प्रेगनेंसी में पेट पर हाथ फेरने के फायदे, गर्भावस्था में पेट पर हाथ फेरने के नुकसान, प्रेगनेंसी पर पेट पर हाथ फेरने से क्या होता है, प्रेगनेंसी टिप्स
प्रेग्नेंट महिला को घर का हर सदस्य हमेशा कुछ न कुछ राय देता रहता है की प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिला और शिशु के लिए क्या सही है और क्या नहीं। और गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं की आदत होती है की वो थोड़ी थोड़ी देर बाद पेट पर हाथ फेरती रहती है। जो की सही भी है और नहीं भी, क्योंकि कोई भी चीज यदि आवश्यकता से अधिक हो तो वो सही नहीं होती है। तो लीजिए अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान महिला के पेट पर हाथ फेरने से क्या फायदे होते हैं और क्या नुकसान होते हैं।
प्रेगनेंसी में पेट पर हाथ फेरने के फायदे
गर्भावस्था में पेट पर यदि महिला हाथ फेरती है तो यह अच्छा होता है, लेकिन क्यों अच्छा होता है इस बारे में जानते हैं।
माँ और शिशु का रिश्ता होता है गहरा
गर्भ में पल रहे शिशु को केवल गर्भवती महिला ही अनुभव कर सकती है, लेकिन यदि महिला शिशु को अपना अहसास करवाना चाहती है जिससे गर्भ से ही माँ और शिशु का रिश्ता प्यार से भरपूर हो सके, और उनके बीच का रिश्ता गहरा हो सके। तो दिन में महिला चाहे तो दो तीन बार पेट पर हाथ फेर सकती है, और पांचवे महीने के आस पास तो शिशु हलचल करने लग जाता है। ऐसे में यदि आप शिशु से बातें करती है, या पेट पर हाथ फेरती है तो हो सकता शिशु भी आपको महसूस करे और आपको जवाब दे, और उसका जवाब गर्भ में हो रही हलचल से आपको मिल जाएगा।
खुजली से आराम
कई बार प्रेगनेंसी में पेट में खुजली अधिक होती है ऐसे में अपने नाखुनो का इस्तेमाल करके तेजी से खुजली करना नुकसानदायक हो सकता है। इसीलिए खुजली से आराम पाने के लिए आप अपने हाथ को पेट पर फेरे, इससे खुजली से राहत मिलेगी।
प्रेगनेंसी में पेट पर हाथ फेरने के नुकसान
शिशु को महसूस करने के लिए पेट पर हाथ फेरना अच्छी बात है, लेकिन यदि आप हमेशा ही पेट पर हाथ फेरती है तो यह अच्छी बात नहीं होती है। क्योंकि शिशु भी गर्भ में आराम करता है ऐसे में यदि आप हमेशा हाथ फेरती रहती हैं तो ऐसा करने से शिशु को भी परेशानी हो सकती है। साथ ही दूसरों के सामने आपकी यह आदत आपको शर्मिंदा भी कर सकती है। तो इसीलिए प्रेगनेंसी में बार बार या हमेशा पेट पर हाथ नहीं फेरते रहना चाहिए।
तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पेट पर हाथ फेरना चाहिए और क्यों नहीं फेरना चाहिए।
यूट्यूब विडिओ –
क्या आप भी गर्भावस्था के दौरान अपने पेट पर हाथ सहलाती हैं?
गर्भावस्था में थकान और दर्द की समस्या से ऐसे निजात पाएं, प्रेगनेंसी में थकान की समस्या को दूर करने के टिप्स, प्रेगनेंसी में दर्द से निजात पाने के तरीके, ऐसे करें गर्भावस्था में थकान और दर्द को दूर
प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले बदलाव के कारण बहुत जल्दी थकान व् शरीर के अंगो में दर्द होना आम बात होती है। कई महिलाएं तो पूरे नौ महीने कमर दर्द की समस्या से परेशान रहती है। लेकिन ऐसे में इन परेशानियों से बचने के लिए आपको किसी भी तरह के दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि वह आपको आराम तो देंगी लेकिन उनका असर गर्भ में पल नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन आप कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके प्रेगनेंसी में होने वाली इन परेशानियों से निजात पा सकती है आइये जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।
संतुलित आहार
प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली किसी भी परेशानी से बचाव के लिए बहुत जरुरी होता है की आप अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखें। भरपूर पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें, ताकि गर्भावस्था के समय आप स्वस्थ रह सकें। इसके अलावा हर दो घंटे में आपको कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए ताकि आप हमेशा एनर्जी से भरपूर रह सकें। यदि आप स्वस्थ रहेंगे तो भी आपको थकान व् बॉडी में दर्द जैसी परेशानी से राहत पाने में मदद मिलेगी।
भरपूर आराम
बॉडी में हो रहे तेजी से हार्मोनल बढ़लाव के कारण थकान, कमजोरी व् दर्द होना आम बात होती है। ऐसे में जितना हो सके आपको अपनी बॉडी को आराम देना चाहिए, किसी भी काम को तेजी से नहीं करना चाहिए। भरपूर नींद लेनी चाहिए, रात के साथ दिन में भी थोड़ा आराम जरूर करना चाहिए ऐसा करने से भी आपको अच्छा महसूस होता है।
एनर्जी ड्रिंक पीएं
एनर्जी ड्रिंक का मतलब है, की दूध, ताजे फलों का रस, पानी, निम्बू पानी, आदि का भरपुए सेवन करना चाहिए, इससे आपको पोषक तत्व तो मिलते ही हैं। साथ ही यह आपकी बॉडी को हाइड्रेट रखने के साथ हमेशा एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करता है। इसीलिए आठ से दस गिलास पानी एक दिन में पीने के साथ दूध जूस का सेवन भी भरपूर मात्रा में करें।
मालिश करें
रात को सोने से पहले बॉडी की हल्के हाथों से मसाज करनी चाहिए, ऐसा करने से रक्त संचार अच्छे से होता है। साथ ही आपको रिलैक्स महसूस होता है, जब भी आपको दर्द महसूस हो या थकान हो थोड़ी देर ऐसा करने से आपको दोनों ही परेशानियों से आराम मिलता है।
थोड़ी देर वॉक करें या व्यायाम करें
हमेशा आराम ही आपको फायदा नहीं पहुंचा सकता है, बल्कि थकान और दर्द की समस्या से निजात पाने के लिए आप थोड़ा वॉक करना या हल्का व्यायाम करना भी जरुरी होता है। ऐसा करने से आपको फ्रैश महसूस होता है साथ ही बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है जिसके कारण आपको इस परेशानी से राहत मिलती है।
तो यह हैं कुछ खास तरीके जिनका इस्तेमाल करके आप प्रेगनेंसी में होने वाली थकान और दर्द को दूर कर सकते है। इसके अलावा यदि आपको दर्द ज्यादा हो या असहज महसूस हो रहा हो तो इस लक्षण को अनदेखा नहीं करना चाहिए, और डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।
विटामिन्स, आयरन, पोटैशियम, फाइबर, प्रोटीन, बीटा कैरोटीन, जैसे पोषक तत्वों से भरपूर मिर्च का सेवन बहुत फायदेमंद होता है, यह हर किचन में आसानी से मिल जाने के साथ आपकी सब्जियों का जायका बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जाती है। लेकिन गर्भवती महिला को मिर्च का सेवन करना चाहिए या नहीं इस बारे में जानना बहुत जरुरी है। वैसे तो गर्भवती महिला हरी मिर्च का सेवन कर सकती है क्योंकि इसमें मौजूद पोषक तत्व प्रेग्नेंट महिला के लिए फायदेमंद होते हैं। परन्तु इसका सेवन पर्याप्त मात्रा में सब्जी में डालकर ही किया जाना चाहिए इसके अलावा कच्ची हरी मिर्च का सेवन या अधिक मात्रा में सब्जियों में इसका इस्तेमाल गर्भवती महिला के लिए परेशानी का कारण भी बन सकता है।
प्रेगनेंसी में हरी मिर्च खाने के फायदे
गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान हरी मिर्च का सेवन पर्याप्त मात्रा में कर सकती है, क्योंकि हरी मिर्च का सही मात्रा में सेवन गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद होता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को हरी मिर्च का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।
विटामिन सी
विटामिन सी से भरपूर हरी मिर्च का सेवन यदि गर्भवती महिला करती है तो यह बॉडी में दूसरे जरुरी विटामिन्स को भी आसानी से अवशोषित करने में मदद करती है, जो की गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
इम्यून सिस्टम
एंटी बैक्टेरियल गुणों से भरपूर होने के कारण यह बॉडी को बैक्टेरिया फ्री रखने में मदद करता है। जिससे इम्यून सिस्टम को मजबूत होने के साथ गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को प्रेगनेंसी के दौरान हर तरह के संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।
मूड स्विंग्स
प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण मूड स्विंग्स का होना आम बात होती है, जिसके कारण कई महिलाएं तनाव जैसी समस्या से भी परेशान हो सकती है। और प्रेगनेंसी के दौरान तनाव लेना गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में हरी मिर्च का सेवन करने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचने में मदद मिलती है क्योंकि हरी मिर्च को मूड बूस्टर के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि यह मस्तिष्क में एंडोर्फिन नामक हॉर्मोन का संचार करने में मदद करता है। जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को खुश और रिलैक्स रहने में मदद करता है।
पाचन क्रिया
डाइट्री फाइबर से भरपूर हरी मिर्च को अपनी डाइट में शामिल करने से गर्भवती महिला की पाचन क्रिया को बेहतर रहने में मदद मिलती है।
प्रेगनेंसी में हरी मिर्च का सेवन करने के नुकसान
गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त मात्रा में और सही रूप से किसी चीज का सेवन किया जाये तो वह जितनी फायदेमंद होती है, उतना ही आवश्यकता से अधिक और गलत तरीके से किसी चीज का सेवन किया जाए तो वह गर्भवती महिला को नुकसान भी पहुंचा सकती है। तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में हरी मिर्च का सेवन करने से कौन से नुकसान होते हैं।
सीने में जलन
कच्ची हरी मिर्च, खाने में अधिक हरी मिर्च डालकर उसका सेवन करने से गर्भवती महिला को सीने में जलन जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
कब्ज़ व् एसिडिटी
अधिक मात्रा में हरी मिर्च का सेवन प्रेगनेंसी में करने के कारण गर्भवती महिला को कब्ज़ व् एसिडिटी जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और कब्ज़ की समस्या अधिक रहने के कारण और मिर्च का सेवन अधिक करने के कारण बवासीर जैसी परेशानी होने के चांस भी बढ़ जाते है।
तो यह हैं कुछ फायदे और नुकसान जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान हरी मिर्च का सेवन करने से हो सकते हैं। ऐसे में हरी मिर्च के फायदों के लिए गर्भवती महिला को सब्जियों में इसका इस्तेमाल करके इसका सेवन करना चाहिए, लेकिन पर्याप्त मात्रा में ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए।
गर्भावस्था के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है और मौसम के बदलाव के साथ महिला को अपने खान पान, रहन सहन के तरीको में भी बदलाव करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से मौसम के कारण होने वाले परेशानी से महिला को बचे रहने में मदद मिलती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं की गर्भवती महिला को गर्मी के मौसम में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला को और बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।
ठंडी चीजों का सेवन न करें
गर्मी से बचने के लिए हो सकता है गर्भवती महिला की ठंडी चीजें खाने की इच्छा हो लेकिन ध्यान रखें की प्रेग्नेंट महिला को ठंडी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए यहां तक की ठंडा पानी भी नहीं पीना चाहिए। क्योंकि इसके कारण कफ, जुखाम, बॉडी में दर्द खासकर जोड़ो में दर्द, सूजन की समस्या आदि होती है। ऐसे में यदि प्रग्नेंट महिला गर्मियों में ठंडी चीजों का सेवन खाने से परहेज करती है तो इससे महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
मसालेदार चीजों के सेवन से बचें
प्रेगनेंसी के दौरान महिला को गर्मी से बचने के लिए मसालेदार, ज्यादा तेलीय, जंक फ़ूड आदि के सेवन से परहेज करना चाहिए। क्योंकि इन सभी के सेवन के कारण महिला को गर्मी अधिक महसूस होने की, पेट सम्बंधित समस्या, सीने में जलन, आदि होती है। और गर्भवती महिला यदि खाने में मसालेदार चीजों की जगह पोषक तत्वों से भरपूर हल्के, ताजे व् संतुलित आहार का सेवन करती है तो इससे महिला को गर्मी के मौसम में होने वाली दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिलती है।
नमक की मात्रा कम लें
नमक का सेवन गर्मी के मौसम में अधिक नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके कारण गर्भवती महिला को शरीर में पानी की कमी, सूजन की समस्या का सामना अधिक करना पड़ता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला नमक का सिमित मात्रा में सेवन करती है तो गर्मी के कारण होने वाली परेशानियों से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।
धूप में निकलने से बचें
गर्मी से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को धूप में नहीं निकलना चाहिए। क्योंकि धूप में निकलने से गर्मी के कारण होने वाले परेशानी के साथ थकान, कमजोरी, सिर दर्द जैसी परेशानियां अधिक होती है।
घर को ठंडा रखें
प्रेगनेंसी के दौरान महिला को गर्मी से बचने के लिए घर को ठंडा रखना चाहिए। इसके लिए महिला को घर के उन हिस्सों में पर्दें लगाने चाहिए जहां से सीधी धूप आती है। थोड़ी थोड़ी देर के लिए कूलर या एसी चलाते रहना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से घर की दीवारे ठंडी रहती है जिससे गर्मी से बचे रहने में मदद मिलती है।
पहनावें का ध्यान रखें
गर्मी से बचने के लिए महिला को अपने पहनावें का ध्यान रखना चाहिए। जैसे की कॉटन की सूती मैक्सी पहननी चाहिए, अपने साइज से थोड़े खुले कपडे पहनने चाहिए, आदि। ऐसा करने से भी गर्मी के कारण होने वाली परेशानी से बचाव होता है।
हाइड्रेट रहें
गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी का होना गर्भवती महिला और बच्चे दोनों के लिए बहुत सी परेशानियां खड़ी कर देता है। ऐसे में गर्मी से बचने के लिए गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए। पानी के साथ नारियल पानी, निम्बू पानी, फलों का ताजा रस आदि भी पीना चाहिए।
तो यह हैं कुछ बातें जिनका ध्यान रखने से गर्भवती महिला को गर्मियों में रखना चाहिए। यदि प्रेग्नेंट महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो इससे गर्मी के कारण होने वाली दिक्कत से माँ व् बच्चे दोनों को बचे रहने में मदद मिलती है।
पानी पीना आपके स्वास्थ्य के लिए कितना लाभदायक है इस बात से तो आप शायद अनजान नहीं होंगे, लेकिन यदि आप नियमित गुनगुना या फिर निम्बू पानी का सेवन करते है, तो आपको इससे दुगुना फायदा मिलता है, क्योंकि इसके कारण आपके शरीर से विषैले पदार्थो को यूरिन और पसीने के रास्ते बाहर निकालने में मदद मिलती है, जिससे आपकी बॉडी बिलकुल फिट रहती है, आपके पाचन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है, अधिक वजन से परेशान लोगो के लिए बहुत लाभदायक होता है, ऐसे ही और भी बहुत से फायदे है जो आपको निम्बू पानी या गुनगुना पानी पीने से मिलते है, और यदि आप ऐसा नहीं करते है, तो कोई बात नहीं आज हम जो आपको इसके फायदे बताएंगे उसके बाद आप इसे जरूर पीएंगे, तो आइये जानते है की आपको इससे कौन कौन से फायदे मिलते है।
गुनगुने पानी का सेवन करने से आपके शरीर में मौजूद विषैले तत्व बाहर निकल जाते है, साथ ही इससे आपकी स्किन भी हाइड्रेट रहती है, जिससे आपकी त्वचा को खूबसूरत बनने में मदद मिलती है।
नई कोशिकाओं का निर्माण होता है:-
यदि आप नियमित सुबह गुनगुने पानी का सेवन करते हैं, तो ऐसा करने से आपके शरीर में नई रक्त कोशिकाएं बनती है, और साथ ही नई मांसपेशियों का निर्माण भी होता है, जिससे आपके ब्लड फ्लो को भी बेहतर बनने में मदद मिलती है, और आप फिट रहते हैं।
आपकी लसिका प्रणाली को स्वस्थ रखता है:-
लसिका ग्रंथि आपको बाहरी संक्रमण से लड़ने में मदद करती है, जिससे आपको इन्फेक्शन आदि से बचने में मदद मिलती है, और यदि सुबह आप खाली पेट गुनगुने पानी का सेवन करते हैं तो ऐसा करने से आपको आपको अपने रोजमर्रा के काम बिना किसी रुकावट के करने में मदद मिलती है, साथ ही यह शरीर में फ्लूइड को भी संतुलित रखने में मदद करता है।
वजन घटाने में करता है मदद:-
जब भी आप सुबह उठकर गुनगुने पानी का सेवन करते हैं, तो इससे आपकी मेटाबोलिज्म को बढ़ावा मिलने में मदद मिलती है, और आपके शरीर पर जमी अतिरिक्त चर्बी भी धीरे धीरे कम होने लगती है, जिससे आपके वजन को कम होने में और आपको स्लिम ट्रिम रहने में मदद मिलती है।
बीमारियों को दूर रखने में मदद करता है:-
यदि आप नियमित रूप से सुबह उठ कर गुनगुने पानी का सेवन करते हैं तो ऐसा करने से आपको कैंसर, टीबी, नेत्र, मूत्र, गुर्दे की बीमारी, गले का रोग, उल्टी, सिर दर्द, थकान, पेट से जुडी समस्या आदि का समाधान करने में मदद मिलती है, इसीलिए यदि आप स्वस्थ रहना चाहते हैं और बीमारियों को अपने शरीर से दूर भगाना चाहते है, तो आपको नियमित गुनगुने पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।
निम्बू में मौजूद अम्ल आपके खाएं भोजन को आसानी से पचाने में मदद करते है, साथ ही इससे आपका भोजन हज़म भी अच्छे से होता है, जिससे आपका पाचन तंत्र मजबूत बनता है, और आपको भूख भी खुलकर लगती है, साथ ही इससे आपको गैस व् एसिडिटी जैसी परेशानी से भी निजात दिलाने में मदद मिलती है।
वजन को कम करने में है फायदेमंद:-
यदि आप नियमित सुबह उठकर खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में एक निम्बू का रस मिलाकर उसका सेवन करते हैं तो ऐसा करने से आपके शरीर में कैलोरी को बर्न होने में मदद मिलती है, जिससे आपके शरीर पर जमी अतिरिक्त चर्बी भी कम होती है, और आपको फिट और आकर्षक फिगर पाने में मदद मिलती है, साथ ही यदि आप चाहे तो इसमें एक चम्मच शहद भी मिला सकते है, इससे आपको दुगुना फायदा मिलता है।
संक्रमण से बचाता है:-
निम्बू में मौजूद विटामिन सी आपको सर्दी, जुखाम, खांसी, फ्लू आदि के साथ बुखार से भी बचाने में मदद करता है, इसके लिए यदि आप दिन में किसी भी समय एक गिलास पानी में निम्बू का रस मिलाकर उसका सेवन करें, आपको इन सभी परेशानियों से बचाव होने में मदद मिलेगी।
आपको तरोताजा रखने में मदद करता है:-
निम्बू पानी का सेवन करने से आपके अंदर दिनभर एनर्जी बनी रहती है, इससे आपको पूरा दिन फ्रैश महसूस होने में मदद मिलती है, तो यदि आप भी पूरा दिन फ्रैश महसूस करना चाहते है तो नियमित सुबह उठकर आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए।
लीवर को साफ़ करने में मदद करता है:-
आपके शरीर को सुचारु रूप से काम करने के लिए चाहिए की आपका लीवर हमेशा साफ रहे, और यदि आप गुनगुने पानी में निम्बू का रस मिलाकर इसका सेवन करते हैं तो ऐसा करने से आपके लीवर में से विषैले पदार्थो को बाहर निकालकर उसे डिटॉक्सीफाई करने में मदद मिलती है, जिससे आपका लीवर किडनी हमेशा साफ़ रहते है, और आपके शरीर को बीमारियों से बचाव होने मे मदद मिलती है।
मुँह में आने वाली बदबू की समस्या से राहत मिलती है:-
मुँह से आने वाली बदबू आपको दूसरो के सामने आपको शर्मिंदा कर सकती है, लेकिन यदि आप निम्बू पानी का सेवन करते है, तो इससे आपके मुँह में मौजूद बैड बैक्टेरिया को खत्म करके आपको फ्रैश फील करने में मदद मिलती है, जिससे आपको दूसरो के सामने अपमानित नहीं होना पड़ता है।
कब्ज़ से राहत दिलाने में मदद मिलती है:-
जिन लोगो को कब्ज़ से जुडी परेशानी रहती है, उनके लिए निम्बू पानी किसी वरदान से कम नहीं होता ही, क्योंकि इसमें आपके भोजन को सही से पचाने के गुण होते हैं, जिसके कारण आपका भोजन अच्छे से पच जाता है, यदि आप भी कब्ज़ से परेशान रहते है तो खाना खाने से थोड़ी देर पहले या थोड़ी देर बाद एक गिलास पानी में निम्बू का रस और थोड़ा नमक आप चाहे तो तो पानी को गुनगुना भी कर सकते है, उसका सेवन करे आपको फायदा मिलेगा।
तो ये हैं कुछ फायदे जो आपको गुनगुना पानी और निम्बू पानी को पीने से मिलते है, इसके अलावा आपको वैसे भी दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए, ताकि आपकी बॉडी हाइड्रेट रहे, जिससे आपको स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।
गर्भधारण से लेकर डिलीवरी तक के नौ महीनों का सफर हरेक गर्भवती महिला के लिए यादगार होता है। इस सफर की खट्टी मीठी यादें महिलाएं जिंदगी भर अपने मन में संजोय रखती हैं। गर्भधारण से लेकर माँ बनने तक का एहसास किसी भी महिला के लिए बहुत खास होता है। परन्तु ये खास पल मुश्किल तब हो जाता है जब डिलीवरी में दिक्क्तें आने लगती है। कई महिलाओं की डिलीवरी बहुत आसानी से हो जाती है। लेकिन कुछ महिलाओं की डिलीवरी का समय नजदीक आते-आते कॉम्प्लीकेशंस होने लगती हैं। जो शिशु और माँ दोनों के लिए ही समस्या का कारण बन जाता है।
आज हम आपको कुछ खास टिप्स दे रहे हैं जिन्हे आपको गर्भधारण के बाद से ही करना है ताकि डिलीवरी के समय परेशानी से बचा जा सके।
डिलीवरी की परेशानी से बचने के लिए क्या करें?
प्रसव के समय होने वाली अधिकतर समस्याएं गर्भावस्था के दौरान की गयी गलतियों के कारण होती हैं। अगर महिला गर्भधारण के बाद से ही सतर्क हो जाएं और सावधानियां बरतें तो डिलीवरी के समय परेशानी नहीं होगी।
डॉक्टरी जाँच
प्रेग्नेंसी में जो सबसे जरुरी चीज होती है वो है डॉक्टरी जाँच। अगर आप सही समय पर डॉक्टरी सलाह नहीं लेंगी, अल्ट्रासाऊंड नहीं कराएंगी, दवाएं नहीं खाएंगी, टेस्ट नहीं कराएंगी तो डिलीवरी के समय परेशानी आएगी। क्यूंकि बिना डॉक्टरी जांच के शिशु की ग्रोथ जानना मुश्किल है। इसलिए प्रेग्नेंसी कन्फर्म होते ही डॉक्टर से मिलें और जाँच करें। सभी दवाएं टाइम पर खाएं, सभी टेस्ट समय पर करवाएं और डॉक्टर की सलाह लेती रहें। ताकि शरीर की कमियों से सही समय पर पूरा किया जा सके और शिशु की ग्रोथ का पता चल सके। अगर शरीर में सब कुछ नार्मल रहेगा तो डिलीवरी में दिक्कत नहीं होगी।
खान-पान में बदलाव
आपको और गर्भ में पल रहे शिशु को उचित पोषण देने के लिए खान-पान में उचित बदलाव करना आवश्यक होता है। गर्भधारण के बाद से ही आपको ऐसा आहार लेना चाहिए जो पोषक तत्वों से भरपूर हो और उसमे सभी तरह के विटामिन्स और मिनरल्स हों। पूरी प्रेग्नेंसी के दौरान आपको प्रॉपर डाइट लेनी होगी ताकि शरीर में पोषक तत्वों की कमी न हो। इसके अलावा पहली और दूसरी तिमाही के बाद भी अपनी आहार में उचित बदलाव करने होंगे। ताकि शिशु को आवश्यकतानुसार पोषक तत्व मिल सके।
खून की कमी
डिलीवरी के समय होने वाली अधिकतर परेशानियां खून की कमी के कारण होती है। खून की कमी होने पर गर्भाशय के आस-पास के हिस्सों में रक्त का परिसंचरण ठीक तरह से नहीं हो पाता जिसके कारण डिलीवरी प्रोसेस में मुश्किल होती हैं। इन समस्यायों से बचने के लिए गर्भधारण के बाद से ही आयरन युक्त चीजें का सेवन करना शुरू कर दें। इसके लिए आप हरी पत्तेदार सब्जियां, पालक, ड्राई फ्रूट, अखरोट, किशमिश, अंजीर, स्ट्रॉबेरी, चुकंदर, ब्रॉक्ली, बीन्स, अंडे का पीला भाग, मीट, मछली, दालें और दलिया आदि का खूब सेवन करें।
हड्डियों के लिए
प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल चैंजेस के कारण महिलाओं को कई समस्यायों का सामना करना पड़ता है। हड्डियों की परेशानियां भी उन्ही में से एक हैं। डिलीवरी के दौरान और बाद में अक्सर हड्डियों से संबंधित समस्या बनी रहती है। कई बार हड्डियां कमजोर होने के कारण भी डिलीवरी के समय दिक्क्त होती है। ऐसे में महिला को गर्भधारण के बाद से ही कैल्शियम युक्त आहार का सेवन करना चाहिए। पूरी प्रेग्नेंसी के दौरान दूध पीना चाहिए। और पहले तीन महीने के बाद नियमित रूप से अंडा खाना चाहिए ताकि शरीर में कैल्शियम की जरूरत को पूरा किया जा सके।
सभी पोषक तत्व लें
प्रेग्नेंसी कन्फर्म होने के बाद से ही संतुलित आहार लें। ठोस आहार के साथ-साथ तरल पदर्थों का भी खूब सेवन करें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। फल व् सब्जियों के साथ-साथ अन्य चीजें भी खाएं। जैसे – बादाम, फिश, कम तेल मसाले वाला मीट आदि। ये चीजें ज्यादा मात्रा में नहीं खाए। इसके साथ-साथ नारियल पानी, फलों का रस, रसीले फल, रोटी, चावल, दाल, सोयाबीन, सब्जियों का उचित मात्रा में सेवन करें। दही भी खाएं, ये शरीर को ठंडक देगी और पाचन भी सही रखेगी।
डिलीवरी की तैयारी
सुखद और आरामदायक डिलीवरी के लिए आपको पहले महीने से ही अपनी केयर करनी होगी। लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान आपको सातवें महीने से रखना है। सातवें महीने से घी, केसर दूध, बादाम दूध, ड्राई फ्रूट्स, बीन्स और अंडे का सेवन करें। गर्मियों के दिनों में रोजाना एक अंडा दूध के साथ जरूर खाएं, दूध में घी डालकर पियें। इससे गर्भाशय में चिकनाहट आएगी जिससे डिलीवरी में आसानी होगी और दर्द कम होगा।
अन्य बातों का भी रखें ध्यान
डिलीवरी के समय दिक्क्त न हो इसके लिए गर्भवती महिला को अन्य बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। जैसे –
प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही के बाद कोई भी भारी वजन नहीं उठाएं।
पेट का आकार बढ़ा हो जानें पर झुककर या पेट पर दबाब देकर कोई काम नहीं करें।
कठिन योग और व्यायाम करने से बचें।
रोजाना सुबह-शाम टहलें।
धूप में घर से बाहर कम निकलें।
ज्यादा शोर, प्रदूषण धूल-मिट्टी वाले क्षेत्र में नहीं जाएं।
किसी भी फल या सब्जी को प्रयोग से पूर्व पानी से अच्छी तरह साफ कर लें। बिना धोएं इस्तेमाल नहीं करें।
कोई भी समस्या हो खुद डॉक्टर नहीं बनें। छोटी से छोटी समस्या होने पर डॉक्टर से मिलें। ताकि सही समय पर समस्या का समाधान किया जा सके।
तो ये कुछ खास टिप्स हैं जिन्हे आपको गर्भधारण के बाद से ही ध्यान रखना है। अगर आप इन टिप्स को पूरी प्रेग्नेंसी में अपनाएंगी तो डिलीवरी के समय कोई दिक्क्त नहीं होगी।
प्रेग्नेंट महिला को नाश्ते में खाने चाहिए, नाश्ता दिन का सबसे पहला आहार होता है। ऐसे में नाश्ते में हर व्यक्ति को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने के साथ भर पेट सेवन करने की सलाह दी जाती है। ताकि पूरा दिन व्यक्ति को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिल सके। और गर्भवती महिला को तो नाश्ते का ज्यादा ध्यान रखना चाहिए और कभी भी नाश्ता करने में लापरवाही नहीं करनी चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी महिला के लिए ख़ुशी का पल होने के साथ बहुत ही नाजुक समय भी होता है।
ऐसे में गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के लिए और भ्रूण के बेहतर विकास के लिए सही समय से नाश्ता करने के साथ पोषक तत्वों से भरपूर नाश्ता करना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला को पूरा दिन एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिल सके। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम ऐसे कुछ खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिन्हे प्रेग्नेंट महिला को अपनी नाश्ते में जरूर शामिल करना चाहिए।
अंडा
प्रेग्नेंट महिला को अपने सुबह के नाश्ते में अंडे को जरूर शामिल करना चाहिए।
क्योंकि अंडा प्रोटीन, फैट, आयरन, कोलिन जैसे पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं।
जो न केवल गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
बल्कि इससे गर्भ में भ्रूण के विकास को भी मदद मिलती है।
ऐसे में ऑमलेट, अंडे की भुर्जी, उबले हुए अंडे किसी भी रूप में गर्भवती महिला इसका सेवन कर सकती है।
लेकिन ध्यान रखें की प्रेग्नेंट महिला को कच्चे अंडे का अच्छे से न पके हुए अंडे का सेवन नहीं करना चाहिए।
क्योंकि इसके कारण प्रेग्नेंट महिला को उल्टी, दस्त जैसी परेशानी होने का खतरा रहता है।
प्रेग्नेंट महिला को नाश्ते में खाने चाहिए नट्स
नाश्ते के दौरान किसी न किसी ड्राई फ्रूट का सेवन भी गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए।
क्योंकि ड्राई फ्रूट्स में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं।
जो प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने के साथ भ्रूण के लिए भी फायदेमंद होते हैं।
डेयरी प्रोडक्ट्स
प्रेग्नेंट महिला को डेयरी प्रोडक्ट्स का भी भरपूर सेवन करना चाहिए।
क्योंकि कैल्शियम, प्रोटीन, जैसे पोषक तत्व डेयरी प्रोडक्ट्स में भरपूर मात्रा में होते हैं।
जो गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने के साथ भ्रूण के विकास में भी मदद करते हैं।
ऐसे में दूध, दही, पनीर व् अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स आदि का सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए।
प्रेग्नेंट महिला को नाश्ते में खाने चाहिए फल व् फलों का रस
प्रेग्नेंट महिला को नाश्ते में किसी न किसी फल का सेवन भी जरूर करना चाहिए।
या आप चाहे तो जूस का सेवन भी कर सकती है क्योंकि फल व् फलों का रस भी नाश्ते में शामिल किया जाने वाला एक बेहतरीन आहार है।
लेकिन इस बात का ध्यान रखें की खाली पेट जूस का सेवन न करें।
क्योंकि खाली पेट जूस पीने से प्रेग्नेंट महिला को दिक्कत हो सकती है।
सूप
सुबह नाश्ते में प्रेग्नेंट महिला तरह तरह की सब्जियों का सूप बनाकर भी खा सकती है।
सब्जियों में मटर, गाजर, पालक, कॉर्न्स, आलू, टमाटर, ब्रोकली, पत्तागोभी आदि को शामिल कर सकती है।
यह सभी सब्जियां प्रेग्नेंट महिला के लिए फायदेमंद होती है साथ ही शिशु के विकास में भी मदद करती है।
साबुत अनाज
गर्भवती महिला नाश्ते में ओटमील, पराठें, दलिया आदि का सेवन भी जरूर करना चाहिए।
क्योंकि साबुत अनाज का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला का पेट भरा रहता है।
साथ ही साबुत अनाज का सेवन करने से गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।
तो यह हैं कुछ खाद्य पदार्थ जिन्हे प्रेग्नेंट महिला को अपनी सुबह की डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और भ्रूण के विकास को अच्छे से होने में मदद मिल सके। और सुबह का नाश्ता सही लेने से पूरे दिन तक एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिल सके। नाश्ते के अलावा प्रेग्नेंट महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए ताकि बॉडी को हाइड्रेट रहने में मदद मिल सके।
ज्यादातर महिलाएं चाहती है की उनका शिशु हष्ट पुष्ट व् तंदरुस्त हो लेकिन नोर्मल डिलीवरी से, क्योंकि नोर्मल डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है। लेकिन यह किसी के लिए भी बता पाना मुश्किल होता है की गर्भवती महिला की डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन। क्योंकि यह पूरी तरह से गर्भवती महिला की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहती है, खान पान का अच्छे से ध्यान रखती है, गर्भ में शिशु का विकास बेहतर तरीके से होता है, तो महिला की नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है। जबकि यदि प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स हो तो डॉक्टर्स सिजेरियन डिलीवरी के लिए भी बोल सकते हैं। ऐसे में यदि महिला नोर्मल डिलीवरी चाहती है तो इसके लिए गर्भवती महिला को अपने स्वास्थ्य का बेहतर तरीके से ध्यान रखना चाहिए।
नोर्मल डिलीवरी के लिए क्या खाएं
यदि आप गर्भवती है और नोर्मल डिलीवरी चाहती है, तो नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने के लिए गर्भवती महिला को अपनी डाइट में कुछ खास खाद्य पदार्थो को शामिल करना चाहिए। जिससे नोर्मल डिलीवरी होने में मदद मिल सके, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की महिला को नोर्मल डिलीवरी के लिए किन चीजों का सेवन करना चाहिए।
संतरा
संतरे में पानी की मात्रा अधिक होती है जो गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होती है। साथ ही इसके विटामिन सी की अधिकता होने के कारण यह इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। और महिला और शिशु का स्वस्थ होने नोर्मल डिलीवरी के लिए बहुत जरुरी होता है, साथ ही संतरे का सेवन करने से शिशु की त्वचा को खूबसूरत बनाएं रखने में मदद मिलती है।
कम वसा वाला मीट
आयरन से भरपूर कम वसा के मीट का सेवन यदि गर्भवती महिला करती है, तो इससे बॉडी में हीमोग्लोबिन की मात्रा को भरपूर रखने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने, एनीमिया से बचाव करने, शिशु तक खून की मात्रा की पर्याप्त पहुंचाने में मदद मिलती है। साथ ही आयरन का भरपूर मात्रा में बॉडी में होना डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद करता है जिससे महिला के नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ते हैं। इसके अलावा अन्य आयरन युक्त आहार जैसे की गाजर, अनार, पालक व् अन्य हरी सब्जियों का सेवन भी भरपूर करना चाहिए क्योंकि इनमे भी आयरन व् अन्य मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते है।
देसी घी
प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में गर्भवती महिला को घी का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि घी का सेवन करने से महिला को स्वस्थ रहने और शिशु का विकास बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। साथ ही इसके कारण गर्भाशय में संकुचन को बढ़ाने, और गर्भाशय की सतह को चिकनी होने में मदद मिलती है जिससे नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ाने में मदद मिलती है।
शकरगंद
नोर्मल डिलीवरी के लिए शकरगंद का सेवन करना भी एक बेहतरीन उपाय है, क्योंकि इसमें बीटा कैरोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जो बॉडी में जाने के बाद विटामिन ए में बदल जाता है। और विटामिन ए का बॉडी में भरपूर होना भ्रूण के बेहतर विकास और गर्भवती महिला को फिट रखने के लिए बहुत जरुरी होता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला शकरगंद का सेवन भरपूर मात्रा में करती है तो इससे महिला के नोर्मल डिलीवरी होने के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।
अंडे
मिनरल्स, विटामिन, प्रोटीन, कैलोरी, फैट भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जो गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रखने में मदद करता है। ऐसे में गर्भवती महिला को नियमित कम से कम दो अंडो को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए, जिससे महिला को स्वस्थ रहने के साथ सामान्य प्रसव के चांस को बढ़ाने में मदद मिल सके।
ब्रोकली
विटामिन बी 9, विटामिन सी, कैल्शियम, फाइबर युक्त ब्रोकली का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को पेट सम्बन्धी समस्या से राहत मिलने के साथ फिट रहने में भी मदद मिलती है। साथ ही ऐसा भी माना जाता है की प्रेगनेंसी के दौरान ब्रोकली का सेवन करने से नोर्मल डिलीवरी होने के चांस को बढ़ाया जा सकता है।
पालक
आयरन, कैल्शियम व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर पालक का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने के साथ महिला को फिट रखने में भी मदद मिलती है, जिससे गर्भवती महिला के सामान्य प्रसव के होने के चांस बढ़ सकते हैं। गर्भवती महिला सलाद, सब्ज़ी, सूप आदि के रूप में स्वादानुसार इसका सेवन कर सकती है।
केला
केले का सेवन करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को भरपूर मात्रा में फोलिक एसिड और ऊर्जा मिलती है। और महिला का ऊर्जा से भरपूर रहना डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करता है जिससे नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।
पानी
यदि गर्भवती महिला चाहती है की उसकी डिलीवरी नोर्मल हो तो इसके लिए महिला को अपने शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए। पानी का शरीर में भरपूर मात्रा में होने शिशु और गर्भवती महिला दोनों के लिए बेहतर होता है, और इससे सामान्य प्रसव के चांस को भी बढ़ाया जा सकता है।
तो यह हैं कुछ खाद्य पदार्थ जिनका सेवन यदि गर्भवती महिला करती है तो इससे नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके अलावा महिला को अपने स्वास्थ्य को सही रखने के लिए हल्का व्यायाम करना चाहिए, तनाव नहीं लेना चाहिए, समय पर जांच करवानी चाहिए, इन्फेक्शन से बचाव करना चाहिए, आदि। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला जितना इन सभी परेशानियों से बची रहती है उतना ही नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।
अपने अकसर देखा होगा की प्रेगनेंसी के दौरान पेट निकल जाने के बाद गर्भवती महिलाएं अपने पेट को चुन्नी आदि से ढककर रखती है। खासकर घर से बाहर जाते समय महिलाएं ऐसा जरूर करती हैं। लेकिन क्या कभी अपने सोचा है की प्रेग्नेंट महिलाएं ऐसा क्यों करती है? यदि नहीं तो आइये अब हम आपको बताते हैं की प्रेग्नेंट महिला आखिर ऐसा क्यों करती हैं। ऐसा करने के पीछे महिलाओं के कई कारण हो सकते हैं। जैसे की:
नज़र न लगें
कई महिलाओं के ऐसे विचार होते है की प्रेग्नेंट महिला और उसके गर्भ को नज़र लगने का खतरा अधिक होता है। और यदि नज़र लग जाती है तो कुछ बुरा हो सकता है। ऐसे में पेट को ढककर रखने से उन्हें लगता है की उन्हें बुरी नज़र से बचे रहने में मदद मिलेगी। इसीलिए आज भी कई महिलाएं अपने पेट को ढककर रखती है।
धूप से बचाव
धूप में बाहर निकलने पर शरीर का तापमान नियंत्रित रहें, धूप की तेज किरणों का बुरा असर गर्भ पर न पड़े इसीलिए भी कुछ महिलाएं धूप में बाहर जाते हैं अपने पेट को चुन्नी से ढककर चलती है।
मौसम में बदलाव
मौसम में बदलाव जैसे की सर्दी का मौसम, बरसात का मौसम ऐसे में मौसम में माँ व् बच्चे दोनों को कोई दिक्कत न हो। इसके लिए भी महिलाएं अपने पेट को ढककर रखती है। जो की एक बहुत अच्छी बात है और ऐसा आपको भी करना चाहिए।
अजीब न लगे
कुछ महिलाओं को पेट के बाहर निकलने पर ऐसे चलते हुए अजीब सा महसूस होता है। ऐसे में महिला को अजीब महसूस न हो इसके लिए भी कुछ महिलाएं अपने पेट को ढककर रखती है।
तो यह हैं कुछ कारण जिसके कारण प्रेग्नेंट महिलाएं अपने पेट को ढककर रखती है। लेकिन ऐसा भी जरुरी नहीं है की हर महिला को ऐसा करना चाहिए। लेकिन मौसम के बदलाव के साथ, धूप आदि से आपको अपना बचाव जरूर करके रखना चाहिए।
गर्भावस्था के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला जितना अच्छे तरीके से अपना ध्यान रखती है। उतना ही महिला को फिट रहने और बच्चे के बेहतर विकास होने में मदद मिलती है। और महिला को स्वस्थ रहने व् बच्चे के बेहतर विकास के लिए महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यदि महिला पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला की प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली समस्या कम होती है वहीँ बच्चे के बेहतर विकास के लिए भी बच्चे को सभी जरुरी पोषक तत्व मिलते हैं।
लेकिन यदि महिला ऐसे आहार का सेवन करती है जिसमे न तो पोषक तत्व है और न हो वो आहार प्रेगनेंसी में खाना सही होता है तो इससे महिला की सेहत के साथ बच्चे का विकास भी बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। जिसके कारण बच्चे के विकास में शरीरिम व् मानसिक रूप से कमी आ सकती है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे आहार के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन करने से बच्चे के विकलांग होने का खतरा हो सकता है।
बाहर का खाना
गर्भावस्था के दौरान बाहर का खाना जैसे की पिज़्ज़ा, बर्गर, चाइनीज़ फ़ूड, मैदे से बनी चीजें, गोलगप्पे, स्ट्रीट फ़ूड, चाट पकोड़े, आदि किसी भी चीज का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इन्हे बनाने के लिए किस तरह के सामान का इस्तेमाल किया जाता है, किस तरह इन्हे बनाया जाता है, कितने दिन पुराने सामना का इन्हे बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, आदि। इसके साथ चाइनीज़ फ़ूड को बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली सोया सॉस में मर्करी की मात्रा मौजूद होती है।
ऐसे में इन सब में न तो पोषक तत्व होते हैं साथ ही इनकी क़्वालिटी भी बेकार होती है। और प्रेग्नेंट महिला यदि इनका सेवन करती है तो इससे महिला की सेहत खराब होने के साथ शिशु को भी पोषक तत्व नहीं मिलते हैं। जिससे शिशु के अंगो का विकास बेहतर नहीं हो पाता है और शिशु के शारीरिक विकास में कमी आने के कारण शिशु के जन्म के समय विकलांग होने का खतरा बढ़ जाता है।
कैफीन
जिन चीजों में कैफीन की मात्रा होती है जैसे की चॉकलेट, चाय, कॉफ़ी इनका सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को करने से बचना चाहिए। क्योंकि कैफीन का सेवन बच्चे के शारीरिक व् मानसिक विकास पर बहुत बुरा असर डाल सकता है जिसके कारण शिशु जन्म के समय शारीरिक या मानसिक रूप से कमजोर हो सकता है साथ ही शिशु के अंगो का बेहतर विकास न होने के कारण शिशु के विकलांग होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
मर्करी युक्त मछली न खाएं
गर्भावस्था के दौरान मछली का सेवन माँ के साथ बच्चे के लिए भी फ़ायदेमंद होता है। लेकिन, गर्भवती महिलाओं को ऐसी मछलियों को खाने से बचना चाहिए, जिनके मर्करी का स्तर अधिक होता है। जैसे कि स्पेनिश मेकरल, मार्लिन या शार्क, किंग मैकरेल, टिलेफिश, आदि। ऐसी मछलियों को खाने से माँ के पेट में पल रहे बच्चे के विकास में बाधा आ सकती है। जिसके कारण गर्भ में शिशु का विकास रुक जाता है और हो सकता है इस कारण बच्चे के किसी अंग में जन्म के समय समस्या आ जाये और होने वाला शिशु विकलांग जन्म लें।
बिना धुली सब्ज़ियां और फल न खाएं
बिना धुली हुई सब्जियों व् फलों में टॉक्सोप्लाज़्मा नाम का बैक्टीरिया मौजूद हो सकता है, जिससे शिशु के विकास में बाधा आती है। और प्रेग्नेंट महिला यदि इस बात का ध्यान नहीं रखती है तो इस कारण बच्चे पर बैक्टेरिया का बुरा प्रभाव अधिक पड़ सकता है जिसके कारण जन्म के समय शिशु के वजन में कमी, शिशु को विकलांगता जैसी समस्या हो सकती है।
तो यह हैं कुछ खाद्य पदार्थ जिनका सेवन यदि प्रेग्नेंट महिला करती है तो इसका पेट में पेल रहे बच्चे के विकास पर नकारात्मक असर पड़ता है और बच्चा विकलांग पैदा होता है। ऐसे में यदि आप माँ बनने वाली हैं तो आपको इन खाद्य पदार्थों को खाने से बचना चाहिए ताकि बच्चे के विकास पर किसी तरह का बुरा प्रभाव न पड़े।