Home Blog Page 116

पैर की मोच ठीक करने के उपाय

Remedies for Ankle Sprain and Swelling 

पैर की मोच ठीक करने के उपाय, Remedies for Ankle Sprain and Swelling, natural remedies for leg and ankle sprain, Ankle Sprain Treatment, Causes of ankle sprain 

आज के समय में हर कोई भाग दौड़ में लगा हुआ है किसी को पैसा कमाने की जल्दी है तो किसी को प्रतिष्ठा कमाने की। किसी को गाड़ी खरीदनी है तो किसी को घर। जिसके लिए वे दिन रात मेहनत करते रहते है। और इसके वे अपनी ओर ध्यान देना भूल ही जाते है। लेकिन कई बार इस भाग दौड़ करने के चलते आपके पैरों में मोच आ जाती है। जो जोड़ों से संबंधित एक आम समस्या है और यह किसी को भी हो सकती है।

इस समस्या के होने के पर आपके पैरों के लिगामेंट्स जरूरत से ज्यादा खींच जाते है जिसके कारण उन्हें नुकसान होता है और आपके पैर में दर्द और सूजन आ जाती है। मोच आने के बाद चलने फिरने में काफी परेशानी होती है। क्योंकि ये समस्या पैर के सबसे निचले जोड़ पर होती है। वैसे इस समस्या के होने का मुख्य कारण अधिक भार उठाना, अचानक चलते चलते पैर मुड़ जाना या दौड़ते समय पैर मुड़ जाना या भगते हुए गिर जाना आदि होते है।

Read More : फटी एड़ियों का इलाज 

वैसे तो ये समस्या कुछ ही समय बाद मालिश आदि करने से अपने आप ही ठीक हो जाती है लेकिन कई बार ये काफी दिनों तक भी ठीक नहीं होती। इसके अलावा ऐसे भी बहुत लोग है जो अक्सर मोच आने के कारण परेशान रहते है। अगर आपके साथ भी ऐसी को परेशानी है तो निश्चिन्त हो जाएं क्योंकि आज हम आपको कुछ ऐसे आसान और घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे है जिनका प्रयोग करके आप इस समस्या का उपचार कर सकते है। और इन उपायों के लिए आपको बहुत से पैसे खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी।ankle sprain swelling

लेकिन ध्यान रहे अगर उपाय का प्रयोग करने के 1 से 2 दिन बाद भी दर्द व् सूजन में आराम नहीं मिले तो तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से जाकर मिलें। क्योंकि हो सकता है जिसे आप मोच समझ रहे हो वो समस्या कुछ और ही हो। तो आइये अब जानते है उन उपायों के बारे में

मोच ठीक करने के घरेलू उपाय :-

मोच आ जाने पर सर्वप्रथम इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए की जिस स्थान पर मोच आयी है उसे तुरंत आराम दें उसे ज्यादा हिलाय डुलाय नहीं ऐसा करने से दर्द और सूजन बढ़ सकती है। इसलिए पूरा आराम करें। साथ ही नीचे बताये गए उपायों का भी प्रयोग करें।

1. बर्फ से सिकाई :

जिस प्रकार गर्म सिकाई बड़े से बड़ा दर्द ठीक कर देती है उसी प्रकार बर्फ की सिकाई भी सूजन, दर्द और मोच में आराम देने का काम करती है। इसके प्रयोग के लिए बर्फ के टुकड़ों को किसी तौलिया या मोटे कपडे में लपेटकर दर्द वाली जगह पर 10 से 15 मिनट के लिए रख दें। दिनभर में 3 से 4 बार उपाय का प्रयोग करने से आराम मिलेगा।

2. पट्टी करें :

सूजन को बढ़ने से रोकने के लिए आप मोच वाले स्थान पर कपडे की बैंडेज का इस्तेमाल कर ससकते है। ऐसा करने से मोच के कारण होने वाले दर्द में कमी आएगी और आपके पैरों पर जोर भी नहीं पड़ेगा। इसके लिए आप मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली क्रेप बैंडेज का भी इस्तेमाल करें। लेकिन ध्यान रहे ज्यादा टाइट न हो। पुरे दिन इसे पहन कर रखे और रात्रि के समय उतार दें।

3. हल्दी :

हल्दी में मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी ऑक्सीडेंट और अन्य पोषक तत्व दर्द के साथ साथ सूजन को भी कम करने में मदद करते है। ये न केवल मोच अपितु जोड़ों के ादर्द में भी आराम दिलाने में मदद करता है। इसके लिए आप हल्दी वाले दूध का सेवन कर सकते है। या हल्दी में निम्बू मिलाकर उसे थोड़े गर्म पाने में उबालकर पेस्ट बना लें। यह सूजन में भी आराम देने में मदद करेगा। इसके अलावा आप हल्दी, थोड़े से चुने और पानी को एक साथ मिलाकर भी मोच के लिए प्रयोग कर सकते है।

4. लहसुन और तेल :

लहसुन की एंटी फंगल और एंटी इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टी मोच के कारण होने वाले दर्द और सूजन को कम करके आराम देने का काम करती है। उपाय के लिए लहसुन का रस निकालकर उसमे 2 चम्मच नारियल या बादाम के तेल को मिलाएं। अब इस मिश्रण को हल्का गर्म करके मोच पर लगाकर मालिश करें। दिन में 2 से 3 बार प्रयोग करने से आराम मिलेगा।

5. सेंधा नमक :

पिछले काफी समय से मोच ठीक करने के लिए इस उपाय का प्रयोग किया जा रहा है।इसमें मौजूद गुण मांसपेशियों को आराम देते है जिससे सूजन और दर्द में कमी आती है। इसके लिए एक बाल्टी में हल्का गुनगुना पानी ले और उसमे एक कप सेंधा नमक मिलाएं। अब इस बाल्टी में अपना पैर आधा घंटे तक डुबाएं रखें। दिन में 2 बार ऐसा करने से आपकी मोच के दर्द में आराम मिल जाएगा।

6. प्याज :

सुनने में थोड़ा अटपटा है लेकिन वास्तव में प्याज भी आपकी मोच से संबंधित समस्यायों को दूर करने की क्षमता रखती है। इसमें मौजूद दर्द निवारक गुण और सूजन दूर करने वाले गुण दर्द और सूजन में आराम दिलाते है। इसके लिए प्याज के बारीक टुकड़े काटकर इन्हे किसी पतले कपडे में बंद करके मोच वाले स्थान पर 2 घंटों के लिए बांध दें। आप चाहे तो प्याज के रस का भी इस्तेमाल कर सकते है।

7. पत्ता गोभी :

यह उपचार अक्सर मोच आने या हड्डी टूटने के कारण आने वाली सूजन से छुटकारा पाने के लिए किया जाते है। इसके इस्तेमाल के लिए गोभी के पत्तों को हल्का गर्म करके मोच वाले स्थान पर लगाकर बैंडेज से बांध दें। आधा घंटे तक बंधे रहने दें और उसके बाद हटा दें। दिन में 2 बार प्रयोग करने से सूजन में आराम मिलेगा।

तो ये थे कुछ घरेलू उपाय जिनकी मदद से आप अपने पैरों की मोच को कुछ ही समय में ठीक कर सकते है। बस आपको उपायों का प्रयोग सही तरीके और सही समय पर करना है। जिससे वे अपना असर दिखा सके। और हां, जैसा की हमने बताया 2 दिन में लाभ न मिलने पर तुरंत डॉक्टरी जाँच कराएं।

ट्रांसजेंडर बच्चे कैसे पैदा होते है?

ट्रांसजेंडर बच्चे कैसे पैदा होते है, ट्रांसजेंडर शिशु, ट्रांसजेंडर बच्चों का जन्म, ट्रांसजेंडर कैसे बने बच्चे, ट्रांसजेंडर शिशु के जन्म का कारण, क्यों कोई बच्चा बनता है ट्रांसजेंडर, कैसे कोई शिशु बनता है ट्रांसजेंडर, ट्रांसजेंडर होने की असल वजह क्या है,ट्रांसजेंडर बच्चे कैसे होते है, ट्रांसजेंडर बच्चों का जन्म कैसे होता है, ट्रांसजेंडर बच्चों के जन्म की वजह, ट्रांसजेंडर बच्चे क्यों होते है 

ट्रांसजेंडर वे लोग होते है जिन्हे न तो पुरुष समझा जाता है और न हो महिला। क्योंकि उनका शरीर पुरुष जैसा होता है लेकिन आदतें और हाव भाव महिलाओं जैसे होते है। हमारे समाज में उन्हें किन्नर और हिजड़े के नाम से बुलाया जाता है। डॉक्टरों की माने तो ट्रांसजेंडर लोगों में महिला और पुरुष दोनों के ही गुण पाए जाते है।

ऊपर से पुरुष दिखाई देने वाले व्यक्ति में इंटरनल ऑर्गन और गुण महिलाओं जैसे हो सकते है उसी प्रकार ऊपर से महिला जैसे दिखने वाले किसी व्यक्ति में पुरुषों वाले गुण और गुप्तांग हो सकते है।

कैसे कोई शिशु बनता है ट्रांसजेंडर?

डॉक्टर के अनुसार गर्भावस्था के पहले तीन माह में शिशु का लिंग बनता है। हालांकि, अधिकतर मामलों में शिशु के ट्रांसजेंडर होने की वजह पता नहीं लग पति लेकिन शिशु के लिंग निर्धारण की प्रक्रिया के दौरान किसी चोट का लग्न, टॉक्सिक खान पान, हार्मोनल प्रॉब्लम, जैसी वजहों के कारण पुरुष या महिला बनने की बजाय दोनों ही लिंग के ऑर्गन्स के गुण आ जाते है।

क्या करें?

डॉक्टर की माने तो, प्रेग्नेंसी के शुरूआती तीन महीने बहुत महत्वपूर्ण होते है इसीलिए इस दौरान बहुत अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। लेकिन फिर भी कई बार लापरवाही बरतने और ध्यान न रखने के कारण लोगों को ट्रांसजेंडर बच्चे हो ही जाते है। जिनके कारण के बारे में जानना बहुत मुश्किल होता है। इसीलिए आज हम आपको ट्रांसजेंडर बच्चों के पैदा होने के कारणों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है। ताकि आप अपनी प्रेगनेंसी के समय इन गलतियों को न करें।

इन वजहों से पैदा होते ट्रांसजेंडर बच्चे :-

1. बुखार :

प्रेग्नेंसी के शुरूआती 3 महीने में अगर महिला को बुखार आया हो और उसमे किसी हैवी मेडिसिन का सेवन किया हो तो ट्रांसजेंडर बच्चे की संभावना हो सकती है।

2. दवाएं :pregnant women

प्रेग्नेंसी के दौरान यदि महिला ने किसी ऐसी दवा का सेवन किया हो जो शिशु के लिए हानिकारक हो सकती है जैसे Teratogenic Drug आदि।

3. टॉक्सिक फ़ूड :

अगर इस दौरान महिला ने किसी ऐसे फ़ूड का सेवन किया हो जिनमे टॉक्सिन्स की मात्रा बहुत अधिक है तो शिशु को नुकसान हो सकता है। जैसे की केमिकल से बने या पेस्टीसिड्स फ्रूट और वेजिटेबल।

4. एक्सीडेंट / बिमारी :pregnancy

अगर प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में माता का कोई एक्सीडेंट या गंभीर बिमारी हुई हो तो भी शिशु के ऑर्गन्स को नुकसान पहुँच सकता है।

5. जेनेटिक प्रॉब्लम :

10-15% मामलों में जेनेटिक डिसऑर्डर के कारण शिशु के लिंग निर्धारण पार असर पड़ता है।

6. अज्ञात / इडियोपैथिक :pregnancy

ट्रांसजेंडर बच्चे पैदा होने के अधिकतर मामले इडियोपैथिक होते है यानी इनके कारणों का पता नहीं चल पाता।

7. एबॉर्शन की दवा :

यदि महिला ने बिना डॉक्टरी सलाह के एबॉर्शन की दवा खाई हो या किसी घरेलू उपाय का इस्तेमाल किया हो तो भी असर बच्चे के लिंग निर्धारण पर पड़ता है।

इस तरह रखें अपना ध्यान :-

  • बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा न खाएं। बुखार या दर्द जैसी आम समस्या के लिए भी नहीं।
  • हेल्थी डाइट लें। किसी भी तरह के टॉक्सिक फ़ूड या ड्रिंक का सेवन न करें हो सके तो उन्हें अवॉयड ही करें।
  • थाइराइड, डायबिटीज, मिर्गी जैसी समस्याओं के लिए डॉक्टरी सलाह के बाद ही प्रेगनेंसी प्लान करें।Pregnant
  • प्रेगनेंसी के शुरूआती 3 महीनों में बुखार या किसी अन्य समस्या के होने पर बिना समय गवाएं डॉक्टर को दिखाएं।
  • प्रेगनेंसी के दौरान शराब, सिगरेट या अन्य नशीले उत्पादों के सेवन से बचें। नींद की दवा डॉक्टरी सलाह के बाद ही लें।

पीरियड्स में कम ब्लीडिंग होने के कारण

0

आजकल के बदलते लाइफस्टाइल के कारण महिलाओ में पीरियड्स की प्रॉब्लम आम हो गयी है। किसी को हैवी ब्लीडिंग और किसी को कम ब्लीडिंग के प्रॉब्लम सुनने में बहुत ही साधारण लगती है। पर इन दोनों ही चीज़ो की अपनी अपनी अलग वजह हो सकती है।आईये आज बात करते है पीरियड्स में होने वाली कम ब्लीडिंग की। कम ब्लीडिंग होने के के कारण है जैसे की सही समय पर ना खाना, तनाव, किसी गंभीर बीमारी का होना , मीनोपॉज के नजदीक पहुंचना व अन्य। आइये डिटेल में जानते है इन कारणों के बारे में।

१. उम्र

  • पीरियड्स के दौरान कम ब्लीडिंग होने की एक ख़ास वजह है, उम्र।
  • १४ से २८ की उम्र में ब्लीडिंग का फ्लो सही होना चाहिए। शुरुआत में जब पीरियड्स शुरू होते है तो पहले एक और दो साल कम ब्लीडिंग हो सकती , परन्तु लगातार आगे भी कम ब्लीडिंग होती है तो कुछ विशेष समस्या हो सकती है। ऐसे में डॉक्टरों से मिलना सही रहता है।
  • २८ से ३८ साल की उम्र में, पहले की उपेक्षा कम ब्लीडिंग हो सकती है। परन्तु बहुत ज्यादा कम ब्लीडिंग और पेट में दर्द भी रहे तो डॉक्टर से मिल लेंगे जरुरी है।
  • ३८ से ५० की उम्र में मीनोपॉज वाली स्तिथि नजदीक होती है। ऐसे में हार्मोन्स में बदलाव होने लगता है, जिसके कारण भी कम ब्लीडिंग या पीरियड्स में ज्यादा अंतराल आने लगता है। इसी समय को प्री मीनोपॉज भी कहते है।

२. तनाव

  • तनाव से महिलाओ के होर्मोनेस पर अत्याधिक असर पड़ता है। जिससे पूरी पीरियड्स साइकिल असंतुलित हो जाती है ऐसे में पीरियड्स के दौरान कम ब्लीडिंग ही होती है।
  • यदि आप ८-९ घंटे की नींद भी पूरी नहीं लेते तो आपके शरीर में कोर्टिसोल ज्यादा मात्रा में बढ़ने लगता है ये एक स्ट्रेस हॉर्मोन है, जो की आपकी पीरियड साइकिल को बिगाड़ देता है।
  • हालाँकि ऐसा देखा गया है, जैसे ही तनाव का असर कम होता है , वैसे ही पीरियड्स नार्मल फ्लो में आ जाते है।

३. अनियमित खानपान

  • यदि महिलाये समय पर खाती पीती नहीं, जरुरी पोषक तत्व को अपने भोजन में शामिल नहीं करने से भी कम ब्लीडिंग होती है।
  • जरुरी है की हरी सब्जिया , फल, दूध , दही, अंडे , सूखे मेवा को भी अपने भोजन में शामिल करे।

४. हेल्थ प्रोब्लेम्स

  • अगर आपको थाइरोइड बीमारी है, जो की महिलाओ को आमतोर पर होती है, तो ऐसे में भी पीरियड्स में कम ब्लीडिंग होती है।
  • यदि किसी महिला को पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम है, आम भाषा में अंडाशय में ग्रंथियों का बनना , ऐसी स्तिथि में भी पीरियड्स खुल कर नहीं होते।
  • सर्वाइकल स्टेनोसिस जैसी हेल्थ प्रॉब्लम में भी ब्लीडिंग कम ही होती है
  • खून की कमी के कारण भी ब्लीडिंग खुल कर नहीं होती। जो लोग एनिमिक होते है उन्हें ये प्रॉब्लम अक्सर रहती है।

५. बर्थ कण्ट्रोल पिल्स

जो महिलाये बर्थ कण्ट्रोल पिल्स का इस्तेमाल करती है , उनके शरीर में अंडे पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते, ऐसे में भी ब्लीडिंग कम ही होती है।

६. स्तनपान करवाना

जो महिलाये बच्चो को दूध पिलाती है , उनके शरीर में भी अंडे सृजन कम होने लगता है। तो ऐसे में भी ब्लीडिंग कम होती है।

बच्चों का दिमाग तेज करने के लिए क्या-क्या खिलाना चाहिए?

बच्चों की परवरिश माँ-बाप के लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है, इसलिए सभी पेरेंट्स इसमें जरा भी लापरवाही नहीं बरतते। हर कोई चाहता है की उनका बच्चा अच्छे से पढाई करें, खेलकूद के साथ-साथ अन्य एक्टिविटीज में भी भाग ले। लेकिन कई बार बच्चे की शारीरिक और मानसिक अस्वस्थता के कारण वे पढाई में उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं दे पाता जितना की उसे देना चाहिए। उम्र के हिसाब से हर बच्चे का दिमाग विकसित होता है। परन्तु हर बार केवल प्राकृतिक परिवर्तनों पर निर्भर रहना भी ठीक नहीं।

अगर बच्चे को पढाई में आगे बढ़ाना है तो उसके लिए उसके दिमाग का तेज होना बहुत जरूरी है। जिसके लिए सिर्फ दूध ही पर्याप्त नहीं है।जी हां, बच्चे का दिमाग तेज करने के लिए केवल दूध ही काफी नहीं है क्योंकि दूध से उसे केवल कैल्शियम और प्रोटीन मिलता है जिसके कारण अन्य पोषक तत्वों की जरूरत अधूरी ही रह जाती है। इसके अलावा जंक-फ़ूड भी बच्चे का पढाई में ध्यान नहीं लगने का एक बड़ा कारण है।

आजकल के बच्चों को खाने की किसी भी चीज की तुलना में जंक फ़ूड ज्यादा अच्छे लगते है जो उनके मानसिक और शरीरिक विकास पर प्रभाव डालते है। छोटी उम्र में बच्चे को ऐसे खाद्य पदार्थ खिलाने चाहिए जो उनके विकास में सहयोग करें। इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों (फूड्स) के बारे में बता रहे है जिनका सेवन करके बच्चे का दिमाग तेज होने लगेगा। इन सभी खाद्य पदार्थों में वे सभी जरुरी पोषक तत्व है जो एक बच्चे के दिमागी विकास और उसे तेज के लिए चाहिए होते है। तो आइए जानते है उनके बारे में…..

बच्चों का दिमाग तेज करने के लिए उन्हें ये खिलाएंबच्चों का दिमाग तेज के लिए ये खिलाएं

1. अंडे से होगा सेल डेवलपमेंट :

अंडों में विटामिन्स की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो बच्चे के दिमागी विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। इनके सेवन से दिमाग के सेल्स (कोशिकाएं) अच्छी तरह से विकसित होती है जिससे बच्चे का दिमाग भी तेज चलने लगता है। इतना ही नहीं अंडे के सेवन से बच्चों की मेमोरी भी बढती है और शरीरिक रूप से फिट रहने में भी मदद मिलती है।

2. स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी दिमाग के लिए अच्छी :

दोनों बेरीज में एंटी ओक्सिडेट्स की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो दिमाग के कार्य करने की क्षमता को बढाता है। इतना ही नहीं स्वाद में टेस्टी होने के चलते बच्चे भी इन्हें बड़े शौक से खाते है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी ये बहुत लाभकारी होती है।

3. दही से होगा सही विकास :

दही का नियमित सेवन करना केवल दिमाग ही नहीं अपितु स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी होता है। यह बच्चों के दिमाग के सेल्स को फ्लेक्सीबल (लचीला) बनाता है। जिससे दिमाग के सिग्नल लेने और तुरंत प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढती है। और बच्चा सभी चीजें अच्छी तरह याद रख पाता है।

4. ड्राई फ्रूट्स से चलेगा दिमाग :

बच्चों को नियमित रूप से ड्राई फ्रूट्स का सेवन कराना चाहिए। इससे उनके दिमाग का सही विकास होता है। वैसे तो आप उन्हें केवल ड्राई फ्रूट्स भी खाने के लिए दे सकते है लेकिन अगर इन्हें दूध में मिलाकर देंगे तो दिमाग और अच्छा काम करेगा। बादाम खिलाने के लिए रात में बादाम भिगो लें और सुबह उन्हें छीलकर खिलाएं।

5. शरीरिक और मानसिक विकास के लिए दूध :

शरीर और मस्तिष्क के विकास के लिए दूध बहुत जरुरी होता है खासकर बच्चों के लिए। क्योंकि इसमें कैल्शियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा दूध और दूध से बनी चीजों का नियमित सेवन करने से भी बच्चों का दिमाग तेज किया जा सकता है।

6. ओट्स है दिमाग के लिए फ्यूल :

ओट्स दिमाग के लिए एक जरुरी इंधन के रूप में कार्य करता है जो दिमाग को बेहतर तरीके से काम करने और तेज चलने में मदद करता है। इतना ही नहीं ओट्स में फाइबर की भी अच्छी मात्रा पाई जाती है जो दिमागी विकास के लिए जरुरी होता है। यह विटामिन ई, विटामिन-बी, पोटैशियम और जिंक आदि का भी अच्छा स्त्रोत है।

7. मछली करेगा दिमागी विकास :

अगर आप non-veg है तो आप अपने बच्चे के दिमागी विकास के लिए उसे मछली खिला सकते है। इसमें विटामिन-डी और ओमेगा-3 की अच्छी मात्रा पाई जाती है। जजों बच्चे की याददाश्त और याद रखने की क्षमता को बढ़ाती है। इसके अलावा मछली में बच्चे के दिमाग को विकसित करने के लिए आवश्यक मिनरल्स भी पाए जाते है।

8. सेब से नहीं होगी कोई दिमागी समस्या :

ऐसे तो आप सभी अपने बच्चे को सेब खाने के लिए देती होंगी लेकिन क्या आप जानती है की इनके सेवन से बच्चे को किसी तरह की दिमागी समस्या नहीं होती। जी हां, इनमे एंटी ओक्सिडेंट्स की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो बच्चों में भूलने की बीमारी उत्पन्न नहीं होने देती।


बच्चों का दिमाग तेज करने के लिए क्या खिलाना चाहिए, याददाश्त तेज करने के उपाय, आहार जो करें बच्चों का दिमाग तेज, बच्चों के तेज दिमाग के लिए फूड्स, बच्चों का दिमाग तेज करने के उपाय, बच्चों को तेज दिमाग के लिए क्या खिलाएं, बेबी का माइंड डेवलपमेंट, बच्चों का दिमाग तेज करना, बच्चों का विकास, दिमाग कैसे तेज करे

वजन कैसे घटाएं? ये हैं उपाय

How To Loose Weight In 1 Month?

वजन कैसे घटाएं ये हैं उपाय, How to Lose Weight, Tips to Lose weight in hindi, Wajan ghtane ke tarike, 1 mahine me wajan kaise kam kare, Weight loss tips

मोटापा वर्तमान की एक आम समस्या बनता जा रहा है जो हर किसी को अपने चपेट में लिए जा रही है। बच्चा हो या बड़ा सभी इस समस्या से परेशान दिखाई पड़ते है। जिसके चलते वे न तो ठीक प्रकार से कोई काम कर पाते है और न ही ठीक तरह से आराम कर पाते है। बढ़ा हुआ वजन न केवल आपके लिए नुकसानदेह होता है बल्कि सामने वाले लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है।

ऐसे में इससे छुटकारा पाना बेहद जरुरी हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी इसके बढ़ने के पीछे के कारणों के बारे में सोचा है? शायद नहीं, दरअसल मोटापा हाल के हाल होने वाली समस्या नहीं है बल्कि पिछले कई समय से की जाने वाली लापरवाहियों का नतीजा होता है। वास्तव में जब हम भोजन से बनने वाली ऊर्जा का सही यूज नहीं कर पाते तो यह ऊर्जा शरीर में एकत्रित हो जाती है। जो आगे चलकर मोटापे की वजह बनती है।

Read more : गर्दन का मोटापा दूर करने के उपाय

इस बात का सीधा सा उदाहरण है आस पास काम करने वाले मजदुर। अपने भी बहुत से मजदूरों को देखा होगा लेकिन क्या कभी किसी का पेट बढ़ा हुआ देखा है?? नहीं! क्योंकि वे जितना भोजन खाते है उससे अधिक शारीरिक परिश्रम करते है जिसके कारण उन्हें भोजन से मिलने वाली ऊर्जा प्रयोग हो जाती है। और जब शरीर में कोई अतिरिक्त ऊर्जा नहीं होगी तो मोटापे का तो सवाल ही नहीं उठता।

लेकिन आप और हम जैसे कई लोग पेट भर कर खाना तो खा लेते है लेकिन उसके मुताबिक शारीरिक परिश्रम नहीं करते। जिसके कारण दिनों दिन हमारे शरीर पर चर्बी इकट्ठी होने लगती है। इस स्थिति में इससे निजात पाना बहुत जरुरी हो जाता है। यहाँ हम आपको वजन कम करने / चर्बी घटाने / मोटापा कम करने के कुछ उपाय बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप अपनी इस समस्या को 1 महीने के भीतर कुछ कम कर सकते है। तो आइये जानते है इन उपायों के बारे में –

वजन कम करने की टिप्स :-

1. खूब सारा पानी पियें :

पानी हमारे मोटापे को कम करने में मदद कर सकता है। इसके लिए दिन भर में कम से कम 13 लीटर पानी का सेवन करें विशेषकर भोजन करते समय। इसके लिए खाना खाने से 20-25 मिनट पहले या खाना खाने से पहले पेट भरकर पानी पी लें। इससे भूख कम लगेगी और आप कम खाना खाएंगे। जिससे आपका मोटापा नियंत्रित होने लगेगा।

2. ब्लैक कॉफ़ी :

इसमें बहुत से एंटी ऑक्सीडेंट्स पाए जाते है जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते है। एक शोध में पाया गया है की इसमें मौजूद कैफीन मेटाबोलिज्म को बूस्ट करने में मदद करता है और साथ ही एक्स्ट्रा फैट को बर्न करने में भी मदद करता है। तो आप भी ब्लैक कॉफ़ी का सेवन शुरू कर दें।

3. काली चाय या हरी चाय :

ग्रीन टी और ब्लैक टी भी आपके वजन को नियंत्रित करने में काफी मदद करती है। यह न केवल आपके मेटाबोलिज्म को बूस्ट करती है अपितु चर्बी कम करने में भी मदद करती है।

4. फ़ास्ट फ़ूड को न :fast-food

बाजार के खाने में फैट की बहुत अधिक मात्रा पाई जाती है जो शरीर के लिए नुकसानदायक होती है। इन चीजों में फ़ास्ट फ़ूड, समोसा, कचोरी, चिप्स, मोमोस, चाउमीन आदि सम्मिलित है। अगर आप पतले होना चाहते है तो आपको इन चीजों को त्यागना होगा।

5. दोपहर की नींद ठीक नहीं :

जितनी नींद लेनी है उतनी एक ही बार रात में ले लें। क्योंकि दोपहर में सोने से भी मोटापा बढ़ता है। रात्रि में सही समय से सोने की आदत डालें और प्रातः जल्दी उठे, स्वस्थ शरीर के लिए 8 घंटे की नींद पर्याप्त होती है। तो उतनी ही लें।

6. हरी सब्जियां :

हरी पत्तेदार सब्जियां, जैसे पालक, सरसों, मेथी, बथुआ, गोभी आदि भी वजन को बढ़ने से रोकती है। वजन घटाने की प्रक्रिया में भी आपको रोजाना इनका सेवन करना चाहिए।

7. खाने को चबा-चबा कर खाएं :

भोजन को हमेशा चबा चबा कर खाना चाहिए। ऐसा करने से खाना खाने के बाद आलस नहीं आता। और हां, कभी भी जल्दी बाजी में खाना नहीं खाना चाहिए। इससे खाना ग्रसिका नली में अटक सकता है।

8. नींबू, शहद और मिर्च :

मोटापा घटाने के लिए 1 चम्मच काली मिर्च, 1 चम्मच शहद और 4 चम्मच नींबू का रस लें और इन्हे 1 ग्लास गर्म पानी में अच्छे से मिला लें। और रोजाना सुबह खाली पेट इसका सेवन करें। इसके नियमित सेवन से मोटापा अपने आप कम हो जाएगा।

9. मॉर्निग और इवनिंग वाक :

मोटापा कम करने के लिए प्रातः जल्दी उठकर मॉर्निंग वाक पर जाएं। 10 से 15 की वाक करें और साथ ही कुछ चलने फिरने वाली एक्सरसाइज भी करें। साथ ही इवनिंग में भी वाक करें। यह आपको वजन घटाने के साथ-साथ स्वस्थ निरोगी शरीर देने में भी मदद करेगी।

10. फ्रूट जूस :

अगर आप अपना वजन कम करना चाहते है तो कभी कभी भोजन के स्थान पर फ्रूट जूस का सेवन कर लें। क्योंकि ये आपके मोटापे को नहीं बढ़ाता। इसके लिए आप सप्ताह में 2 से 3 बार खाने के स्थान पर फ्रूट जूस का सेवन करें। आप चाहे तो 2 दिनों का फ़ास्ट रख सकते है जिसमे केवल फल खाने हो।

तो ये थे कुछ टिप्स जिनकी मदद से आप अपना वजन कुछ ही महीनों में कम कर सकते है। इसके अलावा खाने के बाद वाक, चढ़ने के लिए लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का प्रयोग करना, व्यायाम करना, सही डाइट आदि कुछ और उपाय है जिनके द्वारा आप अपने वजन को नियंत्रित कर सकते है।

गर्भावस्था में रखें इन बातों का ख़्याल

बच्चों से ही घर में रौनक़ होती है। छोटे छोटे बच्चे जब पूरे घर में दौड़ते फिरते हैं तो उन्हें देख कर माता-पिता व परिवार के अन्य सदस्यों की दिन भर की थकान यूँ ही दूर हो जाती है। माँ बनना हर महिला का सपना होता है। छोटे बच्चे के आने का इन्तजार ना केवल माँ बल्कि पूरा परिवार करता है। छोटे बच्चे होते ही इतने प्यारे हैं कि परिवार का हर सदस्य हर वक़्त बस उनके ही साथ खेलना चाहता है।

माँ बनने का एहसास किसी भी महिला के लिए सबसे अधिक सुखद होता है। गर्भावस्था के दौरान मां के स्वास्थ्य का प्रभाव होने वाले शिशु पर भी पड़ता है। इसलिए यह बहुत जरुरी है कि अगर आप माँ बनने के बारे में सोच रही हैं तो सबसे पहले अपने डॉक्टर की सलाह लें। पति-पत्नी दोनों को एक साथ डॉक्टर के पास जाना चाहिए। डॉक्टर आपके कुछ टेस्ट करेंगे, जिससे यह पता चल पाएगा कि आपका शरीर गर्भधारण करने के लिए पूरी तरह से तैयार है या नहीं।

कुछ ज़रूरी टेस्ट जो डॉक्टर करते हैं, वो हैं –

1. ब्लड ग्रूप और RH फ़ैक्टर – सबसे पहले किया जाने वाले टेस्ट है ब्लड ग्रूप का और RH फ़ैक्टर का, जिससे पता चलता है कि आपका ब्लड ग्रूप पॉज़िटिव है या नेगेटिव। नेगेटिव ब्लड ग्रूप आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाते, ख़ासकर O-ve , अगर पहले से ब्लड ग्रूप की जानकारी हो तो ज़रूरत के समय के लिए पहले से व्यवस्था करने में आसानी हो जाती है।

2. हीमोग्लोबिन की जाँच – हीमोग्लोबिन की जाँच भी आवश्यक ताकि पता चल सके कि होने वाली माँ में ख़ून की कमी तो नहीं।

3. मधुमेह, उच्च रक्तचाप, HIV इत्यादि की जाँच – गर्भधारण से पहले ये जान लेना ज़रूरी होता है कि आपको कोई ऐसी बीमारी तो नहीं जिससे बच्चे के लिए किसी तरह का ख़तरा हो या वो बीमारी बच्चे को भी हो जाने की सम्भावना हो। आज तकनीक इतनी विकसित हो चुकी है कि पहले से पता चल जाने पर डॉक्टर की देखरेख में आप अपनी बीमारियों को बच्चे में जाने से रोक सकती हैं।

अगर आपने प्लान नहीं किया था पर माँ बनने वाली हैं, तो शीघ्र अतिशीघ्र अपने डॉक्टर के पास जाएँ और ऊपर लिखे सब टेस्ट करवाएँ। साथ ही डॉक्टर आपको कई अन्य तरीक़े बताएगी अपना ध्यान रखने के और कुछ दवाइयाँ देगी, जो आपको नियमित रूप से लेनी होंगी। अब हम आपको ये बताएँगे कि गर्भावस्था में आपको किन किन बातों का ख़्याल रखना चाहिए।

गर्भावस्था में रखें इन बातों का ध्यान :- pregnancy symptoms 2

1. मोर्निंग सिकनेस – गर्भावस्था के शुरू के दो या तीन महीने तक गर्भवती महिला को मोर्निंग सिकनेस की समस्या आती है। मोर्निंग सिकनेस यानि जी मिचलाना, उलटी आना। ये गर्भावस्था का एक आम लक्षण है, परंतु बहुत ज़्यादा उलटी होना या पूरा दिन चक्कर आते रहना ठीक नहीं होता। अगर ऐसा हो रहा है तो फ़ौरन अपने डॉक्टर को बताएँ।

2. आहार का विशेष ख़्याल रखें –  गर्भवस्था के दौरान निर्धारित कैलोरी और पौष्टिक आहार लेना बहुत जरूरी है, जैसे अनाज, सब्जियां, फल, बिना चर्बी का मीट, कम वसा युक्त दूध, दही, पनीर, सूखे मेवे, नारियल पानी आदि। अगर महिला शाकाहारी है तो प्रोटीन आपूर्ति के लिए अंकुरित दालें व पनीर ज़्यादा खिलाएँ।

3. तैलीय पदार्थों व अधिक मसालेदार चीज़ों से दूर रहें – ज़्यादा मिर्च मसाले वाले भोजन व तैलीय पदार्थों का कम से कम में सेवन करें। इस दौरान जूस, सलाद, सूप इत्यादि तरल पदार्थों का सेवन अधिक से अधिक करें।

4. लम्बे समय तक भूखी ना रहें – गर्भवती महिला को ज़्यादा देर तक भूखा नहीं रहना चाहिए। हर दो घंटे में कुछ ना कुछ हल्का फुल्का खाते रहना चाहिए। जैसे फल, जूस, सलाद, मेवे या बिस्किट। कम खाएँ पर थोड़ी थोड़ी देर में खाएँ। सुबह उठते ही अगर जी मिचलाने की समस्या हो रही है तो उठते ही कुछ ना कुछ खा लें और थोड़ी थोड़ी देर में थोड़ा थोड़ा खाती रहें। ख़ाली पेट रहने से एसीडिटी की समस्या हो सकती है।

5. भरपूर नींद लें – गर्भवती महिला को रात में कम से कम 8 घंटे की नींद जरुर लेनी चाहिए। इसके अलावा दिन में भी 1-2 घंटे का आराम आवश्यक है। ये आपके और आपके बच्चे के लिए बहुत फ़ायदेमंद है। नींद पूरी होने पर आप स्वस्थ रहेंगी और तरोताज़ा महसूस करेंगी।

6. सैर और व्यायाम – गर्भावस्था में स्वस्थ व चुस्त रहने के लिए व्यायाम अतिआवश्यक होता है। सुबह शाम सैर ज़रूर करें, हल्के फुल्के योगासन व प्राणायाम करें।pregnancy-122

7. भारी काम ना करें – गर्भावस्था में हल्के फुल्के काम करते रहना चाहिए, शरीर व शिशु दोनों ही तंदरुस्त रहते हैं। निष्क्रिय रहने से बेवजह वज़न बढ़ता है और आलस आता है। परंतु भारी काम करने से बचें, वज़न ना उठाएँ, ज़्यादा झुकने वाले काम ना करें।

8. तनाव से बचें – तनाव किसी के लिए भी सही नहीं होता है। और अगर आप गर्भवती हैं तो आप को तनाव से एकदम दूर रहना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा खुश रहने का प्रयास करें। तनाव में रहना आपके व आपके शिशु के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं है। आप चाहे तो मैडिटेशन का सहारा भी ले सकती है। इससे आप तनाव से तो दूर रहेंगी ही, साथ में सकारात्मक ऊर्जा भी अपने अंदर महसूस करेंगी।

9. नशीले पदार्थों से दूर रहें – गर्भावस्था के दौरान सिगरेट व शराब जैसे पदार्थों का सेवन न करें। नशीले पदार्थों से ना सिर्फ़ आपकी सेहत पर बल्कि आपके शिशु की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है।

पोषक तत्व भी है जरुरी :- 

इसके अलावा डॉक्टर द्वारा लिखी दवाइयों का नियमित सेवन करना भी आवश्यक होता है। यूँ तो फल, सब्ज़ियों और अनाज इत्यादि में सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, फिर भी तत्वों की आपूर्ति हमें बाहर से करनी पड़ती है। जैसे –

Folic acid – गर्भवती महिलाओं को शुरू के तीन महीने तक folic acid की गोली लेना बहुत आवश्यक होता है। folic acid से बच्चे के मस्तिष्क का विकास सही तरीक़े से होता है। गर्भावस्था के दौरान कम से कम 180 गोलियाँ लेनी ज़रूरी होती हैं।

Calcium – डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को calcium की आपूर्ति के लिए calcium की गोली लेने की सलाह देते हैं। इसके अलावा दूध औत दूध से बने उत्पादों को भी ग्रहण करना चाहिए, इनमे calcium होता है। calcium आपके शिशु की मज़बूत हड्डियों के लिए ज़रूरी होता है।

Iron – गर्भवती महिलाओं में ख़ून की कमी ना हो, इसलिए उन्हें iron की गोली लेने की सलाह दी जाती है। ख़ून  कमी होने से माँ व शिशु दोनों की जान को ख़तरा हो सकता है।

विटामिन – गर्भवती महिलाओं को फल, सब्ज़ियों का भरपूर सेवन करना चाहिए। इनसे शरीर को ज़रूरत पड़ने वाले विटामिन की आपूर्ति होती है। इसके अलावा डॉक्टर आपको कोई विटामिन अतिरिक्त लेने की भी सलाह दे सकते हैं। ये आपकी सेहत पर निर्भर करता है।

प्रोटीन – गर्भावस्था में प्रोटीन से भरपूर भोजन का सेवन करें। ये आपके शिशु के विकास के लिए आवश्यक है। दूध, दही, पनीर, मूँगफली, अंकुरित दालें खाएँ।

पानी – अधिकाधिक पानी पिएँ। स्वस्थ रहने के लिए पानी ज़्यादा पीना चाहिए। गर्भावस्था में अपने साथ साथ आपको अपने गर्भ में पल रहे शिशु का भी ध्यान रखना होता है। इसलिए पानी अधिक पिएँ।

अन्य ध्यान रखने योग्य बातें –

  • समय समय पर डॉक्टर से अपनी जाँच करवाती रहें। शुरू के 6-7 महीने तक महीने में एक बार जाँच करवाना ज़रूरी होता है। उसके बाद हर 15 दिन में जाँच करवाएँ। नौवाँ महीना शुरू होने के बाद हर हफ़्ते जाँच करवानी चाहिए।
  • गर्भावस्था के दौरान दो tetanus के टीके लगने भी अतिआवश्यक होते हैं।
  • प्रेगनेंसी के दौरान दो या तीन अल्ट्रासाउंड करवाने भी ज़रूरी होते हैं, ताकि पता चलता रहे कि बच्चे का विकास ठीक से हो रहा है या नहीं।
  • गर्भावस्था में ज़्यादा भाग दौड़ ना करें। चलती फिरती रहें, मगर ध्यान से। ज़्यादा तेज़ ना चलें।
  • तनाव ना लें। गर्भावस्था में प्रसन्न रहना आपकी व आपके शिशु की सेहत के लिए फ़ायदेमंद है।
  • साफ़ पानी पिएँ। कहीं बाहर जा रही हैं तो अपने साथ साफ़ पानी बोतल में डाल कर ले जाएँ।
  • बिना धोए कोई भी फल ना खाएँ। फलों को पकाने के लिए या फिर सड़ने से बचाने के लिए उनपर रसायनों का छिड़काव किया जाता है।
  • ये रसायन आपकी सेहत के लिए हानिकारक होते हैं। इसलिए फल हमेशा धो कर ही खाएँ।
  • ज़्यादा देर से काट कर रखे हुए फल ना खाएँ – फल या फिर सलाद खाते वक़्त ही काटें। पहले से काटकर रखे हुए फल व सलाद ना खाएँ।
  • सूती व ढीले वस्त्र पहने। सिन्थेटिक व तंग कपड़ों में आपको घबराहट महसूस हो सकती है। इसलिए सूती व ढीले वस्त्रों को प्राथमिकता दें।इस सब बातों का ख़्याल रखें और आने वाले शिशु के स्वागत की तैयारी करिए। माँ बनने के बाद दुनिया पूरी तरह बदल जाती है। आपकी हर ख़ुशी शिशु के इर्द गिर्द ही घूमती है। अपनी गर्भावस्था का आनंद लें व आने वाले दिनों के हसीन सपने देखें।
    😊Happy Motherhood 😊

बालों का झड़ना बंद कैसे करें?

आजकल के वातावरण में बालों का झड़ना बहुत आम है। रोजाना हर किसी के थोड़े थोड़े बाल झड़ते ही है। क्योंकि हमारे आसपास के वातावरण में प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ गया है। इसके अतिरिक्त संतुलित भोजन ना लेना, शरीर में मिनरल्स की कमी, स्ट्रेस, जेनेटिक प्रोब्लेम्स के कारण भी बाल झड़ने लगते है। थोड़े बहुत बाल झड़ने के लिए परेशान नहीं होना चाहिए, लेकिन आपके बाल बहुत ज्यादा और लगातार झड़ रहें है तो आपके लिए समस्या हो सकती है।

इस लेख में हम आपको कुछ घरेलु उपचार बताएँगे जिन्हे अपनाकर आप अपने बालों के झड़ने की समस्या को रोक सकते है।

साफ सफाई

वातावरण में अत्यधिक प्रदूषण होने के कारण बालों में धूल, मिटटी और गंदगी हो जाती है। इसके लिए जरुरी है के बालों की साफ़ सफाई रखे। माइल्ड शैम्पू से हर एक दिन छोड़ कर एक दिन धोये। रोजाना बालों का ना धोये क्योंकि ज्यादा शैम्पू के इस्तेमाल से केमिकल्स से भी हानि हो सकती है। घर से बाहर जाते समय सर को कॉटन की दुप्पटे से ढँक लें।

मेथी

मेथी के दानों को रात भर पानी में भिगो कर रखें। अगले दिन मेथी के दानों को पीस लें। अब इस पेस्ट को बालों की जड़ो में लगाए। आधे घंटे बाद पानी से धो ले। इस तरीके को अपनाने से बालों को झड़ने से रोकने में मदद मिलेगी।

कोकोनट मिल्क

बालों के लिए सबसे बेहतर उपायों में से एक है फ्रेश कोकोनट मिल्क। फ्रेश कोकोनट मिल्क लेकर अपने बालों की जड़ों में लगायें, हल्की उँगलियों से मसाज करें। मसाज करने के बाद बालों को शावर कैप या टॉवल से ढंके। 20 से 25 मिनट बाद पानी से धो लें। इस उपाय को हफ्ते में दो या तीन दिन इस्तेमाल कर सकते है।

एलोवेरा

पौधे के एक टहनी से एलोवेरा का ताजा जेल निकाले। अब इस जेल को अपने बालों की जड़ो में लगाये। 40 मिनट बाद बालों को ताजे पानी से धो लें। एलोवेरा जेल एंटीऑक्सीडेंट तत्वों से भरपूर होता है। इस उपाय से आपके बालों का झड़ना बहुत कम हो जाएगा।

ग्रीन टी

जी हाँ एक ग्रीन टी का कप जो आपको सुबह नींद से जगाने में काम आता है, यह आपको बालों के भी खूब काम आएगा। एक कप गर्म पानी में दो से तीन टी बैग डालिये अच्छे से मिक्स होने के बाद और टी के ठंडे होने के बाद बालों में डाले। 5 मिनट के लिए बालों और जड़ो को हलके हाथों और उँगलियों से मसाज करें। उसके बाद साफ़ पानी से धो लें।

करी पत्ते

करी पत्ते में आवश्यक नुट्रिएंट्स तत्व, एंटीऑक्सीडेंट्स तत्व, आयरन, फॉस्फोरस, कैल्शियम, विटामिन ए, बी, सी, इ और फोलिक एसिड होते है। करी पत्ते को पीस कर एक पेस्ट बना लें। पेस्ट बनाने के लिए पिसते समय जरुरत के हिसाब से पानी भी मिला लें। इस पेस्ट को बालों और जड़ों में लगायें आधे घंटे बाद पानी से धो लें।

प्याज का रस

प्याज में एंटीबैक्टीरियल गुण होते है। यह ब्लड सर्कुलेशन बढ़ा कर बालों को झड़ने से रोकता है। प्याज को पीस कर उसका रस निकाल ले, अब इस रस को जड़ों में लगायें। 20 से 30 मिनट बाद माइल्ड शैम्पू से बालों को धो लें। इस उपाय को आप सप्ताह में एक बार इस्तेमाल कर सकते है।

आँवला

आँवलों के गुणों को सदियों से बालों की लिए आजमाया जाता रहा है। कई शैम्पू और तेलों में भी आँवला को इस्तेमाल किया जाता है। इसके ताजे रस को निकालकर आप अपने बालों की जड़ो में लगा सकते है। आधे घंटे बाद बालों को किसी भी माइल्ड शैम्पू से धो लें। इस उपाय को सप्ताह में दो बार इस्तेमाल करने से बालों का झड़ना रूककर रिग्रोथ होगी।

इन सभी उपायों के अलावा तनाव रहित रहे और अपने भोजन में ताजे फल, सब्जियाँ, दूध, दहीं, अंडे, फिश आदि को शामिल करे।

इन टिप्स से डिलीवरी के दौरान होने वाला लेबर पेन होगा कम

शिशु के गर्भ में आने की खबर से लेकर शिशु के जन्म तक गर्भवती महिला बहुत से नए नए अनुभव से गुजरती है। लेकिन जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है तो महिला के मन में तरह तरह के सवाल उधेड़बुन करने लगते हैं। ऐसे में महिला के मन में चल रहे इन सवालों के कारण महिला की परेशानी बढ़ सकती है, जिससे लेबर के दौरान महिला को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को अपने आप को रिलैक्स रखना चाहिए, ताकि गर्भवती महिला को किसी भी तरह की परेशानी न हो। और प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में कुछ टिप्स का ध्यान रखना चाहिए को लेबर के दौरान होने वाली परेशानी से बचाव करने में आपकी मदद कर सकते है।

सोच को सकारात्मक रखें

डिलीवरी का समय पास आने पर दिमाग में बहुत सी बातें चलती रहती हैं। लेकिन इस दौरान महिला को अपनी सोच को सही रखना जरुरी होता है, क्योंकि यदि आप अपने मस्तिष्क पर जोर डालती है तो इससे तनाव के कारण डिलीवरी के दौरान परेशानी ज्यादा हो सकती है। ऐसे में प्रसव होने से पहले आपको अच्छी बातों को सोचना चाहिए, संगीत सुनना चाहिए, अपनों से बातें करनी चाहिए, ताकि प्रसव का समय पास आने पर आपको परेशानी न हो।

प्रसव की जानकारी लें

ऐसा जरुरी नहीं होता है की डिलीवरी के दौरान हर महिला की स्थिति एक जैसी हो, बल्कि यह हर महिला की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। ऐसे में डिलीवरी के दौरान के होने वाली परेशानी से बचाव के लिए महिला को प्रसव के बारे में सारी जानकारी इक्कठी करनी चाहिए, ताकि जब भी आपको दर्द महसूस हो, एमनियोटिक फ्लूड निकलें तो ऐसे में आपको पता चल जाए की प्रसव होने वाला है और जल्द से जल्द आप डॉक्टर के पास जाएं जिससे आपकी इन सभी परेशानियों को खत्म करने में मदद मिल सके।

अपने आप को बिज़ी रखें

प्रेगनेंसी के आखिरी समय में महिला को ज्यादा परेशानी का अनुभव हो सकता है, उठने, बैठने, सोने तक में परेशानी हो सकती है। ऐसे में महिला को इन परेशानियों से बचाव के लिए अपने आप को जितना हो सके बिज़ी रखना चाहिए, इससे न केवल आपकी प्रेगनेंसी के आखिरी समय की परेशानी कम होती है। अपने आप को बिज़ी रखने के लिए गर्भवती महिला को अपनी पसंद का कोई काम करना चाहिए, लेकिन जो भी काम करें उससे गर्भवती महिला की या गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत को किसी तरह का कोई न नुकसान नहीं होना चाहिए।

डर को करें जाहिर

खासकर जब महिला पहली बार माँ बनती है तो हर कोई अपना एक्सपीरियंस शेयर करता है, ऐसे में कई बार हो सकता है की महिला घबरा जाएँ। और ज्यादा डर और घबराहट महिला के लिए परेशानी खड़ा कर सकती है, इसीलिए गर्भवती महिला को यदि किसी बात का डर है या मन में कोई सवाल उठ रहे है तो उनको जाहिर करना चाहिए ताकि उन परेशानियों का हल करके महिला को रिलैक्स फील करवाने में मदद मिल सके।

मालिश करवाएं

मालिश करने से गर्भवती महिला को मानसिक के साथ शारीरिक रूप से भी आराम मिलता है, ऐसे में महिला रिलैक्स फील करने के साथ प्रसव के दौरान होने वाले दर्द का अनुभव कम करने में भी मदद मिलती है। लेकिन पेट की मालिश करने से बचना चाहिए, मालिश करने के लिए आप किसी भी तेल या क्रीम आदि का इस्तेमाल कर सकती है।

हॉट शावर लें

हॉट शावर लेने से न केवल रिलैक्स महसूस होता है, बल्कि इससे बॉडी में होने वाले दर्द से भी राहत पाने में मदद मिलती है। लेकिन इस बात ला भी ध्यान रखें की पानी बहुत ज्यादा गर्म न हो, यह उपाय की प्रसव का समय पास आने पर प्रसव के दौरान होने वाली दिक्कतों को कम करने में मदद करता है।

डॉक्टर से राय लें

प्रेगनेंसी के नौवें महीने की शुरुआत के बाद आपको समय समय पर डॉक्टर से राय लेते रहना चाहिए, और यदि कोई समस्या या कोई ऐसा लक्षण दिखाई दे जो की परेशानी का कारण बन जाएँ तो उसे अनदेखा न करते हुए डॉक्टर के पास जाना चाहिए, ताकि इस दौरान होने वाली हर परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जो डिलीवरी के दौरान होने वाली परेशानी को कम करने में मदद करते हैं, साथ ही इससे नोर्मल डिलीवरी के होने के चांस भी बढ़ते हैं।

प्रेगनेंसी से पहले की तैयारी

प्रेगनेंसी से पहले की तैयारी:-

गर्भावस्था महिला की जिंदगी में आने वाला वो लम्हा होता है, जिससे उसकी जिंदगी के बारे में कहें तो उसका मतलब ही बदल जाता है। इसके अलावा महिला की जिंदगी में नए मेहमान के साथ उसकी जिंदगी में बहुत से बदलाव भी आ जाते है। परंतु प्रेगनेंसी जैसे लम्हे को जीने के लिए महिला को पहले से ही तैयारी कर लेनी चाहिए, जैसे की सबसे पहले महिला को अपने साथी के साथ मिलकर इस विषय में सबसे पहले विचार करना चाहिए, ताकि दोनों की रजामंदी के साथ आप जिंदगी के इस नए दौर को जीने की तैयारी करें।

इसके अलावा महिला को पहले अपने सभी चेक अप्स करवाने चाहिए, की वो शारीरिक रूप से फिट है या नहीं। और उसे मानसिक रूप से भी इस फैसले के लिए तैयार होना चाहिए, उसके बाद एक अच्छे डॉक्टर का चुनाव करके उसे अपनी सारी मेडिकल की हिस्ट्री बतानी चाहिए, ताकि डॉक्टर उस पर आपको राय देनी चाहिए। शरीर की जांच के साथ अपने वजन की जांच करवाना भी जरूरी है, क्योंकि आपकी सोच से परे आपके वजन का आपकी फर्टिलिटी और प्रेगनेंसी हेल्थ से गहरा संबंध होता है।

यदि आप कोई दवाइयां ले रहे हों या आपको कोई शारीरिक समस्या के कारण दवाई लेनी पड़ रही है तो, ऐसे में उन सभी के बारें में डॉक्टर से खुलकर बात करें क्योंकि कुछ दवाइयां गर्भावस्था के दौरान नहीं ली जानी चाहिए। इसके अलावा आपको नशीले पदार्थो का सेवन भी नहीं करना चाहिए, खान पान का ध्यान रखना चाहिए, तनाव रहित रहना चाहिए, भरपूर नींद भी लेनी चाहिए, इसके अलावा आपको और भी बहुत सी बातें है जिनका ध्यान आपको गर्भधारण से पहले रखना चाहिए।

तो आइये विस्तार से जानते है की आपको गर्भावस्था से पहले किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, परंतु इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आपको कम से कम तीन महीने पहले इन सब बातों पर फोकस कर देना शुरू कर देना चाहिए, फोलिक एसिड का सेवन भी आपको तीन महीने पहले ही शुरू कर देना चाहिए। साथ ही गर्भावस्था के दौरान आने वाले नए अनुभवो को बहुत ही उत्साह के साथ जीना चाहिए, और इस समय में होने वाली परेशानियों से घबराना नहीं चाहिए, तो अब जानते है की वो कौन सी बातें है जिनका आपको गर्भधारण से पहले ध्यान रखना चाहिए।

गर्भधारण से पहले इन बातों की तैयारी करें:-

अपने आप को तंदरुस्त रखें:-

महिला को जब भी गर्भधारण करने का मन हो तो उसे अपने पोषण पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरुरत होती है, इसके अलावा महिला के लिए जरुरी होता है की अपने आप को तंदरुस्त रखें, इसके लिए महिला को अपने आहार का भी ध्यान रखना चाहिए, व्यायाम आदि करना चाहिए, आहार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, फलो आदि का सेवन भी करना चाहिए, और बाहर का भोजन व् मसालेदार भोजन का ज्यादा सेवन न करें, आदि। जिससे महिला के स्वस्थ होने के साथ आपका बच्चा भी हेल्थी हो सकें।

डॉक्टर से परामर्श लें:-

गर्भधारण के लिए आपको डॉक्टर से भी अपने भवरें में राय लेनी चाहिए की आप शारीरिक रूप से बच्चे को जन्म देने के लिए फिट है या नहीं, इसके अलावा आपको डॉक्टर से यदि आप किसी दवाई का सेवन कर रही है तो इस विषय में भी खुल कर विचार करना चाहिए, और आपको डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही काम करना चाहिए, इसके अलावा यदि आपका पहले कोई गर्भपात हो चुका है तो इस विषय में भी डॉक्टर से बात करनी चाहिए, ताकि आप यदि कोई कमजोरी है तो उसे पूरा कर सकें।

तनाव न लें, व् मानसिक रूप से आराम महसूस करें:-

कई महिलाएं गर्भधारण करने का फैसला तो कर लेती है, परंतु तनाव व् किसी मानसिक परेशानी होने के कारण बहुत परेशान रहती है, ऐसे में यदि आप गर्भवती हो भी जाती है तो इसके कारण गर्भपात का खतरा बना रहता है, और इसका सीधा असर आपके बच्चे पर भी पड़ता है, साथ ही बच्चे के विकास में भी कमी आ जाती है, इसीलिए जब भी आप गर्भधारण का फैसला लें तो कोशिश करें की आप खुश रहें और साथ ही किसी भी प्रकार का तनाव या मानसिक परेशानी का शिकार न बने।

व्यायाम करें:-

exercise

व्यायाम करने से आपको बहुत से फायदे मिलते है, जैसे की इसके कारण आपको तनाव से राहत मिलती है। आपको इसके कारण ऊर्जा भी मिलती है, इसके साथ आपकी नींद में भी इजाफा होता है, और गर्भवती महिलाओ के लिए थोड़ा बहुत व्यायाम करना जरुरी भी होता है, यदि आप गर्भधारण से पहले व्यायाम करती है, तो इससे आपके शरीर में ऊर्जा का स्त्रोत भी होता है, जिससे आपको गर्भधारण करने में बहुत फायदा मिलता है।

नशीले पदार्थो का सेवन न करें:-

जब भी आपको किसी भी नए जीवन की शुरुआत होती है तो आपको अपने पुराने जीवन में कुछ बदलाव लाने की भी जरुरत होती है। इसके साथ आप यदि धूम्रपान, ड्रग्स, शराब आदि का सेवन करते है तो आपको इन सब चीजो से परहेज रखना चाहिए। क्योंकि इन सबका बुरा असर आने वाले बच्चे पर पड़ता है, इसीलिए यदि आप बच्चे के विकास में कोई कमी नहीं आने देना चाहते, और चाहते है की आपका बच्चा स्वस्थ हो तो आपको यदि आप इन सबका सेवन करते है, तो इनसे परहेज करना चाहिए।

अपने साथी से इस विषय में बात करें:-

बच्चे की परवरिश में माँ और बाप दोनों का बराबर का योगदान होता है, तो जब भी आप गर्भधारण का फैसला करते है तो ये सिर्फ आपका नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें आप दोनों की राय सम्मिलित होनी चाहिए। आपको गर्भधारण के हर पहलु के बारे में सोच कर इस पर खुल कर अपने विचार एक दूसरे के सामने रखने चाहिए। इसके अलावा आपको इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की आप एक साथ मिलकर इस फैसले को मंजूरी दें, ताकि इस ख़ुशी को आप मिल कर मना सकें।

फोलिक एसिड का सेवन करें:-

प्रेगनेंसी की तैयारी के कम से कम तीन महीने पहले से आपको फोलिक एसिड लेना शुरू करना चाहिए। फोलिक एसिड बच्चे की रीढ़ की हड्डी के विकास और तन्त्रिका नलिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करने के साथ महिला के लिए भी उपयोगी होता है। फोलिक एसिड आप अपने डॉक्‍टर की सलाह से लेने के बाद भी ले सकती है, इसके अलावा यह पालक, अण्डे, फलियों सभी हरी सब्जियों में बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है। और आपको डॉक्टर भी इसकी सलाह देते है, क्योंकि ये बहुत फायदेमंद भी होता है।

वजन पर नियंत्रण रखें:-

motapa

शायद आपको ये नहीं पता हो की आपके वजन और आपकी फर्टिलिटी का सीधा सम्बन्ध होता है, इसीलिए आपको अपने वजन पर रोक लगानी चाहिए। क्योंकि कई बार ज्यादा वजन होने के कारण गर्भधारण करने में आपको परेशानी हो सकती है, इसके कारण गर्भधारण भी नहीं होता है, क्योंकि वजन बढ़ने के साथ आपकेशरीर में कई और बीमारिया भी प्रवेश कर जाती है, इसीलिए यदि आप गर्भधारण करना चाहते है तो आपको अपने वजन पर रोक लगाकर रखनी चाहिए, परंतु अपनी सेहत के साथ कोई लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।

नींद को भरपूर मात्रा में लें:-

यदि आप गर्भधरण करना चाहती है तो इसके लिए ये भी जरुरी है की आप नींद को भरपूर मात्रा में लें, क्योंकि नींद को भरपूर लेने से आप फ्रेश महसूस करते है, और साथ ही इससे आपके शरीर के अंगो का भी अच्छे से विकास होता है, साथ ही इसके कारण आपके शरीर को अच्छे से आराम भी मिल जाता है, इसीलिए यदि आप गर्भवती महिला है या आप गर्भधारण करने जा रही है, तो आपको एक दिन में कम से कम छह से आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए, ताकि आप अच्छे से आराम महसूस कर सकें।

गर्भधारण से पहले ध्यान रखने योग्य अन्य बातें:-

  • कैलोरी को पर्याप्त मात्रा में लें।
  • व्यायाम से किसी भी तरह का परहेज न करें।
  • नशीले पदार्थो का सेवन न करें।
  • खुश रहें, किसी भी तरह की परेशानी को दिमाग पर न लें।
  • शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए अपने आहार पर भी ध्यान दें।
  • ज्यादा भारी वजन उठाने से परहेज रखें।
  • खान पान में भी सावधानी बरते, ध्यान रखें की क्या खाएं क्या न खाएं।
  • डॉक्टर के साथ खुल कर विचार विमर्श करें।
  • वजन पर रोक लगाएं, और किसी भी तरह का भारी व्यायाम न करें।

गर्भधारण से पहले करें ये तैयारी, गर्भधारण से पहले के लिए टिप्स, यदि आप गर्भधारण करना चाहती है तो आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए, गर्भधारण से पहले रखें इन बातों का ध्यान, garbhadharan se pehle ki taiyyari, garbhadhran se pehle dhyan rakhen in baaton ka, preparation before pregnancy, pregnancy se pehle dhyan rakhen in baaton ka

जुड़वां बच्चे चाहती है तो अपनाएं यह उपाय

माँ बनना तो हर महिला की तमन्ना होती है लेकिन कुछ कपल्स ऐसे होते हैं जो चाहते हैं की जुड़वां बच्चे चाहते हैं। ऐसे में यदि आप भी उन्ही कपल्स में से एक हैं तो आप भी अपनी इस तमन्ना को पूरी करने की कोशिश कर सकते हैं। क्योंकि जुड़वां बच्चों के लिए सबसे जरुरी होता है की आप वो सभी जानकारी इक्कठी करें जिनसे आपको जुड़वां बच्चे हो सके। तो आइये आज इस आर्टिकल में ऐसे कुछ टिप्स बताने जा रहें हैं जिनका ध्यान रखने से आपकी जुड़वां बच्चों की तमन्ना को पूरा होने में मदद मिल सके।

फोलेट से भरपूर डाइट का सेवन करें

यदि आप चाहती है की आप जुड़वां बच्चों को जन्म दें तो इसके लिए आपको अपनी डाइट में फोलेट से भरपूर आहार जैसे की हरी सब्जियों, चुकंदर, गाजर, संतरा, अनार, सेब आदि का सेवन करें। क्योंकि जिन महिलाओं की बॉडी में फोलेट की मात्रा भरपूर होती है उन महिलाओं के जुड़वां बच्चों के होने के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

डेयरी प्रोडक्ट्स

दूध व् दूध से बनी चीजों का भी भरपूर सेवन करने से महिला को जुड़वां बच्चे होने के चांस बढ़ाने में मदद मिलती है। लेकिन ऐसा आपको प्रेगनेंसी प्लान करने के छह महीने पहले से ही शुरू कर देना चाहिए।

पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में गैप

यदि आप चाहती है की आपके जुड़वां बच्चे हो तो आपको अपनी पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में ज्यादा गैप रखना चाहिए। ऐसा करने से भी महिला के जुड़वां बच्चे होने के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

उम्र

ऐसा भी माना जाता है की तीस की उम्र के बाद माँ बनने पर गर्भ में जुड़वां बच्चे होने के चांस बढ़ जाते हैं। ऐसे में यदि आप चाहती है की आपके बच्चे जुड़वां हो तो आप तीस की उम्र के बाद प्रेगनेंसी प्लान करें। लेकिन इस बाद का ध्यान रखें की आप शारीरिक रूप से भी स्वस्थ रहें।

साबूदाना खाएं

फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया के बाद अंडा यदि दो हिस्‍सों में टूट जाए या दो अलग अंडे फर्टिलाइज हो जाएं तो जुड़वा बच्‍चे पैदा हो सकते हैं। ऐसे में ऐसा माना जाता है की साबुदाना खाने से महिलाओं में ओवुलेशन के दौरान एक से ज्‍यादा अंडे रिलीज होने की सम्भावना बढ़ती है जिससे जुड़वा बच्‍चे होने के चांस बढ़ते हैं। ऐसे में यदि आप भी चाहती है की आपके जुड़वां बच्चे को तो अपनी डाइट में साबूदाना को जरूर शामिल करें।

अनानास खाएं

प्रेगनेंसी के दौरान बेशक अनानास का सेवन न करने की सलाह दी जाती है लेकिन जुड़वां बच्चों की चाह रखने वाली महिला को अनानास का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि अनानास में ब्रोमेलिन नामक प्रोटीन होता है जो कि ओवुलेशन और फर्टिलाइजेशन में मदद करता है जिससे जुड़वां बच्चे के चांस बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान यदि आप रखती है तो इससे आपको भी जुड़वां बच्चों की चाह को पूरा करने में मदद मिलती है। आप चाहे तो एक बार अपनी इस इच्छा को पूरी करने के लिए डॉक्टर से भी राय ले सकती है।