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हल्दी का कैसे करे उपयोग त्वचा को सुन्दर और गोरा बनाने के लिए?

हल्दी को सदियों से ही स्वाद और रंग के लिए खाने में इस्तेमाल किया जाता है और साथ ही इसके गुणों के कारण इसे कुछ दवाइयों में भी इस्तेमाल किया जाता है। एशिया के ज्यादातर भागो में हल्दी को भोजन में और बहुत सी बिमारियों को ठीक करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।

हाल ही हुए अध्ययन में यह बात साबित होती है के हल्दी इन्फेक्शन से लड़ने के काम आता है, और कैंसर, पाचन क्रिया से जुडी समस्याओं, लिवर प्रोब्लेम्स आदि को ठीक करने के काम आती है। हल्दी एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर है और सालो से हल्दी को बहुत सी स्किन संबंधित समस्यों और जख्मो को ठीक करने के लिए कारागार माना जाता है।

हल्दी को बहुत सी दवाइयों और स्किन क्रीम में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके अतिरिक्त हमारे पास बहुत से ऐसे घरेलु तरीके है जिन्हे इस्तमाल कर हल्दी के गुणों से हम अपनी त्वचा को सुंदर और साफ़ बना सकते है। त्वचा हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है त्वचा के अच्छे होने से सिर्फ हमारी सुंदरता ही नहीं बढ़ती बल्कि हमारे शरीर के अंदर के सिस्टम को भी सुरक्षा प्रदान करती है।

हमारी त्वचा हमारे शरीर को सुरक्षा प्रदान करते करते बहुत से बाहरी तत्वों को सहन करती है जिस कारण हमारी स्किन को डिहाइड्रेशन, गर्मी, एलर्जी आदि समस्यों से गुजरना पड़ता है। आइये जानते है हल्दी को कैसे अपनी त्वचा सुंदर, साफ़ और सुरक्षा प्रदान कर सकते है।

निशानों और जख्मों पर

हल्दी में एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के होने से हमारी त्वचा को ठंडा रख उसके पोर्स को ठीक करने का काम करते है। हल्दी अपने एंटीसेप्टिक गुणों से त्वचा के दाग धब्बो और जख्मो को बहुत जल्दी से ठीक करती है। एक चम्मच बेसन में एक चुटकीलगाए  हल्दी को मिलाये और थोड़ा सा पानी मिलाकर एक स्मूथ पेस्ट तैयार कर लें। इस स्मूथ पेस्ट को जख्मों और कटे हुए निशानों पर, अब इस पेस्ट को 25 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें। और फिर हल्के गुनगुने पानी से धो लीजिये। इस पेस्ट के नियमित इस्तेमाल से त्वचा के कटे और जख्मों के निशान भी ठीक हो जाते है।

रूखी और फटी त्वचा का इलाज

मौसम बदलते ही हमारी त्वचा रूखी हो जाती है और फटने भी लगती है। आपने अपनी फटी एड़ियों को तो देखा ही होगा, ऐसा ही हाल कई बार हमारे हाथो की त्वचा और शरीर की बाकी त्वचा का भी हो जाता है। अब अपनी इस फटी त्वचा पर हल्दो को इस्तेमाल करे, आप इसके परिणामो से बिलकुल भी निराश नहीं होंगे।

बराबर मात्रा में हल्दी और नारियल तेल मिलाकर अपनी एड़ियों पर या रूखी त्वचा पर लगाए और 15 मिनट तक सूखने के लिए छोड़े। 15 मिनट बाद अपनी त्वचा को धो लीजिये, आपकी त्वचा को आराम मिलेगा और हल्दी से आपकी त्वचा मुलायम भी बनेगी।

स्ट्रेच मार्क्स

हल्दी, केसर और निम्बू रस को लेकर एक मुलायम पेस्ट बनाये। अब इस पेस्ट को अपने स्ट्रेच मार्क्स पर लगाए और इस पेस्ट को 15 मिनट तक सुखाये। इस पेस्ट को रोजाना अपनी त्वचा पर लगाए जब तक आपके त्वचा से स्ट्रेच मार्क्स पूरी तरीके से साफ़ न हो जाये।

त्वचा की रंगत

हल्दी हमारी प्राकृतिक त्वचा की रंगत को निखार के सांवली त्वचा का इलाज करता है। धुप से हुई सांवली त्वचा का इलाज भी हल्दी से किया जा सकता है। धुप कारण हुई सांवली त्वचा के लिए 2 चम्मच दूध, 1 चम्मच निम्बू और 1 चुटकी हल्दी लें, इन तीनो चीजों का अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा पर अच्छे से लगाए। 15 से 20 मिनट बाद त्वचा को ताजे पानी से धो लीजिये। इस उपाय को आप रोजाना इस्तेमाल कर सकते है। इससे आपकी त्वचा की सारी टैनिंग खत्म हो जाती है।

त्वचा की रंगत निखारने के लिए एक चम्मच शहद, एक चम्मच दूध और 1/4 चम्मच हल्दी लेकर अच्छे से मिलकर फेसपैक बना लें। अब इस फेस पैक को त्वचा पर अच्छे से लगाए और 25 मिनट तक सूखने के बाद ताजे पानी से धो लें। इस उपाय को सप्ताह में 3 से 4 बार इस्तेमाल करे। इस पैक से त्वचा की रंगत बहुत साफ़ होती है।

झाइयां

हल्दी एक चमकदार ओषधि के रूप में इस्तेमाल की जाती है। त्वचा पर हुई झाइयों से छुटकारा दिलवाने में भी हल्दी मददगार होती है। आधा चम्मच हल्दी को दो चम्मच चंदन पाउडर में मिलाये, एक मुलायम पैक बनाने के लिए जरुरत के हिसाब से पानी मिलाये और अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस पैक को अपने चेहरे पर लगाए और इस पैक को अच्छे से सूखने दें। इस पैक को सप्ताह में दो से तीन बार इस्तेमाल कर सकते है। इस पैक के नियमित इस्तेमाल से चेहरे की झाइयां ठीक हो जाती है।

एजिंग

हल्दी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व हमारी त्वचा को बढ़ती उम्र की निशानियों से बचाते है। हल्दी के नियमित इस्तेमाल से त्वचा पड़ने वाली झुर्रिया और काले धब्बे भी कम हो जाते है। इसके एंटीऑक्सीडेंट तत्व हमारी त्वचा को प्रदूषण से होने वाले नुक्सान से बचाते है।

स्किन कैंसर

सभी कैंसर में से स्किन कैंसर सबसे कॉमन कैंसर है। वैज्ञानिको द्वारा भी यह बात साबित की गयी है के हल्दी से स्किन कैंसर का खतरा भी कम होता है। कैंसर के कारण त्वचा पर जो भी निशान पड़ते है और जलती है उसे भी हल्दी ठीक करता है। हल्दी सिर्फ हमारी त्वचा की बाहरी परत को ही सहीं नहीं करता है, बल्कि त्वचा के अंदर की परत जिस पर कैंसर से ट्यूमर बन जाता, हल्दी उस परत पर ट्यूमर को भी कम करने में मदद करता है।

हल्दी में बहुत से पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट तत्व होते है जो स्किन पर कैंसर के ट्यूमर को भी कम करता है। कैंसर के कारण त्वचा जलने लगती है। हल्दी के इस्तेमाल से त्वचा की जलन भी कम होती है।

तो आपने देखा हल्दी को हम अपनी त्वचा की खूबसूरती बढ़ाने के साथ साथ अच्छी सेहत के लिए भी इस्तेमाल कर सकते है। अपने शरीर के अंदरूनी दर्द को खत्म करने के लिए भी आप हल्दी का इस्तेमाल भी कर सकते है। इसके लिए एक चुटकी हल्दी को एक ग्लास दूध में मिलाकर पिए इससे शरीर के सारा दर्द खत्म हो जाएगा।

प्रेगनेंसी तीन महीने के अंदर खत्म हो जाती हैं यह उपाय अपनाएं

प्रेगनेंसी होना किसी भी महिला के लिए बहुत खास होता है, लेकिन कई बार ऐसा होता है की अभी आप बच्चा नहीं चाहते हैं। लेकिन आपका गर्भ ठहर जाता है, इसका कारण होता है आपका असुरक्षित सम्बन्ध बनाना। और कई बार महिला को पता भी नहीं चलता है की उसका गर्भ ठहर गया है, लेकिन जैसे ही मासिक धर्म में देरी होनी शुरू होती है। वैसे ही महिला को पता चलता है की उसका गर्भ ठहर गया है। और यदि वो बच्चा नहीं चाहती है तो ऐसे में गर्भपात ही एक रास्ता होता है। लेकिन क्या आप जानते है की गर्भपात के बाद महिला के शरीर में कमजोरी आने के साथ उसे और भी कई तरह की परेशानियां हो सकती है।

ऐसे में महिला को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की यदि अभी वो बच्चा प्लान नहीं करना चाहते हैं तो सम्बन्ध में सुरक्षा का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। उसके बाद आपको इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की आपका गर्भ यदि तीन महीने के आस पास का हो गया है तो इसे डॉक्टर से जरूर चेक करवाना चाहिए, क्योंकि कई बार घर पर गर्भपात करने से आपके गर्भाशय में कुछ टिश्यू रह जाते हैं जिनके कारण आपको बाद में परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। अनचाहा गर्भ गिराने के लिए आप क्या क्या कर सकते हैं आज हम आपको इसी के लिए कुछ टिप्स देने जा रहें हैं। लेकिन इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की गर्भ तीन महीने के ऊपर का नहीं होना चाहिए।

प्रेगनेंसी तीन महीने के अंदर खत्म करने के टिप्स:- प्रेगनेंसी यदि तीन महीने से कम की होती है तो आप घरेलू तरीको का इस्तेमाल करके गर्भ को गिरा सकते है। लेकिन यदि गर्भ ज्यादा महीने का हो जाता है। तो आपको इसे घर में गिराने का रिस्क न लेते हुए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। तो आइए अब जानते हैं की तीन महीने की प्रेगनेंसी के गर्भ को गिराने के लिए कुछ टिप्स इस प्रकार है।

विटामिन सी को करें अपने आहार में भरपूर मात्रा में शामिल:- प्रेगनेंसी के दौरान आपको विटामिन सी युक्त पदार्थ जैसे की आंवला, अनानास, कच्चा पपीता, निम्बू, कटहल, आदि खाने के लिए मना किया जाता है। क्योंकि यह सभी गर्भनिरोधक तत्व होते हैं, जिनसे गर्भ गिरने का खतरा रहता है। ऐसे में यदि आप गर्भपात करना चाहते हैं तो आपको अपने आहार में इसे भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए, जिससे की आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिल सके।

दालचीनी भी है गर्भपात के लिए आसान उपाय:- दालचीनी मसाले का इस्तेमाल सब्जियों के स्वाद को बढ़ाने के लिए बहुत किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं की यह एक गर्भनिरोधक भी है। यदि आप दिन में दो या तीन बार एक गिलास पानी में एक चम्मच दालचीनी पाउडर को डालकर उसका सेवन करते हैं, और साथ ही सब्जियों आदि में भी इसे भरपूर मात्रा में लेते हैं। तो ऐसा करने से आपको अनचाहे गर्भ की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

सीताफल के बीज भी है अनचाहे गर्भ के लिए असरदार उपाय:- सीताफल के बीजों को अच्छे से पीसकर एक पेस्ट तैयार करें। उसके बाद इस पेस्ट को अपने प्राइवेट पार्ट पर अच्छे से लगाएं। और थोड़ी देर के लिए वही लगे रहने दें, ऐसा जब तक करें जब तक की आपको ब्लीडिंग अच्छे से न शुरू हो जाए। और यदि दो दिन तक इस उपाय को करने से आपको रक्तस्त्राव नहीं होता है। तो इसके लिए आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए।

ज्यादा से ज्यादा करें शारीरिक श्रम:- प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने भरपूर रेस्ट की सलाह दी जाती है क्योंकि इस दौरान गर्भ गिरने का बहुत अधिक खतरा होता है। ऐसे में अनचाहे गर्भ को गिराने के लिए आपको अधिक से अधिक व्यायाम करना चाहिए, उछल कूद करनी चाहिए, ऐसा काम करें जिसके कारण आपके पेट पर जोर पड़े, जैसे की भारी सामान उठाना चाहिए, ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी चाहिए। ऐसा करने से भी आपके गर्भपात करने के चांस को बढ़ाया जा सकता है।

तिल के बीज और शहद का सेवन करें:- तिल के बीज और शहद का सेवन करने से आपको बहुत जल्दी असर देखने को मिलता है। इसके लिए आप एक चम्मच तिल को अच्छे से पीस लें, उसके बाद उसमे एक चम्मच शहद और थोड़ा सा पानी मिलाएं। अच्छे से मिक्स करने के बाद आप इस घोल का सेवन करें। ऐसा करने से आपको सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते है, आप इसका सेवन दिन में दो बार करें जब तक की आपको रक्तस्त्राव शुरू नहीं हो जाता है।

कच्चा पपीता खाएं:- गर्भ गिराने के लिए कच्चे पपीते के सेवन को सबसे आसान और सबसे सरल उपाय माना जाता है। क्योंकि इसमें सबसे अधिक विटामिन सी होता है जो की गर्भ को ठहरने नहीं देता है। ऐसे में यदि आप चाहते हैं की आपका गर्भ न ठहरे तो आपको भरपूर मात्रा में कच्चे पपीते का सेवन करना चाहिए।

जितना हो सके गर्म पानी से नहाएं:- जितना अधिक आप गर्म पानी से नहाती है, उतनी ही गर्मी आपके गर्भ मे बढ़ती है, जिसके कारण गर्भ ठहर नहीं पाता है। तो आप जितना गर्म पानी सह सकते हैं उतने गर्म पानी से आपको नहाना चाहिए। ऐसा करने से आपको अनचाहे गर्भ की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

हर्बल चाय का करें सेवन:- गर्भपात करने के लिए हर्बल चाय का सेवन करने से भी आपको फायदा मिलता है। इसके लिए आप चाय के पानी को उबालते समय उसमें सूखे कैमोमाइल को थोड़ा सा डाल दें, और अच्छे से उबालने के बाद इसे छानकर इसका सेवन करें। ऐसा करने से आपको अनचाहे गर्भ की परेशानी से निजात मिल जाता है,और इसके लिए आप दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करें।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको अपने तीन महीने तक के गर्भ को गिराने में मदद मिलती है। लेकिन गर्भपात के बाद महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की यदि वो बार बार गर्भपात करती है तो यह बाद में उसके लिए समस्या का कारण बन सकता है। इसीलिए ऐसा न होने दें, और सम्बन्ध बनाते समय सुरक्षा का खास ध्यान रखें, साथ ही गर्भपात होने के बाद एक बार डॉक्टर को जरूर दिखाएं। इसके अलावा आपका गर्भ यदि दो महीने का है तो यह उपाय ज्यादा असर करते हैं दो महीने से ऊपर के गर्भ के लिए आपको डॉक्टर से ही राय लेनी चाहिए।

गर्भवती महिला को सोने से परेशानी क्यों होती है और इसके क्या उपाय है?

जिस समय में आपको सबसे ज्यादा सोने और आराम की जरुरत होती है उसी समय में आपको नींद नहीं आती है। और खास बात यह के इस समय में ही आप सबसे अच्छी नींद ले सकते है क्योंकि बेबी के होने के बाद जब तक आपका बेबी रूटीन में नहीं आता तब तक तो रात की नींद भूलनी ही पड़ती है।

गर्भावस्था में कब नींद की समस्या होती है?

गर्भावस्था के दौरान 75 प्रतिशत महिला को सोने से परेशानी होती है या ये कहना ज्यादा सही होता के गर्भावस्था में नींद नहीं आ पाती है। कम नींद आने और कम सोने की परेशानी गर्भावस्था के शुरूआती तीन महीनो में होती है। क्योंकि इस समय में शरीर में बहुत तेजी से हार्मोनल बदलाव होते है। वैसे यह स्थिति हर गर्भवती महिला के साथ नहीं होती है। क्योंकि हर महिला की हर गर्भावस्था अलग होती है इसीलिए कई बार कुछ महिलाओं को शुरूआती तीन महीनो में ज्यादा थकान, दर्द और घबराहट के कारण ज्यादा नींद आती है।

नींद ना आने की यह समस्या सिर्फ गर्भावस्था के शुरूआती तीन महीनो में ही नहीं होती बल्कि गर्भावस्था के अंतिम तीन महीनो में यह समस्या बहुत ज्यादा होती है। गर्भावस्था के अंतिम तीन महीनो में सोने में परेशानी आना लगभर हर तीसरी या दूसरी गर्भवती महिला को होती है।

गर्भावस्था में नींद ना आने के कारण

आइये जानते है के प्रेगनेंसी के दौरान कम सोने या नींद ना आने के क्या कारण होते है।

  • गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों से बेचैनी इतनी बढ़ जाती है के रात में नींद आना मुश्किल हो जाता है।
  • प्रेगनेंसी के आखिरी तीन महीनो में गर्भाशय बढ़ने से किडनी पर भी प्रेशर बढ़ जाता है और बार बार पेशाब के लिए जाना पड़ता है, कई बार रात रात में भी उठ कर बाथरूम जाना होता है इसीलिए गर्भवती महिला ढंग से सो ही नहीं पाती है।
  • सीने में जलन प्रेगनेंसी की बहुत साधारण समस्या है इसके कारण बेचैनी से गर्भवती महिला सो नहीं पाती है।
  • गर्भवती महिलाओं को अक्सर लातो में क्रैम्प आने की भी समस्या हो जाती है जिसके कारण उन्हें दर्द रहता है और वह सो नहीं पाती है।
  • मेटाबोलिज्म बढ़ने के कारण गर्भवती महिला के शरीर को गर्मी महसूस होती है चाहे सर्दियों की दिन ही क्यों ना हो।
  • डिलीवरी के तनाव को लेकर भी नींद नहीं आती है।

नींद ना आने पर अपनाये यह उपाय

ऐसा नहीं है के गर्भावस्था आप बिलकुल भी आँख नहीं झपक पाते। नींद तो आती ही है पर बार बार तनाव या बेचैनी के कारण आँख खुल जाती है। जिसके कारण आपके शरीर को पूरा आराम नहीं मिल पाता है। निचे दिए कुछ उपाय अपनाये आपकी नींद ना आने की समस्या जरूर थोड़ी राहत मिलेगी।

 कैफीन

दोपहर और शाम के समय में गर्भवती महिला चॉकलेट, चाय, कॉफ़ी और कोल्डड्रिंक आदि है सेवन ना करे। कैफीन के प्रयोग से नींद दूर हो जाती है जिन्हे पहले से ही नींद की समस्या हो उन्हें कैफीन युक्त प्रदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए।

रात का भोजन

रात के समय का भोजन भर पेट करे और समय पर करे, इससे नींद आने में आसानी होगी। और रात का भोजन करते समय जल्दी ना करें अच्छा टाइम लेकर रात के भोजन को अच्छे से चबा कर काये। इससे खाना अच्छे से पचेगा और सीने में जलन नहीं होगी।

एक्सरसाइज और ध्यान

रात में चैन से सोने के लिए थोड़ी बहुत एक्सरसाइज और मैडिटेशन अपनी रूटीन में शामिल करे। योगा और ध्यान करने से आप तनाव से भी दूर रहेंगे और आपको सोने में भी आसानी रहेगी। पर ध्यान रखिये की गर्भावस्था में आपको हैवी एक्सरसाइज या योगा नहीं करनी है। बस अपनी रूटीन में हल्की फुलकी मॉर्निंग वाक और थोड़ी बहुत एक्सरसाइज कर सकती है।

सोने का समय

रोजाना अपनी रूटीन में सोने के समय को फिक्स करने की कोशिश करे। और सोने से पहले अपनी पसंद की किताब पढ़ना या फिर संगीत सुनना लाभदायक होगा। इससे आपका दिमाग स्ट्रेस फ्री रहेगा और नींद आराम से आ पायेगी।

टीवी और लैपटॉप

आजकल अक्सर लोग सोने से पहले टीवी,कंप्यूटर या लैपटॉप देखना पसंद करते है। पर इन चीजों की स्क्रीन की लाइट आपकी नींद लाने की बजाय भगा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार सोने से कम से कम एक घंटे पहले टीवी जैसे उपकरणों का इस्तेमाल करना बंद कर देना चाहिए।

आरामदायक स्थिति

ऐसा कोई भी नियम नहीं है के गर्भावस्था के दौरान आपको बहुत से तकिये लेकर ही सोने है। बस अपनी पसंदीदा स्थिति और आपके शरीर आराम देने वाली स्थिति को देखिए और अपने तकिया और कम्बल को इस प्रकार ले जिससे आपको जल्द ही नींद आये।

फिजियोथेरेपी

कई बार कुछ गर्भवती महिलाओं के शरीर में दर्द बहुत बढ़ जाता है जिस कारण वह सो नहीं पाती है। इसके लिए अपने डॉक्टर से बात कर कुछ फिजियोथेरेपी और मसाज लें इससे आपको दर्द में भी आराम मिलेगा। और आप आसानी सो भी पाएंगे।

साधारणतः इन उपाय को करने से गर्भवती महिला को नींद की समस्या में आराम मिलता है पर अगर फिर भी आपको नींद नहीं आ रही है तो अपने डॉक्टर से तुरंत अपनी प्रॉब्लम के बारे में बात करें।

Pregnancy stages: गर्भावस्था के एक से नौ महीने तक

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए बहुत ही नाजुक समय होता है। गर्भधारण से लेकर बच्चे के जन्म तक प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला अपने शरीर में नए बदलाव और बहुत से नए अनुभव  महसूस करती है। प्रेगनेंसी कन्फर्म के बाद से ही मातृत्व क्या होता है महिला को समझ में आने लगता है। और गर्भ में पल रहे बच्चे से हुए जुड़ाव को महसूस करती है। साथ ही प्रेगनेंसी के हर पल महिला के दिल और दिमाग में केवल अपने बच्चे के विकास से जुड़े सवाल ही घूमते रहते हैं।

इसके बाद जैसे ही गर्भ में बच्चा हलचल करता है तो यह पल महिला के लिए उसकी प्रेगनेंसी का सबसे प्यारा और इमोशनल पल होता है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के हर महीने महिला कैसा महसूस करती है और प्रेगनेंसी की हर स्टेज पर क्या क्या होता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी का पहला महीना: First Month of Pregnancy

गर्भावस्था के पहले महीने में ओवुलेशन पीरियड के दौरान आपके और आपके पार्टनर के बेहतर सम्बन्ध बनाने पर अंडे व् शुक्राणु के मिलन से निषेचन की प्रक्रिया होती है। जिसके बाद गर्भाशय में प्रत्यारोपण किया जाता है। उसके बाद पीरियड्स मिस होने पर घर में टेस्ट करके प्रेगनेंसी कन्फर्म की जाती है।

गर्भवती महिला के शरीर में होने वाली परेशानियां: उल्टी आने का मन करना, थकान, कमजोरी, स्तन के आगे के हिस्से के रंग में बदलाव, खून का धब्बा लगना आदि।

बच्चे का विकास: प्रेगनेंसी के पहले महीने में भ्रूण की सिर्फ दो कोशिकाओं का विकास होता है।

गर्भावस्था का दूसरा महीना: Second Month of Pregnancy

प्रेगनेंसी के दूसरा महिला महिला का माँ बनने की तरफ दूसरा कदम होता है। ऐसे में बॉडी में हार्मोनल बदलाव के कारण महिला थोड़ा परेशानी महसूस कर सकती है।

गर्भावस्था के दूसरे महीने में होने वाली परेशानियां: बार बार यूरिन आने की समस्या, थकान व् कमजोरी का महसूस होना, मॉर्निंग सिकनेस की परेशानी होना, गंध से एलर्जी होना, आदि

बच्चे का विकास: बच्चे का दिल धड़कने लगता है, बच्चे के दिमाग का विकास होना शुरू हो जाता है।

प्रेगनेंसी का तीसरा महीना: Third Month of Pregnancy

गर्भावस्था का तीसरा महिला पहली तिमाही का आखिरी महीना होता है। यह महीना महिला के लिए और बच्चे के लिए दोनों के लिए बहुत अहम होता है। क्योंकि इस दौरान महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ने के साथ थोड़ी सी लापरवाही के कारण गर्भ गिरने का डर भी होता है।

प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में होने वाली परेशानियां: कब्ज़, सफ़ेद पानी, पेट में ऐंठन, मूड स्विंग्स, सीने में जलन, स्तनों में भारीपन महसूस होना, आदि।

बच्चे का विकास: तीसरे महीने में भ्रूण एक बच्चे की तरह दिखने लग जाता है। साथ ही बच्चे का आकार एक निम्बू के जितना हो जाता है।

गर्भावस्था का चौथा महीना: Fourth Month of Pregnancy

दूसरी तिमाही की शुरुआत के पहले महीने में महिला को पहली तिमाही में होने वाली परेशानियों से थोड़ी राहत मिल जाती है। महिला का पेट थोड़ा सा बाहर निकल जाता है। साथ ही जिन महिलाओं का खाने का मन नहीं करता है उन गर्भवती महिलाओं की इस महीने में भूख बढ़ सकती है।

प्रेगनेंसी के चौथे महीने में होने वाली शारीरिक परेशानियां: सीने में जलन, कब्ज़, पैरों में दर्द, पीठ में दर्द की समस्या।

बच्चे का विकास: इस समय बच्चे की हड्डियों की आकृतियां बनी हुई होती है और वह मजबूत हो रही होती है। ऐसे में अल्ट्रासॉउन्ड के माध्यम से आप बच्चे के विकास को देख सकते हैं। साथ ही बच्चे का आकार एक बड़े संतरे के जितना हो जाता है।

प्रेगनेंसी का पांचवां महीना: Fifth Month of Pregnancy

पांचवें महीने में महिला थोड़ा रिलैक्स महसूस करती है। लेकिन वजन बढ़ने के कारण थोड़ी परेशानी का अनुभव भी महिला कर सकती है। साथ ही पांचवें महीने पेट थोड़ा ज्यादा बाहर आ जाता है जिसे देखकर लोग आसानी से अनुमान लगा सकते हैं की आप प्रेग्नेंट हैं। इसके अलावा पांचवें महीने में आपके बच्चे की हलचल भी आपको महसूस होती है।

प्रेगनेंसी के पांचवें महीने में होने वाली परेशानियां: पीठ में दर्द, कब्ज़, सिर में दर्द, सीने में जलन, सूजन जैसी परेशानी आपको होती है।

बच्चे का विकास: गर्भ में बच्चे की हड्डियों व् मांसपेशियों का विकास बढ़ता है, बच्चे के सुनने की क्षमता में वृद्धि होती है।

गर्भावस्था का छठा महीना: Sixth Month of Pregnancy

प्रेगनेंसी का छठा महीना दूसरी तिमाही का आखिरी महीना होता है। इस महीने में महिला का पेट थोड़ा और बाहर आ जाता है। साथ ही गर्भ में शिशु की हलचल भी बढ़ जाती है। साथ ही वजन बढ़ने के कारण महिला थोड़ा असहज महसूस कर सकती है।

गर्भावस्था के छठे महीने में होने वाली परेशानियां: सूजन, ज्यादा भूख लगना, खर्राटे आना, पेट के निचले हिस्से में दर्द, सफ़ेद पानी गिरना, भूख में बढ़ोतरी, पीठ में दर्द, आदि।

बच्चे का विकास: इस महीने में बच्चे के सभी अंग पूरी तरह बन चुके होते हैं साथ ही कुछ अंग अपना काम भी करने लगते हैं। जैसे की बच्चे की सुनने की क्षमता का विकास बढ़ता है।

प्रेगनेंसी का सातवां महीना: Seventh Month of Pregnancy

गर्भावस्था के सातवां महीना यानी की मुबारक हो आप प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में कदम रख चुकी है। इस समय आपका पेट बाहर की तरफ और ज्यादा आ चूका होता है, आपका वजन पहले की अपेक्षा दस से बारह किलो तक बढ़ चूका होता है।

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में होने वाली परेशानियां: पेट में संकुचन महसूस हो सकता है जिसे की फाल्स लेबर पेन कहा जाता है, स्तनों से रिसाव हो सकता है, कब्ज़ की समस्या बढ़ सकती है, सूजन की परेशानी, आदि।

बच्चे का विकास: सातवें महीने में बच्चा माँ के स्पर्श व् बाहर की आवजों को सुनकर प्रतिक्रिया दे सकता है।

गर्भावस्था का आठवाँ महीना: Eighth Month of Pregnancy

गर्भावस्था का आठवाँ महीना बहुत ही अहम होता है क्योंकि इस समय बच्चे के जन्म से पहले होने का खतरा अधिक होता है। साथ ही बच्चे का विकास भी तेजी से बढ़ता है और वजन बढ़ने के कारण महिला को शारीरिक परेशानियां भी अधिक होती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है।

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में होने वाली परेशानी: सूजन की समस्या, सोने में परेशानी, उठने बैठने में दिक्कत, कब्ज़, बवासीर की समस्या, पीठ और पेट के निचले हिस्से में दर्द की समस्या, बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होना, आदि।

बच्चे का विकास: इस दौरान शिशु के सभी अंग विकसित हो चुके होते हैं बस शिशु का वजन तेजी से बढ़ रहा होता है।

प्रेगनेंसी का नौवां महीना: Ninth Month of Pregnancy

गर्भावस्था का नौवां महीना महीना वो महीना होता है जब आपका इंतज़ार खत्म होने वाला होता है। और आपका नन्हा मेहमान बहुत जल्दी आपकी गोद में आने वाला होता है। और इस दौरान शिशु अपनी सही पोजीशन में भी आने लगता है। लेकिन आपको इस दौरान तनाव नहीं लेना चाहिए क्योंकि तनाव लेने के कारण आपकी परेशानियां बढ़ सकती है।

गर्भावस्था के नौवें महीने में होने वाली परेशानियां: सूजन, सोने में परेशानी, कब्ज़, पेट के निचले हिस्से में भारीपन महसूस होना, यूरिन ज्यादा आना, दस्त लगना, उल्टी की परेशानी होना, रक्त के धब्बे महसूस होना, आदि।

बच्चे का विकास: नौवें महीने में बच्चा जन्म लेने की सही पोजीशन में आने की कोशिश करता है, वजन का विकास पूरी तरह हो चूका होता है।

यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी प्रेगनेंसी के हर महीने आप बहुत से नए अनुभव महसूस करेंगी। जो आपको ऊपर बताए गए हैं। लेकिन पूरे नौ महीने आपको दो बातों का खास ध्यान रखना है। पहला किसी भी चीज चाहे वो खान पान हो या काम उसमे लापरवाही न करें, और दूसरा किसी भी दिक्कत के महसूस होने पर उसे अनदेखा न करें एक बार डॉक्टर से जरूर बात करें।

प्रेगनेंसी को फैशन में यूँ बदलें

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गर्भवती होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं होता है, की आपके पेट बाहर आ गया है या ने बॉडी पार्ट्स में थोड़ा बदलाव आ गया है। तो आप खूबसूरत नहीं लग सकती है या ट्रेंड के साथ नहीं चल सकती है। बल्कि प्रेगनेंसी के यह समय महिला के लिए जितने अनुभवों से भरा होता है उतना ही बेहतर तरीके से महिला अपने आप को फैशनएबल दिखा सकती है। ज्यादातर महिलाएं इस दौरान अपने कपड़ो को लेकर चिंतित रहती है, तो लीजिये आज हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान किस तरह के कपडे पहनने चाहिए जिनसे आप स्टाइलिश दिखें आइये जानते हैं।

अपने साइज के कपडे पहने

प्रेगनेंसी का यह मतलब नहीं होता है की आप अपने साइज से दुगुने साइज के कपडे पहनना शुरू कर दें, बल्कि आपको आरामदायक या अपने साइज से एक या दो इंच बड़े कपडे ही पहनने चाहिए ताकि स्किन के साथ कपडे चिपके हुए न हो जिससे आपको परेशानी न हो।

लॉन्ग गाउन पहने

लॉन्ग गाउन पहनने पर प्रेगनेंसी के दौरान न केवल महिला आरामदायक महसूस करती है, बल्कि इससे महिला को खूबसूरत लगने में भी मदद मिलती है। गर्भवती महिला को ब्रैस्ट की तरफ से फिट और नीचे की तरफ खुला हुआ यानी की फ्लेयर वाला गाउन पहनना चाहिए। ऐसा गाउन पहनने से महिला का पेट भी अधिक दिखाई नहीं देता है।

डार्क रंग के कपडे पहनने

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हलके रंग के कपडे नहीं पहनने चाहिए, बल्कि डार्क रंगो के कपडे पहनने चाहिए। कुछ नया रंग ट्राई करें, इससे आपको खुश रहने में मदद मिलेगी, साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान यह रंग आपको फैशन के रंग में रंगे रहने में मदद करेंगे।

स्ट्रेचेबल जीन्स

यदि आप जीन्स पहनना पसंद करती हैं, और प्रेगनेंसी के दौरान आपको ऐसा लग रहा है की आप जीन्स नहीं पहन सकती है। तो घबराइए नहीं बल्कि जीन्स की लग्गिंग जो की स्ट्रेचेबल होने के साथ प्रिंट वाली भी होती है। प्रेगनेंसी के दौरान उसे पहन कर आप अपने इस शौक को पूरा करने के साथ फैशन के साथ प्रेगनेंसी को एन्जॉय कर सकती है।

बैलून टॉप

यह टॉप प्रेगनेंसी के दौरान सबसे बेहतरीन होते है, जो न केवल आरामदायक होते हैं, बल्कि इन्हे पहनने से गर्भवती महिला का पेट भी ज्यादा नहीं दिखाई देता है। यह टॉप कमर की तरफ से टाइट होते हैं और ब्रेस्ट और पेट पर से खुले बैलून की तरह होते है, यह मार्किट में आसानी से आप किसी भी दूकान से खरीद सकए हैं, और इसे स्ट्रेचेबल जीन्स के साथ पहन सकते हैं।

लाइनिंग प्रिंट वाली ड्रेस

जो ड्रेस लाइनिंग प्रिंट में होती है वो न केवल आपकप फैशनएबल दिखाई हैं, बल्कि ऐसी ड्रेस में आपका पेट भी दिखाई कम देता है, तो आप चाहे तो इसी तरह की ड्रेस खरीद सकते हैं। क्योंकि प्रेगनेंसी में आपकी लुक को बेहतर करने में यह आपकी मद करते हैं।

तो यह हैं कुछ प्रेगनेंसी में गर्भवती महिला को फैशन से भरपूर रखने के लिए टिप्स, लेकिन गर्भवती महिला को इस दौरान ऐसे ही ड्रेस का चुनाव करना चाहिए जिससे महिला आरामदायक महसूस करें, और कॉंफिडेंट लगे। ताकि प्रेग्नेंट महिला ख़ूबसूरती के साथ प्रेगनेंसी के इन बेहतर लम्हो का आनंद उठा सके।

माहवारी कब से शुरू होती है? और टीनएजर को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

माहवारी कब शुरू होती है, पीरियड्स के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, पहली बार पीरियड आने पर इन बातों को न भूलें, मासिक धर्म के लिए टिप्स, Tips for care during Periods

माहवारी हर एक लड़की को कभी न कभी होने वाली एक आम समस्या है जो हर महीने अठाइस दिन के चक्र के बाद दुबारा होती है। ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है की सभी लड़कियों या महिलाओं का मासिक चक्र एक जैसा हो, यह दो तीन पहले या दो दिन बाद भी हो सकती है। साथ ही पीरियड्स कम से कम तीन और ज्यादा से ज्यादा सात दिन तक होते है, यदि इससे ज्यादा दिनों तक पीरियड्स होते हैं, या समय से बहुत पहले या बाद में होते हैं तो इसे अनियमित मासिक चक्र कहा जाता है। मासिक चक्र के दौरान महिलाओं के प्राइवेट पार्ट से रक्त का प्रवाह होता है जो पहले दो दिन ज्यादा और फिर कम हो जाता है। इस दौरान भी महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव होने के कारण कमजोरी आना आम बात होती है, साथ ही पेट आदि में दर्द भी रहता है।

लड़की को पहली बार पीरियड्स कब होते हैं?

हर एक लड़की को एक ही उम्र में मासिक धर्म हो ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है। यह हर लड़की के बॉडी में होने वाले बदलाव पर निर्भर करता है जैसे की कई लड़कियों को बारह तो कई लड़कियों को सोलह की उम्र में भी मासिक धर्म की शुरुआत होती है। और ऐसा भी होता है की एक बार पीरियड आने के बाद दोबारा पीरियड तीन से चार महीने के बाद आएं, उसके बाद धीरे धीरे यह नियमित भी हो जाते हैं।

पहली बार पीरियड में टीनएजर को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

पहली बार पीरियड आने के दौरान कुछ लड़कियों को तो समझ भी नहीं आता है की उनके प्राइवेट पार्ट से खून क्यों निकल रहा है। ऐसे में पहले पीरियड्स के दौरान माँ को बेटी को समझाना चाहिए। इसके अलावा पहले पीरियड्स के दौरान टीनएजर को किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए आइये जानते हैं।

साफ़ सफाई का

प्राइवेट पार्ट बहुत ही कोमल जगह होती है जिकी अच्छे से साफ़ सफाई न हो तो इन्फेक्शन का खतरा बहुत ज्यादा हो जाता है। ऐसे में लड़कियों को पीरियड्स के दौरान साफ़ सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए।

अंडरवियर और पैड का चुनाव

जितना हो सके आपको कॉटन का अंडरवियर ही पहनना चाहिए क्योंकि न केवल वो आरामदायक होता है। बल्कि पसीने के कारण होने वाली परेशानी को भी कम करता है। साथ ही इस दौरान कपडे का प्रयोग नहीं करना चाहिए। और जिस भी पैड का चुनाव आप करती है वो अच्छी क्वालिटी का होना चाहिए।

पैड बदलने का समय

छह घंटे के बाद आपको पैड बदलना चाहिए, और यदि रक्त का प्रवाह ज्यादा हो रहा ही तो उससे भी पहले पैड को बदलना चाहिए। क्योंकि ज्यादा देर तक एक ही पैड को लगाए रखने से भी बैड बैक्टेरिया बढ़ता है जिससे बदबू, खुजली, इन्फेक्शन आदि होने का खतरा रहता है।

प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल

पीरियड्स के दौरान आपको एक बात का खास ध्यान रखना चाहिए की आप किसी भी तरह के खूशबूदार प्रोडक्ट का इस्तेमाल वजाइना के लिए न करें। क्योंकि ऐसा करने से भी वजाइना के ph स्तर में असंतुलन हो सकता है। जिसके कारण आपको परेशानी हो सकती है।

दवाइयों का सेवन

पीरियड्स के दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द, कमर दर्द, आदि होना आम बात होती है। ऐसा सभी लड़कियों के साथ हो ये कोई जरुरी नहीं होता है। लेकिन कई बार इस दौरान होने वाला दर्द असहनीय होता है। जिससे बचने के लिए दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण आपका मासिक चक्र प्रभावित हो सकता है।

सेहत का ध्यान

पीरियड्स के दौरान कमजोरी होना आम बात होती है, ऐसे में लड़कियों को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने के साथ, आयरन को भरपूर लेना चाहिए। क्योंकि इस दौरान बॉडी में रक्त का प्रवाह अधिक होता है।

तो यह हैं कुछ बातें जो लड़कियों को पीरियड्स के दौरान ध्यान रखनी चाहिए ताकि इस दौरान होने वाली किसी भी तरह की परेशानी से बचने में मदद मिल सके।

त्वचा और बालों के लिए कितना फायदेमंद है सरसों का तेल?

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सरसों के तेल का इस्तेमाल हर घर में किसी न किसी रूप में किया ही जाता है. लेकिन अधिकतर लोग इसका प्रयोग खाना बनाने के लिए करते है. परंतु क्या आप जानते है की इस प्राकृतिक तेल का इस्तेमाल आप अपनी त्वचा और बालों के लिए भी कर सकते है. जी हां, सुनने में थोडा अजीब है लेकिन ये सत्य है.

त्वचा के रंग को गोरा करने से लेकर मुंहासे जैसी आम समस्या सभी में सरसों का तेल बेहद फायदेमंद होता है. इसके अतिरिक्त बालों को प्राकृतिक चमक देने के साथ-साथ असमय सफ़ेद हुए बालों को भी ठीक करता है. पहले के समय में ये महंगे कॉस्मेटिक और तेल नहीं हुआ करते थे लेकिन फिर भी उस समय लोगों की त्वचा जवां और बाल बेहद खुबसुरत हुआ करते थे. क्योंकि वे सभी प्राकृतिक वस्तुओं का इस्तेमाल किया करते थे.

लेकिन आजकल के समय में कोई भी इन प्राकृतिक उपायों को नहीं पूछता. जिनमें से कुछ तो इसका इस्तेमाल ही नहीं करना चाहते और कुछ को इसके फ़ायदों के बारे में पता ही नहीं है. इसीलिए आज हम आपको सरसों का तेल बालों और त्वचा के लिए कितना फायदेमंद है इस बारे में बताने जा रहे है. जिनकी मदद से आप भी अपनी त्वचा और बालों से संबंधित समस्याएं दूर कर सकते है.

सरसों के तेल के फ़ायदे 

ऐसे तो सरसों के तेल के बहुत से फ़ायदे है लेकिन आपकी सहूलियत के लिए हमने इन्हें दो भागों बाल और त्वचा में बाँट दिया है. ताकि आप सभी के फ़ायदों को अलग-अलग जान सके. तो आइए सबसे पहले जानते है त्वचा के लिए सरसों के तेल के फ़ायदे!

-> त्वचा के लिए सरसों के तेल के फ़ायदे :-

हमारी त्वचा के लिए सरसों तेल बेहद फायदेमंद होता है और इसके अलावा कई अरोमा थेरेपी ट्रीटमेंट में भी इस तेल का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन, इसके इस्तेमाल से पूर्व हमेशा एक पैच टेस्ट कर लेना चाहिए, ताकि यह पता लगाया जा सके की कहीं आपको इससे एलर्जी तो नहीं है. इसके अतिरिक्त सामान्य प्रयोग के लिए cold pressed mustard oil (सरसों का तेल) का इस्तेमाल किया जाता है. त्वचा के लिए सरसों के तेल के फ़ायदे निम्नलिखित है –

1. दाग़ धब्बे और टैन दूर करे :

टैन और दाग़-धब्बों की समस्या के लिए सरसों का तेल बेहद लाभकारी होता है. ये इन्हें दूर कर आपको प्राकृतिक ग्लोइंग स्किन प्रदान करता है. इसके लिए सरसों का तेल, बेसन, दही और नींबू के रस की कुछ बुँदे मिलाकर अपन चेहरे पर लगाएं. 10 से 15 मिनट तक रखने के बाद इसे ठंडे पानी से साफ़ कर लें. हफ्ते में तीन पर इसका इस्तेमाल करें आपका चेहरा चमक जाएगा.

2. त्वचा के रंग को हल्का करे :

अपने चेहरे की त्वचा स्मूथ बनाने के लिए, नारियल तेल और सरसों के तेल के मिश्रण को अपनी त्वचा पर लगाकर उससे गोलाई में 5 से 6 मिनट तक मसाज करें. उसके बाद किसी मुलायम और गीले कपडे से अपना चेहरा साफ़ कर लें. ये आपकी त्वचा में रक्त के संचरण को बेहतर करेगा जिससे त्वचा की रंगत में फर्क आएगा और मुहांसे से भी छुटकारा मिलेगा.

3. प्राकृतिक सनस्क्रीन :

इसकी मोटी स्थिरता और विटामिन इ की उच्च मात्रा के चलते, इस तेल के इस्तेमाल से त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों और प्रदुषण के अन्य कणों से बचाया जा सकता है. इस तेल से स्किन कैंसर को ठीक करने में भी मदद मिलती है. जबकि इसमें मौजूद विटामिन इ बढती उम्र की निशानियों और झुर्रियों को दूर करने में मदद करता है.

4. पसीने के ग्रन्थियां :

सरसों के तेल का सेवन करने और उसके प्रयोग से पसीने की ग्रंथियां उत्तेजित होती है और त्वचा के छिद्र खुल जाते है. जिसके कारण ये शरीर के तापमान को कम करके शरीर से सभी बेकार toxins, पानी और लवण को निकाल देता है.

5. रैशेज और इन्फेक्शन :त्वचा के लिए सरसों का तेल

इस तेल की एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल प्रकृति रैशेज और त्वचा के अन्य इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करती है. इसके साथ ही त्वचा का रुखापन, मुरझाई त्वचा और खुजली में भी आराम देता है. सरसों के तेल से की गई बॉडी मसाज रक्त के संचरण को बढाकर त्वचा को साफ़ करने में मदद करती है.
इसके अलावा सरसों के तेल की एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रकृति, त्वचा की सुजन और कटे जले के कारण होने वाली तकलीफ को दूर करती है.

6. होंठो की देखभाल :

रूखे और बेजान होंठो के लिए सरसों तेल बेहद अच्छा घरेलू उपाय है. इसके लिए सोने से पर्व सरसों के तेल की दो बुँदे अपनी नाभि पर लगायें आपके होंठ कभी भी नहीं फटेंगे. होंठो को मॉइस्चराइज करने और उन्हें मुलायम बनाने के लिए इस उपाय का इस्तेमाल प्राचीन समय से किया जाता आ रहा है.

-> बालों के लिए सरसों के तेल के फ़ायदे :

यदि आप भी लम्बे, मोटे और सिल्की बालों की चाह रखती है तो इसके लिए सरसों का तेल बेहद लाभकारी उपाय है. चाहे इसका सेवन किया जाये या इसका प्रयोग दोनों हो रूप में सरसों तेल आपके बालों की जड़ों को वे सभी जरुरी न्यूट्रीएंट्स प्रदान करता है जो उनकी ग्रोथ के लिए जरुरी है. बालों के लिए सरसों के तेल के फ़ायदे निम्नलिखित है –

7. बालों की ग्रोथ :

सरसों के तेल से अपने स्कैल्प की मसाज करने से रक्त के संचारण में वृद्धि होती है जो आपके बालों की ग्रोथ को बढ़ाने में मदद करता है. इसके साथ ही इसमें कई विटामिन्स और मिनरल पाए जाते है, सबसे ज्यादा beta-carotene. शरीर में जाकर ये तत्व विटामिन ए के रूप में परिवर्तित हो जाता है जो बालों की ग्रोथ के लिए बेहद लाभकारी होता है. इसके साथ ही में आयरन, फैटी एसिड, कैल्शियम और मैग्नीशियम भी पाए जाते है जो बालों की ग्रोथ के लिए जरूरी है.

8. असमय सफ़ेद हुए बाल :

असमय सफ़ेद हुए बालों को ठीक करने के लिए सरसों का तेल बेहद फायदेमंद होता है. ये तेल आपके बालों को प्राकृतिक तौर पर डार्क करने में मदद करता है. इसीलिए यदि आप भी सफ़ेद बालों से परेशान ह तो रोजाना सोने से पूर्व अपने बालों में सरसों के तेल की मालिश करें.

9. बालों का झड़ना और स्कैल्प की अन्य समस्याएं :

गंजेपन और बालों के झड़ने की समस्या में सरसों का तेल बेहद लाभकारी होता है. इसके साथ ही रूखे और बेजान बालों को ठीक करने के लिए भी इसका प्रयोग करना फायदेमंद होता है. स्कैल्प संबंधी अन्य समस्याओं के लिए गर्म सरसों तेल, नारियल तेल, ओलिव आयल और बादाम तेल के मिश्रण से अपने बालों में 15 से 30 मिनट तक मसाज करें. 2 से 3 घंटे तक रखने के बाद किसी माइल्ड शैम्पू से बाल धो लें. ये आपके बालों को मोटा, लम्बा और सिल्की बनाने में मदद करेगा.

 

गर्भावस्था में क्या खाना हो सकता है नुकसानदायक?

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हर महिला के जीवन में प्रेगनेंसी एक बहुत ही क्रूशियल और सेन्सिटिव समय होता है। हर गर्भवती महिला अपने आने वाले बच्चे के लिए बहुत सारे सपने बुनती है और चाहती है के उसका बच्चा बिलकुल तंदरुस्त हो और सवस्थ हो। इसीलिए गर्भावस्था के दौरान हर महिला पौष्टिक आहार को अपने भोजन में शामिल करने की कोशिश करती है।

हमारे घर के बड़े और बुजुर्ग हमे समय समय पर बताते है की हमें क्या खाना है और क्या नहीं खाना है। दरअसल प्रेगनेंसी के दौरान क्या क्या खाना चाहिए यह तो हमें सभी बता देते है। परन्तु क्या नहीं खाना चाहिए इसके बारे में हर किसी की अलग अलग राय होती है, इन्हीं सब बातों को लेकर अक्सर गर्भवती महिलाएं कंफ्यूज रहती है।

तो चलिए आज हम आपको बताएंगे की गर्भावस्था के दौरान कौन कौन सी चीजें खाना हो सकता है नुकसानदायक।

कॉफ़ी चाय और सॉफ्ट ड्रिंक्स :

  •  कॉफ़ी, चाय और सॉफ्ट ड्रिंक्स यानी कोक, पेप्सी आदि में प्राकृतिक कैफीन पाया जाता है।
  • गर्भावस्था के दौरान कैफीन का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • कैफीन बहुत जल्दी से हमारे शरीर में घुलकर हमारे गर्भाशय में पहुँच जाता है।
  • कैफीन की ज्यादा मात्रा लेने से बच्चे का वजन जन्म के समय बहुत कम रह जाता है।
  • गर्भावस्था के कैफीन का सेवन करने से डिलीवरी में बच्चे की जान का खतरा भी बढ़ जाता है।
  • डॉक्टर के अनुसार भी प्रेगनेंसी के दौरान 2 कप से ज्यादा चाय, कॉफ़ी या सॉफ्ट ड्रिंक नहीं पीनी चाहिए।

कच्चा अंकुरित भोजन :

  • वैसे तो कच्ची अंकुरति दाल बीन्स हमारी सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है।
  • आद्र वातावरण के कारण अंकुरित की गयी दालों और बीन्स में  कुछ ऐसे बैक्टीरिया पैदा हो जाते जो पानी से भी साफ़ नहीं होते।
  • कच्चे स्प्राउट्स कंटामिनटेड हो सकते है।
  • गर्भावस्था में अगर स्प्राउट्स खाने भी तो सिर्फ पकाने ही खाइये।

कच्चे अंडे या हाफ कुक्ड-एग

  • कई लोगों को हाफ बॉयल्ड या हाफ कुक्ड अंडे खाना बहुत ही पसंद होता है, परन्तु गर्भावस्था में यह भोजन नुक्सानदायक हो सकता है।
  • प्रेगनेंसी में अधपके अंडे खाने से सालमोनेला संक्रमण होने का खतरा बना रहता है।
  • इस संक्रमण के होने से गर्भवती महिला की पाचन क्रिया खराब हो सकती है।

शराब या नशीले प्रदार्थ :

  • शराब और नशीले प्रदार्थ हर किसी के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते है।
  • गर्भावस्था में शराब के सेवन से बच्चे के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।
  • शराब और नशीले प्रदार्थो से शिशु के दिमागी और शारीरिक विकास में बांधा आती है।
  •  प्रेगनेंसी में नशीले प्रदार्थो के सेवन से गर्भपात का खतरा भी बढ़ जाता है।

अपाश्चरीकृत दूध और दूध पनीर :

  • प्रेगनेंसी के दौरान अपाश्चरीकृत दूध या उससे बनी चीजों का सेवन हानिकारक हो सकता है।
  • अपाश्चर्यकृत दूध में लिस्टेरिया नाम का बैक्टीरिया होता है।
  • यह बैक्टीरिया गर्भपात और समय से पहले प्रसव का खतरा बढ़ा देता है।

अधिक पके हुए फल :

  • आजकल बाजार में फलों को पकाने के लिए केमिकल्स का प्रयोग किया जाता है।
  • प्रेगनेंसी में अधिक पके हुए फल खाने से हार्मफुल केमिकल्स आपके शरीर में पहुंच कर आपको और आपके शिशु को हानि पहुंचा सकते है।

पपीता :

  • गर्भावस्था के दौरान अक्सर हमारे घर के लोग भी हमें पपीता खाने से मना करते है।
  • कच्चे पपीते में लेटेक्स होता है, लेटेक्स के कारण शुरुआती दिनों में गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।
  • पपीते में पपैन भी मौजूद होता है जो के शिशु के विकास को रोक देता है।

अंगूर :

  • अंगूर की तासीर गर्म होती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान अंगूर खाने से कभी भी प्रसव होने का डर बना रहता है।

चाइनीज़ फ़ूड :

  • चाइनीज़ फ़ूड में मोनो सोडियम ग्लूटामेट शामिल होता है।
  • ऍम एस जी के कारण शिशु में शारीरिक कमी देखने को मिल सकती है।
  • सोया सॉस में नमक की ज्यादा मात्रा के कारण गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर की परेशानी भी हो सकती है।

अनानास :

  • प्रेगनेंसी के दौरान अनानास खाना हो सकता है हानिकारक।
  • अनानास में ब्रोमेलिन शामिल होता है।
  • ब्रोमेलिन से जल्द प्रसव का खतरा भी बढ़ जाता है।

प्रेगनेंसी के दौरान शुरुआती दिनों में गर्म चीजों को खाना नज़र अंदाज करना चाहिए। इस दौरान अपनी और शिशु की सेहत को ध्यान में रखते हुए बैलेंस्ड और हेल्थी भोजन खाना चाहिए।

प्रेगनेंसी में ये होना आम बात है! डरें नहीं

माँ बनना इस दुनिया का सबसे खास और प्यारा अनुभव होता है, जैसे ही आपको पता चलता है की आप माँ बनने वाली है आपके मन में ख़ुशी के साथ एक डर भी आता है, की क्या आप उस बच्चे की अच्छे से केयर कर पाएंगी, क्या आप उसे अच्छे से परवरिश दें पाएंगी, इसके अलावा इस दौरान शरीर में होने वाले बदलाव के कारण भी महिलाएं घबरा जाती है, खास कर वो जो की पहली बार माँ बनने जा रही होती है, महिलाओ को ऐसे में डरना नहीं चाहियें, बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान हर एक अनुभव का आनंद उठाना चाहिए।

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pregnant woman

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में आने वाले बदलाव के साथ स्वाभाविक रूप से भी बदलाव आते है, जैसे की आपको गंध से एलर्जी हो जाती है , आपको शोर पसंद नहीं होता हैं, आप चिड़चिड़े हो जाते है, इसके अलावा शरीर में होने वाले हॉर्मोन के असंतुलन के कारण आपको शारीरिक रूप से भी परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है, जैसे की कई महिलाओ को बहुत ज्यादा उल्टी, चक्कर आदि की समस्या रहती है, हर महिला में होने वाले बदलाव उनके शरीर में होने वाले हॉर्मोन पर निर्भर करता है, सभी महिलाओ में एक जैसे बदलाव हो ऐसा जरुरी नहीं होता है। और जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है कई बार अपने शरीर में होने वाले इन बदलाव को समझ नहीं पाती है और डरने लग जाती है, और ऐसा होता है क्योंकि माँ बनने की जितनी ख़ुशी होती है उतनी ही घबराहट भी होती है, तो आइये हम आपको बताते है की प्रेगनेंसी में कौन कौन से ऐसे बदलाव होते है जिन्हे देख कर आपको नहीं डरना चाहिए।

पेट में दर्द होना:-

गर्भावस्था के दौरान पेट में हल्का फुल्का दर्द रहना आम बात होती है, ऐसे में महिलाओ को घबराना नहीं चाहिए, ऐसा जरुरी नहीं है पेट में यदि आपको तीसरे महीने में दर्द है तो वो लेबर पेन है, लेकिन यदि किसी समय आपके पेट में बहुत ज्यादा दर्द हो, और वो आपसे सहन न हो रहा हो तो आपको इसमें भी लापवाही नहीं करनी चाहिए, बल्कि इसके लिए भी तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, और आखिरी दिनों में होने वाले दर्द को अनदेखा नहीं करना चाहिए, क्योंकि कई बार महिलाओ को सातवे महीने में भी परेशानी हो जाती है, इसीलिए इन दिनों इस बात का ध्यान रखना चाहिए।

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स्वभाव में परिवर्तन आना:-

चिड़चिड़ होना, ज्यादा बोलने से आपको परेशानी होना, किसी से बात न करने का दिल करना, गुस्सा आना, कई महिलाओ के प्रेगनेंसी में ये भी लक्षण होते है, इसका कारण होता है की महिला के शरीर में बहुत तेजी से हो रहा हॉर्मोन का परिवर्तन होता है, और ये डिलीवरी के बाद या डिलीवरी के नजदीक आते आते ठीक हो जाता है, इसीलिए ऐसे में इन बदलाव को देखकर भी महिला को डरना नहीं चाहिए।

सर दर्द व् चक्कर आना:-

प्रेगनेंसी में महिला के शरीर के अंगो में कई बार दर्द रहना है और कई महिलाओ को ब्लड प्रैशर की भी समस्या हो जाती है, जिसके कारण उन्हें सर दर्द व् चक्कर आने लगते है, ये काफी आम बात है, और डिलीवरी के बाद ये बिल्कुल ठीक भी हो जाता है, खास कर जो पहली बार माँ बन रही होती है उन्हें काफी डर लगता है, परन्तु इसमें डरने वाली कोई बार नहीं होती है।

उल्टी या गैस की समस्या होना:-

महिलाओ को प्रेगनेंसी के समय उल्टी या फिर पेट में गैस की परेशानी होती रहती है, ऐसे में कभी भी इसे देखकर आपको घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि पेट में गैस की परेशानी का कब्ज़ की प्रॉब्लम तो महिलाओ को नौ महीने तक भी हो सकती है, साथ ही उल्टी कई महिलाओ को तीन महीने तक होती है, या फिर कई महिलाएं पूरे नौ महीने तक उल्टियां करती है।

स्पॉटिंग होना:-

कई महिलाओ को प्रेगनेंसी में कई बार हल्का फुल्का दाग लग जाता है, इसे देखकर आपको घबराना नहीं चाहिए, बल्कि इस बारे में अपने डॉक्टर से राय लेनी चाहिए, और आपको कोई ऐसा भारी काम या भागा दौड़ी नहीं करनी चाहिए, जिसके कारण आपके लिए समस्या खड़ी हो, और आपको ब्लीडिंग का खतरा हो, क्योंकि कई बार महिलाएं ब्लड स्पॉट देखकर तनाव में आ जाती है जो की उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है।

पैरों में सूजन आना:-

अधिकतर महिलाओ को प्रेगनेंसी के आखिरी महीनो में पैरों में सूजन होने लगती है, जो की एक आम बार होती है, ये भी ज्यादात्तर महिलाओ के साथ होता है, जिसके कारण आपको थोड़ा चलने में परेशानी हो सकती है, परन्तु ये डिलीवरी के बाद सही हो जाती है, परन्तु यदि आपको पैरों में सूजन के साथ दर्द भी है और आपको ज्यादा तकलीफ है तो आप डॉक्टर को दिखा सकती है, या आप घर में भी गरम तेल की मसाज आदि भी कर सकती है।

घबराहट होना:-

प्रेगनेंसी में शरीर में होने वाले बदलाव के कारण आपको कई बार घबराहट भी महसूस होती है, और आप थका थका महसूस करती है, आपकी साँस भी कई बार तेज हो जाती है, ये भी आम बात होती है, इसीलिए आपको प्रेगनेंसी में किसी भी काम को करते हुए तेजी नहीं करनी चाहिए, और न ही ऐसा कोई काम करना चाहिए जिसके कारण आपके पेट पर दबाव पड़े, क्योंकि यदि आप पेट के बल काम करती है, या किसी काम को करने में तेजी करती है तो आपको ज्यादा घबराहट महसूस हो सकती है।

तो ये कुछ चीजे है जो की गर्भावस्था के दौरान आम होती है, ऐसे में महिलाओ को ज्यादा नहीं डरना चाहिए, परन्तु यदि आपको ज्यादा तकलीफ हो रही हो तो इन चीजों को इग्नोर भी नहीं करना चाहिए, जैसे की पेट में किसी समय बहुत ज्यादा दर्द का नुभव हो और असहनीय हो तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए ताकि आपको कोई और परेशानी न हो, और जो भी परेशानी आप प्रेगनेंसी के दौरान सहन करती है, जैसे ही वो नन्ही सी जान आपके हाथो में आती है, वैसे ही आप इन सब परेशानियों को भूल जाती है।

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प्रेगनेंसी के इन महीनो में होता है! शिशु के इन अंगो का विकास

माँ बनने के सुखद अहसास इस दुनिया का सबसे खूबसूरत लम्हा है, मगर माँ बनना भी किसी जुंग से कम नहीं होता है नौ महीने तक शिशु को गर्भ में रखना, उसके आने के बाद फूल की तरह उस शिशु की केयर करना, और उसे एक अच्छी परवरिश देना, कोई आसान काम नहीं होता है, परतु जब शिशु माँ के गर्भ में होता है तो उस जैसा प्यारा अनुभव भी इस दुनिया में कही नहीं है, और इस समय में माँ जो भिकर्ति उसका सीधा असर उसके गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है, इसीलिए माँ को पूरे नौ महीने तक अपना अच्छे से ख्याल रखना पड़ता है, ताकि गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ हो।

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प्रेगनेंसी के समय में महिला के शरीर में बहुत से बदलाव आते है, वैसे ही गर्भ में पल रहे शिशु का भी धीरे धीरे विकास होता है, जैसे जैसे समय बढ़ता है बच्चे के अंगो का विकास होता है, बच्चा हरकते करने लगता है, और माँ उसे महसूस भी कर सकते है, यह तक को बच्चा भी आपके द्वारा कही हुई बातें सुनता है, लाते मारता है, ये अनुभव माँ के गर्भ में होने के कारण माँ अच्छे से महसूस कर सकती है, तो आइये आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे है की बच्चा माँ के गर्भ में किस तरह से बढ़ता है, और किस महीने उसमें क्या परिवर्तन आता है, यदि आप भी माँ बनने जा रही है तो इन बातों को जान कर आपको एक अच्छा अहसास होगा, तो ये है बच्चे के गर्भ में उसके विकास के बारे में कुछ बातें।

प्रेगनेंसी का पहला महीना:-

प्रेगनेंसी के पहले महीने में जब आपको पता चलता है की आप माँ बनने वाली है तो ये लम्हा आपके लिए बहुत ही ख़ास होता है, ऐसे में महिला को अपने खान पान, उठने बैठने, सब चीजों का ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि बच्चा माँ के अंदर होता है, और माँ के खून से ही बनता है, इसीलिए माँ को अपनी बहुत अच्छे से देखभाल करनी चाहिए, ताकि माँ और गर्भ में पल रहा शिशु दोनों ही स्वस्थ रहें।, और इस महीने में बच्चे के दिल की धड़कन आ जाती है।

प्रेगनेंसी का दूसरा महीना:-

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में बच्चे के चेहरा बनना शुरू होता है, ऐसा कहा जाता है की इस समय महिला जिसके बारे में ज्यादा सोचती है, बच्चे का चेहरा उसी के जैसा बनता है, इसके साथ महिला को ऐसे समय में प्रोटीन व् कैल्शियम युक्त आहार का सेवन करना चाहिए, ताकि बच्चे के विकास में मदद मिल सकें।

प्रेगनेंसी का तीसरा महीना:-

प्रेगनेंसी के तीसरे महीना में बच्चे की हड्डियों का विकास होता है, और इसी महीने में ही बच्चे के बाहरी अंग जैसे की कान, हाथ, उंगलिया आदि का विकास भी इसी महीने होता है, और इस समय में महिला के गर्भ का आकार भी बढ़ता है, और बच्चे की लम्बाई भी तीन इंच तक बढ़ जाती है, ऐसे में आपको अपना और भी ख्याल रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी का चौथा महीना:-

इस महीने में महिला के गर्भ का आकार और भी बढ़ता है, साथ ही बच्चे में हॉर्मोन भी पैदा होते है, और बच्चे से एमनीओटिक लिक्विड भी निकलने लगता है, बच्चे का वजन और लम्बाई भी बढ़ती है, साथ ही बच्चे के सिर पर बाल आने की शुरुआत भी हो जाती है, और कई बच्चे चौथे महीने हल्का मूवमेंट भी करने लग जाते है।

इन्हे भी पढ़े:- प्रेगनेंसी में पहले तीन महीने तक ये सावधानी बरतें

प्रेगनेंसी का पांचवा महीना:-

इस महीने में बच्चे के हाथ पैर, उनकी उँगलियों का विकास भी तेजी से होता है, और इस महीने में अधिकतर बच्चे अपने हाथ पैर हिलाना शुरू कर देते है, ऐसे में कभी वो हिलते है, तो कभी बिल्कुल शांत बैठे होते है, इस महीने में महिला को जितना हो सकें बाहरी खाने, ज्यादा मसालेदार, और जंक फ़ूड के सेवन को बंद कर देना चाहिए।

प्रेगनेंसी का छठा महीना:-

इस महीने में बच्चे की आँखों का अच्छे से विकास ही जाता है, और बच्चा अपनी पलके खोल भी सकता है, और बंद भी कर देता है, साथ ही बच्चा लात भी मार सकता है, और क्या आप जानते है की बच्चा माँ के गर्भ में रो भी सकता है, महिला को इस समय भी अपना खास ख्याल रखना चाहिए क्योंकि कई बच्चे इस महीने में जन्म भी ले लेते है, ऐसे में उन्हें और भी देखभाल की जरुरत पड़ती है।

प्रेगनेंसी का सातवा महीना:-

इस महीने में गर्भ में पल रहा शिशु भी अंगूठा चूसने लग जाता है, और यदि कोई महिला के गर्भ पर काम लगाकर सुने तो उसे बच्चे की धड़कन बिल्कुल साफ़ सुनाई देती है, इस समय महिला के गर्भ का आकार बढ़ रहा होता है, ऐसे में महीने को ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी चाहिए, साथ ही ज्यादा देर तक खड़े भी नहीं रहना चाहिए, ऐसा करने से पेट पर जोर पड़ता है।

प्रेगनेंसी का आठवां महीना:-

प्रेगनेंसी के इस महीने में माँ को बच्चे के हाल चाल के बारे में अच्छे से पता चलने लग जाता है, और इस समय बच्चा नींद भी लेने लग जाता है, और बच्चे के भी सोने और जागने का समय होता है, और इस महीने में बच्चा अपनी आँखे भी अच्छे खोल व् बंद कर सकता है, इस माह में बच्चे का वजन भी दो से तीन किलो तक हो जाता है, और इस समय में महिला को जब भी भूख लगे तो उसे अपने पेट की सुननी चाहिए, और भोजन का सेवन करना चाहिए।

प्रेगनेंसी का नौवा महीना:-

इस समय बच्चे के इस दुनिया में आने का समय पास आ जाता है, इस महीने में बच्चा शांत रहने लगता है, और बच्चे का सर नीचे की तरफ और पैर ऊपर की तरफ हो जाता है, कई महिला को इस महीने ब्रैस्ट से दूध भी आने लग जाता है, और जब बच्चे के आने का समय आता है, तो हर कोई खुश होता है और नवजात शिशु के गोद में आते ही ऐसा लगता है वो वक़्त वहीं ठहर जाएँ।

प्रेगनेंसी के समय महिलाओ को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:-

  • महिला को ज्यादा भागादौड़ी नहीं करनी चाहिए, ज्यादा भार नहीं उठाना चाहिए।
  • महिला को तनाव नहीं लेना चाहिए, खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए।
  • महिला को ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहिए, जिसके कारण उसके पेट पर दबाव पढ़ें, जैसे की झुकना, या पैरों के भार बैठना आदि।
  • महिला को अपने आहार को भी भरपूर लेना चाहिए और थोड़े थोड़े समय बाद कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए, और ऐसा आहार लेना चाहिए जिसमे सभी मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजद हो।
  • महिला को अपनी नींद को भी भरपूर मात्रा में लेना चाहिए।
  • महिला को अधिक व्यायाम नहीं करना चाहिए, और जितना हो सकें यात्रा से भी बचना चाहिए।
  • महिला को नियमित डॉक्टर से अपनी जांच भी करवानी चाहिए।

तो इस तरह से बच्चे का विकास हर महीने होता है, ऐसे में महिला को अपना और अपने गर्भ में पल रहे शिशु का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, और महिला को किसी भी तरह की लापवाही नहीं बरतनी चाहिए, जिसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह का कोई नुकसान हो, साथ ही महिला को अपने खान पान में संतुलित व् पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए, जिससे बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें, तो यदि आप भी माँ बनने वाली है तो इस खास अनुभव को आप भी महसूस कर सकती है।

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