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पेशाब में बदबू आने के क्या कारण होते है?

Causes of Smell In Urine

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मनुष्य शरीर की प्रक्रिया बहुत ही अजीब ढंग से कार्य करती है जिसके मुताबिक अच्छे और स्वस्थ तत्व को शरीर के अंदर ब्लड बन जाते है जबकि विषैले और दूषित पदार्थ पसीना और मूत्र बनकर शरीर से बाहर आ जाते है। इसीलिए जब भी हम बाथरूम जाते है तो पेशाब से हलकी सी बदबू आती है।

वैसे तो ये बदबू शरीर के टॉक्सिन्स के बाहर आने पर आती है हो की बिलकुल सामान्य है। परन्तु जब पेशाब से अजीब सी बदबू आने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह कोई आम बात नहीं बल्कि शरीर में पल रही किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। इसीलिए आज हम आपको इन सभी बीमारियों और कारणों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी वजह से पेशाब में अजीब तरह की बदबू आती है।

पेशाब में बदबू आने के कारण :-

1. डिहाइड्रेशन :पेशाब में बदबू आने

शरीर को सुचारु रूप से चलाने के लिए पानी बहुत जरुरी होता है। क्योंकि शरीर के हर भाग में पानी होता है फिर चाहे वो हड्डियां ही क्यों न हो। इसीलिए हम्मे नियमित रूप से एक दिन में 10 से 12 ग्लास पानी पीने की सलाह दी जाती है। जिसे आप अपणी जरूरत के अनुसार घटा या बढ़ा भी सकते है। आप अपनी शरीर की जरूरत के अनुसार पानी पी रहे है या नहीं इसकी पहचान आप अपने पेशाब के रंग से लगा सकते है। अगर आपके पेशाब का रंग सामान्य है तो आप पानी की सही मात्रा का सेवन कर रहे है। लेकिन अगर पेशाब का रंग पीला है और उसमे से बदबू भी आ रही है तो समझ लें की आपके शरीर के अंदर पानी की कमी है।

2. यूटीआई :

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन एक ऐसी बीमारी है जिसके कारण महिलाओं के पेशाब से अजीब तरह की बदबू आने लगती है। दरअसल यह एक संक्रमण है जो महिलाओं की पेशाब की थैली में होता है। इसीलिए अगर आपके पेशाब से बदबू आ रही है तो डॉक्टर से मिलें और जाँच करवाएं।

3. डायबिटीज :

मधुमेह आज के समय की एक ऐसी बीमारी है जो हर किसी को हो रही है और अगर यह एक बार हो जाए तो जीवनभर पीछा नहीं छोड़ती। मधुमेह की समस्या खून में शुगर की मात्रा अधिक होने के कारण होती है। और मधुमेह का एक लक्षण ये भी है। किडनी से जब अधिक मात्रा में शुगर का स्त्राव होने लगता है तब एक अजीब से बदबू आने लगती है। समझ लें की यह मधुमेह की समस्या का कारण है और इसका तुरंत इलाज करवाएं।

4. कुछ खाद्य पदार्थ :

बिमारियों के अलावा कुछ खाद्य पदार्थ भी ऐसे है जिनका सेवन करने से पेशाब में बदबू आने लगती है। अधिक मसालेदार खाना, खाने में प्याज, लहसुन आदि का इस्तेमाल करने से भी पेशाब में तेज बदबू आने लगती है। अगर आप अल्कोहल का सेवन करती है तो इसकी दुर्गन्ध भी आपके पेशाब से आएगी।

5. अनुवांशिक बीमारी :

कुछ बीमारियां ऐसी होती है जो परिवार से मिलती है, फिर चाहे आप कितना ही बचाव क्यों न कर लें वे आपको घेर ही लेती है। महिलाओं में भी ऐसी एक समस्या होती है – ट्राइमेथीलेमिनुरिया। इस बीमारी में आप कितनी ही सफाई क्यों न रख लें, खान पान का ध्यान क्यों न रखें लेकिन आपके पेशाब से बदबू आएगी ही। कई बार इसके कारण माहवारी भी अनियमित हो जाती है।

6. सफाई :

अगर आप अपने गुप्तांगों की सफाई पर ठीक तरह से ध्यान नहीं दे रही है तो सावधान! क्योंकि सफाई न करने से बहुत से संक्रमण हो सकते है जो आगे चलकर गंभीर समस्या का कारण बन सकते है। इसके अतिरिक्त अगर आपने समय रहते इसपर ध्यान नहीं दिया तो इसके कारण ओवेरियन कैंसर भी हो सकता है।

7. गर्भवती :

गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में यानी गर्भधारण के कुछ दिनों बाद महिला को इस बात का पता नहीं चल पाता की वह गर्भवती है। वैसे जानकारी के लिए बता दें की गर्भावस्था के लक्षण यूरिन के जरिए पता लगाएं जा सकते है। अगर आपके पेशाब से अजीब तरह की बदबू आने लगी है तो किट से जाँच लें की कहीं आप गर्भवती तो नहीं है?

8. यौन संक्रमण :

STD यानि यौन संक्रामक बीमारियां बहुत ही खतरनाक और जानलेवा हो सकती है। अगर इसका निदान आपके अंदर नहीं हुआ है तो आपके पेशाब से बदबू आ रही है तो समझ की आपको यौन संक्रमण हो सकता है। क्लैमाइडिया, यौन संक्रमित बिमारी का एक ऐसा प्रकार है जिसके कारण यूरिन से बदबू आने लगती है। इसके अतिरिक्त पेशाब से बदबू आने के और बभी कई लक्षण हो सकते है। ऐसे में डॉक्टर से मिलकर बात करना ठीक रहेगा।

ये खाने के बाद दूध कभी भी न पियें

दूध पीना स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होता है। लेकिन क्या आप जानते है की कुछ खाद्य पदार्थ है जिनका सेवन करने के बाद दूध पीने से हमारे स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुँचता है। लेकिन सभी को उन खाद्य पदार्थों के बारे में पता नहीं होता। इसलिए आज हम आपको ये बताने जा रहे है की किन खाद्य पदार्थों के बाद दूध का सेवन नही करना चाहिए।

हम दिनभर में न जाने कितनी ही चीजों का सेवन करते है जिनमे से कुछ हमारे लिए बहुत लाभकारी होती है। इसके अलावा कुछ चीजें ऐसी है जिन्हें डेली नीड भी कहा जा सकता है। इन्ही में से एक है दूध। दूध का सेवन हमारे स्वास्थ्य के कितना लाभकारी है ये बताने की जरुरत नहीं। क्योंकि इसको पीने से ताकत तो मिलती ही है साथ-साथ ये हमें कई बिमारियों से बचाने में भी मदद करता है।

पोषक तत्वों से भुरपुर यह तरल हमारी हड्डियों को मजबूत करके उन्हें शक्ति प्रदान करता है। इतना ही नहीं दूध पीने से दिमाग भी तेज होता है। इसीलिए हर घर में बच्चा हो या बड़ा सभी रोजाना एक गिलास का दूध का सेवन जरुर करते है। भूख मिटाने के साथ-साथ मोटापे को नियंत्रित करने का भी ये सबसे उत्तम मार्ग है।

दूध पीने से सेहत और त्वचा में आने वाले बदलावों के बारे में तो हम सभी जानते है लेकिन गर्म दूध पीने से होने वाले वाले फ़ायदों के बारे में बहुत कम लोग जानते है। दूध पीना अच्छा है लेकिन इसे पीने का एक निश्चित समय होता है। परन्तु अगर इसे सही समय पर न पीया जाए तो ये आपके स्वास्थ्य के बिगड़ने का कारण भी बन सकता है। पहले के समय की तो कही नहीं जा सकती लेकिन आजकल के समय में बहुत ही कम लोग ऐसे होंगे जिन्हें इस बारे में पता होगा की दूध पीने का सही समय क्या होता है।ये खाने के बाद दूध कभी

इसी प्रकार हम दूध के साथ या उससे पहले या उसके बाद किन चीजों का सेवन कर रहे है ये भी काफी महत्त्व रखता है। क्योंकि अगर गलत चीजों के साथ दूध का सेवन किया जाए तो ये हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकते है। इसीलिए आज हम आपको कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे है जिनको कभी भी दूध के साथ या उसे पीने से पहले नहीं लेना चाहिए। ताकि इससे होने वाली परेशानियों से बचा जा सके। तो देर किस बात की! आइए जानते है की किन खाद्य पदार्थों के साथ दूध का सेवन नहीं करना चाहिए।

इन चीजों के बाद कभी न करें दूध का सेवन :- 

✓  उड़द की डाल खाने के बाद या उसके साथ कभी भी दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे स्वास्थ्य संबंधी बीमारियाँ हो सकती है।

 दूध को कभी भी तिल के साथ या उसके बाद नहीं पीना चाहिए।

 कभी भी दूध को नींबू के बाद या उसके साथ नहीं लेना चाहिए। इससे सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

 यदि आपने खाने के साथ दही का सेवन किया है तो उसके रात में दूध का सेवन कभी न करें। इन दोनों को हमेशा अलग-अलग समय पर ही करें।

 मूली, जामुन, मछली आदि का सेवन करने के बाद भी दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे त्वचा संबंधी बीमारियाँ हो सकती है।

 करेले या नमक के साथ दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। ये आपको लाभ पहुँचाने की बजाय नुकसान देगा। जिससे आपको स्वास्थ्य संबंधी बीमारियाँ हो सकती है।milk

 बहुत ज्यादा ठंडा या बहुत ज्यादा गर्म दूध नहीं पीना चाहिए।

 दूध को हमेशा अकेले ही पीना चाहिए। क्योकि अगर आप इसमें चीनी मिलाते है तो आपको कफ की शिकायत हो सकती है। चीनी की बजाय आप शहद या मुन्नके का इस्तेमाल कर सकते है।

 दूध के साथ कभी भी तला-भुना खाने का सेवन नहीं करना चाहिए।

 नमक वाली चीजें जैसे नमकीन आदि को भी दूध के साथ नहीं खाना चाहिए ऐसा करने से आपको त्वचा रोग हो सकता है।

 कभी भी मांसाहारी भोजन के बाद या उससे पहले दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। ये शरीर को बुरी तरह से प्रभावित करते है।

इस तरह से कर सकते है दूध का सेवन :- 

1. रात में बिना चीनी का दूध पियें। आप चाहे तो उसमें 1- 2 चम्मच गाय का घी डाल सकते है।
2. ताजा, जैविक और बिना हार्मोन की मिलावट वाला दूध सबसे अच्‍छा होता है।
3. दूध को गर्म करके या उबाल कर ही पियें। अगर दूध पीने में भारी लगे तो उसे उसमें थोड़ा पानी मिला कर उबाल लें।
4. दूध में एक चुटकी अदरक, लौंग, इलायची, केसर, दालचीनी और जायफल आदि मिलाएं। इससे आपके पेट में गर्मी बढ़ेगी जिससे दूध हजम होने में आसानी होगी।
5. बेहतर होगा देशी गाय के दूध का ही सेवन करें।
6. यदि आप डिनर नहीं करना चाहते तो रात को एक चुटकी जायफल और केसर डाल कर दूध पियें। इससे नींद भी अच्‍छी आती है।

गर्भवती महिला को तरबूज, खरबूजा खाना चाहिए या नहीं

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प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अपने आहार का बेहतर तरीके से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। क्योंकि जितना महिला अपने आहार का बेहतर तरीके से ध्यान रखती है उतना ही महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। साथ ही गर्भवती महिला कई बार कुछ खाने की चीजों को लेकर चिंतित भी रहती है की गर्भवती महिला को वो चीजे खानी चाहिए या नहीं। जैसे की तरबूज, खरबूजा, आदि, तो आज हम आपको इसी बारे में कुछ टिप्स बताने जा रहें हैं की गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान तरबूज या खरबूजा खाना चाहिए या नहीं, और इसे खाने के क्या फायदे होते हैं और क्या नुकसान होते हैं।

प्रेगनेंसी में तरबूज व् खरबूजा खाना चाहिए या नहीं

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान खरबूजा व् तरबूज का सेवन जरूर करना चाहिए, क्योंकि यह पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। जो न केवल गर्भवती महिला बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होते हैं। लेकिन इनका फायदा आपको तभी मिलता है जब आप इनका पर्याप्त मात्रा में सेवन करते हैं क्योंकि आवश्यकता से अधिक यदि किसी भी चीज का सेवन किया जाये तो वह आपके लिए नुकसानदायक ही होती है।

प्रेगनेंसी में खरबूजा व् तरबूज खाने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है, ऐसे में आज हम आपको पोषक तत्वों से भरपूर खरबूजा और तरबूज खाने से प्रेगनेंसी के दौरान कौन कौन से फायदे मिलते हैं इस बारे में बताने जा रहे हैं।

डिहाइड्रेशन की समस्या से बचाते हैं

तरबूज व् खरबूजा दोनों में ही पानी की मात्रा पर्याप्त होती है, जिसके कारण यह आपको डिहाइड्रेशन की समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान सुरक्षित रखते है। और तरबूज में तो पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है। और बॉडी में पर्याप्त पानी का होना शिशु के बेहतर विकास के लिए भी बहुत जरुरी होता है।

मॉर्निंग सिकनेस से बचाव होता है

ज्यादातर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से परेशान रहती है। ऐसे में तरबूज का जूस यदि महिला सुबह पीती है तो गर्भवती महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है, आप चाहे तो इसे अपने नाश्ते में भी शामिल कर सकती है।

तनाव से राहत

खरबूजे में मौजूद गुण आपके मस्तिष्क को आराम पहुंचाने के साथ दिल की धड़कन को सामान्य रखने में मदद करते हैं। साथ ही इससे आपके ब्लड प्रैशर को भी कण्ट्रोल में रखने में मदद मिलती है, जिससे प्रेगनेंसी के दौरान खरबूजे का सेवन करने से आपको तनाव जैसी समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

स्किन के लिए है फायदेमंद

तरबूज व् खरबूजा दोनों ही प्रेगनेंसी के दौरान आपकी स्किन की ख़ूबसूरती को भी बरकरार रखने में मदद करते हैं। क्योंकि पानी की मात्रा भरपूर होने के कारण यह आपकी स्किन को हाइड्रेट रखते हैं जिससे आपकी त्वचा को पोषण मिलता है और आपकी स्किन ग्लोइंग रहती है। साथ ही स्किन पर होने वाले दाने, मुहांसे आदि की समस्या से भी बचाव करने में मदद मिलती है।

मांसपेशियों को आराम मिलता है

गर्भवती महिला का वजन बढ़ने के साथ मांसपेशियों में खिंचाव का होना, शरीर के अंगो में दर्द होना आम बात होती है, ऐसे में तरबूज का सेवन करने से आपको दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है, साथ ही आपको इससे एनर्जी से भरपूर रहने में भी मदद मिलती है।

सीने में जलन से आराम

प्रेगनेंसी के दौरान सीने में जलन, खट्टी डकार, एसिडिटी का होना बहुत आम बात होती है। और तरबूज का या खरबूजे का सेवन करने से आपको इन सब परेशानियों से आराम पाने में मदद मिलती है।

पाचन तंत्र मजबूत होता है

तरबूज व् खरबूजे का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान आपके पाचन तंत्र को मजबूत रहने में मदद मिलती है। इससे आपको खाना पचाने में कोई समस्या नहीं होती है, साथ ही कब्ज़ जैसी समस्या से छुटकारा पाने में भी मदद मिलती है।

सूजन से आराम

कुछ गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान हाथ या पैरों में सूजन की समस्या से परेशान रहती हैं, ऐसे में तरबूज व् खरबूजे का सेवन करने से आपको सूजन की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

शिशु के लिए है फायदेमंद

प्रेगनेंसी के दौरान तरबूज व् खरबूजे का सेवन गर्भवती महिला के साथ शिशु के लिए भी फायदेमंद होता है। इससे शिशु की आँखों का विकास, मस्तिष्क व् तंत्रिका तंत्र का विकास, इम्यून सिस्टम को मजबूत बनने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में तरबूज व् खरबूजा खाने के नुकसान

गर्भवती महिला यदि सिमित मात्रा में तरबूज व् खरबूजे का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला को फायदा मिलता है। लेकिन यदि गर्भवती महिला बहुत अधिक मात्रा में इसका सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला को नुकसान भी पहुँच सकता है। तो आइये अब जानते हैं की गर्भवती महिला को अधिक मात्रा में तरबूज व् खरबूजा खाने से कौन से नुकसान हो सकते हैं।

गेस्टेशनल डाइबिटीज़

खरबूजा व् तरबूज बहुत ही मीठा होता है, ऐसे में इसका अधिक सेवन करने से ब्लड में ग्लूकोस की मात्रा बढ़ जाती है। जिसके कारण गर्भवती महिला को गेस्टेशनल डाइबिटीज़ की समस्या होने का खतरा रहता है। साथ ही इसके कारण शिशु को भी यह समस्या होने का खतरा रहता है।

न्यूट्रिएंट्स की कमी

पानी से भरपूर होने के कारण यह बॉडी में से विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद करता है। और इसका अधिक सेवन करने से बॉडी से विषैले पदार्थ निकलने के साथ न्यूट्रिएंट्स भी बाहर निकल जाते हैं, जिसके कारण शिशु के विकास में कमी आने के साथ महिला को भी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या हो सकती है। ऐसे में इसका ज्यादा सेवन भी नहीं करना चाहिए।

बासी तरबूज या खरबूजा खाने से बचें

गर्भवती महिला जिस समय तरबूज या खरबूजे को काटती है उसी समय महिला को उसका सेवन कर लेना चाहिए, क्योंकि कटा पड़ा तरबूज या खरबूजा खाने से महिला को पेट सम्बन्धी समस्या हो सकती है। साथ ही इन्फेक्शन होने का खतरा भी रहता है। ऐसे में महिला के साथ शिशु को भी नुकसान पहुँच सकता है इसीलिए आपको ताजा व् फ्रैश तरबूज या खरबूजे का सेवन करना चाहिए।

तो यह हैं गर्भवती महिला के प्रेगनेंसी के दौरान तरबूज या खरबूजे का सेवन करने से जुड़े कुछ खास टिप्स, लेकिन यदि आपको तरबूज या खरबूजे का सेवन करने से किसी तरह की एलर्जी होती है तो इसके सेवन से आपको परहेज करना चाहिए। साथ ही आपको खाली पेट इसका सेवन नहीं करना चाहिए और तरबूज या खरबूजे का सेवन करने के बाद पानी का सेवन करने से बचना चाहिए।

खाने के तुरंत बाद प्रेग्नेंट महिला यह नहीं करें यह काम गर्भ हो होता है नुकसान

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को छोटी छोटी चीजों का भी अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। क्योंकि कई बार एक छोटी सी गलती गर्भवती महिला और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होती है। जैसे की महिला को ज्यादा तेजी से नहीं चलना चाहिए, सीढ़ियां ज्यादा तेजी से नहीं चढ़नी चाहिए, बहुत ज्यादा व्यायाम नहीं करना चाहिए, बहुत ज्यादा सोना नहीं चाहिए, पेट के बल काम करने से बचना चाहिए, आदि। यह सभी काम करने से प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे को दिक्कत हो सकती है। तो आज इस आर्टिकल में हम गर्भवती महिला के लिए ऐसे ही जरुरी टिप्स के बारे में बात करने जा रहे हैं और वो है की खाने के बाद गर्भवती महिला को क्या नहीं करना चाहिए।

खाना खाने के बाद कभी न पीएं पानी

गर्भवती महिला को खाना खाने के बाद कभी नहीं पीना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से खाने से जो गर्भवती महिला को ऊर्जा मिलती है पोषक तत्व मिलते हैं वो खत्म हो जाते हैं। साथ ही इसके कारण खाना अच्छे से हज़म नहीं हो पाता है और महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। और जब महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होती है तो इसके कारण बच्चे के विकास में भी कमी आती है।

चाय नहीं पीनी चाहिए

अधिकतर महिलाओं की यह आदत होती है की वो खाना खाने के तुरंत बाद एक कप चाय का पीना पसंद करती है। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको अपनी इस आदत को बदल लेना चाहिए। क्योंकि खाना खाने के बाद चाय पीने से खाना अच्छे से हज़म नहीं हो पाता है, महिला को एसिडिटी हो जाती है,और कैफीन खाने में मौजूद सभी पोषक तत्वों को भी सोख लेता है। जिसके कारण गर्भवती महिला को कोई फायदा नहीं मिलता है और बच्चे के विकास में भी कमी आती है।

खाना खाने के बाद न खाएं फल

फलों का सेवन गर्भवती महिला और बच्चे दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होता है, लेकिन गर्भवती महिला को खाना खाने के बाद फल भी नहीं खाने चाहिए। क्योंकि खाना खाने के तुरंत बाद फल खाने से प्रेग्नेंट महिला को एसिडिटी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और यदि आपका फल खाने का मन है तो खाना खाने के कम से कम दो घंटे बाद फल खाएं।

नहाएं नहीं

खाना खाने के तुरंत बाद गर्भवती महिला को नहाना भी नहीं चाहिए क्योंकि ऐसा करने से बॉडी के तापमान में आए बदलाव के कारण पेट के चारों और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है। और पाचन क्रिया धीमी हो जाती है जिसके कारण महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है और गर्भ में बच्चा भी असहज महसूस कर सकता है।

तुरंत न करें वाक

खाना खाने के बाद वाक करना फायदेमंद होता है यह सभी जानते हैं लेकिन खाना खाने के तुरंत बाद वाक करने से आपको डाइज़ेशन से जुडी परेशानी, लौ ब्लड प्रैशर की समस्या हो सकती है जिससे महिला व् बच्चे दोनों को परेशानी होती है। ऐसे में खाना खाने के कम से कम दस से पंद्रह मिनट बाद गर्भवती महिला को वाक करनी चाहिए।

खाने के तुरंत बाद सोना भी नहीं चाहिए

खाना खाने के बाद नींद आना आम बात होती है लेकिन गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए। की खाना खाने के तुरंत बाद महिला सोएं नहीं क्योंकि ऐसा करने से पाचन क्रिया तो कमजोर होती है साथ ही वजन भी तेजी से बढ़ने लगता है। और प्रेग्नेंट महिला का वजन जरुरत से ज्यादा होना न केवल प्रेगनेंसी में दिक्कतों को बढ़ाता है बल्कि इससे माँ व् बच्चे को दिक्कत होने का भी खतरा होता है।

स्मोक नहीं करें

वैसे तो प्रेगनेंसी में बिल्कुल भी स्मोक नहीं करना चाहिए लेकिन यदि आप खाना खाने के बाद स्मोक कर रही है तो अपनी इस आदत को आज ही बंद कर दें। क्योंकि खाना खाने के बाद एक सिगरेट दस सिगरेट के जितना नुकसान करती है। जिसके कारण माँ व् बच्चे दोनों को नुकसान हो सकता है। और गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक के साथ मानसिक विकास पर भी बुरा असर पड़ता है।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका खाना खाने के बाद गर्भवती महिला को अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यदि महिला इन बातों का ध्यान नहीं रखती है तो इसके कारण प्रेग्नेंट महिला की परेशानियां बढ़ती है। और जब गर्भवती महिला परेशान होती है तो गर्भ में शिशु को भी परेशानी होती है।

Things not to do after eating meal in Pregnancy it may harm baby in womb

गर्मियों में अपनी ख़ूबसूरती को ऐसे रखें बरकरार

गर्मी का मौसम बहुत ही कम लोगो को पसंद होता है क्योंकि गर्मी के मौसम में गर्मी लगना, पसीना आना, स्किन पर छोटे छोटे लाल लाल दाने होना, धूप के कारण स्किन पर प्रभाव पड़ना, स्किन का काला होना, डेड स्किन का इक्कठे होना, खाने पीने की इच्छा में कमी आना, आँखों में जलन महसूस होना और आँखों का लाल होना आदि परेशानियां हो सकती है।

लेकिन गर्मी के मौसम में भी चाहे महिला हो या पुरुष सभी अपनी ख़ूबसूरती को बरकरार रखना चाहते हैं। ऐसे में धूप व् गर्मी के कारण स्किन को होने वाली दिक्कत से बचने के लिए कुछ आसान तरीको का इस्तेमाल किया जा सकता है। तो आइये इस आर्टिकल में हम आपको गर्मी के मौसम में भी आप अपनी ख़ूबसूरती को कैसे बरकरार रख सकते हैं इस बारे में बताने जा रहें हैं।

एलोवेरा जैल

रोजाना नहाने से पहले आप चेहरे पर एलोवेरा जैल लगाएं और सूखने के बाद मुँह को धो लें, या फिर रात को सोने से पहले एलोवेरा जैल लगाएं और सुबह उठकर मुँह को धो लें। ऐसा करने से गर्मी के कारण स्किन को होने वाली समस्या, मुहांसे, दाग धब्बे आदि सभी से निजात मिलता है। साथ ही स्किन कोमल व् ग्लोइंग होती है। एलोवेरा जैल के लिए आप एलोवेरा जैल के पत्ते को काटकर उसमे से जैल निकाल सकते हैं नहीं तो मार्किट में ही एलोवेरा जैल आसानी से मिल जाता है, आप इनमे से किसी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

कच्चा दूध

कच्चे दूध में रुई डालकर उसे भिगो लें, उसके बाद इसे चेहरे पर लगाएं, व् शरीर के अन्य हिस्सों पर भी आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। जब स्किन अच्छे से दूध को सोख लें तो साफ़ पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को धो लें, ऐसा दिन में एक या दो बार करें इससे स्किन की नमी को बरकरार रहने के साथ स्किन को ग्लोइंग होने में मदद मिलती है।

चन्दन और गुलाबजल

एक कटोरी में एक चम्मच चन्दन का पाउडर डालें और उसमे गुलाबजल डालकर उसे अच्छे से मिक्स कर लें। और लेप थोड़ा पतला बनाएं, उसके बाद इसे चेहरे पर लगाएं। सूखने के बाद साफ़ पानी से चेहरे धोएं और चेहरे के सूखने के बाद लोशन लगाएं। ऐसा हर दूसरे दिन करें इससे गर्मी के मौसम में चेहरे को ठंडक मिलती है जिससे गर्मियों में भी चेहरे की ख़ूबसूरती बरकरार रहती है। इसके अलावा नियमित रात को सोने से पहले यदि आप रुई की मदद से गुलाबजल को अपने चेहरे पर लगाती है तो चेहरे की ख़ूबसूरती को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

मुल्तानी मिट्टी

एक चम्मच मुल्तानी मिट्टी के पाउडर में थोड़ा निम्बू का रस, थोड़ा पानी मिलाकर चेहरे पर लगाएं। अब इस लेप को मास्क के रूप में चेहरे पर लगाएं और सूखने के बाद चेहरे को धो लें। ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें, ऐसा करने से गर्मियों में भी आपके चेहरे की ख़ूबसूरती को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

निम्बू का रस

एक निम्बू की स्लाइस काटकर रोजाना नहाने से पहले चेहरे या बॉडी के किसी भी हिस्से पर रगड़ें, उसके बाद जब आपकी स्किन निम्बू के रस रस को सोख लें। फिर अपने चेहरे को साफ़ पानी से धो दें। ऐसा करने से भी गर्मियों में आपके चेहरे की ख़ूबसूरती को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

हेल्दी डाइट

गर्मियों में स्किन की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने के लिए अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखें और अपनी डाइट में टमाटर, तरबूज, अमरूद, खीरा, आदि को शामिल करें। क्योंकि यह लाइकोपीन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती हैं जिससे स्किन को होने वाली परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है।

सनस्क्रीन का करें इस्तेमाल

घर से बाहर जाने से पहले सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें इससे धूप के कारण स्किन को होने वाली परेशानी से बचने में मदद मिलती है। इसके अलावा नहाने के बाद और रात को सोने से पहले स्किन के लिए लोशन का इस्तेमाल करें। लेकिन ध्यान रखें की आयल फ्री लोशन का इस्तेमाल करें।

मेकअप का करें कम इस्तेमाल

गर्मी के मौसम के महिला को मेकअप का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए। क्योंकि मेकअप का अधिक इस्तेमाल और ऊपर से स्किन से पसीना और स्किन पर धूप का प्रभाव इससे स्किन पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। इसीलिए गर्मी के मौसम में स्किन की खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए मेकअप का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए।

पानी का सेवन करें भरपूर

गर्मी में स्किन की नमी को बरकरार रखने के लिए आपको पानी का सेवन भरपूर सेवन करना चाहिए। एक दिन में कम से कम नौ से दस गिलास पानी का सेवन करें। ऐसा करने से भी स्किन की चमक को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

आँखों का भी रखें ध्यान

स्किन के साथ आँखों का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए बाहर निकलने से पहले गॉगल्स या कोई चश्मा लगाकर निकलना चाहिए। आँखों पर खीरे के स्लाइसेस काटकर हफ्ते में दो से तीन बार रखने चाहिए।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिनमे से आप किसी भी एक टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। यदि आप गर्मी के मौसम में इन टिप्स का को ट्राई करते रहते हैं तो इससे चेहरे की चमक को गर्मी के मौसम में भी बरकरार रहने में मदद मिलती है।

गर्भवती महिला को सूजन की समस्या

प्रेगनेंसी में सूजन

माँ बनना जितना खास लम्हा होता है उतना ही प्रेगनेंसी के दौरान महिला को शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन इस बात का इस दौरान ध्यान रखना भी जरुरी होता है की यदि कोई भी परेशानी अधिक हो तो उसे अनदेखा ना करें बल्कि उसके लिए एक बार डॉक्टर से बात करें। तो लीजिये आज हम उन्ही में से एक परेशानी के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसका होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। और वो है प्रेगनेंसी के दौरान सूजन की समस्या, प्रेगनेंसी के समय महिला के हाथ, पैर, उँगलियों, टखनों, स्तन, मुँह आदि पर सूजन की समस्या हो सकती है। और यह कोई शारीरिक बिमारी नहीं होती है लेकिन यदि महिला को बहुत अधिक सूजन हो और साथ दर्द भी महसूस हो तो एक बार डॉक्टर से जांच जरूर करवानी चाहिए।

प्रेगनेंसी में सूजन होने के कारण

गर्भवस्था में महिला को सूजन की समस्या होने का कोई एक कारण नहीं होता है, बल्कि इसके कई कारण हो सकते हैं जिसके कारण महिला को सूजन की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान सूजन होने के कौन कौन से कारण हो सकते हैं।

हार्मोनल बदलाव

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं। जिसके कारण बॉडी में सोडियम की मात्रा बढ़ सकती है, और बॉडी के कुछ हिस्सों में थोड़ी बहुत सूजन हो सकती है।

गर्भाशय का आकार

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के गर्भाशय का आकार बढ़ता है जिसके कारण पेल्विक एरिया से नीचे की तरफ दबाव बढ़ने लगता है। और ऐसी स्थिति में बॉडी में हदय से पैरों तक तक तो ब्लड फ्लो अच्छे से होता है, लेकिन पैरों से हदय तक ब्लड फ्लो अच्छे से होने में दिक्कत हो सकती है, और बॉडी में ब्लड फ्लो यदि बेहतर तरीके से नहीं होता है तो महिला को सूजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

दवाई

जो महिलाएं तनाव से जुडी, ब्लड प्रैशर से जुडी दवाइयों का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करती हैं उन महिलाओं को भी प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी पार्ट्स में सूजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

शारीरिक समस्या

जिन गर्भवती महिला को किडनी से जुडी समस्या, लिवर से जुडी परेशानी, थायरॉयड की समस्या प्रेगनेंसी के दौरान होती है। उन महिलाओं को भी प्रेगनेंसी के दौरान सूजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

एक ही स्थान पर खड़े रहना

गर्भावस्था में एक ही जगह पर खड़े रहने के कारण भी महिला को पैरों में सूजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही प्रेग्नेंट महिला को लगातार बहुत देर तक भी नहीं चलना चाहिए, क्योंकि इसके कारण भी पैरों में सूजन की परेशानी हो सकती है।

नमक

नमक का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पर्याप्त मात्रा में ही करना चाहिए। क्योंकि नमक का सेवन अधिक मात्रा में करने से गर्भवती महिला को सूजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

खून की कमी

जिन गर्भवती महिलाओं के शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा में कमी पाई जाती है उन गर्भवती महिलाओं को भी प्रेगनेंसी के दौरान सूजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी में सूजन की समस्या से बचने के टिप्स

  • ठंडी चीजों का सेवन करने से बचें।
  • नमक का सेवन पर्याप्त मात्रा में ही करें।
  • ज्यादा देर तक न तो एक जगह खड़े रहें, न ही पैर लटका कर बैठे रहें।
  • किसी भी शारीरिक परेशानी के होने पर एक बार डॉक्टर से बात करें।
  • अपने आप किसी भी दवाई का सेवन न करें।
  • पानी की कमी शरीर में न होने दें, तरल पदार्थों का भरपूर मात्रा में सेवन करें।
  • प्रेगनेंसी के दौरान अपने स्वास्थ्य का अच्छे से ध्यान रखें और पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें।
  • यदि सूजन के साथ दर्द महसूस हो या स्किन लाल पड़ने लगे तो एक बार डॉक्टर से जरूर मिलें।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला को सूजन की समस्या हो सकती है। सूजन के आलावा प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी शारीरिक परेशानी के अधिक बढ़ने पर इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। और इसका समय से उपचार करना चाहिए ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में किसी तरह की कोई दिक्कत न आए।

सम्बन्ध बनाने के बाद सूजन होने के कारण

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सम्बन्ध बनाना भी वैवाहिक जीवन का एक अभिन्न अंग हैं क्योंकि जितने बेहतर आपके सम्बन्ध होते हैं उतना ही ज्यादा प्यार आपके बीच में बढ़ता है और उसे जवान रहने में मदद मिलती है। लेकिन कई बार शारीरिक सम्बन्ध का मज़ा आप उस तरह नहीं उठा पाते हैं जिस तरह आपको आना चाहिए इसका कारण महिलाओं के प्राइवेट पार्ट से जुडी समस्या हो सकती है। क्योंकि कई बार सम्बन्ध बनाने के बाद महिलाओं को प्राइवेट पार्ट में सूजन की समस्या हो जाती है साथ ही दर्द भी महसूस होता है। जिसके कारण महिलाओं को सम्बन्ध बनाते समय हिचकीचाहट महसूस होती है। और यदि आप संबंध बनाते भी हैं तो वो उतना बेहतर नहीं बन पाते क्योंकि आपका पार्टनर उसमे पूरा सहयोग नहीं दे पाता है। लेकिन सम्बन्ध बनाने के बाद सूजन बनाने के क्या कारण हो सकते हैं आइये विस्तार से जानते हैं।

पहली बार सम्बन्ध बनाने के कारण

यदि आप पहली बार शारीरिक सम्बन्ध बनाते हैं तो इसके कारण आपको वजाइना में सूजन हो सकती है। क्योंकि इसके कारण वजाइना में संकुचन होता है और मांसपेशियों में खिंचाव होता है जिसके कारण आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

प्राइवेट पार्ट में सूखापन

जिन महिलाओं को वजाइना में सूखेपन की समस्या रहती है, तो सम्बन्ध बनाते समय प्राइवेट पार्ट पर जोर पड़ता है और रगड़ लगती है। जिसके कारण महिलाओं को सूजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

मेनोपॉज़

यह महिलाओं में आने वाली एक ऐसी स्टेज होती हैं जिसमे बॉडी में बहुत से हार्मोनल बदलाव आते हैं। और इन बदलाव आने के कारण प्राइवेट पार्ट में सूखापन आ जाता है, और इस दौरान यदि आप सम्बन्ध बनाते हैं तो ऐसे में कई बार महिलाओं को वजाइना में होने वाली सूजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

वजाइना संकुचन

यह महिलाओं के लिए बहुत ही गंभीर स्थिति होती है, क्योंकि इस समय सम्बन्ध बनाते समय प्राइवेट पार्ट में टैम्पोन जैसी चीज़ों को इन्सर्ट करने, गाइनकोलॉजिकल टेस्ट, या फिर सम्बन्ध बनाने के दौरान मांसपेशियां टाइट हो जाती है, जिसके कारण महिला को दर्द की समस्या हो सकती है। और कुछ महिलाओं को दर्द के साथ सूजन भी हो सकती है।

इन्फेक्शन होने के कारण

यदि महिला को प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन होने के बाद भी आप सम्बन्ध बनाते हैं, तो कई बार इसका दुष्परिणाम देखने को मिलता है जिसके कारण महिला को खुजली, जलन, व् सूजन जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से सम्बन्ध बनाने के बाद प्राइवेट पार्ट में सूजन की समस्या हो सकती है। ऐसे में इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए और एक बार हो सके तो इसके लिए डॉक्टर से राय लेनी चाहिए ताकि प्राइवेट पार्ट से जुडी इस समस्या का कोई गंभीर कारण न हो।

डिलीवरी के बाद क्या क्या खाना चाहिए

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प्रेगनेंसी की शुरुआत होते ही महिला को खान पान का सिर्फ अपने लिए ही नहीं बल्कि उसके गर्भ में पल रहे अंश के लिए भी पूरा ध्यान रखना पड़ता है। और डिलीवरी के बाद भी महिला को अपने खान पान का और अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि प्रसव के बाद महिला का शरीर तो कमजोर हो ही जाता है, साथ ही शिशु भी अपने विकास के लिए जरुरी पोषक तत्वों के लिए महिला पर ही निर्भर करता है। ऐसे में महिला को जल्दी फिट होने के लिए और शिशु को स्वस्थ व् हष्ट पुष्ट रखने के लिए क्या क्या खाना चाहिए आइये जानते हैं।

सौंठ के लड्डू

सौंठ के लड्डू खाने से गर्भवती महिला को बहुत जल्दी फिट होने में मदद मिलती है, क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है जो बॉडी को बहुत जल्दी रिकवर करने में मदद करती है, साथ ही इससे महिला की पाचन क्रिया भी बेहतर होती है। नोर्मल डिलीवरी वाली महिलाएं इसका सेवन करके बहुत जल्दी फिट हो जाती है, लेकिन सिजेरियन डिलीवरी वाली महिलाओं को डॉक्टर से पूछने के बाद ही इसका सेवन करना चाहिए।

अंडा

प्रसव के बाद बॉडी को फिट करने के लिए प्रोटीन की भरपूर मात्रा चाहिए होती है, जो की अंडे में बहुत अधिक होती है। ऐसे में डिलीवरी के बाद अंडे का सेवन जरूर करना चाहिए और अधपके या कच्चे अंडे का सेवन नहीं करना चाहिए।

पालक

डिलीवरी के बाद बॉडी में आयरन की कमी हो सकती है, ऐसे में आयरन की मात्रा को भरपूर रखने साथ ही शरीर को फिट रखने के लिए पालक का सेवन भी महिला को जरूर करना चाहिए। इससे शिशु को भी फायदा मिलता है। आप सूप या सब्ज़ी बनाकर इसका सेवन कर सकते हैं।

ओट्स

ओट्स का सेवन भी डिलीवरी के बाद महिला को तनाव से दूर रखने के साथ महिला की बॉडी में आयरन और फाइबर की भरपूर मात्रा रखने में मदद करता हैं। डिलीवरी के बाद हो सके तो नाश्ते में ओट्स का सेवन जरूर करना चाहिए।

बादाम

विटामिन इ, ओमेगा 3 से भरपूर बादाम का सेवन करने से महिला को जल्दी फिट होने के साथ शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। इसीलिए महिला को बादाम के साथ अन्य नट्स का सेवन भी डिलीवरी के बाद जरूर करना चाहिए।

दूध

विटामिन, कैल्शियम, प्रोटीन की मात्रा से भरपूर दूध का सेवन करने से महिला की हड्डियों के साथ शिशु की हड्डियों को मजबूत बनाने में भी मदद मिलती है। जिससे उसका बेहतर विकास होता है, इसीलिए महिला को दिन में तीन से चार गिलास दूध का सेवन करने के साथ दूध से बनी अन्य चीजों का सेवन भी जरूर करना चाहिए।

घी का सेवन करें

डिलीवरी के बाद आपको देसी घी भी जरूर खाना चाहिए क्योंकि इससे न केवल आपके शरीर को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है, बल्कि कमजोरी दूर होती है, शरीर मजबूत बनता है, साथ ही शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। नोर्मल डिलीवरी के बाद आप इसका भरपूर सेवन करना चाहिए लेकिन सिजेरियन डिलीवरी वाली महिलाओं को थोड़े दिन रूककर इसका सेवन करना चाहिए, क्योंकि शुरुआत में इसके सेवन के कारण टाँके सूखने में आपको परेशानी हो सकती है।

पेय पदार्थ

डिवीर्य के बाद बॉडी में पानी की कमी न इसके लिए पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए, और पानी की कमी को पूरा करने के लिए आप नारियल पानी, गाजर का जूस, आदि भी पी सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें की आप ताजा और घर में निकालें हुए जूस का ही सेवन करें।

डिलीवरी के बाद खाएं यह अन्य आहार

  • रात को सोते समय दूध का सेवन जरूर करें, लेकिन ध्यान रखें की दूध मलाई रहित हो।
  • मछली का तेल प्रसव के बाद बहुत फायदेमंद होता है।
  • हरी पत्तेदार सब्जियों का भरपूर मात्रा में सेवन करें।
  • ताजे व् मौसमी फल जरूर खाएं।
  • साबुत अनाज का भरपूर सेवन करें।
  • भरपूर मात्रा में दालें, और उबले हुए चावल का सेवन जरूर करें।
  • रात का खाना हल्का खाएं, और थोड़े थोड़े समय बाद कुछ न कुछ खाते रहें जिससे आपके शरीर को फिट होने के साथ, शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिल सकें।

तो यह हैं कुछ आहार जिनका सेवन डिलीवरी के बाद महिला को जरूर करना चाहिए, क्योंकि इससे न केवल प्रसव के बाद महिला को जल्दी फिट होने में बल्कि शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। इसके अलावा आप चाहे तो डिलीवरी के बाद शिशु के लिए और महिला के लिए क्या बेहतर है इसके लिए आप डॉक्टर से भी राय ले सकते हैं, साथ ही आपको ऐसी कोई भी चीज नहीं खानी चाहिए जिससे शिशु को परेशानी का अनुभव हो।

न्यू डैड के लिए प्रेगनेंसी टिप्स

होने वाले पिता के लिए प्रेगनेंसी टिप्स, माँ बनना हर महिला के जिंदगी का सबसे खास अनुभव होता है। और उतना ही खास समय यह होने वाले पिता के लिए भी होता है। न्यू डैड प्रेगनेंसी में होने वाले अनुभव को महसूस नहीं कर सकता है। लेकिन अपनी प्रेग्नेंट पार्टनर के सफर में उसका साथ देकर प्रेगनेंसी को यादगार जरूर बना सकता है। क्योंकि गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जहां महिला को अपने पार्टनर की सबसे ज्यादा जरुरत होती है। ताकि महिला को अपने मन में आ रहे विचारों को अपने डर को अपने पार्टनर के साथ शेयर करके कम कर सके। और इस साथ की जरुरत महिला को प्रेगनेंसी के नौ महीने के साथ शिशु के जन्म के बाद भी होती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम न्यू डैड के लिए कुछ खास टिप्स बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान किस तरह दे न्यू डैड अपने पार्टनर का साथ

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला बहुत सी शारीरिक परेशानियों व् बदलाव का अनुभव करती है। तो ऐसे में पुरुष किस तरह से अपनी प्रेग्नेंट वाइफ का साथ दे सकते हैं। आइये आज इस आर्टिकल में जानते हैं।

प्रेग्नेंट महिला को समय दें

  • गर्भावस्था के दौरान महिला बहुत से शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक बदलाव का अनुभव करती है।
  • ऐसे में न्यू डैड का यह फ़र्ज़ बनता है की वो अपनी प्रेग्नेंट वाइफ को समय दें।
  • प्रेग्नेंट महिला को कैसे महसूस हो रहा है यह सब उन्हें शेयर करें, उन्हें समय दे।
  • ताकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला की दिक्कतों को कम करने में मदद मिल सके।

मूड स्विंग्स को समझें

  • प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को मूड स्विंग्स की समस्या हो सकती है।
  • जिसके कारण महिला को गुस्सा व् चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है।
  • यदि महिला कभी गुस्सा या चिड़चिड़ कर रही होती है तो आपको उसे समझना चाहिए और उन्हें रिलैक्स करने की कोशिश करनी चाहिए।

होने वाले पिता अपनी प्रेग्नेंट वाइफ की जांच करवाने खुद जाएँ

  • गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी जांच करवानी पड़ती है, अल्ट्रासॉउन्ड करवाना पड़ता है।
  • ऐसे में इन सभी जांच के दौरान आपको अपनी पार्टनर के साथ जाना चाहिए।
  • ताकि आपको अपनी वाइफ का सपोर्ट करने में मदद मिल सके।
  • आपका ऐसा करना आपकी वाइफ को भी अच्छा लगता है।

अपने होने वाले बच्चे से संपर्क बनाएं

  • गर्भ में होने वाले शिशु की हलचल का अनुभव महिला तो प्रेगनेंसी के दौरान लेती ही है।
  • साथ ही न्यू डैड को भी महिला के गर्भ पर हाथ या गाल रखकर शिशु को महसूस करना चाहिए।
  • और गर्भ में शिशु की हलचल को महसूस करते हुए आपको भी अपने बच्चे के साथ अपने रिश्ता गहरा करना चाहिए।

होने वाले पिता भी लें प्रेगनेंसी की जानकारी

  • गर्भावस्था में क्या क्या होता है इसकी जानकारी प्रेग्नेंट महिला के साथ न्यू डैड को भी लेनी चाहिए।
  • क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को क्या महसूस हो सकता है, महिला को क्या दिक्कत हो सकती है।
  • इसके बारे में यदि आप भी जानकारी लेते हैं तो इससे महिला की दिक्कत को कम करने में मदद मिल सकती है।

महिला को खुश रखने की कोशिश करें

  • न्यू डैड को प्रेगनेंसी के दौरान अपनी महिला पार्टनर को तनाव नहीं लेने देना चाहिए।
  • बल्कि उन्हें खुश रखने की कोशिश करनी चाहिए।
  • क्योंकि महिला जितना खुश रहती है उतना ही प्रेगनेंसी के दौरान कॉम्प्लीकेशन्स को कम करने में मदद मिलती है।
  • ऐसे में महिला को खुश करने के लिए आप महिला को बेबीमून पर ले जाएँ, एक प्रेगनेंसी फोटोशूट करवाएं आदि।

होने वाले पिता न डरें अपनी सम्बन्ध लाइफ को लेकर

  • प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध लाइफ पर थोड़ा असर तो पड़ ही जाता है।
  • और यदि प्रेगनेंसी में कॉम्प्लिकेशन हो या महिला का मन न हो तो आप पूरी प्रेगनेंसी में इसका आनंद नहीं ले पाते हैं।
  • लेकिन पति पत्नी का रिश्ता इतना कमजोर तो नहीं होता है की सम्बन्ध न बनाने के कारण उनमे प्यार की कमी हो जाए।
  • खासकर प्रेगनेंसी के समय, प्रेगनेंसी के दौरान महिला के गर्भ में आपका शिशु होता है, ऐसे में सम्बन्ध लाइफ को लेकर डरना नहीं चाहिए।
  • बल्कि इस दौरान आपको अपनी लाइफ के साथ प्रेगनेंसी के खूबसूरत लम्हो को एन्जॉय करना चाहिए।

डिलीवरी के बाद किस तरह दे न्यू डैड अपनी पार्टनर का साथ

केवल प्रेगनेंसी के दौरान ही नहीं बल्कि डिलीवरी के बाद भी महिला को थोड़े समय के लिए अपने पार्टनर के साथ की जरुरत होती है। ऐसे में डिलीवरी के बाद भी महिला को अपनी पार्टनर का साथ जरूर देना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की डिलीवरी के बाद पुरुष अपनी पार्टनर का साथ कैसे दे सकता है।

शिशु के काम में करें मदद

  • शिशु के जन्म के बाद शिशु की केयर को लेकर भी महिला तनाव में आ सकती है।
  • ऐसे में शिशु की केयर का अनुभव केवल महिला को ही नहीं बल्कि न्यू डैड को भी लेना चाहिए।
  • जैसे की शिशु के कपडे बदलने में, शिशु का डाइपर बदलने में, शिशु के लिए दूध की बोतल बनाने में न्यू डैड को महिला की मदद करनी चाहिए।

जोर न ड़ालें

  • प्रेगनेंसी के दौरान नौ महीने तक सम्बन्ध का महिला और पुरुष उस तरह आनंद नहीं ले पाते हैं।
  • क्योंकि उस दौरान शिशु और महिला की सेहत को लेकर मन में डर होता है।
  • ऐसे में पुरुष को डिलीवरी के तुरंत बाद भी सम्बन्ध बनाने के लिए महिला पर जोर नहीं डालना चाहिए।
  • क्योंकि शारीरिक रूप से फिट होने के महिला को डिलीवरी के बाद समय लग सकता है।
  • ऐसे में जब तक महिला डिलीवरी के बाद पुरुष को महिला की हालत को समझना चाहिए और उन्हें स्वस्थ होने में उनका साथ देना चाहिए।

थोड़ा साथ में रहें

  • डिलीवरी के बाद महिला अपने शरीर में बदलाव, शिशु को लेकर जिम्मेवारियों के कारण तनाव में आ सकती है।
  • ऐसे में न्यू डैड को उनके साथ थोड़ा समय बताना चाहिए, महिला को क्या महसूस हो रहा है उसके बारे में पूछना चाहिए।
  • यदि पुरुष ऐसा करते हैं तो इससे महिला को अच्छा महसूस होता है।
  • क्योंकि उन्हें इस दौरान शारीरिक से ज्यादा मानसिक रूप से किसी के साथ की जरुरत होती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स न्यू डैड के लिए, जो प्रेगनेंसी के दौरान और डिलीवरी के बाद उन्हें ध्यान रखने चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला को मानसिक रूप से रिलैक्स रहने और अपने पार्टनर के साथ अपनी जिंदगी के खूबसूरत लम्हे को बेहतर तरीके से एन्जॉय करने में मदद मिल सके।

मुंडन करवाने के क्या-क्या फायदे होते हैं

बच्चे का मुंडन करवाने के फायदे, हिन्दू धर्म में मुंडन करवाने की परम्परा बहुत पुराने समय से चली आ रही है। ऐसा माना जाता है की शिशु जब जन्म लेता हैं तो उसके सिर पर होने वाले बालों में बहुत से बैक्टेरिया होते हैं। जिन्हे आसानी से नहीं खत्म किया जा सकता है। और इन बैक्टेरिया को खत्म करने के लिए मुंडन किया जाता है। इसके अलावा ऐसा भी माना जाता है की मुंडन करवाने के बाद शिशु पवित्र हो जाता है। इसके अलावा मुंडन को लेकर तरह तरह की और भी बातें की जाती हैं।

मुंडन करवाने के लिए 1, 3, 5, 7, साल की उम्र सबसे अच्छी मानी जाती है इसके अलावा हर कोई अपने रीती रिवाज़ के अनुसार मुंडन करवा सकता है। लेकिन असल में सच तो यह है की बच्चे का मुंडन करवाने से बच्चे को बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको बच्चों को मुंडन करवाने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं इस बारे में बताने जा रहे हैं।

बैक्टेरिया से बचाव

  • जन्म के बाद शिशु के सिर पर जो बाल होते हैं उन पर बैक्टेरिया का जमाव हो सकता है।
  • बच्चों को नियमित अच्छे से नहलाने, सिर धोने से भी यह बैक्टेरिया नहीं निकल पाता है।
  • ऐसे में इस बैक्टेरिया से निजात पाने के लिए शिशु का मुंडन करवाया जाता है।

घने बालों के लिए

  • जन्म के बाद शिशु के सिर पर होने वाले बहुत हल्के होते हैं और कई बच्चों के तो बहुत कम बाल होते हैं।
  • ऐसे में मुंडन करवाने से सूरज की रौशनी सिर तक पर पड़ती है जिसके कारण शिशु को विटामिन डी मिलने के साथ सिर की नसों में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है।
  • जिससे शिशु के दोबारा आने वाले बालों को घना करने में मदद मिलती है।

बच्चे का मुंडन करवाने से दांतों को मिलता है आराम

  • कुछ बच्चों का मुंडन पहले साल में ही करवा दिया जाता है ऐसे में उन बच्चों के लिए मुंडन करवाना बहुत फायदेमंद होता है।
  • क्योंकि उस दौरान बच्चे के दांत निकल रहे होते हैं।
  • और दांतों में खुजली होने के कारण बच्चे बहुत परेशान रहते हैं।
  • साथ ही सिर में बालों की वजह से शिशु को सिर में भारीपन भी महसूस हो सकता है।
  • ऐसे में मुंडन करवाने से शिशु को आराम मिलता है।
  • साथ ही इससे शिशु को दांतों में खुजली की समस्या होना, तालु का अधिक कांपना भी बंद हो जाता है।

शिशु स्वस्थ रहता है

  • शिशु का मुंडन करवाने से शिशु के शरीर व् दिमाग दोनों को ठंडा रहने में मदद मिलती है।
  • जिससे शिशु को फोड़े, फुंसी जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

बच्चे का मुंडन करवाने से दिमाग का विकास होता है

  • मुंडन करवाने पर शिशु के सिर की नसों पर दबाव पड़ता है।
  • साथ ही मुंडन करवाने के बाद सिर पर सीधी धूप भी पड़ती है।
  • जिससे दिमाग की मांसपेशियों में ब्लड फ्लो को बेहतर होने में मदद मिलती है।
  • और दिमाग में ब्लड फ्लो का बेहतर तरीके से होना शिशु के दिमागी विकास को बढ़ाने में मदद करता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो बच्चे को मुंडन करवाने से मिलते हैं, इसीलिए जन्म के बाद बच्चे का मुंडन जरूर करवाना चाहिए।