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प्रेगनेंसी में सुबह का आहार कैसा होना चाहिए

गर्भावस्था में सुबह का नाश्ता

सुबह का नाश्ता दिन का सबसे पहला मील होता है ऐसे में यदि आप अच्छे से नाश्ता करते हैं और नाश्ते में भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों से युक्त आहार का सेवन करते हैं तो इससे आपको पूरे दिन के लिए ऊर्जा मिलती है। जिससे आप रिलैक्स, फ्रेश, एक्टिव महसूस करते हैं। और गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान तो अधिक ऊर्जा की जरुरत होती है क्योंकि प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानी के कारण महिला काफी कमजोर व् थका हुआ महसूस कर सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को नाश्ते में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला को सुबह आठ से नौ के बीच नाश्ता कर लेना चाहिए। और सुबह का नाश्ता बेहतर तरीके से करने से केवल गर्भवती महिला को नहीं बल्कि गर्भ में शिशु के विकास को भी फायदा मिलता है।

प्रेग्नेंट महिला को सुबह क नाश्ते में क्या-क्या खाना पीना चाहिए

प्रेग्नेंट महिला यदि सुबह से ही अपने रूटीन का अच्छे से ध्यान रखती है तो इससे केवल गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि शिशु को भी फायदा मिलता है। क्योंकि महिला जितना अपने स्वास्थ्य का बेहतर तरीके से ध्यान रखती है उतना ही शिशु के बेहतर विकास में फायदा मिलता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को सुबह के नाश्ते में क्या आहार लेना चाहिए।

पानी

सबसे पहले सुबह उठकर महिला को खली पेट बिना कुल्ला किए एक या दो गिलास पानी के जरूर पीने चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थो को बाहर निकलने के साथ महिला को एनर्जी मिलती है। इसके अलावा खाली पेट सुबह पानी पीने से गर्भवती महिला का पेट अच्छे से साफ़ होता है जिससे प्रेग्नेंट महिला को कब्ज़, एसिडिटी, सीने में जलन जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

फल और सलाद

प्रेग्नेंट महिला को अपने नाश्ते में फल या सलाद का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि इसमें न केवल प्रोटीन, फाइबर जैसे पोषक तत्व होते हैं। बल्कि पानी की मात्रा भी भरपूर होती है जो न केवल इसे आसानी से पचाने में मदद करता है। इसके अलावा फल व् सलाद प्रेग्नेंट महिला के लिए एक बेहतरीन नाश्ता होता है क्योंकि वसा की मात्रा कम होने के कारण यह प्रेग्नेंट महिला की शारीरिक परेशानियों को कम करने में मदद करता है।

भीगे हुए बादाम

रात को पांच छह बादाम पानी में भिगो दें, उसके बाद सुबह उठने के बाद या नाश्ते में इनका सेवन करें। यह भी बहुत फायदेमंद होते हैं क्योंकि इनमे मिनरल्स भरपूर मात्रा में शामिल होते हैं।

अंडे

प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान तीन सौ अतिरिक्त कैलोरी की जरुरत होती है। और अंडा महिला की इस जरूरत को पूरा करने में मदद करता है। इसीलिए प्रोटीन, कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर अंडे को भी गर्भवती महिला को अपने नाश्ते में शामिल करना चाहिए। आप उबले अंडे, ऑमलेट आदि बनाकर इस का सेवन कर सकती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखे की कच्चा अंडा और अधपका अंडा न खाएं क्योंकि इसमें मौजूद बैक्टेरिया गर्भवती महिला और शिशु की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।

साबुत अनाज

विटामिन, कैल्शियम, प्रोटीन, फाइबर जैसे पोषक तत्‍व साबुत अनाज जैसे दालें, ब्राउन राइस, दलिया, कॉर्न आदि में मौजूद होते हैं इसीलिए प्रेग्नेंट महिला नाश्ते में इनका सेवन कर सकती है। क्योंकि यह पोषक तत्व महिला को स्वस्थ रखने के साथ शिशु के बेहतर विकास में मदद करते हैं।

दूध व् दूध से बने प्रोडक्ट्स

कैल्शियम, प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर दूध व् दूध से बने प्रोडक्ट्स जैसे दूध, दही, पनीर, छाछ, आदि का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला नाश्ते में कर सकती है। इससे गर्भ में शिशु का बेहतर विकास होने के साथ प्रेग्नेंट महिला को भी कमजोरी व् थकान जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही इस बात का ध्यान रखे की क्रीम से बने दूध व् उससे बनी चीजों का इस्तेमाल न करें क्योंकि इससे महिला की सेहत पर असर पड़ सकता है।

जूस व् नारियल पानी

पानी की कमी से होने वाली परेशानियों से बचने के लिए व् बॉडी में पोषक तत्वों की मात्रा को भरपूर रखने के लिए प्रेग्नेंट महिला अपने नाश्ते में चाहे तो जूस व् नारियल पानी को भी शामिल कर सकती है। इससे महिला की पाचन क्रिया को भी बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है। साथ ही प्रेग्नेंट महिला को पूरा दिन ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आहार जिन्हे प्रेग्नेंट महिला अपने सुबह के नाश्ते में शामिल कर सकती है। ताकि प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला चाहे तो नाश्ते में किन किन चीजों को शामिल करना चाहिए इसके लिए अपने डॉक्टर से भी राय ले सकती है।

लौकी के जूस के क्या फ़ायदे होते है?

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हमारे फ्रिज में बहुत-सी सब्जियां मौजूद होती है जिनमे से कुछ तो हमारे स्वाद को बढ़ाती है जबकि कुछ को मज़बूरीवश उनके फ़ायदों के कारण खाना पड़ता है. उन्ही कुछ सब्जियों में से एक है घीया जिसे लौकी भी कहा जाता है. बाज़ार में लौकी की कई वैरायटी मिलती है. लेकिन सामान्य तौर पर गोल और लम्बी घीया देखने को मिलती है. ऐसे तो सभी इसका प्रयोग सब्जी आदि बनाने के लिए करते है लेकिन कई कुछ लोग अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और परेशानियों के लिए इसके जूस का प्रयोग करते है.

बेल के रूप में उगने वाले इस फल की परत थोड़ी मोटी होती है, जिसमे पानी और पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा पायी जाती है. ऊपर से ये कुछ पीले और हरे रंग का होता है जिसे छिलने पर सफ़ेद रंग का गुदा मिलता है. सामान्य तौर पर इसकी खेती नम और आद्र क्षेत्रों में की जाती है. पोषक तत्वों के अतिरिक्त इसमें कई विटामिन्स और मिनरल्स भी पाए जाते है जो मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होते है.

इस लाभदायक सब्जी की सबसे बड़ी खासियत है की ये आसानी से किसी भी जगह मिल जाती है. इसके अलावा लौकी में और भी कई गुण मौजूद होते है जो कुछ गंभीर बिमारियों में औषधि के रूप में कार्य करते है. सामान्य तौर पर देखा जाता है की लोगो को लौकी खाना पसंद नहीं होता. कुछ लोग को इसे इसके स्वाद के कारण नापसंद करते है तो कुछ को ये पता ही नहीं होता की ये सब्जी उनके स्वास्थ्य के लिए कितनी फायदेमंद है. यदि आप भी उन्ही लोगों में से है जिन्हें घीया खाना बिलकुल पसंद नहीं है तो आपको बता दें लौकी एक बेहद फायदेमंद सब्जी है जिसके प्रयोग से वजन बढ़ने जैसी आम समस्या से लेकर गुर्दे की सुजन तक सभी में आराम मिलता है.

लेकिन सभी के इसके फ़ायदों के बारे में नहीं होता होता, इसीलिए आज हम आपको लौकी के जूस के विभिन्न फ़ायदों से अवगत कराने जा रहे है जिन्हें जानकर आपको हैरानी होगी. क्योंकि इस बेस्वाद सब्जी के वाकई में कई फ़ायदे है. तो आइए जानते है लौकी का जूस पीने के फायदें!!

लौकी के जूस के स्वास्थ्य के लिए फ़ायदे :-

ऐसे तो लौकी के जूस का सेवन करने के बहुत से फ़ायदे होते है लेकिन उनमे से कुछ है जिनमे लौकी का जूस बहुत अधिक लाभकारी होता है और उन्ही कुछ टॉप हेल्थ बेनेफिट्स की जानकारी हम आपको देने जा रहे है. इसीलिए आज से ही अपने रेगुलर डाइट चार्ट में लौकी को सम्मिलित करें.

1. वजन घटाने में मददगार :

वजन घटाने के लिए लौकी का जूस सबसे अधिक प्रयोग में लाया जाता है. इसके लिए ताज़ी लौकी को छीलकर उसके छोटे-छोटे टुकड़े काट लें, उसके बाद उसे मिक्सी में डालकर उसका जूस निकाल लें. अपना वजन घटाने के लिए रोज़ाना इस जूस का सेवन करें. लौकी के जूस में बहुत से विटामिन्स, पोटैशियम और आयरन पाया जाता है जो आपके लिए बेहद फायदेमंद होते है. बेहतरीन परिणाम पाने के लिए सुबह खाली पेट इस जूस का सेवन करें.

2. पाचन में सहायक और कब्ज में दे आराम :

लौकी में न केवल एक soluble fiber है बल्कि एक insoluble fiber भी है जिसमे पानी की अच्छी मात्रा पायी जाती है. पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में लौकी का जूस बेहद लाभकारी होता है. इसके अलावा कब्ज की समस्या में लौकी जूस का सेवन करना बेहद फायदेमंद होता है. इसके साथ ही पाचन तंत्र से जुडी समस्याएं जैसे गैस और फेट फूलने की समस्या में भी आराम देता है.

3. ठंडक दे :

चूँकि लौकी के जूस में पानी की अच्छी मात्रा पायी जाती है, तो ये शरीर को ठंडक पहुंचाता है. इसके साथ ही पसीने के रूप में निकले पानी की कमी को भी पूरा करता है. इसीलिए गर्मियों के दिनों में तो इसका सेवन जरुर करना चाहिए.

4. मूत्र संबंधी समस्याएं :

इसकी diuretic प्रकृति के चलते, लौकी का जूस शरीर में मौजूद पानी की अतिरिक्त मात्रा को फ्लश आउट करने में मदद करता है. यदि इसके सेवन से पूर्व एक चम्मच नींबू के रस का सेवन किया जाए तो ये और भी फायदेमंद सिद्ध हो सकता है.

5. नींद से संबंधित समस्याएं :

यदि आप भी insomnia की समस्या से पीढित है, तो लौकी के जूस में थोडा सा तिल का तेल मिलाकर उसका प्रयोग करें. ये आपकी नींद को बेहतर बनाने में मदद करेगा.

6. पानी से संबंधित समस्याएं :

यदि आप भी sweating, fatigue और diarrhea जैसी स्वास्थ्य संबंधित समस्यायों से पीढित है तो एक गिलास लौकी का जूस आपके लिए बेहद लाभकारी सिद्ध हो सकता है. क्योंकि लौकी का जूस शरीर में हुई पानी की क्षति को प्रकृतिक तरीके से उसी समय पूरा कर देता है. इसके साथ ही मधुमेह के रोगियों के साथ होने वाली आम समस्या जैसे अधिक प्यास लगना को भी नियंत्रित करता है. इसके साथ ही आपके शरीर में हुई पानी की हानि को भी पूरा करता है.

7. हृदय को स्वस्थ रखे :

रोज़ाना लौकी के जूस का सेवन करने से आपके शरीर में BP नियंत्रित रहता है जिससे आपका हृदय भी स्वस्थ रहता है.

8. गुर्दे की सुजन :

आयुर्वेद में गुर्दे के सुजन का उपचार करने के लिए लौकी के जूस को पीने की सलाह दी जाती है.

कैसे बनाएं लौकी का जूस?लौकी के जूस के क्या फ़ायदे होते है

जैसा की हमने आपको बताया लौकी का जूस पीने के कई फ़ायदे है लेकिन बहुत से लोग इसे इसके खराब स्वाद के कारण नापसंद करते है. यदि आप भी उन्ही लोगों में से एक है जिन्हें कच्ची लौकी का स्वाद और फ्लेवर पसंद नहीं है, तो हम आपको लौकी के जूस बनाने की एक बेहतर रेसिपी बताने जा रहे है. हो सकता है इस रेसिपी से आप इसे पसंद कर लें.

  • सबसे पहले एक छोटी लौकी लें, उसका वजन लगभग 250 से 300 ग्राम होना चाहिए.
  • इसके बाद उसे पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि उसपर किसी प्रकार की गंदगी न मौजूद हो.
  • अब उसे छीलकर उसके टुकड़े काट लें. यदि सम्भव हो तो घीया का छोटा सा टुकड़ा काट कर उसे चख लें की कहीं वो कड़वा तो नहीं है.
  • उसके बाद उसमे पुदीने की कुछ पत्तियां मिला लें.
  • थोडा सा पानी डालकर सबको मिक्सी में पीस लें.
  • जूस बन जाने के बाद इसमें एक चम्मच जीरा पाउडर, 2 चम्मच काली मिर्च और स्वादानुसार नमक मिला लें.
  • अच्छे से मिलाने के बाद उसमे बर्फ के टुकड़े डालकर लौकी के जूस का स्वाद लें.

इस रेसिपी को एक बार ट्राई करें, हो सकता है की आप भी इस बेस्वाद लौकी के फेन हो जाएँ.

सौन्दर्य के लिए लौकी के जूस के फ़ायदे :-

क्या आप जानते है रोजाना सुबह लौकी के जूस का सेवन करने से गंजेपन और असमय बाल सफ़ेद होने की समस्या से निजात पाई जा सकती है? इतना ही नहीं, घिये का जूस पीने से आपकी त्वचा स्वस्थ और ग्लोइंग भी होती है. इसके साथ ही मुंहासे और दाग़ धब्बों से छुटकारा भी दिलाता है. त्वचा और बालों के लिए लौकी का जूस निम्नलिखित रूप से फायदेमंद है :

1. असमय सफ़ेद हुए बाल :

यदि आप रोजाना सुबह लौकी के जूस का सेवन करते है, तो आपके बाल कभी भी असमय सफ़ेद नहीं होंगे.

2. स्मूथ और सुन्दर त्वचा के लिए :

चूँकि लौकी का जूस आंतरिक तौर पर आपके शरीर की सफाई करता है तो ये आपकी त्वचा को स्वस्थ और मुहांसों से दूर रखने में भी मदद करता है. साथ ही त्वचा में तेल के निर्माण को भी नियंत्रित करता है.

ध्यान रखने वाली बातें :-

जब आप अपने स्वास्थ्य और त्वचा के लिए लौकी के जूस का सेवन करते है तो इसके लिए आपको कुछ बातों का बेहद खास ख्याल रखना होता है. कड़वे लौकी के जूस का सेवन करने से समस्याएँ उत्पन्न हो सकती है. कडवी लौकी का जूस पीने के मुख्य प्रभाव पेट के निचले भाग में दर्द, उल्टियाँ और डायरिया की समस्या है. इसीलिए, यदि आपने गलती से कडवी लौकी के जूस का सेवन कर लिया है तो जितना जल्दी हो सके अपने डॉक्टर से कंसल्ट करें.

इसीलिए लौकी के जूस को अपने डाइट में सम्मिलित करने से पूर्व और उसका सेवन करने से पूर्व एक बार अपने डॉक्टर से कंसल्ट जरुर करें.

चालीस ( 40 ) की उम्र में गर्भधारण करने में क्या जोखिम होते हैं

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए बहुत ही प्यारा लम्हा होता है, लेकिन इसकी भी एक सही उम्र होती है, कम उम्र में माँ बनना और अधिक उम्र में माँ बनना प्रेगनेंसी के होने वाले खतरों को बढ़ाता है, कई महिलायें ऐसी भी होती है जो चालीस के बाद माँ बनने के बारे में सोचती है, ऐसा नहीं है की वो प्रेग्नेंट नहीं होती है, लेकिन ऐसी प्रेगनेंसी किसी जोखिम से कम नहीं होती है, देखा जाए तो प्रेगनेंसी की सही उम्र 25 से 35 साल होती है, इस समय एक स्वस्थ महिला के स्वस्थ शिशु को जन्म देने के चांस सबसे ज्यादा होते है, क्या आपकी भी उम्र बढ़ती जा रही है, और आप अभी माँ बनने के बारे में सोच रहीं हैं, यदि हाँ तो अधिक उम्र में माँ बनने बनने से आपको काउ कौन सी परेशानियां आ सकती है आइये जानते है।

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ब्रैस्ट कैंसर का खतरा रहता है:-

चालीस की उम्र के बाद माँ बनने वाली महिलाओ को ब्रैस्ट कैंसर का खतरा बहुत अधिक होता है, क्योनी इस समय माँ बनने पर शरीर में हार्मोनल बदलाव और भी तेजी से होते है, और यह बात एक अध्यन में भी साफ़ की गई है, सामान्य प्रेगनेंसी की तुलना से ज्यादा खतरा 35 वर्ष की उम्र के बाद माँ बनने पर ब्रैस्ट कैंसर का खतरा ज्यादा होता है।

हाई ब्लड प्रैशर की समस्या हो जाती है:-

हाइपरटेंशन का खतरा भी आपको अधिक हो जाता है, क्योंकि इस समय यूरिन में प्रोटीन की मात्रा अधिक तेजी से बढ़ती और उम्र होने के कारण आपको इससे परेशानी का अनुभव हो सकता है, और प्रेगनेंसी के बीस हफ्तों के बाद क्रोनिक हाइपरटेंशन और उसके बाद गेस्टेशनल हाइपरटेंशन के कारण महिला का ब्लड प्रैशर बढ़ा रहता है।

गेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा रहता है:-

अधिक उम्र में प्रेगनेंसी होने के कारण गेस्टेशनल डायबिटीज का भी खतरा रहता है, जिसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है, और उसका वजन बढ़ने लगता है, जिसके कारण आपको डिलीवरी के सामने होने वाली परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, साथ ही शिशु को भी भविष्य में कभी भी शुगर होने की संभावना बढ़ जाती है।

इन्हें भी पढ़ें:- उम्र ज्यादा होने पर होने पर गर्भधारण में होने वाली परेशानिया

गर्भपात के चांस ज्यादा होते हैं:-

ज्यादा उम्र होने पर गुणसूत्र में भी असमानता हो जाती है, जिसके कारण गर्भपात के चांस भी बढ़ जाते है, और यह बार अध्यन में भी साफ़ की गई है की चालीस के बाद माँ बनने पर आपकी गर्भपात की आशंका पंद्रह प्रतिशत तक और भी बढ़ जाती है।

डिलीवरी के समय लेना पड़ता है सिजेरियन का सहारा:-

उम्र के अधिक होने पर आपकी नार्मल डिलीवरी के चांस कम और सिजेरियन डिलीवरी के चांस बढ़ जाते है, क्योंकि प्लासेंटा प्रीविया की समस्या बढ़ जाती है, पोर गर्भनाल भी ग्रीवा को ब्लॉक कर देता है, जिसके कारण डिलीवरी के लिए आपको सिजेरियन का सहारा लेना पड़ सकता है।

गर्भ में पल रहे शिशु को भी हो सकती है परेशानी:-

समय से पहले शिशु का जन्म होना, बच्चे का अविकसित पैदा होना, बच्चे का दिमागी रूप से कमजोर होना, डाउन सिंड्रोम की समस्या होना, यदि महिला को शुगर है तो शिशु का वजन बढ़ना और उसे भी शुगर होने के चांस होना, ऐसी कुछ परेशानिया अधिक उम्र में माँ बनने पर आपके शिशु को भी उठानी पड़ सकती है।

तो यदि आप भी माँ बनने का प्लान कर रहीं है तो सही उम्र का भी ध्यान रखें ताकि आपको प्रेगनेंसी में आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स से बचाव करने में मदद मिल सकें, और शिशु को होने वाले खतरों से भी आप बचा सकें।

इन्हें भी पढ़ें:- कम उम्र में माँ बनने से होती हैं ये समस्या?

डिलीवरी के बाद चेहरे के दाग हटाने के लिए क्या करें?

गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जहां महिला बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करने के साथ स्किन से जुडी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है। हो सकता है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला स्किन पर ज्यादा ध्यान न दे पाएं लेकिन डिलीवरी के बाद स्किन पर महिला को दाग धब्बे महसूस हो सकते हैं। ऐसा नहीं है यह हर महिला के साथ हो क्योंकि जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान खान पान का ध्यान रखने के साथ स्किन को स्वस्थ रखने का भी पूरा ध्यान रखती है उन्हें डिलीवरी के बाद इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकती है। लेकिन जो महिलाएं चेहरे पर दाग होने के कारण डिलीवरी के बाद परेशान होती हैं, कई बार इसके कारण महिला में आत्मविश्वास की कमी आ सकती है, क्योंकि उन्हें ऐसा महसूस हो सकता है की उनकी ख़ूबसूरती अब कम हो गई है।

डिलीवरी के बाद चेहरे से दाग हटाने के लिए यह करें

यदि प्रसव के बाद महिला को चेहरे पर दाग होने की समस्या होती है तो इसके लिए महिला को परेशान नहीं होना चाहिए। बल्कि इस समस्या का उपचार कैसे किया जाए इसके बारे में विचार करना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की डिलीवरी के बाद चेहरे पर होने वाले दाग की समस्या से निजात पाने के लिए महिला को क्या करना चाहिए।

खान पान

डिलीवरी के बाद चेहरे पर होने वाले दाग से निजात पाने के लिए व् चेहरे को पर्याप्त पोषण देने के लिए महिला को अपने खान पान का खास ध्यान रखना चाहिए। जैसे की दालों, हरी सब्जियों, गाजर, फलों, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए। साथ ही स्किन को हाइड्रेट रखने के लिए महिला को निम्बू पानी, नारियल पानी, फलों के रस आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए। यदि डिलीवरी के बाद महिला अपने खान पान का ऐसे ही बेहतरीन तरीके से ध्यान रखती है तो इससे भी स्किन से जुडी परेशानी से निजात पाने के साथ स्किन को ग्लोइंग बनाने में भी महिला को मदद मिलती है।

आलू

चेहरे पर दाग को खत्म करने, झुर्रियों से निजात पाने, एजिंग के लक्षण को खत्म करने, त्वचा के निखार को बढ़ाने के लिए, आलू का रस बहुत फायदेमंद होता है। नियमित रूप से एक आलू का रस निकाल कर रुई की मदद से इस रस को अपने चेहरे पर दिन में दो बार लगाएं और सूखने के बाद चेहरे को ताजे पानी से धो लें। रोजाना ऐसा करने से आपको अपने चेहरे पर दाग की समस्या से कुछ ही दिनों में राहत पाने में मदद मिल सकती है।

एलोवेरा

एलोवेरा जैल स्किन से जुडी सभी परेशानियों से राहत के लिए एक असरदार उपाय है। इसके इस्तेमाल के लिए नियमित रात को सोने से पहले एलोवेरा के ताजे पत्ते को काटकर उसमे से जैल निकालकर उसे अपने चेहरे पर लगाएं और दो मिनट तक मसाज करें। अब इसे रात भर के लिए ऐसे ही छोड़ दें, सुबह उठकर साफ़ पानी से चेहरे को धो लें, ऐसा करने से आपको चेहरे पर होने वाले दाग की समस्या से राहत पाने के साथ चेहरे पर निखार लाने में भी मदद मिलती है।

गुलाबजल

चेहरे की स्किन के लिए गुलाबजल भी बहुत फायदेमंद होता है इसके इस्तेमाल के लिए रात को सोने से पहले महिला को अपने मुँह से साफ़ पानी को धोने के बाद अच्छे से सुखाना चाहिए। चेहरे के सूखने के बाद अच्छे से रुई की मदद से महिला को अपने चेहरे पर गुलाबजल लगाना चाहिए। और उसके बाद सो जाएँ और सुबह उठाकर चेहरे को साफ़ पानी से धो लें। ऐसा करने से चेहरे पर होने वाले दाग से निजात पाने के साथ डिलीवरी के बाद चेहरे को ग्लोइंग बनाने में भी महिला को मदद मिलती है।

चन्दन

चन्दन पाउडर में थोड़ा सा गुलाबजल मिलाकर एक पतला लेप बनाएं और एक मास्क की तरह उसे चेहरे पर लगाएं। सूखने के बाद ताजे पानी का इस्तेमाल करके अपने चेहरे पर मसाज करते हुस इसे साफ़ कर दें। अब स्किन पर लोशन लगाएं। इस तरीके को हफ्ते में कम से कम तीन बार अपने चेहरे पर इस्तेमाल करें ऐसा करने से भी डिलीवरी के बाद महिला को चेहरे से जुडी समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

संतरे के छिलके

संतरे के छिलके को सुखाकर पाउडर के रूप में तैयार कर लें, उसके बाद एक कटोरी में एक चम्मच संतरे के छिलके का पाउडर और एक चम्मच शहद डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। अब इसे अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं खासकर जहां पर दाग हैं। अब इसे सूखने के लिए छोड़ दें और सूखने के बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें। एक हफ्ते में दो से तीन बार इस उपाय को करने से डिलीवरी के बाद महिला को स्किन से जुडी दाग धब्बो की परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

बेसन

एक चम्मच बेसन में निम्बू का रस या गुलाबजल को मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं। चेहरे पर लगाने के बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके अपने चेहरे को अच्छे से साफ़ करें। इस उपाय को हफ्ते में दो से तीन बार चेहरे के लिए ट्राई करें ऐसा करने से भी आपके चेहरे को दाग से छुटकारा दिलाने में मदद मिलती है।

सेब का सिरका

एक चम्मच सेब का सिरका, आधा चम्मच शहद, थोड़ा सा पानी लें। अब इन तीनो को अच्छे से मिक्स कर लें, मिक्स करने के बाद रुई की मदद से इस मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाएं। और चेहरे को सूखने के लिए छोड़ दें। चेहरे के सूखने के बाद साफ़ पानी से अपने चेहरे को धो लें, ऐसा करने से भी डिलीवरी के बाद चेहरे पर होने वाले दाग की समस्या से महिला को राहत पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से प्रेग्नेंट महिला को डिलीवरी के बाद चेहरे पर होने वाले दाग की समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है। और ऐसा नहीं है कि एक ही दिन में आपको इस परेशानी से राहत मिल जाये बल्कि नियमित कुछ दिनों तक इन टिप्स को ट्राई करें ऐसा करने से आपको धीरे धीरे आपको अपने चेहरे पर इसका असर साफ़ दिखाई देगा, और फिर से आपकी ख़ूबसूरती को वापिस आने में मदद मिल सकेगी।

एक से तीन महीने की प्रेगनेंसी में किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

एक से तीन महीने की प्रेगनेंसी में किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, प्रेगनेंसी टिप्स, प्रेगनेंसी में इन बातों का ध्यान रखें, पहले ट्राइमेस्टर में क्या करें क्या नहीं, एक से तीन महीने की प्रेगनेंसी में भूलकर भी न करें यह काम, Pregnancy tips for first Trimester

जैसे ही प्रेगनेंसी की न्यूज़ घर वालों और रिश्तेदारों को पता चलती है वैसे ही हर कोई अपनी राय देना शुरू कर देता है। ऐसा करना इससे बच्चे को फायदा होगा, ऐसा मत करना, क्या अच्छा है क्या बुरा है हर कोई इस बारे में अपनी राय देना शुरू कर देता है। ऐसे में इतना सब कुछ सुनकर हो सकता है प्रेग्नेंट महिला परेशान हो जाए। लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए की गर्भावस्था के पहले तीन महीने बहुत ही ज्यादा अहम होते हैं। इस दौरान थोड़ी सी भी लापरवाही की जाए तो इसके कारण गर्भपात, बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है। ऐसे में महिला को पहले तीन महीने में अपना बहुत अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है।

और महिला को केवल खान पान का ही नहीं बल्कि काम करने का, घूमने फिरने का, आराम का, डॉक्टर से राय लेने का, समय से टेस्ट करवाने व् दवाइयों का सेवन करने का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। और इस दौरान महिला के शरीर में हो रहे तेजी से बदलाव के कारण महिला परेशानी अनुभव कर सकती है। ऐसे में उनके पार्टनर को इस दौरान उनका भरपूर साथ देना चाहिए। प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है, ऐसे में महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने के लिए टिप्स

खुशनुमा अहसास और शिशु को महसूस करना जहां गर्भवती महिला के लिए बहुत यादगार होता है। वहीँ इस लम्हे को पूरी तरह से एन्जॉय करने के लिए महिला को पहले ट्राइमेस्टर में अपना अच्छे से ध्यान भी रखना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की वो कौन कौन सी बातें हैं जिनका ध्यान प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में रखना चाहिए।

डॉक्टर का चुनाव करें

प्रेगनेंसी के कन्फर्म होने के बाद आपको सबसे पहले एक अच्छे डॉक्टर का चुनाव करके चेकअप करवाना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के लिए क्या सही है और क्या नहीं इसके बारे में आप डॉक्टर से राय ले सकें।

ज्यादा न घूमें

प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में सुबह के समय आप हल्का फुल्का वॉक कर सकते हैं, लेकिन इस दौरान आपको ज्यादा प्रदूषण वाली जगह, ज्यादा भीड़भाड़ में, रेडिएशन वाली जगह पर या ज्यादा दूर की यात्रा करने से बचना चाहिए, क्योंकि यदि आपको थोड़ा सा भी झटका लगता है, या प्रदूषण से आप प्रभावित होती है तो इसके कारण गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।

पेय पदार्थो को भरपूर लें

मॉर्निंग सिकनेस से गर्भवती महिलाएं बहुत परेशान रहती है इसके होने का एक कारण आपके शरीर में होने वाली पानी की कमी हो सकती है। ऐसे में इस समस्या से बचने के लिए आपको निम्बू पानी, अदरक की चाय, नारियल पानी, जूस, दूध आदि दिन में पीते रहना चाहिए। और साथ ही आठ से दस गिलास पानी का सेवन करना चाहिए,  इन तीन महीनो में शिशु के अंगो का विकास होना शुरू होता है ऐसे में आपको ज्यादा ध्यान रखना चाहिए की बॉडी में पानी की कमी के कारण कोई परेशानी न हो।

ओमेगा फैटी एसिड को जरूर शामिल करें आहार में

बच्चे के मानसिक रूप से बेहतर विकास के लिए, आँखों के लिए, तंत्रिका तंत्र की बेहतर सरंचना के लिए महिला को अपने आहार में ओमेगा फैटी एसिड का भरपूर सेवन करना चाहिए। और इसके लिए आपको अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, फिश ऑयल, सरसों का तेल, नट्स आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

आयरन

हीमोग्लोबिन की मात्रा में बॉडी में पर्याप्त होना बहुत जरुरी होती है। क्योंकि यदि शरीर में खून की कमी होती है तो इसके कारण बच्चे के विकास और डिलीवरी के बाद और प्रसव के समय आपको बहुत परेशानी हो सकती है। और इस समस्या से बचने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए आपको आयरन और फोलिक एसिड का भरपूर सेवन करना चाहिए।

आहार में न करें लापरवाही

गर्भवस्था के दौरान महिला को हर दो से तीन घंटे में कुछ न कुछ खाते पीते रहना चाहिए। क्योंकि इससे आपको ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है साथ ही शिशु का बेहतर तरीके से विकास भी होता है। ऐसे में आप जो भी आहार लें, वह ताजा होना चाहिए, और साथ ही प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, व् अन्य खनिज से भरपूर होना चाहिए।

जरुरी टेस्ट करवाएं

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में बच्चे के दिल की धड़कन को देखने के लिए डॉक्टर अल्ट्रासॉउन्ड करवाते हैं, इसके अलावा, ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, व् एचआईवी टेस्ट, व् अन्य टेस्ट अपने डॉक्टर से पूछकर जरूर करवाएं, इसके अलावा और भी टेस्ट होते हैं। आपको इनमे बिल्कुल भी लापरवाही न करते हुए सभी टेस्ट समय पर करवाने चाहिए।

अपनी मर्ज़ी से दवाइयां न लें

पहले तीन महीने हार्मोनल बदलाव बॉडी में बहुत तेजी से होते हैं, जिसके कारण आपको परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। ऐसे में इनसे निजात पाने के लिए आपको अपनी मर्ज़ी से दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि गर्भनाल के रास्ते जाकर यह शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं, ऐसे में आपको यदि कोई परेशानी है तो डॉक्टर से राय लें, और उसके बाद दवाइयां लें।

तनाव न लें

तनाव लेने के कारण गर्भपात होने के चांस बढ़ जाते हैं ऐसे में आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए। की आप तनाव न लें, और जितना हो सकें खुश रहने की कोशिश करें इसके लिए आप बुक्स पढ़ें, संगीत सुनें, इससे शिशु पर भी अच्छा असर पड़ता है।

एक से तीन महीने की प्रेगनेंसी में ध्यान देने योग्य अन्य बातें

  • गर्म पानी का इस्तेमाल न तो नहाने के लिए और न ही पीने के लिए करें।
  • कच्चे पनीर, मांस और अंडे के सेवन से परहेज करें।
  • शराब व् धूम्रपान से दूरी रखें इनका न तो सेवन करें, और न ही उस जगह पर जाएँ जहां इनका कोई इस्तेमाल कर रहा हो।
  • बाहर का खाना खाने से बचे, ज्यादा तला भुना हुआ भी न खाएं इससे आपको पेट में जलन आदि की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
  • वजन बढ़ने के डर से डाइटिंग न करें इससे आपको और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है।
  • कोई भी समस्या के होने पर डॉक्टर से चेक जरूर करवाएं, और समय पर अपनी जांच करवाएं।
  • ज्यादा भागादौड़ी और सीढ़ियां चढ़ने से बचें।
  • कमर झुकाकर काम न करें, पेट के ऊपर दबाव न डालें, और न ही ज्यादा वजन उठाएं इनके कारण गर्भपात होने के चांस बढ़ सकते हैं।
  • हील्स और पेट पर ज्यादा टाइट होने वाले कपडे पहनने से भी परहेज करें।
  • बासी व् ठन्डे आहार का सेवन न करें, बल्कि ताजा और संतुलित आहार का सेवन करें।
  • नींद के प्रति लापरवाही न करें।
  • ऐसी किसी भी चीज का सेवन न करें जिससे गर्भपात के चांस बढ़ जाएँ।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने महिला को रखना चाहिए। यदि महिला इन टिप्स का ध्यान रखती है और अपनी अच्छे से केयर करती है तो शिशु को बेहतर तरीके से विकसित होने में मदद मिलती है। साथ ही आपको प्रेगनेंसी के बाकी समय भी फिट रहने में मदद मिलती है।

विडिओ एक से तीन महीने की प्रेग्नेंसी का ख्याल ऐसे रखें

एबॉर्शन करवाने का सही समय कब तक होता है

प्रेगनेंसी जहां किसी भी महिला के लिए सुखद अहसास होता है, वहीँ गर्भपात किसी भी महिला के लिए दुखी होने की वजह भी बन सकता है, परन्तु कई बार ऐसा भी होता है, की महिला नहीं चाहती है, की वो प्रेग्नेंट हो, और उसका गर्भ ठहर जाएँ, परन्तु असुरक्षित यौन सम्बन्ध बनाने के कारण महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में महिला का जब अनचाहा गर्भ ठहर जाता है, तो महिला उसे गिराने के लिए कोशिश करने लगती है।

लेकिन क्या आप जानते है की गर्भ गिराने का सही समय कब तक होता है, क्योंकि यदि आप दो से ज्यादा महीने का गर्भ गिराने की घर में ही कोशिश करती है, तो इसके कारण आपको परेशानी का अनुभव होता है, और ऐसा भी जरुरी नहीं होता है की घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करके आपका गर्भ गिर जाएँ, घरेलू तरीको से गर्भ गिराने पर हो सकता है शायद की आपको ब्लीडिंग हो जाएँ, लेकिन ऐसा होने पर भी आपको डॉक्टर को एक बार जरूर दिखाना चाहिए।

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क्योंकि कई बार आपके गर्भाशय में टिश्यू रह जाते है, जिसके कारण आपको बाद में परेशानी का अनुभव होता है, साथ ही इसके कारण आपको बाद में प्रेगनेंसी से जुडी परेशानी भी हो सकती है, कई महिलायें ऐसी भी होती है, जो एबॉर्शन के लिए या गर्भधारण से बचने के दवाइयों का इस्तेमाल करती है, परन्तु क्या आप जानती है, की यदि आप इसका सेवन अधिक करती हैं, तो इसके कारण आपको बाद में प्रेगनेंसी होने में समस्या होती है, साथ ही बार बार गर्भपात भी महिला को शारीरिक रूप से कमजोर कर देता है।

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अनचाहे गर्भ का कारण:-

जो महिला और पुरुष बिना किसी सुरक्षा के सम्बन्ध बनाते है, और ऐसा करने पर यदि महिला के गर्भाशय में अंडा निषेचित हो जाता है, और ऐसे में महिला के गर्भ ठहरने के चांस बढ़ जाते है, जिसके कारण आपको प्रेगनेंसी हो सकती है।

गर्भपात का सही समय कब होता है:-

यदि महिला को एक से दो महीने तक की प्रेगनेंसी होती है, तो महिला घरेलू तरीको का इस्तेमाल करके जैसे की गरम चीजों का अधिक सेवन करके, भागदौड़ करके, विटामिन सी युक्त पदार्थो का अधिक मात्रा में सेवन करके, सीताफल के बीजो को पीसकर योनि में लगाकर, इलायची का सेवन करके आदि, इन तरीको का इस्तेमाल करके गर्भ को गिरा सकती है, इन तरीको का इस्तेमाल करने के बाद यदि आपको ऐसा लगता है की आपको ब्लीडिंग हो गई है, उसके बाद भी आपको डॉक्टर से जरूर चेक करवाना चाहिए।

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उसके बाद यदि आपको दो से तीन महीने की प्रेगनेंसी है तो घरेलू तरीके तेजी से काम नहीं करते है, इसके लिए जितना जल्दी हो सकें आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि यदि आपको तीन से ज्यादा महीने की प्रेगनेंसी हो जाती है तो उसके बाद गर्भपात होना मुश्किल हो जाता है, साथ ही आपको अधिक शारीरिक समस्या का सामना करना पड़ता है, तो यदि आपका भी अनचाहा गर्भ ठहर गया है, तो आपको भी इन सब बातों का ध्यान रखना चाहिए, साथ ही सेक्स करते समय यदि आप सावधानी बरतेंगे तो आपको इस समस्या से बचाव करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा आपको यदि प्रेगनेंसी से बचना है तो आपको हमेशा सुरक्षा का इस्तेमाल करना चाहिए, यदि आपका पुरुष साथ सुरक्षा का इस्तेमाल नहीं करता है, तो आजकल महिलाओ के लिए भी बहुत से ऐसे तरीके जैसे की कंडोम, गर्भनिरोधक गोलियां आदि उपाय है, जिनसे आपको इस समस्या से राहत मिल सकती है।

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गर्मियों में ये कर के घर से बाहर निकलें

गर्मियों का मौसम आ चुका है, और ऐसे में घर से बाहर निकलने का दिल ही नहीं करता है, परन्तु ऑफिस जाना, घर के काम के कारण बाहर आना जाना, बच्चों के स्कूल के लिए ऐसे ही कुछ काम करने के लिए घर से बाहर निकलना ही पड़ता है, गर्मियों में घर से बाहर निकलते समय आपको बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इस मौसम में सूरज की तेज किरणे और लू के कारण आपकी त्वचा और सेहत को नुकसान हो सकता है, इसीलिए गर्मियों में बाहर निकलते समय पूरी केयर के साथ बाहर निकलना चाहिए।

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सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट किरणे यदि सीधा आपकी त्वचा के संपर्क में आती है तो इसके कारण त्वचा शुष्क होने के साथ काली भी पड़ने लगती है, इसके साथ यदि आप गर्मियों में खाली पेट या फिर बिना खाएं घर से निकलते है तो भी आपको सेहत से सम्बंधित समस्या का सामना करना पड़ सकता है, साथ ही आप जब भी घर से बाहर निकलते है तो आपको अपने चेहरे को अच्छे से ढक कर निकलना चाहिए, अपनी त्वचा के लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए, ऐसी ही कुछ छोटी छोटी बातें है जिनका आपको ध्यान रखना चाहिए, यदि आप इन बातों का ध्यान रखते है तो इसके कारण आपको गर्मी में बाहर निकलने से जो दुष्प्रभाव होते है उससे बचने में मदद मिलती है, तो आइये विस्तार से जानते है की गर्मियों में घर से निकलते समय आपको कौन कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

खाली पेट घर से बाहर न निकलें:-

खाली पेट गर्मियों में आपको घर से बाहर बिलकुल भी नहीं निकलना चाहिए, क्योंकि यदि आप खाली पेट घर से बाहर निकलते है तो इसके कारण आपको सेहत सम्बन्धी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, इसके कारण आपको सर दर्द चक्कर जैसी समस्या उत्त्पन्न हो सकती है, इसीलिए गर्मियों में घर से बाहर निकलते समय ध्यान रखें की आप खाना खाकर ही निकलें।

पानी की बोतल साथ रखें:-

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गर्मियों में बाहर निकलते समय आपको ध्यान रखना चाहिए की आप पानी की बोतल साथ रखें क्योंकि गर्मियों में पानी का आपके शरीर में भरपूर होना बहुत जरुरी होता है, और जब भी आप कही धूप में बाहर निकालें, तो आपको थोड़ी थोड़ी देर बाद पानी पीते रहना चाहिए, इसके कारण आपको लू के प्रभाव से बचने में मदद मिलती है, और याद रहे की आप धूप में हमेशा नार्मल पानी का ही सेवन करें, ज्यादा ठन्डे पानी को पानी का सेवन से आपकी तबियत खराब हो सकती है।

त्वचा को अच्छे से ढक कर निकलें:-

जब भी आप गर्मियों में कही बाहर जाते है तो आपको अपनी त्वचा को अच्छे से ढक कर बाहर निकलना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन का आपकी त्वचा पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है, यदि वो किरणे सीधा आपकी त्वचा के संपर्क में आती है तो इसके कारण आपकी त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है, साथ ही त्वचा में कालेपन की समस्या भी उत्त्पन्न होने लग जाती है।

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सनस्क्रीन लगाएं:-

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चिलचिलाती गर्मी में बाहर निकलने से कम से कम बीस मिनट पहले आपको अच्छे से अपनी स्किन के लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए, इसके इस्तेमाल से आपकी त्वचा की नमी बनी रहने में मदद मिलती है, और साथ ही आपकी त्वचा पर सूर्य की करने का बुरा प्रभाव भी नहीं पड़ता है, इसके साथ आप चाहे तो मॉइस्चराइजर का भी इस्तेमाल कर सकती है।

आँखों का भी रखें ध्यान:-

सूर्य की किरणों का गलत प्रभाव आपकी आँखों पर भी पड़ता है, इसीलिए जब भी आप गर्मियों में बाहर जाते है तो आपको अपने चेहरे को अच्छे से ढक कर निकलने के साथ आपकी आँखों के लिए भी गॉगल्स का इस्तेमाल करना चाहिए, इसके इस्तेमाल से आपकी आँखों को सूर्य की तेज किरणों के साथ धूल मिट्टी आदि से भी निजात मिलता है, जिसके कारण आपकी आँखों पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है।

कॉटन के कपडे पहने:-

गर्मियों में अधिक पसीना आता है, जो कॉटन के कपड़ो द्वारा अच्छी से सोख लिया जाता है, परन्तु यदि आप गर्मियों में रेशमी कपडे पहन कर बाहर जाते है, तो इसके कारण न तो आपका पसीना सोखा जाता है, और साथ ही इसके कारण आपको खुजली की समस्या और होने लग जाती है, जबकि कॉटन के कपडे पहनने के कारण आपको न तो पसीने से जुडी कोई परेशानी होती है, और न ही खुजली आदि की समस्या होती है, और जितना हो सकें गर्मियों में आपको हलके रंगो के कपडे ही पहनने चाहिए, क्योंकि ज्यादा गाढ़े रंग पहनने के कारण भी आपको अधिक गर्मी का अहसास हो सकता है।

गर्मी में बाहर निकलते समय करें छाते का प्रयोग:-

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गर्मियों में बाहर निकलते समय आपको छाते का इस्तेमाल करना चाहिए, ऐसा करने से आपके शरीर को धूप और लू दोनों से ही बचने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपको सेहत से सम्बंधित कोई परेशानी नहीं होती है, और खास कर जब आप छोटे बच्चे को साथ लेकर निकलती है तो आपको इसका इस्तेमाल जरूर करना चाहिए, इसके कारण बच्चे को भी लू के प्रभाव से बचाने में मदद मिलती है।

बॉडी के लिए टेलकम पाउडर का इस्तेमाल कर सकते है:-

गर्मियों में बाहर निकलते समय कई लोगो को घमौरिया की परेशानी भी हो जाती है इससे बचने के लिए आप अपनी बॉडी के लिए टेलकम पाउडर का इस्तेमाल कर सकते है, इसके कारण आपको घमौरिया से सुरक्षा मिलने के साथ ठंडक का अहसास भी होता है, और पसीना भी कम आता है, और घमौरिया है तो ठीक हो जाता है, नहीं तो घमौरिया की समस्या से बचाव होता है, और साथ ही आपको खुजली व् जलन जैसी समस्या नहीं होती है।

तो ये कुछ बातें है जिनका ध्यान आपको गर्मियों में बाहर निकलते समय रखना चाहिए, इन टिप्स का इस्तेमाल करने से गर्मियों में होने वाली बीमारियों और परेशानी से बचने से आपको आराम मिलता है, साथ ही आपकी त्वचा को कोई नुकसान नहीं होता है, आपकी त्वचा की कोमलता को बनाएं रखने में मदद मिलती है, इसके साथ आपको अपने खान पान का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, गर्मियों में पानी की कमी को अपने शरीर में नहीं होने देना चाहिए इसीलिए समय समय पर ग्लूकोस, पानी व् फलों के रस का सेवन करते रहना चाहिए।

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गर्भावस्था के दौरान कैसी ब्रा और पैंटी (Undergarments) पहननी चाहिए?

Undergarments For Pregnancy

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में बहुत से बदलाव आने लगते है जिसके कारण कभी उनका वजन बढ़ने लगता है तो कभी बॉडी के किसी हिस्से में तनाव महसूस होने लगता है। प्रेगनेंसी के टाइम पर सबसे बड़ी समस्या वजन को लेकर होती है जिसके कारण महिलाएं ना तो ठीक तरह से कपडे पहन पाती हैं और ना ही इनर वियर। गर्भावस्था के समय बढ़ने के साथ-साथ वजन भी बढ़ जाता है जिसके कारण शरीर के अंगों में भी परिवर्तन होने लगता है – जिसमे पेट का बढ़ना, कमर के निचले हिस्से का बढ़ना और सबसे ज्यादा स्तनों के आकार में बदलाव होते रहना।

ऐसे में यदि सही अंडर गारमेंट्स का चुनाव करना बहुत जरूरी होता है। प्रेगनेंसी के दौरान सही ब्रा और पैंटी पहनने से शरीर और बच्चा दोनों सेफ रहते हैं। इसके अलावा प्रेगनेंसी में स्तन ढीले होने की समस्या भी बनी रहती है इसलिए इस समय में महिलाओं को सही अंडर गारमेंट्स पहनने चाहिए।

आज हम आपको ऐसे ही कुछ ब्रा और पैंटी के बारे में बता रहे हैं जिन्हे गर्भावस्था के दौरान पहना जा सकता है।

प्रेगनेंसी के लिए ब्रा 

प्रेगनेंसी के दौरान आपकी रेगुलर ब्रा आपको फिट नहीं आएगी इसलिए आपको नई ब्रा खरीदनी पड़ेगी जिसके लिए आप  नीचे दिए गए ऑप्शंस में से ब्रा का चुनाव कर सकते हैं-

मैटरनिटी ब्रा 

Maternity Bra with Wide Straps : मैटरनिटी ब्रा को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है, की प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ते पेट और ब्रैस्ट को यह आसानी से एडजस्ट कर लेती हैं और इसकी चौड़ी स्ट्रैप आपके ब्रैस्ट में आने वाले को बदलावों को एडजस्ट कर देती है। इस ब्रा को पहनने से न तो आपके शरीर में दर्द होता और ना ही पेट पर ज्यादा प्रेशर पड़ता है। ये ब्रा सिर्फ गर्भावस्था के दौरान ही नहीं बल्कि गर्भावस्था के बाद भी बच्चे को दूध पिलाते समय काम आती है।

स्पोर्ट्स ब्रा

Sports Bra : स्पोर्ट्स ब्रा भी प्रेग्नेंसी के दौरान काफी कंफर्टबल मानी जाती हैं। क्योंकि इनमे किसी तरह की स्ट्रिंग या वायर नहीं होती जिससे पेट या कमर पर स्ट्रेस नहीं पड़ता। और सॉफ्ट फैब्रिक होने के कारण ये आसानी से बॉडी के अनुसार एडजस्ट हो जाती हैं। आप चाहे तो स्पोर्ट्स ब्रा में सो भी सकती हैं।

नर्सिंग ब्रा

Nursing Bra : नर्सिंग ब्रा अधिकतर प्रेगनेंसी के बाद यूज की जाती हैं जो बहुत कंफर्टबल होती हैं। इस ब्रा में डीटैचेबल स्ट्रैप्स होती हैं जिन्हे बच्चे को फीड कराते समय हटाया जा सकता है। इसके अलावा इस ब्रा को इस तरह से डिज़ाइन किया जाता है की ब्रा बिना खोले ही बच्चे को फीड कराया जा सके। सॉफ्ट होने के साथ-साथ इनकी फिटिंग पर भी काफी ध्यान दिया जाता है ताकि डिलीवरी के बाद स्तनों में ढीलापन ना आए।

इन बातों का ध्यान रखें

  • अंडर-वायर ब्रा ना लें : ये ब्रा गर्भवती महिलाओं के लिए अच्छी नहीं मानी जाती क्योंकि इसके निचले हिस्से में वायर होता है जो आपके ब्रैस्ट में दर्द का कारण बन सकता है।
  • ज्यादा तंग ब्रा से बचें : इस तरह की ब्रा महिला के शरीर में दर्द भी हो सकता है।
  • सही माप की ब्रा लें : इसके लिए आप डॉक्टर की मदद ले सकती हैं।
  • ब्रा को अच्छे से जाँच लें : ब्रा का निचला हिस्सा यानी ब्रेस्ट के नीचे के हिस्से की ब्रा को अच्छे से चेक कर लें वो ज्यादा टाइट नहीं होनी चाहिए, अन्यथा आपको जलन और दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • ब्रा का फैब्रिक भी सही होना चाहिए : सही ब्रा के साथ-साथ सही फैब्रिक का चुनाव करना भी बहुत जरुरी है। इसीलिए ऐसी ब्रा चुनें जिनका कपड़ा कंफर्टबल और ड्राई रहता हो। बेहतर होगा वो कॉटन की हो।

प्रेग्नेंसी के लिए अंडरवियर

अक्सर अंडरवियर की लास्टिक की वजह से गर्भावस्था के दौरान पेट पर निशान बन जाते है जो बच्चे के लिए ठीक नहीं। इसलिए इस दौरान आपको ऐसे अंडरवियर पहनने चाहिए जो आरामदायक होने के साथ-साथ सॉफ्ट भी हो। इसके अलावा प्रेग्नेंसी में वजाइनल डिस्चार्ज भी होता है जिससे फंगल इन्फेक्शन भी हो सकता है इसीलिए पैंटी के फैब्रिक पर ध्यान देना भी बहुत जरुरी है।

यहाँ हम आपको कुछ पैंटी के बारे में बता रहे है। ये सभी अंडरवियर प्रेगनेंसी के दौरान पहनने के लिए बिलकुल सेफ है।

Under Bump Underwear

ये अंडरवियर इस तरह से डिज़ाइन किये जाते है की ये आपके बेबी बंप के नीचे सेट हो जाएं। इनका कपड़ा बहुत सॉफ्ट और कंफर्टबल होता है, इसलिए आप इन्हे प्रेग्नेंसी के आखिरी महीनों में भी पहन सकती हैं।

Under Bump Maternity Panties

इन पैंटीज का आगे वाला हिस्सा काफी छोटा होता है जिससे पेट पर किसी तरह का दबाब नहीं पड़ता और पीछे का हिस्सा बड़ा होने के कारण यह कमर पर अच्छे से सेट हो जाती हैं। इन्हे पहनने से फिसलने का डर भी नहीं रहता जो अक्सर सामान्य पैंटीज में होता है।

Under Bump Maternity Underwear

इन पेंटीज का डिज़ाइन V-आकार में होता है जो बेबी बंप के नीचे सेट हो जाती है जिससे इनका प्रेशर पेट पर नहीं पड़ता। इनकी लास्टिक काफी सॉफ्ट होती है जिससे पेट पर रबर के निशान भी नहीं बनते। लेकिन इनकी कॉस्ट थोड़ी ज्यादा हो सकती है।

Maternity Support Briefs

बेबी के कारण बढ़ते पेट से दर्द होने पर इस तरह की पैंटी पहनना अच्छा होता है। यह आपके पेट को फुल सपोर्ट देती हैं जिससे पेट का वजन शरीर पर कम पड़ता है और दर्द भी कम होता है। ये बहुत आरामदायक और फ्री साइज होती हैं जिन्हे कोई भी लेडी पहन सकती है। इससे पहनने से शरीर पर जलन और खुजली जैसा नहीं होता क्यूंकि इसका कपडा काफी सॉफ्ट होता है।

Maternity Cradle Briefs Boyshort

ये कुछ-कुछ Men शॉर्ट्स जैसी होती है लेकिन इनके आगे वाले हिस्सा V आकार का होता है जो बेली के नीचे सेट हो जाता है। जबकि बैक से यह फुल कवरेज देती है। इन्हे प्रेग्नेंसी के बाद भी आसानी से पहना जा सकता है।

Seamless Maternity Hipster Panty

ये पैंटी थोड़ी फैशनेबल होती हैं, इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान इन्हे पहनना ठीक नहीं माना जाता है। लेकिन डिलीवरी के बाद इन्हे पहना जा सकता है।

Plus-Size Maternity Hi-cut Panties

ये पेंटीज प्लस साइज में होती हैं जिन्हे प्रेगनेंसी के दौरान पहना जा सकता है। ये पेट के आसपास के हिस्से को पूरी तरह कवर कर लेती है। इसका फैब्रिक काफी सॉफ्ट होता है और लास्टिक भी मुलायम होती है। जिसे पहनने पर शरीर पर किसी तरह का दबाब नहीं पड़ता।

High Cut Maternity Panties

ये अंडरवियर नाभि तक होती है जो पेट के काफी हिस्से को कवर कर लेती है। इनकी बैंड बहुत सॉफ्ट होती है, जो पेट पर कोई प्रेशर नहीं डालती और न ही स्लिप होती है। इन्हे आप अपने साइज के अनुसार ले सकते है। इन पेंटीज को डिलीवरी के बाद पेट को सपोर्ट देने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

Note : इन्हे आप किसी भी Lingerie स्टोर या ऑनलाइन स्टोर से खरीद सकती है। लेकिन ध्यान रहे अगर आप इन्हे ऑनलाइन खरीद रही हैं तो अंडरवियर और ब्रा का ब्रांड सही होना चाहिए, जबकि स्टोर से लेते वक्त इनका कपड़ा जरूर चेक करें। ये सॉफ्ट और कॉटन का होना चाहिए।

सफ़ेद छोले खाना प्रेगनेंसी में क्यों जरुरी है?

गर्भावस्था के दौरान कई बार प्रेग्नेंट महिला को अपनी पसंद की खान पान की चीजों को छोड़ना पड़ता है और ऐसी चीजों का सेवन करना पड़ता है जो महिला को पसंद नहीं होती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला की हेल्थ अच्छी हो यह सबसे ज्यादा जरुरी होता है। क्योंकि माँ की हेल्थ अच्छी होती है तभी तो गर्भ में बच्चे का विकास भी अच्छे से हो पाता है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपसे सफ़ेद छोले जो की हर किसी की पसंद होते हैं उसका सेवन गर्भवती महिला को क्यों करना चाहिए इस बारे में बात करने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में क्यों खाने चाहिए सफ़ेद छोले?

प्रेग्नेंट महिला को गर्भावस्था के दौरान ऐसी चीजें खानी चाहिए जिससे माँ व् बच्चे दोनों को फायदा मिलें। और सफ़ेद छोले प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। क्योंकि इसमें फोलेट, कैलोरीज़, आयरन जैसे बेहतरीन पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो महिला को स्वस्थ रखने के साथ बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद छोले खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

प्रेगनेंसी में सफ़ेद छोले खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि सफ़ेद छोले का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला को और बच्चे को बहुत से फायदे मिलते हैं। जैसे की:

फोलेट

सफ़ेद छोले खाने में फोलेट भरपूर मात्रा में मौजूद होता हैं। और फोलेट गर्भ में पल रहे शिशु के लिए एक अहम पोषक तत्व होता है। जो शिशु के मस्तिष्क के बेहतर विकास, बेहतर शारीरिक विकास में मदद करने साथ शिशु को जन्म के समय होने वाली बिमारियों से सुरक्षित रखने में भी मदद करता है। ऐसे में गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर विकास के लिए गर्भवती महिला को सफ़ेद छोले का सेवन जरूर करना चाहिए।

आयरन

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी, हीमोग्लोबिन की कमी के कारण माँ व् बच्चे दोनों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। लेकिन यदि महिला सफ़ेद छोले का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करती है तो माँ व् बच्चे दोनों को खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि छोले का सेवन करने से शरीर में खून की कमी को पूरा करने, लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ाने और हीमोग्लोबिन के स्तर को सही रखने में मदद मिलती है।

कोलिन

कोलिन एक ऐसा पोषक तत्व है जो गर्भ में शिशु के मस्तिष्क के विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। और यदि यह पोषक तत्व बच्चे को नहीं मिलता है तो इसके कारण बच्चे के विकास में कमी भी आ जाती है। लेकिन छोले का सेवन करने से बच्चे को यह पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलता है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में बच्चे के मस्तिष्क का विकास अच्छे से होने में मदद मिलती है।

ऊर्जा का है बेहतरीन स्त्रोत

माँ बनना महिला के लिए बहुत मुश्किल होता है क्योंकि वजन बढ़ने के साथ थकावट, शारीरिक परेशानियों के बढ़ने के कारण महिला सुस्त व् परेशान होने लगती है। ऐसे में छोले का सेवन करने से महिला की इस परेशानी को खत्म करने में मदद मिलती है। क्योंकि छोले में मौजूद कैलोरीज़ गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करती है।

वजन रहता है नियंत्रित

गर्भावस्था के दौरान अधिकतर महिलाएं वजन बढ़ने को लेकर परेशान रहती है। लेकिन यदि महिला छोले का सेवन करती है तो इससे महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि छोले का सेवन करने से महिला के वजन को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में छोले का सेवन करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

  • जरुरत से ज्यादा छोले न खाएं।
  • छोले अच्छे से उबल जाएँ तभी उनका सेवन करें क्योंकि कच्चे छोले खाने से पेट से संबधी परेशानी होने का खतरा रहता है।
  • यदि छोले खाने से आपको एसिडिटी हो जाती है, एलर्जी होती है तो आपको इनका सेवन नहीं करना चाहिए।
  • रात को छोले का सेवन करने से बचें।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला व् बच्चे को प्रेगनेंसी के दौरान मिलते हैं। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको और आपके बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके

Benefits of eating White Chana in Pregnancy

बेबी डिलीवरी के बाद क्या- क्या खाना चाहिए

बेबी डिलीवरी के बाद क्या- क्या खाना चाहिए, डिलीवरी के बाद खाएं यह आहार, शिशु के जन्म के बाद खाएं यह आहार, प्रसव के बाद यह आहार होते हैं फायदेमंद, डिलीवरी के बाद डाइट प्लान, Food after delivery

प्रेगनेंसी के दौरान ही नहीं बल्कि शिशु के जन्म के बाद भी गर्भवती महिला को अपने बेहतर तरीके से ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि डिलीवरी के बाद महिला का शरीर काफी कमजोर हो जाता है, बॉडी में हार्मोनल बदलाव भी होते रहते हैं, और शिशु भी अपने खान पान के लिए महिला पर ही निर्भर करता है, और अब महिला को केवल अपने ही नहीं बल्कि उस नन्ही सी जान का भी ध्यान रखना पड़ता है जो उस पर निर्भर करता है। ऐसे में जरुरी है की महिला को जल्दी फिट होने के लिए और शिशु के बेहतर विकास के लिए पोषक तत्वों का भरपूर सेवन करना चाहिए। तो लीजिये आज हम आपको कुछ ऐसे ही आहार के बारे में बताने जा रहें हैं जो डिलीवरी के बाद महिला को जरूर खाने चाहिए, क्योंकि इनके सेवन से महिला को फिट होने के साथ शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

दूध

कैल्शियम से भरपूर दूध का सेवन करने महिला की हड्डियों को मजबूत करने के साथ दूध की मात्रा को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। जिससे महिला तो एनर्जी से भरपूर रहती है, और शिशु को भी भरपूर पोषण मिलता है। इसीलिए महिला को डिलीवरी के बाद दिन में दो से तीन गिलास दूध का सेवन जरूर करना चाहिए।

सौंठ के लड्डू

डिलीवरी के बाद महिला को सौंठ के लड्डू का सेवन भी जरूर करना चाहिए, क्योंकि इसका सेवन करने से महिला का शरीर मजबूत बनता है, बॉडी को एनर्जी मिलती है, महिला की पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है। लेकिन यदि आपकी सिजेरियन डिलीवरी हुई है तो इसके सेवन से पहले एक बार आपको डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

दलिया

प्रसव के बाद नाश्ते में महिला को दलिया खाना चाहिए यह एक सम्पूर्ण आहार की तरह काम करता है, और इसमें घी, गुड़, ड्राई फ्रूट्स, फल, दूध आदि मिलाकर आप इसका सेवन कर सकते हैं। यदि आप इसका नाश्ते में सेवन करते हैं तो न केवल यह आपको एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करता है बल्कि इससे शिशु के लिए दूध की मात्रा बढ़ाने के साथ पोषक तत्व भी भरपूर मिलते है। जो महिलाएं मीठा दलिया खाना पसंद नहीं करती है उन महिलाओं को सभी सब्जियों को मिलाकर नमकीन दलिया बनाकर उसका सेवन करना चाहिए।

हरी सब्जियां

हरी सब्जियां पोषक तत्वों से भरपूर होती है, डिलीवरी के बाद महिला को ब्लीडिंग की समस्या काफी दिनों तक होती है। ऐसे में हरी सब्जियां महिला में खून की मात्रा को पर्याप्त रखने में मदद करती है। साथ ही महिला को एनर्जी से भरपूर रखती है, और हरी सब्जियों में मौजूद पोषक तत्व दूध के जरिये शिशु को भी मिलते हैं जिससे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

दालें

प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर, मिनरल्स आदि से भरपूर दालों का सेवन करने से भी डिलीवरी के बाद महिला को बहुत फायदा मिलता है। साथ ही मूंग की दाल खाने से स्तन में दूध की वृद्धि भी होती है। और भरपूर पोषक तत्व मिलने से शिशु का बेहतर विकास होता है। ऐसे में महिला को पतली दाल बनाकर उसमे घी, जीरा पाउडर आदि डालकर दिन में एक समय उसका जरूर सेवन करना चाहिए।

संतरा

संतरा डिलीवरी के बाद सुपरफूड की तरह काम करता है, क्योंकि इसमें मौजूद विटामिन सी डिलीवरी के टाइम आए स्टिचेस यानी टांको को ठीक करने में मदद करता है। साथ ही दर्द की समस्या से राहत दिलाता है और बॉडी को एनर्जी से भरपूर रखने में भी मदद करता है, इसके सेवन से बॉडी में पानी की कमी की समस्या से भी राहत मिलती है ऐसे में डिलीवरी के बाद महिला को दिन के समय एक संतरे का सेवन जरूर करना चाहिए।

दही

दही का सेवन न केवल डिलीवरी के बाद महिला बल्कि शिशु को भी फायदा पहुंचाता है। इससे पाचन तंत्र बेहतर रहता है साथ ही इसमें मौजूद कैल्शियम, प्रोटीन हड्डियों की मजबूती, कोशिकाओं की मजबूती देने का काम करते हैं साथ ही इससे महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में भी मदद मिलती है।

ओट्स

ओट्स भी फाइबर, मैग्नीशियम, आयरन, कैल्शियम, आदि से भरपूर होते हैं। साथ ही डिलीवरी के बाद यह बॉडी को एनर्जी देने का काम भी करते हैं। ऐसे में पूरा दिन एनर्जी से भरपूर रहने में लिए और बॉडी में पोषक तत्वों की मात्रा को भरपूर रखने के लिए डिलीवरी के बाद महिला ओट्स का सेवन भी कर सकती है।

सालमन मछली

प्रसव के बाद सालमन मछली का सेवन भी हफ्ते में दो या तीन बार करने से गर्भवती महिला को फिट रहने के साथ शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। शिशु के तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए यह बहुत फायदेमंद होती है। लेकिन आपको एक बात का ध्यान रखना चाहिए की आप इसका अधिक मात्रा में सेवन न करें, साथ ही ताजा सालमन मछली लेकर उसका सेवन करें फ्रोजेन मछली से सेवन को न खाएं।

बादाम

ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर बादाम का सेवन करने से भी महिला के साथ शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। आप इन्हे भूनकर, भिगोकर या दलिया आदि में डालकर भी इसका सेवन कर सकती है। साथ ही इससे दूध के उत्पादन को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

अंडा

प्रेगनेंसी के दौरान और डिलीवरी के बाद दोनों समय ही अंडे का सेवन करने से महिला और शिशु दोनों को फायदा मिलता है। यदि आप दिन में एक या दो अंडे का सेवन करती है तो इससे आपको महिला के शरीर को एनर्जी से भरपूर रहने के साथ शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।

पेय पदार्थ

खाने के साथ महिला को पानी व् अन्य पेय पदार्थ का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से बॉडी में एनर्जी को भरपूर बनाएं रखने के मदद मिलती है। साथ ही शिशु को स्तनपान करवाने से पहले एक गिलास पानी या अन्य किसी पेय पदार्थ जैसे की जूस, दूध आदि का सेवन भी जरूर करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ आहार जिनका सेवन डिलीवरी के बाद महिला को जरूर करना चाहिए इन चीजों का सेवन करने से महिला को बहुत जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है। साथ ही इससे शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से होता है। लेकिन एक बात का ध्यान रखना चाहिए जिन चीजों से आपको एलर्जी हो उनका सेवन नहीं करना चाहिए, बासी व् बाहर के खाने से परहेज करना चाहिए, ज्यादा देर तक भूखे नहीं रहना चाहिए, नींद भरपूर लेना चाहिए, पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए, आदि। इन बातों का डिलीवरी के बाद ध्यान रखने से आपको बहुत फायदा मिलता है।