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मसाज कराने के क्या फायदे होते हैं

जब भी आपके शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द होता है तो आपके दिमाग में सबसे पहले आता है की मसाज करने से इस दर्द से आराम मिलेगा, फिर चाहे वो सर दर्द हो या कमर दर्द, लेकिन क्या आप जानते हैं की मसाज करने से आपको केवल शारीरिक रूप से ही बल्कि मानसिक रूप से भी रिलैक्स महसूस होता है, तभी आज कल बॉडी मसाज के लिए इतने मसाज पार्लर खुल चुकें, हैं, और उनमे जाने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है, मसाज करने से आपके शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, आपके शरीर के अंगो पर दबाव पड़ता हैं जिनसे उन्हें आराम मिलता है साथ ही उन्हें एक्टिव होने में मदद मिलती है जिससे आपकी कार्यक्षमता को भी बेहतर बनने में मदद मिलती है, इसके अलावा और भी कई फायदे आपको बॉडी मसाज से होते है, तो आइये आज हम आपको बॉडी मसाज के फायदे बताएंगे जिन्हे सुन कर आप चौंक जाएंगे।

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कार्यक्षमता बढ़ती है:-

मसाज करवाने से आपके अंगो की कार्यक्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है, क्योंकि मसाज करते समय आपके शरीर के अंगो पर एक्यूप्रेशर के कारण दबाव पड़ता है, और आपके अंगो को रिलैक्स महसूस होता है, और आपकी मांसपेशियों को भी राहत मिलती है, जिससे आपको फ्रैश और ऊर्जा से भरपूर महसूस होता है और आपकी कार्यक्षमता बढ़ती है।

वजन कम करने में मदद मिलती है:-

आज हर तीसरा व्यक्ति वजन के बढ़ने की समस्या से परेशान हैं, लेकिन मसाज करने से केवल आपकी थकान ही नहीं बल्कि आपके वजन को भी कम करने में मदद मिलती है, क्योंकि मसाज करते समय आपके शरीर में हीट बर्न होती है, जिससे कैलोरी को कम करने में मदद मिलती है, वसा कम होता है, और आपके वजन को कम करने में मदद मिलती है।

दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है:-

आपके शरीर के किसी भी हिस्से के दर्द से राहत के लिए मसाज एक प्राकृतिक थेरैपी का काम करती है, जब भी आपके शरीर के अंग में दर्द होता है, चाहे फिर वो सर हो या कमर और आप मसाज करते हैं तो ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे आपकी मांसपेशियों को भी राहत मिलती है, और आपको दर्द से राहत मिलने में मदद मिलती है।

मानसिक रूप से भी रिलैक्स महसूस होता है:-

सारा दिन भागदौड़ करने के बाद और हर रोज एक नई परीक्षा होने के कारण व्यक्ति को तनाव होना आम बात है, लेकिन इसके बाद भी आपको अपने लिए समय निकालना चाहिए यदि आप किसी मसाज पार्लर या नियमित रात को सोने से पहले अपने तलवो की मसाज करते हैं तो इससे भी आपको रिलैक्स महसूस होता है, साथ ही आपके डिप्रेशन को भी कम होने में मदद मिलती है।

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बेहतर नींद लेने में मदद करता है:-

शरीर को फिट रखने के लिए व्यक्ति को दिन में कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए लेकिन बिज़ी दिनचर्या के चलते और समय पर न सोने के कारण लोगो को अनिंद्रा की समस्या हो जाती है, परन्तु मसाज करके सोने से आपकी मांसपेशियों को आराम मिलने के साथ आपको दिमागी रूप से भी आराम मिलता है, जिससे आपको बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है, इसीलिए यदि आपको अनिंद्रा की समस्या है तो एक बार इस उपाय का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

सूजन कम करने में मदद मिलती है:-

शरीर के किसी हिस्से में सूजन की समस्या है या लम्बे समय से आपको यह समस्या है तो भी आपको मसाज करने से फायदा मिलता है, इसके लिए आप दिन में एक या दो बार अच्छे से तेल को गरम करके रख लें, और उसके गुनगुना रहने पर अच्छे से मसाज करें, फिर देखिएगा आपको इसका असर साफ़ दिखाई देगा और आपकी सूजन की समस्या से राहत पाने में आपको मदद मिलेगी।

बॉडी को लचीला बनाने में मदद मिलती है:-

यदि आप अपने बॉडी की अच्छे से मसाज करते हैं, तो यह व्यायाम जैसा ही आपको फायदा देता हैं, जैंसे व्यायाम करने से आपकी बॉडी में लचीलापन बना रहता है, साथ ही एक्सरसाइज करने से आपकी मांसपेशियों में थकावट का अनुभव होता है, जबकि यदि आप बॉडी मसाज करते हैं तो आपको ऐसी कोई समस्या नहीं होती है, बल्कि आपकी मांसपेशियों को राहत मिलती है।

पाचन तंत्र के लिए अच्छा होता है:-

मसाज कराने से आपके शरीर में मौजद टॉक्सिन्स को बाहर निकलने के साथ यह आपकी आँतों के लिए भी बहुत अच्छी होती है, जिससे आपके पाचन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है,और आपका पाचन भी बढ़ता हैं, साथ ही मसाज से आपके शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

त्वचा की रंगत में निखार आता है:-

बॉडी मसाज करने से आपकी स्किन टोन को भी बेहतर करने में मदद मिलती है, क्योंकि मसाज करने से आपके शरीर में आपकी ग्रथियों को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है, और साथ ही वसा में भी कमी आती है, जिससे आपकी स्किन को साफ़ सुथरा, और हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है।

ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है:-

मसाज कराने से आपकी बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर होने में मदद मिलती है, क्योंकि इससे आपके शरीर के सभी पॉइंट्स पर दबाव पड़ता है, जिससे पूरी बॉडी में रक्त का संचार अच्छे से होने में मदद मिलती है साथ ही ऑक्सीजन भी शरीर के हर हिस्से तक अच्छे से पहुँचती है जिससे आपको फिट रहने में मदद मिलती है।

मसाज करवाने से पहले इन बातों का ध्यान रखें और बरते ये सावधानियां:-

  • जहां भी आप मसाज करवाने जाएँ वो प्रशिक्षित मसाज करने वाले व्यक्ति या लाइसेंस वाले सेंटर पर ही जाएँ।
  • यदि आप किसी तरह की हेल्थ प्रॉब्लम से झूझ रहें हैं तो मसाज करवाने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
  • घाव, चोट, फ्रेक्चर, डीप वेन थ्रम्बोसिस जैसी प्रॉब्लम में भूल कर भी आपको मसाज नहीं करवानी चाहिए।
  • यदि आपको मसाज करवाने से कोई तकलीफ हो रही हो या दर्द बढ़ने लगे तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें, और उसी समय मसाज को रोक दें उसके बाद जैसा आपको डॉक्टर कहे उसी अनुसार चलें।

तो ये ये हैं कुछ फायदे जो आपको मसाज करवाने से होते हैं लेकिन आपको इन खास बातों का भी ध्यान रखना चाहिए, जो ऊपर दी गई है क्योंकि मसाज भी तभी फायदा करती है जब वो अच्छे से की जाएँ।

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प्राइवेट पार्ट के आस पास खुजली व रैशेस हो जाते हैं? ये हैं घरेलू उपाय

प्राइवेट पार्ट से जुडी परेशानी होने पर लोग इसे शेयर नहीं करते है, क्योंकि इस बारे में किसी से भी बात करते हुए शर्म आती है, साथ ही प्राइवेट पार्ट में खुजली व् रैशेस की समस्या होना आम बात है, और यह समस्या केवल महिलाओ को ही नहीं बल्कि पुरुषो को भी होती है, लेकिन कई लोग इसे अनदेखा करते है, जिसके कारण खुजली अधिक करने पर वहां लाल दाने बन जाते है, और रैशेस पड़ने लगते है, जिसके कारण उठने बैठने में परेशानी के साथ कई बार दर्द भी होने लगता है, और यह समस्या इसीलिए बढ़ जाती है, क्योंकि प्राइवेट पार्ट की स्किन किसी बच्चे की नाजुक स्किन की तरह ही होती है।

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प्राइवेट पार्ट से जुडी इस परेशानी के कई कारण हो सकते है, साफ़ सफाई का ध्यान न रखना, ज्यादा खुसबूदार प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना, कमजोर इम्यून सिस्टम की समस्या होने के कारण, जो लोग ज्यादा मीठे का सेवन करते है उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ता है, एलर्जी होने पर, आदि ये सब कुछ कारण है जिनके कारण आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ता है, तो आइये आज हम आपको अपने प्राइवेट पार्ट से जुडी इस परेशानी को हल करने के लिए कुछ उपाय बताते है, लेकिन इसके साथ आपको हमेशा अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान रखना चाहिए, ताकि आपको ये परेशानी न हो।

नीम का इस्तेमाल करें:-

नीम में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट आपकी इस समस्या का समाधान करने में मदद करते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप नीम के कुछ पत्ते लें, और उसे एक बर्तन में तीन से चार गिलास पानी लेकर अच्छे से उबाल लें, और जब यह पानी अच्छे से उबल जाएँ, तो आप इसके हल्का गुनगुना होना पर इसका इस्तेमाल अपने प्राइवेट पार्ट के लिए करें, यानी इस पानी से अच्छी तरह अपने प्राइवेट पार्ट को साफ़ करें, और इसे सूखने के लिए छोड़ दें, दिन में दो बार और कुछ दिन इस उपाय को करने से आपको फायदा होगा।

नारियल के तेल का इस्तेमाल करें:-

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नारियल का तेल न केवल आपकी स्किन को कोमल बनाते है, बल्कि आपको खुजली, रैशेस, जलन जैसी समस्या से बचाने में भी मदद करता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक कटोरी में दो से तीन चम्मच नारियल का तेल लें, और उसमे थोड़ा सा कपूर पीस कर अच्छे से मिक्स कर लें, मिक्स करने के बाद इस मिश्रण को अपने प्राइवेट पार्ट पर लगाएं, आप चाहे तो नारियल तेल को हल्का गुनगुना भी कर सकती है, इसके बाद इसे थोड़ी देर के लिए ऐसे ही छोड़ दें, और फिर गुनगुने पानी से अपने प्राइवेट पार्ट को साफ़ करें।

सरसों के तेल का इस्तेमाल करें:-

सरसों के तेल का इस्तेमाल करने से भी आपको रैशेस, व् खुजली की समस्या से बचाव में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप पहले एक कटोरी में सरसों के तेल को डालें, और उसे गुनगुना करें, उसके बाद उसे अच्छे से अपने प्राइवेट पार्ट पर लगाएं, और आप चाहे तो उस पर थोड़ा टेलकम पाउडर भी लगा सकती है, इसका इस्तेमाल करने से आपको जल्दी राहत मिलने में मदद मिलती है, आप चाहे तो इसे रात को लगाकर सो सकते है, और सुबह उठकर गुनगुने पानी से साफ़ कर लें।

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दही का इस्तेमाल करें:-

दही में गुड़ बैक्टेरिया होता है, जो आपके प्राइवेट पार्ट के बैक्टेरिया के संतुलन को बनाएं रखने में भी आपकी मदद करता है, दे का इस्तेमाल प्राइवेट पार्ट के लिए करने से आपको इस समस्या से निजता पाने में मदद मिलती है इसके इस्तेमाल के लिए आप एक रुई का टुकड़ा लें, जो आपके रैशेस को अच्छे से कवर कर लें, उसके बाद इसे अच्छे से दही में डुबो कर रख दें, और अब इसे अपने प्राइवेट पार्ट पर रखें, कम से कम दो घंटे के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दें, और उसके बाद अपने प्राइवेट पार्ट को पानी की मदद से साफ़ कर लें, दिन में दो बार इस उपाय का इस्तेमाल करें, और अपने आहार में भी दही को शामिल करें, परन्तु ध्यान रखें की मीठा दही न खाएं ये आपकी परेशानी को बढ़ा सकता है।

सेब के सिरके का इस्तेमाल करें:-

सेब के सिरके का इस्तेमाल करने से आपको प्राइवेट पार्ट से जुडी परेशानी का समाधान करने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप दो कप पानी में तीन बड़े चम्मच सिरके के मिलाएं, और इसका इस्तेमाल अपने प्राइवेट पार्ट को धोने के लिए करें, उसके बाद आप जब आपकी स्किन सूख जाएँ तो उसे गुनगुने पानी से साफ़ कर लें, दिन में दो बार इस उपाय को करें, लोर यदि आपको असर नहीं हो रहा है तो आप पानी और एप्पल साइडर विनेगर को बराबर मात्रा में लें, और उसे अपने प्राइवेट पार्ट को धोने के लिए इस्तेमाल करें, आपको फायदा मिलेगा।

बोरिक एसिड का इस्तेमाल करें:-

बोरिक एसिड आपके प्राइवेट पार्ट में जलन उत्त्पन्न कर सकता है, परन्तु आपको इस समस्या से राहत दिलवाने में मदद करता है, और गर्भवती महिलाओ को इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, इसके अलावा इसके इस्तेमाल के लिए आप दो कप गरम पानी में एक चम्मच बोरिक एसिड का मिलाएं, और उसे अपने प्राइवेट पार्ट को धोने के लिए इस्तेमाल करें, और जब वह सूख जाएँ तो पानी की मदद से अपने प्राइवेट पार्ट को साफ़ कर लें, ऐसा आप कम से कम दो हफ्ते तक दिन में एक बार करें, आपको जरूर फायदा मिलेगा।

एलोवेरा का इस्तेमाल करें:-

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एलोवेरा में मौजूद एंटी फंगल, एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी इरिटेटिंग, गुण आपको प्राइवेट पार्ट में होने वाली खुजली और रैशेस की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है, साथ ही इसमें मौजूद विटामिन, एंजाइम, एमिनो एसिड होते है, जो आपके लिए फायदेमंद होते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप दो चम्मच एलोवेरा जेल में, एक कप संतरे का रस या फिर एलोवेरा जेल डाल कर मिलाएं, और उसे अपने प्राइवेट पार्ट पर लगाएं, और सूखने के बाद धो दें, इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपको इस समस्या से राहत मिलती है।

डॉक्टर से सलाह लें:-

प्राइवेट पार्ट में किसी भी समस्या को ज्यादा दिनी तक अनदेखा नहीं करना चाहिए, यदि आपको रैशेस के कारण दर्द या उसमे से खून आ रहा है, तो आपको इस बारे में डॉक्टर से खुल कर बात करनी चाहिए, क्योंकि कई बार इसका कारण इन्फेक्शन भी होता है, डॉक्टर आपको इस बारे में राय देगा, और आपको इस परेशानी से बचने के लिए समाधान मिलेगा।

तो ये कुछ उपाय जिनका इस्तेमाल करके आप प्राइवेट पार्ट से जुडी इस परेशानी का समाधान कर सकते है, इसके अलावा आप जब भी बाथरूम में जाते है, तो आपको अपने प्राइवेट पार्ट को अच्छे से धोकर साफ करना चाहिए, और सूखने के बाद कपडे पहनने चाहिए, ताकि प्राइवेट पार्ट का पह बैलेंस सही रहें जिससे किसी तरह के इन्फेक्शन, खुजली, जलन व् रैशेस की समस्या से आपका बचाव हो सकें।

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प्रेगनेंसी में नारियल पानी पीना क्यों जरुरी है?

प्रेगनेंसी के दौरान जितना जरुरी पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना जरुरी होता है उतना ही जरुरी बॉडी में तरल पदार्थ की मात्रा का होना भी जरुरी होता है। और पानी की भरपूर मात्रा के लिए गर्भवती महिला को दिन में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ निम्बू पानी, ताजे फलों का रस, नारियल आदि का सेवन भी कर सकती है। क्योंकि यह सब बॉडी को हाइड्रेटेड रखने के साथ गर्भवती महिला के लिए जरुरी पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं। तो लीजिये आज हम प्रेगनेंसी के दौरान नारियल पानी पीने से क्या होता है, कितनी मात्रा में नारियल पानी का सेवन करना चाहिए, आदि के बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में नारियल पानी पीना चाहिए या नहीं?

जी हाँ, गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान नारियल पानी का सेवन जरूर कर सकती है, क्योंकि इसमें पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को फायदा पहुंचाने में मदद करते हैं। साथ ही इससे गर्भावस्था के दौरान आने वाली परेशानियों से राहत पाने में भी महिला को मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में नारियल पानी पीने के फायदे

क्लोराइड, इलेक्ट्रोलाइट्स, राइबोफ्लेविन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन सी जैसे पोषक तत्वों से भरपूर नारियल पानी का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में नारियल पानी पीने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

एंटीऑक्सीडेंट्स: नारियल पानी में विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करते हैं। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला व् शिशु दोनों को गंभीर बीमारियों व् संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

कैलोरी: कैलोरी की मात्रा कम होने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान यह गर्भवती महिला के वजन को नियंत्रित रखने में मदद करता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की इसे गर्भवती महिला को पोषक तत्व नहीं मिलते हैं, बल्कि नारियल पानी पीने से महिला को पोषक तत्व मिलने के साथ वजन को कण्ट्रोल रखने में मदद मिलती है। क्योंकि गर्भवती महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ना गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए परेशानी का कारण हो सकता है

डाइट्री फाइबर: प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला की पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है। जिसके कारण महिला को कब्ज़, एसिडिटी, सीने में जलन जैसी परेशानी का सामना गर्भवती महिला को करना पड़ सकता है। लेकिन नारियल का पानी पीने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सकती है। क्योंकि नारियल पानी में मौजूद डाइट्री फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं।

इलेक्ट्रोलाइट्स: नारियल पानी में सोडियम, कैल्शियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस, खनिज जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो बॉडी को ऊर्जा से भरपूर रखने, रक्तचाप को नियंत्रित रखने, मांसपेशियों को बेहतर तरीके से काम करने, बॉडी को हाइड्रेटेड रखने में मदद करते हैं। और गर्भावस्था के दौरान महिला की बॉडी में सभी क्रियाओं के बेहतर तरीके से काम करने पर गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

शुगर: नारियल पानी स्वाद में थोड़ा मीठा होता है लेकिन इसके सेवन से बॉडी में ब्लड में शुगर का लेवल कण्ट्रोल रहता है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को गेस्टेशनल डाइबिटीज़ जैसी परेशानी से बचें रहने में मदद मिलती है।

एमनियोटिक फ्लूड: गर्भ में शिशु एमनियोटिक फ्लूड में होता है और प्रेगनेंसी के दौरान नारियल पानी का सेवन करने से गर्भ में एमनियोटिक फ्लूड के स्तर को बेहतर बनाये रखने में मदद मिलती है। जो की शिशु की गर्भ में बेहतर मूवमेंट और शिशु के बेहतर विकास में मदद करता है।

शिशु का विकास: नारियल पानी में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो गर्भ में पल रहे शिशु तक सभी पोषक तत्व को भरपूर मात्रा में पहुंचाने में मदद करते हैं जिससे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करते हैं।

प्रेगनेंसी में नारियल पानी कब और कितना पीना चाहिए?

गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने लगातार कर सकती है क्योंकि यह गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। लेकिन इसका सेवन कितनी मात्रा में करना चाहिए इसका ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि जरुरत से ज्यादा नारियल पानी का सेवन महिला को परेशान कर सकता है, ऐसे में महिला एक गिलास या एक नारियल का पूरा पानी पी सकती है। साथ ही यदि कोई ऐसी महिला है जिसे नारियल पानी अच्छा नहीं लगता है या नारियल पानी पीने से कोई समस्या या एलर्जी की परेशानी होती है उसे नारियल पानी पीने से बचना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान नारियल पानी का सेवन करने के कुछ फायदे और नारियल पानी पीने से जुड़े कुछ टिप्स जो प्रेगनेंसी के दौरान आपके काम आ सकते हैं। तो यदि आप भी गर्भवती है ऐसे में नारियल पानी का सेवन करने से पहले इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

आपके गर्भ में पल रहे शिशु का विकास कैसे होगा जानिए

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प्रेगनेंसी के दौरान हर गर्भवती महिला उत्साहित होती है की गर्भ में पल रहे शिशु का विकास कैसे हो रहा है, हर दिन हर महीने उसमे क्या क्या बदलाव आता है। खासकर जब महिला पहली बार माँ बनती है तो वह बहुत उत्सुक रहती है। जैसे ही उसे पता चलता है की वो प्रेग्नेंट है उसी दिन से उसके मन में गर्भ में पल रहे शिशु को लेकर तरह तरह के सपने बुनने की शुरुआत हो जाती है। अल्ट्रासॉउन्ड के माध्यम से आप गर्भ में शिशु का विकास देख सकते है। लेकिन हर महीने शिशु में क्या क्या बदलाव आते हैं और किस तरह उसका विकास होता है, आइये इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

गर्भ में शिशु का पहला महीना

सबसे पहले गर्भशय की विभाजित कोशिकाएं एक बॉल के रूप में बन कर एक भ्रूण का आकार ले लेती हैं। उसके बाद गर्भनाल और शरीर में अल्पविकसित नाल जो की बच्चे को पोषण और ऑक्सीजन देती है, वो बॉडी में एक्टिव होने लग जाती है। दिल, मस्तिष्क, फेफड़े, रीढ़ की हड्डी, आदि गर्भावस्था के पहले महीने में ही शरीर में विकसित होने लग जाते हैं।

दूसरा महीना

दूसरे महीने में बच्चे के दिल की धड़कन आने लगती है, बच्चे की पाचन तंत्र प्रणाली, मूत्र प्रणाली, आकार लेने लगते है। साथ ही बच्चे के हाथ पैर भी बढ़ने लगते हैं, और बच्चे का चेहरा भी विकसित होने लगता है।

गर्भ में तीसरे महीने में शिशु का विकास

इस महीने में बच्चे के अंग थोड़े और मजबूत होने लगते हैं और कोहनी, घुटने, फेफड़े, आदि स्पष्ट रूप से दिखने लगते हैं। साथ ही इस दौरान बच्चे की आँखों की पलके भी विकसित होने लग जाती है।

चौथा महीना

तीसरे महीने के खत्म होने के बाद आपको अल्ट्रासॉउन्ड करवाना होता है, इस दौरान आप गर्भ में शिशु के विकास को देख सकते हैं। इस समय बच्चे के बाल व नाख़ून का विकास तेजी से होने लगता है साथ ही बच्चे के जोड़ो में मजबूती आने लगती है।

प्रेगनेंसी का पांचवे महीने में शिशु का विकास

पांचवे महीने के आखिर में भी आपको एक अल्ट्रासॉउन्ड करवाना होता हैं और इस समय बच्चे की उंगलियां अच्छे से विकसित होने लगती है, इस दौरान कुछ बच्चे अंगूठा भी चूसने लगते हैं। और इस समय कई बार आप भी गर्भ में बच्चे की हलचल को महसूस कर सकते हैं।

छठे महीने में शिशु का विकास

बच्चे का जबड़ा मजबूत होने लगता है, गर्भ में शिशु के सभी अंग अच्छे से विकसित हो जाते है, बच्चे की दिल की धड़कन तेज होने लगती है। और आप गर्भ में शिशु की हलचल को दिन में कई बार और थोड़ा बेहतर महसूस करने लगती हैं।

सातवे महीने में शिशु का विकास

इस महीने में शिशु का वजन भी तेजी से बढ़ने लगता हैं अब शिशु अच्छे से गर्भ में घूमने लगता है, व तेज आवाज़ होने पर तेजी से हलचल करता है, यानी उसके सुनने की क्षमता में विकास होने लग जाता है। अब वह अपने हाथ पैर को और अच्छे से घुमाने लगता है, और साथ ही आँखे भी खोलने और बंद करने में माहिर हो जाता है।

आठवें महीने में शिशु का विकास

प्रेगनेंसी का यह समय महिला के लिए सबसे खास होता है, क्योंकि इस दौरान शिशु का वजन भी तेजी से बढ़ता है, और बच्चा बहुत ही आसानी से गर्भ में मूव करने लगता है, और इस महीने के खत्म होते होते बच्चा अपनी सही पोजीशन लेना गर्भ में शुरू कर देता है।

नौवें महीने में शिशु का विकास

इस दौरान शिशु गर्भ से बाहर आने के लिए पूरी तरह तैयार होता है, और किसी भी समय उसका जन्म हो सकता है। साथ ही बच्चे का वजन, उसके सभी अंग, मस्तिष्क पूरी तरह से विकसित हो जाते हैं।

तो यह है गर्भ में शिशु का एक से नौ महीने का सफर, जिसमे उसके सभी अंगो का विकास होता है। और गर्भ में शिशु किस तरह से विकसित होकर जन्म लेने के लिए अपने आप को तैयार करता है। गर्भ में शिशु का विकास बेहतर तरीके से हो सके इसके लिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। भरपूर पोषण अपने आप को देना चाहिए जिससे गर्भ में पल रहे शिशु का विकास बेहतर तरीके से होने में आपको मदद मिल सके।

गर्भावस्था में पैरों की ऐंठन दूर करने के उपाय

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प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला बहुत सी शारीरिक समस्याओं से गुजरती है। साथ ही प्रेगनेंसी के समय शारीरिक परेशानियों का होना बहुत ही आम बात होती है। लेकिन हर गर्भवती महिला को एक ही तरह की परेशानी हो ऐसा जरुरी नहीं होता है। यह हर महिला की बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करता है। ऐसे की कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान पैरों में ऐंठन की समस्या हो जाती है, यह समस्या खासकर दूसरी या तीसरी तिमाही में अधिक होती है। और ऐसा होने के कारण महिला को चलने में, सोने में, परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। तो लीजिए आज हम प्रेगनेंसी के दौरान पैरों में होने वाली ऐंठन के क्या कारण होते हैं, और आप किस प्रकार इस समस्या से निजात पा सकते हैं इस बारे में जानते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान पैरों में ऐंठन के कारण

  • वजन बढ़ने के कारण पैरों की नसों पर दबाव अधिक पड़ने लगता है जिसके कारण महिला को यह समस्या हो सकती है।
  • बॉडी में ब्लड फ्लो का बेहतर तरीके से न होना भी इसका एक कारण हो सकता है।
  • यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान पानी का सेवन कम करती है तो बॉडी के हाइड्रेट न रहने के कारण भी ऐसा हो सकता है।
  • प्रेगनेंसी में पैरों में होने वाली ऐंठन का कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी का होना भी हो सकता है।
  • जो महिलाएं यूरिन इन्फेक्शन, ब्लड प्रैशर से सम्बंधित दवाइयों का सेवन करती है उनके भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी के दौरान पैरों की ऐंठन से बचने के उपाय

यदि आप भी प्रेगनेंसी के दौरान पैरों की ऐंठन की समस्या से परेशान हैं तो लीजिए आज हम आपको इस समस्या से बचने के कुछ आसान टिप्स बताने जा रहें हैं जो आपको इस परेशानी से बचाव करने में आपकी मदद करेंगे।

गुनगुना पानी

एक बाल्टी में गुनगुना पानी लेकर उसमे थोड़ा नमक मिलाएं, उसके बाद थोड़ी देर के लिए अपने पैरों को उस पानी में रखें। ऐसा करने से आपके पैरों को आराम मिलता है, जिससे पैरों की ऐंठन की समस्या से तुरंत राहत मिलने में मदद मिलती है।

पानी का भरपूर सेवन

वाटर रीटेनशन के कारण भी प्रेगनेंसी के दौरान पैरों में ऐंठन की समस्या के कारण आपको परेशान होना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को इस समस्या से बचाव करने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ अन्य तरल पदार्थ जैसे नारियल पानी, निम्बू पानी, जूस आदि का भी भरपूर सेवन करना चाहिए।

स्ट्रेच करें

पैरों को स्ट्रेच करें, ऐसा करने से पैरों की नसों को आराम मिलेगा। जिससे आपको पैरों में दर्द, ऐंठन की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।

हल्का व्यायाम या वॉक करें

प्रेगनेंसी के दौरान हल्का व्यायाम करने से, वॉक करने से बॉडी को एनर्जी मिलती है, साथ ही ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर रहने में मदद मिलती है, जिससे बॉडी में हर हिस्से में रक्त का प्रवाह बेहतर तरीके से होता है। जिससे आपको इस परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।

मसाज

गुनगुने तेल का इस्तेमाल करके अच्छे से पैरों की मसाज करें, इससे भी ब्लड फ्लो बेहतर होगा, साथ ही आपको भी आराम महसूस होगा जिससे प्रेगनेंसी के दौरान आपको पैरों की ऐंठन से आराम मिलेगा। और मसाज के लिए आप किसी भी तेल का इस्तेमाल कर सकती है।

ज्यादा देर एक ही पोजीशन में ना रहे

एक ही जगह पर अधिक देर तक बैठे रहना, खड़े रहना, या लेटे रहना प्रेगनेंसी के दौरान आपकी
पैरों से जुडी परेशानी का कारण हो सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान इस परेशानी से बचने के लिए आपको एक ही पोजीशन में नहीं रहना चाहिए।

पोषक तत्वों का सेवन

पोषक तत्वों की कमी होने के कारण भी आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान इस परेशानी से बचाव करना चाहती हैं तो आपको पोषक तत्वों का सेवन बरपुर मात्रा में करना चाहिए।

पैरों में ऐंठन होने पर डॉक्टर से कब मिलें

  • पैरों में बहुत ज्यादा दर्द का अहसास होने पर।
  • पैरों में ऐंठन के साथ हाथों, मुँह पर अधिक सूजन होने के कारण।

तो यह हैं कुछ उपाय जिनकी मदद से आप प्रेगनेंसी के दौरान पैरों में ऐंठन की समस्या से निजात पा सकते हैं। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा होना आम बात होती है, ऐसे में आपको इससे घबराना नहीं चाहिए। साथ ही आपको कभी भी ज्यादा दिक्कत हो या असहज महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

गर्भवती महिला को गर्म पानी से नहाना सेफ है?

गर्भवती महिला को गर्म पानी से नहाना सेफ है, गर्भावस्था में महिला को गर्म पानी से नहाने के नुकसान, प्रेगनेंसी में महिला को हॉट वॉटर बाथ क्यों नहीं लेना चाहिए

प्रेगनेंसी का हर पल महिला के लिए बहुत ही खुशनुमा पल होता है, और महिला इस दौरान अपनी सेहत का और भी बेहतर तरीके से ध्यान रखती है। चाहे फिर वो उसका खान पान हो, या उठना बैठना, क्योंकि गर्भवती महिला द्वारा की गई कोई भी लापरवाही शिशु पर बुरा असर डाल सकती है। ऐसे में महिला अपनी सेहत के साथ किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करती है। इस दौरान महिला को एक बात का और ध्यान रखना चाहिए की नहाने के लिए महिला को गरम पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि यह शिशु पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कोशिश करनी चाहिए की जितना हो सके ठन्डे पानी से ही नहाना चाहिए। या आप नार्मल तापमान पर पानी को मिक्स करके भी उसे नहा सकते हैं, लेकिन ज्यादा गर्म पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की गर्म पानी से गर्भवती महिला को नहाने पर क्या क्या नुकसान हो सकते हैं।

गर्भपात

यदि प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में महिला नहाने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करती है तो इसके कारण बॉडी का तापमान बढ़ जाता है और गर्भाशय में संकुचन होता है। जिसके कारण महिला का गर्भ गिर सकता है।

रक्तचाप को प्रभावित करता है

गर्म पानी से नहाने के कारण बॉडी में ब्लड फ्लो धीरे होने लगता है जिसके कारण शिशु तक पोषक तत्व व् ऑक्सीजन कम पहुँचती है और उसके विकास पर असर पड़ता है, साथ ही हदय गति भी बढ़ जाती है जिसके कारण महिला परेशानी अनुभव कर सकती है।

शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ता है

गर्म पानी का इस्तेमाल यदि गर्भवती महिला नहाने के लिए करती है तो इसके कारण हाइपरथर्मिया होने की सम्भावना बढ़ जाती है। और इस समस्या होने के कारण शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ता है, साथ ही पहली तिमाही में ऐसा करने के कारण शिशु की रीढ़ की हड्डी बुरा असर पड़ता है और मानसिक विकास भी धीमा हो जाता है।

महिला कमजोर होती है

प्रेगनेंसी के दौरान गर्म पानी से नहाने के कारण बॉडी का तापमान बढ़ता है जिसके कारण महिला को कमजोरी व् मितली होने जैसी परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को गर्म पानी से नहाने के कारण हो सकती है। ऐसे में महिला को कोशिश करनी चाहिए। की प्रेगनेंसी के दौरान महिला नहाने के लिए ज्यादा गर्म पानी का इस्तेमाल न करें। और जितना हो सके ठन्डे या ताजे पानी से ही नहाए।

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क्या गर्भवती महिला का गर्म पानी से नहाना सेफ है?

प्रेगनेंसी के चौथे महीने से यह 10 चीजें गर्भवती महिला जरूर खाएं

गर्भावस्था का चौथा महीना प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही का पहला महीना होता है। और प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही को प्रेगनेंसी का हैप्पी पीरियड भी कहा जाता है। क्योंकि इस समय महिला की शारीरिक परेशानियां थोड़ी कम होने लगती है, महिला शरीर में होने वाले बदलाव को समझने लगती है, बच्चे के विकास को लेकर महिला एक्टिव हो जाती है, आदि। और इस समय गर्भ में बच्चे के अंगो की आकृतियां बनने के बाद बच्चे का शारीरिक व् मानसिक रूप से विकास बढ़ने लगता है।

और शिशु गर्भ में थोड़ा एक्टिव होने लगता है। ऐसे में बच्चे का विकास अच्छे से हो और गर्भवती महिला को भी फिट रहने में मदद मिल सके, प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स कम हो। इसके लिए जरुरी है की गर्भवती महिला भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों से युक्त आहार का सेवन करें। तो आइये अब जानते हैं की ऐसे कौन से आहार हैं जिनका सेवन प्रेगनेंसी के चौथे महीने में महिला को जरूर करना चाहिए।

दूध व् दूध से बने पदार्थ

कैल्शियम, प्रोटीन, वसा व् अन्य मिनरल्स से भरपूर दूध व् दूध से बने पदार्थों का सेवन गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के चौथे महीने में भरपूर करना चाहिए। क्योंकि इससे महिला को भरपूर पोषण मिलने के साथ बच्चे की हड्डियों, कोशिकाओं के बेहतर विकास को बढ़ावा मिलने में मदद मिलती है। ऐसे में एक दिन में दो से तीन गिलास दूध (मलाई वाले और कच्चे दूध का सेवन नहीं करें), दही, आदि का सेवन प्रेग्नेंट महिला जरूर करें।

नॉन वेज

चौथे महीने की शुरुआत से ही प्रेग्नेंट महिला यदि नॉन वेज जैसे की मछली, चिकन आदि खा लेती है तो उसका सेवन जरूर करें। क्योंकि इसमें आयरन, प्रोटीन के साथ अन्य पोषक भी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। यदि गर्भवती महिला नॉन वेज खाती है तो इससे माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें की कच्चा या आधा पका हुआ, बेकार से जगह से लिया हुआ, बासी व् ठंडा नॉन वेज न खाएं क्योंकि इसके कारण गर्भवती महिला को डायरिया, इन्फेक्शन, पेट में दर्द जैसी परेशानियां हो सकती है।

अंडे

अंडे का सेवन भी प्रेगनेंसी के चौथे महीने से महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि अंडे में प्रोटीन, वसा, choline जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो बच्चे के शारीरिक के साथ दिमागी विकास को भी बेहतर करने में मदद करते हैं। और अंडे के भरपूर फायदे के लिए सुबह नाश्ते में दो उबले हुए अंडो का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है। लेकिन अंडे का सेवन करते हुए ध्यान रखें की कच्चे अंडो का सेवन न करें क्योंकि इसके कारण डायरिया, पेट में दर्द, माँ व् बच्चे दोनों को संक्रमण होने का खतरा आदि परेशानियां हो सकती है।

हरी सब्जियां

आयरन, पोटैशियम, फाइबर, विटामिन्स से भरपूर हरी सब्जियों का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि हरी सब्जियों का सेवन करने से गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के लिए पोषक तत्व मिलने के साथ बच्चे के विकास के लिए जरुरी पोषक तत्व भी मिलते हैं। हरी सब्जियों के अलावा बीन्स, गाजर, चुंकदर, आदि का सेवन भी जरूर करें। लेकिन ध्यान रखें की किसी भी सब्ज़ी को खाने में प्रयोग करने से पहले उसे अच्छे से धोएं उसके बाद ही खाने के लिए इस्तेमाल करें।

सूखे मेवे

बादाम, अखरोट, व् अन्य सूखे मेवे भी गर्भावस्था के चौथे महीने में प्रेग्नेंट महिला को जरूर खाने चाहिए। क्योंकि सूखे मेवों का सेवन करने से ओमेगा-3 फैटी एसिड, आयरन, विटामिन्स व् अन्य मिनरल्स भरपूर मात्रा में मिलते हैं। साथ ही ओमेगा-3 फैटी एसिड गर्भ में बच्चे के शारीरिक विकास को बेहतर करने के साथ बच्चे के दिमागी विकास को बढ़ाने में भी मदद करते हैं। इसके अलावा यदि प्रेग्नेंट महिला दूध के साथ ड्राई फ्रूट्स का सेवन करती है तो इसका फायदा दुगुना बढ़ जाता है।

फल

संतरा, आंवला, मौसमी, सेब, अनार, केला आदि फलों का सेवन प्रेगनेंसी के चौथे महीने में जरूर करना चाहिए। क्योंकि यह फल विटामिन सी, फाइबर, आयरन, आदि के बेहतरीन स्त्रोत होते हैं। और यह पोषक तत्व गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद करते हैं साथ ही बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं।

दालें

दालों का सेवन भी प्रेगनेंसी के चौथे महीने में भरपूर मात्रा में प्रेग्नेंट महिला को करना चाहिए। क्योंकि दालें प्रोटीन व् फाइबर के अलावा और भी पोषक तत्वों से भरपूर होती है। जो प्रेग्नेंट महिला को फिट रखने के साथ बच्चे की कोशिकाओं के बेहतर विकास में मदद करती है जिससे बच्चे के शारीरिक व् दिमागी विकास को बेहतर करने में मदद मिलती है। खासकर चना, राजमा, मूंग दाल आदि का सेवन तो जरूर करना चाहिए।

सलाद

प्रेगनेंसी के चौथे महीने में महिला स्नैक्स के तौर पर फ्रूट चाट या सलाद का सेवन भी कर सकती है। क्योंकि यह खाने में हल्का होता है जिसे महिला को पचाने में परेशानी नहीं होती हैं, साथ ही यह पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है, और महिला अपनी पसंद के फलों को इसमें शामिल भी कर सकती है। इसीलिए गर्भवती महिला को चौथे महीने में सलाह या फ्रूट चाट का सेवन भी जरूर करना चाहिए।

देसी घी

प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के चौथे महीने से रोटी पर लगाकर, थोड़ा सा दाल आदि में डालकर देसी घी भी जरूर खाना चाहिए। खासकर जिन महिलाओं का वजन कम होता है उन्हें तो जरूर करना चाहिए। देसी घी में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो प्रेग्नेंट महिला के वजन को सही रखने में मदद करते हैं, लेकिन ध्यान रखें की यदि आपका वजन सही या पहले से ही ज्यादा तो देसी घी का सेवन न करें साथ ही यदि आपको ब्लड प्रैशर बढ़ने की समस्या है तो भी देसी घी न खाएं।

तरल पदार्थ

खाने के साथ महिला को बॉडी को हाइड्रेट रखने के लिए तरल पदार्थों का सेवन भी प्रेगनेंसी के चौथे महीने में भरपूर करना चाहिए। क्योंकि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पानी की कमी महिला व् बच्चे दोनों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। ऐसे में शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए महिला को आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ फलों के रस, नारियल पानी, दूध, निम्बू पानी, शरबत, आदि का सेवन भी जरूर करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ आहार जिनका सेवन प्रेगनेंसी के चौथे महीने में महिला को जरूर करना चाहिए। इसके अलावा महिला को डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का सेवन, सभी तरह की जांच आदि समय से करवानी चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली किसी भी कॉम्प्लीकेशन्स से बचे रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में इसबगोल पीने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन हर समस्या से निजात पाने के लिए महिला दवाई का सेवन नहीं कर सकती है। क्योंकि डॉक्टर के बिना परामर्श के किसी भी दवाई का सेवन करना गर्भवती महिला की सेहत के साथ बच्चे के विकास पर भी बुरा असर डाल सकता है।

ऐसे में गर्भवती महिला इन परेशानियों से निजात पाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल कर सकती है। जो की प्रेगनेंसी के दौरान माँ या बच्चे दोनों पर किसी भी तरह का नकारात्मक असर न डालें। तो आज इस आर्टिकल में हम एक घरेलू नुस्खे के बारे में बताने जा रहे हैं जो है इसबगोल और प्रेगनेंसी के दौरान इसबगोल पीने से गर्भवती महिला को क्या फायदे मिलते हैं आइये अब जानते हैं।

कब्ज़ से निजात

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को पाचन तंत्र से जुडी परेशानियां होती रहती है। खासकर कब्ज़, गैस जैसी परेशानियां तो अधिक होती है। ऐसे में इसबगोल का सेवन करना गर्भवती महिला के लिए बड़ा फायदेमंद होता हैं। इसके लिए प्रेग्नेंट महिला रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने पानी या दूध में एक से डेढ़ चम्मच इसबगोल को मिलाएं और उसका सेवन करें। ऐसा करने से सुबह महिला को फ्रेश होने में आसानी होगी साथ ही कब्ज़ व् गैस जैसी परेशानी भी दूर होगी। गर्भवती महिला को जब भी कब्ज़ की दिक्कत अधिक हो तो गर्भवती महिला को इसबगोल का सेवन जरूर करना चाहिए।

पेट में गर्मी को कम करता है

प्रेग्नेंट महिला यदि कभी कभार ज्यादा मसालेदार या चटपटा खा लेती है तो इसके कारण पेट में गर्मी बढ़ जाती है जिसके कारण महिला को दिक्कत हो सकती है। ऐसे में इसबगोल का सेवन करने से पेट को ठंडा रहने में मदद मिलती है साथ ही मसालेदार खाने के कारण होने वाली अन्य परेशानियों को दूर करने में भी मदद मिलती है।

बवासीर से निजात

कब्ज़ की समस्या होने के कारण, वजन बढ़ने के कारण पेट के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है जिसके कारण मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ता है। और कुछ महिलाएं इस कारण प्रेगनेंसी के दौरान बवासीर जैसी परेशानी का सामना कर सकती है। यदि किसी महिला को यह परेशानी होती है तो इसबगोल खाने से इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में इसबगोल कैसे खाएं?

गर्भवती महिला एक गिलास गुनगुने पानी में एक या दो चम्मच इसबगोल मिलाकर इसका सेवन कर सकती है। साथ ही एक गिलास गुनगुने दूध में डालकर या एक कटोरी दही में डालकर भी इसबगोल का सेवन किया जा सकता है। दही या दूध में डालने के बाद यदि महिला को उसका स्वाद अच्छा नहीं लगता है तो महिला चीनी डालकर भी इसका सेवन कर सकती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जी इसबगोल का सेवन करने से गर्भवती महिला को मिलते हैं। तो यदि आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ आदि की परेशानी अधिक रहती है तो आप भी इसबगोल का सेवन कर सकती है।

क्या रोजाना बाल धोना सही होता है?

बालों की ख़ूबसूरती को बनाएं रखने के लिए उसकी साफ़ सफाई बहुत जरुरी होती है। इसीलिए महिला हो या पुरुष अच्छे से अच्छे शैम्पू का इस्तेमाल बालों को धोने के लिए करते हैं। इससे न केवल बालों से आयल निकलता है, बल्कि बालों में होने वाली गंदगी भी साफ़ हो जाती है। लेकिन कई बार कुछ लोग नियमित बालों को धोने के लिए शैम्पू का इस्तेमाल करने लगते हैं। ऐसे में वो अपने बालों को फायदा नहीं पहुंचा रहे होते है, बल्कि उनका नुकसान कर रहे होते हैं। क्योंकि आज कल मार्किट में जितने अच्छे शैम्पू का आप इस्तेमाल करते है उसमे केमिकल की मात्रा उतनी ही ज्यादा होती है।

और जितना आप इस केमिकल को सिर पर ज्यादा लगाते है उतने ही बाल रूखे सूखे होने लगते है। स्टाइलिस्ट भी मानते है की बालों को नियमित नहीं धोना चाहिए, बालों को धोने की जरुरत तब होती है जब आपके बालों में आपको ऐसा लगे की तेल आ रहा है। इसके अलावा आपके बालों की टाइप को देखने के बाद ही आपको शैम्पू का चुनाव करना चाहिए। और यदि आप बालों की अच्छे से केयर करना चाहते है तो इन्हे नियमित धोएं नहीं बल्कि इन्हे अच्छे से पोषित करें और हफ्ते में तीन या चार बार बालों को धोएं तो आइये अब हम आपको विस्तार से बताते हैं की बालों को नियमित धोना सही होता है या नहीं।

बालों को नियमित धोना सही होता है या नहीं:-

हेयर स्टाइलिस्ट मानते है की बाल भी एक तरह का फाइबर होता है, जैसे की वूल फाइबर आप जितना इसे धोते हैं यह उतनी की अपनी प्राकृतिक चमक को खो देता है, और डल पड़ने लगते हैं। यदि आपके बाल साफ़ है तो आपको इन्हे धोने की जरुरत ही नहीं होती है। क्योंकि ज्यादा बाल धोने से न केवल आपके बालों को नुकसान होता है। बल्कि यह जड़ से कमजोर होने लगते है जिससे बालों के टूटने व् झड़ने की समस्या भी शुरू हो जाती है। इसके अलावा बालों की प्राकृतिक चमक और कोमलता भी धीरे धीरे कम हो जाती है। जिसके कारण बाल रूखे सूखे और बेजान हो जाते है। इसीलिए आपको रोजाना बालों नहीं धोना चाहिए।

हफ्ते में कितने बार बालों को धोना चाहिए:-

यदि आपको ऐसा लगता है की आपके स्कैल्प से ऑयल ज्यादा निकलता है तो आप अपने बालों को एक दिन छोड़ कर धो सकते हैं, नहीं तो हफ्ते में दो या तीन बार ही अपने बालों को धोना चाहिए। इससे आपके बालों को साफ रहने में मदद मिलती है। साथ ही इससे बालों को की चमक भी बरकरार रहती है, और बालों ज्यादा नुकसान भी नहीं होता है। इसके अलावा आपको बालों को धोने के लिए सही तरीके का इस्तेमाल भी करना चाहिए, क्योंकि यदि आप गलत तरीके से बालों को धोते हैं तो इससे भी आपके बालों को नुकसान होता है।

ज्यादा बाल धोने से होने वाले नुकसान:-

  • बाल जड़ से कमजोर होने लगते है।
  • इससे बालों की ग्रोथ कम होती है।
  • बालों के झड़ने व् टूटने की समस्या शुरू हो जाती है।
  • ज्यादा बालों को धोने से बाल अपनी प्राकृतिक चमक को खोने लगते है।
  • बाल रूखे सूखे व् बेजान होने लगते है।

तो आपको अपने बालों का अच्छे से ध्यान रखने के लिए अच्छे शैम्पू का इस्तेमाल करना चाहिए, साथ ही नियमित बालों को नहीं धोना चाहिए। क्योंकि बालों की ख़ूबसूरती बरकरार रहने के साथ आपकी ख़ूबसूरती को भी बरकरार रहने में मदद मिलती है। इसीलिए आपको अपने बालों की केयर के साथ बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

गर्भवती महिला को मूंगफली खाने के फायदे

गर्भवती महिला को मूंगफली खाने के फायदे, प्रेगनेंसी में मूंगफली खाने के फायदे, गर्भवती महिला को मूंगफली खाने से मिलते हैं यह लाभ, मूंगफली खाने के फायदे, Benefits of eating Groundnut during Pregnancy

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिसमे की भरपूर मात्रा में पोषक तत्व शामिल हो। और इसके अलावा मेवे, फल, जूस आदि खाने पीने की सलाह भी दी जाती है, ताकि महिला को प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहने में मदद मिल सके। तो आज हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान मूंगफली खाने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं इस बारे में बताने जा रहें हैं। लेकिन गर्भवती महिला को यदि मूंगफली खाने से किसी तरह की एलर्जी हो या खाने के बाद कुछ अजीब सा महसूस हो तो गलती से भी मूंगफली का सेवन नहीं करना चाहिए। और एक बार डॉक्टर को भी जरूर दिखाना चाहिए। लेकिन यदि गर्भवती महिला को इसके सेवन से किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होती है तो आप इसका सेवन कर सकती हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को मूंगफली का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

पोषक तत्वों से होती है भरपूर

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पोषक तत्वों से भरपूर चीजें खाने की सलाह दी जाती है है, और मूंगफली में प्रोटीन, फोलेट, फाइबर, फोलिक एसिड आदि भरपूर मात्रा में होते हैं। जो की महिला को स्वस्थ रखने के साथ शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है

गर्भवती महिला की बॉडी में यदि कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाये तो इसके कारण महिला को बहुत परेशानी हो सकती है। ऐसे में मूंगफली का सेवन करने से गर्भवती महिला का कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

खून की कमी नहीं होती

प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी होने के कारण गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही इससे शिशु के विकास पर भी असर पड़ता है, और मूंगफली का सेवन करने से आपको इस परेशानी से निजता मिलता है क्योंकि इसका सेवन करने से आपको खून की कमी नहीं होती है।

तनाव से राहत

मूंगफली का सेवन करने से महिला को तनाव जैसी समस्या से भी निजात मिलता है, क्योंकि इसमें मौजूद पोषक तत्व महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानी से बचाते हैं। जिससे महिला को स्वस्थ रहने और मानसिक रूप से फिट रहने में मदद मिलती है।

बेहतर नींद

जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान नींद न आने की परेशानी होती है उनके लिए भी मूंगफली का सेवन बहुत ही फायदेमंद होता है। क्योंकि मूंगफली का सेवन करने से महिला को बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।

मेटाबोलिज्म बेहतर होता है

फाइबर से भरपूर मूंगफली का सेवन करने से गर्भवती महिलाओं को पाचन क्रिया से सम्बंधित समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है। क्योंकि यह शरीर में मौजूद विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद करती है, इसीलिए गर्भवती महिला को इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

हड्डियां मजबूत होती है

कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर होने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला की हड्डियों की मजबूती को बनाए रखने के साथ, शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मूंगफली खाने से फायदा मिलता है।

तो यह हैं कुछ खास फायदे जो गर्भवती महिला को मूंगफली का सेवन करने से मिलते हैं। और यदि मूंगफली आदि खाने से आपको खांसी जैसी कोई समस्या होती है तो भी आपको इसका सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि खांसी अधिक होने के कारण भी पेट पर जोर पड़ता है जिसके कारण पेट पर खिंचाव महसूस हो सकता है।

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गर्भावस्था में मूंगफली खाने के फायदे, गर्भवती महिलाओं को मूंगफली क्यों खानी चाहिए?