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Mint Benefits During Pregnancy पुदीना का सेवन कितना फायदेमंद है

प्रेगनेंसी हर किसी के जीवन में बहुत सी खुशिया और उमंग भर देती है और इसके साथ ही बहुत सी सावधानियां और चिंता भी हमारे मन में ले आती है। प्रेगनेंसी के दौरान आने वाले बदलावों में एक बदलाव आपको लाना होता है आपके भोजन में। इस समय में यह सोचना जरुरी हो जाता है के जो भी हम खा रहे है वह हमारे लिए हैल्थी है या नहीं। प्रेगनेंसी में कुछ भी खाने से पहले उसके फायदे और नुकसान के बारे में जानना जरुरी होता है।

मिन्ट यानी की पुदीना हमारे घरो में रोजाना इस्तमाल होता ही है। लेकिन क्या आप जानते है के गर्भावस्था में इसके इस्तेमाल के बहुत से फायदे होते है। इसमें बहुत से औषधीय गुण होते है जिसे हम लोग सदियों से अपने इस्तेमाल में ला रहे है। आइये जानते है गर्भावस्था में पुदीना इस्तेमाल करने के क्या क्या फायदे होते है।

साँसो की ताजगी 

गर्भावस्था के शुरूआती तीन महीनों में मॉर्निंग सिकनेस होना बहुत ही आम होता है। इसी मॉर्निंग सिकनेस के कारण हमारे मुँह का टेस्ट बहुत बिगड़ जाता है और हमारी साँसो से भी दुर्गंध आने लगती है। कुछ महिलाओं को तो पुरे नो महीने ही मिचली और उलटी की समस्या रहती है। रोजाना पुदीने की कुछ पत्तियों को चबाने से मुँह का टेस्ट भी सही हो जाता है और साथ ही साँसों की दुर्गन्ध से भी छुटहोते है कारा मिलता है। 

उलटी में राहत 

जी घबराना, उलटी होना, मिचली आदि गर्भावस्था की बहुत सामान्य परेशानियाँ होती है। पुदीना खाने से इसमें राहत मिलती है, जब भी आपको घबराहट हो आप कुछ पुदीने की पत्तियों को चबा लें, आपकी घबराहट शांत हो जायेगी। पुदीने को आप चटनी में डालकर भी इस्तेमाल कर सकते है। अगर आप पत्तियों को चबाना भी नहीं चाहते तो सुबह के समय एक या दो पत्तियां अपने मुँह में रख लेने से भी आपको आराम मिलेगा। 

पाचन क्रिया 

प्रेगनेंसी के दौरान आपको खाना पचाने में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पुदीने के सेवन से आपको इन परेशानियों को झेलना नहीं पड़ेगा। यह आपके पेट को ठंडा रख आपकी पाचन क्रिया को अच्छे से चलाएगा। 

ठंडी तासीर 

गर्भावस्था के दौरान बहुत से हार्मोनल बदलावों से गुजरना पड़ता है जिस कारण अलग अलग चीजे खाने का मन भी करता है। भोजन की तरह तरह की वैरायटी का सेवन करने से गर्भवती महिला की बॉडी का टेम्परेचर बढ़ भी सकता है। पुदीना में ठन्डे करने के गुण होते है इसके सेवन से गर्भवती महिला के शरीर का तापमान कण्ट्रोल रहता है। गर्मियों में भी यह बॉडी को ठंडा रखने के काम आता है। 

कोल्ड 

आपने अक्सर देखा होगा के ज्यादातर वैपो-रब और इन्हेलर्स पुदीने के फ्लेवर में मिलते है। इसका एक कारण है के पुदीना चेस्ट इन्फेक्शन, नोज, थ्रोट और लंग्स का इन्फेक्शन भी साफ़ करता है। इसके अतिरिक्त एंटी इन्फ्लामेट्री गुणों के कारण यह क्रोनिक खांसी को भी ठीक करता है। मौसम बदलने से गर्भावस्था में बहुत जल्द ही खांसी, जुकाम आदि हो जाता है। इस समय में ज्यादा दवाइयों का सेवन ना करते हुए पुदीना का इस्तेमाल बेहतर रहता है। 

पीरियड्स के आने से पहले क्या लक्षण होते है

पीरियड्स हर महिला हो होने वाली एक आम समस्या होती है। यह महिलाओं को इक्कीस दिन से लेकर पैंतीस दिन के चक्र के बीच हो सकता है। लेकिन यदि महिलाओं को यह इक्कीस दिन से कम या पैंतीस दिन से ज्यादा दिन में होता है तो यह परेशानी का विषय होता है। पीरियड्स के दौरान महिला के प्राइवेट पार्ट से रक्तस्त्राव होता है। मासिक धर्म की अवधि भी हर महिला की अलग अलग होती है जैसे की कुछ महिलाओं को यह दो दिन कुछ तो तीन, पांच या सात दिन के लिए भी हो सकता है। लेकिन यदि इससे ज्यादा दिन के लिए मासिक धर्म होता है तो यह अनियमित पीरियड कहलाता है।

मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को बहुत सी परेशानियां भी होती है, जैसे की पेट, पेडू व् कमर में दर्द होना। रक्त के थक्के निकलना, रक्त का कम से लेकर ज्यादा होना, आदि। पीरियड्स में होने वाले बदलाव हर महिला के हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करते है। जैसे की कई महिलाओं को दर्द आदि की परेशानी होती है और कुछ महिलाओं को दर्द का आभास भी नहीं होता है। और यदि आपको पीरियड्स से जुडी कोई भी परेशानी हो तो इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए। इसके अलावा पीरियड्स का के बारे में महिलाओं के मन में तरह तरह के सवाल भी होते है तो आइये इससे जुडी कुछ बातें जानते हैं।

कब होता है महिला को पहला पीरियड:-

बारह से तरह वर्ष की उम्र में लड़कियों को पहला पीरियड होता है इसे मेनार्चे भी कहा जाता है। लेकिन ऐसा भी हो सकता है की आपको इस उम्र से पहले भी पीरियड शुरू हो जाए या कुछ लड़कियों को इस उम्र के बाद भी पीरियड की शुरुआत हो सकती है। पीरियड का होना शारीरिक गतिविधियों और शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करता है। कई बार पहले पीरियड के बाद कई महीनो तक पीरियड नहीं आता है तो कुछ को नियमित तरीके से आना भी शुरू हो जाता है।

पीरियड आने से पहले के क्या लक्षण होते हैं:-

पीरियड्स के आने से पहले ही आपके शरीर में बदलाव होने शुरू हो जाते है। जिनका संकेत आपकी बॉडी भी देती है, ऐसे में आपको इन संकेतो से पता चल सकता है की कहीं आपको पीरियड तो नहीं होने वाला है।

टांगो में दर्द का होना:-

पीरियड्स आने से पहले महिला को टांगो में दर्द का अनुभव हो सकता है, साथ ही महिला की जांघो में खिंचाव भी महसूस हो सकता है। यदि आपको आपकी पीरियड की डेट से पहले ऐसा दर्द महसूस होता है तो समझ लीजिए की आपको पीरियड आने वाला है।

पेट, पेडू व् कमर में दर्द का आभास होता है:-

हल्का फुल्का पेट में दर्द का होना भी पीरियड आने से पहले का सामान्य लक्षण है। कई महिलाओ को तेज दर्द भी हो सकता है और जरुरी नहीं है हर महिला को ऐसा हो कुछ को दर्द नहीं भी होता है। लेकिन यदि आपकी पीरियड की तारीख पास हो और आपको ऐसा दर्द हो तो समझ लीजिए की आपको पीरियड आने वाला है, पेट के साथ पेडू और कमर में दर्द की समस्या का आभास भी हो सकता है।

सफ़ेद पानी का आना:-

जो महिलाएं बच्चे को जन्म दे चुकी होती है या फिर सम्बन्ध बना चुकी होती है। उन्हें पीरियड आने से पहले और बाद में प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद पानी आने की समस्या हो सकती है। कई बार यह स्त्राव ज्यादा भी हो सकता है।

कमजोरी महसूस होना:-

पीरियड्स आने से पहले आपको बॉडी में कमजोरी का अहसास भी हो सकता है। साथ ही आपको बहुत जल्दी थकने की समस्या भी होती है। ऐसे में बॉडी का आराम करने का दिल करता है। कई बार कमजोरी के साथ घबराहट भी महसूस हो सकती है।

भूख बढ़ जाती है:-

पीरियड्स के आने से पहले महिलाओं को दूसरे दिनों की तुलना में भूख अधिक लगने लगती है। और महिला को थोड़ी थोड़ी देर बड़ा कुछ न कुछ खाने की इच्छा हो सकती है, लेकिन इन दिनों में अधिक खाने में कारण महिला को वजन बढ़ने की परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।

आपके व्यवहार में भी आता है बदलाव:-

पीरियड्स आने से पहले ही शरीर में हार्मोनल बदलाव होने लग जाते है जिसके कारण महिला के मूड में बदलाव आता है। और मूड में आने वाले बदलाव के कारण महिला का चिड़चिड़ापन, उदासी, तनाव आदि होना आम बता होती है। पीरियड के आने से पहले महिला की सोचने की शक्ति भी कमजोर होने लगती है।

स्किन में होने लगता है परिवर्तन:-

पीरियड्स आने से पहले महिला की स्किन में भी बदलाव देखने को मिलता है, जैसे की इस समय महिला को स्किन पर मुहांसे आदि होने की समस्या ज्यादा होती है। और यदि पहले से ही मुहांसे है तो वो और भी ज्यादा होने लगते है। इसके अलावा पैरों के और हाथों की स्किन की सूखी सी महसूस होने लगती है।

ब्रैस्ट में भी आने लगता है बदलाव:-

पीरियड्स के आने से पहले महिला के ब्रैस्ट में भी बदलाव देखने को मिलता है। जैसे की ब्रैस्ट सूजे हुए से महसूस होते है, और साथ ही बहुत सॉफ्ट यानी कोमल भी हो जाते है। यदि आप भी अपने ब्रैस्ट में ऐसा कुछ परिवर्तन देखते हैं तो इसका मतलब होता है की आपको पीरियड्स आने वाला है।

नींद में आने लगती है कमी:-

सही तरीके से नींद का न आना, सोते हुए नींद का बार बार खुलना, सोते हुए बहुत अधिक पसीने का आना भी पीरियड्स के आने का संकेत देता है। ऐसे में आपको थकान का अहसास भी होता है इसीलिए आपको पीरियड्स के दौरान रेस्ट करने की सलाह दी जाती है।

पीरियड्स के दौरान इन बातों का रखें खास ध्यान:-

  • पीरियड्स के दौरान अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।
  • शरीर को रेस्ट देना चाहिए क्योंकि पीरियड्स होने पर शरीर में कमजोरी आ जाती है।
  • अच्छी क़्वालिटी के सैनिटरी पैड का इस्तेमाल करना चाहिए, और ध्यान देना चाहिए की हर छह से आठ घंटे में आप अपना पैड बदलें।
  • साफ़ सफाई का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि यदि आप अपने प्राइवेट पार्ट की साफा सफाई का ध्यान नहीं रखते हैं तो इससे आपको इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है।
  • पीरियड्स के दिनों में आपके शरीर में से रक्त का प्रवाह होता है इसके लिए आपको अपने आहार में भरपूर आयरन को शामिल करना चाहिए। ताकि आपके शरीर को एनर्जी मिल सकें।

पीरियड्स के दौरान हर महिला में अलग अलग लक्षण होते है। क्योंकि यह महिला के हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करते है। इसके अलावा महिला के पीरियड्स की अवधि भी अलग अलग होती है। ऐसे में पीरियड की डेट को देखकर तो आप पता कर सकते है की आपको पीरियड्स किस तारीख के आस पास आने वाला है, लेकिन यदि आपका पीरियड आगे पीछे आता है तो ऊपर दिए गए कुछ सामान्य लक्षणों को महसूस करके आप पता कर सकते हैं की कहीं आपको पीरियड तो नहीं आने वाला है।

गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने के लिए गर्भवती महिला खाएं यह 10 चीजें

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के लिए गर्भवती महिला को अपने लाइफस्टाइल, अपने खान पान, अपने रूटीन, व्यायाम, आदि सभी चीजों पर ध्यान देना जरुरी होता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। और जब भी महिला अल्ट्रासॉउन्ड स्कैन के लिए डॉक्टर का पास जाती है तो गर्भ में शिशु का विकास कैसा हो रहा है महिला को इस बारे में पता चल जाता है। साथ ही प्रेग्नेंट महिला के वजन बढ़ने, पेट के आकार बढ़ने, गर्भ में शिशु की हलचल आदि से भी गर्भ में शिशु के विकास का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

ऐसे में कुछ केस में देखने को मिलता है की गर्भ में पल रहे बच्चे का वजन उतना नहीं होता है जितना की होना चाहिए। जो की प्रेग्नेंट महिला के लिए परेशानी का कारण होता है। लेकिन गर्भवती महिला चाहे तो गर्भ में शिशु का वजन बढ़ा सकती है और इसके लिए जरुरी होता है की महिला अपनी डाइट पर ज्यादा अच्छे से ध्यान दे। तो आइये इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे 10 फ़ूड के बारे में बताने जा रहे हैं जो गर्भ में बच्चे के वजन को बढ़ाने के लिए गर्भवती महिला को अपनी डाइट में जरूर शामिल करने चाहिए।

दूध

दूध कैल्शियम और प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत होता है। और कैल्शियम व् प्रोटीन गर्भ में शिशु की हड्डियों व् मांसपशियों के बेहतर विकास के लिए बहुत जरुरी होते हैं। जिससे गर्भ में शिशु के वजन को सही तरीके से बढ़ने में मदद मिलती है। इसीलिए एक दिन में गर्भवती महिला को दो से तीन गिलास दूध का सेवन करना चाहिए। और यदि गर्भवती महिला का सादा दूध पीने का मन नहीं है तो महिला मिल्क शेक, बादाम दूध, दूध से बना दलिया आदि का सेवन कर सकती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें की कच्चे दूध का सेवन गर्भवती महिला न करें। दूध के साथ दही का सेवन करने से भी गर्भ में बच्चे के वजन को बढ़ाने में मदद मिलती है।

अंडा

प्रोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, choline, विटामिन ए, विटामिन डी जैसे पोषक तत्वों से भरपूर अंडा भी गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने में मदद करता है। और अंडे का सेवन करने से वजन बढ़ने के साथ शिशु के दिमाग के बेहतर विकास और जन्म के समय शिशु को होने वाली दिक्कतों से भी बच्चे को बचे रहने में मदद मिलती है। इसीलिए गर्भवती महिला को अंडे का सेवन जरूर करना चाहिए। लेकिन ध्यान रखें की अंडा अच्छे से पका हुआ हो।

हरी पत्तेदार सब्जियां

आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, फोलिक एसिड व् अन्य एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर हरी सब्जियों का सेवन करने से भी गर्भ में बच्चे का वजन बढ़ाने में मदद मिलती है। और हरी सब्जियों में सरसों, पालक, चौलाई, फूलगोभी, केल के पत्ते, चना साग, आदि का सेवन प्रेग्नेंट महिला कर सकती है।

ब्रोकली

आयरन, बीटा कैरोटीन, विटामिन ई व् अन्य विटामिन्स से भरपूर ब्रोकली भी गर्भ में बच्चे के विकास के लिए बहुत फायदेमंद होती है। इसीलिए गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने के लिए प्रेग्नेंट महिला ब्रोकली का सेवन भी कर सकती है।

ड्राई फ्रूट्स

आयरन, जिंक, फोलिक एसिड, कॉपर से भरपूर ड्राई फ्रूट्स जैसे की बादाम, अखरोट, किशमिश आदि का सेवन भी गर्भवती महिला गर्भ में बच्चे का वजन बढ़ाने के लिए कर सकती है।

दालें व् फलियां

प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर दालें व् फलियों का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला गर्भ में बच्चे का वजन बढ़ाने के लिए कर सकती है। क्योंकि यह सभी पोषक तत्व गर्भ में बच्चे का वजन बढ़ाने के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

फिश

मछली में ओमेगा 3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भ में बच्चे के दिमाग के विकास को बढ़ाने के साथ शारीरिक विकास को भी तेजी से बढ़ाने में मदद करता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला यदि मछली का सेवन करना चाहे तो प्रेगनेंसी के दौरान कर सकती है। लेकिन गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की जिस किस्म की मछली का सेवन महिला कर रही है उसमे मर्करी नहीं होनी चाहिए।

चिकन

चिकन में आयरन, प्रोटीन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। और यह शिशु की कोशिकाओं व् शारीरिक विकास के लिए बहुत जरुरी पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला चिकन का सेवन करती है तो ऐसा करने से गर्भ में शिशु का बेहतर विकास होने के साथ प्रेग्नेंट महिला को एनीमिया से बचे रहने में मदद मिलती है। लेकिन गर्भवती महिला को ध्यान रखना चाहिए की महिला कच्चे, आधे पके हुए, ठन्डे, गन्दी जगह से लिए हुए चिकन का सेवन न करें।

सोयाबीन

सोयाबीन भी प्रोटीन, कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है जो गर्भ में बच्चे के बेहतर विकास में मदद करते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला गर्भ में पल रहे शिशु का वजन बढ़ाने के लिए सोयाबीन का सेवन भी कर सकती है।

छैना

छैना प्रोटीन, कैल्शियम का बेहतरीन स्त्रोत होता है जो की गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए बहुत जरुरी होते हैं। ऐसे में यदि गर्भवती महिला को डॉक्टर बताते हैं की उनके गर्भ में पल रहे बच्चे का वजन कम है तो ऐसे में महिला को छैना का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान जरूर करना चाहिए। क्योंकि छैना का सेवन करने से गर्भ में शिशु के वजन को तेजी से बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं वो फ़ूड जो गर्भवती महिला को बच्चे का वजन बढ़ाने के लिए जरूर खाना चाहिए। यदि गर्भवती महिला इन फ़ूड को अपनी डाइट में शामिल करती है तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को अपने गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के दौरान ही स्ट्रैचमार्क्स के लिए यह करें

प्रेगनेंसी के दौरान ही स्ट्रैचमार्क्स के लिए यह करें, स्ट्रेचमार्क्स से निजात पाने के टिप्स, प्रेगनेंसी के दौरान स्ट्रेचमार्क्स से बचने के आसान तरीके, Remedies for Stretch marks during Pregnancy

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने शरीर में बहुत से बदलाव देखने को मिलते हैं, और यह बदलाव महिला के सौन्दर्य से भी जुड़े होते हैं। जैसे की डिलीवरी के बाद महिला को स्ट्रेचमार्क्स जैसी परेशानी का सामना करना पड़ता है, इसका कारण प्रेगनेंसी के दौरान त्वचा में होने वाला खिंचाव होता है, और जैसे जैसे महिला का वजन बढ़ता है, पेट का आकार बढ़ता है वैसे ही इसकी शुरुआत हो जाती है। स्ट्रेचमार्क्स की समस्या पेट, जांघ, कूल्हों, ब्रेस्ट आदि पर स्ट्रेचमार्क्स की समस्या हो सकती है। ऐसे में इस परेशानी से निजात पाने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान ही कुछ टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है, जिसके इस्तेमाल से आपको इस परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।

नारियल तेल

नारियल तेल स्किन के लिए एक नेचुरल मॉइस्चराइजर का काम करता है। और स्किन पर होने वाली मृत त्वचा को निकाल कर यह स्किन में निखार को बढ़ाने का काम करता है। ऐसे में यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान या बाद में भी इसका इस्तेमाल करती है तो ऐसा करने से यह आपको स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से निजात दिलाने में मदद करता है।

बेबी ऑयल

बेबी ऑयल भी आपकी स्किन से जुडी इस परेशानी को हल करने में आपकी मदद करता है। ऐसे में यदि आप अपनी स्किन पर नियमित बेबी ऑयल द्वारा हल्के हाथों से मसाज करती हैं। तो ऐसा करने से आपको स्ट्रेचमार्क्स की कोई परेशानी से नहीं होती है।

एलोवेरा जैल

एलोवेरा जैल भी स्किन पर होने वाली मृत कोशिकाओं को निकालकर स्किन की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने में आपकी मदद करता है। इसीलिए यदि आप स्किन के लिए एलोवेरा जैल का इस्तेमाल करती हैं, तो भी आपको स्ट्रेचमार्क्स से बचे रहने में मदद मिलती है।

पोषक तत्वों से भरपूर आहार

प्रेगनेंसी के दौरान पोषक तत्वों की बॉडी में कमी भी आपकी सुंदरता को कम करती है, ऐसे में आपको हरी सब्जियों, दालों, फलों, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए जिससे आपकी बॉडी में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व मौजूद रहें जिससे आपकी ख़ूबसूरती को बरकरार रहने में मदद मिल सके।

अरंडी या बादाम का तेल

नियमित रात को सोने से पहले अरंडी या बादाम के तेल को हल्का गुनगुना करके अच्छे से अपनी स्किन की मसाज करें। इससे मृत कोशिकाओं की परत को हटाकर आपकी स्किन की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको प्रेगनेंसी में होने वाली स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान ही बचाव करने में मदद मिलती है। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो प्रेगनेंसी के तीसरे महीने के बाद से ही आपको इन टिप्स का इस्तेमाल करना शुरू कर देना चाहिए।

प्रेगनेंसी में टमाटर खाने के फायदे

गर्भावस्था में टमाटर

प्रेगनेंसी के दौरान महिला जितना संतुलित व् पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेती है उससे उतना ही गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों से बचे रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी फायदा मिलता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान टमाटर को अपनी डाइट में शामिल करना गर्भवती महिला के लिए एक बेहतर विल्कल्प होता है, टमाटर का सेवन महिला कई तरह से कर सकती है। जैसे की सब्जियों का स्वाद बढ़ाने के लिए उनमे टमाटर का इस्तेमाल किया जाता है, किसी भी फल के जूस में टमाटर को मिक्स करके उसके जूस का आनंद लिया जा सकता है, सूप, सलाद आदि के रूप में भी टमाटर का सेवन किया जा सकता है।

प्रेगनेंसी में टमाटर खाने के फायदे

आयरन, कैल्शियम, विटामिन्स, फॉस्फोरस, फोलिक एसिड आदि जैसे पोषक तत्वों से भरपूर टमाटर का सेवन करने से गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में भी फायदा मिलता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान टमाटर का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

एंटी ऑक्सीडेंट

टमाटर में लाइकोपीन नामक एंटी ऑक्सीडेंट मौजूद होता है जो गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को संक्रमण जैसे की वायरल इन्फेक्शन, फ्लू के कारण होने वाली परेशानी जैसी समस्या से सुरक्षित रखने में मदद करता है। क्योंकि टमाटर का सेवन करने से गर्भवती महिला के इम्यून सिस्टम को मजबूत होने में मदद मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल

एलडीएल नामक तत्व जो की टमाटर में मौजूद होता है, वह गर्भवती महिला के शरीर में कोलेस्ट्रॉल के लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करता है। और यदि गर्भवती महिला का कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल रहता है तो इससे महिला को हदय सम्बन्धी समस्या से भी बचे रहने में मदद मिलती है।

एनर्जी

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को थकान व् कमजोरी का अनुभव होना आम बात होती है, ऐसे में टमाटर का सेवन करने से गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है। क्योंकि टमाटर में कैलोरीज़ भरपूर मात्रा में होती है जो गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर

टमाटर में पोटैशियम की मात्रा भी पर्याप्त होती है जो ब्लड में सोडियम में लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करता है जिससे प्रेग्नेंट महिला को ब्लड प्रैशर के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

आयरन

आयरन से भरपूर टमाटर प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को पर्याप्त बनाये रखने में मदद करता है जिससे गर्भवती महिला को खून की कमी के कारण होने वाली परेशानी से बचाने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है।

फ्री रेडिकल्स की समस्या

फ्री रेडिकल्स के दुष्प्रभाव के कारण गर्भवती महिला या गर्भ में पल रहे शिशु हो होने वाले नुकसान से बचाव के लिए गर्भवती महिला को टमाटर का सेवन अपनी डाइट में जरूर करना चाहिए।

फाइबर

टमाटर में मौजूद फाइबर प्रेग्नेंट महिला को पेट सम्बन्धी समस्याओं जैसे की कब्ज़, एसिडिटी आदि से सुरक्षित रखने में मदद करता है। साथ ही टमाटर का सेवन करने से पाचन क्रिया को दुरुस्त तरीके से काम करने में मदद मिलती है।

ब्लड फ्लो

प्रेग्नेंट महिला की बॉडी में ब्लड फ्लो के बेहतर न होने के कारण गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में टमाटर का सेवन करने से ब्लड फ्लो को बॉडी में बेहतर तरीके से होने में मदद मिलने के साथ ब्लड को साफ़ करने में भी मदद मिलती है जिससे प्रेग्नेंट महिला को ब्लड इन्फेक्शन जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

शिशु का विकास

फोलिक एसिड, विटामिन सी, कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर टमाटर का सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिलती है। साथ ही इससे गर्भ में शिशु को हर तरह के संक्रमण से सुरक्षित रहने के साथ जन्म के समय होने वाली परेशानियों से भी सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान टमाटर का सेवन करने के कुछ फायदे लेकिन गर्भवती महिला को इसका सेवन जरुरत से ज्यादा भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि जरुरत से ज्यादा किसी भी चीज का सेवन करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को समस्या का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की टमाटर का पर्याप्त मात्रा में सेवन जहां ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल करने में मदद करता है वहीँ अधिक टमाटर का सेवन करने से ब्लड प्रैशर की समस्या के कारण गर्भवती महिला को परेशान भी होना पड़ सकता है।

गर्भवती महिला के लिए प्लास्टिक की बोतल से पानी पीना कितना नुकसानदायक है

प्रेगनेंसी में प्लास्टिक बोतल में पानी क्यों नहीं पीना चाहिए, प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि पानी पीने से गर्भवती महिला को हाइड्रेटेड रहने में मदद मिलती है। साथ ही पानी पीने से प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने और प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली बहुत सी परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है। लेकिन पानी का सेवन करते हुए भी महिला को बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

जैसे की बहुत ज्यादा गर्म या ठन्डे पानी का सेवन नहीं करना चाहिए, पानी को उबालकर ठंडा करने के बाद पानी पीना चाहिए, प्लास्टिक की बोतल में भरा हुआ पानी पीने से बचना चाहिए, आदि। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला को प्लास्टिक की बोतल में भरे हुए पानी का सेवन क्यों नहीं करना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में प्लास्टिक बोतल में भरे हुए पानी का सेवन क्यों नहीं करना चाहिए

गर्भवती महिला को प्लास्टिक की बोतल में भरे हुए पानी का सेवन इसीलिए नहीं करना चाहिए। क्योंकि प्लास्टिक की बोतल में बीपीए यानी बिस्फेनॉल ए मौजूद होता है। जो की एक हानिकारक रसायन होता है और इससे प्रेग्नेंट महिला के साथ शिशु को भी नुकसान पहुँच सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला और शिशु को प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से कौन से नुकसान हो सकते हैं।

गर्भवती महिला को बोतल में पानी पीने से होने वाले नुकसान

प्रेग्नेंट महिला यदि प्लास्टिक की बोतल को मुँह लगाकर या प्लास्टिक की बोतल में भरे हुए पानी का सेवन करती है। तो इससे बीपीए बॉडी में पहुंचकर हॉर्मोन में असंतुलन पैदा कर सकता है। और बॉडी में हार्मोनल अंसतुलन होने के कारण प्रेग्नेंट महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की भूख में कमी होना, कमजोरी महसूस होना, इम्युनिटी कमजोर होना, ब्रेस्ट कैंसर का खतरा, दिल सम्बंधित परेशानियां, पाचन तंत्र से जुडी समस्या आदि

प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से शिशु को होने वाले नुकसान

गर्भवती महिला के प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से गर्भवती महिला के शरीर में बीपीए नामक रसायन पहुँच सकता है। और गर्भवती महिला के शरीर में पहुंचकर यह गर्भनाल के रास्ते शिशु तक भी पहुंच सकता है। और शिशु तक पहुंचकर यह शिशु के विकास को बहुत बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। और इसके कारण शिशु के दिमागी विकास, शारीरिक विकास को खतरा होने के साथ शिशु को जन्म के समय होने वाली दिक्कतों का सामना भी करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो प्रेग्नेंट महिला व् शिशु को प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने के कारण हो सकते हैं। ऐसे में महिला या शिशु को ऐसी कोई दिक्कत न हो इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से बचना चाहिए।

त्वचा टाइट करने के उपाय

खूबसूरत और दमकती हुई स्किन आपकी पर्सनैलिटी में चार चाँद लगा देती है। वही ढीली स्किन आपके लुक को खराब करती है। त्वचा का ढीलापन खासकर पेट, जांघो के आस पास, या चेहरे पर अधिक दिखाई देता हैं। और इस परेशानी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे की डिलीवरी के बाद महिला की स्किन में ढीलापन आ जाता है, सूर्य की किरणे भी आपकी स्किन पर बहुत बुरा प्रभाव डालती है, या फिर जब आप अपने वजन को तेजी से घटाने की कोशिश करते हैं तो भी आपको ये समस्या होती है, साथ ही उम्र के बढ़ने के कारण भी आपको स्किन में ढीलेपन की समस्या हो सकती है। लेकिन आप इस समस्या का समाधान भी कर सकते हैं। क्योंकि त्वचा यदि कसावदार हो तभी आपकी लुक को बेहतर बनने में मदद मिलती है। तो आइये जानते हैं की आप अपनी त्वचा को किस प्रकार टाइट कर सकते हैं।

इन्हें भी पढ़ें:- चेहरे की झुर्रियां हटाने के इलाज आपकी किचन में हैं

त्वचा के ढीलेपन के कारण:-

  • डिलीवरी के बाद महिलाओ के पेट, जांघो के आस पास ये समस्या अधिक देखी जाती है।
  • उम्र बढ़ने के कारण भी त्वचा में ढीलापन आने लगता है।
  • जो महिलाएं बहुत तेजी से वजन कम करती हैं उनकी त्वचा भी लटकने लगती है।
  • ज्यादा देर तक धूप में रहने के कारण भी आपकी त्वचा पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
  • स्किन को अच्छे से पोषण न देने के कारण और शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण भी आपको त्वचा से जुडी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

त्वचा टाइट करने के टिप्स:-

ब्रशिंग का इस्तेमाल करें:-

brushing

स्किन पर मृत कोशिकाओं का जमाव होने के कारण भी आपको त्वचा के ढीलेपन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इस समस्या से बचने के लिए आपको अपनी स्किन को ब्रश करना चाहिए। या फिर आप स्क्रब भी कर सकते हैं ऐसा करने से आपकी डेड स्किन निकल जाती है। साथ ही ऐसा करने से आपका ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता हैं और त्वचा में नई कोशिकाओं को ग्रोथ होने में मदद मिलती है, जिससे आपकी स्किन टाइट होने लगती है।

बादाम तेल का इस्तेमाल करें:-

बादाम तेल भी आपकी स्किन को टाइट करने में बहुत मदद करता है। इसके लिए आप नियमित अपने चेहरे, जांघो, पेट की अच्छे से मसाज करें। थोड़े ही दिनों में आपको इसका असर साफ़ दिखाई देगा और साथ ही यदि आपको स्ट्रेचमार्क्स की समस्या है तो उससे भी निजात पाने में मदद मिलेगी।

कैस्टर आयल और निम्बू का इस्तेमाल करें:-

नियमित रात को सोने से पहले थोड़ा से कैस्टर आयल में कुछ बूंदे निम्बू के रस की और कुछ बूंदे लैवेंडर ऑयल की मिलाएं। उसके बाद इससे अच्छे से अपनी स्किन पर मसाज करें और सुबह उठकर नहा लें। ऐसा नियमित करने से भी आपकी बॉडी की जहां की भी स्किन ढीली है उसे कसावदार बनाने में मदद मिलेगी।

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प्रोटीन युक्त आहार का भरपूर सेवन करें:-

स्किन को टाइट करने के लिए आपको प्रोटीन का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि प्रोटीन आपकी त्वचा में मसल्स बनने दुबारा शुरू हो जाते हैं। और साथ ही स्किन में लचीलापन भी वापिस आने लगता है और आपके शरीर में भी प्रोटीन की मात्रा भरपूर होती है। प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करने के लिए आप अपने आहार में दालें, बींस, चिकन और मछली को शामिल कर सकते हैं।

फलों और सब्जियों को भरपूर मात्रा में लें:-

vegetabels

फलों और सब्जियों का सेवन भरपूर मात्रा में करने से आपके शरीर को मिनरल्स व् अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते है। जिससे आपकी स्किन को भी भरपूर पोषण मिलता है। और यदि आप इनका सेवन भरपूर मात्रा में करते हैं तो ऐसा करने से आपकी स्किन को टाइट होने में मदद मिलती है। आप सलाद के रूप में या फ्रूट चाट के रूप में भी इनका सेवन कर सकते हैं।

पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें:-

त्वचा के टाइट रहने के लिए जरुरी है की आपकी स्किन हाइड्रेट रहे। और अपनी स्किन को नमीयुक्त रखने के लिए आपको पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। यदि आपकी स्किन हाइड्रेट नहीं होती है तो इससे आपकी स्किन ढीली, रूखी, बेजान, व् झुर्रियों भरी हो जाती है। इसीलिए आपको इससे बचने के लिए पानी का सेवन दिन में कम से कम आठ से दस गिलास करना चाहिए।

स्पा जाएँ:-

यदि आप महीने में एक बार भी स्पा ट्रीटमेंट लेती हैं तो ऐसा करने से भी आपकी त्वचा को पोषण मिलता है। इसीलिए आप चाहे तो इस आसान टिके का इस्तेमाल करके भी अपनी त्वचा को टाइट कर सकते हैं। इससे न केवल आपकी बॉडी की त्वचा बल्कि चेहरे की स्किन में भी कसाव लाने में मदद मिलती है।

योग व् व्यायाम करें:-

योगा व् व्यायाम करने से आपकी बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर तरीके से होता है। जिससे आपकी स्किन को भी पोषण मिलता है जिससे आपकी स्किन को टाइट होने के साथ सूंदर व् दमकती हुई बनने में भी मदद मिलती है। इससे आपकी बॉडी को भी फिट रहने में मदद मिलती है इसीलिए आपको इसके फायदे लेने के लिए अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।

ढीली त्वचा में कसाव लाने के अन्य उपाय:-

  • त्वचा की मसाज नियमित करने से आपको अपनी त्वचा में कसाव लाने में मदद मिलती है।
  • जिम से ट्रेनिंग लेकर भी आप अपनी इस समस्या का समाधान कर सकती हैं।
  • पेय पदार्थो का सेवन भरपूर मात्रा में करने से भी आपको फायदा मिलता है।
  • स्क्रब करने से आपकी स्किन में कसाव लाने में मदद मिलती है।
  • ढीली त्वचा को टाइट करने के लिए आप नियमित दौड़ भी लगा सकते हैं और साइकिलिंग भी कर सकते हैं।
  • पोषक तत्वों युक्त आहार का सेवन करना चाहिए जिससे आपकी स्किन को भी पोषक तत्व मिल सकें।
  • धूप में अधिक नहीं निकलता चाहिए, और निकलते हैं तो अपनी बॉडी को अच्छे से कवर करके जाना चाहिए।
  • मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल नियमित अपनी बॉडी को अपने चेहरे के लिए करना चाहिए।

चेहरे की त्वचा को टाइट करने के तरीके:-

  • अंडे को तोड़कर उसके सफ़ेद भाग को अलग कर लें, उसके बाद इसे अपने चेहरे और गर्दन पर बीस मिनट के लिए लगाएं और धो दें, हफ्ते में दो बार इसे नियमित करने से आपको फायदा मिलता है।
  • च्विंगम चबाने से भी आपको फायदा मिलता है, परन्तु इस बात का ध्यान रखें की उसमे शुगर की मात्रा कम हो ताकि आपके गम्स को कोई नुकसान न हो।
  • एलोवेरा जैल को अपने चेहरे पर लगाएं और सूखने के बाद गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें, इससे भी आपके चेहरे को फायदा मिलता है।
  • निम्बू के रस को चेहरे पर लगाने से भी त्वचा में कोलेजन का निर्माण होता है। जिससे आपकी स्किन को टाइट होने में मदद मिलती है।
  • खीरे के रस को निकालकर चेहरे पर लगाएं और सूखने के बाद चेहरे को धो दें, ऐसा करने से भी आपको स्किन को टाइट करने में मदद मिलती है।
  • चन्दन का मास्क लगाने से भी आपको चेहरे की स्किन को टाइट करने में मदद मिलती है।

तो ये हैं कुछ तरीके जिनका इस्तेमाल करके आप अपनी स्किन को टाइट कर सकते हैं। इसके अलावा यदि आप अपनी स्किन पर मृत कोशिकाओं का जमाव नहीं होने देते हैं। त्वचा को अच्छे से से पोषण देते हैं तो इन तरीको से भी आप अपनी स्किन की प्राकृतिक चमक और उसे टाइट रख सकते हैं।

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गुलाब जल का क्या-क्या उपयोग होता है?

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गुलाब जल त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट जैसे कई गुण पाए जाते है जो स्किन को पोषण देने में मदद करते हैं। गुलाबजल का इस्तेमाल करने से त्वचा में नमी को बनाए रखने में मदद मिलती है जिससे स्किन मुलायम दिखती है।

सिर्फ घरेलू नुस्खों में ही नहीं बल्कि कई तरह की कॉस्मेटिक्स में भी गुलाबजल का इस्तेमाल किया जाता है। त्वचा पर गुलाबजल का इस्तेमाल करने के कई सारे फायदे होते हैं। गुलाबजल का कई तरह से इस्तेमाल किया जाता है त्वचा में ग्लो लाने से लेकर फेस पर मौजूद गंदगी तक सभी को साफ करने में गुलाबजल कारगर होता है। आज हम आपको बता रहे हैं की गुलाबजल का क्या-क्या उपयोग होता है?

गुलाब जल का इस्तेमाल कैसे किया जाता है?

टोनर के रूप में

टोनर का इस्तेमाल चेहरे की गंदगी को साफ़ करने के लिए किया जाता है। टोनर के रूप में गुलाबजल का इस्तेमाल करने के लिए शुद्ध गुलाब जल लें और उसे कॉटन बॉल्स पर डालें। रुई को अच्छी तरह पुरे चेहरे पर लगाएं। गुलाबजल को ऐसे ही चेहरे पर लगे रहने दें। कुछ देर बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें। चेहरा चमकने लगेगा।

मॉश्चराइजिंग के लिए

गुलाब जल का इस्तेमाल कैसे करें?

मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल त्वचा को नमी और पोषण देने के लिए किया जाता है। मॉश्चराइजिंग के लिए गुलाब जल का इस्तेमाल करना है तो तीन चम्मच शुद्ध गुलाब जल, एक चम्मच ग्लिसरीन और एक चम्मच नारियल तेल को एक बोतल में डालकर अच्छे से मिला लें। जब तीनों चीजें अच्छे से मिक्स हो जाएं थोड़ा सा मिश्रण लेकर त्वचा पर लगाएं। कुछ देर बाद पानी से चेहरा साफ़ कर लें। 3 दिन के गैप पर इस उपाय का इस्तेमाल करें।

सनबर्न या टैनिंग के लिए

अगर त्वचा पर टैनिंग या सनबर्न हो गया है तो गुलाबजल का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह त्वचा को रिलैक्स करके जलन में आराम दिलाता है। टैनिंग के लिए, तुलसी की पत्तियों को पीसकर उन्हें गुलाबजल में मिला दें। मिलाने के बाद इस मिश्रण को स्प्रे बोतल में डालकर दो घंटे के लिए फ्रिज में रख दें। और बाद में प्रयोग करें।

कील-मुहांसों के लिए

अगर त्वचा पर मुहांसे और ब्लैकहैड की समस्या बहुत ज्यादा है तो गुलाब जल का प्रयोग करें। गुलाब जल त्वचा को ठंडक देकर मुहांसों में आराम दिलाता है। प्रयोग के लिए एक चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच गुलाब जल जल को अच्छे से मिलाकर चेहरे पर लगाएं। 15 मिनट रखें और फिर ठंडे पानी से चेहरा साफ़ कर लें। अगर त्वचा संवेदनशील है तो नींबू के रस में थोड़ा पानी मिला लें।

क्लींजिंग के लिए

स्प्रे के रूप में गुलाबजल का प्रयोग करें

त्वचा की सफाई के लिए गुलाबजल बहुत फायदेमंद होता है। यह पोर्स को क्लीन करके चेहरे की गंदगी साफ़ करने में मदद करता है। इस्तेमाल करने के लिए स्प्रे बोतल में गुलाबजल भर लें। इससे चेहरे पर तब तक स्प्रे करें जब तक पूरा फेस गीला ना हो जाए। एक मिनट तक ऐसे ही रहने दें और उसके बाद टिश्यू पेपर से चेहरा साफ़ कर लें।

फेस पैक के लिए

फैस पैक के रूप में भी गुलाबजल का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है। फेस पैक बनाने के लिए एक चम्मच मुल्तानी मिट्टी और दो चम्मच गुलाब जल को अच्छे से मिला लें। फेस को पानी से धोकर, तौलिया से सूखा लें। इस पेस्ट को अपने चेहरे लगाएं और दो मिनट तक हलके हाथों से मसाज करें। मसाज के बाद पांच मिनट ऐसे ही रहने दें। उसके बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें।

होंठो के लिए

लिप्स को सुंदर बनाने के लिए भी गुलाबजल का इस्तेमाल किया जाता है। ब्यूटीफुल लिप्स के लिए चुकंदर को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें और उसे 60 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ओवन में आठ से दस मिनट के लिए रख दें। इससे चुकंदर की नमी खत्म हो जाएगी। अब चुकंदर को घिसकर पाउडर बना लें। इस पाउडर में गुलाबजल मिलाएं और गाढ़ा पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को होठों पर लगाएं और 15 मिनट बाद साफ कर लें।

निखरी त्वचा के लिए

ग्लोइंग त्वचा के लिए गुलाब जल बहुत फायदेमंद होता है। ग्लोइंग स्किन के लिए तीन चम्मच गुलाब जल और चार चम्मच शहद अच्छे से मिला लें। अब इस मिश्रण को पुरे चेहरे पर फेस पैक की तरह लगाएं। करीब 15 मिनट तक लगे रहने दें और उसके बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें। स्किन दमकने लगेगी।

इन सब तरह से गुला बजल का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा फ्रेश स्किन, चेहरे के दाग-धब्बो, आँखों, बालों, डार्क सर्कल्स, सेंसिटिव स्किन, झुर्रियां व् सूजन आदि की समस्या में भी गुला बजल का इस्तेमाल किया जाता है।

Unwanted Kit : अनवांटेड किट का इस्तेमाल कैसे करें और क्या क्या परेशानियाँ हो सकती है?

अनवांटेड किट का इस्तेमाल महिला का गर्भपात करने के लिए किया जाता है। जो महिलाएं गर्भ ठहराना नहीं चाहती है, और कई बार उनका गर्भ ठहर जाता है, तो वो इस किट का इस्तेमाल करती है। इसका इस्तेमाल छह से सात सप्ताह के गर्भ को गिराने के लिए किया जाता है। यदि इससे ज्यादा समय हो जाता है, तो आपको डॉक्टर की से ही इस बारे में राय लेनी चाहिए। अनवांटेड किट 200mg टैब्लेट के रूप में होती है।

इस किट का इस्तेमाल करने से महिला को कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है, क्योंकि इसके लेने के बाद प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंग होने लगती है। और यह रक्तस्त्राव काफी ज्यादा होता है। जिसके कारण आपको कमजोरी, थकान, चक्कर, उल्टी, बुखार, और भी कई परेशानियां हो सकती है। और आपको इसका सेवन डॉक्टर की राय के बिना नहीं करना चाहिए। क्योंकि डॉक्टर गर्भ कितने समय का है उसके बाद ही इसे देते है।

Unwanted kit का इस्तेमाल कैसे करें:-

गर्भपात के लिए इस्तेमाल की जाने वाली अनवांटेड किट के मुख्य घटक माईज़ोप्रोस्टोल और मीफेप्रिस्टोन हैं। जो की आपके गर्भ को गिराने में मदद करते है, और यह दवाई आपको डॉक्टर की राय के बिना नहीं मिलती है। इस किट में पांच गोलियां होती है, और डॉक्टर आपको इस बारे में बता देते हैं की किस तरह से, कब, और कितने समय के बाद इसका सेवन करना चाहिए।

Unwanted kit खाने के बाद क्या होता है:-

अनवांटेड किट में पांच गोलिया होती है, जिसमे से एक मीफेप्रिस्टोन जो की 200mg की होती है, और चार गोलिया माईज़ोप्रोस्टोल 0.2mg की होती है। सबसे पहले मीफेप्रिस्टोन की गोली खाली पेट ली जाती है, इस गोली के सेवन के बाद यह प्रेगनेंसी के लिए जरुरी हॉर्मोन प्रोजेस्ट्रोन को बढ़ने से रोकता है। उसके बाद आपको चौबीस से अड़तालीस घंटे के अंदर बाकी बची गोलियों का सेवन करना चाहिए।

इससे आपका सर्विक्स मुलायम होता है, जिसके बाद आपको ब्लीडिंग शुरू हो जाती है। यदि आप सही समय पर इन गोलियों का सेवन नहीं करते हैं तो यह अपना असर अच्छे से नहीं दिखा पाती है। और ब्लीडिंग के खत्म होने के बाद आपको अपना अल्ट्रासाउंड भी करवाना चाहिए। ताकि इससे आपको पता चल सके की आपका गर्भ अच्छे से साफ हुआ है या नहीं।

Unwanted kit के सेवन से होने वाली परेशानियां:-

पेट में दर्द व् ऐंठन:-

इसके सेवन के बाद आपको असहनीय पेट में होने वाले दर्द व् ऐंठन की समस्या का सामना करना पद सकता है। इससे आराम पाने के लिए आप अपने पेट की गरम पानी से सिकाई कर सकते है।

सांस लेने में तकलीफ:-

इस दवाई के इस्तेमाल के बाद आपको सांस लेने में भी परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। परन्तु धीरे धीरे आपको इस परेशानी से आराम मिल जाता है।

उल्टी:-

दवाई के सेवन के बाद आपके शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण आपको उल्टी व् जिस मचलने की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में आपको पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए जिससे शरीर में अधिक कमजोरी न हो।

यूरिन में परेशानी:-

इस दौरान आपको यूरिन पास करते समय परेशानी हो सकती है, जैसे की दर्द, जलन, आदि की समस्या हो सकती है। इसीलिए इन्फेक्शन के खतरे से बचने के लिए प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

थकान व् कमजोरी:-

शरीर कमजोर महसूस करने लगता है, और कुछ भी काम करते हुए बहुत जल्दी थकावट होने लगती है। क्योंकि गर्भपात के समय शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव हो रहे होते है।

हैवी ब्लीडिंग:-

इस दौरान मासिक धर्म से बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है, और यह आपको ज्यादा दिनों के लिए हो सकती है। साथ ही रक्तस्त्राव में कई बार खून के थक्के भी आते है।

भूख कम हो जाती है:-

अनवांटेड किट का सेवन करने के बाद आपकी भूख पर भी असर पड़ता है, जिसके कारण आपको कम खाने की इच्छा होती है। लेकिन शरीर में आ रही इस कमजोरी को दूर करने के लिए आपको अपने खान पान के साथ बिलकुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

अनिंद्रा:-

आपको नींद लेने में भी परेशानी होती है, क्योंकि शरीर में थकान, कमजोरी के कारण अजीब सा महसूस होता है। जिसके कारण आपको सोने की इच्छा नहीं होती है, और दर्द होने के कारण भी आपको ऐसा महसूस हो सकता है।

सर दर्द:-

सर दर्द, चक्कर, सर का भरी महसूस होना, आँखों में दर्द, आदि की परेशानिहोना भी इस दौरान आम बात होती है। ऐसे में आपको जितना हो सके आराम करने की कोशिश करनी चाहिए

दस्त:-

दवाई लेने के कारण आपको दस्त की परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। क्योंकि इस दौरान शरीर में बहुत से परिवर्तन हो रहे होते है।

दर्द की परेशानी:-

अनवांटेड किट का सेवन करने के बाद आपको पेट के साथ कमर, हाथों, पैरों, पेडू, आदि में भी दर्द हो सकता है। इसे बचने के लिए आप अच्छे से मसाज आदि कर सकते है जिससे आपको इस समस्या से आराम मिल सकें।

घबराहट महसूस होती है:-

इन दवाइयों का सेवन करने से आपको घबराहट महसूस हो सकती है। इसके कारण जी घबराने लग जाते है, पसीना भी अधिक आने की परेशानी हो सकती है।

तो आप भी यदि अनचाहे गर्भ को गिराना चाहती है, तो डॉक्टर से राय लेकर आप इसका इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन इसके सेवन के बाद कुछ दिनी तक ज्यादा ब्लीडिंग होने के कारण आपको परेशानी हो सकती है, तो इससे बचने के लिए आपको अपने खान पान का ध्यान रखने के साथ अपनी अच्छे से केयर करनी चाहिए।

नोट:– अनवांटेड किट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की राय जरूर लें।

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नोर्मल डिलीवरी के लिए 10 टिप्स

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बदलती जीवनशैली के कारण आजकल देखा जाता है महिलाओं के पास अपने लिए ही समय नहीं होता है। जिसके कारण समय से पहले ही उन्हें कोई न कोई शारीरिक परेशानी लगी रहती है। और ऐसी ही परेशानियों का सामना उन्हें प्रेगनेंसी के दौरान भी करना पड़ता है। और सबसे ज्यादा परेशान तो महिलाएं प्रसव के समय होती है क्योंकि आज कल डॉक्टर्स भी दर्द से बचाने के लिए नार्मल से ज्यादा सिजेरियन डिलीवरी की सलाह देते हैं। लेकिन फिर भी ज्यादातर महिलाएं यही चाहती हैं की उनकी नोर्मल डिलीवरी हो। क्योंकि यदि आपका प्रसव नोर्मल होता है तो आपको डिलीवरी के समय तो बहुत दर्द होता है। लेकिन उसके बाद फिट होने के लिए आपको ज्यादा समय नहीं लगता है, और न ही ज्यादा शारीरिक समस्याएं होती हैं। नोर्मल डिलीवरी का फायदा न केवल महिला को होता है बल्कि यह शिशु के लिए भी फायदेमंद होती है।

नोर्मल डिलीवरी के लिए टिप्स

क्या आप भी प्रेग्नेंट हैं और आप चाहती हैं की आपकी नोर्मल डिलीवरी हो यदि हाँ तो इसके लिए आपको एक बात का खास ध्यान रखना चाहिए, कि प्रेगनेंसी के दौरान आप अपने स्वास्थ्य का अच्छे से ध्यान रखे जिससे आप स्वस्थ रह सकें और गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी अच्छे से हो। जिससे आपके नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ सकें, इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान आप कुछ टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे आपके नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ जाते हैं आइये जानते हैं कि वो टिप्स कौन से हैं।

बेहतर डाइट

प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहना बहुत जरुरी होता है, क्योंकि जितना आप फिट रहती है उतना आपके नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ते हैं। और फिटनेस के लिए आपको अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, जैसे कि पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेना चाहिए, पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए, समय पर खाना चाहिए, ऐसे आहार से बचना चाहिए जिससे आपको कोई स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी या एलर्जी हो। इससे गर्भवती महिला को फिट रहने के साथ शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

वजन ज्यादा न बढ़ने दें

प्रेगनेंसी के दौरान अपने वजन को भी सही रखना चाहिए क्योंकि यदि आपका वजन बहुत ज्यादा हो जाता है तो ऐसे में नोर्मल डिलीवरी के चांस कम हो जाते हैं। लेकिन इस बात का भी ध्यान रखें कि वजन कम करने के लिए डाइट न करें। बल्कि खाना खाने के बाद थोड़ा वॉक करें, ज्यादा ऑयली न खाएं, आदि इससे आपके वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

हाइड्रेट रहें

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी का हाइड्रेट रहना बहुत जरुरी होता है क्योंकि जितना आपकी बॉडी हाइड्रेट रहती है। इससे भी नोर्मल डिलीवरी में मदद मिलती है और इसके लिए दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन करने के साथ, सूप, घर में ताजा बना हुआ जूस आदि भरपूर मात्रा में लें।

तनाव से रखें दूरी

स्ट्रेस लेने से भी गर्भावस्था के दौरान आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आप तनाव से दूरी बनाकर रखें। जितना हो प्रेगनेंसी में आप खुश रहें दिमाग को रिलैक्स रखें, इससे आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी और सामान्य प्रसव के चांस बढ़ाने में मदद मिलेगी।

व्यायाम करें

प्रेगनेंसी के दौरान आपको हल्का फुल्का व्यायाम करते रहना चाहिए, लेकिन अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए। यदि आपको शारीरिक समस्या अधिक रहती है तो बॉडी पर जोर नहीं डालना चाहिए। और यदि आप ठीक हैं तो हल्का फुल्का व्यायाम करना चाहिए, इससे बच्चे कि पोजीशन को सही रहने में मदद मिलती है जिससे आपको डिलीवरी के समय अधिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। और इससे बॉडी को सामान्य प्रसव के लिए तैयार करने में मदद मिलती है।

घी का सेवन

यदि आप गर्भावस्था के नौवें महीने में घी का भरपूर सेवन करते हैं तो ऐसा करने से सर्विक्स में चिकनाहट उत्त्पन्न होती है, जो न केवल नोर्मल डिलीवरी के लिए फायदेमंद होती है, बल्कि इस दौरान होने वाली प्रसव पीड़ा से निजात दिलाने में भी आपको मदद करती है। इसीलिए सामान्य प्रसव के लिए प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में घी का भरपूर सेवन करना चाहिए।

मालिश करें

प्रेगनेंसी के आखिरी महीनो में आपको अपनी बॉडी कि हल्की मसाज भी करनी चाहिए इससे न केवल आपको बॉडी में होने वाले दर्द से आराम मिलता है। बल्कि आपके शरीर को लेबर पेन के लिए तैयार करने में भी मदद मिलती है। लेकिन ध्यान रखें पेट पर ज्यादा तेजी से मालिश न करें।

फिटनेस का रखें ध्यान

प्रेगनेंसी के दौरान जितना आप स्वस्थ रहती है उतना ही शिशु का बेहतर विकास होता है और नोर्मल डिलीवरी के चांस भी बढ़ते हैं। और इसके लिए आपको अपनी दिनचर्या का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए जैसे कि एक्सरसाइज करना, नींद भरपूर लेना, खान पान का अच्छे से ध्यान रखना, इससे आप फिट रहती है और आपको सामान्य प्रसव के लिए मदद मिलती है। साथ ही आपको डिब्बाबंद चीजों, बाहर के खाने आदि का सेवन नहीं करना चाहिए इससे गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों पर ही बुरा असर पड़ता है।

खून की कमी से बचें

नोर्मल डिलीवरी के लिए शरीर में ब्लड कि मात्रा पूरी होनी चाहिए यदि आपके शरीर में आयरन कि कमी होती है तो इससे नोर्मल डिलीवरी के चांस कम हो जाते है। ऐसे में खून कि कमी से बचने के लिए आपको प्रेगनेंसी के दौरान आयरन युक्त आहार का भरपूर सेवन करना चाहिए।

डॉक्टर से राय लें

प्रेगनेंसी के समय आपको समय समय पर जांच करवाने के साथ डॉक्टर से राय लेते रहना चाहिए, और नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ाने के उपाय पूछने चाहिए। जिससे गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी अच्छे से हो सके और प्रेगनेंसी के दौरान आपको भी फिट रहने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल यदि आप प्रेगनेंसी के समय करते हैं तो ऐसा करने से आपके नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है। और यदि आपकी प्रेगनेंसी में किसी तरह कि कॉम्प्लीकेशन्स हैं और आपको शारीरिक समस्या हैं तो आपको अपनी बॉडी पर किसी तरह का जोर नहीं डालना चाहिए कि नोर्मल डिलीवरी हो, यदि आप ऐसा करती हैं तो हो सकता हैं कि आपकी परेशानी बढ़ जाएँ।