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पीरियड्स में ब्लड ज्यादा आने के कारण

पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग होने के कारण, पीरियड्स के दौरान महिला को ब्लीडिंग होना बहुत ही सामान्य बात होती है, और महिलाओं के साथ ऐसा हर महीने होता है। इस दौरान महिला को तीन से पांच दिन तक ब्लीडिंग हो सकती है। पीरियड्स की शुरुआत के दो दिन ज्यादा व बाकी बचे दिनों में थोड़ी कम ब्लीडिंग हो सकती है। लेकिन यदि आपको ब्लीडिंग ज्यादा दिनों तक हो या ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो रही हो यानी यदि आपको हर घंटे पैड बदलने की जरुरत पड़ रही हो।

तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। पीरियड्स के दौरान यदि महिला को ब्लीडिंग ज्यादा हो तो इसका कोई एक कारण नहीं होता है। बल्कि पीरियड्स के समय ज्यादा ब्लीडिंग होने के बहुत कारण हो सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की पीरियड्स में ब्लीडिंग अधिक होने के क्या कारण होते हैं।

हार्मोनल असंतुलन

  • पीरियड्स के समय महिला की बॉडी में हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं।
  • ऐसे में यदि महिला की बॉडी में एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोन का स्तर सामान्य नहीं होता है।
  • यानी की बॉडी में हॉर्मोन्स असंतुलित होते हैं तो इसके कारण महिला को ज्यादा ब्लीडिंग हो सकती है।
  • इसके अलावा यदि किसी और कारण भी यदि बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की समस्या होती है।
  • तो उसके कारण महिला को पीरियड्स के समय ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।

पीरियड्स में अधिक ब्लीडिंग होने का कारण है अंडाशय से जुडी समस्या

  • यदि महिला के अंडाशय से अंडे रिलीज़ नहीं होते हैं।
  • तो इसके कारण महिला की बॉडी में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन रिलीज़ नहीं होता है।
  • जिसके कारण महिला को ज्यादा ब्लीडिंग हो सकती है।

गर्भनिरोधक उपकरण

  • यदि महिला ने किसी तरह के गर्भनिरोधक उपकरण का इस्तेमाल अपनी बॉडी में किया है, जैसे की कोपर- टी।
  • तो इसके कारण महिला को पीरियड्स के दौरान अधिक ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।
  • साथ ही गर्भनिरोधक गोलियों का अधिक सेवन करने के कारण भी महिला को अनियमित पीरियड्स व पीरियड्स के दौरान अधिक ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।

प्रेगनेंसी से जुड़े कारण

  • यदि महिला का गर्भपात हुआ है, डिलीवरी के बाद का समय है, महिला को एक्टोपिक प्रेगनेंसी हुई है तो इसके कारण भी महिला को पीरियड्स में अधिक ब्लीडिंग हो सकती है।
  • ऐसे में थोड़े समय बाद महिला के पीरियड्स नोर्मल हो जाते हैं।

पीरियड्स में अधिक ब्लीडिंग होने का कारण है दवाइयां

  • यदि आप किसी बिमारी से जुडी दवाइयों का सेवन कर रही हैं।
  • तो उन दवाइयों का सेवन करने के कारण भी आपको हो सकता है की पीरियड्स के दौरान अधिक ब्लीडिंग होने की समस्या हो जाए।

शारीरिक बीमारियां

  • यदि महिला गर्भाशय से जुड़े कैंसर, अंडाशय के कैंसर, सर्वाइकल कैंसर आदि शारीरिक बिमारी से पीड़ित है।
  • तो इसके कारण भी महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अधिक ब्लीडिंग होने की समस्या हो सकती है।

अनुवांशिक

  • कई बार इस समस्या का कारण अनुवांशिक भी हो सकता है यानी की यदि आपकी माँ या बहन को ऐसी समस्या रही हो।
  • तो हो सकता है उसी कारण आपको भी इस परेशानी का सामना करना पड़े।
  • ऐसे में एक बार डॉक्टर से राय लेना बेहतर होता है।

पीरियड्स में अधिक ब्लीडिंग होने का कारण है वजन

  • यदि किसी महिला का वजन बहुत ज्यादा होता है तो इसके कारण भी बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो सकती है।
  • जिसके कारण महिला को ज्यादा पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।

पेल्विक इंफ्लेमेट्री डिसीज ( पीआईडी )

  • पीआईडी यह एक प्रकार का संक्रमण होता है जो बॉडी के एक या एक से ज्यादा अंगों में हो सकता है जैसे – यूट्रस, फेलोपियन ट्यूब्‍स आदि।
  • यदि महिला इस तरह के संक्रमण से ग्रसित होती है तो इसके कारण महिला भी महिला को पीरियड्स में अधिक ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।
  • पीआईडी होने का कारण महिला को सम्बन्ध बनाने से सम्‍बंधी संक्रमण के कारण हो सकता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला को पीरियड्स में अधिक ब्लीडिंग हो सकती है। ऐसे में महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए और जल्द से जल्द डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

गर्भ में शिशु को दिक्कत होने के कारण गर्मियों में

प्रेगनेंसी के दौरान हर गर्भवती महिला को गर्भ में पल रहे शिशु को लेकर बहुत उत्साहित होती है। ऐसे में गर्भ में शिशु को किसी तरह की दिक्कत न हो और बच्चे का विकास भी बेहतर तरीके से हो इसके लिए प्रेग्नेंट महिला किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करती है। लेकिन गर्मी का मौसम प्रेग्नेंट महिला के लिए परेशान कर देने वाला हो सकता है ऐसे में गर्भवती महिला को होने वाली परेशानी का असर बच्चे पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा यदि महिला किसी भी तरह की लापरवाही करती है तो उसके कारण भी बच्चा परेशान हो सकता है। तो आइये अब हम आपको गर्भ में शिशु को गर्मियों में क्या दिक्कत हो सकती है इस बारे में जानते हैं।

शरीर का तापमान

गर्भवती महिला यदि गर्मी के मौसम में गर्म जगह पर ज्यादा रहती है, धूप में बाहर जाती है, गैस आदि के सामने ज्यादा काम करती है, तो ऐसे में गर्भवती महिला के शरीर का तापमान बढ़ सकता है। जिसके कारण पेट में बच्चे को परेशानी हो सकती है। और एक बार के लिए आप गर्मी में थोड़ा एडजस्ट कर सकती है लेकिन आपका बच्चा बिल्कुल भी एडजस्ट नहीं करेगा। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को शिशु को होने वाली इस दिक्कत से बचने के लिए गर्मी से बचना चाहिए और थोड़े ठन्डे माहौल में रहने की कोशिश करनी चाहिए।

पानी की कमी

गर्भावस्था के दौरान शरीर में पानी की कमी होना महिला व् बच्चे दोनों के लिए दिक्कत खड़ी कर सकती है। और गर्मी के मौसम में तो शरीर में पानी की कमी का होना बच्चे पर बहुत बुरा असर डाल सकता है। ऐसे में बच्चे को ऐसी कोई दिक्कत न हो उससे बचने के लिए गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए। पानी का भरपूर सेवन करने से एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रहने में भी मदद मिलती है जिससे बच्चे के विकास को सही रहने में मदद मिलती है।

धूप के कारण

यदि किसी कारण प्रेग्नेंट महिला धूप में निकलती है तो धूप की तेज किरणे बॉडी पर पड़ती है जिससे बॉडी का तापमान अचानक से बढ़ सकता है। और बॉडी का तापमान बढ़ने के कारण पेट में बच्चा असहज महसूस कर सकता है साथ ही इसके कारण ब्लीडिंग व् गर्भपात जैसी समस्या हो सकती है।

दोपहर में नहाने के कारण

गर्मी के मौसम में यदि महिला दोपहर के समय नहाती है और टंकी का पानी गर्म होता है तो इसके कारण भी बॉडी के तापमान में फ़र्क़ आ सकता है। जिसके कारण बच्चा असहज महसूस कर सकता है। साथ ही बॉडी का तापमान यदि अधिक बढ़ जाता है तो शुरूआती दिनों में इस कारण महिला को ब्लीडिंग या गर्भपात होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

नींद कम लेने के कारण

गर्मी अधिक महसूस होने के कारण हो सकता है की गर्भवती महिला को नींद लेने में दिक्कत हो और महिला की नींद पूरी न हो। ऐसे में बच्चे का विकास बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। क्योंकि नींद पूरी न होने के कारण महिला को थकान, कमजोरी, आलस, आदि की समस्या होने के साथ शरीर की क्रियाएं भी प्रभावित हो सकती है। जिससे शिशु पर बुरा प्रभाव पड़ने के कारण बच्चे को दिक्कत हो सकती है।

भूख कम लगने की वजह से

गर्मी के मौसम में भूख कम लगना बहुत आम बात होती है लेकिन गर्भवती महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। और अपने आहार का भरपूर सेवन करने के साथ भोजन में भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों को भी शामिल करना चाहिए। यदि प्रेग्नेंट महिला अपने आहार में लापरवाही करती है तो इसके कारण बच्चे के विकास पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है।

प्रेग्नेंट महिला के एक्टिव न रहने के कारण

गर्मी में आलस, कमजोरी, थकान महसूस होना बहुत आम बात होती है जिसके कारण गर्भवती महिला एक्टिव नहीं रहती है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला एक्टिव नहीं रहती है तो पेट में बच्चा भी एक्टिव नहीं रहता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से प्रेगनेंसी के दौरान गर्मियों के मौसम में पेट में पल रहे बच्चे को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को इन सभी बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे को दिक्कत न हो और माँ के साथ बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

टाँके के निशान हटाने के उपाय

बचपन में लगी चोट के कारण आपको टाँके लग सकते है। और यह टाँके के निशान खत्म नहीं होते है, बल्कि रह जाते है। और जैसे जैसे आप बड़े होते है यह निशान और बढ़ जाते है। यदि यह निशान ऐसे किसी हिस्से पर हो जो की कपडे से ढक जाए तो अलग बात है, लेकिन कई बार यह निशान आपके चेहरे, हाथ पर हो तो इसके कारण आपकी लुक खराब होती है। साथ ही यह निशान भद्दा भी दिखाई देता है। और कभी कभी तो चोट का निशान भी आपकी स्किन पर रह जाता है।

चोट अदि लगने पर उसका घाव भरने के लिए तो आप दवाई लगा लेते है, लेकिन इसके निशान नहीं जाते। क्या आपके भी चेहरे या किसी अन्य हिस्से पर चोट या टाँके का निशान है।यदि हाँ तो आज हम आपको इस समस्या से निजात पाने के कुछ टिप्स बताते है। लेकिन ऐसा भी नहीं है की यह आपको एक दिन में फायदा करेंगे बल्कि नियमित इस्तेमाल से आपको धीरे धीरे इसका असर दिखने लगेगा, और आपकी स्किन साफ़ हो जाएगी। तो आइये जानते है टाँके के निशान हटाने के क्या उपाय है।

टाँके का निशान हटाने के उपाय:-

एलोवेरा:-

एलोवेरा का इस्तेमाल हर तरह के दाग धब्बो और निशान को हटाने में मदद करता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप ताजे एलोवेरा के गुद्दे को निकालकर पेस्ट तैयार करें। उसके बाद इससे अच्छे से अपने टांको पर मसाज करें। और रात भर के लिए छोड़ दें, कुछ दिनों तक ऐसा नियमित करने से आपको फायदा मिलेगा।

ओटमील और शहद:-

एक कटोरी में एक चम्मच ओटमील, एक चम्मच शहद और थोड़ा सा पानी मिलाएं। उसके बाद आप इसे अच्छे से मिक्स करें, और इसे निशान पर लगाएं। थोड़ी देर के लिए इसे रहने दें, और उसके बाद गुनगुने पानी का इस्तेमाल करके इसे साफ करें। ऐसा नियमित करने से धीरे धीरे आपका निशान गायब होने लग जाएगा।

प्याज़ और खीरा:-

खीरे का रस भी चेहरे के दाग धब्बे हटाने के साथ चेहरे की रंगत को निखारने के लिए भी किया जाता है। लेकिन यदि आप प्याज़ और खीरे का रस बराबर मात्रा में मिलाकर इसे अपने टांको के निशाँ पर लगाते हैं। तो इससे आपको जल्दी फायदा होता है, इसके लिए आप दिन में चार से पांच बार खीरे और प्याज़ के रस को लगाकर टांको के निशाना पर छोड़ दें।

कोकोआ बटर:-

कोकोआ बटर को अच्छे से फैट कर अपने निशान पर लगाएं और हलके हाथों से मसाज कर थोड़ी देर के लिए वहीँ छोड़ दे। उसके बाद गुनगुने पानी से इसे साफ़ कर लें, ऐसा नियमित करने से आपको टाँके के निशान को मिटाने में मदद मिलती है। लेकिन ध्यान दें की मसाज आपको हलके हाथ से ही करनी चाहिए।

मेथी दाना:-

मेथी का दानो का इस्तेमाल भी आप टांको के निशान हटाने के लिए कर सकते है, इसके लिए आप दो चम्मच मेथी दाना को रात भर के लिए पानी में भिगो दें। उसके बाद सुबह उठकर पानी अलग करके दानो को पीस कर उनका लेप तैयार करें। अब इस लेप को टांको के निशान पर लगाएं। और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। ऐसा नियमित करें आपको कुछ ही दिनों में इसका असर दिखाई देने लगेगा।

पुदीने की पत्तियां:-

पुदीने की पत्तियों को पीस कर उनका रस निकाल लें, उसके बाद इस रस को दिन में चार से पांच बार अपने टांको के निशान पर लगाएं। इससे आपकी चोर को ठीक होने, दर्द को कम करने, और टांको के निशान को हटाने में मदद मिलती है।

बेकिंग सोडा:-

एक चम्मच बेकिंग सोडा में पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। उसके बाद इस पेस्ट को अपने टाँके के निशान पर लगाएं, लेकिन इस बात का ध्यान रखें की आप इसे ज्यादा रगड़े नहीं। और थोड़ी देर के लिए इसे लगे रहने दें, इस उपाय को नियमित कुछ दिन करने से आपको टाँके के निशान को खत्म करने में मदद मिलती है।

कच्चा आलू:-

कच्चे आलू का रस निकाल कर या इसकी स्लाइसेस काट कर आप किसी भी निशान पर रगड़ें। इससे हर तरह के दाग धब्बो को साफ़ करने में मदद मिलती है। और टाँके के निशान हटाने के लिए आप दिन में दो बार ऐसा करें। इससे न केवल आपकी स्किन को खूबसूरत बने रहने में मदद मिलती है। बल्कि इससे आपके टांके के निशान को भी खत्म किया जाता है।

टाँके के निशान हटाने के ने उपाय:-

  • जैतून का तेल हर तरह के विटामिन से भरपूर होता है चोट या टाँके के निशान पर इससे नियमित मसाज करने पर आपको इसका असर दिखाई देता है।
  • चन्दन पाउडर में दूध या गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बनाकर अपने निशान पर लगाएं।
  • मुल्तानी मिट्टी में गुलाबजल मिलाकर लगाने से भी टाँके के निशान को खत्म करने में मदद मिलती है।
  • बादाम को रात भर के लिए भीगोकर रख दें, उसके बाद सुबह इसका छिलका उतार कर पीस लें, अब इसमें गुलाबजल मिलाकर अपने निशान पर लगाएं।
  • निम्बू के रस का इस्तेमाल नियमित दिन में दो से तीन बार करने पर भी आपको फायदा मिलता है।
  • बाजार से क्रीम या लौटीं आदि खरीद कर भी आप इस समस्या से राहत पा सकते है।

तो यदि आपकी स्किन पर भी टाँके के निशान है तो आप भी ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल कर सकते है। इसके अलावा यदि आप जल्दी इस समस्या से राहत पाना चाहते है तो आजकल मीडियल साइंस में छोटी सी सर्जरी के माध्यम से आपकी इस समस्या को खत्म करके इस समस्या का समाधान किया जाता है, लेकिन कई लोगो को यह तरीका महंगा लगता है। इसीलिए आप ऊपर दिए गए टिप्स का नियमित इस्तेमाल तो कर सकते है।

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अपनी उम्र कम करने के घरेलू तरीके

वैसे तो हर व्यक्ति चाहता है की वो हमेशा जवान रहें, परन्तु उनका खान पान, दिनचर्या, आदतें, आदि का असर उनके चहरे पर साफ़ दिखाई देता है, बढती उम्र को आप रोक नहीं सकते है, परन्तु आप ये तो कर सकते है की आप चालीस की उम्र में पच्चीस के लगे, क्योंकि आपकी फिटनेस आपके ऊपर निर्भर करती है, यदि आप एक नियमित और अच्छी दिनचर्या रखते है तो उसका असर आपके चेहरे पर दिखाई देता है,और ये बात भी सच है व्यक्ति अपने खान पान और दिनचर्या को सही रखता है तो वो अपनी बढती हुई उम्र को रोक सकता है।

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जवान रहने के लिए जरुरी है की आप शारीरिक रूप से स्वस्थ हो, क्योंकि यदि आपका शरीर सही से काम करेगा तभी आपको एक्टिव रहने में मदद मिलती है, इसके अलावा आपको अपनी फिटनेस के लिए अपने खान पान, अपने वजन, अपनी स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना चाहिए, पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए, फलों व् उनके रस को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए, नींद को नज़रंदाज़ नहीं करना चाहिए, खुश रहना चाहिए, ऐसे ही कुछ नियमो को जब आप अपनी लाइफ में शामिल करते है तो आपको फिट रहने में मदद मिलती है, जिसका असर आपके चेहरे और आपकी उम्र पर भी पड़ता है, जिससे आपकी उम्र को थाम कर रखने और आपके चेहरे की ख़ूबसूरती को बढाने में मदद मिलती है, तो आइये अब विस्तार से जानते है की वो टिप्स कौन से है जो आपकी उम्र को कम करने में मदद करते है।

व्यायाम व् योगासन को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएं:-

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व्यायाम करने से आपके अंगो को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, क्योंकि ऐसा करने से आपकी हड्डियों को मजबूती मिलती है, साथ ही इसके कारण आपके शरीर को बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है, व्यायाम यदि आप सुबह करते है तो इसके कारण आपको पूरा दिन फ्रेश रहते है, और इसके कारण आपकी त्वचा भी रिलैक्स महसूस करती है, साथ ही योगासन करना भी आपकी सेहत के लिए बहुत फायदा करता है, ऐसा करने से ने आपको न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, और यदि आप इसे नियमित करते है तो आपको फिट और हमेशा जवान रहने में मदद मिलती है।

संतुलित व् पोष्टिक आहार का सेवन करें:-

संतुलित व् पोष्टिक आहार का सेवन करने से आपके शरीर का विकास अच्छे से होने में मदद मिलती है, साथ ही यदि आप नियमित ढंग से और समय पर आहार का सेवन करते है, तो इसके कारण आपका शरीर स्वस्थ रहता है, और साथ ही कमजोरी, थकान, शरीर के अंगो में दर्द जैसी समस्या से भी बचने में मदद मिलती है, और इसका असर आपके चेहरे पर भी साफ़ दिखाई देता है, और यदि आप अपने आहार में जंक फ़ूड, ज्यादा तला और मसालेदार भोजन को शामिल करते है, तो इसके कारण आपका वजन बढ़ता है, बीमारियों की चपेट में आप आ जाते है, जो आपको समय से पहले बूढा बना देते है, इसीलिए जितना हो सकें आपको इनसे दूर रहना चाहिए, और संतुलित व् पोष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए।

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वजन को नियंत्रित रखना चाहिए:-

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अपनी उम्र को यदि आप थाम कर रखना चाहते है, तो इसके लिए आपको अपने वजन को हमेशा नियंत्रित रखना चाहिए, और इसके लिए जरुरी है की आप अपने खान पान का ध्यान रखें, व्यायाम करें, ग्रीन टी का सेवन करें, बासी व् ठन्डे खाने के साथ ज्यादा वसा युक्त भोजन से परहेज करें, खाने को खूब चबा चबा कर सेवन करना चाहिए, ऐसा करने से आपका पाचन तंत्र सही रहता है, साथ ही आपके मेटाबोलिज्म को सही रहने में मदद मिलती है, जिससे आपके वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है, और आपका स्वास्थ्य सही रहता है जिससे आपकी उम्र को कम होने में मदद मिलती है।

पानी का भरपूर सेवन करें:-

पानी पीने से व्यक्ति के शरीर में मौजूद विषेले तत्वों को यूरिन और पसीने के रास्ते बाहर निकालने में मदद मिलती है, जिससे आपके शरीर का बीमारियों से बचाव होता है, साथ ही इसके कारण आपकी स्किन को भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, पानी का सेवन एक व्यक्ति को दिन में कम से कम आठ से दस गिलास करना चाहिए, ऐसा करने से आपके शरीर में उर्जा बनी रहती है, जिससे आपको फिट और जवान रहने में मदद मिलती है।

नींद को भरपूर लें:-

स्वस्थ व् फिट रहने के साथ सदा जवान बने रहने के लिए जरुरी है की आप अपनी नींद को हमेशा भरपूर लें, क्योंकि नींद को भरपूर लेने से आपकी मांसपेशियों और उत्तको को रिलैक्स करने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपके शरीर में उर्जा भरपूर मात्रा में होती है, साथ ही इसके कारण आपको आलस थकान जैसी समस्या से भी बचाव करने में मदद मिलती है, इसीलिए जितना हो सकें आपको रात को समय से सोना चाहिए और सुबह समय से उठाना चाहिए, इसके कारण आपको अपने आ को फिट रखने में और हमेशा जवान रहने में मदद मिलती है।

तनाव न लें, हमेशा खुश रहें:-

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तनाव आपकी उम्र को बहुत तेजी से बढ़ता है, इससे न केवल आप शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी बहुत तेजी से प्रभावित होते है, और यदि आपको कोई परेशानी है तो आपको उसे दिल पर लगाने की बजाय उस समस्या का समाधान करके उसे खत्म करने चाहिए, और दूसरी तरफ आपके लिए खुश रहना किसी दवाई से कम नहीं होता है, खुश रहने से आपको बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है, साथ ही खुश रहने से आपके चेहरा भी हमेशा लोगो को आपकी और आकर्षित करते है, और आपको हमेशा जवान महसूस होता है।

फलों का सेवन करें:-

जिस तरह भोजन आपके लिए जरुरी है इसीलिए आपको फिट रहने और अपने शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा को बढाने के लिए फलों का सेवन भी भरपूर करना चाहिए, ऐसा करने से आपको अपने शरीर में मिनरल्स की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है, इसीलिए आपको दिन में कम से कम दो बार फलों का सेवन जरुर करना चाहिए, साथ ही आपको फलों का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

तो ये कुछ टिप्स है जिनका इस्तेमाल करने से आपको अपनी उम्र को कम करने में मदद मिलती है, और आपको एक या दो दिन के लिए अपनी दिनचर्या को नहीं बल्कि हमेशा अपनी दिनचर्या को सही रखना चाहिए, ऐसा करने से आपको अपनी लुक को बेहतर बनाने के साथ बढती उम्र को भी थामने में मदद मिलती है।

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डिलीवरी डेट कैसे कैलकुलेट करें

डिलीवरी डेट कैसे कैलकुलेट करें, प्रसव की तारीख ऐसे पता करें, डिलीवरी डेट घर पर ऐसे पता करें, कैसे करते हैं डिलीवरी डेट कैलकुलेट

यदि किसी शिशु के जन्म की बात की जाये तो हमेशा यही कहा जाता है की शिशु माँ गर्भ में नौ महीने रहने के बाद जन्म लेता हैं जो की गकत है, क्योंकि एक स्वस्थ शिशु कम से कम 38 से चालीस हफ्ते तक माँ के गर्भ में रहता है, जिसके कारण पूरे नौ महीने कहना गलत होगा। कई बचे ऐसे भी होते हैं जो समय से पहले जन्म ले लेते हैं, तो कुछ नौ महीने पूरे होने के बाद जन्म लेते हैं। साथ ही ऐसा भी नहीं होता है की महिला और पुरुष ने एक बार सम्बन्ध बनाया और महिला गर्भवती हो गई, बल्कि कई बार सम्बन्ध बनाने के बाद महिला का गर्भ ठहरता है।

ऐसे में किस दिन सम्बन्ध बनाने के बाद महिला गर्भवती हुई है इसका पता करना डॉक्टर्स के लिए भी मुश्किल होता है। क्योंकि जिस दिन महिला और पुरुष के बीच सम्बन्ध बनने के बाद महिला शुक्राणु आपस में मिले होंगे उस दिन निषेचन होने के कारण महिला का गर्भ ठहरता है। ऐसे में महिला के प्रसव डेट का पता करने के लिए महिला के लास्ट पीरियड्स की डेट के अनुसार उसका पता किया जाता है, आप घर पर भी आसानी से अपनी डिलीवरी डेट का पता कर सकते हैं। तो आइये आज हम आपको डिलीवरी डेट का पता करते हैं इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

ऐसे करें डिलीवरी डेट कैलकुलेट

डिलीवरी डेट कैलकुलेट करने के लिए आप अपने लास्ट पीरियड के पहले दिन की तारीख याद रखनी होती है। उसके बाद उसमे नौ महीने जोड़ दें, और फिर जो तारीख आएगी उसमे सात दिन और जोड़ दें, जैसे की आपको लास्ट पीरियड 15 जनवरी को आया था तो 15 अक्टूबर में साथ दिन जोड़कर यह डेट 22 अक्टूबर हो जाएगी। ऐसे आप घर पर आसानी से डेट कैलकुलेट कर सकते है, लेकिन कई बार अल्ट्रासॉउन्ड में शिशु की ग्रोथ को देखकर डिलीवरी डेट डॉक्टर बदल देते हैं, क्योंकि शिशु की ग्रोथ से उन्हें यह पता चलता है की शायद निषेचन की क्रिया महीने की शुरुआत में नहीं थोड़ा लेट हुई है, इसका अंदाजा केवल डॉक्टर ही लगा पाते हैं।

तो यह हैं वो आसान तरीका जिससे आप घर पर बैठे आसानी से अपने शिशु के जन्म की डेट का पता कर सकते है, लेकिन ऐसा जरुरी नहीं होता है की शिशु उसी दिन जन्म लें क्योंकि यह महिला के शरीर पर और गर्भ में शिशु की पोजीशन पर निर्भर करता है, ऐसे में हो सकता है शिशु थोड़ा पहले या बाद में जन्म ले ले।

प्रेगनेंसी के बाद आपका पेट बड़ा नहीं होगा! अगर अपनाएंगे ये तरीके

बच्चे के जन्म के बाद ज्यादातर महिलायें अपने बाहर निकले हुए पेट से परेशान हो जाती है, और जल्द ही उसे अंदर करने की सोचती है, परन्तु डिलीवरी के तुरंत बाद कड़ा व्यायाम या खाने से परहेज करना न केवल आपके शरीर में कमजोरी लाता है, बल्कि इसका असर आपके शिशु के विकास पर भी पड़ता है, यदि आपका बच्चा स्तनपान करता है तो, परन्तु आप इस परेशानी का हल कर सकते है, और अपने पेट को बढ़ने से रोक सकते है।

इन्हें भी पढ़ें:- अगर आप डिलीवरी के बाद भी पहले जैसी दिखना चाहती है? तो ये करें

प्रेगनेंसी के समय आपका वजन समय के साथ बढ़ता है, क्योंकि गर्भ में पल रहे शिशु का वजन और आकार दोनों बढ़ते है, लेकिन डिलीवरी के बाद आप इस समस्या से निजात पा सकते है, और यदि आप चाहते है की आपका पेट बाहर न निकलें, तो आपको कुछ ऐसे तरीको का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे न तो आपका पेट बाहर निकलें, और न ही नवजात शिशु की देखभाल पर कोई असर पड़ें, जैसे की यदि आप डिलीवरी के बाद यदि अधिक मात्रा में पानी का सेवन करते है, तो आपका पेट बाहर निकल जाता है, ज्यादा देर एक ही जगह पर बैठने के कारण आपका वजन बढ़ता है, यदि आप बासी या फिर फ्रिज से निकला हुआ ठंडा खान खाते है तो आपका वजन बढ़ जाता है, इस बारे में यदि आपके घर में कोई बड़ा हो तो आप उससे भी पूछ सकते है, तो यदि आप भी डिलीवरी के बाद अपने पेट को बढ़ने नहीं देना चाहती है, तो आइये आपको आज आपको इस समस्या से बचने के कुछ टिप्स देते है।

पानी का सेवन अधिक न करें:-

डिलीवरी के बाद यदि आप ज्यादा पानी का सेवन करती है तो इसके कारण आपका पेट बाहर निकलने लगता है, इसके अलावा जब आप पानी पीते है तो उसे एक ही सांस में पीना चाहिए, और यदि आप चाहे तो पानी में मोटी इलायची, अजवाइन आदि को अच्छे से उबाल कर उस पानी का सेवन करना चाहिए, इस पानी का सेवन यदि आप करते है तो ऐसा करने से आपके पेट को डिलीवरी के बाद आपका पेट नहीं बढ़ता है।

ताजे फलों और मौसमी सब्जियों का सेवन करें:-

डिलीवरी के बाद आपको ताजे फलों का सेवन करना चाहिए, बासी फलों के सेवन से परहेज करना चाहिए, और साथ ही जितना हो सकें फ्रिज में ज्यादा देर रखें हुए फलों का सेवन भी न करें, इसके साथ आपको मौसमी सब्जियों का सेवन भी करना चाहिए, पोअरान्तु याद रखें की वो भी ताज़ी हो, और साथ ही एक ही तरह का खाना नियमित नहीं खाना चाहिए, अपने भोजन में बदलाव करने के साथ ऐसा आहार लें जिससे आपके शरीर को सभी पोषक तत्व मिल सकें।

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योगासन करें:-

डिलीवरी के बाद यदि आप अपने बाहर निकले हुए पेट को अंदर करना चाहते है तो इसके लिए आप अपने घर में ही थोड़ी देर बैठ कर योगा कर सकते है, ऐसा करने से न केवल आपको शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, आप ज्यादा देर नहीं सुबह के समय थोड़ी देर यानि आधे घंटे तक योगासन कर सकते है।

भोजन को चबा चबा कर उसका सेवन करें:-

यदि आप चाहते है की आपकी सेहत भी सही रहें, और आपका पेट भी न बढ़ें, तो इसके लिए आपको अपने खाने पीने का का ध्यान रखने के साथ इस बात का ध्यान भी रखना चाहिए की आप अपने भोजन को अच्छे से चबा चबा कर उसका सेवन करें, यदि आप भोजन को अच्छे से चबाते है तो इसके कारण आपकी पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है, और आपका पेट भी बाहर नहीं आता है।

 व्यायाम करें:-

हम आपको यह बिलकुल नहीं कह रहे है की डिलीवरी के बाद आप व्यायाम करना शुरू कर दें, बल्कि आप यदि चाहते है की आपका पेट बाहर न आयें तो इसके लिए आपको खाना खाने के बाद या सुबह उठकर थोड़ी देर आराम से वाक जरुर करनी चाहिए, ऐसा करने से आपको फिट रहने के साथ अपने वजन को भी घटाने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपका पेट बाहर नहीं आता है, परन्तु आपको इस बात का ध्यान भी रखना चाहिए की आपको ये सब कम से कम चालीस दिन के बाद इसे शुरू करना चाहिए, और फिर भी ज्यादा कड़ा व्यायाम नहीं करना चाहिए।

बच्चे को स्तनपान जरुर करवाएं:-

ज्यादातर महिलायें ऐसा ही सोचती है की यदि बच्चे को स्तनपान करवाया जाएँ तो इसके कारण उनका ब्रैस्ट या फिर उनका फिगर खराब हो जाता है, परन्तु ऐसा बिलकुल गलत होता है, स्तनपान करवाने से बच्चे और महिला दोनों को शारीरिक रूप से बीमारियों से बचाव करने में तो मदद मिलती ही है, साथ ही इसके कारण महिला की स्किन टाइट भी रहती है, जिसके कारण उसमे ढीलापन नहीं आता है, और पेट भी बाहर नहीं निकलता है, इसीलिए आपको इसे परहेज नहीं करना चाहिए, साथ ही माँ का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार है, इसके करवाने शिशु की ग्रोथ को अच्छे से होने में मदद मिलती है।

ज्यादा देर तक बैठें नहीं:-

डिलीवरी के बाद पेट के बहार निकलने का एक कारण आपका ज्यादा देर तक एक ही स्थान पर बैठना भी हो सकता है, इसीलिए यदि आप चाहते है की आपका पेट बाहर नहीं आयें तो इससे बचने के लिए आपको ज्यादा देर तक न तो एक ही स्थान पर बैठना चाहिए, जब शोशु स्तनपान कर रथ हो तो अलग बात है, और न ही एक ही साइड होकर ज्यादा देर तक लेते रहने चाहिए , इसके कारण भी आपके पेट पर दबाव पड़ता है, साथ ही उसमे ढीलापन भी आजाता है, इसीलिए जितना हो सकें इस बात का ध्यान रखना चाहिए।

तो ये कुछ टिप्स है जिनका इस्तेमाल करके आप डिलीवरी के बाद पेट बाहर निकलने की समस्या से राहत पा सकते है, इसके अलावा आपको अपने पेट को अंदर करने के लिए ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहिए, जिससे आपकी सेहत या नवजात शिशु के विकास पर कोई भी बुरा असर पड़े, और आपको इन चीजो का भी ध्यान रखना चाहिए।

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चावल या रोटी खाना क्या फायदेमंद होता है प्रेगनेंसी में?

अधिकतर लोग यह जानना चाहते हैं की चावल या रोटी दोनों में से कौन ज्यादा फायदेमंद होता है। खासकर प्रेगनेंसी के दौरान तो महिलाएं यह जरूर जानना चाहती है की उनके लिए रोटी खाना ज्यादा बेहतर है या चावल। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपसे इसी बात के बारे में बात करने जा रहे हैं की आखिर प्रेगनेंसी में चावल खाना ज्यादा फायदेमंद होता है या रोटी का? ताकि गर्भवती महिला के मन में चावल व् रोटी के बारे में आने वाले सवालों का जवाब मिल सके।

दोनों ही होते हैं कैलोरी से भरपूर

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अतिरिक्त ऊर्जा की जरुरत होती है और उसके लिए प्रेग्नेंट महिला को कैलोरी से भरपूर डाइट लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में गर्भवती महिला को रोटी या चावल को लेकर परेशान होने की बिल्कुल भी जरुरत नहीं हैं। क्योंकि रोटी व् चावल दोनों में कैलोरीज़ भरपूर मात्रा में मौजूद होती है। ऐसे में आप चाहे तो रोटी या फिर चावल या फिर थोड़ा थोड़ा दोनों का सेवन कर सकती है।

प्रोटीन

यदि चावल व् रोटी में प्रोटीन की बात की जाएँ तो दोनों की प्रोटीन के बेहतरीन स्त्रोत होते हैं। लेकिन रोटी में मौजूद प्रोटीन से ज्यादा चावल में मौजूद प्रोटीन की गुणवत्ता अच्छी होती है। ऐसे में प्रोटीन के लिए रोटी से ज्यादा महिला को चावल का सेवन करना चाहिए।

फाइबर

फाइबर युक्त आहार का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान बहुत जरुरी होता है। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है ऐसे में फाइबर महिला की पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता है। लेकिन यदि चावल और रोटी में से बात की जाये तो रोटी में फाइबर चावल की अपेक्षा ज्यादा होता है।

फैट

प्रेगनेंसी के दौरान वजन को संतुलित रखने के लिए फैट युक्त आहार का सेवन कम ही करना चाहिए। और इसके लिए आपको रोटी या चावल में से किसी एक को चुनने की जरुरत नहीं है। क्योंकि चावल और रोटी दोनों में ही फैट की मात्रा कम होती है।

फोलेट

गर्भ में पल रहे शिशु के लिए फोलेट के महत्वपूर्ण पोषक तत्व है ऐसे में यदि बात की जाये की चावल या रोटी में किस में ज्यादा फोलेट होता है। तो इसका जवाब होता है की रोटी या चावल दोनों में ही फोलेट मौजूद होता है। लेकिन आज कल चावल को पोलिश किया जाता है जिसके कारण उसकी गुणवत्ता में कमी आ सकती है ऐसे में फोलेट के लिए रोटी का सेवन ज्यादा फायदेमंद होता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान चावल या रोटी के सेवन से जुडी कुछ बातें, ऐसे में गर्भवती महिला के लिए किसी एक को चुनना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। क्योंकि जो पोषक तत्व चावल में होते हैं वो रोटी में कम होते हैं, जो रोटी में पोषक तत्व होते हैं वो चावल में कम होते हैं, कुछ पोषक तत्व दोनों में बराबर होते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को दोनों को ही संतुलित मात्रा में लेना चाहिए ताकि दोनों के ही फायदे गर्भवती महिला और बच्चे को मिल सके।

प्रेगनेंसी में गैस होना या पेट फूलना

प्रेगनेंसी में गैस होना या पेट फूलना, प्रेगनेंसी में गैस की समस्या से राहत पाने के टिप्स, पेट फूलने की समस्या से प्रेगनेंसी में ऐसे पाएं निजात, गर्भावस्था के दौरान गैस की समस्या दूर करने के टिप्स, Remedies for Acidity during Pregnancy 

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, और गैस होना या पेट फूलना आम बात होती है। इसके कारण महिला को खट्टी डकार या कब्ज़ जैसी परेशानी भी हो सकती है। खासकर प्रेगनेंसी के शुरुआत के दिनों में यह बहुत आम बात होती है। इसका कारण बॉडी में प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन की अधिकता होने के कारण पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है। जिसके कारण आपको यह परेशानी हो सकती है। बढ़ते वजन और पेट के कारण प्रसव का समय नजदीक आते आते कई बार यह दिक्कत ज्यादा भी हो सकती है। इससे बचने का सबसे आसान तरीका होता है की आप उन चीजों का सेवन न करें जिनसे आपको गैस की समस्या होती है। तो आइये अब कुछ आसान उपचार जानते हैं जिनसे प्रेगनेंसी के समय आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

मेथी का पानी

एक गिलास पानी में एक चम्मच मेथी रात भर के लिए भिगोकर रख दें, उसके बाद सुबह उठ कर उस पानी को छान लें। और एक बार में उस पानी को पूरा पी लें, इससे आपको गैस की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

धनिये के बीज

एक कप गरम पानी में एक चम्मच धनिये का चूर्ण मिला लें, उसके बाद उस पानी को अच्छे से मिक्स करके छान लें। और आराम से पानी को पीएं यह भी आपके पेट को साफ रखने के साथ पेट फूलने की समस्या से राहत दिलाता है।

अदरक

जब भी आपको एसिडिटी से ज्यादा परेशानी हो तो आधा चम्मच अदरक के रस में आधा चम्मच शहद को मिक्स करके उसका सेवन करें। ऐसा करने से आपको इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।

पानी भरपूर पीएं

पानी का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान आपको हर तरह की परेशानी से बचाए रखने में मदद करता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के समय आपको कब्ज़, पेट में दर्द, एसिडिटी जैसी समस्या से बचाव के लिए भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए।

फाइबर से भरपूर आहार

फाइबर युक्त आहार का सेवन गर्भावस्था में करने से न केवल आपके शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है बल्कि इसके कारण पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाया का सकता है।

व्यायाम

बॉडी की फिटनेस के लिए प्रेगनेंसी के दौरान आपको थोड़ा व्यायाम भी करना चाहिए, खासकर खाने में बाद दस मिनट वॉक जरूर करनी चाहिए। ऐसा करने से बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होने के साथ मेटाबोलिज्म भी बेहतर होता है जिससे आपको गैस अपच जैसी परेशानी से प्रेगनेंसी के दौरान राहत पाने में मदद मिलती है।

दालचीनी

एक कप पानी अच्छे से उबाल लें, और उबलते हुए पानी में ही आधा चम्मच दालचीनी पाउडर और एक चम्मच शहद का मिलाएं, उसके बाद उसे छानकर ठंडा करके उसका सेवन करें। इसकी मदद से आपकी पाचन क्रिया को बेहतर होने में मदद मिलती है।

आहार का खास ध्यान रखें

प्रेगनेंसी के दौरान आपका खान पान आपकी सेहत को ठीक रखने में सबसे ज्यादा आपकी मदद करता है, ऐसे में आपको ऐसा खान पान रखना चाहिए जिसमे सारे पोषक तत्व भी मौजूद हो और जिससे आपको गैस जैसी परेशानी का सामना भी न करना पड़े। ऐसे में किसी भी आहार का सेवन जैसे की गोभी, चने की दाल आदि न खाएं जिससे आपको गैस जैसी समस्या होती है।

तनाव से दूरी रखें

प्रेगनेंसी में गैस का एक कारण तनाव भी होता है, ऐसे में आपको अपनी पाचन क्रिया को बेहतर बनाने, और साथ ही शरीर के सभी क्रियाओं के सुचारु रूप से काम करने के लिए मानसिक रूप से फ्रैश रहना पड़ता है। इसीलिए यदि आप तनाव मुक्त रहते हैं तो ऐसा करने से आपकी पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको पेट फूलने, गैस बनने, खट्टी डकार, सीने में जलन जैसी परेशियों से प्रेगनेंसी के दौरान राहत पाने में मदद मिलती है।

रात को गुंथा हुआ आटा गर्भवती महिला के लिए क्यों होता है नुकसानदायक ?

भाग-दौड़ से भरी जिंदगी में सभी कामों को करने में हम इतने व्यस्त हो जाते है के हमें कुछ हानिकारक चीजों का अंदाजा ही नहीं होता।

खासतौर पर अगर महिलाओं के बारे में बात की जाए तो ऑफिस और घर सँभालते सँभालते वह अपनी सेहत का तो ध्यान रख ही नहीं पाती।

अगर महिला गर्भवती हो तो ऐसे में उन्हें अपनी सेहत का ध्यान रखना बेहद जरुरी हो जाता है। पर फिर हम घर पर कुछ न कुछ ऐसी चूंक कर देते है जिसका हमे अंदाजा भी नहीं होता।

अक्सर सभी ने देखा होगा अगले दिन सुबह की तैयारी करते हुए हम एक दिन पहले ही रात के समय आटा गूँथ कर रख देते है। ताकि सुबह सबका खाना बनाने में कही देर न हो जाये।

पर क्या हम सब जानते है के एक रात पहले का गुंथा हुआ आटा हमारे लिए कितना हानिकारक हो सकता है, ख़ासतौर पर एक गर्भवती महिला के लिए।

आइये जानते है एक दिन पहले गुंथा हुआ आटा एक गर्भवती महिला के लिए कैसे नुकसानदायक है।

  • विशेषज्ञों का मानना है के आटा गूंथने के तुरंत बाद हमे उसे इस्तेमाल करना चाहिए।
  • आटे के पानी में संपर्क में आने से कुछ रसायनिक बदलाव आते है जो गर्भवती महिला के लिए बहुत हानिकारक होता है।
  • गुंथे हुए आटे को फ्रीज़ में रखने से फ्रीज़ की हानिकारक किरणों के संपर्क में आने से आटा और भी ख़राब हो जाता है।
  • अपने अक्सर महसूस भी किया होगा एक दिन पहले गुंथे हुए आटे की रोटी का स्वाद भी बदल जाता है।
  • बासी आटे की रोटी खाने से गर्भवती महिला को गैस की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • ख़राब आटे की रोटी खाने से ना के सिर्फ गर्भवती महिला की पाचन क्रिया बल्कि बच्चे की भी पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है।

तो आपने देखा कैसे एक छोटी सी आदत से गर्भवती महिला की सेहत बिगड़ सकती है।

चींटियां भगाने के घरेलू उपाय

घर में चींटियों का होना अधिकतर मानसून व् गर्मियों के मौसम में देखने को मिलता है। लेकिन घर में यदि चींटियां हो जाएँ तो यह खाने पीने के सामान में घुस जाती है खासकर मीठी चीजों में। और यदि गलती से चींटी काट जाए तो उस जगह पर तेज दर्द, उस जगह का लाल होना, खुजली व् खून आने तक की समस्या हो सकती है। खासकर जब घर में छोटे बच्चे हो तो इन चीजों का और भी ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। लेकिन चींटियों को मारने या घर से भगाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल करने से आपको परेशानी भी हो सकती है। तो आइये आज हम आपको इस आर्टिकल में घर से चींटियों को भगाने के कुछ आसान टिप्स बताने जा रहे हैं।

निम्बू

  • निम्बू का स्वाद व् सुगंध दोनों ही चींटियों को पसंद नहीं होती है।
  • ऐसे में घर में जिस जगह पर चींटियों का झुण्ड दिखें वहीँ पर निम्बू की छोटी छोटी स्लाइसेस काटकर रख दें।
  • ऐसा करने से आपको आसानी से घर से चींटियों को भगाने में मदद मिलती है।

चींटियां भगाने के लिए इस्तेमाल करें नमक

  • चींटियों का झुण्ड जहां रहता है वहां पर थोड़ा नमक डालकर छिड़काव कर दें।
  • ऐसा रोजाना करें जब तक की चींटियां वहां आना बंद न कर दें।
  • ऐसा करने से भी घर से चींटियों को भगाने में मदद मिलती है।

लाल मिर्च

  • रसोई घर में खाने को लजीज बनाने वाली लाल मिर्च की गंध से चींटियां दूर भागती हैं।
  • ऐसे में जिस रास्ते चींटियां घर में आती है या जहां उनका झुण्ड होता है वहां पर लाल मिर्च पाउडर छिड़क दें।
  • ऐसा करने से घर से चींटियों को आसानी से भगाने में मदद मिलती है।

सिरका

  • पानी और सिरका को बराबर मात्रा में मिलाकर एक स्प्रे बनाएं और उसे बोतल में भर लें।
  • अब घर के उन हिस्सों में स्प्रे का छिड़काव करें जहां चींटियां आती हैं।
  • ऐसा नियमित करें आपको खुद ही इस उपाय का असर दिखने लगेगा।

चींटियां भगाने के लिए इस्तेमाल करें हल्दी पाउडर

  • हल्दी पाउडर का इस्तेमाल करने से भी चींटियों को घर से भगाने में मदद मिलती है।
  • घर के जिस हिस्से में भी आपको चींटियां नज़र आएं वहां पर हल्दी पाउडर छिड़क दें।
  • थोड़ी देर बाद आपको खुद भी पता नहीं चलेगा की आखिर चींटियां कहां गई।

कॉफ़ी पाउडर

  • कॉफ़ी पाउडर का इस्तेमाल करने से भी घर से चींटियों को भगाने में मदद मिलती है।
  • इस उपाय को करने के लिए भी घर के उन हिस्सों में कॉफ़ी पाउडर छिड़क दें जहां पर चींटियां दिखाई दें।
  • ऐसा जब तक करते रहे जब तक की उस जगह पर चींटियां आना बंद न कर दें।

खीरे का छिलका

  • चींटियों को भगाने के लिए खीरे का छिलका भी बहुत फायदेमंद होता है।
  • इस उपाय के लिए आप खीरे के छिलके को उस स्थान पर रख दें जहां चींटियां आती हैं।
  • खीरे के छिलके को देखकर चींटियां उस जगह पर नहीं आती हैं।
  • रोजाना आप ऐसा करें ताकि चींटियां उस जगह पर कभी न आएं।

चींटियां भगाने के लिए इस्तेमाल करें दालचीनी

  • दालचीनी पाउडर को पानी में मिलाकर स्प्रे करके या दालचीनी के टुकड़े को उस जगह पर रखें जहां घर में आपको चींटियां दिखाई देती है।
  • इस उपाय को करने से भी आपको घर से चींटियों को दूर रखने में मदद मिलती है।
  • दालचीनी के अलावा काली मिर्च पाउडर, तेज पत्ता, पुदीने की पत्तियां आदि का इस्तेमाल करके भी घर से चींटियों को भगाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से घर से चींटियों को भगाने में मदद मिलती है। तो यदि आप भी इस समस्या से परेशान है तो आप भी इनमे से किसी टिप्स का इस्तेमाल करके आसानी से इस परेशानी से निजात पा सकते हैं।