प्रेगनेंसी के दौरान और डिलीवरी के बाद महिला को बहुत से शारीरिक बदलाव से गुजरना पड़ता है, जिसके कारण महिला को परेशानी का अनुभव हो सकता है। ऐसा ही एक बदलाव महिला के प्राइवेट पार्ट में भी आता है और वो है प्राइवेट पार्ट का ढीला होना, खासकर नोर्मल डिलीवरी वाली महिला के प्राइवेट पार्ट में ढीलापन ज्यादा आ सकता है। और शिशु के जन्म के बाद प्राइवेट पार्ट में ढीलापन आपकी शादीशुदा जिंदगी के आनंद को थोड़ा कम भी कर सकता है। ऐसे में जिस तरह प्रेगनेंसी के दौरान और डिलीवरी के बाद महिला अपनी फिटनेस का ध्यान रखती है, उसी तरह महिला को अपनी स्किन के ढीलेपन को दूर करने और प्राइवेट पार्ट को ढीलेपन को दूर करने के लिए जरूर कुछ न कुछ करना चाहिए।
प्राइवेट पार्ट के ढीलेपन को दूर करने के टिप्स
क्या प्रेगनेंसी के दौरान या डिलीवरी के बाद आप प्राइवेट पार्ट के ढीलेपन को लेकर परेशान हैं? यदि हाँ तो लीजिये आज हम आपके लिए कुछ ऐसे उपचार लाये हैं जिससे प्राइवेट पार्ट के ढीलेपन को दूर करने में मदद मिलती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।
एक्सरसाइज
प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण स्किन में ढीलापन आना बहुत ही आम बात होती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने और डिलीवरी के तुरंत बाद आपको एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए। लेकिन प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में और डिलीवरी के एक महीने बाद आप व्यायाम करना शुरू कर सकते हैं। लेकिन व्यायाम करते समय इस बात का ध्यान रखें की आपकी सेहत पर उसका कोई गलत असर न पड़े। यदि आप नियमित रूप से व्यायाम करती हैं तो इससे स्किन को टाइट बने रहने में मदद मिलती है, जिससे प्राइवेट पार्ट के ढीलेपन को दूर करने में मदद मिलती है।
वजन
गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ना बहुत आम बात है लेकिन यदि आप वजन जरुरत से ज्यादा तेजी से बढ़ता है तो इसके कारण भी प्राइवेट पार्ट की स्किन में ढीलापन आ सकता है। और डिलीवरी के बाद यदि आप बहुत तेजी से वजन घटाने की कोशिश करते हैं तो भी प्राइवेट पार्ट में ढीलापन आ सकता है। इसीलिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपना वजन नियंत्रित रखने के साथ डिलीवरी के बाद भी धीरे धीरे वजन घटाना चाहिए ऐसा करने से भी आपको प्राइवेट पार्ट के ढीलेपन को दूर करने में मदद मिलती है, और डिलीवरी के बाद एक दम तो नहीं लें धीरे धीरे आपकी बॉडी और अंग वापिस शेप में आने लगते हैं।
पानी
पानी का भरपूर सेवन करने से न केवल आपको स्वास्थ्य रूप से फिट रहने में मदद मिलती है। बल्कि पानी का भरपूर सेवन करने से आपकी स्किन को भी पोषण मिलता है जिससे स्किन में कसाव को बने रहने में मदद मिलती है। इसीलिए प्राइवेट पार्ट के ढीलेपन को दूर करने के लिए पानी का भरपूर सेवन कर सकती है, और इसके लिए महिला को दिन में दस से बारह गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।
सही आहार
बॉडी को भरपूर पोषण से युक्त रखने के लिए महिला को सही आहार का सेवन भी करना चाहिए। क्योंकि विटामिन से भरपूर आहार का सेवन करने से महिला को स्किन को पोषण पहुंचाने के साथ स्किन को टाइट बनाने में मदद मिलती है और इसके लिए महिला को पालक, हरी पत्तेदार सब्जियां, फलों, उबले अंडे, नॉन वेज, ब्रोकली आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।
तनाव
प्रेगनेंसी के दौरान या डिलीवरी के बाद यदि महिला तनाव लेती है तो इसके कारण भी महिला की फिटनेस पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे में महिला को स्किन को टाइट रखने के लिए तनाव जैसी समस्या से भी दूर रहना चाहिए।
तो यह हैं कुछ खास टिप्स जो प्राइवेट पार्ट के ढीलेपन को दूर करने में आपकी मदद करते हैं, लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान और डिलीवरी के बाद आप किसी भी टिप्स का इस्तेमाल करते हुए पूरी सावधानी बरते और इन्हे नियमित रूप से करें ताकि आपको इस परेशानी से बचने में मदद मिल सके। और इसका असर धीरे धीरे आपको अपनी बॉडी पर जरूर दिखाई देगा।
हर प्रेग्नेंट महिला यही चाहती है की उसके गर्भ में पल रहे शिशु का विकास बेहतर तरीके से हो, शिशु सेहतमंद, हष्ट- पुष्ट, बुद्धिमान हो। तो इसके लिए सबसे जरुरी होता है की गर्भवती महिला अपने स्वास्थ्य का बेहतर तरीके से ध्यान रखे। जैसे की पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें, अपने आहार को समय से ले, खान पान में किसी भी तरह की लापरवाही न करे, बॉडी में आयरन की कमी न होने दे, व्यायाम आदि करे जिससे बॉडी में रक्त का संचार अच्छे से हो सके, आदि। यदि महिला फिट होती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। खान पान के साथ महिला को प्रेगनेंसी के दौरान और भी बहुत सी छोटी छोटी चीजे जैसे की तनाव न लेना, उठने, बैठने, चलने का अच्छे से ध्यान रखना, कोई भी ऐसा काम न करना जिससे शिशु पर नकारात्मक असर पड़े इन बातों का भी अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है।
सेहतमंद बेबी के प्रेग्नेंट महिला क्या खाएं
सेहतमंद शिशु को जन्म देने के लिए महिला को अपनी डाइट का खास ख्याल रखना चाहिए। क्योंकि जितने अधिक मात्रा में शिशु को पोषक तत्व मिलते हैं उतना ही शिशु का शारीरिक व् मानसिक विकास बेहतर तरीके से होता है। तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की सेहतमंद शिशु को जन्म देने के लिए गर्भवती महिला को क्या क्या खाना चाहिए।
आयरन
खून की कमी का शरीर में होने गर्भवती महिला की शारीरिक समस्या को बढ़ाने के साथ शिशु के विकास में कमी का भी कारण बन सकता है। ऐसे में सेहतमंद शिशु के लिए गर्भवती महिला को अपनी डाइट में आयरन को भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए ताकि बॉडी में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिल सके। और इसके लिए महिला को अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, फलियां, सफ़ेद बीन्स, चिकन, मछली, अच्छे से पके हुए अंडे, अनाज आदि को भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए। साथ ही आयरन का बॉडी में भरपूर होना डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियों को भी कम करने में मदद करता है।
कैल्शियम
गर्भ में शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास के लिए गर्भवती महिला के शरीर में कैल्शियम की मात्रा का भरपूर होना भी बहुत जरुरी होता है। और यदि प्रेग्नेंट महिला कैल्शियम का भरपूर मात्रा में सेवन नहीं करती है तो इससे शिशु की हड्डियों के विकास में कमी आ सकती है। ऐसे में कैल्शियम की मात्रा को बॉडी में भरपूर रखने के लिए गर्भवती महिला को दूध व् दूध से बनी चीजें, सूखे मेवे जैसे बादाम, अखरोट आदि, साबुत अनाज, अंकुरित दालें, हरी पत्तेदार सब्जियों आदि को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।
प्रोटीन
प्लेसेंटा और शिशु के विकास के लिए गर्भवती महिला को प्रोटीन युक्त आहार का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि प्रोटीन का बॉडी में भरपूर मात्रा में होना शिशु की कोशिकाओं के बेहतर निर्माण में मदद करता है। और इसके लिए गर्भवती महिला दालें, दूध, अंडा, दही, नॉन वेज, बीन्स, सूखे मेवे आदि का भरपूर मात्रा में सेवन कर सकती है। लेकिन अधिक वजन वाली महिलाओं को प्रोटीन को बहुत अधिक मात्रा में भी नहीं लेना चाहिए क्योंकि इससे वजन और तेजी से बढ़ सकता है और प्रेग्नेंट महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
घी
ज्यादातर लोग यह नहीं जानते होंगे की प्रेगनेंसी के दौरान देसी घी का पर्याप्त मात्रा में सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि यह प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है जिससे गर्भ में शिशु और गर्भवती महिला दोनों को संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही घी का सेवन प्रेगनेंसी की आखरी तिमाही में करने से शिशु के वजन और विकास को तेजी से बढ़ाने में मदद मिलती है।
चिकन और अंडे
गर्भावस्था की दूसरी तिमाही से गर्भवती महिला चाहे तो चिकन और अंडे का सेवन शुरू कर सकती है। क्योंकि इनमे कैल्शियम, प्रोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, फैट, जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में शामिल होते हैं जो गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में बहुत फायदेमंद होते हैं। लेकिन इनका सेवन करते समय ध्यान रखे की अधपके या कच्चे अंडे, अधपके या कच्चे चिकन का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है।
हरी सब्जियां व् फल
प्रेग्नेंट महिला को हरी सब्जियों व् फलों का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि हरी सब्जियों व् फलों में भी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं जो प्रग्नेंट महिला की जरूरतों को पूरा करने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं। खासकर पालक, संतरा, केला, एवोकाडो, अनार, सेब आदि का सेवन जरूर करना चाहिए।
फोलेट
फोलेट से युक्त आहार जैसे हरी सब्जियां, अंकुरित अनाज, चुकंदर, सोयाबीन, दालें, आदि का भी गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। क्योंकि फोलेट युक्त आहार का भरपूर सेवन करने से शिशु को जन्म के समय होने वाली परेशानियों से सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
तो यह हैं कुछ आहार जो गर्भवती महिला को अपनी डाइट में जरूर शामिल करने चाहिए ताकि गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके। साथ ही शिशु के विकास में कोई कमी न रहे इसके लिए डॉक्टर से राय भी जरूर लेनी चाहिए साथ ही अपनी सभी जांच भी समय से करवानी चाहिए ताकि प्रेग्नेंट महिला को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। तो यदि आप भी चाहती हैं की आपका होना वाला शिशु सेहतमंद व् हष्ट पुष्ट हो तो उसके लिए गर्भवती महिला को अपनी डाइट में इन सब पोषक तत्वों को जरूर शामिल करना चाहिए।
सर्दियों में गुड़ खाने के फायदे, Benefits of eating jaggery in winters, Gud ke labh, गुड़ खाने के फायदे, सर्दियों में गुड खाना अच्छा होता है, ठंड में गुड खाएं
भारत में गुड़ का एक अपना ही महत्व है, क्योंकि यहाँ रहने वाले हर भारत वासी इसके स्वाद को पहचानता है। क्या बच्चे और क्या बड़े सभी इसे खाने का एक मौका भी नहीं छोड़ते। पहले के जमाने में गुड़ का सेवन बहुत अधिक किया जाता है क्योंकि ये न केवल स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभकारी है अपितु इसमें मौजूद गुण हमारे शरीर को कई बिमारियों से भी बचाते है।
शायद आप नहीं जानते लेकिन पहले लोग चीनी का इस्तेमाल नहीं किया करते थे बल्कि गुड़ का ही इस्तेमाल करते है जबकि आजकल तो चीनी में गुड़ को रिप्लेस कर दिया है। जिसके कारण लोगों शुगर और डायबिटीज जैसी बीमारियां होने लगी है। जानकरी के लिए बता दें, गन्ने से रस से गुड़ और चीनी दोनों बनाए जाते है लेकिन ये भी सत्य है की चीनी बनने की प्रक्रिया में उसमे मौजूद आयरन, पोटैशियम, गंधक, फॉस्फोरस और कैल्सियम आदि तत्व नष्ट हो जाते है। जबकि गुड़ में इन सभी की भरपूर मात्रा मौजूद रहती है। और इसी के साथ विटामिन ऐ और विटामिन बी भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है।
वैसे तो गुड़ में अनेकों फायदे है लेकिन उनमे से पाचन से जुड़ा फायदा बहुत अच्छा होता है क्योंकि एकमात्र पाचन के बिगड़ने से व्यक्ति का पूरा स्वास्थ्य बिगड़ सकता है जबकि पाचन ठीक रहने से कोई भी बीमारी आपके आस पास भी नहीं भटक सकती। गुड़ का नियमित सेवन करने से अनेकों रोगों से बचा जा सकता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी है की इसका सेवन सही और लिमिटेड मात्रा में किया जाए क्योंकि अधिक मात्रा में सेवन करने से इसके दुष्परिणाम भी आ सकते है।
क्योंकि गुड़ की तासीर बहुत गर्म होती है ऐसे में अधिक मात्रा में सेवन करना स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। वैसे भी गर्मियों की तुलना में सर्दियों में इसका सेवन अधिक किया जाता है। क्योंकि इस समय शरीर को गर्मी की आवश्यकता होती है जो गुड़ से आसानी से मिल जाती है। यहां हम आपको सर्दियों में गुड़ खाने के फायदों के बारे में बताने जा रहे है जिन्हें जानकार आप भी इस प्राकृतिक देन को खाने के बारे में अवश्य सोचेंगे।
सर्दियों में गुड़ खाने के फायदे :-
=> बच्चों के लिए :
गुड़ में कैल्सियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है जिसे खाने से बच्चों की हड्डियों की कमजोरी दूर होती है। इसके अलावा दांतों के टूटने पर होने वाली कमजोरी भी नहीं होती। बढ़ते हुए बच्चों को गुड़ देना उनकी सेहत के लिए बेहद लाभकारी होता है।
=> आयरन की कमी :
अधिकतर महिलाओं में आयरन की कमी पाई जाती है। जिसके कारण कई बार मासिक धर्म होने पर परेशानी हो सकती है। लेकिन क्या आप जानती है की अगर आप गुड़ का सेवन करती है तो आपको उससे फायदा हो सकता है। शरीर में खूब की कमी होने पर भी आयरन की कमी हो जाती है। और गुड़ में आयरन की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो खून की कमी और हीमोग्लोबिन की समस्या को ठीक कर देता है।
=> मानसिक स्वास्थ्य :
विटामिन बी होने के कारण गुड़ मस्तिष्क से संबंधी बिमारियों को दूर करने की भी क्षमता रखता है। ग्रंथों में कहावत है की, गुड़, दही और मक्खन खाने वालों को बुढ़ापा जल्दी नहीं आता। इसीलिए विशेषकर सर्दियों में गुड़ का सेवन जरूर करें।
=> एनर्जी बूस्टर :
पहले के समय में जो लोग मेहनत का काम करते थे वे अपना काम शुरू करने से पूर्व गुड़ अवश्य खाते थे। क्योंकि गुड़ खाने से तुरंत एनर्जी मिलती है। जिससे व्यक्ति को काम करने में आसानी होती है और थकावट महसूस नहीं होती।
=> दिल की बिमारी :
गुड़ में पोटैशियम की मात्रा पाई जाती है जो दिल से संबंधित बिमारियों को रोकने में फायदेमंद होता है। हृदय रोग से सम्बंधित व्यक्तियों के लिए चीनी खाना नुकसानदेह हो सकता है जबकि गुड़ उनके लिए फायदेमंद ही होगा।
ठंड में गुड़ का सेवन करने के अन्य फायदे :
1. सर्दियों में गुड़, अदरक और तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर गरमा गर्म पीने से बहुत लाभ होता है और यह काढ़ा सर्दी जुखाम की समस्या से बचाता है।
2. जुखाम जम गया हो तो गुड़ को पिघलाकर उसकी पपड़ी बनाकर खाएं। फायदा होगा।
3. पांच ग्राम गुड़ को बराबर मात्रा के सरसों के तेल में मिलाकर खाने से श्वास संबंधी रोगों में लाभ मिलता है।
4. सर्दियों के दिनों में गुण और काले तिल के लडडु खाने से अस्थमा परेशान नहीं करता।
5. गुड़, सेंधा नमक, काला नमक मिलाकर चटनी बनाएं और उसे खाएं। इसे खट्टी डकारे आना बंद हो जाएंगी।
6. सर्दियों के मौसम में गुड़ की चाय पीना बेहद लाभकारी होता है। और स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होता है।
7. भोजन करने से बाद गुड़ खाने से पीट में गैस नहीं बनती।
8. जिन लोगों के शरीर में खून की कमी (एनीमिया) होती है उनके लिए गुड़ बेहद लाभकारी होता है। क्योंकि गुड़ में आयरन की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो हीमोग्लोबिन का लेवल बढ़ाकर समस्यायों जो दूर करने में मदद करता है।
9. गुड़ हमारी पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है इसीलिए खाने के बाद थोड़ा सा गुड़ खाना अच्छा होता है।
10. गुड़ का इस्तेमाल बहुत सी डिशेस बनाने के लिए भी किया जाता है। जैसे गुड़ पट्टी, गुड़ और तिल की चिक्की, गुड़ और तिल के लडडू, गुड़ की खीर, गुड़ का परांठा, चूरमा आदि।
11. गुड़ में मौजूद पोटैशियम ब्लूस प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। अगर किसी को BP से जुडी परेशानी हो तो डॉक्टरी सलाह के बाद वे गुड़ का सेवन कर सकते है।
12. कब्ज की समस्या होने पर रात को खाना खाने के बाद एक छोटा सा गुड़ का टुकड़ा खा लें।कब्ज की समस्या ठीक हो जाएगी।
13. स्वास्थ्य की दृष्टि से पुराना गुड़ बहुत अच्छा होता है लेकिन अगर पुराना गुड़ नहीं मिले तो नए गुड़ को थैली में डालकर कुछ देर धुप में रख दे। वह पुराने गुड़ जैसा ही गुणकारी हो जाता है।
14. गैस की समस्या होने पर रोजाना सुबह खाली पेट थोड़ा सा गुड़ चूसना चाहिए। फायदा होगा।
15. गुड़ के साथ पकाय गए चावल को खाने से बैठा हुआ गला और आवाज खुल जाती है।
16. गुड़ का हलवा खाने से स्मरण शक्ति तेज होती है।
17. बाजरे की खिचड़ी में गुड़ डालकर खाने से आँखों की रौशनी तेज होती है।
18. खाली पेट गुगुने पाने में गुड़ घोलकर पीने से बहुत फायदा होता है। यह शरीर से सभी टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में भी मदद करता है। इसके अलावा अगर आप रात को सोने से पहले गर्म दूध के साथ थोड़ा सा गुड़ खाते है तो सुबह आपके पेट का मिजाज बिलकुल अच्छा रहता है।
प्रेगनेंसी के दौरान खान पान का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है साथ ही आपको किस तरह की चीजों का सेवन करना चाहिए और किस तरीके से खाने की चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी होता है। जैसे की गर्भवती महिला को बहुत देर तक कटी पड़ी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए, खुले में रखी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए, बिना धुली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए, फ्रिज में रखी हुई चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए, आदि। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको फ्रिज में रखी हुई कौन- कौन सी चीजों को गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।
बर्फ
कुछ गर्भवती महिलाओं की प्रेगनेंसी में बर्फ खाने की इच्छा हो सकती है खासकर यदि गर्मियों का मौसम हो। ऐसे में गर्भवती महिला को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की गर्भवती महिला बर्फ का सेवन बिल्कुल न करें। क्योंकि इसके कारण महिला को सूजन, खांसी, जुखाम, गले में इन्फेक्शन, बुखार, पेट में गर्मी होने जैसी परेशानियां होती है।
ठंडा पानी
ठंडा पानी भी गर्भवती महिला को नहीं पीना चाहिए क्योंकि इसके कारण भी महिला को सर्दी, खांसी, गले में इन्फेक्शन जैसी परेशानी होने के साथ डीहाइड्रेशन की समस्या भी हो सकती है। और यदि गर्मी का मौसम है और आपका ठंडा पानी पीने का मन कर रहा है तो मटके का पानी आप पी सकती है क्योंकि वह पानी ठंडा होने के साथ सेहत के लिए अच्छा होता है।
ठन्डे फल
फलों का सेवन आप प्रेगनेंसी के दौरान करना बहुत फायदेमंद होता है लेकिन गर्भवती महिला को फ्रिज से निकालकर तुरंत फलों का सेवन नहीं करना चाहिए। बल्कि फलों को बाहर निकलकर पहले दस पंद्रह मिनट के लिए रख देना चाहिए। और उसके बाद फलों का सेवन करना चाहिए। क्योंकि यदि फल ज्यादा ठन्डे होते हैं तो इसके कारण दांतों से जुडी परेशानी होने के साथ गले में खराश, कोल्ड आदि होने का खतरा भी रहता है।
बासी खाना
प्रेग्नेंट महिला को जब भी खाना खाने की इच्छा हो तो महिला को ताजा खाना बनाकर खाना चाहिए। क्योंकि बासी आहार गर्भवती महिला की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। साथ ही फ्रिज से निकालकर खाने को दुबारा गर्म करके खाने से गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानी हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को फ्रिज से खाना निकालकर खाने से भी बचना चाहिए।
तो यह हैं कुछ चीजें जिनका सेवन फ्रिज में रखने के बाद गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि इनका सेवन करने से गर्भवती महिला की सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि आपको स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।
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बच्चों की मानसिक शक्ति बढ़ाने के तरीके
एग्जामिनेशन हॉल में प्रवेश करते ही अधिकतर बच्चे याद करी हुई चीजें भूल जाते हैं। प्रश्न पत्र हाथ में आते ही पढ़ी हुई चीजें भूल जाते हैं, उत्तर आते हुए भी वे गलत लिख देते हैं। और नतीजा रिपोर्ट कार्ड में दिखाई देता है। ऐसा अधिकतर बच्चों के साथ होता है। जिसका कारण होता है कमजोर मानसिक शक्ति। पढ़ते समय उनका दिमाग सभी चीजों को याद कर लेता है। लेकिन कुछ समय बाद वो चीजें याद नहीं रहतीं।
ऐसे में करें तो क्या? आज हम आपको ऐसे ही टिप्स बता रहे हैं जिनकी मदद से बच्चों की मानसिक शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। इन टिप्स को अपनाकर आप अपने बच्चे का दिमाग शार्प कर सकते हैं। आइये जानते हैं बच्चों की मानसिक शक्ति बढ़ाने के तरीके।
बच्चों का दिमाग तेज करने के तरीके
अधिकतर बच्चों की 3 साल की आयु से पहले मानसिक क्षमता बहुत सीमित होती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ यादाश्त बढ़ने बढ़ती हैं और अगर सही समय पर ध्यान दिया जाए तो बच्चों की स्मरण शक्ति को हमेशा के लिए मजबूत किया जा सकता है।
कुछ विशेष खेल
बच्चों की स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए आपको विशेष खेलों की आवश्यकता होती। क्या आप जानते हैं, बचपन में खेले जाने वाले जासूसी के खेल बच्चों की दिमागी क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। चीजों को छुपाकर उन्हें ढूंढना, आसपास मौजूद संख्याओं में से जोड़ने, घटाने, गुणा करने जैसे प्रश्न पूछना, शतरंज, पहेलियाँ, गिनती के खेल आदि बच्ची की स्मरण शक्ति को बढ़ाने में बहुत मदद करते हैं।
बाहर खेलना
घर में रहने वाले बच्चों की तुलना में बाहर जाकर शरीरिक गतिविधियों वाले खेल खेलने वाले बच्चों की स्मरण शक्ति तेज होती है। बैडमिंटन, क्रिकेट, बास्केटबॉल आदि खेल, शारीरिक गतिविधियां और अच्छी खुराक बच्चों की याददाश्त बढ़ाने में मदद करती है।
सवाल पूछें
स्कूल से आने के बाद बच्चों से उनकी दिनभर की गतिविधियों के बारे में पूछते रहें। स्कूल में क्या हुआ? क्या खाया? क्या पढ़ा? कौन सी मैडम ने क्या कहा? कौन सा गेम खेला? वगैरह-वगैरह जैसे प्रश्न पूछें। ऐसे सवाल उन्हें चीज याद रखने में मदद करेंगे और पढ़ते समय उनकी ये शक्ति बहुत काम आएगी।
पढ़ें और सुनाएं
आपने कभी सोचा है, की नर्सरी के बच्चों को सभी राइम्स इतनी जल्दी याद कैसे हो जाती हैं। जबकि उन्हें बाकी चीजें याद नहीं रहती। कारण है संगीत, संगीत किसी भी चीज को मन में रखने और याद करने की क्षमता को बढ़ाता है जिससे यादाश्त बढ़ाने में मदद मिलती है। आप बच्चों को सिलेबस से जुडी चीजें पढ़कर सुनाएँ। अगली बार उन्हें पढ़ने को कहें। कुछ समय बाद उसे पढ़ते हुए बीच में रुक जाएं और बच्चे को उसे बताने को कहें। आप देखेंगी बच्चे को चीजें याद होने लगी हैं।
सोने का समय
बच्चों को हमेशा सही वक्त पर सुलाएं। यह सुनिश्चित करें की बच्चे रोजाना 11 से 13 घंटे की नींद लें। क्यूंकि शरीर को सही तरीके से काम करने, दिमाग को याद रखने और टिश्यू को रिपेयर करने के लिए बच्चों को 11 से 13 घंटे की नींद लेना जरुरी होता है। तभी उनका दिमाग और शरीर बेहतर तरीके से काम करेंगे।
पौष्टिक आहार
मस्तिष्क के बेहतर विकास के लिए बच्चों को पोषक तत्वों से भरपूर भोजन देना बहुत जरुरी है। दिमाग तेज करने के लिए बच्चों को ओमेगा 3, विटामिन बी, विटामिन बी 12 और फोलेट से भरपूर आहार देना चाहिए। ओमेगा 3 के लिए समुद्री मछलियां, नट्स, बीन्स आदि फायदेमंद रहेंगी। फोलेट के लिए संतरे का जूस, ब्रोकली, पालक आदि खाएं। विटामिन बी डेरी प्रोडक्ट्स जैसे घी, दूध, मक्खन, बटर, छाछ दही, अनाज और सब्जियों में पाया जाता है। बच्चे को रोजाना 8 से 10 ग्लास पानी पीने कहें। खाने में ये चीजें दें –
अनार, सेब और बाकी के फल।
अखरोट दें।
चेरी दें।
भीगे हुए बादाम दें। या उन्हें पीसकर दूध में मिलाकर दें।
पालक दें।
डार्क चॉकलेट।
गुड़ के साथ तिल।
अलसी का तेल दें।
संभव हो तो ब्राह्मी खिलाएं।
एग्जाम के टाइम रोजाना मुलेठी खिलाएं।
दिन में दो बार गुलुकंद खिलाएं।
दालचीनी पाउडर को शहद में मिलाकर बच्चे को चटाएं।
दूध में शहद मिला दें।
बच्चे को रोजाना दही खिलाएं दही खाने से दिमाग तेजी से काम करता है।
ये कुछ टिप्स हैं जिन्हे अपनाकर बच्चों की मानसिक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। बच्चों के सामने किसी भी तरह का लड़ाई-झगड़ा नहीं करना चाहिए। इससे बच्चे तनाव में आ जाते है और तनाव बच्चों की स्मरण शक्ति के लिए ठीक नहीं। तनाव मस्तिष्क के सोचने की क्षमता को कम करता है जिससे पढ़ने के बाद भी कुछ याद नहीं रहता।
गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी के दौरान सबसे बड़ी परेशानी का यही कारण होता है की प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को क्या खाना पीना चाहिए और क्या नहीं। क्योंकि पोषक तत्वों से भरपूर खान पान जहां गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को फायदा पहुंचा सकता है वहीँ गलत खान पान के कारण नुकसान भी पहुँच सकता है। कुछ महिलाओं को चाय पीने की बहुत आदत होती है, और प्रेगनेंसी के दौरान चाय के सेवन को लेकर महिलाएं परेशान रहती है की उन्हें ऐसा करना चाहिए या नहीं।
तो ऐसे में इसका जवाब होता है की प्रेगनेंसी के दौरान चाय के साथ कॉफ़ी, ग्रीन टी, ब्लैक टी आदि का सेवन भी अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके सेवन से गर्भवती महिला और शिशु को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कुछ महिलाएं ऐसी भी होती है जो यदि चाय का सेवन न करें तो उन्हें सर दर्द जैसी परेशानी हो सकती है, ऐसे में थोड़ी बहुत चाय का सेवन करना तो ठीक होता है लेकिन अधिक मात्रा में इसके सेवन से गर्भवती महिला को बचना चाहिए
प्रेगनेंसी में चाय पीने के नुकसान
चाय में कैफीन की मात्रा अधिक होती है, ऐसे में कैफीन का गर्भवती महिला के शरीर में अधिक मात्रा में होना गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। क्योंकि गर्भनाल की मदद से जिस तरह शिशु को पोषक तत्व मिलते है, उसी तरह कैफीन भी शिशु तक पहुंचकर उसे नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा चाय का सेवन यदि गर्भवती महिला अधिक मात्रा में करती है तो इसके कारण और भी परेशानियां हो सकती है, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में चाय पीने से कौन कौन से नुकसान हो सकते हैं।
गर्भपात
प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में यदि महिला चाय कॉफ़ी का सेवन अधिक मात्रा में करती है तो इसके कारण बॉडी में कैफीन की मात्रा बढ़ने के कारण गर्भाशय में संकुचन का खतरा रहता है। जिसके कारण महिला के गर्भपात होने की सम्भावना हो सकती है। इसके अलावा ग्रीन टी, ब्लैक टी का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके कारण भी गर्भपात होने का खतरा रहता है।
भ्रूण पर असर
गर्भ में पल रहे शिशु पर भी चाय के अधिक सेवन करने का बुरा असर पड़ सकता है। क्योंकि यदि गर्भवती महिला चाय का सेवन अधिक करती है तो इसके कारण शिशु को जन्म के समय वजन में कमी जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पेट में समस्या
यदि आप गर्भवती है और आपकी सुबह उठते ही चाय पीने की आदत है तो गर्भवती महिला को अपनी इस आदत को बदलना चाहिए, क्योंकि सुबह उठते ही खाली पेट चाय पीने से महिला को पेट में गैस की समस्या हो सकती है। ऐसे में यदि आप चाय पीना चाहती है तो नाश्ते के आधे घंटे के बाद आप चाय का सेवन कर सकते है।
तो यह हैं कुछ नुकसान जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान चाय पीने से हो सकते हैं, ऐसे में गर्भवती महिला को चाही का सेवन अधिक नहीं करना चाहिए। यदि आप चाय पीना चाहे तो गिलास भर कर नहीं बल्कि थोड़ी थोड़ी दिन में एक या दो बार चाय ले सकते हैं।
लौंग का प्रयोग तो सभी करते है लेकिन अधिकतर उसके फ़ायदों को नहीं जानते। इसीलिए आज हम लौंग के कुछ फ़ायदे लेकर आये है। जिन्हें जानकर आपको आश्चर्य तो होगा ही साथ-साथ प्रसन्नता भी होगी।
भारतीय रसोइयों की सबसे खास बात यही होती है की यहाँ आपको बहुत प्रकार के मसाले और seasoning material आसानी से मिल जाते है। जो खाने को एक नई सुगंध और स्वाद प्रदान करते है। परन्तु कुछ मसाले ऐसे है जो खाने के स्वाद को तो बढ़ाते ही है साथ-साथ आपके स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद होते है। उन्ही कुछ मसालों में से एक है लौंग। जिसका इस्तेमाल लगभग हर भारतीय रसोई में एक महत्वपूर्ण मसाले के रूप में किया जाता है। आप भी अपने खाने और चाय को कडक और स्वादिष्ट बनाने के लिए तो लौंग का इस्तेमाल करते होंगे। लेकिन क्या आप जानते है की ये मसाला आपके स्वास्थ्य के लिए कितना लाभदायक है।
इतना ही नहीं स्वास्थ्य के अलावा त्वचा संबंधी समस्याएं और बालों से जुडी सभी परेशानियों में ये काफी लाभदायक होता है। पहले के समय में सभी लोग इस प्राकृतिक देन का खूब इस्तेमाल किया करते थे। लेकिन आज कल के मॉडर्न जमाने में लोग इस देन को भूलते ही जा रहे है। कोई जानकारी के आभाव में इसका इस्तेमाल करने से चूक जाते है तो कोई घरेलू उपाय समझकर इसका इस्तेमाल ही नहीं करते। इसीलिए आज हम आपको लौंग के उन सभी के बारे में बताने जा रहे है जिनसे शायद आप आजतक अनजान थे। ऐसे तो लौंग के बहुत से फायदे है लेकिन आपकी सुविधा के लिए हमने इन्हें तीन भागों स्वास्थ्य, त्वचा और बालों में बाँट दिया है। तो चलिए, जानते है लौंग के फायदें!!
स्वास्थ्य के लिए लौंग के फ़ायदे :-
1. दांत में दर्द :
दांतों में दर्द की समस्या के लिए लौंग का इस्तेमाल करना काफी लाभदायक होता है। इसीलिए 99% टूथपेस्ट में लौंग एक महत्वपूर्ण सामग्री के रूप में प्रयोग की जाती है।
2. उल्टियाँ :
अगर लौंग और लौंग के तेल का एक साथ साथ सेवन किया जाए तो जी मचलने की समस्या में आराम मिलता है।
3. कफ और सांसों की बदबू :
लौंग का सेवन करने से कफ और सांसों की बदबू की समस्या को ठीक किया जा सकता है। ये समस्या आजकल के समय में होने वाली आम समस्यायों में से एक है जिससे हर कोई परेशान रहता है। नियमित रूप से लौंग का सेवन करने से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। आप चाहे तो इसे अपने खाने का हिस्सा बनाकर भी इसका सेवन कर सकते है।
4. खाने को स्वादिष्ट बनाये :
लौंग का इस्तेमाल कई खाद्य पदार्थों की सीसनिंग में किया जाता है। जो खाने को एक मजेदार फ्लेवर और सुगंध प्रदान करता है।
5. Sinusitis :
लौंग की मदद से Sinusitis की समस्या को भी ठीक किया जा सकता है। इसके लिए पीसी हुई लौंग के पाउडर को नाक में डालें। इस उपाय के लिए आप उचित आकार की पाइप का इस्तेमाल कर सकते है।
6. सुबह की थकान :
सुबह की थकान को हटाने के लिए ये सबसे बेहतर घरेलू उपाय है। इसके लिए लौंग की 10 कलियाँ लें और उन्हें इमली और चीनी के साथ मिला लें। अब पानी के साथ इन सामग्रियों को डालकर एक मिश्रण बना लें। दिन में दो बार इस मिश्रण का सेवन करें फायदा मिलेगा।
7. पेट फूलना :
पेट फूलने की समस्या से निजात पाने के लिए लौंग को पाने के साथ मिला लें और उसका प्रयोग चाय बनाने के लिए करें। ये चाय पेट फूलने की समस्या में आराम देने में मदद करेगी।
8. सर्दी :
सामान्य सर्दी होने पर हलके गुनगुने पानी में लौंग के तेल की 10 बूंद और शहद डालकर पीने से काफी लाभ मिलता है। बेहतर परिणामों के लिए इसका सेवन दिन में दो से तीन बार करें।
9. कामोद्दीपक (Aphrodisiac) :
लौंग एक बेहतर कामोद्दीपक के रूप में भी कार्य करती है। इसकी खुशबु थकावट और थकान को दूर करके स्फूर्ति जगाने में मदद करती है।
10. तनाव :
शायद आप नहीं जानते लेकिन इसकी मदद से शरीर के तनाव से भी राहत पाई जा सकती है। इसके लिए लौंग को तुलसी की पत्ती, पुदीने और इलायची के साथ मिलाकर एक फ्लेवर्ड चाय बनाएं। तानव से राहत पाने के लिए शहद के साथ इस चाय का सेवन करें। आराम मिलेगा।
त्वचा के लिए लौंग के फायदे :
लौंग के तेल की तासीर काफी स्ट्रोंग होती है इसीलियें इसका इस्तेमाल थोडा ध्यान से करना चाहिए। लगाने के लिए प्रयोग करते समय 1 % मात्रा लौंग के तेल की किसी अन्य के साथ मिलाकर प्रयोग करनी चाहिए। क्योंकि इस तेल के डायरेक्ट प्रयोग से आपकी त्वचा पर जलन आदि की समस्या हो सकती है। Naturopaths और beauticians द्वारा लौंग के तेल का इस्तेमाल त्वचा संबंधी परेशानियों को दूर करने के लिए किया जाता है। त्वचा के लिए लौंग के अन्य फायदे निम्नलिखित है –
11. एक्ने की समस्या :
एक्ने को हटाने के लिए लौंग का तेल काफी प्रभावी होता है। आप चाहे तो इसे सीधे ही अपनी त्वचा के प्रभावित क्षेत्रों पर लगा सकती है या अन्य फेस पैक और मसाज क्रीम के साथ इसे मिलाकर प्रयोग में ला सकती है। त्वचा पर लगाने पर ये sensation उत्पन्न करता है। sensation के पीछे का कारण लौंग के तेल की शक्तिशाली प्रकृति होती है।
इस तेल में मौजूद एंटी माइक्रोबियल गुण प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद बैक्टीरिया को भी समाप्त करने में मदद करते है। त्वचा में होने वाली समस्याएं जैसे वाइटहेड, ब्लैकहैड, दाग़-धब्बे, मुहांसे और scaly स्किन एक बीमारी के लक्षण है और इसी रोग को एक्ने के काम से जाना जाता है। त्वचा में होने वाले patches और blemishes भी एक्ने के कारण ही उत्पन्न होते है। सामान्य तौर पर एक्ने किशोरावस्था में हॉर्मोन के असंतुलन के कारण उत्पन्न होते है। लौंग के पौधे के फूल से बनाए गए एसेंशियल आयल में शुद्धता के गुण पाए अजते है। जो pimple के कारण होने वाली जलन और सुजन को कम करते है। इसके साथ ही ये त्वचा में मौजूद सभी हानिकारक बैक्टीरिया को समाप्त करने में भी मदद करते है।
12. दाग़-धब्बे और blemishes :
त्वचा के दाग़-धब्बे और blemishes को हटाने के लिए भी इसका प्रयोग किया जा सकता है। लेकिन इसका इस्तेमाल केवल प्रोफेशनल की देख रेख में ही करना चाहिए। लौंग के तेल को त्वचा में लगाने पर ये एक mild chemical peel के रूप में कार्य करता है। जो blemishes को exfoliate करके डेड स्किन को निकालने में मदद करता है। ताकि आपकी त्वचा जवां और स्वस्थ दिखे।
13. एंटी-ओक्सिडेंट प्रकृति :
अन्य सभी एसेंशियल आयल की तुलना में Clove एसेंशियल आयल में एंटी oxidents की उच्च मात्रा पाई जाती है। और इस बात को हम सभी जानते है की स्वस्थ त्वचा और शरीर के लिए एंटी ओक्सिडेंट बहुत लाभकारी होता है। इसके अलावा लौंग के एसेंशियल आयल में मिनरल्स जैसे पोटैशियम, सोडियम, फॉस्फोरस, आयरन और विटामिन ए और सी की भी अच्छी मात्रा पाई जाती है।
14. रैशेज, कट और घाव :
लौंग के एसेंशियल आयल का इस्तेमाल rashes, scabies, stings, cuts, wounds, bites, fungal infections आदि समस्यों को ठीक करने के लिए भी किया जा सकता है।
15. Anxiety (चिंता, घबराहट) :
ये Anxiety की समस्या में आराम देने के साथ-साथ नींद को बढ़ाने में भी मदद करता है। इसके अलावा clove एसेंशियल आयल के इस्तेमाल से आकर्षक और साफ़-सुथरी त्वचा भी पाई जा सकती है। अस्वस्थ त्वचा के सबसे मुख्य कारण Anxiety और Insomnia है। और इसके एसेंशियल आयल की antimicrobial, anti-fungal, aphrodisiac, antiviral, antiseptic और stimulating प्रकृति इन सभी समस्यायों को दूर करने में मदद करती है।
बालों के लिए लौंग के फायदें :-
त्वचा और स्वास्थ्य के अतिरिक्त लौंग के कुछ फायदे आपके बालों के लिए भी है। तो अगर आपके साथ इनमे से कोई भी एक समस्या है तो लौंग का इस्तेमाल करके देखें। लेकिन प्रोफेशनल की सलाह के बाद। और इच्छित परिणाम पाइए।
16. बालों का झड़ना :
लौंग और लौंग के तेल का इस्तेमाल बालों के झड़ने की समस्या में किया जा सकता है। इसके अलावा बालों की मोटाई बढ़ाने के लिए भी इसका इस्तेमाल करना लाभकारी होता है।
17. Hair Color Refresher :
लौंग की चाय एक बेहतर Hair Color Refresher है। इसके लिए बालों को कलर करने और शैम्पू कर लेने के बाद अपने बालों में लौंग की चाय का इस्तेमाल करें। लेकिन एक बात का ध्यान रखें की लगाते समय चाय बिलकुल ठंडी हो। इस उपाय के इस्तेमाल से आपके बाल पहले से अधिक खुबसुरत और आकर्षक हो जायेंगे। बालों के लिए लौंग एक तरह का सेंट है जो refreshed hair के लिए फायदेमंद होता है।
18. हेयर कंडीशनर :
अगर आपके बाल भी हलके भूरे और श्यामले रंग के है तो ओलिव आयल के साथ लौंग मिलकर उसका प्रयोग कंडीशनर के रूप में करें। ये बालों में एक नई खुशबु देने के साथ-साथ एक बेहतर रंग देने में भी मदद करेगा। इस कंडीशनर को बनाने के लिए, 2 चम्मच पीसी हुई लौंग और आधा कप ओलिव आयल लें। अब के पैन में इस मिश्रण को गर्म कर लें।
लेकिन एक बात का ध्यान रखें की आपको इसे उबलना नहीं है बल्कि गर्म करना है। थोड़ी देर बाद उसे उतारकर 3 घंटे तक ठंडा होने के लिए छोड़ दें। बाद में मिश्रण को छान कर किसी बोतल में रख लें। अब नहाने से पहले, थोडा सा लौंग और ओलिव आयल के मिश्रण को गर्म करें और अपनी हथेलियों के बीच रगड़ कर इससे अपनी स्कैल्प की मसाज करें। कंघी की मदद से इसे पुरे बालों में फैला लें। 20 मिनट तक रखने के बाद बालों को अच्छे से धों लें। बेहतर परिणामों के लिए हफ्ते में दो बार इस उपाय का इस्तेमाल करें।
क्या लौंग नुकसान भी करती है?
जी हां, यूँ तो लौंग और उसके तेल के बहुत से फ़ायदे है। लेकिन कुछ नुकसान भी है। लौंग या उसके तेल के अत्यधिक प्रयोग से ये आपके स्वास्थ्य और त्वचा को हानि दे सकते है। जिसकी वजह से एलर्जी भी होएं लगती है। अधिक मात्रा में लौंग का सेवन करने से ब्लड में शुगर की मात्रा कम हो जाती है। कई बार ब्लीडिंग की समस्या भी हो जाती है। इसीलिए इसका इस्तेमाल सिमित मात्रा में और डॉक्टरी परामर्श के बाद ही करना चाहिए।
प्रेगनेंसी एक ऐसा समय होता है जहां गर्भवती महिला को तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। तो लीजिये आज हम एक ऐसी परेशानी के बारे में बात करने जा रहे हैं जो गर्भवती महिला को न ही हो तो अच्छा होता है, और वो है समय पूर्व प्रसव। समय पूर्व प्रसव का मतलब होता है यदि शिशु का जन्म तेंतीस या चौंतीस हफ्ते से पहले कभी भी हो जाता है। यानी की शिशु का जन्म सातवें या आठवें महीने में या उससे पहले हो सकता है। और प्रेग्नेंट महिला को यह समस्या होना शिशु को बहुत ज्यादा बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। क्योंकि ऐसा होने के कारण शिशु को किसी बिमारी, वजन में कमी, शिशु को जल्दी संक्रमण में आने का खतरा जैसी और भी समस्याएँ हो सकती है। और जन्म के बाद ऐसे शिशु को बहुत ज्यादा केयर की जरुरत होती है। ऐसे में गर्भवती महिला को ऐसी कोई दिक्कत न हो इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को बहुत सी बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है, तो आइये अब जानते हैं की समय पूर्व प्रसव जैसी समस्या से बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है।
स्वस्थ रहें
जितना प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला अपने खान पान, अपनी दिनचर्या, अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखती है। उतना ही ज्यादा गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। और गर्भवती महिला जितना स्वस्थ रहती है, उतना ही प्रेगनेंसी में आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स जैसे की समय पूर्व प्रसव जैसी परेशानी से महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।
जो खाएं उसका अच्छे से ध्यान रखें
गर्भावस्था के दौरान खाने में केवल पोषक तत्वों की मात्रा ही नहीं देखनी चाहिए बल्कि इस बात का ध्यान भी रखना चाहिए की क्या वह चीज प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद है या नहीं। जैसे की अनानास, कच्चा पपीता, कटहल, आदि का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए, क्योंकि इनके कारण गर्भाशय में संकुचन हो सकता है जिसके कारण असमय प्रसव की समस्या हो सकती है।
भरपूर आराम
गर्भावस्था के दौरान आपको भरपूर आराम करने की सलाह दी जाती है लेकिन यदि आपको प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स हैं, बच्चे का भार नीचे की तरफ है, डॉक्टर ने आपको रेस्ट करने की सलाह दी है, तो आपको भरपूर आराम करना चाहिए। यहां तक की छोटे छोटे कामों को करने से भी बचना चाहिए। क्योंकि यदि आपको प्रेगनेंसी में रिस्क है और आप आराम करने की जगह किसी भी तरह की लापरवाही करती हैं तो उससे आपको समय पूर्व प्रसव का खतरा हो सकता है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए भरपूर आराम करें।
तनाव
मानसिक रूप से परेशानी केवल आपको मानसिक रूप से ही परेशान नहीं करती है बल्कि इसके कारण आपको शारीरिक रूप से भी परेशानी हो सकती है। और समय पूर्व प्रसव का एक कारण गर्भवती महिला का अधिक तनाव में रहना भी हो सकता है। ऐसे में शिशु का जन्म समय से पहले न ही और गर्भ में शिशु का विकास अच्छे तरीके से हो इसके लिए गर्भवती महिला को तनाव नहीं लेना चाहिए और जितना हो सके खुश रहना चाहिए।
पानी
प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में पानी की कमी होने के कारण यानी डिहाइड्रेशन की समस्या के कारण भी समय पूर्व प्रसव का खतरा रहता है। ऐसे में समय पूर्व प्रसव का खतरा न हो इसके लिए गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए।
यूरिन न रोकें
प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव व् वजन बढ़ने के कारण बार बार यूरिन पास करने की इच्छा हो सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को यूरिन रोककर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इसके कारण यूटेरस पर दबाव पड़ सकता है। और यूटेरस पर दबाव पड़ने के कारण पेट में दर्द होने की सम्भावना बढ़ सकती है।
नशा
अगर आप प्रेग्नेंट हैं और नशे जैसे की अल्कोहल, धूम्रपान या अन्य किसी तरह के नशे का सेवन करती है। तो आपको ऐसा करने से भी बचना चाहिए क्योंकि गर्भवती महिला यदि किसी भी तरह के नशे का सेवन करती है तो इससे शिशु के विकास पर नकारात्मक असर पड़ने के साथ समय पूर्व प्रसव का भी खतरा रहता है ऐसे में समय पूर्व प्रसव की समस्या से बचाव के लिए महिला को नशे के सेवन से भी बचना चाहिए।
दूसरी प्रेगनेंसी
यदि आप माँ बन गई है और उसके बाद आप दूसरी प्रेगनेंसी में बिल्कुल भी गैप नहीं रखती हैं तो इसके कारण आपको दूसरी डिलीवरी में समय पूर्व प्रसव का खतरा हो सकता है। ऐसे में दूसरी प्रेगनेंसी के लिए आपको कम से कम एक से डेढ़ साल का गैप जरूर रखना चाहिए ताकि समय पूर्व प्रसव जैसी परेशानी से बचाव में आपको मदद मिल सके।
कुछ काम करने से बचें
गर्भवती महिला को अधिक सीढ़ियां चढ़ना, व्यायाम अधिक करना, भारी सामान उठाना, यात्रा करना, पैरों के भार बैठकर काम करना, पेट के बल काम करना, ज्यादा देर एक ही जगह पर खड़े रहना, तेजी से सम्बन्ध बनाना, बिना डॉक्टर की राय के दवाइयों का सेवन करना, नींद में कमी, केमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल करना, जैसी लापरवाही करने से भी बचना चाहिए। क्योंकि यह सभी गर्भवती महिला की दिक्कतों को बढ़ा सकते हैं और प्रेगनेंसी में अधिक परेशानियों का बढ़ना भी समय पूर्व प्रसव के खतरे को पैदा कर सकता है। ऐसे में समय पूर्व प्रसव के खतरे से बचने के लिए गर्भवती महिला को इन कामो को करने से बचना चाहिए।
समय पर जांच
यदि आपको शुगर, हाई ब्लड प्रैशर या अन्य कोई भी शारीरिक समस्या है तो आपको प्रेगनेंसी में समय समय पर जांच करवानी चाहिए। क्योंकि यदि कभी इन परेशानियों के कारण आपको दिक्कत होती है तो इसके कारण शिशु का जन्म समय से पहले होने का खतरा रहता है। ऐसे में समय पूर्व प्रसव की समस्या से बचाव के लिए आपको समय पर जांच करवानी चाहिए। और यदि कोई शारीरिक परेशानी नहीं है तो भी अपना रूटीन चेकअप समय से करवाना चाहिए।
तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान गर्भवती महिला को समय पूर्व प्रसव के खतरे से बचाव के लिए ध्यान रखने चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला भी स्वस्थ रहे और शिशु का विकास अच्छे से होने के साथ समय से पहले शिशु के जन्म होने की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके।
गर्भावस्था हर महिला की जिंदगी का वो मोड़ होता है जहां उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है। जैसे की महिला के शरीर में बदलाव आते हैं, महिला की ख़ूबसूरती में बदलाव आते है, महिला के रिश्तों में बदलाव आते हैं, आदि। इसके अलावा महिला जो नोर्मल लाइफ में परेशानी महसूस नहीं करती है उन परेशानियों का सामना महिला को प्रेगनेंसी के दौरान करना पड़ सकता है। लेकिन ऐसा जरुरी नहीं है की हर गर्भवती महिला की एक ही तरह के बदलाव महसूस करे।
लेकिन एक बात जो सभी प्रेगनेंसी में मिलती है की हर प्रेग्नेंट महिला को अपना दुगुना ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला अकेली नहीं होती है। बल्कि अब महिला के गर्भ में एक नन्ही जान भी पल रही होती है जो पूरी तरह से महिला पर ही निर्भर करती है। ऐसे में माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें और प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स न हो इसके लिए कुछ ऐसे काम है जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को नहीं करने चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की वो काम कौन से हैं।
डॉक्टर से मिलने में देरी
घर में प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद तुरंत महिला को डॉक्टर से मिलने जाना चाहिए और डॉक्टर से मिलने में बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि हो सकता है डॉक्टर से मिलने में थोड़ी देरी आपके लिए परेशानी खड़ी कर दे।
दवाइयों व् जाँच में लापरवाही
गर्भवती महिला को डॉक्टर की बिना सलाह के किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए और डॉक्टर ने जो दवाइयां बताई हैं उनका सेवन जरूर करना चाहिए। साथ ही अपनी सभी जांच को महिला को समय से करवाना चाहिए और उसमे किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
खाने में आनाकानी
बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण, शारीरिक परेशानियों के बढ़ने की वजह से गर्भवती महिला को खाने के प्रति अरुचि उत्त्पन्न हो सकती है। लेकिन ऐसे में गर्भवती महिला को खाने को छोड़ना नहीं चाहिए, बल्कि अपनी डाइट को सही ढंग से लेना चाहिए। क्योंकि भरपूर आहार न लेने के कारण महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां अधिक होने के साथ बच्चे के विकास में कमी आ सकती है। साथ ही वजन बढ़ने के डर से प्रेग्नेंट महिला को खाने को छोड़ना नहीं चाहिए।
जंक फ़ूड का सेवन
जंक फ़ूड, ज्यादा तेलीय व् मसालेदार खाना, स्ट्रीट फ़ूड, आदि का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे महिला व् बच्चे को पोषक तत्व नहीं मिलते हैं। जिससे बच्चे के विकास में कमी, गर्भवती महिला को शारीरिक कमजोरी जैसी परेशानियां अधिक हो सकती है।
यात्रा
गर्भावस्था के दौरान महिला को यात्रा करने से बचना चाहिए क्योंकि यात्रा के दौरान एक ही जगह पर बहुत देर तक बैठे रहने से, अचानक से झटका लगने आदि से महिला की तबियत खराब हो सकती है। जिसका असर महिला व् बच्चे की सेहत पर पड़ सकता है। यहां तक की यात्रा के कारण शुरूआती दिनों में गर्भपात होने का खतरा भी अधिक होता है और आखिर में शिशु का जन्म समय से पहले होने का खतरा रहता है।
भारी सामान उठाना व् सरकाना
प्रेग्नेंट महिला को बिल्कुल भी भारी सामान न तो उठाना चाहिए न ही सरकाना चाहिए। क्योंकि इसके कारण पेट को झटका, पेट पर जोर आदि पड़ने का खतरा रहता है, जिसकी वजह से गर्भ गिरने व् समय से पहले शिशु का जन्म होने जैसी समस्या हो सकती है।
झुकें नहीं
प्रेगनेंसी की किसी भी तिमाही में महिला को झुककर काम नहीं करना चाहिए जैसे की वाशरूम को साफ़ करना, गिरी हुई चीजों को उठाना आदि। क्योंकि इसके कारण गर्भपात, पेट पर दबाव पड़ने के कारण शिशु को परेशानी, समय से पहले बच्चे का जन्म आदि दिक्कत हो सकती है।
पेट और पैरों के बल काम न करें
प्रेग्नेंट महिला को ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहिए जिसमे महिला के पेट पर दबाव पड़े। साथ ही महिला को पैरों के भार बैठकर भी काम नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण पेट पर दबाव पड़ता है। और पेट पर अधिक दबाव का पड़ना महिला व् बच्चे दोनों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।
मालिश
गर्भवती महिला को मालिश करने से भी बचना चाहिए खासकर पेट की मालिश तो बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इसके कारण पेट पर दबाव पड़ने का खतरा रहता है। जिससे बच्चे को दिक्कत हो सकती है।
केमिकल का इस्तेमाल
किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल जैसे की पोछा लगाने में इस्तेमाल किया जाने वाला केमिकल, कपडे धोने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाला केमिकल, आदि के प्रयोग से बचना चाहिए। क्योंकि इनके कारण महिला को इन्फेक्शन का खतरा रहता है जिससे बच्चे को भी दिक्कत हो सकती है।
गर्म पानी से नहाना
गर्भवती महिला को गर्म पानी से नहीं नहाना चाहिए, यहां तक की गर्म पानी से पेट की सिकाई आदि भी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इसके कारण गर्भाशय में हलचल बढ़ सकती है साथ शुरूआती तीन महीनों में इसके कारण गर्भपात भी हो सकता है।
असहज महसूस होने पर अनदेखा
प्रेग्नेंट महिला को अपने शरीर में होने वाले छोटे छोटे बदलाव का भी ध्यान रखना चाहिए। और यदि कोई भी ऐसा लक्षण महसूस हो जिससे महिला या बच्चे को परेशानी तो उसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। क्योंकि हो सकता है की बाद में इसके कारण आपको ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़े।
एक्स रे
प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान एक्स रे नहीं करवाना चाहिए। क्योंकि एक्स रे से निकलने वाली रेडिएशन के कारण बच्चे के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी आ सकती है। इसके अलावा एक्स रे की वजह से बच्चे को जन्मदोष होने का भी खतरा रहता है।
शराब व् धूम्रपान का सेवन
गर्भवती महिला को शराब व् धूम्रपान का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे बच्चे के शारीरिक व् मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ता है। साथ ही इससे समय से पहले डिलीवरी होने का भी खतरा रहता है।
व्यायाम
प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला हल्का फुल्का व्यायाम महिला कर सकती है। लेकिन बहुत अधिक व्यायाम महिला को नहीं करना चाहिए, खासकर वो व्यायाम जिससे महिला को बहुत अधिक थकावट हो, महिला के पेट पर बल पड़े, आदि। क्योंकि इससे प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे को नुकसान हो सकता है।
तो यह हैं कुछ काम जो प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए। क्योंकि इन्हे करने से माँ और बच्चा दोनों को परेशानी हो सकती और प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ सकती है।
प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में खून की मात्रा का पर्याप्त होना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि गर्भ में पल रही जान के बेहतर विकास के लिए खून की जरुरत होती है। साथ ही ब्लड के माध्यम से ही बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है जिससे बच्चे का विकास अच्छे से हो सकें। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून की कमी होती है या महिला आयरन युक्त आहार नहीं लेती है तो इसके कारण लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या शरीर में नहीं बढ़ती है। जिसके कारण गर्भवती महिला की प्रेगनेंसी के दौरान परेशानियां बढ़ने के साथ गर्भ में बच्चे के विकास में भी कमी आ जाती है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आयरन युक्त डाइट जरूर लेनी चाहिए।
गर्भावस्था में खून की कमी के लक्षण
चेहरे का रंग पीला पड़ना या आँखों के नीचे काले घेरे अधिक होना।
प्रेग्नेंट महिला को थकान व् कमजोरी की समस्या अधिक होना।
सिर दर्द, जोड़ो में दर्द, चक्कर जैसी परेशानियां होना।
आँखों के रंग में पीलापन आना।
तनाव अधिक होना।
गर्भावस्था के दौरान खून बढ़ाने के उपाय
गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है ताकि प्रेग्नेंट महिला को हर तरह की परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके। वैसे ही यदि गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी है तो कुछ बातों का ध्यान रखने से गर्भवती महिला को शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। यदि आयरन की कमी नहीं भी है तो भी शरीर में खून की मात्रा को सही रखने के लिए प्रेग्नेंट महिला को आयरन युक्त डाइट लेनी चाहिए। तो आइये अब जानते हैं किस तरह प्रेग्नेंट महिला शरीर में खून की कमी को पूरा कर सकती है।
डॉक्टर द्वारा दी गई दवाई
गर्भावस्था के दौरान महिला को आयरन की गोलियां खाने की सलाह दी जाती है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला आयरन की गोलियों को नियमित रूप से लेती है। तो ऐसा करने से गर्भवती महिला को शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।
कच्चा केला
प्रेगनेंसी के दौरान कच्चे केले की सब्ज़ी का सेवन करें। कच्चे केले में आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला कच्चे केले का सेवन करती है तो इससे शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।
फलों का रस
संतरा, अनार, सेब, जैसे फलों में आयरन व् विटामिन सी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। आयरन शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने में मदद करता हैं। वहीँ विटामिन सी शरीर के सभी अंगो में आयरन को अवशोषित करने में मदद करता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को खून की कमी की समस्या निजात पाने में मदद मिलती है। ऐसे में शरीर में खून की मात्रा को सही रखने के लिए प्रेग्नेंट महिला को रोजाना किसी न किसी फल के रस का सेवन जरूर करना चाहिए।
ड्राई फ्रूट्स
सूखे मेवे भी आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून की कमी है तो महिला को सूखे मेवे खासकर बादाम, किशमिश, अखरोट का सेवन जरूर करना चाहिए। अखरोट और किशमिश को रोजाना रात को भिगोकर रखें और सुबह उठकर इनका सेवन करें या फिर अंजीर को भिगोकर खाएं। ऐसा करने से आयरन की कमी को बहुत जल्दी पूरा करने में मदद मिलती है।
हरी सब्जियां
पालक, मेथी, सरसों, बथुआ जैसी हरी सब्जियां आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होती है साथ ही इनमे विटामिन सी भी प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए हरी सब्जियों का भरपूर सेवन करना चाहिए। और रोजाना कम से कम एक समय की डाइट में किसी न किसी हरी सब्ज़ी को जरूर शामिल करना चाहिए।
गाजर, चुकंदर, टमाटर जैसी लाल सब्जियां
दिखने में लाल होने के साथ गाजर, चुकंदर, टमाटर जैसी सब्जियां आयरन से भी भरपूर होती है। ऐसे में सब्ज़ी, सलाद, सूप, जूस आदि के रूप में गर्भवती महिला को नियमित इनका सेवन करना चाहिए। यदि प्रेग्नेंट महिला नियमित इनका सेवन करती है तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।
नॉन वेज
चिकन, बिना मर्करी की मछली, अंडा आदि का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को भरपूर करना चाहिए। क्योंकि यह सभी आयरन का समृद्ध स्त्रोत होते हैं। जो प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं।
लोहे के बर्तन
ऐसा माना जाता हैं की लोहे के बर्तनों में खाना बनाने से उनके आयरन की मात्रा बढ़ जाती है। इसीलिए कोशिश करें की प्रेगनेंसी के दौरान लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल खाना बनाने के लिए करें। ताकि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिल सके।
फल
अनार, सेब, अमरुद, स्ट्रॉबेरी यह सभी फल प्रेगनेंसी के दौरान खाना बहुत फायदेमंद होते हैं। क्योंमि इनमे आयरन, फोलिक एसिड, पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है। जिससे शरीर में खून की कमी को पूरा करने के साथ लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी मदद मिलती है।
शहद
शहद में भी आयरन की मात्रा मौजूद होती है। ऐसे में शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए गर्भवती महिला रोजाना एक से डेढ़ चम्मच शहद का दूध या पानी में डालकर सेवन कर सकती है।
तो यह हैं कुछ उपाय जिन्हे करने से प्रेग्नेंट महिला को शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको और आपके बच्चे को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।