Home Blog Page 104

प्रेगनेंसी में प्याज़ खाने से क्या होता है?

गर्भावस्था में प्याज

प्याज का इस्तेमाल सब्जियों के स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है। और केवल सब्जी में ही नहीं बल्कि सलाद के रूप में कच्चा भी इसका सेवन किया जाता है। प्याज कई प्रकार के होते हैं जैसे की लाल प्याज, हरी प्याज, लीक प्याज़, आदि। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान इसके सेवन को लेकर महिला में मन में सवाल आ सकता है की प्रेगनेंसी के दौरान प्याज़ का सेवन करना चाहिए या नहीं? तो इसका जवाब है जी हाँ, यदि गर्भवती महिला की यदि प्रेगनेंसी के दौरान प्याज खाने की इच्छा होती है तो महिला इसका सेवन कर सकती है। क्योंकि इसका सेवन गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद होता है। लेकिन जिन महिलाओं को प्याज खाने से एलर्जी होती है, या जो महिलायें सांस से सम्बंधित समस्या से परेशान होती है। उन्हें प्याज़ का सेवन करने से प्रेगनेंसी में बचना चाहिए। साथ पर्याप्त मात्रा में इसका सेवन करना चाहिए। क्योंकि जरुरत से ज्यादा प्याज का सेवन करने से गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी में प्याज खाने के फायदे

जरुरत के अनुसार गर्भवती महिला यदि प्याज का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी बहुत से फायदे मिलते हैं। जो गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में भी मदद करते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को प्याज का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

रक्तचाप को नियंत्रित करता है

फाइटोन्यूट्रिएंट्स से भरपूर कच्चे प्याज का सेवन करने से रक्तचाप यानी ब्लड प्रैशर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इसके अलावा प्रीक्लेम्पसिया, समयपूर्व प्रसव जैसी परेशानी जो गर्भवती महिला को ब्लड प्रैशर बढ़ने के कारण हो सकती उनसे सुरक्षित रखने में भी गर्भवती महिला की मदद करता है।

कब्ज़

ज्यादातर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ की समस्या से परेशान हो सकती है। ऐसे में इस समस्या से बचने के लिए गर्भवती महिला कच्चे प्याज को अपनी डाइट में शामिल कर सकती है। क्योंकि कच्चे प्याज में भरपूर मात्रा में फाइबर मौजूद होता है जो कब्ज़ की समस्या को दूर करने और पाचन क्रिया को बेहतर रखने में मदद करता है।

विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद करता है

प्रेग्नेंट महिला की बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थ गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला कच्चे प्याज का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करती है तो इससे प्याज में मौजूद सिस्टीन और मेथियोनीन जैसे एमिनो एसिड आपके शरीर से विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद करते हैं।

इम्युनिटी

विटामिन सी से भरपूर कच्चे प्याज को यदि गर्भवती यदि अपनी डाइट में शामिल करती है तो विटामिन जो की एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट गर्भवती महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है। जिससे गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

गेस्टेशनल डाइबिटीज़

कुछ गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान गेस्टेशनल डाइबिटीज़ की समस्या से भी ग्रस्त हो सकती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला अपनी डाइट में कच्चे प्याज का सेवन करती है तो इससे ब्लड में शुगर लेवल को कण्ट्रोल में रखने में मदद मिलती है। और ब्लड शुगर लेवल कण्ट्रोल रहने के कारण गर्भवती महिला को गेस्टेशनल डाइबिटीज़ से बचे रहने में मदद मिलती है।

गले में खराश

यदि प्रेग्नेंट महिला को गले में खराश या दर्द की समस्या होती है तो थोड़ा सा प्याज का रस व् शहद मिलाकर लेने से गर्भवती महिला को गले में खराश के कारण होने वाली परेशानी से भी निजात पाने में मदद मिलती है।

वजन

वसा व् कैलोरी की मात्रा प्याज में कम होती है जिससे प्रेग्नेंट महिला के वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। और गर्भवती महिला का वजन अधिक होने के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

मसूड़ों की समस्या

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला को मसूड़ों में दर्द, मसूड़ों से खून आना, मुँह से स्मेल आने जैसी परेशानी हो सकती है। लेकिन कच्चे प्याज का सेवन करने से महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में प्याज़ खाने के नुकसान

  • यदि गर्भवती महिला जरुरत से ज्यादा प्याज का सेवन करती है तो इसके कारण गर्भवती महिला को परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में अधिक प्याज का सेवन करने से कौन से नुकसान होते हैं।
  • अधिक प्याज का सेवन करने से गर्भवती महिला को सीने में जलन की अधिक समस्या के कारण परेशान होना पड़ सकता है।
  • उल्टी, दस्त यानी डायरिया जैसी परेशानी का सामना भी गर्भवती महिला को अधिक मात्रा में प्याज का सेवन करने से पड़ सकता है।
  • प्याज का अधिक सेवन करने के कारण गर्भवती महिला को एलर्जी, सांस लेने में परेशानी जैसी समस्या भी हो सकती है।

तो यह हैं कुछ फायदे और नुकसान जो प्रेग्नेंट महिला को प्याज का सेवन करने से हो सकते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को पर्याप्त मात्रा में ही प्याज का सेवन करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को प्याज का सेवन करने के बेमिसाल फायदे मिल सके।

नींद में बड़बड़ाने का क्या मतलब होता है?

नींद में बड़बड़ाना, जानें कारण और इलाज, लोग नींद में क्यों बात करते है, नींद में बोलना, नींद में बड़बड़ाना भी होती हैं एक बीमारी, नींद में बड़बड़ाने की आदत, बन सकती है मुसीबत, नींद की प्रत्येक बीमारी, नींद में है बड़बड़ाने की आदत से छुटकारा, जानिए सोते वक्त बोलने की आदत, नींद में बड़बड़ाने की आदत किसे होती है, लोग नींद में क्यों बड़बड़ाते है, नींद में बड़बड़ाना मुसीबत या बिमारी, नींद में बड़बड़ाने की आदत क्यों होती है, नींद में बोलना या बड़बड़ाना 

रात की नींद सभी के लिए बेहद जरुरी होती है। क्योंकि दिन भर की थकवाट के बाद एक वही समय होता है जब आप आराम करके अपने शरीर को रिलैक्स करते है। लेकिन बहुत से लोग अपनी इस नींद का पूर्ण फायदा नहीं उठा पाते। क्योंकि उन्हें या तो नींद में डरावने सपने आने लगते है या वे नींद में चौंक जाते है। लेकिन इसके अलावा भी कुछ है जिसकी वजह से अक्सर लोगों की नींद खराब होती है।

और वो है नींद में बड़बड़ाना। बहुत से लोगों को नींद में बड़बड़ाने की आदत होती है जिसके कारण अक्सर उनकी नींद टूट जाती है और साथ ही कमरे में मौजूद अन्य लोगों को भी परेशानी होती है। अक्सर लोग इस समस्या से परेशान रहते है। कुछ की माने तो यह सपना होता है जो उन्हें सच लगता है जबकि कुछ कहते है की हमें गंभीर बिमारी है।

बता दें, नींद में बड़बड़ाना कोई बिमारी नहीं है बल्कि एक आम समस्या है जो किसी के साथ भी हो सकती है। इसलिए आज हम आपको नींद में बड़बड़ाने से जुडी कुछ महत्वपूर्ण बातें और उपाय बताने जा रहे है। जिनके बाद भी इस समस्या के बारे में पूर्ण रूप से जान जाएंगे।

नींद में ही क्यों बड़बड़ाते है लोग?

नींद में बातें करना या बोलने को ही बड़बड़ाना कहते है क्योंकि जब आप बड़बड़ाते है तो आपके वाक्य आधे अधूरे और स्पष्ट नहीं होते। यह एक प्रकार का पैरासोम्निया है जिसका अर्थ है सोते समय स्वाभाविक व्यवहार करना। लेकिन साइंस की भाषा में इसे बिमारी नहीं कहा जा सकता। रात में बड़बड़ाते हुए आप कभी कभी अपने आप से ही बातें करने लगते है ऐसे में सुनने वाले को थोड़ा भद्दा लग सकता है। बता दें, नींद में बड़बड़ाने वाले लोग एक समय में 30 सेकंड से अधिक देर तक नहीं बोलते।

कौन बड़बड़ाते है नींद में?

10 वर्ष से छोटी आयु के 50 % से अधिक बच्चे निंग में बड़बड़ाकर अपनी बात पूरी करते है। इसी प्रकार 5 फीसदी बड़े भी नींद में बड़बड़ाते है। कई बार कारण होता है की जो लोग बातें करते करते सो जाते है, वे उसी बात को करने करने के लिए नींद में बोलने लगते है। ये केवल एक रात या कई बार हो सकता है। एक अध्यन के अनुसार हर 10 में से एक बच्चा सप्ताह में कई बार नींद में बड़बड़ाते है। विशेषज्ञों की माने तो यह अनुवांशिक भी हो सकता है।

क्या है नींद में बड़बड़ाने के कारण?

कई बार बुरे और डरावने सपने भी नींद में बड़बड़ाने का कारण होते है। क्योंकि कई बार जिस बारे में हम सोच रहे होते है वही चीज हमारे सपनो में दिखने लगती है। हालांकि इस बात की पुष्टि डॉक्टर्स नहीं करते है। नींद में बड़बड़ाने से कोई नुकसान तो नहीं होता लेकिन नींद में बड़बड़ाना किसी विकार या स्वास्थ्य संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है।

नींद में बड़बड़ाने का इलाज :-

आमतौर पर इस समस्या का कोई इलाज आवश्यक नहीं होता। लेकिन अगर आपको आरईएम या नींद में बहुत अधिक बातें करने की समस्या है तो आप किसी साइको थेरेपिस्ट से मिलें। क्योंकि कई बार नींद में बड़बड़ाने के कारण नींद विकार, दुर्बलता, चिंता या तनाव हो सकता है।

इन डॉक्टर्स से मिलकर इस समस्या को कम किया जा सकता है। इसके अलावा आप अपने साथी से कहें की जब भी आप नींद में बड़बड़ायें तो वह आपको तुरंत जगा दें। इससे आपको नींद आने में मदद मिलेगी।

नींद में बड़बड़ाना कम करने के उपाय :-

ऐसे तो इसके लिए कोई ख़ास इलाज नहीं है लेकिन आप निम्नलिखित के द्वारा इस समस्या से छुटकारा पा सकते है :

  • तनाव कम लेकर।
  • योग करके मन को शांत करें।
  • अपनी स्लीप डायरी बनाए।
  • उसमे दो सप्ताह का टेबल लिखे। जैसे आप कितने बजे सोने गए, जब सोये, कब जागे, कब बड़बड़ाये, और कौन सी दवा खाई थी आदि नोट करें।
  • अपने डॉक्टर को सभी बातें खुलकर बताएं, कुछ छुपाएं नहीं।
  • इसके लिए आप अपने दोस्तों या घरवालों की भी मदद ले सकते है।
  • रात को सोते समय चाय, कॉफ़ी आदि के सेवन से बचें।
  • रात को कभी भी डरावनी मूवी या सीरियल नहीं देखें।
  • सोते समय अपने मन में अच्छे विचार लाएं।
  • मन में किसी प्रकार की चिंता या तनाव लेकर नहीं सोएं।
  • और खास बात रोजाना सोने से पहले अपने हाथ, मुंह और पैर ठंडे पानी से धोकर सोएं।
  • इससे अच्छी नींद आने में मदद मिलेगी और आप चैन से सो पाएंगे।

गर्मियों में नन्हे शिशु को गर्मी लगने से ऐसे बचाएं

गर्मियों में शिशु की देखभाल

गर्मियों के मौसम में लगातार बढ़ता तापमान और चिलचिलाती गर्मी में नन्हे शिशु की केयर कर पाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। जरा सी लापरवाही शिशु के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। ऐसे में महिलाओं को बहुत ही सावधानी से अपने नवजात शिशु की केयर करनी चाहिए। गर्मियों में सबसे ज्यादा परेशानी लू लगने की होती है। जिसके कारण उलटी, दस्त, पेट दर्द जैसी समस्याएं होने लगती है। जो शिशु के लिए ठीक नहीं। आज हम आपको कुछ खास टिप्स दे रहे है जिनकी मदद से गर्मियों में नन्हे शिशु को गर्मी लगने से बचा सकती है।

शिशु को गर्मी लगने से कैसे बचाएं?

अपने शिशु को गर्मियों में लू लगने की समस्या से बचाने के लिए आपको बहुत सी बातों का ख्याल रखना होगा।

सही कपड़ें चुनें

  • गर्मियों में शिशु के लिए ऐसे कपडे चुनें जो आरामदायक हो। आप शिशु के लिए कॉटन के कपडे ले सकती हैं। ये शिशु के शरीर से पसीना सोख लेंगे, जिससे घमौरियां नहीं होंगी।
  • घर से बाहर जाते समय शिशु को हलके रंग के कपडे पहनाएं, गहरे रंगों का इस्तेमाल नहीं करें। हलके शरीर ठंडक देने का काम करते हैं जबकि डार्क रंग गर्मी सोखते हैं।
  • बाहर जाते समय शिशु को पुरे ढके हुए कपडे पहनाएं। जिसमे शिशु के हाथ-पैर पूरी तरह कवर हो जाएं। इससे धूप की सीधी रौशनी शिशु पर नहीं पड़ेगी।
  • अगर आपका शिशु थोड़ा बड़ा है तो आप उसके लिए टोपी लें सकती हैं। ध्यान रहे टोपी, चौड़े रिम वाली हो जिससे सिर, गर्दन और चेहरे को धूप से बचाया जा सके।
  • इलास्टिक वाली हैट नहीं खरीदें। ये शिशु की त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती है।

समय का ध्यान रखें

  • सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक गर्मी सबसे ज्यादा होती है। अगर आवश्यक नहीं है तो उस समय घर से बाहर नहीं जाएं। सुबह जल्दी या शाम के समय सैर करने जा सकती हैं। इस समय ज्यादा गर्मी नहीं होती और ठंडी हवाएं भी चलती हैं।
  • अगर आवश्यक है तो शिशु को प्रैम या बेबी कैरियर में लिटाएं। इससे शिशु को सीधी धूप नहीं लगेगी।
  • गर्मी न लगे इसके लिए प्रैम या बेबी कैरियर में सूती चादर बिछा दें। ये शिशु को प्रैम के सिंथेटिक कपड़ें की गर्मी से बचाने में मदद करेगी और शिशु का पसीना भी सोख लेगी। जिससे शिशु को गर्मी नहीं लगेगी।

शिशु को आराम दें

  • अगर संभव हो तो शिशु को दिन के समय कुछ देर बिना लंगोट या डायपर के रहने दें। क्यूंकि लंगोट या डायपर से शिशु की कमर और जांघो पर निशान पड़ जाते हैं और वहां पसीना भी ज्यादा आता है। अगर आप कुछ देर बिना लंगोट के रखेंगी तो शिशु को ठंडक मिलेगी।
  • शिशु को उस समय बिना लंगोट के रखें जब वह लगा हुआ हो और बाथरूम आदि न करें। इससे आपका बेड भी गन्दा नहीं होगा और शिशु भी अच्छा फील करेगा।
  • आप शिशु को हमेशा सूती अंडरवियर पहनाकर सूती चादर पर लिटा दें। चादर के नीचे एक प्लास्टिक की पन्नी भी रख दें ताकि अगर शिशु गीला करें तो पूरा बिस्तर खराब न हो।

शिशु को ठंडक दें

  • एक व्यस्क की तुलना में शिशु को अधिक पानी की आवश्यकता होती है। क्यूंकि बच्चों के सभी अंग बहुत तेजी से काम करते हैं। ऐसे में आपको शिशु को हाइड्रेट रखना जरूर है।
  • अगर आपका शिशु केवल स्तनपान करता है तो उसे समय-समय पर दूध पिलाती रहें। अगर शिशु 6 माह से बड़ा है तो आप ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ दें। साथ-साथ पानी भी पिलाती रहें। ताकि पानी की कमी न हो।
  • अगर आपका शिशु डिब्बे वाला दूध पीता है तो गर्मियों में दूध को अच्छे से उबालकर ठंडा किया दूध दें।
  • ठोस आहार खाने वाले शिशु को फलों का रस भी पिलायें। ये शिशु के शरीर में पानी की कमी नहीं होने देंगे।

शिशु का आहार

  • अगर आपका शिशु 6 माह से बड़ा है तो उसे कभी भी सड़क किनारे मिलने वाली आइसक्रीम, बर्फ का गोला, पानी या फलों का रस नहीं पिलायें। हो सकता है ये ताजा ना हो और शिशु को बीमार कर दे। इसलिए ध्यान रखें।
  • शिशु को जब भी कहीं बाहर लेकर जाएं तो अपने साथ पानी और खाना लेकर जाएं। बाहर से नहीं खरीदें। शिशु का खाना अच्छी क्वालिटी के फ़ूड ग्रेड बर्तन में रखें।
  • गर्मियों के दिनों में शिशु को खाना खिलाने से पहले स्वयं भोजन को चख लें की खाना खराब तो नहीं हुआ है? क्यूंकि गर्मियों में खाना बहुत जल्दी खराब हो जाता है। अगर आप शिशु को स्तनपान करा रही हैं तो भी आप स्वस्थ और ताजा आहार लें। खराब खाना खाने से शिशु को भी परेशानी हो सकती है।

मालिश के बाद ये करें

  • शिशु की हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए मालिश करना बहुत जरुरी होता है। लेकिन गर्मियों के दिनों में ज्यादा मालिश करने से शिशु के शरीर पर तेल की परत बन जाती है जिससे शिशु को परेशानी हो सकती है।
  • इस परेशानी से बचने के लिए ध्यान रखें की मालिश के बाद नहलाते समय शिशु के शरीर से पूरा तेल साफ़ हो जाना चाहिए। गाढ़े तेल की बजाए हल्के तेल का इस्तेमाल करें। ये आसानी से त्वचा में समा जाता है और साफ़ हो जाता है।

पाउडर लगाते समय

  • गर्मियों के दिनों में शिशु को पसीने से बचाने के लिए अच्छी क्वालिटी का बेबी टैल्कम पाउडर लगाएं। ये शिशु को सूखा रखने में मदद करेगा।
  • पाउडर हमेशा अपने हाथों में लेकर हलके हाथों से शिशु के शरीर पर लगाएं। कभी भी सीधे डिब्बे या पफ से शिशु के शरीर पर पाउडर नहीं लगाएं।
  • इस तरह से पाउडर लगाने पर शिशु पाउडर को साँस लेते समय अंदर ले सकता है जिसके कारण शिशु को साँस लेने में परेशानी हो सकती है। इसीलिए अपने हाथों में लेकर धीरे-धीरे लगाएं।
  • जब शिशु की गर्दन और आस-पास के हिस्सों में पाउडर लगाएं तो खास ध्यान रखें की पाउडर इधर-उधर न गिरे।

शिशु को पानी में खेलने दें

  • गर्मियों के मौसम में शिशु को पानी से खेलना बहुत अच्छा लगता है। पानी की ठंडक उनके शरीर को आराम देती है।
  • आप अपने शिशु को थोड़े से पानी में खिलौने डालकर बाथटब या हवा वाले बेबी पूल में बिठा सकती हैं। इससे उन्हें अच्छा लगेगा और गर्मी का एहसास नहीं होगा।
  • बाथटब आदि में बैठने के बाद कभी भी शिशु को अकेला नहीं छोड़ें। जरा सी लापरवाही बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। इसीलिए हमेशा शिशु के साथ रहें।

मच्छरों से बचाएं

  • गर्मियों में मच्छर बहुत अधिक मात्रा में होते हैं। जो बहुत सी बीमारियां फैलाते हैं। आपको शिशु को इन मच्छरों से बचाना चाहिए।
  • आप शिशु को हमेशा मच्छर दानी में रखें। खासकर शाम और रात को सोते समय।
  • मच्छर भगाने के लिए आप कोइल या मॉस्किटो किलिंग मशीन का इस्तेमाल कर सकती हैं।
  • अगर संभव हो तो शाम होने से पहले घर के जाली वाले खिड़की दरवाजें बंद कर लें और दरवाजों के नीचे खुली जगह पर “डोर ब्रश” लगवा लें। इससे मच्छर घर में प्रवेश नहीं कर पाएंगे।
  • अगर घर में कूलर है तो नियमित रूप से उसकी साफ़-सफाई का ध्यान रखें और पानी भी बदलती रहें।
  • अपने घर के आसपास ज्यादा गंदगी इकठ्ठा न होने दें। घर के बाहर पानी जमा न होने दें। इससे मच्छर पैदा नहीं होंगे।
  • अगर किसी अपार्टमेंट आदि में रहती हैं और वहां साफ-सफाई सही तरीके से नहीं हो रही है तो अपने सोसाइटी प्राधिकरण से बात करें और सफाई करवाएं।

तो दोस्तों, ये कुछ जरूरी टिप्स हैं जिन्हे फॉलो करके आप अपने शिशु को गर्मी लगने / लू लगने की समस्या से बचा सकती हैं। इसके साथ-साथ आप शिशु की सेहत का भी ध्यान रखें। अगर शिशु की तबियत खराब है तो घरेलू उपायों की बजाए डॉक्टर से मिलें। क्यूंकि गर्मी के दिनों में शिशु की तबियत खराब रहना ठीक नहीं।

प्रेगनेंसी में 1 से 9 महीने तक क्या-क्या सावधानियां रखें

प्रेगनेंसी महिला के लिए एक बहुत ही सुखद अहसास होने के साथ बहुत ख़ुशी का पल भी होता है। लेकिन साथ ही इस दौरान गर्भवती महिला में शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक रूप से बहुत से बदलाव आ सकते हैं। इसमें घबराने की बात नहीं होती है क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा होना आम बात होती है। लेकिन इस बदलाव के कारण गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु पर किसी तरह का बुरा असर न पड़े इसके लिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना दुगुना ध्यान रखना पड़ता है। और हर काम करने से पहले इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है, की उसे करने से शिशु को कोई नुकसान न हो। फिर चाहे वो आपके खान पान से जुड़ा हो या किसी अन्य काम से, क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान बरती गई थोड़ी सी लापरवाही गर्भवती महिला और शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान बरतें यह सावधानियां

गर्भावस्था के दौरान महिला अकेली नहीं होती है बल्कि गर्भ में पल रही नन्ही सी जान भी पूरी तरह से महिला पर ही निर्भर करती है। ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने सावधानी बरतने की जरुरत होती है ताकि गर्भवती महिला और शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को पूरे नौ महीने तक कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए।

खान पान

गर्भवती महिला को खाने पीने की चीजों में सावधानी बरतना जरुरी होता है जैसे की महिला को पता होना चाहिए की कौन सी चीज का सेवन गर्भावस्था के दौरान नहीं करना चाहिए, कितनी मात्रा में सेवन करना चाहिए, अच्छे से धोने के बाद और ताजे फलों व् सब्जियों को खाने में प्रयोग करना चाहिए, बासी व् ठन्डे भोजन से परहेज करना चाहिए, जंक फ़ूड व् ज्यादा मसाले वाले भोजन के सेवन से बचना चाहिए, आदि।

फलों के जूस का सेवन

अब आप यह सोच रहे होंगे की हम फलों का रस पीने में सावधानी बरतने की सलाह क्यों दे रहे हैं क्योंकि फलों का सेवन तो प्रेगनेंसी के दौरान अच्छा होता है। लेकिन शायद आप यह नहीं जानते हैं फलों का रस निकलने के बाद उसमे शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसे में यदि महिला अधिक जूस का सेवन करती है तो इससे महिला का वजन बढ़ने के साथ ब्लड में शुगर लेवल बढ़ने का भी खतरा रहता है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को गेस्टेशनल शुगर जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

कच्चे अंडे व् नॉन वेज

गर्भवती महिला को इस बात की भी सावधानी बरतनी चाहिए की जब भी वह अंडे या नॉन वेज का सेवन करती है तो इस बात का ध्यान रखे की वो अच्छे से पका हुआ हो। क्योंकि कच्चे अंडे या अच्छे से न पका हुआ नॉन वेज खाने के कारण महिला को पेट सम्बंधित समस्या का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही मछली का सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखें की मछली में मर्क्युरी की मात्रा मौजूद न हो।

गंध का ध्यान

गर्भवती महिला को उन केमिकल का प्रयोग नहीं करना चाहिए जिनकी गंध तेज हो, जैसे की कपडे धोने में इस्तेमाल किया जाने वाला सामान, पोछा लगाने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाला केमिकल, यदि कहीं पेंट आदि हो रहा है तो, आदि। क्योंकि उसके कारण जब आप सांस लेते हैं तो उस केमिकल का असर बॉडी में फ़ैल सकता है। जिसके कारण गर्भवती महिला को इन्फेक्शन जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे शिशु को भी खतरा हो सकता है। और यदि आप इनका इस्तेमाल करती है तो हाथों में ग्लव्स और मुँह पर मास्क लगाने के बाद ही इनका इस्तेमाल करना चाहिए।

स्किन के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले प्रोडक्ट्स

प्रेगनेंसी के दौरान आपको अपनी स्किन केयर प्रोडक्ट्स का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि इन्हे बनाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। और जब आप इन्हे अपनी स्किन पर लगाती है तो आपकी स्किन इसे अवशोषित कर लेती है ऐसे में गर्भ में पल रहे शिशु तक इस केमिकल का प्रभाव पहुँच सकता है। जिससे शिशु को नुकसान पहुँच सकता है, ऐसे में शिशु के बेहतर विकास में लिए महिला को स्किन केयर प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए।

गरम पानी से नहाना

प्रेग्नेंट महिला को गरम पानी से नहाने से बचना चाहिए क्योंकि यदि महिला गरम पानी से नहाती है तो इसके कारण बॉडी का तापमान बढ़ सकता है, महिला का ब्लड प्रेशर लौ हो सकता है, आदि। और प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में यदि आप ऐसा करती है तो बॉडी का तापमान बढ़ने के कारण गर्भपात तक होने का खतरा रहता है। ऐसे में महिला चाहे तो गुनगुने पानी से नहा सकती है लेकिन पानी का तापमान अधिक नहीं होना चाहिए, और वो भी ठंड के मौसम में, गर्मी से गुनगुने पानी नहाने से भी गर्भवती महिला को बचना चाहिए।

भारी सामान उठाना

गर्भवस्था के दौरान महिला को भारी सामान को उठाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इसके कारण पेट पर जोर पड़ता है जिसके कारण महिला और शिशु दोनों को परेशानी हो सकती है।

पेट के बल काम

गर्भवती महिला को पेट पर जोर पड़ने वाले काम को करने से बचना चाहिए यहां तक की झुककर भी किसी काम को नहीं करना चाहिए। और किचन में काम करते हुए पेट के बल खड़े होकर काम नहीं करना चाहिए।

यात्रा

प्रेगनेंसी के दौरान चाहे छोटा सफर हो या लम्बा गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि सफर के दौरान झटका अदि लगने का खतरा रहता है, साथ ही महिला को बहुत देर तक एक ही पोजीशन में बैठने के कारण परेशानी भी हो सकती है। ऐसे में शिशु और महिला दोनों को स्वस्थ रहने के लिए गर्भवती महिला को सफर करने से बचना चाहिए।

ज्यादा देर तक एक जगह खड़े रहना

प्रेग्नेंट महिला को बहुत देर तक न तो एक ही पोजीशन में बैठना चाहिए, न खड़े होना चाहिए, न ही सोना चाहिए, क्योंकि यह सब महिला के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं, इसके अलावा गर्भवती महिला को ज्यादा तेजी से चलने और सीढ़ियां चढ़ने से भी बचना चाहिए।

तनाव

गर्भवती महिला को तनाव लेने से भी बचना चाहिए क्योंकि प्रेग्नेंट महिला यदि किसी चीज को लेकर मानसिक रूप से परेशान रहती है। तो इससे न केवल गर्भवती महिला की परेशानियां बढ़ती है बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु पर भी असर पड़ सकता है।

नशा

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला महिला को न तो किसी तरह का नशा करना चाहिए और न ही उस जगह पर बैठना चाहिए जहां कोई धूम्रपान कर रहा हो या अल्कोहल का सेवन कर रहा हो। क्योंकि इससे शिशु के विकास पर नकारात्मक असर पड़ता है।

भीड़भाड़

जहां पर बहुत ज्यादा लोग हो, प्रदूषण हो, ज्यादा शोर हो ऐसी जगह पर भी गर्भवती महिला को नहीं जाना चाहिए। क्योंकि इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु को इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है जिससे शिशु को जन्म दोष होने का खतरा रहता है।

व्यायाम

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को बिल्कुल भी व्यायाम नहीं करना चाहिए क्योंकि इस समय महिला द्वारा बरती गई लापरवाही शिशु के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। इसके अलावा दूसरी तीसरी तिमाही में महिला चाहे तो हल्का फुल्का व्यायाम शुरू कर सकती है।

पीठ के बल सोना

प्रेग्नेंट महिला को नींद के प्रति लापरवाही न करने के साथ अपने सोने की पोजीशन का भी ध्यान रखना चाहिए। न तो गर्भवती महिला को पीठ के बल सोना चाहिए और न ही पेट के बल सोना चाहिए। क्योंकि पेट के बल सोने के कारण जहां शिशु को दिक्कत हो सकती है वहीँ पीठ के बल सोने के कारण गर्भाशय का भार दूसरे अंगो पर पड़ने लगता है जिसके कारण बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है और महिला को सेहत सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

घर के पालतू जानवर का काम

प्रेग्नेंट महिला को घर में पालतू जानवर का काम करने से भी बचना चाहिए क्योंकि इसके कारण भी महिला और शिशु को इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है।

डॉक्टर से जांच

महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी दवाइयों का सेवन समय से करने के साथ सभी टेस्ट महिला को समय से करवाने चाहिए। इसके अलावा जब भी आपको डॉक्टर ने बुलाया है आपको समय से जाना चाहिए और बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए, साथ ही डॉक्टर के संपर्क में हमेशा रहना चाहिए। ताकि जब भी कोई दिक्कत हो आप डॉक्टर से राय ले सके।

तो यह हैं कुछ सावधानियां जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान एक से नौ महीने तक बरतनी चाहिए। ऐसा करने से गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में कोई भी असामान्य लक्षण महसूस होने पर उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।

बालों का टूटना गिरना और बेजान होना समस्या का समाधान

Baal jhadne se rokne ka upay, Balo ka girna rokne ke upay in hindi, Balo ka ilaj, Balo ki samasya ka samadhan, डैमेज बालों के लिए उपाय, झड़ते बालों का इलाज, गिरते बालों के उपाय, बालों का टूटना घरेलू उपाय, बालों का गिरना कैसे करें, बाल टूटने की समस्या, बालों के झड़ने की समस्या, बाल गिरने के कारण और उपाय, बेजान बालों के उपाय, बेजान बाल के घरेलू इलाज, बालों के लिए बेस्ट तेल, Hair loss remedies, Baldness remedies, Hair fall home remedies in hindi

टूटते बालों की समस्या के उपाय

आज के समय में लगभग 75 प्रतिशत लोग अपने बालों से जुडी समस्यायों से परेशान रहते हैं फिर चाहे वो पुरुष हो या महिलाएं। बालों का झड़ना, बालों का टूटना, दो मुहें बेजान बाल वर्तमान की सबसे बड़ी समस्या बन गया है। जिसके कई कारण होते हैं जैसे हमारे आस पास का प्रदूषित वातावरण, अनुवांशिकता, खान पान में कमी, तनाव या कोई बिमारी। परन्तु बहुत से लोग इस समस्या को समझ नहीं पाते और गलत उपायों का प्रयोग करने लगते हैं जो बालों को स्वस्थ करने की बजाय और अधिक बेजान बना देते हैं।

दरअसल बालों का टूटना या गिरना कोई बड़ी समस्या नहीं है, अक्सर खान पान में कमी और तनाव के चलते लोगों के बाल झड़ने लगते हैं। परंतु यदि सही तरीके से सही उपायों का इस्तेमाल किया जाए तो इस समस्या को हमेशा के लिए दूर किया जा सकता है। यहाँ हम बालों के टूटने, गिरने और बेजान होने की समस्या के उपाय बता रहे हैं। आशा है इन उपायों की मदद से आपके बालों का टूटना या झड़ना बंद हो जाएगा।

बालों का टूटना, गिरना और बेजान होने के उपाय

अगर आप भी अपने बालों से संबंधित समस्यायों से परेशान हैं तो निम्नलिखित उपायों का प्रयोग करके आप उन समस्यायों से छुटकारा पा सकते हैं।

एलोवेरा 

बालों से जुड़ी परेशानियों के लिए एलोवेरा बहुत लाभकारी होता है और यह सभी के घर में आसानी से मिल भी जाता है। प्रयोग के लिए एलोवेरा से जेल निकालकर उसे अपने बालों में रगड़ें और जड़ों की अच्छे से मसाज करें। मसाज के बाद 15 मिनट छोड़ें और बाद में ठंडे पानी से बाल धो लें। हफ्ते में 3 बार इसका प्रयोग करें।

प्याज़ का रस 

टूटते बालों की समस्या के लिए प्याज का रस बहुत लाभकारी होता है। प्रयोग के लिए एक प्याज़ को अच्छे से कस लें और उसके बाद उसका जूस निकालकर किसी बर्तन में रख लें। अब इस जूस को रुई की मदद से बालों की जड़ों से छोर तक लगाएं। 30 मिनट तक लगाएं रखें और उसके बाद सीधे पानी से बाल धो लें। बाद में शैम्पू कर लें। हफ्ते में 1 बार इस उपाय का इस्तेमाल करें।

गुड़हल का फूल 

अगर आपके आसपास या आपके घर में गुड़हल का फूल है तो आप बालों के लिए इसका भी प्रयोग कर सकते हैं। प्रयोग के लिए एक पैन में 2 कप नारियल तेल डालें और उसमे गुड़हल के 10 फूल डाल दें। जब फूल ब्राउन हो जाए तो तेल को छानलें और किसी बोतल में भर दें। रोजाना रात को इस तेल से बालों की मालिश करें। और अपने सहूलियत के अनुसार 2 या 3 दिन बाद बाल धो लें। हफ्ते में 2 से 3 बार इस उपाय का इस्तेमाल करने से बाल अच्छे हो जाएंगे और टूटेंगे नहीं।

ग्रीन टी 

ग्रीन टी के प्रयोग से बालों को लम्बा और मजबूत किया जा सकता है। इसके प्रयोग से बालों का तेजी से विकास होता है। प्रयोग के लिए एक कप गर्म पानी में 2 ग्रीन टी बैग डालें। ठंडा होने तक बैग को ऐसे ही रहने दें। इसके बाद ग्रीन टी बैग को निकालें और उस पानी से बालों को धोएं। धोते समय पानी से जड़ों की मालिश भी करें। इसके बाद बालों में शैम्पू कर लें। हफ्ते में 2 बार इस उपाय का इस्तेमाल करें बाल टूटना बंद हो जाएंगे।

नारियल तेल की मसाज 

बालों की जड़ों में तेल की मसाज भी बालों को टूटने और बेजान होने से बचने में मदद करती है। प्रयोग के लिए नारियल तेल को थोड़ा सा गर्म कर लें और उसके बाद धीरे-धीरे बालों में तेल लगाकर मालिश करें। इसके बाद आधा घंटे या पूरी रातभर के लिए बालों में तेल लगे रहने दें। उसके बाद अगली सुबह शैम्पू करके बाल धो लें। उचित परिणाम नहीं मिलने तक हर 2 दिन बाद बाल में तेल लगाकर शैम्पू करें। बाल टूटना बंद हो जाएंगे।

हरा धनिया पत्ता 

खाने को स्वादिष्ट बनाने वाला हरा धनिया भी बालों के झड़ने की समस्या को दूर करने में मदद करता है। प्रयोग के लिए 1 कप ताजा हरे धनिये के पत्तों को पीस लें और उसमे थोड़ा सा पानी मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें। अब इसे किसी बर्तन में छान लें। और जूस को बालों की जड़ों से सिरे तक अच्छे से लगा लें। एक घंटे तक रखें और उसके बाद शैम्पू करके बालों को धो लें। इसका प्रयोग नहाने से पहले हफ्ते में 2 बार करें। बालों का गिरना बंद हो जाएगा।

कड़ी पत्ता 

यह बालों के लिए टॉनिक के रूप में कार्य करता है। टूटते बालों को बचाने के लिए आप जिस भी तेल का इस्तेमाल करते हैं उस तेल में कड़ी पत्ते डालकर उबाल लें। तेल को तब तक उबालें जब तक पत्ते ब्राउन न हो जाएं। उसके बाद छानकर तेल को शीशी में बंद कर दें। अब इस तेल का प्रयोग अपनी जड़ों में करें और मालिश करें। बेहतर होगा यदि आप इसका प्रयोग रात के समय करेंगे। इससे तेल रातभर बालों में लगा रहेगा और पूरा असर करेगा। अगली सुबह जागकर बालों में शैम्पू कर लें। हर बार शैम्पू से पहले इस उपाय का प्रयोग करें बाल स्वस्थ हो जाएंगे।

तो ये थे कुछ उपाय जिनकी मदद से बालों के टूटने, गिरने और बेजान समस्या होने की समस्या से निजात पाई जा सकती है, लेकिन ध्यान रहे सभी उपायों का प्रयोग नियमित रूप से करना होगा तभी फायदा होगा।

प्रेगनेंसी में क्या पीएं और क्या नहीं पीएं

प्रेगनेंसी में क्या पीना चाहिए, गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला क्या खा रही हैं केवल इसी चीज का ही ध्यान नहीं रखना चाहिए। बल्कि प्रेग्नेंट महिला को क्या पीना चाहिए और क्या नहीं पीना चाहिए इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान बॉडी का हाइड्रेट रहना बहुत जरुरी होता है। इससे प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है। साथ ही गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए भी प्रेग्नेंट महिला का हाइड्रेट रहना जरुरी होता है। तो आइये आज हम इस आर्टिकल में आपको बताने जा रहे हैं की गर्भवती महिला को क्या पीना चाहिए और क्या नहीं पीना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला व् शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके और किसी भी तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी न हो।

प्रेगनेंसी में क्या पीना चाहिए

  • गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किन किन पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
  • जो प्रेगनेंसी के दौरान जरुरी होने के साथ पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।
  • तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को क्या क्या पीना चाहिए।

पानी

  • गर्भावस्था के दौरान एक दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी का सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए।
  • क्योंकि इससे गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।
  • साथ ही इससे एमनियोटिक फ्लूड जिसमे गर्भ में शिशु होता है।
  • उसकी मात्रा को सही रखने में मदद मिलती है।
  • इसके अलावा गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली बहुत सी परेशानियों से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में क्या नहीं पीना चाहिए, जूस

  • गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान फलों का सेवन करने के साथ फलों के रस का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए।
  • क्योंकि फलों के रस पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
  • साथ ही यह बॉडी में पानी की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं।
  • लेकिन ध्यान रखें की घर में बने हुए ताजे फलों के रस का ही सेवन करें।
  • मार्किट से लाए डिब्बाबंद जूस का सेवन न करें।

नारियल पानी

  • प्रेगनेंसी महिला को नारियल पानी का सेवन भी जरूर करना चाहिए।
  • क्योंकि इसमें मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला व् शिशु को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
  • साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान मॉर्निंग सिकनेस, कब्ज़, जी मिचलाना, उल्टी जैसी परेशानियों से प्रेगनेंसी के दौरान बचे रहने में मदद मिलती है।

निम्बू पानी

  • गर्भवती महिला चाहे तो निम्बू पानी का सेवन भी कर सकती है।
  • क्योंकि इससे गर्भवती महिला को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है।
  • साथ ही निम्बू पानी का सेवन करने से गर्भवती महिला को उल्टी, जी मिचलाने जैसी परेशानी से राहत पाने में भी मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में क्या नहीं पीना चाहिए

कुछ ऐसे पेय पदार्थ भी है जिनका सेवन प्रेग्नेंट महिला को या तो सिमित मात्रा में करना चाहिए। या तो बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को क्या क्या नहीं पीना चाहिए।

उबला हुआ पानी

  • प्रेग्नेंट महिला कभी कभी गुनगुना पानी पीने की इच्छा हो तो महिला पी सकती है।
  • लेकिन गर्भवती महिला को बहुत ज्यादा तेज चाय से उबले हुए पानी का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि बहुत ज्यादा गर्म पानी का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर के तापमान में फ़र्क़ आ सकता है।
  • जिसके कारण महिला को परेशानी हो सकती है।
  • साथ ही प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में शरीर के तापमान में फ़र्क़ आने के कारण भ्रूण पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

अधिक मात्रा में कैफीन

  • कैफीन युक्त पेय पदार्थ जैसे की चाय कॉफ़ी का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि कैफीन का अधिक सेवन गर्भवती महिला के साथ शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
  • आप चाहे तो दिन में एक से दो कप चाय या फिर एक दिन में एक कप कॉफ़ी का सेवन कर सकते हैं।

कोल्ड ड्रिंक

  • कोल्ड ड्रिंक का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि कोल्ड ड्रिंक को बनाने के लिए केमिकल्स व् उसे मीठा करने के लिए भी केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है।
  • जो गर्भ में शिशु के विकास में रूकावट पैदा कर सकते हैं।
  • इसीलिए कोल्ड ड्रिंक का सेवन करने से गर्भवती महिला को बचना चाहिए।

अल्कोहल

  • नशीले पदार्थ जैसे की अल्कोहल आदि का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि इनके कारण गर्भवती महिला को दिक्कतें ही नहीं बढ़ती हैं।
  • बल्कि इनका बुरा प्रभाव गर्भनाल के माध्यम से शिशु तक भी पहुँच सकता है।
  • जिसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास को भी नुकसान पहुँच सकता है।

तो यह हैं कुछ पेय पदार्थ जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पीने चाहिए और नहीं पीने चाहिए। क्या आप भी प्रेग्नेंट हैं? यदि हाँ तो इन टिप्स का अच्छे से ध्यान रखें। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको स्वस्थ रहने के साथ शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिल सके।

जीभ क्या बताती है आपके स्वास्थ्य के बारे में

किसी की स्किन, आँखे, नाख़ून आदि को देखकर ही कई बार लोग बोलने लग जाते हैं की तबियत ठीक नहीं है क्या। क्योंकि आपकी आँखे, नाख़ून, स्किन आदि आपके स्वास्थ्य के बारे में बताते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं की आपकी जीभ भी आपके स्वास्थ्य से जुडी जानकारी बताती है। जी हाँ जीभ का रंग, जीभ पर दाग या सूखापन आदि देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है। की आपको जरूर कोई शारीरिक या मानसिक परेशानी है। तो लीजिये आज हम भी आपको इस आर्टिकल में जीभ से देखकर आपको आपके स्वास्थ्य के बारे में क्या पता चलता है उस बारे में बताने जा रहे हैं।

जीभ का सूखा होना

  • कई बार आपको ऐसा महसूस होता है की आपकी जीभ सूख रही है।
  • ऐसा कभी कभार हो तो कोई बात नहीं होती है।
  • लेकिन जीभ का अधिक सूखा रहना शरीर में पानी की कमी या व्यक्ति के तनाव में होने के कारण हो सकता है।

काले निशान

  • जीभ की अच्छे से साफ़ सफाई करने के बाद भी यदि आपको कभी ऐसा लगे की जीभ पर काले धब्बे हैं।
  • तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि जीभ पर काले धब्बे या दाग नज़र होना बॉडी में बैक्टेरियल इन्फेक्शन होने के कारण हो सकता है।

सफ़ेद जीभ

  • यदि आप नियमित अपनी जीभ की सफाई करते हैं तो आपकी जीभ सफ़ेद नहीं होती है।
  • लेकिन कई बार जीभ की सफाई न करने पर आपकी जीभ पर सफ़ेद परत नज़र आ सकती है।
  • और यह पतली परत आपकी जीभ की सफाई न करने के कारण हो सकती है।
  • लेकिन यदि आप कभी भी जीभ की सफाई नहीं करते हैं।
  • तो इसके कारण यह परत मोटी हो सकती है।
  • जिसके कारण आपके मुँह से बदबू आने की समस्या शुरू हो सकती है।
  • साथ ही आपको फंगल इन्फेक्शन होने के खतरा भी रहता है।

जीभ क्या बताती है आपके स्वास्थ्य के बारे में जैसे की जीभ का जीभ का नीला होना

  • यदि आपको ऐसा महसूस हो की आपकी जीभ के रंग में परिवर्तन आ रहा है।
  • और आपकी जीभ नीले रंग की महसूस हो रही है।
  • तो यह बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन न होने के कारण हो सकता है।

जीभ क्या बताती है आपके स्वास्थ्य के बारे में जैसे की जीभ का लाल होना

  • जीभ का रंग हल्का गुलाबी व् सफ़ेद होता है।
  • लेकिन यदि जीभ का रंग गुलाबी से लाल हो जाये तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि जीभ का लाल होना गर्मियों के मौसम में शरीर में पानी की कमी के कारण हो सकता है।
  • साथ ही इसके कारण मुँह में अल्सर होने की परेशानी का खतरा भी हो सकता है।
  • ऐसे में इसका अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

जीभ क्या बताती है आपके स्वास्थ्य के बारे में जैसे की जीभ पर जलन महसूस होना

  • यदि आपको कुछ खाने या पीने पर जीभ में जलन महसूस हो रही है।
  • तो इसका कारण बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव व् टूथपेस्ट हो सकता है।

जीभ क्या बताती है आपके स्वास्थ्य के बारे में जैसे की छाले होना

  • यदि कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा स्मोकिंग करता है तो उसे इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • या फिर कभी कभी आप जब बहुत ज्यादा गर्म चीज को एक दम से खा लेते हैं तो भी जीभ पर दाने निकल जाते हैं।
  • जो छाले का रूप ले लेते हैं और फिर जब आप कुछ भी खाने की कोशिश करते हैं तो आपको जीभ में जलन महसूस हो सकती है।

तो यह है आपके स्वास्थ्य से जुडी जानकारी जो आपकी जीभ पर दिखाई देने वाले लक्षण आपको बताते हैं। यदि आपको भी आपकी जीभ में कोई ऐसा लक्षण महसूस हो तो उसे अनदेखा न करते हुए उसका इलाज करना चाहिए। साथ ही शरीर के साथ अपनी जीभ की साफ़ सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। और इस आर्टिकल से आप जान सकते हैं की जीभ क्या बताती है आपके स्वास्थ्य के बारे में।

एबॉर्शन करवाने के बाद ये दिक्कते आती है इसलिए पहले ही डॉक्टर से बात करे

गर्भपात हो जाना एक बहुत बड़ी समस्या है। कई बार गर्भपात कुछ दिक्कतों के कारण भी हो जाता है। हर औरत अपनी जिंदगी में बच्चे का सपना देखती है। पर कई बार कुछ मेडिकल प्रोब्लम हो जाती है जिससे गर्भपात हो जाता है। ऐसी स्थिति में एक औरत को बहुत दुःख होता है और वह गहरे सदमे में चली जाती है। उसके दिल और दिमाग पर गहरा असर देखने को मिलता है, जो उसे शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर कर देता है। कभी–कभी महिलायें अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिय भी गर्भपात करवाती है। पर इसे करवाने के बाद कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलाव देखने को मिलते है। कई बार तो गर्भपात जिन्दगी को भी खतरे में डाल देता है।

गर्भपात होने के निम्न कारण हो सकते है-

  • लगातार बढती उम्र- आजकल कई लोग अपने करियर को बनाने के चक्कर में शादी करने में देर कर देते है। जिससे ज्यादा उम्र होने के कारण शरीर कमजोर हो चुका होता है जो गर्भ धारण करने में भी समस्या उत्पन करता है और अगर गर्भ धारण हो भी जाता है तो  उसमे भी गर्भपात होने के बहुत ज्यादा चांस होते है।
  • कई प्रकार की गंभीर बीमारियाँ- अगर शरीर में कई प्रकार की बीमारियाँ होती है तो वह शरीर को कमजोर कर देता है जो गर्भपात का कारण बन सकता है। गर्भाशय का संक्रमण भी गर्भपात का कारण हो सकता है।
  • यदि गर्भधारण से पहले भी गर्भपात कराया हो- यदि आपने पिछले समय में कभी गर्भपात कराया है तो यह भी आपके गर्भपात का मुख्य कारण हो सकता है।
  • शराब या अन्य मादक पदार्थो का सेवन करना- इस तरह की गलत आदते भी समस्या उत्पन्न कर देती है। जैसे जो महिलायें शराब का सेवन अधिक मात्रा में करते है और अपनी देखभाल करना बंद कर देते है तो भी गर्भपात का खतरा बना रहता है।

गर्भपात कराने के बाद निम्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है-

  • ज्यादा मात्रा में रक्तस्त्राव- कभी-कभी एबॉर्शन करने के बाद रक्त का स्त्राव बहुत ज्यादा हो जाता है क्योंकि गर्भपात करते समय डॉक्टर कई प्रकार के औजारों का प्रयोग करते है जिसकी वजह से गर्भ में चोट भी लगना एक कारण हो सकता है।
  • मासिक धर्म में अनियमिता- गर्भपात कराने के बाद पीरियड में अनियमिता आ जाती है। कभी-कभी दाग रुक-रुक कर तो कभी-कभी ये लम्बे समय तक दिखाई देता है। दाग आने का समय 10 से 15  दिन भी हो सकता है।
  • अवसाद- गर्भपात कराने के बाद महिलाओं के अन्दर कई तरह के मानसिक बदलाव होते है। कभी कभी वो मानसिक रूप से खुद को कमजोर महसूस करती है।
  • संक्रमण की समस्या- एबॉर्शन कराते समय डॉक्टरों द्वारा संक्रमित औजार प्रयोग करने से गर्भाशय में संक्रमण होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। संक्रमण की समस्या महिलाओं के लिए कई समस्या पैदा कर सकती है।
  • भविष्य में गर्भघारण करने में परेशानी- गर्भपात करवाने के बाद दोबारा गर्भधारण के बारे में जब महिलाये सोचती है तो फिर से एबॉर्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। माँ बनना बहुत मुश्किल हो जाता है।
  • हीनता की भावना- गर्भपात कराने से महिलाओं के अन्दर कई तरह के मनोवैज्ञानिक परिवर्तन होते है। कई बार हम अनचाहे गर्भ को ख़त्म करने के बाद अपराध बोध की भावना से ग्रसित हो जाते है जो हमारे अन्दर हीनता की भवना पैदा कर देती है।
  • शारीरिक कमजोरी- गर्भपात होने के बाद एक महिला का शरीर कमजोर हो जाता है। ऐसे में उसका अच्छे से ध्यान रखना ज्यादा जरुरी हो जाता है। अगर हम ध्यान नहीं देगे तो हमें इसका बुरा परिणाम देखना पड़ सकता है।

गर्भपात कराने से पहले निम्न बातो पर अवश्य ध्यान दे-

  • डॉक्टर की सलाह ले-  हमें  एबॉर्शन करने से पहले डॉक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए। खुद गोली (Pills) ले कर घर पर एबॉर्शन नहीं करना चाहिए। क्यूंकि जब गोली लेते है तो भ्रूण पूरी तरह से समाप्त नहीं होता है। उसका कुछ न कुछ अंश गर्भ में रह जाता है। जो सुरक्षित तरीका नही है।
  • किसी अनुभवशील महिला से बात करे– एबॉर्शन करने के बाद क्या परिणाम देखने को मिलते है यह जानने के लिए एक ऐसी महिला से बात करे जिसने अपना पहले पहले एबॉर्शन कराया हो। इससे आपको यह पता चल जायेगा की एबॉर्शन कराने के बाद आपको किस तरह की परेशानियों को सामना करना पड़ा और उन्होंने क्या बदलाव महसूस किया।
  • तनाव ना ले- इसके लिये आपको पहले से खुद को एबॉर्शन के लिए तैयार करना होगा। एबॉर्शन से पहले डॉक्टर से सलाह ले।
  • अपने मासिक धर्म की जाँच करते रहे- आप कैलेंडर पर निशान लगा कर भी अपने मासिक धर्म की गणना कर सकते है। अगर आपका मासिक रुका हुआ है तो आप डॉक्टर से या खुद अपनी प्रेग्नेंशी की  जाँच कर सकते है।
  • गर्भ की जाँच करते रहे-  हर महीने अपना रूटीन चेकअप कराते रहे  ताकि यह पता चलता रहे की बच्चे की ग्रोथ सही से हो रही है कि नहीं। क्यूंकि कुछ मामलो मे ही एबॉर्शन करने कि जरुरत पड़ती है। अगर एबॉर्शन करना जरुरी हो तभी कराये।

निष्कर्स : हर लड़की की जिंदगी में माँ बनना एक हसीन सपना होता है। वह इस दिन का बेसबरी से इंतजार करती है कि कब उसके बच्चे का जन्म होगा। वह अपने बच्चे को लेकर कई तरह के सपने देखना शुरू कर देती है। पर कभी-कभी जब कुछ परिस्थितियों के कारण उसका गर्भपात हो जाता है तो वह भावात्मक रूप से बहुत दुखी हो जाती है। गर्भपात हो जाने पर वह अवसाद में चली जाती है।

ऐसे में उसकी देखरेख करना जरुरी हो जाता है। पर जब हम अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए एबॉर्शन करवाते है तो हमें पहले डॉक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए और उनकी देखरेख में ही एबॉर्शन कराना चाहिये। यही सुरक्षित रहेगा। दोस्तों आपको हमारा लेख आपको कैसा लगा जरुर बताये।

ब्रैस्ट और निप्पल के आस पास के बाल कैसे हटाएँ?

शरीर पर अनचाहे बाल महिलाओ को बिल्कुल पसंद नहीं होते है। और हर महिला अपनी स्किन की ख़ूबसूरती को बनाएं रखने की हमेशा कोशिश करती है। ऐसे में महिलाएं इस समस्या को दूर करने के लिए अलग अलग तरीको का इस्तेमाल करती है। और ऐसे ही महिलाओ के ब्रैस्ट पर निप्पल के आस पास भी कई बार बाल आ जाते है। और महिलाओ को इस चीज से परेशानी होती है। ब्रैस्ट के आस पास वैक्सिंग करना कई बार आपकी स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है।

इसलिए महिलाएं ब्रैस्ट पर ज्यादातर वैक्सिंग नहीं करती है। साथ ही महिलाओ को शर्म आने के कारण भी महिलाएं ऐसा नहीं करती है। क्या आप भी ब्रैस्ट और निप्पल के आस पास के बाल होने से परेशान है तो आइये आज हम आपको ब्रैस्ट पर और निप्पल के आस पास के बाल हटाने के लिए कुछ आसान उपाय बताते है, लेकिन इनका इस्तेमाल ध्यान करते समय तेजी भी नहीं बरतनी चाहिए।

ब्रैस्ट और निप्पल के आस पास बाल हटाने के उपाय:-

सरसों का तेल और बेसन:-

इस उपाय को करने के लिए आप एक कटोरी में थोड़ा सा बेसन, हल्दी, और सरसों का तेल मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें। उसके बाद इसे अच्छे से ब्रैस्ट और निप्पल के आस पास लगाएं। उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद इसे अच्छे से रगड़ कर उतार दें, ऐसा करने से आपको अनचाहे बालों को हटाने में मदद मिलती है।

निम्बू:-

एक कटोरी में एक चम्मच शहद और एक निम्बू का रस रस अच्छे से मिक्स करके एक पेस्ट तैयार करें। अब इसे अच्छे से अपने ब्रैस्ट के आस पर और निप्पल पर लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के नाद ठन्डे पानी से इसे अच्छे से रगड़ कर उतारें। ऐसा तीन से चार दिन करने पर आपको इस परेशानी से राहत मिलती है।

सिट्रस एसिड का उपयोग:-

इस तरीके का इस्तेमाल करने के लिए आप एक पैन में आधा चम्‍मच सिट्रस एसिड, आधा कप ब्राउन शुगर और आधा चम्‍मच ग्‍लीसरीन मिलाकर अच्छे से गर्म करके एक गाढ़ा घोल तैयार करें। अब इसे इतना गर्म रहने दे की यह आपकी स्किन को कोई नुकसान न पहुचाएं। उसके बाद इसे वैक्स की तरह इस्तेमाल करें, इसे आपके बालों को उसी समय हटाने में मदद मिलती है।

एलोवेरा:-

दो चम्मच एलोवेरा जैल को वैक्स के साथ मिलाकर अपने ब्रैस्ट व् निप्पल के आसा पास लगाकर, वैक्स स्ट्रिप की मदद से इसे हटाएँ इस तरीके का इस्तेमाल करने से न तो आपकी ब्रैस्ट की स्किन को कोई नुकसान पहुँचता है। साथ ही आपकी स्किन पर से अनचाहे बालों को हटाने में मदद मिलती है।

कच्चा पपीता:-

यह उपाय थोड़ा लम्बा है लेकिन आपकी इस समस्या का समाधान जरूर करता है। इसके लिए आप थोड़ा सा कच्चा पपीता पीस कर उसमे हल्दी मिलाएं। उसके बाद अच्छे से ब्रैस्ट पर रगड़कर मसाज करें। ऐसा कुछ दिनों तक नियमित करने से आपको इस समस्या से निजात मिलता है।

चीनी:-

चीनी भी इस समस्या के समाधान के लिए एक असरदार उपाय है, और इसके इस्तेमाल के बाद आप काफी दिन तक इस समस्या से बचे रह सकते है। इसके लिए आप एक पैन में थोड़ी सी चीनी को गरम करके, उसके पिघलने का इंतज़ार करें। उसके बाद इसका इस्तेमाल वैक्स की तरह करें, और कॉटन के कपडे से इसे हटाएँ, आपको उसी समय इसका असर दिखाई देगा।

लेज़र थेरैपी:-

यदि आप ब्रैस्ट और निप्पल के आस पास के बालों से हमेशा के लिए छुटकारा पाना चाहते है तो आपको लेज़र थेरैपी का इस्तेमाल करना चाहिए। यह थोड़ी महंगी होती है, और इसके लिए आप दो से तीन बार जाना पड़ता है, लेकिन आपको हमेशा के लिए इन अनचाहे बालों से छुटकारा पाने में मदद मिलती है।

तो यदि आपके भी निप्पल या ब्रैस्ट के आस पास बाल है तो आप भी ऊपर दिए गए किसी भी टिप्स का इस्तेमाल करके इस समस्या का समाधान कर सकते है।और यदि आप हमेशा इन्ही टिप्स का इस्तेमाल करती है तो धीरे धीरे यह जड़ से ही खत्म होने लग जाते है।

कद बढ़ाने के घरेलू तरीके क्या क्या होते हैं?

अच्छी पर्सनैल्टी के लिए अच्छी हाइट होना बहुत जरुरी होता है, लेकिन ऐसा नहीं है की कम हाइट वाले लोग कुछ नहीं कर सकते है, यदि आप कम हाइट की समस्या के कारण परेशान हैं, तो आपको एक बार सचिन तेंदुलकर, पॉल सिमोन, मार्टिन लूथर के बारे में सोचना चाहिए, यह एक ऐसी समस्या है जिसका समाधान समय पर होना चाहिए वैसे लगभग 21 की उम्र तक हाइट बढ़ने के चांस ज्यादा होते है, लेकिन इसके बाद भी हाइट बढ़ सकती है, लड़के और लड़कियों दोनों को कई बार कम हाइट के कारण मज़ाक का विषय बनना पड़ता है, जो कई बार उन्हें मानसिक रूप से भी परेशान कर सकता है, अच्छी हाइट न होने के भी कई कारण हो सकते हैं जैसे की अनुवांशिक यदि आपके माता पिता की हाइट कम है तो हो सकता है की आपकी भी हाइट कम हो, इसके अलावा और भी कारण हो सकते हैं, क्या आप भी इस समस्या से परेशान हैं यदि हाँ तो आइये आज हम हाइट न बढ़ने के कुछ कारण और इनके उपाय के बारे में चर्चा करते हैं।

इन्हें भी पढ़ें:- क्या आप ज्यादा ही दुबली है? ये बढाएंगे आपका वजन

हाइट कम होने के कारण:-

  • यदि आपके माता पिता ही हाइट कम हैं तो उसका असर आपके जीन्स पर भी पड़ सकता है।
  • शरीर में होने वाले पोषक तत्वों की कमी के कारण।
  • ग्रोथ हॉर्मोन में आने वाली रूकावट के कारण भी आपको ये समस्या हो सकती है।
  • यदि आप किसी बिमारी से बचपन से पीड़ित हैं तो भी ये समस्या हो सकती है।

मिनरल्स से भरपूर आहार लें:-

शरीर की अच्छे से ग्रोथ हो इसके लिए संतुलित आहार का सेवन करना बहुत जरुरी होता है, क्योंकि यदि आप मिनरल्स से भरपूर आहार का सेवन करते हैं, तो इससे आपकी बॉडी में ग्रोथ हॉर्मोन स्त्रावित होते हैं, जिससे आपकी हाइट और वजन दोनों बढ़ने में मदद मिलती है, यदि आप शिशु की हाइट नहीं बढ़ रही है तो इसके लिए आपको उसे विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम, व् अन्य मिनरल्स युक्त आहार का सेवन करना चाहिए, ताकि उसकी ग्रोथ अच्छे से होने में मदद मिल सकें, और नियमित रूप से करें तभी आपको फायदा मिलेगा।

नींद भरपूर लें:-

क्या आप जानते हैं की जब आप सोते हैं तब आपकी हाइट सबसे ज्यादा बढ़ती है, इसीलिए शिशु की हाइट बढ़ाने के लिए जरुरी होता है की वो भरपूर नींद लें, साथ ही उसके सोने की जगह बिलकुल साफ़ हो, और उसे सोने के लिए पूरा स्थान दें, ताकि वो अच्छी नींद ले सकें, ऐसे में मन शांत होता है और आपका शरीर अच्छे से ग्रोथ करता है जिससे बच्चे की हाइट बढ़ने में मदद मिलती है, लेकिन यदि बच्चे को टाइट जगह पर सुलाया जाए तो उसे परेशानी का अनुभव हो सकता है, जिससे उसके विकास मे भी कमी आती है।

इन्हें भी पढ़ें:- तेजी से लंबाई बढ़ाने के तरीके

दूध व् दूध से बनी चीजों का सेवन करें:-

यदि आपकी हड्डियों की ग्रोथ अच्छे से होती है, तो इससे आपकी हाइट बढ़ने में भी मदद मिलती है, और हड्डियों की ग्रोथ के लिए शरीर में कैल्शियम का भरपूर मात्रा में होना बहुत जरुरी होता है, तो आप अपने बच्चे को दूध व् दूध से बनी चीजों का सेवन भरपूर मात्रा में करवाएं, कैल्शियम की मात्रा में अधिकता होने के कारण यह आपके शरीर की ग्रोथ में मदद करता है, इसके लिए आप दूध, दही, पनीर, आदि  का सेवन अपने बच्चों को करवा सकते हैं सोयाबीन में भी कैल्शियम भरपूर होता है इससे भी आपकी हाइट को बढ़ाने में मदद मिलती है।

लटकने और दौड़ने जैसा व्यायाम करें:-

व्यायाम करने से भी हाइट बढ़ाने में मदद मिलती है, इसके लिए आपको ऐसा व्यायाम करना चाहिए जिससे आपके हाथों और पैरों में खिंचाव हो जैसे ही लटकना चाहिए, दौड़ना चाहिए, जम्प करने चाहिए, नियमित रूप से आधा घंटा यदि आप ऐसा करते हैं तो इससे आपकी हड्डियों का विकास होने में मदद मिलती है जिससे आपको फायदा होता है।

विटामिन डी भरपूर मात्रा में लें:-

हाइट को बढ़ाने के लिए विटामिन डी का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए, जैसे की मशरूम, बादाम, टोफू, गाय का दूध, व् उससे बने उत्पाद यदि आप अपने बच्चे को इसका सेवन करवाते हैं तो इससे भी हाइट को बढ़ने में मदद मिलती है, साथ ही जब हलकी धूप हो तो उसमे अपने शिशु को थोड़ी देर पैदल चलने के लिए कहना चाहिए ऐसा करने से धूप की किरणों से मिलने वाला विटामिन डी उसे मिलेगा जिससे शिशु की हाइट को बढ़ाने में आपको मदद मिलती है।

प्याज़ और गुड़ का सेवन करें:-

यह एक सबसे आसान और असरदार घरेलू नुस्खा है यदि आपो नियमित दिन में दो बार प्याज़ और गुड़ का सेवन करते हैं तो इससे आपकी लम्बाई को बढ़ाने में मदद मिलती है, यदि आपकी लम्बाई बीस की उम्र में भी नहीं बढ़ रही है तो आप भी इस तरीके का इस्तेमाल करें आपको जरूर फायदा मिलेगा।

नागौरी और अश्वगंधा का इस्तेमाल करें:-

सुखी नागौरी के साथ अश्वगंधा की जड़ को बराबर मात्रा में पीस लें, अब इस मिश्रण के बराबर इसमें खांड को मिक्स कर लें, और किसी एयर टाइट कांच के डिब्बे में रख दें, और नियमित रात को दो चम्मच गाय के दूध के साथ लें, इससे आपकी हाइट में दो महीने में ही आपको फ़र्क़ दिखने लगेगा, साथ ही यदि आपको दुबलेपन की समस्या है तो ये उससे भी निजात दिलाने में आपको मदद करता है।

योगासन करें:-

आपकी हाइट को बढ़ाने में योगासन भी बहुत मदद करता है, इससे शरीर में स्ट्रेच उत्त्पन्न होता है, जिससे आपकी मांसपेशियों और हड्डियों के विकास में मदद मिलती है जिससे आपकी हाइट बढ़ने में मदद मिलती है, जैसे की ताड़ासन, भुजंगासन, सूर्य नमस्कार, आदि नियमित करने से आपको फायदा मिलता है।

तो ये हैं कुछ घरेलू उपाय जनका इस्तेमाल करके आपको हाइट बढ़ाने में मदद मिलती है साथ ही यदि उम्र ज्यादा होने के बाद भी आपके शिशु की हाइट नहीं बढ़ रही है, तो इस बारे में आपको डॉक्टर से बात करनी चाहिए, ताकि कोई उपाय हो सके।

इन्हें भी पढ़ें:- क्या आपके बच्चे का वजन ज्यादा बढ़ रहा है? ये है उपाय