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नोर्मल डिलीवरी कैसे होती है?

प्रेगनेंसी से डिलीवरी तक का समय

जिस दिन महिला को पता चलता है की उसके गर्भ में एक नन्ही सी जान आ गई है उस दिन से लेकर डिलीवरी के दिन तक का सफर गर्भवती महिला के लिए बहुत खास होने के साथ परेशानियों से भरा हुआ होता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में लगातार हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं, जिसके कारण महिला शारीरिक व् मानसिक रूप से बदलाव महसूस कर सकती है, और इन्ही बदलाव के कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन इसके बाद भी महिला को अपनी अच्छे से केयर करने की सलाह दी जाती है ताकि गर्भ में शिशु का विकास बेहतर तरीके से हो सके।

गर्भ में शिशु का आना ही महिला के मातृत्व के अहसास को जगा देता है, लेकिन डिलीवरी का समय पास आने पर महिला के मन में यही घूम रहा होता है की उसकी डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन। ज्यादातर गर्भवती महिलाएं नोर्मल डिलीवरी ही पसंद करती है जबकि कुछ महिलाएं दर्द से बचने के लिए या प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों के कारण सिजेरियन डिलीवरी की मदद से शिशु को जन्म देती है। लेकिन यह भी सच है की महिला की डिलीवरी किसी भी तरीके से हो, प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कितनी ही परेशानी आई हो शिशु के महिला के हाथ में आते ही महिला की सारी परेशानियां गायब हो जाती है।

नोर्मल डिलीवरी कैसे होती है

नोर्मल डिलीवरी में महिला प्राकृतिक तरीके से बच्चे को जन्म देती है, जिसमे बच्चेदानी का मुँह खुलने के बाद शिशु जन्म लेता है। नोर्मल डिलीवरी होने के दौरान बॉडी में बहुत से लक्षण महसूस होते हैं जैसे की महिला को रुक रुक कर पेट, कमर, पेट के निचले हिस्से में दर्द का अहसास होना, प्राइवेट पार्ट से एमनियोटिक फ्लूड का निकलना, ब्लड फ्लो होना, शिशु का गर्भ में अधिक हलचल करना आदि। ऐसे में इन लक्षणों का बॉडी में महसूस होना ही बच्चेदानी के खुलने का लक्षण होता है, और शिशु के जन्म से पहले एक दम से ही बच्चेदानी का मुँह नहीं खुलता है। साथ ही शिशु के जन्म के लिए बच्चेदानी का मुँह लगभग 10 सेंटीमीटर तक खुलना चाहिए तभी शिशु का जन्म नोर्मल डिलीवरी की मदद से हो पाता है।

ऐसे में जैसे जैसे बच्चेदानी का मुँह खुलने लगता है महिला को दर्द का अहसास भी बढ़ने लगता है, लेकिन यह दर्द एक ही दम नहीं होता है बल्कि रुक रुक कर इसका अनुभव होता है। पहली स्टेज में बच्चेदानी का मुँह जीरो से 3 सेंटीमीटर तक खुल सकता है, उसके बाद यह 4 से 7 या 8 सेंटीमीटर तक खुल सकता है, और उसके बाद यह आठ से 10 सेंटीमीटर तक खुल सकता है। और जैसे जैसे बच्चेदानी का मुँह खुलता जाता है वैसे वैसे महिला को प्रसव पीड़ा बढ़ती है और बच्चेदानी का पूरा मुँह खुलते ही शिशु का जन्म हो जाता है, और ऐसा भी कोई जरुरी नहीं होता है की नोर्मल डिलीवरी के दौरान टाँके नहीं लगती है बल्कि कुछ महिलाएं जो सामान्य प्रसव से शिशु को जन्म देती है उन्हें भी टाँके लग सकते हैं।

नोर्मल डिलीवरी के लक्षण

  • शिशु का भार नीचे की तरफ महसूस होना और सीने व् पेट में हल्कापन महसूस होना।
  • गर्भाशय में संकुचन का अधिक होना।
  • प्राइवेट पार्ट से तरल पदार्थ यानी एमनियोटिक फ्लूड का निकलना।
  • पेट, कमर, पेट के निचले हिस्से में रुक रुक कर दर्द का अनुभव होना या मांसपेशियों में खिंचाव अनुभव होना।
  • प्राइवेट पार्ट से तरल पदार्थ के साथ खून की बूंदे महसूस होना।
  • पेट से जुडी समस्या जैसे की कब्ज़ आदि का अधिक होना।
  • बहुत अधिक नींद आना लेकिन बेचैनी का अनुभव होने के कारण सोने का मन न करना।
  • जोड़ो में दर्द व् खिंचाव का अनुभव होना।

तो यह है नोर्मल डिलीवरी कैसे होती है इससे जुडी कुछ बातें, ऐसे में नोर्मल डिलीवरी के लिए महिला को अपनी अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि डिलीवरी के दौरान किसी भी तरह की परेशानी न आये। साथ ही यदि महिला की गर्भाशय की सतह पतली होती है तो महिला को अपनी दुगुनी केयर करनी चाहिए, क्योंकि यदि गर्भाशय की सतह कमजोर होती है तो इसके कारण समय पूर्व प्रसव जैसी परेशानी का सामना महिला को करना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी में कच्चा आम खाना चाहिए या नहीं?

प्रेगनेंसी में खान पान

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान खान पान को लेकर बहुत परेशानी रहती है, की कौन सा आहार महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए फायदेमंद है और कौन सी चीजों के सेवन से उन्हें परहेज करना चाहिए। साथ ही गर्भवती महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण जीभ के स्वाद में भी परिवर्तन आता है। जिसकी वजह से कुछ महिलाओं का मीठा खाने की इच्छा होती है, तो कुछ महिलाओं को खट्टा खाने की इच्छा होती है, साथ ही कुछ महिलाएं अपनी पसंदीदा खाने की चीजों को देखना भी पसंद नहीं करती है। लेकिन खान पान के प्रति सतर्क रहने को लेकर हर खाने की चीज को लेकर महिला के मन में सवाल होता है की जिस भी चीज का वो सेवन करना चाहती है वह प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद है या नुकसानदायक।

गर्भवती महिला को कच्चा आम खाना चाहिए या नहीं?

आम को फलों का राजा कहा जाता है, और खट्टा यानी की कच्चा आम बहुत सी गर्भवती महिलाओं की पहली पसंद होता है। क्योंकि इसके सेवन से उनकी जीभ का स्वाद बढ़ने में मदद मिलती है। लेकिन कई महिलाएं इस बात को लेकर परेशान रहती है की प्रेगनेंसी में कच्चा आम खाना चाहिए या नहीं? तो इसका जवाब है हाँ प्रेगनेंसी के दौरान कच्चे आम का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है। थोड़ा बहुत कच्चा सेवन करने के साथ महिला इसकी सब्ज़ी बनाकर, कच्चे आम का रस बनाकर भी इसके स्वाद का आनंद उठा सकती है। लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की जरुरत से जयादा भी इसका सेवन न करें क्योंकि पर्याप्त मात्रा में सेवन की गई चीज का जितना फायदा मिलता है उतना ही आवश्यकता से अधिक मात्रा में किसी भी चीज का सेवन करने से नुकसान भी हो सकता है।

प्रेगनेंसी में कच्चा आम खाने के फायदे

प्रेग्नेंट महिला यदि प्रेगनेंसी में पर्याप्त मात्रा में कच्चे आम का सेवन करती है तो इसके कारण गर्भवती महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं। जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फिट रखने में मदद करते हैं। तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में कच्चे आम का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

इम्युनिटी सिस्टम

इम्युनिटी सिस्टम का मजबूत होना गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान फ्लू, इन्फेक्शन जैसी अन्य बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करता है। ऐसे में कच्चे आम का सेवन करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद करता है।

पाचन तंत्र

कच्चे आम का सेवन करने से बॉडी में फाइबर की मात्रा को भरपूर बनाएं रखने में मदद मिलती है जिससे पाचन क्रिया को मजबूत रखने में मदद मिलती है। और प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को कब्ज़, एसिडिटी, सीने में जलन, पेट फूलना जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही इसके कारण गर्भवती महिलाओं को भूख की कमी जैसी परेशानी का सामना करने से भी बचे रहने में मदद मिलती है।

मॉर्निंग सिकनेस

बहुत सी गर्भवती महिलएं प्रेगनेंसी के दौरान मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से परेशान रहती हैं। और कच्चे आम का सेवन करने से गर्भवती महिला को इस समस्या से निजात पाने में भी मदद मिलता है, और सुबह उठने पर फ्रैश महसूस होता है।

ब्लड के लिए है फायदेमंद

कच्चे आम का सेवन करने से खून को साफ़ करने और ब्लड से जुडी बीमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है, क्योंकि इसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है। साथ ही कच्चे आम का सेवन करने से नए ब्लड सेल्स का भी निर्माण होता है, जिससे गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

एनर्जी

गर्भवती महिला के स्वस्थ रहने के लिए बॉडी में एनर्जी का भरपूर होना बहुत जरुरी होता है, और कच्चे आम का सेवन करने से बॉडी में एनर्जी की मात्रा को भरपूर बनाएं रखने में मदद मिलती है। इसीलिए गर्भवती महिला को एनर्जी के लिए कच्चे आम का सेवन, कच्चे आम का रस, घर में बनी ताज़ी चटनी आदि का सेवन जरूर करना चाहिए।

कैल्शियम

एक्सपर्ट्स के अनुसार प्रेगनेंसी के दौरान और डिलीवरी के बाद बहुत सी महिलाएं कैल्शियम की कमी के कारण कमजोरी की समस्या से ग्रस्त रहती है। लेकिन कच्चे आम में मौजूद विटामिन सी बॉडी में कैल्शियम की मात्रा की कमी नहीं होने देता है, जिससे गर्भवती महला की हड्डियों की मजबूती बने रहने के साथ कमजोरी जैसी समस्या से भी बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही कैल्शियम का भरपूर मात्रा में गर्भवती महिला के शरीर में होना गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास के लिए भी फायदेमंद होता है।

शुगर

जो गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान शुगर की समस्या से जूझ रही होती है, उनके लिए भी कच्चे आम का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि कच्चे आम का सेवन करने से बॉडी में ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है, जिसके कारण शुगर के कारण होने वाली परेशानी से बचाव मिलने में फायदा होता है।

गर्मियों में गर्भवती महिला के लिए है फायदेमंद

यदि गर्मी के मौसम के दौरान आप गर्भवती होती है, तो कच्चे आम का सेवन प्रेग्नेंट महिला को गर्मी में होने वाली परेशानियों से भी बचाने में मदद करता है। इसके सेवन से लू से बचने, गर्मी में आलस, थकान से बचने में मदद मिलती है। साथ ही महिला कच्चे आम का रस भी पी सकती है और इससे गर्भवती महिला को हाइड्रेटेड रहने में मदद मिलती है जिससे गर्भवती महिला को बॉडी में पानी की कमी के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

कच्चे आम का सेवन करने से होने वाले नुकसान

यदि गर्भवती महिला बहुत अधिक इसका सेवन करती है तो इसके कारण गले में इन्फेक्शन, पेट में दर्द जैसी परेशानी हो सकती है। साथ ही कच्चे आम के सेवन से पहले इसे अच्छे से धो लेना चाहिए ताकि इन्फेक्शन जैसी समस्या से बचे रहने में गर्भवती महिला को मदद मिल सके।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान कच्चे आम के सेवन से जुडी कुछ बातें ऐसे में यदि गर्भवती महिला का यदि कच्चे आम का सेवन करने का मन करे तो वह कर सकती है। साथ ही आम का सेवन मौसम के अनुसार ही करना चाहिए क्योंकि बिना मौसम के आने वाले आम कृत्रिम तरीको से पकाए जाते है जो गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने तक भूल कर भी क्या-क्या नहीं करना चाहिए

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने तक भूल कर भी क्या-क्या नहीं करना चाहिए:-

प्रेगनेंसी में क्या न करें : माना जाता हैं की औरत का दूसरा जन्म तब होता हैं जब वो माँ बनती हैं| क्योंकि माँ बनना भी किसी जंग से कम नहीं हैं| और देखा जाएँ तो इस दुनिया की सबसे अनमोल ख़ुशी तभी मिलती हैं, जब कोई महिला माँ बनती हैं| बच्चे के जन्म के सपने माँ तभी से बुनने शुरू कर देती हैं, जब शिशु गर्भ में आता हैं| और पुरे नौ महीने महिला नए-नए अनुभवो से गुजरती हैं| इस दौरान महिला के शरीर में भी कई बदलाव आते हैं| जैसे की वजन बढ़ना, त्वचा में फ़र्क़ आना, उलटी आना, शरीर में दर्द जैसी कई परेशानियों का सामना भी महिला को करना पड़ता हैं|

जैसे ही महिला को पता चलता हैं की वो माँ बनने वाली हैं, वैसे ही महिला को अपना बहुत ध्यान रखना चाहिए| क्योंकि इस समय पर महिला अकेली नहीं होती हैं| बल्कि एक नवजात शिशु भी महिला के गर्भ में पल रहा होता हैं| और जैसे ही गर्भ में शिशु हरकते करनी शुरू करता हैं, वैसे ही आपको ऐसा अनुभव होता हैं, जैसे की आपके शरीर में कोई हलचल हो रही होती हैं| महिला को गर्भावस्था के समय में परेशानियों के साथ कुछ ऐसे अनुभव भी होते हैं जो उन्हें सारी जिंदगी याद रहते हैं| और उनके यादगार पलों में शामिल हो जाते हैं|प्रेगनेंसी में क्या न करें

गर्भावस्था के तीन ट्राइमेस्टर होते हैं, जिनमे महिला को अपना बहुत ध्यान रखना पड़ता हैं| जिसमे से पहला ट्राइमेस्टर बहुत अहम होता हैं| क्योंकि इस समय में महिला के शुरूआती दिनों में समस्या बढ़ने का खतरा ज्यादा होता हैं| ऐसे में महिला को अपना बहुत ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता होती हैं| इस समय पर खान-पान से लेकर आपको अपनी दिनचर्या में भी बहुत से बदलाव लाने पड़ते हैं| जैसे की पेट के बल नहीं लेटना, ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी चाहिए, पेट के बल होकर व्यायाम नहीं करना चाहिए, आदि|

प्रेगनेंसी में क्या न करें:आइये आज हम आपको बताते हैं की महिला को गर्भावस्था के समय में किन-किन बातो का ध्यान रखना चाहिए| जिससे की महिला और उसके होने वाले बच्चे पर कोई खतरा न आ सकें| कहा जाता हैं की स्वस्थ माँ के गर्भ में ही स्वस्थ बच्चा निवास करता हैं| इसीलिए आपको इन सब बातो का ध्यान रखना चाहिए| जिससे की आपका बच्चा स्वस्थ रह सकें, और आइये जानते हैं की महिला को पहले तीन महीनो में किन-किन बातों पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए|

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने तक भूल कर भी क्या-क्या नहीं करना चाहिए:-

भारी सामान न उठायें;-

प्रेगनेंसी का वैसे सारा समय ही बहुत ध्यान रखने वाला होता हैं, परंतु प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने गलती से भी भारी सामान को नहीं उठाना चाहिए| क्योंकि ऐसा करने से ब्लीडिंग का खतरा होता हैं| भारी सामान उठाने से सबसे ज्यादा दबाव पेट पर पड़ता हैं| जिसके कारण पेट में दर्द रहने की भी समस्या खड़ी हो सकती हैं|

गरम चीजो का सेवन न करें:-

गर्भावस्था के समय में गरम पदार्थो का सेवन नहीं करना चाहिए| गरम पदार्थ जिस प्रकार ज्यादा ड्राई फ्रूट्स का सेवन नहीं करना चाहिए| क्योंकि ऐसा करने से कई बार योनि में से रक्त आने की समस्या उत्त्पन्न हो जाती हैं| इसीलिए आपको खास कर पहले तीन महीने इन चीजो से परहेज रखना चाहिए|

पपीते का सेवन न करें:-

पपीते का सेवन करने से माना जाता हैं जी गर्भ गिरने की सम्भावना बढ़ जाती हैं| जिसके कारण कई बार गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता हैं| इसीलिए आपको पपीते का सेवन भी नहीं करना चाहिए| क्योंकि इसमें विटामिन-सी की मात्रा अधिक होती हैं| जो गर्भ को गिरा सकती हैं|

विटामिन-सी का ज्यादा उपयोग न करें:-

गर्भावस्था के पहले तीन महीने में ज्यादा मात्रा में उपस्थित होने वाले विटामिन-सी वाले पदार्थो का सेवन नहीं करना चाहिए| जैसे की शिमला मिर्च, ब्रोकली, पपीता, स्ट्रॉबेरी, गोभी आदि के सेवन से परहेज करना चाहिए| क्योंकि इनकी वजह से गर्भ गिरने का खतरा बढ़ जाता हैं|

अनानास का सेवन न करें:-

अनानास का भी प्रयोग गर्भावस्था के पहले तीन महीने हो सकें तो नहीं करना चाहिए| क्योंकि इसमें भी विटामिन-सी की मात्रा अधिक होती हैं, और हो सकें तो कीवी, आम, आदि फलो से परहेज करना चाहिए|
क्योंकि इससे गर्भ गिरने के खतरा बढ़ जाता हैं|

ज्यादा मसालेदार भोजन का सेवन न करें:-

ज्यादा मिर्च मसाले व् ज्यादा तले हुए भोजन से परहेज करना चाहिए| क्योकि इससे पेट में दर्द जैसी समस्या उत्तपन हो सकती हैं| जो की गर्भावस्था के पुरे समय के लिए ही अच्छी नहीं होती हैं| और इसी के कारण आपको परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता हैं| इसीलिए आपको ऐसा नहीं करना चाहिए|

ज्यादा भागदौड़ व् व्यायाम न करें:-

गर्भावस्था के समय में आपको ज्यादा भाग-दौड़ व् व्यायाम नहीं करना चाहिए| क्योंकि ज्यादा व्यायाम व् भागदौड़ करने से आपको शरीर में दर्द व् थकावट जैसी समस्या हो जाती हैं| जिससे कई बार महिलाओ को परेशानी का सामना करना पड़ सकता हैं| कई बार व्यायाम करने से पेट पर भी दबाव पड़ता हैं जो की गर्भावस्था के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता हैं|

कटहल का प्रयोग न करें:-

कटहल का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसका उपयोग करने से भी गर्भ गिरने का खतरा बढ़ जाता हैं| क्योंकि इसमें भी विटामिन-सी की मात्रा अधिक होती हैं| इसीलिए हो सकें तो अजवाइन का सेवन नहीं करना चाहिए|

इलायची का सेवन न करें:-

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में इलायची का सेवन भी नहीं करना चाहिए| क्योंकि इलायची का सेवन करने से भी गर्भ गिरने का खतरा बढ़ जाता हैं| इलायची का सेवन चाय में भी न ही करे तो अच्छा रहेगा|

अजवाइन का उपयोग न करें:-

अजवाइन का उपयोग भी गर्भावस्था के समय में ज्यादा नहीं करना चाहिए| क्योंकि अजवाइन की तासीर गरम होती हैं, और गरम चीजो का सेवन पहले तीन महीने प्रेगनेंसी के समस्या खड़ी कर सकते हैं|

बिना डॉक्टर के परामर्श के दवाई का सेवन करें:-

कई बार गर्भावस्था के समय में दर्द की समस्या होती रहती हैं| ऐसे में कई महिलाये दवाईयो का सेवन करती हैं| पर ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि दर्द की दवाईयो का ज्यादा सेवन कई बार गर्भावस्था में आपको बहुत साडी परेशानियो का सामना करना पड़ सकता हैं| इसीलिए हो सकें तो ऐसा नहीं करना चाहिए|

डॉक्टर की सलाह के बिना न करें सम्भोग:-

सम्भोग पहले तीन महीने में कई बार गलत साबित हो सकता हैं| और जो महिलाएं काफी कठिनाई के बाद माँ बनने का अनुभव लेती हैं| उन्हें तो इस चीज के लिए ज्यादा ध्यान देने की जरुरत होती हैं| इसीलिए इस मामले में डॉक्टर का परामर्श जरूर लेना चाहिए|

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मस्से से निजात पाने के उपाय

मस्सा जिन्हे warts भी कहा जाता है एक तरह का दाना होता है जो हमारी त्वचा में उभर कर फूल जाता है. सामान्य तौर पर ये काले या भूरे रंग का होता है लेकिन कई बार ये सफ़ेद रंग के भी देखने को मिलते है. डॉक्टरों की माने तो ये एक प्रकार का चर्म रोग होता है जो अक्सर सरसों या मूंग से लेकर बेर तक के आकार का होता है. ये अधिकतर व्यक्ति के हाथ व पैर पर देखने को मिलते है लेकिन ये शरीर के किसी भी भाग में हो सकते है.

मस्से विषाणु संक्रमण के कारण उत्पन्न होंते है जिनका कारण विषाणु की ‘मानव पेपिल्लोमैविरस’ प्रजाति होती है. मस्से के लगभग 10 से 12 प्रकार होते है जो ग्रसित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी उत्पन्न हो सकते है. ऐसे तो उत्पन्न होने के कुछ महीने बाद ये स्वयं ही चले जाते है लेकिन कई बार ये कई वर्षो तक ऐसे ही बने रहते है और जाने के बाद भी वापस आ जाते है. ऐसे में उनसे छुटकारा पाना और भी जरुरी हो जाता है. मस्से हमारे शरीर के उन हिस्सों में प्रवेश करते है जहां की त्वचा कटी फटी या डैमेज होती है.

वैसे तो इनका होने कोई भयंकर समस्या नही है लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो ये एक गम्भीर समस्या बन सकती है. यदि ये आपकी त्वचा में अचानक उभर आएं तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए. मस्से ज्यादातर 20 वर्ष की आयु के आस पास उभरते है लेकिन कई बार 30 से 40 वर्ष की आयु में भी इनकी मौजूदगी देखी जा सकती है. किशोरावस्था और गर्भावस्था के दौरान ये मस्से गहरे काले रंग के हो जाते है.

कुछ लोगो के मस्से जन्म से ही होते है लेकिन कुछ के 30 की आयु और जन्म के बाद निकलते है, जो उनके लिए खतरनाक है. क्योकि 30 की आयु और जन्म के बाद निकलने वाले मस्सो से कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है. यदि आपके साथ भी यही समस्या है और मस्सो में से खून निकलता है या उनमे खुजली होती है तो समय व्यर्थ किये बिना तुरंत डॉक्टर से मिलें.

मस्से को कभी भी काटना या फोड़ना नहीं चाहिए इससे वायरस के शरीर के अन्य हिस्सो में फैलने का खतरा बना रहता है. यदि आप भी इस समस्या से ग्रसित है और इससे छुटकारा पाना चाहते है या इससे छुटकारा पाने के लिए कई तरह के उपाय अपना चुके है तो परेशान न हो. क्योंकि आज हम आपके लिए कुछ ऐसे घरेलू उपाय लेकर आएं है जिनकी मदद से आपकी ये समस्या हमेशा हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी. आईये जानते है मस्से से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय !

मस्से हटाने के लिए घरेलू नुस्खे :-

ऐसे तो घर पर मस्सा हटाना सुरक्षित नहीं है लेकिन आप निम्न विधियों का प्रयोग करके मस्से हो हटा सकते है.

1. सेब का सिरका :

  • इसके लिए आपको सेब के सिरके, रुई और बैंडेज की आवश्यकता होगी.
  • प्रयोग के लिए सबसे पहले सेब के सिरके में रुई में डुबोकर उसे मस्से पर लगायें.
  • उसके बाद उसपर बैंडेज लगा लें.
  • पूरी रात भर इसे ऐसे ही रहने दे. अगली सुबह हटा दें.
  • रोज़ाना रात इसका इस्तेमाल करें.

2. टी ट्री आयल :

  • सबसे पहले टी ट्री आयल की कुछ बुँदे और पानी की आवश्यकता होगी.
  • प्रयोग के लिए एसेंशियल आयल को पानी में मिलाकर प्रभावित क्षेत्र पर लगायें.
  • अब इसे सूखने दें.
  • दिन में 5 से 6 बार और रात को सोते समय इसका प्रयोग करें.

3. Oregano आयल :

  • इस उपाय के लिएय 1 चम्मच oregano आयल और 8 चम्मच ओलिव आयल या नारियल तेल की आवश्यकता होगी.
  • सबसे पहले oregano आयल को दोनों में से किसी एक तेल के साथ मिला लें और कांच की किसी छोटी बोतल में रख लें.
  • रोजाना इस तेल की कुछ बूंदों को अपने मस्से पर लगायें और ऐसे ही लगे रहने दे.
  • आप चाहे तो इसे duct tape से भी ढक सकते है.
  • दिन में 4 से 6 बार इस उपाय का प्रयोग करें. फ़ायदा मिलेगा.

4. Duct Tape की मदद से हटाएं :

  • जी हां, घरेलू तरीकों से मस्से से छुटकारा पाने के लिए डॉक्टर भी इसकी सलाह देते है. इसके लिए duct tape और pumic स्टोन की आवश्यकता होगी.
  • सबसे पहले duct tape की एक पट्टी को मस्से के ऊपर लगाएं. और तब तक लगे रहने दे जब तक वो खुद न हट जाए.
  • उसके बाद प्रभावित क्षेत्र को pumic स्टोन से स्क्रब करें.
  • एक ही प्रयोग से आपका मस्सा पूरी तरह हट जाएगा.

5. Beetle Juice :

  • इसके लिए Beetle juice और duct tape की आवश्यकता होगी.
  • सबसे पहले Beetle juice की कुछ बुँदे मस्से पर डालें और उसे duct tape से ढक लें.
  • 12 घंटे तक लगायें रखे.
  • वैसे तो 12 घंटे में मस्सा या उसका कुछ भाग साफ़ ही हो जाएगा लेकिन यदि ऐसा न हो तो 12 घंटे बाद आप इसका इस्तेमाल दोबारा कर सकते है.

6. केले का छिलका :

  • इस उपाय को करने के लिए आपको केले के छिलके की आवश्यकता होगी.
  • केले के छिलके को मस्से पर कुछ मिनट तक रगड़ते रहे.
  • आप चाहे तो सीधे केले के छिलके को मस्से पर रखकर और उस पर बैंडेज रख सकते है.
  • रोजाना इसका इस्तेमाल करें. इसमें थोडा समय लग सकता है लेकिन आपको धैर्य रखना होगा.

7. नारियल तेल :

  • इसके लिए वर्जिन नारियल तेल की आवश्यकता होगी.
  • सबसे पहले नारियल तेल को थोडा सा गर्म कर लें और इसे अपने मस्से पर लगायें.
  • कुछ देर तक इस तेल से मसाज करते रहे जब तक त्वचा पूरा तेल न सोख ले.
  • मसाज करने के बाद साफ़ पानी से धो लें.
  • दिन में दो से तीन बार इसका प्रयोग करें. फायदा होगा.

8. लहसुन :

शायद आपको विश्वास न हो लेकिन लहसुन भी आपकी इस समस्या को दूर करने में मदद कर सकता है.

  • उपयोग के लिए लहसुन की कुछ कलियाँ ले.
  • सबसे पहले लहसुन की कलियों को छीलकर उन्हें मसल लें.
  • अब उस पेस्ट को प्रभावित क्षेत्र पर रगड़ें.
  • आप चाहे तो रोजाना इसके सेवन से भी समस्या से छुटकारा पा सकते है.
  • ऊपर वाले तरीके का तब तक इस्तेमाल करते रहे जब तक समस्या पूरी तरह ठीक न हो जाये.

9. कास्टर आयल :

  • थोडा सा कास्टर आयल लें. और उसे कुछ मिनट तक प्रभावित त्वचा पर रगड़ें.
  • कुछ देर ऐसे ही लगे रहने दें.
  • दिन में दो से तीन बार इसका इस्तेमाल करें. आपकी समस्या छू मन्तर हो जाएगी.

10. Frankincense आयल :

  • इस उपाय को करने के लिए आपको Frankincense oil और बैंडेज की आवश्यकता होगी.
  • सबसे पहले मस्से वाले हिस्से को अच्छे से साफ़ कर लें.
  • अब उस पर एसेंशियल आयल की कुछ बुँदे डालें.
  • इसके बाद उस हिस्से को बैंडेज से ढक दें.
  • तेल के हर बार प्रयोग करने पर बैंडेज बदलें.
  • हफ्ते में एक बार इसे करें. फायदा मिलेगा.

11. Thuja आयल :

  • मस्से की समस्या के लिए ये एक लाभकारी होम्योपैथिक ट्रीटमेंट है. इसके लिए Thuja आयल और band-aid की आवश्यकता होगी.
  • सबसे पहले Thuja आयल को मस्से पर लगायें. और उसपर band-aid लगा दें.
  • अगले दिन band-aid हटा दें और फिर से तेल लगायें. इस बार मस्से को फ्रेश band-aid से ढकें.
  • जब तक समस्या खत्म न हो जाये इसका इस्तेमाल करते रहे.

12. बेकिंग सोडा :

  • इसके लिए 3-4 चम्मच बेकिंग सोडा और छोटे से बाउल में पानी लें.
  • सबसे पहले बेकिंग सोडा को पानी में डाल दें.
  • अब उसमे प्रभावित हाथ या पैर डुबोएं.
  • 30 मिनट तक ऐसे ही डुबोएं रखें.
  • उसके बाद हाथ या पैर निकाल लें.
  • अपने हाथ या पैर को सुखाएं नहीं बल्कि ऐसे ही रहने दे.
  • जब तक मस्सा पूरा तरह हट नहीं जाता इस उपाय का इस्तेमाल करते रहे.

13. हल्दी :

  • इस उपाय के लिए हल्दी पाउडर और पानी की आवश्यकता होगी.
  • सबसे पहले पानी और हल्दी को मिलाकर एक पेस्ट बना लें.
  • अब इसे मस्से वाले स्थान पर लगायें.
  • 30 मिनट तक लगे रहने दे.
  • उसके बाद साफ़ पानी से धो लें.
  • हल्दी के रंग से छुटकारा पाने के लिए आप उस जगह नींबू भी रगड़ सकते है.
  • दिन में दो से तीन बार इसका इस्तेमाल करें.

14. नेल पोलिश :

  • इस उपाय को करने के लिए नेल पोलिश और नेल पोलिश रिमोवर की आवश्यकता होगी.
  • सबसे पहले नेल पोलिश की एक मोटी परत अपने मस्से पर लगा लें. और उसके सूखने का इंतजार करें.
  • कुछ घंटो बाद nail पोलिश रिमोवर की मदद से उस नेल पोलिश को हटा दें.
  • कुछ-कुछ घंटे के अंतराल में इसका प्रयोग करें.

15. आलू :

  • इसके उपाय के लिए कच्चे आलू की आवश्यकता होगी.
  • सबसे पहले कच्चे आलू को छिल लें.
  • उसके बाद उसके टुकड़े को मस्से वाले हिस्से पर रगड़े.
  • रोजाना दिन में इसका इस्तेमाल करें. फायदा मिलेगा.

पालक खाना कितना फायदेमंद है गर्भवती महिला के लिए

हरी सब्जियों का सेवन गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इनमे आयरन, फोलिक एसिड, फोलेट, विटामिन फाइबर, एंटी ऑक्सीडेंट व् अन्य सभी मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होते हैं। हरी सब्जियों में खासकर पालक का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि यह प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रखने और गर्भ में शिशु के मानसिक व् शारीरिक विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद करती है। पालक का सेवन गर्भवती महिला सब्ज़ी, सूप, जूस आदि के रूप में कर सकती है।

गर्भवती महिला को क्यों करना चाहिए पालक का सेवन?

गर्भवस्था के दौरान महिला को उस आहार को अपनी डाइट में भरपूर मात्रा में शामिल करने की सलाह दी जाती है जिसमे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद हो और जो गर्भवती महिला और भ्रूण दोनों के लिए फायदेमंद हो। और पालक पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ गर्भवती महिला और भ्रूण के लिए फायदेमंद होती है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पालक का सेवन करने की सलाह दी जाती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की पालक का सेवन करने से गर्भवती महिला और शिशु को कौन से फायदे मिलते हैं।

आयरन

आयरन की कमी के कारण गर्भवती महिला को एनीमिया, थकावट व् कमजोरी, डिलीवरी के दौरान परेशानी, शिशु के विकास में कमी जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बॉडी में हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करने के लिए गर्भवती महिला को पालक का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करना चाहिए क्योंकि पालक में आयरन भरपूर मात्रा में होता है। जो गर्भवती महिला को इन सभी परेशानियों से बचाने में मदद करता है।

कैल्शियम

पालक में कैल्शियम की मात्रा भी भरपूर होती है जो गर्भवती महिला की हड्डियों की मजबूती को बढ़ाने में मदद करती है। जिससे गर्भवती महिला को एक्टिव रहने, थकान व् कमजोरी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा गर्भवती महिला की बॉडी में कैल्शियम का भरपूर मात्रा में होना गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद करता है। साथ ही कैल्शियम की मदद से गर्भवती महिला के दांतों को स्वस्थ रहने के साथ शिशु के दांतों के विकास को भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।

फाइबर

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण और वजन बढ़ने के कारण गर्भवती महिला की पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है। जिसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कब्ज़ जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में पालक का सेवन करना गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि पालक में मौजूद फाइबर गर्भवती महिला की पाचन क्रिया को सुचारु रूप से काम करवाने के साथ कब्ज़ जैसी परेशानी से निजात दिलाने में भी मदद करता है।

विटामिन सी

गर्भवस्था के दौरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव के कारण महिला का इम्यून सिस्टम भी कमजोर पड़ सकता है। जिसके कारण गर्भवती महिला और भ्रूण को संक्रमण होने का खतरा रहता है। पालक में मौजूद विटामिन सी जो की एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट हैं गर्भवती महिला के इम्यून सिस्टम की मजबूती को बढ़ाने में मदद करता है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को इम्यून सिस्टम की मजबूती के लिए प्रेगनेंसी के दौरान पालक का सेवन जरूर करना चाहिए।

फोलिक एसिड

गर्भपात से बचने के लिए, समय पूर्व प्रसव से बचाव के लिए, ब्लड फ्लो को बॉडी में बेहतर तरीके से होने के लिए गर्भवती महिला के शरीर में फोलिक एसिड की मात्रा का सही होना बहुत जरुरी होता है। और पालक का सेवन करने से गर्भवती महिला को फोलिक एसिड भरपूर मात्रा में मिलता है जिससे गर्भवती महिला को इन सभी परेशानियों से बचाव करने में मदद मिलती है।

फोलेट

पालक में आयरन व् फोलिक एसिड के साथ फोलेट भी भरपूर मात्रा में विद्यमान होता है। और फोलेट का भ्रूण तक भरपूर मात्रा में पहुंचना शिशु के सम्पूर्ण विकास में मदद करने के साथ शिशु को जन्म के समय होने वाली बीमारियों से सुरक्षित रखने में भी मदद करता है।

नाइट्रेट

बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड प्रेशर की समस्या से भी परेशान हो सकती है। और गर्भवती महिला को ब्लड प्रेशर की परेशानी होना महिला के साथ शिशु पर भी बुरा असर डाल सकती है। ऐसे में इस समस्या से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को पालक को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। क्योंकि पालक में मौजूद नाइट्रेट गर्भवती महिला के ब्लड प्रेशर को कण्ट्रोल करने में मदद करता है।

शिशु का विकास

गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए जरुरी सभी पोषक तत्व पालक में मौजूद होते हैं जिससे शिशु के अंगो का बेहतर विकास होने के साथ मस्तिष्क के बेहतर विकास को होने में भी मदद मिलती है। ऐसे में गर्भवती महिला को अपने स्वास्थ्य को बेहतर रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए पालक को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को पालक का सेवन मिलते हैं। लेकिन पालक का सेवन करते समय एक बात का खास ध्यान रखें की पालक ताज़ी होनी चाहिए, पालक को अच्छे से धोने और साफ़ करने के बाद ही खाने में प्रयोग में लाना चाहिए, ताकि इसके कारण महिला को किसी तरह की कोई परेशानी न हो।

पीरियड के कितने दिन बाद गर्भ ठहरता है?

गर्भधारण के लिए कब संबंध बनाएं, पीरियड के कितने दिन बाद गर्भ ठहरता है, कब संबंध बनाने से प्रेगनेंसी नहीं होती, मासिक धर्म के कितने दिन बाद प्रेग्नेंसी होती है, प्रेग्नेंसी का सही समय, गर्भधारण करने का उचित समय, ओवुलेशन पीरियड कब होता है?


माँ बनना हर महिला का सपना होता है लेकिन कई बार लगातार कोशिशें करने के बाद भी गर्भधारण नहीं हो पाता है। जिसके कारण दम्पत्ति बहुत परेशान रहते हैं। शायद आप नहीं जानते, लेकिन गर्भधारण करना या गर्भधारण नहीं करना ये दंपत्ति के संबंध बनाने के उचित समय पर निर्भर करता है। क्योंकि पुरे महीने में एक समय होता है जब गर्भधारण के चांसेस सबसे ज्यादा होते हैं। आज हम आपको कुछ टिप्स दे रहे हैं जिससे आपको समझ आ जाएगा की कब संबंध बनाने से प्रेग्नेंसी होगी और कब संबंध बनाने से प्रेग्नेंसी नहीं होगी?

अगर आप प्रेग्नेंट होना चाहती है तो आपको पता होना चाहिए की पीरियड के कितने दिन बाद बनाने चाहिए जिससे गर्भधारण हो सके।

अंडे से स्पर्म का मिलना

गर्भधारण के लिए पुरुष के स्पर्म का महिला के अंडे से मिलना बहुत जरुरी होता है। लेकिन गर्भधारण तभी होता है जब अंडा पूरी तरह से फर्टाइल हो यानी निषेचन के लिए पूरी तरह परिपक्व हो। बस आपको ये जानकारी रखनी है की अंडा फर्टाइल कब होता है ?

इसके लिए आपको अपना मासिक चक्र इस तरह समझना होगा। मान लीजिये आपके पीरियड्स एक तारीख को आते हैं और अगर आप 10 तारीख के बीच के समय तक संबंध बनाती हैं तो प्रेगनेंसी नहीं होगी। जबकि 10 तारीख से लेकर 20 तारीख तक प्रेगनेंसी होने की संभावनाएं 80 परसेंट तक होती है। और 20 तारीख के बाद माहवारी आने तक भी प्रेग्नेंसी की कोई संभावनाएं नहीं होती। तो अगर आपको बच्चा चाहिए तो 10 से 20 तारीख के बीच ही संबंध बनाएं।

जानिए इसके क्या कारण होते हैं?

जैसा की हमने आपको पहले बताया, गर्भधारण होने का एक निश्चित समय होता है और निषेचन के लिए अंडा फर्टाइल होना जरुरी होता है। 30 दिन के पुरे महीने में ये समय केवल चार दिन के लिए ही होता है। लेकिन यहाँ आपको 10 दिनों का समय इसीलिए बताया गया है क्यूंकि कई महिलाओं के पीरियड्स आगे पीछे हो जाते हैं किन्ही का 2-3 दिन आगे किन्ही का 2-3 दिन पीछे हो जाता है। और सभी का मासिक चक्र एक जैसा नहीं होता है।

ओवुलेशन पीरियड में बनाएं संबंध

अंडाशय में परिपक्व अंडा

पीरियड्स शुरू होने के 14 वें दिन से 18 वें दिन के बीच को ओवुलेशन पीरियड कहा जाता है। इसको हिंदी में स्त्री बीज जनन कहते हैं। इस दौरान महिला का अंडा अंडाशय से बाहर आकर शुक्राणु से मिलने के लिए इंतजार करता है और गर्भधारण के लिए पूरी तरह से तैयार होता है। अगर इन चार दिनों में शुक्राणु का अंडे के साथ मिलन हो जाए तो गर्भधारण हो जाता है। और ये सबसे उचित समय होता है किसी भी महिला के लिए गर्भधारण करने का।

अब आप समझ गयी होंगी की अगर आपको बच्चा चाहिए तो पीरियड शुरू होने के बाद के 10 दिन से 20 दिन के बीच जितना ज्यादा हो सके संबंध बनाएं। और अगर बच्चा नहीं चाहिए तो इन दस दिनों को अवॉयड करें। लेकिन इस बात का जरूर ध्यान रखें की अगर आप प्रेग्नेंसी नहीं चाहती हैं तो हमेशा सुरक्षित तरीका अपनाएं या माहवारी के बाद उचित समय का ध्यान रखें। आशा है, हमारे द्वारा दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट होंगी।

विडिओ पीरियड्स के कितने दिन बाद गर्भ ठहरता है?

बढ़ती उम्र में महिलाओं की दाढ़ी मूछ और छाती के बाल क्यों उग जाते हैं?

महिलाओं को दाढ़ी मूछें, महिलाएं अपनी ख़ूबसूरती को लेकर बहुत ही सजग रहती है। और इसके लिए महिलाएं तरह तरह की क्रीम व् ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल भी करती हैं। लेकिन फिर भी कुछ कारणों की वजह से महिला की ख़ूबसूरती कम पड़ सकती है। जैसे की कुछ महिलाओं को दाढ़ी, मूछ, छाती व् पीठ पर बाल उगने लगते हैं। अब छाती व् पीठ के बाल तो छुप जाते हैं। लेकिन चेहरे पर होने वाले अधिक बाल महिला की ख़ूबसूरती को कम कर सकते हैं।

कई बार इसके कारण महिला हास्य का विषय भी बन सकती है। ऐसे में महिला का आत्मविश्वास कमजोर हो सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं की आखिर महिलाओं के साथ ऐसा क्यों होता है। और ऐसा होने का कोई एक कारण नहीं होता है। बल्कि महिलाओं को होने वाली इस समस्या के बहुत से कारण हो सकते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की महिला के चेहरे, छाती पर अनचाहे बाल होने के क्या कारण होते हैं।

हार्मोनल असंतुलन

  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यह एक हार्मोनल डिसऑर्डर होता है।
  • और यह डिसऑर्डर महिलाओं के रिप्रोडक्टिव सिस्टम को ठेस पहुंचा सकता है।
  • जिससे औरतों को भी दाढ़ी, मूछें या छाती के बाल उग आते हैं।
  • तो जिन महिलाओं को यह समस्या होती है उन्हें अनचाहे बाल की समस्या हो सकती है।

दवाइयां

  • कुछ महिलाएं किसी बिमारी से सम्बंधित दवाइयों का सेवन कर रही होती है।
  • और यह दवाइयां बॉडी में हॉर्मोनल बैलेंस को बिगाड़ सकती है।
  • जिसके कारण महिला को दाढ़ी, मूछ, छाती पर अनचाहे बाल की समस्या हो सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान आ सकती है महिलाओं को दाढ़ी मूछें

  • गर्भावस्था के दौरान भी महिला की बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो सकती है।
  • जिसके कारण महिला को बॉडी व् चेहरे पर अनचाहे बालों की समस्या हो सकती है।

मेनोपॉज़ के दौरान आ सकती है महिलाओं को दाढ़ी मूछें

  • यह एक शारीरिक अवस्था है जो महिला को चालीस या पेंतालिस की उम्र के बाद हो सकती है।
  • और इस शारीरिक अवस्था में महिला को पीरियड्स आना बंद हो जाते हैं।
  • जिससे बॉडी में हॉर्मोन का स्तर बिगड़ सकता है।
  • और महिलाओं को दाढ़ी मूछें व् चेहरे पर अनचाहे बालों की समस्या हो सकती है।

अनुवांशिक

अनुवांशिक का मतलब होता है की यदि आपके परिवार में पहले किसी को यदि यह समस्या है। तो आपको भी इस परेशानी के होने के चांस हो सकते हैं।

गलत लाइफ स्टाइल

जो महिलाएं बहुत ज्यादा व्यायाम करती हैं, गलत आदतें व् गलत दिनचर्या रखती हैं। तो इससे भी महिला के शरीर में हार्मोनल डिसऑर्डर हो सकता है। जिसके कारण महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिलाओं को दाढ़ी मूछें या छाती पर बाल उग सकते हैं। इस समस्या से बचाव के लिए आप लेज़र ट्रीटमेंट करवा सकते हैं। इसके अलावा अपने लाइफ स्टाइल को सही रखें।

क्या खाने से नोर्मल डिलीवरी होती है?

सामान्य प्रसव के लिए टिप्स, गर्भावस्था के समय गर्भवती महिला के दिमाग में बहुत सी बातें चलती रहती हैं। और जैसे जैसे प्रेगनेंसी का समय पास आता है वैसे वैसे महिला इस बात को लेकर परेशान हो सकती है। की आखिर महिला की डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन होगी। और ज्यादातर गर्भवती महिलाएं यही चाहती हैं की उनकी डिलीवरी नोर्मल हो। क्योंकि सिजेरियन की अपेक्षा नोर्मल डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी स्वस्थ होने में मदद मिलती है। साथ ही नोर्मल डिलीवरी के बाद शिशु को इन्फेक्शन जैसी समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है। अब ऐसा तो नहीं है की जैसा आप चाहती हैं वैसा हो। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान यदि आप अपने खान पान में कुछ चीजों को शामिल करती है तो इससे नोर्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ सकते हैं।

क्या खाने से नोर्मल डिलीवरी होती है

प्रेगनेंसी के दौरान खान पान का बहुत अधिक महत्व होता है। पोषक तत्वों से भरपूर आहार गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने व शिशु के बेहतर विकास में मदद करता है। साथ ही ऐसे कुछ आहार भी होते हैं जिनका सेवन यदि प्रेग्नेंट महिला करती है तो इससे नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ाने में भी मदद मिलती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाने से नोर्मल डिलीवरी होने के चांस हो सकते हैं।

सामान्य प्रसव के लिए खाएं संतरा

  • संतरे में पानी की मात्रा की अधिकता होती है जो एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रखने में मदद करती है।
  • साथ ही संतरे में मौजूद विटामिन सी गर्भवती महिला व शिशु को संक्रमण से बचाव करने के साथ स्वस्थ रहने में मदद करता है।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला और शिशु का स्वस्थ रहना ही नोर्मल डिलीवरी होने के चांस को बढ़ाता है।
  • इसके अलावा संतरे का सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु की स्किन को मुलायम व हेल्दी रहने में भी मदद मिलती है।

सामान्य प्रसव के लिए खाएं दालें व फलियां

  • गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला को दालों व फलियों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • क्योंकि इसमें प्रोटीन व फाइबर के साथ अन्य पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
  • जो कब्ज़ जैसी परेशानी से निजात दिलाने के साथ पूरी बॉडी के साथ पेल्विक एरिया की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद मिलती है।
  • जिससे नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

शकरकंद

  • शकरकंद में बीटा कैरोटीन, विटामिन ए मौजूद होता है जो प्रेग्नेंट महिला व भ्रूण के लिए एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है।
  • गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपने आहार में विटामिन ए का सेवन 40% तक बढ़ाने की आवश्यकता होती है।
  • ऐसे में शकरकंद को अपने आहार चार्ट प्रेग्नेंट क्योंकि इससे प्रेग्नेंट महिला और भ्रूण को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है जिससे नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

सामान्य प्रसव के लिए खाएं हरी सब्जियां

  • आयरन, फोलिक एसिड, प्रोटीन, कैल्शियम जैसे पोषक तत्व हरी सब्जियों में भरपूर मात्रा में शामिल होते हैं।
  • जो गर्भवती महिला व शिशु को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
  • आयरन से भरपूर हरी सब्जियां गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करती है।
  • और खून की मात्रा का गर्भवती महिला के शरीर में पर्याप्त होना नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद करता है।
  • हरी सब्जियों में पालक, ब्रोकली का जरूर गर्भवती महिला को सेवन करना चाहिए।

डेयरी प्रोडक्ट्स

  • प्रोटीन, कैल्शियम, फैट से भरपूर डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन भी नोर्मल डिलीवरी के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
  • क्योंकि इससे गर्भवती महिला व भ्रूण की हड्डियों व मांसपेशियों को मजबूत होने में मदद मिलती है।
  • जिससे नोर्मल डिलीवरी होने के चांस में भी बढ़ सकते हैं।
  • इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को दूध, दही, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

लीन मीट

  • आयरन की मात्रा लीन मीट में भरपूर होती है।
  • जो प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करती है।
  • और गर्भवती महिला के शरीर में ब्लड की मात्रा का पर्याप्त होना नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद करती है।

सामान्य प्रसव के लिए खाएं केला

  • केले का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने व थकान को दूर करने में मदद मिलती है।
  • और प्रेग्नेंट महिला का ऊर्जा से भरपूर रहना और एक्टिव रहना नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद करता है।

अंडे

  • प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत अंडे होते हैं।
  • अंडे गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ शिशु के बेहतर शारीरिक व मानसिक विकास में भी मदद करते है।
  • अंडे प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत होने के कारण मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करते हैं।
  • जिससे डिलीवरी के दौरान महिला को आसानी होती है और नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ते हैं।

ओट्स

  • ओट्स कार्बोहाइड्रेट का बेहतरीन स्त्रोत होने के कारण प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करते हैं।
  • साथ ही इससे बॉडी में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
  • और प्रेग्नेंट महिला का स्वस्थ रहना और ऊर्जा से भरपूर रहना गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

पानी का भरपूर सेवन करें

  • केवल खाना ही नहीं बल्कि नोर्मल डिलीवरी के लिए गर्भवती महिला को पानी का भी भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • इससे गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने के साथ गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है।
  • और गर्भवती महिला का हाइड्रेट रहना भी नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद करता है।

तो यह हैं खान पान से जुड़े कुछ खास टिप्स जिनका सेवन यदि प्रेग्नेंट महिला करती है तो इससे नोर्मल डिलीवरी होने के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और चाहती है की आपकी डिलीवरी नोर्मल हो तो आप भी इन खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल कर सकती है।

हाथों और पैरों को कोमल बनाने के तरीके

केवल चेहरा ही सूंदर होने से आपकी ख़ूबसूरती नहीं होती है बल्कि आकर्षक दिखने के लिए आपके हाथों पैरों की ख़ूबसूरती भी बहुत जरुरी होती है। और यदि आप ऐसा सोचते हैं की नहाने के बाद किसी लोशन का इस्तेमाल हाथों पैरों के लिए करने से हाथ पैर सूंदर और कोमल हो जाते हैं। तो यह बिल्कुल गलत हैं, क्योंकि आपके चेहरे की तरह ही आपके हाथों पैरों की कोमलता और सुंदरता को बरकरार रखने के लिए उन्हें भी ज्यादा केयर की जरुरत होती है।

और यदि आप हाथों पैरों की अच्छे से केयर नहीं करते हैं तो इसके कारण हाथों पैरों की स्किन काली पड़ने लगती है, स्किन रूखी व् बेजान हो जाती है, क्योंकि धूल मिट्टी के कण, प्रदूषण के कारण, धूप के कारण हाथों पैरों की स्किन पर बुरा असर पड़ता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको हाथों पैरों की स्किन की कोमलता को बरकरार रखने के लिए कुछ आसान व् असरदार टिप्स बताने जा रहे हैं।

नहाने से पहले और नहाने के बाद यह काम करें

रोजाना नहाने से पहले आपको अपने हाथों पैरों की ऑयल से अच्छे से मसाज करनी चाहिए। और नहाते समय ऐसे साबुन का इस्तेमाल करना चाहिए जो आपकी स्किन को सूट करता हो और हाथों पैरों को अच्छे से साफ़ करना चाहिए। उसके बाद जब आप नहाकर निकलें तो अपने हाथों पैरों पर अच्छे से लोशन लगाना चाहिए। ऐसा रोजाना करने से आपके हाथों पैरों की कोमलता को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

हल्दी और ग्लिसरीन

एक कटोरी में थोड़ी हल्दी, पांच छह बूंदे ग्लिसरीन, थोड़ा सा नारियल का तेल मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट से अपने हाथों पैरों की तीन से चार मिनट तक मसाज करें, और दस मिनट के लिए इसे स्किन पर लगे रहने दें। उसके बाद आप इसे गुनगुने या नोर्मल पानी से साफ कर दें। और फिर लोशन लगाएं, ऐसा हफ्ते में एक या दो बार जरूर करें ऐसा करने से न केवल आपकी स्किन को कोमल बनेगी बल्कि स्किन में निखार भी आएगा।

शहद और दूध

एक या दो चम्मच शहद में दूध मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, अब इसे मास्क के रूप में अपने हाथों पैरों पर लगाएं और दस से पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें। उसके बाद हाथों पर हल्का पानी लगाकर चार से पांच मिनट तक मसाज करें और उसके बाद इसे पानी से साफ कर दें। इससे हाथों पैरों की स्किन को कोमल व् निखरी हुई होने में मदद मिलती है।

एलोवेरा जैल

एक कटोरी में एक चम्मच एलोवेरा जैल, थोड़ा सा शहद, दो चार बूंदे ग्लिसरीन और गुलाबजल मिलाएं और इन सभी चीजों को अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस पेस्ट को अपने हाथों पैरों पर लगाएं और दस मिनट के लिए छोड़ दें, उसके बाद मसाज करते हुए इसे साफ पानी से धो दें। ऐसा करने से हाथों पैरों पर जमी गंदगी साफ़ होने के साथ स्किन भी सॉफ्ट हो जाएगी। हफ्ते में एक बार ही आप यदि इस उपाय को करते हैं तो ऐसा करने से हाथों पैरों की सुंदरता और कोमलता को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

संतरे का छिलका

संतरे के छिलको को सुखाकर उसमे दूध मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। उसके बाद इस पेस्ट को अपने हाथों पैरों पर लगाएं। सूखने के बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके इसे धो दें, ऐसा करने से भी आपके हाथों पैरों को कोमल बनाने में मदद मिलती है साथ ही इससे स्किन टोन भी बेहतर होती है।

मिल्क थेरेपी

हफ्ते में एक या दो बार एक बर्तन में गुनगुना दूध लेकर उसमे अपने हाथों और पैरों को थोड़ी देर तक भिगोकर रखें, आप चाहे तो आधा दूध और आधा गुनगुना पानी मिक्स कर सकते हैं। ऐसा करने से दूध आपकी स्किन को कोमल बनाता है और गुनगुना होने के कारण यह आपकी डेड स्किन को निकालने में मदद करता है जिससे आपके हाथों पैरों की स्किन को कोमल व् निखरी हुई बनने में मदद मिलती है।

ऑयल मसाज

यदि दिनभर में आपके पास समय नहीं होता है तो आप रात को सोने से पहले नारियल तेल, बादाम तेल, आदि से अपने हाथों पैरों की मसाज करें ऐसा करने से भी आपके हाथों पैरों की कोमलता को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ उपाय जिन्हे ट्राई करने से आपको हाथों पैरों की ख़ूबसूरती और कोमलता को बरकरार रखने में मदद मिलती है। ऐसे में यदि आप भी अपने हाथों पैरों की सुंदरता को बढ़ाना चाहते हैं तो आप भी इन टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

पहली बार प्रेग्नेंट हैं तो इन बातों का खास ध्यान रखें

प्रेगनेंसी गर्भवती महिला के लिए एक ऐसा समय होता है जहां महिला को बेहतर देखभाल के साथ बहुत सी चीजों से परहेज भी करना पड़ता है। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को किसी तरह की दिक्कत न हो और गर्भ में शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से हो सके। जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है उनके लिए लिए यह अनुभव ख़ुशी से भरपूर होने के साथ दुविधाओं से भरा भी हो सकता है। क्योंकि प्रेगनेंसी से जुडी जानकारी उन्हें घर में या बाहर के लोग देते रहते हैं लेकिन ऐसा बिल्कुल भी जरुरी नहीं होता है की दो महिला के अनुभव आपस में मेल खाते हो। ऐसे में महिला परेशान हो सकती की आखिर क्या सही है और क्या गलत, तो इसके लिए आपको बिल्कुल भी परेशान होने की जरुरत नहीं है क्योंकि यदि आप पहली बार माँ बन रही है तो ऐसे में आपको किन किन बातों का ध्यान रखना जरुरी है आइये आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताने जा रहे हैं।

आखिरी पीरियड की तारीख

यदि आपका पीरियड मिस हो गया है तो आपको अपने आखिरी पीरियड की डेट का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको ये पता चल सके की आपके पीरियड मिस होने से कितने दिन ज्यादा हो गए हैं। और यदि आपको पांच से सात दिन ऊपर हो गया हैं तो घर पर ही आप प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकते हैं। और आखिरी पीरियड की डेट के बारे में आपको डॉक्टर भी पूछ सकते हैं इसीलिए इस डेट का आपको ध्यान रखना चाहिए।

सभी जांच

यदि आप पहली बार माँ बनने का प्लान कर रही है या आपने गर्भधारण कर लिया है तो सबसे पहले आपको अपनी बॉडी की अच्छे से जांच करवानी चाहिए। ताकि यदि आपको कोई शारीरिक समस्या हो तो उसका समाधान उसी समय हो सके और प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने व् शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी से जुडी किताबें पढ़ें ‘

गर्भावस्था की खबर पहले तीन महीने तो किसी से शेयर नहीं करनी चाहिए और यदि आप अपने घर में किसी से शेयर भी करती हैं। तो हर कोई अपना प्रेगनेंसी का अनुभव आपसे शेयर कर सकता है, लेकिन ऐसा कोई जरुरी नहीं है की जैसा अनुभव उनका प्रेगनेंसी के दौरान रहा है वैसा ही आपके साथ भी हो। ऐसे में आपको इंटरनेट या किताबों के माध्यम से प्रेगनेंसी से जुडी जानकारी इक्कठी करनी चाहिए। ताकि आपको प्रेगनेंसी से जुडी जानकारी मिल सके और यदि कोई बदलाव बॉडी में आपको महसूस हो तो आपको उसे समझने में मदद मिल सके।

तनाव नहीं लें

प्रेगनेंसी के लिए केवल महिला का शारीरिक रूप से तैयार होना ही जरुरी नहीं होता है। बल्कि इसके लिए महिला को मानसिक रूप से भी तैयार होना जरुरी होता है की आप शिशु की जिम्मेवारी लेने के लिए तैयार है। क्योंकि यदि आप मानसिक रूप से अभी शिशु को जन्म लेने के लिए तैयार नहीं होती है तो इससे भी प्रेगनेंसी के दौरान कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ सकती है।

संपूर्ण आहार

खान पान का ध्यान रखना प्रेगनेंसी के दौरान बहुत जरुरी होता है, क्योंकि यदि महिला पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करती है, समय से अपना आहार लेती है, तो ऐसा करने से महिला की बॉडी में पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर बने रहने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में भी मदद मिलती है। इसीलिए फोलिक एसिड, आयरन, फोलेट, कैल्शियम, प्रोटीन, एंटी ऑक्सीडेंट, जैसे पोषक तत्व से भरपूर आहार का सेवन जरूर करना चाहिए। और सम्पूर्ण आहार के साथ महिला को भरपूर मात्रा में पानी का सेवन भी करना चाहिए, क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान हाइड्रेट रहने से भी गर्भवती महिला की बहुत सी परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

क्या करें क्या नहीं

छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना प्रेगनेंसी के दौरान बहुत जरुरी होता है क्योंकि यही छोटी छोटी बातें प्रेग्नेंट महिला को बड़ी बड़ी परेशानियों से दूर रखने में मदद करती है। ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी में क्या करना चाहिए जैसे की मैडिटेशन करनी चाहिए, रेस्ट करना चाहिए, सम्पूर्ण आहार लेना चाहिए आदि, और प्रेगनेंसी में क्या नहीं करना चाहिए जैसे की ज्यादा भागदौड़, भारी सामान उठाना, सीढिया अधिक चढ़ना, यात्रा करना, आदि। इन सभी बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है।

क्या खाएं क्या नहीं

गर्भावस्था के दौरान खाना पीना बहुत महत्व रखना हैं लेकिन कुछ भी खाने से पहले यह ध्यान रखना भी जरुरी होता है। की प्रेगनेंसी के दौरान वह चीजें खानी चाहिए या नहीं, कितनी मात्रा में उस चीज का सेवन करना चाहिए, कितना मिर्च मसाले व् तेल का इस्तेमाल आहार में करना चाहिए, आदि। यदि प्रेग्नेंट महिला खाने पीने से जुडी इन बातों का ध्यान रखती है तो इससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में शिशु के विकास में भी फायदा मिलता है।

भरपूर आराम

पहली प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला बहुत ज्यादा थकान, कमजोरी व् परेशानी का अनुभव कर सकती है। ऐसे में महिला को शारीरिक व् मानसिक रूप से रिलैक्स रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला को भरपूर आराम करना चाहिए।

डॉक्टर से जांच

पहली प्रेगनेंसी के दौरान आपको जब भी डॉक्टर चेकअप के लिए कहे तो आपको जरूर करवाना चाहिए। और इसमें किसी भी तरह की देरी नहीं करनी चाहिए, समय पर स्कैन करवाने चाहिए ताकि शिशु के विकास को जानने में आपको मदद मिल सके। इसके अलावा गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान कोई भी असहज लक्षण महसूस हो तो उसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका ध्यान महिला को पहली प्रेगनेंसी के दौरान रखना चाहिए। ताकि महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सके और गर्भ में शिशु को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मिलें जिससे शिशु का विकास बेहतर तरीके से होने में मदद मिल सके।