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गर्भावस्था में ऐंठन होने के कारण व् उपाय

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिसमे से ऐंठन की समस्या होना बहुत ही आम बात होती है। प्रेगनेंसी के दौरान पेट, पैरों में ऐंठन होने के कारण गर्भवती महिला सबसे ज्यादा परेशान रहती है। क्योंकि गर्भाशय के बढ़ते आकार के कारण पेट की मांसपेशियों में खिंचाव आता है और वजन बढ़ने के कारण पैरों पर अधिक दबाव पड़ता है जिसके कारण पैरों में ऐंठन की समस्या होती है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में ऐंठन होने के क्या कारण होते हैं और गर्भवती महिला किस तरह इस परेशानी से निजात पा सकती है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में पैरों में ऐंठन होने के कारण

  • वजन बढ़ने के कारण।
  • गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होने के कारण पैरों पर अधिक दबाव पड़ता है सतह ही पेट व् पीठ की मांसपशियों में खिचाव ज्यादा होता है जिसकी वजह से ऐंठन की समस्या होती है।
  • भारी वजन उठाने के कारण।
  • बहुत देर तक एक ही पोजीशन में बैठे रहने के कारण।
  • गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट के निचले हिस्से पर दबाव अधिक बढ़ जाता है जिसकी वजह से ऐंठन की समस्या हो जाती है।
  • बॉडी में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण।
  • बॉडी में तरल पदार्थों का जमाव होने के कारण सूजन व् ऐंठन की समस्या होती है।
  • बहुत देर तक एक ही पोजीशन में बैठने के कारण

गर्भावस्था में ऐंठन की समस्या से निजात पाने के टिप्स

यदि प्रेग्नेंट महिला ऐंठन की समस्या से परेशान है तो इस परेशानी से निजात पाने के लिए कुछ आसान तरीको का इस्तेमाल कर सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को ऐंठन से निजता पाने के लिए क्या करना चाहिए।

खान पान का ध्यान रखें

गर्भवती महिला बॉडी में पोषक तत्वों की कमी न होने दें, अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखें, समय से खाए, ज्यादा नमक का सेवन न करें, पानी का भरपूर सेवन करें, आदि। यदि गर्भवती महिला अपने खान पान से जुड़े इन टिप्स का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से पोषक तत्वों की कमी के कारण होने वाली ऐंठन की समस्या से प्रेग्नेंट महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

आराम करें

गर्भावस्था के दौरान शरीर को आराम की ज्यादा जरुरत होती है, ऐसे में यदि महिला भरपूर आराम नहीं करती है तो इस कारण भी मांसपेशियों में जकड़न बढ़ती है जिससे ऐंठन की समस्या होती है। ऐसे में ऐंठन की समस्या से बचने के लिए महिला को भरपूर आराम करना चाहिए। साथ ही गर्भवती महिला को बहुत देर तक एक ही पोजीशन में नहीं बैठना चाहिए।

मालिश करें

गुनगुने तेल से ऐंठन वाली जगह की मसाज करें, ऐसा करने से भी मांसपेशियों को आराम मिलता है और बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है। ऐसा करने से ऐंठन से आराम मिलता है, लेकिन ध्यान रखें की पेट पर हलके हाथों से मालिश करें बिल्कुल भी दबाव न डालें।

व्यायाम व् योगासन

ऐंठन की समस्या से निजात पाने के लिए गर्भवती महिला को हल्का फुल्का व्यायाम भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि व्यायाम करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है साथ ही बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है, मानसिक रूप भी महिला रिलैक्स रहती है। जिससे ऐंठन से बचे रहने में गर्भवती महिला को मदद मिलती है।

गुनगुने पानी से सिकाई

यदि प्रेग्नेंट महिला पैरों में ऐंठन की समस्या से ज्यादा परेशान है तो गुनगुने पानी में नमक डालकर पैरों की सिकाई करें। ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को पैरों में ऐंठन से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं गर्भवती महिला को ऐठन की समस्या होने के कारण व् इस परेशानी से बचाव के लिए कुछ आसान टिप्स, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी इन टिप्स का ध्यान रखें साथ ही ऐंठन की समस्या अधिक होने पर इसे अनदेखा न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें।

प्रेगनेंसी में खुश रहने के तरीके

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किसी भी महिला के लिए गर्भावस्था बहुत ही खुशी भरा अहसास होता है, लेकिन इस दौरान महिला को होने वाली शारीरिक व् मानसिक परेशानी के कारण महिला के स्वाभाव में बदलाव आना आम बात है। लेकिन यदि प्रेगनेंसी के समय आप तनाव में रहती है, या ज्यादा गुस्सा करती हैं और चिड़चिड़ी रहती है, तो इसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है। और महिला के स्वाभाव में आए इस परिवर्तन का कारण बॉडी में हार्मोनल बदलाव होते हैं, और शुरुआत में तो यह काफी तेजी से होते हैं।

ऐसे में स्वस्थ रहने और शिशु के बेहतर विकास के लिए महिला को इन सबसे दूर रहकर अपने आप को खुश रखने की कोशिश करनी चाहिए, हाँ हो सकता है बॉडी में हो रही समस्या के कारण आपको परेशानी हो लेकिन यदि आप चाहे तो कुछ आसान तरीके अपनाकर अपने मन को दूसरी जगह लगाकर खुश रह सकती है। तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसे खास टिप्स बताते हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान आपको खुश रखने में मदद करते हैं जिससे गर्भ में पल रहे शिशु को भी फायदा मिलता है।

संतुलित आहार लें

प्रेगनेंसी के दौरान जितना आप स्वस्थ रहती है उतनी ही सकारात्मक सोच आपकी होती है, और स्वस्थ रहने के लिए सबसे जरुरी है की आप अपने खान पान का ध्यान रखें। ताजा और हैल्दी खाना खाएं जो की पोषक तत्वों से भरपूर हो। इससे आपको फिट रहने में मदद मिलेगी जिससे आपको फ्रैश महसूस करने और खुश रहने में मदद मिलती है।

योगा करें

योगा न केवल आपको शारीरिक रूप से फिट रखने में मदद करता है, बल्कि मानसिक रूप से भी यह आपको मजबूत बनता है और फ्रैश रखता हैं। प्रेगनेंसी में रोजाना सुबह उठकर थोड़ी देर योगा करें इससे आपको बेहतर महसूस होगा, स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी, साथ ही तनाव से राहत मिलेगी जिससे आप खुश रहेंगी।

अकेले न रहें

गर्भावस्था में अकेलापन आपको बहुत ज्यादा परेशान कर सकता है, क्योंकि अकेले होने पर आप केवल प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों के बारे में ही सोचते हैं। ऐसे में खुश रहने के लिए आपको अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहिए, दोस्तों के साथ बातें करनी चाहिए, अपने पार्टनर के साथ प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले अनुभव शेयर करने चाहिए, इससे आपका मन खुश रहता है।

अपने दिल की बात करें

जिन लोगो पर आप भरोसा करते हैं, जिनके साथ रहने पर आपको ख़ुशी मिलती है, उनसे अपने दिल की बातें आपको कहनी चाहिए ऐसा करने से प्रेगनेंसी में आपको अपने तनाव को दूर करने में मदद मिलती है। साथ ही आपको प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली समस्या को शेयर करने से भी उससे राहत पाने के तरीको का पता चलता है। जिससे आपका मन हल्का होता है और आपको खुश रहने में मदद मिलती है।

अपना पसंदीदा कुछ करें

खुश रहने के लिए आपको प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा कुछ करना चाहिए जिससे आपको ख़ुशी मिलती है, जैसे की यदि आपको संगीत सुनना पसंद है तो उसे सुने, पेंटिंग करना पसंद है वो करें, बुक्स पड़ना पसंद है, या अन्य खुश भी। यदि आप अपनी पसंद का कुछ भी प्रेगनेंसी में करती है तो इससे आपका मन बहलता है और आपको ख़ुशी मिलती है।

चिंता छोड़ दें

यदि आप प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानी या अन्य किसी बात में उलझी रहती है, और उसी के बारे में चिंता करती है, तो इसका बुरा असर आपके शिशु पर पड़ता है, साथ ही आपकी भी परेशानी बढ़ती है, ऐसे में यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहना चाहती हैं तो अपनी सभी चिंताओं को छोड़कर मानसिक रूप से रिलैक्स रहना चाहिए।

आराम करें

आराम करना भी प्रेगनेंसी में बहुत जरुरी है, क्योंकि यदि आप अच्छे से आराम करती हैं तो ऐसा करने से आपको शारीरिक रूप से बहुत आराम रहता है, जिससे आपको रिलैक्स महसूस होता है, और बॉडी में आराम होने के कारण आपको ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है, जिससे आपका मूड भी अच्छा रहता है।

यादों के लम्हे जोड़ें

यादों को हमेशा संजो का रखना आपके मन को बहुत खुश करता है, ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहने के लिए प्रेगनेंसी के हर एक अनुभव को कैद करके रखना चाहिए। इसके लिए आप कविता लिख रखती है, डायरी लिख सकती है, या कोई ब्लॉग भी लिख सकती है, इसके अलावा इन यादों को आप फोटो में भी कैद कर सकती है। ऐसा करने से आपकी यह यादें हमेशा के लिए आपके पास रहती है और प्रेगनेंसी के दौरान आपको खुश रहने में भी मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास तरीके जो प्रेगनेंसी के दौरान आपको खुश रखने में मदद करते हैं, और जितना हो सके आपको गर्भावस्था में खुश ही रहना चाहिए ताकि आप अपनी लाइफ के इस बेहतरीन लम्हे को खुलकर जी सकें, और हर पल का खास अनुभव ले सकें।

प्रेगनेंसी में जब मुँह कड़वा और फीका लगे तो क्या करें?

प्रेगनेंसी एक ऐसा समय होता है जहां महिला को बॉडी में बहुत से बदलाव महसूस होते हैं, बहुत सी शारीरिक परेशानियां होती है, महिला बहुत से नए अनुभवों को महसूस करती है, आदि। और ऐसा ही एक बदलाव गर्भवती महिला के मुँह के स्वाद में भी महसूस होता है जैसे की कुछ महिलाओं के खाने के स्वाद में परिवर्तन आता है तो कुछ महिलाओं को मुँह का स्वाद कड़वा व् फीका होता है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के मुँह का स्वाद कड़वा व् फीका क्यों होता है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेग्नेंट महिला के मुँह का स्वाद फीका व् कड़वा होने के कारण

  • गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण ऐसा होता है।
  • गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी दवाइयों का सेवन करती है जिसकी वजह से भी गर्भवती महिला के मुँह का स्वाद बिगड़ जाता है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला मुँह की साफ सफाई अच्छे से नहीं करती है, महिला को दांतों से जुडी कोई समस्या होती है, तो भी गर्भवती महिला के मुँह का स्वाद कड़वा व् फीका होता है, साथ ही महिला को अपने मुँह से बदबू भी महसूस होती है।
  • प्रेग्नेंट महिला का मुँह यदि सूखा रहता है तो इस कारण भी महिला को नूह का स्वाद कड़वा व् फीका महसूस होता है।
  • पाचन क्रिया से जुडी समस्या होने की वजह से भी महिला के मुँह में कड़वाहट महसूस होती है।

मुँह के फीकेपन और कड़वेपन को दूर करने के लिए अपनाएँ यह टिप्स

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को मुँह का स्वाद बिगड़ा हुआ महसूस होता है तो कुछ आसान टिप्स का ध्यान रखने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला मुँह के कड़वेपन और फीकेपन को दूर करने के लिए क्या कर सकती है।

मुँह व् दांतों की साफ़ सफाई

प्रेग्नेंट महिला को मुँह, जीभ व् दांतों की साफ सफाई अच्छे से करनी चाहिए। जैसे की सुबह उठते ही और रात को सोने से पहले ब्रश कर लें। गुनगुने पानी से कुल्ला करें, ऐसा करने से मुँह में जमे बैक्टेरिया को खत्म करने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को मुँह के फीकेपन, कड़वेपन व् मुँह से आने वाली स्मैल की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। और मुँह में जमे बैक्टेरिया के कारण होने वाली परेशानी से माँ व् बच्चे दोनों को बचे रहने में मदद मिलती है।

खट्टे फलों का सेवन

खट्टे फल जैसे की संतरा, निम्बू, आंवला, मौसमी आदि का सेवन करने से भी भी गर्भवती महिला को इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि इन फलों को खाने से मुँह में लार बनने लगती है जिससे मुँह का सूखापन दूर होता है। और मुँह के कड़वापन व् फीकेपन को दूर करने के साथ मुँह का स्वाद भी सही होता है।

तरल पदार्थ

पेय पदार्थ जैसे की पानी, जूस, नारियल पानी, निम्बू पानी, आदि का भरपूर सेवन प्रेग्नेंट महिला को करना चाहिए। इससे शरीर को हाइड्रेट रहने और मुँह में नमी को बरकरार रहने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को मुँह के कड़वेपन व् फीकेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

फाइबर युक्त आहार

प्रेग्नेंट महिला को पेट सम्बन्धी समस्या जैसे की कब्ज़ आदि के कारण खट्टे डकार, सीने में जलन जैसी परेशानी हो सकती है। जिसके कारण भी मुँह के स्वाद में फ़र्क़ आ जाता है। लेकिन फाइबर युक्त आहार का सेवन करने से पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है जिससे महिला को इस परेशानी से निजात मिलता है।

कुछ अपनी पसंद का खाएं

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से महिला के खाने की इच्छा में कमी आती है क्योंकि महिला के मुँह का स्वाद बिगड़ जाता है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला अपनी इच्छा से कुछ हेल्दी और चटपटा बनाकर खाती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला के मुँह के स्वाद को सही करने में मदद मिलती है।

सेब का सिरका

थोड़े से पानी में सेब का सिरका मिलाकर दिन में दो बारे उससे कुल्ला करें इससे मुँह में जमे बैक्टेरिया को मुँह से बाहर निकालने में मदद मिलती है जिससे महिला के मुँह का स्वाद सही होता है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान मुँह के कड़वेपन और फीकेपन को दूर करने में मदद मिलती है। यदि आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान मुँह के स्वाद में गड़बड़ी महसूस होती है तो आपको भी ऊपर दिए गए टिप्स का ध्यान रखना चाहिए।

गर्मियों में इन चीजों का सेवन शिशु के लिए नुकसानदेह होता है

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ऐसी कोई भी चीज नहीं खानी चाहिए जिससे पेट में पल रहे बच्चे के विकास पर बुरा असर पड़े। और बदलते मौसम के अनुसार भी प्रेग्नेंट महिला को अपने खान पान में भी बदलाव करते रहना चाहिए। जैसे गर्मियों में कुछ ऐसी चीजें हैं जिनका सेवन प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए।

क्योंकि उनका सेवन करने से बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है। और बच्चे के विकास में किसी भी तरह की कमी शिशु के जन्म के समय शिशु और महिला दोनों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्मियों में प्रेग्नेंट महिला को किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए जिससे शिशु को नुकसान पहुँचता है उस बारे में बताने जा रहे हैं।

कैफीन

गर्भवती महिला को गर्मियों में कैफीन युक्त पदार्थ जैसे की चॉकलेट, चाय, कॉफ़ी आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि कैफीन का सेवन करने से बॉडी में पानी की की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है। जिसकी वजह से न केवल गर्भवती महिला की परेशानियां बढ़ती है बल्कि गर्भ में बच्चे के विकास पर बहुत बुरा असर पड़ता है।

नॉन वेज

गर्मियों में प्रेग्नेंट महिला को नॉन वेज का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए। क्योंकि नॉन वेज का सेवन करने से बॉडी का तापमान बढ़ता है साथ ही पाचन तंत्र भी बहुत बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। जिससे महिला के साथ बच्चे को भी पेट में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा अंडे का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को सिमित मात्रा में ही करना चाहिए।

गर्म तासीर वाली चीजें

प्रेगनेंसी में गर्म तासीर वाली चीजें जैसे की ड्राई फ्रूट, केसर, आदि का सेवन थोड़ा बहुत किया जा सकता है लेकिन जब मौसम थोड़ा ठंडा हो। इसके अलावा यदि बहुत ज्यादा गर्मी का मौसम है तो प्रेग्नेंट महिला को गर्म तासीर वाली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे बॉडी का तापमान बढ़ने के साथ बच्चे को दिक्कत होने लगती है, साथ ही गर्भाशय में सकुचन भी हो सकता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को जितना हो सके इन चीजों के सेवन से परहेज करना चाहिए।

ज्यादा ठंडी चीजें

गर्मी में मौसम में ठंडा पानी, ठंडी चीजें आपको आराम तो पहुंचा सकती है लेकिन गर्मी के मौसम में ठंडी चीजों का अधिक सेवन बॉडी में गर्मी बढ़ाने के साथ ठण्ड के कारण होने वाली परेशानी का कारण भी बन सकता है। ऐसे में महिला को यदि परेशानी होती है तो इसके कारण बच्चे को भी परेशानी हो सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को जितना हो सके ठंडी चीजों के सेवन भी भी गर्मी के मौसम में परहेज करना चाहिए।

नमक

प्रेग्नेंट महिला को नमक का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान कम करना चाहिए खासकर गर्मियों में तो बहुत कम करना चाहिए। क्योंकि नमक का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के ब्लड प्रैशर के बढ़ने का खतरा रहता है। और प्रेग्नेंट महिल का ब्लड प्रैशर बढ़ने के कारण बच्चे को भी दिक्कत हो सकती है।

तो यह हैं कुछ खाद्य पदार्थ जिनका सेवन गर्मियों में प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि इनका सेवन करने से बच्चे के विकास में परेशानी आ सकती है। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला को उन चीजों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए जिनका सेवन करने से माँ और बच्चे दोनों को फायदा मिलता है।

प्रेगनेंसी जांच कब करना सही होता है?

प्रेगनेंसी के लक्षण

गर्भवती होना हर महिला के लिए बहुत ही सुखद अहसास होता है और पीरियड्स का मिस होना इस ख़ुशी का सबसे पहला अहसास होता है। क्योंकि शादी के बाद पीरियड्स मिस होने पर मन में सबसे पहले यही आता है की कहीं में गर्भवती तो नहीं हूँ? और ऐसा नहीं होता है की जब आपको पता चले की आप गर्भवती हैं तभी आपकी बॉडी में आपको प्रेगनेंसी के लक्षण महसूस हो बल्कि यदि आपका गर्भ ठहर जाता है तो निषेचन की प्रक्रिया होने के बाद से ही बॉडी में हार्मोनल बदलाव होने शुरू हो जाते हैं। जिसके कुछ लक्षण आपको महसूस भी होते हैं जैसे की कमजोरी का अनुभव, मुँह का स्वाद बिगड़ना, पेट में हल्का दर्द, उल्टी आने का मन करना आदि। और उसके बाद यदि आपको पीरियड्स मिस हो जाएँ तो हो सकता है की आप सच में प्रेग्नेंट हो, लेकिन इसे सच मानने से पहले आपको प्रेगनेंसी की जांच करनी चाहिए।

प्रेगनेंसी जांच टेस्ट किट

पीरियड्स मिस होने के बाद यदि आपको ऐसा महसूस हो की आपका गर्भ ठहर गया है तो इसकी जांच करवाने के लिए आपको डॉक्टर के पास जाने की जरुरत नही होती है। क्योंकि प्रेगनेंसी की जांच करने के लिए मार्किट में आपको किसी भी मेडिकल स्टोर पर प्रेगनेंसी जांच किट मिल जाती है। जिसे आप घर पर ही इस्तेमाल करके आसानी से यह पता लगा सकती है की आपका गर्भ ठहरा है या नहीं। प्रेगनेंसी जांच किट का इस्तेमाल किस तरह से किया जाता है इसका पूरा विवरण प्रेगनेंसी जांच किट के पैकेट पर दिया होता है। अगर एक बार टेस्ट करने पर रिपोर्ट नेगेटिव आये तो दो दिन रूककर दोबारा टेस्ट करना चाहिए और यदि फिर टेस्ट पॉजिटिव आये या नेगेटिव दोनों ही केस में डॉक्टर से मिलना चाहिए। ताकि यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपका सही ट्रीटमेंट हो सके और यदि प्रेग्नेंट नहीं है तो पीरियड्स मिस होने के कारण का पता चल सके।

प्रेगनेंसी जांच करने का सही समय

यदि आपका पीरियड्स मिस हो गया है और पीरियड्स मिस हुए पांच दिन या एक हफ्ता हो गया है तो आप घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकते हैं। और प्रेगनेंसी टेस्ट करते समय एक बात का ध्यान रखें की सुबह के सबसे यूरिन का इस्तेमाल करें, क्योंकि उस समय HCG हॉर्मोन का लेवल अधिक होने के कारण परिणाम सही आने के सबसे अधिक चांस होते हैं। और यदि आप दिन में किसी भी समय टेस्ट करते हैं तो इस बात का ध्यान रखें की टेस्ट करने से चार या पांच घंटे पहले तक आप यूरिन पास न करें। और एक बात का ध्यान रखें की पैकेट पर एक्सपाइरी डेट देख लें, और किट को सूखी और समतल जगह पर रखें, साथ नहीं किट को खोलने के दस घंटे के अंदर ही उसका इस्तेमाल कर लेना चाहिए।

प्रेगनेंसी टेस्ट किट को इस्तेमाल करने का तरीका

यदि आप बाजार से प्रेगनेंसी टेस्ट किट लाते हैं तो उसे इस्तेमाल करने से पहले यूरिन का नमूना ले लें, प्रेगनेंसी जांच किट में मौजूद ड्रॉपर की मदद से यूरिन की दो से तीन बूँदे किट में यूरिन डालने वाली जगह पर डाल दें। उसके बाद परिणाम के लिए पांच से दस मिनट के लिए इंतज़ार करें, यदि किट पर दी गई एक लाइन डार्क होती है तो इसका मतलब होता है की आपका प्रेगनेंसी का परिणाम नेगेटिव है यदि दोनों लाइन डार्क हो जाती है तो इसका मतलब होता है की मुबारक हो आपका परिणाम पॉजिटिव है आप माँ बनने वाली हैं।

तो यह हैं प्रेगनेंसी जांच कब और कैसे करनी चाहिए साथ ही प्रेगनेंसी जांच किट का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए इससे जुड़े टिप्स। तो यदि आपका भी पीरियड मिस हो जाता है तो आपको प्रेगनेंसी किट का इस्तेमाल करके आसानी से जान सकती है की आप गर्भवती हैं या नहीं।

मालपुआ बनाने की अलग अलग विधियां

मालपुआ एक राजस्थानी व्यंजन है, लेकिन पुरे भारत में इसे बहुत शौक खाया और बनाया जाता है। ख़ासकर पुरे भारत में होली के त्यौहार पर मालपुआ बनाया जाता है और सभी को खिलाया जाता है। विदेश से भी आने वाले लोगों को मालपुआ बहुत ही पसंद आता है।

मालपुए की यह विशेषता है के यह झटपट तैयार हो जाता है और किसी प्रकार से अपनी इच्छानुसार और स्वादानुसार खाया सकते है।

स्वादिष्ट मालपुए बाजार में भी आसानी से मिल जाते है और झटपट घर पर भी बनाये जा सकते है। अगर आपके घर कोई मेहमान आ जाये तो आप जल्द से मालपुए बनाकर उन्हें खिला सकते है। इन्हे बनाने की सामग्री भी आसानी से घर पर ही उपलब्ध होती है।

मालपुए को अलग अलग तरीकों से भी बनाया जा सकता है। यहां हम आपको मालपुए की 2-3 विधि बताएंगे।

गेहूँ के आटे वाले मालपुए

गेहूँ के आटे से बनने वाले मालपुए बहुत ही आसानी से बन जाते है। ख़ास बात यह है की इन्हें आप किसी भी मौसम में खा सकते है।

सामग्री :

  • 1 बड़ा कप गेहूँ का आटा
  • एक छोटी कटोरी दूध
  • 1 छोटी कटोरी चीनी
  • 2 चम्मच देसी घी

बनाने की विधि :

  • एक बाउल में चीनी और दूध अच्छे से मिला लें।
  • अब थोड़ा थोड़ा दूध और चीनी का घोल आटे में मिलाएं और फैंटते रहें।
  • ध्यान रखिये की कहीं आटे में गांठ ना बने।
  • धीरे धीरे सारा दूध आटे घोल तैयार कर ले।
  • घोल को तब तक फंटे जब तक घोल चिकना न हो जाये।
  • अब एक पैन या कड़ाई में घी गर्म कर लें।
  • बड़ी चम्मच से कड़ाई में घोल को डालकर डीप फ्राई कर लें।
  • पुए को दोनों और से अच्छे तरह पकाएं।
  • सारे मिश्रण के एक एक करकें मालपुए बना लीजिये।
  • अब इन मालपुओं को चटनी, निम्बू के आचार या खीर के साथ अपने स्वादानुसार खा सकते है।

इन मालपुओं को आप डीप फ्राई करने के बजाय पैन में शैलो फ्राई भी कर सकते है।

मैदे और मिल्क पाउडर से तैयार मालपुए

मैदे और मिल्क पाउडर से बने हुए मालपुए किसी भी त्यौहार के लिए ख़ास व्यंजन के रूप में आप परोस सकते है।

सामग्री :

  • मैदा 1/2 कप
  • मिल्क पाउडर 1/2 कप
  • चीनी 1 कप
  • दूध 1 कप
  • बादाम 5-6
  • पिस्ता 10-11
  • इलायची पाउडर 1/2 छोटा चम्मच
  • घी 2 बड़े चम्मच

बनाने की विधि :

  • एक बड़े बाउल में मैदा और मिल्क पाउडर डाल लें।
  • अब इस मिश्रण में थोड़ा थोड़ा दूध डालते हुए घोल तैयार करें।
  • घोल बनाते समय लगातार हाथ चलाते रहें जिससे की घोल में मैदे की गांठ ना बनें।
  • घोल को अच्छे से फैंट ले अगर घोल गाढ़ा लगे तो थोड़ा सा दूध और मिला ले।
  • इस मिश्रण को थोड़ी देर आराम करने दे।
  • अब एक बर्तन में चीनी और बराबर मात्रा में पानी डालें और गैस पर रखें।
  • इस पानी चाशनी बनने तक पकाएं।
  • चाशनी को बिच बिच में हिलाते रहें।
  • एक चम्मच में चाशनी को लेकर उंगलियों से चाशनी को छूकर अंगूठे और उंगलियों की बिच चिपकाकर देखें।
  • अगर शहद की तरह आपकी यह चिपक रही है तो आपकी चाशनी तैयार है।
  • अब इसे गैस से उतार कर इसमें इलायची पाउडर डाल दें।
  • अब पहले से तैयार बैटर को लीजिये और एक बार फिर से फैंटे।
  • एक पैन में घी गर्म करके उसमे छोटे छोटे मालपुए तल लीजिये।
  • धीमी आँच पर मालपुए को दोनों और से ब्राउन होने तक सेंके
  • मालपुए को चाशनी में डाल दीजिये।
  • 3-4 मिंट तक चाशनी से मालपुओं को निकाल कर प्लेट पर सजा लें।
  • अब मालपुओं पर बारीक़ कटे हुए बादाम और पिस्ता काट कर सज़ा लें और गर्म गर्म परोस दें।

इन गरमा गर्म मालपुओं को आप रबड़ी के साथ भी परोस सकते है।

खोया और मैदा से तैयार मालपुए

खोए और मैदे से बने मालपुए खाने में बहुत ही स्वादिष्ट और नरम होते है।

सामग्री :

  • मैदा 1 कप
  • खोया 1 कप
  • चीनी 2 कप
  • देसी घी 4 बड़े चम्मच
  • बादाम 8
  • पिस्ता 10
  • 1 चुटकी केसर

बनाने की विधि :

  • खोए को कदूकस करके मैदे के साथ मिला दीजिये।
  • अब इस मिश्रण में थोड़ा थोड़ा पानी मिलाते हुए एक बैटर तैयार करें।
  • लगातार बैटर को हिलाते रहें, बैटर बहुत ज्यादा पतला या बहुत ज्यादा गाढ़ा नहीं होना चाहिए।
  • एक गैस पर बराबर मात्रा में चीनी और पानी डालकर चाशनी तैयार कर लें।
  • दूसरी और गैस पर एक पैन रखकर घी गर्म करें।
  • एक चम्मच बैटर घी में डालें, हल्की आंच पर मालपुए को सेंके।
  • इस प्रकार बारी बारी करकें सारे बैटर के छोटे छोटे मालपुए तल लें।
  • दोनों तरफ से मालपुए को हल्का ब्राउन होने के बाद चाशनी में डाल दें।
  • 3-4 मिंट बाद चाशनी में से सभी मालपुओं को निकालकर प्लेट में लगाए।
  • ऊपर से बारीक़ कटे हुए बादाम, पिस्ता और केसर से मालपुओं को सजाये और सर्व करें।

इनमें से कोई भी मालपुए बनाने की विधि को चुनकर आप अपने आने वाले होली के त्यौहार को ख़ास बना सकते है।

ब्रेस्टमिल्क बढ़ाने के लिए 10 आहार

गर्भ में शिशु का विकास पूरी तरह से महिला पर निर्भर करता है, उसी तरह जन्म के बाद भी शिशु का विकास पूरी तरह से महिला पर ही निर्भर करता है। क्योंकि जन्म के बाद कम से कम छह महीने तक शिशु के लिए माँ का दूध ही सबसे सर्वोत्तम आहार होता है, और यह बात माँ बनने के बाद आपको डॉक्टर सबसे पहले बताते हैं। शिशु के जन्म के छह महीने तक शिशु को केवल माँ का दूध ही देना चाहिए इसके अलावा शिशु को पानी भी नहीं देना चाहिए, क्योंकि माँ का दूध शिशु के लिए किसी वरदान से कम नहीं होता है। लेकिन कई बार महिला का दूध अच्छे से उतर नहीं पाता है, या कम आता है तो ऐसे में महिला परेशान हो सकती है, क्योंकि हर माँ के लिए उसके शिशु का विकास सबसे जरुरी होता है। ऐसे में कुछ महिलाएं शिशु को ऊपर का दूध (डिब्बे वाला दूध) देना भी शुरू कर देती है।

ब्रेस्टमिल्क बढ़ाने के आहार

यदि महिला का दूध बहुत कोशिश करने के बाद भी नहीं उतर रहा है तो एक अलग बात है, लेकिन यदि महिला को ब्रेस्टमिल्क आ रहा है। लेकिन शिशु की जरुरत के अनुसार उसका उत्पादन नहीं हो रहा तो महिला को अपनी डाइट में कुछ ऐसे आहार को शामिल करना चाहिए। जिससे ब्रेस्टमिल्क को बढ़ाने में मदद मिल सके और शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की ब्रेस्टमिल्क बढ़ाने के लिए महिला को कौन से आहार को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।

मेथी दाना

मेथी के बीज में आयरन, विटामिन, कैल्शियम, बीटा कैरोटीन, ओमेगा 3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। और वसा स्तन में दूध की आपूर्ति में बढ़ाने में मदद करता है, साथ ही यह अन्य पोषक तत्व तत्व भी स्तन में दूध की आपूर्ति को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसीलिए मेथी दाना का सेवन करने से महिला को ब्रेस्टमिल्क को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। और इसके लिए महिला मेथी की चाय, मेथी दाना को पराठों व् सब्जियों में डालकर महिला इसका सेवन कर सकती है।

हरी सब्जियां

बीटाकैरोटीन, राइबोफ्लेविन जैसे विटामिन हरी सब्जियों में भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो ब्रेस्टमिल्क को बढ़ाने में मदद करते हैं। साथ ही हरी सब्जी में आयरन, कैल्शियम जैसे अन्य पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो स्तनपान के जरिये शिशु तक पहुँचते हैं और शिशु के बेहतर विकास में मदद करने के साथ शिशु के लिए ब्रेस्टमिल्क के उत्पादन को बढ़ाने में भी मदद करते हैं। इसीलिए दूध पिलाने वाली महिला को दिन में एक समय के आहार में हरी सब्ज़ी को जरूर शामिल करना चाहिए।

दालें

प्रोटीन के साथ दालें अन्य पोषक तत्वों का भी बेहतरीन स्त्रोत होती है जो की स्तन में दूध की आपूर्ति को बढ़ाने में मदद करता है। क्योंकि प्रोटीन दूध की आपूर्ति को बढ़ाने वाली कोशिकाओं को बेहतर तरीके से दूध का उत्पादन करने में मदद करता है। खासकर मूंग, मसूर की दाल दूध का उत्पादन तेजी से बढ़ाने में मदद करती है।

ड्राई फ्रूट्स

वसा, प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर ड्राई फ्रूट्स का सेवन भी गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि यह स्तन में दूध की वृद्धि को बढ़ाने में मदद करते हैं। और ड्राई फ्रूट्स का सेवन ऐसे ही करने की बजाय महिला को पंजीरी, लड्डू, हलवा आदि में मिलाकर करना चाहिए ऐसा करने से इसका फायदा और भी बढ़ जाता है, साथ ही इससे महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में भी मदद मिलती है।

कच्चा प्याज

कच्चा प्याज भी माँ के दूध को बढ़ाने में बहुत मददगार होता है क्योंकि इसमें सभी जरुरी विटामिन्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। इसीलिए यदि आपको ऐसा महसूस होता है की आपको ब्रेस्टमिल्क का उत्पादन कम हो रहा है तो अपने आहार में सलाद के रूप में, सैंडविच बनाकर कच्चे प्याज का सेवन जरूर करना चाहिए।

डेयरी प्रोडक्ट्स

दूध व् दूध से बनी चीजें जैसे पनीर, दही, छाछ आदि का सेवन भी स्तनपान करवाने वाली महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि इनमे वसा, कैल्शियम, प्रोटीन आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं, साथ ही जितना अधिक महिला दूध का सेवन करती है उतना ही ज्यादा ब्रेस्टमिल्क को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसीलिए दूध पिलाने वाली महिला को दिन में कम से कम तीन से चार गिलास दूध का सेवन जरूर करना चाहिए।

गाजर

गाजर में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है, जो ब्रेस्टमिल्क के उत्पादन को बढ़ाने में मददगार होता है। इसीलिए जिन महिलाओं को ब्रेस्टमिल्क से जुडी परेशानी हो उन्हें गाजर की सब्जी, सलाद, जूस आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए, क्योंकि इसे अपनी डाइट में शामिल करने से महिला को ब्रेस्टमिल्क से जुडी समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

ब्राउन राइस

भूरे चावल का सेवन करने से बॉडी में हॉर्मोन को बैलेंस करने में मदद मिलने के साथ दूध के उत्पादन को भी बढ़ाने में मदद मिलती है। ऐसे में जिन महिलाओं को ब्रेस्टमिल्क अच्छे से न आने की समस्या होती है उन्हें अपनी एक टाइम की डाइट में ब्राउन राइस को जरूर शामिल करना चाहिए। ताकि महिला को इस परेशानी से निजता पाने के साथ शिशु तक पर्याप्त पोषण पहुंचाने में मदद मिल सके।

सुवा

सुवा के पत्ते भी स्तन में दूध की आपूर्ति में सुधार करने में बहुत फायदेमंद होते हैं क्योंकि इनमे आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। इसीलिए जिन महिलाओं को स्तन में दूध अच्छे से न उतर पाने की समस्या हो उन्हें सुवा के पत्तों का सेवन जरूर करना चाहिए।

तरल पदार्थ

तरल पदार्थ यानी भरपूर मात्रा में पानी, फलों का रस, नारियल पानी आदि का सेवन भी महिला को भरपूर करना चाहिए। क्योंकि इससे महिला की बॉडी को हाइड्रेटेड रहने में मदद मिलने के साथ पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में मिलते हैं। खासकर जब महिला शिशु को दूध पिलाती है तो महिला को उससे पहले एक गिलास पानी, जूस या किसी अन्य तरल चीज का सेवन जरूर करना चाहिए इससे भी शिशु के लिए दूध की आपूर्ति को बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं वो आहार जिन्हे स्तनपान करवाने वाली महिला को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए जिससे शिशु के लिए पर्याप्त मात्रा में दूध का उत्पादन हो सके। और शिशु के जन्म के बाद उसके बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलने के साथ उसे बीमारियों से लड़ने के लिए सक्षम बनाया जा सके।

बच्चों में खट्टे डकार और एसिडिटी की समस्या से बचने के घरेलू नुस्खे

बच्चों में खट्टे डकार और एसिडिटी की समस्या से बचने के घरेलू नुस्खे:-

पेट में जलन होना, गैस होना, खट्टे डकार आना, एसिडिटी होना, यदि ये परेशानी किसी बड़े को होती है, तो सोचिये आप कितने परेशान होते है, तो सोचिये जब आपके बच्चे को ये परेशानी होती है तो वो कटना परेशान होता होगा, जबकि बच्चा तो आपको बता भी नहीं सकता है की उसे क्या हो रहा है, इसके लिए आपको ही पता करना पड़ता है की आपका बच्चा परेशान क्यों हो रहा है। यदि बच्चा दूध न पीएं, या फिर पीते ही उलटी कर दें, या उसे कफ होने लगे, तो आप समझ जाइये की आपके बच्चे को पेट से सम्बंधित कोई समस्या है।

ऐसे में आपको डॉक्टर के पास तो जाना चाहिए, परंतु कुछ घरेलू नुस्खे भी है जिनका इस्तेमाल करके अपनी इस समस्या का समाधान कर सकते है, और यदि फिर भी आपके बच्चे को आराम न आएं तो डॉक्टर के पास जाने में ज्यादा देरी नहीं बरतनी चाहिए। आपके लिए आज हम कुछ ऐसे ही नुस्खे बताने जा रहे है जो बच्चों में होने वाली एसिडिटी और खट्टे डकार की समस्या का समाधान करेंगे, इसके लिए आप इन तरीको का इस्तेमाल करके अपने बच्चे को वापिस से स्वस्थ कर सकती है, तो आइये अब जानते है वो टिप्स जो आपकी ईस समस्या का समाधान करेंगे।

बच्चों में एसिडिटी और खट्टी डकार के घरेलू उपचार:-

पुदीने का इस्तेमाल करें:-

mint oil

पुदीने का इस्तेमाल करने से बच्चों में होने वाली एसिडिटी और खट्टे डकार की समस्या से निजात पाया जा सकता है, क्योंकि पुदीना पेट में ठंडक का अहसास करवाता है, और साथ ही पेट में होने वाली पाचन क्रिया की समस्या से भी निजात दिलाता है, इसके इस्तेमाल एके लिए आप तो आप बच्चे को पुदीने के तेल की दो बूँद, और जैतून के तेल की दो बूँद मिलाकर बच्चे के पेट पर मालिश करें, और यदि आप बच्चे को स्तनपान करवा रही है तो आप भी पुदीने की चाय का सेवन कर सकती है, क्योंकि दूध में पुदीने के मिनरल्स जाकर बच्चे को फायदा पहुँचाते है।

एप्पल साइडर विनेगर का इस्तेमाल करें:-

apple sider vineger

एप्पल साइडर विनेगर का इस्तेमाल करके भी आप बच्चों में होने वाली इस समस्या से निजात पा सकती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक हलके गिलास पानी में थोड़ा सा एप्पल साइडर विनेगर मिलाकर बच्चे को दिन में उसका सेवन थोड़ी थोड़ी देर बाद करवाते रहें ऐसा करने से आपको बच्चों की इम्युनिटी में भी बदलाव नज़र आएगा, साथ ही बच्चे को एसिडिटी और खट्टे डकार जैसी समस्या से भी निजात मिल जायेगा। और यदि आपका बच्चा एक साल से बड़ा है, तो आप उसे शहद भी दे सकती है।

नारियल के तेल का इस्तेमाल करें:-

coconut oil

नारियल के तेल में लुरिक एसिड पाया जाता है, जो की बच्चे के लिए माँ के दूध जितना ही फायदा करता है, इसके सेवन से बच्चों में इम्युनिटी के साथ खाना हैं करने की ताकत बढ़ती है, जो महिलाए गर्भवती होती है, उन्हें भी अपने खाने में इसे सम्मिलित करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से आपके होने वाले बच्चे की इम्युनिटी में इजाफा होता है, और साथ ही उसका पाचन तंत्र भी मजबूत होता है, इसके लिए आप दूध या खाने में दो बूँद नारियल के तेल की मिलाकर दे सकती है।

कैमोमाइल टी का सेवन करवाएं:-

camomile tea

कैमोमाइल टी यह एक herbal चाय होती है, और यह हर्बल चाय बच्‍चे का पाचन ठीक करती है, और साथ भी बच्चे को एसिडिटी और खट्टे डकार की समस्या से भी राहत दिलाती है, और कालिक पेन से भी राहत दिलाती है। इसके उपयोग के लिए आप गरम पानी में आधा चम्‍मच सूखी कोमामाइल फूल की पंखुडियां मिलाएं और दिन भर उस पानी को थोड़े थोड़े अंतराल के बाद शिशु को पिलाती रहें। ऐसा करने से आपको थोड़ी ही देर में फ़र्क़ दिखाई देगा, और आपके बच्चे को इस परेशानी से निजात मिल जायेगा।

शहद का इस्तेमाल करें:-

honey

शहद का इस्तेमाल करने से भी बच्चों को होने वाली एसिडिटी और खट्टे डकार की समस्या से बचाया जा सकता है, इसके इस्तेमाल के लिए यदि आपका बच्चा एक साल तक का है तो, आप बच्चे को पुदीने की पत्तियो को पानी में उबाल कर उस पानी को छान लें, और अब उस पानी में शहद को मिलाकर उस पानी का सेवन करने से आपके बच्चे को होने वाली एसिडिटी और खट्टे डकार की समस्या से राहत मिलती है। आप चाहे तो पुदीने के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर भी बच्चे को चटा सकती है।

केले का सेवन करवाएं:-

केले का सेवन करने से भी बच्चों में होने वाली एसिडिटी की समस्या से राहत मिलती है, आप चाहते तो बच्चे को केले को मैश करवाकर उसका सेवन करवा सकते है, ऐसा करने से बच्चे का पचतंत्र सही रहता है, और बच्चे को एसिडिटी की समस्या से भी राहत मिलती है, यदि आप बच्चे को दिन में एक बार भी केले का सेवन, परंतु ऐसा केवल आप बच्चे के छह महीने के बाद ही कर सकती है, क्योंकि छह महीने तक तो माँ के दूध को ही बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार कहा गया है, इसीलिए आप बच्चे को छह महीने के बाद यदि ऐसी परेशानी हो तो केले का सेवन नियमित रूप से करवाएं। और केले का सेवन करने से बच्चे में कैल्शियम की मात्रा भी बढ़ती है।

बच्चों में होने वाली खट्टे डकार और एसिडिटी की समस्या से बचने के लिए अन्य टिप्स:-

  • यदि आप बच्चे को स्तनपान करवाती है तो आपको ऐसे आहार का बिलकुल भी सेवन नहीं करना चाहिए जो बच्चे को नुक्सान दे सकता है, आपको दसन्तुलित व् पोष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए।
  • बच्चे को एक निश्चित समय के बाद और सम्पूर्ण तरह से आहार देना चाहिए, बच्चे को हर दो घंटे के बाद दूध पिलाना चाहिए।
  • बच्चे को कभी भी जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए, नहीं तो बच्चा खाना खाने के बाद, या दूध पीने के बाद उलटी कर देता है।
  • बच्चे को दिन में कम से कम आधा घंटे उल्टा लिटाना चाहिए, इससे बच्चे की पाचन क्रिया ठीक होती है।
  • बच्चे को व्यायाम भी करवाना चाहिए, जो की आप मालिश करते समय कर सकती है, और बच्चे के पेट पर भी अच्छे से मसाज करनी चाहिए, ताकि बच्चे को पेट में गैस आदि की समस्या से भी बचाया जा सकें।
  • यदि आप बच्चे को बोतल से दूध देती है, तो बच्चे की बोतल को साफ़ सुथरा रखेने के साथ बच्चे को हमेशा ताजे दूध का सेवन करवाना चाहिए, और ठन्डे या कच्चे दूध का सेवन बच्चे के लिए नुक्सान दायक हो सकता है।
  • बच्चे को यदि एसिडिटी की समय है, तो बच्चे को ज्यादा दूध देने की बजाय बच्चे के दूध का अंतराल बढ़ा दें।
  • बच्चे के लिए आप चाहे तो पुदीने के रस का शहद के साथ इस्तेमाल भी कर सकती है।
  • बच्चा यदि दूध पीते समय उलटी जैसा महसूस करता है तो बच्चे को दूध नहीं पिलाना चाहिए।
  • माँ को भी अपने आहार में संतुलित व् पोष्टिक आहार को सम्मिलत करना चाहिए।

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जब प्रेगनेंसी में भूख नहीं लगे तो ये करें

प्रेगनेंसी में हमेशा महिला को सलाह दी जाती है के उन्हें दो के लिए भोजन खाना है। पर क्या हो अगर एक गर्भवती महिला दो की जगह एक का भी भोजन सहीं से ना खा पाए। बहुत सी महिलाओं के साथ ऐसा होता है के उन्हें गर्भावस्था में भूख ही लगना बंद हो जाती है। प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में तो भूख का कम लगना बहुत सामान्य बात है परन्तु भूख बिलकुल भी ना लगना एक गंभीर बात हो सकती है। 

गर्भावस्था में हार्मोन्स में बदलाव के कारण भूख नहीं लगती। शुरूआती प्रेगनेंसी में हार्मोन्स में बहुत तेजी से बदलाव होता है जिसके कारण जी घबराना, मचलना, उलटी आदि जैसी समस्याएं लगी रहती है। इसीलिए गर्भावस्था के शुरू के तीन महीनों में भूख नहीं लगती है।

प्रेगनेंसी के आगे के दिनों में जैसे जैसे गर्भवती महिला के पेट का आकर बढ़ने लगता है वैसे ही पाचन क्रिया पर दबाव बढ़ने लगता है। भोजन सहीं से ना पचने के कारण और हैवीनेस होने से भूख का लगना खुद पर खुद ही बंद हो जाता है।

भूख कम लगने से गर्भवती महिलाये बहुत कम ही मात्रा में खा पाती है। ऐसे में उन्हें बहुत सी मानसिक और शारीरिक परेशानियों से गुजरना पड़ता है। पूर्ण भोजन ना खाने से माँ और शिशु को जरुरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। जिससे जन्म के समय शिशु शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर होता है।

आज हम आपको बताएंगे की गर्भवती महिला को भूख ना लगने के पर क्या तरिके अपनाने चाहिए।

ज्यादा से ज्यादा पेय प्रदार्थो का प्रयोग करें। रोजाना अपनी रूटीन में एक दिन में कम से कम 8 से 10 ग्लास तरल जरूर पिए। तरल प्रदार्थ में पानी, फलो का रस, सब्जियों का रस, सुप, छाछ और दूध को शामिल करें। हर एक से दो घंटे के अंतराल में एक एक ग्लास करके लेंगे तो भी तरल प्रदार्थ की कमी पूरी हो जाएगी। इन सभी चीजों का सेवन करने से आपको और शिशु को सभी जरुरी पोषक तत्व भी मिलेंगे। पर ध्यान रखिये तरल लेने का मतलब ये नहीं की आप बाजारी रेडीमेड चीजों का इस्तेमाल करें। घर में ही इन चीजों को पूरी साफ़ सफाई से बनाकर  प्रयोग करें। बाजार में उपलब्ध प्रदार्थो में कीटाणु और जर्म्स हो सकते है जो आपके और शिशु के लिए हानिकारक हो सकते है। साथ ही बाजार के पैक्ड जूस और सुप केमिकल्स बेस्ड होते है। इनके इस्तेमाल से कोई भी आवश्यक पोषक तत्व मिलना तो दूर रहा पर हाँ आपके स्वास्थ्य को कोई नुकसान अवश्य हो सकता है।  
एक समय में ज्यादा मात्रा में भोजन ना करीये। एक ही बार में ज्यादा मात्रा में भोजन खाने से आपको हैवीनेस भी हो सकती है। और साथ ही गर्भवस्था के दौरान हमारी पाचन शक्ति भी कमजोर हो जाती है जिससे एक साथ ज्यादा भोजन पचने में परेशानी हो सकती है। इसीलिए जरुरी है के कुछ कुछ समय के अंतराल पर थोड़ी थोड़ी मात्रा में भोजन खाते रहे। 
अपने भोजन में फ़ास्ट फ़ूड को शामिल ना करे। हो सके तो घर पर बना ही भोजन खाये। और हैवी प्रदार्थो के सेवन की बजाय हल्के हल्के प्रदार्थो का सेवन करें। इससे भोजन को पचने में आसानी भी रहेगी। भोजन में सलाद और ताजे फल को जरूर शामिल करें। 
जिन प्रदार्थो में तेज महक हो और मिर्च मसालों का प्रयोग किया जाए उनका सेवन ना करें। हो सके तो बॉयल फ़ूड का ही सेवन करें।  
हल्के फुल्की एक्सरसाइज और योगा करें। योग करने से आपको भूख भी लगेगी और आप एक्टिव भी रहेंगे। पर ध्यान रखे ज्यादा भरी एक्सरसाइज ना करे। 
कभी कभी अपनी पसंद का भोजन भी खाये। गर्भावस्था में बहुत सारी चीजों की क्रेविंग होती है। हर बार तो नहीं पर अपनी सेहत को ध्यान रखते हुए कभी कभी अपनी पसंद के हिसाब से भी खा सकते है।

इन सभी चीजों के बावजूद भी अगर आपको भूख नहीं लगती तो अपने डॉक्टरों से जरूर सलाह ले। गर्भावस्था में लम्बे समय के लिए कुछ ना खाना आपके और शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है।  

प्रेगनेंसी में जिन महिलाओं को घबराहट होती है उन्हें यह करना चाहिए

प्रेगनेंसी गर्भवती महिला के लिए बहुत ही सुखद अहसास होता है लेकिन साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। और ऐसा भी जरुरी नहीं होता है की सभी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान एक ही तरह की परेशानियों का सामना करती है, बल्कि यह महिला के स्वास्थ्य, बॉडी में हार्मोनल बदलाव, महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपना कितना ध्यान रखती है उस पर निर्भर करता है।

लेकिन फिर भी अधिकतर गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान घबराहट महसूस होना आम बात होती है। खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती हैं। उन्हें यह दिक्कत ज्यादा हो सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को घबराहट महसूस होने के क्या कारण होते हैं और किस तरह महिला इस समस्या से निजता पा सकती है।

प्रेगनेंसी में घबराहट महसूस होने के कारण

गर्भवती महिला को घबराहट महसूस होने का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि महिला को कई कारणों की वजह से घबराहट महसूस हो सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की महिला को घबराहट होने के क्या कारण होते हैं।

डर

प्रेगनेंसी के दौरान महिला बहुत सी बातों को लेकर डरती रहती है जिसके कारण महिला को हमेशा घबराहट महसूस होती है। जैसे की प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भपात का डर, शिशु की पांच मिनट तक हलचल महसूस न होने पर बच्चे को लेकर डर, प्रेगनेंसी के दौरान बच्चे के विकास का डर, डिलीवरी का समय पास आने पर डर, आदि।

हार्मोनल बदलाव

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में तेजी से हार्मोनल बदलाव महसूस होते हैं जिसके कारण महिला को बहुत सी शारीरिक व् मानसिक रूप से परेशानी भी होती होती है और इस कारण महिला को घबराहट महसूस होती है।

बच्चे की हलचल

बेबी की मूवमेंट प्रेग्नेंट महिला के लिए प्रेगनेंसी का सबसे सुखद अनुभव होता है लेकिन कई बार ऐसा होता है की महिला काम कर रही होती है तो उसे शिशु की हलचल उतनी महसूस नहीं होती है जितनी की आराम से बैठने या लेटने पर होती है। इसके कारण भी महिला बहुत जल्दी घबरा जाती है।

बच्चे का विकास

पूरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला केवल एक बात की लेकर जरूर चिंता करती है की गर्भ में बच्चे का विकास अच्छे से हो रहा है या नहीं। यदि कभी कोई भी परेशानी महिला को होती है तो महिला इस बात को लेकर घबरा जाती है की कहीं बच्चे को तो कुछ नहीं हो गया है।

डिलीवरी को लेकर डर

जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है तो महिला की डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन, बच्चे को कोई दिक्कत तो नहीं होगी, आदि को लेकर भी महिला बहुत ज्यादा घबराती है।

लोगो की बातें सुनकर घबराहट

जैसे ही महिला की प्रेगनेंसी की खबर दोस्त रिश्तेदार, पड़ोसियों आदि को मिलती है वैसे ही हर कोई महिला को अपनी अपनी राय देता है व् अपनी प्रेगनेंसी के एक्सपीरियंस को शेयर करता है। यह एक्सपीरियंस अच्छे भी हो सकते हैं साथ ही कुछ महिला को डरा भी सकते हैं। ऐसे में यदि महिला को कोई डरा देने वाली बात पता चलती है तो इसे लेकर भी महिला घबराहट महसूस करती है।

प्रेगनेंसी के दौरान महिला की घबराहट दूर करने के टिप्स

  • प्रेगनेंसी के हर मूवमेंट को करें एन्जॉय नकारात्मक विचारों को मन में न लाएं ऐसा करने से महिला को घबराहट को दूर करने में मदद मिलती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं इन्हे लेकर घबराएं नहीं, बल्कि भरपूर आराम करें ताकि आपको हार्मोनल बदलाव के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।
  • गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानियों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। जब भी कोई परेशानी हो उससे बचने का तरीका ढूंढें या फिर परेशानी ज्यादा महसूस होने पर डॉक्टर से मिलें।
  • बच्चे की हलचल महसूस न होने पर आराम से बैठें और बच्चे की मूवमेंट को देखें, उसके बाद कुछ करें।
  • प्रेगनेंसी के दौरान खान पान, डॉक्टर द्वारा बताए मल्टीविटामिन का सेवन समय से करें ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको और आपके बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।
  • थोड़ी देर योगासन व् मैडिटेशन जरूर करें इससे महिला को मानसिक रूप से रिलैक्स रहने में मदद मिलती है जिससे महिला को घबराहट से निजात मिलता है।
  • लोगो की बातों को सुनकर डरें नहीं क्योंकि ऐसा जरुरी नहीं है की जैसा उनके साथ हुआ है वैसा आपके साथ भी हो। आपकी और उनकी प्रेगनेंसी में फ़र्क़ होता है।
  • डिलीवरी को लेकर डरें नहीं क्योंकि इसका फैसला आप नहीं ले सकते यह आपको डिलीवरी का सही समय आने पर पता चल जायेगा।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान महसूस होने वाली घबराहट होने के कारण व् इस परेशानी से बचने के आसान टिप्स, तो यदि आप भी माँ बनने वाली है तो प्रेगनेंसी के दौरान घबराने की बजाय जिंदगी के इस बेहतरीन पल को खूब एन्जॉय करे।