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चेहरे की झुर्रियां हटाने के इलाज आपकी किचन में हैं

चेहरे पर लाइन्स आने का मुख्य कारण होता है, आपकी त्वचा का ढीला होना, जिसके कारण आपको झुर्रियों का सामना करना पड़ता है, और यदि यह उम्र से पहले हो जाएँ तो आप भी उम्र से पहले ही बूढ़े दिखने लगते है, और यह समस्या केवल आपके चेहरे पर ही नहीं बल्कि हाथों, पैरों, और गले पर भी होने लगती है, चेहरे पर होने वाली झुर्रियों के बहुत से कारण हो सकते है जैसे की आधी धूम्रपान करना, अपनी डाइट का ध्यान न रखना, धूल मिट्टी प्रदूषण, स्किन की अच्छे से केयर न करना, या हॉर्मोन में असंतुलन होने के कारण आपको इन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

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jhurriya

चेहरे पर झुर्रियों से निजात पाने के लिए अजा कल मार्किट में बहुत से उत्पाद भी आ गए है, परन्तु महंगे होने के साथ कई बार वो इतनी तेजी से आपके चेहरे पर असर नहीं कर पाते है, जितनी तेजी से उन्हें करना चाहिए, तो आइये आज हम आपको आपके घर की किचन में ही मौजूद कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताते है जिनसे आप झुर्रियों की समस्या से राहत पा सकते है, लेकिन ये एक ही बार में अपना असर नहीं दिखाएंगे, कुछ दिनों तक आपको इन्हे नियमित करना चाहिए उसके बाद खुद ही आपको इसका असर दिखाई देगा, तो आइये जानते है की झुर्रिया हटाने के लिए वो चीजें कौन सी हैं ।

झुर्रियां होने के क्या क्या कारण होते है:-

  • धूप में अधिक घूमने के कारण आपको झुर्रियां हो सकती है।
  • उम्र अधिक होने पर भी आपकी स्किन ढीली पड़ने लगती है जिससे आपको झुर्रियां हो सकती है।
  • अच्छे से स्किन की केयर न करने के कारण आपको त्वचा सम्बन्धी इस समस्या का सामना करना पड़ता है।
  • शरीर में विटामिन डी और सी की कमी होने पर आपको इस समस्या का सामना करना पड़ता है।
  • स्किन को स्वस्थ रहने के लिए भी पोषण की जरुरत होती है यदि उसे वो नहीं मिलता है तो भी आपको झुर्रियों की समस्या का सामना करना पड़ता है।
  • जो लोग धूम्रपान अधिक करते है उन्हें झुर्रियां जल्दी होने लगती है।
  • अधिक तनाव भी झुर्रियों का कारण होता है।
  • अधिक प्रदूषण, त्वचा को ज्यादा रगड़ने या कई ब्यूटी प्रोडक्ट्स के साइड इफ़ेक्ट के कारण आपको ये समस्या हो सकती है।

झुर्रियां हटाने के लिए टिप्स:-

दूध से बनाएं फेस पैक का इस्तेमाल करें:-

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इस पैक को तैयार करने के लिए आप दो चम्मच मसूर की डाल का आटा, आधा चम्मच हल्दी, और उसे मिक्स करने के लिए बराबर मात्रा में कच्चे दूध और पानी का इस्तेमाल करें, और अच्छे से मिक्स करके एक पेस्ट तैयार करें, और उसके बाद इसे अपने चेहरे पर गर्दन पर अच्छे से लगाएं, और सूखने के बाद ठन्डे पानी की मदद से इसे धो दें, हफ्ते में एक या दो बार इसे कुछ दिनों तक लगाएं, झुर्रियां खत्म होने के साथ इसकी मदद से आपके चेहरे पर ग्लो आने में भी मदद मिलेगी।

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ताज़ी मलाई का इस्तेमाल करें:-

ताज़ी मलाई का इस्तेमाल निम्बू के रस के साथ करने पर आपको झुर्रियों से निजात पाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप दो चम्मच ताज़ी मलाई में कुछ बुँदे निम्बू के रस की मिलाएं, और इसे अच्छे से मिक्स करके अपने चेहरे पर लगाएं, और पंद्रह से बीस मिनट तक लगे रहने के बाद इसे गुनगुने पानी से धो दें, से आपको चेहरे की त्वचा को टाइट करने में मदद मिलेगी, जिससे आपको झुर्रियों से निजात मिलेगा।

अंडे का इस्तेमाल करें:-

चेहरे को झुर्रियों से निजात दिलाने के लिए अंडा भी एक उत्तम उपाय है, अंडे की जर्दी को अच्छे से फैट कर अपने चेहरे, गर्दन, हाथ पैर कहीं पर भी लगा सकते है, और उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें, उसके बाद साफ़ पानी से इसे साफ कर दें, हफ्ते में दो बार इस उपाय को करने से आपकी स्किन को टाइट होने और आपके चेहरे को झुर्रियों से निजात पाने में मदद मिलती है।

टमाटर का इस्तेमाल करें:-

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टमाटर का इस्तेमाल करने से न केवल आप झुर्रियों से निजात पा सकते हैं, बल्कि इससे आपकी स्किन को टोन को भी बेहतर बनने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप टमाटर के गुद्दे को निकाल कर पीस लें, या फिर टमाटर की स्लाइसेस काट कर अच्छे से अपनी झुर्रियों पर मसाज करें, और उसके बाद अपने चेहरे को साफ़ पानी से धो दें, नियमित इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपको असर जरूर दिखाई देगा, क्योंकि टमाटर में एंटी एजिंग के गुण होते हैं, और साथ ही आपको गोरापन पाने में भी मदद मिलेगी।

पपीते का इस्तेमाल करें:-

पके हुए पपीते को अच्छे से पीस कर एक पेस्ट तैयार करें, उसके बाद उस पेस्ट को अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं, और इससे दो मिनट तक मसाज करने के बाद कम से कम बीस मिनट तक इसे अपने चेहरे पर लगे रहने दें, और उसके बाद पानी से मुँह धो लें, ऐसा करने से आपकी स्किन से सभी दाग धब्बो को हटाने और आपको झुर्रियों की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।

नारियल तेल का इस्तेमाल करें:-

चेहरे पर होने वाली झुर्रियों की समस्या से निजात पाने के लिए आप नारियल के तेल का इस्तेमाल भी कर सकती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप नारियल तेल को गुनगुना करके अच्छे से अपने चेहरे की मसाज करें, और ऐसा नियमित करें, थोड़े ही दिनों में आपके चेहरे पर कसाव आने लगेगा, साथ ही आपकी स्किन को मुलायम होने में मदद मिलेगी जिससे आपके चेहरे को झुर्रियों से राहत पाने में भी मदद मिलेगी।

एलोवेरा का इस्तेमाल करें:-

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एलोवेरा हर एक घर में बहुत ही आसानी से मिल जाता है, और साथ ही यह आपकी स्किन के लिए, बालों के लिए बहुत फायदेमंद भी होता है, और कई लोग तो इसका सेवन अपने आप को स्वस्थ रखने के लिए भी करते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप नियमित एलोवेरा के पत्ते को तोड़कर उसके ताजे जैल को अपने चेहरे पर लगाएं, और अच्छे से मसाज करें, मसाज करने के बाद इसे अपने चेहरे पर सूखने के लिए छोड़ दें, सूखने के बाद ठन्डे पानी से अपने चेहरे को धो लें, ऐसा करने से आपके चेहरे से झुर्रियों के साथ दाग धब्बो, झाइयां आदि की समस्या को दूर होने के बाद आपकी स्किन की ख़ूबसूरती को भी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

अनानास का इस्तेमाल करें:-

अनानास का इस्तेमाल करने से भी आपके चेहरे से झुर्रियों को हटाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप अनानास के गुद्दे को पीसकर अपने चेहरे पर लगाएं, और उससे अपने चेहरे की मसाज करें, उसके बाद पानी की मदद से अपने चेहरे को धो लें, इससे आपके चेहरे को धीरे धीरे झुर्रियों से राहत पाने में मदद मिलती है।

झुर्रियां हटाने के अन्य उपाय:-

  • धूम्रपान करने से आपके चेहरे पर झुर्रियां आने लगती है, इसीलिए यदि आप इससे निजात पाना चाहते है तो धूम्रपान न करें।
  • चने और सोया बीन्स का सेवन करने से आपको झुर्रियों से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • योगा और मैडिटेशन करने से आपको अपनी एजिंग के लक्षणों को खत्म करने में मदद मिलती है।
  • झुर्रियों की समस्या से राहत पाने के लिए दूध का सेवन भरपूर करें, इससे आपकी हड्डियां भी मजबूत होती है।
  • शहद, मलाई और जैतून का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं इससे भी आपको अच्छा असर देखने को मिलता है।
  • खट्टे फलों का सेवन भरूर करने से भी आपको झुर्रियों से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • कच्चे दूध को रुई की मदद से तीन से चार बार अपने चेहरे पर लगाएं, इससे भी आपको इस समस्या से राहत मिलती है साथ ही त्वचा की रंगत में भी निखार आता है।
  • अनानास के गुद्दे की चेहरे पर मसाज करने से आपको झुर्रियों से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • तनाव होने के कारण भी आपको ये समस्या हो सकती इसीलिए हमेशा जवान रहने और झुर्रियों से राहत पाने के लिए हमेशा खुश रहना चाहिए।
  • नियमित अपनी डाइट में गाजर के जूस को शामिल करें, इससे भी आपको झुर्रियों से राहत पाने में मदद मिलती है।

तो ये कुछ उपाय हैं, जिनका इस्तेमाल करके आप चेहरे पर होना वाली झुर्रियों की समस्या से निजात मिल सकता है, इसके अलावा आपको अपने खान पान का अच्छे से ध्यान देना चाहिए, फलों का सेवन करना चाहिए, पानी को भरपूर लेना चाहिए, स्किन को अच्छे से मॉइस्चराइज करना चाहिए इससे आपकी स्किन को हमेशा चमकदार बने रहने और जवान दिखने में मदद मिलती है।

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प्रेगनेंसी में खरबूजा खाने के नुकसान

खरबूजा एक मौसमी फल है जो गर्मियों में खाया जाता है। स्वादिष्ट होने के साथ पोषक तत्वों से भी यह भरपूर होता है। और यह पोषक तत्व आपको स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। साथ ही खरबूजे में मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं। जैसे की प्रेगनेंसी में खरबूजा खाने से गर्भवती महिला को एनीमिया, कब्ज़, शरीर में पानी की कमी, आदि की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

साथ ही गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास के लिए भी खरबूजे का सेवन फायदेमंद होता है। क्योंकि खरबूजे से बच्चे के विकास के लिए भी सभी जरुरी पोषक तत्व मिलते हैं। लेकिन जरुरत से ज्यादा यदि गर्भवती महिला खरबूजे का सेवन करती है तो इसके कारण गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी नुकसान भी होते हैं। तो आज इस आर्टिकल में खरबूजा खाने के कारण गर्भवती महिला को क्या परेशानियां हो सकती है उस बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में होता है शुगर का खतरा

खरबूजा स्वाद में बहुत मीठा होता है ऐसे में बहुत अधिक मात्रा में खरबूजे का सेवन करने से ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ सकता है। जिसकी वजह से प्रेग्नेंट महिला को गर्भावस्था के दौरान शुगर होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

यूरिन आने की समस्या बढ़ सकती है

खरबूजे में पानी की मात्रा मौजूद होती है जो बॉडी को हाइड्रेट रखने में मदद करती है। लेकिन खरबूजे का अधिक सेवन करने से बॉडी में पानी की मात्रा बढ़ने के कारण बार बार यूरिन आने की समस्या भी हो जाती है। जिसकी वजह से विषैले तत्वों के साथ बॉडी से जरुरी न्यूट्रिएंट्स भी बाहर निकल जाते हैं। और गर्भवती महिला को कमजोरी महसूस हो सकती है।

पेट सम्बन्धी परेशानी

यदि महिला कटा पड़ा खरबूजा, बासी खरबूजा, जरुरत से ज्यादा खरबूजे का सेवन करती है। तो इसके कारण पेट में गैस, उल्टी, दस्त जैसी परेशानियों का सामना प्रेग्नेंट महिला को करना पड़ सकता है।

सूजन की समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान वजन बढ़ने के कारण गर्भवती महिला को सूजन की समस्या हो सकती है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला खरबूजे का सेवन जरुरत से ज्यादा करती है तो गर्भवती महिला की यह परेशानी बढ़ सकती है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो गर्भवती महिला को खरबूजे का सेवन करने के कारण हो सकते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को जितना हो सके इन परेशानियों से बचने के लिए सिमित मात्रा में और ताजे खरबूजे का ही सेवन करना चाहिए।

 

Jirna Griha Pravesh



अगर आप पुराने घर को नए तरीका से बनवाकर उसमें गृह प्रवेश करने वाले है तो उसके लिए भी सही मुहूर्त का होना बहुत जरुरी होता है। हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य के लिए मुहूर्त देखने का विधान है। जीर्ण गृह प्रवेश करने के लिए भी शुभ मुहूर्त देखना अति आवश्यक हो जाता है, जब भविष्य में आने वाली सभी खुशिया आपके सही मुहूर्त पर किये गए गृह प्रवेश पर निर्भर करती हो।

जीर्ण गृह प्रवेश करने के लिए मुहूर्त मुहूर्त-चक्र की हिसाब से निकलवाना चाहिए। मुहूर्त चक्र में शुभ तिथि, शुभ वार, शुभ नक्षत्र, शुभ माह आदि इन सभी बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ताकि आने वाले भविष्य में घर में सुख, शान्ति, बरकद व धन दौलत का हमेशा वास रहे।

कैसे करें जीर्ण गृह प्रवेश के मुहूर्त का चयन ? How to Choose Auspicious Date for Renovated Griha Pravesh ?

जीर्ण गृह प्रवेश करने से पूर्व, गृह स्वामी के अनुसार ही मुहूर्त निकालने चाहिए। गृह स्वामी की कुंडली को देख कर ही नक्षत्र और मुहूर्त चक्र के अनुसार गृह प्रवेश के लिए तिथि का चयन करें।

अशुभ तिथि या बिना मुहूर्त के जीर्ण गृह प्रवेश करने पर क्या होता है ? What Happen When We Take Entry in Renovated House Without Muhurat ?

कई बार ऐसा देखा गया है के लोग बिना देखे, बिना शुभ दिन देखे या किन्ही के द्वारा गलत मुहूर्त देने पर गृह प्रवेश कर लेते है। गलत मुहूर्त या बिना मुहूर्त के किये गए गृह प्रवेश में बाधा उत्पन्न होती है समय पर कोई भी कार्य पूरा नहीं होता या कई सारी अड़चने आती है, परिवारिक सुख शांति नहीं रहती। भविष्य में घर में कलह कलेश का वास होने की भी शंका रहती है।

कब करें जीर्ण गृह प्रवेश 2020 के महीनो में ? When to Do Entry in Renovated House in 2020 ?

आप 2020 के इन तिथियों में, नक्षत्रो में जीर्ण गृह प्रवेश कर सकते है। ये मुहूर्त मुहूर्त चक्र के अनुसार है। जीर्ण गृह प्रवेश कब करें 2020 में, जीर्ण गृह प्रवेश का शुभ महीना, शुभ मुहूर्त, हिन्दू पंचांग और मुहूर्त चक्र के अनुसार है। अगर आप मुहूर्त गृह स्वामी के अनुसार निकालना चाहते है तो आप संपर्क करें ताकि आपका कार्य भी किसी अड़चन के बिना सफल हो और घर में अपार खुशिया मिले।

जीर्ण गृह प्रवेश की तिथियां – Jirna Griha Pravesh Muhurat Date 2020

जनवरी 2020 जीर्ण गृह प्रवेश के शुभ मुहूर्त-Auspicious Dates for Jirna Griha Pravesh in January 2020

  • दिनांक 2 जनवरी 2020, दिन गुरूवार, तिथि सप्तमी, नक्षत्र उत्तराभाद्रपद
  • दिनांक 3 जनवरी 2020, दिन शुक्रवार, तिथि अष्ठमी, नक्षत्र रेवती
  • दिनांक 8 जनवरी 2020, दिन बुधवार, तिथि त्रयोदशी, नक्षत्र रोहिणी
  • दिनांक 15 जनवरी 2020, दिन बुधवार, तिथि पंचमी, नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी
  • दिनांक 17 जनवरी 2020, दिन शुक्रवार, तिथि सप्तमी, नक्षत्र चित्रा
  • दिनांक 20 जनवरी 2020, दिन सोमवार, तिथि एकादशी, नक्षत्र अनुराधा
  • दिनांक 27 जनवरी 2020, दिन सोमवार, तिथि तृतीया, नक्षत्र घनिष्ठा
  • दिनांक 29 जनवरी 2020, दिन बुधवार, तिथि चतुर्थी, नक्षत्र उत्तराभाद्रपद
  • दिनांक 30 जनवरी 2020, दिन गुरूवार, तिथि पंचमी, नक्षत्र उत्तराभाद्रपद
  • दिनांक 31 जनवरी 2020, दिन शुक्रवार, तिथि षष्ठी, नक्षत्र रेवती

फरवरी 2020 जीर्ण गृह प्रवेश की शुभ तिथियां- Jirna Griha Pravesh Muhurats in February 2020

  • दिनांक 5 फरवरी 2020, दिन बुधवार, तिथि एकादशी, नक्षत्र मृगशिरा
  • दिनांक 13 फरवरी 2020, दिन गुरूवार, तिथि पंचमी, नक्षत्र चित्रा
  • दिनांक 14 फरवरी 2020, दिन शुक्रवार, तिथि षष्ठी, नक्षत्र चित्रा
  • दिनांक 20 फरवरी 2020, दिन गुरूवार, तिथि द्वादशी, नक्षत्र उत्तराषाढ़ा
  • दिनांक 21 फरवरी 2020, दिन शुक्रवार, तिथि त्रयोदशी, नक्षत्र उत्तराषाढ़ा
  • दिनांक 26 फरवरी 2020, दिन बुधवार, तिथि तृतीया, नक्षत्र उत्तराभाद्रपद

मार्च 2020 जीर्ण गृह प्रवेश के शुभ मुहूर्त-Auspicious Dates for Entry in Renovated House March 2020

  • दिनांक 7 मार्च 2020, दिन शनिवार, तिथि द्वादशी, नक्षत्र पुष्य
  • दिनांक 13 मार्च 2020, दिन शुक्रवार, तिथि चतुर्थी, नक्षत्र स्वाति

अप्रैल 2020 जीर्ण गृह प्रवेश की शुभ तिथियां-Jirna Griha Pravesh Muhurats in April 2020

  • दिन 17 अप्रैल 2020, दिन शुक्रवार, तिथि दशमी, नक्षत्र घनिष्ठा
  • दिन 18 अप्रैल 2020, दिन शनिवार, तिथि एकादशी, नक्षत्र शतभिषा
  • दिन 20 अप्रैल 2020, दिन सोमवार, तिथि त्रयोदशी, नक्षत्र उत्तराभाद्रपद
  • दिन 27 अप्रैल 2020, दिन सोमवार, तिथि चतुर्थी, नक्षत्र मृगशिरा
  • दिन 30 अप्रैल 2020, दिन गुरूवार, तिथि सप्तमी, नक्षत्र पुष्य

मई 2020 जीर्ण गृह प्रवेश के शुभ मुहूर्त-Auspicious Dates for Jirna Griha Pravesh in May 2020

4 मई 2020 सोमवार एकादशी उत्तराफाल्गुनी 8 मई 2020 शुक्रवार प्रतिपदा विशाखा 9 मई 2020 शनिवार द्वितीया अनुराधा 18 मई 2020 सोमवार एकादशी उत्तराभाद्रपद 25 मई 2020 सोमवार तृतीया मृगशिरा 27 मई 2020 बुधवार पंचमी पुष्य 28 मई 2020 गुरूवार षष्ठी पुष्य

जून 2020 जीर्ण गृह प्रवेश की शुभ तिथियां-Jirna Griha Pravesh Muhurats in June 2020

  • 11 जून 2020 गुरूवार षष्ठी घनिष्ठा
  • 12 जून 2020 शुक्रवार सप्तमी शतभिषा
  • 15 जून 2020 सोमवार दशमी रेवती
  • 24 जून 2020 बुधवार तृतीया पुष्य

जुलाई 2020 जीर्ण गृह प्रवेश के शुभ मुहूर्त-Auspicious Dates for Jirna Griha Pravesh in July 2020

  • 2 जुलाई 2020 गुरूवार द्वादशी अनुराधा
  • 9 जुलाई 2020 गुरूवार चतुर्थी / पंचमी शतभिषा
  • 11 जुलाई 2020 शनिवार षष्ठी उत्तराभाद्रपद
  • 13 जुलाई 2020 सोमवार अष्ठमी रेवती
  • 17 जुलाई 2020 शुक्रवार द्वादशी रोहिणी
  • 18 जुलाई 2020 शनिवार त्रयोदशी मृगशिरा
  • 25 जुलाई 2020 शनिवार पंचमी उत्तराफाल्गुनी
  • 27 जुलाई 2020 सोमवार सप्तमी चित्रा
  • 29 जुलाई 2020 बुधवार दशमी अनुराधा
  • 30 जुलाई 2020 गुरूवार एकादशी अनुराधा

अगस्त 2020 जीर्ण गृह प्रवेश की शुभ तिथियां-Jirna Griha Pravesh Muhurats in August 2020

  • 5 अगस्त 2020 बुधवार द्वितीया घनिष्ठा / शतभिषा
  • 6 अगस्त 2020 गुरूवार तृतीया शतभिषा
  • 8 अगस्त 2020 शनिवार पंचमी उत्तराभाद्रपद
  • 13 अगस्त 2020 गुरुवार नवमी / दशमी रोहिणी
  • 14 अगस्त 2020 शुक्रवार दशमी / एकादशी मृगशिरा
  • 21 अगस्त 2020 शुक्रवार तृतीया उत्तराफाल्गुनी
  • 24 अगस्त 2020 सोमवार षष्ठी स्वाति

सितम्बर 2020 जीर्ण गृह प्रवेश के शुभ मुहूर्त-Auspicious Dates for Jirna Griha Pravesh in September 2020

  • 2 सितम्बर 2020 बुधवार पूर्णिमा शतभिषा
  • 4 सितम्बर 2020 शुक्रवार द्वितीया उत्तराभाद्रपद
  • 10 सितम्बर 2020 गुरूवार अष्ठमी रोहिणी / मृगशिरा
  • 14 सितम्बर 2020 सोमवार द्वादशी पुष्य

अक्टूबर 2020 जीर्ण गृह प्रवेश की शुभ तिथियां-Jirna Griha Pravesh Muhurats in October 2020

  • 19 अक्टूबर 2020 सोमवार तृतीया अनुराधा
  • 26 अक्टूबर 2020 सोमवार दशमी शतभिषा
  • 28 अक्टूबर 2020 बुधवार द्वादशी उत्तराभाद्रपद
  • 29 अक्टूबर 2020 गुरूवार त्रयोदशी उत्तराभाद्रपद / रेवती

नवंबर 2020 जीर्ण गृह प्रवेश के शुभ मुहूर्त-Auspicious Dates for Jirna Griha Pravesh in November 2020

  • 11 नवंबर 2020 बुधवार एकादशी उत्तराफ़ाल्गुनी
  • 12 नवंबर 2020 गुरूवार द्वादशी हस्त
  • 13 नवंबर 2020 शुक्रवार त्रयोदशी चित्रा
  • 19 नवंबर 2020 गुरूवार पंचमी उत्तराषाढ़ा
  • 21 नवंबर 2020 शनिवार सप्तमी घनिष्ठा
  • 25 नवंबर 2020 बुधवार एकादशी उत्तराभाद्रपद
  • 26 नवंबर 2020 गुरूवार द्वादशी रेवती
  • 30 नवंबर 2020 सोमवार पूर्णिमा रोहिणी

दिसंबर 2020 जीर्ण गृह प्रवेश की शुभ तिथियां-Jirna Griha Pravesh Muhurats in December 2020

  • 2 दिसंबर 2020 बुधवार द्वितीया मृगशिरा
  • 5 दिसंबर 2020 शनिवार पंचमी पुष्य
  • 10 दिसंबर 2020 गुरूवार दशमी / एकादशी चित्रा
  • 11 दिसंबर 2020 शुक्रवार एकादशी स्वाति

इन दिनों सोयाबीन खाना क्यों जरुरी है प्रेग्नेंट महिला को

गर्भावस्था में महिला को हर वो चीज खाने की सलाह देती है जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होती है। और आज कल के खान पान को देखा जाये तो लोग अपने आहार में खाने की चीजों को शामिल तो करते हैं लेकिन उनमे पोषक तत्वों की कमी होती है। जिसके कारण उन्हें बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन गर्भवती महिला खान पान में थोड़ी भी लापरवाही करे तो इसके कारण महिला की सेहत पर ही नहीं बल्कि बच्चे के विकास पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

ऐसे में दूध, दही, अंडा, दालें, नॉन वेज, हरी सब्जियां, फल आदि का भरपूर मात्रा में महिला को सेवन करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ एक और चीज हैं जो प्रेग्नेंट महिला को अपनी डाइट में जरूर शामिल करनी चाहिए और वो है सोयाबीन। सोयाबीन प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होता है। जो प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में सोयाबीन खाने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

प्रोटीन: सोयाबीन में प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है। जो गर्भवती महिला की मांसपेशियों में खिंचाव के कारण होने वाली परेशानियों को दूर करने के साथ बच्चे की मांसपेशियों के बेहतर विकास में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के साथ बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

कैल्शियम: प्रोटीन के साथ कैल्शियम की मात्रा भी सोयाबीन में मौजूद होती है। और कैल्शियम प्रेग्नेंट महिला की हड्डियों को मजबूत करने के साथ गर्भ में बच्चे की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद करता है। इसके अलावा सोयाबीन का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को थकान, कमजोरी, जैसी परेशानियों से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

शुगर रहती है कण्ट्रोल: सोयाबीन का सेवन करने से ब्लड में शुगर के लेवल को मेन्टेन रखने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को गेस्टेशनल शुगर जैसी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

हाई ब्लड प्रैशर: पोटैशियम की मात्रा भी सोयाबीन में मौजूद होती है जो प्रेग्नेंट महिला के ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने में मदद करती है। जिससे ब्लड प्रैशर के घटने या बढ़ने के कारण होने वाली परेशानी से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

आयरन: सोयाबीन का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में भी मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।

तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी सोयाबीन का सेवन जरूर करना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

रंगों का क्या महत्व है? और कौन सा रंग किसका प्रतीक है?

क्या आपने कभी रंगों के महत्व को जानने की कोशिश की है? या क्या आपने कभी सोचा है की आखिर रंगीन फूलों को देखते ही मन प्रफुल्लित क्यों हो जाता है? हरे भरे खेतों को देखकर क्यों हम अन्दर से ताजा-ताजा फील करते है? या दोस्ती की हाथ बढाने के लिए लाल गुलाब ही क्यों दिया जाता है पीला भी तो दिया जा सकता है? इन्द्रधनुष को देखने के लिए सभी इतने उत्साहित क्यों होते है? शायद नहीं क्योंकि बहुत कम लोग रंगों के महत्व को समझते है।holi skin care tips

जी हां, व्यक्ति के जीवन में रंगों का बहुत अधिक महत्व होता है। उसके कपड़ों से लेकर उसके आस पास की सभी चीजों में रंगों का सही बैलेंस होना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि रंग ही हमारे स्वाभाव और हमारे व्यवहार को बना और बिगाड़ सकते है। अगर आप गौर करेंगे तो आपने देखा होगा जो लोग भडकीले और डार्क कलर्स अधिक पसंद करते है वे स्वभाव के नक्चड़े और गुस्सैल होते है जबकि हलके और कोमल रंग पहनने वाले स्वाभाव के सरल और मितभाषी होते है।

इसके अलावा आपने देखा होगा मंदिर आदि जैसी जगहों पर धार्मिक और हलके रंग किये जाते है जबकि पब और पार्टी करने वाले रेस्तरां में भड़कीले और डार्क रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि रंग बहुत खास होते है और इनका अपने आप ही अलग महत्व और अर्थ होता है। इसलिए आज हम आपको रंगों का महत्व और किस रंग का क्या अर्थ होता है इस बारे में बता रहे है। तो आइये जानते है रंगों के बारे में …

कौन से रंग का क्या अर्थ होता है?

पीले रंग का अर्थ :

पीले रंग को प्रकाश, ज्योति (लौ) और प्रसन्नता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक रूप से भी इस रंग का खास महत्व होता है। बता दें पीले रंग को सूर्य का रंग भी कहा जाता है। इस रंग से व्यक्ति के मन में प्रकाश और ज्ञान फैलता है। यह रंग सकारात्मकता और चतुराई का संदेश भी देता है। इस रंग से व्यक्ति के विचारों में स्पष्टता आती है जिससे मन में सतर्कता बढती है। पीले रंग की मदद से मन की आध्यात्मिक उर्जा को भी बढाया जा सकता है।

वैज्ञानिक रूप से लिवर और त्वचा का रंग भी पीला होता है जिसके कारण यह शरीर में मौजूद सभी टोक्सिन्स / विषाक्त पदार्थों को दूर करने में बेहद उपयोगी होता है। ये रंग केवल सुन्दरता के लिए ही नहीं अपितु हमारे मनोभावों को भी बिना कुछ कहे व्यक्त कर देता है। स्त्रियों की काया में भी इसका खास योगदान होता है।

नारंगी रंग का अर्थ :

नारंगी रंग को राजसी एश्वर्य और वीरता का भी प्रतीक माना जाता है। इसलिए भारत के राष्ट्रिय ध्वज में भी इसका स्थान सबसे ऊपर आता है। इस रंग को खुशियों और उत्साह का प्रतीक भी माना जाता है। व्यक्ति की भावनाओं को सक्रिय करने के लिए इस रंग को बहुत प्रभावशाली माना जाता है। इसके अलावा नारंगी रंग स्वतंत्रता, ख़ुशी, ऊर्जा, सामाजिकता और सृजन का भी प्रतीक होता है।

धार्मिक रूप से भी इस रंग को बहुत शुभ माना जाता है। संत आदि महात्मा भी अपने वस्त्रों के लिए इसी रंग को चुनते है। इस रंग से वातावरण में सकारात्मकता फैलती है।

लाल रंग का महत्व :

लाल रंग को प्रेम, क्रोध और संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा हिन्दू धर्म में सुहाग का प्रतीक भी लाल रंग ही होता है। घर में किसी भी शुभ कार्य के लिए सबसे पहले लाल रंग का ही इस्तेमाल किया जाता है। फिर चाहे वो किसी के कपडे हो या पूजा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पुष्प। इसके अतिरिक्त पूजा में चढ़ाएं जाने वाले फलों में भी लाल रंग को महत्ता दी जाती है।

वैज्ञानिक दृष्टि से लाल रंग व्यक्ति के शरीर की उर्जा को प्रभावित करता है। यह रंग उत्प्रेरक, उत्तेजक और जोशीला होता है, जिसे देखते ही दिल की धड़कने तेज होने लगती है। लाल रंग को युद्ध के देवता का रंग भी कहा जाता है। खतरे और सावधानी को दर्शाने के लिए भी इसी रंग का इस्तेमाल किया जाता है क्यूंकि लाल रंग काफी अट्रेक्टिव होता है जो जिसे ऑंखें अपने आप ही ढूंढ़ लेती है। ये आँखों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इसके अलावा महिलाएं सिंदूर और लिपस्टिक के लिए भी लाल रंग का इस्तेमाल करती है क्योंकि लाल रंग सेक्स और रोमांस का भी प्रतीक होता है।

गुलाबी रंग का महत्व :

गुलाबी रंग को प्रेम और रोमांस के लिए अच्छा माना जाता है। यह रंग कोमलता और सुन्दरता का भी प्रतीक होता है। और शायद इसलिए लड़कियों को यह रंग खूब भाता है। इसके अलावा अपने दिल के करीबी और प्रेमी को देने के लिए भी गुलाबी गुलाब की चुना जाता है क्योंकि इस रंग को देखते है वातावरण में भीनी भीनी से हवा चलने लगती है। गुलाबी रंग व्यक्ति की भीतरी उर्जा का संचार करता है और उसमे नेतृत्व की भावना को जगाता है। प्यार के इजहार के लिए भी गुलाबी रंग को ही चुना जाता है।

हरे रंग का महत्व :

हरे रंग को प्रकृति और हरियाली से जोड़ा जाता है क्योंकि खेत खलिहानों से लेकर बड़े बड़े पहाड़ों तक सभी हरे रंग में समाहित होते है। वसंत ऋतू के आगमन पर पूरा धरातल हरा-भरा हो जाता है। इस महीने में खेतों में हरे-पीले फूलों को कालीन सी बिछने लगती है। चिकित्सा की दृष्टि से इसे गहरी सास का रंग माना जाता है। मेंटल स्ट्रेस और बॉडी रिलैक्सेशन के लिए भी हरे रंग को बहुत प्रभावशाली माना जाता है।

इसके लिए आप जब भी परेशान हो या निराश हो तो किसी हरियाली वाली जगह जैसे दूर तक फैले खेत, फूल आदि पर चले जाएं। 2 से 3 मिनट के भीतर आपके मन का सारा स्ट्रेस दूर हो जाएगा। साथ ही आपमें पॉजिटिव एनर्जी का भी संचार होगा। इतना ही नहीं हरा रंग व्यक्ति के जीवन में भी हरियाली भर देता है और शायद इसलिए वसंत ऋतू आने पर कई जगह पर्व मनाए जाते है।

नीला रंग का अर्थ :

समुद्र और असमान दोनों का ही रंग नीला होता है। जो आँखों को खास शांति प्रदान करता है। इसके अलावा एकता, शांति, ठंडक, वफादारी और सतर्कता का प्रतीक भी इसी रंग को माना जाता है। यह मानसिक आराम देने का भी काम करता है। चित्रों में किया गया नीला कलर उन्हें रॉयल लुक देता है। नीला रंग हमारे मूड और मनोभावों पर अच्छा व् सकारात्मक प्रभाव डालता है। पश्चिम दिशा का सूचक नीला रंग होता है जो व्यक्तियों के मन की इच्छाओं को उजागर करके उसे ज्ञान और विज्ञान से जोड़ता है। मन की शांति और शरीर की ठंडक देने के लिए नीला रंग बहुत लाभकारी होता है।

सफ़ेद रंग का अर्थ :

सफ़ेद रंग को शांति का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा एकता, शुद्धता, सत्यता और उज्ज्वलता के प्रतीक भी सफ़ेद रंग ही होता है। सफ़ेद रंग के प्रयोग से व्यक्ति के मन की सभी बुरी भवनाएँ दूर हो जाती है। इसीलिए भारत के राष्ट्रिय ध्वज में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। इस रंग को भोलेपन का भी प्रतीक माना जाता है जो मन को शांति प्रदान करता है। सफ़ेद रंग के इस्तेमाल से शरीर की आतंरिक प्रणाली का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। पूजा के कमरों में इस रंग का प्रयोग करने से निर्मलता और शीतलता आती है।

काला रंग :

धार्मिक और वैज्ञानिक रूप से भारत के अधिकतर हिस्सों में इस रंग को शुभ नहीं माना जाता। क्योंकि यह रंग हमारे मनोभावों को दूषित करता है। इस रंग को बार-बार देखने से आँखों में भ्रम की स्थिति पैदा होता है। जो लोग काले रंग का ज्यादा इस्तेमाल करते है वे बहुत जल्दी गुस्सा हो जाते है (short temper)। इसलिए इस रंग का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए।

चिकित्सा में रंगों का महत्व :

आजकल के समय में दवाओं से ज्यादा डॉक्टर वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली का इस्तेमाल करने लगे है। जिसमे व्यक्तिओं को उनके आस पास मौजूद वस्तुओं और गतिविधियों से ठीक किया जाता है। प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली में रंगों की सहायता ली जाती है। क्योंकि ये बात स्पष्ट हो चुकी है की रंग व्यक्ति के शरीर पर ही नहीं अपितु मन को भी प्रभावित करते है। रंग चिकित्सकों का मानना है की शरीर के हर अंग और प्रणाली की अपनी अलग विशेषताएं और विशेष ऊर्जा होती है जिन्हें रंगों की मदद से उत्तेजित और शिथिल किया जा सकता है। व्यक्ति अपने आस पास और अपने कपड़ों के रंगों में बदलाव करके अपने सुख और स्वास्थ्य में समृद्धि ला सकते है।


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गर्मियों में नाक से खून आने के घरेलु उपाय

नाक से खून बहने को मेडिकल टर्म्स में एपिस्टाक्सिस कहते है। गर्मियों में यह समस्या होना बहुत ही आम बात है, ज्यादातर यह समस्या नाक के ब्लड वेसल्स खराब होने होते है। वैसे नाक से ब्लीडिंग होना कोई खतरनाक बीमारी नहीं है। यह समस्या अधिकतम गर्मियों में ही होती बहुत कम लोगों को ही यह समस्या सर्दियों में होती है। गर्मियों में जब गर्म हवा सूखे हुए म्यूकस को छेड़ती है तब नाक से ब्लीडिंग होती है। वैसे तो यह प्रॉब्लम किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है फिर भी देखने में यह आता हे के यह समस्या 2 से 10 साल तक के बच्चो में और 50 से 80 साल के बड़ो में अधिक देखी जाती है।

गर्मियों की गर्म हवा हमारी नाक के लिए हानिकारक होती है और इसके अतिरिक्त गर्म लू के कारण एलर्जी होने का खतरा भी बढ़ जाता है। आइये जानते है के इस समस्या का कैसे इलाज किया जा सकता है।

नमक और पानी

गर्मियों में गर्म और शुष्क हवा के कारण हमारे म्यूकस पर असर पड़ता है जिससे नाक से ब्लीडिंग होने लगती है। इसके लिए आधा कप पानी में एक चुटकी नमक डाले और अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस मिश्रण की कुछ बूंदो अपनी नाक में डालिये इससे म्यूकस की अंदर की परत में नमी जायेगी और वह जल्दी से खराब नहीं हो पाएंगे। इस उपाय को हम सप्ताह में 2 से 3 बार अपना सकते है।

प्याज का रस

प्याज को घीस कर उसका रस निकाल लीजिये, कॉटन का छोटा सा टुकड़ा लेकर प्यास के रस में भिगो लें। इस कॉटन का इस्तेमाल उस नाक की तरफ कीजिये जहां से ज्यादा ब्लीडिंग होती है। या फिर दूसरा तरीका यह भी है के प्याज का टुकड़ा लेकर नाक के नीचे रख उसकी खुशबु को महसूस करे। इस उपाय से आपको बहुत फर्क पड़ेगा और गर्मी में जल्दी जल्दी नाक से खून नहीं आएगा।

बर्फ के टुकड़े

बर्फ का इस्तेमाल सबसे ज्यादा कारगर होता है। बर्फ का टुकड़ा लेकर नाक की सिकाई करें और जल्दी आराम के लिए बर्फ वाला पानी पिए इससे नाक से ब्लीडिंग एकदम से रुक जायेगी।

धनिया

धनिया का तेल या इसका ताजा रस निकाल कर कुछ बुँदे नाक में डाले। हो सके तो धनिये का पेस्ट बनाकर माथे पर मले। इसे धनिये की पत्तियों का ठंडापन ब्लीडिंग से तुरंत आराम दिलवाएगा।

दालचीनी

एक कप में गर्म पानी लेकर दालचीनी डाले और पूरी रात के लिए रख दें। अब इस मिश्रण में कॉटन को भिगोये और अपने नाक पर रखे। इससे नाक से ब्लीडिंग में बहुत जल्द ही आराम मिलेगा।

बेकिंग सोडा

एक कप पानी में 1/4 चम्मच बेकिंग सोडा और 1/2 चम्मच नमक डाले और अच्छे से घोल लें। इस मिश्रण को स्प्रे बोतल की मदद से नाक पर छिड़के। इस उपाय को एक दिन में कम से कम तीन बार करें। ऐसा करने से धीरे धीरे आपको इस समस्या पूरी तरह निजात मिल जाएगी।

सेब का सिरका

आधे कप पानी में थोड़ा सा सेब का सिरका डाले और इसमें कुछ बर्फ के टुकड़े भी डाले। एक छोटा सा कॉटन का टुकड़ा लेकर इस मिश्रण में भिगोये और कॉटन को अपनी नाक में रखे 5 से 10 मिनट बाद कॉटन निकाल दे। आप चाहे तो कुछ दिन तक रोजाना एक कप पानी में दो ढक्क्न सिरके के डाल कर भी उसका सेवन कर सकते है। दोनों ही तरीको से नाक से खून आना बंद हो जाता है।

ध्यान  रखिये नाक से खून अधिक गर्मी और गर्म लू के कारण आता है इसीलिए अपने आप को गर्मी से बचाकर रखे और हो सके तो ठंडी चीजों का भी सेवन करें। कभी भी अचानक हुई ब्लीडिंग को रोकने के लिए सर उल्टा कर उस पर ठंडा पानी डाल ले ब्लीडिंग बंद हो जायेगी।

प्रेगनेंसी में बादाम खाने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को एक स्वस्थ व पौष्टिक आहार की जरुरत होती है, ताकि प्रेग्नेंट महिला को गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ रहने के साथ प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानियों से भी बचाव करने में मदद मिल सके। और गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के समय जितना बेहतर तरीके से अपना ख्याल रखती है उतना ही गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। ऐसे में महिला को हरी सब्जियां, फल, सूखे मेवे, दालें आदि का सेवन करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इन सभी चीजों में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते हैं। तो लीजिये आज हम आपको पोषक तत्वों से भरपूर बादाम का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान क्या फायदे मिलते हैं इस बारे में बताने जा रहे हैं। क्योंकि बादाम का सेवन करने से न केवल गर्भवती महिला को बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी बहुत फायदा मिलता है।

ब्लड प्रैशर कण्ट्रोल करता है

मैग्नीशियम, फॉस्फोरस की मात्रा प्रचुर होने के कारण बादाम का सेवन करने से ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है, जिससे गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।

न्यूरल ट्यूब के दोष को करता है कम

न्यूरल ट्यूब में होने वाली कमी के कारण शिशु के शारीरिक विकास में कमी आने के साथ शिशु को शारीरिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है, ऐसे में बादाम का सेवन प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही करने पर इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

फोलिक एसिड होता है भरपूर

गर्भ में शिशु के बेहतर विकास और जन्म दोष से सुरक्षित रखने के साथ गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के लिए बॉडी में पर्याप्त मात्रा में फोलिक एसिड का होना बहुत जरुरी होता है। और ऐसा माना जाता है की फोलिक एसिड का सेवन जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान भरपूर मात्रा में करती हैं, उनके बच्चे दूसरे बच्चों की अपेक्षा ज्यादा स्वस्थ होते हैं।

मेटाबोलिज्म रेट बढ़ता है

प्रेगनेंसी के दौरान मेटाबोलिज्म रेट के बेहतर होने से गर्भवती महिला को पेट सम्बन्धी समस्या से बचे रहने के साथ फिट रहने में भी मदद मिलती है, क्योंकि यह वजन को कण्ट्रोल करने में मदद करता है। साथ ही इसके सेवन से पाचन क्रिया को भी बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है, जिससे खाना आसानी से पच जाता है, ऐसे में बादाम का सेवन गर्भवती महिला के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है।

प्री एक्लेम्पसिया के खतरे को करता है कम

बादाम में कैल्शियम की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिसके कारें यह प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली प्री एक्लेम्पसिया की समस्या को कम करने में मदद करता है साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों, दांत, तंत्रिका तंत्र आदि के विकास में मदद करता है। साथ ही बादाम में मौजूद एल डी एल कोलेस्ट्रॉलको भी कण्ट्रोल करता है जिससे दिल स्वस्थ रहता है।

फाइबर से होता है भरपूर

फाइबर की मात्रा बादाम में अधिक मात्रा में होती है, और प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ की समस्या से राहत पाने के लिए बादाम खाने से बहुत फ़ायदा मिलता है, क्योंकि फाइबर युक्त चीजों का सेवन करने से उन्हें भोजन को अच्छे से पचने में मदद मिलती है, जिससे कब्ज़ नहीं होने की सम्भावना होती है।

गर्भ में शिशु को एलर्जी का खतरा होता है कम

शिशु के जन्म के बाद अस्थमा या किसी अन्य तरीके की एलर्जी से शिशु को सुरक्षित रखने के लिए भी बादाम का सेवन करने से फायदा मिलता है, ऐसे में शिशु को सुरक्षित रखने के लिए भी महिला को इसका भरपूर सेवन करना चाहिए।

आयरन मिलता है

प्रेगनेंसी के समय बॉडी को फिट रहने के लिए और गर्भ में शिशु के बेहतर के लिए आयरन की मात्रा का बॉडी में भरपूर होना भी बहुत जरुरी होता है। ऐसे में बादाम का सेवन करने से गर्भवती महिला को जितनी मात्रा में आयरन की जरुरत होती है उसे बादाम का सेवन करने से पूरा करने में मदद मिलती है।

किस तरह करें बादाम का सेवन

बादाम को भिगोकर खाने से सबसे ज्यादा फायदा मिलता है, इसके लिए रात के समय थोड़े से पानी में पांच छह बादाम भिगोकर रख दें। और उसके बाद सुबह उठकर उसका छिलका उतारने के बाद उसका सेवन करें। या फिर बादाम का दूध पीना, या खीर आदि बनाकर उसमे बादाम डालकर भी उसका सेवन किया जा सकता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बादाम का सेवन करने से मिलते हैं। लेकिन बादाम का सेवन भी पर्याप्त मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि जरुरत से ज्यादा इसका सेवन करने से गर्भवती महिला को परेशानी हो सकती है। जैसे की गर्भवती महिला बादाम का ज्यादा सेवन करती है तो इसमें मौजूद वसा, कैलोरी के कारण महिला को वजन अधिक बढ़ने जैसी परेशानी हो सकती है, साथ ही इससे बॉडी में विटामिन इ की मात्रा बढ़ने के कारण पेट फूलने, सिर दर्द, डायरिया जैसी समस्या भी हो सकती है।

गर्भधारण के बाद ये करें मिसकैरिज नहीं होगा

जब किसी महिला को पता चलता है की वो माँ बनने वाली है तो उसकी खुशियों का ठिकाना नहीं रहता है। लेकिन यदि किसी कारण महिला का गर्भपात हो जाए तो इसके कारण महिला केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी टूट जाती है। ऐसे में गर्भपात जैसी समस्या से बचने के लिए महिला को प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही कुछ ऐसी बातों का खास ध्यान रखना चाहिए जिससे महिला को गर्भपात जैसी परेशानी से बचाव करने के साथ प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स से बचे रहने में भी मदद मिल सके। साथ ही महिला को गर्भपात के सभी लक्षणों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि यदि थोड़ी सी भी परेशानी हो तो उसी समय इलाज करके गर्भपात जैसी परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके।

गर्भ ठहरने के बाद ये करें गर्भपात नहीं होगा

जैसे ही महिला पीरियड्स के मिस होने के बाद घर में प्रेगनेंसी टेस्ट करती है, और उसका परिणाम पॉजिटिव आता है। उस समय से ही महिला को कुछ ऐसी बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे महिला को गर्भपात जैसी परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भधारण के बाद वो कौन सी बातें हैं जिनका ध्यान रखने से गर्भपात के खतरे से बचे रहने में मदद मिलती है।

डॉक्टर से मिलें

प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद आपको सबसे पहले एक अच्छे से डॉक्टर का चुनाव करना चाहिए और उससे जाकर मिलना चाहिए। साथ ही यदि आपको कोई शारीरिक परेशानी है, या आपकी कोई मेडिकल हिस्ट्री है तो उन सभी रिपोर्ट्स को अपने साथ लेकर जाना चाहिए। ताकि डॉक्टर को आपकी कंडीशन को समझने में आसानी हो और जल्दी से जल्दी आपका प्रेगनेंसी का शुरुआत से ही सही ट्रीटमेंट शुरू हो सके।

अपनी जाँच करवाएं

बहुत से ऐसे टेस्ट होते हैं जो प्रेगनेंसी की शुरुआत में करवाएं जाते हैं जिनसे आपकी गर्भावस्था को समझने में आसानी होती है। तो आपको वो सभी टेस्ट समय से करवाने चाहिए ताकि यदि कोई परेशानी हो तो उसका समय से इलाज हो जाए। जिससे आपको गर्भपात जैसी परेशानी से बचने में मदद मिल सके।

भरपूर आराम करें

प्रेगनेंसी का शुरुआत का समय बहुत की अहम होता है खासकर पहले तीन महीने में यदि महिला किसी भी तरह की लापरवाही करती है। तो इसका असर केवल महिला के स्वास्थ्य पर ही नहीं पड़ता है बल्कि इसके कारण गर्भ में शिशु को भी समस्या हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना और जितना हो सके आराम करना चाहिए, क्योंकि महिला जितना आराम करती है उतना ही प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स को कम करने और गर्भपात की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

खुश रहें

निषेचन की क्रिया के बाद से ही बॉडी में तेजी से हार्मोनल बदलाव होने शुरू हो जाते हैं जिसके कारण महिला परेशान हो सकती है यहां तक की कुछ गर्भवती महिलाएं तो इसके कारण तनाव में भी आ जाती है। ऐसे में महिला का तनाव लेना न केवल महिला को मानसिक रूप से परेशान करता है बल्कि इसका नकारात्मक असर गर्भ में पल रहें शिशु पर पड़ सकता है। यहां तक की तनाव अधिक लेने के कारण मिसकैरिज का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में जितना हो सके गर्भपात की समस्या से बचने के लिए प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद महिला को बहुत खुश रहना चाहिए। और खुश रहने के लिए महिला को परिवार के साथ समय बिताना चाहिए, अपनी पसंद का काम करना चाहिए जो की प्रेगनेंसी में सेफ हो, मैडिटेशन करनी चाहिए, आदि।

लापरवाही से बचे

गर्भपात से सुरक्षित रहने के लिए प्रेगनेंसी के शुरुआत समय में महिला को किसी भी तरह की लापरवाही जैसे की पेट के बल काम करना, झुकना, भारी सामान उठाना, भारी सामान सरकाना, केमिकल वाली चीजों का इस्तेमाल करना, व्यायाम करना, डाइट करना, खाने में लापरवाही करना, तेजी से चलना, भागदौड़ करना, आदि से बचना चाहिए। क्योंकि इन सभी के कारण महिला के मिसकैरिज के चांस बढ़ सकते हैं ऐसे में यदि महिला इन चीजों का ध्यान रखती है तो इससे महिला को गर्भपात की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

आहार का ध्यान रखें

पोषक तत्वों की शरीर में कमी होने के कारण महिला काफी कमजोर महसूस कर सकती है, और गर्भवती महिला के शरीर का कमजोर होना भी गर्भपात का कारण बन सकता है। साथ ही महिला को कच्चा पपीता, अनानास जैसी कुछ खाने की चीजें हैं जिनसे प्रेगनेंसी के दौरान परहेज करना चाहिए क्योंकि इनसे भी गर्भपात होने का खतरा रहता है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने से गर्भवती महिला को करना चाहिए इससे महिला स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। और जितना गर्भवती महिला स्वस्थ रहती है उतना ही गर्भपात जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा उन चीजों के सेवन से भी महिला को परहेज करना चाहिए जिसके कारण महिला को गर्भपात का खतरा रहता है।

दवाइयां समय से लें

गर्भपात से बचने के लिए महिला को अपनी सभी दवाइयों का सेवन समय से करना चाहिए, और केवल डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का ही सेवन करना चाहिए। अपनी मर्ज़ी से किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए। यदि प्रेग्नेंट महिला डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का सेवन समय पर करती है तो इससे भी गर्भपात से बचने में मदद मिलती है।

लक्षणों को समझें

कुछ ऐसे लक्षण हैं जो गर्भवती महिला को यदि अपनी बॉडी में महसूस हो तो यह गर्भपात का कारण बन सकते हैं। ऐसे में महिला को इन लक्षणों को समझना चाहिए ताकि किसी समस्या के होने पर जल्द से जल्द ट्रीटमेंट करके उस परेशानी से बचने में मदद मिल सके। जैसे की पेट के निचले हिस्से में दर्द, ब्लीडिंग अधिक होना, मासिक धर्म की तरह पेट या पीठ में दर्द का अनुभव होना, आदि के होने पर जल्दी से जल्दी डॉक्टर से मिलना चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान गर्भवती महिला को गर्भधारण के बाद रखना चाहिए, यदि महिला इन टिप्स का अच्छे से ध्यान रखती है। तो ऐसा करने से न केवल महिला को गर्भपात के खतरे से बचे रहने में मदद मिलती है बल्कि इससे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

क्या मैं गर्भवती हूँ? मेरे साथ यह हो रहा है

प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद ही आपको यह पता नहीं चलता है की आपका गर्भ ठहर गया है। बल्कि जिस समय महिला के अंडाशय में रखें अंडे और पुरुष के शुक्राणु का आपस में फैलोपियन ट्यूब में मिलन हो जाता है। और निषेचन की क्रिया शुरू हो जाती है, तभी से महिला की बॉडी में हार्मोनल बदलाव होने शुरू हो जाते हैं। जिसके कुछ लक्षण आपको बॉडी में महसूस हो सकते हैं, लेकिन ऐसा भी जरुरी नहीं होता है की हर महिला की बॉडी में एक ही जैसे लक्षण महसूस हो। बल्कि यह हर महिला की बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करता है। ऐसे में कुछ महिलाएं एक दम से बॉडी में महसूस होने वाले लक्षणों को लेकर परेशान हो सकती है की आखिर उनके साथ ऐसा क्यों हो रहा है क्या कहीं इसका कारण प्रेगनेंसी तो नहीं है?

पीरियड्स मिस होने से पहले प्रेगनेंसी के लक्षण

पीरियड मिस होने के बाद प्रेगनेंसी किट की जांच के माध्यम से आप आसानी से यह जान सकती है की कहीं आपका गर्भ तो नहीं ठहर गया है। लेकिन उससे पहले यदि आपको कुछ लक्षण या बदलाव यदि आपको बॉडी में महसूस हो तो यह प्रेगनेंसी के लक्षण हो सकते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के कौन से लक्षण पीरियड्स मिस होने से पहले बॉडी में महसूस हो सकते हैं।

उल्टी आने का मन करना

जीभ का स्वाद बदलना व् उल्टी आने का मन करना, और ऐसी समस्या का अधिक होना गर्भधारण का लक्षण हो सकता है। लेकिन यदि आप ऐसा सोच रही है की आपने अपने पति के साथ सम्बन्ध नहीं बनाया है और फिर भी आपको ऐसा क्यों महसूस हो रहा है तो यह आपके गलत खान पान की वजह से भी हो सकता है।

कमजोरी व् थकान

निषेचन की क्रिया शुरू होने के बाद बॉडी में तेजी से हार्मोनल बदलाव होने शुरू हो जाते हैं। जिसके कारण बॉडी में ब्लड फ्लो भी तेजी से होने लगता है और इसके कारण महिला काफी थका हुआ व् कमजोरी का अनुभव कर सकती है, यदि आपके साथ भी ऐसा कुछ हो रहा है तो हो सकता है की आपका गर्भ ठहर गया हो।

सिर दर्द व् चक्कर

हार्मोनल बदलाव शुरू होने के साथ बॉडी में ब्लड फ्लो भी तेजी से हो सकता है जिसके कारण महिला को सिर में दर्द की समस्या अधिक होने के साथ चक्कर आदि भी महसूस हो सकते हैं। यदि आपकी बॉडी में भी आपको ऐसा महसूस हो रहा है तो पीरियड्स मिस होने के बाद आपको तुरंत जांच करनी चाहिए, क्योंकि यह भी प्रेगनेंसी का एक लक्षण होता है।

मूड स्विंग्स

गुस्सा व् चिड़चिड़ापन अधिक महसूस होना, किसी काम को करने में मन न लगना, आलस अधिक महसूस होना, आदि। यह मूड स्विंग्स होते है जो प्रेगनेंसी होने के आम लक्षणों में से एक है।

कब्ज़

यदि आपका गर्भ ठहर गया है तो आपकी बॉडी में हार्मोनल बदलाव शुरुआत में तेजी से होते हैं और हार्मोनल बदलाव तेजी से होने के कारण पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है। और पाचन क्रिया के धीमे पड़ने के कारण कब्ज़ की समस्या का सामना आपको करना पड़ सकता है। यदि आप भी कब्ज़ की समस्या से अधिक परेशान हो रही है तो हो सकता है की आपकी बॉडी में दिखने वाला यह लक्षण आपकी प्रेगनेंसी की और इशारा कर रहा हो।

ब्लीडिंग

यदि महिला को पीरियड्स जैसा दर्द न हो, पीरियड्स जैसी ब्लीडिंग न हो, लेकिन खून का दाग लगे तो यह भी प्रेगनेंसी का लक्षण होता है। क्योंकि यदि आपका गर्भ ठहर गया है तो आपके साथ ऐसा हो सकता है, ऐसा इसीलिए होता है जब फैलोपियन ट्यूब में से भ्रूण को गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है तो ऐसा महिला के साथ हो सकता है। क्या आपको भी पीरियड्स आने की जगह केवल दाग ही लग रहा है यदि हाँ, तो हो सकता है की आपके लिए खुशखबरी हो।

पेट में हल्का दर्द

यदि आपका गर्भ ठहर गया है तो गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट की मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है जिसके कारण महिला को पेट या पेट के निचले हिस्से में थोड़ा दर्द का अनुभव हो सकता है। यदि आपके साथ ऐसा हो रहा है तो यह प्रेगनेंसी का लक्षण हो सकता है।

बार बार यूरिन करने की इच्छा

यदि आपको बहुत जल्दी जल्दी यूरिन पास करने की इच्छा हो रही है तो यह भी प्रेगनेंसी का एक लक्षण हो सकता है। क्योंकि बॉडी में हार्मोनल बदलाव तेजी से होने के कारण बहुत जल्दी जल्दी यूरिन पास करने की इच्छा हो सकती है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो आपको यदि बॉडी में दिखाई दे, तो इसका कारण आपके गर्भ का ठहरना हो सकता है। और यह लक्षण दिखने के बाद यदि आपके पीरियड मिस हो जाते हैं तो आप इस बात को कन्फर्म भी कर सकते हैं।

गर्भवती महिला को सीढ़ियां चढ़ने उतरने से क्या दिक्कत आती है

प्रेगनेंसी में सीढ़ियां चढ़ना उतरना

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी में किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स का सामना न करना पड़े इसके लिए बहुत जरुरी होता है, की महिला प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही न करे। क्योंकि प्रेगनेंसी के नौ महीने महिला के लिए बहुत ही नाजुक समय होता है इस दौरान की गई थोड़ी सी चूक गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में खान पान के साथ छोटे छोटे काम को करते हुए भी बहुत सी बातों का ध्यान रखना पड़ता है। जैसे की सीढ़ियां चढ़ते समय, सीढ़ियां चढ़ना प्रेगनेंसी के दौरान नुकसानदायक हो सकता है यदि इसमें थोड़ी सी भी चूक हो जाए। खासकर प्रेगनेंसी के दौरान यदि कोई परेशानी है तो डॉक्टर सीढ़ियां न चढ़ने की सलाह देते हैं।

गर्भवती महिला को सीढ़ियां चढ़ने के नुकसान

यदि गर्भवती महिला बहुत अधिक सीढ़ियां चढ़ती है तो इसके कारण प्रेगनेंसी की शुरुआत के साथ प्रेगनेंसी के आखिरी दिनों में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में सीढ़ियां चढ़ने के क्या नुकसान होते हैं।

ब्लीडिंग

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने महिला के लिए सबसे अहम होते हैं क्योंकि इस दौरान गर्भपात के चांस सबसे ज्यादा होते हैं। ऐसे में अधिक सीढ़ियां चढ़ने के कारण महिला को स्पॉटिंग या ब्लीडिंग जैसी परेशानी का अनुभव हो सकता है, जिसके कारण प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ सकती है।

दर्द

सीढ़ियां चढ़ने से पेट के निचले हिस्से और जांघो की मांसपेशियों में बहुत अधिक खिंचाव हो सकता है। और खिंचाव के कारण टांगों में, पेट में, पेट के निचले हिस्से में गर्भवती महिला को दर्द का अनुभव करना पड़ सकता है।

गर्भपात

प्रेगनेंसी में काम करते समय तेजी करना महिला के लिए नुकसानदायक हो सकता है, ऐसे में यदि महिला सीढ़ियां बहुत ज्यादा चढ़ने उतरने के साथ बहुत तेजी करती है, जिसके कारण दर्द और ब्लीडिंग की समस्या के बढ़ने का खतरा रहता हैं। और गर्भावस्था के पहले तीन महीने में ऐसा करना महिला के गर्भपात का कारण बन सकता है।

गिरने का डर

जैसे जैसे महिला के पेट का साइज बढ़ता है वैसे वैसे नीचे देखने में महिला को दिक्कत हो सकती है, ऐसे में सीढ़ियां चढ़ने उतरने में दिक्कत हो सकती है। जिसके कारण गिरने का डर भी रहता है, और गिरने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी खतरा हो सकता है।

शिशु को खतरा

यदि सीढ़ियां चढ़ते समय महिला का पैर फिसल जाता है और महिला गिर जाती है, तो गिरने पर पेट पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ता है। जिसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु को भी खतरा होने के चांस बढ़ जाते हैं, ऐसे में गर्भवती महिला को इस तरह की लापरवाही बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।

किन गर्भवती महिलाओं को सीढ़ियां नहीं चढ़नी चाहिए

  • जिन महिलाओं को ब्लीडिंग की समस्या हो।
  • पहले गर्भपात की समस्या से महिला जूझ चुकी हो।
  • प्रेगनेंसी में बहुत सी समस्याएँ हो।
  • बहुत अधिक उम्र में महिला प्रेग्नेंट हुई हो।
  • डॉक्टर ने प्रेगनेंसी में बेड रेस्ट की सलाह दी हो।

प्रेगनेंसी में सीढ़ियां चढ़ते हुए इन बातों का ध्यान रखें

  • सीढ़ियां उतरते समय हाथ में किसी तरह का सामान या बच्चे को पकड़कर न उतरें।
  • यदि अँधेरा हो तो पहले लाइट ऑन करें।
  • पैरों पर अच्छे से ध्यान रखते हुए सीढ़ियां उतरनी चाहिए।
  • सीढ़ियां उतरते समय रेलिंग को जरूर पकड़ना चाहिए ताकि गिरने के डर को कम किया जा सके।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो प्रेगनेंसी में सीढ़ियों का अधिक इस्तेमाल करने के कारण हो सकते हैं। साथ ही सीढ़ियां चढ़ते समय किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इस बारे में भी बताया गया है। ऐसे में गर्भवती महिला को इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए, ताकि प्रेगनेंसी के दौराब सीढ़ियां चढ़ने के कारण होने वाली परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके।