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दीवाली के दिनों में टोने-टोटके से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को क्या करना चाहिए?

दीवाली खुशियों का पर्व होता है और देश के लगभग हर हिस्से में इसे बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। हर जगह रौशनी व् दीयों की जगमगाहट के नज़ारे देखने को मिलते हैं। लेकिन जहां कुछ लोग ख़ुशी से इस दिन को मना रहे होते हैं वहीं कुछ लोग टोना टोटका भी करते हैं। और यह टोना टोटका कुछ लोग अपनी स्वार्थ पूर्ति जैसे की घर में बरकत, धन में वृद्धि, सुख समृद्धि, सफलता आदि के लिए करते हैं। लेकिन इनमे कुछ लोग ऐसे भी है जो नकारात्मकता को फैलाने के लिए टोना टोटका करते हैं। ऐसे में हर व्यक्ति को इस रात इन चीजों का खास ध्यान रखना चाहिए। खासकर छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाओं को, क्योंकि इन पर बहुत जल्दी नेगेटिव एनर्जी का असर दिखाई देता है।

प्रेग्नेंट महिला को दीवाली के दिन टोना टोटका से बचने के लिए क्या करें

यदि आप गर्भवती है और दीवाली के पर्व पर टोने टोटके के कारण होने वाले बुरे असर से बची रहना चाहती है, तो आपको दीवाली की रात ही नहीं बल्कि दीवाली के पूरे दिन में कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जिससे आपको टोने टोटके के बुरे असर से बचे रहने में मदद मिल सके। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को दीवाली के दिन टोने टोटके से बचे रहने के लिए क्या- क्या करना चाहिए।

घर से बाहर न निकलें

दीवाली एक ऐसा त्यौहार है जहां खुशियों को मनाने के साथ सतर्कता बरतना भी जरूरी होता है और यह सतर्कता केवल पटाखों, शोर आदि से नहीं बल्कि नकारत्मकता से बचने के लिए भी बरतनी चाहिए। ऐसे में टोने टोटके से बचने के लिए हो सके तो गर्भवती महिला को दीवाली का त्यौहार घर में रहकर ही मनाना चाहिए और घर से बाहर नहीं जाना चाहिए। क्योंकि यदि प्रेग्नेंट महिला घर के बाहर जाती है तो उस पर टोने टोटके के असर का खतरा रहता है लेकिन घर में रहने से टोने टोटके के दुष्प्रभाव से गर्भवती महिला और शिशु को बचे रहने में मदद मिलती है।

चौराहे पर न जाएँ

यदि दीवाली के दिन गर्भवती महिला किसी काम से बाहर निकल भी जाती है तो महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वो गलती से भी चौराहे (जहां चार रास्ते मिलते हैं) के बीच में से न जाए। बल्कि किसी और रास्ते से चली जाए क्योंकि दीवाली के दिन ज्यादातर लोग टोने टोटके चौराहे पर ही करते हैं।

कुछ चीजों को अपने साथ रखें

घर से बाहर जाने पर गर्भवती महिला माचिस, चाकू, कील, या अन्य किसी लोहे की वस्तु को गर्भवती महिला को अपने पास रखकर ही घर से बाहर निकलना चाहिए। क्योंकि बड़े बुजुर्गो का मानना है की इन चीजों को पास रखने से नकारात्मक चीजे आस पास नहीं आती है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को घर से बाहर निकलते समय इनमे से किसी भी एक चीज को अपने पास जरूर रखना चाहिए।

भगवान के नाम का ध्यान करें

जब आप पॉजिटिव एनर्जी को अपने आस- पास बनाए रखती है तो भी नकारत्मकता से बचे रहने में मदद मिलती है। इसीलिए गर्भवती महिला को दीवाली के दिन जितना हो सके भगवान का ध्यान करना चाहिए क्योंकि भगवान का ध्यान करने से आस पास पॉजिटिव एनर्जी को बनाए रखने में मदद मिलती है, और टोने टोटके की परेशानी से भी बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ उपाय जिनका ध्यान हर गर्भवती महिला को दीवाली के दिन नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को दीवाली के दिन टोने टोटके से बचे रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी के चौथे से छटे महीने में कैसे ध्यान रखे?

गर्भावस्था के चौथे से छटे महीने को सेकंड ट्रिमेस्टर यानि की दूसरा तिमाही का नाम दिया जाता है। प्रेगनेंसी के एस दूसरे भाग में शिशु पहले से और बड़ा और मजबूत बनता है। बेबी के बढ़ते आकर से गर्भवती महिला का पेट और भी बाहर की तरफ निकल जाता है। बहुत सी महिलाओं को प्रेगनेंसी का यह भाग पहले से ज्यादा आसान लगता है। पर फिर भी यह भाग शिशु की ग्रोथ के लिए बहुत इम्पोर्टेन्ट होता है। इस भाग में भी गर्भवती महिला में बड़े शारीरिक बदलाव होते है। आइये जानते है इन महीनो के दौरान गर्भवती महिला किन किन बदलावों से गुजरती है और शिशु की कितनी ग्रोथ होती है।

शारीरिक बदलाव

प्रेगनेंसी के इस दूसरे भाग के दौरान पहले तीन महीनो के लक्षणों में सुधार होने लगता है। अधिकतम महिलाओं के अनुसार प्रेगनेंसी का यह समय बहुत खुशनुमा होता है। इन दिनों में महिला को कोई उल्टी, सर दर्द, घबराहट आदि पहले से कम हो जाता है। प्रेगनेंसी के इन तीन महीनो में गर्भवती महिला का गर्भाशय पहले अधिक बड़ा हो जाता है। इस दौरान पेट पहले से बड़ा, कम ब्लड प्रेशर के कारण घबराहट, स्ट्रेच मार्क्स, खुजली, पैरो या हाथो पर सूजन आदि का सामना करना पड़ सकता है। पेट का आकर बड़ा होने से मसल्स खिंचती जिसके कारण खुजली होने लगती है। ज्यादा खुजली करने के कारण स्ट्रेच मार्क्स पड़ने लगते है।

इस समय में गर्भवती महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। अपने खाने और पीने का अच्छे से ध्यान रखते हुए हाइड्रेट रहने के लिए अच्छे से फलो का रस, जूस और पेय प्रदार्थ का सेवन करने चाहिए। इसके अलावा इस समय में आप ड्राई फ्रूट्स का सेवन भी कर सकते है। गर्भावस्था के दूसरे भाग में हर महिला को दूध और दूध से बनी चीजों का सेवन जरूर करना चाहिए। इस समय में ज्यादा खुजली होने पर नाखुनो से ना खुजाये बल्कि नारियल तेल या कोई मॉइस्चराइजर से हल्के हाथो से मालिश करें।

मानसिक बदलाव

गर्भावस्था के चौथे माह से लेकर छटे माह तक का समय पूरी प्रेगनेंसी का सबसे सुखद समय होता है। यह समय इसलिए खास होता है क्योंकि इस समय में आप अपने शिशु की हर हरकत को महसूस कर सकते है। बच्चे की छोटी छोटी मूवमेंट्स को महसूस कर के आपको मानसिक संतुष्टि मिलती है। वैसे तो पूरी प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहना चाहिए क्योंकि हमारी हर चीज का असर बेबी पर पड़ता है परन्तु यह समय ऐसा होता है जब गर्भवती महिला खुद पर खुद ही खुश रहना शुरू कर देती है। कभी कभी कुछ महिलाये मानसिक तनाव महसूस कर सकती अगर प्रेगनेंसी में कुछ कम्प्लीकेशन हो तो।

जैसा की हम पहले भी बता चुके है गर्भावस्था में स्ट्रेस दूर करने का सबसे आसान उपाय होता है मैडिटेशन और योगा। मैडिटेशन और योगा सिर्फ गर्भवती महिला के लिए ही नहीं बल्कि उनके शिशु के लिए भी फायदेमंद होती है।

शिशु का विकास

प्रेगनेंसी के चौथे से छटे महीने में भ्रूण का बहुत अच्छे से विकास हो जाता है। इस समय में शिशु के सभी ऑर्गन्स यानि के सभी अंगो का निर्माण हो चूका होता है। इस समय में बेबी में सुनने के शक्ति आ जाती है। छटा महीना शुरू होते होते बेबी गर्भाशय में घूमना शुरू कर देता है। इस समय में जब जब हम कुछ खाते या पीते तब तब गर्भ में शिशु घूमता है या लात मरता है। अगर आप ध्यान दे तो आपको पता लगेगा के इस समय में आपका शिशु कब सो रहा है कब जाग रहा है।

शिशु के इस विकास और हरकतों से आपको शिशु के बारे में जानकारी मिलती रहती है जिससे आपको ख़ुशी और शांति का अनुभव होता है। प्रेगनेंसी के इस भाग में आपको पूरा सचेत रहने के जरुरत होती है क्योंकि इस समय के अंत तक भी अगर आप बेबी की मूवमेंट्स को महसूस नहीं कर पा रहे तो अपने डॉक्टरों से जरूर बताये। डॉक्टरों के अनुसार छटे महीने के अंत तक शिशु की लम्बाई 14 इंच तक बढ़ जाती है।

केले के छिलके के फायदे

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Benefits of Banana Peel

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केला एक ऐसा फल है जिसे न केवल बड़े बल्कि बच्चे भी बड़े चाव से खाते है। यह एक स्वादिष्ट फल होने के साथ-साथ बहुत ही फायदेमंद भी है। वजन घटाना हो या बढ़ाना हो सभी में केला महत्वपूर्ण योगदान देता है। इस फल में विटामिन और मिनरल्स जैसे पोटैशियम, मैग्नीशियम, विटामिन B6, B12 की अच्छी मात्रा पाई जाती है।

लेकिन क्या आप जानते है की इसके फल के साथ साथ इसका छिलका कितना फायदेमंद होता है? शायद नहीं! क्योंकि कभी इस बात पर गौर ही नहीं किया। आपको जानकर हैरानी होगी की कूड़े में फेंके जाने वाला छिलका वास्तव में बहुत से गुणों से परिपूर्ण होता है। इस छिलके में phytonutrients, फैटी एसिड और कई तत्व पाए जाते है जो हमारी स्किन, हेयर और स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होते है।

लेकिन सभी को इसके इन फायदों को बारे में पूर्ण जानकारी नहीं होती। इसीलिए आज हम आपको केले के छिलकों के फायदों के बारे में बताने जा रहे है जिनके बाद आप भी इसे कूड़े में फेंकने से पहले एक बार इस्तेमाल अवश्य करेंगी। तो आइये जानते है केले के छिलकों के फायदे स्वास्थ्य, त्वचा और बालों के लिए।

केले के छिलके के फायदे :-banana peel benefits

1. एक्ने :

केले के छिलके के सफ़ेद भाग को स्किन पर मलकर सोने से एक्ने की समस्या दूर हो जाती है। इसके अलावा फोड़े फुंसी और छोटे मोटे दाने भी इस उपाय से दूर हो जाते है। इसके लिए आपको कुछ नहीं करना है बस केले का छिलका उतारकर उसके सफ़ेद भाग को अपने स्किन पर रगड़ना है।

2. एक्ज़िमा :

केले का छिलका स्किन के लिए बहुत लाभकारी होता है। जो एक्ज़िमा और Psoriasis की समस्या को ठीक करने की क्षमता रखता है। इसमें मौजूद esterified fatty acid पाया जाता है जिसका प्रयोग इन बिमारियों में यूज होने वाली क्रीम्स और लोशन्स में किया जाता है। अगर आपके साथ ही ऐसी समस्या है तो रोजाना केले के छिलके को अपनी त्वचा पर रगड़ें।इससे आपको लाभ मिलेगा और साथ ही खुजली, लालिमा और जलन की समस्या भी नहीं होगी।

3. कीड़े के काटने पर :

कई बार किसी कीड़े, मच्छर या किसी प्रकार के पौधे के सम्पर्क में आने से त्वचा पर लालिमा, रैशेस, खुजली और सूजन आ जाती है। ऐसी स्थिति में केले के छिलके का प्रयोग लाभकारी होता है। इससे समस्या में तुरंत आराम मिल जाता है।

4. केले के सब्जी :

केले के छिलके में tryptophan नामक एमिनो एसिड पाया जाता है। जो की शरीर में सेरोटिन नाम का न्यूरो ट्रांसमीटर बनाने के काम आता है। यह तत्व नींद, मूड, यादाश्त और एपेटाइट को सुधारने में मदद करता है। इसके लिए आप कच्चे केले की सब्जी का सेवन करें।

5. दांत :

Read more : दांतों को सफ़ेद और सुंदर बनाने के घरेलू उपाय

केले के छिलका का प्रयोग दांतों की देखभाल के लिए भी किया जा सकता है। इसके लिए केले के छिलकों के भीतरी हिस्से से अपने दांतों को रगड़ें। लेकिन इसका अर्थ ये कतई नहीं है की आप ब्रश करना छोड़ दें। इसके साथ-साथ दिन में दो बार ब्रश करना भी बेहद जरुरी है।

6. मस्सा :

अगर आपके चेहरे या शरीर के किसी अन्य हिस्से पर मस्सा हो गया है तो उसे भी केले के छिलके के इस्तेमाल से आसानी से हटाया जा सकता है। इसमें मौजूद गुण भविष्य में इनके दोबारा आने की संभावना को कम करते है। इसके लिए रोजाना रात को सोने से पहले छिलके को मस्से पर रगड़ें।

7. झुर्रियां :केले के छिलके

उम्र बढ़ने के साथ-साथ चेहरे पर महीन झुर्रियां पडने लगती है। जिसे हटाने के लिए केले के छिलके के पेस्ट में एक अंडे के पीले भाग को मिलाएं। मिलाने के बाद 10 मिनट के लिए इस पैक को अपने फेस पर लगाएं। झुर्रियां अपने आप ठीक हो जाएंगी।

8. दर्द :

अगर आपके शरीर के किसी हिस्से में तेज दर्द हो रहा है तो उस हिस्से पर केले के छिलके को लगाएं। कुछ ही समय में दर्द से छुटकारा मिल जाएगा।

9. कोमलता और निखार :

इसके लिए रोजाना रात को सोने से पहले अपना फेस साफ़ करें और कुछ देर केले का छिलका उसपर रगड़ें। अगली सुबह अपना फेस अच्छे से साफ़ कर लें। स्किन अपने आप ही मुलायम और निखरी हुई हो जाएगी।

10. UV rays :kele ka chilka

कुछ देर आंखों पर केले का छिलका लगाने से उन्हें सूर्य की हानिकारक UV rays से बचाया का सकता है। इतना ही नहीं इससे मोतियाबंद की संभावना भी कम होती है। इस छिलके को खाने से आंखों की सेहत में सुधार आता है।

11. कोलेस्ट्रॉल :

केले के छिलके में soluble और insoluble फाइबर पाए जाते है। जो स्किन से LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।

12. जूतों के लिए :

इसके छिलके से रगड़ने पर जूते भी अच्छी तरह साफ़ हो जाते है।

तो ये थे, केले के छिलके के फायदे। जिन्हे जानकर आपको आश्चर्य तो हुआ ही होगा। क्योंकि शायद ही कोई इसके इन फायदों के बारे में जानता होगा। तो अगली बार से केले का छिलका कूड़े में फेंकने की बजाय उसका प्रयोग करें। लाभ मिलेगा।

आजकल चिकन, एग और मटन खाना क्या सेफ है?

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कुछ लोग नॉन वेज खाने के बहुत शौकीन होते हैं। ऐसे में कुछ लोग केवल अंडे खाना पसंद करते हैं तो कुछ चिकन तो कुछ लोग मटन खाना पसंद करते हैं। और ऐसा भी जरुरी नहीं है की जो चिकन खाता है वो मटन नहीं खाता है। बल्कि कुछ लोग तीनो खाना पसंद करते हैं और स्वास्थ्य के लिए भी चिकन, मटन और अंडे तीनो खाना फायदेमंद होते हैं।

लेकिन इनका सेवन करते समय एक बात का ध्यान रखना जरुरी होता है की आप इन चीजों को किसी अच्छी दूकान से खरीदें। क्योंकि यदि आप इन्हे किसी अच्छी दूकान या साफ़ सुथरी जगह से नहीं खरीदतें हैं या किसी ऐसी वैसी जगह से खरीदतें हैं तो हो सकता है की आपकी सेहत को नुकसान हो। तो आइये अब जानते हैं की चिकन, मटन और अंडे खाने से कौन से फायदे मिलते है।

चिकन खाने के फायदे

  • विटामिन, प्रोटीन, मिनरल्स से भरपूर होने के कारण चिकन का सेवन करने से शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।
  • चिकन खाने से हड्डियों व् दांतों को मजबूत रहने में मदद मिलती है क्योंकि चिकन में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है।
  • यदि आप चिकन का सेवन करते हैं तो इससे बॉडी में आयरन की कमी को पूरा होने में मदद मिलती है जिससे खून की कमी शरीर में नहीं होती है।
  • चिकन में मौजूद बैक्टेरिया इम्युनिटी को बढ़ाने में भी मदद करते हैं।
  • चिकन बॉडी में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और वसा की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करता है। जिससे मोटापे को कण्ट्रोल करने, हदय को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। साथ ही चिकन का सेवन करने से ब्लड में शुगर के लेवल को कण्ट्रोल करने में भी मदद मिलती है।

अंडे खाने के फायदे

  • अंडा एक सम्पूर्ण आहार होता है जो बॉडी में पोषक तत्वों को भरपूर करने में मदद करता है जिससे आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड व विटामिन-बी12 अंडे में मौजूद होता है जो दिमाग को तेज करने में मदद करता है।
  • प्रोटीन की मात्रा भी अंडे में मौजूद होती है ऐसे में अंडे का सेवन करने से बॉडी में कोशिकाओं को पोषण मिलता है जिससे आपको स्वस्थ और ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।
  • अंडे का सेवन करने से बॉडी में कोलेस्ट्रॉल व् ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल रहने में मदद मिलती है।
  • विटामिन ए की मात्रा भी अंडे में मौजूद होती है ऐसे में अंडे का सेवन करने से आँखों की रौशनी को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।
  • फास्फोरस, विटामिन-डी और कैल्शियम की मात्रा भी अंडे में मौजूद होती है ऐसे में अंडे का सेवन करने से हड्डियों को मजबूत रहने में मदद मिलती है।
  • अंडे का सेवन करने से पेट भरा रहता है जिससे भूख कम लगती है और वजन को संतुलित रहने में मदद मिलती है।
  • यदि आप माँ बनने वाली हैं तो आपके लिए अंडे का सेवन बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि यह माँ के साथ बच्चे के विकास के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।

मटन खाने के फायदे

  • मटन में विटामिन ए की मात्रा मौजूद होती है इसीलिए यदि आप मटन का सेवन करते हैं तो इससे आँखों की रौशनी को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • आयरन की मात्रा भी मटन में मौजूद होती है जिससे यह बॉडी में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है।
  • यदि आप मटन का सेवन करते हैं तो इससे हड्डियों व् मांसपेशियों को मजबूत रहने में मदद मिलती है।
  • मटन का सेवन करने से दिमाग को तेज करने और तनाव को कम करने में भी मदद मिलती है।

क्या आज कल मटन, चिकन, अंडे खाना सुरक्षित है?

अब आप सोच रहे होंगे की जब अंडे, चिकन और मटन खाने के इतने फायदे हैं तो इसका सेवन तो जरूर करना चाहिए। तो इसका जवाब है की इन्हे खाना तो सुरक्षित है लेकिन आप इन्हे कहा से ला रहे हैं, कौन कौन इन्हे काटकर आपको दे रहा है, कौन कौन इसे छु रहा है, कहीं वो इन्फेक्टेड तो नहीं है? आदि यह जानना बहुत जरुरी है। क्योंकि आज कल कोरोना वायरस का कहर इतना बढ़ गया है की हो सकता है यदि कोई इन्फेक्टेड व्यक्ति आपके द्वारा लिए गए सामान को छु देता है।

तो उससे आपको और जो भी उसे खाएगा उन सभी को इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है। इसके अलावा यदि कोई अन्य व्यक्ति भी आपके द्वारा लिए गए सामान को छु लेता है तो उसे भी इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है। ऐसे में बाहर से आयी चीजों के कारण होने वाले इन्फेक्शन से बचने के लिए आज कल आपको मटन, एग, चिकन न खाने की सलाह दी जा रही है। और आपको इस सलाह को मानना भी चाहिए ताकि और और आपके परिवार को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

तो यह हैं मटन, अंडे, चिकन खाने से जुड़े कुछ टिप्स, तो यदि आप भी इनका सेवन करते थे तो आज कल इनका सेवन करने से आप बचें। ताकि आपको स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में ब्रेस्ट पेन होने के कारण

प्रेगनेंसी बेशक महिला के लिए उत्साह से भरपूर समय होता है। लेकिन इस दौरान महिला को बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव, शारीरिक बदलाव के कारण बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। जैसे की जोड़ो में दर्द, पेट व् पीठ में दर्द, भूख में कमी, भूख का जरुरत से ज्यादा लगना, उल्टियां व् जी मिचलाना, चक्कर, कमजोरी, थकान जैसी परेशानियां होना, स्तनों में दर्द होना आदि। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान ब्रेस्ट पेन के बारे में बताने जा रहें हैं। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान अधिकतर महिलाएं परेशान होते हैं।

प्रेगनेंसी में ब्रेस्ट पेन होने के कारण

स्तनों में दर्द, भारीपन, कड़ापन, स्तन का संवदेनशील होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। और इस परेशानी के होने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे की:

हार्मोनल बदलाव

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव होते हैं जिसके कारण एस्ट्रोजन हॉर्मोन व् अन्य हॉर्मोन के स्तर बदलाव होने लगते है। जिसके कारण स्तन में भारीपन व् कड़ापन महसूस होता है। और महिला को ब्रेस्ट में दर्द भी महसूस होता है।

स्तन में दूध बनने की प्रक्रिया

शिशु के गर्भ में आने के बाद से ही महिला के स्तन में शिशु के लिए दूध बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। जिसके कारण ब्रेस्ट के उत्तकों में फैलाव होने लगता है, कोशिकाएं विकसित होने लगती हैं,दूध बनने लगता है। जिसकी वजह से स्तन भारी होने लगते हैं और महिला को दर्द की समस्या भी हो सकती है।

ब्रेस्ट साइज में बदलाव

प्रेगनेंसी के दौरान जैसे जैसे समय आगे बढ़ता है वैसे वैसे महिला के ब्रेस्ट साइज में भी बदलाव आता है। क्योंकि ब्रेस्ट में दूध बनाने वाली कोशिकाएं विकसित होने लगती है जिसके कारण ब्रेस्ट की स्किन में खिंचाव भी बढ़ने लगता है। ऐसे में स्तन का आकार बढ़ने के कारण भी महिला को ब्रेस्ट पेन की समस्या हो जाती है।

स्तन में गाँठ

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण स्तन के टिशू भी प्रभावित होते हैं। जिसके कारण एक या दोनों स्तन में छोटे छोटे सिस्ट यानी गाँठ बन जाती है। और इन्ही गांठ के बनने के कारण महिला को ब्रेस्ट पेन हो सकता है।

टाइट ब्रा

गर्भावस्था के दौरान ब्रेस्ट साइज बढ़ जाता है इसीलिए महिला को अपने ब्रेस्ट साइज के हिसाब से नई ब्रा खरीदकर पहननी चाहिए। लेकिन यदि महिला पहले वाली ब्रा ही पहनती है और वो महिला को टाइट होती है तो टाइट ब्रा पहनने के कारण भी महिला को ब्रेस्ट पेन की समस्या हो जाती है।

प्रेगनेंसी के दौरान ब्रेस्ट पेन से बचने के उपचार

  • कैफीन युक्त आहार का सेवन अधिक करने से बचें।
  • पानी का सेवन भरपूर करें।
  • ज्यादा ऑयली चीजों का सेवन न करें।
  • जरुरत से ज्यादा वजन न बढे इस बात का ध्यान रखें।
  • सिकाई करें, मसाज करें।
  • अपने साइज की ब्रा का चुनाव करें।
  • खान पान का अच्छे से ध्यान रखें।
  • व्यायाम करें।

प्रेगनेंसी में ब्रेस्ट पेन होने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए

वैसे तो प्रेगनेंसी में ब्रेस्ट पेन होना आम बात होती है लेकिन यदि महिला को कुछ ऐसे लक्षण महसूस हो जो असहनीय या अजीब हो। तो महिला को कोई रिस्क नहीं लेना चाहिए और जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से मिलना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं वो लक्षण कौन से हैं जिनके महसूस होने पर महिला को डॉक्टर के पास जरूर जाना चाहिए।

  • ब्रेस्ट में दर्द के साथ खुजली की समस्या अधिक हो।
  • स्तन में दर्द इतना ज्यादा हो रहा हो की आपसे सहन ही न हो।
  • स्तन में एक ही जगह दर्द होना और उसी जगह पर दर्द का बढ़ना।
  • आपको ऐसा महसूस हो रहा हो की आपके स्तन में गांठ पड़ गई है।
  • ब्रेस्ट से आपको सफ़ेद या पीले के अलावा किसी और रंग का पदार्थ निकलता हुआ महसूस हो।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान ब्रेस्ट पेन से जुडी कुछ बातें, जिनका ध्यान गर्भवती महिला को जरूर रखना चाहिए। ताकि माँ व् बच्चे दोनों को किसी भी परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

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प्रेगनेंसी में ट्रेवल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

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प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए बहुत ही नाजुक समय होता है, इसीलिए गर्भवती महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। क्योंकि गर्भावस्था के समय महिला अकेली नहीं होती है बल्कि गर्भ में पल रहा शिशु भी अपनी माँ पर ही निर्भर करता है, ऐसे में महिला द्वारा की गई किसी भी तरह की लापरवाही का असर सीधा गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है। ऐसे में यदि किसी महिला को कहीं यात्रा पर जाना पड़ जाए, तो महिला के लिए परेशानी का विषय होता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर्स महिला को यात्रा न करते की सलाह देते हैं।

और यात्रा करने के लिए डॉक्टर इसीलिए मना करते हैं क्योंकि इस दौरान झटका, पेट पर दबाव, आदि पड़ने के कारण महिला को परेशानी हो सकती है। खासकर शुरूआती दिनों में तो यह गर्भपात का कारण भी बन सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान यदि यात्रा करनी भी पड़ जाये तो जरुरी होता है की महिला अपना ख्याल अच्छे से रखें और सावधानी बरते जिससे गर्भवती महिला या गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह की परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके। तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान यात्रा करते समय गर्भवती महिला को किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

खान पान का ध्यान रखें

ट्रैवेलिंग के दौरान कुछ महिलाओं को उल्टी आने की समस्या होती है, और प्रेगनेंसी के दौरान यात्रा करने पर तो अधिकतर महिलाओं को यह समस्या हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को अपने खान पान का ध्यान रखना चाहिए, हल्का भोजन करना चाहिए, और साथ ही ट्रेवल करते समय टॉफी, आदि का सेवन करते रहना चाहिए जिससे उल्टी आदि न आए और आपको इस परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके।

आरामदायक कपडे पहने

गर्भवती महिला को यात्रा के दौरान आरामदायक कपडे पहनने चाहिए जिससे अधिक गर्मी या ठण्ड का अहसास न हो। और महिला रिलैक्स भी महसूस करे, साथ ही बंद जूते आदि पहनने से बचना चाहिए और आगे से खुली हुई चप्पल आदि पहननी चाहिए, और ध्यान रखें की ऐसी चप्पल न पहने जो ढीली हो या जिसमे आपका पैर फिसलता हो।

भारी सामान लेकर न चलें

प्रेगनेंसी में गर्भवती महिला को भारी सामान न उठाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे गर्भवती महिला के पेट पर दबाव पर सकता है, जिसके कारण परेशानी का अनुभव हो सकता है। ऐसे में यदि महिला को भारी सामान लेकर जाना है तो कुली से सामान उठवाना चाहिए या घर के किसी सदस्य को साथ लेकर जाना चाहिए। ताकि महिला को भारी सामान के कारण होने वाली परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके।

सही सीट का चुनाव

गर्भवती महिला यात्रा के दौरान यदि एक ही पोस्चर में बैठी रहती है तो इसके कारण भी महिला को परेशानी हो सकती है। ऐसे में जरुरी होता है की गर्भवती महिला यात्रा के दौरान सही सीट का चुनाव करें, जिससे वह अपना पोस्चर आराम से बदल सकें। जैसे की ट्रेन में यदि महिला सफर कर रही है तो तो उसे बुकिंग करके नीचे वाली सीट लेनी चाहिए, टू टियर या थ्री टियर में ही बुकिंग करवानी चाहिए, कार में यदि आप सफर कर रही हैं तो आगे वाली सीट पर बैठें ताकि सीट को ऊपर नीचे करके आप अपनी पोजीशन को बदल सकें, आदि।

दूसरे ट्राइमेस्टर में कर सकती है सफर

वैसे तो प्रेगनेंसी के दौरान सफर करने से बचना चाहिए, लेकिन यदि आपको जरुरी सफर पर जाना है तो ऐसे में दूसरे ट्राइमेस्टर में सफर करना सुरक्षित होता है, यदि पूरी सेफ्टी का ध्यान रखा जाए। और पहले और तीसरे ट्राइमेस्टर में जितना हो सकें सफर नहीं करना चाहिए।

डॉक्टर से ले राय

गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी में क्या सही है क्या नहीं इसके बारे में सबसे बेहतर तरीके से डॉक्टर बता सकता है। ऐसे में यात्रा करने से पहले गर्भवती महिला को अपनी मेडिकल कंडीशन के बारे में डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। और उसके बाद ही सफर करना चाहिए, क्योंकि यदि प्रेगनेंसी में किसी तरह की परेशानी होती है तो डॉक्टर आपको उसके बारे में अच्छे से बता देता है।

बाहर के खाने से बचें

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण जीभ के स्वाद में परिवर्तन आना आम बात होती है, ऐसे में ट्रेवल करते समय कुछ बाहर का खाने की इच्छा होना आम बात होती है। लेकिन महिला को बाहर के खाने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण व ट्रेवल के दौरान तबियत के खराब होने का डर भी रहता है। और जितना हो सके खाने का सामान अपने घर से ही लेकर जाना चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान गर्भवती महिला को ट्रेवल करते समय रखना चाहिए। ताकि ट्रैवेलिंग के दौरान आने वाली हर तरह की परेशानी से बचाव करने में महिला को मदद मिल सके। साथ ही गर्भवती महिला को यदि ट्रेवलिंग से पहले ही प्रेगनेंसी के दौरान अधिक सेहत सम्बन्धी समस्या हो ट्रेवलिंग करने से बचना चाहिए।

तंपन या टॅम्पोन (Tampon) क्या होता है? क्या सेफ है पिरिअड्स के समय इस्तेमाल करना?

तंपन या टॅम्पोन : अपने मासिक धर्म से निपटने का एक अन्य तरीका है टैम्पोन (Tampon)। यह मासिक धर्म से सुरक्षा देने का एक तरीका है, जैसा की आप पैड लगाते है, पीरियड्स के दिनों में, आजकल एक नई चीज आई है जो कपास या रेयान से बना होता है एक टैम्पून यो*नि के अंदर सुरक्षित तरीके से फिट होता है। मासिक धर्म के दौरान मासिक स्राव को सोखने के लिए यो*नि के अंदर डाला जाता है

कुछ महिलाओं को इस बात का डर लगा रहता है कि टैम्पून आपके शरीर में अंदर कहीं खो जाएगा या तो अंडरर चला जायेगा (सभी लड़कियों को पहले यह डर रहता है)। पर ये बात बिलकुल ही गलत है, गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्सस) का मुँह इतना छोटा होता है कि टैम्पून इसके अंदर प्रवेश नहीं कर सकता। और टैम्पून के एक सिरे पर एक छोटा धागा होता है ताकि उसे आसानी से बाहर निकाला जा सके। इस तरह आप बिना किसी डर के और झिझक के आप इसका इस्तेमाल कर सकती है।

आकार : टैम्पोन विभिन्न आकारों में आते हैं आप अपने हिसाब से बाजार से खरीद सकती है। सभी ब्रांडों के तंपन उपर से तो एक जैसे दिखते हैँ पर इस्तेमाल करने पर इनमे अंतर स्पष्ट हो जाता है। तंपन जब स्राव सोखने पर फूलते हैं तो कुछ लम्बाई मे तो वहीं कुछ चौड़ाई मे विस्तारित (बढ़ते) होते हैं। सभी तंपनों को निकालने के लिए इनसे एक डोरी जुडी़ होती है, तो वहीं कुछ मे एक अतिरिक्त बाहरी आवरण होता है जो प्रविष्टि और निकासी मे सहायता प्रदान करता है।

टैम्पोन को किस तरह प्रविष्ट कराएं?
जब आप टैम्पोन बाक्स खरीदती हैं, आपको प्रवेश कराने के लिए चित्रों के साथ निर्देश होंगे। निर्देशों और चित्रों का पालन करें।

Tempon Use, How to use Tempon, 
टैम्पोन का इस्तेमाल आपके पीरियड्स के समय ही होता है, उस समय टैम्पोन आसानी से इन्सर्ट हो जायेगा क्यों की उस समय नमी होती है आपके प्राइवेट पार्ट में, इन्सर्ट करने का सबसे सामान्य स्थिति है उकड़ू (थोड़े झुके हुए घुटनों पर खड़ा होना) और अन्य है टॉयलेट बाउल या बाथटब के ऊपरी हिस्से के ऊपर एक पैर रख कर खड़ा होना। और अन्दर फिर इन्सर्ट कर देना, ध्यान रहे की आगे का धागा बाहर हो, ताकि जब आपको निकलने की जरुरत पड़े आसानी से धागा पकड़ कर बाहर कर सकते है।

टैम्पोन को किस प्रकार हटाएं?
टैम्पोन को कभी भी 8 घंटों से अधिक नहीं छोड़ना चाहिए हो सकता है ज्यादा समय तक रखने से इन्फेक्शन हो जाये जिसे टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम (टीएसएस) कहते हैं। टीएसएस का खतरा कम करने के लिए रात में सोते समय सेनेटरी पैड का प्रयोग करना सदैव सर्वोत्तम होता है।
टैम्पोन द्वारा पर्याप्त रक्त अवशोषित करने में लगा समय मासिक प्रवाह और टैम्पोन की अवशोषण क्षमता पर निर्भर करता है। टैम्पोन को 3-4 घंटे छोड़ना चाहिए ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि इसने पर्याप्त रक्त अवशोषित कर लिया हो। पर ज्यादा समय तक नहीं रखनी चाहिए।

क्या इसके इस्तेमाल से विर्जि*निटी खत्म हो जाती है?

कुछ लड़कियों में टैम्पोन से कौमार्य खोने की चिंता होती है। उसको इस्तेमाल करने में मुख्य चिंता हायमन (पतला ऊतक जो योनि के मुंह को आंशिक रूप से ढके होता है) के फटने के बारे में होती है जिसे कौमार्य खोने का चिन्ह माना जाता है।
कौमार्य का अर्थ होता है कभी भी लैंगिक संसर्ग न करना। चूंकि टैम्पोन का प्रयोग करना संसर्ग करना नहीं होता है, आपका कौमार्य बना रहेगा।
टैम्पोन का निर्माण बहुत पतली नलिकाओं की भांति किया जाता हैं और जब निर्धारित तरीके से उनका प्रयोग न किया जाए तो वे हायमन को क्षतिग्रस्त नहीं कर सकते हैं। लेकिन एक संभावना रहती है कि टैम्पोन हायमन को क्षति पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा भी कई कारन होता है कौमार्य खोने की, जैसे खेलकूद, साइकिल चलाना, तैराकी इत्यादि,

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नीम की दातुन से दांत साफ़ करने के फायदे

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Benefits Of Neem Datun 

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दांतों को मनुष्य का अनमोल रत्न माना जाता है। इसलिए इनकी देखभाल करना भी बेहद जरुरी है। आजकल बाजार में बहुत से ऐसे प्रोडक्ट मौजूद है जो दावा करते है की इसे यूज करने के बाद आपके दांत मजबूत और चमकीले बनेंगे। लेकिन वास्तव में देखा जाए तो ये चीजें केवल परेशानी का कारण बनती है। भले ही एक दो दिन ये आपको कोई समस्या नहीं दें लेकिन लंबे समय तक प्रयोग करने के बाद होने वाले नुकसान आपके दांतों के लिए काफी दुखदायी होते है।

ये बात तो आप सभी जानते होंगे, पुराने जमाने में कोई ब्रांडेड टूथपेस्ट और मंजन नहीं हुआ करते थे लेकिन उस समय भी लोगों के दांत बुढ़ापे तक सही सलामत रहते थे। जिसका कारण उनके द्वारा यूज की जाने वाली आयुर्वेदिक चीजें हुआ करती थी। लेकिन वर्तमान में अधिकतर लोग दांतों से संबंधित समस्यायों से परेशान दिखाई पड़ते है। जिसका सीधा अर्थ ये है की दांत साफ करने के लिए गलत चीजों का इस्तेमाल बहुत नुकसानदायक हो रहा है।

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ऐसे में प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करना आपके लिए लाभकारी हो सकता है। दातुन के बारे में तो आप सभी भली-भांति जानते होंगे। क्योंकि शहरों में न सही लेकिन गावों में आज भी बहुत से लोग है जो अपने दांतों को साफ़ करने के लिए टूथपेस्ट नहीं बल्कि दातुन का प्रयोग करते है। दातुन करने से न केवल आपके दांत साफ़ होते है बल्कि उन्हें कई बिमारियों से सुरक्षा भी मिलती है।नीम की दातुन करने के labh

दातुन करने से केवल दांत ही नहीं अपितु आपको जीभ भी अच्छी तरह साफ़ होती है और उस पर मौजूद कीटाणु भी नष्ट हो जाते है। लेकिन आजकल के ब्रांडेड टूथपेस्ट के समक्ष कोई भी व्यक्ति इसे पूछता तक नहीं। क्योंकि वे इसे केवल समय की बर्बादी और पेड़ का तना ही समझते है। जबकि वे नहीं जानते की ये पेड़ का तना भी उनके दांतों के लिए कितना लाभकारी है। यहाँ हम आपको दातुन करने के कुछ फायदों के बारे में बताने जा रहे है। जिन्हें जानकर हो सकता है आप भी इस प्राकृतिक वस्तु का इस्तेमाल करने लगें।

आयुर्वेद के अनुसार दांतों के लिए वरदान है दातुन :-

आयुर्वेद के अनुसार अर्क, न्यग्रोध, खदिर, करज्ज, नीम बाबुल आदि के पेड़ों के तने से दातुन करने के लिए कहा जाता है। इस वेद के मुताबिक, मुंह को कफ की सबसे बड़ा वजह माना जाता है। जब आप रात्रि के बाद सुबह जागते है तो आपके मुंह में कफ जमा हो जाता है जिसमे कई बैक्टीरिया और हानिकारक विषाणु भी होते है। इन विषाणुओं को समाप्त करने के लिए नियमित रूप से दातुन करने की सलाह दी जाती है।

जिसमे सबसे अधिक महत्व नीम की दातुन को दिया जाता है। क्योंकि इससे न केवल आपके दन्त स्वस्थ होते है अपितु आपकी पाचन क्रिया भी सुधरती है और आपके फेस पर एक नया ग्लो भी आता है। इसलिए आज भी बहुत से लोग नीम की दातुन का इस्तेमाल दांत साफ़ करने के लिए करते है।

टूथपेस्ट से बेस्ट होता है दातुन :-नीम की दातुन

आजकल बाजार में मिलने वाले अधिकतर टूथपेस्ट को बनाने में केमिकल का इस्तेमाल किया जाता जो दांतों को साफ करते है। लेकिन मसूड़ों तक पहुंचने के बाद ये टूथपेस्ट काफी नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा कई बच्चे टूथपेस्ट निगल भी लेते है जो उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।

जबकि दातुन न केवल आपको दांतों की सफाई करता है अपितु आपकी जीभ को भी बैक्टीरिया मुक्त करता है। साथ ही यह मसूड़ों से संबंधित समस्यायों को भी दूर करता है। और गलती से आप अगर इसके रस को निगल भी लें तो उसका स्वास्थ्य पर कोई बुरा प्रभाव भी नहीं होता।

नीम की दातुन करने के क्या-क्या फायदे होते है?

दांतों को साफ़ करने के लिए सबसे अधिक नीम की दातुन का ही इस्तेमाल किया जाता है। ये न केवल आपके दांतों को स्वस्थ बनाती है। बल्कि आपके स्वास्थ्य के लिए बभी अच्छी होती है। इसके फायदे कुछ इस प्रकार है –

1. दांतों का पीलापन :

नियमित रूप से नीम की दातुन करने से दांतों का पीलापन दूर किया जा सकता है। आज के समय में अधिकतर लोगों के दांतों पीले नजर आते है। ऐसे में अगर आप नीम की दातुन करते है तो आपके दांतों का पीलापन दूर हो जाएगा साथ ही वे सफ़ेद, मजबूत और चमकदार बनेंगे।

2. मुंह के छालें :

नीम में मौजूद एंटी माइक्रोबियल गुण और एंटी ओक्सिडेंट तत्व मुंह के छालों को ठीक करने में मदद करते है। ये मुंह में मौजूद सभी बैक्टीरिया को समाप्त करते समस्या को दुबारा पनपने नहीं देते।

3. फेस की कसरत :

अक्सर अपने देखा होगा की ब्रश तो आप सामान्य रूप से करते है लेकिन जब दातुन किया जाता है तो दांतों की सफाई के साथ साथ आपके फेस की भी कसरत होती है। जिससे फेस की नियमित एक्सरसाइज होती रहती है। ऐसे में आपका फेस सुन्दर और स्लिम भी बनता है।

4. दांतों का दर्द :dant me dard

नीम की दातुन से निकलने वाला रस न केवल दांतों की समस्यायों को दूर करता है अपितु आपके दांतों के दर्द को भी ठीक करता है। इसमे मौजूद एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल और एंटी वायरल गुण दांतों की नसों को आराम दिलाकर दर्द ठीक करने में मदद करते है। साथ ही इससे मसूड़े भी मजबूत होते है। नीम की दातुन करने से बुढ़ापे तक दांतों को स्वस्थ रखा जा सकता है।

5. दांत में कीड़ा :

चॉकलेट आदि खाने की वजह से अक्सर छोटे बच्चों के दांतों में कीड़ा लग जाता है। जिसकी वजह से दांतों में तो दर्द होता ही है साथ-साथ खाने पीने में भी समस्याएं होने लगती है। ऐसे में यदि आप अपने बच्चे को नियमित रूप से नीम की दातुन कराते है तो उसके दांतों में कीड़ा नहीं लगेगा। और वे अच्छी तरह से साफ़ होंगे। इस दातुन से मुंह में मौजूद कीटाणु भी समाप्त हो जाएँगे।

6. सांसों की बदबू :

अक्सर खाने पीने या किसी अन्य कारण की वजह से सांसों से बदबू आने लगती है। ऐसे में यदि आप नियमित रूप से नीम का दातुन का इस्तेमाल करते है तो आपके मुंह से कभी बदबू नहीं आएगी। और आपकी सांसे फ्रेश और ताजगी भरी रहेंगी।

7. सेंसिटिविटी :

दांतों में सेंसिटिविटी होना आज के समाज की आम समस्या बनता जा रहा है। इए में अगर आप नीम की दातुन का इस्तेमाल करते है तो आपके दांतों से सेंसिटिविटी हमेशा के लिए दूर हो जाएगी और आपके दांत स्वस्थ और अच्छे रहेंगे।

तो ये थे नीम के कुछ फायदे जिन्हें जानकार आप भी इस प्राकृतिक देन का इस्तेमाल करने के बारे में जरुर सोचेंगे। एक बात और, नीम की दातुन को हमेशा ताजा तोड़कर ही प्रयोग में लाना चाहिए। स्वाद में यह काफी कडवा होता है तो छोटे बच्चों को इस्तेमाल कराते समय विशेष ध्यान रखें।

प्रेग्नेंट महिला सैनिटाइज़र इस्तेमाल कर रही है तो इन बातों का ध्यान रखें

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपने हाथों की साफ सफाई का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि कोई भी कीटाणु महिला के हाथों के माध्यम से ही महिला के शरीर में प्रवेश करता है। और यदि ऐसा होता है तो इसके कारण केवल गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी संक्रमण होने का खतरा रहता है।

ऐसे में हाथों की साफ़ सफाई के लिए प्रेग्नेंट महिला यदि सैनिटाइज़र का इस्तेमाल कर रही है तो महिला को बहुत सी बातों का ध्यान रखने की जरुरत होती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करते समय किन -किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

यदि केमिकल से एलर्जी है तो न करें इस्तेमाल

प्रेगनेंसी के दौरान केमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल न करने की सलाह दी जाती है। और सैनिटाइज़र को बनाने के लिए केमिकल व् अल्कोहल का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला को केमिकल का इस्तेमाल करने से कोई परेशानी या स्किन को कोई एलर्जी होती है तो महिला को सैनिटाइज़र का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। साथ ही यदि आपको सैनिटाइज़र से कोई दिक्कत नहीं है लेकिन प्रेगनेंसी में इसका इस्तेमाल करने से आपको एलर्जी हो गई है तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

सुगंध से दिक्कत है तो सैनिटाइज़र का न करें इस्तेमाल

कुछ गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी में गंध से भी एलर्जी होती है ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला को सैनिटाइज़र की गंध से किसी भी तरह की दिक्कत होती है। तो महिला को सैनिटाइज़र का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

सैनिटाइज़र लगाते ही न जाएँ गैस के पास

प्रेग्नेंट महिला यदि सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करती है तो ऐसे में सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करते ही महिला को तुरंत गैस के पास नहीं जाना चाहिए। क्योंकि सैनिटाइज़र बनाने के लिए अल्कोहल का इस्तेमाल किया जाता है ऐसे में गैस या अन्य किसी जलने वाली चीज के पास जाने से महिला को जलन महसूस होती है।

सैनिटाइज़र लगाते ही मुँह या आँखों को न छुएं

प्रेग्नेंट महिला को सैनिटाइज़र लगाते ही अपनी आँखों या मुँह को नहीं छूना चाहिए। क्योंकि केमिकल से बना होने के कारण यह आपकी आँखों व् स्किन को नुकसान पहुंचाता है।

पानी और साबुन है सबसे आसान तरीका

गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला को सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करते समय इतनी बातों का ध्यान रखना पड़ता है साथ ही इसके कारण महिला को दिक्कत होने का खतरा भी रहता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करने की बजाय साबुन व् पानी से बार बार हाथ धोने चाहिए। इससे महिला के हाथ भी साफ़ हो जाते हैं और महिला को कोई दिक्कत भी नहीं होती है।

तो यह हैं कुछ बातें जो प्रेग्नेंट महिला को सैनिटाइज़र लगाते समय ध्यान रखनी चाहिए, और यदि ऐसी कोई परेशानी नहीं हो इसके लिए महिला को बार बार पानी व् साबुन से हाथ धोते रहना चाहिए ऐसा करने से भी हाथों की साफ़ सफाई को बरकरार रखने में मदद मिलती है। और माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

पीठ पर काले-काले दाग होने के कारण और उपाय

पीठ पर काले धब्बे

कील मुहांसे की समस्या केवल चेहरे पर ही नहीं बल्कि बॉडी के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिल सकती है, जैसे की कई बार पीठ पर कील मुहांसे अधिक हो जाते हैं। जो काले काले दाग के रूप में दिखाई देते हैं, वैसे तो इस समस्या का होना आम बात होती है। लेकिन यदि यह दाने आदि के रूप में होते हैं तो इनके कारण दर्द, दानों में से पानी निकलने की समस्या भी हो सकती है। पीठ पर काले दाग होने का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि इसके कई कारण हो सकते हैं। और यह समस्या महिला या पुरुष किसी को भी हो सकती है तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की पीठ पर काले दाग होने के क्या कारण हो सकते हैं और किस प्रकार इस परेशानी से निजात पाया जा सकता है।

पीठ पर काले दाग होने के कारण

  • बॉडी में हार्मोनल असंतुलन होने के कारण यह परेशानी हो सकती है।
  • एंटी बायोटिक दवाइयों का सेवन करने के कारण भी कील मुहांसे की समस्या हो सकती है।
  • धूल प्रदूषण के कारण डेड स्किन इक्कठी होने लगती है जिसके कारण स्किन के रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और स्किन पर कील मुहांसे, दाग धब्बो की समस्या हो सकती है।
  • रोम छिद्र बंद होने के कारण स्किन में ब्लड सर्कुलेशन भी अच्छे से नहीं होता है जिसके कारण कील मुहांसे यानी काले दाग हो सकते हैं।
  • जिन महिला या पुरुष को कब्ज़ की समस्या अधिक रहती है उनकी स्किन पर भी यह परेशानी हो सकती है।
  • बहुत अधिक पसीना आने के कारण भी कील मुहांसे की समस्या अधिक हो सकती है।
  • चाय कॉफ़ी का सेवन अधिक मात्रा में करने के कारण भी यह परेशानी हो सकती है।
  • जिन लोगो की स्किन तेलीय होती है उन्हें स्किन से जुडी इस परेशानी का सामना अधिक करना पड़ सकता है।
  • ज्यादा तेल, मसालें, जंक फ़ूड का अधिक सेवन करने से भी यह समस्या हो सकती है।

पीठ पर काले धब्बों को दूर करने के उपाय

यदि आपको भी पीठ पर काले धब्बे होने की समस्या है तो आपको इसके लिए बिल्कुल भी परेशान होने की जरुरत नहीं है। क्योंकि आप आसानी से कुछ तरीको का नियमित इस्तेमाल करके इस समस्या से निजात पा सकते हैं। तो लीजिये अब जानते हैं की पीठ के काले धब्बों को दूर करने के वह टिप्स कौन से हैं।

एलोवेरा जैल

एलोवेरा जैल स्किन की कोमलता और चमक को बढ़ाने के साथ दाग धब्बों, कील मुहांसे की समस्या से निजात दिलाने में भी मदद करता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एलोवेरा के ताजे पत्ते में से जैल को निकालकर उसमे आधे टमाटर को पीस कर अच्छे मिलाएं और उसे अपनी पीठ पर लगाएं और थोड़ी देर सूखने के लिए छोड़ दें। उसके बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके अच्छे से अपनी पीठ को साफ़ करें। ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें आपको इसका असर जरूर दिखाई देगा।

मुल्तानी मिट्टी

मुल्तानी मिट्टी स्किन से निकलने वाले तेल को सोखकर रोमछिद्रों को खोलने में मदद करती है जिससे स्किन को बेहतर तरीके से पोषण पहुंचाकर स्किन से जुडी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप मुल्तानी मिट्टी को पीसकर उसमे पानी मिलाकर एक पतला पेस्ट तैयार करें। उसके बाद किसी की मदद से इसे अच्छे से अपनी पीठ पर लगवाएं और सूखने के लिए छोड़ दें, सूखने के बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके इसे अच्छे से साफ़ कर दें।

प्याज़

एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी बैक्टेरियल गुणों से भरपूर प्याज का इस्तेमाल करने से भी पीठ पर होने वाले काले दाग की समस्या से आसानी से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए प्यास को पीसकर उसका रस निकाल लें, उसके बाद इसके थोड़ा सा निम्बू का रस और शहद मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें। अब इसे अपनी पीठ पर अच्छे से लगाएं और आधे घंटे के लिए छोड़ दें। उसके बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके इसे साफ कर दें, इससे डेड स्किन को हटाने में मदद मिलने के साथ रोमछिद्रों को खोलने में भी मदद मिलती है जिससे पीठ पर होने वाले काले दाग की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

खीरा

खीरे का इस्तेमाल करने से भी पीठ पर होने वाली काले दाग की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप खीरे को कदूकस कर लें। अब इसे पीठ पर लगाएं, और थोड़ी देर के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दें। इससे स्किन को हाइड्रेट रहने में मदद मिलेगी और रोमछिद्र खुलेंगे।

स्क्रब

पीठ की स्किन थोड़ी टफ होती है ऐसे में पीठ पर होने वाली काले दाग की समस्या से बचने के लिए हफ्ते में कम से कम बार एक स्क्रब जरूर करवानी चाहिए। ऐसा करने से डेड स्किन इक्कठी नहीं होती है, रोमछिद्रों को खोलने में मदद मिलती है, स्किन की कोमलता को बरकरार रहने में मदद मिलती है, साथ की कील मुहांसे, दाग धब्बे जैसी परेशानी से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

गुलाबजल और निम्बू

निम्बू और गुलाबजल को बराबर मात्रा में मिलाएं, अब इसमें थोड़ा सा ग्लिसरीन भी मिक्स करें। अब इन तीनों को अच्छे से मिक्स करने के बाद रात को सोने से पहले अपनी पीठ पर लगाकर सो जाएँ। और सुबह उठकर ताजे पानी से नहाएं। ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें यह उपाय पीठ पर होने वाले काले दाग को दूर करने के साथ पीठ की स्किन की कोमलता को बरकरार रखने में मदद करता है।

जायफल

एक चम्मच जायफल का पाउडर लेकर उसमे कच्चा दूध मिलाएं और अब इसे अच्छे से मिक्स करके एक पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को पीठ पर पर अच्छे से लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद ताजे पानी का इस्तेमाल करके इसे साफ़ कर लें। इस उपाय को करने से भी पीठ पर होने वाले काले दाग की समस्या से निजात पाने में आपको मदद मिलती है। इससे काले दाग को दूर करने के साथ स्किन में निखार आने में भी मदद मिलती है।

दालचीनी

एक चम्मच दालचीनी में पुदीने के पत्तों का रस मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें अब इस पेस्ट को अच्छे से मास्क की तरह पीठ पर लगाएं और उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद ताजे पानी का इस्तेमाल करके इसे धो दें। ऐसा करने से भी पीठ पर होने वाले काले दाग की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ तरीके जिनका इस्तेमाल करने से पीठ पर होने वाले काले धब्बों की समस्या से आसानी से निजात पाने में मदद मिलती है। तो यदि आपको भी यह परेशानी है तो आप भी इन टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।