Home Blog Page 105

नौवें महीने में महिला इन लक्षणों को देखकर जान सकती है सब नोर्मल है या अबनॉर्मल

वैसे तो प्रेगनेंसी का हर दिन हर पल बहुत ही खास होता है लेकिन नौवां महीने में महिला के लिए ख़ुशी के साथ टेंशन से भरा हुआ भी होता है। क्योंकि जहां शिशु के जन्म के होने की ख़ुशी होती है वहीँ महिला के मन में यह डर भी होता है की डिलीवरी के दौरान किसी तरह की दिक्कत तो नहीं होगी, महिला की डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन, आदि। ऐसे में किसी तरह की कोई परेशानी न तो इसके लिए महिला को डर और घबराहट से दूर रहना चाहिए। और प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले लक्षणों पर ध्यान रखना चाहिए। की प्रेगनेंसी के दिखाई देने वाले लक्षण सही है या नहीं, क्योंकि इस दौरान यदि बॉडी में दिखाई देने वाले लक्षणों को अनदेखा किया जाये तो इसके कारण महिला को परेशानी हो सकती है।

नौवें महीने में महिला गर्भवती महिला रखे इन लक्षणों का ध्यान

प्रसव का समय जैसे जैसे पास आता है वैसे वैसे बॉडी में महिला को अलग अलग लक्षण महसूस हो सकते हैं। ऐसे में महिला को कौन कौन से लक्षण महसूस हो सकते हैं और वो नोर्मल हैं या उनके कारण किसी तरह की परेशानी हो सकती है इस बात का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। तो आइये प्रेगनेंसी में कौन से लक्षण सही होते हैं और कौन से गलत इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

शिशु की हलचल

नौवें महीने में शिशु की हलचल गर्भवती महिला को कभी ज्यादा तो कभी कम महसूस हो सकती है। क्योंकि इस दौरान शिशु का विकास लगभग पूरा हो चूका होता है ऐसे में उसे घूमने के लिए गर्भ में कम जगह मिलती है। जिसके कारण शिशु तेजी से हलचल करता है तो कभी शांत हो जाता है। लेकिन आपको शिशु की हलचल का इस महीने में ध्यान रखना चाहिए को यदि आपको आधे या एक घंटे तक शिशु की हलचल महसूस न हो तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि शिशु का गर्भ में हलचल न करना शिशु के लिए रिस्क हो सकता है।

मांसपेशियों में खिंचाव

वजन बढ़ने के कारण रीढ़ की हड्डी के आस पास की मांसपेशियों में खिंचाव अधिक महसूस हो सकता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला को मांसपेशियों में खिंचाव अधिक महसूस हो और पेल्विक एरिया के आस पास की मांसपेशियों में भी खिंचाव अधिक महसूस हो तो इसे गर्भवती महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह भी प्रसव का लक्षण होता है और प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा होना सामान्य बात होती है।

पेट में दर्द

पेट की मांसपेशियों में खिंचाव के कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के नौवे महीने में पेट में हल्के फुल्के दर्द की समस्या रह सकती है। और ऐसा होना आम बात होती है लेकिन यदि महिला को पेट में रुक रुक कर तेजी से दर्द का अहसास हो रहा हो तो इसे महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह प्रसव का लक्षण हो सकता है।

पेट सम्बंधित समस्या

नौवें महीने में वजन बढ़ने के कारण महिला की पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है जिसके कारण महिला को खाने को हज़म करने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला को कब्ज़ या फिर उल्टी दस्त की समस्या अधिक हो तो इसे महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए। और तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए क्योंकि यह प्रसव का लक्षण हो सकता है साथ ही डायरिया की समस्या अधिक होने के कारण महिला को दिक्कत भी हो सकती है। इसके अलावा महिला को बार बार यूरिन पास करने की इच्छा भी हो सकती है।

शिशु का भार नीचे महसूस होना

गर्भावस्था के नौवें महीने में महिला का वजन पूरी तरह बढ़ चूका होता है, ऐसे में महिला को उठने बैठने सोने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि महिला को शिशु का भार नीचे की तरफ अधिक महसूस हो और सीने और पेट में हल्कापन महसूस हो तो यह भी डिलीवरी का लक्षण होता है। ऐसे में इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए और जल्दी से जल्दी डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

ब्लीडिंग

कुछ महिलाओं को नौवें महीने में थोड़ा बहुत खून के धब्बे भी लग सकते हैं, इसका मतलब होता है की शिशु का जन्म होने वाले हैं। ऐसे में भी आपको जितना जल्दी हो सके डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

एमनियोटिक फ्लूड

गर्भ में शिशु गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड में ही होता है, और यह फ्लूड शिशु की मूवमेंट और शिशु के विकास को बेहतर रखने में मदद करता है। लेकिन नौवें महीने में यदि महिला को प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद चिपचिपा पदार्थ यूरिन की तरह निकलता हुआ दिखाई देता है, तो इसे महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह एमनियोटिक फ्लूड हो सकता है इसका मतलब होता है की महिला की डिलीवरी होने वाली है। और यदि आप इसे अनदेखा करती है तो इससे भी शिशु को गर्भ में दिक्कत हो सकती है।

प्रसव पीड़ा का कोई लक्षण महसूस न होना

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में यदि डॉक्टर द्वारा दी गई तिथि निकल गई है और उसके बाद भी गर्भवती महिला को बॉडी में प्रसव का कोई लक्षण महसूस नहीं हो रहा है। तो इसे गर्भवती महिला को बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए, और जल्दी डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि समय से ज्यादा गर्भ में शिशु का रहना शिशु के लिए रिस्क हो सकता है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो यदि गर्भवती महिला को बॉडी में महसूस होते हैं तो इससे महिला को प्रेगनेंसी के नौवें महीने में यह जानने में आसानी होती है। की कौन से लक्षण सही हैं और कौन से नहीं, ताकि प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में होने वाली हर दिक्कत से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिल सके।

गर्भावस्था में रात को देरी से सोने के नुकसान

प्रेग्नेंट महिला को अपनी दिनचर्या का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और अपना रूटीन बनाकर रखना चाहिए। क्योंकि जितना महिला का रूटीन बेहतर होता है उतना ही महिला व् बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। जैसे की महिला को समय से खाना चाहिए, समय से नहाना चाहिए, समय से सोना चाहिए, समय से उठना चाहिए, आदि। और यदि किसी कारण महिला अपने रूटीन में यदि थोड़ी सी भी गड़बड़ी करती है तो इससे महिला का पूरा रूटीन खराब हो जाता है साथ ही प्रेग्नेंट महिला को परेशानियां भी बढ़ती है।

तो आइये आज इस आर्टिकल में हम उन गर्भवती महिलाओं के लिए कुछ बातें बताने जा रहे हैं जो रात को देरी से सोती है। गर्भवती महिला यदि रात को देरी से सोती है तो इसके कारण महिला का सुबह लेट उठती है जिससे प्रेग्नेंट महिला का रूटीन बिगड़ जाता है साथ ही महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को रात को देर से सोने से कौन से नुकसान होते हैं।

दिनचर्या होती है खराब

रात को देरी से सोने के कारण महिला सुबह देरी से उठती है, नाश्ता देरी से करती है, दोपहर का खाना खाया या नहीं खाया सब बराबर हो जाता है, व्यायाम का कोई समय नहीं होता है, आदि। और इसके कारण महिला की पूरी दिनचर्या खराब हो जाती है जिससे महिला की परेशानियां बढ़ जाती है। और इसका नकारात्मक असर केवल महिला पर ही नहीं बल्कि बच्चे पर भी पड़ता है।

हार्मोनल असंतुलन

रात को देरी से सोने के कारण बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो जाती है जिसके कारण गर्भवती महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ने के कारण गर्भपात, बच्चे के विकास में कमी, समय पूर्व प्रसव जैसी परेशानी होने का खतरा रहता है।

शारीरिक परेशानियां बढ़ती है

रात को देरी से सोने के कारण बॉडी में हार्मोनल अंसतुलन की समस्या हो जाती है जिसके कारण शरीर की सभी क्रियाओं पर बुरा प्रभाव पड़ता है। जिसकी वजह से महिला की शारीरिक परेशानियां जैसे की थकान, कमजोरी, पाचन क्रिया से जुडी समस्या, गेस्टेशनल शुगर, वजन का बढ़ना, ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या, सिर दर्द, बॉडी के अन्य हिस्सों में दर्द जैसी परेशानियां बढ़ जाती है।

मूड होता है खराब

रात को देरी से सोने के कारण अगले दिन महिला को आलस, सुस्ती महसूस होती है जिससे महिला चिड़चिड़ी व् गुस्से में रहती है। और गर्भवती महिला का ऐसा व्यवहार शिशु के लिए सही नहीं होता है।

तनाव

रात को देरी से सोने के कारण प्रेग्नेंट महिला मानसिक रूप से भी परेशानी का अनुभव होता है जिसके कारण महिला तनाव से ग्रसित हो जाती है। और तनाव के कारण प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे दोनों की दिक्कतें बढ़ जाती है।

बच्चे के विकास में आती है कमी

रात को देरी से सोने के कारण प्रेग्नेंट महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ती है जिसका असर पेट में पल रहे बच्चे पर भी पड़ता है।जिसके कारण शिशु के विकास में दिक्कत आती है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो रात को देरी से सोने के कारण गर्भवती महिला व् बच्चे को होते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को ऐसी कोई परेशानी न हो, महिला का रूटीन बेहतर रहे इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को रात को समय से सोना चाहिए और सुबह समय से उठकर दिन की शुरुआत बेहतर करनी चाहिए। ताकि पूरा दिन बेहतर निकलें और माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

आँखों को फड़कने से रोकने के उपाय

How to Reduce or Stop Eye Twitching

आंखों का फड़कना रोकने के उपाय, How to Reduce or Stop Eye Twitching, आंखों के फड़कने की समस्या, आंख फड़कने का फल, आंखों के फड़कने का क्या कारण होता है, Causes of Eye Twitching, Eyelid Twitch, आंखों का फड़कना, आंखें क्यों फड़कती है, आंखों के फड़कने का इलाज घर पर कैसे करें

आंखों का फड़कना रोजमर्रा की जिंदगी में होने वाली आम समस्या है जो किसी के साथ भी हो सकती है। वैसे तो यह कोई गंभीर बिमारी नहीं है लेकिन अगर समय पर ध्यान नहीं दिया जाए तो आगे चलकर यह बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। लेकिन यह बात केवल वैज्ञानिक तथ्यों पर निर्भर करती है। अगर दुसरे नजरिए से देखा जाए तो इसे काफी बातों से जोड़कर देखा जाता है।आंखें क्यों फड़कती है

भारत में आंखों के फड़कने को बहुत सी गलत और सही चीजों से जोड़ा जाता है। सभी लोग अपने अपने मुताबिक आंखों के फड़कने का अर्थ निकालते है। इसे शुभ-अशुभ के तौर पर भी देखा जाता है। लोगो की मान्यता के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की सीधी आँख फड़कती है तो उसके जीवन में खुशियां या अच्छी खबर आने वाली होती है जबकि उलटी आंख फड़कने को कष्टों के आने का संकेत माना जाता है।

Read more : आंखों के फड़कने से जुड़े हर रहस्य को जानने के लिए यहाँ क्लिक करें – आंखों के फड़कने का रहस्य!

लेकिन अगर आप इसे एक समस्या के रूप में देख रहे है तो इसका तुरंत इलाज करना आवश्यक है, क्योंकि लंबे समय तक आंखों का फड़कना शर्मनाक, असुविधाजनक और परेशानी का कारण बन जाता है। ऐसे में इससे छुटकारा पाना और भी जरुरी हो जाता है। परन्तु किसी भी समस्या का इलाज जानने से पूर्व उसके कारणों के बारे में जान लेना चाहिए ताकि भविष्य में इसके होने की संभावना को कम किया जा सके।

आंखों के फड़कने के मुख्य कारण :-
  • तनाव लेना।
  • अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन करना।
  • थकान होना।
  • आंखों में एलर्जी।
  • सूखी आंखे होना।
  • खराब पोषण।
  • अधिक समय तक धुल मिटटी और प्रदूषित वातावरण में रहना आदि।

आंखों को फड़कने से रोकने के उपाय :-

यहां हम आपको कुछ उपाय बता रहे है जिनकी मदद से आप अपनी आंखों का फड़कना कम कर सकते है। बता दें ये उपाय पूरी तरह घरेलू है जिनमे किसी भी तरह की दवाई और केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

1. पलकों को झपकाएं :palko ko jhapkaye

काफी समय से फड़क रही आंख को सामान्य करने के लिए जितना हो सके उतनी जोर से अपनी आंखें बंद कर लें। फिर आंखों को खोलकर पूरी तरह फैलाएं। इस प्रक्रिया को तब तक दोहराते रहे जब तक आपकी आंखों से आंसू न आने लगे। अगर दर्द का एहसास हो या आंखें और अधिक जोर से फड़कने लगे तो इसे तुरंत बंद कर दें।

2. मसाज करें :

इस उपाय के लिए अपनी बीच की ऊँगली से निचली पलक की गोलाई में मसाज करें। ऐसा लगभग 30 सेकंड के लिए करें। जलन या संक्रमण से बचने के लिए मसाज से पूर्व अपने हाथों और चेहरे को अच्छी तरह से साफ़ कर लें। ऐसा करने से रक्त का प्रवाह बेहतर होता है और फडकन कम होती है।

3. 30 सेकंड तक करें यह क्रिया :

इस उपाय को आपको पूरी तेजी से करना होगा क्योंकि धीरे धीरे करने से इच्छित पारिणाम प्राप्त नहीं होंगे। इसके लिए आप अपनी पलकों को लगातार झपकाते रहे। जिस प्रकार जीवित रहने के लिए पानी और भोजन की आवश्यकता होती है उसी प्रकार आंखों के लिए पलकों को झपकाना बेहद जरुरी होता है। यह आंखों की मांसपेशियों को आराम पहुंचाती है और साथ ही पुतलियों को चिकनाई भी प्रदान करती है। जिससे आंखें नहीं फड़कती।

(क्रिया करते समय दर्द का एहसास होते ही क्रिया बंद कर देनी चाहिए।)

4. अर्ध-खुली अवस्था :half open

आंखों का फड़कना बंद करने के लिए आप इस क्रिया का भी इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए आपकों अपनी आंखों को अर्ध-खुली अवस्था में रखना होगा। यानी न पूरी बंद और न पूरी खुली। ऐसा करने से आपकी आंखों पर तनाव कम पड़ेगा जिससे थकान के कारण होने वाला कंपन बंद हो जाएगा।

5. आंखों की एक्सरसाइज :

आंखों के फड़कने की समस्या होने पर आप Eyes Exercise की मदद भी ले सकते है। इसके लिए 1 मिनट के लिए अपनी आंखों को बंद कर लें। इस बीच अपनी आंखें जोर से मीचें और फिर उन्हें खोले बिना ही ढीला छोड़ दें। आंखों को पुनः खोलने से पूर्व इस प्रक्रिया को 3 बार दोहराएँ।

6. हाइड्रोथेरेपी तकनीक :washing eyes

यह एक सामान्य थेरेपी है जिसमे आंखों पर गुनगुने और ठंडे पानी की छींटे मारी जाती है। आप भी इसका इस्तेमाल कर सकते है। आंखों का फड़कना बढ़ने पर बंद आंखों पर बारी बारी से ठंडा और गुनगुना पानी डालें। ठंडा पानी रक्त वाहिकाओं को संकुचित करेगा जबकि गुनगुना पानी उन्हें फैलाने का काम करेगा। ऐसा करने से वाहिकाओं में रक्त का प्रवाह बढ़ेगा जिससे आंखों के फड़कने में आराम मिल जाएगा। वैसे आप चाहे तो पानी की छींटे मारने से पूर्व बर्फ के टुकड़ों का इस्तेमाल भी कर सकते है। इसे कम से कम 7 से 8 बार करें समस्या में आराम मिल जाएगा।

तो ये थे कुछ उपाय जिनकी मदद से आपकी आंखों के फड़कने की समस्या आसानी से दूर हो जाएगी। एक बात ध्यान रखें अगर आपको किसी भी व्यायाम या क्रिया को करने में परेशानी या तनाव का अनुभव हो रहा है तो तुरंत ही उस क्रिया को करना बंद कर दें। जल्द राहत न मिलने पर डॉक्टर की सलाह भी लें।

शादी के बाद लडकियां मोटी क्यों हो जाती हैं?

शादी के बाद लडकियां मोटी क्यों हो जाती हैं, शादी के बाद लड़कियों का वजन बढ़ने के कारण, शादी के बाद मोटापे का कारण, Reasons for weight gain after marriage

शादी से पहले जहां लडकियां अपने सौ ग्राम वजन बढ़ने पर भी डाइट शुरू कर देती हैं, वहीँ शादी के बाद महिला के वजन में अचानक से बदलाव देखने को मिलता है। शादी के बाद लड़कियों के चेहरे के निखार और बढ़ते वजन को देखकर घर के लोग कहते हैं की लगता है पति बहुत प्यार करता है। और उसे छेड़ने लगते है, जबकि शादी के बाद वजन बढ़ना ज्यादातर महिलाओं के लिए समस्या होता है। ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि शादी के बाद और शादी से पहले के लाइफस्टाइल में चेंज हो जाता है। जहां शादी से पहले लड़की केवल अपने बारे में सोचती है, वहीँ शादी के घर के सदस्य और पति के बाद अपने बारे में सोचने का समय मिलता है। ऐसे में लड़कियों के पेट बाहर निकलने, ब्रेस्ट साइज में बदलाव, हिप्स का बढ़ना आदि बदलाव लड़कियों में देखने को मिलते हैं।

शादी के बाद लड़कियों के मोटे होने के कारण

शादी के बाद महिला की दिनचर्या में बदलाव, अपनी केयर के प्रति लापरवाही, शरीर में होने वाले आंतरिक परिवर्तन, आदि के कारण लड़कियों के वजन बढ़ने की समस्या हो जाती है। इसके अलावा और भी कई कारण होते हैं जिनके कारण शादी के के बाद लड़कियों का वजन बढ़ जाता है तो आइये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

हार्मोनल चेंज

शादी के बाद लड़कियों के वजन बढ़ने का सबसे अहम कारण बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव होते है, क्योंकि सम्बन्ध बनाने के बाद उनकी बॉडी में तेजी से बदलाव होते हैं। इसके अलावा प्रेगनेंसी के डर से बचने के लिए कुछ लडकियां गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन भी करती हैं जिसके कारण उनका वजन बढ़ सकता है।

नींद की कमी के कारण

शादी के बाद भरपूर नींद न लेने के कारण भी मेटाबोलिज्म रेट प्रभावित होता है, जिसके कारण मोटापा आने लगता है। अब नींद न लेने के कई कारण हो सकते हैं जैसे की रात को सोने में देरी और सुबह जल्दी उठ जाना, और शादी के बाद दिन में सोना थोड़ा मुश्किल होता है।

लुक्स के प्रति लापरवाही

शादी से पहले लड़कियां अपनी ख़ूबसूरती का अपने वजन का बहुत अच्छे से ध्यान रखती है, और उसे मेन्टेन करके रखती है। जबकि शादी होने के बाद वो अपनी अच्छे से केयर नहीं करती है और फिटनेस के प्रति लापरवाही करने लगती है जिसके कारण वजन बढ़ने लगता है।

ज्यादा बाहर का खाना

शादी के बाद दो तीन महीने तक कोई न कोई आपको बुलाता ही रहता है, और हमेशा ऑयली खाना, मीठा अधिक खाना, साथ ही आपके पार्टनर के साथ समय बिताने के लिए भी शुरुआत में आप आप बाहर का खाना ही पसंद करते है। जिससे आपके शरीर में वसा की मात्रा का इजाफा होता है नतीजा वेट गेन होने लगता है।

तनाव

जी हाँ शादी के बाद वजन बढ़ने का एक कारण तनाव भी हो सकता हैं, क्योंकि कहीं न कहीं लड़कियों के मन में यह डर होता है की किस तरह वो एडजस्ट कर पाएंगी। और ज्यादा तनाव आपके शरीर पर बुरा प्रभाव डालता है जिसके कारण आपको वजन बढ़ने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

उम्र के कारण

आज कल शादी की उम्र में बदलाव आ रहा है आज कल लोग अठाइस से तीस वर्ष की उम्र में शादी करना पसंद करते है। जिसके कारण उनका मेटाबोलिज्म रेट बहुत तेजी से प्रभावित होने लगता है और उन्हें शादी के मोटापे की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी होने के कारण

शादी के बाद ज्यादातर कपल शादी एक या दो साल में ही बच्चा प्लान कर लेते है, जिसके कारण शादी के बाद महिलाएं बेफिक्र हो जाती है। जिसके कारण वो अपनी फिटनेस के प्रति लापरवाही करने लगती है और उनका वजन बढ़ने लगता है।

शारीरिक श्रम कम होने के कारण

नई बहु को घर में कोई काम करने के लिए नहीं कहता है, ऐसे में शादी के बाद ज्यादा समय घूमने, बातें करने में या गॉसिपिंग में जाता है। और इसके कारण महिला किसी तरह का शारीरिक श्रम नहीं करती है जिसके कारण उसके शरीर पर चर्बी जमने लग जाती है।

दबाव कम होने के कारण

शादी से पहले यदि वजन बढ़ जाता है तो सभी टोकने लग जाते हैं फिर चाहे वो घर के हो या बाहर के, लेकिन शादी के बाद ऐसा कुछ नहीं होता है क्योंकि अब तो शादी हो गई है। ऐसे में लड़कियों पर समाजिक दबाव कम होने के कारण वो अपनी फिटनेस के प्रति लापरवाह हो जाती है।

प्राथमिकता बदलने के कारण

शादी के बाद लडकियां अपने ऊपर कम ध्यान देती है, और अपने परिवार और पति के ऊपर ज्यादा ध्यान देती है। और वो अपनी दिनचर्या घर के सदस्यों के हिसाब से बना लेती है। जिसके कारण अपने ऊपर अच्छे से ध्यान नहीं दे पाती है और वजन बढ़ने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से ज्यादातर लड़कियों का शादी के बाद वजन बढ़ने लग जाता है। लेकिन मोटापा कहीं न कहीं शरीर में बीमारियों का कारण भी बनता है ऐसे में शादी के बाद भी लड़कियों को ज्यादा लापरवाही न करते हुए अपने आप को फिट रखना चाहिए।

विडिओ शादी के बाद लड़कियां मोटी क्यों हो जाती हैं?

बेजान होठों में नई जान ला देगा, अगर अपनाएंगे ये टिप्स

खुबसुरत और आकर्षक होंठ पाना हर महिला की चाह होती है। लेकिन हमारे आस पास के वातावरण और कुछ अन्य कारणों की वजह से उनके होंठ रूखे होकर बेजान होने लगते है जिसके चलते उनकी ये चाह पूरी नहीं हो पाती। अगर आप भी उन्ही में से एक है तो परेशान न हो क्योंकि आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू उपाय बताने जा रहे है। जिनकी मदद से आपके बेजान होठों में भी नई जान आ जाएगी।

महिलाओं की खूबसूरती उनके चेहरे से झलकती है। जिसमे चेहरे के सभी भाग अपना-अपना योगदान निभाते है। जहाँ एक तरफ आँखें आपके मन का हल बया करती है वहीं दूसरी ओर आपका दमकता चेहरा भी अच्छी पर्सनालिटी को ओर इशारा करता है। लेकिन इसके अलावा भी एक अंग है जो आपकी खूबसूरती को बढ़ाने के  साथ-साथ पुरुषों को आकर्षित करने का जरिया भी है। जी हां, हम बात कर रहे है, होंठों की।

होंठ महिलाओं की खूबसूरती की एक ऐसा अभिन्न हिस्सा है जिसकी खूबसूरती को चाहकर भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। इसीलिए महिलाएं इनके लिए महंगी-महंगी लिपस्टिक और कॉस्मेटिक खरीदती है। ताकि इनकी खूबसूरती को दुगना किया जा सके। पहले की समय की तो कही नहीं जा सकती लेकिन आजकल की महिलाएं और लड़कियां सभी अपने चेहरे के साथ-साथ इस अंग की खूबसूरती को बढ़ाने के प्रयासों में लगी रहती है।बेजान होठों में नई जान ला देगा

लेकिन कई बार इतने सारे प्रयास करने के बाद भी उनकी ये इच्छा अधूरी ही रह जाते है जिनका बहुत से कारण होते है। कभी प्रदूषित वातावरण तो कभी शरीर में आई पानी की कमी। खुबसुरत होंठ पाना हर महिला की इच्छा होती है। ऐसे में उनका बेजान और रुखा होना आपकी सुंदरता पर तो प्रभाव डालता ही है साथ-साथ आपके व्यक्तित्व को भी प्रभावित करता है। इसीलिए आपको चाहिए की आप अपने होठों का ख़ास ख्याल रखें। लेकिन खास ख्याल रखने के बाद भी इनमे कई परेशानियाँ होने लगती है जिनके बारे में हम अक्सर जान ही नहीं पाते। इसीलिए आज हम आपको होठों के बेजान होने और उसके घरेलू उपाय दोनों के बारे में बताएँगे।

ताकि अगली बार से आप इन कारणों का ध्यान रखें। और अपने खुबसूरत होठों को बेजान न होने दें।

होंठो के बेजान होने के क्या-क्या कारण होते है?

किसी भी समस्या के उपाय जानने से पूर्व यह जानना आवश्यक है की आपको उस समस्या के कारणों के बारे में पता हो। इसीलिए बेजान होंठो को ठीक करने के उपाय बताने से पूर्व हम आपको उसके कारणों के बारे में बताने जा रहे है। ताकि अगली बार उन कारणों का ध्यान रख आप इस समस्या को बढ़ने से रोक पाए।

1. पानी :

होठों के बेजान होने का प्रमुख कारण निर्जलीकरण को माना जाता है। अर्थात शरीर में आई पानी की कमी। इसीलिए पुरे दिन भर अधिक से अधिक मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए। इतना ही नहीं आपको दिन भर में कम से कम एक रसीले फल का सेवन भी जरुर करना चाहिए। आप चाहे तो फल व् सब्जियों के रस का सेवन करके भी शरीर में पानी की कमी को दूर कर सकते है। पानी की कमी दूर करने के साथ-साथ ये आपको पौष्टिक तत्व देने में भी मदद करेंगे।

2. जलवायु :होंठो का रखें ध्यान

होठों के फटने और बेजान होने में जलवायु भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अर्थात गर्मियों की तुलना में सर्दियों में होंठ फटने की समस्या सबसे अधिक होती है जबकि गर्मियों में होठों को पूर्ण नमी न मिल पाने के कारण वे बेजान होने लगते है। जलवायु में परिवर्तन होना प्राकृतिक है इसे आप नहीं बदल सकते है लेकिन इसके प्रभाव से अपनी त्वचा को बचा सकते है। इसीलिए हमेशा होठों पर लिप बाम आदि का प्रयोग करते रहे।

3. अन्य कारण :

ऊपर बताये गए कारणों के अलावा प्रदुषण, शरीर में विटामिन बी की कमी, अनियमित खान पान, देखभाल में लापरवाही, अत्यधिक कॉस्मेटिक का प्रयोग और उन्हें चबाने की गन्दी आदत की वजह से भी होंठ बेजान होने लगते है। कई बार तो इन कारणों की वजह से उनमे खून तक आने लगता है। इसके अलावा धुम्रपान आदि करने, होठों को चाटने से भी वे रूखे हो जाते है। तो बेहतर होगा की अगली बार इन सभी कारणों का विशेष ध्यान रखें।

बेजान होठों को ठीक करने के घरेलू उपाय :-

1. शहद और वैसलीन :

शहद के एंटी बैक्टीरियल गुणों के बारे में हम सभी जानते है और ये उन प्राकृतिक उपायों में से एक है जिनमे प्राकृतिक हीलिंग एजेंट पाए जाते है। जबकि वैसलीन पेट्रोलियम जेली त्वचा को रूखेपन से बचाकर उसे मुलायम करने में मदद करती है। और यदि इन दोनों सामग्रियों के मिश्रण का इस्तेमाल बेजान होठों के लिए किया जाए तो क्या कहने?

  • इस उपाय के लिए सबसे पहले शहद को अपने पुरे होठों पर फैला लें।
  • अब उस पर वैसलीन की एक पतली परत लगाकर 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें।
  • ये आपके होठों को शहद सोखने में मदद करेगा जिससे वे भीतर से मुलायम होंगे। जबकि वैसलीन उन्हें नमी प्रदान करके शहद को सूखने से रोकेगी।
  • उसके बाद किसी सूती कपडे की मदद से वैसलीन और शहद को साफ़ कर दें।
  • बेहतर परिणाम पाने के लिए एक हफ्ते तक इस उपाय का प्रयोग करें।

2. खीरा :

गर्मियों के दौरान ये सब्जी आपकी सबसे पसंदीदा हो जाती है। लेकिन क्या आप जानते की मदद से अपने बेजान होठों में भी जान लाइ जा सकती है। ये न केवल त्वचा नमी देने में मदद करता है बल्कि रंग को निखारने और tan हटाने में भी मदद करता है। तो अगर आपके होठों पर किसी तरह के दाग़ है तो एक बार इसका इस्तेमाल करके देखें।

  • इसके लिए खीरे को छीलकर उसकी slices काट लें।
  • अब उन टुकड़ों से अपने होठों को रगड़ें।
  • 15 मिनट तक ऐसा ही करते रहे। उसके बाद सामान्य पानी से धो दें।
  • ये आपके होठों को मुलायम बनाने के साथ-साथ उन्हें कोमल भी बनाएगा।

3. गुलाब की पंखुडियां :

गुलाब की पंखुड़ियों में त्वचा का रंग हल्का करने वाले तत्व पाए जाते है जो हमारे होठों को हाइड्रेट करने में भी मदद करते है। इसके साथ ही गुलाब होठों को कोमल और स्मूथ बानने में भी मदद करता है और उन्हें प्राकृतिक रंग प्रदान करता है।

  • इसके लिए कुछ घंटों के लिए गुलाब की पंखुड़ियों को दूध में भिगो कर रख दें।
  • बाद में इन्हें मैश करके एक मुलायम पेस्ट बना लें।
  • इसका इस्तेमाल अपने होठों पर करें।
  • 15-20 मिनट तक रखने के बाद ठंडे पाने से धो दें।

4. स्क्रब :स्क्रब भी है जरुरी

अपने होठों को बेहतर बनाने के लिए स्क्रब का इस्तेमाल करें। ये त्वचा को exfoliate करके डेड स्किन सेल्स से निजात दिलाने में मदद करता है। इसके साथ ही ये होठों के प्राकृतिक रंग को वापस लाने में भी मदद करता है और उन्हें मुलायम और कोमल बना देता है। स्क्रबिंग के लिए शुगर सबसे बेहतर प्राकृतिक उपाय है।

  • इसके लिए 2 चम्मच ब्राउन शुगर में ओलिव आयल की कुछ बूंद डालें।
  • अब उसमे आधा चम्मच शहद और मिला लें। अच्छे से मिलाने के बाद 5 मिनट तक इन्तजार करें। ये शुगर को मल्ट होने में मदद करेगा।
  • उसके बाद इस मिश्रण से अपने होठों को स्क्रब करें। थोड़ी देर तक स्क्रब करने के बाद गुनगुने पानी से साफ़ कर लें।

5. नींबू :

नींबू और चीनी डार्क और रूखे-बेजान होठों को ठीक करने के लिए प्रयोग किये जाने वाले उपायों में से एक है। जहां एक तरफ नींबू एक प्राकृतिक ब्लीच का काम करता है वहीं दूसरी तरफ शहद होठों को फ्री रेडिकल्स के हानिकारक नुकसान से बचाता है।

  • इसके लिए एक चम्मच नींबू के रस और शहद को मिला लें।
  • अब इसमें आधा चम्मच कास्टर आयल डाल लें।
  • अच्छे से मिलाने के बाद रोज रात सोने से पहले इसका इस्तेमाल अपने होठों पर करें।
  • बेहतर परिणामों के लिए 10 दिनों तक इस उपाय का प्रयोग करें। फायदा होगा।

6. एलोवेरा :

एलोवेरा में कई तरह के प्राकृतिक तत्व पाए जाते है जो फटे और बेजान होठों को ठीक करने में आपकी मदद कर सकते है। ये होठों के ऊपर मौजूद प्रोटेक्टिव लेयर को मजबूती देते है और रूखे-बेजान होठों को ठीक करते है। इसके लिए रोजाना रात सोने से पहले अपने होठों पर फ्रेश एलोवेरा जेल लगायें।

7. ओलिव आयल :

ओलिव आयल एक बेहतर और प्राकृतिक मॉइस्चराइजर और lubricant है। इसमें मौजूद फैटी acid रूखे और बेजान होठों को ठीक करके उन्हें नमी देकर मुलायम बनाने में मदद करते है। बेहतर परिणामों के लिए दिन में दो बार जैतून के तेल का प्रयोग करें।

8. अलसी के बीज का तेल :

अलसी के बीज के तेल में पाया जाने वाले फैटी acid त्वचा को पोषण देने में मदद करते है। ये तत्व लिप टिश्यू में जाकर उन्हें मुलायम और कोमल बनाने में मदद करते है। इसके लिए अपने बेजान होठों पर सीधे ही Flax seed oil लगा लें।

9. तेल :

कास्टर आयल और नारियल तेल दोनों में ही फैटी acid की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो रूखे और बेजान होठों में जान डालने का काम करते है। इसके लिए दिन में दो बार इनमे से किसी एक तेल का इस्तेमाल अपने होठों पर करें।

10. पानी :

हमारी सुन्दरता को बरकरार रखने के लिए पानी सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। ये हमारे शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ उसे स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। जबकि पानी की कमी के कारण होंठ बेजान और रूखे होने लगते ह। इसीलिए दिन भर में कम से कम 10 से 12 ग्लास पानी का सेवन करना चाहिए।

जुड़वां बच्चे पैदा होने के क्या कारण होते हैं?

एक ही प्रेगनेंसी के दौरान जन्म लेने वाले दो भ्रूण को हम जुड़वां कहते है, और ये भी दो तरह के होते है या तो वो एक जैसे होते हैं, या वो एक दूसरे से अलग होते है, जो बच्चे एक जैसे होते है, उन्हें वैज्ञानिक भाषा में “एकयुग्मनज/मोनोज़ाईगोटिक” जिसका मतलब होता है की वो एक ही युग्मनज से हुए है जो की विभाजित होकर दो भ्रूणों का रूप ले लेता है, या जो एक दूसरे से नहीं मिलते हैं जिन्हे वैज्ञानिक भाषा में “द्वियुग्मनज/डाईज़ाईगोटिक” आप कह सकते हैं, क्योंकि वो दोनों एक गर्भाशय में दो अलग अलग अंडो में और दो विभिन्न शुक्राणुओं द्वारा निषेचित होते हैं।

इन्हें भी पढ़ें:- जुड़वाँ बच्चा क्यों और कैसे होता है? पूरी जानकारी

जुड़वां बच्चे होने के चांस केवल तीन प्रतिशत महिलाओ को होता है, लेकिन ऐसा नहीं है की यदि आप चाहते है तो आप भी ट्विन्स को जन्म दे सकते है, परन्तु उसके लिए कुछ बातों का होना जरुरी होता है, जैसे की यदि महिला की उम्र अधिक हो, तो उसके जुडवा बच्चों को जन्म देने के चांस बढ़ जाते है, जो महिलाएं स्वास्थ्य रूप से अधिक वजन की होती है, फोलिक एसिड का सेवन करने से, महिलाओ के गर्भनिरोधक दवाइयों के सेवन से आदि, यदि आपकी भी इनमे से कोई स्थिति है तो आपके जुड़वां बच्चे को जन्म देने के चांस बढ़ जाते है, तो आइये जानते है, की जुडवा बच्चे होने के शुरुआती लक्षण क्या है।

जुड़वां बच्चे होने के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं:-

जुड़वां बच्चे होने की स्थिति एक बच्चे के जन्म से थोड़ी अलग होती है, और इसमें महिला को कई बार अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है, चेहाहे वो महिला के प्रेगनेंसी में वजन बढ़ने को लेकर हो या फिर डिलीवरी के समय आइये जानते है जुड़वां बच्चे गर्भ में होने पर क्या क्या लक्षण होते है।

सुबह के समय परेशानी:-

जुड़वां बच्चों के गर्भ में होने पर महिला को बहुत ज्यादा मोर्निंग सिकनेस होती है, ज्यादातर महिलायें प्रेगनेंसी के पहले चरण में उलटी, जी मचलाना जैसी समस्या का सामना करती है, परन्तु जुड़वां बच्चे के समय ये परेशानी महिला को ज्यादा उठानी पड़ती है।

वजन का बढ़ना:-

इस दौरान महिला का वजन भी अधिक बढ़ता है,क्योंकि गर्भ में एक शिशु का नहीं बल्कि दो शिशु का वजन होता है, साथ ही महिला का पेट भी बड़ा होता है, और कई बार डिलीवरी के बाद ट्विन्स के केस में ऐसा देखा जाता है, की उन बच्चों का वजन कम होता है।

ब्लीडिंग और स्पोटिंग का खतरा:-

कई बार महिलाओ को प्रेगनेंसी में देखा जाता है, की उन्हें ब्लीडिंग या स्पोटिंग होने लगती है, ऐसा ही जुड़वां बच्चों के केस में भी होता है, यदि आप भूरे रंग के धब्बे लगते है, तो ऐसा होना काफी सामान्य बात है, लेकिन पेट में दर्द या ब्लीडिंग अधिक होने लगती है, तो आपको डॉक्टर को जरुर दिखाना चाहिए, लेकिन जुड़वां बच्चों के केस में ऐसा कई बार हो जाता है।

जल्दी डिलीवरी और सिजेरियन के चांस ज्यादा होते है:-

जुडवा बच्चों के केस में ज्यादातर देखा जाता है, की महिला की डिलीवरी समय से पहले हो जाती है, और वो भी सिजेरियन तरीके से, क्योंकि कई बार शिशु का वजन अधिक होने के कारण या किसी और ने कारण की वजह से ऐसा हो जाता है।

भूख अधिक लगती है:-

जुड़वां बच्चों के समय आपको बहुत अधिक भूख लगती है, क्योंकि वो दोनों शिशु भी अपने पालन पोषण के लिए आप पर ही निर्भर करते है, जिसके लिए महिला को कभी भी अपने आहार में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए, और कभी भी आपको अपनी भूख को अनदेखा नहीं करना चाहिए और कुछ न कुछ जरुर खाते रहना चाहिए।

दो दिल की धड़कन:-

जन्म से पहले ही बच्चे के दिल की धड़कन को सुनना किसी भी माँ बाप के लिए सबसे यादगार लम्हा होता है, जन्म से पहले शिशु के दिल की धड़कन को सुनने के लिए डोपलर प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है, और अप नौवे हफ्ते में शिशु के दिल की धड़कन को साफ़ साफ़ सुन सकते है, और जुड़वां बच्चों की और वो भी अलग अलग, लेकिन आप गर्भ में इनकी पहचान को अलग अलग नहीं कर पाते है।

अनुवांशिक होने के कारण:-

जुडवा बच्चे के होने का कारण अनुवांशिक भी हो सकता है, इसका मतलब होता है की यदि आपके घर में पहले किसी के जुड़वां बच्चे हुए हो, या फिर आपने ही पहले जुड़वां बच्चों को जन्म दिया हो तो इसके चांस बढ़ जाते है।

जुड़वां बच्चों की चाह रखने वालो के लिए कुछ टिप्स:-

अधिक उम्र होने पर:-

जुड़वां बच्चे होने के चांस बढ़ जाते है, यदि आपकी उम्र तीस से चालीस के बीच में होती है तो, इसका कारण होता है जैसे आपकी उम्र बढती है, आपके ओवुलेटरी चक्र की सघनता कम होती है, जिसके कारण एक ही समय में दो बच्चे गर्भ में आने के चांस बढ़ जाते है, और आपकी जुड़वां बच्चों की चाह पूरी हो सकती है।

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन की मदद से:-

यह एक ऐसी तकनीक है जिसमे अंडे को बाहर निकालकर निषेचित किया जाता है, तो यदि आप भी इस तकनीक का सहारा माँ बनने के लिए ले रही है तो आप भी जुड़वां बच्चे यदि चाहती है, तो अपनी इस इच्छा को पूरा कर सकती है।

इन्हें भी पढ़ें:- IVF इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन या कृत्रिम गर्भाधान क्या होता हैं

विटामिन लें:-

वैसे तो सभी विटामिन आपको भरौर पोषण देने में मदद करते है, लेकिन यदि आप जुड़वां बच्चों की चाह रखती है, तो आपको फोलिक एसिड का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए, और यह सभी प्रेग्नेंट महिलाओ को दिया जाता है, परन्तु इसका सेवन एक दिन में 1000 मि.ग्रा से अद्गिक नहीं लेना चाहिए।

अपने वजन को बढ़ाएं:-

जिन लोगो का वजन स्वस्थ तरीके से बढ़ा हुआ होता है, उनके भी जुड़वां बच्चों को जन्म देने के चांस होते है, और अपने वजन को सही रखने के लिए आपको सभी मिनरल्स युक्त आहार का सेवन करना चाहिए, और आप यदि अपने वजन को स्वस्थ तरीके से बढ़ाना चाहती है, तो इस बारे में आप अपने डॉक्टर से भी राय ले सकती है।

बर्थ कण्ट्रोल पिल्स का सेवन करने से:-

कई महिलायें कुछ समय तक बच्चे को जन्म न देने के चक्कर से इन पिल्स का सेवन करती है, जिसके कारण जब वो इसे लेना बंद करती है, तो इसके कारण उनके ओवुलेशन पीरियड पर भी प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण कई बार गर्भ में दो अंडे निषेचन की क्रिया में भाग लेते है, और महिला के जुड़वां बच्चे के होने के चांस बढ़ जाते है।

डेरी प्रोडक्ट और रतालू का सेवन करने से:-

एक अध्यन के अनुसार जो महिलाएं अपनी प्रेगनेंसी से पहले डेरी उत्पादों का सेवन भरपूर करती है, उनके जुड़वां बच्चों को जन्म देने के चांस पांच प्रतिशत तक बढ़ जाते है, क्योंकि गाय के दूध में एक ऐसा तत्व पाया जाता है जो की गाय के लीवर में उत्पादित होता है, जिससे इसके चांस बढ़ जाते है, और यदि आप जुड़वां बच्चे चाहती है तो आपको rBGH हार्मोन वाली गायों के दूध का सेवन करना चाहिए, इसके अलावा रतालू का सेवन करने से भी ऐसा माना जाता है की आपको जुड़वां बच्चे होने की संभावना बढ़ जाती है।

तो ये हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करके आप जुड़वां बच्चों को जन्म दे सकती है, और साथ ही यदि आप चाहती है की आपके बच्चे जुड़वां हो तो ऊपर दिए गये टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है, साथ ही इसके बारे में अप एक बार चाहे तो डॉक्टर से भी राय ले सकती है, और यदि आप जुड़वां बच्चे चाहती है, तो आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप शारीरिक रूप से बिलकुल फिट हो।

इन्हें भी पढ़ें:- पेट में जुड़वाँ बच्चे है? ऐसे रखें ध्यान

 

गर्भावस्था में सफ़ेद पानी का आना

गर्भावस्था में सफ़ेद पानी का आना, जानिए इन कारणों से आता है गर्भावस्था में सफ़ेद पानी, प्रेगनेंसी में सफ़ेद पानी आने के कारण, प्रेगनेंसी में सफ़ेद पानी सही या गलत

प्रेगनेंसी के दौरान रोजाना महिला किसी न किसी नए अनुभव व् समस्या से जूझती है। बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला के खान पान से लेकर उनके शरीर में भी बहुत से बदलाव देखने को मिलते हैं। और इन्ही बदलाव में से एक है प्रेगनेंसी के दौरान महिला के प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद पानी का आना, यह काफी सामान्य होता है। जो की ज्यादातर महिलाओं में देखने को मिलता है, और यह प्रेगनेंसी की शुरुआत से आखिरी तक देखने को मिलता है। और प्राइवेट पार्ट से जब तक सफ़ेद पानी का स्त्राव ज्यादा न हो, इसका रंग खून जैसा न हो, इसमें से गंध न आए तब तक कोई डर की बता नहीं होती है।

प्रेगनेंसी में सफ़ेद पानी क्यों निकलता है

सफ़ेद पानी को ल्यूकोरिया के नाम से भी जाना जाता है, प्रेगनेंसी के दौरान सफेद पानी के आने का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि इसके कई कारण हो सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद पानी आने के कौन कौन से कारण होते हैं।

  • जब गर्भवती महिला के शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा बढ़ जाता है, और प्राइवेट पार्ट की तरफ रक्त का बहाव तेजी से होने लगता है, तो इस कारण सफ़ेद पानी अधिक आ सकता है।
  • गर्भ में पल रहे शिशु को संक्रमण से बचाव के लिए भी सफेद पानी का डिस्चार्ज पूरी प्रेगनेंसी के दौरान होता है।
  • यदि आपको यूरिन करने में परेशानी हो, जलन, खुजली महसूस हो, डिस्चार्ज में से ज्यादा गंध आए, तो इसका मतलब होता है की प्राइवेट पार्ट में कोई संक्रमण हो गया है।
  • यदि आपको प्राइवेट पार्ट से यूरिन की तरह सफ़ेद पानी आ रहा हो, साथ ही ब्लड भी महसूस हो, तो बिना देरी किये आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। क्योंकि यह प्रसव होने का संकेत होता है।

प्रेगनेंसी में सफ़ेद पानी आने से शिशु को कोई नुकसान होता है?

यदि आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान गंधहीन, हल्का चिपचिपा को गाढ़ा स्त्राव महसूस होता है तो इसके घबराने की कोई बात नहीं होती है। क्योंकि यह पानी गर्भाशय को सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह के संक्रमण से बचाव करने में मदद मिलती है। लेकिन यदि प्रेगनेंसी के किसी भी माह में यदि आपको यह स्त्राव अधिक महसूस हो तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। ओट तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

तो यह हैं गर्भवस्था के दौरान सफ़ेद पानी आने के कारण, और यह क्यों आता है। इसके अलावा यदि प्रेगनेंसी में कोई और भी समस्या हो तो आपको इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। और आपको हर एक चीज के लिए डॉक्टर से राय लेनी चाहिए ताकि गर्भ में पल रहे शिशु और गर्भवती महिला दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

डिलीवरी को आसान बनाने के तरीके

गर्भावस्था के नौ महीने

प्रेगनेंसी कन्फर्म होने से लेकर डिलीवरी तक का पूरा समय गर्भवती महिला के लिए खास होने के साथ बहुत सी परेशानियों से भरपूर होता है। क्योंकि इस दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण शारीरिक परेशानियों के साथ महिला हमेशा गर्भ में शिशु को लेकर परेशान रहती है की गर्भ में शिशु स्वस्थ है या नहीं, और इसके बाद जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है वैसे वैसे महिला इस बात को लेकर चिंतित रहती है की पता नहीं सामान्य प्रसव होगा या सिजेरियन डिलीवरी द्वारा शिशु का जन्म होगा। ऐसे में महिला के लिए प्रेगनेंसी का पूरा समय उतार चढ़ाव से भरपूर होता है जहां माँ बनने की ख़ुशी होती है वही कुछ परेशानियां भी हो सकती है, साथ ही शिशु की गर्भ में हलचल का पहले खास अनुभव होने के साथ डिलीवरी के समय शिशु स्वस्थ तो होगा इस बात को लेकर डर भी लगा रहता है।

डिलीवरी को आसान बनाने के टिप्स

डिलीवरी का समय पास आने पर महिला यह सोचकर की डिलीवरी के दौरान कोई परेशानी तो नहीं होगी, शिशु को कोई दिक्कत तो नहीं होगीं, नोर्मल डिलीवरी होगी या सिजेरियन डिलीवरी, अपने आप का तनाव में डाल सकती है। जिससे डिलीवरी के दौरान महिला की परेशानी कम होने की बजाय बढ़ सकती है। तो लीजिये आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं को न केवल डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद करते हैं बल्कि इससे आपको डिलीवरी को आसान बनाने में भी मदद मिलती है।

सोचना छोड़ दें

गर्भावस्था के दौरान मानसिक रूप से परेशान रहना न केवल महिला बल्कि शिशु की सेहत पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को प्रसव को लेकर सारी चिंता को छोड़ देनी चाहिए, और खुश रहकर इस समय को एन्जॉय करना चाहिए। क्योंकि ऐसा बिल्कुल नहीं होता है की एक मिनट में डिलीवरी हो जाये बल्कि डिलीवरी से पहले बॉडी कुछ संकेत देती है जैसे की पेट में दर्द, एमनियोटिक फ्लूड निकलना, भावनात्मक रूप से बदलाव आदि।

प्रसव की जानकारी लें

आज कल इंटरनेट एक ऐसी सुविधा है जहां आप आसानी से अपने सभी सवालों का जवाब जान सकते हैं, ऐसे में प्रसव को आसान बनाने के लिए उसे समझना जरुरी होता है। इसीलिए आपको डिलीवरी से जुडी सारी जानकारी इक्कठी करनी चाहिए। ताकि डिलीवरी के संकेत को समझने और डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानी को कम करके प्रसव को आसान बनाने में मदद मिल सके। आप चाहे तो घर के बड़े, अपनी सहेलियों से भी प्रसव से जुड़े सवाल पूछ कर अपनी परेशानी को हल कर सकती है।

डॉक्टर के संपर्क में रहें

गर्भावस्था के नौवें महीने में आपको हमेशा डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए, और बॉडी में किसी असहज लक्षण के महसूस होने पर, किसी दिक्कत का अनुभव होने पर, डिलीवरी से जुड़े टिप्स जानने के लिए आपको डॉक्टर से तुरंत राय लेनी चाहिए। डॉक्टर के लगातार संपर्क में रहने से आपको प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है।

तनाव से दूर रहें

डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन, बच्चे को डिलीवरी के समय कोई परेशानी तो नहीं होगी या फिर किसी को डिलीवरी के दौरान आई परेशानी के अनुभव को सुनकर आपको तनाव नहीं लेना चाहिए। बल्कि इस दौरान केवल अपने और शिशु के आने वाले पलों को सोचना चाहिए। और यदि महिला तनाव से दूर रहकर इस दौरान खुश रहती है तो इससे महिला को प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है।

अकेले न रहें

डिलीवरी का समय पास आने पर आपको अकेले नहीं रहना चाहिए बल्कि इस दौरान परिवार के साथ रहना चाहिए। क्योंकि अकेले रहने के कारण घबराहट व् चिंता अधिक होती है, और किसी के साथ होने पर डर को कम करने के साथ खुश रहने में मदद मिलती है, और किसी भी दिक्कत के कारण होने वाली परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।

आहार

अपने खान पान का इस दौरान महिला को अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि जितना महिला पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करती है। उतना ही महिला और शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है जिससे प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है। साथ ही आयरन की कमी को बॉडी में नहीं होने देना चाहिए क्योंकि खून की कमी के कारण डिलीवरी में दिक्कत आ सकती है, इसीलिए आयरन युक्त आहार को अपनी में भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए।

व्यायाम

इस दौरान महिला को हल्का फुल्का व्यायाम जैसे की सैर आदि करते रहना चाहिए। इससे महिला को फिट रहने के साथ बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर होने में मदद मिलती है। साथ ही व्यायाम करने से गर्भवती महिला को एक्टिव रहने में मदद मिलती है जिससे प्रसव में आने वाली दिक्कतों को कम करने प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है।

आराम करें

वजन बढ़ने के कारण महिला को काम करने में परेशानी होने के साथ बहुत जल्दी थकावट का अहसास भी हो सकता है। ऐसे में महिला को अपनी बॉडी को पूरा आराम देने के साथ भरपूर नींद लेनी चाहिए। इससे महिला को रिलैक्स महसूस होता है जो महिला को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

संकेत को समझें

प्रसव की जानकारी इकठा करने के बाद आपको प्रसव के संकेत का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यदि आपकी बॉडी में प्रसव का कोई लक्षण महसूस होता है तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास पहुँच जाना चाहिए ताकि किसी भी तरह की दिक्कत से बचे रहने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जो गर्भवती महिला के प्रसव को आसान बनाने में मदद करते हैं। तो यदि आप भी गर्भवती है और आपकी डिलीवरी होने वाली है तो आपको भी इन टिप्स का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि डिलीवरी के दौरान आने वाली किसी भी परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

पीरियड्स (माहवारी) आगे या पीछे कैसे करें?

लड़कियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी तब होती है जब वे पीरियड्स से गुजरती है। महीने के वो दिन किसी भी उम्र की महिला को परेशान करने वाले होते है। ऊपर से इस दौरान होने वाला पेट और कमर दर्द वाकई असहनीय होता है। ऐसे तो यह हर महीने होने वाली आम प्रक्रिया है जिससे सभी महिलाओं को गुजरना पड़ता है। परन्तु यह प्रक्रिया परेशानी का कारण तब बन जाती है जब आपको उस स्थिति में कहीं बाहर जाना पड़ जाए।

ऐसे में सभी सोचती है की कुछ दिनों के लिए पीरियड्स की डेट आगे पीछे कर ली जाए। जो सही भी है। लेकिन बहुत सी लड़कियां इसे सही नहीं मानती, उनका मानना है की इस तरह पीरियड्स की डेट डिले या प्रिपोंड करने से उनके अगले पीरियड्स पर असर पड़ता है। जबकि ऐसा नहीं है, यदि आप सही और प्राकृतिक तरीकों की मदद से पीरियड्स की डेट आगे पीछे करती है तो उसका कोई गलत असर नहीं होता।

पीरियड्स की डेट आगे पीछे करने के कारण :-

ऐसे तो सभी हर महीने इस परेशानी को झेलती ही रहती है लेकिन जब बात घर के किसी बड़े फंक्शन या कहीं बाहर जाने की आती है तो इस स्थिति में वे सभी इससे बचने के बारे में सोचने लगती है। इसके अलावा शादी का फंक्शन, कहीं घूमने जाना हो या कोई जरुरी काम हो तो भी महिलाएं इस समस्या से बचाने के बारे में सोचने लगती है। अगर आप भी उपरोक्त कारणों के अलावा किसी वजह से अपने पीरियड्स की डेट आगे पीछे करना चाहती है तो आप निम्नलिखित प्राकृतिक तरीकों का इस्तेमाल कर सकती है।

माहवारी (पीरियड्स) की डेट आगे करने के तरीके :-

वैसे तो आजकल बाजार में बहुत सी गोलियां मौजूद है जिनकी मदद से पीरियड्स की डेट डिले की जा सकती है लेकिन इनका सेवन करने से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है। यहाँ हम आपको कुछ प्राकृतिक और घरेलू तरीके दे रहे है जिनकी मदद से पीरियड्स की डेट आगे की जा सकती है।

व्यायाम करें :

यदि आप व्यायाम नहीं करती है तो आपको इसे शुरू करना होगा। और अगर आप पहले से ही व्यायाम कर रही है तो इसकी टाइमिंग थोड़ी बढ़ा दीजिये। इसके अलावा आप कोई खेल खेलकर भी आप अपनी समस्या को कुछ दिनों के लिए टाल सकती है।

दिमागी काम करें :

अगर आपको पीरियड्स की डेट आगे करनी है तो आपको उसके लिए स्ट्रेस वाले काम करने होंगे। दिनभर ऐसे कामों में लगे रहें जिससे दिमागी थकान हो। लेकिन ये उपाय केवल विशेष परिस्थितियों में ही इस्तेमाल करें क्योंकि स्ट्रेस लेने से हॉर्मोन में चेंजेस होते रहते है, जो पीरियड्स को आगे करने में मदद कर सकता है।

भोजन पर ध्यान दें :

पीरियड्स को आगे करने के लिए आपको अपने खाने पर भी ध्यान देना होगा। अर्थात आपको ऐसे भोजन का सेवन करना चाहिए जो हॉर्मोन में उत्तेजन पैदा न करें। मसालेदार और चटाकेदार भोजन खाने से बचें क्योंकि ये भोजन गर्मी पैदा करता है जिससे पीरियड्स जल्दी आती है। विशेष रूप से अदरक, लहसुन, मिर्च, काली मिर्च आदि से आदि से दूर रहें।

सेब का सिरका :

सेब का सिरका भी पीरियड्स की डेट आगे करने में आपकी मदद कर सकता है। इसके लिए 1 ग्लास पानी में 3 से 4 चम्मच सिरका डालें। और दिन में 3 से 4 बार इसका सेवन करें।

चने की दाल :

चने की दाल में प्रोटीन की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो पीरियड्स की डेट को आगे करने में काफी मदद करती है। इसके लिए आपको थोड़ी सी चने की दाल को फ्राई करके उसे मिक्सी में पीस लें। अब इस पाउडर का सूप बनाकर पियें। सूप बनाने के लिए गर्म पानी में पाउडर डालें और पका कर अगले पीरियड की ड्यू डेट से 7 दिन पहले लेना शुरू कर दें। बेहतर परिणामों के लिए सुबह खाली पेट इसका सेवन करें।

पार्सले की पत्तियां :parsley

यह एक विदेशी जड़ी-बूटी है जो भारत में भी पाया जाता है। वैसे तो इस हर्ब के बहुत से फायदे होते है लेकिन क्या आप जानती है की इसकी मदद से पीरियड्स की डेट को भी आगे किया जा सकता है। इसके लिए मुट्ठी भर पार्सले की पत्तियां लें और उन्हें 500 ml पानी में उबाल लें। अब इसमें थोडा सा शहद मिलाएं और छान कर पी लें। इसका इस्तेमाल दिन में 2 से 3 बार तब तक करती रहें जब तक आपको डेट आगे करनी है।

नींबू :

अगर आपको पीरियड्स की डेट कुछ दिन आगे करनी है तो उसके लिए कुछ दिनों तक अपने खाने में नींबू मिला कर खाएं। इससे या तो पीरियड्स बहुत कम होंगे या होंगे ही नहीं। आप चाहे तो नींबू पानी भी पी सकती है। लेकिन इसके बाद अगले पीरियड्स थोड़े दुखदाई होंगे।

पीरियड्स की डेट आगे करने के लिए इन चीजों को खाने से बचें :-

मासिक धर्म को आगे करने के लिए आपको अपने खान पान का ध्यान रखना होगा। आपको उन चीजों से परहेज करना होगा जो शरीर में हीट पैदा करें। क्योंकि शरीर में गर्मी बढ़ने से पीरियड्स आगे नहीं बल्कि समय से पहले ही हो जाएंगे। इन चीजों में अनार, डार्क चॉकलेट, गुड, अजवाइन, लाल मांस, पपीता, खजूर, गाजर, तिल, हल्दी, पाइनएप्पल आदि सम्मिलित है। अगर आपको पीरियड्स की डेट आगे करनी है तो इन चीजों के सेवन से परहेज करना होगा।

तो ये थे कुछ उपाय जिनकी मदद से पीरियड्स की डेट आगे पीछे की जा सकती है। लेकिन ध्यान रहे प्राकृतिक और एलोपेथिक उपायों का एक साथ प्रयोग करने से नुक्सान हो सकता है। इसलिए इन दोनों में से केवल एक ही उपाय को अपनाएँ।

बियर के फायदे आपके शरीर और त्वचा के लिए

बियर एक पेय पदार्थ है जिसमे की अल्कोहल की मात्रा विद्यमान होती है, जो की आपको शरीर को स्वस्थ ही नहीं बल्कि आपकी त्वचा और बालों को भी खूबसूरत बनाने के काम करता है, इसमें विटामिन बी, हॉप्स, सशाराइड्स और खमीर उपयुक्त मात्रा में पाया जाता है, जिसके कारण ये आपकी त्वचा को कोमल बनाने में मदद करता है, तो आइये जानते है की बियर का इस्तेमाल करने से आपको कौन कौन से फायदे होते है।

इन्हें भी पढ़ें:- करेला बहुत गुणकारी है इसके सेवन से ये फायदे होंगे!

beer

बियर का सेवन करने से आपके शरीर के सभी विषैले तत्व बाहर निकल जाते है, इसके अल्कोहॉलिक गुणों के कारण ये आपकी त्वचा के रोम छिद्रों को खुलने में मदद करता है, जिससे आपकी त्वचा कोमल व् मुलायम बनती है, साथ ही त्वचा से मुहांसे आदि की समस्या को भी दूर करने में मदद करता है, क्योंकि इसमें एंटी बेक्टेरियल गुण भी विद्यमान होते है, बियर पानी, स्टार्च और माल्टेड जौ और शराब बनाने वाली खमीर की तरह के तत्वो से मिलकर बनाई जाती है, और कई लोग तो इसे फेस पैक और फेशियल में मिक्स करके भी इस्तेमाल करते है, क्योंकि इसके कारण भी आपकी त्वचा पर ग्लो आता है, साथ ही बालों के लिए बियर कंडीशनर का काम करती है, जिसके कारण बालों को बाउंसी बनने में मदद मिलती है, तो आइये विस्तार से जानते है की बियर का प्रयोग करने से आपको कौन कौन से फायदे होते है।

बियर त्वचा को हाइड्रेट करता है:-

बियर आपकी त्वचा को अंदर से हाइड्रेट करने में मदद करता है, और साथ ही लोग रेगिस्तान चिलचिलाती गर्मी से अपनी त्वचा को हाइड्रेट रखने के लिए बियर का सेवन करते थे, जिसके कारण उनकी त्वचा की नमी बरकरार रहती थी।

बियर का प्रयोग करें हेयर कंडीशनर की तरह:-

बियर एक प्राकृतिक हेयर कंडीशनर की तरह इस्तेमाल किया जाता है, इसके लिए आप किसी भी बेहतर शैम्पू से बालों को धोने के बाद बियर से अपने बालों को धोइये, इसके कारण आपके बालों को चमकदार होने में मदद मिलती है, साथ ही बाल बाउंसी भी हो जाते है।

मृत कोशिकाओं को हटाता है:-

यदि आप अपनी त्वचा पर बियर का इस्तेमाल करते है, तो ये आपकी त्वचा से मृत कोशिकाओं को हटाने के बाद त्वचा के रोमछिद्रों को खोल कर त्वचा को चमकदार और मुलायम बनाने में मदद मिलती है, इसीलिए आपको इसका इस्तेमाल करते रहना चाहिए।

बालों को घना बनाने में मदद करती है:-

यदि आप पंद्रह दिनों में एक बार भी अपने बालों को धोने से वह घना दिखने दिखने लगते है, साथ ही बालों में एक अलग सी शाइन भी आती है, और बालों की क़्वालिटी भी निखर कर सामने आती है।

एक्ने से राहत दिलाता है:-

एक्ने से राहत दिलाने के लिए बियर का इस्तेमाल करने से बहुत फायदा होता है, इसीलिए जब भी आप फेस पैक या फेशियल का इस्तेमाल करती है, तो उसमे बियर को मिलाना न भूलें, क्योंकि इसके कारण आपकी त्वचा पर होने वाली एक्ने की समस्या से राहत मिलने में मदद मिलती है।

त्वचा के ph बैलेंस को मेन्टेन करता है:-

बियर का इस्तेमाल त्वचा पर करने त्वचा का ph बैलेंस भी सही रहता है, क्योंकि कई बार त्वचा का ph बैलेंस सही नहीं होता है, जिसके कारण त्वचा तेलीय या रूखी सुखी होती है, ऐसे में बियर का इस्तेमाल करने से ph बैलेंस को मेन्टेन करके रखता है।

उम्र कम लगती है:-

इस में एंटी ऑक्सीडेंट्स और विटामिन बी मौजूद होता है, जिसके कारण आपकी त्वचा से ये आपके बुढ़ापे को छीन लेता है, और त्वचा में जान डाल देता है, इसीलिए यदि आपकी उम्र तीस है तो आपको इसका इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

स्टोन की समस्या से निजात दिलाता है:-

बियर का सेवन करने से आपके शरीर से सभी विषैले पदार्थ यूरिन के रास्ते बाहर निकल जाता है, और साथ ही यह गुर्दे में पथरी को हटाने के लिए एक अच्छा उपाय है, जिन व्यक्तियों को गुर्दे में पत्थरी होती है उन्हें बियर का सेवन करने से आसानी से इस समस्या से राहत दिलाई जा सकती है।

हार्ट अटैक का खतरा कम होता है:-

बियर का सेवन करने से हार्ट अटैक का खतरा भी कम होता है, क्योंकि इसमें फोलिक एसिड विद्यमान होता है, जो आपके शरीर में रक्चचाप को सही रखता है, जिसके कारण आपको हार्ट अटैक आने की सम्भावना कम हो जाती है।

फैट को कम करता है:-

इसमें में ऐसे घुलनशील फाइबर होता है, जो की आपके शरीर पर जमी चर्बी को कम करने में मदद करता है, और आपको फिट रहने में भी मदद करता है, और आपका मोटापा भी कण्ट्रोल होता है।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है:-

इसका का सेवन करने से आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को नियंत्रित होने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपको कोलेस्ट्रॉल के कारण होने वाली हानि से बचाया जा सकता है।

तो ये कुछ फायदे है जो आपको बियर का इस्तेमाल करने से होते है, यदि आप भी इन फायदों को उठाना चाहते है, तो आपको बियर का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण आपकी त्वचा से जुडी बहुत सी परेशानियों का हल निकलता है, जिससे त्वचा में जान आती है, साथ ही इसके कारण आपके बालों को भी घना, चमकदार पर शाइनी बनने में मदद मिलती है, और अपने शरीर से विषैले तत्वो को बाहर निकालने में मदद करते है।