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प्रेगनेंसी में क्या-क्या नहीं खाना चाहिए?

प्रेगनेंसी के नौ महीनों का सफर महिला के लिए बहुत ही नाजुक और महत्वपूर्ण होता है ऐसे में महिला यदि किसी भी तरह की लापरवाही करती है या गलती करती है तो इसका अंजाम काफी खतरनाक हो सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को पूरे नौ महीने अपना अच्छे से ध्यान रखने की जरुरत होती है। और किसी एक बात का नहीं बल्कि महिला को हर छोटी छोटी बात का ध्यान रखने की जरुरत होती है की आखिर क्या महिला और शिशु के लिए सही है और क्या नहीं है।

खासकर खान पान से जुडी हर बात का महिला को अच्छे से ध्यान रखने की जरुरत होती है क्योंकि महिला का सही और पोषक तत्वों से भरपूर खान पान माँ व् बच्चे के स्वास्थ्य के लिए सबसे अहम होता है। ऐसे में बहुत सी ऐसी चीजें होती है जो महिला प्रेगनेंसी से पहले खा लेती थी लेकिन अब प्रेगनेंसी के दौरान महिला को उनकी मनाही होती है और कुछ चीजें ऐसी होती है जो महिला पहले नहीं खाती थी लेकिन अब महिला के लिए उन्हें खाना जरुरी होता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला क्या नहीं खाएं?

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला गलत खाद्य पदार्थों का सेवन करती है तो उनकी वजह से गर्भवती महिला और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। तो आइये अब जानते हैं की वो खाद्य पदार्थ कौन से हैं।

कच्चा पपीता

गर्भवती महिला को कच्चा पपीता नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें मौजूद एंजाइम गर्भ में पल रहे शिशु के लिए नुकसानदायक होते हैं। और इसे खाने के कारण महिला के गर्भपात होने का खतरा अधिक होता है।

अनानास

अनानस का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए क्योंकि शुरूआती दिनों में इसका सेवन करने से गर्भपात और प्रेगनेंसी के आखिरी महीनों में इसका सेवन करने से समय से पहले बच्चे के जन्म होने का खतरा होता है।

एलोवेरा जूस

स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदों के लिए एलोवेरा जूस पीना बहुत फायदेमंद होता है लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको अजा ही एलोवेरा जूस का सेवन बंद कर देना चाहिए। क्योंकि एलोवेरा जूस पीने से महिला को ब्लीडिंग होने का खतरा होता है।

कच्चा अंडा

प्रेग्नेंट महिला को कच्चे अंडे का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके सेवन से फ़ूड पोइज़इनिंग का खतरा होता है। साथ कच्चे अंडे का सेवन करने से शरीर में साल्मोनेला, जैसे बैक्टेरिया भी प्रवेश करते हैं जो माँ व् बच्चे के स्वास्थ्य को बहुत नुकसान पहुंचा सकते हैं।

सहजन

यदि आप सहजन को सब्जियों में इस्तेमाल करती है तो आपको प्रेगनेंसी में ऐसा नहीं करना चाहिए। क्योंकि सहजन का सेवन करने से भी मिसकैरिज का खतरा बढ़ जाता है।

तिल

गर्भवती महिला को तिल का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि तिल की तासीर गर्म होती है जिसके कारण गर्भ गिरने का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा शहद के साथ तिल मिलाकर तो बिल्कुल भी नहीं खाने चाहिए।

बैंगन

गर्भावस्था के दौरान महिला को बैंगन का सेवन करने से भी बचना चाहिए क्योंकि बैंगन का सेवन करने से शरीर में ब्लड फ्लो में रुकावट होने का खतरा होता है। जिसके कारण माँ व् बच्चे को दिक्कत हो सकती है।

कटहल

कटहल में भी कुछ ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए सही नहीं होते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को कटहल का सेवन करने से भी बचना चाहिए।

कैफीन

गर्भवती महिला को कैफीन युक्त पदार्थ जैसे की चाय, कॉफ़ी, चॉकलेट आदि का सेवन करने से भी बचना चाहिए। क्योंकि कैफीन का जरुरत से जय सेवन करने से गर्भपात, शिशु के विकास में कमी जैसी समस्या पैदा हो सकती है।

नशीले पदार्थ

शराब व् अन्य नशीले पदार्थों का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए क्योंकि यह सभी पदार्थ गर्भ में शिशु के विकास में रूकावट पैदा करते हैं। इसके अलावा इनका असर शिशु के शारीरिक के साथ मानसिक विकास पर भी पड़ सकता है।

चाइनीज़ फ़ूड

अगर आप चाइनीज़ खाना बहुत पसंद करती है तो प्रेगनेंसी के दौरान आपको चाइनीज़ फ़ूड का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। क्योंकि चाइनीज़ फ़ूड में अजीनो मोटो, सोया सॉस आदि होती है जिसमे मर्करी की मात्रा मौजूद होती है। और मर्करी का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करने से गर्भ में शिशु को नुकसान पहुँचने का खतरा अधिक होता है यहां तक की इसकी वजह से गर्भ गिर भी सकता है।

जंक फ़ूड

गर्भावस्था के दौरान महिला को जंक फ़ूड, ज्यादा मसालेदार खाना, ठंडा व् बासी खाना, डिब्बाबंद आहार आदि खाने से भी बचना चाहिए। क्योंकि यह सभी आहार गर्भ में पल रहे शिशु व् महिला की सेहत के लिए सही नहीं होते है इनकी वजह से महिला की शारीरिक दिक्कतें बढ़ने के साथ गर्भ में शिशु के विकास में कमी का खतरा भी अधिक होता है।

बिना धुले फल व् सब्जियां

गर्भवती महिला को बिना धुलें फल व् सब्जियां भी नहीं खाने चाहिए क्योंकि इनके ऊपर मौजूद बैक्टेरिया शरीर में प्रवेश कर जाता है। जिसके कारण महिला को पेट में इन्फेक्शन का खतरा अधिक होता है जो माँ व् बच्चे दोनों की सेहत के लिए नुकसानदायक होता है।

बिना डॉक्टरी सलाह के दवाइयां

गर्भवती महिला को बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी दवाई का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि बिना डॉक्टरी सलाह के दवाई का सेवन करने से वह दवाई गर्भ पर नकारात्मक असर डाल सकती है। जिसका असर कई बार शिशु के मानसिक विकास को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।

तो यह हैं कुछ खाद्य पदार्थ जिनका सेवन गर्भवती महिला को गलती से भी नहीं करना चाहिए क्योंकि यह सभी माँ व् बच्चे की सेहत पर हानिकारक प्रभाव डालते हैं। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए जिनसे माँ व् शिशु को केवल फायदा ही मिलता है।

What not to eat during pregnancy

प्रेगनेंसी में यहां यहां दर्द होने पर नहीं करना चाहिए इग्नोर

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की उल्टियां होना, जी मिचलाना, घबराहट होना, बॉडी में दर्द रहना, पैरों में सूजन होना, पेट से जुडी समस्या होना, आदि। और इन समस्याओं का होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। और ऐसा भी जरुरी नहीं होता है सभी गर्भवती महिलाओं को एक ही जैसी शारीरिक परेशानियां हो।

साथ ही गर्भवती महिला को किसी भी शारीरिक परेशानी के अधिक होने पर अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यदि कोई परेशानी अधिक हो तो उसके कारण महिला और शिशु को दिक्कत होने का खतरा होता है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में कहाँ कहाँ दर्द होने पर अनदेखा नहीं करना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

पेट में दर्द

गर्भावस्था के दौरान थोड़ा बहुत पेट में दर्द रहना आम बात होती है। और यह दर्द गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण, पेट में शिशु की हलचल के कारण, पेट से जुडी समस्या होने के कारण हो सकता है। लेकिन यदि महिला को पेट में दर्द ज्यादा तेजी से होता है तो महिला को इसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह गर्भपात, समय से पहले प्रसव, प्रसव का संकेत हो सकता है।

पीठ में दर्द

प्रेग्नेंट महिला को पीठ में तेजी से दर्द का अनुभव होने पर भी उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि पीठ में तेजी से दर्द होना भी गर्भपात या डिलीवरी होने का लक्षण होता है।

पेल्विक एरिया में दर्द

प्रेग्नेंट महिला को यदि पेल्विक एरिया यानी पेट के निचले हिस्से में ज्यादा दर्द महसूस हो तो महिला को उसे भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह दर्द गर्भपात, प्राइवेट पार्ट में संक्रमण, प्रसव आदि के कारण हो सकता है।

सीने में दर्द

गर्भवती महिला को यदि प्रेगनेंसी के दौरान कभी भी हल्का फुल्का भी रह रह कर सीने में दर्द होता है तो महिला को इस दर्द को भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह हाई ब्लड प्रैशर, हार्ट से जुडी समस्या होने का संकेत होता है।

सिर दर्द

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को बहुत ज्यादा सिर में दर्द रहता है तो महिला को इसे भी अनदेखा न करते हुए डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि सिर दर्द की समस्या अधिक होने के कारण महिला को तनाव होने का खतरा रहता है। साथ ही यदि सिर दर्द की समस्या होने पर महिला को चक्कर आने की समस्या भी हो जाती है तो ऐसे में महिला अचानक से कही भी गिर सकती है जिसके कारण महिला और उसके होने वाले बच्चे दोनों को दिक्कत होने का खतरा होता है।

तो प्रेगनेंसी में शरीर के इन हिस्सों में होने वाले दर्द को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि इन हिस्सों में दर्द को अनदेखा करने के कारण आपको तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही इन दर्द से निजात के लिए घर में अपनी मर्ज़ी से किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान बिना डॉक्टरी परामर्श के ली गई दवाइयों से भी आपको नुकसान पहुँच सकता है।

पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को कम करने के आसान तरीके

पीरियड्स महिलाओं को होने वाली एक आम समस्या है जो महिलाओं को हर अठाइस दिनों के चक्र में दोबारा होती है। इस दौरान महिलाओं के प्राइवेट पार्ट से ब्लड फ्लो होता है। ऐसा जरुरी भी नहीं होता है की हर महिला को पूरे अठाइस दिन बाद दोबारा से पीरियड्स आ जाये बल्कि दो चार दिन पीरियड्स का ऊपर नीचे होना बहुत आम बात होती है।

साथ ही कुछ महिलाओं को पीरियड्स तीन से पांच दिन तक आते है तो कुछ महिलाओं को एक हफ्ते तक भी होते हैं। पीरियड्स आने पर महिलाओं को पेट, पीठ, जांघों में दर्द महसूस होना बहुत आम बात होती है लेकिन कई महिलाओं को इस दौरान असहनीय दर्द का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा ऐसा भी हो सकता है की कुछ महिलाओं को इस दौरान बिल्कुल भी दर्द नहीं हो।

लेकिन जिन महिलाओं को दर्द होता है उन महिलाओं को इस दर्द से निजात पाने के लिए किसी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से आपको अनियमित पीरियड, शरीर में हार्मोनल इम्बैलेंस जैसी समस्या हो सकती है। जिसकी वजह से आपको बाद में ज्यादा दिक्कत हो सकती है।

क्या आपको भी पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द की समस्या होती है? यदि हाँ तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे कुछ घरेलू नुस्खे बताने जा रहे हैं जिन्हे ट्राई करने से आपको पीरियड्स में होने वाले दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

अजवाइन

एक गिलास पानी में एक चम्मच अजवाइन डालें उसके बाद इस पानी को आधा रहने तक अच्छे से उबाल लें। उसके बड़ा इस पानी को छानकर चाय की तरह सिप सिप करके पीएं। ऐसा दिन में दो से तीन बार करें इससे आपको पीरियड्स भी खुलकर आएंगे और पीरियड्स में होने वाली दर्द की समस्या से भी निजात पाने में मदद मिलेगी।

हल्दी वाला दूध

एक ग्लास दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पीएं ऐसा करने से आपको पेट में दर्द से निजात मिलने के साथ अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे भी मिलेंगे।

मेथी, अजवाइन

कई बार महिलाओं को पीरियड्स के दौरान गैस की समस्या भी हो जाती है जिसकी वजह से महिला को पेट में दर्द ज्यादा होता है। ऐसे में आप चाहे तो अजवाइन या मेथी में थोड़ा नमक मिलाकर इसे गुनगुने पानी के साथ लें। ऐसा करने से आपको गैस की समस्या से राहत मिलेगी जिससे आपका पेट दर्द भी कम होगा।

अदरक

अदरक को पीसकर या फिर इसे छोटे छोटे टुकड़ों में काटकर एक गिलास पानी में डालकर उबाल लें। उसके बाद जब पानी आधा रह जाएँ तो इसे छानकर चाय की तरह पीएं ऐसा करने से भी आपको आराम मिलता है।

पपीता

पीरियड्स के दौरान पपीते का सेवन करने से भी पीरियड्स में होने वाले दर्द को कम करने में मदद मिलती है। क्योंकि पपीता खाने से पाचन क्रिया मजबूत होती है जिससे आपको पेट दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

तुलसी

औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी का इस्तेमाल करने से भी आपको पीरियड्स के दौरान होने वाले पेट दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप तुलसी के कुछ पत्तों को पानी में उबालकर उस पानी को पी सकती हैं या फिर यदि आप पीरियड्स में चाय पीती है तो चाय में तुलसी के पत्तों को डाल सकती है।

जीरा

एक चम्मच जीरा एक गिलास पानी में उबाल लें और उसके बाद उस पानी को छानकर उसका सेवन करें या फिर चाय बनाते समय उसमे जीरा डाल लें। और फिर उस चाय का सेवन करें यदि आप इस उपाय को करते हैं तो इससे भी आपको पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

चाय कॉफ़ी पीने से बचें

कई महिलाएं ऐसा सोचती है की चाय कॉफ़ी का सेवन करने से महिला को दर्द से आराम मिलता है जबकि सच यह हैं की कैफीन युक्त चीजें पीने से महिला को गैस होने का खतरा होता है। जिसकी वजह से महिला को दर्द की समस्या कम होने की बजाय बढ़ सकती है। ऐसे में पीरियड्स के दौरान ज्यादा चाय कॉफी के सेवन से बचना चाहिए।

थोड़ा व्यायाम भी करें

पीरियड्स के दौरान थोड़ा व्यायाम भी करें इससे आपकी मांसपेशियों को आराम मिलता है जिससे आपके पीरियड्स भी अच्छे से आते हैं और दर्द की समस्या से निजात पाने में भी मदद मिलती है।

सिकाई करें

हॉट वाटर बैग की मदद से या बोतल में गर्म पानी डालकर पेट के निचले हिस्से की अच्छे से सिकाई करें। ऐसा करने से आपको बहुत जल्दी पेट में होने वाले दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

गर्म पानी से नहाएं

पीरियड्स के दौरान आपको गर्म पानी से नहाना चाहिए इससे पेट, कमर, टांगों आदि की सिकाई हो जाती है। जिससे आपको पीरियड्स में होने वाले दर्द की समस्या से आराम मिलता है।

मालिश

आप चाहे तो तेल का इस्तेमाल करके पेट के निचले हिस्से की मसाज भी कर सकते हैं क्योंकि ऐसा करने से भी आपको पीरियड्स में होने वाले दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

खान पान का ध्यान रखें

पीरियड्स के दौरान आप हेल्दी खाना खाएं इससे आपको जरुरी पोषक तत्व मिलेंगे साथ ही शरीर में एनर्जी बनी रहेगी जिससे आपको पीरियड्स के दर्द को कम करने में मदद मिलेगी।

तो यह हैं कुछ आसान तरीके जिन्हे ट्राई करने से आपको पीरियड्स में होने वाली दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। यदि आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो आप भी इनमे से किसीभी टिप्स को ट्राई कर सकती है आपको इसका फायदा जरूर मिलेगा। इसके अलावा पीरियड्स पेन की समस्या को कम करने के लिए आपको ठंडी चीजों के सेवन से परहेज करना चाहिए।

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नवरात्रि का व्रत करने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए जरुरी जानकारियां

नवरात्रि का व्रत माँ के नौ अलग अलग रूपों को प्रसन्न करने व् उनकी कृपा पाने के लिए किया जाता है। अधिकतर महिला, पुरुष, बच्चे तक भी यह व्रत करते हैं। साथ ही यह व्रत पूरे नौ दिन तक चलता है उसके बाद कुछ लोग अष्टमी तो कुछ नवमी के दिन कन्या पूजा करके इस व्रत का उदयापन कर देते हैं। कई गर्भवती महिलाएं भी इस व्रत को करने की इच्छा जताती है और रखना भी चाहती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम जानते हैं की प्रेगनेंसी में नवरात्रि का व्रत महिला को करना चाहिए या नहीं और यदि हाँ तो महिला को क्या क्या जानकारी होनी जरुरी है।

क्या गर्भवती महिला नवरात्रि का व्रत रख सकती है?

गर्भावस्था महिला के लिए बहुत ही नाजुक समय होता है ऐसे में कुछ महिलाएं व्रत रखने के बारे में सोचती है तो उन्हें व्रत रखने से पहले अपने स्वास्थ्य के बारे में सोचना चाहिए। की क्या महिला पूरी तरह स्वस्थ है, महिला को शारीरिक परेशानियां ज्यादा तो नहीं होती हैं, डॉक्टर्स क्या कहते हैं, आदि। उसके बाद महिला को व्रत रखने के बारे में सोचना चाहिए। डॉक्टर हाँ कहे तो व्रत रखें नहीं तो रहने दें।

उसके बाद भी महिला को पूरे नौ दिन के व्रत नहीं करने चाहिए बल्कि पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद भी महिला का यदि मन है तो महिला एक या दो दिन फ़ास्ट कर सकती है। लेकिन यदि महिला को थोड़ी भी दिक्कत होती है तो महिला को व्रत करने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए क्योंकि व्रत तो महिला अगले साल भी रख सकती है लेकिन व्रत रखने पर यदि महिला को कोई दिक्कत हो जाये तो इसकी वजह से माँ व् शिशु दोनों को खतरा हो सकता है।

व्रत रखने पर महिला को क्या-क्या जानकारी जरूर रखनी चाहिए?

यदि कोई गर्भवती महिला डॉक्टर्स से राय लेने के बाद व्रत रखती है तो महिला को बहुत सी बातों का ध्यान भी रखना जरुरी होता है ताकि माँ या बच्चे को व्रत रखने पर कोई भी परेशानी नहीं हो। तो आइये अब उन बातों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

कितने व्रत रखने सही है?

प्रेग्नेंट महिला को सबसे पहले तो कितने व्रत रखने चाहिए उसके बारे ध्यान रखना चाहिए क्योंकि कई महिलाएं व्रत के दौरान दवाई नहीं खाती है। और प्रेगनेंसी के दौरान विटामिन्स लेना बहुत जरुरी होता है ऐसे में महिला को एक या दो दिन से ज्यादा व्रत रखने के बारे में नहीं सोचना चाहिए। और यदि महिला ज्यादा व्रत रखती भी है तो महिला को दवाई का सेवन बंद नहीं करना चाहिए।

क्या खाएं क्या नहीं?

प्रेग्नेंट महिला को व्रत रखने पर अपने खाने पीने की भी पूरी जानकारी होनी चाहिए जैसे की नवरात्रि के व्रत में अन्न नहीं खाया जाता है बल्कि कुट्टू या सिंघाड़े के आटे का सेवन किया जाता है। लेकिन कुट्टू के आटे की तासीर बहुत गर्म होती है ऐसे में गर्भ में शिशु को उससे नुकसान पहुँच सकता है। साथ ही ज्यादा तला भुना जैसे की चिप्स, नमकीन आदि का सेवन भी महिला को ज्यादा नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से महिला को पाचन सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

थोड़ा थोड़ा करके खाते रहें

व्रत के दिनों में लोग एक ही बार खाना खाते हैं लेकिन गर्भवती महिला को ज्यादा सख्त नियम के साथ व्रत नहीं करना चाहिए। बल्कि महिला को थोड़ी थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए जैसे की फल, साबूदाना, नारियल पानी, जूस, दही, छाछ, आदि।

शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें

व्रत रखने पर महिला को अपने शरीर में गलती से भी पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए। क्योंकि यदि महिला के शरीर में पानी हो जाती है तो इसके कारण महिला की परेशानियां बढ़ जाती है। ऐसे में महिला को दिन भर में आठ से दस गिलास पानी, जूस, आदि पीते रहना चाहिए।

कौन सी तिमाही में व्रत रखना सही होता है

वैसे तो महिला को प्रेगनेंसी के दौरान कोई भी व्रत रखने से बचना चाहिए लेकिन यदि महिला का नवरात्रि रखने का मन है तो महिला यह व्रत कर सकती है। परन्तु हो सके तो महिला को पहली और तीसरी तिमाही में व्रत रखने से बचना चाहिए क्योंकि पहली तिमाही में शिशु का शुरूआती विकास हो रहा होता है ऐसे में यदि कोई कमी आ जाती है तो इसकी वजह से शिशु के विकास में कमी आ सकती है साथ ही तीसरी तिमाही में शिशु का विकास तेजी से हो रहा होता है। ऐसे में महिला चाहे तो दूसरी तिमाही में चाहे तो नवरात्रि का व्रत कर सकती है।

आराम भी है जरुरी

नवरात्रि व्रत में ऐसी बहुत सी चीजें हैं जिनका सेवन नहीं किया जाता है ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान व्रत रखने पर महिला को शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। जिसकी वजह से महिला थका थका सा महसूस कर सकती है। इसीलिए महिला के लिए जितना खान पान का ध्यान रखना जरुरी है उतना ही महिला के लिए आराम भी जरुरी है ऐसे में महिला को आराम का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और आम दिनों के मुकाबले थोड़ी ज्यादा देर आराम करना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में व्रत रखने से जुडी जानकारी, यदि आप भी गर्भवती है और आप व्रत रखना चाहती हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान व्रत रखने पर आपको किसी भी तरह की कोई भी परेशानी नहीं हो।

Navratri fasting information for pregnant women

प्रेगनेंसी में पनीर खाने के क्या-क्या फायदे हैं?

गर्भावस्था के दौरान डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करना महिला व् शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होता है। और पनीर भी दूध में खट्टास का इस्तेमाल करके बनाया जाता है। ऐसे में गर्भवती महिला चाहे तो प्रेगनेंसी के दौरान पनीर का सेवन कर सकती है। साथ ही पनीर में मौजूद पोषक तत्व जैसे की आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन आदि महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होते हैं।

तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और सोच रही हैं पनीर का सेवन करें या नहीं तो इसका जवाब है की आप पनीर का सेवन कर सकती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान पनीर का सेवन करने से माँ व् बच्चे को कौन कौन से फायदे मिलते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रोटीन

प्रोटीन मांसपेशियों के विकास के लिए बहुत फायदेमंद होता है। और पनीर प्रोटीन का एक बेहतरीन स्त्रोत होता है ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला पनीर का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला के शरीर में प्रोटीन की मात्रा सही रहती है। जिससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर मानसिक व् शारीरिक विकास में मदद मिलती है।

कैल्शियम

पनीर कैल्शियम का भी बेहतरीन स्त्रोत होता है और कैल्शियम प्रेगनेंसी के दौरान माँ और बच्चे के लिए एक जरुरी पोषक तत्व होता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला पनीर का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला को भरपूर कैल्शियम मिलता है जिससे महिला की हड्डियों को मजबूत रहने में मदद मिलती है और महिला को थकान व् कमजोरी की समस्या से निजात मिलता है। इसके अलावा गर्भ में पल रहे शिशु को भी कैल्शियम भरपूर मात्रा में मिलता है जिससे शिशु की हड्डियों व् दांतों के विकास को बेहतर होने में मदद मिलती है।

विटामिन ए

पनीर विटामिन ए का भी बेहतरीन स्त्रोत होता है जो गर्भवती महिला की आँखों की रौशनी बढ़ाने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की आँखों के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

आयरन

प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी का होना माँ व् बच्चे दोनों की सेहत पर बुरा असर डालता है। ऐसे में पनीर का सेवन करना महिला के लिए फायदेमंद हो सकता है क्योंकि पनीर में आयरन मौजूद होता है। जो गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा रखने में मदद करता है जिससे माँ व् बच्चे दोनों को खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है साथ ही दोनों स्वस्थ भी रहते हैं।

फोलिक एसिड

गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए फोलिक एसिड एक जरुरी पोषक तत्व होता है और पनीर में यह पोषक तत्व मौजूद होता है। ऐसे में गर्भवती महिला यदि पनीर का सेवन करती है तो इससे शिशु के विकास के लिए जरुरी फोलिक एसिड मिलता है जिससे गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास को बेहतर होने में मदद मिलती है। इसके अलावा शिशु को जन्म दोष जैसी समस्या से सुरक्षित रहने में भी मदद मिलती है।

विटामिन डी

गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए विटामिन डी बहुत जरुरी होता है और प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को विटामिन डी नहीं मिलता है तो इसके कारण माँ व् बच्चे दोनों को गंभीर समस्या हो सकती है। ऐसे में महिला को शरीर में विटामिन डी की मात्रा को सही रखने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान पनीर का सेवन जरूर करना चाहिए।

ओमेगा 3 फैटी एसिड

पनीर में ओमेगा 3 फैटी एसिड भी मौजूद होता है जो गर्भ में पल रहे शिशु के जन्म दोष होने की सम्भावना को कम करने के साथ महिला को समय से पहले होने वाली डिलीवरी से बचाव करने में भी मदद करता है। इसके अलावा इससे गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास को बेहतर होने में मदद मिलती है।

एनर्जी का स्त्रोत

गर्भावस्था के दौरान महिला को ज्यादा कैलोरी की जरुरत पड़ती है ऐसे में पनीर का सेवन करने से महिला को जरुरत के अनुसार कैलोरी मिलती है जिससे महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

वजन नियंत्रित रहता है

प्रेगनेंसी के दौरान वजन का जरुरत से ज्यादा बढ़ना माँ व् बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है। ऐसे में महिला को ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए जिससे महिला का वजन नियंत्रित रहे साथ ही महिला को भरपूर पोषक तत्व भी मिलें। इसलिए पनीर का सेवन करना महिला के लिए फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि पनीर का सेवन करने से महिला को पोषक तत्व भी भरपूर मिलते हैं साथ ही वजन भी नियंत्रित रहता है। क्योंकि पनीर खाने के बाद महिला का पेट लम्बे समय के लिए भरा रहता है।

प्रेगनेंसी में पनीर खरीदतें समय इन बातों का ध्यान रखें

  • पनीर खरीदते समय यह जांच करें की पनीर ताजा है या नहीं और पैकेट वाला पनीर खरीदतें समय उस पर लिखी डेट जरूर चेक करें।
  • ज्यादा दिन फ्रिज में रखें पनीर का सेवन नहीं करें।
  • ध्यान रखें की पनीर पोश्चिकृत दूध से बना होना चाहिए।
  • ज्यादा टाइट, रंग में अलग सा होने पर उस पनीर को नहीं खरीदना चाहिए।

ध्यान रखें: प्रेगनेंसी के दौरान पनीर का सेवन करते समय ध्यान रखें की जरुरत से ज्यादा मात्रा में पनीर का सेवन नहीं करें क्योंकि जरुरत से ज्यादा कोई भी चीज आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। जैसे की पनीर में सोडियम की मात्रा अधिक होती है ऐसे में पनीर का सेवन अधिक करने से हाई ब्लड प्रैशर की समस्या हो सकती है, पनीर में कैलोरी अधिक होने के कारण वजन ज्यादा बढ़ सकता है, जरुरत से ज्यादा पनीर खाने के कारण कब्ज़ अपच जैसी समस्या भी हो सकती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो पनीर का सेवन करने से गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु को मिलते हैं। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको और शिशु को भी यह बेहतरीन फायदे मिल सकें इसके लिए आपको पनीर का सेवन जरूर करना चाहिए।

Health benefits of eating paneer during Pregnancy

प्रेगनेंसी में अंगूर खाना ज्यादा फायदेमंद होता है या अनार?

गर्भावस्था के दौरान महिला फलों का सेवन भरपूर मात्रा में कर सकती है। क्योंकि फलों में पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर होती है और यह पोषक तत्व माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को सही रखने में मदद करते हैं। लेकिन ऐसा जरुरी नहीं होता है की प्रेग्नेंट महिला सभी फलों का सेवन कर सकती है या सभी फलों का सेवन एक की मात्रा में कर सकती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान कुछ फल ऐसे होते हैं जिनका सेवन गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए ।

साथ ही कुछ फलों का सेवन केवल महिला को टेस्ट के लिए ही करना चाहिए। ऐसे में महिला खान पान का जितना अच्छे से ध्यान रखती है उतना ही गर्भवती महिला व् शिशु को फायदा पहुंचाने में मदद मिलती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम दो फलों के बारे में बात करने जा रहे हैं और फल फल है अनार और अंगूर। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में अनार खाना ज्यादा फायदेमंद होता है या अंगूर।

गर्भवती महिला को अनार या अंगूर क्या ज्यादा खाना चाहिए?

सबसे पहले तो अनार और अंगूर की बात की जाये तो दोनों में ही पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व आपकी सेहत को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं। लेकिन जब बात प्रेग्नेंट महिला की आती है तो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अंगूर का कम और अनार का ज्यादा सेवन करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि अंगूर की तासीर थोड़ी गर्म होती है जिसकी वजह से यह गर्भ के लिए नुकसानदायक होता है।

लेकिन कभी कभार चाहे तो महिला एक दो अंगूर का सेवन टेस्ट के लिए कर सकती है। साथ ही अनार का सेवन गर्भावस्था के दौरान महिला बिना किसी डर के सिमित मात्रा में कर सकती है। इसके अलावा अनार के फल का सेवन करने के साथ महिला इसे जूस के रूप में भी ले सकती है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा की प्रेगनेंसी के दौरान अनार अंगूर से ज्यादा फायदेमंद होता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में अनार खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

गर्भावस्था में अनार खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि अनार का सेवन करती है तो इससे केवल माँ ही नहीं बल्कि बच्चे को भी फायदे मिलते हैं। जिससे गर्भवती महिला को हेल्दी रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। जैसे की अंगूर खाने से:

फोलेट

अनार फोलेट का बेहतरीन स्त्रोत होता है जो गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करता है। इसके अलावा अनार का सेवन करने से शिशु को जन्म दोष के खतरे से सुरक्षित रखने में भी मदद मिलती है।

फाइबर

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पाचन तंत्र से जुडी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है जैसे की कब्ज़, गैस, अपच, आदि। ऐसे में महिला को फाइबर से भरपूर डाइट लेने की सलाह दी जाती है ताकि महिला को पाचन तंत्र से जुडी समस्याओं से बचे रहने में मदद मिल सके। ऐसे में फाइबर के लिए महिला अनार का सेवन कर सकती है क्योंकि अनार में फाइबर की मात्रा मौजूद होती है।

आयरन व् विटामिन सी

एनीमिया यानी की खून की कमी की समस्या होने के कारण गर्भवती महिला और शिशु दोनों को ही दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन अनार का सेवन करने से गर्भवती महिला इस समस्या से बच सकती है क्योंकि अनार में आयरन की मात्रा मौजूद होती है जो शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करती है। इसके अलावा अनार में विटामिन सी भी मौजूद होता है जो शरीर के सभी अंगों में आयरन को अवशोषित करने में मदद करता है।

पोटैशियम

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ऐंठन की समस्या जैसे की मांसपेशियों में ऐंठन, पेट में ऐंठन जैसी समस्या हो सकती है। जिसकी वजह से महिला को परेशानी का अनुभव हो सकता है लेकिन अनार का सेवन करने से महिला को भरपूर पोटैशियम मिलता है जिससे महिला को ऐंठन की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

कैल्शियम

अनार में कैल्शियम भी मौजूद होता है जो हड्डियों व् दांतों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला अनार का सेवन करती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला की हड्डियों को पोषण मिलता है जिससे महिला को थकान व् कमजोरी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है इसके अलावा कैल्शियम गर्भ में शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में मदद करता है जिससे शिशु का शारीरिक विकास बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।

हाई ब्लड प्रैशर से आराम

जिन गर्भवती महिलाओं को हाई ब्लड प्रैशर की समस्या प्रेगनेंसी के दौरान रहती है उनके लिए अनार खाना फायदेमंद होता है। क्योंकि अनार का सेवन करने से ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

इम्युनिटी बूस्टर

अनार का सेवन करने से विटामिन सी जैसे बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट गर्भवती महिला को मिलते हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला की इम्युनिटी को बूस्ट करने में मदद करते हैं। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान संक्रमण व् बिमारियों से महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान अंगूर और नार का सेवन करने से जुडी जानकारी, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान अनार या अंगूर के सेवन से जुडी जानकारी पता होनी चाहिए ताकि आपको या बच्चे को केवल फायदा ही मिलें और किसी भी तरह का नुकसान नहीं हो।

डिलीवरी के 5 दिन के अंदर ही यह काम जरूर कर लें?

गर्भावस्था के दौरान महिला को पूरे नौ महीने तक महिला को अपनी अच्छे से टेक केयर करने की सलाह दी जाती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता है की डिलीवरी होते ही महिला बिल्कुल ठीक हो जाती है। बल्कि डिलीवरी के बाद महिला को अपना और ज्यादा ध्यान रखना चाहिए ताकि महिला को डिलीवरी के बाद शरीर में आई कमजोरी को जल्द से जल्द दूर करने में मदद मिल सकें। इसके अलावा कुछ काम तो ऐसे होते हैं जो डिलीवरी के बाद महिला को तुरंत कर लेने चाहिए। ताकि महिला के शरीर में आई कमजोरी से जल्द से जल्द महिला रिकवर हो सकें। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसे कामों के बारे में बताने जा रहे हैं जो डिलीवरी के बाद महिला को तुरंत कर लेने चाहिए।

घर में काम वाली रख लेनी चाहिए

यदि आपके घर में कोई काम करने वाला नहीं है तो घर के सभी काम और अपने थोड़े बहुत काम के लिए आपको एक कामवाली रख लेनी चाहिए। क्योंकि डिलीवरी के बाद एक से डेढ़ महीने तक आपको केवल आराम की जरुरत होती है।

मालिश वाली लगवाएं

यदि आपकी डिलीवरी नोर्मल हुई है तो आपको डिलीवरी के बाद घर जाते ही मालिश करवानी शुरू कर देनी चाहिए। क्योंकि मालिश करवाने से शरीर को रिलैक्स रहने, ऊर्जा से भरपूर होने, शरीर में आई कमजोरी को दूर करने, आदि में मदद मिलती है। लेकिन यदि आपकी सिजेरियन डिलीवरी है तो आपको कम से कम पंद्रह से बीस दिन बाद मालिश करवानी चाहिए और वो भी पेट की मालिश नहीं करवानी चाहिए।

बच्चे को दूध पिलाना शुरू कर देना चाहिए

नई माँ को बच्चे को जन्म के बाद से ही दूध पिलाना शुरू कर देना चाहिए शुरुआत में बच्चे को दूध पीने में दिक्कत हो सकती है। लेकिन धीरे धीरे सब ठीक हो जाता है और यदि आप बच्चे को दूध पिलाने में देरी करती है तो कई बार बाद में दूध नहीं उतर पाता है साथ ही महिला को ब्रेस्ट पेन की समस्या भी हो सकती है।

लड्डू खाएं

डिलीवरी के बाद घर जाते ही आपको रोजाना ड्राई फ्रूट, सौंठ, अजवाइन आदि के लड्डू खाने शुरू कर देने चाहिए। क्योंकि इनकी तासीर गर्म होती है साथ ही इनमे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। जो आपके शरीर में डिलीवरी के बाद आई कमजोरी को दूर करने में आपकी मदद करते हैं।

दूध बढ़ाने वाले आहार

जीरा, सौंफ, हरी सब्जियां, दालें आदि भरपूर मात्रा में खानी चाहिए इन्हे खाने से ब्रेस्ट मिल्क को बढ़ाने में मदद मिलती है। ऐसे में यदि किसी महिला का ब्रेस्ट मिल्क नहीं उतरता है तो उनके लिए ऐसा करना बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा दिन भर में दो से तीन गिलास दूध में थोड़ी सी पत्ती डालकर उसका सेवन भी करें क्योंकि दूध पीने से भी ब्रेस्टमिल्क को बढ़ाने में मदद मिलती है। यदि आपको टाँके लगे हैं तो उसके सूखने के बाद आप प्लेन दूध पी सकते हैं लेकिन जब तक टाँके नहीं ठीक होते तब तक प्लेन दूध पीने से बचना चाहिए।

गर्म पानी पीएं

डिलीवरी के बाद कुछ दिनों तक हो सकें तो पानी को थोड़ा गर्म करके पीएं इससे शरीर को गर्माहट मिलने के साथ हानिकारक तत्व भी शरीर से बाहर निकलते हैं। इसके अलावा इससे महिला के वजन को भी नियंत्रीरत रहने में मदद मिलती है।

शिशु की भी मालिश करवाएं

महिला अपने साथ शिशु की भी मालिश करवाना शुरू कर दें आप उसके लिए भी कोई बाहर से मालिश वाली रख सकती हैं या फिर आपके घर में मौजूद कोई भी शिशु की मालिश कर सकता है। जिसे शिशु की मालिश करनी आती हो क्योंकि शिशु की मालिश करने से शिशु का शारीरिक विकास भी बेहतर होता है, शिशु की हड्डियां मजबूत होती है, शिशु को आराम पहुँचता है, आदि।

तो यह हैं कुछ काम जो डिलीवरी के तुरंत बाद महिला को करने शुरू कर देने चाहिए ताकि महिला को जल्द से जल्द रिकवर होने में मदद मिल सकें। इसके अलावा महिला को कम से कम चालीस दिन तक इसी रूटीन को फॉलो करना चाहिए इससे महिला को फिट व् एक्टिव रहने में मदद मिलती है और डिलीवरी के बाद शरीर में आई कमजोरी भी दूर हो जाती है।

प्रेगनेंसी में खाली पेट दूध पीने के नुकसान

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को एक दिन में कम से कम दो से तीन गिलास दूध का सेवन करना चाहिए। क्योंकि दूध प्रोटीन, कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है। जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला की शरीर को पोषण पहुंचाने में मदद करता है। साथ ही प्रोटीन व् कैल्शियम जैसे पोषक तत्व गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में भी मदद करते हैं।

लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान दूध का सेवन करते समय महिला को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे की महिला को कच्चा दूध नहीं पीना चाहिए, खाली पेट दूध नहीं पीना चाहिए, आदि। क्योंकि इन तरीकों से दूध पीने से महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा रहता है और कई बार इनका असर शिशु के विकास में भी दिक्कत पैदा कर सकता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खाली पेट दूध का सेवन क्यों नहीं करना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

पेट सम्बन्धी समस्या

गर्भावस्था के समय महिला को पाचन तंत्र से जुडी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि महिला खाली पेट दूध पीती है तो महिला को दूध को पचाने में मुश्किल हो सकती है। जिसकी वजह से महिला को गैस, सीने में जलन जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

उल्टी की समस्या अधिक हो सकती है

खाली पेट दूध पीने के कारण महिला को एसिडिटी बढ़ सकती है जिसकी वजह से महिला के मुँह का स्वाद अजीब हो सकता है और महिला को इस कारण उल्टियां अधिक हो सकती है।

शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है

यदि आप खाली पेट दूध का सेवन करते हैं तो इसकी वजह से आपको दूध को पचाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। जिसके कारण आपको पूरा दिन भारी भारी महसूस होता है और भूख कम लगती है। जिसकी वजह से शरीर में दूध में मौजूद पोषक तत्व तो आपके शरीर को मिलते हैं लेकिन अन्य कोई भी भोजन न लेने के कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। जिसका असर माँ व् बच्चे दोनों की सेहत पर पड़ता है।

दस्त की समस्या

खाली पेट दूध पीने के कारण दूध को पचाने में दिक्कत हो सकती है जिसकी वजह से महिला को दस्त की समस्या होने का खतरा रहता है। और इस वजन से महिला को शरीर में पानी की कमी, कमजोरी, चक्कर जैसी समस्या भी हो सकती है।

कफ की समस्या हो सकती है

खाली पेट दूध पीने के कारण कफ की समस्या होने का खतरा भी रहता है। साथ ही यदि महिला को कफ की समस्या पहले से होती है तो महिला की यह दिक्कत और भी बढ़ सकती है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो खाली पेट दूध पीने के कारण महिला को हो सकते हैं। ऐसे में महिला को दूध तो पीने चाहिए लेकिन खाली पेट दूध का सेवन नहीं करना चाहिए।

Pregnancy Me Kachcha Aam Video

Sid effect and benefits of raw mango during pregnancy. गर्भावस्था में कच्चे आम का सेवन

गर्भवती महिला को कच्चे आम का सेवन करने चाहिए या नहीं देखिये इस वीडियो में। ये आपके गर्भ के लिए कितना फायदेमंद होता है। गर्भ नुकसान से बचाने के लिए इस तरीके से कच्चे आम का यानी बिना पके हुए आम का सेवन करने चाहिए।

इम्युनिटी सिस्टम
इम्युनिटी सिस्टम का मजबूत होना गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान फ्लू, इन्फेक्शन जैसी अन्य बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करता है। ऐसे में कच्चे आम का सेवन करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद करता है।

पाचन तंत्र
कच्चे आम का सेवन करने से बॉडी में फाइबर की मात्रा को भरपूर बनाएं रखने में मदद मिलती है जिससे पाचन क्रिया को मजबूत रखने में मदद मिलती है। और प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को कब्ज़, एसिडिटी, सीने में जलन, पेट फूलना जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही इसके कारण गर्भवती महिलाओं को भूख की कमी जैसी परेशानी का सामना करने से भी बचे रहने में मदद मिलती है।

मॉर्निंग सिकनेस
बहुत सी गर्भवती महिलएं प्रेगनेंसी के दौरान मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से परेशान रहती हैं। और कच्चे आम का सेवन करने से गर्भवती महिला को इस समस्या से निजात पाने में भी मदद मिलता है, और सुबह उठने पर फ्रैश महसूस होता है।

ब्लड के लिए है फायदेमंद
कच्चे आम का सेवन करने से खून को साफ़ करने और ब्लड से जुडी बीमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है, क्योंकि इसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है। साथ ही कच्चे आम का सेवन करने से नए ब्लड सेल्स का भी निर्माण होता है, जिससे गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

एनर्जी
गर्भवती महिला के स्वस्थ रहने के लिए बॉडी में एनर्जी का भरपूर होना बहुत जरुरी होता है, और कच्चे आम का सेवन करने से बॉडी में एनर्जी की मात्रा को भरपूर बनाएं रखने में मदद मिलती है। इसीलिए गर्भवती महिला को एनर्जी के लिए कच्चे आम का सेवन, कच्चे आम का रस, घर में बनी ताज़ी चटनी आदि का सेवन जरूर करना चाहिए।

कैल्शियम
एक्सपर्ट्स के अनुसार प्रेगनेंसी के दौरान और डिलीवरी के बाद बहुत सी महिलाएं कैल्शियम की कमी के कारण कमजोरी की समस्या से ग्रस्त रहती है। लेकिन कच्चे आम में मौजूद विटामिन सी बॉडी में कैल्शियम की मात्रा की कमी नहीं होने देता है, जिससे गर्भवती महला की हड्डियों की मजबूती बने रहने के साथ कमजोरी जैसी समस्या से भी बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही कैल्शियम का भरपूर मात्रा में गर्भवती महिला के शरीर में होना गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास के लिए भी फायदेमंद होता है।

शुगर
जो गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान शुगर की समस्या से जूझ रही होती है, उनके लिए भी कच्चे आम का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि कच्चे आम का सेवन करने से बॉडी में ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है, जिसके कारण शुगर के कारण होने वाली परेशानी से बचाव मिलने में फायदा होता है।

गर्मियों में गर्भवती महिला के लिए है फायदेमंद
यदि गर्मी के मौसम के दौरान आप गर्भवती होती है, तो कच्चे आम का सेवन प्रेग्नेंट महिला को गर्मी में होने वाली परेशानियों से भी बचाने में मदद करता है। इसके सेवन से लू से बचने, गर्मी में आलस, थकान से बचने में मदद मिलती है। साथ ही महिला कच्चे आम का रस भी पी सकती है और इससे गर्भवती महिला को हाइड्रेटेड रहने में मदद मिलती है जिससे गर्भवती महिला को बॉडी में पानी की कमी के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

कच्चे आम का सेवन करने से होने वाले नुकसान
यदि गर्भवती महिला बहुत अधिक इसका सेवन करती है तो इसके कारण गले में इन्फेक्शन, पेट में दर्द जैसी परेशानी हो सकती है। साथ ही कच्चे आम के सेवन से पहले इसे अच्छे से धो लेना चाहिए ताकि इन्फेक्शन जैसी समस्या से बचे रहने में गर्भवती महिला को मदद मिल सके।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान कच्चे आम के सेवन से जुडी कुछ बातें ऐसे में यदि गर्भवती महिला का यदि कच्चे आम का सेवन करने का मन करे तो वह कर सकती है। साथ ही आम का सेवन मौसम के अनुसार ही करना चाहिए क्योंकि बिना मौसम के आने वाले आम कृत्रिम तरीको से पकाए जाते है जो गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।

गर्भवती महिला के लिए कच्चे आम का सेवन से गर्भ को बहुत ही ज्यादा फायदे मिलते हैं। Craving for raw mango during pregnancy

What are the side effects and benefits of raw mango during pregnancy? kachcha aam khane se kya hota hai. कच्चा आम खाने से क्या होता है गर्भवती महिला को, Eat Unripe Mangoes during Pregnancy Video

गर्भ में शिशु कितने घंटे सोता है?

प्रेगनेंसी महिला के लिए खुशनुमा होने के साथ थोड़ी अलग भी होती है। क्योंकि महिला को हमेशा यह जानने की इच्छा होती है की उनका शिशु गर्भ में क्या कर रहा है। लेकिन इस बारे में वो जान नहीं पाती है क्योंकि उनके पास कोई तरीका नहीं होता है जिससे वो जान सकें की उनका नवजात शिशु गर्भ में क्या कर रहा है।

लेकिन फिर भी महिला केवल यह सोचकर तसल्ली रखती है की उनका बच्चा गर्भ में किक कर रहा है तो इसका मतलब यह है की गर्भ में शिशु स्वस्थ है। आज इस आर्टिकल में आपसे क्या गर्भ में बच्चे सोते हैं? कितनी देर सोते हैं? क्या उनका सोने का कोई रूटीन होता है? उसके बारे में बात करने जा रहे हैं।

क्या गर्भ में शिशु सोता है?

गर्भ में शिशु बहुत कुछ करता है जैसे की अंगड़ाई लेता है, हँसता है, रोता है, अंगूठा चूसता है, आदि। वैसे की गर्भ में शिशु आराम भी करता है यानी की गर्भ में शिशु सोता भी है। और आपको यह जानकार हैरानी होगी की गर्भ में आपका शिशु हर दिन कम से कम 90% समय सोने में बिताता है। साथ ही ऐसा भी माना जाता है की जो शिशु गर्भ में अच्छे से नींद लेते हैं।

जन्म के बाद उनका सोने का तरीका बिल्कुल सही होता है। ऐसे में आप यह कह सकते हैं की शिशु का कोई रूटीन नहीं होता है क्योंकि वह ज्यादातर समय गर्भ में सोता ही है। और उसके बाद जैसे शिशु उठता है और गर्भ में में घूमता है तो आपको गर्भ में शिशु की हलचल ज्यादा तेजी से अनुभव होती है।

तो यह हैं गर्भ में शिशु कितनी देर सोता है उससे जुड़े कुछ टिप्स, साथ ही गर्भ में शिशु कितनी देर सोता है इसका कोई सही परिणाम अभी मौजूद नहीं है। ऐसे में गर्भ में शिशु क्या कर रहा है क्या नहीं महिला केवल उसका अंदाजा ही लगा सकती है।

How much time fetus sleeping in womb