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कोरोना की तीसरी लहर में क्या-क्या हो सकता है?

कोरोना की शुरुआत 2020 में हुई थी और शुरुआत में ही इसे कण्ट्रोल करने की कोशिश को देखकर ऐसा लग रहा था की बहुत जल्दी इस समस्या से निजात मिल जायेगा। लेकिन 2021 में इस संक्रमण का एक भयंकर रूप सामने आया। जिसने बच्चे बड़े सभी को प्रभावित किया। और अब कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखकर कोरोना की तीसरी लहर के जल्दी आने का अनुमान लगाया जा रहा है।

साथ ही देशभर में बढ़ते कोरोना के मामलों को लेकर और रोजाना होने वाली मौतों की दर को देखकर यह बताया जा रहा है की कोरोना की तीसरी लहर इससे भी ज्यादा बुरी तरह आपको प्रभावित कर सकती है और जो हालत आज है हालत उससे ज्यादा बिगड़ भी सकते हैं। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर में क्या क्या हो सकता है आइये इसके बारे में हम आपको इस आर्टिकल में बताने जा रहे हैं।

कोरोना की तीसरी लहर में क्या हो सकता है?

कोरोना की तीसरी लहर को लेकर आशंका जताई जा रही है की इस लहर का सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों पर होगा। बच्चों के इस लहर की चपेट में आने के सबसे ज्यादा चांस है। साथ ही बड़ो पर जहां इस वैक्सीन का ट्रायल हो चूका है और देशभर में वैक्सीन लोगो को दी जा रही है। वहीँ बच्चों के लिए अभी कोई वैक्सीन नहीं है ऐसे बच्चों को इस समस्या से ग्रसित होने का खतरा सबसे ज्यादा है। ऐसे में जरुरी है की आप अपना और अपने बच्चों के लिए हर वो तरीका अपनाएँ जिससे आपके बच्चों को और आपको सेफ रहने में मदद मिल सके। साथ ही यदि देशभर के लोग सरकार द्वारा बताई गई गाइडलाइन्स का पालन करते हैं, अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखते हैं तो इस संक्रमण को खत्म भी किया जा सकता है।

तो यह हैं कोरोना की तीसरी लहर को लेकर कुछ जानकारी, ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर की रोकथाम के लिए जरुरी है की आप सभी सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करें। ताकि इस माहमारी को न बढ़ने दिया जा सकें और जड़ से खत्म किया जा सके।

वाटर बैग ब्रेक क्या होता है? घर में अचानक से वाटर बैग ब्रेक होने पर क्या करना चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में शिशु एक झिल्लीदार थैली से घिरा होता है जिसमे तरल पदार्थ मौजूद होता है। और इसी तरल पदार्थ में आपके शिशु का पूरे नौ महीने तक विकास होता है। इस थैली को पानी की थैली, वाटर बैग या एमनियोटिक थैली कहा जाता है।

गर्भ में शिशु के इस थैली में मौजूद तरल पदार्थ की मदद से शिशु को चोट लगने या दबाव से बचे रहने में मदद मिलती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको वाटर बैग ब्रेक क्या होता है और घर में अचानक से अचानक से यदि वाटर बैग ब्रेक हो जाए तो महिला को क्या करना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

वाटर बैग ब्रेक क्या होता है?

सबसे पहले तो आपको ये पता होना चाहिए की वाटर बैग ब्रेक यानी की पानी की थैली या एमनियोटिक थैली का फटना या ब्रेक होना लेबर पेन का सबसे अहम लक्षण होता है। वाटर बैग ब्रेक होने पर महिला के प्राइवेट पार्ट से एक रंगहीन चिपचिपा पदार्थ निकलता है जो थोड़ा धीरे या फिर तेजी से भी निकल सकता है। इसी को वाटर बैग ब्रेक कहा जाता है।

ऐसा होने पर महिला को बहुत ज्यादा गीला गीला महसूस हो सकता है या कई बार महिला को ऐसा भी लग सकता है की शायद महिला का यूरिन बीच में निकल गया है। ऐसे में नौवें महीने में ऐसा कुछ होने पर एक बार आपको अपने डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए ताकि डिलीवरी के समय आपको की दिक्कत नहीं हो।

इसके अलावा यदि किसी महिला को ऐसा महसूस हो की प्राइवेट पार्ट से रंगहीन नहीं बल्कि गंध वाला, रंग में भूरा पदार्थ निकल रहा है तो इसका मतलब यह होता है की शिशु ने मल कर दिया है ऐसे में आपको बिल्कुल भी देरी न करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

क्या वाटर बैग ब्रेक होने पर दर्द महसूस हो सकता है?

गर्भावस्था के आखिरी महीने में महिला को हल्का फुल्का या रुक रुक कर पेट में दर्द होता रहता है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी जरुरी नहीं होता है की यदि वाटर बैग ब्रेक होगा तो महिला को दर्द जरूर होगा। हाँ लेकिन कुछ महिलाओं को दर्द महसूस हो भी सकता है और कुछ को नहीं महसूस होता है।

घर ने वाटर बैग फट जाए तो क्या करें?

कई बारे घर में अचानक से ही वाटर बैग फट जाता है तो ऐसे में महिला को घबराने की बिल्कुल भी जरुरत नहीं होती है। बल्कि यदि महिला को महसूस हो रहा है की वाटर बैग फट गया है तो जितनी जल्दी हो सकें हॉस्पिटल पहुँच जाना चाहिए। क्योंकि ऐसा नहीं होता है की एक दम से ही सारा पानी बाहर आ जाता है।

लेकिन हाँ यदि आप पानी निकलने के बाद भी घर में ही रहते हैं और पेन का इंतज़ार करते हैं तो इसकी वजह से महिला और बच्चे को दिक्कत हो सकती है। ऐसे में माँ या बच्चे को कोई दिक्कत नहीं हो इससे बचने के लिए महिला को जितना जल्दी हो सके डॉक्टर के पास पहुँच जाना चाहिए।

वॉटर ब्रेक और यूरिन आने में क्या अंतर् है?

प्रेगनेंसी के दौरान वाटर ब्रेकहोने पर एम्नियोटिक द्रव और यूरिन के बीच अंतर करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। ऐसे में आपको इनके बार में पता होना चाहिए जैसे की एम्नियोटिक द्रव स्पष्ट, गंधहीन तरल पदार्थ होता है, जो कि पीले रंग का होता है और कई महिलाओं को पानी के साथ शुरूआत में थोड़ा रक्त भी निकल सकता है। इसकी महक से पता चल जाएगा कि यह एम्नियोटिक द्रव है या यूरिन है।

क्या समय से पहले भी वाटर बैग फट सकता है?

जी हाँ, कुछ केस में समय से पहले भी वाटर बैग फट सकता है जैसे की यदि पहली प्रेगनेंसी में ऐसा हुआ हो, ब्लीडिंग की समस्या महिला को हो, महिला अपने खान पान का अच्छे से ध्यान न रखें, आदि। ऐसे में कुछ केस में ऐसा हो सकता है और इस समस्या से बचने के लिए आपको प्रेगनेंसी की शुरुआत से लेकर आखिर तक अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि आपको या आपके बच्चे को ऐसी कोई समस्या नहीं हो।

तो यह है वाटर बैग ब्रेक क्या होता है और घर में अचानक से वाटर बैग ब्रेक होने पर क्या करना चाहिए उससे जुडी जानकारी, ऐसे में यदि आप भी माँ बनने वाली है और आपकी डिलीवरी का समय पास है तो आपको भी इस बता का ध्यान रखना चाहिए। ताकि यदि आपका वाटर बैग भी फट जाये और फ्लो शुरू हो जाये तो आप समझ सके की यह डिलीवरी का लक्षण है और अब बच्चा जन्म लेने वाला है तो आपको जल्द से जल्द डॉक्टर के पास पहुंचना चाहिए।

Water bag break during pregnancy

प्रेगनेंसी के दौरान प्राइवेट पार्ट में सूजन है तो यह बातें ध्यान रखें?

महिला के प्रेग्नेंट होते ही महिला के शरीर में बदलावों का होना शुरू हो जाता है साथ ही शरीर में हार्मोनल बदलाव भी तेजी से हो रहे होते हैं। इसके अलावा जैसे जैसे प्रेगनेंसी का समय आगे बढ़ता है वैसे वैसे गर्भ में शिशु का विकास बढ़ता है और गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण महिला को पेट बाहर निकलने के कारण परेशानी, पेट सम्बन्धी समस्या, पेल्विक एरिया से जुडी परेशानियां होनी शुरू हो जाती है। क्योंकि गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेल्विक एरिया पर दबाव बढ़ने लगता है। जिसकी वजह से कई बार महिला को प्राइवेट पार्ट में दर्द, सूजन जैसी समस्या भी महसूस हो सकती है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान प्राइवेट पार्ट में होने वाली सूजन के बारे में बात करने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में प्राइवेट पार्ट में सूजन होने के कारण

संक्रमण: प्रेगनेंसी के दौरान प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान रखना चाहिए ऐसे में यदि महिला साफ़ सफाई का ध्यान नहीं रखती है तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। जिसकी वजह से प्राइवेट पार्ट में सूजन की समस्या दर्द की समस्या हो सकती है।

हार्मोनल असंतुलन: गर्भावस्था में हार्मोनल असंतुलन के कारण प्राइवेट पार्ट में सूखापन आ जाता है जिसके कारा दर्द व् सूजन की समस्या महिला को हो सकती है।

गर्भस्थ शिशु का विकास: बच्चे का विकास बढ़ने के साथ पेट के निचले हिस्से पर दबाव अधिक बढ़ जाता है जिसकी वजह से पेल्विक एरिया में खिंचाव महसूस हो सकता है और महिला को प्राइवेट पार्ट से जुडी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

ब्लड सर्कुलेशन बढ़ने के कारण: प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर के साथ प्राइवेट पार्ट के हिस्सों में भी ब्लड फ्लो तेजी से होने लगता है। जिसकी वजह से कई बार महिला को प्राइवेट पार्ट में दर्द व् सूजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी: जिन महिलाओं को एक्टोपिक प्रेगनेंसी होती है उन महिलाओं को भी प्राइवेट पार्ट में दर्द, सूजन, ब्लीडिंग जैसी परेशानियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

प्रेग्नेंट महिला प्राइवेट पार्ट में सूजन होने पर इन बातों का ध्यान रखें?

गर्भवती महिला को यदि प्राइवेट पार्ट में सूजन महसूस होती है तो महिला को इसे अनदेखा न करते हुए इससे बचने का इलाज सोचना चाहिए। जैसे की महिला को:

गर्म पानी से सिकाई करनी चाहिए

इस समस्या से बचने के लिए महिला को हल्के गर्म पानी से प्राइवेट पार्ट की सिकाई करनी चाहिए। सिकाई करने से सूजन को कम करने में मदद मिलती है साथ ही यदि संक्रमण के कारण ऐसा होता है तो उससे भी निजात मिलता है।

मसाज करें

थोड़े सा गुनगुना तेल लेकर प्राइवेट पार्ट के आस पास मसाज करें ऐसा करने से पेल्विक एरिया के आस पास की मांसपेशियों और स्किन को ढीला होने में मदद मिलेगी। जिससे गर्भवती महिला को कम कर सकती है।

बाईं और करवट लेकर सोएं

गर्भावस्था के दौरान महिला के सोने के लिए सबसे सही पोजीशन बाईं और करवट लेकर सोना होती है क्योंकि इस पोजीशन में महिला आराम से सो जाती है। साथ ही इस पोजीशन में सोने से पूरी बॉडी में ब्लड फ्लो सही तरीके से होने में मदद मिलती है। ऐसे में जब प्राइवेट पार्ट में ब्लड फ्लो सही तरीके से होता है तो भी महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

साफ़ सफाई का ध्यान रखें

प्रेग्नेंट महिला को आस पास साफ़ सफाई रखने के साथ अपने शरीर की साफ़ सफाई का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। साफ़ सुथरे कपडे और अंडरगार्मेंट पहनने चाहिए ताकि प्राइवेट पार्ट में संक्रमण की समस्या नहीं हो और महिला को प्राइवेट पार्ट में सूजन की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे फॉलो करने से प्रेग्नेंट महिला को प्राइवेट पार्ट में सूजन की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा प्राइवेट पार्ट में सूजन ज्यादा हो, दर्द ज्यादा हो या अन्य कोई और समस्या हो रही हो तो प्रेग्नेंट महिला को डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

Swelling problem in private part in pregnancy

क्या प्रेगनेंसी में पेट दर्द होना गर्भपात का लक्षण होता है?

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में बहुत सी परेशानियां हो सकती है जैसे की एसिडिटी, उल्टियां होना, सिर दर्द, चक्कर आना, हाथों पैरों में सूजन होना, शरीर के अंगों में दर्द होना, नींद में कमी आना, मानसिक रूप से परेशानी का अनुभव करना आदि। और इन सभी दिक्कतों का होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है।

इसीलिए तो कहा जाता है की एक महिला के लिए माँ बनना किसी जंग से कम नहीं होता है। क्योंकि पूरे नौ महीने महिला किसी न किसी समस्या से झूझती रहती है। किसी महिला को प्रेगनेंसी के दौरान थोड़ी कम तो किसी महिला को बहुत ज्यादा दिक्कतें रहती है। ऐसे में महिला यदि अपना प्रेगनेंसी के दौरान अच्छे से ध्यान रखती है तो इससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान कुछ चीजों को लेकर महिला के मन में सवाल भी चलते रहते हैं और महिला के पास उन सभी सवालों का जवाब होना जरुरी होता है क्योंकि इससे प्रेगनेंसी को समझने में आसानी होती है। आज हम उन्ही में से एक सवाल के बारे में इस आर्टिकल में बात करने जा रहे हैं। और वो सवाल है की क्या प्रेगनेंसी के दौरान पेट में दर्द होना गर्भपात का लक्षण होता है? तो आइये अब इस सवाल के बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या गर्भावस्था के दौरान पेट दर्द गर्भपात का लक्षण होता है?

प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी महिलाओं को पेट में दर्द की समस्या हो सकती है। कुछ महिलाओं को थोड़ी ज्यादा तो कुछ महिलाओं को कम तो कुछ महिलाओं को यह समस्या बिल्कुल नहीं होती है। जिन महिलाओं को पेट में दर्द की समस्या होती है तो हर बार इसका मतलब यह नहीं होता है की महिला का गर्भपात होने वाला है।

बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान पेट में हल्का फुल्का दर्द रहना बहुत आम होता है। लेकिन यदि पेट में दर्द ज्यादा हो तो महिला के लिए दिक्कत होती है परन्तु फिर भी तेज दर्द होने का मतलब केवल गर्भपात ही हो ऐसा जरुरी नहीं होता है। बल्कि गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को पेट में दर्द होता है तो इसका एक नहीं बल्कि कई कारण हो सकते हैं। तो आइये अब आगे जानते हैं की गर्भावस्था के दौरान पेट में दर्द होने का क्या कारण होता है।

गर्भावस्था में पेट दर्द होने के कारण

गर्भवती महिला को पेट में यदि ज्यादा दर्द की दिक्कत रहती है या कभी अचानक से बहुत ज्यादा दर्द होने लगता है तो ऐसा होने के बहुत से कारण हो सकते हैं। जैसे की:

अबॉरशन यानी गर्भपात

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में यदि महिला को पेट में बहुत ज्यादा दर्द महसूस हो रहा है जैसा की महिला को पीरियड्स के दौरान होता है। साथ ही हल्की या हैवी ब्लीडिंग हो रही है तो महिला को पेट दर्द को अनदेखा न करते हुए डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि यदि महिला को दर्द और ब्लीडिंग अधिक होती है तो इसका मतलब होता है की अबॉरशन यानी गर्भपात हो गया है।

समय से पहले डिलीवरी

यदि प्रेग्नेंट महिला को डिलीवरी का समय आने से पहले ही पेट में तेज दर्द हो रहा है या फिर दर्द के साथ प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद पानी का रिसाव या ब्लड निकलता हुआ महसूस हो रहा है। तो ऐसे में महिला को इस लक्षण को अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि यह समय से पहले बच्चे के जन्म के होने का संकेत होता है।

पथरी यानी स्टोन

जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान कभी कभार अचानक से पेट में तेज दर्द हो जाता है तो उन महिलाओं को एक बार अपना चेकअप जरूर करवाना चाहिए। क्योंकि कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान स्टोन यानी पथरी की समस्या हो जाती है जिसकी वजह से महिला को यह दिक्कत हो सकती है।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी

गर्भावस्था की पहली तिमाही में पेट में तेज दर्द होने का एक कारण एक्टोपिक प्रेगनेंसी भी हो जाती है। इस केस में बच्चा फैलोपियन ट्यूब में ही विकसित होने लगता है क्योंकि वो गर्भाशय में प्रत्यारोपित नहीं होता है। यह स्थिति महिला के लिए काफी खतरनाक होती है ऐसे में पेट में तेज दर्द को महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए। साथ हो ऐसे केस में भी महिला का डॉक्टर्स की मदद से गर्भपात करवाया जाता है।

यूरिन इन्फेक्शन

प्रेगनेंसी के दौरान यूरिन इन्फेक्शन की समस्या का होना बहुत आम बात होती है। ऐसे में यदि महिला को यूरिन इन्फेक्शन होता है तो इस कारण भी महिला को पेट या फिर पेट में निचले हिस्से में दर्द की समस्या हो सकती है। साथ ही महिला को यूरिन करते समय जलन, दर्द, पीठ में दर्द जैसी दिक्कतें भी हो सकती है। ऐसे में इस समस्या को खत्म करने के लिए आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि यूरिन इन्फेक्शन का अधिक होना प्रेगनेंसी के दौरान सही नहीं होता है।

गर्भावस्था में पेट में दर्द होने के अन्य कारण

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के पेट में दर्द रहने के कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं और इनकी वजह से अधिकतर सभी महिलाओं को पेट में दर्द की समस्या रह सकती है।

  • गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट की व् उसके आस पास की मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ जाता है जिसकी वजह से महिला को पेट में दर्द महसूस हो सकता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान पाचन क्रिया से जुडी समस्या जैसे की गैस अपच, कब्ज़ आदि होने के कारण भी महिला को पेट में दर्द हो सकता है।
  • बच्चे का वजन बढ़ने की वजह से पेट के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ने लगता है जिसकी वजह से महिला को पेट में दर्द हो सकता है।
  • लम्बे समय तक भूखे रहने की वजह से भी महिला को पेट में दर्द हो सकता है।
  • शरीर में पानी की कमी होने के कारण भी महिला को इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला को पेट में दर्द की समस्या हो सकती है। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो हर बार पेट दर्द होने पर घबराएं नहीं बल्कि आप पहले लक्षण देखें की पेट दर्द कैसा है उसके बाद डॉक्टर से मिलें। ताकि यदि दर्द ज्यादा है तो उसे कण्ट्रोल किया जा सके साथ ही यदि कोई दिक्कत है तो उसका सही से इलाज हो सके।

Is stomach pain symptom of abortion during pregnancy

वैक्सीन लगवाने के बाद क्या करें क्या नहीं?

कोरोना संक्रमण इस कदर फ़ैल रहा है की हर तीसरा आदमी इसकी चपेट में आ रहा है। ऐसे में इस संक्रमण की रोकथाम के लिए और इसके खतरे को कम करने के लिए देशभर में लोगो को वैक्सीन लगाईं जा रही है। और लोग इसे लगवा भी रहे हैं ताकि कोरोना जैसे भयंकर संक्रमण के बचे रहने में मदद मिल सकें।

ऐसे में यदि आप वैक्सीन लगवा रहे हैं तो वैक्सीन लगवाने के बाद आपको किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, क्या क्या करना चाहिए, क्या क्या नहीं करना चाहिए उसके बारे में ध्यान रखना भी जरुरी है। ताकि आपको वैक्सीन लगवाने के बाद किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो। तो आइये अब इन टिप्स के बारे में इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं।

वैक्सीन लगवाने के बाद क्या करें

यदि आप वैक्सीन लगवाकर आएं है तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे आपको किसी तरह की दिक्कत नहीं हो। जैसे की:

आराम करें: वैक्सीन लगवाने के बाद आपको कुछ शारीरिक समस्या जैसे की बुखार आना, सिर दर्द, बदन दर्द, आदि हो सकता है। ऐसे में आपको भरपूर आराम करना चाहिए ताकि आपको इन शारीरिक परेशानियों से आराम पाने में मदद मिल सकें।

हाइड्रेट रहें: इंजेक्शन लगवाने के बाद हाइड्रेट रहें यानी की पानी का भरपूर सेवन करे क्योंकि हाइड्रेट रहने से आपको ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

डाइट का रखें ध्यान: वैक्सीन लगवाने के बाद आप ऐसी डाइट लें जो पोषक तत्वों से भरपूर हो। क्यंकि पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने से आपको हेल्थी रहने में मदद मिलती है।

पॉजिटिव सोचें: वैक्सीन लगवाने के बाद बिल्कुल भी नेगेटिव नहीं सोचें बल्कि पॉजिटिव रहें।

डॉक्टर के संपर्क में रहें: वैक्सीन लगने के बाद डॉक्टर के संपर्क में रहें ताकि यदि आपको कोई एलर्जी हो, शरीर में कोई असहज लक्षण महसूस हो तो आपको जल्द से जल्द उसका ट्रीटमेंट मिल सके।

वैक्सीन लगवाने के बाद क्या नहीं करें

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए यदि आपने वैक्सीन लगवाई है तो वैक्सीन लगवाने के बाद आपको कुछ ऐसे कमा भी है जो की नहीं करने चाहिए। जैसे की:

नशीले पदार्थों का सेवन: वैक्सीन लगवाने के बाद आपको अल्कोहल, धूम्रपान व् अन्य किसी भी तरह के नशीले पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए।

मास्क के बिना कहीं नहीं जाएँ: आपको वैक्सीन लग गई है तो इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है की आपको कोरोना नहीं होगा बल्कि जब तक आपको दोनों डोज़ नहीं लग जाती है और दोनों डोज़ लगने के बाद भी आपको बिना मास्क के कहीं नहीं जाना है। और हमेशा मास्क का इस्तेमाल करना है।

भीड़भाड़ में जाने से बचें: वैक्सीन लगवाने के बाद भीड़भाड़ में नहीं जाएँ या अन्य किसी जगह भी जाने से बचें।

तला भुना नहीं खाएं: वैक्सीन लगवाने के बाद हेल्दी फ़ूड का सेवन करें और जंक फ़ूड व् अन्य तला भुना आहार लेने से परहेज करें।

तो यह हैं काम जो वैक्सीन लगने के बाद आपको करने चाहिए और नहीं करने चाहिए। यदि आप भी अभी वैक्सीन लगवाकर आएं हैं तो आपको भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको वैक्सीन लगवाने के बाद किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो।

C- Section डिलीवरी के बाद किन-किन बातों का ध्यान रखना होता है?

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए उसकी लाइफ का सबसे बेहतरीन समय होता है लेकिन साथ ही इस दौरान महिला बहुत शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक रूप से बदलाव भी महसूस करती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान महिला की जिम्मेवारी और भी बढ़ जाती है क्योंकि अब महिला को केवल अपना ध्यान नहीं रखना होता है बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु का भी ध्यान रखना होता है।

ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हर काम को करने में बहुत ज्यादा सतर्कता बरतने की जरुरत होती है। ताकि महिला को प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तक स्वस्थ रहने में मदद मिल सके साथ ही महिला को प्रसव के दौरान भी कोई दिक्कत नहीं हो। और अधिकतर गर्भवती महिलाएं यही चाहती है की उनका प्रसव सामान्य हो क्योंकि सामान्य प्रसव के बाद महिला को जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है साथ ही बच्चा भी स्वस्थ रहता हैं।

लेकिन कुछ केस में बहुत कोशिश के बाद भी सिजेरियन यानी C- Section डिलीवरी करनी पड़ती है। और सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को अपना और भी ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको C- Section डिलीवरी के बारे में विस्तार से बताते हैं।

क्या होती है सिजेरियन डिलीवरी?

जब बच्चा प्राकृतिक तरीके से जन्म नहीं लेता है और डॉक्टर्स को पेट पर कट लगाकर गर्भाशय को काटते हुए बच्चा बाहर निकालना पड़ता है उसे सिजेरियन डिलीवरी कहते हैं। और डिलीवरी के बाद महिला के गर्भाशय व् पेट को वापिस से सील दिया जाते हैं और थोड़े समय बाद यह टाँके स्किन में घुलने लगते हैं और ठीक हो जाते हैं इसे ही सिजेरियन डिलीवरी कहा जाता है।

क्यों होती है सिजेरियन डिलीवरी?

ऐसा बिल्कुल भी जरुरी नहीं होता है की हर महिला की डिलीवरी सिजेरियन होती है बल्कि जब महिला के साथ कोई दिक्कत होने लगती है, गर्भ में शिशु को दिक्कत होती है तभी सिजेरियन डिलीवरी का सहारा लिया जाता है। जैसे की गर्भ में शिशु पॉटी कर दे, डिलीवरी का समय पूरा होने के बाद भी महिला को दर्द शुरू नहीं हो, गर्भ में एक से ज्यादा शिशु को, गर्भ में शिशु की हलचल महसूस होनी बंद हो जाये, कुछ कम्प्लीकेशन हो जाये, आदि। इसके अलावा कुछ महिलाएं अपनी मर्ज़ी से भी सिजेरियन डिलीवरी करवा लेती है। तो ऐसे कुछ केस में महिला को सिजेरियन डिलीवरी का सहारा लेना पड़ता है।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को किन-किन बातों का ध्यान रखना होता है?

यदि महिला ऑपरेशन के द्वारा बच्चे को जन्म देती है तो महिला को डिलीवरी के बाद अपना प्रेगनेंसी के से भी ज्यादा ध्यान रखना चाहिए ताकि महिला के टाँके जल्दी ठीक हो सके, महिला के शरीर में आई कमजोरी को दूर करने में मदद मिल सके आदि। तो आइये अब सिजेरियन डिलीवरी के बाद किन टिप्स का ध्यान रखना चाहिए उनके बारे में विस्तार से जानते हैं।

टांको का रखें ख्याल

जब तक टाँके ठीक नहीं हो जाते तब तक रोजाना उन पर दवाई लगाएं टाँके के आस पास की जगह की साफ़ सफाई रखें, टांकों पर पानी नहीं लगने दें, आदि। ऐसा करने से टाँके जड़ से जल्द भर जाते हैं और इन्फेक्शन के खतरे को कम करने में मदद मिलती है।

उठने बैठने में सावधानी बरतें

सिजेरियन डिलीवरी के बाद कुछ दिन तक महिला को उठने बैठने में ज्यादा तेजी नहीं करनी चाहिए बल्कि पहले करवट लेकर उठना चाहिए, और बैठते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अलावा महिला को ज्यादा तेजी से चलना भी नहीं चाहिए क्योंकि इसकी वजह से कमर दर्द आदि की समस्या महिला को हो सकती है।

आयरन कैल्शियम लें

डिलीवरी के बाद आपको डॉक्टर आयरन, कैल्शियम व् अन्य दवाइयां लेने की सलाह दे सकते हैं जिससे शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं हो। ऐसे में आपको नियमित रूप से उन दवाइयों का सेवन करना चाहिए जिससे आपको जल्दी से जल्दी रिकवर होने में मदद मिल सके।

भारी सामान नहीं उठाएं

डिलीवरी के कम से कम तीन से छह महीने तक भारी सामान उठाने से बचें। क्योंकि ऐसा करने से आपको पेट, कमर में दर्द की शिकायत बढ़ सकती है साथ ही ऐसा भी कहा जाता है की भारी सामान उठाने से टांकों पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

मालिश बीस से पच्चीस दिन बाद करवाएं

नोर्मल डिलीवरी के दो चार दिन बाद से ही महिलाएं शरीर की मालिश करवा सकती है क्योंकि मालिश करवाने से शरीर को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है। लेकिन सिजेरियन डिलीवरी के कम से कम बीस से पच्चीस दिन तक महिला को मालिश नहीं करवानी चाहिए और उसके बाद भी जब महिला मालिश करवाती है तो महिला को पेट की मालिश नहीं करवानी चाहिए।

साफ़ सफाई का ध्यान रखें

सिजेरियन डिलीवरी के बाद साफ़ सफाई का खास ध्यान रखें क्योंकि यदि साफ़ सफाई न राखी जाये तो इसकी वजह से टांकों में इन्फेक्शन, पस पड़ने जैसी समस्या हो सकती है। और यदि ऐसा कुछ हो जाता है तो उसके बाद महिला को ठीक होने में और ज्यादा समय लग सकता है।

डाइट में पोषक तत्वों से युक्त चीजों को शामिल करें

महिला को अपनी डाइट में आयरन, प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए। इसके अलावा महिला को फाइबर की मात्रा अपनी डाइट में बढ़ानी चाहिए जिससे महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रहने में मदद मिल सकें। साथ ही महिला को ऐसी चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए जिन्हे पचाने में महिला को दिक्कत होती है। और थोड़े थोड़े समय बाद कुछ न कुछ खाते पीते रहना चाहिए।

हाइड्रेट रहें

डाइट अच्छी लेने के साथ महिला को पानी का भी भरपूर सेवन करना चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी नहीं हो। साथ ही महिला को दिन में एक से दो गिलास गुनगुना पानी भी पीना चाहिए इससे पेट साफ़ रहता है, एनर्जी मिलती है, फैट कम होता है, आदि।

सीढ़ियां नहीं चढ़े

सिजेरियन डिलीवरी के कुछ समय बाद तक सीढ़ियां बिल्कुल भी नहीं चढ़नी चाहिए ऐसा करने से महिला को दिक्कत हो सकती है। और यदि आप ऊपर रहते हैं तो या तो नीचे शिफ्ट हो जाये या फिर नीचे उतरने के लिए लिफ्ट का इस्तेमाल करें।

सम्बन्ध

डिलीवरी के कम से कम तीन महीने तक कपल को बिल्कुल भी सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए वैसे तो सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को पूरी तरह से ठीक होने में छह महीने तक का समय लग सकता है। इसके अलावा हो सके तो आपको इस बारे में एक बार डॉक्टर से भी राय लेनी चाहिए।

अपनी मदद के लिए किसी को रखें

यदि आपके घर में आपकी मदद के लिए कोई है तो अच्छी बात है लेकिन यदि कोई नहीं है तो अपनी मदद के लिए किसी नौकरानी को रखें। क्योंकि सिजेरियन डिलीवरी के बाद कम से कम डेढ़ महिला तक आपको जितना हो सके आराम ही करना चाहिए।

बच्चे को दूध पिलाते समय ध्यान रखें

जब भी आप बच्चे को दूध पिलाएं तो आप सहारा लेकर आरामदायक पोजीशन में बैठें क्योंकि बच्चा दूध बीस से तीस मानते के लिए पीता है। ऐसे में यदि आप आरामदायक पोजीशन में नहीं बैठते हैं तो आपको कमर में दर्द आदि की समस्या हो सकती है।

स्ट्रेस नहीं लें

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को थोड़ी ज्यादा परेशानी हो सकती है लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है की महिला स्ट्रेस ले। बल्कि महिला को अपने आप को मानसिक रूप से रिलैक्स रखने की कोशिश करनी चाहिए। ताकि महिला को जल्द से जल्द ठीक होने में मदद मिल सकें।

डॉक्टर से चेक करवाते रहें

डॉक्टर ने आपको जो जो सावधानियां बरतने के लिए कहा है वो आप जरूर फॉलो करें साथ ही आप किसी भी दिक्कत के होने पर जल्दी से जल्दी डॉक्टर से मिलें।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद दोबारा कब गर्भधारण करना चाहिए?

वैसे तो आपके दो बच्चों में कम से कम तीन से पांच साल का गैप होना चाहिए लेकिन फिर भी यदि आप जल्दी गर्भधारण करना चाहिए है तो आपको कम से कम एक साल का समय तो लेना चाहिए ताकि सिजेरियन के बाद शरीर में आई कमजोरी को दूर करने में मदद मिल सके।

तो यह है सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उससे जुड़े टिप्स, इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि आपके शरीर को सामान्य प्रसव के लिए तैयार होने में मदद मिल सकें।

Health care tips for women after c section delivery

दूसरी प्रेगनेंसी में इन बातों का ध्यान रखें?

अधिकतर महिलाएं यही सोचती हैं की जब एक बार महिला प्रेग्नेंट हो जाती है और बच्चे को जन्म दे देती है। तो दूसरी प्रेगनेंसी में महिला को ज्यादा ध्यान देने की जरुरत नहीं होती है। इसीलिए वो दूसरी बारे माँ बनने जब जा रही होती है तो वो अपनी सेहत का ज्यादा ध्यान नहीं देती है। उनका सारा ध्यान पहले बच्चे की केयर और परिवार पर ही लगा रहता है। जबकि महिला का ऐसा करना बिल्कुल गलत होता है क्योंकि पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में ज्यादा फ़र्क़ नहीं होता है।

महिलाओं द्वारा बरती गई इसी लापरवाही के कारण दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान महिलाएं ज्यादा शारीरिक व् मानसिक रूप से थकान का अनुभव कर सकती है। साथ ही महिला को सेहत से जुडी परेशानियों का सामना भी अधिक करना पड़ सकता है ऐसे में दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ऐसी कोई भी दिक्कत नहीं हो। इसके लिए महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं कुछ टिप्स के बारे में जिनका ध्यान महिला को दूसरी प्रेगनेंसी में खासतौर से रखना चाहिए।

बच्चों में गैप रखें

सबसे पहले तो महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला जब दूसरी बारे माँ बनने जा रही है तो वो अपने दोनों बच्चों में कम से कम तीन साल का गैप जरूर रखें। ताकि महिला को शारीरिक रूप से पूरी तरह ठीक होने व् पहले बच्चे को थोड़ा बड़ा होने में मदद मिल सकें।

वजन रखें कण्ट्रोल

डिलीवरी के बाद अधिकतर महिलाओं का वजन बढ़ जाता है और बच्चे की केयर में महिलाएं अपना ध्यान रखने के बारे में तो सोच ही नहीं पाती हैं। लेकिन यदि महिला दूसरी बार प्रेग्नेंट होने जा रही है तो महिला को प्रेगनेंसी प्लानिंग से पहले और गर्भावस्था के दौरान अपने वजन को सही रखना चाहिए। क्योंकि यदि महिला का वजन ज्यादा होता है तो महिला को डाइबिटीज़, हाई ब्लड प्रैशर जैसी परेशानियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

खाने पीने का अच्छे से ध्यान रखें

महिला को दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान भी अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए क्योंकि दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान आपकी उम्र भी बढ़ जाती है। और उम्र बढ़ने का साथ कई बार महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जो की माँ व् बच्चे दोनों की सेहत के लिए सही नहीं होता है। ऐसे में महिला को दूसरी बार गर्भधारण करने पर अपनी डाइट के साथ बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए और पोषक तत्वों से युक्त डाइट लेनी चाहिए। ताकि दूसरी प्रेगनेंसी में भी माँ व् बच्चा दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।

लापरवाही नहीं करें

यदि आप ऐसा सोच रही हैं की पहली प्रेगनेंसी के बाद आपको दूसरी प्रेगनेंसी में कोई दिक्कत नहीं हो सकती है तो आपका यह सोचना बिल्कुल गलत है। क्योंकि दोनों ही प्रेगनेंसी बहुत नाजुक होती है बस फर्क इतना होता है की आपको पहली प्रेगनेंसी में जानकारी कम होती है और दूसरी प्रेगनेंसी में आपकी जानकारी बढ़ जाती है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की दूसरी प्रेगनेंसी में भी महिला अपना उतना ही ध्यान रखें जितना की महिला ने अपनी पहली प्रेगनेंसी में रखा था और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करें। ताकि दूसरी बार गर्भधारण करने पर भी महिला और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।

डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का नियमित सेवन करें

दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान आपको डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का नियमित सेवन करना चाहिए और समय से करना चाहिए। ऐसा करने से महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं होती है महिला को शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

हेल्थ चेकअप करवाते रहें

बढ़ती उम्र के साथ शरीर में बीमारियां आने का खतरा भी बढ़ता जाता है ऐसे में यदि आपने गर्भधारण किया है तो आपको समय समय पर अपना हेल्थ चेकअप भी करवाते रहना चाहिए इससे महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी और यदि कोई समस्या होगी तो उसका साथ के साथ ट्रीटमेंट भी हो जायेगा।

फिटनेस पर ध्यान दें

यदि दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान आपको कोई यह कह रहा है की आपको इस दौरान व्यायाम नहीं करना है तो ऐसा बिल्कुल नहीं करें बल्कि आपको दिन भर में थोड़ी देर व्यायाम या योगा जरूर करना चाहिए। क्योंकि इससे आपको शारीरिक व् मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी।

अपने पहले बच्चे का भी ध्यान रखें

दूसरी बार प्रेग्नेंट होने पर आप अपने पहले बच्चे का ध्यान अच्छे से रखें साथ ही उससे अपनी बातें शेयर करें और उसे बताएं की उसका छोटा भैया या बहन आने वाला है। उसे बताएं की आपके पेट को कुछ नहीं करें, छोटी छोटी बातें सीखाएं ताकि दूसरे बच्चे के आने पर वो आपकी थोड़ी बहुत मदद कर सकें और आपको ज्यादा तंग नहीं करें। इससे आपको अपनी प्रेगनेंसी और डिलीवरी के बाद दोनों बच्चों की केयर करने में कोई दिक्कत नहीं होगी।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान दूसरी पेग्नेंसी में महिला को रखना चाहिए ताकि महिला को दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान भी कोई दिक्कत नहीं हो। साथ ही कोई दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से राय लें।

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सोने के गहने कैसे साफ़ करें?

सोने के गहने महिलाओं को बहुत पसंद होते हैं और जब सोना चमक रहा होता है तो वो और भी खूबसूरत लगता है। लेकिन कई बार इस्तेमाल में रहने के कारण, रखे रहने के कारण सोने की रंगत थोड़ी फीकी पड़ने लगती है। ऐसे में सोने की शाइन को वापिस लाने के लिए यदि आप उसे सुनार के पास देते हैं तो उसका खर्चा काफी आता है साथ ही कई बार सोने में झोल होने के खतरा भी होता है। ऐसे में आप चाहे तो इस खर्चे से बच सकते हैं साथ ही अपने सोने की खोई चमक को वापिस भी ला सकते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे आसान टिप्स बताने जा रहे हैं तो घर बैठे आपके सोने की चमक को वापिस लाने में आपकी मदद कर सकते हैं।

डिटर्जेंट और हल्दी

इस तरीके का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले गुनगुने पानी में डिटर्जेंट और आधा चम्मच हल्दी घोल लें। ध्यान रखें की पानी उतना लें की आपके गहने उसमे अच्छे से भीग जाएँ। उसके बाद उसमे गहने डालकर दस से पंद्रह मिनट बाद उन्हें बाहर निकालें और मुलायम टूथ ब्रश की मदद से उसे साफ़ करें आप देखेंगे की सोना साफ़ हो रहा होगा उसके बाद साफ़ पानी से उसे साफ़ कर दें। और फिर सूखे और साफ़ कपडे से उन गहनों को सूखा लें। इसके अलावा ध्यान रखें की आप बचे हुए पानी को छान लें ताकि उसमे कोई यदि सोने का कुछ हो तो आपको मिल जाये।

कोलगेट

कोलगेट का इस्तेमाल करने से भी सोने के गहनों की चमक को बरकरार रखने में मदद मिलती है। इसके लिए आप अपने गहनों पर थोड़ा थोड़ा कोलगेट पेस्ट और हल्का पानी लगाएं उसके बाद टूथब्रश की मदद से उसे रगड़ें ऐसा करने से उनपर जमी मैल उतरने लगेगी। फिर साफ़ पानी का इस्तेमाल करके उसे धो दें और सूखे कपडे से उसे पोछ लें।

अमोनिया

अमोनिया का इस्तेमाल करने से भी आप घर पर आसानी से सोने के गहने साफ़ कर सकते हैं इसके लिए आप एक चम्मच अमोनिया में छह चम्मच पानी मिलाएं उसके बाद अपने गहने को उस पानी में भिगो दें, यदि गहने ज्यादा है तो उसके अनुसार एक भाग अमोनिया और छह भाग पानी मिलाएं। थोड़ी देर बाद उन गहनों को बाहर निकालें और हल्के ब्रश से साफ़ करें साफ़ करने के बाद सूखे कपडे से गहनों को साफ़ कर लें।

डिश वाश

बर्तन धोने के साबुन का इस्तेमाल करने से भी आपके सोने के गहनों की चमक को वापिस लाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप बर्तन धोने के साबुन को थोड़ा गुनगुने पानी में मिलाएं। उसके बाद आप उसमे गहनों को डालें और दस से पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें। ऐसा करने के बाद आप उन्हें बाहर निकालकर हल्के ब्रश की मदद से साफ़ करें और फिर साफ़ पानी से धोकर सूखे कपडे से सूखा लें। ऐसा करने से भी आपके सोने के गहनों की चमक को बरकरार रखने में मदद मिलती है।

गर्म पानी

गर्म पानी का इस्तेमाल करने से भी आप सोने के गहनों को साफ़ कर सकती है इसके लिए आप गर्म पानी में गहनों को डालकर रख दें। और फिर बहार निकालकर उन्हें ब्रश या हाथ से रगड़ें और फिर सूखे कपडे से साफ़ कर दें। ऐसा करने से भी आपके सोने के गहनों को साफ़ करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे इस्तेमाल करने से आप आसानी से घर बैठे अपने सोने की चमक को वापिस ला सकते हैं। यदि आप भी अपने सोने की चमक को बरकरार रखना चाहते हैं तो आप भी इन आसान टिप्स को ट्राई कर सकते हैं।

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क्या दूध पीते समय आपका बच्चा हाँफता है? यह कारण हो सकते हैं

जब तक बच्चा बोल नहीं पाता है तब तक बच्चे द्वारा की जाने वाली हरकतों, बच्चे में महसूस होने वाले लक्षणों को समझ कर ही माँ बाप को यह जानना पड़ता है की आखिर बच्चे को क्या दिक्कत हो रही है। जैसे की कई बच्चे दूध पीते समय हाँफने लगते हैं कई बच्चों के साथ ऐसा कभी कभी तो कई बच्चे अधिकतर ऐसा करते हैं।

बच्चे के दूध पीते समय हांफने की समस्या कई बार अनदेखी की जा सकती है लेकिन कई बार यह गंभीर बिमारी की और इशारा कर सकते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की यदि आपका बच्चा हांफने लगता है तो इसके क्या-क्या कारण हो सकते हैं।

नाक दबने के कारण

कई बार जब महिला ब्रेस्टफीड करवा रही होती है तो महिला की ब्रेस्ट का भार बच्चे की नाक पर पड़ जाता है। जिसके कारण बच्चे को अच्छे से सांस नहीं आता है और बच्चे दूध पीते समय हांफने लगता है। ऐसे में महिला को दूध पिलाते समय इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए और ब्रेस्ट के आगे के हिस्से को दो उँगलियों से दबाते हुए बच्चे को दूध पिलाना चाहिए।

हिचकी

कुछ बच्चों को दूध पीते समय अचानक से हिचकी शुरू हो जाती है ऐसे में यदि हिचकी आने पर भी बच्चे को दूध पिलाया जाये तो बच्चा दिक्कत महसूस करने लगता है। और बच्चे के गले में दूध अटकने का खतरा होता है जिसकी वजह से बच्चा हांफने लगता है।

संक्रमण

यदि आपके बच्चे को खांसी या जुखाम है या फिर कफ जमा हुआ है तो भी आपका बच्चा खाते पीते समय कई बार हांफ सकता है। ऐसे में बच्चे को खिलाते समय या दूध पिलाते समय खास ध्यान रखें।

दिल की बिमारी

यह समस्या खासकर उन बच्चों में ज्यादा देखने को मिलती है जो बच्चे दिल की बिमारी से पीड़ित होते है। ऐसे में यदि आपके बच्चे को यह समस्या ज्यादा रहती है तो आपको इस परेशानी को अनदेखा नहीं करना चाहिए। और जल्दी से जल्दी डॉक्टर को दिखाना चाहिए। क्योंकि छोटे होते ही यदि यह बिमारी पकड़ में आ जाती है तो सर्जरी करके इस समस्या से निजात पाया जा सकता है।

अस्थमा

कई बच्चों को जन्म के साथ ही अस्थमा की समस्या होती है ऐसे बच्चों को भी दूध पीते समय, ज्यादा खेलने के बाद हांफने की समस्या अधिक हो सकती है।

मुँह में दूध इक्कठा करने के कारण

कई बार बच्चा दूध पीने की बजाय मुँह में दूध इक्कठा कर लेता हैं और दूध ज्यादा होने पर वह दूध गले में अटकने लगता है जिसकी वजह से बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। और सांस सही से न लेने के कारण बच्चा हांफने लगता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से बच्चे को हांफने की समस्या हो सकती है। यदि आपके बच्चे को भी यह दिक्कत ज्यादा होती है तो इस समस्या को अनदेखा नहीं करें। बल्कि जल्द से जल्द एक बार डॉक्टर से चैक करवाएं ताकि आपको पता चल सके की आखिर आपके बच्चे को दिक्कत क्यों हो रही है। और यदि किसी शारीरिक समस्या के कारण यह दिक्कत हो रही है तो आप जल्द से जल्द उसका ट्रीटमेंट करवा सकें।

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कोरोना के बाद कमजोरी हो गई है यह करें?

कोरोना का सही से इलाज होने पर या कोरोना होने पर अच्छे से देखभाल करने पर कोरोना ठीक हो जाता है। और इसकी जांच के लिए आप चाहे तो कोरोना टेस्ट भी करवा सकते हैं यदि टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो इसका मतलब होता है की आप ठीक हो गए हैं। लेकिन कोरोना ठीक होने के बाद भी शरीर में थकान, कमजोरी जैसी समस्या लगातार बनी रह सकती है।

ऐसे में कोरोना ठीक होने के बाद शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के लिए आपको अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि जल्द से जल्द इस समस्या से निजात पाकर आप अच्छे से फिट हो सकें। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे हेल्थ से जुड़े टिप्स बताने जा रहे हैं जिन्हे इस्तेमाल करने से आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है।

पॉजिटिव रहें

कोरोना के कारण लोग मानसिक रूप से बहुत ज्यादा परेशान हो रहे हैं जिसकी वजह से उनकी शारीरिक परेशानियां भी बढ़ रही है। ऐसे में कोरोना के बाद शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के लिए सबसे पहले ध्यान रखें की आप बिल्कुल भी नेगेटिव नहीं सोचें और पॉजिटिव रहें। जितना ज्यादा आप पॉजिटिव रहेंगे उतना ही जल्दी आपको ठीक होने में मदद मिलेगी।

वैक्सीन लगवाएं

यदि आप कोरोना से ठीक भी हो गए हैं तो जल्द से जल्द कोरोना वैक्सीन लगवाएं ताकि आपकी इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिल सके। जिससे आपको शारीरिक रूप से फिट होने और कोरोना के डर को कम करने में मदद मिल सके।

रूटीन बेहतर रखें

दिन की शुरुआत से लेकर रात तक अपना रूटीन सही रखें, समय से खाएं, समय से सोएं, योगा करें, अपने आप को खुश रखने की कोशिश करें आदि। क्योंकि जितना आपका रूटीन सही होगा उतना ही जल्दी आपको फिट होने में मदद मिलेगी।

सुबह समय से उठें

कोरोना से आई कमजोरी को दूर करने के लिए आपको सबसे पहले सुबह जल्दी उठने की आदत डालनी चाहिए। क्योंकि सुबह की ताज़ी हवा और धूप दोनों ही आपकी सेहत के लिए बेहतर होती है। जिससे आप एक्टिव, रिफ्रेश और ऊर्जा से भरपूर महसूस करते हैं।

व्यायाम व् योगासन

सुबह समय से उठने के बाद आपको थोड़ी देर व्यायाम व् योगासन भी करना चाहिए। ज्यादा नहीं तो कम से कम दस से पंद्रह मिनट जरूर करना चाहिए। इससे आपको मानसिक रूप से रिलैक्स महसूस होने के साथ शारीरिक रूप से भी जल्दी फिट होने में मदद मिलेगी। ध्यान रखें की ज्यादा भागादौड़ी वाला व्यायाम नहीं करें हल्का फुल्का व्यायाम ही करें, ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें, मैडिटेशन करें।

आहार का खास ध्यान रखें

कोरोना से ठीक होने के बाद आपको अपनी डाइट का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। और ऐसी डाइट लेनी चाहिए जो पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ पचाने में भी आसान हो। जैसे की सब्जियों से बना दलिया खाएं, खिचड़ी खाएं (खिचड़ी में भी सब्जियों का इस्तेमाल करें), दाल का पानी, फ्रूट्स, आदि खाएं।

जीरा धनियां सौंफ की चाय पीएं

रोजाना दिन में एक या दो बार जीरा धनियां सौंफ की चाय बनाकर जरूर पीएं इससे आपकी इम्युनिटी बढ़ेगी सतह ही शरीर में आइए कमजोरी को जल्द से जल्द दूर करने में मदद मिलेगी।

हल्दी वाला दूध पीएं

रात को सोने से पहले रोजाना हल्दी वाला दूध पीएं इससे आपको शारीरिक रूप से फिट रहने में मदद मिलेगी। साथ ही बेहतर नींद भी आएगी और शरीर ऊर्जा से भरपूर रहेगा। इसके अलावा हल्दी वाला दूध इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करता है।

ड्राई फ्रूट्स खाएं

दिनभर में थोड़े ड्राई फ्रूट्स भी जरूर खाएं, क्योंकि ड्राई फ्रूट्स पोषक तत्वों की खान होते हैं। जो शरीर को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करते हैं।

दवाइयों का सेवन

यदि आपको डॉक्टर ने कुछ दवाइयों का सेवन करने के लिए कहा है तो आप अपनी दवाइयों का समय से सेवन करें। ताकि आपको जल्द से जल्द ठीक होने में मदद मिल सके और शरीर में आई परेशानियों को दूर करने में भी मदद मिल सके।

भरपूर आराम करें

जितना बेहतर आप नींद लेंगे उतना ही आपकी बॉडी को आराम पहुंचेगा। और जितना शरीर को आराम पहुंचेगा उतना ही जल्दी आपको फिट होने में मदद मिलेगी। ऐसे में आपको जितना हो सके अच्छे से नींद लेनी चाहिए। साथ ही रात को समय से सोना चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे ट्राई करने से आपको कोरोना के बाद शरीर में आई कमजोरी को दूर करने में मदद मिलती है। यदि आप भी कोरोना के कारण आई शारीरिक परेशानी से जल्द से जल्द रिकवर होना चाहते हैं तो आप भी इन टिप्स को जरूर ट्राई करें।

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