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बालों को रेशमी और घने बनाने के घरेलू तरीके

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सुंदर, घने, रेशमी और मुलायम बाल पाना हर महिला की चाह होती है जिसके लिए वे क्या कुछ नहीं करती। महंगे हेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल, सैलून में उनकी रिपेयरिंग और न जाने क्या-क्या? लेकिन फिर भी कई बार इतना सब करके भी उनके बालों में वो चमक और शाइन नहीं आ पाती। बालों को महिलाओं की खूबसूरती का अभिन्न अंग माना जाता है इसीलिए पहले के समय की लड़कियों और महिलाओं के बाल अधिक लम्बे और खूबसूरत हुआ करते थे।

लेकिन आजकल के प्रदुषण भरे वातावरण और देखभाल में कमी के चलते लम्बे बाल पाना हर किसी के लिए संभव नहीं। पहले महिलाएं अपने बालों को अधिक समय दे पाती थी लेकिन आज कल हर कोई अपने कार्यों में इतना व्यस्त है की बालों को पूरा समय दे ही नहीं पाती जिसके कारण वे नमी खोने लगते है और झड़ने भी लगते है।

अगर आपके बाल भी इनमे से किसी समस्या से ग्रस्त है तो परेशान न हो क्योंकि आज हम आपको कुछ ऐसे आसान और घरेलू उपाय बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप अपने बालों में प्राकृतिक शाइन और चमक ला सकती है। इसके अलावा ये उपाय आपके बालों का झड़ना कम करके उन्हें घना करने में भी मदद करेंगे। तो आइए जानते है बालों को घना और रेशमी बनाने के घरेलू उपाय!

बालों को घना और रेशमी बनाने के घरेलू उपाय :- 

1. अंडा :egg pack

बालों के लिए अंडा बहुत लाभकारी होता है। इसका प्रयोग करके आप अपने बालों को शाइन बना सकती है। प्रयोग के लिए एक अंडे को फोड़कर उसका तरल पदार्थ निकाल लें, अब इसमें 2 चम्मच अरंडी का तेल, 1 चम्मच सिरका, 1 चम्मच ग्लिसरीन मिलाकर घोल तैयार कर लें। अब इसे अपने बालों में धीरे-धीरे लगाएं। लगाने के बाद बालों को एक घंटे तक किसी कपडे से ढक लें। और 1 घंटे बाद बालों को ठंडे पानी से धो लें। इससे आपके बाल चमकदार हो जाएंगे।

2. सेब :

इसका इस्तेमाल खाने के लिए तो सभी करते है लेकिन क्या आप जानते है की इसकी मदद से बालों को घना और मुलायम भी बनाया जा सकता है। इसके लिए 3 से 4 सेबों को छील कर एक लीटर पानी में उबाल लें। अब उस पानी से अपने बालों को धोएं। 4 से 5 बार इस्तेमाल करने से बाल लम्बे होने के साथ साथ मुलायम भी होंगे।

3. कॉफ़ी :

कॉफ़ी का इस्तेमाल अक्सर बालों को कला करने के लिए किया जाता है लेकिन इसके प्रयोग से आप उन्हें मुलायम भी बना सकती है। इसके लिए 3 चम्मच कॉफ़ी बीन को पीसकर उबाल लें।ठंडा होने के बाद इस घोल से बाल धो लें। इससे बाल काले तो होंगे ही साथ साथ शाइन भी होंगे।

4. मेहंदी :balo me mehandi

हिना का प्रयोग अधिकतर लोग करते ही है। आपको जानकर हैरानी होगी की बालों के लिए ये एक बेहतर कंडीशनर है। इसे लगाने और प्रयोग की पूर्ण विधि जानने के लिए इसे पढ़े : बालों में मेहंदी कैसे लगाएं?

5. घरेलू टॉनिक :

घर पर बना ये टॉनिक आपके बालों के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है। इसे बनाने के लिए एक कप रेड वाइन में एक अंडा और एक चम्मच बेकिंग सोडा डालें और अच्छे से मिलाएं। अब इस मिश्रण से अपने सर की मालिश करें। एक घंटे तक लगाएं रखें और उसके बाद श्मापू करके बाल धो लें।

6. ग्लिसरीन और सिरका :

ये दोनों ही उत्पाद आपके घर में मिल जाएंगे इसके अलावा दही और नारियल तेल सभी घरों में इस्तेमाल होने वाली कॉमन चीज है। इसके प्रयोग के लिए दो चम्मच ग्लिसरीन, 100 ग्राम दही, 2 चम्मच सिरका और 2 चम्मच नारियल का तेल मिलाकर एक मिश्रण तैयार कर लें। अब इस मिश्रण को अपने बालों में लगाएं और आधा घंटे लगा रहने दें। उसके बाद बालों को पानी से साफ़ कर लें।

7. बियर :

बियर में प्रोटीन की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो बालों की कोशिकाओं को पोषण देकर क्षतिग्रस्त हुए बालों को ठीक करके मजबूत बनाती है। इसके प्रयोग के लिए बालों में शैम्पू करने के बाद जड़ों में उँगलियों से बियर लगाएं। उसके पांच मिनट बाद बाल धो लें। महीने में दो बार इस्तेमाल करने से बाल घने और मुलायम बनेंगे।

8. गुलाब के फूल :

गुलाब के फूल आपको आसानी से मिल जाएंगे। इसके लिए गुलाब की पंखुडिया लाभदायक होती है। प्रयोग के लिए आधा कप ताजे गुलाब की पंखुड़ियों को पीसकर पेस्ट बना लें। उसके बाद उसमे दो अंडे और चार चम्मच बादाम का तेल डालकर मिला लें। और इसे अपने बालों में लगाएं। एक घंटे तक रखने के बाद बालों में शैम्पू कर लें। बाल चमक जायेंगे।

9. खान-पान :

अपने बालों को स्वस्थ और घना बनाए रखने के लिए उन्हें पूर्ण पोषण देना भी जरुरी है। जिसके लिए आपका खान पान बेहतर होना चाहिए। इसीलिए पौष्टिक खुराक लें। जितना हो सके होलग्रेन और ड्राई फ्रूट का सेवन करें, क्योंकि इनमें बायोटीन की मात्रा अधिक होती है। उचित आहार, समय पर हेयर कट, सही शैपू का चयन और हेयर एक्सपर्ट से उचित विचार-विमर्श आपके बालों की देखभाल का सही तरीका है।

10. इनको कहें न :don't do

असंतुलित भोजन, स्वास्थ्य में खराबी, अनियमित जीवन शैली, ब्यूटी प्रोडक्ट्स का अत्यधिक प्रयोग और हेयर स्टाइल के चुनाव में गलती आपके बालों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसीलिए जरुरी है की कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखें। क्योंकि ये ही कारण आपके बालों के कमजोर होने का कारण बनते है।

महिलाओं में प्रजनन क्षमता बढ़ाने के टिप्स

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अनिमित दिनचर्या, गलत आदतें, शरीर में कमजोरी, धूम्रपान व् शराब आदि का सेवन करने के कारण महिलाओं में प्रजनन क्षमता की कमी आने लगती है। जिसके कारण महिला को प्रेगनेंसी से जुडी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, और महिला गर्भवती नहीं हो पाती है। लेकिन यह कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसका कोई इलाज नहीं है बल्कि आज हम उन महिलाओं के लिए कुछ खास उपाय बताने जा रहे हैं, जिनकी फर्टिलिटी पावर कम होती है और इन टिप्स को ट्राई करने के बाद उनके प्रजनन क्षमता में सुधार लाने में मदद मिलेगी।

अंडा

अंडे में मौजूद विटामिन डी बॉडी में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन की मात्रा को बढ़ाने और उसका संतुलन बनाएं रखने में मदद करता है। जिसके कारण महिला की प्रजनन क्षमता बेहतर होती है, इसके लिए महिला को नियमित दिन में एक बार अंडे के किसी न किसी रूप में जरूर खाना चाहिए।

दालचीनी

पोलिसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम एक हार्मोनल समस्या है जो महिला के अंडाशय में असंतुलन उत्पन्न करता है। जिसके कारण प्रजनन अंग अच्छे से काम नहीं कर पाते हैं, और पीरियड्स के दौरान ब्लड का ज्यादा आना इसी सिंड्रोम के कारण होता है। और इस समस्या से निजात पाने के लिए नियमित सुबह यदि आप एक गिलास पानी में एक चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर पीते है, और इसे अपनी सब्जियों में भी शामिल करते हैं। तो इस हार्मोनल विकार से आपको निजात मिलता है और महिलाओं की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है।

तिल का तेल

तिल के तेल को गरम करके पेट की अच्छे से मालिश करने पर गर्भाशय में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर तरीके से होता है, साथ ही इससे ओवुलेशन भी बेहतर होता है। जिसे धीरे धीरे महिला को प्रजनन क्षमता में सुधार होने में लग जाता है, और मालिश के बाद नहाना भी जरूर चाहिए।

अनार

महिलाओं को प्रजनन क्षमता से जुडी समस्या से निजात दिलाने के लिए अनार भी एक फायदेमंद उपाय है। पोषक तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर अनार का सेवन करने से गर्भाशय की झिल्ली को मजबूत करने में मदद मिलती है। और इसके फायदे को उठाने के लिए आपको दिन में एक ताजे अनार या फिर एक गिलास ताजे अनार का जूस जरूर पीना चाहिए।

एवोकाडो

महिलाओं में प्रजनन क्षमता को सुधारने के लिए एवोकाडो का सेवन करने से भी बहुत फायदा मिलता है। क्योंकि इसमें विटामिन इ व् अन्य बहुत से पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं।

केला

केला महिला के अंडाणु में अंडे का विकास करने के साथ बॉडी में हार्मोनल संतुलन को बनाएं रखने में भी मदद करता है। ऐसे में केले का सेवन करने से महिलाओं की प्रजनन क्षमता में सुधार होने लगता है।

हरी पत्तेदार सब्जियां

फोलिक एसिड, आयरन, एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान बहुत फायदा मिलता है। इससे महिला के शरीर में खून की मात्रा को बढ़ाने के साथ प्रजनन अंगो को भी स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। और फोलिक एसिड की भरपूर मात्रा महिला के गर्भवती होने के चांस को बढ़ाने में मदद करती है।

शतावरी

यौन इच्छा को बढ़ाने के साथ प्रजनन क्षमता में भी सुधार करने के लिए शतावरी एक यौन टॉनिक का काम करता है। इसके सेवन से महिला के अंडाणु को पोषण मिलने के साथ एस्ट्रोजन हॉर्मोन का उत्पादन बेहतर होता है। जिससे मासिक धर्म भी नियंत्रित होता है, और ऐसा होने के कारण प्रजनन अंग अपना काम बेहतर तरीके से करते हैं, जिससे महिला की प्रजनन क्षमता में सुधार होता है।

अश्वगंधा चूर्ण

महिला की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए अश्वगंधा चूर्ण एक बेहतरीन उपाय है, यह बॉडी में हार्मोनल संतुलन को बनाएं रखता है। इसके इस्तेमाल के लिए दिन में दो बार एक गिलास दूध में पांच ग्राम यह चूर्ण डालकर अच्छे से मिक्स करें और पीएं, धीरे धीरे आपको इसका असर महसूस होने लगेगा।

बरगद

बरगद के पेड़ की छाल के चूर्ण को एक गिलास गर्म दूध या पानी में डालकर लेने से महिला के प्रजनन अंगो में आए विकारो को दूर करने में मदद मिलती है। जिससे प्रजनन क्षमता को बढ़ावा मिलता है, और एक बात का ध्यान रखें की पीरियड्स के दिनों में इनका सेवन न करें।

महिलाओं में प्रजनन क्षमता बढ़ाने के अन्य टिप्स

  • अपने लाइफ स्टाइल को सही रखें, और अपनी दिनचर्या को नियमित करें, हर काम का एक समय बनाएं चाहे फिर वो खाने का हो या सोने का।
  • पानी का भरपूर सेवन करें, क्योंकि इससे बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं जिससे आपकी शारीरिक क्रियाओं को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है।
  • नशीली चीजे जैसे की ज्यादा दवाइयों का सेवन, शराब, धूम्रपान, आदि का सेवन न करें।
  • दूध व् दूध से बनी चीजों का भरपूर सेवन करें लेकिन सोया व् उससे बनी चीजों से परहेज रखें।
  • तनाव न लें, क्योंकि इससे भी आपकी प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।
  • नियमित आधा घंटा व्यायाम व् योगासन करें इससे बॉडी में ऊर्जा का संचार होता है, साथ ही बॉडी में ब्लड का फ्लो भी सुधरता है, और मांसपेशियों को एनर्जी मिलती है जिससे प्रजनन क्षमता बेहतर होती है, और आपका वजन भी नियंत्रित रहता है।
  • अपने आहार का ध्यान रखें ऐसे आहार का सेवन करें जिसमे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में हो।
  • नींद भी भरपूर लें, ताकि बॉडी को भरपूर आराम मिल सके, और बॉडी में होने वाली सभी क्रियाएं बेहतर तरीके से काम करें।
  • प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए आपको अपने पार्टनर के साथ बेहतर सम्बन्ध भी बनाने चाहिए, क्योंकि यदि आप बेहतर सम्बन्ध नहीं बनाते हैं, या बहुत दिनों बाद सम्बन्ध बनाते हैं तो इसके कारण भी आपकी फर्टिलिटी कम होने लगती है।

तो यह हैं कुछ खास उपाय जिनका इस्तेमाल करने के बाद महिलाएं अपनी प्रजनन क्षमता में सुधार कर सकती है। और यदि किसी महिला को प्रेगनेंसी से जुडी ज्यादा समस्याएं आ रही हैं तो आप चाहे तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से भी राय ले सकती हैं।

बच्चे को गोरा करने के उपाय

How To Fair Baby Skin Color?

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दुनिया की हर माँ चाहती है की उसका बच्चा गोरा, सुंदर और आकर्षक बने। जिसके लिए वे क्या कुछ नहीं करती। बच्चे की साफ़ सफाई करती है, उसकी नियमित देखभाल करती है, प्रसव से पूर्व बच्चे का रंग निखारने वाले खाद्य पदार्थों का भी सेवन करती है। लेकिन कई बार इतना सब करने के बाद भी बच्चे के रंग दबा हुआ होता है।

ऐसे में माँ समझ ही नहीं पाती की करें तो क्या? क्योंकि उसके जन्म से पूर्व उसने जितने भी उपाय किये थे उनका बच्चे की स्किन पर कोई प्रभाव नहीं आया। ऐसे में महिलाएं काफी निराश भी हो जाती है। जबकि उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि बच्चे का रंग 6 महीने तक बदलता रहता है यानी इस बीच बच्चे के रंग कभी डार्क हो जाता है तो कभी लाइट हो जाता है।बच्चे गोरा करने के उपाय

Read more : ट्रांसजेंडर कैसे पैदा होते है?

और ये भी सच है की अक्सर जन्म के बाद बच्चे का रंग थोड़ा दब जाता है जो बाद में अपने आप उम्र बढ़ने के साथ-साथ ठीक हो जाता है। वास्तव में इसका कारण त्वचा में मौजूद milanin pigement होता है जिसके अधिक होने पर त्वचा का रंग दबा हुआ होता है। इसके अतिरिक्त अनुवांशिक कारणों यानी माँ बाप के रंग की वजह से भी कई बार बच्चे का रंग दबा हुआ हो जाता है। ऐसे में परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि सही समय आने पर बच्चे का रंग अपने आप ही साफ़ हो जाता है।

इसके अलावा भी कुछ तरीके और उपाय है जिनकी मदद से आप अपने बच्चे के रंग को साफ़ कर सकती है। इन उपायों से आपका बच्चा और बच्चों की तरह बिलकुल गोरा तो नहीं होगा लेकिन हां, उसकी त्वचा के रंग में कुछ फर्क जरूर आएगा। और अगर आप सोच रही है की मालिश करने से आपका बच्चा गोरा हो जाएगा तो समझ लें की मालिश करने से बच्चा गोरा नहीं होता बल्कि उसकी हड्डियां और मासपेशियां मजबूत होती है। यहाँ हम आपको उन्ही कुछ उपायों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है। तो आइये जानते है क्या है वे उपाय।

बच्चे का रंग गोरा करने की टिप्स :-

1. गर्म तेल की मालिश :child

दुनिया की हर माँ जानती है की गर्म तेल की मालिश बच्चे के लिए बहुत लाभकारी होती है। ये न केवल उसकी हड्डियों को मजबूत बनाती है बल्कि मुलायम मांसपेशियों को भी नयी ताकत प्रदान करती है जिससे वे अन्य क्रियायों में भाग लेने के सक्षम हो पाते है। नवजात शिशु को नियमित रूप से मालिश की आवश्यकता होती है। जिससे उसकी स्किन पर एक नमी की परत बनी रहती है जो उसकी स्किन को ड्राई और रुखा नहीं होने देती। हां, ये बच्चे का रंग गोरा तो नहीं कर सकती लेकिन उसकी देखभाल करने के लिए इससे बेहतर और कोई उपाय नहीं है।

2. रोजाना स्नान :

छोटे बच्चों को नहलाने के लिए न बहुत ज्यादा ठंडे और न बहुत ज्यादा गर्म पानी की आवश्यकता है। क्योंकि उनकी त्वचा बहुत संवेदनशील होती है। ऐसे में अगर आप बहुत ठंडे या बहुत गर्म पानी का प्रयोग करेंगे तो दुष्परिणाम सामने आ सकते है। जिससे उसकी त्वचा का रंग और सांवला हो सकता है। इसीलिए छोटे बच्चों को हमेशा गुनगुने पानी से ही नहलाना चाहिए।

3. बेबी के लिए उबटन :

यह उबटन केवल नवजात शिशुओं के लिए बनाया जाता है जिससे उनकी स्किन को कोई नुकसान भी नहीं होता और उनके रंग में भी फर्क आ जाता है। इसके लिए आप बेसन, पानी, दूध और बेबी आयल को बराबर मात्रा में एक साथ मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट से बच्चे के शरीर को हलके हाथों से रगड़ें। इसके प्रयोग से बच्चे की स्किन में चमक भी आएगी और रक्त परिसंचरण भी बेहतर होगा।

4. मॉइस्चराइज़र :

बच्चों की त्वचा की अतिरिक्त देखभाल करने की आवश्यकता होती है। जिसके लिए आप मॉइस्चराइज़र का प्रयोग कर सकते है। इसके लिए हमेशा अच्छे और बेस्ट क्वालिटी और ब्रांड वाले मॉइस्चराइज़र का ही प्रयोग करें। बच्चे की स्किन को रुखा होने से बचाने के लिए 4 घंट के अंतराल में उसकी त्वचा पर मॉइस्चराइज़र लगाते रहे। ऐसा करने से बच्चों का रंग तो साफ होगा ही साथ-साथ त्वचा का रूखापन भी दूर हो जाएगा।

5. साबुन का इस्तेमाल नहीं :

छोटे बच्चों की स्किन पर कभी भी साबुन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। क्योंकि साबुन बच्चों की त्वचा की बाहरी परत को हटा देता है जिससे वे रूखी और बेजान हो जाती है। इसकी बजाय आप दूध, क्रीम (मलाई) या गुलाबजल से बच्चे की स्किन साफ़ कर सकती है। चाहे तो ग्लिसरीन और क्रीम से बने बेबी वाश का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

6. बच्चे को धुप दिखाए:

धुप बच्चों के लिए बहुत अच्छी होती है। ये न केवल उनके शरीर में रक्त संचार को बढ़ाती है बल्कि उसके शरीर को खोलने में भी मदद करती है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है की आप उसे रोजाना धुप में ले जाएँ। क्योंकि लम्बे समय तक धुप के सम्पर्क में रहने से बच्चे का रंग दब सकता है। जबकि अल्प समय की धुप उसको बहुत से फायदे प्रदान करती है।

7. पानी :

पानी बच्चे ही नहीं बलकि बड़ों की स्किन को साफ़ करने के लिए भी बेहतर उपाय है। ये बच्चे में dehydration की समस्या को नहीं बढ़ने देता। पानी न केवल एक अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करता है बल्कि साफ़ सुथरी त्वचा भी देता है। इसीलिए अगर आपके बच्चे की उम्र कुछ ज्यादा है तो उसे पानी का खूब सेवन कराएं।

8. फलो का रस :

6 महीने के बाद के बच्चों का रंग साफ़ करने के लिए फलों का रस वाकई एक जादुई उपाय है। अंगूर का रस पिलाने से बच्चे की त्वचा का रंग अच्छा होने लगता है। सेब और नारंगी जैसे फलों का रस भी उसका रंग निखारने में मदद कर सकते है।

9. चंदन :

आप अपने बच्चे के चंदन से स्नान करवा कर भी गोरा बना सकती है। इसके लिए चन्दन पाउडर में दूध मिलाकर पेस्ट को बच्चे के शरीर पर लगाएं और हलके हाथों से सफाई करें। इससे बच्चे के शरीर पर मौजूद दाग भी खत्म हो जाएंगे और उसकी त्वचा का रंग भी बेहतर होगा।

10. साफ़ सफाई :

बच्चों की त्वचा को निखारने का एक तरीका उसकी साफ़ सफाई रखना भी है। क्योंकि अगर आपका बच्चा यु ही गन्दा संदा घूमता रहेगा तो उसकी स्किन का डार्क होना तय है। ऐसे में आपकी जिम्मेदारी है की उसे अच्छे से नहला धुलाकर साफ़ कपड़े पहनकर रखें। और अगर वे गंदगी या धूल मिटटी में खेलता है तो उसे वहां खेलने से रोके।

ये थे कुछ तरीके जिनकी मदद से आप अपने बच्चों के रंग को डार्क होने से बचा भी सकती है और उसे कुछ कम भी कर सकती है। लेकिन ध्यान रहे छोटे बच्चे की स्किन बहुत नाजुक होती है। उसपर किसी भी चीज का अधिक इस्तेमाल हानिकारक होता है जो बच्चों के लिए ठीक नहीं। इसीलिए तरीकों का प्रयोग ध्यान से ही करें।

लेबर पेन न होने पर क्या करें?

प्रसव पीड़ा

गर्भवती महिला की डिलीवरी के लिए प्रसव पीड़ा का होना जरुरी होता है, क्योंकि यदि महिला को डिलीवरी की तारीख आने के बाद भी प्रसव पीड़ा नहीं होती है। तो इसके लिए डॉक्टर या तो आर्टिफिशल दर्द के इंजेक्शन लगाकर प्रसव पीड़ा को बढ़ाने की कोशिश करते हैं। और यदि उसके बाद भी यदि महिला पर कोई असर नहीं होता है तो महिला को सिजेरियन डिलीवरी की सलाह दी जाती है। क्योंकि यदि समय ज्यादा हो जाता है तो इससे गर्भ में शिशु को रिस्क को सकता है। और डिलीवरी की देय तारीख के बाद भी यदि महिला को दर्द नहीं होता है तो इसके कारण महिला को घबराहट व् बेचैनी महसूस हो सकती है। ऐसे में महिला प्रसव पीड़ा के लिए कुछ घरेलू तरीको का इस्तेमाल कर सकती है, साथ ही महिला कुछ ऐसे आहार भी ले सकती है जिससे प्रसव पीड़ा को बढ़ाने में मदद मिलती है।

प्रसव पीड़ा लाने के घरेलू तरीके

यदि महिला के डिलीवरी का समय पास आ रहा है और महिला को बॉडी में प्रसव पीड़ा का कोई लक्षण दिखाई नहीं दे रहा है। तो महिला कुछ घरेलू तरीको का इस्तेमाल करके प्रसव पीड़ा को लाने की कोशिश कर सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रसव पीड़ा लाने के लिए किन घरेलू तरीको का इस्तेमाल करना चाहिए।

अरंडी का तेल

प्रेग्नेंट महिला यदि एक चमच्च अरंडी का तेल लेकर हल्के हाथों से पेट पर मालिश करती है तो इससे पेट में संकुचन बढ़ता है। जिससे महिला को प्रसव पीड़ा को शुरू करने में मदद मिलती है। पुराने समय में बहुत सी महिलाएं इस तरीके का इस्तेमाल करती थी, और प्रसव पीड़ा को लाने का यह एक असरदार नुस्खा है। लेकिन एक या दो चम्मच से ज्यादा अरंडी के तेल का इस्तेमाल न करें, क्योंकि स्किन पर अरंडी के तेल का प्रयोग करने से घबराहट, उल्टी जैसी समस्या महिला को हो सकती है।

मसाज

कमर या पीठ पर कुछ ऐसे पॉइंट्स होते हैं जिनपर मसाज करने से प्रसव पीड़ा को शुरू करने में मदद मिल सकती है। यदि डिलीवरी का समय पास आ रहा है और आपके शरीर में प्रसव पीड़ा का कोई लक्षण महसूस नहीं हो रहा है तो आपको मसाज करवानी चाहिए, और इस दौरान प्रसव पीड़ा को बढ़ाने के लिए किन पॉइंट्स पर मालिश करनी चाहिए, इसके लिए आप क्वालिफाइड थैरेपिस्ट से सलाह ले सकते हैं।

योगासन

गर्भावस्था के दौरान योगासन करना बहुत अच्छा माना जाता है क्योंकि यह गर्भवती महिला को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के साथ मानसिक रूप से स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। और यदि महिला प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में योगासन करती है तो इससे भी लेबर पेन की शुरुआत करने के साथ इसे बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान योगासन करती है तो इससे महिला की नार्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

स्तन

प्रसव पीड़ा को उत्पन्न करने के लिए महिला के स्तन भी मदद करते हैं। यदि महिला अपने स्तन के अगले हिस्से पर हाथ लगाते हुए मालिश करते हुए धीरे धीरे घुमाती है। तो ऐसा करने से बॉडी में ऑक्सीटोसिन नाम का हार्मोन रिलीज होता है जो गर्भाशय में संकुचन को पैदा करने में मदद करता है। जिससे प्रसव पीड़ा को बढ़ाने में मदद मिलती है।

वाक करे

प्रेग्नेंट महिला को वाक भी जरूर करनी चाहिए, क्योंकि वाक करने से बॉडी को एक्टिव रहने के साथ बॉडी में ब्लड फ्लो को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। और वाक करने से गर्भवती महिला के एक्टिव रहने के साथ गर्भ में शिशु को भी एक्टिव रहने में मदद मिलती है। और शिशु गर्भ में जितना एक्टिव रहता है उतना ही जल्दी गर्भ में शिशु को अपनी सही पोजीशन में आने में आने में मदद मिलती है। और शिशु के सही पोजीशन में आने से प्रसव पीड़ा को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसीलिए प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में महिला को वाक जरूर करनी चाहिए।

प्रसव पीड़ा बढ़ाने के लिए यह खाएं

प्रसव पीड़ा का यदि कोई भी लक्षण यदि गर्भवती महिला को अपनी बॉडी में महसूस नहीं होता है तो महिला को खान पान में कुछ ऐसी चीजों को शामिल करना चाहिए। जिससे प्रसव पीड़ा को बढ़ाने में मदद मिल सके। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की ऐसी कौन सी चीजें हैं जिनका सेवन करने से प्रसव पीड़ा को बढ़ाने में मदद मिलती है।

अनानास

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भवती महिला को अनानास का सेवन न करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इसमें मौजूद एंजाइम के कारण गर्भपात होने का खतरा रहता है लेकिन प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में अनानास का सेवन करने से वह एंजाइम सर्विक्स पर चिकनाहट को बढ़ाने में मदद करते हैं। जिससे लेबर पेन को बढ़ाने में मदद मिलती है।

तुलसी

औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी के पत्तों को चबाने से भी प्रसव पीड़ा को उत्पन्न करने में मदद मिलती है। क्योंकि तुलसी में मौजूद गुण गर्भाशय में ब्लड फ्लो को तेजी से बढ़ाने में मदद करते हैं। और गर्भाशय में ब्लड फ्लो का तेजी से होना प्रसव पीड़ा को बढ़ाने में मदद करता है।

सिरका

सिरका की थोड़ी सी मात्रा यदि महिला सलाद आदि में मिलाकर उसका सेवन करती है तो इससे भी गर्भाशय में संकुचन को बढ़ाने में मदद मिलती है। जिससे प्रसव पीड़ा धीरे धीरे बढ़ने लगती है।

मसालेदार खाना

गर्भावस्था के दौरान मसालेदार, तेलीय आहार का सेवन करने से गर्भवती महिला के साथ शिशु को भी नुकसान पहुँच सकता है। लेकिन यदि महिला को प्रसव पीड़ा नहीं होती है तो इसके लिए महिला थोड़ा बहुत मसाले वाले आहार का सेवन कर सकती है। इससे भी गर्भाशय में संकुचन को बढ़ाने में मदद मिलती है।

डिलीवरी का समय पास आने पर भी प्रसव पीड़ा न होने पर क्या करें?

यदि गर्भवती महिला का डिलीवरी का समय पास आने पर और सभी नुस्खों का इस्तेमाल करने पर भी महिला को प्रसव पीड़ा न हो तो महिला को बिल्कुल देरी न करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि यदि डिलीवरी की गई तारीख से ज्यादा समय हो जाता है तो गर्भ में शिशु के लिए रिस्क बढ़ जाता है। और शिशु को किसी भी तरह का रिस्क न हो इससे बचने के लिए महिला को तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। क्योंकि फिर डॉक्टर अपने तरीके से इलाज करते हैं जैसे की या तो महिला को आर्टिफिशल दर्द दिया जाता है या सिजेरियन डिलीवरी द्वारा डिलीवरी की जाती है ताकि शिशु को होने वाली दिक्कतों से बचाने में मदद मिल सके।

तो यह हैं महिला को लेबर के न होने पर किस तरह महिला को अपना ध्यान रखना चाहिए और इस दौरान क्या करना चाहिए उससे जुड़े कुछ टिप्स। इन टिप्स का ध्यान रखने और डॉक्टर की राय का ध्यान रखने से महिला और शिशु दोनों को सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

बिजली का करंट लगने का प्राथमिक उपचार

Electric Shock lagne par kya kare : बिजली को इंसान का सबसे खतरनाक दुश्मन माना जाता है, क्योंकि ये केवल उसे आघात ही नहीं पहुंचाती बल्कि कई बार उसकी मृत्यु का कारण भी बन जाती है। इसीलिए बिजली का काम करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है क्योंकि सावधानी हटी और दुर्घटना घटी!

परंतु फिर भी बहुत से लोग बिजली का काम करते समय लापरवाही बरतते है जिसके परिणामस्वरूप उन्हें बिजली का झटका / इलेक्ट्रिक शॉक लग जाता है। सामान्यतौर पर करंट बिजली की नंगी तारों को छूने, किसी बिजली का काम करते समय ध्यान नहीं देने और नंगे या गीले हाथ-पैरों से तारों को छूने से लगता है।

करंट लगने पर क्या होता है?

वैसे तो करंट लगना कोई बड़ी बात नहीं है सामान्य तौर पर छोटे-मोटे करंट के झटके लगते रहते हैं लेकिन कई बार इलेक्ट्रिक शॉक लगाने की वजह से हृदय की गति पर भी प्रभाव पड़ जाता है, इस स्थिति में व्यक्ति बेहोश भी हो जाता है। कई बार बिजली का झटका इतनी ज़ोर से लगता है की व्यक्ति दूर जाकर गिर जाता है।

ऐसी परिस्थिति में लापरवाही करने से रोगी की जान भी जा सकती है इसलिए बिजली का करंट लगने के बाद तुरंत डॉक्टरी इलाज कराने की सलाह दी जाती है। जिसमे थोड़ा समय लग सकता है। इस बीच हम प्राथमिक उपचार देकर व्यक्ति की हालत में सुधार ला सकतें हैं।

यह प्राथमिक उपचार करंट लगे हुए व्यक्ति की स्थिति को सुधारने और उसके हृदय को आघात पहुँचाने से बचाता है। लेकिन बहुत से लोगों को इस प्राथमिक उपचार के बारे में पता नहीं होता। इसीलिए आज हम आपको बिजली का झटका लगने पर प्राथमिक उपचार कैसे करें इस बारे में बताने जा रहे हैं।

बिजली का झटका (Electric Shock) लगने पर क्या करें?

ध्यान दें :

अगर आपने किसी व्यक्ति को इलेक्ट्रिक शॉक लगते हुए देखा है और आप उसकी मदद के लिए जा रहें हैं तो पहले यह सुनिश्चित कर लें की उस व्यक्ति के आस पास कोई करंट वाली चीज तो नहीं है। इसके अलावा आस-पास पानी या लोहा तो नहीं है अगर है तो पहले उन्हें हटा दें इसके लिए लकड़ी या प्लास्टिक की मदद ले सकतें हैं। क्योंकि इन चीजों में करंट बहुत जल्दी पास होता है जबकि प्लास्टिक करंट पास नहीं होने देती।

करंट से दूर करे :

Electricity se dur rahe – करंट लगे व्यक्ति को बचाने के लिए पहले उसे करंट से दूर करना होगा तभी आप उसकी सहायता कर पाएंगे। उसके लिए पहले उस जगह के मेन स्विच को बंद कर दें। क्योंकि स्विच ऑन होने पर आपको भी करंट लग सकता है। और एक बात करंट लगे हुए व्यक्ति को छुएं नहीं इससे खतरा हो सकता है।

प्राथमिक उपचार शुरू करें :

First Aid For Electric Shock – बिजली से पूरी तरह दूर हो जाने के बाद व्यक्ति को रिकवरी पोजीशन में लेता दें। इस स्थिति में मनुष्य को एक करवट से लेटा दिया जाता है। और उसका एक हाथ सर के नीचे और दूसरा हाथ आगे की तरफ होता है। इस पोजीशन में व्यक्ति का एक पैर सीधा और दूसरा मुड़ा हुआ होता है।

सांस की जांच करें :

रिकवरी पोजीशन में लेटाने के बाद थोड़ी उठाकर चेक करें की व्यक्ति सांस ले रहा है या नहीं? अगर सांस नहीं ले रहा है तो उसके अपने मुंह से सांस दें और दिल को दबाएं।

चोट पर ध्यान दें :

अगर उस इंसान को चोट आई है तो उस चोट को पानी से धोएं। अगर कोई हिस्सा जल गया है और उसमें से ब्लीडिंग हो रही है तो उस जगह को साफ़ करके किसी सूखे कपडे से बांध दें।

CPR की मदद लें :

अगर व्यक्ति सांस नहीं ले रहा है तो उसे सीपीआर देना शुरू कर दें। इस क्रिया को मूर्छित अवस्था में पड़े मनुष्य के हृदय और फेफड़ों को पुनः होश में लाया जाता है। लेकिन एक बात का ध्यान रखें अगर व्यक्ति सांस ले रहा है तो कभी भी सीपीआर का इस्तेमाल न करें।

इन उपचारों के बाद बिजली का झटका लगने वाले व्यक्ति को मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत होती है, जो केवल डॉक्टर दे सकते है इसलिए डॉक्टर के पास अवश्य ले जाएं। – Electric Shock Remedies

सांवली त्वचा निखर जाएगी अगर अपनाएंगे ये उपाय

खूबसूरत और निखरी त्वचा पाना हर किसी की चाह होती है लेकिन कई बार कुछ कारणों की वजह से उनकी यह चाह अधूरी ही रह जाती है। जिसका मुख्य कारण है आजकल का प्रदुषण। जो लोगों की त्वचा पर बहुत नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसके अलावा वर्तमान की जीवन शैली और अव्यवस्थित खान पान भी इस समस्या का एक कारण है। क्योंकि त्वचा को निखारने के लिए नए सेल्स का बनना जरुरी होता है जो बेहतर खान पान के कारण बनते है। लेकिन आजकल के युवा अधिकतर अपने काम के चलते ठीक और समय पर भोजन नहीं कर पाते। ऐसे में त्वचा का रंग सांवला होना आम बात है।

ऐसे तो सांवलापन दूर करने के लिए बाजार में बहुत सी क्रीम्स और कॉस्मेटिक मौजूद है लेकिन उन सभी के निर्माण में केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है जो कई बार घातक परिणाम भी दे सकते है। ऐसे में इन क्रीम्स पर भरोसा करना ठीक नहीं। लेकिन सांवली त्वचा को गोरा बनाना भी जरुरी है। इसीलिए आज हम आपको कुछ ऐसे आसान और सस्ते घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप अपनी सांवली त्वचा को आसानी से घर बैठे गोरा कर सकते है।त्वचा का सांवलापन दूर करे

क्या आपकी त्वचा भी अक्सर धुप में काली ही जाती है? उपाय जानने के लिए पढ़े : धुप से काली हुई त्वचा को ठीक करने के उपाय!

और सबसे बड़ी बात इनके लिए आपको कहीं बाहर जाने की भी आवश्यकता नहीं है। क्योंकि ये सभी उपाय आपके घर में ही मौजूद है। तो अगर आप भी अपनी सांवली त्वचा के कारण लोगो के परिहास का कारण बनते है और त्वचा को निखारना चाहते है तो एक बार इन उपायों का इस्तेमाल जरूर करें। आपकी त्वचा गुलाब की तरह खिल उठेगी। तो आइए जानते है सांवली त्वचा को गोरा करने के उपाय!

सांवली त्वचा को गोरा करने के उपाय :-

1. खीरा :

खीरे में बहुत से गुण पाए जाते है जो त्वचा के कालेपन को हटाकर उसे गोरा करने में मदद करते है। इसके लिए 100 ग्राम खीरे को कद्दूकस कर लें। अब इसमें 2 चम्मच ओलिव आयल डालकर अच्छे से मिला लें। प्रत्येक सप्ताह में एक बार इस उपाय का इस्तेमाल करने से सांवली त्वचा साफ़ हो जाएगी।

2. सेब का सिरका :

सेब का सिरका त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है इसकी मदद से भी सांवली त्वचा को साफ़ किया जा सकता है। इसके लिए आधा कप सेब के सिरके में एक चम्मच गुलाबजल डालकर अच्छे से मिला लें। अब रोजाना इस मिश्रण को अपनी त्वचा पर लगाएं। नियमित प्रयोग से त्वचा का रंग साफ़ होगा।

3. उबटन :haldi mask

उबटन भी सांवले रंग को निखारने में काफी मदद करता है। इसके लिए बेसन, चन्दन पाउडर, नींबू का रस, खीरे का रस और कच्चे दूध की आवश्यकता होगी। सबसे पहले 4 चम्मच बेसन, आधा चम्मच चन्दन, 1 चम्मच नींबू का रस, 1 चम्मच खीरे का रस और एक चम्मच दूध को एक साथ डालकर अच्छे से मिला लें। मिलाने के बाद उबटन की तरह इस मिश्रण को शरीर पर लगाएं। सुख जाने के बाद रगड़कर त्वचा साफ कर लें।

4. गाजर :

गाजर का रस सांवली त्वचा को निखारने में बहुत मदद करता है। इसके लिए 4 चम्मच गाजर के रस में एक चम्मच मिल्क पाउडर और 1 चम्मच नींबू का रस मिलाएं। मिलाने के बाद मिश्रण को अपनी त्वचा पर लगाएं। एक सप्ताह में एक बार प्रयोग करने से त्वचा खुल उठेगी।

5. चिरौंजी :

कहने को ये एक ड्राई फ्रूट है लेकिन इसकी मदद से भी सांवली त्वचा को निखारा जा सकता है। इसके लिए आधा चम्मच चिरौंजी को दूध में पीसकर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट में आधा कप दूध और मिलायें। इसके बाद मिश्रण को अपनी चेहरे और बाहों पर लगाएं। 15 मिनट तक रखने के बाद ठंडे पानी से साफ़ कर लें। रोजाना इस्तेमाल से सांवला पन दूर होगा।

6. मुल्तानी मिटटी :mutani mitti

मुल्तानी त्वचा की समस्याएं तो दूर करती ही है साथ-साथ रंग साफ़ करने में भी खास मददगार होती है। इसके लिए 2 चम्मच मुल्तानी मिटटी, 1 चम्मच कच्चा दूध, 1 चम्मच गुलाबजल और 1 चम्मच नारियल पानी मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा के सांवले हिस्सों पर लगाएं। सूखने तक इंतजार करने और उसके बाद ठंडे पानी से साफ़ कर लें। हफ्ते में दो बार प्रयोग करने से त्वचा में चमक आ जाएगी।

7. शहद :

शहद स्वास्थ्य ही नहीं अपितु स्किन के लिए भी बहुत लाभकारी होता है। इसीलिए आयुर्वेद में भी इसे खास स्थान मिला हुआ। इसकी मदद से भी त्वचा में ग्लो लाया जा सकता है। इसके लिए शहद का सेवन करना और उसे निरंतर त्वचा पर लगाना लाभकारी रहेगा। लगाने के लिए एक छोटा चम्मच शहद उचित रहेगा।

8. गुलाबजल :

त्वचा की तरह तरह की समस्याएं दूर करने और उसे निखारने का ये सबसे अच्छा और सस्ता उपाय है। इसके लिए जरुरी नहीं की आप मार्किट से खरीदकर ही गुलाबजल का प्रयोग करें। आप खुद स्वयं घर में भी गुलाबजल बना सकते है। इसके लिए गुलाब की पंखुड़ियों को पाने में डालें। और उस पानी का प्रयोग त्वचा पर करें।

9. पपीता :papita face mask

पपीते का सेवन अक्सर बिमारियों में किया जाता है लेकिन क्या आप जानते है की इसकी मदद से त्वचा को भी बहुत लाभ पहुँचाया जा सकता है। वैसे इसकी तासीर गर्म होती है लेकिन त्वचा के लिए ये बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए पपीते को अपनी डाइट में शामिल करें और उसे अपनी त्वचा पर लगाए।

10. नींबू :

नींबू के फायदों के बारे में कौन नहीं जानता स्किन के लिए ये किसी रामबाण से कम नहीं है। ब्लैकहेड्स से लेकर त्वचा का कालापन सब इसके प्रयोग से ठीक किया जा सकता है। इसके प्रयोग के लिए रोजाना नींबू के रस को अपनी त्वचा पर लगाएं। कुछ देर रखने के बाद चेहरा अच्छी तरह से साफ़ कर लें। वैसे आप नींबू की जगह टमाटर का भी इस्तेमाल कर सकते है।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद जल्दी रिकवर करने के तरीके

नोर्मल डिलीवरी होने पर महिला को बहुत दर्द झेलना पड़ता है लेकिन यह दर्द सिर्फ उसी समय होता है। और डिलीवरी के बाद यह दर्द खत्म हो जाता है, नोर्मल डिलीवरी के बाद हॉस्पिटल से महिला एक या दो दिन में छुट्टी मिल जाती है, साथ ही महिला महिला दो या तीन दिन में अपने आप उठने बैठने भी लगती है। लेकिन यदि महिला की डिलीवरी सिजेरियन होती है तो महिला को टाँके लगते हैं, एक हफ्ते तक महिला को हॉस्पिटल में रखा जाता है, उसके बाद भी महिला को उठने बैठने में बहुत ज्यादा परेशानी होती है।

और अधिकतर महिलाएं यही चाहती है की उनकी डिलीवरी नोर्मल हो। परन्तु कुछ मेडिकल कंडीशन या प्रसव के दौरान महिला या बच्चे के स्वास्थ्य के सही नहीं होने के कारण महिला को सिजेरियन डिलीवरी से बच्चे को जन्म देना पड़ता है। और यदि आपका भी सिजेरियन डिलीवरी से ही बच्चा हुआ है तो डिलीवरी के बाद आपको किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे आपको जल्दी रिकवर होने में मदद मिल सके, आइये इस आर्टिकल में जानते हैं।

टांकों का ध्यान रखें

सिजेरियन डिलीवरी में महिला के पेट पर कट लगाकर शिशु को बाहर निकाला जाता है और उसके बाद टाँके लगाएं जाते हैं। और टांकों का अच्छे से ध्यान न रखा जाये तो महिला को जल्दी फिट होने में समय लगता है। ऐसे में महिला यदि अपने टांकों की साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखती है, दवाई का सेवन करती है, टांकों पर दवाई लगाती है, तो ऐसा करने से टाँके जल्दी ठीक हो जाते हैं। और सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है।

खान पान में पोषक तत्वों को शामिल करें

ऑपरेशन से बच्चे को जन्म देने के बाद महिला को ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिसमे आयरन जिससे महिला के शरीर में खून की कमी पूरी हो सके, कैल्शियम जिससे महिला की हड्डियां मजबूत हो सके और कमजोरी थकान से निजात मिल सके, मैग्नीशियम और प्रोटीन से भरपूर जिससे महिला की मांसपशियों को मजबूती मिल सके, यह सभी पोषक तत्व मौजूद हो। यदि महिला अपनी डाइट में पोषक तत्वों को भरपूर चीजों को शामिल करती है। तो उतनी ही जल्दी महिला को रिकवर होने में मदद मिलती है।

भरपूर आराम करें

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में बहुत ज्यादा कमजोरी आ जाती है। और कमजोरी को दूर करने के लिए महिला को जितना हो सके आराम करना चाहिए। जितना ज्यादा डिलीवरी के बाद महिला आराम करती है उतना ही जल्दी महिला को फिट होने में मदद मिलती है।

बेल्ट का इस्तेमाल करें

बच्चे को बार बार स्तनपान करवाने के लिए, वाशरूम जाने के लिए महिला को उठना पड़ता है। ऐसे में बार बार उठने बैठने के कारण महिला को ज्यादा परेशानी होती है। इस परेशानी को कम करने के लिए और महिला को रिलैक्स रहने के लिए डिलीवरी के बाद महिला को पेट के लिए बेल्ट का इस्तेमाल करना चाहिए। बेल्ट का इस्तेमाल करने से महिला की दिक्कतें कम होती है जिससे महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है।

टेंशन नहीं लें

सिजेरियन डिलीवरी के बाद जल्दी रिकवर होने के लिए महिला को किसी भी बात को लेकर तनाव नहीं लेना चाहिए। जैसे की टांके कब ठीक होंगे, ज्यादा दिक्कत क्यों हो रही है, बच्चे के विकास को लेकर, आदि। जितना आप तनाव से दूर रहती है और अपना अच्छे से ध्यान रखती है उतना ही जल्दी महिला को फिट होने में मदद मिलती है।

संक्रमण से बचाव रखें

सिजेरियन डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग ज्यादा होती है ऐसे में यदि साफ सफाई का ध्यान न रखा जाये। तो इसके कारण संक्रमण का खतरा होता है जिसके कारण महिला की तबियत खराब हो सकती है। ऐसे में महिला को डिलीवरी के बाद साफ सफाई का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि संक्रमण के खतरे से बचे रहने में मदद मिल सके।

मालिश करवाएं

डिलीवरी के तुरंत बाद नहीं बल्कि जब आपके टाँके अच्छे से ठीक हो जाएँ तो महिला को अपने शरीर की मालिश जरूर करवानी चाहिए। क्योंकि मालिश करवाने से शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है, महिला की हड्डियों को मजबूती मिलती है जिससे महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है। मालिश करवाने से पहले आप चाहे तो एक बार डॉक्टर से पूछ सकते हैं।

दवाइयों का सेवन

सिजेरियन डिलीवरी के बाद डॉक्टर द्वारा महिला को कुछ दवाइयों का सेवन करने की सलाह दी जाती हैं। जिससे महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है। ऐसे में जल्दी फिट होने के लिए महिला को उन दवाइयों का सेवन समय से करना चाहिए।

लापरवाही न करें

सिजेरियन डिलीवरी के बाद जल्दी फिट होने के लिए महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वो अपनी सेहत के साथ किसी भी तरह की लापरवाही न करें। क्योंकि महिला यदि थोड़ी सी भी लापरवाही करती है तो इसके कारण महिला को फिट होने में समय लग सकता है और महिला की परेशानियां भी बढ़ सकती है।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका ध्यान रखने से सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है। तो यदि आपकी भी डिलीवरी सिजेरियन हुई है तो इन बातों का ध्यान रखें ताकि आपको जल्दी से जल्दी रिकवर होने में मदद मिल सकें।

Tips to recover fast from cesarean delivery

हर एक महीने डॉक्टर से मिलना क्यों जरुरी होता है प्रेगनेंसी में

गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जब हर महिला के मन में बहुत से सवाल होते है बहुत सा मानसिक और शारीरिक तनाव होता है। वैसे यह समय बहुत ख़ुशी के साथ व्यतीत करना चाहिए पर अक्सर ऐसा हो नहीं पाता है। क्योंकि हर महिला की हर गर्भावस्था अलग होती है। किस गर्भवती महिला को किस चीज से परेशानी हो सकती है इस बारे में उनके डॉक्टर से बेहतर कोई नहीं बता सकता है।

प्रेगनेंसी को पुरे नो महीनों में हमे हमारे डॉक्टर से मिलते रहना चाहिए क्योंकि एक वहीं होते है जो हमारी और हमारे होने वाले शिशु की सेहत के बारे में सही सही बता सकते है। प्रेगनेंसी कन्सीव करते ही सबसे पहले अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए। उन्हें अपने पूरी मेडिकल कंडीशन के बारे में बताना चाहिए हमे जो भी परेशानी हो या कोई भी मेडिकल हिस्ट्री वह सब पहली विजिट में ही अपने डॉक्टर को बता देना चाहिए।

पर ऐसा कभी नहीं होना चाहिए के कन्सीव करते ही अपने डॉक्टर से आप मिले और उसके बाद कभी डॉक्टर के पास विजिट भी नहीं किया ऐसा करना आपके और आपके शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है। प्रेगनेंसी के पुरे नो महीने यानी हर एक महीने में आपको अपने डॉक्टर मिलना जरुरी है अब आप जानना चाहेंगे की ऐसा क्यों तो निचे दिए गए कारणों को पढ़िए।

  •  गर्भावस्था के दौरान बहुत से परेशानियों से गुजरना पड़ता है और एक डॉक्टर ही होता जो आपकी लगभग हर परेशानी का हल निकाल सकते है।
  • पहली विजिट में ही डॉक्टर आपको बहुत से टेस्ट लिखकर देते है जिन्हे करवाने के बाद वह जान पाते है के आपका गर्भ में पल रहे शिशु की कितनी ग्रोथ हो रही है और क्या परेशानी है।
  • यदि आपको पेट में दर्द हो या फिर कोई अन्य परेशानी तो उसके लिए भी आपको अपने डॉक्टर से मिलना जरुरी हो जाता है।
  • हर महीने अपने डॉक्टर से मिलने पर शिशु की सही ग्रोथ और सही सेहत के बारे में जानकारी मिलती रहती है।
  • क्या आप जानते है के गर्भावस्था के पुरे नो महीनो में आपके शिशु का धीरे धीरे विकास होता है जैसे पहले माह में बेबी की हार्ट बीट आती, दूसरे माह में शिशु के शरीर का निर्माण होने लगता है और तीसरे में शिशु की उंगलियों, पैर का पूरी तरीके से विकास हो जाता है। पर इन सभी चीजों के बारे के सही जानकारी हमे डॉक्टर ही दे सकते है।
  • इसीलिए हर महीने डॉक्टर से मिलना जरुरी हो जाता है के शिशु का जिस विकास दर से विकास होना चाहिए था वह उस महीने में हुआ भी है या नहीं।
  • हर महीने के होने वाले टेस्ट भी अलग अलग होते है, उनके बारे में भी डॉक्टर ही बताते है के कब कौनसा टेस्ट करवाना है और किस टेस्ट से हमे क्या पता चलेगा इसकी भी सही जानकारी डॉक्टर ही दे पाएंगे।
  • आजकल के समय में विज्ञानं इतना आगे बढ़ चूका है के डॉक्टर इसका इस्तेमाल कर सिर्फ हमे शिशु के शारीरिक विकास की ही जानकारी नहीं देंगे बल्कि शिशु के मानसिक विकास के बारे में भी बताएंगे।
  • इसके अतिरिक्त प्रेगनेंसी में हमे सभी सलाह देते रहते है के क्या खाना है और क्या नहीं खाना है। पर पोषक तत्वों के आधार पर डॉक्टर से सलाह लेकर ही हमे किसी चीज का सेवन करना चाहिए।
  • प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी महिलाओं को तनाव भी हो जाता है और मन में बहुत से सवाल और परेशानिया भी होने लगती है ऐसे में डॉक्टर की ही सही सलाह से तनाव दूर कर सभी प्रश्नो का उत्तर पाया जा सकता है।
  • गर्भावस्था में कई महिलाओं को नींद नहीं आती, जिसका सीधा प्रभाव शिशु को माँ दोनों की सेहत पर पड़ता है ऐसी स्थिति में भी डॉक्टर से बहुत मदद मिलती है।
  • प्रेगनेंसी होते ही घर के सभी हमे ढेर सारा खाना खाने की सलाह देने लगते है और हमारी डाइट बढ़ाने में भी लग जाते है। पर क्या आप जानते के प्रेगनेंसी में सही वेट का बढ़ना ही जरुरी है जरुरत से ज्यादा वेट नुकसानदेह हो सकता है। किस गर्भवती महिला का कितना वेट बढ़ना चाहिए यह उसकी हाइट पर ही निर्भर करता है इसके लिए भी सही अनुमान आपके डॉक्टर ही आपको दे सकते है।

पूरी प्रेगनेंसी के हर कदम पर हमे डॉक्टर की जरुरत पड़ती रहती है अगर आपको शारीरिक रूप से कोई परेशानी ना भी हो तब भी हर महीने अपने और अपने शिशु के सेहत के सही जानकारी के लिए डॉक्टर से जरूर मिले।

प्रेगनेंसी के दौरान क्या क्या समस्याएं आती हैं? और यह हैं उपाय

प्रेगनेंसी के दौरान क्या क्या समस्याएं आती हैं? और यह हैं उपाय, प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानियां, गर्भावस्था के दौरान होने वाली समस्याएँ, गर्भावस्था में होने वाली समस्याओं से निजात पाने के टिप्स

प्रेगनेंसी के नौ महीने महिला के लिए जितने खास होते हैं उतना ही महिला को इन दिनों में बॉडी में उतार चढ़ाव भी देखने को मिलता है। क्योंकि बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को बहुत सी मुश्किलों का सामना भी करना पड़ता है। जैसे की वजन का बढ़ना, मॉर्निंग सिकनेस, उल्टी व् चक्कर की समस्या, सिर में दर्द, भूख की कमी, शरीर में दर्द आदि। हर महिला को उनकी बॉडी में हो रहे बदलाव के कारण अलग अलग लक्षण देखने को मिलते हैं। लेकिन महिला को इनसे घबराना नहीं चाहिए बल्कि इस दौरान अपनी केयर और अच्छे से करनी चाहिए ताकि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर इसका कोई भी बुरा असर न पड़े। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को क्या क्या समस्या होती है और इसके क्या क्या उपाय हैं।

मॉर्निंग सिकनेस

हार्मोनल बदलाव होने के कारण महिला को सुबह उठते समय परेशानी हो सकती है, बहुत ज्यादा थकान व् कमजोरी का अहसास हो सकता है। ऐसे में इस समस्या से निजात पाने के लिए आप स्वस्थ रहने की कोशिश करनी चाहिए और अपनी बॉडी को फिट रखने के लिए अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, जिससे आपकी बॉडी में सभी पोषक तत्व मौजूद हो और आपको फिट रहने में मदद मिलें जिससे आपको मॉर्निंग सिकनेस जैसी परेशानी से निजात मिल सके।

उल्टी की समस्या

मुँह का स्वाद कड़वा होने के कारण, बॉडी में होने वाले बदलाव के कारण महिला को उल्टी की समस्या भी हो सकती है, कुछ महिलाओं को यह परेशानी प्रेगनेंसी के तीन महीने तक रहती है। तो कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तक इस समस्या से परेशान रहती हैं। ऐसे में इस परेशानी से निजात पाने के लिए आपको आंवले का मुरब्बा खाना चाहिए, नमक और निम्बू का रस मिलाकर पानी पीना चाहिए, तुलसी के पत्तों रस और शहद मिलाकर लेना चाहिए इससे आपको इस परेशानी से राहत मिलती है।

सिर दर्द व् चक्कर

प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में ब्लड फ्लो काफी तेजी से होता है जिसके कारण महिला को सिर में दर्द व् चक्कर जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को स्वस्थ आहार लेना चाहिए, और साथ ही अपने शरीर को आराम देना चाहिए ऐसा करने से महिला को फायदा मिलता है।

कमजोरी व् थकान

बॉडी में अचानक से हो रहे इतने सारे बदलाव के कारण महिला को कमजोरी व् थकान का अनुभव भी हो सकता है ऐसे में महिला को भरपूर पोषक तत्वों का आहार लेना चाहिए, और साथ ही थकान व् कमजोरी को दूर करने के लिए आपको मालिश आदि करनी चाहिए लेकिन ज्यादा तेजी से नहीं बल्कि आराम से जिससे आपको राहत मिल सके।

मूड में बदलाव

प्रेगनेंसी में मूड में बदलाव आना भी आम बात होती है जिसके कारण महिला का स्वभाव गुस्से वाला और चिड़चिड़ा हो सकता है, ऐसे में महिला को जितना हो सके खुश रहना चाहिए। क्योंकि महिला के स्वभाव का असर भी गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है और खुश रहने के लिए महिला को अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहिए, योगा करना चाहिए, और अपने प्रेगनेंसी के लम्हो को एन्जॉय करना चाहिए।

गंध से एलर्जी और भूख की कमी

प्रेगनेंसी के समय महिलाओं को गंध से एलर्जी हो सकती है, जिसके कारण वो खाने से भी परहेज करने लगती है। जिनके कारण उन्हें स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है और साथ ही इसका असर गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर भी पड़ता है। ऐसे में महिला को खाने से बिल्कुल भी परहेज नहीं करना चाहिए, बल्कि आपको थोड़े थोड़े समय के बाद कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए।

शरीर में दर्द

शरीर में दर्द की समस्या का होना भी प्रेगनेंसी में आम बात होती है, जैसे की हल्का पेट में दर्द, कमर में दर्द, सिर दर्द, आदि महसूस होना। और इस समस्या से राहत के लिए महिला को भरपूर आराम करना चाहिए, और साथ ही यदि दर्द की ज्यादा समस्या हो तो इसे इग्नोर न करते हुए एक बार डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

वजन का बढ़ना

प्रेगनेंसी में दौरान जैसे जैसे महीने आगे बढ़ते हैं वैसे वैसे शिशु का विकास गर्भ में बढ़ता है, और महिला को वजन बढ़ने की समस्या होने लगती है। ऐसे में वजन बढ़ने के कारण महिला को बहुत सी परेशानियां हो सकती है, लेकिन महिला को वजन बढ़ने की समस्या से बचने के लिए डाइट नहीं करनी चाहिए, क्योंकि डिलीवरी के बाद धीरे धीरे सब सही हो जाता है।

बार बार यूरिन

वजन बढ़ने के कारण मूत्राशय पर दबाव पड़ता है, जिसके कारण महिला को बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है ऐसे में आपको यूरिन को रोककर नहीं रखना चाहिए। क्योंकि यदि आप यूरिन को रोककर रखते हैं तो इसके कारण पेट में दर्द आदि की समस्या से आपको परेशान होना पड़ सकता है।

नींद में कमी

जैसे जैसे महिला का वजन बढ़ता है वैसे ही महिला को सोने में भी परेशानी होती है, ऐसे में महिला को करवट बदल बदल कर सोना चाहिए इससे उसे बेहतर नींद आती है, और साथ ही रात की नींद के साथ थोड़ी देर दिन में भी जरूर आराम करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जो महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होती है, और इनसे बचने के लिए आप क्या कर सकते है इसके उपाय भी बताएं गए हैं। ऐसे में प्रेगनेंसी के समय किसी भी दवाई का सेवन डॉक्टर से बिना पूछें नहीं करना चाहिए। और साथ ही कोई भी समस्या यदि ज्यादा हो तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

डिलीवरी के बाद सुंदरता बनाएं रखने के लिए टिप्स

डिलीवरी के बाद सुंदरता बनाएं रखने के लिए टिप्स:-

डिलीवरी के बाद ज्यादातर महिलाएं सोचती है की उनका आकर्षण ख़त्म हो गया है, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान महिलाएं बहुत से बदलाव से गुजरती है, जिसका सीधा असर उनकी सुंदरता पर भी पड़ता है, जैसे की महिलाओ के वजन में फ़र्क़ पड़ना, और बाद में त्वचा में ढीलेपन की समस्या आना, चेहरे पर रौनक कम होना, त्वचा में फ़र्क़ आना, स्ट्रैचमार्क्स का होना, आदि। ये सब कुछ समस्याए होती है, जिनका समाधान महिलाएं गर्भावस्था के बाद तुरंत करना चाहती है।

इसके लिए महिलाओ को एक दम से शुरुआत नहीं करनी चाहिए, क्योंकि बच्चे के जन्म के साथ महिला का भी दूसरा जन्म होता है, और महिला के शरीर में उस समय बहुत कमजोरी भी होती है, और साथ ही बच्चा भी पूरी तरह से माँ पर ही निर्भर करता है, और स्तन पान कराते समय महिला यदि खान पान में परहेज करती है, तो ऐसे में उसका सीधा असर माँ के साथ बच्चे पर भी पड़ता है, परंतु उस समय में महिलाये अपने स्ट्रेचमार्क्स और त्वचा संबंधी समस्या का समाधान कर सकती है।

क्योंकि इन्हें करने के लिए आपको किसी भी तरह का व्यायाम नहीं करना पड़ता है, परंतु पेट पर यदि आपको टांके है तो भी मसाज करते समय सावधानी बरतनी चाहिए, तो आइये आज हम आपको डिलीवरी के बाद भी अपनी सुंदरता को कायम रखने के लिए कुछ टिप्स देने जा रहें है, परंतु आपको इन टिप्स का इस्तेमाल करते समय ध्यान रखना चाहिए की इसके कारण आप बच्चे की केयर में किसी प्रकार की असावधानी न बरतें, कई महिलाएं बच्चे को दूध पिलाना बंद कर देती है, ऐसा नहीं करना चाहिए, तो ये है महिलाओ की सुंदरता को डिलीवरी के बाद भी बनाएं रखने के लिए टिप्स।

डिलीवरी के बाद महिलाओ की सुंदरता को बनाएं रखने के लिए टिप्स:-

त्वचा का ध्यान रखें:-

twacha ke liye

महिलाओ की त्वचा में भी गर्भावस्था के दौरान और उसके बाद बदलाव आता है, जिसके वजह से इसका असर उनकी सुंदरता पर भी पड़ता है, तो इसीलिए महिलाओ को चाहिए की वो अपनी त्वचा का पूरा ध्यान रखें, व् इसके साथ उसे पूरा पोषण भी दें, तो आइये जानते है त्वचा में जान डालने के लिए महिलाओ को क्या क्या करना चाहिए।

  • त्वचा को रोजना मॉइस्चराइजर से अच्छे से मसाज करें, ताकि वो कोमल और मुलायम बन सकें।
  • धुप में निकलते समय सनस्क्रीन लगाना कभी भी न भूलें।
  • पानी का भरपूर मात्रा में सेवन करें, इससे सुखी त्वचा में जान आती है।
  • खान पान में भी किसी प्रकार की लापरवाही न बरते, क्योंकि खान पान से भी त्वचा की ख़ूबसूरती को बनाएं रखने में मदद मिलती है।
  • ज्यादा तले व् मसालेदार भोजन और बाहर के खाने से परहेज रखें, क्योंकि इससे त्वचा के साथ बच्चे को भी नुक्सान पहुच सकता है।

त्वचा के ढीलेपन को दूर करने के लिए टिप्स:-

loose-stomach

गर्भावस्था के दौरान महिलाओ का वजन निरंतर बढ़ता रहता है, और बच्चा होने के बाद त्वचा का खिंचाव एक दम से कम होने के कारण त्वचा में ढीलेपन की समस्या उत्तपन हो जाती है, जो ज्यादातर पेट और पीठ पर हो जाता है, जिसके कारण महिलाओ का आकर्षण कही गुम सा हो जाता है, और साथ ही ढीलेपन के कारण महिलाओ के कपडे भी उन पर नहीं जचते है, तो इस समस्या के समाधान के लिए आपके लिए कुछ टिप्स जो आपकी इस समस्या का समाधान कर देंगे।

  • डिलीवरी के बाद जितना हो सकें प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करना चाहिए, जैसे की अंकुरित चना, मछली आदि, ये त्वचा में कसाव लाने में मदद करते है।
  • पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें।
  • स्क्रब करने से भी त्वचा में कसाव लाने में मदद मिलती है।
  • स्तनपान से भी आपको फायदा होता है, इसीलिए बच्चे को स्तनपान आवश्य करवाएं।
  • त्वचा की मसाज करने से भी इस समस्या से निजात मिलता है।
  • हल्का फुल्का व्यायाम करना भी शुरू करें।

वजन को कण्ट्रोल करना चाहिए:-

motapa

डिलीवरी के बाद महिलाओ का वजन बढ़ जाता है, जिसे महिलाओ को बिलकुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि यदि वजन पर कण्ट्रोल न किया जाएँ, तो इसके कारण और भी बहुत सी बीमारिया लग जाती है, परंतु महिलाओ को धीरे धीरे इसकी शुरुआत करनी चाहिए, और सिजेरियन डिलीवरी के बाद तो महिलाओ को ज्यादा ध्यान रखना चाहिए, परंतु जितना हो सकें तो बच्चे के होने के थोड़े समय बाद महिलाओ को अपना वजन नियत्रित करना चाहिए, और आप चाहे तो वजन को कण्ट्रोल करने के लिए इन टिप्स का सहारा ले सकती है।

  • व्यायाम को अपनी दिनचर्या का एक अंग बनाएं।
  • खान पान में अच्छी स्वस्थ और हेल्थी चीजो को सम्मिलित करें।
  • पानी के सेवन को भरपूर मात्रा में करें।
  • नींद से बिलकुल भी परहेज न रखें।
  • ग्रीन टी का सेवन करें ये आपके स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभदायक होती है।
  • मीठे और नमकीन का सेवन नियमित मात्रा में ही करें।
  • जंक फ़ूड और ज्यादा मसालेदार भोजन से हो सकें तो परहेज रखें।

स्ट्रैचमार्क्स का ध्यान रखें:-

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महिलाओ को डिलीवरी के बाद स्ट्रैचमार्क्स की समस्या भी हो जाती है, जिसके कारण महिलाओ के पेट पर धब्बे पड़ जाते है जिसके कारण यदि वो साडी पहनती है तो उन्हें शर्मिंदा होना पड़ सकता है, और महिलाओ को खुद देखने पर ही इन निशानों को लेकर हीं भावना उत्तपन हो जाती है, और वो कुछ भी करके इन निशानों को ख़त्म करना चाहती है, तो आइये आज आपकी इस समस्या का समाधान करने जा रहें है, जिससे आपको इस समस्या का समाधान करने में मदद मिलेगी, तो आप स्ट्रेचमार्क्स को दूर करने के लिए इन तरीको का इस्तेमाल कर सकते है।

  • एलोवेरा का गुद्दा निकाल कर उसे अपनी त्वचा पर अच्छे से मसाज करें, नियमित रूपसे इस उपाय को करने से आपको इस समस्या कासमाधान मिलता है।
  • आहार को स्वस्थ व् पोष्टिक लें, क्योंकि इससे भी आपके पेट पर पड़ी इन रेखाओ को भरने में मदद मिलती है।
  • व्यायाम करने से भी स्ट्रैचमार्क्स को कम करने में मदद मिलती है।
  • आप नारियल के तेल से मसाज करके भी इस समस्या का समाधान कर सकते है।
  • लैवन्‍डर तेल को अगर दिन में तीन बार स्‍ट्रेच मार्क्‍स पर लगाया जाए तो धीरे-धीरे निशान गायब होने लगता है।
  • स्‍ट्रेच मार्क्‍स की डेड और डैमेज स्‍किन को एप्रीकॉट स्‍क्रब से दूर किया जा सकता है।
  • प्रेगनेंसी में पडे़ स्‍ट्रेच मार्क को दूर करने के लिये कोकोआ बटर का प्रयोग करना चाहिए होता है।

स्तनों में भी ढीलापन आ जाता है:-

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महिलाओ का वजन लगातार बढ़ने के कारण उनके पुरे शरीर में परिवर्तन आता है, जिसमे महिलाओ के स्तन भी शामिल होते है, और महिलाओ के स्तन के ढीलेपन के कारण उनका आकर्षण कही खो जाता है, क्योंकि स्तन को महिलाओ के आकर्षण का केंद्र माना जाता है, और यदि आप बच्चे को स्तनपान करती है तो आपको उस दौरान स्तन के साथ कोई एक्सरसाइज नही करनी चाहिए, क्योंकि इसके कारण बच्चे के दूध पर असर पड़ सकता है, इसके आलावा आप मसाज आदि कर सकते है, परंतु उसके बाद साफ़ सफाई का ध्यान रखने चाहिए क्योंकि बच्चे को दूध पीने के दौरान किसी इन्फेक्शन की समस्या न हो, तो ये है स्तनों के ढीलेपन की समस्या को दूर करने के लिए टिप्स।

  • नीम, हल्दी, और शहद का काढ़ा बनाकर पीने से होती है स्तनों के ढीलेपन की समस्या का समाधान।
  • अदरक को पानी में उबाल कर उस पानी को छान कर उसमे दूध मिलाकर पीने से आपकी इस समस्या का समाधान होता है।
  • अंडे का सफ़ेद हिस्सा खाने से भी इस समस्या का समाधान किया जा सकता है, इसके साथ अंडे को स्तन पर लगाकर रखने के बाद थोड़ी देर बाद धो दें, इससे भी आपके स्तनों के ढीलेपन की समस्या का समाधान होता है।
  • व्यायाम करने से भी स्तनों के ढीलेपन की समस्या से आराम मिलता है।
  • ग्रीन टी का सेवन करने से भी आपकी इस समस्या का समाधान होता है।
  • सर्जरी करवाकर भी आप अपनी इस समस्या का समाधान कर सकते है।

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