकती है। ऐसे में नमक का सेवन करने से मांसपेशियों में आई कमजोरी को दूर करने में मदद मिलती है।

तरल पदार्थ: सोडियम के कारण शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा को भरपूर बनाये रखने में मदद मिलती है, जिससे गर्भवती महिला को एनर्जी मिलने के साथ भ्रूण के विकास में भी मदद मिलती है।

गर्भपात: गर्भवती महिला के शरीर में सोडियम की मात्रा यदि भरपूर होती है तो इससे मिसकैरिज जैसी परेशानी से गर्भवती महिला को बचाने में मदद मिलती है।

भ्रूण का विकास: गर्भ में पल रहें शिशु के मस्तिष्क व् तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए भी गर्भवती महिला के शरीर में आयोडीन का होना बहुत जरुरी होता है।

प्रेगनेंसी में नमक खाने के नुकसान

यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान जरुरत के अनुसार नमक का सेवन करती है तो इससे महिला को भरपूर फायदा मिलता है। लेकिन यदि महिला जरुरत से ज्यादा नमक का सेवन करती है तो इसके कारण गर्भवती महिला को नुकसान भी पहुँच सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान अधिक नमक खाने के नुकसान क्या हो सकते हैं।

सूजन: नमक का अधिक सेवन करने से शरीर में पानी जमा होने लगता है जिसके कारण गर्भवती महिला को सूजन जैसी समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान अधिक परेशान होना पड़ सकता है। इसके कारण महिला को हाथों, पैरों, चेहरे आदि पर सूजन की समस्या हो सकती है।

हाई ब्लड प्रैशर: सोडियम का सेवन जरुरत से अधिक करने के कारण गर्भवती महिला को हाई ब्लड प्रैशर जैसी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। और प्रेग्नेंट महिला का हाई ब्लड प्रैशर से परेशान होना गर्भवती महिला के लिए ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहें शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।

कैल्शियम की कमी: नमक का अधिक सेवन करने से बॉडी से कैल्शियम यूरिन के रास्ते बाहर निकलने लगता है जिसके कारण गर्भवती महिला को कैल्शियम की कमी के कारण परेशानी हो सकती है।

प्रेगनेंसी में काला नमक

काला नमक का सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान किया जा सकता है क्योंकि काले नमक का सेवन करने से पेट सम्बन्धी समस्या जैसे कब्ज़, सीने में जलन आदि परेशानियों से गर्भवती महिला को निजात पाने में मदद मिलती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला हाई ब्लड प्रैशर की समस्या से परेशान है तो आपको काला नमक का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके कारण गर्भवती महिला की यह परेशानी बढ़ सकती है।

प्रेगनेंसी में सेंधा नमक

सेंधा नमक का सेवन भी गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान कर सकती है क्योंकि इसमें मौजूद गुण भी प्रेग्नेंट महिला को बहुत सी परेशानियों से निजात दिलाने में मदद करते हैं। जैसे की पाचन क्रिया को बेहतर रखना, ब्लड प्रैशर को नोर्मल रखना, गेस्टेशनल डाइबटीज के खतरे को कम करना, मांसपेशियों से जुडी समस्या से राहत, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना जिससे प्रेग्नेंट महिला और भ्रूण को संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिल सके, अनिद्रा की समस्या से बचाव, वजन कण्ट्रोल करना, आदि। तो इन सभी परेशानियों से प्रेगनेंसी के दौरान सुरक्षित रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला सेंधा नमक का सेवन भी कर सकती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान नमक का सेवन करने से जुड़े कुछ टिप्स, ऐसे में गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के लिए और गर्भ में पल रहें शिशु के बेहतर विकास के लिए नमक का सेवन प्रेगनेंसी में जरुरत के अनुसार ही करना चाहिए।

गर्भधारण से लेकर जन्म तक क्या-क्या परेशानियां आती हैं

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गर्भावस्था के समय महिला के लिए जटिलताओं से भरा हुआ होता है, खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बनती है। उन्हें तो इस बात को लेकर परेशानी हो जाती है की उन्हें इस दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं। प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी समस्याएं भी होती है, किसी महिला को ज्यादा परेशानी का अनुभव करना पड़ता है तो कुछ की प्रेगनेंसी बिना किसी समस्या के निकल जाती है। और यह सब गर्भधारण के बाद बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करता है। तो आइये आज हम आपको ऐसी ही कुछ परेशानियों के बारे में बताने जा रहें हैं जो की गर्भवती महिला को गर्भधारण से लेकर शिशु के जन्म तक होती है।

मॉर्निंग सिकनेस

सुबह उठने में परेशानी होना, सिर में दर्द व् चक्कर महसूस होना भी प्रेगनेंसी के शुरुआत में होना आम बात होती है। और इसका कारण गर्भवती महिला के शरीर में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव होते हैं, और ज्यादातर महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान यह समस्या होती है।

उल्टी व् मतली

उल्टी व् मतली की समस्या के साथ सीने में जलन महसूस होना भी गर्भावस्था के दौरान आम बात होती है। कुछ महिलाएं उल्टी की समस्या से प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने तक परेशान रहती है, और उसके बाद उन्हें इस परेशानी से निजात मिल जाता है। लेकिन कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने इस समस्या से परेशान रहती हैं।

कमजोरी व् थकान

शुरूआती दिनों में हार्मोनल बदलाव के कारण बॉडी में ऊर्जा की कमी होने लगती है, और कुछ महिलाओं का इस दौरान खाने पीने का मन भी नहीं करता है। उसके बाद महिला का वजन बढ़ने के कारण महिला को किसी भी काम को करने में परेशानी का अनुभव करना पड़ता है जिसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान कमजोरी व् थकान का महसूस होना आम बात होती है।

पेट से सम्बन्धी समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान हो रहे हार्मोनल बदलाव का असर पाचन क्रिया पर भी पड़ता है, जिसके कारण वो स्लो हो जाती है और महिला को एसिडिटी, पेट में दर्द व् कब्ज़ जैसी समस्या से परेशान होना पड़ता है।

तनाव होना

बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव, शारीरिक परिवर्तन के कारण कई बार प्रेगनेंसी के दौरान महिलाएं तनाव में भी आ जाती है। लेकिन प्रेगनेंसी में तनाव महिला और गर्भ में पल रहे शिशु की मुश्किलें बढ़ा सकता है। ऐसे में महिला को तनाव नहीं लेना चाहिए और खुश रहना चाहिए।

दर्द की समस्या

कमर दर्द, सिर दर्द व् चक्कर, पेट में दर्द, टांगो में ऐंठन का होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होता है। कई बारे कमजोरी होने के कारण महिला को पूरे बॉडी में भी दर्द का अहसास हो सकता है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए महिला को भरपूर पोषक तत्वों का सेवन करना चाहिए और बॉडी को आराम भी देना चाहिए।

वजन में बढ़ोतरी

प्रेगनेंसी के तीसरे महीने तक महिला के वजन में कमी आ सकती है लेकिन तीसरे महीने के बाद महिला का वजन बढ़ने लग जाता है, कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान जरुरत से ज्यादा खाने लग जाती है। जिसके कारण महिला का वजन बहुत ज्यादा बढ़ने लग जाता है।

बार बार यूरिन आना

प्रेगनेंसी के शुरुआत में हार्मोनल बदलाव के कारण किडनी अधिक सक्रिय हो जाती है, जिसके कारण बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है। उसके बाद जैसे जैसे महिला का वजन बढ़ने लगता है तो मूत्राशय पर दबाव पड़ने के कारण महिला को बार बार यूरिन पास करना पड़ता है। और प्रेगनेंसी के दौरान आपको इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए की आप यूरिन को रोककर न रखें।

बवासीर की समस्या

वजन बढ़ने के कारण पेट के नीचे की तरफ मांसपेशियों पर ज्यादा दबाव पड़ने लगता है, और इसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं को बवासीर जैसी समस्या से परेशान होना पड़ सकता है।

सूजन की समस्या

कुछ महिलाओं को आठवे नौवें महीने में पैरों में, हाथों में सूजन हो जाती है, जिसके कारण पैरों में दर्द व् चलने में परेशानी का अनुभव भी हो सकता है। और आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए यदि आपको सूजन बहुत ज्यादा हैं इस उसमे असहनीय दर्द हो रहा है तो इसका कारण कुछ और भी हो सकता है ऐसे में आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से चेक करवाना चाहिए।

सोने में परेशानी

महिला का वजन बढ़ने के कारण प्रेगनेंसी के आखिरी दिनों में महिला को सोने से जुडी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। और इस परेशानी से निजात पाने के लिए महिला को सीधा या उल्टा नहीं सोना चाहिए बल्कि करवट लेकर सोना चाहिए, क्योंकि करवट लेकर सोने से महिला और शिशु को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होती है, लेकिन एक ही तरफ करवट लेकर भी सारी रात नहीं सोना चाहिए।

इन्फेक्शन

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला खान पान के प्रति लापरवाही करती है, तो इसके कारण इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। जिसके कारण महिला ब्लड इन्फेक्शन, यूरिन इन्फेक्शन, एलर्जी जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

डिलीवरी के समय होने वाला दर्द

प्रसव का समय पास आने पर महिला को पेट में मीठा दर्द होने लगता है, और जैसे ही शिशु पूरी तरह बाहर आने के लिए तैयार हो जाता है। उसके साथ इस दर्द को सहना महिला के लिए मुश्किल हो जाता है, जितने समय तक डिलीवरी नहीं होती है उतनी देर महिला को यह दर्द सहना पड़ता है। लेकिन शिशु के जन्म के बाद आपको इससे आराम मिल जाता है। और यदि आपकी सिजेरियन डिलीवरी होती है तो आपको इस दर्द को नहीं सहना पड़ता है।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जो गर्भवती महिला को गर्भधारण से लेकर शिशु के जन्म तक होती है। और कोई भी परेशानी ज्यादा या असहनीय हो तो प्रेगनेंसी के दौरान उसे बिल्कुल भी इग्नोर नहीं करना चाहिए। और डॉक्टर से चेक करवाना चाहिए, साथ ही डॉक्टर से अपनों नियमित जांच भी करवानी चाहिए ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको स्वस्थ रहने में मदद मिल सके और गर्भ में शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से हो सके।

विटामिन ई के क्या क्या फायदे होते है

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हमारे शरीर के विकास के लिए सभी पोषक तत्वो का सेवन अनिवार्य होता है, फिर चाहे वो प्रोटीन, कैल्शियम हो या फिर विटामिन, हर एक खनिज अपनी विशेषताओ के लिए होता है, हमारे शरीर में यदि सभी खनिज पर्याप्त मात्रा में विद्यमान होते है, तो इसके कारण शरीर के विकास को तेजी से बढ़ने में मदद मिलती है, ऐसे ही विटामिन ई के भी बहुत से ऐसे फायदे होते है, जो आजके शारीरिक विकास के साथ आपके सौन्दर्य को बढ़ाने में भी मदद करते है, इसके कारण आपके शरीर में होने वाली लाल रुधिर कोशिकाओं की संख्या में बढ़ोतरी होती है, जिसके कारण शरीर में होने वाली अनीमिया की समस्या से आपको राहत मिलती है।

इसके साथ ये आपकी त्वचा से जुडी परेशानियों का हल करने में भी आपकी मदद करता है, ऐसे ही बहुत से फायदे है, जो आपको विटामिन ई का सेवन करने पर मिलते है, विटामिन ई वनस्पति तेल, हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध, दाल, मक्खन, चोकर युक्त आटा, गाय के दूध, फलो आदि में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, और जिन व्यक्तियों में विटामिन ई की कमी होती है वो बहुत सी शारीरिक परेशानियों के घिराव में आ जाते है, जैसे की प्रजनन शक्ति का कमजोर हो जाना, शारीरिक रूप से कमजोरी होना, मांसपेशियों में कमजोरी आ जाना।

नेत्र दृष्टि का कमजोर होना, शरीर के अंगो का सही ढंग से काम न कर पाना, थकान की समस्या होना, अचानक से चक्कर आना, आदि। ऐसी कुछ परेशानियां आपको हो जाती है, इसीलिए आपको ऐसा आहार लेना चाहिए जिसमे सरे खनिज उचित मात्रा में विद्यमान हो, आज हम आपको विटामिन ई युक्त आहार लेने के कुछ फायदे बताने जा रहे है, और यदि आप अपने आहार में विटामिन ई का सही इस्तेमाल करते है, तो इसके कारण आपको बहुत से फायदे भी होते है, तो आइये जानते है विटामिन युक्त आहार का सेवन करने के क्या क्या फायदे होते है।

कैंसर की संभावनाओ को कम करता है:-

विटामिन ई का सेवन करने से कैंसर की सम्भावना कम होती है, और यदि आपके शरीर में कैंसर फैलाने वाली कोशिकाएं पनप रही होती है, तो इसके इस्तेमाल से उन्हें भी सामान्य होने में मदद मिलती है, इसीलिए आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए, ताकि आपको इस भयंकर बीमारी से आराम मिल सकें और आप इसकी चपेट में न आएं।

एनीमिया से निजात दिलाता है:-

शरीर में रक्त की कमी होने के कारण एनीमिया की समस्या उत्त्पन्न हो जाती है, जिसके कारण थकान, कमजोरी, जैसी समस्या भी आपको परेशान करता है, इसके सेवन करने सेआपके शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपके शरीर में रक्त पर्याप्त मात्रा में रहता है, और इसका प्रवाह भी सही ढंग से होता है, गर्भवती स्त्री को इसका सेवन जरूर करना चाहिए, क्योंकि गर्भवती महिला के अंदर खून की मात्रा का पर्याप्त होना बहुत जरुरी होता है, इससे उसे कमजोरी का अनुभव भी नही होता है।

हदय रोगों के लिए अच्छा होता है:-

रिसर्च के अनुसार जो लोग विटामिन ई का सेवन भरपूर मात्रा में करते है, उन्हें हदय से सम्बंधित समस्या से राहत मिलती है, क्योंकि रक्त की मात्रा पर्याप्त होने के कारण हदय अपनी सही गति से काम करता है, इसीलिए यदि आप भी चाहते है की आपको भी हदय संबंधी परेशानी न हो, तो आपको जितना हो सकें इसका सेवन करना चाहिए। इसके अलावा महिलाओ में मेनोपॉज के बाद ये स्ट्रोक की सम्भावना को भी कम करता है।

इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है:-

कई लोग से पेट संबंधी परेशानी से जूझते रहते है, जैसे की अपज, बदहज़मी, पेट में गैस बनना आदि की समस्या रहती है, विटामिन ई का सेवन करने से आपके पाचन तंत्र को मजबूत होने में मदद मिलती है, और साथ ही इसके कारण आपको भोजन को पचाने में आसानी होती है, आपका इम्यून सिस्टम बेहतर होता है, ओटर साथ की कब्ज़ जैसी समस्या से भी राहत मिलती है।

स्तन कैंसर की रोकथाम करता है:-

जिन महिलाओ के स्तन में गांठ होती है, या ब्रैस्ट कैंसर की समस्या होती है, ये उन महिलाओ के लिए फायदे का काम करता है, क्योंकि इसके सेवन से स्तन कैंसर को फैलाने वाली कोशिकाएं सामान्य हो जाती है, जिससे ये स्तन कैंसर की रोकथाम में आपकी मदद करता है। जिन महिलाओ को स्तन से जुडी कोई परेशानी हो उन्हें इसका सेवन जरूर करना चाहिए।

पीरियड्स में होने वाले दर्द से राहत दिलाता है:-

सभी महिलाओ को पीरियड्स होते है, और पीरियड्स के दौरान कई महिलाओ को पेट में कमर व् पीठ के साथ टांगो में दर्द की भी शिकायत रहती है, और जिन महिलाओ को इस दर्द का अनुभव नहीं करना पड़ता है वो बहुत भाग्यशाली अपने आप को समझ सकती है, क्योंकि कई बार पीरियड्स में होने वाला दर्द असहनीय होता है, और यदि आप भी मासिक धर्म के दौरान होने वाले इस दर्द की समस्या से परेशान है, तो इससे बचने के लिए आपको विटामिन ई युक्त पदार्थो का सेवन करना चाहिए, ये इस परेशानी से बचने में आपको मदद करता है।

तनाव को कम करने में मदद करता है:-

स्टडीज़ के अनुसार पता किया गया है, की जिन व्यक्तियों में विटामिन ई की कमी पायी जाती है, वो लोग मानसिक रूप से ज्यादा परेशान रहते है, जिसके कारण उन्हें तनाव की समस्या हो जाती है, इसके लिए यदि आप भी तनाव से राहत पाना चाहते है तो आपको विटामिन ई का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए, जिसके इस्तेमाल से आपको मानसिक रूप से फिट रहने में मदद मिल सकें।

कलींजर का काम करता है:-

विटामिन ई युक्त पदार्थ जैसे की एलोवेरा आदि प्राकृतिक कलींजर का काम करते है, इनके इस्तेमाल से आपकी त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाकर त्वचा का सौन्दर्य को और भी बढ़ाने में मदद मिलती है, और ये आपकी त्वचा को गोरा करने में भी आपकी मदद करता है, सत्रह ही त्वचा पर जमने वाली धूल मिट्टी की समस्या से निजात पाने में भी ये आपकी मदद करता है। इसके साथ इसका सेवन करने से भी आपको त्वचा को निखारने में भी मदद मिलती है।

बढ़ती उम्र को रोकने में मदद करता है:-

विटामिन-ई में भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो त्वचा पर बढ़ती उम्र के असर को कम करके आपको जवान बनाएं रखने में मदद करते है, इसके अलावा यह चेहरे पर होने वाली झुर्रियों और मुहांसे की समस्या से निजात दिलाने में भी आपकी मदद करते है, इसीलिए यदि आप भी हमेशा जवान बने रहना चाहते है, और चाहते है की आपकी त्वचा पर ऐसी कोई भी समस्या न हो, तो आपको विटामिन ई का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

त्वचा संबंधी समस्या का हल करता है:-

कई महिलाओ की त्वचा रूखी सुखी व् बेजान होती है, जिसके कारण उनकी त्वचा में वो आकर्षण नहीं होता है, तो यदि आप चाहते है की आपको इस समस्या का समाधान मिलें, तो आपको अपने आहार में विटामिन ई की मात्रा को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि इसका सेवन करने से आपकी त्वचा को नमी मिलती है, जिसके कारण त्वचा की नई कोशिकाओं का निर्माण होता है, जिसके कारण आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

डायबिटीज के खतरे को कम करने में मदद करता है:-

विटामिन ई की पर्याप्त मात्रा यदि आपके शरीर में होती है, तो इसके कारण आपके शरीर में डायबिटीज के खतरे को कम करने में मदद मिलती है। और ये देखा गया है की जिन व्यक्तियों में विटामिन ई की मात्रा की कमी होती है, उनके लिए डायबिटीज का खतरा बाद जाता है, इसीलिए जिन लोगो को ये समस्या हो, उन्हें विटामिन ई का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है:-

विटामिन ई का सेवन सही मात्रा में करने से आपके शरीर में ये कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम करता है और शरीर में वसीय अम्लों के संतुलन को बनाए रखने में सहायता करता है, क्योंकि यदि कोलेस्ट्रॉल और वसा आपके शरीर में बढ़ जाता है, तो इसके कारण आपको मोटापे की समस्या भी हो जाती है, जो आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने के साथ और भी बीमारियों को आपके शरीर में जन्म देती है, इसीलिए इससे बचने के लिए आपको इसका सेवन कजरूर करना चाहिए। इसके साथ ही यह थायराइड और पिट्यूटरी ग्रंथि‍ के कार्य में होने वाले अवरोध को रोकने में भी मदद करता है।

बालों के लिए है फायदेमंद:-

विटामिन ई का सेवन करने से बालों से जुडी परेशानी को हल करने में भी मदद मिलती है, इसके सेवन करने से रक्त का प्रवाह पुरे शरीर में अच्छे से होता है, जिससे बालों को भी अच्छे से पोषण मिलता है, और ये बालों को लंबा और घना बनाने में आपकी मदद करता है, इसके साथ यदि आप मार्किट में आई बाल झड़ने की समस्या से निजात पाने के लिए किसी दवाई का सेवन कर रही है, तो ये उसके साइड इफ़ेक्ट को कम करने में आपकी मदद करता है।

विटामिन ई के सेवन से होने वाले अन्य फायदे:-

  • इसके सेवन से त्वचा पर जमी गंदगी और मृत कोशिकाओं की सफाई करने में मदद मिलती है।
  • त्वचा में नई कोशिकाओं का निर्माण करके त्वचा के सौन्दर्य को बढ़ाने में मदद करता है।
  • सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने में विटामिन-ई आपकी बहुत मदद करता है।
  • सनबर्न की समस्या या फोटोसेंसेटिव होने जैसी समस्याओं से विटामिन-ई आपकी रक्षा करता है।
  • विटामिन-ई का भरपूर मात्रा में सेवन करने पर अल्जाइमर जैसी समस्याओं का खतरा कम होता है।
  • शरीर में होने वाली किसी भी प्रकार की एलर्जी के रोकथाम के लिए विटामिन ई बहुत उपयोगी होता है।
  • बच्चों में यह कंकाल तंत्र के विकास के लिए एक अहम भूमिका निभाता है।
  • विटामिन ई का सेवन करने से बाल झड़ने के लिए ली जाने वाली दवाइयों के साइड इफेक्ट को भी कम करने में मदद करता है।
  • विटामिन ई का सेवन करने से यह चेहरे के काले धब्बो को निकालने का काम करता है।
  • विटामिन ई हमारे शरीर में हाई ब्लड प्रेशर को बढ़ने से रोकता है।

तो इन सब फायदों को उठाने के लिए आपको विटामिन ई का सेवन उपरोक्त मात्रा में करना चाहिए, अखरोट, अंडे, आम, कद्दू,पपीता, एवोकेडो, ब्रोकली, शलगम, बादाम, पॉपकार्न, सूखे मेवे, शकरकंद, कड लीवर ऑयल,
सूरजमुखी के बीज, हरी पत्तेदार सब्जियां, आदि का सेवन करके अपने शरीर में विटामिन ई की मात्रा की पूर्ति कर सकते है, तो आपको विटामिन ई के लिए इनका सेवन करना चाहिए।