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आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं ये है तरीका पता करने का

आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं ये है तरीका पता करने का, प्रेगनेंसी जानने के लिए टिप्स, कैसे जाने की महिला का गर्भ ठहर गया है, प्रेगनेंसी पता करने के लिए करे यह टेस्ट, प्रेग्नेंट होने पर आपकी बॉडी देती है यह संकेत

गर्भावस्था महिला की जिंदगी का सबसे खुशनुमा अहसास होता है, और जब भी किसी महिला का पीरियड मिस हो जाता है तो पहले दिन से महिला यही सोचती रहती है की कहीं वो गर्भवती तो नहीं है। और यदि आपके पीरियड्स को मिस हुए एक हफ्ता या उससे ज्यादा समय हो गया है तो आप घर पर या डॉक्टर के पास जाकर टेस्ट करवा सकते हैं और इस टेस्ट के माध्यम से आप पूरी तरह जान सकते हैं की पीरियड्स मिस होने का कारण क्या आपकी प्रेगनेंसी है। इसके अलावा यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो इसके संकेत आपकी बॉडी में दिखाई देने लग जाते है, लेकिन हर महिला के साथ ऐसा हो यह जरुरी नहीं होता है। तो लीजिए अब जानते हैं की आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं ये है इसे जानने के लिए आप क्या कर सकते हैं।

प्रेगनेंसी टेस्ट करें

घर पर प्रेगनेंसी कन्फर्म करने का सबसे आसान तरीका होता है की आप प्रेगनेंसी किट का इस्तेमाल करें। यह आपको आसानी से किसी भी मेडिकल स्टोर पर मिल जाती है। इस टेस्ट को करने का सबसे सही समय सुबह होता है, इसके अलावा यदि आप यह टेस्ट शाम के समय या किसी और टाइम भी करती है तो इस बात का ध्यान रखें की उससे तीन घंटे पहले तक वॉशरूम न गई हो। इस टेस्ट को करने की पूरी प्रक्रिया आपको प्रेगनेंसी किट के पैकेट पर लिखी होती है। तो आइये जानते हैं की आप किस प्रकार इस टेस्ट को घर पर कर सकते हैं।

  • सबसे पहले किट के साथ मिले ड्रॉपर में यूरिन लें।
  • उसके बाद किट में यूरिन डालने वाली जगह पर दो से तीन बूँदे यूरिन की डालें।
  • उसके बाद समतल और साफ जगह पर उस किट को रख दें।
  • यदि आपकी किट में दो लाइन हैं और तीन से चार मिनट तक देखने के बाद आपको दोनों लाइन साफ दिखाई देती हैं तो इसका मतलब आप प्रेग्नेंट हैं।
  • कई महिलाओं के टेस्ट में एक लाइन हल्की या फिर पहले टेस्ट के दौरान नहीं दिखाई देती है, ऐसे में आप दो दिन बाद दुबारा टेस्ट करें, यदि फिर भी कोई रिजल्ट सामने नहीं आता है तो ऐसे में आपको एक बार डॉक्टर से बात करें।

प्रेगनेंसी के लक्षणों को पहचानें

यदि महिला गर्भवती होती है तो उसके बॉडी में तेजी से हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं। और ऐसे में बॉडी में कुछ ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं जिनसे महिला जान सकती है की महिला का गर्भ ठहरा है या नहीं। ऐसा भी नहीं है की हर महिला का शरीर ऐसे संकेत दें, ऐसे में प्रेगनेंसी टेस्ट करके ही आप सही परिणाम जान सकते हैं। इसके अलावा मॉर्निंग सिकनेस, सिर में दर्द, चक्कर, बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होना, मूड स्विंग, उल्टी, जी मचलाना, खून के धब्बे लगना, कब्ज़, जीभ का स्वाद बदलना, कुछ खाने का मन न करना, आदि कुछ ऐसे लक्षण है जो संकेत देते हैं की महिला गर्भवती हो सकती है।

प्रेगनेंसी जानने के घरेलू तरीके

प्रेगनेंसी कन्फर्म करने के लिए आप कई घरेलू तरीको का इस्तेमाल भी कर सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह सही हो इस बात की हम पुष्टि नहीं करते हैं। यदि आपके भी पीरियड्स मिस हो गए हैं और आपको ऐसा लग रहा है की आपका गर्भ ठहर गया है, तो इसके परिणाम जानने के लिए आप घर में मौजूद कुछ चीजों से जान सकती हैं की आपका गर्भ ठहरा है या नहीं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की वो घरेलू तरीके कौन से हैं।

टूथपेस्ट

सफ़ेद टूथपेस्ट का इस्तेमाल करके आप जान सकती है की आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं। इस टेस्ट को करने के लिए आप एक साफ़ और सूखे हुए ढक्कन में अपने यूरिन को डालें और उसके बाद उसमे थोड़ा सा सफ़ेद पेस्ट मिला दें। यदि टूथपेस्ट का रंग नीला हो जाता है तो यह इस बात का संकेत होता है की आप गर्भवती हैं।

डेटॉल से करें टेस्ट

इस टेस्ट को करने के लिए आप एक कांच के सूखे हुए बर्तन में डेटॉल और यूरिन को बराबर मात्रा में मिलाएं। और देखे यदि डेटॉल के ऊपर यूरिन परत बना लेता है या उसपर तैरने लगता है तो इसका मतलब होता है की आप प्रेग्नेंट हैं, और यदि यह दोनों मिक्स हो जाते हैं तो इसका मतलब होता है की आप प्रेग्नेंट नहीं हैं।

विनेगर

यदि आप विनेगर वाला टेस्ट करने जा रही हैं तो इस टेस्ट को करने के लिए आप विनेगर और यूरिन को बराबर मात्रा में मिलाएं। यदि इन्हे अच्छे से मिलाने के बाद इनके रंग में आप कुछ बदलाव महसूस करती है। तो यह आपकी प्रेगनेंसी की और इशारा करते हैं। और यदि इनके रंग में कोई भी बदलाव नहीं आता है तो इसका मतलब रिजल्ट नेगेटिव होता है।

चीनी से करें टेस्ट

इस टेस्ट को करने के लिए आप थोड़े से यूरिन में चीनी मिलाएं और इसे मिक्स करें, यदि चीनी घुलने की बजाय आपस में चिपक जाती है तो यह गर्भ ठहरने का संकेत हो सकता है। और यदि चीनी मिक्स हो जाए तो इसका मतलब होता है की आप गर्भवती नहीं है।

तो यह हैं कुछ तरीके जिनसे आप जान सकती हैं की आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं। साथ ही यदि आपका घर में परिणाम नेगेटिव आता है और आपको पीरियड्स भी नहीं आ रहे हैं। तो आपको इस बारे में डॉक्टर से राय लेनी चाहिए ताकि आपको पीरियड्स न आने के सही कारण के बारे में पता चल सके।

आ गया एक और चाय! 15 दिन में मोटापा, चेहरे की झुर्रिया, त्वचा में निखार, सुन्दरता, बिमारियों से बचाने वाला

दौड़ लगा लगा कर, खाना कम खाकर और ना जाने कितने घरेलु उपाय करके जैसे की गरम पानी और निम्बू पी पी कर, रात में कम खाना खा कर, सलाद पर रह कर, फ़ास्ट कर के और ऊपर से ग्रीन टी का इस्तेमाल कर कर के परेशान हो गए हैं? तो एक बार फिर से आप चाय पीना शुरू कर दीजिये। अब आ गया है वाइट टी, जी हाँ सफ़ेद चाय जो अप आपका वजन कम करने वाला है और लोगो को घरों में एक और चाय की किस्म रसोई में आने वाली है अब आने वाले मेहमानों को अब सफ़ेद चाय भी पूछा जाने लगेगा। आज हम आपको सफ़ेद चाय के गुणों के बारे में बताने जा रहे हैं। व्‍हाइट टी या सफेद चाय भी हर्बल टी का एक प्रकार है।

White Tea क्यों ?

आपने ग्रीन टी तो बहूत पिए होंगे और इसके बारे में जानते भी होंगे पर आज हम वाइट टी के बारे में बता रहे हैं। इसकी सुगंध लाजवाब होती है। वाइट टी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं और यह कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को कम करने में सहायक है। इसमें कम कैफीन होता है। इसमें फिनोल की मात्रा अधिक होती है जो इलस्टिन और कोलेजन को मजबूत करता है और आपको झुर्रियों से बचाता है।

बढ़ते उम्र को रोकने में सक्षम

अगर आपके चेहरे पर झुरियां आने लगी है, तो अब व्‍हाइट टी पिने की आदत डाल लीजिये । क्यों की हाइट टी में एंटी एजिंग गुण होते है जो आपकी त्‍वचा को हमेशा जवां बनाए रखने में मदद करती है। इसके अलावा आपको हमेशा झुर्रियों से दूर रखती है। और आप जवान दिखने लगते हैं।

वजन घटाने में सहायक

व्‍हाइट टी कम प्रोसेसिंग के कारण इसमें ब्लैक और ग्रीन टी की तुलना में ज्यादा पोषक तत्व होते हैं। और इसमें एंटीऑक्सिडेंट्स का बेहतर स्रोत है जो की शारीर से टॉक्सिन निकालने में सहायक है। इसमें मौजूद यौगिक फैट बर्न करने में मदद करते हैं। और आपके चेहरे और शरीर की चर्बी अपने आप निकलने लगती है और आप स्लिम होने लगते हैं।

White Tea

व्‍हाइट टी बनाने का तरीका

आप बाजार से लूज व्हाईट टी ले आयें उसके बाद एक चम्मच व्हाईट टी, आधा चम्मच अदरक पाउडर और कुछ नींबू रस को एक गिलास पानी में मिक्स कर लें। अगर आप अच्छा परिणाम चाहते हैं, इस चाय को रोजाना कम से कम 15 दिनों तक पिएं।

प्रेगनेंसी में सांस लेने में दिक्कत और सांस फूलने के कारण और उपाय

प्रेगनेंसी के दौरान सांस फूलने की समस्या होने पर अधिकतर गर्भवती महिलाएं घबरा जाती है। जबकि प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में महसूस होने वाले लक्षणों में से सांस फूलना भी प्रेगनेंसी का ही लक्षण होता है। और सत्तर फीसदी महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान इस समस्या से परेशान हो सकती है। साथ ही प्रेगनेंसी की हर तिमाही में में अलग अलग कारण की वजह से गर्भवती महिला को यह दिक्कत हो सकती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में सांस फूलने के क्या कारण होते हैं और किस तरह गर्भवती महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है इस बारे में जानते हैं।

गर्भावस्था में सांस फूलने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान सांस फूलने का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि ऐसे बहुत से कारण होते हैं जिसकी वजह से प्रेग्नेंट महिला को सांस फूलने या सांस लेने में दिक्कत जैसी परेशानी हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं अब सांस लेने में होने वाली परेशानी के कारण:

हार्मोनल बदलाव: प्रेगनेंसी में महिला के शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं। और शरीर में प्रोजेस्ट्रोन, एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ने लगता है। और इन्ही हार्मोनल बदलाव के कारण श्वसन तंत्र से जुडी समस्या हो सकती है।

खून की कमी: प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बॉडी में अतिरिक्त रक्त की जरुरत पड़ती है। और रक्त ही बॉडी के सभी पार्ट्स तक ऑक्सीजन के फ्लो को सही तरीके से करने में मदद करता है। लेकिन यदि किसी गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी होती है तो ऑक्सीजन के सही तरीके से सभी पार्ट्स तक न पहुँचने के कारण महिला को सांस लेने से जुडी परेशानी होती है।

अस्थमा: गर्भवती महिला यदि अस्थमा की मरीज़ है तो महिला को प्रेगनेंसी की दौरान ऐसी परेशानी होना आम बात होती है।

वजन: प्रेगनेंसी में वजन के बढ़ने के कारण गले के टिशू में भी फैट जमा हो सकता है जिसकी वजह से प्रेग्नेंट महिला को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।

खर्राटे: प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाएं खर्राटे अधिक लेने लग जाती है। और खर्राटे लेने का कारण महिला के नाक के रास्ते में रूकावट पैदा हो सकती है। ऐसे में जो महिलाएं खर्राटे अधिक लेती है तो उन्हें भी सांस लेने में परेशानी व् सांस फूलने की समस्या हो सकती है।

फेफड़ों पर दबाव: गर्भाशय का आकार बढ़ने के साथ फेफड़ों पर दबाव भी अधिक बढ़ जाता है। जिसकी वजह से गर्भवती महिला को सांस फूलने की परेशानी होती है।

ज्यादा शारीरिक श्रम: यदि महिला जरुरत से ज्यादा काम करती है, अपनी बॉडी को थकाती है, व्यायाम अधिक करती है, सीढ़ियां चढ़ती है, बहुत देर तक एक ही जगह पर खड़ी रहती है, ज्यादा भागदौड़ करती है, आदि। तो इन सभी कारणों की वजह से भी गर्भवती महिला को सांस लेने में दिक्कत व् सांस फूलने जैसी परेशानी हो सकती है।

गर्भावस्था में सांस फूलने या सांस लेने से जुडी परेशानी से निजात पाने के टिप्स

यदि प्रेग्नेंट महिला को सांस फूलने से जुडी परेशानी होती है तो कुछ आसान से टिप्स का ध्यान रखने से महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सकती है। तो आइये अब जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

आराम करें

यदि आपको ऐसा लगता है की किसी काम को करते हुए, ज्यादा देर खड़े रहने से या किसी और कारण आपको ज्यादा थकावट हो रही है और सांस लेने में दिक्कत हो रही है या सांस फूल रही है। तो आप थोड़ी देर आराम करें आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला को भरपूर आराम करना भी चाहिए क्योंकि महिला जितना आराम करती है उतना ही बॉडी की सभी क्रियाएं बेहतर तरीके से काम करती है और प्रेगनेंसी में दौरान होने वाली परेशानियों को कम किया जा सकता है।

अपनी बैठने और सोने की पोजीशन का ध्यान रखें

जब भी आप बैठ रही है तो अपने कन्धों को पीछे की तरफ लगाएं और ब्रेस्ट को थोड़ा आगे की तरफ निकाल कर बैठें। ऐसा करने से आपको सांस लेने में दिक्कत नहीं होगी। इसके अलावा सोते समय करवट लेकर सोएं और बार बार अपने सोने की पोजीशन बदलते रहें। इससे आपके खर्राटे कम होंगे और आपको सांस लेने में होने वाली परेशानी से निजात पाने में मदद मिलेगी।

ब्रीथिंग व्यायाम

रोजाना थोड़ी देर ब्रीथिंग व्यायाम करें इससे आपकी सांस लेने से जुडी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलेगी। साथ ही आपको लम्बी व् गहरी सांस लेने में मदद मिलेगी जो की आपके लिए बहुत फायदेमंद होता है।

आयरन और विटामिन सी युक्त आहार का सेवन करें

आयरन शरीर में खून की कमी को पूरा करने व् लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने में मदद करता है। वहीँ विटामिन सी बॉडी के सभी पार्ट्स में ब्लड को अच्छे से अवशोषित करने में मदद करता है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को आयरन व् विटामिन सी से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए। और इसके लिए आप हरी सब्जियों, अनार, सेब आदि फलों का सेवन कर सकती हैं।

हल्का भोजन करें

फैट से भरा हुआ भोजन करने के कारण, जो भोजन आपको पचाने में दिक्कत होती है उस तरह के भोजन का सेवन करने से भी आपको बचना चाहिए। क्योंकि इनके कारण भी आपको सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।

प्रेगनेंसी में सांस फूलने से जुडी ज्यादा परेशानी होने पर डॉक्टर से कब मिलें

  • यदि आपको सांस फूलने की परेशानी अधिक हो, सांस लेने में दिक्कत ज्यादा हो रही हो, सीने में दर्द हो रहा हो, तो इस लक्षण को अनदेखा न करें और डॉक्टर से मिलें।
  • सांस लेने में इतनी परेशानी हो की आपको रात को नींद लेने में भी दिक्कत हो।
  • लम्बे समय तक सांस लेने की परेशानी होने पर क्योंकि यदि सांस लेने में होने वाली परेशानी का कारण खून की कमी या अस्थमा है तो आपको डॉक्टर की राय की जरुरत होती है।
  • सांस लेने के साथ गले में दर्द आदि की समस्या अधिक हो।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान सांस फूलने या सांस लेने से जुडी समस्या के कारण व् उससे बचने के आसान टिप्स, ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान यदि आप भी इस परेशानी का सामना कर रही है तो आपको इन टिप्स का ध्यान रखना चाहिए।

गोल्ड चैन साफ़ करने के तरीके

पुराने समय से ही गहनों का इस्तेमाल महिलाओ को सुन्दरता को बढाने के लिए किया जाता है। और अधिकतर महिलाओ को शौक भी होता है की वो कहीं आएं जाएँ तो गहने जरूर पहने, और कुछ गहने जैसे की कानो में सोने के ईयर रिंग, अंगूंठी, और चैन आदि वो रोजमर्रा में भी पहन कर रखती है। ऐसे में धूल मिट्टी व् स्किन के साथ हमेशा चिपके रहने से चैन डल लगने लगती है। और महिलाएं उसे ज्वेलर से साफ़ नहीं करवाना चाहती है, क्योंकि उसे साफ़ करवाने में खर्चा अधिक हो जाता है। लेकिन अब आप खुद ही सोचिए सोना तो चमकते हुए ही अच्छा लगता है, यदि उसका रंग डल पड़ जाए तो फीका लगने लगता है। तो आइये आज हम आपको गोल्ड चैन को साफ़ करने के लिए ऐसे कुछ टिप्स देने जा रहें हैं जिनसे आपके सोने की चमक भी बनी रहेगी और आपको ज्वेलर के पास जाकर अधिक खर्चा भी नहीं करना पड़ेगा।

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गोल्ड चैन साफ़ करने के तरीके:-

निम्बू का प्रयोग करें:-

निम्बू का इस्तेमाल करके आप अपनी सोने की चैन पर जमी सारी गंदगी को बाहर निकल सकती है। इसके लिए आपको आधा कटोरी पानी लेकर उसे अच्छे से गरम कर लें, उसके बाद उसमे निम्बू का रस निचोड़ कर अपनी चैन को पांच से सात मिनट के लिए छोड़ दें। उसके बाद हलके हाथो से या ब्रश से चैन को रगड़े, और उसके बाद साफ पानी से चैन को धोकर कपडे से साफ़ कर सूखा लें, आपकी सोने चमक को वापिस लाने में मदद मिलेगी।

हल्दी का प्रयोग करें:-

हल्दी का प्रयोग करने से भी आप अपनी सोने की चैन की चमक को वापिस ला सकते हैं। इसके लिए आप एक कटोरी में पानी को गरम करके हल्दी मिक्स कर लें। और फिर अपनी चैन को उसमे डाल दें, और उसके बाद ब्रश से अपनी चैन को साफ़ कर लें। फिर साफ़ पानी से चैन को धोकर सूखा लें आपकी चैन ऐसा लगेगा की अभी नई आई है।

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रीठा का उपयोग करें:-

रीठा के इस्तेमाल से भी आप हर तरह के सोने के आभूषणों को चमका सकते हैं। इसके लिए आप इसके लिए आप रीठा को पानी में डाल दें, और साथ ही अपनी सोने की चैन को भी डालकर अच्छे से उबाल लें। फिर उसे निकाल कर अच्छे से साफ़ कर लें, आपको इसका असर साफ दिखाई देगा क्योंकि आपकी चैन चमक जाएगी।

डिटर्जेंट और अमोनिया का इस्तेमाल करें:-

अच्छी क़्वालिटी का एक चम्मच डिटर्जेंट एक चम्मच अमोनिया और साथ ही आधा कटोरी गुनगुना पानी डालकर अच्छे से मिक्स कर लें, और उसके बाद अपनी चैन को उसमे डाल दें। थोड़ी देर अपनी चैन को उसमे छोड़ दें और फिर उसे निकाल कर साफ़ पानी से धो लें। ऐसा करने से आपको अपनी सोने की चैन को चमकाने में मदद मिलेगी।

चूने के घोल का उपयोग करें:-

थोड़ा सा पानी लेकर उसमे थोड़ा चूना मिलाकर घोल तैयार करें, उसके बाद उसमे थोड़ी देर के लिए अपनी सोने की चैन को छोड़ दें। और फिर चैन निकाल कर उसे ब्रश से साफा करें फिर उसे साफ पानी से धो लें। उसके बाद अच्छे से अपनी चैन को सूखा लें, आपकी सोने की चैन बिलकुल नई जैसी हो जाएगी।

टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें:-

घर में टूथपेस्ट आसानी से मिलता है और और जितनी आसानी से ये आपके दांतो की चमक को बनाएं रखता है। उतनी ही चमक इसका इस्तेमाल करने से आपके सोने के गहनों की भी बनी रहती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक टूथब्रश पर थोड़ा सा टूथपेस्ट लगाकर अपनी चैन पर हलके से रगड़े, थोड़ा थोड़ा पानी भी लगाते रहें ताकि पेस्ट सूखे न। उसके बाद साफ़ पानी से चैन को धोकर सूखा लें ऐसा करने से भी आपको अपनी सोने की चैन की चमक बनाएं रखने में मदद मिलेगी।

तो ये हैं कुछ ख़ास टिप्स जिनका इस्तेमाल करके आप आप अपने सोने चैन व् ने सोने के आभूषणों को भी चमका सकती हैं। क्योंकि सोने की चमक बरकरार रहने से महिला की ख़ूबसूरती को भी बरकरार रहने में मदद मिलती है। और इसके लिए आप घर में जब भी खाली बैठी हो तभी कर सकती है आपको कहीं बाहर भी जाने की जरुरत नहीं होती है।

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खून की कमी की समस्या के घरेलू उपाय

शरीर में खून की कमी होने के कारण शरीर में रेड ब्लड सेल्स की कमी हो जाती है, यह समस्या पुरुषो से अधिक महिलाओ में देखने को मिलती है, और शरीर में इसकी कमी होने के कारण एनीमिया जैसी समस्या का भी आपको सामना करना पड़ता है, शरीर में खून की कमी होना मतलब की हीमोग्लोबिन के स्तर का नीचे आ जाना, यह एक तरह का प्रोटीन होता है, जो आपकी बॉडी में ऑक्सीजन को सभी अंगो तक पहुंचाने में भरपूर मदद करता है, इसीलिए इसकी कमी के कारण आपको इस बिमारी से झूझना पड़ता है।

khoon ki kmi

शरीर में खून की कमी होने के कारण आपको बहुत जल्दी थकान का अनुभव होता है, आप सुस्ती महसूस करते है, हाथों पैरों में सूजन रहने लगती है, घबराहट, सांस लेने में परेशानी का अनुभव होता है, पसीना अधिक आने लगता है, आदि जैसी बहुत सी परेशानियां हो जाती है, और खून की कमी होने का सबसे बड़ा कारण होता है की आप अपने शरीर को अच्छे से पोषण नहीं देते है, न ही पौष्टिक आहार का सेवन करते है, क्योंकि यदि आपके शरीर में पोषण तत्व नहीं होंगे तभी तो आपके शरीर में खून की कमी होगी, तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू उपाय बताने जा रहे है जिनका इस्तेमाल करने से आप कुछ ही दिनों में शरीर में होने वाली खून की कमी को पूरा कर सकते है, परन्तु इसके लिए कुछ दिनों तक आपको नियमित रूप से इनका सेवन करना चाहिए, तभी आपकी इस समस्या का समाधान हो पायेगा।

चुकंदर का सेवन करें:-

चुकंदर

चुकंदर का सेवन करने से शरीर में होने वाली आयरन की कमी को दूर करने में मदद मिलती है, क्योंकि इसमें कैल्शियम, पोटैशियम, फाइबर, होने के साथ आयरन की मात्रा भी भरपूर होती है, इसके सेवन के लिए आप गाजर, चुकंदर,और शकरगंद का जूस निकाल कर नियमित इसका सेवन करें, साथ ही आप चुकंदर को अपने आहार के साथ सलाद में भी शामिल करें, और यदि आप इसका सेवन छिलके के साथ करते है तो आपको और फायदा होता है।

पालक का सेवन करें:-

पालक में भी आयरन के साथ फोलिक एसिड, विटामिन बी 12 भरपूर होता है, यदि आप अपने आहार में पालक को शामिल करते है तो इसके कारण भी शरीर में होने वाली खून की कमी को दूर करने में मदद मिलती है, इसके लिए आप एक गिलास पालक के जूस में दो चम्मच शहद डाल कर इसका सेवन रोजाना कर सकते है या फिर आप इसकी सब्ज़ी बनाकर और दिन में दो बार नियमीय पालक का सूप बनाकर पीने से भी आपको फायदा मिलता है।

शीरा का सेवन करें:-

शीरा का सेवन करने से शरीर में रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलती है, इसमें आयरन के साथ और भी खनिज भरपूर मात्रा में होते है, इसके सेवन के लिए आप एक कप पानी या गरम दूध में एक चम्मच शीरा मिलाकर इसके सेवन दिन में एक या दो बार करें, इसके अलावा आप दो चम्मच शीरा और दो चम्मच एप्पल साइडर विनेगर को एक कप पानी में मिलाकर उसका सेवन करें, ऐसा करने से भी आपको फायदा मिलता है, गर्भवती महिलाओ के लिए शीरा का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।

तिल के बीज का प्रयोग करें:-

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यदि आप एक चौथाई कप तिल के बीजों का सेवन रोज करते है तो आपके शरीर में तीस प्रतिशत तक रक्त की मात्रा में वृद्धि होती है, इसके सेवन के लिए आप थोड़े से तिल के बीजों को पानी में दो से तीन घंटे के लिए भिगो कर रख दें, उसके बाद आप इसे पीस कर पेस्ट तैयार कर लें, उसके बाद इसमें शहद मिलाकर दिन में दो बार इसका सेवन करें, आप चाहे तो दूध या गुड़ मिलाकर भी इसका सेवन कर सकते है, इससे भी आपको फायदा मिलता है।

खजूर का सेवन करें:-

खजूर में भी आयरन और विटामिन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, इसीलिए इसके सेवन से भी आपके शरीर में होने वाली खून की कमी को दूर करने में मदद मिलती है, इसके सेवन के लिए यदि आप रोजाना सुबह उठ कर दो या तीन सूखे खजूर का सेवन करते है तो भी आपको फायदा होता है, या आप रात को एक कप दूध में दो या तीन खजूर डाल कर रख दें, सुबह उठ कर इन खजूर का सेवन कर लें, और दूध पी लें आपको फायदा मिलेगा।

अनार का सेवन करें:-

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अनार का सेवन करने से भी आपके शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाने में मदद मिलती है, इसके सेवन के लिए आप रोजाना नाश्ते में एक कप अनार के जूस में दो चम्मच शहद और एक चौथाई चम्मच दालचीनी पाउडर डाल कर इसका सेवन करते है तो आपको इससे फायदा मिलता है, इसके अलावा अनार का सेवन करने से या दो चम्मच अनार के सूखे बीजों का पाउडर बनाकर उसे दूध में मिलाकर पीने से आपको अपने शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।

केले का सेवन करें:-

केला भी आपके शरीर में हीमोग्लोबिन का गठन करने वाले एंजाइम में उत्पादन को बढ़ावा देता है, इसके सेवन के लिए आप दिन में नियमित दो बार केले के साथ एक चम्मच शहद का सेवन करें, या फिर आप केले में एक चम्मच आंवला का रस मिलाकर दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करें, ऐसा करने से भी आपके शरीर में होने वाली खून की कमीको दूर करने में मदद मिलती है।

सेब का सेवन करें:-

रोजाना एक सेब का सेवन करने से आप बहुत फायदा होता है, और यदि आप हरे सेब का सेवन उसके छिलके के साथ करते है तो आपको और फायदा होता है, इसके अलावा यदि आप फ्रैश एप्पल के जूस में समान मात्रा में चुकंदर का जूस और थोड़ा सा शहद मिलाकर उसका सेवन करते है तो इसके कारण आपको शरीर में होने वाली खून की कमी को दूर करने में मदद मिलती है।

मैथी का सेवन करें:-

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मैथी का सेवन करने से भी आपके शरीर में रेड ब्लड सेल्स की मात्रा को बढ़ाने में मदद मिलती है, मैथी के बीज और इसकी पत्तियां दोनों का सेवन करने से आपको और भी फायदा मिलता है, इसके सेवन के लिए आप एक कप चावल में दो चम्मच मैथी के बीज डालकर पकाएं, उसके बाद इसमें स्वादानुसार नमक डालें, और दिन में एक बार इसे नियमित कम से कम तीन हफ्ते तक करें, इसके अलावा आप मैथी की पत्तियों को सूप या सलाद के रूप में लेकर भी इसका सेवन कर सकते है।

सूखे काले किशमिश का सेवन करें:-

इसमें भी आयरन और विटामिन भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो आपके शरीर में होने वाली खून की कमी को दूर करने में मदद करता है, इसके लिए आप दस या बारह किशमिश को रात को भिगो कर रख दें, उसके बाद सुबह इसके बीज निकाल कर अलग कर लें, और नाश्ता करने से पहले इनका सेवन करें, ऐसा कम से कम एक महीने तक लगातार करें आपको जरूर फायदा मिलेगा।

खून की कमी को दूर करने के अन्य उपचार:-

  • गन्ने के ताजे रस का नियमित सेवन करने से भी आपको फायदा मिलता है।
  • बादाम भी खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है साथ ही खून को साफ़ भी करता है।
  • टमाटर का सेवन करने से आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है, और साथ ही इसके टमाटर या इसके सूप के सेवन से आपके शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।
  • आंवले का सेवन करने से भी आपके शरीर में खून की वृद्धि होती है, और साथ ही आप आंवले का मुरब्बा, आंवले का चूर्ण आदि में से किसी का भी नियमित सेवन कर सकते है।
  • गाजर का प्रयोग भी सलाद या सब्ज़ी के रूप में करने से आपको फायदा मिलता है।
  • इसके अलावा आपको अपने आहार में पौष्टिक तत्वों को शामिल करना चाहिए जिसके कारण आपके शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलें।
  • गुड़ का सेवन करने से भी शरीर में होने वाली खून की कमी को दूर किया जा सकता है।

तो ये कुछ घरेलू उपाय है जिनका इस्तेमाल करके आप अपने शरीर में होने वाली खून की कमी को दूर करके अपने शरीर में रेड ब्लड सेल्स की मात्रा को बढ़ा सकते है, साथ ही आपको यह समस्या होगी ही नहीं यदि आप अपने खान पान में लापरवाही न करें, स्वस्थ व् पौष्टिक आहार लें अच्छा लाइफस्टाइल बनाएं, खास कर महिलाओ में ये समस्या ज्यादा पायी जाती है, तो महिलाओ को अपने शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए इन चीजों का सेवन जरूर करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के अंतिम महीने में दूध में बटर डालकर पीने के फायदे

आपने अक्सर बड़े बुजुर्गों से सुना होगा की प्रेगनेंसी के अंतिम महीनों में घी, मक्खन, डेयरी प्रोडक्ट्स आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि यह सभी चीजें पोषक तत्वों से भरपूर होती है। जो गर्भावस्था के आखिरी महीने में शिशु के विकास को बेहतर करने के साथ महिला को डिलीवरी के लिए भी फिट रखने में मदद करती है।

लेकिन क्या आप जानते हैं की प्रेगनेंसी के अंतिम महीने में यदि आप दूध में घी या मक्खन डालकर सेवन करते हैं। तो इसके फायदे दुगुने हो जाते हैं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के अंतिम महीने में दूध में बटर डालकर पीने से क्या फायदे मिलते हैं।

ऊर्जा मिलती है

वजन बढ़ने के कारण, सूजन की समस्या होने के कारण, प्रेगनेंसी के अंतिम महीने में महिला बहुत ज्यादा थकावट का अनुभव कर सकती है। ऐसे में दूध में बटर डालकर पीने से हड्डियों को मजबूती मिलने के साथ शरीर में कैलोरी की मात्रा भी सही रहती है। जिससे गर्भवती महिला ऊर्जा से भरपूर रहती है।

वजन बढ़ता है

यदि गर्भवती महिला या गर्भ में पल रहे शिशु का वजन प्रेगनेंसी के दौरान कम रहता है। और आप चाहती है की डिलीवरी के दौरान बच्चे का वजन सही रहे और आपको भी कोई दिक्कत न हो। तो आपको प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में दूध में बटर डालकर उसका सेवन जरूर करना चाहिए। इससे गर्भवती महिला का वजन सही होने के साथ गर्भ में बच्चे का वजन भी बढ़ता है। जिससे जन्म के समय बच्चे के वजन में कमी जैसी परेशानी नहीं होती है।

पाचन सम्बन्धी परेशानियां होती है दूर

पेट के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ने के कारण गर्भवती महिला की पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है जिसकी वजह से कब्ज़, अपच जैसी परेशानियां महिला को हो जाती है। लेकिन दूध व् बटर को साथ मिलकर सेवन करने से पाचन क्रिया को मजबूत करने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को पाचन सम्बन्धी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।

मूड होता है बेहतर

दूध में बटर डालकर पीने से गर्भवती महिला के मूड को बेहतर रखने में मदद मिलती है। साथ ही इससे गर्भवती महिला को तनाव जैसी परेशानी से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

बच्चे का विकास अच्छे से होता है

दूध में बटर डालकर पीने से गर्भ में पल रहे बच्चे के शारीरिक विकास को बेहतर करने में मदद मिलती है। क्योंकि दूध में बटर डालकर पीने से बच्चे के विकास के लिए सभी जरुरी पोषक तत्व बच्चे को मिलते हैं।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो दूध में बटर डालकर पीने से गर्भवती महिला व् बच्चे को मिलते हैं। लेकिन ध्यान रखें की घर में निकले ताजे मक्खन का सेवन ही करें। बासी मक्खन का सेवन न करें, इसके अलावा यदि आपका वजन ज्यादा है तो भी इसका सेवन नहीं करे। क्योंकि दूध में बटर डालकर पीने से आपका वजन और ज्यादा तेजी से बढ़ता है।

कितनी मुश्किल होती है प्रेग्नेंट महिला की लाइफ

प्रेगनेंसी के नौ महीने

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए बहुत ही खास समय होता है खासकर जब महिला पहली बार माँ बनती है तो प्रेगनेंसी का नया अनुभव और भी खास होता है। लेकिन माँ बनना इतना आसान भी नहीं होता है क्योंकि प्रेगनेंसी के नौ महीने जितने खास होते हैं। उतना ही इसमें महिला को परेशानियों और बदलाव का सामना कारण पड़ सकता है। और यह परेशानी केवल शारीरिक रूप से ही नहीं मानसिक रूप से भी हो सकती है साथ ही महिला को शारीरिक रूप से बदलाव का अनुभव भी प्रेग्नेंट महिला को करना पड़ सकता है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान कुछ खास अनुभव भी होते हैं जो महिला के माँ बनने के अहसास को और भी बेहतरीन बनाते हैं।

जैसे की शिशु की गर्भ में हलचल, शिशु के जन्म से पहले ही महिला को मातृत्व का अहसास होना, शिशु की केयर को लेकर चिंता करना आदि। प्रेगनेंसी के नौ महीने का हर दिन और डिलीवरी तक का समय महिला के लिए खूबसूरत लम्हो से भरा हुआ होता है और प्रेगनेंसी में इतनी परेशानियों के आने के बाद भी महिला को केवल अपने गर्भ में पल रहे शिशु के आने का इंतज़ार भी होता है। इस समय घर का हर सदस्य, आपसे जुड़ा हर व्यक्ति महिला को प्रेगनेंसी में क्या सही है क्या नहीं इसके बारे में समझाता है। तो आइये आज हम आपको प्रेगनेंसी की तीनों तिमाही में प्रेग्नेंट महिला की लाइफ में क्या क्या हो सकता इसके बारे में बताते हैं। जिससे पहली बार माँ बनने के अनुभव को करीब से जानने में आपको थोड़ी मदद मिलेगी।

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही

गर्भावस्था की पहली तिमाही के पहले महीने में महिला को पता भी नहीं होता है की महिला का गर्भ ठहर गया है, लेकिन दूसरी तिमाही में पीरियड्स मिस होने के बाद महिला को जैसे ही प्रेगनेंसी की खबर मिलती है तो यह प्रेगनेंसी का पहला खूबसूरत पल होता है। और जितना खूबसूरत यह पल होता है उतना ही इस दौरान महिला को शारीरिक परेशानियां भी अधिक होती है। क्योंकि इस दौरान गर्भ में शिशु के प्रत्यारोपण से लेकर शिशु के अंगो के बनने की प्रक्रिया होती है। जिसके कारण बॉडी में बहुत तेजी से हार्मोनल बदलाव होते हैं और इसके कारण उल्टियां आना, मॉर्निंग सिकनेस, बार बार यूरिन आने की समस्या होना, स्पॉटिंग की समस्या, सिर में दर्द, मूड स्विंग्स होना, भूख कम लगना आदि।

यह कुछ परेशानियां प्रेग्नेंट महिला को पहले तीन महीने में हो सकती है। और ऐसा जरुरी नहीं है की हर गर्भवती महिला को एक जैसी ही परेशानी हो बल्कि यह हर गर्भवती महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करता है। इन तीन महीनों में गर्भ में शिशु के लगभग सभी अंगो की आकृतियां बनने की शुरुआत हो जाती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने महिला के लिए तनाव से भरे हुए भी हो सकते हैं क्योंकि पहली बार माँ बनने वाली महिलाएं इस दौरान छोटी -छोटी बातों को लेकर परेशान हो सकती है। जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान क्या करना सही है और क्या गलत, प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, आदि, इसके अलावा कुछ महिलाएं इस दौरान बॉडी में हो रहे तेजी से बदलाव के कारण तनाव में भी आ सकती है।

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही

प्रेग्नेंट महिला के लिए प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही को आप थोड़ा हैप्पी कह सकते हैं, क्योंकि इस दौरान महिला की परेशानियां थोड़ी कम हो जाती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में महिला को राहत मिलने के साथ एक नए अनुभव को एन्जॉय करने को भी मिलता है, क्योंकि इस दौरान महिला का पेट थोड़ा बाहर आने के कारण महिला को ख़ुशी मिलती है साथ ही उसकी उत्सुकता भी बढ़ती है और पांचवें महीने के आस पास गर्भ में थोड़ी बहुत शिशु की हलचल का अनुभव भी महिला को होता है जो महिला को गर्भ में शिशु के होने का एक खास अनुभव करवाता है। लेकिन इस दौरान कुछ महिलाओं को थोड़ी बहुत परेशानी भी रह सकती है लेकिन इसमें घबराने की कोई बात नहीं होती है क्योंकि प्रेगनेंसी में ऐसा होना बहुत ही आम होता है, लेकिन महिला को अपनी केयर के प्रति किसी भी तरह की लापरवाही दूसरी तिमाही में भी नहीं करनी चाहिए।

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में महिला का वजन बढ़ जाता है, पेट भी पहले की अपेक्षा बाहर आ जाता है, शिशु का गर्भ में शारीरिक विकास भी तेजी से बढ़ता है, आदि। ऐसे में प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला का वजन बढ़ने के कारण महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की काम करने में परेशानी होना, उठने बैठने में दिक्कत होना, कब्ज़ की समस्या का अधिक होना, सोने में परेशानी होना, यूरिन ज्यादा आना, बेचैनी महसूस होना, आदि। साथ ही जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान कॉम्प्लीकेशन्स होती है उनके लिए तो यह तिमाही और भी ज्यादा मुश्किलों भरी हो सकती है।

ऐसे में गर्भवती महिला को इस तिमाही में बहुत अधिक सावधानी बरतने की जरुरत होती है। क्योंकि इस दौरान यदि महिला अपना अच्छे से ख्याल नहीं रखती है तो इसके कारण महिला की डिलीवरी समय से पहले होने का डर रहता है। इस समय की गई लापरवाही के कारण कई बार शिशु को गर्भ में परेशानी हो सकती है जिसके कारण डिलीवरी के दौरान दिक्कतें आ सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है, क्योंकि इस दौरान शिशु का विकास भी तेजी से होता है और महिला को भी परेशानी अधिक हो सकती है।

साथ ही नौवें महीने में या डॉक्टर की बताई गई तिथि के आस पास महिला की डिलीवरी किसी भी समय हो सकती है, और कई महिलाएं इस समय यह सोचकर परेशान हो सकती हैं की उनकी डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन, तो ऐसे में महिला को बिल्कुल भी इस बारे में नहीं सोचना चाहिए क्योंकि डिलीवरी का समय पास आने पर ही डॉक्टर इस बारे में बता पाते हैं की शिशु की नोर्मल डिलीवरी होगी या सिजेरियन। । ऐसे में गर्भवती महिला के लिए इस समय बॉडी में प्रसव के संकेतों को समझना भी जरुरी होता है। जैसे की पेट में दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव, एमनियोटिक फ्लूड का निकलना, आदि।

तो यह हैं प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के नौ महीने किस किस परेशानी से गुजरना पड़ता है, और महिला को कौन कौन सी दिक्कत आ सकती है इससे जुडी कुछ जानकारी। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान कितनी भी दिक्कत हो उसे कम करने के लिए सोचना चाहिए और उससे घबराना नहीं चाहिए, और अपनी अच्छे से केयर करनी चाहिए, समय समय पर डॉक्टर से राय लेते रहना चाहिए, अपनी जांच समय पर करवानी चाहिए, ताकि महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके और गर्भ में शिशु का विकास बेहतर तरीके से हो सके। तो यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना बहुत जरुरी है ताकि प्रेगनेंसी के नौ महीने क्या होता है इसे समझने में आपको आसानी हो सके।

डायबिटीज के क्या-क्या लक्षण होते है?

Symptoms of Diabetes 

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आज के समय में बीमारियां होना आम होता जा रहा है। बच्चे हो या बड़े, जवान हो या बूढ़े हर कोई किसी न किसी बीमारी से परेशान दिखाई पड़ता है। ऐसी ही एक बीमारी है मधुमेह। जो वर्तमान की आम बिमारियों में से एक है। मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जिससे यदि कोई व्यक्ति एक बार ग्रस्त हो जाए तो यह जिंदगी भर उसका साथ नहीं छोड़ती।

ऐसे तो इस बिमारी को पता लगाने के लिए बहुत से टेस्ट और परीक्षण किये जाते है लेकिन उन सभी को करने में बहुत से पैसे खर्च होते है और कई बार इलाज में देरी समस्या के बढ़ने का कारण बन जाती है। ऐसे में इसे बढ़ने से पहले ही पहचान लेना अच्छा होता है।

लेकिन सभी इस बीमारी के शुरूआती लक्षणों के बारे में नहीं जानते और अज्ञानता के कारण इलाह में देरी हो जाती है। यदि मधुमेह के शुरूआती लक्षणों को पहचान कर इसका इलाज सही समय से करा दिया जाए तो इलाज में आसानी होती है। कई लोगों को इस बीमारी का पता बहुत समय बाद लगता है जिसकी वजह से समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है।डायबिटीज के क्या-क्या लक्षण होते है

वास्तव में डायबिटीज, लाइफस्टाइल संबंधी और वंशानुगत बिमारी है। जब शरीर में pancreas नामक ग्रंथि इन्सुलिन बनना बंद कर देती है तब मधुमेह की बीमारी होती है। इन्सुलिन ब्लड में ग्लूकोस को नियंत्रित करने में मदद करता है। ऐसे में जब इसका निर्माण बंद हो जाता है तो रक्त में ग्लूकोस की मात्रा बढ़ने लगती है।

यहाँ हम आपको मधुमेह के कुछ शुरूआती लक्षणों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप इस बीमारी को बढ़ने से पहले ही रोक पाएंगे।

मधुमेह के शुरूआती लक्षण :-

1. थकान महसूस होना :

डायबिटीज के होने पर शुरूआती दिनों में व्यक्ति को सारा दिन थकान महसूस होती है। रोजाना की भरपूर नींद लेने के बाद भी सुबह उठते ही आपको ऐसा लगेगा की अभी आपकी नींद पूरी नहीं हुई है और शरीर में थकान भी महसूस होगी। यह सबसे सीधा और आसान कारक है जिससे यह पता चलता है की खून में शुगर का लेवल बढ़ता जा रहा है।

2. बार-बार पेशाब आना :

मधुमेह की समस्या होने पर व्यक्ति को बार बार पेशाब आता है। दरअसल, जब शरीर में ज्यादा मात्रा में शुगर इकठ्ठा हो जाता है तो यह पेशाब के रास्ते बाहर निकलता है, जिसके कारण डायबिटीज के मरीज को बार बार पेशाब आने की समस्या शुरू हो जाती है।

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3. अधिक प्यास लगना :pani

मधुमेह की समस्या होने पर रोगी को बार बार प्यास लगती है। क्योंकि पेशाब के रास्ते से शरीर का पानी और शुगर बाहर निकल काटा है जिसके कारण प्यास लगने जैसी स्थिति बनी रहती है। लोग अक्सर इस बात को हलके में ले लेते है और समझ नहीं पाते की उनकी बीमारी की शुरुवात कब हो गयी।

4. आंखे कमजोर होना :

मधुमेह का रोग होने पर सबसे अधिक प्रभाव आँखों पर ही पड़ता है। डायबिटीज के मरीज को रोग होने पर सबसे पहले आँखों की रोशनी कम होने लगती है और धुंधला दिखाई देने लगता है। किसी भी वस्तु को देखने के लिए उसे आँखों पर जोर डालना पड़ता है।

5. वजन का कम होना :

मधुमेह के रोग की शुरुआत होने पर व्यक्ति का वजन तेजी से कम होने लगता है। सामान्य दिनों की अपेक्षा व्यक्ति एकाएक कम होने लगता है।

6. भूख लगना :

मधुमेह के मरीज का वजन तो कम होता है लेकिन उसकी भूख में बढ़ोतरी होती है। जी हां, मधुमेह का रोग होने पर व्यक्ति की भूख कई गुना बढ़ जाती है। उसे बार बार खाने की इच्छा होती है। अगर आपके साथ भी ऐसा है तो समझ ले की आप भी मधुमेह के घेरे में आ चुके है।

7. घाव न भरना :

अगर आपके शरीर में चोट या कहीं घाव हो जाए और वह जल्दी न भरे, फिर चाहे वो छोटी से खरोंच ही क्यों न हो, वह धीरे धीरे बड़े और गंभीर घाव में बदल जाएगी। उस चोट में संक्रमण के लक्षण साफ़ साफ दिखाई देने लगेंगे। तो समझ लें मधुमेह की शुरुवात हो चुकी है।

8. तबियत खराब रहना :

डायबिटीज के मरीज के शरीर में कोई भी संक्रमण या बीमारी जल्दी से ठीक नहीं होती। अगर आपको वायरल खांसी जुखाम / कोई भी बैक्टीरियल इन्फेक्शन हो जाए तो जल्द राहत नहीं मिलेगी। छोटी-छोटी चोटे जो अपने आप ही ठीक हो जाती है बड़े घाव बन जाते है।

9. त्वचा का रोग :

मधुमेह की शुरूआती स्टेज में त्वचा सम्बन्धी कई रोग होने शुरू हो आजाते है। त्वचा के सामान्य संक्रमण बड़े घाव बन जाते है।

10. अनुवांशिक कारण :

अगर आपके परिवार में किसी अन्य सदस्य को मदुमेह की बीमारी है तो आपको सावधान रहने की आवश्यकता है। क्योंकि यह एक अनुवांशिक बीमरी।

वैसे तो इस बीमारी को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता लेकिन हां, कुछ सावधानियां बरतकर आप इसे नियंत्रित अवश्य कर सकते है। उसके लिए जरुरी है की आपने डॉक्टर से सलाह ले और समय समय पर शुगर लेवल की जाँच कराते रहे।

प्रेगनेंसी में दोपहर को नहाने से होने वाले नुकसान

प्रेगनेंसी महिला के लिए एक ऐसा समय होता है जहां महिला को अपने रूटीन का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि महिला का रूटीन यदि सही होता है तो इससे महिला को फिट रहने और प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है। और महिला के रूटीन में केवल खाने, सोने, व्यायाम करने का ही सही समय नहीं होना चाहिए।

बल्कि महिला को सही समय से नहा भी लेना चाहिए। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सही समय से इसीलिए भी नहाना चाहिए ताकि महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिल सके। साथ ही यदि महिला सुबह की जगह दोपहर को नहाती है तो इसके कारण महिला को दिक्कत हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में दोपहर को नहाने से कौन से नुकसान हो सकते हैं।

तापमान: दोपहर के समय टंकी के पानी का तापमान बढ़ जाता है। ऐसे में गर्भवती महिला यदि उस पानी से नहाती है तो इसके कारण महिला के शरीर के तापमान में भी फ़र्क़ आ सकता है। जिससे महिला के गर्भ को दिक्कत हो सकती है। साथ ही बॉडी के तापमान में फ़र्क़ आने के कारण महिला को शारीरिक परेशानी का अनुभव भी ज्यादा हो सकता है।

आलस: यदि आप सुबह समय से न नहाकर दोपहर या शाम को नहाते हैं तो उससे पहले आपको थकान महसूस हो सकती है, आलस भी बहुत अधिक महसूस हो सकता है। लेकिन यदि आप समय से नहा लेते हैं तो उसके बाद आपको रिलैक्स, फ्रैश व् ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

रूटीन: सुबह सही समय से उठकर नहा लेने से आपके रूटीन को भी सही रहने में मदद मिलती है। लेकिन यदि आप सुबह न नहाकर दोपहर तक नहाने का इंतज़ार करते रहते हैं। तो ऐसा करने से आपकी दिनचर्या बिगड़ सकती है। और यदि प्रेग्नेंट महिला की दिनचर्या सही नहीं होती है तो इसके कारण महिला की परेशानियां बढ़ सकती है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो गर्भवती महिला को दोपहर के समय नहाने से हो सकते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला या बच्चे की सेहत को इसके कारण किसी तरह का नुकसान ना हो इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को समय से नहा लेना चाहिए।

क्या प्रेग्नेंट महिला को पपीता खाना चाहिए या नहीं

गर्भवस्था के दौरान पपीते का सेवन करना चाहिए या नहीं? कहीं पपीते के सेवन से गर्भपात तो नहीं हो जायेगा? पपीते का सेवन बच्चे के विकास पर कोई बुरा असर तो नहीं डालेगा? इस तरह के कई सवाल पपीते के सेवन को लेकर गर्भवती महिला के दिमाग में आ सकते हैं। और सही भी हैं, क्योंकि गर्भवती महिला यदि किसी भी गलत चीज का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करती है तो इससे बच्चे और माँ दोनों की सेहत को नुकसान पहुँच सकता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में प्रेगनेंसी में पपीते का सेवन करना चाहिए या नहीं इस बारे ने बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में पपीता खाना चाहिए या नहीं?

पपीते को खाने से सेहत सम्बन्धी बहुत से फायदे मिलते हैं। लेकिन जब गर्भवती महिला की बात आती है तो प्रेग्नेंट महिला को पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए खासकर कच्चे पपीते का। क्योंकि कच्चे पपीते में लेटेक्स व् अन्य ऐसे एंजाइम मौजूद होते हैं। जो गर्भाशय में संकुचन को बढ़ावा देते हैं। जिससे प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में गर्भपात व् प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में समय से पहले शिशु का जन्म जैसी परेशानियां हो सकती है।

साथ ही इससे शिशु को जन्म दोष के साथ शिशु की जान तक को खतरा हो सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को कच्चे पपीते का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। और पके हुए पपीते का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि उसमे ज्यादा नहीं लेकिन लेटेक्स की मात्रा मौजूद जरूर होती है। ऐसे में प्रेगनेंसी पके हुए पपीते को खाने से भी रिस्क हो सकता है।

प्रेगनेंसी में पपीते खाने से होने वाले नुकसान

  • कच्चे पपीते में लेटेक्स और पके हुए पपीते में पैपेन नामक एंजाइम होता है और दोनों ही गर्भाशय में संकुचन को बढ़ावा देते हैं जिससे गर्भपात व् समय से पहले बच्चे के जन्म होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • पैपेन की मौजूदगी होने के कारण पपीते का सेवन करने से गर्भ में बच्चे के विकास में समस्या आ सकती है।
  • पपीते का सेवन करने से बॉडी में शिशु तक पोषक तत्व पहुंचाने वाली नाल पर दबाव बढ़ सकता है जिसके कारण शिशु को गर्भ में दिक्कत हो सकती है।
  • पपीते का सेवन करने से दस्त की समस्या अधिक हो सकती है जिसके कारण भी गर्भपात हो सकता है क्योंकि पपीते में फाइबर की मात्रा मौजूद होती है और फाइबर का अधिक सेवन दस्त का कारण होता है।
  • यदि आपका पहले गर्भपात या समय से पहले डिलीवरी हुई है तो आपको पपीते का सेवन करने से ज्यादा नुकसान हो सकता है।
  • गेस्टेशनल डाइबिटीज़ की समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान न तो कच्चे और न ही पके हुए पपीते का सेवन करना चाहिए। गर्भावस्था के साथ डिलीवरी के बाद भी प्रेग्नेंट महिला को कुछ समय तक पपीते का सेवन करने से बचना चाहिए।