शिशु के जन्म के बाद हर दिन आप उसमे नया बदलाव महसूस करते हैं और जैसे जैसे शिशु का विकास बढ़ता है, वैसे वैसे शिशु पलटी मारने लगता है, चीजों को पकड़ने की कोशिश करने लगता है, बैठने लगता है, बोलने की कोशिश करता है, चलने लगता है, शिशु के दांत आने लगते हैं आदि। जन्म के छह महीने से एक साल के बीच शिशु के दांत आने शुरू हो जाते हैं, और इन दांतों को दूध के दांत भी कहा जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं की शिशु के दांत बनने की प्रक्रिया गर्भ में ही शुरू हो जाती है। और शिशु के जब पूरे दांत आ जाते हैं तो यह लगभग पांच वर्ष की उम्र के बाद यह टूटना भी शुरू हो जाते हैं। और उसके बाद शिशु को नए दांत आते हैं, दांतों के निकलने पर बहुत से शिशु उल्टी, दस्त जैसी समस्या से बहुत अधिक परेशान रह सकते हैं।
दांत के प्रकार
क्या आप जानते हैं की शिशु के जन्म के बाद दांतों के निकलने के भी दो प्रकार होते है, यदि नहीं, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की शिशु के दांत कितनी तरह के हो सकते हैं।
नेटल दांत: यदि शिशु के जन्म के समय ही दांत होते हैं तो उसे नेटल दांत कहा जाता है।
नियो नेटल: यदि शिशु के जन्म के बाद शिशु के छह से एक वर्ष के होने बीच दांतों के आने की शुरुआत होती है तो इसे नियो नेटल दांत कहा जाता है।
क्या शिशु के जन्म के समय उसके दांत हो सकते हैं?
जन्म के समय जिस तरह उसके सभी अंग विकसित होते हैं वैसे ही कुछ बच्चों के दांत भी निकले हुए होते हैं, क्योंकि दांतों के बनने की प्रक्रिया भी गर्भ में शिशु के बाकी अंगो के विकास के साथ ही शुरू हो जाती है। लेकिन ऐसा बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलता है, और यह काफी सामान्य बात होती है, जन्म के समय शिशु के दांतों का होना शिशु को होने वाली किसी बिमारी का संकेत नहीं होता है। लेकिन इसके कारण शिशु को परेशानी का अनुभव जरूर हो सकता है, ऐसे में यदि शिशु के दांत आपको महसूस हो तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए और जितना जल्दी हो सके इसके लिए एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।
क्या जन्म के समय शिशु के दांत होने से कोई परेशानी होती है?
जन्म के समय शिशु के दांत होने पर महिला को शिशु की अच्छे से केयर करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इसके कारण शिशु को कुछ परेशानी हो सकती है, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की शिशु के जन्म के समय से ही दांत होने पर कौन कौन सी परेशानियां हो सकती है।
शिशु के मुँह में दांत होने के कारण शिशु को दूध पीने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, और शिशु यदि दूध न पीए तो माँ को एक बार शिशु का मुँह जरूर चेक करके जरूर देखना चाहिए।
डॉक्टर्स के अनुसार इस तरह के दांत बहुत ही कोमल होते हैं, जिनके बहुत जल्दी टूट जाने का खतरा रहता है, ऐसे में शिशु जब भी कुछ निगलता है तो इन दाँतों का टूटकर सांस की नली या गले में फंस जाने का खतरा होता है। जिससे शिशु को बहुत ज्यादा परेशानी हो सकती है ऐसे में डॉक्टर्स इन्हे निकाल देने की सलाह ही दे सकते हैं।
तो यह हैं है जन्म के समय से ही शिशु को दांत निकलने से जुडी कुछ बातें, तो यदि आप भी गर्भवती है और बहुत जल्दी शिशु को जन्म देने वाली है तो शिशु की बेहतर केयर के लिए इस बात का ध्यान जरूर रखें ताकि शिशु को किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो।
कुत्ते के काटने पर क्या होता है, कुत्ते काटने का प्राथमिक उपचार क्या है, कुत्ते के काटने पर क्या करें, कुत्ते के काटने पर कौन से इंजेक्शन, Primary treatment after dog bite
ऐसा कहा जाता है की कुत्ते सबसे वफादार होने के साथ व्यक्ति के बहुत अच्छे दोस्त भी होते हैं। लेकिन कई बार यह दोस्त डर के कारण या अधिक छेड़ने पर आपको काट भी सकते हैं। कुत्ते का काटना बहुत ही दर्द भरा होने के साथ बीमारियों का कारण भी होता है। खासकर जब आपको ऐसा कोई कुत्ता काट ले जिसको रेबीज़ हो ऐसे कुत्ते के काटने पर आपके शरीर में रेबीज़ का वायरस फैलने लगता है। जिसके कारण आपको मानसिक रूप से सम्बंधित समस्या हो सकती है। ऐसे में जैसे ही कुत्ता आपको काटता है तो सबसे पहले पानी से उस घाव को साफ़ करके उस पर पट्टी बांधनी चाहिए ताकि संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके।
कुत्ते के काटने पर क्या होता है?
कुत्ते के काटने से दर्द, अधिक खून के बहने और घाव जैसी की समस्या हो सकती है।
सूजन, बुखार जैसी समस्या भी आपको हो सकती है।
बॉडी में इन्फेक्शन होने का खतरा होता है, क्योंकि कुत्ता जहां पर आपको काटता है वहां से बैक्टेरिया बॉडी में जाकर आपकी बॉडी में इन्फेक्शन को बढ़ाता है।
यदि आपको कोई पागल कुत्ता काट लेता है जिसको रेबीज़ बिमारी होती है तो आपको भी उस बिमारी के होने का खतरा होता है।
कुत्ते के काटने से मानसिक रूप से भी आपको बिमारी होने का खतरा रहता है।
आपके शरीर में होने वाली तंत्रिकाओं पर भी कुत्ते के काटने का बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।
कुत्ते के काटने पर करें यह प्राथमिक उपचार
कुत्ते के काटने के बाद जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी उपचार करना चाहिए , क्योंकि यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो इसके कारण आपको समस्या हो सकती है। ऐसे में कुत्ते के काटने के तुरंत बाद आपको क्या करना चाहिए और क्या प्राथमिक उपचार देना चाहिए आइये जानते हैं।
घाव को धोएं
जिस जगह पर आपको कुत्ते ने काटा है सबसे पहले उस जगह को अच्छे से पानी से धोना चाहिए, पानी न तो अधिक गरम होना चाहिए और न ही अधिक ठंडा। ऐसा करने से घाव के आस पास के कीटाणु को हटाने में मदद मिलेगी जिससे इन्फेक्शन के खतरे को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही घाव को साफ तोलिये से सूखा लें।
एंटीबायोटिक क्रीम लगाएं
घाव को साफ़ करने के बाद आप उस पर एंटीबायोटिक क्रीम को लगाएं, ऐसा करने से उसके आस पास फैलने वाले कीटाणु को खत्म करके इन्फेक्शन से बचाव करने में मदद मिलती है।
पट्टी का इस्तेमाल करें
क्रीम लगाने के बाद घाव पर अच्छे से पट्टी बाँध दें, ऐसा करने से यदि ब्लड निकल रहा होगा तो उसे भी रोकने में मदद मिलेगी। लेकिन इस बात का ध्यान रखें की न तो आप घाव को खुला छोड़ें और न ही एक ही पट्टी को पूरा दिन बाँध कर रखें। ऐसा करने से संक्रमण होने का खतरा रहता है। इसीलिए दिन में दो से तीन बार घाव को अच्छे से साफ करके पट्टी को बदल दें।
डॉक्टर से करें संपर्क
प्राथमिक चिकित्सा देने के बाद भी आपको डॉक्टर के पास जरूर जाना चाहिए क्योंकि आपको इससे पता चल सकेगा की आपके शरीर में कोई वायरस फैला तो नहीं है। और उसके बाद डॉक्टर ही आपको बता सकते है की आपको कितने और कौन सा इंजेक्शन लगेगा।
कुत्ते के काटने पर कौन से इंजेक्शन लगाए जाते हैं
टेटनस का इंजेक्शन
कुत्ते के काटने से तंत्रिका तंत्र से जुडी परेशानी हो सकती है, और तंत्रिका तंत्र से जुडी बिमारी से बचाव के लिए टेटनस का इंजेक्शन लगाया जाता है। क्योंकि कुत्ते के काटने के बाद यदि बैक्टेरिया आपके शरीर में चला जाता है तो ऐसा करने से यह खून में पहुंचकर जेहरीले पदार्थ का काम करते हैं जिससे तंत्रिका तंत्र से सम्बंधित समस्या होती है ऐसे में टेटनस का इंजेक्शन लगवाने से आपको इस समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।
रेबीज़ का इंजेक्शन
यदि किसी व्यक्ति को पहले रेबीज़ का इंजेक्शन कभी लगा हुआ होता है तो उसे दो इंजेक्शन लगते हैं और यदि कभी इंजेक्शन नहीं लगा होता है तो उसे रेबीज़ के हर इंजेक्शन लगते हैं। और इसका पहला इंजेक्शन कुत्ते के काटने के बाद, उसके बाद तीसरे, सातवें और चौहदवें दिन लगता है। इसके कारण आपको कुत्ते के काटने के कारण होने वाली परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।
तो यह हैं कुछ खास टिप्स जो आपको कुत्ते के काटने पर तुरंत इस्तेमाल करने चाहिए इसके अलावा आपको जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से राय लेनी चाहिए और अपना इलाज करवाना चाहिए ताकि आपको किसी भी तरह की बिमारी जो की कुत्तों के काटने से होती है उससे बचाव करने से मदद मिल सकें।
डेंगू एक ऐसा रोग है जो की मच्छर के काटने से फैलता है, और यह मच्छर आपको दिन के समय काटते है, आज भारत में डेंगू के मरीज़ दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे है, और डेंगू के मच्छर गंदगी में नहीं बल्कि साफ़ पानी में पनपते हैं, इसके व्यक्ति को बुखार आने लगता है, और तेजी से बढ़ता है, ब्लड में प्लैनेट्स की संख्या धीरे धीरे कम हो जाती है, जिसके कारण बदन में दर्द, ठण्ड लगना, उल्टियां होना, त्वचा का सूखा पड़ना, प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना, और भी कई प्रकार के लक्षण शरीर में दिखाई देने लगते हैं, और जैसे ही आपको ये लक्षण अपने शरीर में दिखाई दें, तो इसका उपचार शुरू कर देना चाहिए, ऐसा नहीं है की इसका उपचार नहीं है, बल्कि आप घर में भी इसका उपचार कर सकती है, साथ ही डॉक्टर की राय भी लें, लेकिन धैर्य के साथ आप इस समस्या से निजात पा सकती हैं तो आइये आज हम आपके लिए डेंगू से बचने के कुछ आसान टिप्स लाएं हैं जो आपको इस समस्या से बचने में मदद करेंगे।
रेड लेडी पपीते के पत्ते का इस्तेमाल करने से आपको डेंगू से बचने में मदद मिलती है, क्योंकि इसमें मौजूद कायमोपपैन, और पैपेन आपके प्लैनेट्स काउंट को बढ़ाने में मदद करता है, साथ ही इसके कारण आपके लीवर को भी सही से काम करने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप पपीते की पत्तियों को बिना पानी, नमक चीनी का इस्तेमाल किये बिना लकड़ी की ओखली में कूट लें, उसके बाद दिन में दो बार इसके 10 ml रस का सेवन करें, यदि शिशु है तो 2.5 ml का दिन में दो बार सेवन करें, आपको इसका फ़र्क़ जरूर दिखाई देगा, और पूरे ठीक होने तक इसका सेवन करते रहें, इससे आपको ऊर्जा भी मिलेगी।
गिलोय का सेवन करें:-
गिलोय डेंगू को जड़ से खत्म करने के लिए किसी आयुर्वेदिक औषधि से कम नहीं है, डेंगू के होने पर यदि आप नियमित गिलोय का सेवन तुलसी के रस के साथ करते हैं तो आपको चार से पांच दिनों में ही इसका असर दिखना शुरू हो जाता है, इसके लिए आप गिलोय की टहनी को पानी में उबालकर इसे ठंडा करके दिन में तीन से चार बार इसका सेवन करें, और बच्चों को भी करवाएं, इससे आपके रक्त में प्लैनेट्स की संख्या तेजी से बढ़ती है, जिससे आपको डेंगू से जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है।
बकरी के दूध का इस्तेमाल करें:-
डेंगू के बुखार से बचने के लिए बकरी का दूध बहुत ही आसान उपाय है, साथ ही यह भी डेंगू से राहत के लिए किसी औषधि से कम नहीं होता है, इसके लिए आप बकरी के दूध का सेवन दिन में दो से से तीन बार करें, जैसे जैसे आप इसका सेवन करते है, तो यह भी आपके रक्त में प्लैनेट्स को बढ़ाने में आपकी मदद करता है, इसीलिए यदि आपको कभी ऐसा लगे या कोई डेंगू का लक्षण दिखाई दें, तो आपको बकरी के दूध का सेवन करना चाहिए।
तुलसी किसी आयुर्वेदिक औषधि से कम नहीं होती है, साथ ही इसका सेवन जब आप काली मिर्च के साथ करते हैं तो यह अपने एंटी बैक्टेरियल गुणों के कारण आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में आपकी मदद करते हैं, जिससे आपको ऊर्जा मिलती है और साथ ही धीरे धीरे डेंगू की समस्या से आराम मिलता है, इसके लिए आप तुलसी के पत्तो और दो यया तीन काली मिर्च को पानी में अच्छे से उबाल कर काढ़ा बनाकर ले सकते है, या फिर तुलसी के पत्तो का रस निकालकर उसमे थोड़ा सा काली मिर्च का पाउडर मिलायें आपको फायदा मिलेगा।
मेथी के पत्तो का इस्तेमाल करें:-
डेंगू के प्रभाव से बचने के लिए मेथी के पत्ते भी असरदार उपाय में से एक है इसके लिए आप इसकी पत्तियों को पांच से छह घंटे तक पानी में भिगोकर रख दें, उसके बाद छान कर इस पानी का सेवन करें, या आप इनका जूस निकाल भी सेवन कर सकते है, इससे आपको एनर्जी मिलती है, जिससे आपको बुखार से राहत पाने में मदद मिलती है, आप चाहे तो दिन में दो बार गुनगुने पानी में एक चम्मच मेथी पाउडर को मिलाकर उसका सेवन भी कर सकती हैं इससे भी आपको फायदा मिलता है।
अनार और गेंहूं घास के रस का सेवन करें:-
अनार का रस और गेहूँ की घास का रस मिलाकर पीने से आपको डेंगू की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, और यदि गेहूं घास का रस नहीं है तो आप अनार और सेब का रस मिलाकर भी दिन में दो से तीन बार पी सकती हैं इससे भी आपको डेंगू से राहत पाने में मदद मिलती है, केवल बड़े ही नहीं यदि आप बच्चों को भी नियमित इसका सेवन करवाती हैं तो इससे उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत होने में मदद मिलती है।
नारियल पानी का सेवन करें:-
नारियल पानी का सेवन करने से भी आपको डेंगू के कारण शरीर में होने वाली पोषक तत्वों की कमी और पानी की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है दिन में तीन से चार बार इसके नियमित सेवन से भी आपको डेंगू से जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है।
आंवले का सेवन करें:-
विटामिन सी से भरपूर आंवले का सेवन आप डेंगू बुखार को खत्म करने के लिए किसी भी रूप में कर सकते है, जैसे की आंवले का मुरब्बा दिन में दो से तीन बार करें, कच्चा आंवला खाएं, या फिर सुबह खाली पेट आंवले के चूर्ण का पानी के साथ सेवन करें, इससे भी आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है, साथ ही आपके शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करके आपको स्वस्थ करने में मदद मिलती है।
धतूरे का सेवन करें:-
धतूरे का सेवन करने से भी आपको डेंगू से बुखार से राहत पाने में मदद मिलती है, लेकिन इसे बच्चों को नहीं देना चाहिए और किसी बड़े को भी इसकी खुराक दो ग्राम से अधिक नहीं लेनी चाहिए, यदि आप दिन में दो बार एक एक ग्राम करके इसका सेवन करते हैं तो इससे भी आपको डेंगू बुखार से राहत मिलती है।
डेंगू से बचने के अन्य उपाय:-
हल्दी वाला दूध नियमित पीने से आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है, जिससे आपको डेंगू से बचाया जा सकता है।
अनार और काले अंगूर का रस मिलकर पीने से भी डेंगू के कारण शरीर में होने वाली प्लैनेट्स की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है,
साथ ही आपको बुखार से राहत मिलती है।चिरायता का सेवन करने से भी इस समस्या से रहत पाने में आपको मदद मिलती है।
तुलसी के पत्तो का काढ़ा या तुलसी के पत्तो की चाय का सेवन करने से भी आपको फायदा मिलता है।
गोल्डनसील यह भी एक हर्ब है जो पपीते की पत्तियों की तरह काम करती है, इसे चबाकर या इनका रस निकालकर पीने से भी आपको डेंगू से बचाया जा सकता है।
अपने घर के आस पास खुले में पानी न छोड़े, कूलर, गमले आदि के पानी को भी नियमित बदलने से आपको डेंगू के खतरे से सचेत होने में मदद मिलती है।
विटामिन सी युक्त पदार्थो का सेवन भरपूर मात्रा में करने से आपको डेंगू से बचाव करने में मदद मिलती है।
नीम की पत्तियों का धुआं घर में करने से भी मच्छरों को घर से दूर रखा जा सकता है जिससे आपको इस समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।
डेंगू से बचने के लिए जितना हो सकें आप पूरी बाजू के सूती के कपडे पहन कर रखें।
डेंगू के रोगी का आहार:-
डेंगू होने के कारण व्यक्ति के शरीर में बहुत कमजोरी आ जाती है, जिसके कारण उसकी पाचन शक्ति भी कमजोर हो जाती है, इसीलिए रोगी को ऐसा आहार देना चाहिए जो की आसानी से पच जाएँ और साथ ही वो आहार पौष्टिक भी हो, इसके लिए आप खिचड़ी, दलिया, उबली हुई सब्जियां, सूप, केला, सेब आदि देना चाहिए, साथ ही रोगी को अदरक और इलायची वाली चाय भी देनी चाहिए, साथ ही उलटी और बुखार के कारण शरीर में होने वाली पानी की कमी को दूर करने के लिए आपको रोगी को जूस, नारियल पानी, आदि भी भरपूर देना चाहिए और जितना हो तेलीय पदार्थो से दुरी बनाकर रखनी चाहिए।
तो ये हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करके आप डेंगू से बचाव कर सकते है, साथ ही रोगी के लिए साफ़ सफाई का ध्यान भी रखना चाहिए, और साथ ही रोगी द्वारा इस्तेमाल किये गए सामान को किसी और को इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे डेंगू के फैलने का खतरा रहता है।
प्रसव पीड़ा को सहने के उपाय: गर्भावस्था का समय किसी भी महिला के लिए बहुत खास और अनोखा समय होता हैं| गर्भावस्था के समय हर महिला बहुत खुश होती हैं| क्योंकि कुछ ही दिनों के बाद उसके घर एक नन्हा मेहमान आने वाला होता हैं| इसी समय उसके मन में कई सवाल भी आते हैं| क्योकि महिला जब गर्भावस्था का समय काट रही होती हैं| तो उसके शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं जिनके कारण वो बहुत परेशान रहती हैं| और सबसे ज्यादा परेशान तो वो प्रसव यानि जब बच्चा पैदा होने वाला होता हैं| वो तब होती हैं|
बच्चा पैदा करना किसी जंग से काम नहीं होता किसी महिला के लिए| सिजेरियन में महिला को प्रसव पीड़ा नहीं होती हैं| क्योंकि उसमे तो शरीर को सुन कर दिया जाता हैं| उन्हें पता ही नहीं चलता हैं की कब बच्चा हो गया हैं| परंतु नार्मल डिलीवरी वाली महिला को बहुत दर्द का सामना करना पड़ता हैं| क्योकि ये दर्द असहनीय होता हैं| औरत को लगता हैं की जैसे वो मौत के मुह से बाहर आई हैं| तभी तो कहा जाता हैं| की बच्चा होने के बाद औरत का दूसरा जन्म होता हैं| परंतु माँ बनने का एक नया अनुभव भी होता हैं|
आज के समय में लोग सिजेरियन करवाने को ही प्राथमिकता देते हैं| क्योंकि वो नार्मल डिलीवरी में क्या होता हैं| इसे सुन कर ही डर जाते हैं| नार्मल डिलीवरी में महिलाओ को कई बार बहुत दर्द के बाद भी जब बच्चा नहीं होता हैं तो वो और भी परेशान हो जाता हैं| क्योंकि उससे वो दर्द सहन नहीं होता हैं| और इस दर्द को कम भी नहीं किया जा सकता हैं| क्योंकि कम कर दिया गया तो फिर सिजेरियन ही करना पड़ता हैं| परंतु कई महिलाये आज भी नार्मल डिलीवरी को ही प्राथमिकता देती हैं|
प्रसव पीड़ा के समय महिला का अपने ऊपर बिलकुल भी जोर नहीं चलता हैं| उस समय उसके मन में बस यही चल रहा होता हैं| की बच्चा कब जन्म लेगा और उसे इस दर्द से मुक्ति मिलेगी| पहले के समय में तो लोगो को सिजेरियन के बारे में कुछ पता ही नहीं था| क्योंकि सिजेरियन होती ही नहीं थी| बस जैसे ही औरत को प्रसव पीड़ा होती थी| तो महिलाये खुद घर में ही बच्चा पैदा कर लेती थी| परंतुइ आज का युग ऐसा नहीं हैं| क्योंकि आज के समय में ऐसा करने पर बच्चे को इन्फेक्शन का खतरा बहुत ज्यादा होता हैं|
तो आइये जानते हैं किस प्रकार आप प्रसव पीड़ा को सहन कर सकती हैं| महिलाये नौ महीने तक इस कीमती पल का इंतज़ार करती हैं| और जैसे ही आपकी निर्धारित तारीख आने वाली है तो आप और भी अधिक अधीर हो जाते हालाँकि इस स्थिति से आप आसानी से और धैर्य से निपट सकते हैं| कभी कभी गर्भवती महिला अस्पताल पहुँचने से पहले प्रसव पीड़ा प्रेरित करने के लिए कुछ न कुछ उपाय करती रहती हैं| जिससे आपको प्रसव पीड़ा को सहन करने में आसानी हो| तो ये हैं कुछ उपाय जिन्हें आप प्रसव पीड़ा को सहन करने के लिए अपना सकती हैं|
प्रसव पीड़ा को सहन करने के उपाय और टिप्स:-
गर्भावस्था के समय से ही करती रहे व्यायाम:-
माना जाता हैं की गर्भावस्था के समय से ही जो महिलाये व्यायाम करती हैं| उन्हें प्रसव पीड़ा कम होती हैं| प्रसव पीड़ा धीरे-धीरे शुरू होती हैं| प्रसव पीड़ा से बचने के लिए आपको गर्भावस्था के समय से ही हल्का फुल्का व्यायाम करना चाहिए| परंतु व्ययन ऐसा करे की जिससे बच्चे को कोई नुक्सान न हो| आप यदि गर्भावस्था के समय में योगा या फिर मैडिटेशन करती हैं तो उससे भी आपको आराम मिलेगा| यदि गर्भावस्था के समय से ही इन टिप्स को अपनाते हैं| तो आपको प्रसव के समय कम पीड़ा का सामना करना पड़ता हैं|
अपनी सासों की गति को करे धीमा;-
जैसे ही महिला को प्रसव पीड़ा होने लगती हैं| तो उसके पेट में काफी दर्द हो जाता हैं| जो कई बार असहनीय होता हैं| जिसके कारण आप कई बार बहुत तंग हो जाती हैं| ऐसे में हमारी सांसो की रफ़्तार भी तेज हो जाती हैं| यदि आप चाहती हैं की आपको प्रसव पीड़ा का अहसास कम हो तो आपको अपनी सांसो की गति पर रोक लगानी चाहिए| जिससे की आपको आराम मिल सके| और अपनी सांसो को धीमा करके उन्हें आराम और लंबे लेने से आपको कम दर्द का अहसास होता हैं| इससे भी आप प्रसव पीड़ा से थोड़ा आराम पा सकते हैं|
बार बार अपनी पोजीशन बदले:-
जैसे ही महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होती हैं| तो वो अपने पेट को पकड़कर लेट जाती हैं| ऐसा नहीं करना चाहिए जैसे ही महिला को हल्का फुल्का दर्द हो तो उसे अपनी पोजीशन बदलते रहना चाहिए| इससे दर्द सामान्य रहता हैं| और आपको भी आराम मिलता हैं| प्रसव के दौरान आपको अपनी पोजीशन को बार-बार बदलना चाहिए| परंतु पेट के भर नहीं लेटना चाहिए| नहीं तो ज्यादा दर्द हो जाता हैं| कॉरपेट पर जोर पड़ने की वजह से ज्यादा समस्या उत्तपन हो सकती हैं|
ज्यादा पानी पीये:-
कई महिलाओ को प्रसव पीड़ा के दौरान पानी पीने से भी दर्द का अहसास कम होता हैं| यह एक घरेलू नुस्खा हैं| जिसका इस्तेमाल करके आप प्रसव में होने वाली पीड़ा से निजात पा सकते हैं| क्योकि कई बार आपका पीड़ा के दौरान कुछ खाने का मन नहीं करता हैं| इससे आपके पेट में गैस बनने लगती हैं| जिससे ज्यादा दर्द होता हैं| इसीलिए आपको प्रसव पीड़ा के दौरान यदि कुछ खाना नहीं हैं तो पानी का सेवन ही करती रहे|
पैदल चले:-
यदि आपको प्रसव की पीड़ा हो रही हैं तो आप पैदल चले जिससे बच्चा निचे की और आ जायेगा| और आपकी डिलीवरी में समय भी नहीं लगेगा और आपको प्रसव पीड़ा से भी मुक्ति मिल जाएगी| ऐसा करने से आपको तुरत आराम भी मिलेगा| यदि बच्चा अभी नहीं होने वाला होगा तो आपको दर्द से राहत मिल जाएगी| इसीलिए आप प्रसव पीड़ा से बचने के लिए इस तरीके का भी इस्तेमाल कर सकती हैं| इससे आपको आराम मिलेगा|
अपने साथी से बाते करे:-
कई बार मन कई और लगाने से भी दर्द कम हो जाता हैं| इसीलिए यदि आपको प्रसव पीड़ा हो रही हैं, परंतु अभी बच्चा होने में समय हैं तो आपको अपना मन कही और लगाने के लिए अपने साथी या फिर आपके साथ कोई भी हैं उससे बात करनी चाहिए| ऐसा करने से आपका मन कही और लगेगा और आपको दर्द से भी राहत मिलेगी| आप मन कही और लगाने के लिए भजन या किसी मन्त्र का जाप कर सकती हैं| जिससे आपको आराम मिले|
तो ये हैं कुछ बाते जिनकी मदद से आप प्रसव में होने वाले दर्द से आराम पा सकते हैं| परंतु ऐसा नहीं हैं की दर्द ख़तम हो जायेगा| परंतु आपका मन कही और लगने के कारण आपको ही प्रसव पीड़ा सहने में आसानी होगी| कहा जाता हैं की यदि नोवे महीने में अच्छे से काम किया जाये, आलस न किया जाये, ज्यादातर लेते न रहे, व्यायाम करे, गरम चीजे खाये, ज्यादा मसाले वाला भोजन करे| तो आपको प्रसव पीड़ा का ज्यादा सामना करना नहीं पड़ेगा| बस आप आसानी से थोड़ी ही देर में बच्चे को जन्म दे सकती हैं|
इनके आलावा यदि औरत पुरे नौ महीने तक अपने शरीर को हेल्थी रखे, काम करती रहे ( भारी सामान न उठाये ), और व्यायाम करे, वाक करे, साथ ही आप अच्छा आहार ले, तो भी आपकों प्रसव पीड़ा सहन करने में आसानी हो सकती हैं| जिससे आपको ज्यादा देर दर्द का अहसास भी नहीं होगा| तो यदि आप इन सब बातो का ध्यान रखेगी तो आपको प्रसव पीड़ा को सहन करने में आसानी होगी| और आप तंदरुस्त और स्वस्थ भी रहेंगे|
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अच्छे, घने, लंबे और चमकदार बाल हर महिला की पहली ख्वाहिश होती है। लेकिन समय के अभाव के चलते ठीक प्रकार से देखभाल नहीं कर पाने के कारण वे अपनी इस ख्वाहिश से वंछित रह जाती है। पहले के समय में तो महिलाओं के बाल प्राकृतिक बाल ही चमकदार और खुबसूरत हुआ करते थे। लेकिन आजकल के प्रदुषण भरे वातावरण में बालों को चमक बरकरार रख पाना काफी मुश्किल होता है।
लेकिन चमकदार बाल पाने की चाह में अक्सर गलत तरीकों का इस्तेमाल करने लगती है। जिनमे जेल, मूस, सीरम, हेयर स्प्रे आदि सम्मिलित है। इतना ही नहीं कई महिलाएं तो बालों को सिल्की बनाने के लिए रिबोंडिंग जैसे महंगे ट्रीटमेंट का भी इस्तेमाल करती है। लेकिन इन सभी तरीकों में बालों पर केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है जो कुछ समय के लिए तो बालों को सिल्की बना देता है लेकिन एक लंबे समय के लिए टूटते बालों की समस्या दे जाता है।
ऐसे में क्या कभी आपने किसी घरेलु उपाय का प्रयोग करने के बारे में सोचा है? शायद नहीं! क्योंकि सभी को लगता है की घरेलू उपायों में काफी समय बर्बाद होता है। जबकि ऐसा नहीं है अगर आप चाहे तो थोड़े से समय में भी इन उपायों का इस्तेमाल कर सकती है। आज हम आपके लिए कुछ घरेलू उपायों की सूचि लेकर आये है जो आपके बालों को बिना कोई नुकसान पहुंचाएं प्रकृतिक रूप से लम्बा और चमकदार बनायेंगे। तो आइये इन उपायों के बारे में विस्तार से जानते है।
बालों को चमकदार बनाने के घरेलू उपाय
1. सिरका या नींबू – क्या है आपके लिए बेहतर?
सिरका स्कैल्प के लिए अच्छा होता है क्योंकि यह हेयर क्यूटिकल्स को बंद कर देता है। जिससे बाल स्मूथ हो जाते है और उनमे चमक आती है। इसके लिए 2 चम्मच सिरके को एक लीटर पानी में मिलाकर मिक्स करें। और इसका इस्तेमाल अपने बालों में करें। सिरके की स्मेल दूर करने के लिए इसमें आप एरोमेटिक जेल आदि भी मिला सकती है। चमक लाने के लिए इसका इस्तेमाल शैम्पू करने के बाद करें। आप चाहे तो सिरके की जगह नींबू का इस्तेमाल कर सकती है। यह बालों में चमक लाने के साथ-साथ डैंड्रफ भी दूर करता है।
2. दही का इस्तेमाल करें :
बालों को मुलायम बनाने के लिए तो दही का इस्तेमाल आप सभी ने किया होगा। लेकिन क्या आप जानती है की इसकी मदद से बालों में चमक भी लाई जा सकती है। इसके लिए साफ़ बालों में दही लगा लें और आधे घंटे तक लगाए रखें। उसके बाद बाल धो लें। महीने में एक बार इस उपाय का इस्तेमाल करें। आपके बाल चमकदार हो जाएँगे।
3. अंडे और दूध से मिलेगी इंस्टेंट शाइन :
अंडे में प्रोटीन की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो बालों को पोषण देने के साथ साथ उनकी देखभाल करने में भी मदद करती है जबकि दूध बालों का रूखापन दूर करके उन्हें मुलायम बनाता है। इस उपाय के लिए 2 अंडों को दूध में हलके हाथों से फेंटे और अच्छे से मिला लें। मिलाने के बाद मसाज करते हुए इस मिश्रण को बालों और स्कैल्प में लगा लें। 5 से 7 मिनट तक रखे और फिर अपने बालों को पानी से धो लें।
4. शैम्पू से पूर्व करें सिरके का प्रयोग :
शैम्पू में मौजूद केमिकल बालों की प्राकृतिक नमी छीन लेते है जिससे वे रूखे और बेजान दिखने लगते है। ऐसे में आपको सिरके का इस्तेमाल करना चाहिए। यह बालों की प्राकृतिक नमी बनाए रखता है और उन्हें चमकदार बनाने का काम करता है। इसके लिए आधा कप सिरके को 2 कप पानी में मिला लें। और अपने बालों को इसमें सोक करें। 15 मिनट बाद बालों में में शैम्पू कर लें। इससे बालों को चमक मिलेगी साथ-साथ उनका रूखापन भी दूर होगा।
5. चाय लाये बेजान बालों में जान :
इस उपाय के लिए सबसे पहले पानी को उबालें और उस उबले हुए पानी में 2 टी-बैग्स डालें और 3-5 मिनट के लिए छोड़ दें। अगर आपके पास टी-बैग्स नहीं है तो आप चाय की पत्ती का भी इस्तेमाल कर सकती है। 5 मिनट बाद चाय पत्ती के पानी को छान लें और उसका इस्तेमाल शैम्पू के बाद बालों में करें। इससे आपके बाल नैचुरली शाइनी बनेंगे और उनमे कालापन भी आएगा।
6. बीयर है एक लाभकारी टॉनिक :
बालों के लिए बीयर बहुत ही लाभकारी टॉनिक के रूप में कार्य करती है। जी हां, इसमें पाए जाने वाले तत्व और प्रोटीन बालों को रिपेयर करके उन्हें पोषण प्रदान करते है जिससे उनमे चमक आती है और वे मजबूत और मुलायम भी बनते है।
तो ये थे कुछ घरेलू तरीके जिनकी मदद से आप अपने बालों में प्राकृतिक तरीके से चमकदार और मुलायम बना सकती है। लेकिन ध्यान रहे किसी भी उपाय का प्रयोग सीमित मात्रा में ही करें। क्योंकि जरुरत से अधिक यूज करने पर आपके बालों को हानि हो सकती है।
प्रेगनेंसी का डेंजर साइन, गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए ऐसा समय होता है जहां महिला का अपना बहुत ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती है। क्योंकि अब महिला अकेली नहीं होती है बल्कि गर्भ में पल रहा शिशु भी अपने विकास के लिए पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। इसीलिए महिला द्वारा बरती गई थोड़ी सी लापरवाही केवल महिला पर ही नहीं बल्कि शिशु पर भी नकारात्मक असर डाल सकती है। साथ ही इस दौरान महिला के शरीर में बहुत सी शारीरिक परेशानियां भी होती हैं।
जिनकी वजह से प्रेग्नेंट महिला काफी हद तक परेशान भी हो सकती है। लेकिन कुछ ऐसी परेशानियां होती है। जो गर्भावस्था के दौरान खतरनाक साबित हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को लापरवाही न बरतने के साथ शरीर में होने वाले बदलाव का भी ध्यान रखना चाहिए। ताकि महिला को किसी भी तरह की दिक्कत न हो। और गर्भ में शिशु का विकास भी अच्छे से हो सके। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के डेंजर साइन कौन कौन से होते हैं।
प्रेगनेंसी का डेंजर साइन होता है ब्लीडिंग
प्रेगनेंसी के दौरान हल्का फुल्का खून के धब्बा महसूस होना आम बात होती है।
लेकिन कई बार खून के धब्बे लगने के साथ पेट के निचले हिस्से में दर्द महसूस हो।
ब्लीडिंग की समस्या बढ़ने लगे, तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
क्योंकि प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में ब्लीडिंग का होना गर्भपात का लक्षण हो सकता है।
पेट व् पीठ में तक दर्द
गर्भावस्था के दौरान मांसपेशियों में खिंचाव और गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण महिला को पेट व् पीठ में दर्द की थोड़ी बहुत परेशानी हो सकती है।
लेकिन यदि पेट व् पीठ का दर्द बढ़ने लगे तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
क्योंकि प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में ऐसा होना एक्टोपिक प्रेगनेंसी या गर्भपात का लक्षण हो सकता हैं।
तीसरी तिमाही में भी यदि आपको पेट व् पीठ में दर्द अधिक होती है।
तो ऐसा होना समय पूर्व प्रसव या पूरे समय पर प्रसव होने का संकेत हो सकता है।
प्रेगनेंसी का डेंजर साइन होता है भूख में कमी
बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव व् शारीरिक परेशानियों के अधिक होने के कारण हो सकता है की प्रेग्नेंट महिला को भूख कम लगे।
लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है की गर्भवती महिला अपने खान पान में किसी तरह की लापरवाही करें।
क्योंकि खान पान में लापरवाही बॉडी में पोषक तत्वों की कमी कर सकती है।
जिसके कारण शिशु का स्वास्थ्य व् सेहत सम्बन्धी समस्या और गर्भवती महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ सकती है।
शिशु के वजन में कमी
प्रेगनेंसी के पांचवे महीने के अल्ट्रासॉउन्ड के दौरान शिशु के गर्भ में वजन के बारे में आपको बताया जाता है।
वजन के सही होना जहां अच्छी बात होती है वहीँ शिशु के वजन में कमी परेशानी का विषय हो सकता है।
ऐसे में महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि इस परेशानी को दूर करने में मदद मिल सके।
वजन
प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन ग्यारह से सोलह और यदि गर्भ में जुड़वाँ शिशु हैं तो अठारह किलो तक बढ़ सकता है।
लेकिन यदि महिला का वजन बहुत अधिक बढ़ रहा है तो यह परेशानी का विषय हो सकता है।
क्योंकि वजन का बढ़ना न केवल महिअ की शारीरिक दिक्कतों को बढ़ा सकता है बल्कि इससे शिशु को भी दिक्कत हो सकती है।
डिलीवरी के दौरान भी वजन बढ़ने के कारण महिला को परेशानी हो सकती है।
प्रेगनेंसी का डेंजर साइन होता है तनाव
कुछ गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान तनाव ले लेती हैं।
तनाव लेने का कारण महिला के शरीर में होने वाले बदलाव व् शारीरिक समस्याएं हो सकती है।
लेकिन फिर भी गर्भवती महिला को तनाव लेने से बचना चाहिए।
क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान तनाव लेना गर्भवती महिला की परेशानियों को बढ़ाने के साथ शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी का कारण बन सकता है।
शिशु की मूवमेंट
गर्भ में शिशु की हलचल गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी का सबसे बेहतरीन लम्हा होता है।
लेकिन यदि कभी महिला को ऐसा महसूस हो की बहुत देर से गर्भ में शिशु हलचल नहीं कर रहा है।
तो प्रेग्नेंट महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
क्योंकि यह प्रेगनेंसी के दौरान एक बहुत बड़ा रिस्क हो सकता है ।
ऐसे में गर्भवती महिला को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।
ब्लड प्रैशर
गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करती है।
जिनमे से एक दिक्कत ब्लड प्रैशर के बढ़ने या कम होने की भी हो सकती है।
यदि गर्भवती महिला को ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या अधिक रहती है।
तो यह भी प्रेगनेंसी में एक खतरनाक सिगनल होता है।
इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को अपने ब्लड प्रैशर की जांच करवाते रहने चाहिए।
ताकि गर्भवती महिला को हर दिक्कत से बचे रहने में मदद मिल सके।
प्रसव का संकेत
डिलीवरी से पहले बॉडी बहुत से संकेत देती है।
लेकिन डिलीवरी के लिए दी गई तारीख के निकल जाने के बाद भी बॉडी यदि कोई संकेत नहीं देती है तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
क्योंकि इससे गर्भ में शिशु को रिस्क ही सकता है साथ ही ऐसे केस में सिजेरियन डिलीवरी होने के चांस भी बढ़ जाते हैं।
प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स
यदि प्रेग्नेंट महिला को पहले गर्भपात हुआ तो महिला की प्रेगनेंसी थोड़ी रिस्की हो सकती है।
उम्र अधिक होने पर महिला ने गर्भधारण किया है तो भी प्रेगनेंसी में खतरा ज्यादा होता है।
किसी प्रेग्नेंट महिला को यदि शारीरिक परेशानियां अधिक होती है तो भी प्रेगनेंसी रिस्की हो सकती है।
गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होने पर भी प्रेगनेंसी में थोड़ा खतरा हो सकता है।
गर्भाशय कमजोर होने के कारण भी प्रेगनेंसी में परेशानियां आ सकती है।
प्रेग्नेंट महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान अपना ध्यान रखने की बजाय लापरवाही करती है तो भी प्रेगनेंसी में खतरा हो सकता है।
तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान किन लक्षणों को अनदेखा नहीं करना चाहिए उससे जुड़े टिप्स। तो यदि आप भी गर्भवती हैं तो इन बातों का ध्यान रखें ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको हर दिक्कत से बचाव होने में मदद मिल सके।
चश्मे से नाक पर पड़े दागों को ऐसे हटायें, How to Remove Spectacles Marks on Nose, Spects Marks on Nose, नाक पर चश्मे के निशान हटाने के घरेलू उपाय
चश्मा पहनना आज के समय में एक खास ट्रेंड बनता जा रहा है जिसे देखो वही चश्मा लगाए दिखाई पड़ता है। फिर चाहे वो लड़का हो या लड़की। जहां एक तरफ लड़के अच्छा इम्प्रैशन बनाने के लिए spectacles वियर करते है वहीं लड़कियां खुद को स्टाइलिश और फैशनेबल दिखाने के लिए इनकी मदद लेती है।
लेकिन चश्मे के कारण नाक पर बनने वाले निशान वाकई काफी खराब दिखते है। फैशन के लिए चश्मा पहनने वाले तो फिर भी इन दागों के डर से चश्मा पहनना बंद कर देते है लेकिन जिन्हे मज़बूरी वश चश्मा पहनना पड़ता है वे तो इसे चाहकर भी नहीं हटा सकते।
लड़के तो फिर भी एडजस्ट कर लेते है लेकिन लड़कियों के फेस पर यह दाग डार्क सर्कल्स से भी खराब दिखाई देते है। जो काफी समय तक स्किन पर बने रहते है। अगर आप भी चश्मा पहनती है तो हो न हो आपके नाक पर भी इस तरह के निशान बन गए होंगे। जो देखने में तो बुरे लगते ही है साथ साथ काफी समय तक ऐसे ही बने रहते है।
लेकिन कुछ तरीके है जिनकी मदद से कुछ ही दिनों में आप इन दागों से जिंदगी भर के लिए छुटकारा पा सकती है। और आज हम आपको उन्ही उपायों के बारे में बताने जा रहे है। जानकारी के लिए बता दें, ये उपाय पूरी तरह प्राकृतिक है जिनके कोई दुष्परिणाम नहीं है। तो आप बेझिझक इन उपायों का इस्तेमाल अपने फेस पर कर सकती है। आइये जानते है इनके बारे में –
नाक पर पड़े चश्मे के दागों को ऐसे हटायें
1. बादाम तेल :
बादाम के तेल में विटामिन इ की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो स्किन पर मौजूद किसी भी तरह के निशानों को दूर करने की क्षमता रखता है। अगर आपके नाक पर भी चश्मा पहनने के कारण निशान पड़ गए है तो एक बार इस उपाय का इस्तेमाल करके देखें। इसके लिए रात को सोने से पहले रोजाना अपनी नाक के दाग वाले हिस्से पर बादाम तेल से मालिश करें। कुछ ही दिनों में दाग हमेशा के लिए गायब हो जाएंगे।
2. एलोवेरा जेल :
एलोवेरा स्किन के लिए बहुत अच्छा होता है ये न केवल स्किन को मॉइस्चराइज़ करने का काम करता है बल्कि उसपर मौजूद अशुद्धियों को समाप्त करके बेहतर बनाने में भी मदद करता है। इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स और अन्य पोषक तत्व डार्क स्पॉट्स, दाग धब्बे और पिगमेंटेशन आदि की समस्या दूर करने में भी सहायता करते है। तो अगर आपकी नाक पर भी चश्मे के ऐसे निशान है तो रोजाना रात को सोने से अपने निशान पर एलोवेरा है लगाएं। और सुबह जागकर धो लें।
3. गुलाबजल :
ग्लोइंग और खूबसूरत त्वचा के लिए गुलाबजल का प्रयोग बड़े स्तर पर किया जाता है लेकिन क्या आप जानती है की इसकी मदद से आप अपनी नाक पर पड़े चश्मे के दागों को भी हमेशा के लिए हटा सकती है। इसके लिए रात को सोने से पहले रुई से अपनी नाक पर गुलाबजल लगाएं। नियमित रूप से इसका प्रयोग करने से आपके दाग हमेशा के लिए दूर ही जाएंगे।
4. नींबू :
नींबू में विटामिन सी और ब्लीचिंग के गुण पाए जाते है जो न केवल काले घेरों को दूर करने में मदद करते है। अपितु आपकी स्किन की रंगत को भी निखारते है। लेकिन इसके इस्तेमाल से पूर्व कुछ सावधनियां बरतनी होती है। जैसे अगर आपकी नाक के उस हिस्से पर किसी तरह के कटने या जलने का घाव है तो प्रयोग नहीं कर सकते।
इसके अलावा सेंसिटिव स्किन पर इस्तेमाल से पूर्व भी पैच टेस्ट कर लेना चाहिए। प्रयोग के लिए 1 चम्मच ताजे नींबू के रस में 1 चम्मच पानी मिलाकर रुई से दागों पर लगाएं। 15 मिनट तक रखें और उसके बाद फेस साफ़ कर लें। रोजाना इस्तेमाल से दाग गायब हो जाएंगे।
5. संतरे का छिलका :
संतरे के छिलके का प्रयोग बहुत से ब्यूटी प्रोडक्ट और कॉस्मेटिक के निर्माण में किया जाता है। आप इसका इस्तेमाल करके निखरी हुई गोरी त्वचा भी पा सकती है। आजकल बहुत से ऑरेंज पील मास्क भी बाजार में मिलने लगे है। तो इंस्टेंट ग्लो लाने में मदद करते है। इसके लिए संतरे के कुछ छिलकों को धुप में सुखाकर उन्हें पीस लें। अब इसमें से 1 चम्मच संतरे के पाउडर को आधा चम्मच दूध के साथ मिक्स करके नाक पर लगाएं। सूखने के बाद इसे साफ़ कर लें।
6. आलू :
नींबू की भांति आलू में भी ब्लीचिंग के गुण पाए जाते है जो स्किन की रंगत निखारने के साथ-साथ दाग धब्बों से भी छुटकारा दिलाता है। प्रयोग के लिए आलू का टुकड़ा लें और इसे अपनी नाक के उस हिस्से पर रगड़ें जहां चश्मे के निशान है। कुछ मिनट तक रगड़ने के बाद थोड़ा इंतजार करें। कम से कम 10 मिनट तक इंतजार करने के बाद पानी से चेहरा धो लें। नियमित रूप से रोजाना इस्तेमाल करने पर दाग बिलकुल गायब हो जाएंगे।
7. कच्चा दूध :
कच्चा दूध भी स्किन के दाग धब्बों को दूर करने में आपकी मदद कर सकता है। इसके लिए गाय के दूध का प्रयोग किया जा सकता है। इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड स्किन की सफाई करने में योगदान देता है। प्रयोग के लिए निशान पर दूध लगायें और फिर आराम से मालिश करें। 15 मिनट रखने के बाद गुनगुने पानी से इसे साफ़ कर लें। रोजाना इस्तेमाल करें कुछ ही दिनों में दाग अपने आप दूर हो जाएगा।
तो ये थे कुछ आसान घरेलू उपाय जिनकी मदद से आप अपनी नाक पर पड़े चश्मे के दागों को आसानी से दूर कर सकते है। लेकिन इन सभी उपायों के प्रयोग से पूर्व अपनी स्किन टाइप को ध्यान में रखें। क्योंकि बहुत सी स्किन टाइप को नेचुरल उपाय सूट नहीं करते ऐसे में रिएक्शन के चांसेस बढ़ जाते है।
माँ के गर्भ में जिस तरह बच्चा अपने विकास के लिए अपनी माँ पर निर्भर करता है। वैसे ही जन्म के बाद भी माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार होता है। इसीलिए जन्म के तुरंत बाद से ही डॉक्टर्स भी माँ का दूध बच्चे को पिलाने के लिए कहते हैं। क्योंकि माँ का दूध न केवल बच्चे के पेट को भरता है बल्कि इससे बच्चे को संक्रमण से सुरक्षित रहने और बेहतर विकास होने में बच्चे को मदद मिलती है।
साथ ही यदि कोई महिला शिशु के जन्म के बाद शिशु को छह महीने तक केवल माँ का दूध ही पिलाती है, और उसके बाद भी अन्य खाद्य पदार्थों के साथ भी बच्चे को स्तनपान करवाती है। तो इससे बच्चे को शारीरिक व् मानसिक विकास को तेजी से बढ़ाने में मदद मिलती है।
लेकिन कई बार कुछ कारणों की वजह से महिला के ब्रेस्ट में दूध नहीं उतर पाता है। ऐसे में महिला को ब्रेस्ट में दर्द होने के साथ शिशु को भी परेशानी हो सकती है। लेकिन यदि महिला कुछ आसान टिप्स को ट्राई करती है तो इससे ब्रेस्ट में दूध उतरने में मदद मिलती है।
प्रसव के बाद दूध न उतरने के कारण
डिलीवरी के दौरान यदि महिला को रक्तस्त्राव जरुरत से ज्यादा होता है तो इस कारण महिला के शरीर में खून की कमी होने का खतरा होता है जिस वजह से पीयूष ग्रंथि पर्याप्त दूध के लिए आवश्यक हॉर्मोन का उत्पादन नहीं कर पाती है और महिला को दूध कम आता है या तो नहीं आता है।
महिला के शरीर में खून की कमी होने के कारण।
थायरॉयड से महिला के ग्रसित होने के कारण।
शुगर की समस्या होने के कारण।
यदि महिला की कभी ब्रेस्ट सर्जरी हुई हो।
महिला का वजन जरुरत से ज्यादा कम होने के कारण या बहुत ज्यादा वजन होने के कारण।
यदि शिशु को जन्म के समय कोई समस्या होती है तो उस कारण बच्चा माँ का दूध नहीं पी पाता है जिसके कारण माँ का दूध अच्छे से नहीं उतरता है।
महिला शिशु के जन्म से पहले गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन करती थी, या किसी बिमारी से जुडी दवाइयों का सेवन करती थी तो उस कारण भी महिला को दूध अच्छे से नहीं उतरता है।
शिशु के जन्म के समय यदि महिला तनाव से ग्रसित होती है तो इसके कारण भी महिला के दूध में कमी आती है।
यदि कोई महिला शिशु को स्तनपान नहीं करवाती है तो उसका दूध उतरना वैसे की कम या बंद हो जाता है।
स्तनों में दूध की कमी होने के लक्षण
यदि बच्चा थोड़ी थोड़ी देर बाद दूध पीने के लिए रोयें।
आपका बच्चा यदि बहुत देर देर तक दूध पीता है तो इसका मतलब यह होता है की ब्रेस्ट में दूध अच्छे से नहीं उतर रहा है।
शिशु का दिन में चार से पांच बार शिशु का मल पास करना क्योंकि एक स्वस्थ शिशु दिन में आठ से दस या उससे ज्यादा बार मल पास करता है।
हर बार दूध पिलाने के बाद स्तनों का खाली महसूस होना।
स्तनों में दूध की आपूर्ति को बढ़ाने के लिए टिप्स
प्रसव के बाद यदि किसी कारण महिला के स्तनों में दूध नहीं उतरता है तो इसे लेकर परेशान होने की बजाय महिला को कुछ उपाय करने चाहिए। जैसे की:-
शिशु को दूध पिलाते समय रखें इन बातों का ध्यान
स्तनों में दूध की मात्रा को बढ़ाने के लिए शिशु को दूध पिलाते समय महिला को बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे की शिशु को दूध पिलाते समय शिशु के सिर को थोड़ी ऊपर की और रखना चाहिए। उसके बाद यदि शिशु को दूध चूसते समय ज्यादा जोर लगाना पड़ रहा है तो आप अपने हाथ से ब्रेस्ट को दबाएं। इससे दूध का उत्पादन बढ़ता है और जैसे जैसे शिशु को दूध चूसने में आसानी होती है। और शिशु अपने आप दूध को पीने लगता है वैसे वैसे दूध का उत्पादन अपने आप भी ब्रेस्ट में बढ़ने लगता है। लेकिन इसके लिए आपको भी लगातार बच्चे को दूध पिलाते समय ब्रेस्ट को दबाकर रखना चाहिए। साथ ही ब्रेस्ट को बदलते रहना चाहिए इससे भी दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलती है।
पंप का इस्तेमाल करें
आजकल मार्किट में दूध निकालने के लिए एक उपकरण मिलता है जिसे मिल्क पंप कहा जाता है। यदि डिलीवरी के बाद महिला इस पंप की मदद से ब्रेस्ट से दूध निकालती है। तो इससे दूध ग्रंथियों पर जोर पड़ता है। जिससे दूध बनने की प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिलती है।
पालक
डिलीवरी के बाद पालक व् अन्य हरी सब्जियों का सेवन महिला को भरपूर मात्रा में करना चाहिए। इससे शरीर में आयरन की कमी पूरी होती है। और जितना महिला के शरीर में खून की मात्रा पूरी होती है। उतना ही बच्चे के लिए दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलती है।
सौंफ
यदि डिलीवरी के बाद आपको दूध अच्छे से नहीं उतर रहा है तो खाने के बाद, चाय में, मसालों में सौंफ का सेवन जरूर करें। इससे माँ व् बच्चे की पाचन क्रिया को बेहतर होने में मदद मिलती है साथ ही ब्रेस्ट में दूध का उत्पादन भी बढ़ता है।
मेथी
मेथी के दानों को पीसकर एक पेस्ट बना लें उसके बाद सुबह शाम थोड़ा थोड़ा मेथी पाउडर दूध के साथ लें। साथ ही मेथी पाउडर को अपनी सब्जियों में भी इस्तेमाल करें इससे भी स्तन में दूध की आपूर्ति बढ़ती है।
गाजर व् चुकंदर
यदि किसी महिला का प्रसव के बाद दूध अच्छे से नहीं उतरता है तो महिला को गाजर व् चुकंदर का रस पीना चाहिए, सलाद के रूप में इसे खाना चाहिए, आदि। ऐसा करने से बॉडी में खून की मात्रा बढ़ती है जिससे दूध का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। और यदि खून की कमी नहीं भी है तो भी इसका सेवन करें क्योंकि यह दोनों दूध का उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं।
जीरा
जीरा भी स्तनों में दूध की आपूर्ति को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसके लिए आप जीरे को भूनकर उसे पाउडर के रूप में तैयार कर लें, उसके बाद इसे सब्जियों, सलाद, रायते, पराठे आदि में डालकर इसका सेवन करे। ऐसा करने से बहुत जल्दी महिला के दूध को उतरने में मदद मिलती है।
सूखे मेवे
सूखे मेवे पोषक तत्वों की खान होते हैं इनका सेवन करने से भी स्तनों में दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलती है। और हो सके तो ड्राई फ्रूट्स को दूध के साथ लेना चाहिए। इससे आपको बहुत जल्दी फायदा मिलता है।
तुलसी
तुलसी को आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है। क्योंकि यह बॉडी को बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करती है। इसके अलावा इससेऔर भी बहुत से फायदे मिलते हैं जैसे की डिलीवरी के बाद जिन महिलाओं का दूध नहीं उतरता है उन महिलाओं के स्तन में दूध की आपूर्ति को बढ़ाने में मदद करती है। इसके लिए महिला तुलसी के रस को शहद के साथ लें, तुलसी की चाय या काढ़ा बनाकर उसका सेवन करें।
लहसुन
लहसुन बहुत जल्दी महिलाओं को इस परेशानी से निजात दिलाने में मदद करता है। इसके लिए महिला अपनी सब्जियों, सूप आदि में लहसुन का सेवन कर सकती है। लेकिन ध्यान रखें की कच्चे लहसुन के सेवन से परहेज करें क्योंकि इससे दूध तो अच्छे से उतरता है।लेकिन दूध के स्वाद में बदलाव आने के कारण हो सकता है की आपका बच्चा दूध ही न पीयें। इसके लिए केवल पके हुए लहसुन का ही सेवन करें वह भी बहुत जल्दी फायदे देता है।
तो यह हैं कुछ खास उपाय जिनका इस्तेमाल करने से स्तनों में दूध की आपूर्ति को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके अलावा यदि बहुत कुछ करने पर भी स्तनों में दूध नहीं उतरता है तो महिला को एक बार डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।
शादी के बाद अंगूठी, बिछिया पहनना न केवल महिलाओं को अच्छा लगता है बल्कि इन्हे पहनना शादीशुदा महिला के लिए शुभ भी माना जाता है। लेकिन जब महिला का गर्भधारण होता है तो जिस तरह महिला के पहनावे, खान पान, रूटीन आदि में बदलाव आता है। उसी तरह कुछ अन्य चीजें भी होती है जिनमे महिला को बदलाव करने की जरुरत होती है।
जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान जब महिला का वजन बढ़ता है तो शारीरिक रूप से महिला में बहुत बदलाव आता है। ऐसे में जिस तरह टाइट कपडे पहनने के कारण महिला को परेशानी होती है उसी तरह अंगूठी बिछिया पहनने के कारण भी महिला को दिक्कत हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में अंगूठी बिछिया पहनने के कारण क्या परेशानी होती है।
सूजन के कारण बढ़ सकती है दर्द की समस्या
प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के आखिर या तीसरी तिमाही में महिला को सूजन की समस्या हो सकती है। और हाथों पैरों में सबसे ज्यादा सूजन की परेशानी होती है। ऐसे में अंगूठी बिछिया आदि पहनने के कारण स्किन पर दबाव बढ़ता है जिसकी वजह से महिला को उस जगह पर दर्द अधिक महसूस हो सकता है।
ब्लड फ्लो में आती है रूकावट
जिन उँगलियों में गर्भवती महिला अंगूठी व् बिछिया पहनती है तो सूजन होने के कारण उन पर दबाव अधिक पड़ता है। जिसकी वजह से उन हिस्सों में ब्लड फ्लो में रूकावट आ सकती है। और ब्लड फ्लो में रूकावट आने के कारण महिला को शारीरिक परेशानी ज्यादा होती है।
काम करने व् चलने में हो सकती है दिक्कत
अंगूठी व् बिछिया पहनने के कारण यदि आपको हाथ पैर में दर्द की समस्या होती है तो इस वजह से प्रेग्नेंट महिला को किसी काम को करने में हाथों में दर्द व् चलते समय पैरों में अधिक दर्द की समस्या हो सकती है।
तो यह हैं कुछ नुकसान जो आपकी अंगूठी या बिछिया पहनने के कारण प्रेगनेंसी में हो सकते हैं। तो ऐसे में जितना हो सके इन परेशानियों से बचने के लिए आप अंगूठी बिछिया आदि न पहने। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपकी परेशानियां बढ़ें नहीं बल्कि आपकी परेशानियां कम हो जिससे माँ व् बच्चा दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।
महिला के गर्भधारण के लिए महिला और पुरुष दोनों की फर्टिलिटी का बेहतर होना जरुरी होता है। क्योंकि फर्टिलिटी जितनी बेहतर होगी, प्रजनन अंग उतने की ज्यादा सक्रिय होंगे। जिससे जल्द से जल्द प्रेगनेंसी होने में मदद मिलेगी। लेकिन यदि महिला या पुरुष दोनों में से किसी एक को भी या दोनों को फर्टिलिटी में कमी की समस्या होती है। तो इसके कारण न केवल महिला के गर्भधारण में समस्या आ सकती है।
बल्कि इसके कारण महिला और पुरुष के संबंधों पर भी बुरा असर पड़ सकता है। तो आइये आज हम इस आर्टिकल में आपको आपकी डाइट से जुड़े कुछ खास टिप्स देने जा रहे हैं। जिससे आपको फर्टिलिटी से जुडी समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है। साथ ही गर्भधारण में आ रही परेशानियों को भी दूर करने में मदद मिलती है।
पुरुषों को फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए खाने चाहिए यह आहार
स्पर्म काउंट में कमी होने के कारण पुरुषों की फर्टिलिटी पर बुरा असर पड़ सकता है। और बहुत से लोग इस बारे में डॉक्टर को बताने में शर्म करते हैं तो कुछ महंगा ट्रीटमेंट होने के कारण इसमें लापरवाही करते हैं। लेकिन कुछ ऐसे आहार होते हैं जिन्हे यदि आप अपनी रेगुलर डाइट में शामिल करते हैं। तो उससे फर्टिलिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है। तो आइये अब जानते हैं की पुरुषों को अपनी फर्टिलिटी को बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए।
कद्दू के बीज
जिंक और ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर कद्दू के बीज खाने से पुरुष के प्रजनन अंगो में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होने में मदद मिलती है।
साथ ही नियमित रूप से एक मुट्ठी कद्दू के बीज खाने से टेस्टोस्टेरोन और पुरुषों में स्पर्म काउंट बढ़ता है।
ऐसे में फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए पुरुषों को इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।
टमाटर
लाइकोपिन से भरपूर टमाटर का सेवन करने से पुरुषों के स्पर्म काउंट की संख्या और गुणवत्ता को बेहतर करने में मदद मिलती है।
ज्यादा फायदे के लिए आप टमाटर को ऑलिव ऑयल में पकाकर खा सकते है।
ऐसे में फर्टिलिटी से जुडी समस्या से निजात पाने के लिए पुरुषों को टमाटर का सेवन जरूर करना चाहिए।
गाजर
विटामिन A से भरपूर गाजर स्पर्म काउंट की संख्या को बेहतर करने में मदद करती है।
और नियमित रूप से सलाद में गाजर खाने या गाजर का जूस पीने से फर्टिलिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है।
अंडे
प्रोटीन और विटामिन इ जैसे पोषक तत्वों से भरपूर अंडे हेल्दी स्पर्म के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करते हैं।
इसके लिए पुरुषों को नियमित रूप से नाश्ते में दो अंडे जरूर खाने चाहिए।
साथ ही अंडे का सेवन करने से फ्री रेडिकल्स से बचाव करने में भी मदद मिलती है।
पालक
फोलिक एसिड, आयरन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर पालक का सेवन करने से बॉडी में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाने में मदद मिलती है।
साथ ही इससे स्पर्म काउंट की गुणवत्ता बेहतर होने के कारण फर्टिलिटी को भी बढ़ाने में मदद मिलती है।
फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए खाएं लहसुन
एलिसिन नामक पोषक तत्वों से भरपूर लहसुन का सेवन करने से भी पुरुष के प्रजनन अंगो में ब्लड को बेहतर होने में मदद मिलती है।
जिससे फर्टिलिटी पावर को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।
जिंक युक्त आहार
जिन खाद्य पदार्थों में जिंक की मात्रा मौजूद होती है उनका सेवन करने से बॉडी में टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है।
जिससे फर्टिलिटी को बेहतर करने में मदद मिलती है ऐसे में में मटर, काजू, व् अन्य आहार जिनमे जिंक की अधिकता होती है।
उनका सेवन पुरुषों को फर्टिलिटी को बढ़ाने के लिए जरूर करना चाहिए।
ब्रोकली
विटामिन सी, आयरन, फोलिक एसिड, व् अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
जो स्पर्म काउंट को बढ़ाने के साथ स्पर्म की गुणवत्ता को बेहतर करके फर्टिलिटी को बेहतर रखने में मदद करते हैं।
केला
विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन बी 1, मैग्निशियम, प्रोटीन की अधिकता के कारण केले का सेवन करने से पुरुष के शुक्राणुओं की मात्रा को बढ़ाने में मदद मिलती है।
साथ ही इसमें विटामिन बी और ब्रोमेलिन भी मौजूद होता है जो प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।
इसीलिए पुरुष को फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए नियमित केले का सेवन जरूर करना चाहिए।
पुरुष फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए क्या नहीं खाएं
कुछ ऐसी चीजें भी होती है जो फर्टिलिटी पर बुरा असर डाल सकती है। ऐसे में उन चीजों का सेवन करने से पुरुष को परहेज रखना चाहिए। जैसे की सूअर का मांस, डेली मीट, वसायुक्त रेड मीट, अल्कोहल, रिफाइंड शुगर आदि का सेवन करने से बचना चाहिए। और जितना हो सके तनाव लेने से भी बचना चाहिए।
महिलाएं फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए खाएं यह आहार
माँ बनना महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे खास और प्यारा अनुभव होता है। लेकिन कई बार गलत आदतें, अनियमित पीरियड, तनाव, खराव जीवनशैली का बुरा प्रभाव सेहत पर पड़ जाता है। जिसके कारण महिलाओं की फर्टिलिटी कम होने के कारण महिला को गर्भधारण में दिक्कत हो सकती है। तो आइये अब महिलाओं के लिए लिए जाने वाले आहार के बारे में जानते हैं। जिससे फर्टिलिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है।
हरी पत्तेदार सब्जियां
आयरन, फोलेट व् अन्य पोषक तत्वों से युक्त हरी सब्जियों का सेवन महिलाओं को भरपूर करना चाहिए।
क्योंकि इनका सेवन करने से न केवल बॉडी में ब्लड की मात्रा सही रहती है बल्कि यह एंटी ऑक्सीडेंट प्रजनन अंगो में ब्लड फ्लो बेहतर होने में मदद करते हैं।
जिससे महिलाओं की फर्टिलिटी बढाकर जल्दी से जल्दी गर्भधारण होने में मदद मिलती है।
फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए खाएं अंडे
प्रोटीन और विटामिन इ जैसे पोषक तत्वों से भरपूर अंडे महिलाओं को अपनी डाइट में जरूर शामिल करने चाहिए।
क्योंकि इसके नियमित सेवन से महिलाओं की फर्टिलिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है।
इसीलिए नियमित रूप से महिला को नाश्ते में दो अंडे जरूर खाने चाहिए।
सूखे मेवे
प्रेगनेंसी के दौरान सूखे मेवे का सेवन अधिक मात्रा में करने की मनाही होती है।
लेकिन गर्भधारण में आ रही परेशानियों को दूर करने में सूखे मेवे का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
क्योंकि सूखे मेवे पोषक तत्वों की खान होते हैं जो महिलाओं की फर्टिलिटी को तेजी से बढ़ाने में मदद करते हैं।
विटामिन सी युक्त फल
स्ट्रॉबेरी, जामुन, संतरे, कीवी जैसे फलों में विटामिन सी की मात्रा भरपूर होती है।
और विटामिन सी एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट होता है जो प्रजनन क्षमता को बेहतर करने में आपकी मदद करते हैं।
इसके अलावा महिला को एवोकाडो, अनार, सेब आदि फलों का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए।
फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए खाएं सालमन मछली
यदि आप नॉन वेज का सेवन कर लेती है।
तो आपको अपनी डाइट में सालमन मछली को भी शामिल करना चाहिए।
क्योंकि इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।
जो महिला की प्रजनन क्षमता को तेजी से बढ़ाने में मदद करता है।
जैतून का तेल
मोनोसैचुरेटेड फैट की मात्रा जैतून के तेल में मौजूद होता है।
जो शरीर में सूजन को कम करने में मदद है।
जिससे महिला को जल्दी से जल्दी गर्भधारण करने में मदद मिलती है।
रसोई में इस्तेमाल किए जाने वाले मसालें
हल्दी, मिर्च यह चीजें रसोई घर में हमेशा मौजूद होती है।
महिलाओं को इन्हे अपने लिए बनाएं आहार में जरूर शामिल करना चाहिए।
क्योंकि यह महिला की प्रजनन क्षमता को बेहतर करने में मदद करते हैं।
महिलाओं को फर्टिलिटी को बेहतर करने के लिए क्या नहीं खाना चाहिए
कुछ ऐसे आहार होते हैं जिनका सेवन महिलाओं की फर्टिलिटी पर बुरा असर डाल सकता है। ऐसे में जितना हो सके महिला को उन आहार का सेवन करने से बचना चाहिए। जैसे की नशीले पदार्थ, अधिक मात्रा में कैफीन, बहुत ज्यादा तेल मसाले युक्त आहार, आदि का सेवन करने से बचना चाहिए।
तो यह हैं महिलों और पुरुष की फर्टिलिटी से जुड़े कुछ खास डाइट टिप्स। लेकिन इसके साथ एक बार आपको फर्टिलिटी से जुडी परेशानी को लेकर डॉक्टर से भी बात करनी चाहिए। ताकि जल्द से जल्द इस परेशानी को दूर करने में मदद मिल सके।