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प्रेगनेंसी में काढ़ा पीने के नुकसान

सेहत व् स्वास्थ्य को सही रखने के लिए काढ़ा का सेवन करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार काढ़ा में एंटी ऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं जो इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं। और जब आपकी इम्युनिटी मजबूत होती है तो आपको बिमारियों से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है। लेकिन जब बात प्रेगनेंसी की आती है तो काढ़ा का सेवन करना महिला व् बच्चे के लिए सेफ नहीं माना जाता है।

और यदि महिला काढ़ा का सेवन करती है तो इसके कारण महिला को शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान काढ़ा का सेवन करने से गर्भवती महिला को कौन कौन से नुकसान होते हैं उस बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भपात का होता है खतरा

काढ़ा बनाने के लिए जिन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है उनकी तासीर गर्म होती है। जैसे की अदरक, गिलोय, इलायची, लौंग, तुलसी पत्ता, आदि। इन सभी के साथ मिलने से काढ़ा की तासीर बहुत ज्यादा गर्म हो जाती है और जरुरत से ज्यादा गर्म तासीर वाली चीजों का सेवन करने की प्रेगनेंसी के दौरान मनाही होती है। क्योंकि इससे गर्भ गिरने, ब्लीडिंग होने, समय से पहले बच्चा होने का खतरा बढ़ जाता है।

पेट सम्बंधित समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है। ऐसे में काढ़ा का सेवन करने से महिला को पेट सम्बंधित समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है। जैसे की महिला को पेट में गैस, अपच, खट्टी डकार जैसी परेशानी होने की दिक्कत हो जाती है।

नकसीर

गर्भावस्था के दौरान महिला यदि काढ़ा का सेवन करती है तो इस कारण महिला को नाक में से खून निकलने की दिक्कत हो सकती है। और नकसीर निकलने का कारण भी काढ़ा के कारण शरीर में पैदा हुई गर्मी होती है।

यूरिन से जुडी परेशानी

काढ़ा का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को बहुत ज्यादा यूरिन पास करने की इच्छा हो सकती है। साथ ही पेशाब करते समय जलन महसूस होना जैसी दिक्कत भी हो सकती है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो प्रेग्नेंट महिला को काढ़ा का सेवन करने से होते हैं। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सेफ रहने के लिए और बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए काढ़ा का सेवन करने से बचना चाहिए।

Harmful effect of drinking kadha in pregnancy

प्रेगनेंसी में वाइट डिस्चार्ज होने के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?

गर्भावस्था के दौरान महिला को बॉडी में अलग अलग से लक्षण महसूस हो सकते हैं। जैसे की उल्टियां अधिक होना, पैरों हाथों में सूजन होना, जोड़ो में दर्द का बढ़ना, प्राइवेट पार्ट से डिस्चार्ज होना, आदि। और यह सभी प्रेगनेंसी के दौरान महिला को महसूस होने वाले आम लक्षण होते हैं। लेकिन यदि कोई दिक्कत ज्यादा हो असहनीय हो तो उसे इग्नोर करना महिला के लिए सही नहीं होता है। आज इस आर्टिकल में प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली वाइट डिस्चार्ज की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं।

क्या प्रेगनेंसी में सफ़ेद पानी निकलना आम बात होती है?

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में लगातार हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं। और इन्ही हार्मोनल बदलाव होने के कारण महिला को तरह तरह की दिक्कतें भी हो सकती है। साथ ही हार्मोनल बदलाव होने के कारण महिला को सफ़ेद पानी निकलने की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान प्राइवेट पार्ट से थोड़ा बहुत सफ़ेद पानी निकलना आम बात होती है।

सफ़ेद पानी दिखने में पतला व् गंधहीन होता है। लेकिन यदि महिला को सफ़ेद पानी की समस्या अधिक हो, डिस्चार्ज का रंग अलग हो, सफ़ेद डिस्चार्ज के साथ खून या बदबू आये। तो ऐसे केस में महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद पानी निकलने के क्या क्या कारण होते हैं।

हार्मोनल बदलाव

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में लगातार हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में एस्ट्रोजन हॉर्मोन का लेवल बढ़ता है जिसकी वजह से महिला को सफ़ेद पानी की समस्या होती है।

गर्भाशय में होने वाले बदलाव

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भाशय के आकार में लगातार बदलाव होता हैं साथ ही जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है वैसे वैसे गर्भाशय व् प्राइवेट पार्ट के आस पास का हिस्सा सॉफ्ट होने लगता है जिस वजह से बॉडी से ज्यादा डिस्चार्ज निकलने लगता हैं। ताकि माँ व् बच्चे को किसी भी तरह की दिक्कत न हो और माँ व् बच्चा बिमारियों और संक्रमण से सुरक्षित रहें।

इन्फेक्शन

यदि गर्भावस्था के दौरान महिला को प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन हो जाता है। तो इस कारण भी महिला को सफ़ेद पानी ज्यादा निकलने की समस्या हो जाती है। साथ ही जब महिला को इन्फेक्शन होता है तो डिस्चार्ज के रंग में बदलाव या डिस्चार्ज के साथ खून भी निकल सकता हैं।

प्रसव का होता है संकेत

यदि महिला को प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद पानी बहुत ज्यादा आ रहा होता है तो इसका मतलब यह भी हो सकता है की एमनियोटिक बैग यानि की पानी की थैली फट गई है। और बच्चा होने वाला है ऐसे केस में महिला को जल्दी से जल्दी डॉक्टर से मिलना चाहिए।

कब नहीं करें वाइट डिस्चार्ज को अनदेखा?

जब महिला को डिस्चार्ज के रंग में बदलाव महसूस हो, डिस्चार्ज बहुत ज्यादा हो रहा हो, डिस्चार्ज के साथ खून भी आये, सफ़ेद पानी निकलने के साथ प्राइवेट पार्ट से गन्दी बदबू महसूस हो, प्राइवेट पार्ट में खुजली, जलन, सूजन, लालिमा नज़र आये तो ऐसे केस में महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा होने का कारण महिला को इन्फेक्शन होना हो सकता है ऐसे लक्षण महसूस होने पर महिला को जल्दी से जल्दी डॉक्टर से मिलना चाहिए।

क्या सफ़ेद पानी गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए नुकसानदायक होता है?

प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद पानी का निकलना गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए नुकसानदायक नहीं होता है क्योंकि यह बच्चे को संक्रमण से सुरक्षित रखने में मदद करता है। लेकिन यदि सफ़ेद पानी निकलने का कारण इन्फेक्शन होता है तो इससे बच्चे को नुकसान पहुँच सकता है ऐसे में सफ़ेद पानी की मात्रा और इसे रंग के बदलाव पर नज़र रखना जरुरी होता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद पानी निकलने के कारण व् उससे जुड़े अन्य टिप्स, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी प्रेगनेंसी के दौरान इन बातों का ध्यान रखें। ताकि आपको प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

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सुंदरता बढ़ाने के लिए आलू का इस्तेमाल कैसे करें?

आलू एक ऐसी सब्ज़ी है जो हर घर में आसानी से मिल जाती है। साथ ही आलू एक ऐसी सब्ज़ी है जिसका इस्तेमाल आप अधिकतर सब्जियों के साथ कर सकते हैं और सब्जियों के स्वाद को और भी बढ़ा सकते हैं। सब्जियों का स्वाद बढ़ाने के साथ आलू बहुत से गुणों से भी भरपूर होता है जैसे की आलू में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैंजो आपके शरीर को फिट रखने में मदद करते हैं आलू आपकी सुंदरता को बढ़ाने में भी बहुत फायदेमंद होता है, आदि। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको आलू का इस्तेमाल सुंदरता बढ़ाने के लिए किस तरह से किया जाता है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

आलू का रस

सबसे पहले आप आलू को कसकर उसका रस निकाल लें और उसके बाद रुई की मदद से इसे अपने चेहरे पर लगाएं। ऐसा रस के सूखने के बाद दो से तीन बार लगातार करें और जब आलू के रस को आपकी स्किन अच्छे से सोख ले उसके बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को साफ़ कर लें। एक हफ्ते तक लगातार इस उपाय को करने पर आपको अपनी स्किन में फ़र्क़ जरूर नज़र आएगा।

आलू की स्लाइस से करें मसाज

यदि आपके पास समय नहीं है तो आप फटाफट से आलू की स्लाइस काटें, और उसे अपने चेहरे पर लगाएं। दो से तीन मिनट तक इसे अपने चेहरे और गर्दन पर रगड़ें उसके बाद इसे दस से पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें। फिर साफ पानी का इस्तेमाल करके अपने चेहरे को धो लें। सबसे अच्छा है की आप इस उपाय को रात को सोने से पहले करें और सुबह उठकर अपने चेहरे को धो लें कुछ दिनों में आपको अपनी स्किन ग्लोइंग व् चमकदार महसूस होगी।

हल्दी के साथ इस्तेमाल करें आलू

दो चम्मच आलू के रस में दो चुटकी हल्दी मिलाएं और अच्छे से इसे मिक्स करने के बाद चेहरे पर लगा लें। जब यह पेस्ट सूख जाएँ तो साफ पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को धो लें। हफ्ते में दो से तीन बार इस उपाय को करें आप अपने चेहरे में आये बदलाव को जरूर महसूस करेंगे। इस उपाय को करने से चेहरे को निखरा हुआ बनाने के साथ चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों की समस्या से भी निजात पाने में मदद मिलती है।

मुल्तानी मिट्टी और आलू

इस पैक को बनाने के लिए आप सबसे पहले आप एक छोटा सा आलू लें और उसे अच्छे से पीस लें। उसके बाद पीसे हुए आलू में दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी का पाउडर और थोड़ा सा गुलाब जल मिलाएं। अब इन सब चीजों को अच्छे से मिक्स कर लें और इस पैक को चेहरे और गर्दन पर लगा लें। उसके बाद इसे आधे घंटे के लिए चेहरे पर ही छोड़ दें। फिर साफ़ पानी से इसे साफ कर लें ये उपाय करने से आपके चेहरे की स्किन को चमकदार बनाने में मदद मिलती है।

कच्चा दूध और आलू का रस

कच्चे दूध को क्लीन्ज़र के रूप में जाना जाता है साथ ही आलू का रस स्किन की चमक को बरकरार रखने में मदद करता हैं। ऐसे जब इन दोनों का इस्तेमाल साथ में चेहरे के लिए किये जाता है तो इससे स्किन पर जमी गंदगी, चेहरे पर मौजूद दाग धब्बे, झाइयां आदि सभी समस्याओं से निजात पाने में मदद मिलती है। इस उपाय को करने के लिए आप दो चम्मच कच्चे दूध में दो चम्मच आलू का रस मिलाएं। उसके बाद इसे रुई की मदद से चेहरे पर तीन से चार बार लगाएं और जब यह अच्छे से सूख जाएँ तो साफ़ पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को साफ़ कर दें।

अंडा और आलू

इस पेस्ट को बनाने के लिए आप दो चम्मच आलू के रस में एक अंडे को तोड़कर उसमे अंडे का सफ़ेद हिस्सा मिक्स करें। जब यह अच्छे से मिक्स हो जाये तो उसके बाद इसे चेहरे पर लगाएं, गर्दन पर लगाएं। उसके बाद आँखों पर एक आलू की स्लाइस काटकर रख लें और कम से कम बीस मिनट के लिए आराम से लेट जाएँ और बोलें भी नहीं। बीस मिनट बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें। आपको धोने के बाद अपने चेहरे पर तुरंत ही चेहरे पर फ़र्क़ नज़र आएगा।

तो यह हैं आलू के कुछ बेहतरीन उपाय जो आपके चेहरे के ग्लो को बरकरार रखने में मदद करता है। यदि आप भी चाहें तो चेहरे की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने के लिए इनमे से किसी भी टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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डिलीवरी के समय कट नहीं लगेगा अगर करेंगे यह उपाय

अधिकतर महिलायें डिलीवरी का समय पास आने पर यही चाहती है की उनकी डिलीवरी नोर्मल हो। क्योंकि ऐसा माना जाता है की नोर्मल डिलीवरी होने पर डिलीवरी के बाद महिला की परेशानियां कम होती है और महिला को जल्दी से जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है। जबकि सच बात यह है की यदि महिला की नोर्मल डिलीवरी तो होती है लेकिन उसमे भी महिला को टाँके लगते हैं।

तो भी महिला को डिलीवरी के बाद थोड़ी अधिक दिक्कत होती है। लेकिन ऐसा भी जरुरी नहीं होता है की हर महिला को नोर्मल डिलीवरी के दौरान टाँके लगते हैं। क्या आप प्रेग्नेंट हैं और चाहती है की आपकी नोर्मल डिलीवरी हो और टाँके भी नहीं लगे तो आइये आज इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसे टिप्स के बारे में ही बताने जा रहे हैं।

खान पान का ध्यान

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि महिला के शरीर को नोर्मल डिलीवरी के लिए तैयार होने में मदद मिल सके। जितना महिला का शरीर तैयार होगा, गर्भ में बच्चा स्वस्थ होगा उतना ही डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिलेगी और कट लगने की दिक्कत भी नहीं होगी।

एक्टिव रहे

गर्भावस्था के दौरान महिला का एक्टिव रहना भी इस समस्या से बचने का आसान उपाय होता है। क्योंकि जितना महिला एक्टिव रहती है उतना ही प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स कम होती है। बच्चेदानी का मुँह अच्छे से खुलता है जिससे डिलीवरी के दौरान कट लगने की दिक्कत से बचे रहने में मदद मिलती है।

व्यायाम करें

यदि महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं हैं। तो महिला प्रेगनेंसी के दौरान थोड़ा बहुत व्यायाम कर सकती है बस महिला को इस बात का ध्यान रखना है की व्यायाम करते समय पेट पर किसी भी तरह का दबाव नहीं पड़े। और यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान व्यायाम करती है तो इससे शरीर को प्रसव के लिए तैयार होने में मदद मिलती है। और जब प्रसव के लिए शरीर तैयार होता है तो टाँके लगने के चांस भी कम हो जाते हैं।

प्रसव को उत्तेजित करने वाले आहार लें

डिलीवरी का समय पास आने पर महिला को ऐसी डाइट लेनी चाहिए जिससे महिला की प्रसव पीड़ा को उत्तेजित करने में मदद मिलेगी। जैसे की महिला को पालक, ड्राई फ्रूट्स, घी, लहसुन, खजूर, पालक, आदि का सेवन महिला कर सकती है। क्योंकि जितना अपने आप प्रसव पीड़ा उत्तेजित होगी बच्चेदानी का मुँह खुलेगा। उतना ही महिला को प्रसव के दौरान लगने वाले टांकों की समस्या से बचे रहने में मदद मिलेगी।

बच्चे को नीचे की तरफ करने की कोशिश करें

वैसे तो नौवें महीने में बच्चा धीरे धीरे अपने जन्म लेने की सही पोजीशन में आने लगता है लेकिन कुछ केस में ऐसा नहीं होता है। जिसकी वजह से सिजेरियन डिलीवरी या फिर नोर्मल डिलीवरी में टाँके लगने के चांस अधिक हो जाते हैं। ऐसे में महिला के लिए जरुरी होता है की प्रसव के दौरान टाँके न लगे इसके लिए महिला को नौवें महीने में ऐसे काम करने चाहिए जिससे बच्चे का भार नीचे की तरफ बढ़ें। और इसके लिए लिए महिला वॉक कर सकती है, कीगल व्यायाम कर सकती है, स्क्वाट्स लगा सकती है, आदि।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान रखने से महिला रखने से महिला को प्रसव पीड़ा को उत्तेजित करने में मदद मिलत्ती है साथ ही प्रसव के दौरान लगने वाले टांकों की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

डिलीवरी के बाद महिला भूलकर भी न करें यह गलतियां

माँ बनने के बाद महिला के शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं जैसे की महिला का वजन बढ़ जाता है, टाँके लगे हुए होते है, महिला बहुत कमजोर हो जाती है, ब्लीडिंग बहुत ज्यादा होती है, पहली बार माँ बनी है तो बच्चे की केयर को लेकर दिक्कत होती है, आदि। ऐसे में महिला के लिए डिलीवरी के बाद जल्दी से जल्दी फिट होने के लिए महिला को अपनी ज्यादा केयर करने की जरुरत होती है।

जैसे की महिला को भरपूर आराम करना चाहिए, खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, आदि। इसके अलावा और भी बहुत सी बातें होती है जिनका डिलीवरी के बाद महिला को ध्यान रखना होता है और जरुरी होता है की महिला किसी भी तरह की गलती नहीं करें। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको डिलीवरी के बाद महिला को कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए उस बारे में बताने जा रहे हैं।

टांकों की केयर में लापरवाही

डिलीवरी के बाद महिला को टांकों की देखभाल अच्छे से करनी चाहिए जैसे की पानी नहीं लगने देना चाहिए, टांको पर दवाई लगनी चाहिए, ज्यादा जोर से उठना बैठना नहीं चाहिए, ज्यादा तेलीय चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए, आदि। ऐसा करने से टांकों से जुडी परेशानी होने का खतरा रहता है।

खान पान में लापरवाही

डिलीवरी के बाद महिला का खाना पीना अच्छा और पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए साथ ही महिला को सही समय से अपनी डाइट भी लेनी चाहिए। ताकि महिला स्वस्थ रहे और महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिल सके। साथ ही बच्चे के लिए भी ब्रेस्टफीड की कमी नहीं हो। ऐसे में महिला के लिए जरुरी होता है की डिलीवरी के बाद महिला अपने खान पान में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करें।

आराम नहीं करना

बच्चे के जन्म के बाद महिला के शरीर में बहुत कमजोरी आ जाती है और उस कमजोरी को दूर करने के लिए जरुरी होता है की गर्भवती महिला जितना हो सके आराम करें। क्योंकि जितना ज्यादा महिला आराम करती है उतना ही जल्दी महिला को फिट होने में मदद मिलती है। ऐसे में डिलीवरी के बाद महिला को आराम करने में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए और ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए।

जरुरत से ज्यादा काम करना शुरू कर देना

टाँके काटने बाद आपको ऐसा महसूस हो सकता है की आप ठीक हैं आप काम कर सकती है। लेकिन ऐसा आप सोच रही होती है जबकि आपका शरीर अंदर से बहुत कमजोर होता है ऐसे में डिलीवरी के बाद महिला को कम से कम एक से डेढ़ महीने तक बिल्कुल भी काम नहीं करना चाहिए बस अपने ऊपर ध्यान देना चाहिए।

व्यायाम करना

बच्चे के जन्म के बाद महिला के वजन में बढ़ोतरी होना बहुत आम बात होती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की बच्चे के जन्म के बाद महिला तुरंत व्यायाम करना शुरू कर दें। क्योंकि डिलीवरी के बाद यदि महिला व्यायाम करना तुरंत शुरू कर देती है तो इसके कारण माँ और बच्चे दोनों को दिक्कत होती है।

बच्चे को ब्रेस्टफीड नहीं करवाना

कुछ महिला ब्रेस्ट साइज बढ़ने के डर के कारण डिलीवरी के बाद बच्चे को स्तनपान नहीं करवाती हैं। जो की गलत बात होती है महिला को ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए। क्योंकि ब्रेस्टफीड न करवाने के कारण माँ और बच्चे दोनों की सेहत पर गलत असर पड़ता है।

प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई

बच्चे के जन्म के तुरंत बाद से ही महिला को ब्लीडिंग होनी शुरू हो जाती है और यह ब्लीडिंग तीन से चार हफ्ते तक महिला को हो सकती है। ऐसे में पैड बदलना, प्राइवेट पार्ट की साफ सफाई आदि का ध्यान महिला को अच्छे से रखना चाहिए। क्योंकि यदि महिला प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान नहीं रखती है तो इसके कारण महिला को इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है।

सम्बन्ध बनाना

बच्चे के जन्म के बाद महिला और पुरुष को सम्बन्ध भी नहीं बनाना चाहिए खासकर जब तक महिला के टाँके अच्छे से ठीक नहीं हो जाते, महिला शारीरिक रूप से फिट नहीं हो जाती, ब्लीडिंग बंद नहीं हो जाती है, आदि। क्योंकि यदि महिला फिट नहीं नहीं है या महिला को ब्लीडिंग हो रही है और आप सम्बन्ध बना लेते हैं तो इसके कारण महिला को इन्फेक्शन व् अन्य शारीरिक परेशानियां होने का खतरा रहता है।

तो यह हैं कुछ गलतियां जो डिलीवरी के बाद महिला को नहीं करनी चाहिए। क्योंकि यदि महिला ऐसी किसी भी तरह की लापरवाही करती है तो इसके कारण महिला को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

प्रेगनेंसी में मालिश करवाते समय भूलकर भी न करें यह गलतियां

गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में महिला इन परेशानियों से निजात पाने के लिए कुछ न कुछ जरूर करती है। जैसे की बॉडी पेन की समस्या से राहत के लिए महिलाएं मालिश का सहारा लेती हैं। प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला मालिश करवाती है तो इससे महिला की मांसपशियों व् हड्डियों को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है।

स्ट्रेस से राहत मिलती है, ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है, शरीर को प्रसव के लिए तैयार करने में मदद मिलती है, लेबर पेन में आसानी होती है, आदि। मालिश करवाना प्रेगनेंसी के दौरान बिल्कुल सेफ होता है। लेकिन मालिश करवाते समय कुछ छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है। ताकि मालिश करवाने के कारण महिला को कोई दिक्कत नहीं हो।

प्रेगनेंसी के दौरान मालिश करवाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

यदि आप प्रेग्नेंट हैं और प्रेगनेंसी के दौरान मालिश करवाने की सोच रही है तो कुछ बातों का ध्यान रखें ताकि प्रेगनेंसी में मालिश करवाने के आपको फायदे मिलें। और आपको किसी भी तरह की परेशानी नहीं तो आइये अब जानते हैं वो कौन सी बातें हैं।

पहली तिमाही में मालिश करवाने से बचें

गर्भावस्था की पहली तिमाही में महिला को मालिश करवाने से बचना चाहिए क्योंकि इस दौरान जितनी सावधानी बरती जाये और जितना आराम किया जाये उतना अच्छा होता है। साथ ही यदि मालिश के दौरान यदि कोई गलती हो जाती है जैसे की ज्यादा जोर से मालिश करते है, पेट पर दबाव पड़ जाता है तो इसके कारण गर्भपात होने का खतरा होता है, शिशु का विकास अच्छे से नहीं होने की सम्भावना होती है, आदि।

उल्टा लेटकर मालिश नहीं करवाएं

प्रेगनेंसी के दौरान ध्यान रखें की महिला पेट के बल लेटकर मालिश नहीं करवाएं। क्योंकि पेट के बल मालिश करवाने से गर्भ पर बुरा असर पड़ता है क्योंकि पेट पर दबाव पड़ता है। और पेट पर दबाव पड़ने के कारण महिला के साथ शिशु को भी दिक्कत होती है।

ज्यादा तेजी से और दबाव डालकर मालिश नहीं करें

गर्भावस्था के दौरान बॉडी को रिलैक्स करने के लिए मालिश करवानी चाहिए। और महिला को आराम जब महसूस होता है जब महिला की मालिश हल्के हल्के हाथों से की जाती है। यदि महिला ज्यादा तेजी और दबाव डालकर मालिश करवाती है तो इसके कारण महिला की दिक्कत कम नहीं होती है बल्कि बढ़ जाती हैं। खासकर रीढ़ की हड्डी और पेट पर दबाव डालकर तो बिल्कुल भी मसाज नहीं करनी चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान मालिश करवाने के बेहतरीन फायदे

  • गर्भावस्था के दौरान मालिश करवाने से हड्डियों और मांसपेशियों को आराम मिलता है।
  • महिला का तनाव होता है कम।
  • प्रेगनेंसी महिला को रिलैक्स महसूस होता है।
  • अनिंद्रा की समस्या होती है दूर।
  • शरीर प्रसव के लिए होता है तैयार और नोर्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ते हैं।
  • शरीर में ब्लड फ्लो होता है बेहतर।
  • पैरों में सूजन की समस्या से आराम मिलता है।
  • स्किन सम्बन्धी परेशानियों से निजात मिलता है।
  • ब्लड प्रैशर की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • शरीर में दर्द, जोड़ो में दर्द, की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान मालिश करवाने के फायदे। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान मालिश जरूर करवानी चाहिए। साथ ही ऊपर दी गई बातों का भी ध्यान रखें ताकि प्रेगनेंसी के दौरान मालिश करवाने के आपको बेहतरीन फायदे मिल सके जिससे आपको प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिले।

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डिलीवरी के बाद आई कमजोरी को दूर करने की डाइट

जब महिला एक नन्हे शिशु को जन्म देती है और एक नन्ही जान को इस दुनिया में लाती है। तो इस समय केवल एक बच्चे का ही जन्म नहीं होता है बल्कि महिला का भी एक नया जन्म होता है। क्योंकि एक बच्चे को जन्म देना महिला के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं होता है। और डिलीवरी के बाद महिला का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है। ऐसे में डिलीवरी के बाद अपनी फिटनेस का ध्यान रखने के साथ महिला को बच्चे का भी ध्यान रखना पड़ता है।

और इसके लिए जरुरी होता है की डिलीवरी के बाद महिला अपनी डाइट का खास ध्यान रखें। क्योंकि महिला जितना पोषक तत्वों से भरपूर डाइट का सेवन करती है। उतना ही जल्दी महिला को फिट होने में मदद मिलती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की डिलीवरी के बाद शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के लिए महिला को क्या क्या खाना चाहिए।

लड्डू

डिलीवरी के बाद अलग अलग तरह के लड्डू बनाएं जाते हैं जैसे की सौंठ के लड्डू, ड्राई फ्रूट्स के लड्डू, गोंद के लड्डू, अजवाइन के लड्डू आदि। यह सभी लड्डू देसी घी में बनाएं जाते हैं जिससे इसमें पोषक तत्व बढ़ जाते हैं और इन लड्डू का रोजाना सुबह शाम सेवन करने से डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में एनर्जी भरपूर रखने में मदद मिलती है। साथ ही डिलीवरी के बाद आई कमजोरी को जल्दी से जल्दी दूर करने में मदद मिलती है।

देसी घी

यदि आपका प्रसव सामान्य हुआ है तो डिलीवरी के बाद महिला को घी का सेवन भरपूर करना चाहिए। घी का सेवन महिला दाल सब्ज़ी में डालकर, रोटी पर लगाकर, हलवा आदि बनाकर या वैसे पीकर भी कर सकती है। डिलीवरी के बाद जितना महिला घी का सेवन करती है। उतना ही जल्दी महिला को फिट होने में मदद मिलती है।

दालें खाएं भरपूर

रोजाना किसी न किसी दाल का सेवन महिला को डिलीवरी के बाद जरूर करना चाहिए। क्योंकि दाल का सेवन करने से महिला को प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम व् अन्य पोषक तत्व भरपूर मिलते हैं। जो महिला की मांसपेशियों, हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं और डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में कमजोरी भी दूर होती है।

हरी सब्जियां

बच्चे के जन्म के बाद शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के लिए महिला को हरी सब्जियों का भी भरौर सेवन करना चाहिए। क्योंकि हरी सब्जियों का सेवन करने से महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। जिससे महिला डिलीवरी के बाद जल्दी से जल्दी फिट होती है।

दूध

बच्चे के जन्म के बाद शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के लिए महिला को एक दिन में दो से तीन गिलास दूध भी जरूर पीना चाहिए। क्योंकि दूध में कैल्शियम भरपूर मात्रा में मौजूद होता है और कैल्शियम डिलीवरी के बाद महिला की हड्डियों में आई कमजोरी को दूर करने में मदद करता है। जिससे महिला को जल्द से जल्द फिट होने में मदद मिलती है।

अंडा

डिलीवरी के बाद महिला को प्रोटीन युक्त डाइट का भरपूर सेवन करना चाहिए और अंडा प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत होता है। इसीलिए डिलीवरी के बाद जल्दी फिट होने के लिए महिला चाहे तो अंडे का सेवन भी कर सकती है।

बादाम व् अन्य ड्राई फ्रूट्स

डिलीवरी के बाद महिला को बादाम व् अन्य ड्राई फ्रूट्स का सेवन भी जरूर करना चाहिए क्योंकि सूखे मेवे पोषक तत्वों जो भरपूर होते हैं। जो डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी फिट करने के साथ बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं।

गुनगुना पानी

बच्चे के जन्म के बाद महिला को दिन में जब भी पानी पीने की इच्छा हो तो महिला को गुनगुना पानी ही पीना चाहिए। क्योंकि गुनगुना पानी पीने से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं, पेट सही रहता है, एनर्जी मिलती है, दर्द से राहत मिलती है, आदि। जिससे महिला को डिलीवरी के बाद जल्दी फिट होने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खाद्य पदार्थ जिनका सेवन यदि डिलीवरी के बाद महिला करती है तो ऐसा करने से डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी से जल्दी फिट होने में मदद मिलती है। साथ ही महिला को डिलीवरी के बाद जितना हो सके आराम करना चाहिए। क्योंकि जितनी अच्छी महिला डाइट लेती है और जितना महिला आराम करती है। उतना ही जल्दी महिला को डिलीवरी के बाद फिट होने में मदद मिलती है।

Diet to recover weakness after delivery

प्रेगनेंसी में हल्दी दूध पीना सेफ होता है या नहीं?

प्रेग्नेंट होते ही महिला खाने पीने की चीजों को लेकर बहुत विचार विमर्श करती रहती है की महिला क्या खाये जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ और बच्चे को फायदा मिलें। इसीलिए गर्भावस्था के दौरान खान पान का सबसे अधिक महत्व होता है। साथ ही घर के सदस्यों के साथ गर्भवती महिला को जानने वाले सभी लोग महिला को इस बात के लिए राय भी देते हैं की प्रेगनेंसी में महिला को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान हल्दी दूध का सेवन गर्भवती महिला को करना चाहिए या नहीं इस बारे में बात करने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान हल्दी दूध का सेवन करना चाहिए या नहीं?

हल्दी औषधीय गुणों से भरपूर होती है और दूध भी पोषक तत्वों से भरपूर होता है। ऐसे में दूध और हल्दी को जब साथ मिला देते हैं तो इसका फायदा भी दुगुना हो जाता है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान हल्दी दूध पीना चाहिए या नहीं इसके बारे में जानना महिला के लिए बहुत जरुरी होता है। तो इसका जवाब है की गर्भवती महिला सिमित मात्रा में हल्दी दूध का सेवन कर सकती है। क्योंकि इसका सेवन करना माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है।

लेकिन जरुरत से ज्यादा हल्दी दूध का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए क्योंकि जरुरत से ज्यादा कोई भी चीज भ्रूण के विकास पर उल्टा प्रभाव भी डाल सकती है। ऐसे में दिन में एक बार एक गिलास दूध में दो चुटकी भर हल्दी या कच्ची हल्दी को आधा चम्मच पीसकर डालकर महिला सेवन कर सकती है।

हल्दी दूध में मौजूद पोषक तत्व

एंटी ऑक्सीडेंट गुण, एंटी इंफ्लामेटरी गुण, कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, फाइबर व् अन्य पोषक तत्वों की हल्दी दूध में मात्रा भरपूर होती है। और यह सभी पोषक तत्व आपको तंदरुस्त रखने व् बिमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

प्रेगनेंसी में हल्दी दूध पीने के फायदे

गर्भवती महिला यदि हल्दी दूध का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला व् होने वाले बच्चे को बहुत से फायदे मिलते हैं आइये अब उन फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

इम्युनिटी होती है बूस्ट

हल्दी वाले दूध में एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और यह एंटी ऑक्सीडेंट्स गर्भवती महिला के इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद करते हैं। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे को बिमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

दर्द व् सूजन से राहत

अधिकतर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान सूजन व् दर्द की समस्या से परेशान रहती हैं। लेकिन हल्दी वाले दूध का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि हल्दी वाले दूध में एंटी इंफ्लामेटरी गुण मौजूद होते हैं।

पेट की समस्या से निजात

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से और वजन बढ़ने के कारण गर्भवती महिला की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला हल्दी दूध का सेवन करती है तो ऐसा करने से महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रहने और पेट सम्बन्धी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है। क्योंकि हल्दी वाले दूध में फाइबर प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है।

अनिंद्रा की समस्या होती है दूर

बहुत सी गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान स्ट्रेस, नींद न आने की समस्या, शरीर में ऊर्जा में कमी आदि की समस्या हो जाती है। उन गर्भवती महिलाओं के लिए हल्दी दूध का सेवन बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि हल्दी दूध का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को इन सभी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।

इन्फेक्शन से बचाव

हल्दी दूध का सेवन करने से गर्भवती महिला को सर्दी, जुखाम, गले में खराश आदि परेशानियों से बचे रहने में भी मदद मिलती है। क्योंकि हल्दी दूध में एंटी इंफ्लामेटरी गुण मौजूद होती है। ऐसे में मौसम के बदलाव होने पर प्रेग्नेंट महिला को हल्दी दूध का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि हल्दी दूध मौसम का बदलाव होने पर होने वाली परेशानियों से प्रेग्नेंट महिला को बचे रहने में मदद करता है।

बच्चे का होता है बेहतर विकास

हल्दी वाले दूध में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन आदि सभी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं और यह सभी पोषक तत्व गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर विकास में मदद करते हैं।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान हल्दी दूध का सेवन करने से जुड़े टिप्स और फायदे, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी प्रेगनेंसी के दौरान हल्दी दूध का सेवन कर सकती है। ताकि आपको और आपके होने वाले शिशु को हल्दी दूध के यह सभी फायदे मिलें और आपकी प्रेगनेंसी में किसी तरह की दिक्कत नहीं हो।

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प्रेगनेंसी में तिल से बनी हुई चीजें खानी चाहिए या नहीं

जैसे ही महिला गर्भधारण करती है उसके बाद से ही महिला जो भी खाती है, जैसा करती है, जैसा सोचती है, उसका सीधा असर महिला की सेहत पर पड़ने के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान कुछ भी करने या खाने से पहले पूरी सावधानी का ध्यान रखना जरुरी होता है। इसके अलावा महिला जो भी खाती है उसे महिला को सिमित मात्रा में खाना चाहिए।

क्योंकि जरुरत से ज्यादा भी महिला यदि किसी चीज का सेवन करती है तो उसका दुष्प्रभाव भी प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे पर पड़ता है। आज इस आर्टिकल में हम गर्भावस्था के दौरान तिल व् तिल से बनी हुई चीजों का सेवन गर्भवती महिला को करना चाहिए या नहीं इस बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था के दौरान तिल का सेवन करना चाहिए या नहीं?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कुछ भी खाने से पहले जरुरी होता है की उस खाद्य पदार्थ के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए ताकि किसी भी खाद्य पदार्थ के सेवन के कारण महिला व् बच्चे को कोई भी दिक्कत नहीं हो। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान तिल का सेवन करने की आपको सभी मनाही कर सकते हैं क्योंकि तिल की तासीर गर्म होती है। जिसके कारण ऐसा माना जाता है की तिल का सेवन करने से गर्भपात का खतरा होता है।

लेकिन सच तो यह है की तिल में पोषक तत्व जैसे आयरन, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन्स आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में तो नहीं लेकिन प्रेगनेंसी की दूसरी और तीसरी तिमाही में महिला तिल से बनी चीजों का सेवन सिमित मात्रा में कर सकती है। क्योंकि सही समय और सिमित मात्रा में खाई गई चीजे आपको नुकसान नहीं पहुंचाती है।

तिल में मौजूद पोषक तत्व

कैल्शियम, फाइबर, विटामिन, आयरन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, पोटैशियम, मैग्नीशियम आदि पोषक तत्व तिल में मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी फायदेमंद होते हैं।

प्रेगनेंसी में तिल का सेवन करने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला तिल का सेवन करती है तो महिला को बहुत से सेहत सम्बन्धी फायदे मिलते हैं। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर विकास में मदद मिलती है। तो आइये अब उन फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

फाइबर

तिल में फाइबर की मात्रा मौजूद होती है जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला की पाचन क्रिया दो दुरुस्त रखने में मदद करती है। जिससे महिला को कब्ज़, पेट फूलना, व् अन्य पेट सम्बन्धी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

कैल्शियम

कैल्शियम प्रेगनेंसी के दौरान एक जरुरी पोषक तत्व होता है जो गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है। साथ ही कैल्शियम गर्भ में पल रहे बच्चे की हड्डियों के बेहतर विकास और दांतों के बेहतर विकास में मदद करता है। और कैल्शियम के लिए गर्भवती महिला सिमित मात्रा में तिल से बनी चीजों का सेवन कर सकती है।

विटामिन सी

विटामिन सी एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट होता है जो प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी को बूस्ट करने में मदद करता है। और तिल से बनी चीजों में विटामिन सी की अधिकता होती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और बिमारियों से बचे रहने के लिए महिला को तिल से बनी चीजों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

आयरन व् फोलिक एसिड

तिल में आयरन व् फोलिक एसिड भी मौजूद होता है। ऐसे में गर्भवती महिला यदि तिल से बनी चीजों का सेवन करती है तो ऐसा करने से प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही फोलिक एसिड गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करने के साथ बच्चे को जन्म दोष से सुरक्षित रखने में मदद करता है।

प्रोटीन

तिल प्रोटीन व् एमिनो एसिड का भी बेहतरीन स्त्रोत होता है जो गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में तिल से बनी चीजों के सेवन करने से जुड़े कुछ टिप्स, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी प्रेगनेंसी की दूसरी व् तीसरी तिमाही में तिल से बनी चीजों का सेवन कर सकती हैं।

कोरोना वायरस से बचाव के लिए काढ़ा बनाते समय इन चीजों का इस्तेमाल करें

बिमारियों से बचाव के लिए पुराने समय से ही घरेलु नुस्खों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। और यह घरेलू नुस्खे आसान होने के साथ असरदार भी होते हैं। आज जब कोरोना जैसी भयंकर बिमारी पूरे देश में फ़ैल गई है। तो इससे बचाव के लिए भी घर में लोग बहुत से उपाय कर रहे हैं। जैसे की अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए साफ सफाई का ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, घर से बाहर नहीं जा रहे हैं और यदि जा रहे हैं तो मास्क आदि का इस्तेमाल कर रहे हैं, साथ ही घर में काढ़ा आदि बनाकर पी रहे हैं।

इसके अलावा और भी तरीके है जिनका इस्तेमाल लोग अपने आप को बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए कर रहे हैं। आज इस आर्टिकल में हम आपको कोरोना से बचाव के लिए काढ़ा के लिए आप किन किन चीजों का इस्तेमाल कर सकती है जो आपके घर में मौजूद होने के साथ असरदार भी होती है उनके बारे में बताने जा रहे हैं।

काढ़ा बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली चीजें

  • अदरक
  • लौंग
  • तुलसी
  • काली मिर्च
  • मुलैठी
  • शहद
  • दालचीनी
  • इलायची, मोटी इलायची
  • निम्बू
  • कच्ची हल्दी
  • किशमिश या मुनक्का

कोरोना से बचाव के लिए घर में बनाएं जाने वाले अलग अलग तरह के काढ़े

पहला काढ़ा

सबसे पहले एक पैन में चार से पांच गिलास पानी डालें उसके बाद उसमे दो चम्मचग कसा हुआ अदरक, एक चम्मच पीसी हुई कच्ची हल्दी, दस बारह लौंग और काली मिर्च, चार पांच दालचीनी के टुकड़े मिलाएं। अब इन्हे पानी में डालकर आधा घंटा उबलने के लिए रख दें, उसके बाद इसे छानकर इसका सेवन करें। यह इतना काढ़ा बना जायेगा की आप चार से पांच लोग आधा गिलास इसे पी सकते हैं। आप चाहे तो इसमें स्वादानुसार निम्बू भी मिला सकते हैं।

दूसरा काढ़ा

इसे बनाने के लिए आप एक बर्तन में चार से पांच कप पानी डालें। उसके बाद इसमें आठ दस तुलसी की पत्तियां, सात आठ काली मिर्च, थोड़ा सा सौंठ, एक टुकड़ा दालचीनी, चार या पांच किशमिश या मुनक्का डालें। उसके बाद इसे गैस पर उबलने के लिए रख दें। जैसे ही यह उबल जाये और आधा रह जाएँ उसके बाद इसे छानकर गुनगुना कर ले, उसके बाद इसमें थोड़ा सा शहद और निम्बू का रस मिलाकर इसका सेवन करें।

कोरोना से बचाव के लिए इन अन्य टिप्स का रखें ध्यान

  • रोजाना व्यायाम, योगासन, मैडिटेशन करें।
  • दिन में चार से पांच बार गर्म पानी पीएं।
  • हल्दी दूध रोजाना पीयें।
  • लहसुन, अदरक, धनियां, हल्दी का इस्तेमाल खाने में जरूर करें।
  • शरीर की मालिश करें।
  • निम्बू शहद को पानी में डालकर पीयें।
  • चव्यनप्राश का सेवन जरूर करें।
  • खान पान में ऐसी चीजों को शामिल करें जिससे आपकी इम्युनिटी को बूस्ट होने में मदद मिल सकें।

तो यह हैं वो चीजें जिनका इस्तेमाल करके आप घर में काढ़ा बना सकते हैं साथ ही इन टिप्स का ध्यान रखकर आप कोरोना जैसी भयंकर बीमारी से अपना बचाव कर सकते हैं। इसके अलावा जितना हो सकता है घर में रहे सुरक्षित रहें।