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लम्बे बालों की चाह रखते है? तो अपनाएँ ये एक आसान नुस्खा

लम्बे, घने, चमकदार, बाल ज्यादातर महिलाओ की चाह होती है, क्योंकि महिलाओ की पर्सनैलिटी को बढ़ाने में मदद करते है, इसके अलावा पुरुषो को भी लम्बे बालों वाली महिलाएं बहुत जल्दी अपनी और अट्रैक्ट करती है, साथ ही लम्बे बाल हो तो आप कोई भी हेयर स्टाइल कर सकती है, परन्तु कई बार महिलाओ के बालों की सही से केयर न करने के कारण, खान पान में लापरवाही करने के कारण बालों को अच्छे से पोषण नहीं मिल पाता है, जिसके कारण बालों की ग्रोथ कम होने लगती है।

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lambe baal

तो आइये आज हम आपको बालों को लम्बा करने एक आसान तरीका बताने जा रहे है, जिकी मदद से न केवल आपको अपने बालों की ग्रोथ को बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि बालों में होने वाली रुसी की समस्या, बालों के झड़ने की परेशानी, और बालों को रूखेपन से राहत दिलाने में भी मदद मिलेगी, इसके साथ इसका इस्तेमाल करने से यदि आप गंजेपन की समस्या से परेशान है तो इस समस्या से भी राहत मिलने में आपको मदद मिलती है, और वो उपाय है प्याज इसका इस्तेमाल अन्य चीजों के साथ करने से आपको अपने बालों की ग्रोथ को बढ़ाने में मदद मिलती है, क्योंकि प्याज़ में मौजूद सल्फर आपके बालों के विकास में मदद करता है, साथ ही इसमें मौजूद एंटी बैक्टेरियल गुण आपके बालों से जुडी अन्य समस्याओ का समाधान करते है, तो आइये आज हम आपको बालों के लम्बे होने के लिए प्याज़ से सम्बंधित आसान प्याज़ के उपाय बताने जा रहे है।

प्याज़ के रस का इस्तेमाल करें:-

onion juice

प्याज़ को चील कर आप सबसे पहले एक कटोरी में उसका रस निकाल लें, उसके बाद रस से अच्छे से अपने स्कैल्प की अच्छे से मसाज करें, और कम से कम आधे घंटे के लिए उसे बालों में रहने दें, और आप चाहे तो अपने बालों को अच्छे से ढक भी सकते है, इसके बाद बालों में शैम्पू लगाकर गुनगुने पानी से बालों को धो लें, आपको थोड़े ही दिनों में इसका फायदा दिखने लगेगा।

बियर के साथ करें प्याज़ का इस्तेमाल:-

बियर का इस्तेमाल बालों के लिए करने से आपके बालों को चमकदार बनाने में मदद मिलती है, और यदि आप इसका इस्तेमाल प्याज़ के साथ करते है, तो इससे बाल चमकदार होने के साथ बालों को लम्बा होने में भी मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप बियर में प्याज़ का रस मिलाकर कम से कम हफ्ते में दो बार अपने बालों में लगाएं, इससे बालों की ग्रोथ बढ़ेगी साथ ही बालों के लिए यह प्राकृतिक कंडीशनर का भी काम करता है।

प्याज़ और शहद के मिश्रण को लगाएं बालों में:-

शहद और प्याज़ के मिश्रण का इस्तेमाल करने से भी बालों को तेजी से लम्बा होने में मदद मिलती है, इसके लिए आप प्याज़ को पीस कर उसमें थोड़ा सा शहद मिलाएं, और उसके बाद इसकी मदद से अच्छे से अपने स्कैल्प की मसाज करें, और कुछ देर के लिए इस मिश्रण को अपने बालों में लगाएं, और फिर धो लें इसके कारण आपके बालों के लम्बे होने के साथ गंजेपन की समस्या से भी राहत मिलने में मदद मिलती है।

नारियल तेल के साथ करें प्याज़ का इस्तेमाल:-

onion coconut oil

नारियल के तेल में थोड़ा सा प्याज़ का रस मिलाएं, और इससे अच्छे से अपने बालों में अपने स्कैल्प पर मसाज करें, और थोड़ी देर के लिए अपने बालों में छोड़ दें, ऐसा करने से आपको अपने बालों को लम्बा करने में मदद मिलती है, साथ ही आपके बालों को अच्छे से पोषण भी मिलता है, आप इस उपाय को हफ्ते में दो से तीन बार तक इस्तेमाल कर सकते है।

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प्याज़ के साथ करें निम्बू के रस का इस्तेमाल:-

निम्बू का इस्तेमाल करने से केवल आपके बालों को रुसी की समस्या से ही राहत नहीं मिलती है, बल्कि इसके इस्तेमाल से आपके बालों को भी लम्बा होने में मदद मिलती है, और साथ ही इससे बालों के झड़ने की समस्या से भी राहत मिलने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप प्याज़ और निम्बू के रस को साथ मिलाकर हफ्ते में दो से तीन बार यदि अपने बालों की मसाज करते है, और थोड़ी देर के लिए इसे बालों में छोड़ कर बालों को धो लेते है, तो इसके कारण आपके बालों की ग्रोथ होने में मदद मिलती है।

अंडे की सफेदी के साथ करें प्याज़ का इस्तेमाल:-

अंडे के सेवन से आपकी सेहत को जितने फायदे मिलते है उतने ही आपके बालों को भी होते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप अंडे की सफेदी में प्याज के रस को मिला लें, उसके बाद इस पैक को अच्छे से अपने स्कैल्प पर लगाएं, और इसका इस्तेमाल आप गीले बालों में करें, और कम से कम आधे घंटे के लिए इसे बालों में छोड़ दें, और उसके बाद शैम्पू की मदद से अपने बालों को धो लें, ऐसा करने से आपके बालों को लम्बा होने में मदद मिलती है।

प्याज़ के रस और रम का इस्तेमाल करें:-

इस उपाय को करने के लिए रात भर एक रम के गिलास में प्याज़ को कदूकस करके डाल कर रख दें, उसके बाद सुबह उठ कर इस मिश्रण को छान लें, और अपने सर की अच्छे से मसाज करें, इसके कारण आपके बालों को अच्छे से पोषण मिलेगा, साथ ही आपके बालों को तेजी से लम्बा होने में भी मदद मिलती है, आप इस उपाय को हफ्ते में एक या दो बार भी इस्तेमाल कर सकते है।

तो ये कुछ उपाय है प्याज़ के जिनका इस्तेमाल यदि आप हफ्ते में एक या दो बार अपने बालों के लिए करते है तो इनकी मदद से आपके बालों को तेजी से लम्बा होने में मदद मिलती है, इसके अलावा आपको अपने बालों को लम्बा करने के लिए अच्छे से पोषण देने के लिए बालों की साफ़ सफाई, समय समय पर ट्रीमिंग, अपने आहार में पौष्टिक चीजों का सेवन, करना चाहिए, ऐसा करने से भी आपको बालों की ग्रोथ को बढ़ने में मदद मिलती है।

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प्रेगनेंसी के दौरान मैटरनिटी पिलो खरीदना क्यों जरुरी होता है?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है और उनकी परेशानियों में नींद न आने की समस्या, पैरों में दर्द, कमर में दर्द, सूजन आदि की समस्या का होना आम बात होती है। खासकर प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में वजन बढ़ने के कारण तो यह परेशानी बहुत ज्यादा हो सकती है। ऐसे में इस परेशानी से बचाव के लिए डॉक्टर्स भी आपको प्रेगनेंसी पिलो का इस्तेमाल करने की सलाह दे सकते हैं, और यह आपको आसानी से मार्किट में मिल भी जाता है। प्रेगनेंसी पिलो गर्भावस्था में महिला को रिलैक्स महसूस करवाने के साथ बहुत सी परेशानियों से निजात दिलाने में भी मदद करता है। तो लीजिये आज हम आपको प्रेगनेंसी पिलो का इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला को कौन कौन से फायदे मिलते हैं इस बारे में बताने में जा रहे हैं।

सोने में होने वाली परेशानी

वजन बढ़ने के कारण गर्भवती महिला को करवट लेकर सोने में दिक्कत हो सकती है, और पीठ के बल सोने से महिला की परेशानी और बढ़ सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान बाईं और करवट लेकर सोना सबसे सही पोजीशन होती है, और साथ ही महिला यदि करवट लेकर सोते समय मैटरनिटी पिलो का इस्तेमाल करती है तो इससे महिला को करवट लेकर सोने में होने वाली परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है, और करवट लेकर सोने से गर्भ में शिशु तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद मिलती है।

अच्छी नींद

मैटरनिटी पिलो का इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला को सोने में होने वाली दिक्कत, बार बार नींद में जागने की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को गहरी और अच्छी नींद लेने में मदद मिलती है।

सूजन

गर्भावस्था के दौरान आखिरी तिमाही में गर्भवती महिला सूजन की समस्या से परेशान हो सकती है। और इसका कारण बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन का सही से न होना हो सकता है। लेकिन मैटरनिटी पिलो का इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला को बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन को सही रखने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को सूजन जैसी परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है। साथ ही बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन के बेहतर होने से गर्भवती महिला और भ्रूण को स्वस्थ रहने में भी मदद मिलती है।

दर्द से राहत

ज्यादातर गर्भवती महिला प्रेगनेंसी में होने वाले गर्दन दर्द, पैरों में दर्द, पीठ में दर्द, आदि की समस्या से परेशान रहती है। लेकिन इन सभी परेशानियों से निजात पाने के लिए गर्भवती महिला एक आसान उपाय का इस्तेमाल कर सकती है। और वो है प्रेगनेंसी पिलो, गर्भवती महिला यदि इस पिलो का इस्तेमाल करती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला को गर्दन, पीठ व् पैरों में दर्द की परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी पिलो का इस्तेमाल करने से मिलते हैं। लेकिन मैटरनिटी पिलो खरीदते समय इस बात का ध्यान रखें की वह पिलो ज्यादा हार्ड यानी सख्त न हो, और न ही बहुत ज्यादा मोटा हो। क्योंकि ऐसा होने पर आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है इसीलिए मैटरनिटी पिलो के फायदे के लिए इसकी क़्वालिटी का अच्छे से ध्यान रखें।

पीरियड्स से जुड़े सवाल

पीरियड्स में पूछे जाने वाले आम सवाल

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पीरियड्स एक ऐसी समस्या है जिसके बारे में महिलाएं अक्सर बातें करने से कतराती है। ऐसा नहीं है की कोई इसके बारे में नहीं जानता लेकिन फिर भी महिलाएं इस विषय में बात नहीं करती। पीरियड्स की समस्या हर महिला को होने वाली आम समस्या है जिससे जुड़े कई सवाल अक्सर महिलाएं अपने मन में रखती है। लेकिन किसी से इस विषय से बात ना कर पाने के कारण वे इन्हें अपने मन में ही दबाए रखती है। आज हम आपको ऐसे ही कुछ सवाल और उनसे जुड़े जवाब देने जा रहे है। ताकि आप पीरियड्स से जुडी किसी भी समस्या को अच्छे से समझ सके।

क्या मासिक धर्म में गर्भवती हो सकती हूँ?

Ans. जी हां, क्योंकि शुक्राणु योनी में 5 दिनों तक जिन्दा रहते है। यदि आप मासिक धर्म के दौरान असुरक्षित इंटरकोर्स करतीं है और मासिक धर्म के तुरंत बाद अंडे का ओव्यूलेशन (उत्सर्जन) होता है तो शुक्राणु अंडे को निषेचित कर सकता है जिससे महिला गर्भवती को सकतीं है।

क्या पीरियड्स के तुरंत बाद अंडे का ओव्यूलेशन हो सकता है?

Ans. यह स्थिति आपके मासिक चक्र की अवधि पर निर्भर करती है। यदि किसी महिला का मासिक चक्र सामान्य है – अर्थात एक मासिक धर्म के शुरू होने के पहले दिन से दुसरे मासिक धर्म के शुरू होने से पहले दिन के बीच यदि 28 दिनों का अंतर है तो मासिक धर्म के तुरंत बाद अंडे के उत्सर्जन की संभावना कम होती है। इस स्थिति में मासिक चक्र के 7वें दिन तक रक्तस्राव हो सकता है। जबकि अंडे का उत्सर्जन अगले मासिक धर्म से 14 दिन पहले होता है। इसका अर्थ है अंडे का उत्सर्जन चक्र के 12वें दिन से 16वें दिन के बीच होगा।

मासिक चक्र के अनियमित होने पर – केवल 21 दिनों या 42 दिनों का गैप होने पर अंड्डे का उत्सर्जन मासिक धर्म के तुरंत बाद होने की संभावना अधिक होती है।

क्या पीरियड्स के समय गर्भवती होने से बचा जा सकता है?pregnancy

Ans. जी हां, अगर आप गर्भनिरोधक इस्तेमाल करें। अगर आपके पीरियड्स शुरू नहीं हुए है तो आप प्रोटेक्शन का इस्तेमाल कर सकती है। क्योंकि मासिक धर्म शुरू न होने की स्थिति में गर्भनिरोधक गोलियां शायद असर नहीं करती।

क्या पीरियड्स न होने पर भी अंडे का उत्सर्जन हो सकता है?

Ans. जी हां, अगर आपका वजन कम है, या आप अपने बच्चे को दूध पिलाती हो या आप रजोनिवृत्ति (मेनुपौज़) के करीब हो। अगर इन तीनों में से एक भी कारण आपकी स्थिति से जुड़ा है तो पीरियड्स न होने पर भी अंडे का उत्सर्जन हो सकता है।

कैसे पता लगायें की अंडे का उत्सर्जन कब होगा?

Ans. इसके लिए आपको थोड़ी कैलकुलेशन करनी होगी। आपको अपने मासिक धर्म के शुरू होने के दिन से पीछे की ओर गिनना होगा। 4 दिनों तक अंडे के उत्सर्जन की ज्यादा संभावना होती है जो मासिक धर्म के पहले दिन से 16 से 12 दिन पहले होता है।

यानी अगर आपको हर 28 दिन में मासिक धर्म होता है तो 28-16 = 12

अर्थात अगले मासिक धर्म शुरू होने के 12 बाद के 4 दिन अंडे का उत्सर्जन हो सकता है। जो आपके मासिक चक्र के शुरू होने के 12वें से 16वें दिन के बीच हो सकता है।

अगर आपके मासिक चक्र की अवधि 21 दिन की है तो 21-16 = 5

अर्थात अगले मासिक धर्म शुरू होने के 5 दिन बाद के दिनों में अंडे का उत्सर्जन हो सकता है। जो मासिक धर्म शुरू होने के 5वें से 9वें दिन के बीच हो सकता है। वैसे आप चाहे तो इस कैलकुलेशन के लिए ऑनलाइन ओव्यूलेशन कैलकुलेटर की मदद ले सकती है।

मासिक धर्म शुरू नहीं हुआ हो तो क्या प्रेग्नेंट हो सकती हूँ?

Ans. जी हां, क्योंकि महिलाओं की तुलना में लड़कियों में अंडे का उत्सर्जन मासिक धर्म से 12 से 16 दिन पहले ही हो जाता है। इसलिए पूरी संभावना है की लड़की के पहली बार अंडे के ओव्यूलेशन के बाद ही गर्भवती हो जाएं, मासिक धर्म शुरू होने से पूर्व।

पीरियड्स कब से शुरू होकर कब ख़त्म होते है?मासिक धर्म

Ans. सामान्यतौर पर मासिक धर्म 12 से 13 वर्ष की आयु से शुरू हो जाते है। क्योंकि इस उम्र तक शरीर में मौजूद सभी होर्मोनेस एक्टिवेट हो जाते है जिसके बाद आपकी शारीरिक बनावट के साथ-साथ आपके शरीर में भी कई बदलाव आने लगते है।

वहीं दूसरी तरफ 45 से 50 वर्ष की आयु तक पीरियड्स आना बंद हो जाते है जिसे आम भाषा में रजोनिवृति कहा जाता है। ऐसा नहीं है यह एक दम से बंद हो जाते है बल्कि कुछ समय तक थोड़े थोड़े आते रहते है लेकिन बाद में यह बिलकुल बंद हो जाते है।

अगर मासिक धर्म मिस हो जाए?

Ans. इसका होना कोई परेशानी की बात नहीं है। हमारा शरीर एक मशीन की तरह कार्य करता है और मशीन भी कभी कभार गलती कर देती है ऐसे में चिंता करने की कोई बात नहीं है। इसका कारण आपका तनाव और बीमारी हो सकती है। क्योंकि इन दोनों ही स्थितियों में आपका शरीर ठीक तरह से कार्य नहीं कर पाता। जिसके कारण मासिक धर्म मिस हो सकता है। इसके अलावा हो सकता है की आप गर्भवती हो! लेकिन बिना टेस्ट के इस कारण को सही मान लेना ठीक नहीं। इसीलिए प्रेगनेंसी टेस्ट करके डॉक्टर से सलाह लें। क्योंकि अगर आपने सुरक्षित संबंध नहीं बनाया है तो आपके गर्भधारण की संभावना अधिक होती है।

पीरियड्स में टैम्पोन का इस्तेमाल करने से मैं टोक्सिन शॉक सिंड्रोम का शिकार हो सकती हूँ?

Ans. यह एक समस्या है तो विशेष परिस्तिथि में होती है। अर्थात जब कोई महिला कई घंटों तक एक ही टैम्पोन का इस्तेमाल करती है तो उसे इसके होने का खतरा रहता है। परन्तु हर स्थिति में ऐसा नहीं होता। इसके लिए आप टैम्पोन को हर चार घंटे में बदलें। अगर बुखार, ठंड लगना, दस्त जैसी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें।

क्या अधिक बहाव होना भी एक समस्या है?

Ans. अगर आप अपने पीरियड्स के दिनों में एक दिन में 10 से भी अधिक पैड का इस्तेमाल करती है तो ये काफी हैवी बहाव है। इस स्थिति में आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। क्योंकि अधिक बहाव होना भी आपके लिए अच्छा नहीं होता।

पीरियड्स में ब्लीडिंग कितने दिनों तक होती है?

Ans. सामान्यतौर पर ब्लीडिंग तीन से पांच दिनों तक चलती है। लेकिन अगर इससे अधिक यानी 7 दिनों तक ब्लीडिंग हो रही है तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि यह एक सामान्य क्रिया है। परन्तु अगर आपको सात दिनों के बाद भी ब्लीडिंग हो रही है तो एक बार अपनी डॉक्टर से बात अवश्य करें।

मासिक धर्म में होने वाले दर्द से राहत कैसे पायें?

Ans. इसके लिए आप चाहे तो मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली दवाओं का इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन दवाओं का इस्तेमाल केवल डाक्टरी सलाह से ही करना चाहिए। ऐसे में आप हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल की मदद ले सकती है। इससे अपने पेट के निचले भाग की सिकाई करें। नहाने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करें। अदरक, इलायची और तुलसी वाली हर्बल चाय का सेवन करें। दर्द अपने आप कम हो जाएगा।

इस दौरान खाना खाने के मन नहीं करता?

Ans. मासिक धर्म के समय आपका शरीर पाने की [प्रवृति को रोकता है। जिससे आपको अपना पेट भरा हुआ लगता है। कई बार जीन्स या पेंट के टाइट होने जैसा भी अनुभव होता है। ऐसे में आपको अपने खाने में नमक की मात्रा कम कर लेनी चाहिए। इससे आप पुरे दिन एक्टिव महसूस करेंगी।

टैम्पोन के इस्तेमाल करने से अधिक दर्द होता है?Tempon Use, How to use Tempon, 

Ans. जो महिलाएं टैम्पोन का नियमित इस्तेमाल नहीं करती है उन्हें ऐसा लगता है की इसके इस्तेमाल से अधिक दर्द हो रहा है। जबकि ऐसा नहीं है, आप बिना किसी परेशानी के टैम्पोन का इस्तेमाल कर सकती है।

ज्यादा टी वी और मोबाइल चलाना कितना खतरनाक है गर्भ के लिए?

गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जिसमे हर महिला को ज्यादा केयर, सेफ्टी और देखभाल की जरुरत होती है। इस समय में क्या खाना है, क्या नहीं खाना है, जंक फ़ूड से कितना दूर रहना है इन सभी बातों के प्रति जागरूक रहना पड़ता है।

पर क्या आप जानते है, खाने और पीने के अतिरिक्त और भी बहुत सी बाते होती है जो प्रेगनेंसी के दौरान आप पर और शिशु पर प्रभाव डालती है। जैसे की सभी लोगों की बहुत ही साधारण सी आदत होती टीवी और मोबाइल का इस्तेमाल करने की। परन्तु गर्भवती महिला की यह आदत उसके लिए और शिशु के लिए हानिकारक हो सकती है।

मोबाइल से कुछ ऐसी खतरनाक किरणें निकलती है जो की गर्भवती महिला और उसके शिशु के लिए हानिकारक होती है। गर्भावस्था के दौरान मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल करने से महिला को बहुत सी मानसिक परशानियों का सामना करना पड़ सकता है। एक अध्ययन के अनुसार यदि गर्भवती महिला लगातार फ़ोन का इस्तेमाल करती है तो उसे थकान, अनिंद्रा, सर दर्द, चक्कर आना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

फ़ोन के अत्यधिक इस्तेमाल से मानसिक बिमारियों का ज्यादा सामना करना पड़ता है। जिससे याददाश्त शक्ति भी कमजोर हो जाती है। इसके अतिरिक्त कान बजना, जोड़ो में दर्द आदि की समयस्या भी बढ़ जाती है। मोबाइल का इस्तेमाल सिर्फ गर्भवती महिला पर ही असर नहीं डालता बल्कि उसके अजन्मे शिशु पर भी इसका असर होता है।

एक रिसर्च के अनुसार यह बात सामने आयी है के जो गर्भवती महिलाये ज्यादा फ़ोन के इस्तेमाल करती है उनके शिशु में आगे चलकर व्यवहारिक समस्याएँ आती है और साथ बच्चो को आई क्यू लेवल भी कमजोर होता है। इसके इस्तेमाल के कारण अजन्मे शिशु का दिमागी विकास अच्छे से नहीं हो पाता है।

स्मार्ट फ़ोन से हटकर बात अगर टीवी की की जाए तो उसके बारे में तो हम सभी जानते ही है के लगातार टीवी देखने से किसी की भी आँखे खराब हो सकती है। गर्भवती महिला की भी आँखे कमजोर हो जाती है टीवी देखने से और साथ ही सर दर्द भी बढ़ जाता है।

हम जानते है के आज के समय में हम लोग मोबाइल और टीवी का उपयोग बंद तो नहीं कर सकते पर फिर भी कुछ समय के लिए हमारी खुद की और हमारे शिशु की सेहत के लिए इन चीजों का उपयोग पहले की उपेक्षा कम तो कर ही सकते है। टीवी को लिमिटेड समय के लिए देखे और मोबाइल को यूज़ करते समय भी समय का ध्यान रखे। लम्बी बाते करने के लिए मोबाइल की जगह लैंडलाइन का इस्तेमाल करें। थोड़े दिनों के लिए सोशल मीडिया से दुरी बना लें। ऐसा करने से स्मार्ट फ़ोन के साथ आप कम समय बिताएंग।

संतरा आजकल इन चीजों से बचा रहा है ?

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पूरी दुनिया का सबसे प्रसिद्ध फल है संतरा। आँखों को लुभाने वाला इसका रंग, अपने न्यूट्रिशनल वैल्यू के साथ सभी के लिए बहुत ही फायदेमंद है। हल्का खट्टा और मीठा संतरा हमे इंस्टेंट रिफ्रेश करने के लिए के बहुत जाना जाता है। ऐसा माना जाता है के साउथ ईस्ट एशिया से इसका जन्म हुआ। और अब पूरी दुनिया में इसे इसके गुणों के लिए जाना जाता है।

आजकल की बदलते वातावरण और मौसम में संतरे का सेवन हम सभी के लिए बहुत ही फायदेमंद है। आइये जानते है इन दिनों के संतरे के सेवन से हमे क्या लाभ मिल सकता है।

बैक्टीरिया और वायरस

अगर आप किसी सीरियस वायरल इन्फेक्शन से गुजर रहे है, तो एक बेहतरीन तरीका वायरल से लड़ने का की आप रोजाना संतरा खाये। अगर आपको कोई स्किन इन्फेक्शन है या फिर वायरल फीवर है तो भी आप संतरे का सेवन कर सकते है। सभी फलो में से संतरा एक उत्तम फल है जो लगभग शरीर के सभी बैक्टीरिया से लड़ता है। वायरस या बैक्टीरिया बहुत जल्द हमारी पूरी बॉडी में फैलता है और यदि आप संतरे का सेवन करते है तो हर जगह यह आपको मदद करेगा बैक्टीरिया से लड़ने में।

इम्युनिटी

संतरे में भरपूर मात्रा में विटामिन सी होते है। इसमें बहुत से एंटीऑक्सीडेंट तत्व और कैरोटेनॉयड्स भी होते है जो हमारी इम्युनिटी यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते है। इसका सेवन हमारे शरीर के बहुत से इन्फेक्शन्स को खत्म करता है। रोजाना इसका सेवन करने से हमारे शरीर को सुरक्षा मिलेगी।

कब्ज

संतरा अपने अंदर अच्छी मात्रा में फाइबर के लिए भी जाना जाता है। जब हम पुरे संतरे का सेवन करते है तो हमे कब्ज की परेशानी से नहीं गुजरना पड़ता।

ब्लड सर्कुलेशन

विटामिन सी को प्राकृतिक रूप से ब्लड को पतला करने के लिए जाना जाता है। संतरों में विटामिन्स भरपूर मात्रा में होते है जो हमारे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करते है। इसका सेवन ब्लड की इकट्ठा होने से रोकते है जिससे हृदय संबंधित बिमारियों से राहत मिलती है।

आँखों के लिए

संतरे एक सबसे बेहतरीन गुण है जो के इसमें मौजूद फ्लैवोनॉइड्स के लिए जाना जाता है। इसके कारण हमारी आँखों की नजर सुधरती है और साथ ही बहुत से आँखों से रिलेटेड बीमारियाँ भी दूर होती है। संतरे में विटामिन ए, सी और इ होते है जो के हमारे ऑप्टिक नसों को मजबूत बनाते है।

ब्लड शुगर

सभी डाइबिटिक मरीजों को संतरा अपने भोजन में शामिल करने की सलाह दी जाती है। इसके सेवन से इन्सुलिन लेवल कण्ट्रोल होता है। इसमें मौजूद फाइबर हमारे शरीर के मेटाबॉलिक को इम्प्रूव करता है। ध्यान रखिये डायबिटिक मरीज सिर्फ संतरे का ही सेवन करें इसके जूस का नहीं, क्योंकि जूस में ना तो फाइबर होगी और शुगर की मात्रा भी मिली हो सकती है।

पोटैशियम

संतरे में सभी फलों की अपेक्षा सबसे ज्यादा मात्रा में पोटैशियम पाया जाता है। जिन लोगों के शरीर में मिनरल्स की कमी होती है, उनके लिए यह फल सबसे उत्तम है। अगर आप किसी ऐसे फल की तालाश में जो आपको सभी बीमारियों से बचायें, तो संतरा आपके लिए सबसे बेहतरीन फल है। शरीर में पोटैशियम की कम मात्रा होने पर हार्ट से रिलेटेड बीमारियां हो जाती है। पर यदि आप रोजाना संतरे का सेवन करेंगे तो पोटैशियम की सहीं मात्रा बनी रहेगी और आप सेहतमंद भी रहेंगे।

किडनी

क्या आप जानते है के बहुत सा अध्ययन करने के बाद यह पता चला हे के संतरा आपकी किडनी को भी बहुत अच्छे से सुरक्षा प्रदान करता है। संतरे का सेवन हमे बहुत से किडनी संबंधित बीमारियों से बचाता है और किडनी में स्टोन होने से भी रोकता है। स्टोन को रोकने के लिए आप अत्यधिक जूस का सेवन कर सकते है।

कैंसर

आजकल हमारे आसपास बहुत से कैंसर के मरीज देखने को मिल जाते है। पर क्या आपको पता है के संतरा कैंसर जैसी बड़ी बीमारी को भी ठीक करने में कारागार है। इसमें मौजूद फीटोकेमिकल किसी भी तरह के बड़े बैक्टीरिया और फिजिकल डिस्टर्बेंस को ठीक करता है। संतरे को बहुत से स्किन कैंसर की दवाइयों में भी इस्तेमाल किया जाता है।

स्ट्रेस

संतरे का सेवन हमे इंस्टेंट स्ट्रेस या तनाव से आराम दिलाता है। यह एक स्ट्रेस बस्टर की तरह काम करता ह। इसके खाने से हमारे अंदर ताजगी का संचरण होता है जिससे हम स्ट्रेस फ्री होकर फ्रेश हो जाते है।

बालों और त्वचा

ऑरेंज में मौजूद विटामिन सी और नुट्रिएंट्स के कारण हमारे बालों और त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। यह हमारी त्वचा को पोषित कर साफ़ करता है। हमारी एजिंग को भी रोकने के काम आता है। बहुत से ब्यूटी प्रोडक्ट्स में संतरे का इस्तेमाल किया जाता है। बालों से डैंड्रफ हटाने के भी काम आता है। हमारे बालों को कंडीशन करके उनकी ग्रोथ और शाइन भी बढ़ाता है।

एक छोटा सा संतरा हमारे लिए कितना फायदेमंद है। आजकल के इस प्रदूषण भरे वातावरण जहाँ हमे तरह तरह के वायरस और बैक्टीरिया लगने खतरा बना रहता है, एक संतरा हमे बहुत से बिमारियों से बचा सकता है।

गर्भ में शिशु को सबसे ज्यादा नुकसान कब होता है

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु का विकास पूरी तरह से महिला पर निर्भर करता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान हर कोई महिला को अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखने, अच्छे से खान पान का ध्यान रखने की सलाह देता है। और यदि महिला किसी भी तरह की लापरवाही करती है तो इसके कारण केवल महिला पर ही नहीं बल्कि बच्चे पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भ में शिशु को कब सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचता है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

गलत आहार

कुछ ऐसी चीजें होती है जिनका सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करने की मनाही होती है। जैसे की कच्चा पपीता, अनानास, गर्म तासीर वाली चीजें, कच्चा अंडा, कच्चा मास, पैक्ड फ़ूड, चज़िनीज़ फ़ूड, मर्करी युक्त मछली, आदि। यदि प्रेग्नेंट महिला इन सभी चीजों का सेवन करती है तो यह सभी चीजें गर्भ में शिशु के विकास में रूकावट पैदा करती है।

नशीले पदार्थ

प्रेगनेंसी के दौरान अल्कोहल का सेवन, धूम्रपान करना आदि मना होता है। क्योंकि इनके कारण शिशु के शारीरिक के साथ मानसिक विकास पर भी बुरा असर पड़ता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला इन सभी चीजों का सेवन करती है तो ऐसा करने से गर्भ में शिशु के विकास पर नकारात्मक असर पड़ता है।

पानी कम पीना

गर्भवती महिला के शरीर में यदि पानी की कमी होती है तो इसके कारण एमनियोटिक फ्लूड पर भी असर पड़ता है। और यदि गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की कमी होती है तो इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

तनाव

गर्भावस्था के दौरान महिला को खुश रहने की सलाह दी जाती है और तनाव न लेने के लिए कहा जाता है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला तनाव लेती है तो इस कारण गर्भ में पल रहे शिशु शारीरिक व् मानसिक विकास पर गलत प्रभाव पड़ता है।

सम्बन्ध बनाने के कारण

स्वस्थ प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने की बिलकुल भी मनाही नहीं होती है। लेकिन यदि सम्बन्ध बनाने में लापरवाही की जाएँ जैसे की महिला के पेट पर ज्यादा दबाव पड़े, ज्यादा तेजी से सम्बन्ध बनाया जाये, महिला संक्रमित व्यक्ति के साथ सम्बन्ध बनाएं तो इसके कारण गर्भ पर बुरा असर पड़ता है।

महिला द्वारा बरती गई लापरवाहियों के कारण

कुछ ऐसे काम होते हैं जिन्हे प्रेगनेंसी में न करने की सलाह दी जाती है। जैसे की यात्रा करना, भागादौड़ी करना, भारी सामान उठाना व् सरकाना, पैरों के बल बैठकर काम करना, झुककर काम करना, जरुरत से ज्यादा काम करना आदि। यदि महिला इन सभी बातों का ध्यान नहीं रखती है और लापरवाही करती है तो इनके कारण महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ने के साथ ब्लीडिंग, गर्भपात व् समय से पहले डिलीवरी होने जैसी समस्या होने का खतरा भी रहता है।

दवाइयों का सेवन

गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर्स की सलाह के बिना दवाइयों का सेवन करना बच्चे के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक होता है। क्योंकि इन दवाइयों का असर गर्भनाल के माध्यम से शिशु तक पहुँचता है जिससे शिशु के विकास पर बुरा असर पड़ता है।

पेट पर दबाव पड़ने के कारण

गर्भावस्था के दौरान यदि किसी कारण महिला के पेट पर दबाव पड़ता है तो इसके कारण भी गर्भ में शिशु असहज महसूस करता है शिशु को दिक्कत होती है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ज्यादा टाइट कपडे पहनने, भारी वजन उठाने, जिस कमा को करने से पेट पर जोर पड़े उसे न करने की सलाह दी जाती है।

ज्यादा तेज आवाज़ के कारण

गर्भ में पल रहे शिशु के बढ़ते विकास के साथ शिशु की सुनने की क्षमता में भी वृद्धि होती है। ऐसे में यदि महिला ज्यादा शोरगुल वाली जगह पर जाती है, बहुत तेज आवाज़ में गाने सुनती है तो इसके कारण शिशु की सुनने की क्षमता में कमी आने का खतरा बढ़ जाता है।

शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने पर

गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास के लिए गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट जैसे की कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, फोलेट आदि लेने की सलाह दी जाती है। क्योंकि यह सभी पोषक तत्व गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए बहुत जरुरी होते हैं। ऐसे में यदि इन पोषक तत्वों की गर्भवती महिला के शरीर में कमी होती है तो गर्भ में बच्चे के विकास में कमी आती है और बच्चे को दिक्कत होती है।

तो यह हैं कुछ स्थितियां जब गर्भ में पल रहे शिशु को सबसे ज्यादा परेशानी होने का खतरा रहता है। ऐसे में गर्भवती महिला को इन सभी बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि गर्भवती महिला व् बच्चे दोनों को हर परेशानी से सुरक्षित रहने में मदद मिल सके।

When does the baby suffer the most in the womb

गर्भ में नन्ही जान ऐसे होता है नाराज़

गर्भ में नन्ही जान ऐसे होता है नाराज़, प्रेग्नेंट महिला अपने पेट में पल रहे शिशु की केवल हलचल को महसूस कर सकती है। लेकिन क्या आप जानती है की पेट में आपका शिशु हँसता है, रोता है, अंगूठा चूसता है, घूमता हैं, आपके द्वारा लिए गए आहार के स्वाद का अनुभव करता है, यहां तक की वो आपसे नाराज़ भी होता है। अब आप सोच रही होंगी की ऐसा कैसे होता है? प्रेग्नेंट महिला द्वारा की गई हर हरकत का असर आपके पेट में पल रहे शिशु पर पड़ता है।

वैसे ही यदि आप कुछ ऐसा करती है जो शिशु को पसंद नहीं होता है तो इसके कारण गर्भ में शिशु आपसे नाराज़ हो जाता है। क्या अब आप यह जानने के लिए उत्सुक हैं की कब आपका शिशु आपसे नाराज़ होता है? तो आइये आज इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसे कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी वजह से आपका शिशु आपसे नाराज़ हो सकता है।

गर्भ में नन्ही जान नाराज़ होती है सेहत सम्बन्धी समस्या होने पर

  • प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी छोटी छोटी परेशानियां लगी रहती है।
  • जैसे की पेट में गैस, अपच, कब्ज़, खट्टे डकार, सीने में जलन आदि।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला को यह दिक्कतें ज्यादा रहती है।
  • तो इसके कारण महिला अच्छा महसूस नहीं करती है।
  • और जब माँ अच्छा महसूस नहीं कर रही है तो माँ के पेट में पल रहा बच्चा भी अच्छा महसूस नहीं करता है जिससे वो नाराज़ हो सकता है।
  • ऐसे में शिशु की नाराज़गी को दूर करने के लिए महिला को तरल पदार्थ व् फाइबर युक्त आहार का भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • ताकि प्रेग्नेंट महिला को इन सभी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।

तनाव लेने पर

  • गर्भावस्था के दौरान बहुत सी महिला अपनी बॉडी में रहे परिवर्तन, शारीरिक परेशानियों के कारण तनाव में आ जाती है।
  • जबकि प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा हर महिला के साथ होता है।
  • और महिला का तनाव लेना केवल महिला पर ही नहीं बल्कि महिला के पेट में पल रहे बच्चे पर भी बुरा असर डालता है।
  • ऐसे में महिला यदि बहुत अधिक तनाव लेती है और खुश नहीं रहती है तो बेबी भी खुश नहीं रहता है और नाराज़ हो जाता है।
  • ऐसे में महिला को शिशु की नाराज़गी को दूर करने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहना चाहिए।

गर्भ में नन्ही जान नाराज़ होती है प्रदूषण या भीड़भाड़ में जाने पर

  • यदि महिला किसी ऐसी जगह पर जाती है जहां पर बहुत प्रदूषण होता है, बहुत भीड़भाड़ होती है।
  • तो ऐसी जगह पर जाने से बेबी घबरा सकता है साथ ही उसके विकास पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
  • और घबराहट के कारण आपका बेबी आपसे नाराज़ भी हो सकता है।
  • ऐसे में गर्भवती महिला को शिशु की बेहतरी के लिए प्रेगनेंसी के समय प्रदूषण व् भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से बचना चाहिए।

बहुत तेज आवाज़ होने पर

  • जैसे जैसे शिशु के अंगो का विकास बढ़ता है वैसे वैसे शिशु के सुनने की क्षमता में भी वृद्धि होती है।
  • ऐसे में यदि कभी शिशु बहुत तेज आवाज़, डरावना म्यूजिक, तेज गानों की आवाज़ सुनता है।
  • तो शिशु गर्भ में चौंक सकता है जिसके कारण शिशु ज्यादा मूवमेंट भी कर सकता है।
  • जिसका मतलब यह होता है ही शिशु को घबराहट हो रही है और वो आपसे नाराज़ है।
  • इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान गाने सुनें लेकिन कम आवाज़ में और मधुर संगीत सुनें।

आपके खान पान के सही न होने पर

  • जो भी आहार गर्भवती महिला खाती है उसके पोषक तत्व व् उसका स्वाद शिशु तक जरूर पहुँचता है।
  • ऐसे में यदि कभी आप ऐसा कुछ खाती हैं जिसका स्वाद शिशु को अच्छा नहीं लगता है।
  • तो भी गर्भ में शिशु आपसे नाराज़ हो सकता है।

गर्भ में नन्ही जान नाराज़ होती है आपके बातें न करने पर

  • माँ के पेट में पल रहे शिशु से रिश्ता गहरा करने के लिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपने पेट को थोड़ी देर सहलाना चाहिए, अपने शिशु से बातें करनी चाहिए।
  • यदि महिला ऐसा करती है तो इससे शिशु भी गर्भ में खुश होता है। लेकिन यदि महिला ऐसा कुछ नहीं करती है।
  • तो इसके कारण आपका शिशु आपसे नाराज़ भी हो सकता है।

पेट पर दबाव पड़ने पर

  • यदि महिला कोई ऐसा काम करती है जिससे पेट पर दबाव पड़ता है जैसे की पैरों के भार बैठकर पोछा लगाना, कपडे धोना, पेट के बल सोना, पेट के बल खड़े रहकर काम करना, ज्यादा टाइट कपडे पहनना आदि।
  • तो इसके कारण पेट में शिशु को असहज महसूस हो सकता है परेशानी हो सकती है।
  • और यदि शिशु को परेशानी होगी तो सकता है की वो आपसे नाराज़ हो जाये।

तो यह हैं कुछ कारण जब गर्भवती महिला के पेट में पल रही नन्ही जान अपनी माँ से नाराज़ हो सकता है। तो यदि आप चाहती हैं की आपका बेबी आपसे नाराज़ न हो तो प्रेगनेंसी के दौरान इन बातों का खास ख्याल रखें।

प्रेगनेंसी में तुलसी पत्ते खाना चाहिए या नहीं

प्रेगनेंसी में तुलसी खानी चाहिए या नहीं, तुलसी एक आयुर्वेदिक औषधि की तरह होती है। जिसमे बहुत से विटामिन्स, मिनरल्स आदि मौजूद होते हैं। जो आपको बीमारियों, संक्रमण से बचाने व स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। और अधिकतर घरों में तुलसी का पौधा मौजूद भी होता है। कई लोग नियमित तुलसी की चाय या तुलसी के पत्ते आदि का सेवन भी करते हैं। ऐसे में बहुत सी प्रेग्नेंट महिलाएं तुलसी के सेवन को लेकर यह जानना चाहती है की तुलसी का सेवन प्रेगनेंसी में करना चाहिए या नहीं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी में तुलसी के सेवन को लेकर कुछ बातें करने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में तुलसी का सेवन करना चाहिए या नहीं?

तुलसी पोषक तत्वों की खान होती है जैसे की तुलसी में आयरन, विटामिन्स के साथ एंटी बैक्टेरियल, एंटी फंगल गुण आदि मौजूद होते हैं। जो की प्रेग्नेंट महिला व महिला के पेट में पल रहे बच्चे के विकास के लिए जरुरी होते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला यदि चाहे तो प्रेगनेंसी के दौरान तुलसी का सेवन कर सकती है। लेकिन ध्यान रखें की जितनी जरुरत हो उतना ही सेवन करें, जैसे की एक दिन में तुलसी का एक पत्ता ही बहुत होता है। ताकि महिला व बच्चे दोनों को तुलसी का सेवन करने के भरपूर फायदे मिल सके। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में तुलसी का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं।

प्रेगनेंसी में तुलसी का सेवन करने से मिलता है आयरन

  • आयरन की कमी के कारण गर्भवती महिला को थकान, कमजोरी, शिशु के विकास में कमी, एनीमिया, डिलीवरी के दौरान होने वाली परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
  • लेकिन यदि गर्भवती महिला तुलसी के पत्ते का सेवन करती है।
  • तो महिला को इन सभी परेशानियों से बचाव करने में मदद मिलती है।
  • क्योंकि तुलसी के पत्तों में मौजूद आयरन प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है।

मैग्नीशियम

  • तुलसी के पत्तों में मैग्नीशियम की मात्रा भी मौजूद होती है।
  • जो प्रेग्नेंट महिला की हड्डियों को मजबूत करने के साथ भ्रूण की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं।

विटामिन के

  • तुलसी के पत्तों में विटामिन के भी मौजूद होता है।
  • जो प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून के थक्के बनने से रोकता है।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला की बॉडी में ब्लड फ्लो को बेहतर तरीके से होने में मदद करता है।

एंटी बैक्टेरियल गुण

  • एंटी फंगल, एंटी बैक्टेरियल, एंटी वायरल गुण आदि तुलसी में भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
  • जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला की इम्युनिटी को मजबूत करने व महिला और बच्चे को हर तरह के संक्रमण से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।
  • जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला व शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

विटामिन ए

  • तुलसी के पत्तों में विटामिन ए मौजूद होता है।
  • जो माँ के पेट में पल रहे बच्चे के विकास के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
  • यह शिशु के तंत्रिका तंत्र के साथ बॉडी के अन्य हिस्सों के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

प्रेगनेंसी में तुलसी का सेवन करने से महिला रहती है ऊर्जा से भरपूर

  • बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव, शरीर में होने वाले बदलाव के कारण प्रेग्नेंट महिला बहुत ज्यादा थकान, कमजोरी, तनाव आदि महसूस कर सकती है।
  • लेकिन तुलसी का सेवन करने से महिला को इन सभी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान तुलसी का सेवन करने से महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने, थकान व कमजोरी से निजात पाने, तनाव से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेग्नेंट महिला को तुलसी का सेवन करने से मिलते हैं। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए। की महिला जरुरत से ज्यादा तुलसी का सेवन न करें। क्योंकि जरुरत से ज्यादा तुलसी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को ब्लीडिंग, गर्भाशय में संकुचन का तेज होना, हदय की गति बढ़ना जैसी समस्या हो सकती है।

नाभि में तेल लगाने के फायदे

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आपने आज तक यह सुना होगा की बालों में तेल लगाने से बालों को फायदा होता है, बॉडी पर ऑयल मसाज करने से आपको आराम मिलता है, लेकिन आज हम आपको नाभि में तेल लगाने के क्या क्या फायदे होते हैं इस बारे में बताने जा रहे है। क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार नाभि शरीर की सभी क्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, नाभि में तेल लगाने से आपकी ख़ूबसूरती को बढ़ाने के साथ आपके स्वास्थ्य को भी ठीक रखने में मदद मिलती है। साथ ही आपको इसके लिए ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ती और आपको इसका फायदा भी मिल जाता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की नाभि में तेल लगाने से आपको कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

स्किन के लिए करता है मॉइस्चराइजर का काम

नाभि पर यदि आप तेल लगाती है तो यह आपकी स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होता है। रात को सोने से पहले यदि आप नारियल, जैतून या सरसों के तेल की दो बूंदें नाभि में डालते हैं, तो ऐसा करने से आपकी स्किन की कोमलता को बरकरार रखने में मदद मिलती है। साथ ही यदि आपकी स्किन सूखी हुई है, या त्वचा फटती है तो उससे भी आपको आराम मिलता है, मुलायम त्वचा के लिए आप घी का इस्तेमाल भी नाभि के लिए कर सकते हैं।

दाग धब्बो और कील मुहांसों से दिलाता है निजात

स्किन पर होने वाले दाग धब्बे आपकी ख़ूबसूरती को कम कर सकते हैं, साथ ही इनके इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली क्रीम आदि स्किन को नुकसान भी पहुंचा सकती है। ऐसे में यदि आप नियमित रात को सोने से पहले दो बूँद नीम के तेल की नाभि में डालती है, तो इसके कारण आपकी स्किन पर होने वाले दाग धब्बे, कील मुहांसे की समस्या से आपको निजात पाने में मदद मिलती है।

त्वचा में निखार आता है

हर कोई चाहे महिला को या पुरुष दमकता हुआ चेहरा चाहते हैं, तो इसके लिए आप नियमित रात को सोने से पहले अपने बेली बटन में दो बूँद बादाम के तेल की डालें। नियमित ऐसा करने से आपको गुलाबो जैसा निखार मिलता है और आपकी स्किन हमेशा ग्लोइंग रहती है।

फटे होंठों से मिलता है निजात

सर्दियों में खासकर महिलाएं और पुरुष फटे होंठों की समस्या से परेशान हो जाते है। इसके लिए आप नियमित रात को सोने से पहले नाभि में दो बूँद सरसों के तेल की डालें, आपको इसका फायदा जरूर मिलेगा।

जोड़ो में दर्द से आराम

नाभि में सरसों के तेल की दो बूंदें नियमित सोने से पहले डालें, ऐसा करने से आपको जोड़ो में होने वाले दर्द की समस्या से निजात मिलता है।

इन्फेक्शन से बचाव

नाभि में मैल जमने के कारण वहां पर बैड बैक्टेरिया का जमाव होने लगता है, जिसके कारण इन्फेक्शन की समस्या हो सकती है। इस फिर बॉडी में कहीं चोट लगने के कारण घाव हो जाता है, तो उससे भी इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में आप नाभि से जुडी इस परेशानी को दूर करने के लिए हफ्ते में एक या दो बार साफ़ सफाई के लिए टी ट्री ऑयल, सरसों के तेल, नारियल के तेल आदि की बूंदे नाभि में डाल सकते हैं। इससे नाभि में गंदगी का जमाव नहीं होगा और तेल में मौजूद एंटी बैक्टेरियल और एंटी फंगल गुण इन्फेक्शन की समस्या से बचाव करने में आपकी मदद करेंगे।

पेट दर्द के लिए

गैस, अपच, आदि के कारण कई बार पेट में दर्द की समस्या हो जाती है, ऐसे में यदि आप नाभि में तेल की दो बूंदे डाल देते हैं, तो ऐसा करने से आपको पेट से जुडी समस्या का हल करने में मदद मिलती है। और यदि आप ऐसा नियमित करते हैं तो ऐसा करने से पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलती है।

प्रजनन क्षमता में सुधार करता है

नाभि में तेल डालने से प्रजनन क्षमता को बेहतर करने के साथ पुरुषो को भी शुक्राणु की गुणवत्ता को बेहतर करने में मदद मिलती है। साथ ही इसके कारण आपकी बॉडी में हार्मोनल बैलेंस को बनाएं रखने में भी मदद मिलती है। और महिलाओं में प्रजनन क्षमता के बेहतर होने के कारण प्रेगनेंसी के चांस बढ़ाने में मदद मिलती है।

पीरियड्स के दर्द से राहत दिलाता है

पीरियड्स होने पर कई महिलाओं को असहनीय दर्द होता है, जिसके कारण उन्हें बहुत परेशानी का अनुभव करना पड़ता है। इसके इलाज के लिए आप पीरियड्स के दौरान नाभि में पुदीने के तेल, अदरक के तेल आदि को मिलाकर नाभि ने डालें, और साथ ही हल्की मसाज भी करें। ऐसा करने से पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द व् ऐंठन की समस्या से निजात पाने में आपको मदद मिलती है।

सूजन से राहत मिलती है

यदि आपके शरीर के किसी भी अंग में सूजन की समस्या है तो आप नाभि में तेल डालकर इस समस्या से निजात पा सकते हैं। और इसके लिए आप नारियल तेल, सरसों तेल आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं।

तो यह हैं कुछ फायदे जो आपको नाभि में कोई भी तेल डालने से मिलते है, यह उपचार आसानी से हो जाते हैं और आपको इससे फायदा भी मिलता है। ऐसे ने यदि आपको भी किसी तरह की परेशानी हो तो आप भी नाभि में तेल डालकर अपनी समस्या का उपचार कर सकते हैं।

क्या प्रेगनेंसी में जामुन खा सकते हैं?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला का खान पान के प्रति सावधानी बरतनी बहुत जरुरी होती है। ऐसे में कई बार महिला को कुछ अलग खाने की इच्छा होती है, खासकर जो सब्जियां व फल मार्किट में नए आते हैं, जैसे की जामुन। जामुन ज्यादा समय के लिए नहीं मिलता है, ऐसे में खट्टा व स्वादिष्ट होने के कारण गर्भवती महिलाओं की इसे खाने की इच्छा हो सकती है। लेकिन उनके मन में इसके सेवन से पहले यह सवाल आ सकता है की जामुन खाना प्रेगनेंसी में सुरक्षित है या नहीं। तो इसका जवाब हैं जी हाँ, गर्भवती महिला जामुन का सेवन कर सकती है, क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान यह गर्भवती महिला के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है, साथ ही इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट व पोषक तत्व गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में भी मदद करते हैं। तो आइये अब जानते हैं प्रेगनेंसी के दौरान जामुन का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

पाचन क्रिया को रखता है दुरुस्त

गर्भवती महिला की पाचन क्रिया का बेहतर होना प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली बहुत सी परेशानियों से आराम दिलाता है। ऐसे में जामुन का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला की पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है। और महिला को आहार लेने में किसी भी तरह की परेशानी नहीं होती है, जिससे गर्भ में पल रहे शिशु को भरपूर पोषण मिलने के कारण उसके बेहतर विकास में मदद मिलती है। साथ ही इससे प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली कब्ज़, एसिडिटी, डायरिया जैसी परेशानी से भी बचाव करने में मदद मिलती है।

हड्डियां होती है मजबूत

आयरन, विटामिन सी, पोटैशियम, कैल्शियम से भरपूर जामुन का सेवन करने से हड्डियों को भरपूर पोषण मिलता है, जिससे न केवल गर्भवती महिला की हड्डियां मजबूत रहती है बल्कि गर्भ में शिशु की हड्डियों को भी मजबूती मिलती है।

दिल के लिए है बेहतर

प्रेग्नेंट महिला ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के दिल को स्वस्थ रखने में भी जामुन का सेवन करने से फायदा होता है, क्योंकि इसमें मौजूद पोटैशियम, विटामिन्स और एंजाइम दिल को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। और गर्भवती महिला यदि किसी हार्ट से जुडी परेशानी से जूझ रही है तो इसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ने से रोकने में मदद करते हैं।

इन्फेक्शन से बचाव

ऑक्लिक एसिड, मैलिक एसिड, टैनिन, गैलिक एसिड जामुन में मौजूद होते हैं जो की एंटी बैक्टेरियल, एंटी मैरलियल, गैस्ट्रो प्रोटेक्टिव फायदे गर्भवती महिला को पहुंचाते हैं जिससे प्रेग्नेंट महिला को कई तरह के हानिकारक इन्फेक्शन को दूर रखने में मदद मिलती है।

विटामिन सी और आयरन होता है

जामुन में आयरन और विटामिन सी भरपूर मात्रा में होते है जो की प्रेगनेंसी में आयरन की मात्रा को भरपूर बनाए रखने में मदद करता है। और गर्भवती महिला को खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियां जैसे की एनीमिया से सुरक्षित रखने में मदद करता है।

मुँह के लिए है फायदेमंद

एंटी बैक्टेरियल गुणों से भरपूर होने कारण प्रेगनेंसी के दौरान मुँह में होने वाली परेशानियों से बचाव करने में भी जामुन का सेवन करने से फायदा मिलता है।

डाइबिटीज़ के लिए है बेहतर

यदि कोई गर्भवती महिला शुगर की समस्या से परेशान है तो जामुन का सेवन करने से ब्लड में शुगर के लेवल को कण्ट्रोल करने के लिए जामुन का सेवन एक बेहतरीन उपाय है। इससे शुगर को कण्ट्रोल रखने के साथ प्रेगनेंसी में होने वाली गेस्टेशनल शुगर की समस्या से भी निजात पाने में मदद मिलती है।

कैंसर के रिस्क को करता है दूर

जामुन में केमोप्रोटेक्टिव और रेडियोप्रोटेक्टिव तत्व होते है जो कैंसर को पैदा करने वाले फ्री रेडिकल्स को बढ़ने से रोकने में मदद करते हैं। ऐसे में यदि गर्भवती महिला जामुन का सेवन करती है तो इससे कैंसर के रिस्क को कम करने में मदद मिलती है।

शिशु के लिए है फायदेमंद

पोषक तत्वों से भरपूर जामुन का सेवन करने से शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में मदद मिलने के साथ शिशु को जन्म के समय होने वाले दोष से सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान जामुन का सेवन करने से मिलते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला चाहे तो जामुन का सेवन कर सकती है, लेकिन इसे अच्छे से धोकर और ताजे जामुन का सेवन ही करें।