Home Blog Page 78

दस गलतियों से बचें गर्भावस्था के दौरान

दस गलतियों से बचें गर्भावस्था के दौरान, प्रेगनेंसी के दौरान इन गलतियों से बचें, गर्भावस्था में न करें भूल से भी यह काम, प्रेगनेंसी के समय महिला को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए

गर्भावस्था का समय किसी भी महिला के लिए बहुत ही खास होता है, क्योंकि इस दौरान गर्भ में नन्ही सी जान के साथ वो अपनी लाइफ के बेहतरीन लम्हो का आनंद लेती है। और प्रेगनेंसी का समय महिला के लिए बहुत ही ज्यादा अहम भी होता है, क्योंकि इस दौरान महिला को अपना दुगुना ध्यान रखना पड़ता है। ऐसा इसीलिए क्योंकि महिला द्वारा की गई थोड़ी सी लापरवाही का असर न केवल महिला के लिए स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या का कारण बन सकता है, बल्कि इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इसीलिए महिला को अपने खान पान, उठने बैठने, यात्रा करने, जैसी बहुत सी चीजों का ध्यान रखना पड़ता है, और कुछ गलतियां जो महिला को गर्भावस्था के दौरान बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए आज हम आपको उनके बारे में बताने जा रहे हैं।

खान पान में लापरवाही

बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव, स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी के कारण भी महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपने खान पान में लापरवाही नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इसके कारण महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, और महिला को कमजोरी की समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है। साथ ही पोषक तत्वों की कमी के कारण प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में गर्भपात होने के चांस बढ़ जाते हैं, इसके अलावा शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है।

कैफीन का सेवन

कैफीन का अधिक सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान महिला की पेट सम्बन्धी समस्या को बढ़ाने के साथ गर्भपात का कारण भी बन सकता है। इसीलिए महिला को अधिक चाय, कॉफ़ी, का सेवन नहीं करना चाहिए।

हानिकारक आदतों से बचें

प्रेगनेंसी के दौरान यदि आप धूम्रपान, शराब, ज्यादा एंटीबायोटिक दवाइयों का सेवन या अन्य किसी तरह के नशे का सेवन करती है, तो इसके कारण गर्भ में पल रहा शिशु न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से बुरी तरह प्रभावित होता है, इसीलिए आपको इन चीजों का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए।

गर्म पानी से नहाना

यदि आप गर्म पानी से नहाती हैं तो प्रेगनेंसी के दौरान आपको इससे बचना चाहिए, क्योंकि इसके कारण बॉडी का तापमान बढ़ जाता है। जिसके कारण आपको स्पॉटिंग या गर्भपात जैसी समस्या हो सकती है, यदि आप नोर्मल पानी से नहाना चाहे तो नहा सकती हैं।

ज्यादा व्यायाम

व्यायाम करने से बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, साथ ही इससे आपके शरीर को और भी बहुत से फायदे मिलते हैं। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान आपके द्वारा किया गया अधिक व्यायाम आपके लिए और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान आपको सुबह शाम वॉक करनी चाहिए, जिससे प्रेगनेंसी के दौरान आपको फिट रहने में मदद मिल सके।

मरकरी युक्त पदार्थ

प्रेगनेंसी के समय भी महिलाओं के लिए आहार के प्रति सावधानी बरतनी बहुत जरुरी होती है, इसीलिए यदि आप मांस मछली का सेवन करती है, तो आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की हफ्ते में एक बार ही इसे खाएं। साथ ही कुछ किस्म की मछलियां जिनमे मर्करी की मात्रा अधिक होती है, अधपका मास, ठंडा व् बासी नॉन वेज का सेवन आपको नहीं करना चाहिए। साथ ही कच्चे अंडे का सेवन भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण आपको पेट सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

घूमने फिरने से बचें

अधिक यात्रा करने से, ज्यादा सीढ़ियां चढ़ने से, ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से, प्रदूषण या जहरीली गैस वाली जगह जाने से भी आपको प्रेगनेंसी के दौरान बचना चाहिए। क्योंकि इसके कारण शरीर शिशु के विकास पर बुरा असर पड़ता है, साथ ही प्रदूषण के कारण महिला का गर्भपात होने के साथ शिशु के विकलांग होने के भी चांस होते हैं।

पानी की कमी

प्रेगनेंसी के दौरान पानी की कमी के कारण भी महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, इसके कारण हार्मोनल असंतुलन होने के साथ शिशु को भी गर्भ में परेशानी हो सकती है। इसीलिए प्रेगनेंसी में पानी का सेवन भरपूर के साथ अन्य पेय पदार्थ जैसे की नारियल पानी, जूस आदि का सेवन भी करना चाहिए।

सोने में लापरवाही

नींद की कमी भी आपको मानसिक रूप से परेशान कर सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान आपको अपनी नींद को भरपूर लेना चाहिए, यदि रात को नींद पूरी नहीं होती है तो दिन में थोड़ी देर सोना चाहिए। और सोते समय आपको पेट पर दबाव नहीं डालना चाहिए और न ही पेट के बल सोना चाहिए।

आयरन की कमी

एनीमिया की समस्या, डिलीवरी के दौरान परेशानी, शिशु के शारीरिक विकास में कमी का एक कारण गर्भवती महिला में आयरन की कमी हो सकता है। और यदि आप चाहती हैं की प्रेगनेंसी के दौरान आपको ऐसी किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े तो आयरन युक्त आहार जैसे अनार, गाजर आदि का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ गलतियां जो महिला को प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करनी चाहिए, साथ ही नियमित रूप से अपनी जांच भी करवाते रहना चाहिए। और यदि आपको कोई भी परेशानी हो तो उसे नज़रअंदाज़ न करते हुए तुरंत डॉक्टर से चेक करवाना चाहिए, ताकि प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली किसी भी तरह की परेशानी से आपको बचाव करने में मदद मिल सकें, जिससे गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

सामान्य प्रसव होने के उपाय

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला के लिए किसी जंग से कम नहीं होते है, क्योंकि इस दौरान वो बहुत से शारीरिक और मानसिक बदलाव से गुजरती है, उसके बाद डिलीवरी का समय नजदीक आने पर ज्यादातर महिलाओ की छह होती है, की वो अपने शिशु को जन्म सामान्य प्रसव से दें, क्योंकि इससे उन्हें डिलीवरी के समय तो दर्द होता है लेकिन बाद में तेजी से रिकवर होने में मदद मिलती है, और सर्जरी से बचना चाहती है, क्योंकि सामान्य प्रसन न केवल माँ के लिए बल्कि शिशु के लिए भी बेहतर होता है, लेकिन कई बार डिलीवरी में महिला या शिशु से जुडी परेशानी के आने पर आपको सिजेरियन डिलीवरी का सहारा लेना पड़ता है।

इन्हें भी पढ़ें:- डिलीवरी के बाद होने वाली ढीली और लटकती हुई त्वचा से कैसे पाएं छुटकारा

pregnancy

कुछ महिलाएं खुद भी नार्मल डिलीवरी में होने वाले दर्द से बचने के लिए सिजेरियन डिलीवरी का सहारा लेती है, लेकिन कुछ महिलाएं ऐसी भी होती है, जो प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही ऐसे तरीको का इस्तेमाल करती है जिससे की उनका सामान्य प्रसव हो सकें, लेकिन ये भी सच है शिशु को जन्म देना हर माँ के लिए इस दुनिया का सबसे ख़ास लम्हा होता है, तो आइये आज हम उन महिलाओ के लिए कुछ टिप्स और योगासन बताने जा रहे हैं जिससे उन्हें नार्मल डिलीवरी होने में मदद मिलती है, यदि आप भी प्रेगनेंसी के दौर से गुजर रही है तो आप भी इन टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है।

अपने स्वास्थ्य का अच्छे से ध्यान रखें:-

यदि आप चाहते है की आपका प्रसव सामान्य हो तो इसके लिए सबसे जरुरी होता है की आप शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी पूरी तरह से तैयार हो, आपके शरीर में खून की कमी न हो, कमजोरी न हो, और अपने अपने मन को इस बात के लिए तैयार कर रखा हो की आप डिलीवरी के दौरान होने वाले दर्द को बर्दाश कर लेंगी, तो आपको नार्मल डिलीवरी करवाने में मदद मिलती है।

ज्यादा खड़े न रहें:-

नार्मल डिलीवरी के लिए जरुरी है की आप अधिक देर तक कही खड़े न रहे ऐसा करने से गुरुत्वीय बल के कारण शिशु नीचे की और आता है, जिसके कारण कई बार आपको डिलीवरी के समय परेशानी का अनुभव हो सकता है, साथ ही आपको भारी वजन आदि उठाने से भी बचना चाहिए।

पानी का भरपूर सेवन करें:-

normal delivery

बच्चा गर्भाशय में जिस तरल पदार्थ में रहता है, उसे एमनियोटिक फ्लूड कहते है, इसकी मात्रा को सही रखने के लिए जरुरी होता है की आप पानी का भरपूर सेवन करें, इससे गर्भ में पल रहे शिशु को भी ऊर्जा मिलती है, जिससे नार्मल डिलीवरी में मदद मिलती है ऐसे में गर्भवती महिला को दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें:- सिजेरियन डिलीवरी के बाद ऐसे रखें अपने स्वाथ्य और खान पान का ध्यान

व्यायाम करें:-

ज्यादातर महिलाओ का ऐसा सोचना है की प्रेगनेंसी के दौरान आपको व्यायाम नहीं करना चाहिए, अब आप खुद ही सोचिये की आप प्रेग्नेंट हैं या बीमार है, प्रेगनेंसी में आपको ऐसा व्यायाम नहीं करना चाहिए जिससे आपके शिशु को नुकसान पहुंचे, हल्का फुल्का व्यायाम करने से आपके शरीर को फिट रहने में मदद मिलती है, जिससे और डिलीवरी के समय होने वाले दर्द को सहन करने के लिए अभ्यास भी होता है, इसीलिए हल्का फुल्का व्यायाम आदि करते रहना चाहिए।

अपने आहार का ध्यान रखें:-

बच्चे के विकास और महिला के स्वास्थ्य को पूरी तरह फिट रखने के लिए जरुरी होता है की आप अपने आहार का सेवन भरपूर मात्रा में करें, और सभी मिनरल्स लें, ऐसा करने से आपकी गर्भाशय की ग्रीवा को अच्छे से पोषण मिलता है, जिससे आपको फायदा होता है, साथ ही ताजे और संतुलित आहार और ताजे फलों का सेवन करें, अधिक मसालेदार भोजन, और बासी आहार से आपको दूर रहना चाहिए।

तनाव न लें:-

tanav

तनाव को प्रेगनेंसी से सौ मील तक दूर रखना चाहिए क्योंकि मानसिक तनाव के कारण आपके स्वास्थ्य पर ही नहीं बल्कि शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी असर पड़ता है, जिसके कारण कई बार आपकी डिलीवरी में भी कॉम्प्लीकेशन्स आ सकते है, इससे बचने के लिए आपको तनाव नहीं लेना चाहिए।

अपने डॉक्टर से नियमित जांच करवाएं:-

प्रेगनेंसी के दौरान आप चाहे कितना भी अच्छा महसूस करें, लेकिन आपको अपनी सेहत के प्रति बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए, और नियमित रूपसे डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए, ताकि यदि आपकी डिलीवरी से सम्बंधित यदि कोई समस्या है तो आप उस समस्या का समाधान कर सकें।

सामान्य प्रसव के लिए योगासन:-

पश्चिमोत्तानासन करें:-

पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन करने से आपको सामान्य पसाव करने में मदद मिलती है, क्योंकि इसे करने से इसे आपको तनाव कम होता है, और यह आपकी मांसपेशियों को लचीला बनाता है, साथ ही इससे आपके गर्भाशय के स्नायुजाल को ठीक करने में मदद मिलती है, जिससे नार्मल डिलीवरी के चांस बढ़ते है।

तितली आसन करें:-

इस आसन को यदि आप प्रेगनेंसी के तीसरे महीने से शुरू करते है, तो यह आपको नार्मल डिलीवरी करवाने में मदद करता है, क्योंकि इसे करने से न केवल आपके शरीर की मांसपेशियों को बल्कि यूटेरस की मांसपेशियों को भी लचीला बनाने में मदद करता है, साथ ही इससे प्राइवेट पार्ट के तनाव को खुलने में मदद मिलती है, जिससे आपको फायदा मिलता है।

बुद्ध कोणासन करें:-

बुद्ध कोणासन करने से भी आपको नार्मल डिलीवरी करवाने में मदद मिलती है, और यह सबसे आसन और सरल आसन होता है जो की आपकी नार्मल डिलीवरी करवाने में आपकी मदद करता है।

तो ये कुछ टिप्स है जिनकी मदद से आप सामान्य प्रसव करवा सकती है, साथ ही यदि आपकी प्रेगनेंसी में किसी तरह की परेशानी है तो आपको एक बार कुछ भी करने से पहले डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें:- अगर आप डिलीवरी के बाद भी पहले जैसी दिखना चाहती है? तो ये करें

तेजी से पेट कम करने के ये हैं आसान तरीके!!

वैसे तो सभी लोगो को फिट रहना बहुत पसंद है, लेकिन गलत आदतें, और गलत दिनचर्या के चलते कब आपका वजन बढ़ने लगता है, और कब आपकी तोंद बाहर आ जाती है, पता ही नहीं चलता है और जब इसके कारण आपकी लुक खराब होने के साथ मोटापे के कारण होने वाली परेशानियां आपके सामने आती है, तब आप तरह तरह के तरीके आजमाने शुरू करते है की किसी तरह से ये तोंद अंदर हो जाएँ, कई लोग तो इसके लिए अपना खान पान भी छोड़ देते है, परन्तु क्या आप जानते है ऐसा करके आप चाहे अपनी तोंद को अंदर कर लें, परन्तु इसके कारण होने वाली शारीरिक समस्या का सामना आपको करना पड़ता है।

इन्हें भी पढ़ें:- कुछ खास घरेलु उपाय जो आपके बढ़े हुए पेट और वजन दोनों को कम कर देंगे

motapa-o

आपकी तोंद न तो एक दिन में बाहर आती है, और न ही एक दिन में अंदर जा सकती है, यदि आप अपनी बढ़ी हुई तोंद को कम करना चाहते है तो इसके लिए आपको सबसे पहले अपनी दिनचर्या को सही करना चाहिए, अपनी आदतों में बदलाव लाना चाहिए, अपने खान पान को सही करना चाहिए, यदि आप ऐसा करते है तो धीरे धीरे आप खुद ही देखेंगे की आप फिट हो रहें हैं, साथ ही कई लोग तोंद को कम करने वाली दवाइयों आदि का भी सेवन करते है, ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से आपको फायदा होने के साथ शारीरिक रूप से जुडी समस्या हो सकती है, इसके अलावा आइये हम कुछ आसान से उपाय जानते है, जिसके कारण आपकी बढ़ी हुई तोंद को कम करने में मदद मिलती है।

खाना खाने के बाद पानी का सेवन न करें:-

बाहर पेट निकलने का एक कारण आपका खाना खाने के बाद तुरंत पानी का सेवन करना होता है, यदि आप अपने बाहर निकले हुए पेट कोकम करना चाहते है, तो आपको ऐसा नहीं करना चाहिए, और यदि आपको प्यास लग भी रही है तो खाना खाने के पंद्रह से बीस मिनट के बाद एक कप गुनगुने पानी का सेवन करें, यह आपकी तोंद को कम करने में आपकी मदद करता है, और दिन में जितना हो सकें गुनगुने पानी का सेवन करें।

एक साथ पेट भर न खाएं:-

बढ़ी हुई तोंद को कम करने के लिए दिन में बार बार भोजन करने की बजाय आपको थोड़ा थोड़ा खाना थोड़ी थोड़ी देर बाद खाना चाहिए, ऐसा करने से आपका मेटाबोलिज्म सही रहने के साथ आपके शरीर में ऊर्जा भी बनी रहती है, और आपको अपने नाश्ते में खासकर प्रोटीन का सेवन अधिक करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से आपके पेट काफी देर तक भरा रहता है, जिसके कारण आपके बढ़े हुए पेट को कम करने में मदद मिलती है और प्रोटीन के लिए आप अंडे का सफ़ेद भाग, फैट फ्री दूध या दही, प्रोटीन युक्त सब्जियों आदि का सेवन कर सकते है।

इन्हें भी पढ़ें:- अगर आप अपना वजन बढ़ाना चाहते है? तो ये जरूर करें

शहद का सेवन करें:-

honey-and-lemon

शहद को यदि गुणों की खान कहा जाएँ तो गलत नहीं होगा, क्योंकि इसके नियमित सेवन से न केवल आपका पेट बल्कि शरीर के अन्य भागो में जमी चर्बी को भी कम करने में मदद मिलती है, इसके लिए आप सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में दो चम्मच शहद डालकर उसका सेवन करें, एक महीने तक नियमित करने से ही आपको इसका असर दिखाई देने लगेगा, और यदि आप चाहे तो इसमें निम्बू का रस भी मिला सकते है ऐसा करने से ये आपको दुगुना फायदा करता है।

ग्रीन टी या ब्लैक टी का सेवन करें:-

ग्रीन टी में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स आपके बढे हुए पेट को कम करने में आपकी मदद करते है, साथ ही आपके मेटाबोलिज्म को भी सही रखने में मदद करते है, दिन में तीन से चार बार ग्रीन टी का सेवन आपके लिए बहुत फायदेमंद होता है, इसके अलावा यदि आप चाय पीने के बहुत शौकीन है तो आपको बिना दूध वाली चाय और मीठे का सेवन कम करके पीएं, ऐसा करने से न केवल आपका बाहर निकला हुआ पेट कम होता है, बल्कि आपको अपनी ख़ूबसूरती को भी बढ़ने में मदद मिलती है।

पानी का भरपूर सेवन करें:-

पानी भी आपके बाहर निकले हुए पेट को कम करने के साथ आपके शरीर में ऊर्जा को बरकरार रखने में आपकी मदद करता है, पानी का सेवन करने से आपके शरीर में मौजूद विषैले तत्व बाहर निकलते है, जिसके कारण आपके पेट पर जमी चर्बी को कम होने में मदद मिलती है, और एक दिन में आपको कम से कम आठ से दस गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।

उपवास करें:-

यदि आप खाने के बहुत शौकीन है, और आप अपने बढे हुए पेट को कम करना चाहते है तो आप हफ्ते में सिर्फ एक दिन उपवास करें, और उस दिन आप सिर्फ तरल पदार्थो का सेवन करें, जैसे की पानी, जूस, निम्बू पानी, या फलाहार भी आप ले सकते है, ऐसा करने से आपको खुद ही फ़र्क़ दिखाई देगा, परन्तु ऐसा भी नहीं है की आपको एक ही हफ्ते में इसका असर दिखाई देगा, बल्कि कुछ दिन इसे नियमित करने से आपको फायदा मिलता है ।

मीठे व् नमक का सेवन कम करने:-

यदि आप अपनी बढ़ी हुई तोंद को कम करना चाहते है, तो इसके लिए आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की जितना हो सकें आप अपने आहार में नमक और खाने के बाद और पुरे दिन में मीठे व् नमक का सेवन कम करें, क्योंकि इसके अधिक सेवन से आपके शरीर में जमी चर्बी को बढ़ने में मदद मिलती है, जो की आपके लिए नुकसानदायक होता है, इसीलिए इससे जितना हो सकें आपको परहेज करना चाहिए।

व्यायाम करें:-

exercise

सुबह उठकर कम से कम आधा घंटा व्यायाम व् योगासन करें, इसे करने से न केवल आपको स्लिम एंड ट्रिम रहने में मदद मिलती है, बल्कि आपके शरीर में एनर्जी को भी बढ़ावा मिलता है, साथ ही सुबह यदि आप नियमित आधा घंटा व्यायाम करते है तो इसके कारण आपको पूरे दिन फ्रेश महसूस करने में मदद मिलती है, और यदि आप इस समस्या को दूर भी कर देते है तो फिर भी फिट रहने के लिए आपको व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।

तेजी से पेट को कम करने के अन्य उपाय:-

  • कही आस पास जाने के लिए किसी सवारी का इस्तेमाल करने की बजाय पैदल जाना चाहिए, लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का चुनाव करना चाहिए, इससे शरीर पर जमा अतिरिक्त फैट कम होता है।
  • अपनी नींद को भरपूर मात्रा में लें, क्योंकि अनिंद्रा भी आपके लिए मोटापे की समस्या को खड़ा करता है।
  • तेलीय और अधिक मसालेदार खाने से परहेज करें, आपको पेट अंदर करने में मदद मिलेगी।
  • खाना खाने के बाद तुरंत न सोयें, सोने से कम से कम दो घंटे पहले भोजन का सेवन करें।
  • योगासन को भी अपनी दिनचर्या में शामिल करें, ऐसा करने से आपको अपनी बढ़ी हुई तोंद को कम करने के साथ अपनी ख़ूबसूरती को भी बढाने में मदद मिलती है।
  • नियमित आहार लें, और समय से लें, ज्यादा लम्बा अंतराल अपने खाने के बीच में न रखें, इसके कारण आपके मेटाबोलिज्म रेट पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
  • साइकिल चलायें, दौड़ लगाएँ, तैराकी करें इन सब तरीको का इस्तेमाल करने से भी आपको अपनी बढ़ी हुई तोंद को कम करने में मदद मिलती है।
  • ठंडी चीजो का सेवन भी अधिक मात्रा में न करें, जैसे की आइस क्रीम, आदि इसमें भी कैलोरिज़ अधिक मात्रा में होती है, जो की आपके मोटापे का कारण बनती है।

तो ये कुछ उपाय है जिनका इस्तेमाल करके आप अपनी बढ़ी हुई तोंद को कम कर सकते है, इसके अलावा आपको एक ही दम अपने शरीर पर ज्यादा दबाव भी नहीं डालना चाहिए क्योंकि आपको परेशानी हो सकती है, बल्कि धीरे धीरे आपको कोशिश करनी चाहिए और थोड़े ही दिनों में आपको खुद ही इन तरीको का असर दिखने लगेगा, और आपको बढ़ी हुई तोंद की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

इन्हें भी पढ़ें:- खाना छोड़ वजन घटाने की सोच रहे है? तो हो जाएं सावधान

नाख़ून देखकर जानें की आपको क्या बिमारी है

पुराने समय में डॉक्टर्स कम ही होते थे सभी लोग हकीमो के पास जाते थे। और वह हकीम व्यक्ति की नब्ज़, आँखे, स्किन, नाखून आदि देखकर बता देते थे। की व्यक्ति को क्या समस्या है और उसी अनुसार उन्हें इलाज भी दिया करते थे। और व्यक्ति के नेल्स के रंग, टूटे व् रूखे नाख़ून, नाख़ून में दरारें आदि को देखकर बताया जाता था। की व्यक्ति को कौन सी शारीरिक परेशानी है। तो आइये आज हम आपको नाख़ून से जुडी कुछ ऐसी ही बातों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिससे आप भी जान सकते हैं की कहीं आपको कोई शारीरिक दिक्कत तो नहीं है।

नेल्स का रंग

  • नेल्स के बदलते रंग को देखकर भी यह अंदाजा लगाया जा सकता है।
  • की व्यक्ति को कौन सी शारीरिक समस्या है।
  • और नाख़ून रंग पीला, नीला, भूरा आदि हो सकता है।
  • नाख़ून का बदलता हर रंग शरीर में होने वाली अलग समस्या का संकेत देता है।
  • जैसे की नाख़ून का रंग फीका पड़ना या नाख़ून में चमक न रहना और बेरंग होना बॉडी में पोषक तत्वों की कमी या इन्फेक्शन की समस्या का संकेत होता है।
  • नाख़ून का नीला या ग्रे सा रंग होना बॉडी में ऑक्सीजन का प्रवाह अच्छे से न होने का संकेत होता है।
  • पीले नेल्स पीलिया, फंगल इन्फेक्शन, सायरोसिस बिमारी आदि की और इशारा करते हैं।
  • लेकिन कई बार इसका कारण नेल्स पर बहुत अधिक नेल पोलिश का इस्तेमाल करना भी हो सकता है।
  • नेल्स का रंग भूरा या बहुत ज्यादा डार्क होना थायरॉयड या बॉडी में पोषक तत्वों की कमी के कारण हो सकते हैं।
  • नाख़ून का रंग लाल होना है ब्लड प्रैशर की समस्या की और इशारा कर सकता है।

रूखे नाख़ून

  • यदि आपके नाख़ून में चमक नहीं है।
  • नाख़ून रूखे व् कमजोर होने के साथ जल्दी टूट जाते हैं।
  • यह महिला या पुरुष के थायरॉयड जैसी समस्या से ग्रसित होने का संकेत होता है।
  • रूखे व् कमजोर नाख़ून होने का एक कारण फंगल इन्फेक्शन भी हो सकता है।

नेल्स का मोटा होना

  • कई बार आपने देखा होगा की कुछ लोगो के नाख़ून बहुत मोटे होते हैं जिन्हे काटने में भी दिक्कत हो सकती है।
  • और जिन लोगो के नेल्स ऐसे होते हैं उन्हें इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि नेल्स का मोटा होना एक नहीं बल्कि कई बीमारियों का लक्षण होता है।
  • जैसे की नेल्स का मोटा होना डाइबिटीज़, फेफड़ों में इन्फेक्शन, आर्थ्राराइटिस आदि का लक्षण होता है।

घुमावदार नेल्स

  • जिन लोगो के नेल्स की शेप घुमानदार यानी की चम्मच के अगले हिस्से की तरह होती है।
  • उन लोगो को कोई न कोई अनुवांशिक रोग, लिवर सम्बन्धी समस्या, हाइपोक्रोमिक एनिमिया का संकेत देने वाली कॉइलोनाइचिया बिमारी भी हो सकती है।

नाख़ून पर सफ़ेद धब्बे

  • यदि किसी के नाखूनों पर सफ़ेद निशान या पूरे नाख़ून सफ़ेद हो जाते हैं।
  • तो यह सफ़ेद निशान व्यक्ति को लिवर या हदय सम्बन्धी समस्या होने के कारण हो सकते हैं।
  • इसके अलावा यदि आपके नेल्स के किनारे पर सफ़ेद रंग की लाइन दिखाई देती है।
  • तो यह व्यक्ति को तनाव, शरीर में पोषण की कमी, लिवर सम्बंधित समस्या होने के संकेत देती है।

तो यह हैं कुछ बीमारियां जो आप नेल्स में बदलाव को देखकर जान सकती हैं। और यदि आपको नाखून में कोई बदलाव नज़र आता है तो बिना देरी किये एक बार अपनी शारीरिक जांच करवानी चाहिए। ताकि यदि कोई भी दिक्कत हो तो उसका समय से इलाज हो सके। और आपको स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

घाव ( जख्म ) को भरने के घरेलू उपाय

रोजाना काम करते हुए, कभी अचानक से, या किसी लापरवाही के कारण यदि आपको चोट लग जाती है, और वहां घाव हो जाता है, और इसके उपचार के लिए आप जितना जल्दी हो सकें डॉक्टर के पास जाते है, परन्तु डॉक्टर के पास जाने से पहले भी आपको उसके लिए कुछ करना चाहिए और देखना चाहिए की घाव कितना गहरा है, उसे अच्छे से साफ़ करना चाहिए, यदि उसके घरेलू उपचार करके इलाज़ हो सकता है, तो आपको घर पर ही उसके लिए कुछ करना चाहिए, यदि नहीं इसके बाद आपको ऐसा लगता है की वो ठीक नहीं हो रहा है तो आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

घाव बनने के कारण बहुत से हो सकते है, जैसे कभी चोट लगना,जलना, त्वचा के फटने के कारण, अधिक समय तक एक जगह दबाव पड़ने के कारण आपको घाव बन जाता है, और घाव बनने के पहले या तो आपको उस जगह से खून या मवाद निकलती है, त्वचा लाल होने लगती है, सूजन होने लगती है, कई बार तो तेजी से दर्द का अनुभव भी होता है, ऐसे में आपको घाव को अनदेखा किये बिना घर पर ही इसके लिए कुछ करना चाहिए, यदि आप घाव का समय से उपचार नहीं करते है, तो या तो ये फैलने लग जाता है, या इसके कारण आपको इन्फेक्शन के होने की समस्या होने लगती है, इसीलिए घाव के होने पर सबसे पहले आपको उसकी अच्छे से सफाई करनी चाहिए, इसके लिए आप घाव को ठन्डे पानी से धोएं, इसके कारण घाव पर बैक्टेरिया कम जमता है, इसके बाद आइये आज हम आपको कौन कौन से ऐसे घरेलु उपचार करने चाहिए जिससे आपको घाव को भरने में मदद मिल सकें आइये जानते है।

हल्दी का इस्तेमाल करें:-

uses of haldi

हल्दी में एंटी बायोटिक एंटीसेप्टिक गुण भरपूर मात्रा में होते है, और यह केवल आपके घाव को ही भरने में मदद नहीं करता है, बल्कि इसके इस्तेमाल से आपको इन्फेक्शन का खतरा भी कम होता है, इसके इस्तेमाल के लिए यदि आपको चोट लग जाने पर तेजी से खून बह रहा हो, तो थोड़ी सी हल्दी को उस जगह पर डाल दें, जहां चोट लगी है, इसके कारण खून आना बंद हो जायेगा, साथ ही घाव को भरने के लिए हल्दी में थोड़ा सा पानी मिलाकर एक लेप तैयार करें, और इस लेप को नियमित अपने घाव पर लगाएं, इसकी मदद से आपके घाव को तेजी से भरने में मदद मिलती है।

लहसुन का इस्तेमाल करें:-

लहसुन का इस्तेमाल घाव पर करने से आपके घाव को भरने के साथ, दर्द, और खून निकलने की समस्या से भी राहत पाने में मदद मिलती है, और इसका इस्तेमाल प्राकृतिक रूप से घाव का इलाज किया जाता है, इसके इस्तेमाल के लिए लहसुन की कुछ कलियों को निकाल कर अच्छे से पीस लें, और एक लेप तैयार करें, उसके बाद इस पेस्ट को घाव पर लगाएं, और पट्टी बाँध कर आधे घंटे के लिए छोड़ दें, उसके बाद पट्टी को उतार कर घाव को धो लें, और दिन में इस उपचार को कम से कम दो बार करें, इसकी मदद से आपको जल्द ही घाव को भरने में मदद मिलती है।

नीम का इस्तेमाल करें:-

neem

नीम के अंदर ऐसे फैटी एसिड पाएं जाये है, जो आपके घाव को सूखने में मदद करते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप नीम के पत्तों को पीस कर उसका रस निकाल लें, उसके बाद इस रस में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, उसके बाद इसे घाव पर लगाएं और कुछ देर के लिए छोड़ दें, और फिर इस घाव को गुनगुने पानी की मदद से साफ़ कर लें, और इस उपचार को जब तक करें जब तक की आपका घाव अच्छे से भर नहीं जाता है।

टी ट्री या लैवेंडर आयल का इस्तेमाल करें:-

टी ट्री आयल में भी एंटी फंगल गुण पाएं जाते है जो आपके घाव को तेजी से भरने में आपकी मदद करते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप कॉटन पर टी ट्री आयल लगाकर अच्छे से अपने घाव पर लगाएं दिन में दो से तीन बार इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपको अपने घाव को भरने में मदद मिलती है, इसके साथ यदि आप थोड़ा सा लैवेंडर का तेल और बादाम का तेल अच्छे से मिक्स करके भी दिन में अपने अपने घाव पर दो से तीन बार लगते है, तो भी आपको फायदा मिलती है।

एलोवेरा का इस्तेमाल करें:-

एलोवेरा में प्रचुर मात्रा में फाईटोकेमिकल्स पाएं जाते है जो न केवल आपके घाव को भरने में मदद करते है, बल्कि दर्द सूजन और खून बहने की समस्या से भी आपको राहत दिलवाने में मदद करते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एलोवेरा के पत्ते को तोड़ कर उसके जेल को अच्छे से अपने घाव पर लगाएं, और सूखने के लिए छोड़ दें, उसके बाद गुनगुने पानी से या गीले कपडे से इसे अच्छे से साफ़ करें, दिन में दो से तीन इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपकी त्वचा की नमी को भी बनाएं रखने में मदद मिलती है।

शहद का इस्तेमाल करें:-

honey

शहद में एंटी बैक्टेरियल गुण अधिक मात्रा में होते है जो आपके घाव को भरने के साथ इन्फेक्शन से भी बचाते है यदि आपको कही घाव हो गया है तो आप शहद को अपने घाव पर लगाने के बाद उस जगह पर पट्टी बाँध दें, और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें, उसके बाद गुनगुने पानी की मदद से अपने घाव को साफ़ कर लें, ऐसा करने से आपको घाव भरने के साथ यदि सूजन की समस्या है तो उससे भी राहत पाने में मदद मिलती है।

सिरके का इस्तेमाल करें:-

यदि आपकी किसी जगह पर काटने या छिलने के कारण घाव बन गया है, तो इससे बचने के लिए आप सिरके का इस्तेमाल कर सकते है, इसके प्रयोग से आपको जलन महसूस हो सकती है, परन्तु इसके इस्तेमाल से आपके घाव को तेजी से भरने में मदद मिलती है, इसके प्रयोग के लिए रुई में कुछ बुँदे सिरके की लगाएं, और उससे घाव की अच्छे से सफाई करें इस तरीके का इस्तेमाल दिन में दो से तीन बार इसपे को करने से आपको घाव को जल्दी भरने में मदद मिलती है।

घाव का इलाज करते समय ध्यान रखें ये बातें:-

  • घाव को कभी भी खुला न छोड़ें, जिस समय घाव पर पट्टी न हो उस समय किसी एंटी सेप्टिक दवाई का इस्तेमाल करें, इसके कारण आपको इन्फेक्शन से बचाव होता है।
  • घाव ठीक होने लगता है तो उस पर पपड़ी जमने लगती है, ऐसे में इस पपड़ी को आपको नहीं उतारना चाहिए बल्कि खुद उतरने देना चाहिए यदि आप उसे उतारते है तो घाव का निशान वहां रह जाता है।
  • घाव पर किसी भी ब्यूटी क्रीम या कॉस्मेटिक का इस्तेमाल न करें।
  • घाव को छूने और पट्टी को बदलने से पहले अपने हाथो को अच्छे से धो लें।
  • घाव को ज्यादा धूप में न रहने दे इससे भी घाव के निशान रह जाते है।
  • घाव को जितना हो सकें किसी कपडे से धक् कर रखें ताकि मक्खियां मच्छर न बैठे।
  • यदि आपको ऐसा लगे की घाव में कोई सुधार नहीं आ रहा है तो आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

घाव जल्दी भरने के लिए खाएं ये आहार:-

  • दालें, सोयाबीन, और चने का सेवन भरपूर करें, क्योंकि इसमें प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है।
  • जो लोग मास खाते है वो अंडे और मछली का सेवन करें, इससे उनको फायदा होता है।
  • विटामिस सी युक्त पदार्थ जैसे अनानास, निम्बू, संतरे, ब्रोकली आदि का सेवन करें इससे भी घाव को भरने में मदद मिलती है।
  • पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें, क्योंकि इसमें भी ऐसे मिनरल्स होते है जो आपके घाव को भरने में मदद करते है, साथ ही इसके कारण बॉडी में डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती है।
  • विटामिन ए युक्त आहार जैसे दूध, पनीर गाजर, हरी सब्जियों का सेवन करने से भी आपको घाव को तेजी से भरने में मदद मिलती है।

तो ये कुछ उपचार है जिनका इस्तेमाल करके आपको घाव को भरने में मदद मिलती है, इसके अलावा आपको एक बात का और ध्यान रखना चाहिए यदि घाव गहरा हो या खून बहना बंद न हो रहा हो तो जितना जल्दी हो सकें आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए, और इस समस्या का समाधान करना चाहिए, ऐसा करने से आपको घाव को भरने और इसे अच्छे से ठीक करने में मदद मिलती है।

डिलीवरी के बाद महिला कितने दिन में नोर्मल हो जाती है?

बच्चे के जन्म के बाद महिला के शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं, शारीरिक परेशानियां होती है। जिनसे रिकवर होने में डिलीवरी के बाद महिला को थोड़ा समय लगता है। ज्यादातर महिलाओं को डिलीवरी के बाद कम से कम चालीस दिन तक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है और आराम करने की सलाह दी जाती है। लेकिन असल में सच तो यह हैं की डिलीवरी के बाद महिला का नोर्मल होना महिला के डिलीवरी के तरीके और डिलीवरी के बाद महिला की केयर पर निर्भर करता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की डिलीवरी के बाद महिला कब नोर्मल हो जाती है।

महिला को टाँके न आये हो

यदि महिला का प्रसव नोर्मल हुआ है और महिला को टाँके भी नहीं लगे हैं, और डिलीवरी में महिला को किसी तरह की परेशानी भी नहीं हुई है। साथ ही डिलीवरी के बाद महिला अच्छे से अपने खान पान, आराम, आदि का ध्यान रख रही है तो एक महीने में महिला नोर्मल हो जाती है।

महिला को टाँके आये हो

यदि महिला का प्रसव तो सामान्य तरीके से हुआ है लेकिन महिला को टाँके आये हैं। तो ऐसे में टांकों की अच्छे से केयर करने के बाद, अच्छे से अपने खान पान का ध्यान रखने के बाद, आराम करने के बाद, दवाइयों का सही समय पर सेवन करने के बाद महिला एक से डेढ़ महीने में अच्छे से नोर्मल हो जाती है।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद

यदि महिला का प्रसव ऑपरेशन से हुआ है तो ऐसे में महिला को टाँके भी ज्यादा लगते हैं, ब्लीडिंग भी ज्यादा होती है, शारीरिक परेशानियां भी ज्यादा होती है, जिसकी वजह से महिला को रिकवर होने में नोर्मल डिलीवरी की अपेक्षा ज्यादा समय लगता है। यदि सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला अपना अच्छे से ध्यान रखती है तो उसके बाद भी पूरी तरह से महिला को रिकवर होने में ढाई से तीन महीने का समय लगता है। और उस दौरान भी महिला को थोड़ा बहुत शरीर में दर्द जैसी परेशानियां हो सकती है।

तो यह हैं डिलीवरी के बाद महिला के फिट होने से जुडी कुछ बातें, तो यदि आप भी चाहती है की आप डिलीवरी के बाद जल्द से जल्द फिट हो जाये। तो इसके लिए जरुरी है की आप अपने आराम, खान पान, डॉक्टर द्वारा जांच, टांकों की देखभाल, साफ़ सफाई आदि का ध्यान रखें।

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासॉउन्ड कब और कितनी बार होना चाहिए

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासॉउन्ड

गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी के दौरान अल्ट्रासॉउन्ड करवाना बहुत ही जरुरी होता है, क्योंकि अल्ट्रासॉउन्ड के माध्यम से गर्भ में पल रहे शिशु की जानकारी मिलती है। जैसे की शिशु के अंगो का विकास अच्छे से हो रहा है या नहीं, शिशु को कोई समस्या तो नहीं है, शिशु के हदय से सम्बंधित जानकारी, आदि। लेकिन प्रेग्नेंट महिला के मन में अल्ट्रासॉउन्ड को लेकर तरह तरह के सवाल होते है, जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान कितनी बार अल्ट्रासॉउन्ड करवाना चाहिए, कब अल्ट्रासॉउन्ड करवाना चाहिए, और क्या अल्ट्रासॉउन्ड करवाने से शिशु को किसी तरह का नुकसान तो नहीं पहुँचता है, आदि। तो लीजिये आज हम प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के मन में अल्ट्रासॉउन्ड के लिए उठने वाले इन कुछ सवालों का जवाब देने की कोशिश करने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासॉउन्ड कब करवाते हैं

हर गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अल्ट्रासॉउन्ड करवाने की सलाह दी जाती है, ज्यादातर प्रेग्नेंट महिलाओं को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही के दौरान, प्रेगनेंसी के 18वें हफ्ते के आस पास, और नौवें महीने की शुरुआत में अल्ट्रासॉउन्ड के लिए बोला जा सकता है। पहली तिमाही का अल्ट्रासॉउन्ड जहां शिशु के दिल की धड़कन को जानने के लिए किया जाता है और डिलीवरी की तारीख का अंदाजा लगाने के लिए किया है। वहीँ दूसरी तिमाही में होने वाले अल्ट्रासॉउन्ड के माध्यम से गर्भ में पल रहे शिशु के अंगो का विकास अच्छे से हो रहा है या नहीं यह जानने के लिए किया जाता है।

क्योंकि यदि कोई समस्या होती है और उसका पता चल जाता है तो इससे शिशु को गर्भ से ही सुरक्षा प्रदान की जाती है ताकि शिशु को जन्म के समय किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। आखिरी महीने में होने वाले अल्ट्रासॉउन्ड से डिलीवरी का अंदाजा लगाने में और शिशु का शारीरिक विकास अच्छे से हो रहा है या नहीं यह जानने के लिए किया जाता है। और यदि इस अल्ट्रासॉउन्ड के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के साथ किसी तरह की समस्या देखी जाती है तो कुछ गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी के लिए भी बोल सकते हैं।

प्रेगनेंसी में कितने अल्ट्रासॉउन्ड करवाने चाहिए

हर महिला के केस में अल्ट्रासॉउन्ड की गिनती अलग अलग हो सकती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की समस्या न होने पर महिला को दो से तीन अल्ट्रासॉउन्ड करवाने की सलाह दी जाती है। वहीँ यदि गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स है, महिला की अधिक उम्र होने के कारण प्रेगनेंसी में दिक्कतें अधिक है, या अन्य कोई और समस्या है तो डॉक्टर ज्यादा अल्ट्रासॉउन्ड करवाने के लिए भी बोल सकते हैं। ऐसे में हर महिला को इतने अल्ट्रासॉउन्ड ही करवाने चाहिए यह बताना मुश्किल होता है, लेकिन गर्भवती महिला पाने डॉक्टर से इस बारे में अच्छे से जान सकती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान कब और कितने अल्ट्रासॉउन्ड करवाने चाहिए ये एक डॉक्टर से बेहतर कोई नहीं जान सकता है।

गर्भावस्था में अल्ट्रासॉउन्ड से गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान तो नहीं होता

जी नहीं, अल्ट्रासॉउन्ड एक सेफ प्रक्रिया है जिसे करवाने से गर्भ में पल रहे शिशु को कोई भी नुकसान नहीं होता है। क्योंकि अल्ट्रासॉउन्ड करने के दौरान पेट पर एक रेडियोएक्टिव जैल लगाया जाता है, फिर उसके ऊपर मैग्नेटिक मशीन से उसे छूते हैं। जिसमे से कुछ किरणे निकलती है जो शरीर के अंदर पहुंचकर गर्भ में होने वाले शिशु का चित्र स्क्रीन पर दिखाने में मदद करती है। इन किरणों के कारण गर्भ के तापमान में परिवर्तन नहीं आता है, और यदि थोड़ा प्रभाव होता है तो वो एमनियोटिक फ्लूड की मदद से गर्भ में चारों और फ़ैल जाता है जिससे शिशु को किसी तरह की परेशानी नहीं होती है।

साथ ही अल्ट्रासॉउन्ड के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मशीन को जैल के ऊपर डॉक्टर घुमाते रहते हैं, जिससे अल्ट्रासॉउन्ड के दौरान किसी भी तरह की परेशानी न होती है। बल्कि x ray करवाने के कारण गर्भ पर बुरा असर पड़ता है, इसीलिए प्रेगनेंसी में x ray नहीं बल्कि अल्ट्रासॉउन्ड करवाने की सलाह दी जाती है। और आज कल को अल्ट्रासॉउन्ड से गर्भ में पल रहे शिशु को 3D में देखा जा सकता है, जिससे शिशु के अंगो को विकास को बेहतर तरीके से देखने और समझने में मदद मिलती है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान अल्ट्रासॉउन्ड करवाने से जुड़े कुछ खास टिप्स, जिनसे आपको अल्ट्रासॉउन्ड को समझने में आसानी होगी। और अल्ट्रासॉउन्ड करवाने जाने पर किसी तरह की चिंता करने की जरुरत नहीं होती है, इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के लिए हर प्रयास करना चाहिए। ताकि गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास और प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सके।

चेहरे का कालापन दूर करने के उपाय

चेहरे का कालापन दूर करने के उपाय, चेहरे की रंगत को कैसे निखारें, त्वचा के कालेपन से कैसे छुटकारा पाए, धुप के कालेपन को दूर करने के उपाय, How to Clear Blackness of Face, Remedies for Blackness

गोरा, सुंदर और जवान दिखना भला किसे पसंद नहीं होता है। हर कोई चाहता है के उसके चेहरे की खूबसूरती बनी रहे। कुछ लड़कियों का आत्मविश्वास सुंदर चेहरा ना होने के कारण घटता है। आखिर चेहरा हमारी पहचान भी तो बन जाता है। लड़का हो या लड़की हर कोई सुंदर और गोरा चेहरे के लिए बहुत कुछ करता है। बहुत से लोग सुन्दर चेहरे के लिए महंगे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल और पार्लर में कई घण्टों का समय और पैसा भी लगाते है। पर अक्सर सभी को उनका मनचाहा परिणाम नहीं मिल पाता।

हम कितनी ही कोशिश क्यों ना करे फिर भी भागती जिंदगी, धुप, गर्मी, प्रदूषण और रोजाना के कामकाज का असर हमारे चेहरे पर आ ही जाता है। जिसके कारण बहुत सी स्किन रिलेटेड समस्याएं हो जाती है। जैसे के चेहरे का कालापन, कील मुहांसे, दाग धब्बे और झुर्रिया आदि। ऐसे में चेहरा अपनी चमक खो देता है।

चेहरे का कालापन दूर करने के उपाय

धुप में आने जाने वाले लोगो की रंगत अक्सर बदल जाती है। चेहरा भी काला पड़ जाता है। आइये जानते है चेहरे के कालेपन को कैसे घर पर ही दूर किया जाए।

आलू:

  • आलू को घिसकर उसका रस निकाल लें।
  • इस रस को चेहरे पर 20 मिनट तक लगा कर छोड़ दे।
  • अब ठन्डे पाने से धो लीजिये।
  • आप चाहे तो आलू की पतली पतली स्लाइस काट कर भी अपने चेहरे की मसाज कर सकती है।
  • आलू एक प्राकृतिक ब्लीच के तौर पर काम करता है।
  • इस उपाय को आप रोजाना या सप्ताह में 3 बार भी इस्तेमाल कर सकती है।
  • इस प्रयोग से जल्द ही आपके चेहरे का कालापन दूर हो जायेगा।

निम्बू:

  • निम्बू के रस और पानी को बराबर मात्रा में मिला ले।
  • अब इस मिश्रण को चेहरे पर लगा ले।
  • 20-25 मिनट बाद चेहरे को पानी से धो ले।
  • इसका रस त्वचा के गहरे दाग धब्बो को दूर करता है।
  • निम्बू में एसिडिक गुण होते जो हमारी त्वचा की रंगत साफ़ करते है।
  • इस उपाय को सप्ताह में 2 बार आजमाए।
  • इस प्रयोग के बाद धुप में ना जाए।

दही और केसर:

  • केसर के कुछ दानो को दही के साथ मिलाये।
  • इसे अपने चेहरे पर लगाए।
  • 15-20 बाद चेहरे को धो ले।
  • दही और केसर का यह पैक आपकी त्वचा की रंगत को साफ़ कर चमका देगा।
  • यह पैक सप्ताह में 2 बार लगा सकते है।

टमाटर और दही:

  • दही और टमाटर के रस को बराबर मात्रा में लेकर अच्छे से मिक्स करे।
  • इस पैक को चेहरे पर आधे घंटे तक लगाए।
  • उसके बाद पानी से धो ले।
  • यह पैक आपके चेहरे की सारी गंदगी साफ़ कर देगा।
  • इसके इस्तेमाल से चेहरे का कालापन भी दूर होगा।
  • त्वचा हाइड्रेट होकर सॉफ्ट बनेगी।

चावल:

  • 2 से 3 घंटे तक चावलों को भिगो कर रखें।
  • उसके बाद चावलों का पानी अपने चेहरे पर लगाइये।
  • सूखने के बाद पानी से धो लें।
  • इसका पानी चेहरे के सांवलेपन को दूर करता।
  • इस प्रयोग से चेहरा ग्लो भी करता है।

हल्दी:

  • हल्दी एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर होती है।
  • यह हमारे स्वास्थ्य और त्वचा दोनों के लिए ही फायदेमंद होती है।
  • हल्दी में शहद और निम्बू के रस की कुछ बूंदो को मिलाकर पैक बना लीजिये।
  • इस पैक को चेहरे पर लगाए।
  • 15 मिनट बाद चेहरा धो लीजिये।
  • ध्यान रखिये हल्दी को 15 मिनट से ऊपर मत लगाइये।
  • ज्यादा देर तक लगाने से चेहरा पीला दिखेगा।
  • इस पैक को आप सप्ताह में एक बार इस्तेमाल करे।

एलोवेरा:

  • एलोवेरा हमारी त्वचा के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।
  • इसके जेल से रोजाना चेहरे के मसाज करें।
  • 10 मिनट मसाज करने के बाद पानी से धो ले।
  • यह हमारे चेहरे की रंगत को साफ़ कर देगा।

इन सभी घरेलू, सस्ते और बिना केमिकल वाले पैक आप अपने चेहरे पर बिना किसी फ़िक्र के लगा सकते है।

बेबी बर्थ डेट ऐसे काउंट करें?

बच्चे के जन्म की ख़ुशी हर माँ बाप को होती है, और केवल माँ बाप ही नहीं बल्कि नन्हे मेहमान के आने की खुशी से सारा घर ही झूम उठता है, जैसे ही महिला को यह पता चलता है की वो प्रेग्नेंट है, तभी से उसका इंतज़ार शुरू हो जाता है, की कब वो नन्हा मेहमान उसके हाथों में आएगा, तो आइये आज हम आपके लिए ऐसा ही कुछ लाए हैं, जिससे आप अपनी due डेट के बारे में जानकारी ले सकते है, आम तौर पर प्रेगनेंसी 37 से 40 हफ्तों तक की होती है, लेकिन कई बार महिला की डिलीवरी पहले हो जाती है, ऐसे बच्चो को प्रीमेच्योर बच्चों की श्रेणी में रखा जाता है।

तो कुछ महिलाओ को नौ महीने के बाद भी दर्द का अहसास नहीं होता है, जिसके कारण उन्हें अर्टिफिशियल दर्द लगाकर शिशु को इस दुनिया में लाया जाता है, ज्यादातर ऐसे केस में नॉर्मल से ज्यादा सिजेरियन के चांस होते है, लेकिन नार्मल प्रेगनेंसी 37 से 40 हफ्तों तक की होती है, तो आइये अब जानते हैं की किस तरह आप अपने baby की बिर्थ डेट काउंट कर सकते हैं, बेबी की बर्थ डेट कैलकुलेट करने के लिए आपको सबसे पहले अपने लास्ट पीरियड की फर्स्ट डेट का पता होना चाहिए, उसी के हिसाब से आपको बताया जाता है की आपके शिशु की due डेट कौन सी हैं, तो आइये आपको एक example के साथ बताते हैं।

Example:-

मान लीजिये की आपके लास्ट पीरियड की फर्स्ट डेट चार ( 4 ) जून 2017 थी।

तो आपकी चालीस हफ्तों के हिसाब से डेट 11 मार्च 2018 बनेगी।

इसके अलावा आप इस तरह भी काउंट कर सकती है, जिस तरह आपको चार जून को पीरियड आया था, तो उस महीने से लेकर आप नौ महीने गईं लीजिये, जैसे चार जून के बाद आपको चार मार्च को नौ महीने पूरे होंगे उसके बाद उसमे आप एक वीक और ऐड कर लें, 4 + 7 =11 मतलब की 11 मार्च आपकीdue डेट होगी।

यदि आप भी प्रेग्नेंट है और अपनी due डेट जानना चाहती है, तो आप हमे हमारी साइट पर सवाल कर सकती है।

डिलीवरी के बाद शरीर में आई कमजोरी दूर करने के उपाय

बच्चे को जन्म देना महिला के लिए एक ऐसा अनुभव होता है जिसे केवल महिला ही महसूस कर सकती है। और डिलीवरी के बाद महिला का शरीर बहुत ज्यादा कमजोर हो जाता है। क्योंकि लगातार ब्लीडिंग, पेट पर लगे टाँके, बॉडी में दर्द के कारण महिला बहुत ज्यादा दिक्कत का अनुभव करती है। नोर्मल डिलीवरी के बाद महिला फिर भी थोड़ा जल्दी अपने आप को सँभालने की कोशिश करती है लेकिन सिजेरियन डिलीवरी वाली महिलाओं को ज्यादा दिक्कत होती है।

साथ ही डिलीवरी के बाद महिला की शरीर में आई कमजोरी के बाद भी महिला को अपने बच्चे की केयर का भी पूरा ध्यान रखना पड़ता है। ऐसे में डिलीवरी के बाद महिला शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के लिए महिला को अपना दुगुना ध्यान देने की जरुरत होती है। तो आइये अब हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं जो डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में आइए कमजोरी को दूर करने में बहुत फायदेमंद होते हैं।

आयरन युक्त आहार

डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग अधिक होने के कारण महिला के शरीर में खून की कमी हो जाती है इसीलिए महिला को ज्यादा कमजोरी का अनुभव होता है। ऐसे में महिला के शरीर में खून की कमी न हो जिससे महिला को कमजोरी थकान जैसी परेशानी से बचने और डिलीवरी के बड़ा जल्दी फिट होने में मदद मिल सके। इसके लिए महिला को आयरन युक्त आहार जैसे की हरी सब्जियों, चुकन्दर, गाजर, अनार, सेब, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

डेयरी प्रोडक्ट्स

दूध व् दूध से बनी चीजों का सेवन करने से भी डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में आई कमजोरी को दूर करने में मदद मिलती है।क्योंकि दूध में कैल्शियम व् प्रोटीन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो डिलीवरी के बाद महिला की हड्डियों व् मांसपेशियों में आई कमजोरी को जल्द से जल्द दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा दूध के फायदे को बढ़ाने के लिए महिला इसमें ड्राई फ्रूट्स, घी आदि मिलाकर इसका सेवन कर सकती है। साथ ही दूध का भरपूर सेवन करने से बच्चे को भी भरपूर पोषण मिलता है।

ड्राई फ्रूट्स और सौंठ, तिल या गोंद से बने लड्डू

डिलीवरी के बाद शरीर में आइ कमजोरी को दूर करने के लिए महिला को आटे को खूब सारे घी में भूनकर उसमे ड्राई फ्रूट्स के साथ तिल, सौंठ या गोंद आदि डालकर लड्डू बनाने चाहिए। और रोजाना दूध के साथ इन लड्डुओं का सेवन करना चाहिए। इन लड्डुओं का सेवन करने से डिलीवरी के बाद महिला को बहुत जल्दी फिट होने में मदद मिलती है। साथ ही इन लड्डुओं का सेवन करने से ब्रेस्टमिल्क को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

देसी घी

प्रसव के बाद देसी घी का सेवन भी महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि देसी घी पोषक तत्वों से भरपूर होता है। महिला रोटी पर लगाकर, हलवा बनाकर, सब्जियों में डालकर व् अन्य तरीको से घी का सेवन कर सकती है। नोर्मल डिलीवरी तुरंत बाद से ही महिला घी का सेवन शुरू कर सकती है लेकिन सिजेरियन डिलीवरी होने पर और नोर्मल डिलीवरी के दौरान टाँके आने पर महिला को एक बार डॉक्टर से राय लेने के बाद ही घी का सेवन शुरू करना चाहिए।

दालें

दालें प्रोटीन, आयरन, विटामिन्स व् अन्य पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होती है और यह सभी पोषक तत्व डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में आई कमजोरी को दूर करने में मदद करते है। इसीलिए दाल का सब्ज़ी या सूप के रूप में महिला को जरूर सेवन करना चाहिए।

साबुत अनाज

ओट्स, दलिया, पोहा आदि का सेवन भी डिलीवरी के बाद महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि साबुत अनाज भी डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में आई कमजोरी को दूर करके महिला को एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करती है।

भरपूर आराम

बच्चे के जन्म के बाद महिला का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है ऐसे में डिलीवरी के बाद महिला को भरपूर आराम करना चाहिए। को महिला जितना ज्यादा आराम करती है उतना ही ज्यादा महिला को जल्दी स्वस्थ होने में मदद मिलती है। साथ ही जन्म के तुरंत बाद बच्चा भी दिनभर में ज्यादा समय सोता ही रहता है इसीलिए महिला को अच्छे से आराम भी मिलता है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिनका ध्यान रखने से डिलीवरी के बाद महिला को बहुत जल्दी फिट होने में मदद मिलती है। इसके अलावा आपको इस बात का और ध्यान रखना है की आप अपने खाने पीने या आराम में किसी तरह की लापरवाही न करें। क्योंकि इसके कारण आपको दिक्कत होगी और साथ ही बच्चे को भी दिक्कत होगी, डिलीवरी के बाद महिला जितना आराम करेगी और पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करेगी उतना ही ज्यादा महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिलेगी।