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बालों को तेज़ी से बढ़ाने और घने करने के तरीक़े

long haiirकाले, लम्बे, घने और ख़ूबसूरत बाल किसे अच्छे नहीं लगते! हर लड़की की पहली चाहत यही होती है कि उसके बाल काले, लम्बे और घने हों। ख़ूबसूरत बाल हमारी व्यक्तित्व को निखारते हैं और शारीरिक सौंदर्य को बढ़ाने में काफी मदद करते हैं। लेकिन त्वचा की ही भाँति बालों को भी विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है, इसलिए अपने बालों को स्वस्थ, मुलायम और चमकदार बनाए रखने के लिए उन्हें भरपूर पोषण देना बहुत जरूरी होता है।

वैसे तो आजकल मार्केट में ढेर सारे प्रोडक्ट हमारे बालों की देखभाल के लिए मिल जाते हैं, लेकिन महंगे होने के साथ-साथ उनमें केमिकल भी होते हैं, जो बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू उपाय बताने जा रहे हैं, जिनसे आपके बाल प्राकृतिक रूप से काले, लंबे और घने बनेंगे और बालों को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचेगा।

बालों को काला, घना लम्बा बनाने के घरेलू नुस्ख़े – 

  1. आँवला बालों के लिए आँवला बहुत लाभदायक होता है। आँवले में विटामिन C, विटामिन B कॉम्प्लेक्स, केलशियम, फ़ोसफ़ोरस, आयरन और केरोटीन जैसे पोषक तत्वों की मौजूदगी के कारण इससे बालों को बढ़ने में काफी मदद मिलती है। अगर आपके बाल काले नहीं हैं तो आँवला और रीठा का पाउडर मिक्स करके लगाने से आपके बाल काले हो जाएंगे। आँवले के जूस को सप्‍ताह में एक बार बालों में लगाने से बाल तेजी से बढ़ने लगते हैं।
  2. अंडा अंडे में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, सेलेनियम, फास्फोरस, जिंक, आयरन, फोलेट, सल्फर और विटामिन A, E, D, B12, B5 होता है, जो हमारे बालों को झड़ने से बचाते हैं। अंडे में मौजूद पोषक तत्‍व बालों के लिए भी फ़ायदेमंद होते हैं। ये पोषक तत्‍व बालों को लंबा करने में भी मदद करते हैं।
  • एक अंडे में एक टी स्पून ज़ैतून का तेल मिलाएँ, और बालों में अच्छी तरह से मसाज करें। 15-20 मिनट बाद किसी अच्छे शैम्पू व ठंडे पानी से बाल धो दें। इस मिश्रण से बालों की नियमित मसाज करने से बाल तेज़ी से बढ़ने लगते हैं।
  • एक बाउल में एक अंडा लें, इसमें थोड़ा सा शैम्पू मिक्स डालें व अच्छी तरह मिक्स करें और इस मिश्रण से अपने बाल धो लें। या फिर अकेले अंडे को अच्छी तरह फेंट कर अपने बालों में अच्छी तरह लगाएँ, 10-15 मिनट तक सिर पे कोई तौलिया लपेट कर छोड़ दें। फिर किसी अच्छे शैम्पू से बाल धो दें।
  • अंडे की जर्दी बालों में लगाने से प्रदूषण और नुकसादनदेह यूवी किरणों से बाल बचते हैं।
  1. प्याज आपने अब तक प्याज को एक सब्जी के रूप में ही देखा होगा, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि प्याज़ के प्रयोग से आप बालों को झड़ने से रोक सकते हैं। प्याज़ का रस बालों की सारी समस्याओं को दूर करता है और बालों को पोषण देता हैं। प्याज़ में पाया जाने वाला एनजाईंम  केटालेज़ (catalase), जो की एंटी-ओक्सिडेंट है, बालों को झड़ने से बचाने के साथ-साथ उन्हें सफ़ेद होने से भी बचाता है। प्याज के रस में सिर पर संक्रमण को रोकने वाला बैक्टीरियल गुण होता है, जो बालों को पतला होने से रोकता है। ये ब्लड सर्क्युलेशन को बढ़ा कर hair follicles को पोषण देता है।
  2. नारियल और जैतून का तेल एक बड़ा चम्मच नारियल तेल और जैतून का तेल लें और मिक्स कर लें। इसे अपने बालों में कम से कम हफ्ते में तीन बार लगाएं। इससे बालों के झड़ने से राहत मिलेगी।
  3. आलू आलू में विटामिन B, विटामिन C, zinc, niacin और iron जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो की hair follicles को पोषण देकर बालों को बढ़ने में मदद करते हैं। बालों को तेज़ी से लम्बा करने के लिए व स्वस्थ और घने बालों के लिए सबसे पहले आलू के रस से अपने सिर की त्वचा पर धीरे धीरे मसाज करें, फिर बाक़ी बचा जूस बालों पर लगा दें। अब अपने सिर को किसी तौलिए अथवा शॉवर कैप से ढक दें। 20-25 मिनट बाद ठंडे या गुनगुने पानी से बालों को धो दें।
  • आलू के रस में अंडा और शहद मिक्स करके लगाने से बाल स्वस्थ, सुंदर व चमकदार बनते हैं। ये मिश्रण एक अच्छे कंडिशनर की तरह काम करता है।
  1. मेथी बालों की बढ़ने की गति को बढ़ाने के लिए मेथी के बीजों को 24 घंटे तक पानी में भिगो के रखिए। अब पानी से बीज छान कर निकाल दीजिए और इस पानी को बाल धोने में प्रयोग कीजिए। एक और नुस्ख़े में आप मेथी के बीजों को पीस कर पेस्ट बना लीजिए और अब इसमें थोड़ा नारियल का तेल मिक्स कीजिए। अब इस मिश्रण को बालों और सिर की त्वचा पर लगा लीजिए। आधे घंटे बाद बाल धो दीजिए। मेथी dandruff यानि की रूसी के इलाज में भी फ़ायदेमंद होती है।
  2. निम्बू निम्बू के रस को सीधे स्कैल्प पर लगाना, सबसे बेहतरीन उपाय है डैंड्रफ से छुटकारा पाने का। एक निम्बू लेकर, उसे बीच से काटें और रस निकाल कर स्कैल्प पर लगा दें। 10-15 मिनट बाद  ठंडे या गुनगुने पानी से सिर धो दें। निम्बू लगाने से ना सिर्फ़ डैंड्रफ ठीक होता है, बल्कि बाल भी बढ़ते हैं। परंतु निम्बू में प्राकृतिक रूप से ब्लीचिंग के गुण होते हैं, इसलिए ये आपके बालों के रंग को हल्का कर सकता है। इसे लगाकर कभी भी धूप में ना जाएँ।
  3. बादाम बादाम के तेल में 2-3  टी स्पून  बादाम का दूध मिलाकर सिर की त्वचा यानि बालों की जडों पर लगाने से बाल मजबूत और घने होते हैं।
  4. शहद शहद में आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, सोडियम, विटामिन B और C, एंजाइम्स और अमीनो एसिड पाए जाते हैं। शहद बालों व त्वचा के लिए कुदरती मॉइस्चराइजर का काम करता है। शहद बालों को नर्म, मुलायम, चमकदार और स्वस्थ बनाने में मदद करता है।

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बालों को स्वस्थ और सुंदर बनाने के लिए सिर्फ़ बाहरी पोषण काफ़ी नहीं होता। इसके लिए आपको अपने खानपान व रहन सहन का भी ध्यान रखना होगा, तभी ख़ूबसूरत बालों का सपना सच होगा। निम्नलिखित बातों का ध्यान रख के पा सकते हैं आप ख़ूबसूरत बाल –

  • अपने आहार में इन्हें शामिल करें – 
    • साबुत अनाज साबुत अनाज में जिंक, विटामिन बी और आयरन जैसे पोषक तत्‍व पाये जाते हैं, जो बालों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। जिंक उन हार्मोन का संचालन करता है जो बालों को मजबूत, मोटे और लंबे बनाते हैं। अगर आप नियमित रूप से ज़िंकयुक्त आहार खा रहे हैं तो आपके बाल मजबूत होंगे और बालों के गिरने की समस्‍या ‍भी नहीं होगी।
    • अंडा अंडे में प्रोटीन और अमीनो एसिड, विटमिन (A, B12, D, E) और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो बालों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। इसमें प्रचुर मात्रा में मौजूद प्रोटीन और  लेसिथिन बालों के फॉलिकल्स को मजबूत बनाते हैं।
    • ड्राई फ़्रूट्स बादाम, अखरोट आदि बालों के लिए कुदरत का वरदान हैं। इनमें आयरन, कॉपर,  फॉस्फोरस,  विटमिन बी12 और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है। यह शरीर में हीमोग्लोबिन को बढाता है और नई कोशिकाओं का विकास करता है, जिससे बाल स्वस्थ रहते हैं।
    • गाजर गाजर में विटामिन A पाया जाता है, यह ना केवल आँखो के लिए बल्कि बालों के लिए भी बहुत फायदेमंद है। गाजर बालों में आवश्यक प्राकृतिक तेलों को बनाए रखने में मदद करता है। गाजर खाने से बाल स्‍वस्‍थ और चमकीले होते हैं।
    • केला केला स्‍वास्‍थ्‍य के साथ-साथ बालों के लिए भी बहुत लाभदायक है। रोज एक केला खाने से बाल मजबूत होते हैं। इसमें शुगर, फाइबर, थाइमिन, niacin, फॉलिक एसिड तथा विटामिन A और B पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है। केले में आयरन भरपूर मात्रा में होता है, जिसके कारण खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है और बाल हेल्‍दी और मजबूत होते हैं।
    • डेयरी प्रॉडक्ट्स डेयरी प्रॉडक्ट्स जैसे दूध, दही और पनीर बालों के लिए फायदेमंद हैं। दूध को बालों में लगाने से बाल मजबूत और चमकदार होते हैं। अगर आपके बाल बेजान और उलझे हुए हैं तो उनमें दूध लगाइए। बाल प्रोटीन से बने होते हैं ओर डेयरी उत्‍पादों में प्रोटीन काफी मात्रा में पाया जाता है। इनमें कार्बोहाइड्रेट्स, विटामिन, मिनरल्‍स होते हैं जो बालों के ग्रोथ के लिए जरूरी होते हैं।
  • इसके अलावा गीले बालों में कंघी ना करें, बालों की कसी हुई चोटी बनाकर ना सोएँ, तनाव से दूर रहें, सब्ज़ियाँ और फल अधिक खाएँ, ख़ूब पानी पिएँ, नशीले पदार्थों से दूर रहें। इन सब बातों का ख़्याल रखेंगे और ऊपर लिखे नुस्ख़े अपनाएँगे तो आपके बाल निश्चित ही काले, घने, स्वस्थ और सुंदर रहेंगे।

संतरे, निम्बू, आंवले का सेवन क्यों जरुरी है आज कल प्रेगनेंसी में

प्रेगनेंसी महिला के लिए बहुत ही खास समय होता है क्योंकि इस दौरान महिला के गर्भ में एक नन्ही सी जान पल रही होती है। ऐसे में महिला को अपनी और अपने बच्चे की सेहत का अच्छे से ध्यान रखने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। खासकर आजकल जब कोरोना वायरस व् अन्य फ्लू का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ रहा है।

ऐसे में गर्भवती महिला को अपनी डाइट में संतरा, निम्बू, आंवला, जैसे फलों को शामिल करने की सलाह दी जा रही है। अब आप ऐसा सोच रहे होंगे की आखिर संतरे, निम्बू, आंवले का सेवन इस समय क्यों जरुरी है प्रेग्नेंट महिला के लिए तो आइये अब इस आर्टिकल में इसी के बारे में जानते हैं।

पाचन क्रिया के लिए: फाइबर से भरपूर संतरा, निम्बू, आंवला प्रेग्नेंट महिला की पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को खाना अच्छे से हज़म करने, कब्ज़, एसिडिटी जैसी समस्या से बचे रहने, भूख को सही रखने आदि में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों का सेवन कर सकती है और ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने और बच्चे के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है।

इम्युनिटी: किसी भी तरह के संक्रमण से बचे रहने के लिए सबसे जरुरी होता है की प्रेग्नेंट महिला भरपूर मात्रा में विटामिन सी युक्त आहार का सेवन करे। और निम्बू, आंवला, संतरा, में विटामिन सी भरपूर होता है। जो प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है, और आजकल चल रही बिमारियों से बचे रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी बेहतर होना बहुत जरुरी है।

आयरन: संतरा, निम्बू, आंवलें में विटामिन सी की अधिकता होती है और विटामिन सी बॉडी के सभी अंगों में आयरन को अच्छे से अवशोषित करने में मदद करता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को खून की कमी से बचे रहने के साथ बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है: संतरा, निम्बू,आंवले में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। जिससे प्रेग्नेंट महिला को बिमारियों के खतरे से बचे रहने में मदद मिलती है।

कैल्शियम: निम्बू, संतरा, आंवला कैल्शियम का भी बेहतरीन स्त्रोत होता है जो गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत करने के साथ बच्चे की हड्डियों के विकास में भी फायदेमंद होता है। जिससे महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, ऐसे में इस दौरान महिला को इन खाद्य पदार्थों का सेवन जरूर करना चाहिए।

एंटी इंफ्लेमेटरी गुण: निम्बू, संतरा, आंवला एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भी भरपूर होते हैं। जो प्रेग्नेंट महिला को सूजन जैसी परेशानी से बचाव करने में भी मदद करते हैं।

ऐसे में इन सभी फायदों के लिए और माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने के लिए अपनी डाइट में संतरा, निम्बू, आंवले को जरूर शामिल करना चाहिए।

वीडियो संतरे, निम्बू, आंवले का सेवन क्यों जरुरी है प्रेगनेंसी में

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क्या प्रेगनेंसी के दौरान वीट का इस्तेमाल करना चाहिए?

प्रेगनेंसी में वीट का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं, गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण स्किन पर भी असर पड़ता है। जैसे की प्रेग्नेंट महिला की स्किन ज्यादा सेंसिटिव हो सकती है। ऐसे में स्किन के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले प्रोडक्ट्स को इस्तेमाल करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए। की कहीं उनमे केमिकल की मात्रा अधिक तो नहीं है या प्रेगनेंसी के दौरान इससे स्किन को कोई नुकसान तो नहीं होगा। तो आइये आज हम एक ऐसे सवाल का जवाब आपको देने जा रहे हैं। जिसके बारे में बहुत सी प्रेग्नेंट महिलाएं जानना चाहेंगी।

प्रेगनेंसी में वीट का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं?

  • गर्भावस्था के दौरान स्किन पर होने वाले बालों को रिमूव करने के लिए गर्भवती महिला को क्या करना चाहिए इसके बारे में अधिकतर गर्भवती महिलाएं जानना चाहती है।
  • वीट का इस्तेमाल करने से आसानी से स्किन पर होने वाले बालों को हटाने में मदद मिलने के साथ स्किन की कोमलता को बरकरार रखने में भी मदद मिलती है।
  • लेकिन प्रेग्नेंट महिला को वीट का इस्तेमाल करने से पहले अपनी हाथ या पैर की स्किन पर उसे थोड़ा लगाकर देखना चाहिए।
  • की कहीं इसके इस्तेमाल से प्रेग्नेंट महिला को किसी तरह की एलर्जी, खुजली, जलन, लाल दाने आदि तो नहीं हो रहे हैं।
  • यदि ऐसा कुछ नहीं हो रहा है तो प्रेग्नेंट महिला अपने हाथ, पैर, अंडरआर्म्स के लिए वीट का इस्तेमाल कर सकती है।
  • लेकिन प्राइवेट पार्ट के लिए वीट का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि खुशबूदार होने के साथ इसमें केमिकल की अधिकता भी होती है।
  • और प्रेगनेंसी के दौरान प्राइवेट पार्ट के लिए अधिक केमिकल युक्त या खुशबूदार चीजों का इस्तेमाल करने की मनाही होती है।
  • क्योंकि इसके कारण इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है।
  • प्रेग्नेंट महिला को इन्फेक्शन की समस्या होने के कारण इसका नकारात्मक असर भ्रूण पर भी पड़ सकता है।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को प्राइवेट पार्ट के लिए वीट की जगह पूरी सावधानी के साथ रेज़र का इस्तेमाल करना ही सही होता है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान वेट का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं इससे जुड़े कुछ टिप्स। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और शरीर पर होने वाले अनचाहे बालों को हटाने के लिए वीट का इस्तेमाल करने की सोच रहे हैं। तो उसके लिए इन बातों का खास ख्याल रखें।

प्रेगनेंसी में हमेशा पैरों में दर्द रहता है ऐसे पाएं छुटकारा

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिसमे से पैरों में दर्द महसूस होना बहुत ही आम बात होती है। यह समस्या प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के आखिर व् तीसरी तिमाही में अधिक महसूस हो सकती है। इसके अलावा जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान अपने खान पान का ध्यान नहीं रखती है उन महिलाओं को भी शरीर के सभी अंगो में दर्द रहने के साथ पैरों में भी दर्द की समस्या होती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में पैरों में दर्द होने के क्या कारण होते हैं व् किस तरह से गर्भवती महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है।

प्रेगनेंसी में पैरों में दर्द होने के कारण

  • यदि गर्भवती महिला भारी सामान उठाती है, सीढ़ियां अधिक चढ़ती है, पैरों के भार बैठकर काम करती है, ज्यादा देर एक ही जगह पर खड़ी रहती है, तो इस कारण पैरों पर दबाव पड़ता है जिसकी वजह से पैरों में दर्द होता है।
  • गर्भावस्था के दौरान वजन लगातार बढ़ता है जिसके कारण पैरों पर दबाव भी बढ़ता है और पैरों में दर्द की परेशानी होती है।
  • बच्चे का वजन बढ़ने, गर्भाशय का आकर बढ़ने के साथ पैरों की नसों पर दबाव पड़ने के साथ पैरों तक ब्लड फ्लो भी अच्छे से नहीं होता है जिस कारण महिला को पैरों में दर्द होता है।
  • गर्भवती महिला को यदि पैरों में सूजन की समस्या है तो सूजन के साथ महिला को दर्द का अनुभव भी होता है।
  • खान पान में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण शरीर में थकान व् कमजोरी की समस्या होती है क्योंकि बॉडी के सभी हिस्सों को जरुरी पोषक तत्व नहीं मिलते हैं जिसके कारण महिला को पैरों में दर्द की समस्या होती है।
  • जिन महिलाओं को जुड़वाँ या उससे ज्यादा बच्चे होने वाले होते हैं उन्हें यह परेशानी ज्यादा होती है।

गर्भावस्था में पैरों में दर्द से निजात पाने के टिप्स

गर्भवती महिला यदि पैरों में दर्द की समस्या से परेशान है तो इसे लेकर गर्भवती महिला को घबराने की जरुरत नहीं है। क्योंकि कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके गर्भवती महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है। तो आइये अब जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

मालिश करें

रोजाना रात को सोने से पहले किसी भी तेल को हल्का गुनगुना करके अच्छे से मसाज करें। ऐसा करने से पैरों में ब्लड फ्लो अच्छे से होगा, सूजन कम होगी, जिससे पैरों के दर्द को आराम मिलेगा।

सिकाई करें

गुनगुने पानी में नमक डाल लें, फिर उसमे पैरों को डालकर उसमे बैठ जाये। थोड़ी देर बाद पैरों को निकालकर सूखे कपडे से साफ़ करें। और ढककर सो जाएँ, इसके अलावा बर्फ से, गर्म पानी को बोतल में डालकर, नमक को गर्म करके कपडे में बाँध सिकाई करने से भी पैरों के दर्द से निजात पाने में गर्भवती महिला को मदद मिलती है।

खान पान का ध्यान रखें

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण भी पैरों में दर्द की समस्या अधिक होती है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस समस्या से राहत पाने के लिए अपने आहार में पोषक तत्वों को भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए। ताकि बॉडी के सभी पार्ट्स को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मिलें और गर्भवती महिला को पैरों में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके।

अपने उठने बैठने की पोजीशन का ध्यान रखें

गक्लात्त पोजीशन में उठने बैठने के कारण भी गर्भवती महिला को पैरों में दर्द की समस्या होती है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए गर्भवती महिला को एक ही पोजीशन में बहुत देर तक बैठना नहीं चाहिए, एक ही पोजीशन में बहुत देर तक खड़े नहीं रहना चाहिए, पैरों के भार बैठकर कोई काम नहीं करना चाहिए, पैरों को लटकाकर बहुत देर तक नहीं बैठना चाहिए, ऐसी किसी पोजीशन में बैठने से बचे जिससे पैरों पर दबाव पड़ें, आदि। यदि गर्भवती महिला इन सभी बातों का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से भी महिला को पैरों में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

स्ट्रेचिंग करें

बैठे बैठे ही गर्भवती महिला को पैरों को स्ट्रेच करने वाली एक्सरसाइज करनी चाहिए। ऐसा करने से पैरों में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है साथ ही मांसपेशियों को रिलैक्स महसूस होता है। जिससे गर्भवती महिला को पैरों में होने वाले दर्द से बचे रहने में मदद मिलती है।

पानी का भरपूर सेवन करें

बॉडी में पानी की कमी होने के कारण गर्भवती महिला को सूजन की समस्या अधिक होती है। और सूजन के कारण गर्भवती महिला को पैरों में दर्द महसूस होता है ऐसे में इस समस्या से बचने के लिए गर्भवती महिला को तरल पदार्थों का सेवन भरपूर करना चाहिए।लेकिन ध्यान रखें की चाय, कॉफ़ी आदि का सेवन कम करें क्योंकि कैफीन का सेवन करने से आपकी परेशानी बढ़ती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान पैरों में दर्द होने के कारण व् इस परेशानी से बचने के कुछ आसान उपाय, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपको भी यह परेशानी हैं तो आप भी इन आसान टिप्स का इस्तेमाल करके आसानी से इस परेशानी से निजात पा सकती हैं।

गर्भावस्था में पनीर खाने के फायदे

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने के लिए अपने खान पान का विशेष रूप से ध्यान रखना पड़ता है। और गर्भवती महिला को ऐसी चीजों का सेवन करने की अधिक सलाह दी जाती है जो न केवल पोषक तत्वों से भरपूर हो बल्कि जिससे बॉडी को एनर्जी मिले और गर्भ में पल रहे शिशु का बेहतर विकास भी हो। तो लीजिये आज हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान पनीर का सेवन महिला के लिए कितना फायदेमंद होता है इससे जुड़े कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं। दूध पीने से कितने फायदे मिलते हैं यह तो आप जानते ही हैं, और पनीर दूध से ही बनता है, तो ऐसे में यह भी पोषक तत्वों से भरपूर होता है।

और यदि गर्भवती महिला इसका सेवन करती है तो इसके सेवन से भी महिला को भरपूर पोषक तत्व मिलते हैं। लेकिन कई बार महिला को पनीर का सेवन न करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि कच्चा पनीर या अधिक पनीर का सेवन महिला की परेशानी को बढ़ा भी सकता है। लेकिन यदि आप पनीर की सब्ज़ी बनाकर और इसे पर्याप्त मात्रा में खाते हैं तो यह आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा आप चाहे तो इसका कितना सेवन सही होता है इसके लिए आप डॉक्टर से भी पूछ सकते हैं। तो लीजिये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में पनीर का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

कमजोरी होती है दूर

हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कमजोरी व् थकान का अनुभव होना आम बात होती है। लेकिन पनीर का सेवन करने से महिला को पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा मिलती है, जो महिला को फिट रखने में और एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करती है। जिससे कमजोरी, थकान, सिर दर्द, जैसी परेशानी से निजात मिलता है।

हड्डियों की मजबूती के लिए

कैल्शियम, फॉस्फोरस, व् अन्य मिनरल्स से भरपूर पनीर का सेवन करने से गर्भवती महिला की हड्डियों को भरपूर पोषण मिलता है। जिससे महिला की हड्डियों की मजबूती को बरकरार रखने में मदद मिलती है, साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक विकास के लिए भी पनीर का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।

दर्द व् संक्रमण से करता है बचाव

पनीर एंटी इंफ्लेमेंट्री गुणों से भरपूर होता है जो गर्भवती महिला के शरीर में होने वाले दर्द, किसी भी तरह के संक्रमण, सूजन आदि की समस्या से महिला को बचाव करने में मदद करता है। इसीलिए गर्भवती महिला को इसे अपने आहार में जरूर शामिल करना चाहिए, ताकि उन्हें इस परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके।

वजन नियंत्रित करता है

पनीर का सेवन करने से पेट भरा हुआ रहता है, और लम्बे समय तक भूख का अहसास भी नहीं होता है। जिसके कारण प्रेगनेंसी में बार बार भूख लगने की समस्या नहीं होती है, और आपके वजन को भी नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

तनाव कम करता है

पनीर में ट्राईप्टोफन एमिनो एसिड मौजूद होता है, जो दिमाग को शांत रखने के मदद करता है, जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को तनाव से बचे रहने में मदद मिलती है, और साथ ही इससे गहरी और भरपूर नींद लेने में भी मदद मिलती है।

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है

प्रेगनेंसी के दौरान इम्युनिटी का बेहतर होना बहुत जरुरी होता है ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को हर तरह के संक्रमण से बचाव करने में मदद मिल सके। और पनीर में मौजूद पोषक तत्व इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं।

डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियों को करता है कम

ओमेगा 3 फैटी एसिड की मात्रा भरपूर होने के कारण शिशु में जन्म दोष को कम करने के साथ गर्भवती महिला को लेबर पेन के कारण होने वाली परेशानी, और डिलीवरी के समय आने वाली दिक्कतों को कम करने में भी पनीर का सेवन से फायदा मिलता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो आपको प्रेगनेंसी के दौरान पनीर का सेवन करने से मिलते हैं, लेकिन आपको इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की आपको कच्चा पनीर, बासी पनीर, सोया से बना पनीर आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। और यदि आपको इससे एलर्जी होती है तो भी इसके सेवन से बचना चाहिए। साथ ही पर्याप्त मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए ताकि आपको इसके सेवन के भरपूर फायदे उठाने में मदद मिल सके।

नोज पियर्सिंग करवाने से पहले जान ले ये बातें!

नाक छिदवाने के बाद और पहले इन बातों का ध्यान रखें, नाक छिदवाने के बाद इसे ध्यान रखें, नोज पियर्सिंग में ध्यान रखने योग्य बातें, नाक छेदन में हो सकती है समस्या ये है उपाय, नाक छिदवाने के बाद दर्द ये है इलाज, नाक छिदवाने से पहले ये करें, नाक छिदवाने के बाद ये करें, नोज पियर्सिंग फैशन है या मज़बूरी, नोज पियर्सिंग टिप्स, नोज पियर्सिंग कैसे करवाएं, नोज पियर्सिंग लड़कियों का शौक, नोज पियर्सिंग के बाद क्या करें क्या नहीं करें, नोज पियर्सिंग में होने वाली समस्याएं 

महिलाओं के लिए नाक छिदवाना बेहद जरुरी होता है। क्योंकि स्त्री के सोलह श्रृंगारों में से एक नाक की नथ होती है जिसे विवाह के बाद पहनना अति आवश्यक होता है और इसे पहनने के लिए नाक छिदवाना जरुरी होता है। पहले के समय में यह संस्कृति और परंपरा पूर्ण करने के लिए पहनी जाती है लेकिन इसकी सुंदरता और लुक को देखकर आज की युवा भी इसपर मोहित हो चुकी है। जो लड़कियां नाक छिदवाने से डरती थी वे आज खुद जाकर नाक छिदवा रही है।

क्योंकि नाक छिदवाने से न केवल स्त्री की खूबसूरती बढ़ती है बल्कि उस पर पहने वाले आभूषण उसके नारित्त्व को भी निखारता है। धार्मिक ग्रंथों की माने को स्त्रियों का नाम छिदवाना इसीलिए भी जरुरी है क्योंकि इससे स्त्री की सम्पूर्णता मालूम होती है।

कुछ समय पहले लड़कियां इसे इतना अधिक पसंद नहीं करती थी लेकिन आज कल इसका प्रचलन बहुत अधिक देखने को मिल रहा है। जिसे देखों वही नाक छिदवाये दिखाई पड़ती है। और उसमे तरह तरह की नोज रिंग और कोके आदि पहनती है।

लेकिन केवल नाक छिदवाना पर्याप्त नहीं क्योंकि नाक छिदवाने के बाद बहुत सी बातों का ख्याल रखना होता है। अन्यथा दुष्परिणाम आपको ही भुगतना होगा। इसीलिए आज हम आपको नाक छिदवाने से पूर्व और उसके बाद ध्यान रखने योग्य बातों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप अपनी नोज और स्किन की केयर कर सकती है।

नाक छिदवाने से पूर्व ध्यान रखने योग्य बातें :naak chidwanae

1. नाक छिदवाने से पूर्व इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की आपकी नोज स्किन थोड़ी सॉफ्ट हो। ऐसा करने से पियर्सिंग में आसानी होती है। इसके लिए कुछ दिन पहले से ही अपनी स्किन को नरम करने लगे। ऐसा करने से दर्द भी नहीं होगा।

2. वैसे तो नोज पियर्सिंग के बाद अधिकतर चांदी की बाली ही पहनाई जाती है। लेकिन आप कुछ और ट्राई करना चाहती है तो उसका चयन पहले ही कर लें ताकि छेदन के बाद आप उसे पहन सके।

3. नोज पियर्सिंग कभी भी सर्दियों में नहीं करवानी चाहिए। क्योंकि इस दौरान स्किन बहुत रूखी होती है ऐसे में नाक छेदते समय काफी परेशानी होती है।

4. अगर आप पहले ही नाक छिदवा चुकी है तो उसे छेड़ें है। और न ही नोज पिन को निकालें। ऐसा करने से परेशानी आपको ही होगी।

5. नाक केवल उसी व्यक्ति या सुनार से छिदवाये जो इस कार्य में प्रशिक्षित हो अन्यथा समस्या हो सकती है।

नाक छिदवाने के बाद ध्यान रखने वाली बातें :

1. नाक छिदवाने के कम से कम 3 महीने तक देखभाल करनी होती है। अन्यथा सूजन आ सकती है।

2. नाक छिदवाने के बाद हल्दी में थोड़ा सा घी डालकर उसे हल्का गर्म कर लें। और नाक पर लगाएं। ऐसा करने से सूजन नहीं होती और दर्द भी नहीं होता।

3. नाक छिदवाने के बाद थोड़ी सी चीनी खा लेनी चाहिए। ऐसा करने से संक्रमण नहीं होता।

4. नियमित तौर पर ढंग से सफाई करनी चाहिए। क्योंकि अगर आप ऐसा नहीं करेंगी तो संक्रमण हो सकता है।

5. हां, नाक छिदवाने में थोड़ा दर्द होता है लेकिन वो कुछ समय के लिए होता है बाद में धीरे धीरे ठीक हो जाता है।

6. कुछ महिलाओं का मानना है की नाक छिदवाने के बाद कुछ दिनों तक चने, छोले राजमा आदि जैसे छोटे दानों वाली चीजें का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से नाक पर दाना निकल आता है। ये सच है या झूट हम नहीं कह सकते? क्योंकि यह केवल एक मान्यता है!

7. अगर नाक छिदवाने के बाद किसी तरह का घाव या सूजन आ जाती है तो उसके उपचार के लिए गर्म तेल और हल्दी का मिश्रण घाव पर लगाएं। इसे थोड़ा गर्म करके रुई की मदद से नाक पर लगाएं। घाव जल्दी सूखेगा और दर्द भी नहीं होगा।

शिशु को बुखार होने पर क्या खिलाना चाहिए

छोटे बच्चे को बुखार होने का मतलब होता है की घर के हर एक व्यक्ति का परेशान होना। क्योंकि बच्चे को बुखार होने पर बच्चा बहुत चिड़चिड़ा हो जाता है, बहुत ज्यादा रोता है, खाने पीने में दिक्कत करता है, आदि। जिससे घर के सभी सदस्य परेशान रहते हैं। लेकिन यदि बच्चे को ठीक करना है। तो दवाई के साथ बच्चे के खान पान का ध्यान रखना भी जरुरी होता है।

ऐसे में बच्चा यदि छह महीने तक का है तो बच्चे के लिए माँ का दूध ही सर्वोत्तम आहार है। लेकिन यदि आपका बच्चा छह महीने से बड़ा है तो आपको बच्चे के खान पान का ध्यान रखना ज्यादा जरुरी होता है। ताकि बच्चे के शरीर में कमजोरी को दूर करने व् बच्चे को जल्दी स्वस्थ करने में मदद मिल सके। तो आइये अब जानते हैं की बच्चे को बुखार होने पर क्या खिलाएं।

दाल का पानी

छोटे बच्चों के लिए मूंग दाल सबसे ज्यादा फायदेमंद होती है। क्योंकि इसे पचाना बच्चे के लिए आसान होता है। ऐसे में बच्चे के शरीर का तापमान बढ़ने पर आप बच्चे को मूंग दाल का पानी पिलाएं। आप चाहे तो दाल को भी अच्छे से पीस कर सूप बनाकर भी बच्चे को खिला सकते हैं।

खिचड़ी

थोड़े से चावल और थोड़ी सी दाल को उबालकर पतली पतली खिचड़ी बनाएं। और उसे अच्छे से मैश करके बच्चे को खिलाएं। खिचड़ी बुखार होने पर बच्चे को खिलाएं जाने वाला बेहतरीन आहार है।

दलिया

यदि आपके बच्चे को बुखार है और बच्चे का कुछ खाने का मन नहीं कर रहा है। तो आप उसे दाल या सब्जियों से बना दलिया खिलाएं। ध्यान रखें की दलिया बनाने के बाद उसे अच्छे से मैश कर लें। ताकि बच्चे को खाने में कोई दिक्कत न हो। यदि आपका बच्चा मीठा दलिया खाता है तो आप उसे वो भी खिला सकती हैं।

उबला हुआ आलू

आलू को उबालकर उसे अच्छे से पास लें अब उसमे थोड़ा नमक मिलाकर बच्चे को खिलाएं। ज्यादातर बच्चों को उबला हुआ आलू खाना बहुत पसंद भी होता है।

सूप

सब्जियों को अच्छे से उबालकर सूप बनाएं। अब उस सूप में मौजूद सब्जियों को अच्छे से पीस लें। और अच्छे से मिक्स करके बच्चे को खिलाएं। सूप भी बुखार होने पर बच्चों को खिलाने के लिए एक हेल्दी आहार होता है।

फल

सेब, केला, संतरा, जैसे फलों का छिलका उतरकर उन्हें अच्छे से पीस लें। अब इन फलों को बच्चे को थोड़ा थोड़ा करके खिलाएं। लेकिन ध्यान रखे की बच्चा जितना खाएं उतना ही खिलाएं। और जब भी बच्चे को खिलाएं उसके लिए ताजे फल का इस्तेमाल करें। पहले का रखा हुआ फल बच्चे को न खिलाएं।

तरल पदार्थ

खाने के साथ बच्चे को पानी का सेवन भी भरपूर करवाएं। लेकिन ध्यान रखें की बच्चे को पानी उबालने के बाद ठंडा करके पिलाएं। इसके अलावा आप चाहे तो बच्चे को नारियल पानी, घर में निकला फलों का ताजा जूस भी पीला सकती है।

तो यह हैं कुछ चीजें जो छोटे बच्चे को बुखार होने पर आपको देनी चाहिए। ताकि बच्चे को जल्दी से जल्दी ठीक होने में मदद मिल सके। इसके अलावा एक बात का ध्यान रखें की दही बच्चे को खिलाना फायदेमंद होता है। लेकिन बुखार, कफ, खांसी, जुखाम आदि होने पर बच्चे को दही न दें। क्योंकि दही की तासीर ठंडी होती है जो शिशु की परेशानी को बढ़ा सकती है। इसके अलावा बच्चे के साथ जबरदस्ती न करें बच्चे का जितना मन है उतना खिलाएं। साथ ही बच्चे को खाने खिलाने के बाद कंधे से लगाएं ताकि उसका खाना हज़म हो सकें।

गर्भवती महिला के लिए घीया/कद्दू का सेवन करना सही या गलत

प्रेगनेंसी में घीया/कद्दू

घीया या कद्दू कुछ ऐसी सब्जियां है जिनका नाम सुनते ही बहुत से लोगो की भूख खत्म हो जाती है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान यह सब्जियां बहुत फायदेमंद होती है। प्रेग्नेंट महिला यदि घीया, कद्दू, तौरी जैसी सब्जियों को यदि अपनी डाइट में शामिल करती है तो इससे प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली बहुत सी परेशानियों से निजात पाने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी फायदा मिलता है। क्योंकि घीया/कद्दू में कैल्शियम, विटामिन्स, आयरन व् अन्य मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो की प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में पर्याप्त मात्रा में होने चाहिए, और इसीलिए ज्यादा नहीं तो एक समय की डाइट में इन सब्जियों को जरूर शामिल करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में घीया/कद्दू खाने के फायदे

यदि गर्भवती महिला घीया/कद्दू जैसी सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करती है तो इससे गर्भवती महिला को बहुत फायदा मिलता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान घीया/कद्दू का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

आयरन

आयरन की कमी के कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, साथ ही आयरन की कमी के कारण शिशु के विकास पर भी असर पड़ता है। लेकिन यदि गर्भवती महिला घीया/कद्दू का सेवन करती है तो इससे बॉडी में आयरन की मात्रा को पर्याप्त बनाए रखने में मदद मिलती है, क्योंकि घीया/कद्दू में आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।

ब्लड शुगर लेवल

प्रेगनेंसी के दौरान रक्त में शुगर के लेवल को नियंत्रित रखने में भी घीया/कद्दू का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। और इसके कारण गर्भवती महिला को गेस्टेशनल डाइबिटीज़ की समस्या से भी बचे रहने में मदद मिलती है।

फ्रैशनेस

घीया/कद्दू हल्की सब्जियों में शामिल होती है, जिनका सेवन करने से पेट से जुडी परेशानियों से बचने में मदद मिलती है, पेट में भारीपन महसूस नहीं होता है, इसे खाने के बाद बॉडी फ्रेश और एक्टिव महसूस करती है जो की प्रेगनेंसी के दौरान महिला के स्वस्थ रहने के लिए बहुत जरुरी होता है।

पाचन क्रिया

बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान पेट से जुडी समस्या जैसे की कब्ज़, एसिडिटी आदि से परेशान रहती है, और इसका कारण बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव होते हैं जिनके कारण पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है। ऐसे में घीया का सेवन करने से पाचन क्रिया को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है।

यूरिन सम्बन्धी समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान यूरिन इन्फेक्शन की समस्या होना आम बात होती है लेकिन इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। ऐसे में घीया/कद्दू का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर से विषैले पदार्थो को यूरिन के माध्यम से बाहर निकालने में मदद मिलती है, जिसे गर्भावस्था में महिला को यूरिन से जुडी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

डीहाइड्रेशन

पाने की कमी होने के कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, साथ ही पानी की कमी के कारण गर्भ में पल रहे शिशु पर भी बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान घीया का सेवन करने से बॉडी में पानी की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है क्योंकि घीया में पानी की अधिक मात्रा मौजूद होती है।

कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल

कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है, लेकिन यदि गर्भवती महिला घीया/कद्दू जैसी सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करती है तो इससे कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है। साथ ही कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल रहने के कारण गर्भवती महिला को हदय सम्बन्धी समस्या से भी बचे रहने में मदद मिलती है।

नींद व् मूड स्विंग्स

प्रेगनेंसी के दौरान नींद में कमी, गुस्सा, चिड़चिड़ापन, आलस आदि महसूस होना बहुत आम बात होती है। ऐसा होने का कारण बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं जिसके कारण गर्भवती महिला को मूड स्विंग्स की समस्या हो सकती है। ऐसे में कद्दू का सेवन करने से गर्भवती महिला को मूड को फ्रेश करने और बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है। क्योंकि कद्दू के बीजों में जिंक पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है।

ब्लड प्रैशर

ब्लड प्रैशर का घटना बढ़ना भी गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन घीया का सेवन करने से गर्भवती महिला को ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है, इसीलिए गर्भवती महिला को घीए/कद्दू जैसी सब्जियों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में घीया/ कद्दू खाने के नुकसान

  • गर्भवती महिला को यदि घीया/कद्दू आदि खाने के बाद उल्टी या दस्त की परेशानी हो तो इसे अनदेखा न करते हुए एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।
  • स्वाद का ध्यान रखें, यदि आप लौकी/कद्दू आदि का सेवन करती है और उनका स्वाद आपको कड़वा महसूस होता है, तो आपको उसका सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसका सेवन करने से महिला के मिसकैरिज होने का खतरा बढ़ सकता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान घीया/कद्दू का सेवन करने के कुछ फायदे, ऐसे में आपको इन्हे अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए, ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। साथ ही यदि आपको इनका स्वाद पसंद नहीं है तो आप इन्हे अपने स्वाद के अनुसार अपने तरीके से बनाकर इसका सेवन करें, हो सकता है की आपको पसंद आ जाये।

चंद्र ग्रहण जुलाई 2019 : गर्भवती महिलाएं इन बातों का रखें ध्यान

Chandra Grahan 2019

चंद्र ग्रहण आकाश में घटित होने वाले एक खगोलीय घटना है जो तब होती है जब सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा एक ही रेखा में आ जाते हैं। सूर्य की छाया पृथ्वी पर पड़ती है और पृथ्वी की प्रच्छाया चन्द्रमा पड़ती है जिससे कुछ घंटों के लिए चाँद लाल हो जाता है। और जैसे ही दोनों ग्रह अपनी स्थिति बदलते हैं ग्रहण समाप्त हो जाता है। आज हम आपको 2019 चंद्रग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना है वो बता रहे हैं।

प्रेग्नेंसी के दौरान चंद्र ग्रहण

गर्भवती महिलाओं को सूतक और ग्रहण काल के दौरान खास सावधानी बरतनी चाहिए। अगर आप उन क्षेत्रों में रहती हैं जहाँ चंद्र ग्रहण दिखने वाला है तो आपको खास सावधानी बरतनी होगी। ताकि गर्भ में पल रहे शिशु पर ग्रहण का प्रभाव ना पड़ें। क्यूंकि ग्रहण का प्रभाव सबसे ज्यादा गर्भवती महिला पर ही होता है और शिशु के लिए अच्छा नहीं होता। भारतीय समय के अनुसार, जुलाई में चंद्र ग्रहण आधी रात को लग रहा है। जो भारत में दिखाई देगा। इसलिए खास सावधानी बरतनी होगी खासकर गर्भवती महिलाओं को।

क्या नहीं करना चाहिए आपको चंद्र ग्रहण के दौरान

बाहर नहीं जाएं

चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिला को चंद्र ग्रहण की छाया में नहीं जाना चाहिए और उसकी रौशनी में भी नहीं जाना चाहिए। क्यूंकि चंद्र ग्रहण के दौरान वायुमंडल में हानिकारक किरणें फैली होती है। ऐसे में चन्द्रमा की रौशनी में जाना आपकी और गर्भ में पल रहे शिशु की त्वचा को प्रभावित कर सकता है। इसलिए चन्द्रमा की रौशनी में नहीं जाएं।

कुछ खाएं नहीं और बनाएं नहीं

ग्रहण के दौरान, गर्भवती महिला को कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए और ना ही बनाना चाहिए। क्यूंकि ग्रहण के दौरान वातावरण में दूषित किरणें फैली होती है जो खाने को दूषित कर देती हैं। अगर आप ग्रहण में रखे हुए भोजन को खाती हैं तो आपको स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए ग्रहण के समय रखा हुआ खाना नहीं खाएं।

नुकीली चीजों से बचें

ग्रहण शुरू होने के बाद गर्भवती महिला किसी भी तरह की नुकीली चीज का इस्तेमाल नहीं करें। और कुछ काटें या सिलें नहीं। माना जाता है ऐसा करने से गर्भ में शिशु को नुकसान पहुंचता है।

साज-सज्जा से बचें

ग्रहण के दौरान गर्भवती महिला को श्रृंगार करना, बाल बनाना, तेल लगाना आदि कार्यों से भी परहेज करना चाहिए। ग्रहण के दौरान इन सब कार्यों को करना गर्भ में पल रहे शिशु के लिए सही नहीं माना जाता।

सोएं नहीं

ग्रहण काल के दौरान गर्भवती महिलाएं सोएं नहीं। क्यूंकि ग्रहण के दौरान सोने से गर्भ में पल रहे शिशु पर असर पड़ता है। इस दौरान महिला को केवल आराम से बैठ जाना चाहिए। कभी भूलकर भी चन्द्रमा के डायरेक्ट कॉन्टैक्ट में नहीं आएं।

चंद्र ग्रहण 2019 कब से कब तक है?

16 जुलाई 2019 का खंडग्रास चंद्रग्रहण भारत में पूरी तरह दिखाई देगा। 16 जुलाई का चंद्र ग्रहण मध्यरात्रि 01 बजकर 37 मिनट से आरंभ होगा। जो रात 03 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगा। ये ग्रहण कुल 2 घंटे 44 मिनट तक रहेगा।

16 जुलाई के चंद्र ग्रहण का सूतक शाम 04 बजकर 37 मिनट से लग जाएगा। इसलिए गर्भवती महिलायें सूतक काल से ही परहेज करना शुरू कर दें।

2019 चंद्र ग्रहण कहाँ-कहाँ दिखाई देगा?

जुलाई महीने का चंद्रग्रहण भारत में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। यह ग्रहण एशिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिणी अमेरिका, यूरोप में भी दिखाई देगा। इसलिए अगर आप उन क्षेत्रों में रहती हैं जहाँ चंद्र ग्रहण दिखने वाला है तो आपको खास सावधानी बरतनी होगी। अगर आप इस विडिओ में बताई गयी सभी बातों का ध्यान रखेंगी तो आपके गर्भ पर ग्रहण का दुष्प्रभाव नहीं पडेगा।

अपने पीरियड्स से जानें अपनी सेहत का हाल!

खुद के पीरियड्स से जानें सेहत का हाल, पीरियड्स से कैसे पता लगाएं सेहत का हाल, शरीर का हाल जानने के लिए ध्यान दे पीरियड्स पर, पीरियड्स के दौरान ये होना हो सकता है बीमारी का संकेत, बीमारी बढ़ने पर पीरियड्स के दौरान दिखते है ये लक्षण, इन तरीकों से जानें पीरियड्स में अपने शरीर का हाल, स्वस्थ पीरियड्स, पीरियड्स, अनियमित माहवारी, माहवारी की समस्या, मासिक धर्म से पहचाने सेहत का हाल, मासिक धर्म के ये संकेत बताएंगे गंभीर बीमारी के लक्षण 

महिलाओं के साथ ऐसी बहुत सी समस्याएं होती है जिन्हे केवल वो हो समझ सकती है। इन्ही में से एक है पीरियड्स जो प्रत्येक महिला के जीवन का अभिन्न हिस्सा होते है। कुछ में यह 3 दिन का होता है तो कुछ में 7 दिन का। इस दौरान महिलाओं की योनि से शरीर में मौजूद गंदे और दूषित रक्त का स्त्राव होता है जिसके कारण महिला को चिड़चिड़ापन, शरीर में दर्द और पाचन से जुडी समस्याएं होने लगती है।

बहुत बार इस दौरान कब्ज की समस्या भी देखने को मिलती है। परन्तु ये सभी समस्याएं पीरियड्स खत्म होने के साथ अपने आप ही ठीक हो जाती है। ऐसे में इनके लिए दवाओं का सेवन उचित नहीं। प्रत्येक महीने होने के कारण कोई भी पीरियड्स की समस्याओं पर अधिक ध्यान नहीं देता लेकिन कई बार कुछ चीजों पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है जिनके बारे में आप और हम जान नहीं सकते।

जी हां, पीरियड्स के दौरान हमारे शरीर में ऐसे बहुत से लक्षण देखने को मिलते है जो किसी बड़ी बीमारी या स्वास्थ्य रोग का संकेत होते है। लेकिन ज्ञान के आभाव के चलते अक्सर महिलाएं इन संकेतों पर ध्यान नहीं देती जिसके कारण दिनों दिन समस्या बढ़ती ही जाती है। इसलिए आज हम आपको पीरियड्स के दौरान दिखने वाले कुछ ऐसे संकेतों के बारे में बताने जा रहे है जो किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते है। अगर आपके शरीर में भी ऐसे संकेत दिखाई पड़ते है तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए।

यह पढ़े : MC से जुडी अवधारणाएं

पीरियड्स के दौरान ऐसे पहचाने अपनी सेहत का हाल :-

1. भारी रक्तस्त्राव :

अगर आपके पीरियड्स के दौरान बहुत अधिक रक्तस्त्राव हो रहा है और आप उसे रोकने के लिए अन्य उत्पादों का प्रयोग कर रही है तो यह फिब्रोइड ट्यूमर का सूचक हो सकता है। क्योंकि अगर दो या अधिक चक्रों तक खून ज्यादा बहता है तो यह समस्या का विषय है ऐसे में आपको तुरंत जाँच करवानी चाहिए।

2. हल्का रक्तस्राव :

यह केवल सुनने में ही अच्छा लगता है लेकिन अगर यह बहुत अधिक हल्का हो जाए तो समस्या का कारण बन सकता है। जी हां, अगर थोड़ी देर के लिए आपका स्त्राव सामान्य है तो सब ठीक है लेकिन अगर यह बहुत हल्का है तो हो सकता है यह थाइराइड विकार या गर्भाशय में एक स्क्रेड टिश्यू का संकेत हो। ऐसे में तुरंत डॉक्टरी जाँच करवानी चाहिए।

3. अनियमित पीरियड्स :

इसे भी पढ़े : पीरियड्स को सही समय पर लाने की टिप्स

ऐसे तो मासिक धर्म 28 या 30 दिनों के भीतर दुबारा आ ही जाता है। लेकिन कुछ महिलाओं में यह 21 या 18 दिनों में ही आ जाता है जबकि कुछ को 35 दिन तक लग जाते है। जबकि यह एक गंभीर समस्या है। जी हां, अगर आपको पिछले कुछ महीनों से लगातार अनियमित मासिक धर्म हो रहे है तो आपको पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम की संभावना या थाइराइड की समस्या हो सकती है।

4. पीरियड्स नहीं होना :

बहुत सी महिलाओं को 2 महीनों तक पीरियड्स नहीं होते। लेकिन वास्तव में यह एक खतरे का संकेत है। जिससे निजात पाने के लिए आप गर्भावस्था की संभावना को रोकना होगा साथ ही अपने तनाव के स्तर को कम करना होगा। यदि आप वजन कम कर रही है और बहुत अधिक तनाव में रहती है तो यह आपको अण्डोत्सर्ग करने से रोक सकता है।

5. ऐंठन :periods

सामान्य तौर पर मासिक धर्म के दौरान होने वाली ऐंठन को अंडाशय में एंडोमेट्रियोसिस या अल्सर की संभावना माना जाता है। इसके अलावा फाइब्रॉएड या बेनिंग ट्यूमर भी एक वजह हो सकती है। इसीलिए अगर आपको पीरियड्स के दौरान बहुत अधिक पीड़ा या ऐंठन होती है तो डॉक्टर से इस विषय में परामर्श करें।

6. मूड स्विंग्स :periods

हर बार यह आपके मासिक चक्र का हिस्सा नहीं है। जी हां, कई बार तनाव और अवसाद के कारण भी ऐसा हो सकता है। ऐसे में आप अपनी चिकित्सक से इस विषय में सलाह मशवराह करें।

तो ये थी कुछ समस्याएं जिन्हे पहचानकर आप भी अपने शरीर का हाल जान सकती है। परन्तु अगर इनमे से एक भी संकेत आपको दिखाई दे रहे है तो तुरंत डॉक्टरी परामर्श लें। अन्यथा समस्या आपके लिए ही बढ़ेगी।