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मछली खाने के फायदे

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मछली में प्रोटीन, फैटी एसिड, सैचुरेटेड फैट, विटामिन, मिनरल्स व अन्य बहुत से पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। जो आपकी बॉडी को फिट रखने के साथ उनके बेहतर विकास और उन्हें बीमारियों से दूर रहने में मदद करते हैं। ऐसे बहुत से लोग है जो मछली का सेवन केवल नॉन वेज के रूप में कभी कभार कर लेते हैं, लेकिन शायद वो मछली का सेवन करने के फायदे नहीं जानते हैं। इससे आपका हार्ट जिसका धड़कना आपके जिन्दा रहने के लिए जरुरी है उसे मछली का सेवन करने से स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा और भी ऐसे बहुत से फायदे हैं जो आपको मछली का सेवन करने से मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से मछली के सेवन से जुडी कुछ और बातों को विस्तार से जानते हैं।

मछली खाने के फायदे

जो लोग नॉन वेज का सेवन करते हैं उन्हें अपने आहार में मछली को जरूर शामिल करना चाहिए। और यदि आप मछली का सेवन नहीं करते हैं तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं की मछली का सेवन करने से कौन कौन से फायदे होते हैं। और इन फायदों को पढ़ने के बाद आप इसका सेवन जरूर करेंगे। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की मछली का सेवन करने से कौन कौन से फायदे होते हैं।

हदय सम्बन्धी समस्या से बचाव होता है

ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर मछली का सेवन करने से हार्ट और उसकी मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। साथ ही मछली में कम फैट होता है जो की बॉडी में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करके रखता है, और उसे बढ़ने नहीं देता है। इसीलिए हार्ट के रोगियों के लिए मछली का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।

कैंसर से बचाता है

जो लोग अपने आहार में मछली का सेवन करते हैं, उन्हें दूसरे लोगो की अपेक्षा कैंसर होने का खतरा कम होता है। क्योंकि इसमें मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड कैंसर की के लक्षणों को शरीर से दूर रखने में मदद करता है। इसके सेवन से प्रोस्टेट कैंसर और ब्रैस्ट कैंसर आदि से बचाव करने में मदद मिलती है। अगर आप नॉन वेज खाते हैं और मछली का सेवन नहीं करते हैं तो आज से ही इसे अपने आहार में आपको शामिल करना चाहिए।

मस्तिष्क के लिए है फायदेमंद

मछली में प्रोटीन भी भरपूर मात्रा में होता है जो की दिमाग की वृद्धि करने वाली कोशिकाओं की वृद्धि मस्तिष्क में करने में बहुत फायदा करता है। साथ ही इसमें मौजूद फैटी एसिड आपकी यादाश्त को बढ़ाने में मदद करता है, इसीलिए अपने मस्तिष्क को दुरुस्त रखने के लिए इसका सेवन जरूर करना चाहिए। साथ ही यदि आपके बच्चे नॉन वेज खाते हैं तो उनके दिमाग के बेहतर विकास के लिए आपको उन्हें जरूर मछली का सेवन करवाना चाहिए।

तनाव दूर करता है

कई बार व्यक्ति तनाव में आ जाता है जिसके कारण उसे और भी बहुत सी शारीरिक के साथ मानसिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में अवसाद को दूर करने के लिए मछली का सेवन करने से बहुत फायदा होता है, क्योंकि इसमें होने वाले फैटी एसिड आपके मस्तिष्क को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं जिसके कारण आपको तनाव से दूर करने में मदद मिलती है। ऐसे में महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान तनाव हो जाता है तो उन्हें मछली का सेवन करने से फायदा मिलेगा।

स्किन और बालों के लिए

मछली खाने से केवल आपको शारीरिक परेशानियों से ही निजात नहीं मिलता है बल्कि इसके सेवन से आपकी ख़ूबसूरती को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। यदि आप मछली का सेवन भरपूर करते हैं तो इससे आपकी स्किन को ग्लोइंग बनने के साथ आपके बालों को भी घना और सिल्की होने में मदद मिलती है, साथ ही इसके सेवन से बालों के झड़ने जैसी परेशानी से भी आपको निजात पाने में मदद मिलती है। इसीलिए आपको अपनी ख़ूबसूरती को बरकरार रखने के लिए इसका सेवन जरूर करना चाहिए।

हाई ब्लड प्रैशर को नियंत्रित करता है

मछली में कम फैट होता है जिसके कारण इसके सेवन से आपकी बॉडी में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। ऐसे में यदि आपको भी हाई ब्लड प्रैशर की समस्या रहती है तो आपको मछली का सेवन जरूर करना चाहिए, इससे आपके ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल में रहने में फायदा होता है।

आँखों के लिए है फायदेमंद

जिन लोगो को आँखों से सम्बन्धी समस्या होती है उसका सबसे बड़ा कारण होता है की उनके शरीर में ओमेगा 3 फैटी एसिड की कमी होती है। ऐसे में यदि आप मछली का सेवन करते हैं तो इससे आपको आँखों से जुडी परेशानी जैसे की चश्मा लगा होना, रात को धुंधला दिखाई देना, बच्चों को छोटी उम्र में चश्मा लगना आदि परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है। साथ ही इससे आपकी आँखों की रौशनी को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

शुक्राणु बेहतर होते हैं

एक रिसर्च के अनुसार जो पुरुष मछली का सेवन भरपूर करते हैं, उनके शुक्राणु बेहतर और स्वस्थ होने के साथ सक्रिय भी होते हैं। ऐसे में उनके सम्बन्धो में भी मधुरता रहती है।

श्वसन तंत्र के लिए है फायदेमंद

मछली का सेवन करने से आपके श्वसन तंत्र को भी बहुत फायदा मिलता है। इसीलिए अस्थमा के रोगियों को मछली खाने की सलाह दी जाती है। साथ ही खांसी व् अन्य कोई समस्या जो भी आपके श्वसन तंत्र से जुडी होती है इसके सेवन से आपको बहुत जल्दी उस समस्या से आराम पाने में मदद मिलती है।

ऊर्जा से भरपूर रहने के लिए

बॉडी को हमेशा ऊर्जा से भरपूर रखने के लिए जरुरी होता है की आपके शरीर की मांसपेशियों और हड्डियों को स्वस्थ रखा जा सकें। ऐसे में मछली में मौजूद प्रोटीन आपके शरीर को ऊर्जा से भरपूर रखने में आपकी बहुत मदद करता है। साथ ही यह आपके शरीर में नई कोशिकाओं का निर्माण करने के साथ कोशिकाओं की मरम्मत भी करता है, जिसके कारण आपके शरीर को फिट रहने में मदद मिलती है।

मछली खाने के अन्य फायदे

  • मछली का सेवन करने से आपकी नींद से जुडी परेशानियों को दूर करने और आपको बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।
  • महिलाओं को मछली का सेवन करने से झुर्रियों व् झाइयों की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।
  • जिन लोगो को भूलने की बिमारी होती है उन्हें मछली का सेवन करने से बहुत फायदा मिलता है।
  • मछली का सेवन करने से आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है जिससे बॉडी पर चर्बी जमने की समस्या से भी बचा जा सकता है, और आपको मोटापा जैसी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • बच्चों के विकास के लिए मछली का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
  • गर्भवती महिलाओं के लिए मछली का सेवन बहुत फायदेमंद होता हैं।
  • शरीर में प्रोटीन व् फैटी एसिड को भरपूर मात्रा में रखने में यह आपकी मदद करता है।
  • शुगर के रोगियों को मछली का सेवन करने से बहुत फायदा मिलता है।
  • आपके शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मछली का सेवन करने से बहुत फायदा मिलता है।
  • मछली का सेवन करने से आपके मूड को भी अच्छा रहने में मदद मिलती है।
  • आपके शरीर में कोशिकाओं के बेहतर विकास के लिए मछली में मौजूद फैटी एसिड बहुत फायदेमंद होता है।

तो यह हैं कुछ खास फायदे जो आपको मछली का सेवन करने से होते है। ऐसे में व्यक्ति को शारीरिक फिटनेस के साथ अपनी ख़ूबसूरती को बरकरार और दिमाग को दुरुस्त करने के लिए मछली का सेवन जरूर करना चाहिए। साथ ही अपने बच्चों को भी मछली का सेवन जरूर करवाना चाहिए।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद ऐसे रखें अपने स्वाथ्य और खान पान का ध्यान

सिजेरियन डिलीवरी के बाद ऐसे रखें अपने स्वाथ्य और खान पान का ध्यान:-

आज के समय में ज्यादातर डिलीवरी सिजेरियन ही होती है, कई महिलाएं डिलीवरी के समय दर्द न सहने के कारण सिजेरियन डिलीवरी का चुनाव करती हैं, तो कुछ महिलाओ को प्रेगनेंसी के समय होने वाली कॉम्प्लीकेशन्स के कारण भी सिजेरियन डिलीवरी करवानी पड़ती है। नार्मल डिलीवरी से ज्यादा उन महिलाओ को देखभाल की जरुरत होती है, जो सिजेरियन डिलीवरी की मदद से बच्चे को जन्म देती है, क्योंकि इसमें महिलाओ को टांके ज्यादा लगते है, और साथ ही कमजोरी भी ज्यादा होती है।

महिलाओ को अपने खान पान से लेकर अपने स्वास्थ्य का भी ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है, जैसे की महिलाओ को अपने घावों और टांको की ड्रेसिंग का ध्यान और साथ ही उनकी साफ़ सफाई का भी ध्यान रखना पड़ता है, ताकि इन्फेक्शन जैसी कोई समस्या न हो। इसके आलावा डॉक्टर भी सिजेरियन डिलीवरी वाली महिला को कम से कम दो महीने का बेड रेस्ट बताते है, ताकि उनके अंदर आई शरीरिक कमजोरी को अच्छे से वापिस लाया जा सकें, और साथ ही वो पूरी तरह से स्वस्थ हो सकें।

सिजेरियन डिलीवरी के दौरान कई बार घाव में खुजली या दर्द की परेशानी होने पर आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, बिना डॉक्टर की राय के खुद ही किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए, कच्चा या ठंडा दूध नहीं पीना चाहिए, इसके अलावा दूध में आपको थोड़ी सी चाय पत्ती को मिला लेना चाहिए, इसके अलावा बच्चे को स्तनपान कराते समय अपने उठने बैठने का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, अपनी कमर को अच्छे से सहारा लगाकर और गोद में सिरहाना रख कर उसपर आराम से बच्चे को लिटाकर स्तनपान करवाना चाहिए।

ऐसी ही कुछ छोटी छोटी बातें है जिनका ध्यान महिला को सिजेरियन डिलीवरी के बाद रखना चाहिए, महिलाओ को भारी सामान नहीं उठाना चाहिए, झुककर कोई काम नहीं करना चाहिए, ज्यादा तले भुने का सेवन नहीं करना चाहिए, पेट की थोड़े समय के लिए मसाज नहीं करनी चाहिए, व्यायाम से परहेज रखना चाहिए, बच्चे को स्तनपान जरूर करवाना चाहिए, आइये और भी अन्य टिप्स हम आपको विस्तार से बताते है, जो सिजेरियन डिलीवरी के होने पर महिलाओ के लिए लाभदायक सिद्ध हो सकते है।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाएं ऐसे रखें अपने खान पान और स्वास्थ्य का ध्यान:-

घावों का रखें ध्यान:-

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओ के घाव ताजे होते है, इसीलिए उनकी ड्रेसिंग का महिला को ध्यान रखना चाहिए, उस दौरान यदि उनका ध्यान न रखा जाएँ, तो इन्फेक्शन की समस्या हो सकती है, इसके अलावा हो सकें तो महिलाओ को कुछ दिन तक नहाने से भी परहेज रखना चाहिए, महिलाओ को ज्यादा टाइट, रेशमी और चुभने वाले कपडे नहीं पहनने चाहिए। महिलाएं सूती कपडे पहन कर आराम से रह सकती है, और महिलाओ को डॉक्टरी की सलाह के अनुसार ड्रेसिंग भी करनी चाहिए।

उठने बैठने का रखें ध्यान:-

महिलाओ को सिजेरियन डिलीवरी के बाद उठने बैठने का भी ध्यान रखना चाहिए। महिलाओ को एक दम से उठ कर नहीं बैठना चाहिए, इनसे उनके घावों पर असर पड़ सकता है, महिलाओ को पहले लेटे लेटे हलके से करवट लेनी चाहिए, और फिर बैठना चाहिए। महिलाओ को जितना हो सकें ज्यादा देर के लिए नहीं बैठना चाहिए, सिर्फ स्तनपान कराते समय ही बैठना चाहिए, और सहारा लेकर बैठना चाहिए। और महिलाओ को एक दम से चलना भी नहीं चाहिए बल्कि धीरे धीरे और थोड़ा थोड़ा करके चलने की शुरुआत करनी चाहिए।

आहार का रखें ध्यान:-

शुरूआती दिनों में महिलाओ को बिना घी तेल का स्वास्थवर्धक और हल्का आहार लेना चाहिए। ज्यादा भारी और कार्बोनेट वाला खाना आपके लिए हानिकारक हो सकता है, और साथ ही इसका असर बच्चे के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। महिला को विटामिन सी से भरपूर आहार लेने चाहिए जैसे ब्रोकली, पालक, साग, हरी मटर, संतरा, पीच, बेर, आदि में खूब सारा विटामिन सी पाया जाता है, परंतु ज्यादा मसालो और भारी खाने से कम से कम एक महीने तक दूर रहना चाहिए, और आपको संतुलित आहार लेना चाहिए ये आपको जल्दी रिकवर करने में मदद करता है।

स्तनपान से न करें परहेज:-

कई महिलाएं स्तनपान से परहेज रखती है, परंतु ये बच्चे के साथ महिला के लिए भी बहुत से फायदे पहुचता है, यदि महिला डिलीवरी के बाद रोजाना बच्चे को स्तनपान करवाती है तो, गर्भाशय को वापिस सही स्थिति में आने में मदद मिलती है, और कई बार महिलाएं नहीं जानती है की स्तनपान कैसे करवाया जाएँ तो आइए में वो नर्स की मदद या अपने घर में से किसी बड़े की राय ले सकती है, और स्तनपान बच्चे को हर बीमारी से दूर रखने के साथ बच्चे के विकास में भी बहुत अहम रोल निभाता है, इसीलिए आपको स्तनपान जरूर करवाना चाहिए।

ज्यादा तले भुने आहार से रखें परहेज:-

सिजेरियन के बाद जरुरी होता है की महिलाएं जितना हो सकें, संतुलित आहार लें, ज्यादा मसाले, घी, व् तले हुए भोजन से परहेज रखें, क्योंकि इसके सेवन से टांको को नुक्सान हो सकता है, और साथ ही उन्हें ठीक होने में समय लगने के साथ उनके पकने की आशंका हो जाती है, साथ ही महिलाओ को कभी भी दूध का सेवन ऐसे नहीं करना चाहिए बल्कि इस समय महिलाओ को दूध में थोड़ा पत्ती डाल कर पीना चाहिए, इससे स्तनपान करने वाली महिला के दूध में भी वृद्धि होती है।

ज्यादा भारी सामान नहीं उठाना चाहिए:-

महिलाओ को सिजेरियन डिलीवरी के थोड़े समय तक भारी सामान उठाने से परहेज करना चाहिए, साथ ही सीढिया भी नहीं चढ़नी चाहिए, ऐसा करने से टांको पर खिंचाव पड़ता हैं जिसके कारण पेट में दर्द जैसी परेशानिया उत्त्पन्न हो जाती हैं, और साथ ही ब्लीडिंग बढ़ जाती है, पेट में दर्द जैसी परेशानी होने लगती है, इसीलिए ऐसा नहीं करना चाहिए, साथ ही आपको जितना हो सकें रेस्ट करना चाहिए, ताकि आपको शारीरिक रूप से आराम मिल सकें।

सेक्स सम्बन्ध से रखें परहेज:-

सिजेरियन डिलीवरी के बाद जितना हो सकें सेक्स से भी परहेज रखना चाहिए, डॉक्टर्स के अनुसार कम से कम तीन से चार माह तक सिजेरियन डिलीवरी के बाद सेक्स नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पेट पर दबाव पड़ने के साथ गर्भाशय पर चोट लगने का भी खतरा रहता है, इस समय पर महिला की स्थिति बहुत नाजुक होती है, साथ ही महिला को डिलीवरी के बाद नार्मल डिलीवरी के मुकाबले ज्यादा ब्लीडिंग भी होती है, इसीलिए सिजेरियन डिलीवरी के बाद सेक्स करने से पहले हो सकें तो डॉक्टर की राय आवश्य लेनी चाहिए।

तनाव न लें:-

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओ को उठने बैठने में होने वली दिक्कत और साथ ही खान पान का ध्यान, बच्चे को स्तन पान करवाना, इन सबके एक साथ होने के कारण महिलाएं कई बार तनाव में आ जाती है, ऐसे में महिलाओ को तनाव में नहीं आना चाहिए, बल्कि इस बारे में अपने डॉक्टर से राय लेनी चाहिए, और विचार विमर्श करना चाहिए, ताकि आपके तनाव का इलाज़ हो सकें, और साथ ही आपको यदि सेक्स से सम्बंधित भी कोई बात करनी हो तो शर्माना नहीं चाहिए बल्कि खुलकर इस पर विचार करना चाहिए।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद ध्यान देने योग्य अन्य बातें:-

  • सिजेरियन डिलीवरी के बाद आराम से उठने बैठने के लिए महिलाओ को सिजेरियन बेल्ट का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • महिलाओ को जितना हो सकें तनाव से दूर रहना चाहिए।
  • जंक फ़ूड से परहेज रखना चाहिए।
  • पैरो के बल झुककर कोई काम नहीं करना चाहिए।
  • भारी सामान या किसी भी तरह का वजन उठाने से परहेज रखना चाहिए।
  • महिलाओ को शुरूआती दिनों में एक्सरसाइज या किसी भी तरह का डाइट प्लान नहीं बनाना चाहिए।
  • सिजेरियन केबाद किसी भी तरह का हल्का फुल्का दर्द होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइओ का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • ज्यादा सीढ़िया नहीं चढ़नी चाहिए, इससे दर्द या ब्लीडिंग की समस्या बढ़ सकती है।
  • जितना हो सकें सूती कपडे ही पहनने चाहिए।
  • बुखार, खांसी आदि से बच कर रहें, क्योंकि तेज कहानी की समस्या होने पर टांको पर झटका लग सकता है, और साथ ही टांको पर जोर पड़ने के साथ टांको के टूटने की समस्या भी हो जाती है।
  • ज्यादा देर तक नहाना भी नहीं चाहिए।

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सरसों का तेल या रिफाइंड क्या खाना चाहिए प्रेगनेंसी में

स्वस्थ रहने के लिए सही आहार का सेवन करना कितना जरुरी होता है यह तो आप सभी जानते ही हैं। लेकिन आपका आहार आपके लिए तभी फायदेमंद होता है जब उसे सही तरीके से पकाया जाता है। जैसे की यदि आप कच्चे आहार या आधे पके हुए आहार का सेवन करते हैं तो उसे हज़म करने में आपको दिक्कत होती है जिसके कारण पेट में दर्द जैसी परेशानी होती है। वैसे ही खाने बनाने के लिए आप किन किन चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं यह भी महत्वपूर्ण होता है।

यदि आप खाना तो भरपूर खा रही हैं लेकिन खाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली चीजें सही इस्तेमाल नहीं कर रही हैं तो इसके कारण भी आपको दिक्कत हो सकती है। और गर्भावस्था के दौरान तो इन सभी बातों का ध्यान ज्यादा रखने की जरुरत होती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भवती महिला को खाना बनाने के लिए सरसों के तेल इस्तेमाल करना चाहिए या रिफाइंड इस बारे में बताने जा रहे हैं।

क्या खाना चाहिए प्रेगनेंसी में सरसों का तेल या रिफाइंड?

गर्भावस्था के दौरान कुकिंग ऑयल का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि सही कुकिंग ऑयल भी आपके स्वास्थ्य को सही रखने में मदद करता है। और जब बात प्रेगनेंसी की हो तो इस बात का ध्यान रखना ज्यादा जरुरी हो जाता है। ऐसे में सरसों का तेल या रिफाइंड क्या खाना प्रेगनेंसी के दौरान सही होता है इसके बारे में जानना भी जरुरी होता है।

सरसों का तेल

सरसों का तेल सरसों के बीजों से निकाला जाता है और खाना पकाने के लिए सरसों के तेल को सबसे बेहतरीन माना जाता है। साथ ही सरसों के तेल एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। जो प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। लेकिन इसका फायदा आपको तभी मिलता है जब आप सरसों के तेल को अच्छे से जलाकर यानी पकाकर उसका सेवन करते हैं। क्योंकि यदि गर्भवती महिला कच्चे तेल का सेवन करती है तो इससे बॉडी में खून की कमी, फेफड़ों से सम्बंधित बीमारी, हदय सम्बंधित समस्या होने का खतरा रहता है।

रिफाइंड

रिफाइंड की बात की जाये तो इसमें बहुत से अलग अलग प्रकार का रिफाइंड आता है जैसे की कैनोला तेल, सोयाबीन तेल, कार्न ऑयल, सूरजमुखी तेल, मूंगफली तेल, आदि। ऐसे में गर्भवती महिला यदि रिफाइंड का इस्तेमाल करें और हर बार वह अलग तरह का हो तो इससे गर्भवती महिला को परेशानी हो सकती है। जबकि तिल, मूंगफली, सोयाबीन तेल वाला रिफाइंड पोषक तत्वों से भरपूर होता है लेकिन हो सकता है की इससे गर्भवती महिला को किसी तरह की एलर्जी हो। ऐसे में रिफाइंड का सेवन करके किसी तरह की समस्या का सामना करने से अच्छा है की सेहत के साथ किसी तरह की लापरवाही न बरती जाएँ।

तो ऐसे में यदि परिणाम की बात की जाये तो गर्भवती महिला के लिए सरसों का तेल का सेवन करना ही फायदेमंद होता है। क्योंकि इससे गर्भवती महिला की सेहत को नुकसान नहीं होता है बल्कि फायदे ही मिलते हैं। बस गर्भवती महिला को सरसों के तेल का सेवन करने से पहले इस बात का ध्यान रखना है की महिला सरसों के तेल को अच्छे से पका ले।

आँखों के नीचे सूजन और घरेलु उपाय

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आँखों के नीचे सूजन आने के कारण  और घरेलु उपाय 

कहते है की आँखे सब कुछ बोल देतीं है। इनकी अपनी ही अलग भाषा होती है। बड़ी, सुन्दर, कजरारी, और एक दम खूबसूरत सी आँखें किसको पसंद नहीं होती। आखों की खूबसूरती पर जितना कहा जाये उतना ही कम है।

पर क्या हो जब आँखों की खूबसूरती बदसूरती में बदल जाये, नहीं समझे! जी हां अगर आपकी आँखों के नीचे  सूजन आ जाये तब आप क्या करेंगे।  काया कभी सोचा है आप ने इस बारे में। तो आज इस आर्टिकल के माध्यम से जानते है की आँखों के नीचे सूजन के क्या है कारण? और क्या है घरेलू उपाय?

आँखों के नीचे सूजन आने के  कारण

धूल और मिटटी के कारण

जब कभी तेज़ हवाएँ चलती है, या फिर अचानक आंधी आ जाये तब भी आँखों में मिटटी के सूक्ष्म कण आँख में चले जाते है और आँखे सूज जाती हैं।

एलर्जी  के कारण

कई बार हम अपनी आँखों के लिए कोई ऐसा प्रोडक्ट इस्तेमाल कर लेते है जिसके कारण आखों में एलर्जी  हो जाती है। जैसे की कोई सस्ता आई लयनेर या फिर कोई मस्कारा जैसी चीज़ो से आँखों में एलर्जी हो जाती  है।

इन्फेक्शन के कारण

बहुत बार अपने देखा होगा की जब किसी को आँखों में कोई इन्फेक्शन होता है तब या तो इन्फेक्टेड person खुद भी अपनी आंख को ढक  कर रखता है पर फिर भी आँखे इतनी सेंसटिव होती है की किसी को भी जल्दी ही इन्फेक्शन कर ही देती हैं।

सामान्य रूप से बढ़ती उम्र

उम्र के साथ साथ शरीर में बदलाव होना एक सामान्य प्रक्रिया है। त्वचा ढीली हो जाती है पहले जैसी नहीं रहती। जो हमारी त्वचा का कसाव होता है जो उसकी चमक होती है अब वो नहीं रह पाती।  जिसके कारन भी आँखों के नीचे सूजन आ जाती है।

आँखों में ग्रंथियोँ से सम्बंधित रोग

आँखों में आंसू जब आते है या फिर जब कभी जेथोडा सा दभी रो देते है तब भी आँखों के नीचे सूजन आ जाती है। ऐसा इसलिए होता है की आँखों की ग्रंथियाँ या तो बहुत ही संवेदनशील होती है या फिर ग्रंथिओं में कोई रोग हो गया होता है। जो हमे सामान्य तरीके से नहीं पता चलता।

लेंस या चश्मा

आज कल तो बहुत देखने को मिलता है की लोग अपने आप को सुंदर दिखने के लिए चश्मे या लेंस का उपयोग अधिक करते है।  पर क्या ये सचमुच सुन्दर दिखने के साथ कोई  समस्या तो नहीं बढ़ाता जा रहा है। क्यूंकि लेंस से भी बार बार लगाने या हटाने से आँखों के नीचे सूजन हो सकती है।

आँख आना

आँख आना भी एक संक्रमण होता है। जो बहुत जल्दी एक दूसरे को फैलता  है। इसके लिए संक्रमित व्यक्ति से दूर रहना चाहिए।  नहीं तो इससे भी सूजन हो जाती है और आँखों में दर्द भी होता है।

नींद पूरी न होना

कई बार लगातार कोई काम करने से, या फिर जागे रहने से भी आँखों के नीचे सूजन हो जाती है। जब नींद


ठीक से पूरी नहीं होती तब भी आँखे दुखने लगती है और सूज जाती है।

शराब या ज्यादा एल्कोहलिक चीज़ो का सेवन

रात को सोते समय यदि ज्यादा शराब का सेवन किया जाये तब भी आँखों के आस पास सूजन हो जाती हैं।  सुबह देखने पर ये आराम से दिखाई देती है की आखों के नीचे सूजन है। शराब के अलावा भी किसी और प्रकार का नशा आँखों में सूजन का कारण बन जाता है

शराब हो या किसी भी प्रकार का कोई भी नशा कभी न करें। ये स्वास्थय के लिए हमेशा हानिकरक होता है।

खुजली और जलन

आँखों में कभी कभी अचानक खुजली होने लगती है और खुजली के साथ साथ जलन भी होने लगती है।  जिसके कारन भी आँखों में लालिमा हो जाती है और आँखों में सूजन बढ़ने लगती है।

आँखों में सूजन रोकने के घरेलु उपाय

साफ़ और ठंडा पानी

आँखों को हमेशा साफ़ और ठन्डे पानी से धोना चाहिए। दिन में कम से कम आँखों को ४ से ५ बार जरूर धोएं।

बर्फ़ का इस्तेमाल

आँखों को ठंडा और फ्रेश रखने के लिए बर्फ़ का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए आइस क्यूब को लेकर आँखों के आस-पास लगाए। और २ से ३ मिनट तक ये प्रक्रिया जरूर करें।

नमक का कम सेवन

आप तो जानते ही है की,नमक में सोडियम होता है और यह अधिक मात्रा में खाने से आँखों  पर इफेक्ट भी करता है।  इसलिए नमक की मात्रा का ध्यान रखें और हो सके तो कम ही खाए।

पानी का भरपूर सेवन

पानी की कमी के कारण भी आँखों में सूजन हो जाती हैं। इसके लिए पानी अधिक से अधिक पीएं।

विटामिन और मिनरल्स का सेवन

आँखों की कमी को जो सबसे पहले पूरी करता है वो है विटामिन और मिनरल्स। तो इससे पूरा करने के लिए अपने कहने पीने की चीज़ों में इसका सेवन अधिक से अधिक करें।

एलोवेरा फयदेमंद होता है

आखों के लिए एलोवेरा भी रामबाण उपाय है। एलोवेरा जैल को आँखों पर लगा कर अच्छे से हलके हाथ से ३-४ मिनट तक मसाज करें।

विटामिन ई क्रीम का इस्तेमाल करें

बहुत सी विटामिन ई की ऐसी क्रीम हैं जो बाजार में उपलब्ध है और आँखों के लिए लाभदायक भी होती हैं। इसके लिए आपको डॉक्टर से एक बार जरूर सलाह लेनी चाहिए की कब और कौन  सी  क्रीम आप इस्तेमाल कर सकते है।

आँखों के लिए मास्क

क्या आप जानते है की बाज़ारों में आखों के लिये भी मास्क उपलब्ध होते है। जो आँखों को ठंडक और शीतलता प्रदान करते है।

खीरे भी लाभदायक

खीरे को भी आप आँखों की सूजन और दर्द को दूर करने में इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए आप २ खीरे के स्लाइस काट लीजिए और फिर अपनी आँखों पर रख लीजिए। ये भी आँखों को बहुत लाभ पहुँचता है।

डॉक्टर की सलाह और जांच

आँखों के लिए कभी भी कोई रिस्क न लें। जब भी कभी कोई आँखों से जुडी छोटी से छोटी समस्या भी हो तो आप डॉक्टर के पास जरूर जाएँ और अपनी आंखों का इलाज जरूर करवाए। आँखों के लिए हमेशा अच्छे और विशेषज्ञ डॉक्टर से ही संपर्क करे।

नशीले पदार्थ का सेवन न करें

नशीले पदार्थ का सेवन न तो कभी स्वास्थय के ठीक होता है और न ही इसका कोई लाभ।  तो भूल कर भी कभी कोई नशा न करे।  नशा करने से न केवल आँखों पर असर होगा बल्कि पूरे शरीर पर बुरा ही प्रभाव पड़ेगा।

तो ये सब उपचार जो बताय गए हैं की नमक का सेवन कम करें,पानी खूब पीएं,नशे का सेवन बिलकुल भी न करें। एलोवेरा का इस्तेमाल करें। ठन्डे और साफ़ पानी से आँखों को धोयें। सनक्रीम और विटामिन ई क्रीम का इस्तेमाल करें। धूप से आँखों को बचाए। धूल ,मिट्टी और धुंए से दूर रहे। लगातार काम न करें। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल काम करें।  और सबसे जरुरी और उपयोगी बात की डॉक्टर से जुरु आप समय समय पर अपनी आँखों का चैकअप करवाए।

ये थे कुछ घरेलु उपचार  जिनसे आप अपनी आँखों के नीचे की सूजन  को खत्म कर सकते है। और अपनी आँखों का ध्यान खुद रख सकते है।

 

क्या प्रेगनेंसी में भी ब्लीडिंग होती है?

प्रेगनेंसी के समय ब्लीडिंग का होना किसी भी महिला को डरा सकता है, और इसे देखकर महिला के दिमाग में एक ही बात आती है, की कहीं उसका गर्भपात तो नहीं हो गया है, जो की गलत होता है प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग का मतलब हमेशा गर्भपात ही नहीं होता है, बल्कि इसके कई और कारण हो सकते है, जैसे की महिला के शरीर में हॉर्मोन का असंतुलन होना, तनाव के कारण या गलत तरीके से शारीरिक सम्बन्ध बनाने पर, और सच्चाई ये भी है की प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में स्पॉटिंग होना आम बात होती है, और इस दौरान महिला को अधिक आराम की जरुरत होती है, ताकि उसके गर्भाशय पर अधिक दबाव न पड़े।

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जबकि डॉक्टर्स का भी यह कहना है की स्पॉटिंग के बाद भी महिलाये आराम और दवाइयों की मदद से स्वस्थ शिशुओं को जन्म देती है, इसके अलावा ब्लीडिंग होने के कारण गर्भ में पल रहे शिशु और गर्भवती महिला पर किसी भी तरह का कोई असर नहीं पड़ता है, लेकिन कई बार ब्लीडिंग का होना कई जटिलताओं को भी जन्म दे सकता है, जैसे की कई बार ये गर्भपात, एक्टोपिक गर्भावस्था, प्लेसेंटल एबरप्शन या प्लेसेंटा प्रीविया का भी कारण हो सकती है, इसीलिए इसे अनदेखा भी नहीं करना चाहिए, और इसे एक दम से अनदेखा भी नहीं करना चाहिए तो आइये अब जानते है की प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होने के क्या क्या कारण हो सकते है।

इंप्लांटेशन ब्लीडिंग:-

कई महिलाओ को प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में ब्लीडिंग होना आम बात होती है, क्योंकि फर्टिलाइज़्ड अंडे को फैलोपियन ट्यूब से होते हुए गर्भाशय पहुंचना होता है, और वो अंडा गर्भाशय की लाइनिंग पर इंप्लांट होता है, और जैसे ही वो गर्भशय की लाइनिंग से जुड़ जाता है, तो गर्भाशय में प्रेग्नेंट महिला की रख धमनियों पर थोड़ा प्रभाव पड़ता है, इसीलिए ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होने लगती है।

हॉर्मोन में बदलाव होने के कारण:-

प्रेगनेंसी के समय पर आपको मासिक धर्म नहीं होता है, ऐसे में मासिक धर्म को नियंत्रण करने वाले हॉर्मोन की वजह से आपको गर्भावस्था के शुरूआती समय में ब्लीडिंग हो सकती है।

योनि में संक्रमण होने के कारण:-

योनि या यौन संक्रमण ( जैसे क्लेमीडिया, गोनोरिया या हर्प्स ) के कारण भी गर्भावस्था की पहली तिमाही में आपको ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है, इसीलिए गर्भावस्था के दौरान होने वाले संक्रमणों के बारे में डॉक्टर से राय लें और उनका जल्दी इलाज करवाएं।

गर्भपात होने के कारण:-

प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में आपके द्वारा की गई लापरवाही कई बार एबॉर्शन का कारण बन सकती है, इसके अलावा कई बार गर्भ में भी शिशु का विकास सही से न होने के कारण भी आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

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एक्टोपिक गर्भावस्था होने पर:-

एक्टोपिक गर्भावस्था में फर्टिलाइज़्ड भ्रूण गर्भाशय के बाहर ही इंप्लांट हो जाता है, आमतौर पर फैलोपियन ट्यूब में ही भ्रूण विकसित होने लगता है, जो की काफी परेशानी का विषय होता है, गर्भाशय की तुलना में यह काफी असामान्य होता है जो की साठ में से किसी एक महिला को ही होता है।

मोलर प्रेगनेंसी के कारण:-

ऐसा बहुत ही कम होता है की ब्लीडिंग के लिए मोलर प्रेगनेंसी जिम्मेदार हो, साथ ही मोलर प्रेगनेंसी को मोल भी कहा जाता है और इसमें भ्रूण की जगह एब्नॉर्मल टिशू विकसित हो जाता है, जो की प्रेगनेंसी ही नहीं होती है, और इसे जेस्टेशनल ट्रोफोब्लास्टिक डिजीज भी कहा जाता है।

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में ब्लीडिंग होने के कारण:-

प्लेसेंटल एबरप्शन के कारण:-

यह एक बहुत ही गंभीर स्थति होती है, जिसमें प्लेसेंटा गर्भाशय से अलग हो जाता है और उसके बाद प्लेसेंटा व गर्भाशय के बीच रक्त इकट्ठा हो जाता है, और यह केवल एक प्रतिशत महिलाओ में ही देखने को मिलती है, परन्तु यह महिला और शिशु दोनों के लिए ही हानिकारक होती है।

प्लेसेंटा प्रीविया के कारण:-

ऐसा तब होता है जब प्लेसेंटा गर्भाशय में थोड़ा नीचे रहता है और गर्भाशय के मुँह को अच्छे से ढक देता है,और इस दौरान ब्लीडिंग होते समय आपको दर्द का अनुभव भी नहीं होता है, ऐसे में और इसे अनदेखा न करते हुए आपको तुरंत ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

प्रीटर्म लेबर के कारण:-

ब्लीडिंग यदि दूसरी तिमाही में हो तो कई बार ये प्रीटर्म लेबर का भी संकेत हो सकता है, लेबर शुरू होने से कुछ हफ्ते पहले से म्यूकस प्लग निकलता है, यह आमौतर पर थोड़ा म्यूकस और खून से बना होता है, यदि आप ऐसा कुछ देखें तो समझिए आप प्रीटर्म लेबर में प्रवेश कर रहे हैंम, ऐसे में जल्द ही आपको अपने डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग होने पर रखें इन बातों का ध्यान:-

  • आपको पैड या पेंटी का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए ताकि आपको पता चल सकें की आपको कितनी ब्लीडिंग हो रही हैं, और आप पता लगा सकें की वो सामान्य है या नहीं।
  • इस दौरान शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए और न ही ऐसा कोई काम करना चाहिए जिससे आपके गर्भाशय पर दबाव पड़े।
  • यदि आप ऐसा लगता है की ब्लीडिंग होने पर आपको ज्यादा दर्द हो रहा है, या ब्लीडिंग में कुछ असामान्य दीख रहा है तो आपको डॉक्टर से भी राय लेनी चाहिए।
  • इस दौरान महिला को जितना हो सकें रेस्ट करना चाहिए।
  • पेट में मरोड़ उठना, पीठ में दर्द, अत्यधिक उलटी और स्पॉटिंग को बिलकुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • प्रेगनेंसी में आपको शारीरिक सम्बन्ध बनाते हुए भी ध्यान रखना चाहिए और जितना हो सकें इस बारे में डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।

तो प्रेगनेंसी में स्पॉटिंग को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि कई बार ये आपके लिए परेशानी भी कड़ी कर सकती है, साथ ही प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में आपको अपना अच्छे से ख्याल रखना चाहिए ताकि आपको किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो, और माँ और शिशु दोनों ही स्वस्थ रहें।

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प्रेग्नेंट महिला को पानी पीने का तरीका

प्रेग्नेंट महिला को पानी पीने का तरीका, प्रेगनेंसी में भरपूर पानी पीना क्यों है जरुरी, गर्भवती महिला को पानी पीने का सही तरीका, गर्भावस्था के दौरान कितना पानी पीना चाहिए, प्रेगनेंसी में पानी की कमी से होने वाले नुकसान, गर्भवती महिला को भरपूर पानी पीने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहा शिशु पूरी तरह से गर्भवती महिला पर ही निर्भर करता है, ऐसे में महिला के शरीर में होने वाले पोषक तत्वों की कमी, पानी की कमी, खून की कमी, आदि होने के कारण गर्भवती महिला की ही नहीं बल्कि, गर्भ में पल रहे शिशु की भी परेशानी बढ़ सकती है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने के साथ पानी का भी भरपूर सेवन करने की सलाह दी जाती है। आम तौर पर दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन करना व्यक्ति को स्वस्थ रखने के साथ एनर्जी से भरपूर रखने में भी मदद करता है। और प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ज्यादा ऊर्जा की जरुरत होती है ऐसे में महिला को भरपूर पानी का सेवन करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में महिला को पानी पीने का तरीका और समय

गर्भवती महिला को दिन में एक ही बार पानी का सेवन नहीं करना है बल्कि थोड़े थोड़े समय के अंतराल पर पानी का सेवन करना चाहिए। ताकि महिला के शरीर में पानी की मात्रा को सही रखने में मदद मिल सके। तो आइये जानते हैं की महिला को कब और कितना पानी पीना चाहिए, और पानी पीते समय क्या गलतियां नहीं करनी चाहिए।

  • गर्भवती महिला को दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन करने के साथ जूस, नारियल पानी आदि पेय पदार्थो का सेवन भी करना चाहिए।
  • सबसे पहले गर्भवती महिला को सुबह उठकर एक गिलास पानी का सेवन करना चाहिए, हो सके तो आप गुनगुना पानी पीएं यह ज्यादा फायदेमंद होता है।
  • उसके बाद फ्रेश होकर हल्का व्यायाम आदि करने के बाद फिर से निम्बू पानी, जूस, या नोर्मल एक गिलास पानी का सेवन करें।
  • व्यायाम करने के बाद पानी का सेवन करने आधे घंटे बाद आप नाश्ता कर लें, और जितंना हो सके खाने के बाद पानी पीने से बचें।
  • नाश्ता करने के आधे से एक घंटे बाद फिर से आप एक गिलास पानी का सेवन करें।
  • उसके बाद दोपहर का भोजन लेने से आधे घंटे पहले फिर से एक गिलास पानी पीएं, और खाने के एक घंटे बाद फिर से एक गिलास पानी का सेवन करें।
  • ऐसे में दिन में दो डेड से दो घंटे के अंतराल पर एक गिलास पानी जरूर पीएं इससे बॉडी में पानी मात्रा पर्याप्त रहने के साथ, आपको एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

पानी पीते समय रखें इन बातों का ध्यान

  • पानी को ज्यादा गर्म करके न पीएं।
  • एक साथ ज्यादा पानी का सेवन न करें, बल्कि थोड़ा थोड़ा करके पानी का सेवन करें।
  • यदि आपके घर में पानी साफ़ करने की मशीन आदि नहीं है तो पानी को अच्छे से उबालकर ठंडा करने के बाद उसका सेवन करें।
  • खाने के तुरंत बाद पानी पीने से बचें।

प्रेगनेंसी में पानी पीने के फायदे

गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी समस्याओं से परेशान रहती है, ऐसे में कुछ ऐसी परेशानियां भी है जिनका समाधान महिला के भरपूर पानी का सेवन करने से भी हो सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला के भरपूर पानी पीने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

  • प्रेगनेंसी के दौरान पानी का भरपूर सेवन करने से शरीर से विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद मिलती है, जिससे संक्रमण से बचाव करने में मदद मिलती है।
  • कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़, गैस, एसिडिटी की समस्या से परेशान रहती है। ऐसे में पानी का भरपयर सेवन पेट से सम्बंधित इन परेशानियों से निजात दिलाने में मदद करता है।
  • मॉर्निंग सिकनेस से बचाव के लिए भी पानी का भरपूर सेवन फायदेमंद होता है।
  • पानी का भरपूर सेवन प्रेगनेंसी में भी महिला की त्वचा की चमक को बरकरार रखने में मदद करता है।
  • पानी का भरपूर सेवन प्रेगनेंसी में होने वाली सूजन की समस्या से निजात दिलाने में भी मदद करता है।
  • शरीर में दर्द, सिर दर्द, आदि समस्या से निजात पाने के लिए भी गर्भवती महिला को भरपूर पानी का सेवन करना चाहिए।
  • गर्भवती महिला के शरीर में पानी की भरपूर मात्रा प्रेगनेंसी के दौरान महिला को एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करती है।
  • पानी की भरपूर मात्रा गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास, अच्छे से मूवमेंट, करने आदि में मदद करती है।

गर्भवती महिला को पानी की कमी से होने वाले नुकसान

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला के शरीर में पानी की कमी होती है तो उसे बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, जो की गर्भवती महिला के साथ शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकती है। तो आइये अब जानते हैं की गर्भवती महिला को पानी की कमी से कौन कौन से नुकसान हो सकते हैं।

  • पानी की कमी गर्भवती महिला के शरीर में दर्द, सूजन, चक्कर, कमजोरी आदि समस्या को बढ़ा सकती है।
  • पेट से सम्बंधित समस्या, यूरिन इन्फेक्शन व् अन्य संक्रमण आदि होने के चांस भी बढ़ सकते हैं।
  • एमनियोटिक फ्लूड में कमी का कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जिसके कारण गर्भ में शिशु असहज महसूस कर सकता है।
  • गर्भ में शिशु के विकास में कमी का एक कारण गर्भवती महिला के शरीर में होने वाली पानी की कमी भी हो सकती है।
  • प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही शरीर में पानी की कमी समय पूर्व प्रसव का कारण भी बन सकती है। क्योंकि इसके कारण बॉडी में खिंचाव महसूस होने लग जाता है।
  • शुरुआत के दिनों में पानी की कमी के कारण महिला को गर्भपात जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है, क्योंकि पानी की कमी के कारण बॉडी ज्यादा हीट प्रोड्यूस करने लगती है, जिसके कारण गर्भाशय में संकुचन होने के कारण ऐसा हो सकता है।
  • इसके कारण गर्भ में शिशु की त्वचा की नमी में भी कमी आ सकती है जिसके कारण स्किन सिकुड़ने लगती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान पानी पीने से जुड़े कुछ खास टिप्स, साथ ही यदि आप भी गर्भवती है तो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए, ताकि आपको और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को इसका फायदा मिले। और पानी की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से बचाव करने मे मदद मिल सके।

अगर आप इस तरह से मेहंदी लगाएंगे बालों में तभी होंगे फायदे!

मेहँदी का उपयोग बालों के लिए करने से आपको इन्हे सफ़ेद होने से बचाने में, बालों को घना बनाने में, चमकदार बनाने के लिए, बालों के झड़ने की समस्या से राहत पाने में, बालों के रंग में बदलाव के लिए मदद मिलती है, मेहँदी का इस्तेमाल यदि आप बालों के लिए करते है तो ये बालों को प्राकृतिक रूप से फायदा देती है, क्योंकि इसमें केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता है, इसके अलावा यदि आप मेहँदी का इस्तेमाल बालों पर करने के लिए इसमें और भी जड़ी बूटियों का इस्तेमाल करते है, तो ये आपको बालों से जुडी और भी परेशानियों से बचा सकती है।

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बालों से महिला की ख़ूबसूरती को बढ़ावा मिलता है, परन्तु यदि बाल रूखे हो, उनमे चमक न हो, या असमय सफ़ेद हो जाएँ, तो सुन्दर से सुन्दर महिला की ख़ूबसूरती भी फीकी पड़ सकती है, परन्तु यदि आप अपने बालों की चमक बड़ा कर उनमे जान डालना चाहते है तो मेहँदी का प्रयोग करने से आपको बहुत फायदा मिलता है, इसके अलावा यदि आप मेहँदी का मिश्रण सही नहीं बनाते है, और आपको ये नहीं पता होता है की उसमें क्या मिलाना चाहिए, तो इसके कारण बालों में रूखापन आ सकता है, तो आइये आज हम आपको बताते है की बालों से जुडी कौन सी परेशानी के लिए आपको कौन सी चीज को मेहँदी में मिलाना चाहिए जो आपके बालों के लिए फायदेमंद होती है, उसके बाद मेहँदी को बालों में किस तरह लगाएं इस बारे में जानेंगे।

बालों में मेहँदी लगाने के फायदे:-

  • ये बालों को शाइन और बालों को घना बनाने में मदद करती है।
  • स्कैल्प पर होने वाले डैंड्रफ, खुजली आदि की समस्या से राहत दिलाती है।
  • बालों के लिए कंडीशनर का काम करती है।
  • लम्बे बालों की चाह रखने वालो के लिए भी फायदेमंद होती है।
  • बालों के झड़ने की समस्या से राहत दिलाने में मदद करती है।
  • बालों को असमय सफ़ेद होने की समस्या से आराम दिलाती है।

मेहँदी में करें कैसे जड़ी बूटियों का इस्तेमाल:-

बालों के रंग में बदलाव के लिए:-

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कुछ लोग मेहँदी का इस्तेमाल बालों के रंग में बदलाव करने के लिए भी करते है, और ज्यादा लोग बालों में बरगंडी रंग करना चाहते है, इसके लिए आप मेहँदी में गुड़हल के फूलों को पीस कर मिलाएं, और उसके बाद इसे बालों में लगाएं आपके बालों के रंग में बदलाव आ जायेगा।

सर्दी से बचाव के लिए:-

कई लोग ऐसे भी होते है जिन्हे मेहँदी लगाने के कारण जुखाम आदि हो जाता है, या वो सर्दियों में अपने बालों में मेहँदी का इस्तेमाल करते है, इससे बचने के लिए आप मेहँदी में लौंग को पीस कर, तेल, चाय या कॉफ़ी का पानी, सूखा आंवला, शलगम जूस, दालचीनी, अखरोट आदि को भी मिक्स कर सकते है, ऐसा करने से आपके बालों में चमक भी आती है, साथ ही आपको सर्दियों में आराम मिलता है, और जुखाम आदि से बचाव में भी मदद मिलती है।

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बालों को असमय सफ़ेद होने से बचाने के लिए:-

कई लोगो के बाल उनकी उम्र से पहले ही सफ़ेद होने लग जाते है, इस समस्या से बचाव के लिए भी आप मेहँदी में एक चम्मच पीसा हुआ कपूर, और एक चम्मच मैथी पाउडर को मिक्स कर दें, ऐसा करने से आपको बालों के समय सफ़ेद होने की समस्या से राहत मिलती है।

बालों के झड़ने की समस्या से राहत के लिए:-

यदि आप किसी बिमारी से उठे है, और आपके बाल नियमित झड़ रहे है तो आपको इस को गरम पानी में घोल कर हफ्ते में दो से तीन बार अच्छे से अपने बालों की जड़ में लगाना चाहिए, इसके कारण आपके बालों के झड़ने की समस्या से राहत मिलने के साथ बालों को घना बनने में भी मदद मिलती है।

बालों की चमक बढ़ाने के लिए:-

यदि आप अपने बालों की चमक को बढ़ाना चाहते है तो आपको इस में चाय का पानी मिलाकर लगाना चाहिए, और यदि आप अपने बालों का रंग काला ही रखना चाहते है, तो काली मेहँदी लगाने के बाद बालों को धोने के लिए मेहँदी के पानी का इस्तेमाल करें, यह बालों के लिए कंडीशनर का काम करता है, और बालों की चमक को बढ़ाने में मदद करता है।

बालों का रूखापन खत्म करने के लिए:-

बालों में यदि रूखेपन की समस्या है तो आप इस में दही या लस्सी मिलाकर लगानी चाहिए, ऐसा करने से आपके बालों को रूखेपन की समस्या से राहत मिलती है, और बालों की चमक को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

मेहँदी लगाने के लिए तरीका:-

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  • सबसे पहले आप चाहे तो एक रात पहले इस को भिगो कर रख दें, यदि आप चाय का पानी डालना चाहते है तो उसमें भिगो कर रख दे।
  • उसके बाद सुबह उठ कर आप इसमें जो कुछ भी मिलाना चाहते है, मिला लें, जैसे दही, अंडा, मैथी पाउडर, लौंग जो भी, परन्तु याद रखें की मिक्सचर ज्यादा पतला न हो, क्रीमी मिक्सचर ही बनाएं।
  • उसके बाद अपने बालों को कंघी करें, और बालों को सुलझा लें ताकि इसे लगाने में परेशानी न हो।
  • उसके बाद अपने हेयर लाइन की तरफ अच्छे से वेसेलिन लगा लें, ताकि वहां मेहँदी अपना रंग न छोड़ें।
  • उसके बाद बालों के छोटे छोटे सेक्शन बनाकर इसे लगाएं, इसके साथ आप बालों को एक साथ करने के लिए क्लिप का इस्तेमाल कर सकती है, या आप सिर में बीच में क्राउन भी बना सकते है।
  • ऐसे ही धीरे धीरे आप अपने पूरे बालों में इसे लगाएं, और थोड़ी देर के लिए बालों में रहने दें, और उसके बाद अपने बालों को पानी की मदद से धो लें, शैम्पू का इस्तेमाल बालों को धोने के लिए न करें।

नोट:-

बालों को आप मेहँदी लगाने से पहले ऑयल लगाना चाहती है, तो एक या दो घंटे बाद लगा सकती है, इसके अलावा आप मेहँदी धोने के बाद तेल एक या दिन तक लगाने के बाद भी सर को धो सकती है, और यदि आपको मेहँदी लगाने से इन्फेक्शन होता है, तो आपको इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए, साथ ही यदि आप महीने में दो बार बालों में मेहँदी लगाते है तो आपके बालों को घना बनाने में मदद मिलती है।

तो ये है मेहँदी के गुण, आपको मेहँदी बालों में लगाने के फायदे, और आप बालों के लिए किस तरह से इसका का इस्तेमाल कर सकते है, इसके अलावा आपको जो भी चीज इस में मिलानी हो, या फिर मेहँदी हो उसे देखकर लेना चाहिए, वो ताजा होना चाहिए, ज्यादा समय की चीजों का इस्तेमाल करने से मेहँदी फायदा भी नहीं करती है, साथ ही बालों से जुडी अन्य परेशानियां हो जाती है।

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जब कुछ खाने का मन न करे प्रेगनेंसी में

जब कुछ खाने का मन न करे प्रेगनेंसी में, प्रेगनेंसी में भूख की कमी के कारण, प्रेगनेंसी के दौरान जब कुछ खाने का मन न करे तो क्या करे, गर्भवती महिला के लिए टिप्स, प्रेगनेंसी में भूख बढ़ाने के तरीके

खान पान का बेहतर होना प्रेगनेंसी के दौरान बहुत जरुरी होता है, क्योंकि बेहतर खान पान गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियों से बचाव करने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करता है। लेकिन कई बार ऐसा हो सकता है की गर्भवती महिला को कुछ भी खाने का मन न करे। और इसका कोई एक नहीं बल्कि बहुत से कारण हो सकते हैं, जैसे की शरीर में होने वाले बदलाव के कारण महिला का तनाव में आना, उल्टी आने के डर से खाने का मन नहीं करना, जीभ का स्वाद अलग होने के कारण, कब्ज़ या पेट से जुडी समस्या होने के कारण, आदि। लेकिन यदि आप प्रेगनेंसी में बेहतर खान पान नहीं रखती है, समय से आहार नहीं लेती है, लापरवाही करती हैं, तो ऐसा करने के कारण गर्भवती महिला को परेशानी होने के साथ शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। तो लीजिये आज हम प्रेगनेंसी के दौरान कुछ खाने का मन न करें तो आपको किस तरह अपनी भूख को बढ़ाना चाहिए इससे जुड़े कुछ खास टिप्स बताने जा रहे हैं।

तरल पदार्थ लें

यदि आपका कुछ खाने का मन नहीं कर रहा है तो आपको पानी, जूस, नारियल पानी, आदि पेय पदार्थ भरपूर मात्रा में लेने चाहिए। ऐसा करने से शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं, आपके पेट से सम्बंधित समस्या का समाधान होता है। जिससे आपकी भूख धीरे धीरे बढ़ने लगती है, और आपका खाने का मन करता है।

पेट भरकर न खाएं

प्रेगनेंसी में यदि आपका कुछ खाने का मन न करें, तो आपको धीरे धीरे खाने की शुरुआत करनी चाहिए। और बड़े मील लेने की बजाय जितना आपसे खाया जाए, उतना मील दो से तीन घंटे के अंतराल पर लें। ऐसा करके आप इसे धीरे धीरे अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं, और आपको कोई परेशानी भी नहीं होती है, साथ ही एक ही तरह का खाना न खाएं बदल बदल कर अपने आहार को खाएं।

मुँह की साफ़ सफाई

मुँह का स्वाद अजीब होने के कारण, उल्टी आने जैसा मन होने के कारण, भी महिला का खाने का मन नहीं करता है। ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वो अपने मुँह की साफ़ सफाई का खास ध्यान रखे जिससे मुँह फ्रैश फील करे, और आपका खाने का मन करे।

हल्का खाएं

शुरुआत में आपको हल्के मील के साथ पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए, ज्यादा तेज गंध और ज्यादा मसालों वाले खाने से परहेज करना चाहिए। क्योंकि इससे पेट सम्बन्धी समस्या हो सकती है, इसके लिए आप फलों को अच्छे से धोकर उनका सेवन करें, अधिक मसालों का प्रयोग किये बिना अपनी पसंदीदा सब्जियों आदि का सेवन करें।

व्यायाम करें

यदि आपको भूख नहीं लगती है, या खाने का मन नहीं करता है, तो आप हल्का व्यायाम या योगासन करें। इससे न केवल आपकी बॉडी फिट रहेगी, बल्कि आपको तनाव आदि समस्या से भी निजात पाने में मदद मिलेगी। जिससे आपको धीरे धीरे भूख लगने लगेगी।

डॉक्टर से राय लें

कई बार शारीरिक परेशानियों के अधिक होने के कारण भी खाने का मन नहीं करता है, ऐसे में अधिक परेशानी होने पर इससे बचाव के लिए एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। ताकि आपकी परेशानी का समाधान हो सके और आपको खाने का मन करने लगे।

प्रेगनेंसी में खाना खाने से कभी भी परहेज नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे गर्भवती महिला और शिशु दोनों को दिक्कत हो सकती है। ऐसे में समय से और थोड़ा थोड़ा करके खाने की शुरुआत करे, और ज्यादा दिक्कत होने पर डॉक्टर से राय लें, लेकिन खाने के प्रति लापरवाही न करे।

चेहरे का फैट कम करने के तरीके

जब भी आप किसी से मिलते है तो उसकी सबसे पहले नज़र आपके चेहरे पर ही जाती है, ऐसे में जहां हर किसी को सूंदर, हॉट और सेक्सी दिखने का शौक होता है, वहीँ आपके चेहरे की चर्बी न केवल आपका फर्स्ट इम्प्रैशन खराब करती है, बल्कि आपको आपकी उम्र से बड़ा भी दिखाती है, अब आप खुद ही सोचिये की यदि आपकी बॉडी का वजन बढ़ जाता है, तो आप उसे कम करने के लिए क्या क्या नहीं करते है, लेकिन क्या अपने कभी अपने चेहरे के लिए ऐसा कुछ किया कोई योगा, या एक्सरसाइज आदि, यही कारण होता है की कभी आपका चेहरा आपकी बॉडी की तरह पतला नहीं हो पाता है।

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लेकिन यह भी कोई ऐसी परेशानी भी नहीं है की जिसका इलाज संभव न हो, बल्कि यदि आप अपने चेहरे की मसल्स की एक्सरसाइज या योगा भी करती है तो भी आपको इस समस्या से राहत मिल जाती है, लेकिन यदि आप इसे नियमित रूप से करें, तो तो आइये आज हम आपकी स्किन से जुडी इसी समस्या से बचने के लिए आपको कुछ तरीके बताते है जिनसे आपको इससे बचने में राहत मिलेगी, और साथ ही आपका चेहरे आपकी बॉडी के अनुसार भी हो जाएगा, एक्सरसाइज के अलावा आपको अपने खानपान से सम्बंधित भी कुछ चीजों का ध्यान रखना पड़ता है, तो आइये जानते है की वो चीजे कौन सी हैं।

च्विंगम चबाएं:-

जी हाँ च्विंगम चबाने से आपके चेहरे की चर्बी को कम करने में मदद मिलती है, आपने बहुत से सेलेब्रिटीज़ को ऐसा करते हुए देखा होगा, क्योंकि जब आप इसे चबाते है, तो आपके चेहरे के लिए ये किसी व्यायाम से कम नहीं होता है, इसके करने से आपके चीकबोन्स कम होते है, जिससे आपका चेहरे की लुक को बेहतर बनने में मदद मिलती है, साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें की च्विंगम कम शुगर वाली हो।

फेशियल मसाज करवाएं:-

चेहरे की चर्बी जमने के साथ कई बार आपकी स्किन लटकने भी लग जाती है, इससे बचने के लिए आपको फेशियल मसाज करवानी चाहिए ऐसा करने से आपकी त्वचा में कसाव आता है, जिसके कारण आपके चेहरे की चर्बी को कम होने में मदद मिलती है, साथ ही आपके चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में मदद भी मिलती है।

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नमक का सेवन कम करें:-

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हमारे शरीर में नमक की मात्रा 3.8 मिलीग्राम चाहिए होती है, और यदि इससे ज्यादा आपके शरीर में नमक की मात्रा हो जाती है, तो आपको सूजन व् शरीर में पानी की कमी की समस्या हो जाती है, साथ ही आपके ज्यादा नामक का सेवन करने से आपकी रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ता है, जिससे चेहरे पर सूजन आने लगती है, जिसे की आप चेहरे की चर्बी भी कह सकते है, इससे बचने के लिए आपको नमक का सेवन कम करना चाहिए।

शराब का सेवन कम करें:-

यदि आप अधिक मात्रा में शराब का सेवन करते है तो इसके कारण भी आपके चेहरे पर सूजन की समस्या खड़ी हो जाती है, क्योंकि शराब का सेवन करने से आपके शरीर में पानी की कमी होती है, जिसके कारण आपकी त्वचा डिहाइड्रेट हो जाती है, जिसके कारण हानिकारक तत्व आपके शरीर के हिस्सों में इक्कठे होने लगते है, और आपके चेहरे पर भी चर्बी जमने लगती है, इसीलिए आपको यदि ये समस्या है तो शराब का सेवन कम करना चाहिए।

कैल्शियम युक्त आहार का सेवन करें:-

अपने आहार में आपको कैल्शियम युक्त आहार का अधिक सेवन करना चाहिए, ऐसा करने से आपके फेशियल बोन्स मजबूत होंगे, जिसके कारण आपके चेहरे पर कम फैट इकठ्ठा होगा, इसके लिए आप अपने आहार में दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियों आदि को भरपूर मात्रा में शामिल करें।

पानी का भरपूर सेवन करें:-

चेहरे पर जमी चर्बी का एक कारण आपके शरीर में होने वाली पानी की कमी भी हो सकता है, क्योंकि इसके कारण आपकी त्वचा डिहाइड्रेट हो जाती है, जिसके कारण आपके शरीर में चर्बी जमने लगती है, और इसी कारण आपके चेहरे की त्वचा भी अपनी नमी खो देती है, और आपके चेहरे पर सूजन होने लगती है, इससे बचने के लिए आपको पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

हरी सब्जियों और फलों का सेवन भरपूर मात्रा में करें:-

चेहरे की चर्बी को कम करने के लिए जरुरी है की आपके शरीर में मिनरल्स भरपूर मात्रा में हो, जिससे आपके शरीर में रक्त का संचार अच्छे से होने में मदद मिल सकें यदि आपके शरीर में रक्त का संचार अच्छे से होगा तो आपको फिट रहने में मदद मिलेगी साथ ही आपके चेहरे की चर्बी भी कम होगी, इसके लिए आपको अपने आहार में सभी सब्जियों व् फलों को शामिल करना चाहिए।

चेहरे की चर्बी को कम करने के लिए व्यायाम:-

face yoga

  • आपको खुल कर हंसना चाहिए इससे आपके चेहरे की मांसपेशियों की एक्सरसाइज होती है, जिससे आपके चेहरे की चर्बी को कम होने में मदद मिलती है।
  • दिन में जब भी आप फ्री हो तो आप ” X ” और ” O ” का उच्चारण करें इससे भी आपके चेहरे की चर्बी को कम होने में मदद मिलेगी।
  • दिन में तीन से चार बार अपने मुँह को दस मिनट तक खोल कर रखें, इससे आपकी मांसपेशियों में खिचाव उत्त्पन्न होगा, और आपको पतला होने में मदद मिलती है।
  • अपने गालों को फुलाएं, उसके बाद पहले हवा एक गाल तो फिर दूसरे गाल में करें, ऐसा करने से भी आपके चेहरे की चर्बी को कम होने में मदद मिलती है।
  • सबसे पहले सुखासन की अवस्था में बैठ जाएँ, उसके बाद अपनी उँगलियों को ऊपर की तरफ मिलाएं, और दोनों अंगूठो की मदद से अपनी नाक को बंद करें, और अपने गालों को फुलाएं, उसके बाद आप जितनी देर तक सांस रोक सकते है रोकें और फिर धीरे धीरे उसे बाहर छोड़ दें, ऐसा कम से कम दस बार करें, इससे आपके चेहरे की अतिरिक्त चर्बी को कम होने में मदद मिलती है।
  • इसके अलावा आप अपने हाथो की मदद से अपने गालों को ऊपर की और उठाएं जितना उठा सकते है, उसके बाद इस दस से पंद्रह बार करें, इन आसन को करने से भी आपके चेहरे की चर्बी को कम होने में मदद मिलती है।

तो ये कुछ टिप्स है जिनका इस्तेमाल करने से आपको चेहरे की चर्बी को कम करने में माद्दा मिलती है, साथ ही यदि आप ऊपर दिए गए योगा को नियमित करते है, तो इससे आपके चेहरे की चर्बी कम होने के साथ आपके चेहरे की ख़ूबसूरती को भी बढ़ने में मदद मिलती है।

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प्रेगनेंसी में दिनचर्या कैसी होनी चाहिए

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फिट रहने के लिए बहुत जरुरी है की वो अपना ध्यान अच्छे से रखे खान पान से लेकर, सोने का, उठने, बैठने, चलने का सभी चीजों का अच्छे से ध्यान रखे। क्योंकि जितना महिला अपना अच्छे से ध्यान रखती है उतना ही शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। और पूरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला अपनी एक बेहतरीन दिनचर्या बनानी चाहिए जिससे उसके खाने पीने या किसी अन्य काम में किसी भी तरह की लापरवाही न हो। तो आइये आज हम आपको बताने जा रहे हैं की प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला की दिनचर्या कैसी होनी चाहिए।

सुबह समय से उठें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सुबह समय से उठना चाहिए ताकि आठ से नौ बजे तक महिला अपना पहला मील ले ले। क्योंकि रात के बाद सुबह के खाने में ज्यादा देरी कमजोरी व् मॉर्निंग सिकनेस की समस्या को ज्यादा बढ़ा सकती है। इसीलिए महिला को सुबह समय से उठना चाहिए।

दो घंटे बाद ले आहार

शिशु के बेहतर विकास के लिए वो पूरी तरह से गर्भवती महिला पर ही निर्भर करता है, और गर्भवती महिला को भी अपने स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान दो घंटे के बाद कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए। इससे शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर रहती है साथ ही शिशु का वकास भी बेहतर तरीके से होते हैं। और खान पान की ऐसी ही दिनचर्या रखती चाहिए जिसमे केवल पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए, जंक फ़ूड, ज्यादा ऑयली आहार का सेवन नहीं करना चाहिए। और ऐसा नहीं है की हर बार खाना ही खाना है, बल्कि स्नैक्स आदि का सेवन भी आप कर सकती हैं।

पेय पदार्थ ले भरपूर

दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन करने के साथ जूस, नारियल पानी, दूध, शेक आदि भी पीना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान पानी का भरपूर होना बॉडी के लिए बहुत जरुरी होता है। साथ ही पानी की मात्रा भरपूर होने से प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों से बचाव करने में भी मदद मिलती है।

दवाइयां समय से लें

प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर द्वारा महिला को कैल्शियम, आयरन, आदि खाने की सलाह दी जाती है, ताकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने के साथ शिशु क्विकस में भी कोई कमी न आए। ऐसे में महिला को दवाइयां लेने में भी लारपरवाही नहीं करनी चाहिए और समय से उनका सेवन करना चाहिए।

शाम को करें थोड़ी देर वॉक

प्रेगनेंसी के दौरान सुबह उठकर व्यायाम आदि करना मुश्किल होता है, लेकिन शाम को थोड़ी देर वॉक जरूर करनी चाहिए। क्योंकि इससे प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहने में मदद मिलती है, साथ ही ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। और इससे प्रेगनेंसी के समय आपको फिट रहने में भी मदद मिलती है।

नींद में न करे लापरवाही

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण शरीर में कमजोरी का होना एक आम बात होती है। ऐसे में इस कमजोरी की समस्या से राहत पाने के लिए आपको और शरीर को आराम देने के लिए बहुत जरुरी है की आप नींद में बिल्कुल भी लापरवाही न करें। साथ ही रात को समय से सो जाएं, और हो सके तो दिन में भी एक घंटा आराम करें ऐसा करने से आपको प्रेगनेंसी के दौरान फिर रहने के साथ थकान व् कमजोरी जैसी परेशानी से भी बचे रहने में मदद मिलेगी।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो की आपको प्रेगनेंसी में ध्यान रखना चाहिए और अपनी दिनचर्या को ऐसा ही रखना चाहिए। ताकि शिशु के बेहतर विकास के साथ गर्भवती महिला को भी प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहने में मदद मिल सके।

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प्रेग्नेंसी में दिनचर्या, गर्भावस्था में महिला की दिनचर्या कैसी होनी चाहिए? क्या करें क्या नहीं किन बातों का रखें ध्यान? जानें सम्पूर्ण जानकारी।