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गर्भवती महिला को जब पचने में दिक्कत हो और गैस की समस्या हो तो यह करें

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला को तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बहुत सी ऐसी गर्भवती महिलाएं होती है जिन्हे खाना हज़म करने में परेशानी या पेट में अधिक गैस बनने की समस्या सकती है, जो की प्रेगनेंसी में होना आम बात होती है। लेकिन इस समस्या का अधिक होना भूख की कमी का कारण बन सकता है जो की प्रेग्नेंट महिला के लिए सही नहीं होता है। ऐसे में इस परेशानी से राहत के लिए प्रेग्नेंट महिला को जरूर कुछ न कुछ करना चाहिए। ताकि महिला अच्छे से अपने आहार को ले सके जिससे महिला और शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में गैस बनने और खाना हज़म न होने पर क्या करें

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण बहुत सी गर्भवती महिलाएं भोजन के हज़म न होने व् पेट में गैस की समस्या अधिक होने के कारण परेशान हो सकती है। ऐसे में इस समस्या के कारण होने वाली परेशानी से बचने के साथ इस समस्या से राहत के लिए प्रेग्नेंट महिला को क्या क्या करना चाहिए आइये जानते हैं।

हल्का आहार

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है जिसके कारण महिला को खाना पचाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। और खाना हज़म न होने के कारण महिला को पेट में गैस बनने की समस्या हो सकती है। ऐसे में इस समस्या से निजात पाने के लिए महिला को हल्का आहार यानी की कम तेल, मिर्च, मसालें वाले आहार का सेवन करना चाहिए। क्योंकि ऐसे आहार को हज़म करने में आसानी होती है और महिला को इस दिक्कत से निजात पाने में मदद मिलती है।

खाने की आदतें

आहार का सेवन करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है जैसे की खाने को अच्छे से चबाकर खाएं, खाना एक ही बार में न खाएं बल्कि थोड़ा थोड़ा खाएं, हर दो से तीन घंटे में कुछ खाएं, खाने के बाद उसी जगह पर बैठे न रहें या लेट न जाएँ, फाइबर युक्त आहार का भरपूर सेवन करें, यदि आप इन बातों का ध्यान रखते हैं तो इससे भी प्रेग्नेंट महिला को इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

दही या छाछ

प्रेग्नेंट महिला को दिन में एक समय एक कटोरी दही या एक गिलास छाछ का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि दही का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को पाचन क्रिया से जुडी परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है। और खाना भी आसानी से हज़म होने में फायदा होता है, साथ ही दही का सेवन करने से कब्ज़ व् गैस जैसी परेशानी से भी गर्भवती महिला को राहत पाने में मदद मिलती है।

पानी

जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान पानी का सेवन भरपूर मात्रा में नहीं करती है उन महिलाओं को भी प्रेगनेंसी के दौरान इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि बॉडी में डिहाइड्रेशन की समस्या होने के कारण भी महिला को पाचन क्रिया से जुडी समस्या का सामना करना पड़ सकता है, इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को इस समस्या से बचने के लिए पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

तनाव

बॉडी में होने वाले शारीरिक व् मानसिक बदलाव के कारण बहुत सी गर्भवती महिलाएं तनाव में भी सकती है और प्रेगनेंसी के दौरान तनाव की समस्या होने के कारण भी महिला को पाचन क्रिया से जुडी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

गैस बनाने वाले आहार

जिन चीजों को खाने से गर्भवती महिला को गैस की समस्या हो सकती है उन आहार का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। यदि आप इन चीजों का ध्यान रखती हैं तो ऐसा करने से भी गर्भवती महिला को इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

व्यायाम

प्रेग्नेंट महिला को हल्का फुल्का व्यायाम भी करते रहना चाहिए ऐसा करने से महिला को स्वस्थ रहने के साथ पाचन क्रिया से जुडी समस्या से राहत पाने में भी मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से प्रेग्नेंट महिला को खाना हज़म न होने व् पेट में गैस बनने की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। और यदि आप भी प्रेगनेंसी के दौरान इस समस्या से परेशान हैं तो आपको भी इन टिप्स का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में यूरिन करते समय ध्यान रखें

प्रेगनेंसी के आखिरी महीनें में यूरिन करते समय ध्यान रखें, प्रेगनेंसी में यूरिन करते समय इस बात का ध्यान रखे, गर्भावस्था के नौवें महीने में इस बात का ध्यान रखें, प्रेगनेंसी टिप्स

गर्भावस्था के पूरे नौ महीने महिला को अपना दुगुना ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि महिला जितनी स्वस्थ रहती है गर्भ में शिशु का विकास भी उतना ही बेहतर तरीके से होता है। प्रेगनेंसी के हर महीने, हर दिन, महिला किसी न किसी अनुभव से गुजरती है, चाहे फिर वो कोई शारीरिक समस्या हो या बॉडी में होने वाला कोई बदलाव। और इसी तरह प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में महिला को और ज्यादा केयर करनी पड़ती है, क्योंकि पेट के बाहर निकलने, वजन बढ़ने के कारण महिला को बहुत सी परेशानियां हो सकती है। ऐसे में महिला को यूरिन पास करते समय भी ध्यान रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में यूरिन करते समय इस बात का ध्यान रखें

जब भी आप यूरिन पास करने के लिए जाती है तो आपको ध्यान रखना चाहिए की यूरिन ज्यादा गाढ़ा, या थोड़े खून वाला तो नहीं आ रहा है। यदि ऐसा होता है तो यह इस बात का संकेत होता है की गर्भ से शिशु बाहर आने के लिए तैयार है, क्योंकि यह गाढ़ा पानी यूरिन नहीं बल्कि एमनियोटिक फ्लूड होता है। जिसमे शिशु नौ महीने माँ के गर्भ में रहता है, इसी फ्लूड की मदद से शिशु गर्भ में मूवमेंट कर पाता है। और यदि आपको एमनियोटिक फ्लूड निकलता हुआ महसूस होता है, तो आपको बिना देरी किये जितना जल्दी हो सके डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

क्योंकि जितना गर्भ में एमनियोटिक फ्लूड की कमी होती है उतना ही गर्भ में शिशु असहज महसूस कर सकता है। जब वाटर ब्रेक यानी एमनियोटिक फ्लूड निकलता है तो आपको यूरिन जैसा ही प्रैशर महसूस होता है, ऐसे में यदि आपको पता न चले तो शिशु गर्भ में परेशानी में आ सकता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के नौवें महीने में इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए, और जब भी गर्भवती महिला यूरिन पास करने जाती है उसे इस बात का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही एमनियोटिक फ्लूड को देखकर महिला को ज्यादा तेजी नहीं करनी चाहिए, और न ही अधिक घबराना चाहिए, क्योंकि एक ही बार में सारा फ्लूड बाहर नहीं आता है, बस जैसे ही आपको ऐसा महसूस हो आपको तभी हॉस्पिटल में चले जाना चाहिए।

तो यह है वो बातें जिनका ध्यान गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में यूरिन करते समय ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान यूरिन के रंग का भी ध्यान रखना चाहिए यदि यूरिन का रंग ज्यादा पीला आता है या आपको यूरिन करते समय किसी तरह की परेशानी होती है। तो यह यूरिन इन्फेक्शन के कारण हो सकता है। ऐसे में आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए, और किसी भी तरह की परेशानी होने पर बिना देरी किये जल्दी से जल्दी डॉक्टर से मिलना चाहिए।

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दीमक लगने के क्या कारण होते हैं?

घर में होने वाले कॉकरोच, चूहें, छिपकली आदि इधर उधर घूमते हुए आपको दिख जाते हैं। और इनसे बचने के लिए आप इनका उपचार भी कर लेते हैं ताकि आपको इस समस्या से निजात मिल सकें। लेकिन आपके घर में एक ऐसी चीज भी होती है जो आपको दिखती तो नहीं है लेकिन आपके लिए बहुत नुकसानदायक होती है। अब आप ये सोच रहें होंगे की वो क्या है वो है दीमक। यह आपके घर में मौजूद लकड़ी के सामान में खासकर लग जाती है। और बाद में धीरे धीरे उसे अंदर से बिलकुल खोखला कर देती है। और यही नहीं खुले खेत भी इसके प्रकोप से नहीं बचते हैं कई बार यह वहां भी फ़ैल जाती है, दीवारों आदि में भी लग जाती है, पुरानी इमारते, सीलन आदि होने के कारण ये समस्या हो जाती हैदीमक का सबसे ज्यादा फैलने का खतरा मानसून में होता है। क्या आप जाना चाहते हैं की दीमक लगने के क्या कारण होते हैं तो आइये जानते हैं।

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दीमक लगने के कारण:-

सीलन होने के कारण:-

दीवारे हो चाहे लकड़ी का सामान जहां पर भी सीलन की समस्या अधिक होती है। उस जगह पर दीमक बहुत ही आसानी से अपना स्थान बना लेती है और धीरे धीरे फैलने लगती है और उस चीज को या उस जगह को खोखला कर देती है।

लकड़ी में मॉइशचर होने के कारण:-

यदि किसी लकड़ी के सामना में गीलापन होता है तो वहां भी दीमक के लगने के चांस अधिक हो जाते हैं। क्योंकि गीले लकड़ी को खत्म करने में कम समय लगता है इसीलिए दीमक वहां जल्दी फैलता है।

बारिश के मौसम में:-

बारिश के मौसम में हर जगह नमी बनी रहती है। और जहां नमी अधिक रहती है वहां पर वहां पर दीमक के फैलने का खतरा बहुत अधिक होता है। इसीलिए बारिश के मौसम में जितना हो सकें साफ़ सफाई का खास ध्यान रखने के साथ दवाई आदि का इस्तेमाल भी जरूर करना चाहिए।

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नमी होने के कारण:-

कई बार दीवारों में पानी के कारण, लड़की के सामान में नमी होने कारण भी आपको दीमक की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

आधी समय तक किसी जगह के बंद रहने के कारण:-

जो चीजे लम्बे समय तक बंद रहती है, जैसे की पुरानी इमारते आदि, बंद अलमारी, जिसे की लम्बे समय तक खोला न गया हो। ऐसी जगह पर भी दीमक लगने की समस्या देखी जाती है।

दीमक की समस्या से बचने के उपाय:-

  • यदि आपके घर के किसी सामान में दीमक लग गई है तो उसे दो से तीन दिन के लिए अच्छी धूप दिखाएं इससे आपको इस समस्या से बचने में मदद मिलेगी।
  • जहां भी दीमक फैलने लगे वहां पर करेले या नीम के रस को डाल दें इससे भी आपको दीमक की समस्या से बचने में मदद मिलेगी।
  • दीमक को भगाने के लिए लाल मिर्च पाउडर को उस स्थान पर छिड़क दें जहां पर दीमक की समस्या हो इससे भी आपको उसे खत्म करने में मदद मिलती है।
  • खेतो में दीमक की समस्या से बचने के लिए पानी के साथ मोबिल के तेल का भी छिड़काव करें और साथ ही खेत में कच्ची गोबर न डालें।
  • दीमक लगने वाले स्थान पर बोरिक एसिड का छिड़काव करें आपको फायदा मिलेगा।
  • घर में दीमक की समस्या से बचने के लिए टर्मिनेटर का इस्तेमाल करें इससे भी आपको दीमक की समस्या से बचने में मदद मिलेगी।

तो ये हैं कुछ कारण जिनके कारण दीमक आपके घर में अपना स्थान बना लेती है। इसके अलावा आपको इस समस्या से बचने के लिए कुछ उपाय भी बताएं गए हैं जिससे आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं। साथ ही यदि आपके घर के किसी भी हिस्से में यदि आपको दीमक लगता हुआ दिखाई दे तो उसे हटा देना चाहिए और किसी उपाय का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि वो फ़ैल न सकें।

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प्रेगनेंसी में गोलगप्पे खाने के नुकसान

गर्भावस्था के दौरान अधिकतर महिलाओं का खट्टा, तीखा, चटपटा खाने की इच्छा हो सकती है। और इस इच्छा को पूरा करने के लिए गर्भवती महिला की पहली पसंद पानी पूरी यानी गोलगप्पे होते हैं, इसके अलावा भेल पूरी व अन्य स्वादिष्ट स्ट्रीट फ़ूड भी महिला को पसंद आ सकते हैं। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को गोलगप्पे का सेवन करने से पहले यह जानना बहुत जरुरी होता है की आखिर गर्भवती महिला को गोलगप्पे खाने चाहिए या नहीं? तो आइये आज हम गर्भवती महिला को गोलगप्पे खाने चाहिए या नहीं इस बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भवती महिला को गोलगप्पे खाने चाहिए या नहीं?

प्रेग्नेंट महिला को बाहर से मिलने वाले गोलगप्पों का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि आप नहीं जानते हैं की उन्हें बनाने के लिए कैसे हाथों का इस्तेमाल किया जा रहा है, कौन से मसालों का इस्तेमाल किया जा रहा है, साथ ही बाहर मिलने वाले गोलगप्पों पर कितने मक्खी मच्छर आदि बैठते हैं, आदि।

और ऐसे में यदि गर्भवती महिला बाहर से मिलने वाले गोलगप्पों का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला व बच्चे की सेहत को नुकसान पहुँच सकता है। लेकिन यदि महिला की गोलगप्पे खाने की इच्छा हो रही है तो महिला अपने स्वादानुसार उन्हें घर में बनाकर उनका सेवन कर सकती है। इससे महिला या बच्चे को गोलगप्पों के कारण होने वाले नुकसान से बचे रहने में मदद मिल सकती है।

गर्भावस्था में गोलगप्पे खाने के नुकसान

यदि प्रेग्नेंट महिला बाहर से मिलने वाले गोलगप्पों का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला व बच्चे की सेहत खराब होने का खतरा रहता है। तो आइये अब जानते हैं प्रेगनेंसी में गोलगप्पे खाने से कौन से नुकसान होते हैं।

इन्फेक्शन होने का रहता है डर

आप जहां से पानी पूरी खा रहे हैं वो जगह यदि साफ़ नहीं है, आपको गोलगप्पे खिलाने वाले के हाथ साफ़ नहीं है, गोलगप्पे बनाने के लिए सही सामान का इस्तेमाल नहीं किया गया हैं, आदि। तो इसके कारण बैड बैक्टेरिया बॉडी में प्रवेश कर सकता है जिसके कारण महिला को इन्फेक्शन होने का डर रहता है। और उसके कारण बच्चे के विकास को प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

पाचन क्रिया हो सकती है प्रभावित

गोलगप्पे का पानी बनाने के लिए तरह तरह के मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। और प्रेग्नेंट महिला को तेज मसालों का सेवन न करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इसके कारण महिला का पाचन तंत्र बुरी तरह प्रभावित हो सकती है जिसके कारण पेट में दर्द, पेट में गैस व जलन आदि की समस्या हो सकती है।

गले में इन्फेक्शन

प्रेग्नेंट महिला को गोलगप्पे का सेवन करने के कारण गले में इन्फेक्शन, सीने में जलन, खट्टी डकार जैसी समस्या भी अधिक हो सकती है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान गोलगप्पे खाने से जुड़े कुछ बातें, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं ऐसे में आपको भी बाहर के गोलगप्पे के साथ अन्य स्ट्रीट फ़ूड का सेवन भी नहीं करना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको और आपके बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। इसके अलावा यदि आपकी कुछ खाने की इच्छा है तो घर में ही बनाकर उसका सेवन करें। ताकि आपको भरपूर पोषक तत्व मिल सके और आपको स्वाद का आनंद भी आये।

पहली बार माँ बनने जा रही हैं तो ध्यान रखें इन बातों का

पहली बार माँ बनने जा रही हैं तो ध्यान रखें इन बातों का:-

बेबी प्लानिंग: माँ बनना इस दुनिया की सबसे अनमोल व् अनोखी ख़ुशी हैं| इस बात को जानने के लिए आप उनसे पूछ सकती हैं| जो माँ बनने का अनुभव ले चुकी हैं| और माँ के गर्भ में जब बच्चा होता हैं तो वो क्या-क्या हरकत करता हैं, इस बारे में भी आप अपनी किसी सहेली या भाभी से राय ले सकती हैं| प्रेगनेंसी के दौरान महिला कई सारे नए अनुभवो से गुजरती हैं| ऐसे में महिला के साथ कुछ परेशानियां भी होती हैं|

प्रेगनेंसी का ये अनुभव हर महिला के लिए बहुत ही खास होता हैं, खास कर जो पहली बार माँ बन रही होती हैं| प्रेगनेंसी में होने वाले अनुभव महिला के लिए यादगार बन जाते हैं| शादी के बाद पति-पत्नी के प्यार को भी बच्चे के आने की ख़ुशी दुगुना कर देती हैं| यदि आप पहली बार माँ बनने जा रही हैं, तो आप उनसे पूछिये जो पहले माँ बनने का अहसास ले चुकी हैं|

पहली बार माँ बनने से पहले बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए| जैसे की आपको इस बात का ख्याल रखना चाहिए, की क्या आप शारीरिक व् मानसिक रूप से अपने पहले बच्चे को लाने के लिए तैयार हैं|

पहली बार माँ बनने से पहले बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए| जैसे की आपको इस बात का ख्याल रखना चाहिए, की क्या आप शारीरिक व् मानसिक रूप से अपने पहले बच्चे को लाने के लिए तैयार हैं| और उससे भी पहले क्या आपका साथी माँ बनने की ख़ुशी में आपके साथ हैं?, यदि ऐसा हैं तो आप डॉक्टर से जाकर पूछिये अपने टेस्ट करवाइए, की क्या आपका शरीर पूरी तरह से स्वस्थ हैं|

पहली बार माँ बनने का अहसास हर महिला के लिए बहुत खास होता हैं| क्योंकि कहा जाता है की माँ बनने का मतलब हैं, केवल बच्चे का ही नया जन्म नहीं हुआ हैं| बल्कि महिला का भी नया जन्म होता हैं| गर्भावस्था के दौरान महिलाएँ बहुत सी परेशानियों से भी गुजरती हैं| परंतु इसका अहसास बिलकुल खत्म हो जाता हैं जैसे ही वो नन्ही सी जान आपके हाथो में आती हैं, और आपके नए जीवन की शुरुआत होती हैं|

पहली बार माँ बनने के लिए ध्यान देने योग्य बातें:-

दूसरे बच्चो के साथ समय बिताएं:-

बेबी प्लान करने से पहले जरुरी हैं की आप दूसरे बच्चो के साथ समय बिताएं| जिससे आपको पता चले की आप बच्चो को सँभालने के लिए अभी तैयार हैं भी या नहीं| इसके लिए ये भी जरुरी हैं की आप किसी भाभी या बहन से सलाह ले की किस प्रकार बच्चो के साथ रहा जाता हैं| और उनका पालन पोषण किया जाता हैं आदि| ऐसा करने से आपको बेबी प्लान करने में जरूर मदद मिलेगी|

घर में बेबी से सम्बंधित वातावरण बनाएं:-

पहले घर में बच्चे से सम्बंधित वातावरण बनाएं| आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए, की बच्चे को प्लान करने से पहले जरुरी हैं यदि आपके रिश्तेदार के बच्चे हैं, तो उन्हें बुलाएं, और घर में बच्चो को लाकर देखे की क्या आप उनके साथ अच्छा महसूस करते हैं| और क्या आप बच्चो को अच्छे से देख-रेख कर सकते हैं| ऐसा करने से आपको बेबी प्लान करने में मदद मिलती हैं|

बच्चे के डॉक्टर से जानकारी ले:-

पहली बार माँ बनने से पहले आपको बच्चे के डॉक्टर से जरूर जानकारी लेनी चाहिए| और उनसे पूछना चाहिए की बच्चे को किस तरह के वातावरण की जरुरत होती हैं| बच्चे की परवरिश के लिए क्या-क्या जरुरी होता हैं| और आप किस तरह से बच्चे की परवरिश कर सकते हैं| बच्चे के शुरूआती दिनों की देखभाल कैसे की जाएँ| तो आपको बच्चा प्लान करने से पहले आपको बच्चे के डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए|

आर्थिक स्थिति के बारे में जरूर सोचें:-

बच्चे को प्लान करने से पहले ये भी जरुरी हैं की आप अपनी आर्थिक स्थिति पर ध्यान दे| क्योंकि आर्थिक स्थिति यदि आपकी कमजोर हैं तो शायद आपको अपने बच्चा पैदा करने के लिए थोड़ा और समय लेना चाहिए| ताकि आप अच्छे से बच्चे की परवरिश पर ध्यान दे सके| इसके अलावा कई बार आर्थिक स्तिथि के कारण बाद में कई परेशानियां आ जाती हैं|

शरीरिक व् मानसिक रूप से अपने आप तैयार करें:-

बेबी प्लानिंग के लिए सबसे जरुरी हैं की महिला शारीरिक व् मानसिक रूप से तैयार हैं या नहीं| यदि व् शारीरिक रूप से फिट नहीं हैं तो उन्हें, जरुरी हैं की सबसे पहले शारीरिक रूप से तैयार करें, इसके आलावा ये भी जरुरी हैं की आप मानसिक रूप से भी अपने आप को तैयार करें| इसका मतलब ये भी हैं की जब भी आप माँ बनने का विचार करें, तो आपको किसी भी प्रकार का कोई तनाव न हो|

अपने साथी से इस विषय में जरूर बात करें:-

बच्चे को जिंदगी में लाने से पहले आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए, की क्या आपका साथी और आप इस बारे में एक ही सोच रखते हैं| इसके आलावा आपको इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए, की बच्चे की जिम्मेवारी उठाने के लिए आप दोनों सक्षम हैं या नहीं| यदि आपकी राय एक-दूसरे से नहीं मिलती हैं| तो आपको बेबी को प्लान करने के लिए सही वक़्त का इंतज़ार करें|

तो ये सब कुछ बातें हैं जिनका ध्यान आपको माँ बनने से पहले रखना चाहिए| और आपको अपने बड़ो से और अपनी किसी सहेली से जो पहले माँ बन चुकी हैं| उनसे इस विषय में बात करनी चाहिए, ताकि जब भी आप माँ बनने का फैसला करें, तो आपको इन सब चीजो का पता चले, जो की गर्भावस्था के दौरान होती हैं| आपको इन सबका ध्यान रखने के बाद ही माँ बनने का फैसला लेना चाहिए|

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सांप काटने पर तुरंत ये करें

सांप के काटने से मरने वाले लोगो की संख्या बहुत ज्यादा है, और पुराने समय में तो ऐसा ज्यादा होता था, क्योंकि लोगो को इसके इलाज के बारे में सूचना ही नहीं थी, परन्तु क्या आप जानते है की सांप के 550 प्रजातियां होती है, परन्तु उसमे से केवल दस ही ऐसी होती है जो की जहरीले होते है, बाकी सब मे जहर नहीं होता है, परन्तु सांप काटने का लोगो में इतना डर है की जैसे ही उन्हें पता चलता है की उसे सांप ने काट लिया है, तो इसके डर के मारे ही लोग हार्ट अटैक से मर जाते है।

जब भी आपको सांप काटता है तो ऐसा कहा जाता है, की उसके जहर को आपके दिल और मस्तिष्क तक पहुँचने में कम से कम तीन से चार घंटे का समय लगता है, और उसके बाद ही ये जहर आपके शरीर में धीरे धीरे फैलने लगता है, परन्तु इतने समय में तो लोग उपाय करने की बजाय घबराने लग जाते है, जिसका असर आपके दिमाग पर पड़ता है, और इसी के कारण सांप काटने के कारण लोगो की मौत हो जाती है, जबकि यदि आप उन तीन घंटो में अपने इलाज के लिए कुछ करते है, या किसी डॉक्टर से संपर्क करते है, तो आपको बचाया जा सकता है, परन्तु इस बारे में जानकारी न होने के कारण ही इसका इलाज नहीं हो पाता है, तो आइए जानते है की सांप के काटने पर आपको तुरंत क्या करना चाहिए।

मरीज को उल्टी करवाएं:-

सांप के काटने पर जितना जल्दी हो सकें मरीज को उल्टी करवाने की कोशिश करनी चाहिए, इसके लिए आप उसे घी पिलाएं, या फिर गुनगुना पानी करके दें, इसके कारम उसे उल्टी करने से आसानी होगी और शरीर में जहर के प्रभाव को भी कम किया जा सकता है, और मरीज भी धीरे धीरे आपको ठीक लगने लगता है।

तुअर दाल का सेवन करें:-

तुअर दाल से भी सांप के काटने के कारण फैलने वाले जहर के असर को कम किया जा सकता है, इसके लिए आप तुअर दाल की जड़ को पीस कर यदि आप रोगी को खिलाते है तो आपको जहर के असर को कम करने में मदद मिलती है।

कंटोला का इस्तेमाल करें:-

कंटोला दो तरह का आता है, एक वो जिसमे फल और फूल दोनों होते है, और एक वो जिसमे फूल होता है, उसे बाँझ कंटोला भी कहा जाता है, यदि सांप के काटने के बाद उसके कांड को घिस कर सांप के काटने वाले स्थान पर लगा दिया जाएँ तो ऐसा करने से जहर का असर नहीं फैलता है, और उस व्यक्ति को बचाया जा सकता है।

लहसुन का सेवन करें:-

लहसुन एक ऐसी चीज है जो हर रसोई में बड़ी ही आसानी से मिल जाता है, यदि आपको सांप काट जाता है, तो आप लहसुन को पीस कर उसका पेस्ट तैयार करें, उसके बाद उसमे थोड़ा सा शहद मिलाकर उसे उस स्थान पर लगाएं जहां सांप ने काटा है या फिर उसे चटवायें ऐसा करने से भी सांप के जहर के असर को कम करने में मदद मिलती है।

मिट्टी के तेल और प्याज़ के बने लेप का इस्तेमाल करें:-

सबसे पहले कम से कम दो प्याज़ को लेकर अच्छे से घिस लें, और उसे मिट्टी के तेल की कुछ बूंदो के साथ मिलाएं, और उसे सांप के काटने वाले सतहन व् उसके चारों और अच्छे से लगा दें, थोड़ी देर बाद वो लेप हरे रंग में बदल जाएगा, क्योंकि जहर आपके शरीर में नहीं फैलेगा, और उसका असर इस लेप पर दिखाई देगा।

तम्बाकू के पेस्ट का इस्तेमाल करें:-

तम्बाकू के पेस्ट का इस्तेमाल करने से सांप के काटने पर उसके जहर को शरीर में फैलने से रोका जा सकता है, इसके लिए आप थोड़ा सा पानी लेकर उसमे तम्बाकू मिलाएं और एक लेप तैयार करें, उसके बाद इसे अच्छे से उस स्थान पर लगाएं जहां आपको सांप ने काटा है, ऐसा करने से सांप के द्वारा फैलने वाले जहर के असर को कम किया जा सकता है।

कड़ी पत्ते का सेवन करें:-

कड़ी पत्ते को किसी जड़ी बूटी से कम नहीं माना जाता है, यदि कसी व्यक्ति को सांप ने काट लिया हो, और उसे जल्दी से इसका दलिया बनाकर खिलाया जाता है, तो उस व्यक्ति को सांप के कारण शरीर में फैलने वाले जहर को कम किया जा सकता है।

सांप के काटने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए:-

  • यदि आपको सांप काट ले तो आपको सबसे पहले तो घबराना नहीं चाहिए, और चुपचार और आराम से रहना चाहिए।
  • उसके बाद यदि सांप के काटने वाली जगह पर यदि आपने कुछ पहना हो जैसे कोई गहना या जूता आदि उसे जल्दी से उतार दें।
  • जहां पर आपको सांप ने काटा है उसके दोनों तरफ पट्टी बाँध देनी चाहिए ताकि जहर फ़ैल न सकें।
  • और जहां पर सांप ने काटा है उस जगह को बार बार हाथ न लगाएं, और न ही उस जगह से छेड़छाड़ करें।
  • मरीज को बिलकुल भी न चलने दें, क्योंकि इसके कारण उसकी मांसपेशियों में रगड़ उत्त्पन्न हो सकती है, जिसके कारण तेजी से शरीर में जहर फैलने का डर रहता है।
  • और जितना जल्दी हो सकें मरीज को किसी हॉस्पिटल में लेकर जाने की कोशिश करनी चाहिए।
  • मरीज़ को बिलकुल भी सोने नहीं देना चाहिए, उठा कर रखना चाहिए।
  • सांप कटे व्यक्ति को किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ या दवाई का सेवन भी नहीं करने देना चाहिए, ऐसा करने से आपको परेशानी हो सकती है।
  • यदि आपको ये पता हो या आपने सांप का फोटो खींचा हो जिससे ये पता चल सकें की सांप कौन सी प्रजाति का है, तो इसके कारण डॉक्टर को आपका इलाज करने में आसानी हो सकती है।

तो ये कुछ उपाय है जिनका इस्तेमाल आप सांप के काटने पर अपनी जान बचाने के लिए कर सकते है, और साथ ही आपको सांप के काटने पर कभी भी ज्यादा घबराहट महसूस नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इसका बुरा असर आपके दिल और दिमाग पर बहुत बुरी तरह पड़ता है, जिसके कारण आपकी जान जाने का भी खतरा रहता है, इसीलिए उस समय आपको धैर्य से काम लेना चाहिए ताकि आपको कोई समस्या न हो, तो जब भी आपको या आपके आस पास किसी को सांप काटें तो आप इसमें से किसी भी तरीके का इस्तेमाल करके उनकी मदद कर सकती है।

पहले तीन महीनों में मिसकैरिज होने के क्या कारण होते हैं

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प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने महिला के लिए बेहत खास होते हैं और इस दौरान महिला को बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है। क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही के कारण आपको मिसकैरिज का सामना करना पड़ सकता है। पहले तीन महीने में होने वाले मिसकैरिज का कारण आपकी लापरवाही होने के साथ किसी न किसी शारीरिक समस्या के होने के कारण भी हो सकती है। ऐसे में महिला को अपना बहुत अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि गर्भपात की समस्या न हो। और जैसे ही महिला को पता चलता है की वो प्रेग्नेंट हैं उसके बार तुरंत डॉक्टर के पास जाकर अपनी अच्छे से जांच करवानी चाहिए ताकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके।

पहले तीन महीनों में गर्भ गिरने के कारण

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीनों में गर्भ गिरने के कई कारण हो सकते है, जैसे की फैलोपियन ट्यूब से जुडी समस्या, आपका ज्यादा उछल कूद करना, या किसी ऐसे आहार का सेवन करना जो गर्भपात करता हो, आदि। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भ गिरने के क्या क्या कारण होते हैं।

बच्चेदानी की समस्या

यदि किसी महिला को बच्चेदानी से जुडी परेशानी होती है, तो ऐसे केस में गर्भ गिरने के चांस बहुत ज्यादा होते है। और ज्यादातर यही कारण होता है की महिला का गर्भ नहीं ठहर पाता है।

संक्रमण

यदि महिला को वजाइना में या बच्चेदानी में किसी तरह का रोग या इन्फेक्शन है, तो इसके कारण भी गर्भाशय बहुत जल्दी प्रभावित होता है जिसके कारण महिला को गर्भपात का सामना करना पड़ सकता है।

पुरुष से जुडी परेशानी

कुछ पुरुषो के शुक्राणु ही बेहतर नहीं होते है, जिसमे बच्चा बनाने वाले जीवाणु नहीं होते हैं। और यदि ऐसी समस्या होती है तो इसके कारण भी महिला का गर्भ ठहरता नहीं है और यदि महिला प्रेग्नेंट हो जाती है तो उसे मिसकैरिज की समस्या झेलनी पड़ सकती है।

नशे का सेवन

जो महिलाएं धूम्रपान, शराब, या अन्य नशीली दवाइयों का सेवन करती है उन्हें भी इस समस्या से जूझना पड़ सकता है। इसके अलावा जो महिलाएं बहुत अधिक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती है उसके कारण उनकी गर्भाशय की झिल्ली पर बुरा असर पड़ता है जिसके कारण उनके गर्भपात होने के चांस ज्यादा होते हैं।

ज्यादा उछल कूद

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में महिला को भरपूर आराम करना चाहिए, लेकिन यदि महिला ज्यादा उछल कूद करती है, ज्यादा घूमती है, यात्रा करती है, तो कई बार झटके लगने के कारण भी उसे ब्लीडिंग होने लगती है जिसके कारण बाद में उसका गर्भपात हो जाता है।

शारीरिक रूप से फिट न होने के कारण

यदि कोई महिला शारीरिक रूप से कमजोर होती है, तो ऐसे में उसे भी इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। कमजोर होने के कारण बच्चा गर्भ में ठहर नहीं पाता है जिसके कारण मिसकैरिज हो जाता है।

किसी बिमारी के कारण

कई बार ऐसा भी होता है की महिला का गर्भ ठहर तो जाता है लेकिन किसी बिमारी जैसे की शुगर, ब्लड प्रैशर से जुडी परेशानी, गुर्दे से जुडी समस्या के कारण प्रेग्नेंट होने के बाद भी, उनका गर्भ गिर जाता है, और उनका मिसकैरिज हो जाता है।

खान पान में लापरवाही

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है, लेकिन कई बार ऐसा होता है की महिला प्रेग्नेंट होने के बाद ऐसी किसी चीज जैसे की विटामिन सी की अधिकता वाले पदार्थ आदि का सेवन कर लेती है जिसके कारण उसका गर्भ गिर जाता है।

रेडिएशन के कारण

यदि आप किसी जहरीली गैस के संपर्क में आ जाते हैं, किसी रेडिएशन का असर आप पर पड़ता है, या किसी कीटनाशक का असर होता है तो इसके कारण भी गर्भ गिरने के चने बढ़ जाते हैं।

तनाव होने के कारण

मिसकैरिज का एक कारण तनाव भी हो सकता है, यदि आप अपने दिमाग पर ज्यादा जोर डालते है या किसी चीज को लेकर बहुत परेशान होते हैं। तो इसका बुरा असर भी आपकी प्रेगनेंसी पर पड़ता है जिसके कारण आपको गर्भ गिरने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बार बार गर्भपात का होना महिला के लिए बहुत नुकसानदायक होता है इसीलिए गर्भपात के बाद दुबारा ऐसी परेशानी न हो इसके लिए महिला को अच्छे से अपना ध्यान रखना चाहिए। और प्रेगनेंसी के दौरान पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।

विडिओ बार-बार मिसकैरेज होने के क्या कारण होते हैं?

एक महीने की प्रेगनेंसी में क्या-क्या होता है?

एक महीने की प्रेगनेंसी में क्या-क्या होता है, प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए बहुत ही ख़ुशी का समय होता है। साथ ही प्रेगनेंसी का समय महिला के लिए काफी उतार चढ़ाव से भरा हुआ भी होता है। ऐसे में यदि महिला प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही अपना अच्छे से ध्यान रखती है तो महिला को प्रेगनेंसी को आसान बनाने में मदद मिलती है। प्रेगनेंसी का पहला महीना महिला के लिए बहुत अहम होता है।

क्योंकि इस दौरान बॉडी में तेजी से हार्मोनल बदलाव होते हैं जिसके कारण महिला परेशान हो सकती है। इसके अलावा कई महिलाएं तो घबराहट महसूस करने के साथ तनाव का शिकार भी हो सकती है। और ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि प्रेगनेंसी के पहले महीने में महिला को यह पता ही नहीं चल पाता है की महिला गर्भवती है या नहीं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के पहले महीने में क्या-क्या होता है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

एक महीने की प्रेगनेंसी के लक्षण

  • रक्त के धब्बे महिला को पैंटी में दिखाई दे सकते हैं।
  • बॉडी में हार्मोनल बदलाव होने के कारण महिला को मूड स्विंग्स हो सकते हैं जैसे की महिला चिड़चिड़ाहट, गुस्सा आदि महसूस कर सकती है।
  • ब्रेस्ट भारी, टाइट, सूजे हुए महसूस हो सकते हैं या फिर हल्का फुल्का दर्द भी महसूस हो सकता है।
  • महिला की बार बार यूरिन पास करने की इच्छा हो सकती है।
  • थकान व् कमजोरी का अनुभव महिला को बहुत अधिक हो सकता है।
  • कब्ज़, सीने में जलन आदि परेशानियां हो सकती है।
  • मॉर्निंग सिकनेस, जी मिचलाना, उल्टियां जैसी परेशानियां हो सकती है।
  • पसंद नापसंद में बदलाव आ सकता है।
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द, पीठ दर्द जैसी परेशानी हो सकती है।
  • भूख में कमी या भूख ज्यादा लगना जैसी परेशानी होना।

पीरियड्स मिस होने के बाद प्रेगनेंसी टेस्ट

यदि महिला को यह सब लक्षण अपनी बॉडी में महसूस होते हैं और उसके बाद महिला के पीरियड्स भी मिस हो जाते हैं। तो उसके बाद महिला को घर में प्रेगनेंसी टेस्ट करना चाहिए, ताकि महिला को कन्फर्म हो सके की महिला प्रेग्नेंट हैं या नहीं, और महिला अपना आगे का ट्रीटमेंट करवा सके। जिससे प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही महिला को फिट रहने में मदद मिल सकें।

प्रेगनेंसी के पहले महीने में बच्चे का विकास

गर्भावस्था के पहले महीने में ओवुलेशन पीरियड के दौरान महिला और पुरुष आपस में बेहतर सम्बन्ध बनाते हैं, और  महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु आपस में मिल जाते हैं। और निषेचन की क्रिया पूरी हो जाती है, तो उसके दो से तीन दिन बाद महिला के गर्भाशय में भ्रूण को प्रत्यारोपण हो जाता है। उसके बाद शिशु के अंगो की आकृतियां बननी शुरू हो जाती है। और उसके बाद जैसे जैसे समय आगे बढ़ता है वैसे वैसे शिशु का विकास भी बढ़ता जाता है।

तो यह है प्रेगनेंसी के पहले महीने में क्या क्या होता है उससे जुडी कुछ बातें, यदि आप भी प्रेगनेंसी की कोशिश कर रही है। तो आपको प्रेगनेंसी प्लान करते ही अपना अच्छे से ध्यान रखना शुरू कर देना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सके।

उल्टी और दस्त होने पर ये घरेलू उपाय करें

जरुरत से ज्यादा खा लेने, ज्यादा मसालेदार भोजन का सेवन करने, पेट में गड़बड़ी, एसिडिटी, गैस से जुडी समस्या, होने के कारण आपको उल्टी या दस्त की समस्या हो जाती है, क्योंकि आपका शरीर भोजन को अच्छे से पचा नहीं पाता है, जिसके कारण आपको हाज़मे में परेशानी का अनुभव हो सकता है इसके कारण या तो आपको उल्टियां शुरू हो जाती है, या दस्त लग जाते है, तो आइये आज हम आपको इस परेशानी से बचने के कुछ उपचार बताते है।

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कई बार उल्टी और दस्त का कारण शरीर होने वाली गर्मी भी हो सकती है, परन्तु ये परेशानी यदि आपको ज्यादा हो रही है, तो इसके कारण आपके शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है, इसीलिए आपको इस समस्या में पानी का सेवन भरूर करना चाहिए, कई बार आपको बहुत ज्यादा कमजोरी और चक्कर भी आने लग जाते है, इसके लिए आपको अपने डॉक्टर को भी दिखाना चाहिए, ताकि यदि आपको आराम नहीं आ रहा है तो वो आपको दवाई या ड्रिप लगा सकें, इसके अलावा ये समस्या ऐसी है जिसका उपचार आपके घर में भी आसानी से मिल जाता है, तो आइये आज हम आपको उल्टी और दस्त की समस्या से बचने के लिए कुछ घरेलू उपचात बताने जा रहे है, जो आपकी इस समस्या का समाधान करके आपको फिट कर देंगे।

उल्टी रोकने के घरेलू उपचार:-

अदरक का इस्तेमाल करें:-

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यदि आपको उल्टी आ रही है, या आपको ऐसा महसूस हो रहा है तो आपको अदरक वाली चाय का सेवन करना चाहिए या फिर अदरक के एक छोटे से टुकड़े को मुँह में लेकर चूसते रहना चाहिए ऐसा करने से आपको उल्टी रोकने में मदद मिलती है।

दालचीनी का इस्तेमाल करें:-

दालचीनी को पानी में अच्छे से उबाल लें, उसके बाद उसके गुनगुना रहने पर आप उसमें शहद डाल कर इसका सेवन करें, या फिर दालचीनी की चाय बनाकर उसका सेवन करें, ऐसा करने से भी आपको उल्टी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

पुदीने की पत्तियों का इस्तेमाल करें:-

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पुदीने की पत्तिया आपको रिफ्रेश महसूस करवाने में बहुत मदद करती है, इसके लिए आप पुदीने की चाय, या पुदीने की पत्तियों को पीस कर उसका रस निकाल लें, और उसमें थोड़ा नमक मिलाकर उसका सेवन करें, इससे भी उल्टी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

सिरके का इस्तेमाल करें:-

सिरके का इस्तेमाल काला नमक मिलाकर करने से भी आपको उल्टी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप बराबर मात्रा में सिरका और काला नमक मिला लें, और उसके बाद इसे चाटते रहे ऐसा करने से आपको आराम महसूस होगा।

चावल का पानी पीने से:-

कई बार उल्टी आने का कारण आपके पेट में एसिडिटी की समस्या होना भी हो सकता है, इससे राहत के लिए आप चावल को पानी में उबाल लें, उसके बाद उसमें से पानी को अलग करके उस पानी को ठंडा करके उसका सेवन करें, ऐसा करने से आपको उल्टी की समस्या से राहत मिलती है।

निम्बू का इस्तेमाल करें:-

नींबू पानी पीने के क्या-क्या फ़ायदे है

निम्बू के रस का इस्तेमाल करने से यदि आपके पेट में होने वाली किसी परेशानी के कारण आपको उल्टी हो रही है, तो उससे राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप निम्बू के टुकड़े पर काला नमक लगाकर उसे चूसते रहे ऐसा करने से आपको उल्टी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

लहसुन का इस्तेमाल करें:-

यदि आपको ऐसा लग रहा हो की आपको उल्टी आने वाली है, या उल्टियां बार बार हो रही हो, तो इस समस्या से राहत पाने के लिए आप लहसुन की दो कलियों को चबा कर उसका सेवन करें, इसके कारण आपको इस परेशानी से राहत मिलने में मदद मिलती है।

प्याज़ के रस का सेवन करें:-

प्याज के रस का सेवन करने से भी आपको उल्टी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप प्याज को घिस कर उसका रस निकाल लें, और उसमें काला नमक मिलाकर एक एक घंटे के अंतराल में पीते रहे ऐसा करने से आपको उल्टी की समस्या से रहता पाने में मदद मिलती है।

इलायची का इस्तेमाल करें:-

इलायची का सेवन करने से भी आपको उल्टी की समस्या से राहत मिलती है, और साथ ही यदि आप उल्टी आने जैसी संभावना को महसूस कर रही हो, तो आप उसी समय इलायची का सेवन कर लें, इससे उल्टी की समस्या से राहत मिलने के साथ एसिडिटी की समस्या यदि होगी तो उससे भी राहत मिलने में मदद मिलती है।

बर्फ का इस्तेमाल करें:-

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उल्टी आने पर या आपको ऐसा अनुभव हो रहा हो की आपको उल्टी आने वाली है तो इस समस्या से राहत पाने के लिए आप बर्फ के टुकड़े को चूसते रहे ऐसा करने से आपको उल्टी को रोकने में मदद मिलती है।

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हर एक गर्भवती महिला को आती हैं यह 10 मुसीबतें

प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियां

गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे प्यारा और खास अहसास है, लेकिन इस दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी जटिलताओं का सामना भी करना पड़ सकता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान लगातार बॉडी में हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं, शुरुआत में यह बदलाव बहुत तेजी से होते है, इसीलिए प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने बहुत ही सावधानी से रहने की सलाह दी जाती है। क्योंकि हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन ऐसा भी कोई जरुरी नहीं है की हर महिला को प्रेगनेंसी के दौरान परेशानी का अनुभव हो, या सभी गर्भवती महिलाओं को एक ही तरह की परेशानी हो। प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले बदलाव या परेशानियां पूरी तरह से गर्भवती महिला के शारीरिक सरंचना और महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल चेंज पर निर्भर करते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली मुसीबतें

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, और इन परेशानियों का होना प्रेगनेंसी में आम बात होती है। इन्हे लेकर गर्भवती महिला को घबराना नहीं चाहिए बल्कि इनसे निजात पाने के लिए अपने स्वास्थ्य का बेहतर तरीके से ध्यान रखना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कौन सी मुसीबतों क सामना करना पड़ सकता है।

मॉर्निंग सिकनेस

ज्यादातर महिलाएं प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से परेशान हो सकती है, जिसका कारण बॉडी में एस्ट्रोजन हॉर्मोन के स्तर का बढ़ना हो सकता है। और इस समय उल्टी, चक्कर, जी मिचलाना, सिर में दर्द आदि का अनुभव होना आम बात होती है।

पेट से जुडी समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पेट से सम्बंधित समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है, जैसे की बहुत सी गर्भवती महिलाएं कब्ज़ की समस्या से परेशान रहती हैं। साथ ही एसिडिटी, पाचन क्रिया का धीमा पड़ना, पेट में ऐंठन आदि भी हो सकती है। और इनके कारण महिला को हार्ट बर्न यानी की सीने में जलन और खट्टी डकार जैसी परेशानी का अनुभव भी हो सकता है।

थकान व् कमजोरी

पहली तिमाही में जहां बॉडी में तेजी से होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण वही तीसरी तिमाही में वजन के अधिक बढ़ने के कारण महिला को थकान व् कमजोरी का अनुभव अधिक हो सकता है। ऐसे में महिला को चाहिए की वो अपनी बॉडी को पूरा आराम दें, क्योंकि इस दौरान बॉडी में एस्ट्रोजन हॉर्मोन का स्तर बढ़ने के कारण थकान व् कमजोरी का अनुभव अधिक महसूस हो सकता है।

पेट व् पीठ में दर्द

हल्का फुल्का पेट या पेट के निचले हिस्से में प्रेग्नेंट महिला को दर्द का अनुभव होता रहता है। और इसका कारण गर्भ में शिशु का वजन बढ़ना और गर्भाशय के आकार के बढ़ने के कारण मांसपेशियों में होने वाले खिंचाव के कारण हो सकता है। इसके अलावा कमर व् पीठ में दर्द के कारण भी प्रेग्नेंट महिला बहुत परेशान रहती है, और आखिरी तिमाही में तो पीठ के दर्द का अनुभव बढ़ सकता है, क्योंकि शिशु का आकार बढ़ने के कारण वजन बढ़ता है जिसके कारण पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव हो सकता है जिसके कारण यह परेशानी हो सकती है। और यदि प्रेग्नेंट महिला को पहले से ही यह परेशानी रहती है तो प्रेगनेंसी के दौरान यह समस्या बढ़ सकती है।

मूड स्विंग्स

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव का असर गर्भवती महिला पर केवल शारीरिक रूप से ही नहीं पड़ता है। बल्कि इसके कारण महिला के व्यवहार में भी बदलाव आ सकता है, जैसे की महिला के मूड स्विंग्स होने लगते हैं, जैसे की कभी महिला खुश होने लगती है तो कभी अधिक गुस्सा करने के साथ चिड़चिड़ापन भी महसूस कर सकती है। ऐसे में घबराने के बात नहीं होती है डिलीवरी के बाद यह सब परेशानियां ठीक होने लगती है।

बार बार यूरिन पास करने की समस्या

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में बॉडी में हार्मोनल बदलाव बहुत तेजी से होते हैं जिसके कारण किडनी का काम बढ़ जाता है और वह अधिक सक्रिय हो जाती है, जिसके कारण गर्भवती महिला को बार बार यूरिन पास करने की इच्छा हो सकती है। और प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में भी गर्भवती महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि पेट का आकार बढ़ने के कारण मूत्राशय पर दबाव पड़ने लगता है, जिसके कारण बार बार यूरिन पास करने की इच्छा हो सकती है।

सूजन की समस्या

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में हाथों, पैरों, में सूजन की समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है। इसका कारण महीअल के पेट का आकार बढ़ने के कारण पैरों तक ब्लड फ्लो का सही न होना हो सकता है, साथ ही यदि महिला पैरों के भार बहुत देर तक खड़ी रहती है तो इसके कारण भी गर्भवती महिला को यह परेशानी हो सकती है। प्रेगनेंसी के दौरान सूजन आना काफी आम बात है लेकिन यदि सूजन बढ़ने लगे यानी की हाथ, पैर, मुँह आदि पर होने लगे और साथ ही दर्द भी अधिक हो तो इसे अनदेखा न करते हुए डॉक्टर से चेक करवाना चाहिए।

उल्टी की समस्या

उल्टी आना गर्भावस्था के महत्वपूर्ण लक्षणों में से एक है, और ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जबकि कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तक इस समस्या से परेशान रह सकती है। उल्टी की समस्या अधिक होने के कारण गर्भवती महिला को कमजोरी का अनुभव अधिक हो सकता है ऐसे में महिला को अपने खान पान का बेहतर तरीके से ध्यान रखें चाहिए।

गंध से एलर्जी

गर्भवती महिला के शरीर में होने हार्मोनल बदलाव के कारण कई महिलाओं को खाने पीने या अन्य चीजों की गंध से भी एलर्जी हो सकती है। और यदि महिला को खाने पीने की चीजों की गंध से एलर्जी होती है तो इसके कारण खाने का मन न करना, उल्टी आ जाना, भूख में कमी आदि की समस्या भी हो सकती है।

नींद में कमी

शरीर में कमजोरी आने के कारण, शारीरिक परेशानियों के कारण, वजन बढ़ने की वजह से, तनाव होने के कारण कई बार गर्भवती महिला को अनिंद्रा जैसी परेशानी भी हो सकती है। लेकिन गर्भवती महिला को अपनी नींद का अच्छे से ख्याल रखना चाहिए क्योंकि नींद में कमी गर्भवती महिला की शारीरिक परेशानियों को बढ़ा सकता है।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जिनका सामना गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि कभी प्रेग्नेंट महिला को परेशानी का अधिक अनुभव हो या फिर महिला को असहज महसूस हो तो इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से राय लेनी चाहिए, और घर में किसी भी तरह की दवाई का सेवन करने से बचना चाहिए।