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क्या प्रेग्नेंट महिला के लिए कोरोना वैक्सीन लगवाना सेफ है?

भारत में कोरोना की दूसरी लहर का आतंक बहुत बुरी तरह से देखने को मिल रहा है। ऐसे में इस माहमारी से बचाव के लिए हर कोई वैक्सीन लगवा रहा है। सरकार द्वारा देश के हर हिस्से में जल्द से जल्द सभी लोगो को वैक्सीन लग जाये इसे लेकर मुहीम चल रही है। लेकिन गर्भवती महिला को वैक्सीन लगाईं जाये या नहीं इसे लेकर आज भी सवाल बरकरार हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला को वैक्सीन लगवानी चाहिए या नहीं इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भवती महिला वैक्सीन लगवाए या नहीं?

प्रेग्नेंट महिलाएं इस बात को लेकर परेशानी में है की वो वैक्सीन लगवाएं या नहीं लगवाएं और यदि महिला वैक्सीन लगवा लेती है तो इसकी वजह से बच्चे पर तो कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। तो इसका जवाब है की कि भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देश अनुसार अभी भारत देश में कोरोना वैक्सीन गर्भवती महिलाओं और स्‍तनपान करवाने वाली महिलाओं को नहीं दी जा सकती है।

क्योंकि अभी तक इसका क्‍लीनिकल ट्रॉयल गर्भवती महिलाओं पर नहीं किया गया है और इस बात की भी कोई जानकारी नहीं है की आखिर गर्भवती महिला को वैक्सीन लगने पर महिला और बच्चे पर इसका क्या असर होगा। साथ ही वैक्सीन बनाने वाली कपनियां अभी इस वैक्सीन को गर्भवती महिलाओं और स्तनपान करवाने वाली महिलाओं के लिए सेफ नहीं मान रही हैं। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं या ब्रेस्टफीडिंग करवा रही है तो आपको भी वैक्सीन लगवाने के लिए सरकार द्वारा आने वाले फैसले का इंतज़ार करना होगा।

क्या विदेशों में लग रही है प्रेग्नेंट महिला को वैक्सीन?

अभी विदेशों में सभी गर्भवती महिलाओं को नहीं लेकिन कुछ प्रेगनेंट हेल्‍थकेयर वर्कर्स को कोरोना वैक्‍सीन दी जा चुकी है और उनमें बहुत कम साइड इफेक्‍ट्स देखने को मिले हैं। ऐसे में अब विदेशों में यह बयान जारी किया गया है की अब यह वैक्सीन सभी गर्भवती महिलाओं के साथ स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को भी दी जानी चाहिए।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान वैक्सीन लगवाना सेफ है या नहीं इससे जुडी जानकारी, ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी वैक्सीन लगवानी है या नहीं इसकी पूरी जानकारी होने के बाद ही आप वैक्सीन लगवाएं।

Is coronavirus safe for for pregnant women?

गर्भ में बच्चे का वजन बढ़ाना चाहते हैं? तो प्रेगनेंसी के दौरान यह खाएं

माँ बनना महिला के लिए उसकी जिंदगी का बेहतरीन पल होता है लेकिन साथ ही महिला के लिए यह समय कठिन भी होता है। क्योंकि इस दौरान महिला को केवल अपना ही ध्यान नहीं रखना होता है बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत और स्वास्थ्य भी अपनी माँ पर ही निर्भर करती है। ऐसे में महिला यदि थोड़ी भी लापरवाही करती है तो इसका असर गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। साथ ही यदि महिला अपनी सेहत व् स्वास्थ्य का अच्छे से ध्यान रखती है तो इसका फायदा भी बच्चे को मिलता है।

ऐसे में हर प्रेग्नेंट महिला यही चाहती है की गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ रहे, उसे किसी तरह की दिक्कत नहीं हो, उसका वजन सही तरीके से बढ़ें, आदि। लेकिन कई बार किसी कारण गर्भ में शिशु का वजन अच्छे से नहीं बढ़ पाता है जिसकी वजह से जन्म के समय शिशु को दिक्कत होने का खतरा होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला चाहती है गर्भ में शिशु का वजन सही तरीके से बढ़ें ताकि शिशु को कोई दिक्कत नहीं हो। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे कुछ खाने पीने के टिप्स बताने जा रहे हैं जो गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने में आपकी मदद कर सकते हैं।

डॉक्टर्स द्वारा बताई गई दवाईयां सही समय से लें

गर्भावस्था के दौरान महिला को कुछ दवाइयों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। उन दवाइयों का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्व की मात्रा सही रहती है जिससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को उन दवाइयों का सेवन करने में कोई लापरवाही नहीं करनी चाहिए और समय से उन दवाइयों का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना टीकाकरण भी समय से करवाना चाहिए।

अंडा

गर्भ में पल रहे शिशु का वजन बढ़ाने के लिए महिला अंडे का सेवन भी कर सकती है। अंडा प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है जो शिशु के शारीरिक विकास को बेहतर करने में मदद करते हैं।

सूखे मेवे

सूखे मेवे यानी की काजू, बादाम, अखरोट, खजूर आदि का सेवन भी महिला गर्भ में पल रहे शिशु के वजन को बढ़ाने के लिए कर सकती है। क्योंकि इनमे कैल्शियम, प्रोटीन, आयरन, विटामिन, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। लेकिन ध्यान रखें की सूखे मेवे का सेवन सिमित मात्रा में ही गर्भवती महिला को करना चाहिए।

नॉन वेज

चिकन प्रोटीन, आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होता है और यह पोषक तत्व गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद करते हैं। यदि गर्भवती महिला शिशु का वजन बढ़ाना चाहती है तो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को चिकन का सेवन जरूर करना चाहिए।

शकरकंद

फाइबर, पोटैशियम, विटामिन सी, विटामिन बी6, आयरन, कॉपर, बीटा- कैरोटीन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर शकरकंद का सेवन भी गर्भवती महिला शिशु का वजन बढ़ाने के लिए कर सकती है। क्योंकि यह शिशु की हड्डियों के लिए, शरीर में खून की मात्रा को को सही रखने आदि में मदद करता है।

दालें

आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, विटामिन्स से भरपूर दालों का सेवन भी गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि इससे बच्चे के शारीरिक विकास को बेहतर करने में मदद मिलती है जिससे शिशु का वजन गर्भ में तेजी से बढ़ता है।

दूध और दही

दूध और दही व् अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन भी गर्भ में पल रहे शिशु का वजन को बढ़ाने के लिए गर्भवती महिला कर सकती है। क्योंकि दूध में कैल्शियम, प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है जो शिशु की हड्डियों व् कोशिकाओं के विकास को बढ़ाने में मदद करता है।

सोयाबीन

सोयाबीन में प्रोटीन, आयरन आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो शिशु के शारीरिक विकास को बेहतर करने में मदद करते हैं। सोयाबीन के अलावा सोया चंक्स, टोफू आदि का सेवन भी गर्भवती महिला कर सकती है।

हरी पत्तेदार सब्जियां

हरी सब्जियां एंटी ऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स, आयरन, कैल्शियम, फोलेट व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होती है और यह पोषक तत्व गर्भ में पल रहे के बेहतर शारीरिक विकास में मदद करते हैं। ऐसे में आपको पालक, ब्रोकली, मटर, बीन्स, आदि अन्य हरी सब्जियों का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान जरूर करना चाहिए।

भरपूर फल खाएं

सब्जियों के साथ फलों में भी पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर होती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान वजन सही रखने के लिए गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में फलों का सेवन करना चाहिए। ताकि गर्भ में पल रहे शिशु को पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलें। जिससे उसके विकास में किसी भी तरह की कमी नहीं आएं।

गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने के लिए इन टिप्स का भी ध्यान रखें

  • नशीले पदार्थों का सेवन करने से बचें।
  • कैफीन युक्त चीजों का सेवन कम से कम करें।
  • तनाव से दूर रहें।
  • जरुरत से ज्यादा मसालेदार, तेलीय, मीठा आहार खाने से बचें।
  • खान पान के साथ आराम भी भरपूर करें।
  • शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें।
  • हमेशा सकारात्मक सोचें।
  • गर्भ में पल रहे शिशु से बातें करें।
  • गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने के लिए यदि आपको डॉक्टर्स अपनी डाइट में बदलाव के लिए कहते हैं तो आपको उन सभी बदलाव को करना जरुरी होता है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे ट्राई करने से गर्भ में पल रहे शिशु के वजन को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही महिला को इन टिप्स को फॉलो करना चाहिए ताकि शिशु के वजन में कमी जैसी समस्या से आपको बचे रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी के दौरान संतरे का सेवन क्यों जरुरी है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अलग अलग खाद्य पदार्थों को खाने की सलाह दी जाती है जिनमे से फल भी महिला और शिशु के लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन किसी भी फल का सेवन करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। जैसे की फलों को धोएं बिना उनका सेवन नहीं करें, फल की कितनी मात्रा में लेने सही है, कौन सा मौसम उस फल के लिए सही है, किस समय वो फल खाना चाहिए, आदि। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको संतरे के सेवन के बारे में बताने जा रहे हैं।

क्या प्रेग्नेंट महिला संतरे का सेवन कर सकती है?

जी हाँ, गर्भावस्था के दौरान महिला संतरे का सेवन कर सकती है। क्योंकि संतरे में फाइबर, पानी, कैल्शियम, आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन सी व् अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी बहुत फायदेमंद होते है। लेकिन जितना हो सके महिला को संतरे का सेवन दिन में ही करना चाहिए रात को नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके कारण महिला को सर्दी, गले से सम्बंधित समस्या हो सकती है इसके अलावा महिला को दिन भर में एक या दो संतरे ही खाने चाहिए।

गर्भावस्था में संतरे खाने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला संतरे का सेवन करती है तो इससे महिला को एक नहीं बल्कि कई सेहत सम्बन्धी फायदे मिलते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में संतरा खाने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

फोलिक एसिड

गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए फोलिक एसिड एक अहम पोषक तत्व होता है। और संतरे में यह पोषक तत्व मौजूद होता है ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला संतरे का सेवन करती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु को फोलिक एसिड मिलता है। जिससे शिशु की रीढ़ की हड्डी, मस्तिष्क के बेहतर विकास के साथ शिशु को जन्म दोष के खतरे से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

आयरन

संतरे में आयरन भी मौजूद होता है और आयरन माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरुरी होता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला संतरे का सेवन करती है तो इससे महिला को भरपूर मात्रा में आयरन मिलता है। जिससे गर्भवती महिला को एनीमिया से सुरक्षित रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। साथ ही आयरन के साथ संतरे में मौजूद विटामिन सी भी महिला के सभी अंगों तक आयरन को अच्छे से अवशोषित करने में मदद करता है।

कैल्शियम

प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर्स महिला को कैल्शियम युक्त डाइट लेने की सलाह भी देते हैं क्योंकि कैल्शियम गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास और महिला की हड्डियों को बेहतर पोषक देता है। ऐसे में महिला के लिए संतरे का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है क्योंकि संतरे में कैल्शियम की मात्रा मौजूद होती है।

विटामिन सी

संतरे में विटामिन सी भी मौजूद होता है जो की एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट होता है और प्रेगनेंसी के दौरान महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे को संक्रमण व् बिमारियों के खतरे से बचे रहने में मदद मिलती है।

पानी की कमी होती है पूरी

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में पोषक तत्वों के साथ तरल पदार्थों की मात्रा का सही होना भी जरुरी होता है। और संतरे में पानी की मात्रा की अधिकता होती है ऐसे में संतरे का सेवन करने से महिला को पोषक तत्व तो मिलते हैं साथ ही शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा को सही रहने में भी मदद मिलती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए संतरे का मौसम आने पर रोजाना एक संतरे का सेवन जरूर करना चाहिए।

पाचन तंत्र मजबूत होता है

गर्भावस्था के दौरान संतरे का सेवन करने से महिला की पाचन क्रिया को मजबूती मिलती है क्योंकि संतरे में फाइबर की मात्रा मौजूद होती है। और फाइबर युक्त भोजन करने से पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है जिससे महिला को कब्ज़, गैस जैसी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर कण्ट्रोल रहता है

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं को ब्लड प्रैशर से जुडी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन यदि महिला संतरे का सेवन करती है तो इससे महिला के ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल रहने में मदद मिलती है।

यूरिन इन्फेक्शन का खतरा होता है कम

संतरे का सेवन करने से महिला की किडनी को साफ़ करने में मदद मिलती है साथ ही शरीर में पानी की कमी भी पूरी रहती है जिससे गर्भवती महिला को यूरिन इन्फेक्शन के खतरे से बचे रहने में मदद मिलती है।

एनर्जी भरपूर मिलती है

संतरे में वो सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो शरीर को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद करते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला यदि संतरे का सेवन करती है तो इससे महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है। और जब महिला एनर्जी से भरपूर रहती है तो इससे गर्भवती महिला को एक्टिव रहने में भी मदद मिलती है।

भूख लगती है

गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं को भूख में कमी आने की समस्या हो जाती है जो माँ और बच्चे दोनों के लिए सही नहीं होता है। ऐसे में यदि महिला संतरे का सेवन करती है तो इससे महिला की भूख को बढ़ाने में मदद मिलती है।

मुँह का स्वाद अच्छा हो जाता है

गर्भावस्था के दौरान महिला के मुँह के मुँह का स्वाद कई बार बिगड़ जाता है ऐसे में संतरे का सेवन करने से महिला के मुँह के स्वाद को सही करने में मदद मिलती है।

स्किन को मिलता है फायदा

संतरे में मौजूद पोषक तत्व व् एंटी ऑक्सीडेंट्स प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के चेहरे के ग्लो को बरकरार रखने में मदद करते हैं। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला की स्किन पर दाग धब्बे व् मुहांसे की समस्या होने की सम्भावना कम होती है।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो प्रेगनेंसी के दौरान संतरा खाने से माँ व् बच्चे को मिलते हैं। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने लिए और शिशु के बेहतर विकास के लिए संतरे का सेवन जरूर करना चाहिए।

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बच्चे के पेट में कीड़े होने के कारण व् घरेलू उपाय

बच्चों के पेट में कीड़े होने की समस्या बहुत ही आम बात है लेकिन इसे अनदेखा करना गलत बात होती है। क्योंकि इस समस्या को यदि अनदेखा किया जाए तो इसकी वजह से बच्चे का विकास प्रभावित होता है क्योंकि ऐसा माना जाता है की जिन बच्चों के पेट में कीड़े होते हैं तो उनके द्वारा खाये गए आहार के सभी पोषक तत्व कीड़े खा जाते हैं और बनछए को कुछ भी नहीं मिलता है।

साथ ही बच्चे को पेट से जुडी परेशानियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है। लेकिन यह कोई ऐसी समस्या नहीं है की जिसका कोई इलाज नहीं हो बल्कि डॉक्टर्स की मदद से इसका इलाज़ किया जा सकता है। साथ ही इस समस्या से बचाव के कुछ घरेलू नुस्खें भी है जिनकी मदद से आपको इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की बच्चों के पेट में कीड़े होने के क्या कारण होते हैं, क्या लक्षण होते हैं, और आप किस तरह इस परेशानी से निजात पा सकते हैं।

बच्चे के पेट में कीड़े होने के कारण

  • अधिकतर बच्चे अपने आस पास पड़ी किसी भी चीज को मुँह में डाल लेते हैं जिसकी वजह से दूषित चीजें, नुकसानदायक बैक्टेरिया उनके शरीर में प्रवेश कर जाता है और पेट में कीड़े की समस्या हो जाती है।
  • शरीर में कैल्शियम की कमी होने के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
  • जो बच्चे ज्यादा मीठा खाते हैं उन्हें भी यह दिक्कत होने का खतरा अधिक होता है।
  • दूषित पानी बच्चे को पिलाने के कारण भी पेट में कीड़े की समस्या हो सकती है।
  • जो बच्चे मिट्टी खाते हैं उन्हें भी यह दिक्कत हो सकती है।

बच्चे के पेट में कीड़े होने के लक्षण

  • यदि आपके बच्चे को जल्दी जल्दी भूख लगती है तो समझ जाए की उसके पेट में कीड़े है।
  • आपका बच्चा यदि सही से अपनी डाइट लेता है लेकिन फिर भी उसका शारीरिक विकास अच्छे से नहीं हो रहा है तो समझ जाए की बच्चे के पेट में कीड़े हैं।
  • बच्चे के वजन में कमी होना भी पेट में कीड़े होने का लक्षण होता है।
  • यदि आपके बच्चे की जीभ सफ़ेद हैं या आपके बच्चे के मुँह से बदबू आती है तो समझ जाए की आपके बच्चे के पेट में कीड़े हैं।
  • आपका बच्चा यदि बहुत ज्यादा थका हुआ रहता है तो यह भी पेट में कीड़े होने का लक्षण होता है।
  • यदि आपके बच्चे का पेट अक्सर खराब रहता हैं, बच्चा उल्टी अधिक करता है तो ये भी बच्चे के पेट में कीड़े होने का लक्षण होता है।

पेट में कीड़े की समस्या से बचाव के घरेलु नुस्खें

यदि आपके बच्चे के पेट में कीड़े हैं तो कुछ घरेलु नुस्खे हैं जिन्हे ट्राई करने से बच्चों के पेट में जुडी समस्या को खत्म करने में मदद मिलती है। तो आइये अब जानते हैं की वो उपाय कौन से हैं।

नीम के पत्ते

नीम में मौजूद एंटी बैक्टेरियल गुण इस समस्या से बचाव में मदद कर सकते हैं। इसके लिए आप एक या दो नेम के पत्तों को अच्छे से पीसकर उसे एक चम्मच शहद में मिलाएं। उसके बाद खाली पेट अपने बच्चे को इसका सेवन करवाएं ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें आपको जल्द ही इस समस्या से बचाव में मदद मिलेगी।

लहसुन

खाली लहसुन बच्चे हो सकता है नहीं खाएं ऐसे में आप तीन चार लहसुन की कलियों में थोड़ा सा नमक मिलाकर अच्छे से पीस लें। उसके बाद रोटी के साथ या वैसे भी दिन में दो बार इसका सेवन करें इससे भी पेट में कीड़े की समस्या से बच्चे व् बड़ों दोनों को बचे रहने में मदद मिलेगी।

अनार

अनार के छिलकों को सुखाकर उसका पाउडर तैयार करें और अब इस पाउडर को दिन में दो बार एक एक चम्मच बच्चे को पानी केसाथ या पानी में मिलाकर पिलाएं। ऐसा करने से भी बच्चों को पेट में होने वाले कीड़ों की समस्या से बचे रहने में मदद मिलेगी।

तुलसी

पेट में होने वाले कीड़ों की समस्या से बचाव के लिए तुलसी का सेवन करना भी बहुत फायदेमंद हैं। इसके लिए आप तुलसी के पत्तों को पीसकर उनका रस निकाल लें। उसके बाद दिन में दो बार इस रस का सेवन करें। ऐसा करने से भी आपको पेट में कीड़ों की समस्या से बचाव करने में मदद मिलेगी।

अजवाइन

अजवाइन का इस्तेमाल करने से भी पेट में कीड़ों की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके लिए आप बच्चे को रात को सोने से पहले आधा चम्मच अजवाइन के पाउडर में थोड़ा काला नमक मिलाएं। और उसके बाद इसे गुनगुने पानी के साथ बच्चे को दें।

नारियल तेल

नारियल तेल में एंटी बैक्टेरियल और एंटी वायरल गुण मौजूद होते हैं ऐसे में इसका सेवन करने से पेट में कीड़े की समस्या से बचाव करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए आप बच्चे को नारियल तेल में खाना बनाकर खिलाएं।

हल्दी वाला दूध

औषधीय गुणों से भरपूर हल्दी का इस्तेमाल करने से भी पेट में कीड़े की समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है। इसके लिए आप एक गिलास गर्म दूध में हल्दी मिलाकर रोजाना बच्चे को पिलाएं इससे बच्चे को जल्द से जल्द आराम मिलेगा साथ ही बच्चे की इम्युनिटी भी मजबूत होगी।

अदरक

अदरक के छोटे छोटे टुकड़ों को पानी में डालकर उबाल लें अब इस पानी को छानकर इसमें थोड़ा शहद मिलाएं और थोड़ा थोड़ा करके बच्चे को पिलाएं ऐसा करने से भी इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलेगी।

दही

नियमित रूप से बच्चे को दिन में एक कटोरी दही का सेवन जरूर करवाएं इससे शरीर में बैड बैक्टेरिया बढ़ता है जिससे आपको इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलेगी।

गाजर

नियमित अपना बच्चे को खाली पेट गाजर का सेवन करने के लिए कहें ऐसा करने से भी बच्चे के पेट में कीड़े नष्ट हो जाते हैं। जिससे आपके बच्चे को इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

बच्चों के पेट में कीड़े की समस्या से बचाव के अन्य उपाय

  • आपको बच्चों के आस पास सफाई का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।
  • बिना धुली किसी भी खाने की चीज को बच्चे को खाने को नहीं देना चाहिए।
  • यदि बच्चा कुछ भी मुँह में लेता रहता है तो आपको अपने बच्चे की इस आदत में सुधार करना चाहिए।
  • पौधे या अन्य किस जगह पर मिट्टी अधिक होती है वहां पर बच्चों का खास ध्यान रखना चाहिए की कहीं आपका बच्चा मिट्टी तो नहीं खा रहा है।

तो यह हैं बच्चे के पेट में कीड़े होने के कारण, लक्षण व् इस समस्या से बचाव के कुछ उपाय, यदि आपके बच्चे में भी आपको पेट में कीड़े होने के लक्षण महसूस होते हैं तो आपको भी इन्हे अनदेखा न करते हुए इसका इलाज करना चाहिए। ताकि आपके बच्चे के शारीरिक विकास में किसी भी तरह की कमी नहीं हो।

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प्रेग्नेंट महिला को किसी के साथ एक प्लेट में शेयर करके खाना क्यों नहीं खाना चाहिए?

गर्भावस्था महिला के लिए बहुत ही नाजुक समय होता है इसीलिए महिला को बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। क्योंकि जितना ज्यादा महिला सावधानी बरतती है उतना ही ज्यादा प्रेग्नेंट महिला व् होने वाले शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। तो आज हम प्रेगनेंसी के दौरान फॉलो की जाने वाली एक सलाह के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसका ध्यान हर गर्भवती महिला को रखना चाहिए।

और वो सलाह है की प्रेग्नेंट महिला को किसी के साथ एक प्लेट में शेयर करके नहीं खाना चाहिए। अब आप सोच रहे होंगे की एक प्लेट में महिला को खाने से क्या दिक्कत हो सकती है? तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की एक प्लेट में शेयर करके खाने से महिला को क्या दिक्कत होने का खतरा रहता है।

संक्रमण का होता है खतरा

एक प्लेट में खाने के कारण संक्रमण का खतरा होता है क्योंकि हो सकता है की जिसके साथ आप खा रहे हैं उसे कोई शारीरिक परेशानी हो, उसके हाथ अच्छे से साफ़ नहीं हो, आदि। ऐसे में यदि आप उस व्यक्ति के साथ शेयर करके खाती हैं तो आपको संक्रमण होने का खतरा होता है। इसीलिए आपको इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए।

वायरस फ़ैल सकता है

एक प्लेट एक चम्मच से खाने के कारण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में वायरस फैलने का खतरा भी होता है। जैसे की यदि किसी को जुखाम या खांसी की समस्या है और आप उस व्यक्ति का झूठा खा रही है तो उसका वायरस बहुत तेजी से फैलता है। जिसकी वजह से आपको भी इस समस्या के होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ऐसी छोटी छोटी शारीरिक परेशानियों से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को किसी का भी झूठा खाने या एक प्लेट एक चम्मच में शेयर करके खाने से बचना चाहिए।

बिमारियों का खतरा

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला की इम्युनिटी थोड़ी कमजोर हो जाती है ऐसे में महिला को संक्रमण व् बीमारियां होने का खतरा अधिक होता है। और यदि आप किसी का झूठा खाते है तो इससे भी बीमारियां फैलने का खतरा अधिक होता है ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को किसी तरह की समस्या नहीं हो। इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को किसी का भी झूठा खाने से बचना चाहिए।

तो यह हैं कुछ दिक्कतें जो एक प्लेट में खाना खाने के कारण प्रेग्नेंट महिला को हो सकती है। ऐसे में इन दिक्कतों से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को एक प्लेट में खाना नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा खाने पीने की चीजों को बनाने में साफ़ सफाई का ध्यान रखें और खाने में प्रयोग करने से पहले उन्हें अच्छे से धो लें। ऐसी ही कुछ बातों का ध्यान रखने से प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में क्या-क्या होता है?

गर्भावस्था के पूरे नौ महीने महिला उस पल का बेसब्री से इंतज़ार करती है की कब उसका शिशु उसकी बाहों में खेलेगा और महिला उसे प्यार कर सकेगी, उससे बातें कर सकेगी, उसे बढ़ते हुए देखेगी, आदि। और जैसे ही प्रेगनेंसी का नौवां महीना लगता है वैसे ही महिला का इंतज़ार लगभग खत्म सा होने वाला होता है।

क्योंकि अब महिला की डिलीवरी कभी भी हो सकती है लेकिन वही बात जब प्रेगनेंसी का पूरा समय महिला अपने शरीर में अलग अलग बदलाव देखती है तो प्रेगनेंसी के नौवें महीने में भी महिला को ऐसा कुछ जरूर महसूस होगा। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला को कौन कौन से बदलाव देखने को मिलते हैं क्या-क्या होता है उसके बारे में इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में शरीर में होने वाले बदलाव

  • गर्भवती महिला को नौवें महीने में बढे हुए वजन और पेट के कारण उठने, बैठने, लेटने, सोने आदि में ज्यादा परेशानी का अनुभव हो सकता है।
  • बच्चे का वजन पूरा बढ़ जाने और गर्भ में शिशु के जन्म लेने की सही पोजीशन में आने के कारण पेट के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है जिसकी वजह से पेल्विक एरिया में दर्द के साथ महिला को जल्दी जल्दी यूरिन करने की इच्छा भी हो सकती है।
  • शिशु के जन्म लेने की सही पोजीशन में आने की वजह से महिला को शिशु की मूवमेंट कम महसूस हो सकती है।
  • पैरों में सूजन बढ़ सकती है जिसकी वजह से महिला को चलने फिरने में दिक्कत होने के साथ पैरों में दर्द भी हो सकता है।
  • प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला को रह रह कर पेट में दर्द भी महसूस हो सकता है।
  • इस दौरान महिला को ब्रेस्ट से तरल द्रव का रिसाव भी महसूस हो सकता है।
  • प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला को पेट के साथ पीठ में दर्द की समस्या भी अधिक हो सकती है।
  • कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के नौवें महीने में उल्टियां आदि की समस्या बढ़ सकती है।

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में शिशु का विकास

गर्भावस्था के नौवें महीने में शिशु का वजन लगभग ढाई किलो या उससे अधिक भी हो सकता है। इस दौरान शिशु के हाथ, पैर, कान, आँख, व् अन्य सभी अंग विकसित हो चुकें होते हैं। साथ ही नौवें महीने में कई शिशु अपने जन्म लेने की सही पोजीशन में आने की कोशिश करते हैं यानी की बच्चे का सिर नीचे की तरफ और पैर ऊपर की तरफ हो जाते हैं।

गर्भावस्था के नौवें महीने में महिला क्या खाएं?

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला को भरपूर पोषक तत्वों से युक्त डाइट लेनी चाहिए ताकि शिशु के वजन को तेजी से बढ़ने में मदद मिल सके और महिला के शरीर को डिलीवरी के लिए एनर्जी मिल सकें। तो आइये अब जानते हैं की महिला को क्या-क्या खाना चाहिए।

फाइबर युक्त डाइट

वजन बढ़ने के कारण महिला को नौवें महीने में पाचन सम्बन्धी परेशानी अधिक हो सकती है ऐसे में महिला को फाइबर युक्त डाइट लेनी चाहिए। इसे महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। फाइबर के लिए महिला केला, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, ओट्स, दलिया, खिचड़ी आदि का सेवन कर सकती है।

कैल्शियम युक्त भोजन

हड्डियों के लिए जरुरी कैल्शियम युक्त डाइट भी महिला को प्रेगनेंसी के नौवें महीने में जरूर लेनी चाहिए। क्योंकि इससे गर्भवती महिला को शारीरिक रूप से फिट रहने में मदद मिलती है जिससे महिला को डिलीवरी के समय होने वाली कमजोरी से जल्द से जल्द राहत पाने में मदद मिलती है। और इसके लिए महिला अपनी डाइट में डेयरी प्रोडक्ट्स, ड्राई फ्रूट्स आदि को भरपूर मात्रा में शामिल कर सकती है।

आयरन युक्त डाइट

शरीर में खून की कमी होने के कारण डिलीवरी के समय महिला को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है साथ ही इससे शिशु का विकास भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में महिला को आयरन की कमी के कारण कोई दिक्कत नहीं हो इससे बचने के लिए महिला को आयरन युक्त डाइट लेनी चाहिए। और इसके लिए महिला अनार, सेब, हरी सब्जियां, ड्राई फ्रूट्स आदि का भरपूर सेवन कर सकती है।

देसी घी

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला को देसी घी भी जरूर खाना चाहिए ऐसा माना जाता है इससे महिला को एनर्जी मिलती है। साथ ही देसी घी का सेवन करने से डिलीवरी को आसान बनाने में भी मदद मिलती है।

फोलेट युक्त डाइट

ऐसा माना जाता है की गर्भ में पल रहे शिशु को यदि फोलेट उचित मात्रा में नहीं मिलें तो इसकी वजह से शिशु का मानसिक विकास कम हो सकता है। ऐसे में शिशु के मानसिक विकास में कमी नहीं हो इसके लिए महिला को फोलेट युक्त डाइट का भरपूर सेवन करना चाहिए। और इसके लिए महिला को हरी पत्तेदार सब्जियों, बीन्स, सेब, गाजर, चुकंदर आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

प्रसव को आसान बनाने वाले खाद्य पदार्थ

महिला की डिलीवरी में कोई दिक्कत नहीं हो और महिला के प्रसव को आसान बनाया जा सके इसके लिए गर्भवती महिला को कुछ खाद्य पदार्थ का सेवन करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में महिला को उन खाद्य पदार्थों का सेवन डिलीवरी का समय नजदीक आने पर जरूर करना चाहिए। जैसे की पालक, बीन्स, ड्राई फ्रूट, दूध में घी डालकर, आदि।

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला क्या नहीं खाएं

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के नौवें महीने में भी बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है ताकि महिला की डिलीवरी में और डिलीवरी के समय माँ या बच्चे को किसी भी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़े। ऐसे में महिला को कुछ कुछ पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।

  • गर्भवती महिला को कैफीन युक्त चीजें जैसे की चाय, कॉफी, चॉकलेट्स आदि का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
  • जरुरत से ज्यादा मीठा नहीं खाना चाहिए इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।
  • ज्यादा घबराना या टेंशन नहीं लेनी चाहिए इससे ब्लड प्रैशर से जुडी परेशानी हो सकती है।
  • कच्चे अंडे, कच्चा मास, कच्चा दूध आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • धूम्रपान, शराब, तम्बाकू आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • डिब्बाबंद चीजें, बाहर की बनाई गई मिठाइयां, जंक फ़ूड, मसालेदार व् तेलीय आहार, आदि का सेवन भी गर्भवती महिला को करने से बचना चाहिए।

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में क्या करें क्या नहीं?

  • गर्भवती महिला को खान पान, नींद, अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।
  • डिलीवरी को लेकर टेंशन नहीं लेनी चाहिए बल्कि बल्कि बच्चे के आने की ख़ुशी में खुश रहना चाहिए।
  • गर्भवती महिला को ऐसी डाइट नहीं लेनी चाहिए जिससे गैस बनती हो।
  • महिला को पेट के भार कोई काम नहीं करना चाहिए न ही झुककर कोई काम करना चाहिए।
  • इस दौरान महिला को थोड़ी देर वाक, व्यायाम आदि जरूर करना चाहिए।
  • गर्भवती महिला को यात्रा, ज्यादा भागादौड़ी करने से इस दौरान बचना चाहिए।
  • प्रसव के लक्षणों का ध्यान रखें यदि शरीर में कोई भी प्रसव का लक्षण महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में डॉक्टर से कब मिलें

गर्भावस्था के नौवें महीने में डॉक्टर आपको हफ्ते या चार पांच दिन बाद चेकअप के लिए बुला सकते है। ऐसे में आपको समय से अपने चेकअप के लिए जाना चाहिए। या फिर शरीर में प्रसव के लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर के पास तुरंत जाना चाहिए। तो आइये अब प्रसव के कुछ लक्षणों के बारे में जानते हैं।

प्रसव के लक्षण कौन कौन से होते हैं?

  • महिला के पेट में रुक रुक कर दर्द होना या फिर तेज दर्द होना।
  • महिला के प्राइवेट पार्ट से चिपचिपे द्रव का रिसाव ज्यादा होना।
  • पेट के निचले हिस्से में दबाव महसूस होना।
  • महिला को पीठ में तेज दर्द होना।
  • महिला को ऐसा महसूस होना जैसे की बच्चा गिरने वाला है।
  • पेट खराब होना या यूरिन आने की समस्या का बढ़ जाना।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के नौवें महीने के दौरान महसूस होने वाले बदलाव व् अन्य जानकारी, यदि आपका भी प्रेगनेंसी का नौवां महीना लगने वाला है या लग चूका है तो आपको भी यह जानकारी होना जरुरी है। ताकि आपके प्रसव को आसान बनाने व् नौवें महीने में आने वाली मुश्किलों को कम करने में मदद मिल सकें।

Changes during ninth month of pregnancy

थायरॉइड के लक्षण और बचाव के घरेलू उपाय

थायरॉइड एक ऐसी परेशानी है जिसका सामना आज कल बहुत सी महिलाओं या पुरुषों को करना पड़ रहा है। थायरॉइड की समस्या एक ऐसी समस्या है जिसका सबसे अहम कारण आज कल की गलत जीवनशैली व् लाइफस्टाइल है। साथ ही यदि आयुर्वेद की मानें तो शरीर में वात पित्त कफ दोष से सम्बंधित परेशानी होने के कारण यह समस्या होती है। जब शरीर में वात एवं कफ दोष हो जाता है तो इसकी वजह से थायरॉइड हो जाता है। इसके अलावा इस समस्या का उपचार भी आसानी से किया जा सकता है इस समस्या का उपचार आयुर्वेदिक तरीकों से करने के साथ घरेलू नुस्खों से भी किया जा सकता है।

क्या होता है थायरॉइड?

गले में आगे की एक ग्रंथि होती है जो आपके स्वरतंत्र के बिल्कुल साथ ही होती है। यह दिखने में एक तितली के आकार की होती है। और यही ग्रंथि शरीर की कई जरूरी गतिविधियों को नियंत्रित करती है ताकि आपके शरीर में सभी अंगों को सुचारु रूप से काम करने में मदद मिल सकें। साथ ही यह ग्रंथि भोजन को ऊर्जा में बदलने का काम करती है। थायरॉइड ग्रंथि T3 यानी ट्राईआयोडोथायरोनिन और T4 यानी थायरॉक्सिन हार्मोंन का निर्माण करती है।

इन हॉर्मोन का सीधा असर सांस, हृदय गति, पाचन तंत्र और शरीर के तापमान पर पड़ता है। इसके अलावा यह हॉर्मोन हड्डियों, मांसपेशियों व कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करते हैं। ऐसे में जब यह हॉर्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं, तो वजन कम या ज्यादा होने लगता है, तो इसे ही थायरॉइड की समस्या कहते हैं। और इस समस्या के होने पर शरीर में आपको अलग अलग लक्षण भी महसूस होते हैं। इसके अलावा मस्तिष्क में पिट्यूरी ग्रंथि से एक अन्य हार्मोन निकलता है, जिसे की थायरॉइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (TSH) कहते हैं।

यह हार्मोन शरीर में अन्य दो थायरॉइड हॉर्मोन टी3 और टी4 के प्रवाह को नियंत्रित करता है। जो की शरीर में वजन, तापमान, मांसपेशियों की ताकत, यहां तक की आपके मूड को भी नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। थायरॉइड की समस्या महिलाओं व् बुजुर्गों में सबसे अधिक देखने को मिलती है पुरुषों को यह समस्या हो सकती है लेकिन उतना ज्यादा यह समस्या पुरषों में देखने को नहीं मिलती है।

थायरॉइड के प्रकार

अधिकतर लोगो में दो प्रकार का थायरॉइड देखने को मिलता है:-

हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism)

जब थायरॉइड ग्रंथि जरूरत से कम मात्रा में हॉर्मोन का निर्माण करती है। तो इसे हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) कहा जाता है इसमें व्यक्ति का वजन जरुरत से ज्यादा हो जाता है।

हाइपरथायरॉइडज्म (Hyperthyroidism)

जब थायरॉइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हॉर्मोन का निर्माण करती है। तो इसे हाइपरथायरॉइडज्म (Hyperthyroidism)
कहा जाता है इसमें व्यक्ति का वजन कम होने लगता है।

थायरॉइड के लक्षण

  • घबराहट होना, तनाव महसूस होना, चिड़चिड़ाहट होना, आदि।
  • बालों के झड़ने या पतले होने की समस्या का अधिक होना।
  • पसीना जरुरत से ज्यादा आना।
  • हाथों का कांपना।
  • महिलाओं में पीरियड्स से जुडी समस्या अधिक होना जैसे की महिला के पीरियड देरी से आना, कम आना, आदि।
  • नींद न आने की समस्या अधिक होना।
  • बहुत अधिक खाना खाने के बाद वजन का न बढ़ना या फिर कुछ न खाने पर भी वजन का तेजी से बढ़ना।
  • हड्डियों में कैल्शियम की कमी होना।
  • सचने, समझने, याद रखने की क्षमता में कमी होना।
  • धड़कन कम होना।
  • शरीर में थकावट अधिक होना।
  • पेट सम्बन्धी समस्या जैसे कब्ज़ होना, जोड़ो में दर्द रहना, मांसपेशियों में अकड़न रहना, आदि।
  • महिलाओं को प्रेगनेंसी नहीं होने की समस्या होना।
  • चेहरे पर सूजन होना।
  • समय से पहले ही बालों का सफ़ेद हो जाना।
  • ब्लड प्रैशर असामान्य होना।

थायरॉइड होने के कारण

  • बहुत सी महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान यह समस्या हो जाती है।
  • यह समस्या अनुवांशिक भी हो सकती है यदि आपके घर में पहले किसी को थायरॉइड की समस्या है तो हो सकता है की आपको भी यह दिक्कत हो या आपके परिवार के अन्य सदस्यों को भी यह समस्या हो जाये।
  • गलत खान पान, गलत लाइफस्टाइल भी इस समस्या के होने का एक अहम कारण है।
  • शरीर में आयोडीन की कमी होने के कारण भी यह समस्या हो जाती है।

थायरॉइड की समस्या से बचाव के घरेलू उपचार

यदि आप थायरॉइड की समस्या से पीड़ित है तो कुछ आसान घरेलू उपचार करके आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की थायरॉइड की समस्या से बचाव के घरेलू उपचार कौन-कौन से हैं।

मुलेठी

मुलेठी थायरॉइड की समस्या से बचाव के लिए बहुत ही असरदार उपाय है क्योंकि इसमें ट्रीटरपेनोइड ग्लाइसेरीथेनिक एसिड मौजूद होता है जो थायरॉइड ग्रंथि को सही रखने में मदद करता है। ऐसे में आप नियमित रूप से मुलेठी का सेवन करें आपको जरूर फायदा मिलेगा।

हल्दी दूध

हल्दी के औषधीय गुणों से कोई भी अनजान नहीं है और हल्दी का सेवन करने से आप थायरॉइड की समस्या से भी निजात पा सकते हैं। इसके लिए आप नियमित रूप से एक गिलास में आधा चम्मच हल्दी या फिर कच्ची हल्दी लाकर उसे पीसकर उसे दूध में डालकर अच्छे से उबाल लें। और फिर इसका सेवन करें ऐसा करने से भी थायरॉइड की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

लौकी

लौकी के जूस का सेवनकरने से भी थायरॉइड की समस्या से आराम मिलता है यदि आप नियमित रूप से लौकी का जूस पीते हैं तो आपको जल्द ही इस समस्या से छुटकारा पाने में मदद मिलती है। लेकिन ध्यान रखें की लौकी का जूस निकालने से पहले टेस्ट कर लें की लौकी कड़वी न हो।

काली मिर्च

काली मिर्च भी थायरॉइड की समस्या में फायदा करती है ऐसे में अपने खाने पीने की चीजों में काली मिर्च को मिलाकर उसका सेवन करें आपको जरूर फायदा मिलेगा।

हरा धनिया

हरा धनिया भी थायरॉइड की समस्या से बचाव के लिए असरदार घरेलू नुस्खा है इसके लिए आप हरे धनिये को अच्छे से पीसकर उसे पानी में मिलाएं और उसका सेवन करें। ऐसा करने से भी आपको थायरॉइड की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।

तुलसी

नियमित रूप से दो चम्मच तुलसी के रस में आधा चम्मच एलोवेरा जूस मिलाकर पीएं। ऐसा करने से भी थायरॉइड की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

त्रिफला चूर्ण

आपको अपने घर के आस पास होने वाली किसी भी पंसारी की दूकान से त्रिफला चूर्ण मिल जाता है। यदि आपको थायरॉइड है तो नियमित रूप से आप एक चम्मच त्रिफला चूर्ण का सेवन करें। ऐसा करने से भी आपको थायरॉइड की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

अश्वगंधा

अश्वगंधा चूर्ण का सेवन करने से भी आपको थायरॉइड की समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है। इसके सेवन के लिए आप नियमित रात को सोने से पहले एक चम्मच अश्वगंधा चूर्ण को गाय के गुनगुने दूध के साथ लें। इसके अलावा आप चाहे तो अश्वगंधा की जड़ और पत्तियों को भी पानी में उबालकर पी सकते हैं। यदि आप नियमित रूप से इसका सेवन करते हैं तो इससे शरीर में हार्मोनल संतुलन बना रहता है। जिससे आपको थायरॉइड की समस्या के साथ अन्य समस्या से निजात पाने में भी मदद मिलती है।

सेब का सिरका

एक चम्मच सेब के सिरके को एक गिलास पानी में मिक्स करें साथ ही एक चम्मच शहद भी इसमें मिलाएं और इस ड्रिंक का सेवन नियमित रूप से कुछ दिनों तक करें। ऐसा करने से आपको थायरॉइड की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है साथ ही इससे शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को भी बाहर निकालने में मदद मिलती है।

अलसी

अलसी के बीज मैग्नीशियम, विटामिन बी 12 जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। साथ ही इसमें फैटी एसिड भी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो थायरॉइड ग्रंथि को सही से काम करने में मदद करते हैं।

डेयरी प्रोडक्ट्स

डेयरी प्रोडक्ट्स में आयोडीन की मात्रा मौजूद होती है जो शरीर में आयोडीन के स्तर को सामान्य बनाएं रखने में मदद करते हैं और थायरॉइड की समस्या से निजात पाने में मदद करते हैं।

तो यह हैं थायरॉइड से बचाव के कुछ घरेलू नुस्खें यदि आप या आपके घर में कोई अन्य इस समस्या से पीड़ित है तो आप भी इन आसान नुस्खों को ट्राई करके इस समस्या से निजात पा सकते हैं।

Home remedies to get rid of Thyroid

नवजात शिशु के रोने के क्या-क्या कारण होते हैं?

छोटे बच्चों का रोना बहुत ही आम बात होती है ऐसे में जब बच्चे के रोने के बाद आप उसे खिलाते है, बुलाते हैं या गोद में उठा लेते हैं तो बच्चा चुप भी हो जाता है। लेकिन यदि बच्चा फिर भी रोता रहता है तो इसका मतलब यह होता है की बच्चे के रोने का कोई कारण है। क्योंकि बच्चा छोटा है तो वो आपको बता नहीं पाता है की उसे क्या दिक्कत हो रही है लेकिन लगातार यदि बच्चा रो रहा है तो आपको यह समझने की कोशिश करनी चाहिए की आखिर बच्चा क्यों रो रहा है। और जब बच्चा ज्यादा रो रहा है तो उसे अनदेखा भी नहीं करना चाहिए की वो अपने आप चुप हो जायेगा क्योंकि हो सकता है की बच्चे को कोई दिक्कत हो रही हो। आज इस आर्टिकल में हम बच्चे के रोने के क्या-क्या कारण हो सकते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

भूख व् प्यास के कारण

छोटे बच्चे को भूख लगी है प्यास लगी है इसके बारे में बच्चा बता नहीं पाता है ऐसे में यदि आपका बच्चा रोता है। तो इसका कारण बच्चे को भूख लगना या प्यास लगना हो सकता है। शुरुआत में हो सकता है की आपको समझ न आये की बच्चा भूखा है लेकिन धीरे धीरे आपको यह समझ आने लगता है।

सही तरीके से पेट नहीं भरने के कारण

बच्चे के दूध पीने के बाद भी यदि बच्चे का पेट अच्छे से नहीं भरता है तो इसके कारण भी आपका बच्चा बार बार रो सकता है। ऐसे में बच्चे को अच्छे से दूध पिलाना चाहिए ताकि बच्चे का पेट अच्छे से भर जाये।

डाइपर गीला होने के कारण

छोटे बच्चे को आजकल सभी डाइपर पहनाते हैं ऐसे में यदि डाइपर गीला हो जाता है या डाइपर में बच्चा पॉटी कर देता है। तो इसके कारण बच्चे को दिक्कत महसूस होती है और बच्चा रोने लग जाता है।

रैशेस होने के कारण

डाइपेट के कारण कई बच्चों को रैशेस की समस्या हो सकती है जिसके कारण जांघो के आस पास लाल लाल दाने होने लगते हैं। और इसमें बच्चे को दर्द महसूस हो सकता है जिसकी वजह से बच्चा ज्यादा रो सकता है।

यूरिन पास करने की इच्छा होने के कारण

कई छोटे बच्चों की यह आदत होती है की जब भी उन्हें सुसु आती है तो वो रोना शुरू कर देते हैं और जैसे ही सुसु हो जाती है। तो वो रोना बंद कर देते हैं ऐसे में धीरे धीरे माँ को बच्चे की यह आदत समझ आने लगती है और इसमें घबराने की कोई बात नहीं होती है।

पेट में गैस होने की वजह से

बच्चे को पेट सम्बन्धी समस्या लगी रहती है ऐसे में कई बार बच्चे को पेट में गैस बन जाती है जिसके कारण बच्चे को पेट दर्द महसूस हो सकता है। ऐसे में यदि को पेट में ज्यादा दिक्कत महसूस होती है, बच्चा अच्छे से फ्रैश नहीं होता है या बच्चे को दस्त लग जाते हैं तो इन कारणों की वजह से बच्चा चिड़चिड़ा सकता है जिसकी वजह से बच्चा रोने लगता है।

कहीं कुछ लग जाने के कारण

कई बार बच्चे हाथ या मुँह में कुछ लेकर खेल रहे होते हैं या वैसे ही कही अचानक से बैठे होते हैं। तो उनके मुँह, हाथ या पैर आदि में यदि कुछ लग जाता है। तो अचानक किसी चीज के लग जाने के कारण वो रोना शुरू कर देते हैं।

तबियत खराब होने की वजह से

शिशु को यदि किसी तरह की सेहत सम्बन्धी समस्या है जैसे की बुखार है, जुखाम है, या अन्य कोई भी परेशानी है तो इस वजह से बच्चे का स्वभाव थोड़ा चिड़चिड़ा हो जाता है। साथ ही शिशु को शारीरिक परेशानी होने के कारण भी शिशु थोड़ा ज्यादा रो सकता है। ऐसे में आपको बच्चे के ज्यादा रोने पर बच्चे के शरीर का तापमान आदि मापना चाहिए और जानने की कोशिश करनी चाहिए की आखिर शिशु को क्या दिक्कत हो रही है।

अकेले होने के कारण

कई बारे शिशु को जब आस पास कोई नहीं दिखता है तो इस कारण भी बच्चे रोना शुरू कर देते हैं। ऐसे में आपको बच्चे को गोद में उठाना चाहिए, उसे गाना सुनाना चाहिए, उसे किसी खिलौने की मदद से खिलाने की कोशिश करनी चाहिए, उसकी पीठ थपथपानी चाहिए, आदि। ऐसा करने से बच्चे को चुप करवाने में मदद मिलती है।

शोर के कारण

बच्चों को ज्यादा शोर शराबा पसंद नहीं होता है क्योंकि ज्यादा शोर या तेज आवाज़ के कारण बच्चे घबराने लगते हैं डरने लगते हैं। ऐसे में यदि बच्चे के आस पास यदि ज्यादा शोर वाला वातावरण होता है तो इसके कारण भी बच्चा रोने लगता है।

नींद आने के कारण

जब बच्चा सोने पर होता है यानी की बच्चे को नींद आ रही होती है तो इस कारण भी आपका बच्चा रो सकता है। साथ ही यदि किसी कारण बच्चे की नींद पूरी नहीं होती है और बच्चा उठ जाता है तो इसके कारण भी बच्चा ज्यादा रो सकता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से बच्चा रोने लगता है। ऐसे में माँ को बच्चे के रोने के सही कारण को जानने की कोशिश करनी चाहिए। इसके अलावा यदि बहुत कोशिश करने के बाद भी बच्चा यदि चुप नहीं होता है तो इसे अनदेखा किये बिना एक बार डॉक्टर से मिलना चाहिए ताकि शिशु को जल्द से जल्द इस समस्या से निजात पाने में मदद मिल सके।

What are the reasons for crying of a newborn

प्रेगनेंसी में केयर कैसे करें?

गर्भावस्था महिला के लिए बहुत ही खास पल होने के साथ ही बहुत ही केयर करने वाला समय होता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला शरीर में होने वाले तरह तरह के बदलाव, हार्मोनल बदलाव, शारीरिक परेशानियों आदि का सामना करती है और बच्चे का विकास भी महिला पर ही निर्भर करता है। साथ ही इस दौरान महिला यदि अपनी केयर में थोड़ी भी लापरवाही करती है तो इसका बुरा असर महिला की सेहत पर पड़ने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर भी पड़ता है।

ऐसे में महिला यदि चाहती है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो साथ ही गर्भ में शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से हो। तो इसके लिए महिला को अपनी अच्छे से केयर करनी चाहिए। आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको कुछ प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपनी केयर किस तरीके से करनी चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

रूटीन बनाएं बेहतर

प्रेगनेंसी के दौरान जरुरी है की महिला अपना एक रूटीन बनाएं और अपनी जीवनशैली को सही रखें। क्योंकि जितना महिला का रूटीन बेहतर होता है और जीवनशैली सही होती है उतना ही गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

पोषक तत्वों से भरपूर ले आहार

प्रेग्नेंट महिला के फिट रहने के लिए और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए महिला के लिए जरुरी है की महिला पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें। यदि महिला पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेती है तो इससे महिला और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

अपने खान पान में न करें लापरवाही

प्रेग्नेंट महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने के साथ खाना खाते समय बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे की भरपेट खाने की बजाय थोड़ा थोड़ा करके खाएं ताकि खाना अच्छे से हज़म हो सकें, डाइट नहीं करें, खाना खाते समय ध्यान रखें की उन चीजों का सेवन नहीं करें जिनसे आपको एसिडिटी की समस्या होती है, आदि। इन बातों का ध्यान रखने से महिला की पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है जिससे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पेट सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

दवाइयों का समय से करें सेवन

प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर महिला को कुछ विटामिन्स लेने की सलाह देते हैं ऐसे में गर्भवती महिला को डॉक्टर द्वारा बताये गए विटामिन्स को समय से लेना चाहिए। ताकि शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा को सही रहने में मदद मिल सके।

व्यायाम जरूर करें

प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ व् एक्टिव रहने के लिए दिन भर में थोड़ा व्यायाम भी जरूर करना चाहिए। ज्यादा व्यायाम प्रेगनेंसी के दौरान सेफ नहीं होता है ऐसे में आप चाहे तो योगा कर सकते हैं और यदि आप योगा भी नहीं कर रही है तो दिन में थोड़ी देर वॉक जरूर करें।

मैडिटेशन भी है जरुरी

गर्भावस्था के दौरान तनाव से बचे रहने और मानसिक रूप से रिलैक्स रहने के लिए महिला को थोड़ी देर मैडिटेशन जरूर करनी चाहिए। मैडिटेशन के लिए सुबह का समय सबसे बेहतरीन माना जाता है।

हाइड्रेट रहें

गर्भावस्था के दौरान महिला को शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा को पूरा रखना चाहिए। और इसके लिए महिला को दिन में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ जूस, निम्बू पानी, नारियल पानी आदि का सेवन भी जरूर करना चाहिए।

नेगेटिविटी से दूर रहें

तनाव, नेगेटिव बातें, नेगेटिव सोच से गर्भवती महिला को दूर रहना चाहिए। क्योंकि इसके कारण महिला के साथ बच्चे की सेहत पर नेगेटिव असर पड़ता है। ऐसे में महिला और शिशु का स्वास्थ्य बेहतर रहे इसके लिए गर्भवती महिला को खुश रहना चाहिए।

साफ़ सफाई का ध्यान रखें

प्रेगनेंसी में अपनी केयर करने के दौरान महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला अपने आस पास सफाई रखें ताकि महिला को किसी भी तरह की शारीरिक परेशानी होने का खतरा नहीं हो।

नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करें

गर्भवती महिला को किसी भी तरह के नशे जैसे की अल्कोहल, धूम्रपान आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही अधिक मात्रा में कैफीन युक्त पदार्थ जैसे की चाय कॉफ़ी का भी अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह सभी बच्चे के विकास में रूकावट पैदा कर सकते हैं

लापरवाही न करें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपनी केयर करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करें। क्योंकि इस दौरान बरती गई थोड़ी सी लापरवाही माँ और बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में महिला को पेट के बल या झुककर कोई काम नहीं करना चाहिए, ज्यादा सीढ़ियां नहीं चढ़नी चाहिए, कोई काम ज्यादा तेजी से नहीं करना चाहिए, पेट के बल नहीं सोना चाहिए, ज्यादा भारी सामान नहीं उठाना चाहिए, यात्रा नहीं करनी चाहिए, आदि काम नहीं करने चाहिए।

नींद है जरुरी

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए जितना खान पान का ध्यान रखना जरुरी है उतनी ही महिला के लिए नींद भी जरुरी होती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को शारीरिक व् मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए खान पान बेहतर लेने के साथ नींद भी भरपूर लेनी चाहिए।

डॉक्टर से करवाएं नियमित जांच

गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ रहने के लिए महिला को समय से अपना टीकाकरण करवाने के साथ नियमित जांच भी समय से करवानी चाहिए। क्योंकि नियमित जांच के दौरान यदि कोई समस्या होती भी है तो उसका इलाज साथ के साथ ही हो जाता है जिससे माँ और बच्चे को बाद में कोई दिक्कत नहीं होती है।

गर्भ में बच्चे की मूवमेंट पर भी रखें नज़र

महिला को अपनी सेहत का ध्यान रखने के साथ गर्भ में शिशु की हलचल पर भी ध्यान रखना चाहिए। की शिशु गर्भ में हलचल कर रहा है या नहीं, यदि गर्भ में शिशु हलचल कर रहा है तो बहुत अच्छी बात है। लेकिन यदि आपको लम्बे समय से गर्भ में शिशु की हलचल महसूस नहीं हुई है तो इसे अनदेखा नहीं करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें।

मौसम के अनुसार केयर करने के तरीके में थोड़ा बदलाव करें

गर्भावस्था के दौरान प्रेगनेंसी के हर महीने खान पान में थोड़ा बदलाव करने की सलाह दी जाती है ताकि माँ और बच्चे को भरपूर पोषण मिल सकें। ऐसे में हर महीने बदलाव करने के साथ महिला को मौसम में बदलाव के साथ भी अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि महिला की इम्युनिटी सही रहे जिसे माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान यदि प्रेग्नेंट महिला रखती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

Pregnancy care tips

सर्दियों में प्रेग्नेंट महिला को अंडा क्यों खाना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बदलते मौसम के साथ अपने खान पान, रहन सहन में बदलाव करने की जरुरत होती है। क्योंकि बदलते मौसम के साथ महिला जितना अच्छे से अपना ध्यान रखती है उतना ही महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को उसका फायदा मिलता है। आज इस आर्टिकल में हम सर्दियों के मौसम में गर्भवती महिला के लिए अंडा खाना क्यों जरुरी होता है उसके बारे में बताने जा रहे हैं। लेकिन उससे पहले यह जानते हैं की गर्भावस्था में अंडा खाना कब सेफ होता है और कब नहीं।

गर्भावस्था में अंडा कब खाएं कब नहीं?

गर्भावस्था की पहली तिमाही में अंडे का सेवन करने से महिला को बचना चाहिए क्योंकि अंडा खाने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है जिसके कारण शिशु को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा गर्मी के मौसम में महिला को अंडा यदि खाना है तो महिला जरुरत से ज्यादा अंडे का सेवन नहीं करें। क्योंकि जरुरत से ज्यादा अंडे खाने से भी महिला को दिक्कत हो सकती है। लेकिन महिला यदि मौसम के अनुसार और सिमित मात्रा में अंडे का सेवन करती है तो इसके बेहतरीन सेहत सम्बन्धी फायदे माँ और बच्चे दोनों को मिलते हैं।

अंडे में मौजूद पोषक तत्व

विटामिन डी, विटामिन बी 12, प्रोटीन, choline, विटामिन बी 6, फोलेट, कैल्शियम, जिंक जैसे पोषक तत्व अंडे में भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। ऐसे में इन पोषक तत्वों की कमी को प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में पूरा करने के लिए महिला को अंडे का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान जरूर करना चाहिए।

सर्दियों में अंडा खाने के बेहतरीन फायदे

गर्भवती महिला यदि सर्दियों में अंडे का सेवन करती है तो इससे महिला को सेहत सम्बन्धी एक नहीं बल्कि बहुत से फायदे मिलते हैं। जो गर्भवती महिला को स्वस्थ और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद करते हैं। तो आइये अब उन फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

शरीर को गर्मी मिलती है

अंडा खाने से गर्भवती महिला के शरीर को सर्दी के मौसम में भी गर्म रहने में मदद मिलती है। जिससे माँ व् बच्चे को ठण्ड के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

choline मिलता है

यह पोषक तत्व गर्भ में पल रहे शिशु के दिमागी विकास के लिए बहुत जरुरी होता है यदि शिशु को यह पोषक तत्व नहीं मिलता है। तो इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु का मानसिक विकास अच्छे से नहीं हो पाता है। ऐसे में यदि महिला अंडे का सेवन करती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु को choline मिलता है जिससे शिशु के विकास को बेहतर होने में मदद मिलती है।

प्रोटीन और एमिनो एसिड

अंडे का सेवन करने से गर्भवती महिला को प्रोटीन व् एमिनो एसिड की मात्रा को शरीर में सही रखने में मदद मिलती है। जिससे माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, मांसपेशियों को मजबूती मिलती है, हड्डियों को पोषण मिलता है, ब्लड प्रैशर को सही रखने में मदद मिलती है, आदि।

कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल रहता है

अंडे का सेवन करने का गर्भवती महिला को कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल रखने में मदद मिलती है। साथ ही शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल रहने से महिला को हदय सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने और हदय को स्वस्थ रखने में भी मदद मिलती है।

कैलोरी मिलती है

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने के लिए अतिरिक्त कैलोरी की जरुरत होती है ताकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिल सके। और अंडे का सेवन करने से महिला की इस जरूरत को पूरा करने में मदद मिलती है।

विटामिन डी

गर्भावस्था के दौरान माँ व् बच्चे के लिए विटामिन डी बहुत जरुरी होता है। और यदि गर्भवती महिला के शरीर में विटामिन डी की कमी होती है तो इससे महिला की सेहत सम्बन्धी परेशानियां बढ़ने के साथ शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी आने का खतरा रहता है।

कैल्शियम

अंडे में कैल्शियम की मात्रा भी मौजूद होती है जिससे गर्भवती महिला और शिशु की हड्डियों को पोषण मिलता है। और हड्डियों के मजबूत होने से महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों को कम करने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में मदद मिलती है।

ध्यान रखें:- प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला अंडे का सेवन करती है तो महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला अच्छे से पकाने के बाद भी अंडे को खाने में प्रयोग में लाएं। क्योंकि कच्चा अंडा खाने या आधा पका हुआ अंडा खाने के कारण उसमे मौजूद बैक्टेरिया गर्भ में पल रहे शिशु और महिला की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को सर्दियों में अंडा खाने से मिलते हैं ऐसे में महिला को सर्दियों के मौसम में अंडे का सेवन जरूर करना चाहिए। साथ ही महिला को सिमित मात्रा में ही अंडे का सेवन करना चाहिए।

Why pregnant women should eat eggs in winter