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गर्भ में बच्चा कमजोर हो तो क्या खाएं?

गर्भ में शिशु

हर गर्भवती महिला चाहती है की प्रेगनेंसी के दौरान वो अपनी अच्छे से केयर करे, छोटी छोटी बातों का अच्छे से ध्यान रखे। और किसी भी तरह की लापरवाही न करें, ताकि इससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके। क्योंकि यदि गर्भवती महिला स्वस्थ होगी तभी गर्भ में शिशु को भी भरपूर पोषण मिल सकेगा। लेकिन कई बार गर्भ में शिशु को भरपूर पोषण नहीं मिल पाता है, जिसके कारण गर्भ में शिशु के विकास में कमी आ सकती है। जिसके कारण जन्म के बाद शिशु को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए गर्भ में शिशु के बेहतर विकास पर ध्यान देना बहुत जरुरी होता है।

गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए अपनाएँ यह टिप्स

कई बार गर्भ में शिशु का विकास बेहतर तरीके से नहीं हो पाता है, जिसके कारण शिशु के जन्म के बाद वजन में कमी जैसी परेशानी हो सकती है। लेकिन अल्ट्रासॉउन्ड के माध्यम से आज कल यह जानना बहुत आसान हो गया है की शिशु का वजन ठीक है या कम है। ऐसे में शिशु का वजन कम यह यह जानने के बाद आपको कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके गर्भ में आसानी से शिशु के वजन को बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की गर्भ में पल रहे शिशु का वजन बढ़ाने के लिए गर्भवती महिला को क्या क्या खाना चाहिए।

छैना

छैना यानी की सफ़ेद रसगुल्ला यह आसानी से किसी भी मिठाई की दूकान पर मिल जाता है। ऐसा माना जाता है की छैना में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन मौजूद होता है, जो की गर्भ में पल रहे शिशु के वजन में बढ़ोतरी करने में मदद करता है। और ऐसा भी माना जाता है की यदि गर्भवती महिला सुबह खाली पेट छैना का सेवन करती है तो इससे गर्भ में पल रहा शिशु गोरा व् सूंदर भी होता है। ऐसे में शिशु के वजन को बढ़ाने के लिए गर्भवती महिला दिन में एक या दो छैना का सेवन कर सकती है।

दूध व् दूध से बने प्रोडक्ट्स

कैल्शियम व् प्रोटीन से भरपूर दूध का सेवन भी गर्भवती महिला को नियमित रूप से करना चाहिए। इससे शिशु की हड्डियों और मांसपेशियों के बेहतर विकास में मदद मिलती है। जिससे शिशु के वजन को बढ़ाने में मदद मिलती है, इसके लिए दिन में दो से तीन गिलास दूध गर्भवती महिला को जरूर पीना चाहिए, आप चाहे तो दूध में नट्स आदि को भी शामिल कर सकती है। दूध के अलावा दूध से बनी चीजों का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

दालें

दालों में भी प्रोटीन, कैल्शियम व् अन्य मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसीलिए गर्भ में पल रहे शिशु का वजन बढ़ाने के लिए दालों का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए। उबली हुई दालों का सेवन करने के साथ अंकुरित दालों का सेवन करने से भी गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में मदद मिलती है।

अंडा

अंडे के सफ़ेद भाग में प्रोटीन की मात्रा पर्याप्त होती है, ऐसे में गर्भवती महिला महिला को अंडे को भी अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। ऐसा करने से गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक के साथ मानसिक विकास को भी बेहतर होने में मदद मिलती है।

घी

गर्भ में पल रहे शिशु का वजन न बढ़ने पर गर्भवती महिला को अपनी डाइट में थोड़ा देसी भी शामिल करना चाहिए, घी में मौजूद पोषक तत्व गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में मदद करते हैं। साथ ही यदि गर्भवती महिला का वजन ज्यादा है तो घी के सेवन के लिए एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

ड्राई फ्रूट्स

ड्राई फ्रूट्स भी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, गर्भवती महिला यदि इन्हे अपनी डाइट में शामिल करती हैं। तो इससे भी गर्भ में पल रहे शिशु का वजन बढ़ाने में मदद मिलती है। लेकिन प्रेगनेंसी की शुरुआत में इनका अधिक सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इनके कारण परेशानी भी हो सकती है।

सब्जियां व् फल

गर्भवती महिला को अपनी डाइट में फलों और सब्जियों को भी भरपूर मात्रा में अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। क्योंकि फलों और सब्जियों में भी भरपूर मात्रा में पोषक तत्व होते हैं जो शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करते हैं। साथ ही गर्भवती महिला को अपनी डाइट में फलों का रस भी शामिल करना चाहिए।

डॉक्टर की राय

गर्भ में शिशु के कमजोर होने पर डॉक्टर शिशु का वजन बढ़ाने के लिए तरह तरह के आहार या कैल्शियम, आयरन आदि की दवाइयों के सेवन की सलाह दे सकते हैं। ऐसे में आपको डॉक्टर की सलाह का जरूर पालन करना चाहिए। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ आहार जो गर्भवती महिला यदि खाती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु का वजन बढाने में मदद मिलती है। इसीलिए यदि आपको भी डॉक्टर से जांच के बाद पता चलता है की गर्भ में पल रहे शिशु के वजन में कमी है तो आपको भी इन चीजों को अपने आहार में जरूर शामिल करना चाहिए।

Hindi Video : Garbh me bacha kamjor ho to kya kare?

Garbh me shishu ka wajan badhane ke upay

प्रेगनेंसी में अमरुद खाने के फायदे और नुकसान

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फलों का सेवन करने की सलाह जरूर दी जाती है क्योंकि फलों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। तो आज इस आर्टिकल में हम एक ऐसे ही फल के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसका सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करना बहुत फायदेमंद होता है। और वो फल है अमरुद, खाने में अमरुद बहुत ही स्वादिष्ट होता है। अमरुद में मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला को फिट रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं। तो आइये अब जानते हैं की अमरुद का सेवन करने से गर्भवती महिला और शिशु को कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

विटामिन सी

अमरुद में विटामिन सी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है और विटामिन सी एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट होता है। जो गर्भवती महिला की इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है जिससे माँ व् बच्चे दोनों को प्रेगनेंसी के दौरान संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा विटामिन सी शरीर के सभी हिस्सों में ब्लड को अच्छे से अवशोषित करने में मदद करता है जिससे शरीर में खून की कमी की समस्या से भी गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

पोटैशियम

पोटैशियम और घुलनशील फाइबर से भरपूर अमरुद का सेवन करने से गर्भवती महिला के ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है। जिससे ब्लड प्रैशर हाई या लौ होने के कारण होने वाली परेशानी से महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

डाइट्री फाइबर

अमरुद में डाइट्री फाइबर मौजूद होता है जो गर्भवती महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करता है। जिससे गर्भवती महिला को कब्ज़, अपच, भूख में कमी, एसिडिटी जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

आयरन

अमरुद आयरन का भी बेहतरीन स्त्रोत होता है जो गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है। जिससे गर्भवती महिला को एनीमिया व् खून की कमी के कारण होने वाली अन्य परेशानियों से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

विटामिन बी 6

प्रेगनेंसी के दौरान अधिकतर महिलाएं मॉर्निंग सिकनेस यानी सुबह उठने के बाद उल्टी, सिर दर्द चक्कर, थकान जैसी समस्या से परेशान होती है। लेकिन अमरुद का सेवन करने से महिला को अपनी इस परेशानी को कम करने में मदद मिलती है। क्योंकि विटामिन बी 6 इस समस्या को कम करने में मदद करता है।

तनाव होता है दूर

अमरुद में मौजूद विटामिन्स महिला को मानसिक रूप से रिलैक्स रहने में भी मदद करते हैं। जिससे प्रेग्नेंट महिला को तनाव, घबराहट जैसी परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है। साथ ही महिला का दिमाग शांत और मूड बेहतर होता है।

फोलिक एसिड

अमरुद में फोलिक एसिड भी मौजूद होता है जो गर्भ में शिशु के विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। फोलिक एसिड शिशु के दिमागी विकास को बेहतर करने के साथ शिशु को जन्मदोष से सुरक्षित रखने में भी मदद करता है।

कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल

शरीर में कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना गर्भवती महिला के लिए नुकसानदायक हो सकता है। और अमरुद का सेवन करने से महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। क्योंकि अमरुद में मौजूद डाइट्री फाइबर शरीर में बाद कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकते हैं।

ब्लड शुगर लेवल

अमरुद का सेवन करने से गर्भवती महिला के ब्लड में शुगर के लेवल को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को जेस्टेशनल डाइबिटीज़ की समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान बचे रहने में मदद मिलती है।

अमरुद खाने के नुकसान

यदि गर्भवती महिला सही तरीके और सही मात्रा में अमरुद का सेवन करती है तो अमरुद का सेवन करने से महिला को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होती है। लेकिन यदि महिला गलत तरीके और जरुरत से ज्यादा अमरुद का सेवन करती है तो इसके कारण महिला को नुकसान हो सकता है। जैसे की:

  • अमरुद में फाइबर की मात्रा मौजूद होती है ऐसे में जरुरत से ज्यादा अमरुद का सेवन करने से डायरिया होने का खतरा होता है।
  • यदि महिला बिना धोये अमरुद का सेवन करती है तो अमरुद पर मौजूद बैक्टेरिया शरीर में प्रवेश कर सकता है जिससे प्रेग्नेंट महिला को इन्फेक्शन होने का खतरा होता है।
  • अमरुद को खाने से पहले एक बार काटकर जरूर देखें क्योंकि अमरुद में कीड़ा हो सकता है जो माँ व् बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • ज्यादा कच्चा अमरुद यदि महिला खाती तो इसके कारण महिला को पेट दर्द और दांतों से जुडी परेशानी होने का खतरा रहता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो अमरुद का सेवन करने से माँ व् बच्चे को मिलते हैं। तो गर्भवती महिला को भी प्रेगनेंसी के दौरान अमरुद का मौसम चल रहा है तो तो रोजाना एक अमरुद जरूर खाना चाहिए।

गर्भाधारण होते ही इन चीजों को खाना बंद कर दें

यदि आप बेबी प्लान कर रही है या आपके पीरियड्स मिस हो गए हैं और आपको ऐसा लग रहा है की हो सकता है की आपका गर्भ ठहर गया है। और आप चाहती है की आपका मिसकैरिज या प्रेगनेंसी में कोई दिक्कत न हो तो इसके लिए आपको पीरियड्स मिस होने के बाद से ही अपना दुगुना ध्यान रखना शुरू कर देना चाहिए। और प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद तो ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे आपको या बच्चे दोनों की सेहत को किसी भी तरह का नुकसान हो। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिनका सेवन गर्भाधारण होते ही महिला को बंद कर देना चाहिए।

कच्चे अंडे

यदि आप कच्चे अंडे का सेवन करती है तो प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद आपको इनका सेवन बंद कर देना चाहिए। क्योंकि कच्चे अंडे में मौजूद बैक्टेरिया माँ व् बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है साथ ही कच्चे मास का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

सी फ़ूड

गर्भाधारण के तुरंत बाद से ही गर्भवती महिला को सी फ़ूड खाना बंद कर देना चाहिए। क्योंकि इसमें मर्करी की मात्रा अधिक होती है जो बच्चे के लिए नुकसानदायक होती है।

अंकुरित चीजें

बहुत सी महिलाएं नाश्ते के दौरान अंकुरित चीजों का सेवन करना पसंद करती है। लेकिन यदि आपने गर्भाधारण कर लिया है तो आपको तुरंत ही इन चीजों का सेवन बंद कर देना चाहिए। क्योंकि इसमें मौजूद बैक्टेरिया माँ व् बच्चे के लिए नुकसानदायक होता है।

गर्म तासीर वाली चीजें

कुछ ऐसी चीजें होती है जिनकी तासीर बहुत गर्म होती है जैसे की बाजरा, खजूर, लाल मिर्च, अदरक, तिल, दालचीनी, शहद, ड्राई फ्रूट्स, केसर, आदि, इन चीजों का सेवन भी प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही महिला को बंद कर देना चाहिए। क्योंकि गर्म तासीर वाली चीजों का सेवन करने से प्रेगनेंसी की शुरुआत में गर्भपात होने का खतरा रहता है।

कच्चा दूध

कच्चा दूध व् कच्चे दूध से बनी चीजों का सेवन भी गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के कन्फर्म होने के बाद से ही बंद कर देना चाहिए। क्योंकि कच्चे दूध में लिस्टेरिया, साल्मोनेला नामक बैक्टेरिया होता है जो बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।

बिना धुले फल व् सब्जियां

प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद से ही हर एक खाने पीने की चीज में महिला को सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को बिना धुले हुए फल व् सब्जियों का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इस पर कीटाणु हो सकते है जो गर्भ में पहुंचकर बच्चे को नुकसान पहुंचाते हैं। साथ ही बहुत देर कटे पड़े फल सलाद आदि का सेवन भी महिला को नहीं करना चाहिए।

बाहर का खाना

जंक फ़ूड, स्ट्रीट फ़ूड, बाहर से मिलने वाला खाना आदि का सेवन भी गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के तुरंत बाद बंद कर देना चाहिए। क्योंकि इसके कारण बच्चे को नुकसान पहुँच सकता है।

कैफीन

यदि आप चाय, कॉफ़ी, ग्रीन टी, ब्लैक टी आदि पीने की आदत है तो आपको अपनी इस आदत में भी बदलाव करने चाहिए। क्योंकि इन सभी चीजों में कैफीन की अधिकता होती है जिसके कारण गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।

डिब्ब्बाबंद आहार या जूस

डिब्बाबंद आहार या जूस का सेवन भी महिला को करने से बचना चाहिए, क्योंकि इन सभी चीजों को लम्बे समय तक सही रखने के लिए केमिकल का प्रयोग किया जाता है जो गर्भ में शिशु को नुकसान पहुंचाता है।

ज्यादा मीठा

प्रेगनेंसी की शुरुआत में महिलाओं की मीठा खाने की क्रेविंग हो सकती है लेकिन यदि ऐसा है तो महिला को अपनी इस इच्छा को कण्ट्रोल करना चाहिए। क्योंकि अधिक मीठे का सेवन करने से ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ सकता है जिससे माँ व् बच्चे दोनों को नुकसान पहुँचता है। ज्यादा मीठे के साथ ज्यादा नमक का सेवन भी महिला को नहीं करना चाहिए।

दवाइयां

डॉक्टर की बिना सलाह के आपको किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह दवाइयां शिशु के लिए खतरा साबित हो सकती है।

बासी, ज्यादा तेल मसालें वाला खाना न खाएं

प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद से ही महिला को अपने खाने में तरीके में भी थोड़ा बदलाव करना चाहिए। जैसे की बासी खाना, फ्रिज से निकला ठंडा खाना, ज्यादा तेल मसाले वाला खाना भी महिला को नहीं खाना चाहिए।

नशीले पदार्थ

गर्भाधारण होने के बाद ही महिला को धूम्रपान, शराब आदि नशीली चीजों का सेवन बिल्कुल बंद कर देना चाहिए। क्योंकि यह सभी चीजें शिशु के शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक विकास को भी रोक सकती है।

तो यह हैं कुछ चीजें जिनका सेवन गर्भाधारण के तुरंत बाद महिला को बंद कर देना चाहिए क्योंकि इसके कारण गर्भपात व् बच्चे के विकास से जुडी अन्य परेशानियां होने का खतरा रहता है।

चेहरे से ब्लैकहेड्स हटाने के तरीके

आजकल वातावरण में धूल और प्रदुषण बहुत ज्यादा है, शुद्ध हवा लगभग ना के बराबर है, जो लोग बाहर आते जाते है, उन्हें अक्सर स्किन प्रोब्लेम्स का सामना करना पड़ता है। स्किन प्रोब्लेम्स में ब्लैकहेड्स सबसे आम दिक्कत है। ब्लैकहेड्स और वाइटहेड्स रोमछिद्रो में गदंगी जमने से होते है। जैसे की नाम से ही पता चलता है ब्लैकहेड्स काले रंग के और वाइटहेड्स हलके पिले रंग के होते है। लोग अक्सर इन्हे दबा कर निकालने की कोशिश करते है, जो की बिलकुल गलत तरीका है, ऐसा करने से चेहरे पर निशान पड़ जाते है। कई लोग ब्लैकहेड्स निकलवाने के लिए पार्लर भी जाते है। ब्लैकहेड्स हर महीने या फिर २ महीने के अंतराल में हो ही जाते है, ऐसे में हर बार पार्लर जाने से अच्छा है की हम घर पर ही इन्हे निकाल ले। आइए जानते है घर बैठे ही बालकहेड्स से कैसे छुटकारा पाए।

  • बराबर मात्रा में बेकिंग सोडा और पानी ले, इसका मिश्रण बनाकर १५ मिंट तक चेहरे पर लगाकर, हलके गुनगुने पानी से धोने से ब्लैकहेड्स निकल जाते है।
  • किचन में रखे जाने वाले मसालो में से दालचीनी और शहद का मिश्रण भी ब्लैकहेड्स को हटाने का एक सरल तरीका है। दालचीनी और शहद दोनों ही एंटी इन्फ्लैमटॉरी के रूप में काम करते है।
  • दही और ओट्स को मिलाकर चेहरे पर लगाने से भी ब्लैकहेड्स से छुटकारा मिल जायेगा।
  • एलोविरा के पत्तो से ताजा जेल निकाल कर लगाने से भी सॉफ्ट स्किन हो जाती है और ब्लैकहेड्स निकल जाते है।
  • हल्दी पाउडर में पुदीने का रस मिलाकर लगाने से भी बालकहेड्स निकल जाते है।
  • मेथी को पानी में बारीक़ पीस कर चेहरे पर लगाए, इससे ब्लैकहेड्स और वाइटहेड्स दोनों निकल जाते है। मेथी एंटीऑक्ससिडेंट और एंटी इन्फ्लैमटॉरी के गुणों से भरपूर है।
  • ग्रीन टी की पत्तियों का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से भी फायदा मिलता है।
  • स्टॉबेरी, शहद और निम्बू के रस को मिलाकर ब्लैकहेड्स पर लगाने से भी इनसे छुटकारा पाया जा सकता है।
  • दूध और शहद को बराबर मात्रा में लगाने से भी ब्लैकहेड्स से निजात मिलती है।

ये सब तरीके अपनाकर हम घर पर ही ब्लैकहेड्स से छुटकारा पा सकते है। इन उपाय को करने में पार्लर जितना खर्च भी नहीं करना पड़ेगा और ना ही बाजार में उपलब्ध महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स को उपयोग करने के लिए खर्च करने की जरुरत होगी। अच्छे परिणाम के लिए सप्ताह में दो बार कोई भी एक उपाय कर सकते है।

गर्भावस्था में इन कारणों से आती है पैरों में सूजन

गर्भावस्था में इन कारणों से आती है पैरों में सूजन, प्रेगनेंसी में सूजन होने के कारण, गर्भवस्था में इन कारणों की वजह से आती है पैरों में सूजन, प्रेगनेंसी में सूजन की समस्या होने के कारण

गर्भवती महिला में प्रेगनेंसी के दौरान बहुत से शारीरिक बदलाव देखने को मिलते हैं, साथ ही इस समय महिला को तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आज हम उन्ही परेशानियों में से एक पैरों में होने वाली सूजन के बारे में बात करेंगे। प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में लगातार हार्मोनल बदलाव होते हैं, वजन बढ़ता है, जिसके कारण आपके शरीर की प्रक्रियाओं पर असर पड़ता है। और ऐसे ही कुछ कारणों की वजह से गर्भवती महिला को पैरों के साथ हाथों में भी सूजन की समस्या हो सकती है। यदि यह सूजन थोड़ी बहुत होती है, तो इसमें घबराने की कोई बात नहीं होती।

लेकिन यदि आपके हाथों, पैरों के साथ मुँह पर भी सूजन आदि आने लगती है, साथ ही दर्द का अनुभव भी हो। तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह प्री-एक्लेमप्सिया का संकेत हो सकता है। जो की गर्भवती महिला के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। क्या आप भी गर्भवती है और आपको भी पैरों में सूजन हो रही है, तो घबराइए नहीं थोड़ी बहुत सूजन का होना प्रेगनेंसी के दौरान सामान्य होता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में सूजन होने के क्या क्या कारण हो सकते हैं।

हार्मोनल बदलाव

प्रेगनेंसी की शुरुआत से लेकर आखिरी महीने तक बॉडी में लगातार हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसके कारण शरीर की क्रियाएं प्रभावित हो सकती है। और यदि ऐसा होता है तो इसके कारण गर्भवती महिला को पैरों में सूजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

पानी की कमी

पानी की कमी के कारण प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यदि आप भी प्रेगनेंसी के दौरान पानी का सेवन कम करती हैं तो इसके कारण आपको भी पैरों में सूजन की समस्या हो सकती है।

ज्यादा देर एक ही पोजीशन में बैठना

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन लगातार बढ़ता है, यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान लम्बे समय तक एक ही पोजीशन में बैठी रहती हैं तो इसके कारण बॉडी में ब्लड फ्लो धीमा होने लगता है। और बॉडी में ब्लड फ्लो धीमा होने के कारण आपको पैरों में सूजन की समस्या हो सकती है।

पैरों पर दबाव पड़ने के कारण

गर्भवती महिला यदि एक ही जगह पर ज्यादा देर तक खड़ी रहती है, तो पैरों पर वजन पड़ने के कारण पैरों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिसके कारण गर्भवती महिला को इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

सीधा सोने के कारण

गर्भवती महिला यदि सीधा होकर सोती है, तो इसके कारण ब्लड फ्लो पैरों तक अच्छे तरीके से नहीं हो पाता है। जिसके कारण महिला के पैरों में सूजन होने की समस्या हो सकती है, और साथ ही इसके कारण चक्कर आने की परेशानी आदि भी हो सकती है।

प्रेगनेंसी में होने वाली पैरों की सूजन से निजात पाने के टिप्स

  • पानी का भरपूर सेवन करें इससे शरीर से सारे विषैले पदार्थो को बाहर निकलने में मदद मिलेगी, बल्कि इससे प्रेगनेंसी के दौरान ऊर्जा से भरपूर रहने, स्वस्थ रहने के साथ पैरों में सूजन की समस्या से भी राहत मिलती है।
  • ज्यादा देर एक ही जगह पर खड़े न रहें, और न ही एक ही पोजीशन में बैठें रहें, बल्कि थोड़ी थोड़ी देर बाद पोजीशन बदलते रहें।
  • पैरों की ज्यादा देर तक नीचे लटकाकर न रखें, बीच में पैरों को हिलाते रहे और ऊंचाई पर रखें।
  • सीधे होकर न सोएं, सोने के लिए बाईं तरफ करवट लेकर सोएं, यह प्रेगनेंसी के दौरान सोने के लिए सबसे बेहतरीन पोजीशन होती है।
  • अपने खान पान का बेहतर तरीके से ध्यान रखें, पुष्टि तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें।
  • हल्का व्यायाम या वॉक भी जरूर करें इससे बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।
  • अधिक मात्रा में नमक युक्त आहार का सेवन या स्नैक्स आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
  • गुनगुने पानी में नमक डालकर पैरों की सिकाई करें इससे भी आपको आराम मिलेगा।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला को पैरों में सूजन की समस्या हो सकती है, साथ ही इससे बचने के लिए आप नीचे दिए टिप्स का भी जरूर ध्यान रखें। इसके अलावा ज्यादा समस्या होने पर इसे नज़रअंदाज़ न करते हुए एक बार डॉक्टर से जरूर राय लें।

पीले दांतो को सफ़ेद करने के तरीके

खिलखिलाती मुस्कान आपकी पर्सनैल्टी को और भी बढ़ा देती है, लेकिन यदि आपके दांत पीले हो तो इसके कारण आपको शर्मिंदा भी होना पड़ सकता है, दांतो की अच्छे से साफ़ सफाई का न करने के कारण आपको दांतो के पीलेपन का सामना करना पड़ता है, साथ ही पानी में मौजूद केमिकल्स, तम्बाकू, बीड़ी, सिगरेट का अधिक सेवन करने वाले व्यक्ति भी इस समस्या से परेशान होते है, और इससे बचने के लिए आज कल मार्किट में आपको बहुत से प्रोडक्ट्स भी मिल जाते है,

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लेकिन क्या आप इस बात को जानते हैं की इसमें मौजूद केमिकल्स आपके लिए कितने नुकसानदायक हो सकते है, इससे आपके मसूड़ों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है, और जो टूथपेस्ट भी आपके दांतों को सफ़ेद करते हैं उनमे भी केमिकल्स भी बहुत अधिक मात्रा में होता है, तो आइये आज हम आपको ऐसे कुछ आसान और ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं जिससे आपके दांतों को पीलेपन से भी निजात मिलेगा, साथ ही दांत मजबूत भी बनेंगे।

दांतों के पीलेपन के कारण:-

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  • सही ढंग से दांतो की साफ़ सफाई न करने के कारण आपके दांत पीले होने लगते है।
  • धूम्रपान अधिक करने का बुरा असर भी आपके दांतों पर पड़ता है, जिसके कारण दांतों का रंग पीला होने लगता है।
  • कैफीन का सेवन अधिक मात्रा में करने पर भी आपको दांत पीले पड़ने लगते है।
  • जो लोग तम्बाकू आदि का सेवन अधिक सेवन करते हैं, उनके भी दांत पीले पड़ने लगते है।

तुलसी का प्रयोग करें:-

तुलसी न केवल आपके शरीर को बीमारियों से दूर रखने में बल्कि आपके दांतों का पीलापन दूर करने में भी आपकी मदद करती है, इसके लिए आप तुलसी के कुछ पत्तों धूप में सूखा लें, उसके बाद उन्हें पीस कर पाउडर के रूप में तैयार कर लें, फिर नियमित रूप से अपने टूथपेस्ट में इसे मिलाकर अच्छे से पेस्ट करें इस उपाय को करने से आपके दांतों के पीलेपन को कुछ ही दिनों में दूर करने में मदद मिलती है, आप संतरे के छिलको और तुलसी के पत्तों का पाउडर बनाकर भी नियमित ब्रश करने के बाद अपने दांतों पर लगा सकती हैं, इससे भी आपके दांतों के पीलेपन को दूर होने में मदद मिलती है।

स्ट्रॉबेरी का प्रयोग करें:-

स्ट्रॉबेरी में मौजूद मैलिक एसिड आपके दांतों के पीलेपन को दूर करने में मदद करता है, साथ ही इसमें नेचुरल वाइटनिंग एजेंट के भी गुण होते है, एक हफ्ते में एक बार इसका इस्तेमाल करने पर भी आपको बहुत फायदा मिलता है, इसके लिए आप एक स्ट्रॉबेरी को पीस कर अच्छे से टूथब्रश की मदद से अच्छे से अपने दांतो पर रगड़ें, ऐसा करने से आपके दांतों के पीलेपन को दूर करके सफ़ेद मोतियों जैसे बनाने में मदद मिलती है।

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सरसों के तेल का प्रयोग करें:-

सरसों के तेल में थोड़ा नमक और चुटकी भर हल्दी बनाकर एक पेस्ट तैयार करें, उसके बाद हर दूसरे दिन इस पेस्ट को ऊँगली या ब्रश की मदद से अपने दांतों पर रगड़ें, और थोडी देर के लिए ऐसे ही छोड़ दें, इससे दांतों का पीलापन दूर होने के साथ दांतों की चमक को बढ़ाने में भी मदद मिलती है, साथ ही इससे पायरिया और मसूड़ों से सम्बंधित समस्या से भी निजात पाने में मदद मिलती है।

निम्बू का प्रयोग करें:-

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निम्बू में मौजूद एसिड और ब्लीचिंग एजेंट के गुण आपके दांतों के पीलेपन के साथ कालेपन को भी दूर करने में मदद करते है, इसके लिए आप निम्बू के छिलके को अच्छे से अपने दांतों पर रगड़ें, ऐसा करने से आपके दांतों का पीलापन दूर होगा, साथ ही आपके मुँह की बदबू को भी दूर होने में मदद मिलती है, आप निम्बू के छिलके पर सरसों के तेल की कुछ बूंदे डालते हैं तो आपको और अधिक फायदा मिलता है।

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करें:-

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करने से आपके दांतों पर जमी पीली परत को दूर करके आपके दांतों को सफ़ेद बनाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप ब्रश करने के बाद थोड़ा सा बेकिंग सोडा हाथ में लें, और अपनी ऊँगली या ब्रश की मदद से अपने दांतों पर रगड़ें, ऐसा करने से आपके दांतों को सफ़ेद होने में मदद मिलेगी।

सेब का सेवन करें:-

सेब का सेवन यदि आप नियमित रूप से करते है, तो इससे भी आपके दांतों को मोतियों जैसा सफ़ेद रखने में मदद मिलती है, क्योंकि जब आप सेब को खूब चबाते हैं तो यह आपके दांतों के लिए स्क्रब का काम करती है, जिससे आपके दांतो पर जमा पीलापन दूर होता है, और आपके दांतो को सफ़ेद होने में मदद मिलती है, सेब के साथ यदि आप गाजर और खीरे का भी खूब चबा चबा कर सेवन करते है, तो आपको बहुत फायदा मिलता है।

लकड़ी के कोयले का इस्तेमाल करें:-

यदि आप लकड़ी के कोयले को बारीक पीस लेती हैं, और उसके बाद इसे अपने दांतों पर लगाकर अच्छे से अपने दांतों को ब्रश या ऊँगली की मदद से साफ़ करती हैं, तो ऐसा करने से भी आपके दांतों की चमक को बढ़ाने में मदद मिलती है।

दांतों के पीलेपन को दूर करने के उपाय:-

  • कुछ भी खाने पीने के बाद कुल्ला करना न भूलें, साथ ही सुबह और रात को सोने से पहले ब्रश जरूर करें।
  • अधिक मीठे का सेवन करने से भी आपको परहेज करना चाहिए।
  • नीम की दातुन का प्रयोग करने से भी आपके दांतों को मजबूत और आपके दांतों को पीलेपन की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • तम्बाकू और धूम्रपान नहीं करना चाहिए।
  • नारियल, तिल, या जैतून का तेल लेकर अच्छे से नियमित रूप से अपने दांतो को साफ़ करें, इससे भी दांतों के पीलेपन को दूर करने में मदद मिलती है।
  • निम्बू के रस से अपने दांतों की मसाज करें या फिर नीम की दातुन को रात भर के लिए आधा गिलास पानी में निम्बू को निचोड़ कर रख दें, सुबह उठकर इससे दातुन करें, इससे दांत साफ होने के साथ दांतों को मजबूत और स्वस्थ रहने में भी मदद मिलती है।
  • चुटकी भर नमक में सरसों के तेल की दो बूंदे मिलाकर इससे अच्छे से ब्रश करें, यह भी आपके दांतों को सफ़ेद बनाने का काफी पुराना नुस्खा है।
  • अल्कोहल का सेवन भी अधिक मात्रा में न करें इसके कारण भी आपके दांतों के पीले होने की समस्या हो सकती है।
  • गुनगुने पानी में नमक डालकर नियमित रूप से कुल्ला करें इससे भी दांतों पर जमने वाली कैविटी को दूर करने में मदद मिलती है।

तो ये हैं कुछ उपाय जिनका इस्तेमाल करने से आपके दांतों को मजबूत बनने के साथ दांतो के पीलेपन को भी दूर करने में मदद मिलती है, इसके अलावा आपको अपने दांतों की साफ़ सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए साथ ही ऐसी चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जिससे आपके दांत खराब होते है, जैसे की बीड़ी सिगरेट के सेवन से दूर रहना चाहिए।

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शिशु गोरा हो इसके लिए प्रेग्नेंट महिला यह गलतियां नहीं करें

जैसे ही किसी महिला को पता चलता है की वो माँ बनने वाली है। तो उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता है, साथ ही प्रेग्नेंट महिला हर वो काम करती है जिससे गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास अच्छे से हो। क्योंकि गर्भ में पल रहा शिशु पूरी तरह से अपने विकास के लिए अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। ऐसे में गर्भवती महिला को सभी लोग बहुत सी राय भी देते हैं जैसे की महिला क्या खाएं क्या नहीं जिससे शिशु का विकास अच्छे हो, शिशु को गर्भ में कोई परेशानी न हो, होने वाला शिशु सूंदर, गोरा और बुद्धिमान हो आदि।

यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी बहुत से लोगो में इन बातों के बारे में जरूर समझाया होगा। लेकिन यह वो समय होता है जब महिला को बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है। तो आज इस आर्टिकल में हम प्रेग्नेंट महिला को कुछ ऐसी गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे शिशु की रंगत काली या सांवली पड़ सकती है। जैसे की:

गर्म जगह पर न रहें

यदि प्रेग्नेंट महिला धूप में अधिक घूमती है या ऐसी गर्मी में अधिक रहती है तो ऐसा माना जाता है। की इससे गर्भ में पल रहें शिशु की रंगत प्रभावित होती है। और आपका होने वाला शिशु गोरा नहीं होता है।

स्मोकिंग

प्रेगनेंसी के दौरान धूम्रपान करने से शिशु का शारीरिक व् मानसिक विकास प्रभावित होता है। यह तो आप सभी जानते हैं लेकिन साथ ही धूम्रपान करने का बुरा असर शिशु की स्किन पर भी पड़ता है। जिसके कारण आपके शिशु का रंग काला होने के चांस बढ़ जाते हैं।

गलत खान पान

गर्भावस्था के दौरान गलत खान पान के कारण शिशु के शारीरिक विकास को प्रभावीर करता है जिसकी वजह से शिशु के विकास में कमी आ सकती है। साथ ही इससे शिशु की स्किन को भी अच्छे से पोषण नहीं मिलता है। जिसके कारण आपके शिशु की रंगत प्रभावित होती है।

नॉनवेज

ऐसा भी माना जाता है जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान नॉन वेग का सेवन जरुरत से ज्यादा करती है। तो इसका असर भी गर्भ में शिशु पर पड़ता है जिसकी वजह से शीशी की रंगत काली हो सकती है।

तो यह हैं कुछ गलतियां जो यदि प्रेग्नेंट महिला करती है तो इससे आपके होने वाले शिशु की रंगत में फ़र्क़ आ सकता है। ऐसे में यदि आप चाहती हैं की आपका होने वाला शिशु गोरा हो तो आपको इन गलतियों को नहीं करना चाहिए।

गर्भावस्था में सफ़ेद पानी (White discharge) आने की समस्या के कारण व् समाधान

महिला को गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले हॉर्मोन्स के बदलाव के कारण बहुत से बदलाव उनके शरीर में भी आते है, जैसे की महिला की योनि में से सफ़ेद पानी (white disharge) का गिरना, क्या आप भी पहली बार माँ बनने का अनुभव लेने जा रही है? और आपकी योनि में से सफ़ेद पानी के आने की समस्या के कारण परेशान है? तो आपको परेशान होने की कोई जरुरत नहीं है, क्योंकि ये लक्षण आपको योंन अवस्था से लेकर तब तक दिखता रहता है, जब तक की औरत प्रजनन करने में सक्षम होती है।

सफ़ेद पानी में मृत कोशिकाएं बाहर आती है, जो की आपकी योनि को साफ़ और इन्फेक्शन से बचाने का काम करता है। परंतु इसका ज्यादा मात्रा में गर्भावस्था के दौरान इस बात का संकेत होता है की आपका हॉस्पिटल जाने का समय आ गया है, और यदि आपको ये आखिरी महीने से पहले ज्यादा मात्रा में आने लगता है, तो आपको बिना देरी किये तुरत जाकर अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए, बाकी गर्भावस्था के समय इसका सामान्य रूप से आना एक आम बात होती है।

सफ़ेद पानी को leucorrhea के नाम से जाना जाता है, गर्भावस्था के समय कुछ महिलाएं इसे देखकर घबरा भी जाती है, उन्हें ऐसे नहीं करना चाहिए, तो आइये आज हम आपको आपको बताते है की सफ़ेद पानी यों गिरता है, और ये कब आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है, और आप इसके लिए क्या क्या कर सकते है, और यदि आप अपनी योनि को इन्फेक्शन से बचाना चाहते है, तो आपके लिए ये अच्छा होता है, और गर्भावस्था की तो ये तीनो तिमाही में देखने को मिलता है, तो आइये अब इसके बारे में विस्तार से जानते है।

सफ़ेद पानी के गिरने के क्या कारण होते है:-

प्रेगनेंसी की तीनि तिमाही में आपको सफ़ेद पानी देखने को मिलता है, ये cervical mucus होता है, यह गंधहीन और सफ़ेद रंग का पदार्थ होता है, और यह औरत के जनन तंत्र को सही रखने का काम करता है, इसके कारण महिला के जनन तंत्र को इन्फेक्शन से बचाव और भ्रूण को भी इसके कारण सुरक्षा मिलती है, इसका टेक्सचर भी गर्भावस्था के समय बदलता है, जैसे की कभी ये गाढ़ा सफ़ेद पानी या गुलाबी रंग का निकलता है, और प्रेगनेंसी की शुरुआत के समय में यह गाढे रंग का होता है इसका कारण एस्ट्रोजेन की मात्रा का अधिक होना होता है, तो आइये अब आपको बताते है की प्रेगनेंसी की तीनो तिमाही में इसके क्या लक्षण हो सकते है।

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही (1st to 13 weeks) में सफ़ेद पानी:-

पहली तिमाही में यह पतला और रंगहीन होता है, और समय के साथ ये गाढ़ा हो जाता है, और ये पहली तिमाही में ज्यादा मात्रा में होता है, और यदि आपको इसके कुछ लक्षण असमान्य दिखे तो आपको इस बारे में अपने डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

दूसरी तिमाही (14 to 26 weeks) में:-

दूसरी तिमाही में ये अंडे के सफ़ेद भाग की तरह निकलता है, और यह गंढीं और सामान्य रंग का ही होता है, परंतु यदि आपको इसके साथ खून देखने को मिलता है, तो इस बारे में आप अपने डॉक्टर से राय ले सकते है।

तीसरी तिमाही (27 to 40 weeks) में:-

तीसरी तिमाही में भी इसका आना सामान्य होता है, और कई बार इसके साथ खून के थक्के भी आने लगते है, आप चाहे तो इस बारे में अपने डॉक्टर से राय ले सकते है, परंतु तीसरी तिमाही में खून के थक्के आना आम बात होती है।

फाइनल स्टेज पर:-

डिलीवरी के आस पास इसका आना यह संकेत देता है की गर्भ में पल रहा शिशु अपने आप को बाहर लाने के लिए तैयार कर रहा है, और कभी आपको पेशाब की तरह यह आने लगे, तो इसे देखकर घबराने की जरुरत नहीं होती है, यह amniotic fluid का लीकेज होता है, और यह इस बात का संकेत होता है, की आप हॉस्पिटल जाने वाली है।

क्या सफ़ेद पानी का आना बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकता है:-

नहीं, सफ़ेद पानी बच्चे की सुरक्षा के लिए बनता है, इसके कारण बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता है, यदि आपको किसी तरह का इन्फेक्शन हो जाये तो यह नुकसान कर सकता है, इसीलिए जरुरी है की आप अपनी योनि की साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखें, इससे इन्फेक्शन का खतरा कम होता है।

सफ़ेद पानी के कारण इन्फेक्शन से बचने के टिप्स:-

  • अपने गुप्तांग की साफ़ सफाई का ध्यान रखें, जितनी बार बाथरूम जाएँ उतनी बार योनि को अच्छे से धोकर सुखाएं।
  • डॉक्टर से पूछ कर गुप्तांग के लिए किसी साबुन या जैल का चुनाव करें, और रोजाना उससे गुप्तांग को धोने के बाद सूखने पर कपडे पहने।
  • हलके कॉटन के अंडरवियर का चुनाव करें, और रोजाना नियमित रूप से अंडरवियर को बदलें।
  • आप इससे बचने के लिए पैड का इस्तेमाल भी कर सकती है, ताकि आपको आरामदायक महसूस हो।
  • कभी भी गुप्तांग के लिए खुसबूदार क्रीम या पाउडर का इस्तेमाल न करें।
  • कोई भी परेशानी का अनुभव होने पर अपनी महिला डॉक्टर से जरूर मिलें।
  • गर्भावस्था के समय में जितना हो सकें पब्लिक टॉयलेट्स का इस्तेमाल न करें, इसके कारण भी आपको इन्फेक्शन की समस्या हो सकती है।
  • अपने खान पान का भी ध्यान रखें क्योंकि कई बार गलत खान पान भी इन्फेक्शन का कारण बन सकता है।
  • कभी भी असामान्य स्थिति का अनुभव होने पर बिना देरी किये डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए।

तो ये कुछ बातें है सफ़ेद पानी के बारे में जो की आपको गर्भावस्था के समय ध्यान रखना चाहिए, इसके अलावा आपको सफ़ेद पानी के रंग, टेक्सचर, और गंध पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए, यदि यह पतला गाढ़ा या रनहीं है तो कोई समस्या नहीं है, परंतु यदि किसी तरह का इन्फेक्शन होता है तो आपके इसके रंग और गंध को देखकर पता कर सकते है, और यदि आपको कुछ भी असमान्य लगे तो आपको तुरंत ही डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान केसर दूध गर्मियों के कैसे सेवन करे?

सदियों से माना जाता है के गर्भावस्था के दौरान केसर वाला दूध पीने से होने वाले शिशु की त्वचा का रंग गोरा होता है। इसीलिए आज भी कई जगहों पर घर के बड़े केसर वाला दूध पीने की सलाह देते है। पर अभी ऐसी कोई रिसर्च में यह बात साबित नहीं होती है के केसर दूध के सेवन से बेबी का रंग गोरा होगा। विशेषज्ञों के अनुसार बेबी का प्राकृतिक रंग उसके माता और पिता के रंग पर ही आधारित होता है।

केसर दूध के लाभ

क्या आप जानते है के केसर दुनिया के सबसे महंगे मसालों में से एक है। हालाँकि यह बात तो साबित नहीं होती की केसर दूध से शिशु की स्किन का रंग निखरेगा पर केसर दूध को गर्भावस्था के दौरान पीने और कई अन्य फायदे जरूर होते है। तो आइये जानते है के केसर दूध के सेवन से क्या लाभ मिलता है।

ब्लड प्रेशर

चूहों पर आधारित एक रिसर्च से यह पता चलता है के केसर में ऐसे गुण होते है जो हमारे ब्लड प्रेशर को कण्ट्रोल करते है। गर्भावस्था के दौरान हमारा हृदय को दुगनी तेजी से काम करना होता है ताकि ऑक्सीजन की सप्लाई गर्भाशय और पुरे शरीर मे अच्छे से हो सके, जिस कारण ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। केसर दूध का नियमित सेवन हमारे शरीर का ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल करता है और हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति से बचाता है।

पाचन शक्ति

गर्भावस्था के दौरान बहुत सी महिलाओं को पाचन क्रिया से संबंधित परेशानियां हो जाती है जैसे की कब्ज, पेट और सीने में जलन आदि।ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रेगनेंसी में हमारे शरीर में प्रोजेस्ट्रोन नामक हार्मोन्स बहुत तेजी से बढ़ते है और यह हार्मोन्स पाचन क्रिया को कमजोर कर देते है। साथ ही बढ़ते गर्भाशय के कारण भी पाचन शक्ति पर प्रेशर बढ़ जाता है जिससे पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है। एक रिसर्च के अनुसार केसर हमारे शरीर में ब्लड फ्लो को बढ़ाता हो पाचन क्रिया को अच्छा करता है।

इसीलिए गर्भावस्था के दौरान केसर दूध पीने से पेट से संबंधित परेशानियों से निजात मिलती है।

नींद

गर्भावस्था में ख़ुशी, तनाव और नए अनुभवों के कारण बहुत सी महिलाओं की नींद उड़ जाती है। सेहतमंद प्रेगनेंसी के लिए अच्छी नींद लेना भी बहुत जरुरी है। पर स्ट्रेस के कारण गर्भावस्था में नींद आना मुश्किल हो जाता है तो ऐसे में खाना खाने के बाद केसर दूध का सेवन जरूर करें। माना जाता है के कुछ महिलाओं को केसर दूध का सेवन करने से बहुत अच्छी नींद आती है।

तनाव

गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं का मुड़ बहुत जल्दी जल्दी बदलने लगता है जिसके कारण वह चिड़चिड़ी हो जाती है और बहुत तनाव भी महसूस करती है। केसर को एंटी डिप्रेस्सेंट के लिए भी जाना जाता है। केसर दूध का नियमित सेवन गर्भावस्था के दौरान बदलने वाले मुड़ को भी अच्छा करता है।

हार्ट

एक रिसर्च के अनुसार केसर एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है। इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल लेवल नियंत्रण में रहता है जिसके कारण हृदय संबंधित रोग कम होने का खतरा होता है। गर्भावस्था में हृदय को बहुत तेजी से काम करना होता है ऐसे कुछ समस्या आने का खतरा बना रहता है। केसर दूध का सेवन इस खतरे को भी कम करने में मदद करता है।

त्वचा

केसर दूध होने वाले शिशु की त्वचा को निखारेगा या नहीं इस बात का तो किसी को भी अच्छे से नहीं पता। पर हाँ गर्भवती महिला की स्किन की देखभाल जरूर अच्छे से होगी। प्रेगनेंसी में हुए हार्मोन्स बदलाव के कारण त्वचा पर दाग धब्बे और झाइयां आने लगती है। पर केसर दूध के नियमित सेवन से यह आपके काले दाग धब्बो को दूर करेगा।

कैसे करे गर्मियों में केसर दूध का सेवन?

केसर के इतने गुणों को जानने बाद जरुरी है के यह भी जाने के इसका सेवन कब और कितनी मात्रा में किया जाना चाहिए।

  • आपको यह ध्यान देना होगा के केसर बहुत ही गर्म होती है। इसीलिए दो या तीन दानो से अधिक केसर का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि केसर गर्म तासीर की है तो गर्भावस्था के शुरूआती तीन महीनो में इसका सेवन ना करें। गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में गर्भपात का खतरा ज्यादा होता है इसीलिए इन दिनों सिर्फ ठंडी चीजों का ही सेवन करना बेहतर होता है। गर्भावस्था के चौथे महीने से आप इसका सेवन आराम से कर सकते है।
  • सर्दियों में सुबह और शाम दोनों समय खाना खाने के बाद केसर दूध का इस्तेमाल कर सकते है। दूध के एक ग्लास में दो या तीन दाने केसर के मिलाकर पी लें।
  • गर्मियों के दिनों में ध्यान दे सिर्फ रात के समय खाना खाने के बाद ही केसर दूध का सेवन करें। गर्मियों में सिर्फ एक समय ही केसर दूध का सेवन पर्याप्त है।
  • कभी भी केसर दूध को खाली पेट ना पीजिये। खाली पेट केसर दूध आपको नुक्सान पहुंचा सकता है।
  • गर्भावस्था के आखिरी दिनों में केसर दूध को सुबह शाम दोनों समय सेवन करें। इससे डिलीवरी में आसानी रहेगी। आप चाहें तो प्रेगनेंसी का नोवा महीना शुरू होते ही केसर की थोड़ी सी मात्रा बढ़ाकर 4 या 5 दाने भी कर सकते है।

ज्यादा पसीना आने का कारण और इलाज

शरीर से पसीना निकलना एक आम प्रक्रिया है, यह हर व्यक्ति को होता है। लेकिन कई लोग ऐसे भी होते है जिन्हे पसीना बहुत अधिक आता है। गर्मी में, व्यायाम करते समय, या जब आप बहुत अधिक डर या तनाव में होते है तो भी पसीना आना आम बात होती है। शरीर में होने वाली एक्राइन पसीना ग्रंथि के कारण हमारे शरीर से पसीना निकलता है। यह ग्रंथि सबसे ज्यादा आपके माथे, हथेली, पैर के तलवे, अंडर आर्म्स, आदि में अधिक पसीना लाती है। अधिक पसीना आना कई बार आपके शरीर में होने वाली किसी बिमारी की और भी संकेत करना है।

हदय रोग से परेशान व्यक्तियों को, ब्लड प्रैशर की मरीज़ो में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। इसीलिए अधिक पसीना आने पर इसे आपको नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। और एक बार अपनी जांच जरूर करवानी चाहिए। और कई बार आदिक पसीना आने के कारण आपको पसीने की बदबू जैसी परेशानी का भी सामना करना पड़ता है। तो आइये अब हम आपको विस्तार से बताते है की ज्यादा पसीना आने के क्या कारण होते है, और आप इसका इलाज कैसे कर सकते है।

अधिक पसीना आने के क्या कारण होते है:-

  • अत्यधिक गर्मी होने के कारण पसीना आना सबसे आम बात होती है।
  • यदि आप मानसिक रूप से तनाव अनुभव करते हैं, या आप किसी चीज से बहुत अधिक डर महसूस करते हैं तो आपको अधिक पसीना आता है।
  • जिन लोगो का वजन अधिक होता है उन्हें भी यह परेशानी हो सकती है।
  • किसी शारीरिक बिमारी के कारण भी अधिक पसीना आने की समस्या हो सकती है।
  • शारीरिक मेहनत आप जितनी अधिक करते है उतना अधिक आपके शरीर से पसीना आना है।
  • जो लोग चाय, कॉफ़ी, शराब का सेवन करते है उन्हें भी अधिक पसीना आता है। क्योंकि इसमें कैफीन की मात्रा अधिक होती है।
  • अधिक मसालेदार खाना खाने से भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • धूम्रपान का सेवन भी अधिक मात्रा में करने पर आपको अधिक पसीना आने की समस्या हो सकती है।
  • जो लोग सिंथेटिक कपडे अधिक पहनते है उन्हें यह परेशानी ज्यादा होती है।

अधिक पसीने से बचने के उपाय:-

हरड़ का उपयोग करें:-

हरड़ को बारीक पीस कर एक चूर्ण तैयार करें अब इसमें पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, और नहाने से पहले इसे या तो पूरे शरीर पर या फिर जहां आपको अधिक पसीना आता है वहां लगाकर दस मिनट के लिए छोड़ दे। उसक बाद नहा लें, हफ्ते में तीन या चार बार इस उपाय को करने से पसीना कम आने लगता है।

फिटकरी का उपयोग करें:-

नहाने के पानी में एक चम्मच फिटकरी डालकर नहाएं इससे भी आपको अधिक पसीना आने की समस्या से निजात मिलता है। लेकिन ध्यान रखें फिटकरी को अधिक मात्रा में न डालें, क्योंकि इससे शरीर पर अधिक खारिश होने की समस्या हो जाती है।

गुलाबजल का इस्तेमाल करें:-

पानी में गुलाबजल डालकर नहाएं इससे भी आपको अधिक पसीना आने की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।या आप नहाने से पहले रुई से अपने शरीर पर गुलाबजल लगाकर पांच मिनट के लिए छोड़ दे। और उसके बाद अच्छे से नहा ले इससे भी आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करना चाहिए:-

दिन में दो बार यदि आप पानी में एक या दो चम्मच बेकिंग सोडा डालकर नहाते हैं, तो इससे भी आपको अधिक पसीना आने की समस्या का समाधान करने में मदद मिलती है। आप चाहे तो बेकिंग सोडा और पानी का पेस्ट बनाकर केवल उस स्थान पर भी लगा सकते है जहां आपको अधिक पसीना आने की समस्या है, और उसके बाद नहा लें।

वीटग्रास का रस पीएं:-

इसे गेहूं के ज्वारे के नाम से भी जाना जाता है, यह भी किसी औषधि से कम नहीं होता है। यदि आप नियमित एक गिलास इसके रस का सेवन करते है तो इससे भी आपके शरीर से अधिक पसीना आने की समस्या का समाधान करने में मदद मिलती है।

अंगूर का सेवन करें:-

अंगूर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स भी आपको इस समस्या से बचाने में आपको मदद करता है। यदि आप नियमित थोड़े से अंगूरों का सेवन करते है तो आपको इससे फायदा मिलता है, आप चाहे तो अंगूर के रस का भी सेवन कर सकते है।

निम्बू का इस्तेमाल करें:-

यदि आप नियमित दो से तीन गिलास ठन्डे पानी में नमक और निम्बू डालकर इसका सेवन करने से भी आपके शरीर को ठंडक मिलती है। जिससे आपको अधिक पसीना आने की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।

अधिक पसीने से बचने के अन्य उपाय:-

  • चाय, कॉफ़ी, धूम्रपान, व् शराब का सेवन से परहेज करना चाहिए।
  • तनाव नहीं लेना चाहिए खुश रहना चाहिए।
  • कॉटन के कपड़ो का चुनाव करना चाहिए, खासकर गर्मियों में।
  • गर्मी से बचने के लिए दही लस्सी आदि का सेवन भरपूर करना चाहिए, इससे आपकी बॉडी को ठंडा रखने में मदद मिलती है।
  • नहाने से पहले बैंगन का रस निकालकर अपने पूरे शरीर पर लगाना चाहिए, और पांच मिनट बाद अच्छे से नहा लेना चाहिए, इससे भी आपको फायदा मिलता है।
  • अपने वजन को नियंत्रित करना चाहिए इससे आपको बहुत सी परेशानियों से बचें रहने में मदद मिलती है।
  • संतुलित व् पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए अधिक मसाले से परहेज करना चाहिए।
  • टमाटर के जूस का सेवन करने से पसीने की समस्या से राहत मिलती है।
  • ग्रीन टी का सेवन करने से भी आपको इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।

तो ये हैं कुछ कारण जिनकी वजह से आपको अधिक पसीना आने की समस्या का सामना करना पड़ता है। और यदि आपको भी यह समस्या है तो आप भी ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल करके इस समस्या का समाधान कर सकते हैं। इसके अलावा यदि आपको इससे ज्यादा परेशानी का अनुभव होता है तो एक बार डॉक्टर से भी रात जरूर लेनी चाहिए।