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नारियल पानी कब से और क्यों पीना चाहिए प्रेगनेंसी में?

गर्भावस्था के दौरान खान पान का अच्छे से ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है क्योंकि जितना अच्छे से प्रेग्नेंट महिला अपने खान पान का ध्यान रखती है उतना ही गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान नारियल पानी का सेवन क्यों जरुरी है, कब से नारियल पानी पीना चाहिए, नारियल पानी पीने से माँ व् बच्चे को क्या क्या फायदे मिलते हैं इस बारे में बात करने जा रहे हैं। तो आइये अब इन सभी सवालों के जवाब विस्तार से जानते हैं।

क्यों है प्रेगनेंसी के दौरान नारियल पानी पीना जरुरी?

नारियल पानी में कैल्शियम, फाइबर, विटामिन सी, मैग्नीशियम, राइबोफ्लेविन, इलेक्ट्रोलाइट्स आदि पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद करते हैं। इसीलिए माँ व् बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रेग्नेंट महिला को नारियल पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।

कब से नारियल पानी पीना गर्भवती महिला को शुरू करना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान किसी खास दिन या महीने में महिला को नारियल पानी पीने की शुरुआत करने की जरुरत नहीं होती है। बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान महिला शुरुआत से लेकर आखिरी महीने तक नारियल पानी का सेवन कर सकती है। और दिन भर में किसी भी समय महिला नारियल पानी पी सकती है लेकिन सुबह खाली पेट नारियल पानी का सेवन सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला को ज्यादा ठन्डे नारियल पानी का सेवन नहीं करना चाहिए बल्कि ताज़ा और नोर्मल नारियल पानी का सेवन ही करना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला को नारियल पानी से मिलने वाले फायदे

नारियल पानी पोषक तत्वों की खान होता है ऐसे में प्रेग्नेंट महिला यदि नारियल पानी का सेवन करती है तो इससे एक नहीं बल्कि कई सेहत सम्बन्धी फायदे प्रेग्नेंट महिला को मिलते हैं। जैसे की:

डीहाइड्रेशन की समस्या होती है दूर

गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी होने के कारण माँ ही नहीं बल्कि शिशु को भी दिक्कत होने का खतरा रहता है। इसीलिए पोषक तत्वों से भरपूर डाइट के साथ प्रेग्नेंट महिला को तरल पदार्थों का सेवन भी भरपूर मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला नारियल पानी का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। जिससे माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने और परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

कब्ज़ व् अन्य पेट सम्बन्धी समस्या से मिलता है निजात

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कब्ज़, पेट में गैस, खाना हज़म करने में परेशानी, पेट में गर्मी, सीने में जलन, खट्टी डकार जैसी बहुत सी परेशानियां हो जाती है। और इन सभी परेशानियों से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को नारियल पानी का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि नारियल पानी का सेवन करने से पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है जिससे गर्भवती महिला को इन सभी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

इम्युनिटी मजबूत होती है

प्रेगनेंसी के दौरान महिला की इम्युनिटी थोड़ी कमजोर हो जाती है जिसके कारण संक्रमण व् बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में इम्युनिटी को मजबूत करने के लिए प्रेग्नेंट महिला को इम्युनिटी बूस्ट करने वाले आहार लेने की सलाह दी जाती है। और नारियल पानी में विटामिन सी जैसे बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं। और जब गर्भवती महिला की इम्युनिटी मजबूत होती है तो प्रेग्नेंट महिला को संक्रमण व् बिमारियों के खतरे से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर रहता है कण्ट्रोल

कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रैशर की समस्या हो जाती है और यह परेशानी यदि बढ़ जाती है तो इसके कारण माँ व् बच्चे दोनों को खतरा होता है। ऐसे में इस समस्या से बचे रहने के लिए नारियल पानी का सेवन करना महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि नारियल पानी का सेवन करने से गर्भवती महिला के ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल रहता है

यदि गर्भवती महिला के शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है तो इसकी वजह से माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत होने का खतरा रहता है लेकिन यदि महिला नारियल पानी का सेवन करती है तो इससे महिला के शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में मदद मिलती है। साथ ही इससे हदय को स्वस्थ रखने में भी मदद मिलती है।

कैल्शियम और मैग्नीशियम मिलता है

नारियल पानी कैल्शियम और मैग्नीशियम का बेहतरीन स्त्रोत होता है जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत रखने और गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में मदद करता है।

एनर्जी मिलती है

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अतिरिक्त कैलोरी की जरुरत होती है और नारियल पानी का सेवन करने से महिला के शरीर कैलोरी की जरुरत को पूरा करने में मदद मिलती है जिससे महिला के शरीर में एनर्जी को भरपूर रखने में मदद मिलती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला हमेशा एक्टिव रहती है।

वजन रहता है नियंत्रित

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ जाता है तो इसके कारण माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है। ऐसे में महिला को अपने वजन को नियंत्रित रखना चाहिए। और वजन नियंत्रित रखने के लिए महिला चाहे तो नारियल पानी का सेवन कर सकती है क्योंकि नारियल पानी पीने से मेटाबोलिज्म बेहतर रहता है जिसे वजन को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

मॉर्निंग सिकनेस से आराम

जिन महिलाओं को सुबह उठकर उल्टी, थकावट, कमजोरी, जी मिचलाना जैसी समस्या होती है उन महिलाओं को नारियल पानी का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि नारियल पानी का सेवन करने से महिला की इस परेशानी को दूर करने में मदद मिलती है।

स्किन रहती है बेहतर

नारियल पानी का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला की स्किन को भी फायदा मिलता है और प्रेगनेंसी के दौरान महिला की स्किन चमकदार और ग्लोइंग रहती है।

यूरिन इन्फेक्शन का खतरा होता है कम

गर्भावस्था के दौरान महिला को यूरिन इन्फेक्शन जैसी परेशानी होने का खतरा रहता है। और यदि महिला को यह परेशानी अधिक होती है तो इसकी वजह से महिला की दिक्कत बढ़ सकती है। लेकिन यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला नारियल पानी का सेवन करती है तो इससे महिला को होने वाले यूरिन इन्फेक्शन के खतरे को कम करने में मदद मिलती है।

  • नारियल पानी का सेवन करते समय किन बातों का ध्यान रखें
  • ताजे कटे हुए नारियल पानी का सेवन करें।
  • बहुत देर तक खुले रखें नारियल पानी का सेवन नहीं करें।
  • डिब्बाबंद नारियल पानी का सेवन करने से बचें।
  • दिन भर में एक या डेढ़ गिलास नारियल पानी का सेवन बहुत होता है इससे ज्यादा नारियल पानी नहीं पीएं क्योंकि जरुरत से ज्यादा कोई भी चीज सेहत पर बुरा असर डाल सकती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेग्नेंट महिला को नारियल पानी का सेवन करने से मिलते हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी नारियल पानी का सेवन जरूर करना चाहिए ताकि आपको और आपके होने वबले बच्चे को नारियल पानी के बेहतरीन सेहत सम्बन्धी फायदे मिल सकें।

Coconut benefits for pregnant women

गर्भधारण नहीं होने पर क्या-क्या करना चाहिए?

शादी के बाद हर महिला प्रेग्नेंट होने का सपना देखती है साथ ही प्रेगनेंसी महिला के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी होता है। प्रेगनेंसी को लेकर कुछ महिलाओं के मन में थोड़ा डर होता है और वो शादी के तुरंत बाद प्रेग्नेंट नहीं होना चाहती हैं क्योंकि वो शादी के बाद एन्जॉय करना चाहती है या अपने काम के प्रति थोड़ा और ध्यान लगाना चाहती है। वहीँ कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी को लेकर बहुत उत्सुक होती है और वो शादी के बाद प्रेग्नेंट हो भी जाती है।

आज कल के समय में जहां शादी की उम्र ही बीस से बढ़कर पच्चीस या तीस साल हो गई है, लोगो की दिनचर्या, लाइफस्टाइल, खान पान सही सही नहीं हैं, आदि। वहां महिलाओं को शादी के बाद गर्भधारण करने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आज इस आर्टिकल में महिला को प्रेगनेंसी नहीं होने के क्या कारण होते हैं और महिला किस तरह इस परेशानी से निजात पा सकती है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेग्नेंट नहीं होने के कारण

  • उम्र के कम या ज्यादा होने पर प्रेगनेंसी में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
  • गलत लाइफस्टाइल, दिनचर्या, खान पान आदि भी आपकी प्रेगनेंसी में आ रही मुश्किलों का कारण हो सकते हैं।
  • अनियमित पीरियड्स की समस्या होने पर भी प्रेगनेंसी से जुडी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
  • फैलोपियन ट्यूब, गर्भाशय, अंडाशय से जुडी समस्या होने के कारण भी प्रेगनेंसी में आ रही मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
  • सम्बन्ध यदि अच्छे से न बनाएं जाएँ और दोनों पार्टनर्स खुश नहीं हो तो इस कारण भी गर्भधारण नहीं हो पाता है।
  • यदि महिला सम्बन्ध बनाने के बाद तुरंत उठ जाती है, अपने प्राइवेट पार्ट को साफ़ कर लेती है तो ऐसे कुछ कारणों की वजह से भी शुक्राणु और अंडे का मिलन नहीं हो पाता है जिसकी वजह से प्रेगनेंसी में दिक्कतें आ सकती है।
  • तनाव की समस्या होने पर भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • यदि आप किसी गंभीर शारीरिक बिमारी से जूझ रही है तो भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

जल्दी गर्भधारण के आसान तरीके

यदि आपको गर्भधारण नहीं हो रहा है तो आपको कुछ आसान और असरदार टिप्स को फॉलो करना चाहिए इन्हे फॉलो करने से आपको प्रेगनेंसी में आ रही समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है।

अपने ओवुलेशन पीरियड का पता लगाएं

ऐसा माना जाता है की सही ओवुलेशन पीरियड में यदि सम्बन्ध बनाएं जाते हैं तो इससे जल्दी गर्भधारण होने में मदद मिलती है। ऐसे में महिला को अपने ओवुलेशन पीरियड का पता करना चाहिए। ओवुलेशन पीरियड का पता लगाने के लिए आप अपने पीरियड की डेट लिखें और उसके बाद पीरियड्स वाले दिन से लेकर बारह से अठारह दिन तक गिनें।

जैसे की यदि आपको एक तारीख को पीरियड आये हैं तो बारह तारीख से लेकर अठारह तारीख तक का जो समय होता है वो आपका ओवुलेशन पीरियड होता है। इन दिनों में रोजाना सम्बन्ध बनाएं ऐसा माना जाता है इन दिनों में बेहतर सम्बन्ध बनाने से गर्भधारण के चांस बढ़ जाते हैं। ओवुलेशन का पता लगाने के लिए आप अपने डॉक्टर से भी राय ले सकती है।

बेहतर सम्बन्ध बनाएं

यदि आप कभी कभार अपने पार्टनर के सम्बन्ध बनाती है और उसे भी अच्छे से एन्जॉय नहीं करती है तो यह एक कारण भी आपकी प्रेगनेंसी में रूकावट हो सकता है। ऐसे में जल्दी गर्भधारण के लिए आपको बेहतर सम्बन्ध बनाने चाहिए।

अनियमित पीरियड्स की समस्या का इलाज़ करवाएं

यदि आपको पीरियड्स से जुडी समस्या है तो आपको उस समस्या का इलाज करवाना चाहिए। ताकि आपको जल्द से जल्द गर्भधारण में मदद मिल सकें।

अपने डॉक्टर से मिलें

यदि बहुत समय से कोशिश करते हुए भी आपको प्रेगनेंसी नहीं हो रही है तो इस समस्या के इलाज के लिए आपको अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए। और उसके बाद आपको डॉक्टर जो जो जांच करवाने की सलाह देते हैं आपको वो सलाह लेनी चाहिए। और समय से जाँच करवाकर ट्रीटमेंट शुरू करना चाहिए क्योंकि जितना जल्दी आपकी इन परेशानियों का इलाज़ होता है। उतना ही जल्दी आपको गर्भधारण होने में मदद मिलती है और डॉक्टर्स द्वारा आपको आगे क्या करना है उसके बारे में भी सलाह दी जाती है।

तो यह है गर्भधारण नहीं होने पर आपको क्या क्या करना चाहिए उससे जुड़े टिप्स, यदि आपको इसके बाद भी प्रेगनेंसी नहीं होती है। तो आज कल मेडिकल ने बहुत तरक्की कर ली है तो आप सरोगेसी, आईवीएफ के जरिये भी अपने बच्चे को जन्म दे सकती है। उसके बाद आपको इन सभी की जानकारी भी डॉक्टर द्वारा बता दी जाती है।

What to do if there is no pregnancy

प्रेगनेंसी में आपको कम भूख लगती है या ज्यादा भूख लगती है?

गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने मूड में, शरीर में, मानसिक रूप से बहुत से बदलाव महसूस हो सकते हैं। जैसे की महिला का कभी खुश हो जाना तो कभी उदास होना, वजन बढ़ना, परेशान रहना, शारीरिक परेशानियां होना, आदि। इसके अलावा और भी अलग अलग अनुभव महिला प्रेगनेंसी के दौरान कर सकती है।

आज इस आर्टिकल में हम एक ऐसे ही बदलाव के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसका सम्बन्ध गर्भवती महिला की भूख से है। प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं की भूख बहुत ज्यादा बढ़ जाती है और कुछ महिलाओं की भूख कम हो जाती है। क्या आपके साथ ही कुछ ऐसा हो रहा है? यदि हाँ तो आइये आपके साथ ऐसा क्यों हो रहा है इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

प्रेगनेंसी में भूख ज्यादा लगने के कारण

गर्भावस्था के दौरान यदि आपकी भूख बढ़ गई है तो घबराएं नहीं, क्योंकि ऐसा होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण ऐसा हो सकता है, साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान शरीर का काम दुगुना हो जाता है ऐसे में भूख ज्यादा लग सकती है, गर्भ में शिशु का विकास भी माँ पर ही निर्भर करता है ऐसे में बच्चे के लिए जरुरी पोषक तत्व भी महिला के शरीर से ही लिए जाते हैं ऐसे में इस कारण भी बढ़ जाती है। तो यदि आपकी भी भूख बढ़ गई है तो घबराएं नहीं क्योंकि ऐसा होना आम बात होती है।

गर्भवती महिलाओं की भूख में कमी का कारण

जरुरी नहीं होता है की हर गर्भवती महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव एक ही तरह का असर दिखाएं। जिस तरह बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण कुछ गर्भवती महिलाओं की भूख बढ़ जाती है। वैसे ही बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण कुछ महिलाओं की भूख घट भी जाती है यानी की कम हो जाती है।

भूख ज्यादा लगने या कम लगने के कारण महिला को किसी तरह की परेशानी हो सकती है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को जब ज्यादा भूख लगती है तो महिला यदि जरुरत से ज्यादा खाने लग जाती है तो इसकी वजह से महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ सकता है। और वजन बढ़ने की वजह से माँ और बच्चे दोनों को परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है।

इसके अलावा यदि महिला कम खाती है तो इसकी वजह से शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। जिसकी वजह से महिला को कमजोरी हो जाती है जिससे महिला की शारीरिक दिक्कतें बढ़ सकती है। साथ ही शिशु के विकास के लिए जरुरी पोषक तत्व भी शिशु तक नहीं पहुँच पाते हैं। जिसके कारण शिशु के विकास में कमी आ सकती है।

ऐसे में आपको भूख कम लगने या ज्यादा लगने के कारण कोई दिक्कत नहीं हो। इसके लिए आपको न तो जरुरत से ज्यादा खाना चाहिए और न ही कम खाना चाहिए। साथ ही उतना ही खाना चाहिए जितना आप आसानी से हज़म कर लें। इसके अलावा दिन में एक बार भरपेट खाने की बजाय थोड़ा थोड़ा करके खाएं इससे आपके खाने के रूटीन को सही रहने में मदद मिलेगी।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा भूख या कम भूख लगने के कारण व् उसके कारण होने वाले नुकसान, तो यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको और आपके होने वाले बच्चे को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

इन छोटी सी भूल से ही सातवें महीने में बच्चा पैदा हो जाता है?

किसी भी महिला के लिए माँ बनने का अहसास बहुत ही खास होता है। और इस दौरान महिला को अपना बहुत ज्यादा ख्याल रखने की जरुरत होती है क्योंकि महिला यदि अपना अच्छे से ध्यान रखती है तो इससे माँ व् बच्चा दोनों को ही स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन कई बार प्रेगनेंसी के ऐसी स्थिति आ जाती है की नौ महीने से पहले ही शिशु का जन्म हो जाता है और ऐसी डिलीवरी को प्रीमैच्योर डिलीवरी या समय से पूर्ण डिलीवरी होना कहा जाता है।

वैसे माँ के गर्भ में शिशु का विकास लगभग चालीस हफ़्तों तक होता है और उसके बाद शिशु जन्म लेता है। लेकिन यदि किसी केस में शिशु सैंतीसवें हफ्ते या उससे पहले ही जन्म ले लेता है तो इसे प्रीमैच्योर डिलीवरी कहा जाता है। और कुछ महिला को सातवें महीने में ही लेबर पेन शुश्रु हो जाता है तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको सातवें महीने में डिलीवरी होने या समय से पहले डिलीवरी होने के कुछ कारण बताने जा रहे हैं।

गर्भाशय के कमजोर होने के कारण

कुछ महिलाओं का गर्भाशय कमजोर होता है जिसकी वजह से महिला को गर्भधारण करने में दिक्कत आ सकती है। ऐसे में यदि महिला का गर्भधारण हो भी जाता है तो महिला की समय से पहले डिलीवरी होने की आशंका भी अधिक हो जाती है।

गर्भ में एक से अधिक शिशु का होना

यदि महिला के गर्भाशय में एक से अधिक शिशु होता है तो भी कई बार महिला को समय से पहले ही प्रसव पीड़ा शुरू हो सकती है, एमनियोटिक फ्लूड की थैली फट सकती है, आदि। जिसकी वजह से महिला की डिलीवरी समय से पहले हो जाती है।

उम्र

समय से पहले डिलीवरी होने का एक कारण महिला की उम्र भी हो सकता है। यदि महिला की उम्र अठारह से कम या फिर पैंतीस से ज्यादा होती है। और महिला इस उम्र में गर्भधारण करती है तो ऐसे में भी महिला को समय से पहले डिलीवरी होने के चांस अधिक होते हैं।

नशीले पदार्थों का सेवन

यदि प्रेग्नेंट महिला नशीले पदार्थ जैसे की धूम्रपान, शराब, या अन्य किसी भी तरह ड्रग्स लेती है। तो इन चीजों का सेवन करने के कारण न केवल बच्चे के विकास में कमी आती है बल्कि प्रीमैच्योर डिलीवरी होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

पहले भी प्रीमैच्योर डिलीवरी हुई हो

समय से पहले डिलीवरी होने का एक कारण यह भी होता है की यदि महिला का पहले बच्चा भी समय से पहले पैदा हुआ था तो दूसरी डिलीवरी के समय भी महिला के साथ ऐसा होने के चांस बढ़ जाते हैं।

संक्रमण

यदि प्रेगनेंसी के दौरान किसी कारण माँ या बच्चे किसी को भी कोई संक्रमण हो गया हो और उस संक्रमण का प्रभाव ज्यादा पड़े। तो ऐसा होने पर भी महिला की डिलीवरी से पहले हो सकती है।

वजन

महिला का वजन जरुरत से कम हो या बहुत ज्यादा हो तो इसका असर भी डिलीवरी पर पड़ सकता है और महिला की डिलीवरी समय से पहले होने के चांस बढ़ जाते हैं।

शारीरिक समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को हाई ब्लड प्रैशर, हदय से जुडी समस्या, शुगर या अन्य कोई भी शारीरिक परेशानी अधिक हो तो भी महिला को समय से पहले प्रसव पीड़ा शुरू हो सकती है।

पेट पर दबाव

यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के समय अपना अच्छे से ध्यान नहीं रखती है और ऐसे काम करती है जिससे पेट पर ज्यादा दबाव पड़ता है। जैसे की भारी सामान उठाना, पेट के बल काम करना, पैरों के भार काम करना, लम्बे समय तक खड़े रहना, आदि काम करती है। तो इनके कारण भी महिला को समय से पहले समय से पहले लेबर पेन शुरू हो जाता है।

शिशु का विकास

यदि गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से नहीं हो रहा है और शिशु के विकास में किसी तरह की कमी होती है। तो इसके कारण भी महिला की डिलीवरी समय से पहले होने का खतरा होता है।

खून की कमी

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में खून की मात्रा का सही होना बहुत जरुरी है क्योंकि यदि महिला के शरीर में खून की कमी होती है तो इसके कारण प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ जाती है। जिसकी वजह से महिला की डिलीवरी समय से पहले होने का खतरा भी होता है।

एमनियोटिक फ्लूड ज्यादा होना

गर्भाशय में यदि एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा बढ़ जाती है और गर्भाशय कसा हुआ सा हो जाता है तो ऐसे केस में भी एमनियोटिक बैग के समय से पहले फटने का खतरा होता है। जिसकी वजह से महिला की डिलीवरी समय से पहले ही हो जाती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला की डिलीवरी समय से पहले हो जाती है ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि महिला को समय से पहले डिलीवरी होने की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सकें।

Causes of Premature Delivery

साँसों की बदबू दूर करने के उपाय

कई बार आप बहुत अच्छे माउथवाश का इस्तेमाल करते हैं अच्छे से दांतों की साफ सफाई का ध्यान रखते हैं लेकिन फिर भी आपके मुँह से बदबू आती है। ऐसा होना काफी शर्मिंदगी भरा हो सकता है और इसी कारण कई बार आप दूसरों के सामने बात करने में भी कतराते हैं की कहीं आपको कोई टोक न दे। साथ ही इसकी वजह से आपके आत्मविश्वास में कमी आना भी स्वाभाविक होता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको साँसों की बदबू के कुछ कारण व् इस समस्या से बचाव के कुछ उपाय बताने जा रहे हैं।

क्यों आती है साँसों से बदबू?

  • लोग ऐसा सोचते हैं की अच्छे से ब्रश कर लिए तो इससे मुँह फ्रैश हो गया जबकि मुँह में होने वाला बैड बैक्टेरिया जीभ पर ज्यादा जमता है ऐसे में यदि आप अपनी जीभ की अच्छे से साफ़ सफाई नहीं करते हैं तो इसकी वजह से मुँह से बदबू आना आम बात होती है।
  • जो लोग खाना खाने के बाद कुल्ला नहीं करते हैं या मुँह की साफ़ सफाई का ध्यान अच्छे से नहीं रखते हैं उन लोगो को भी यह समस्या हो सकती है।
  • जिन लोगो का मुँह सूखा रहता है यानी की मुँह में लार अच्छे से नहीं बनती है उन्हें इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और इसका कारण शरीर में पानी की कमी होना या फिर दवाइयों का अधिक सेवन करना हो सकता है।
  • मसूड़ों या दांतों में संक्रमण होने के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
  • जिन लोगो को पायरिया की समस्या होती है उनके मुँह से बदबू आ सकती है।
  • मुँह का अल्सर होने पर भी यह दिक्कत हो सकती है।
  • यदि आप नाक की जगह मुँह से अधिक सांस लेते हैं तो इसकी वजह से मुँह सूखा रहता है जिसकी वजह से मुँह में से बदबू आ सकती है।
  • पेट में गड़बड़ी रहना जैसे की पेट में गैस बनना, खट्टी डकार आना आदि के कारण भी मुँह से बदबू आ सकती है।
  • बहुत अधिक शराब पीने, तमाबू खाने, धूम्रपान करने के कारण भी आपको यह दिक्कत हो सकती है।
  • जो लोग चाय या कॉफ़ी का अधिक सेवन करते हैं उन्हें भी यह दिक्कत हो सकती है।

साँसों में बदबू आने की समस्या को दूर करने के टिप्स

जिन लोगो को साँसों में बदबू आने की समस्या होती है उन्हें ज्यादा परेशान होने की जरुरत नहीं होती क्योंकि यह कोई ऐसी समस्या नहीं है की इसका इलाज़ नहीं हो। बल्कि इस समस्या से निजात पाने के लिए आप कुछ आसान टिप्स को ट्राई कर सकते हैं। जैसे की:

ग्रीन टी पीएं

साँसों में बदबू आने की समस्या को दूर करने के लिए ग्रीन टी का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि ग्रीन टी में ईजीसीजी नामक तत्व मौजूद होता है जो मसूड़ों में उन कोशिकाओं को उत्तेजित करता है जिससे एंटीमाइक्रोबियल केमिकल रिलीज होता है। और यह केमिकल मुँह में जमने वाले बैड बैक्टेरिया को टारगेट करता है और उन्हें खत्म करता है। जिससे इस समस्या से निजात मिलता है लेकिन ध्यान रखें की एक दिन में दो या तीन कप से ज्यादा ग्रीन टी का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।

दही

दही का सेवन करने से भी साँसों में बदबू की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। क्योंकि दही में हेल्दी बैक्टीरिया पाया जाता है जिसे लैक्टोबैसिलस नाम से जाना जाता है यह हेल्दी बैक्टीरिया शरीर के विभिन्न हिस्सों में मौजूद बुरे बैक्टीरिया से लड़ने और उन्हें कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। और यह मुँह व् साँसों में मौजूद बैड बैक्टेरिया को खत्म करने में भी मदद करते हैं। दही के नियमित सेवन से आपको कुछ ही दिनों में इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

सौंफ

सौंफ का इस्तेमाल सदियों से माउथ फ्रैशनर के रूप में किया जाता है। और यह साँसों में आने वाली बदबू की समस्या से बचाव के लिए काफी फायदेमंद भी होता है। क्योंकि इसमें मौजूद ऑयल साँसों को तरोताजा रखने में मदद करता है ऐसे में आपको यदि साँसों में बदबू आने की समस्या है तो आपको खाना खाने के बाद सौंफ का सेवन जरूर करना चाहिए। इसके अलावा आप चाहे तो सौंफ में थोड़ी मिश्री मिलाकर इसका सेवन कर सकते हैं।

संतरा

जिन लोगो के मुँह से बदबू आती है उनके लिए संतरे का सेवन करना भी फायदेमंद होता है क्योंकि संतरे के सेवन से इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। संतरे में विटामिन सी होता है ऐसे में संतरे का सेवन करने से मुँह में लार सही मात्रा में बनती है जिससे साँसों में आने वाली बदबू की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

निम्बू पानी

एक गिलास गुनगुने पानी में एक निम्बू को निचोड़ लें उसके बाद इसका सेवन करें ऐसा दिन में कम से कम दो बार करें। ऐसा करने से भी मुँह में आने वाली बदबू से निजात पाने में मदद मिलती है।

लौंग

यदि आपके साँसों में से बदबू आती है तो आपको लौंग को मुँह में रखकर चूसना चाहिए इससे आपकी सांसों को तरोताजा रहने में मदद मिलती है जिससे इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। लौंग के अलावा मुलैठी को मुँह में रखने से भी साँसों की बदबू की समस्या से निजात मिलती है।

फिटकरी का इस्तेमाल करें

थोड़े से पानी में फिटकरी डालकर उस पानी से नियमित दिन में तीन से चार बार कुल्ला करें इससे मुँह में जमे बैड बैक्टेरिया को बाहर निकलने में मदद मिलती है। साथ ही पायरिया की समस्या को दूर करने के लिए भी इस तरीके का इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि आप कुछ दिन इस तरीके को ट्राई करते हैं तो इससे मुँह की बदबू को दूर करने में मदद मिलती है।

अमरुद के पत्ते

यदि आपके घर के आस पास अमरुद का पेड़ है तो नियमित अमरुद के एक पत्ते को तोड़कर अच्छे से चबाएं ऐसा रोजाना करने से भी आपको मुँह में बदबू की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

मुँह की बदबू की समस्या से बचने के अन्य उपाय

  • तुलसी की पत्तियां चबाने से भी मुँह की दुर्गन्ध दूर होती है।
  • पानी की कमी के कारण भी यह समस्या होती है ऐसे में इस समस्या से बचाव के लिए आपको पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • पुदीने की पत्तियां चबाकर खाएं ऐसा करने से भी मुँह की दुर्गध दूर होती है।
  • दिन में दो बार ब्रश करें, खाना खाने के बाद कुल्ला करें, जीभ की सफाई करें ऐसा करने से भी मुँह की दुर्गन्ध दूर होती है।
  • अनार के छिलको को पानी में उबालकर उस पानी का सेवन करें ऐसा करने से भी इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • मुँह में इलायची रखकर इलायची चबाएं ऐसा करने से भी इस समस्या से भी बचे रहने में मदद मिलती है।
  • अदरक का रस निकालें और उसके बाद उस रस को गुनगुने पानी में मिक्स करें फिर उस पानी से दिन में दो बार कुल्ला करें ऐसा करने से भी मुँह की बदबू की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

डॉक्टर को कब दिखाएं

यदि सभी उपाय अपनाने के बाद भी आपके मुँह से बदबू आने की समस्या दूर नहीं हो रही है तो आपको एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए क्योंकि कई बार मुँह से बदबू आना किसी गंभीर बिमारी का संकेत हो सकता है। ऐसे में आपको लम्बे समय तक इस समस्या को अनदेखा भी नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं साँसों में से बदबू आने के कारण व् इस समस्या से बचे रहने के उपाय, यदि आपको भी यह परेशानी है तो अपने मुँह की अच्छे से साफ़ सफाई करने के साथ आप ऊपर दिए गए टिप्स को भी फॉलो कर सकते हैं। क्योंकि इन्हे फॉलो करने से आपको इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

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हरियाली तीज 2022 कब है? प्रेग्नेंट महिला हरियाली तीज पर इन बातों का ध्यान रखें

सावन का पूरा महिला किसी त्यौहार से कम नहीं होता है। और इस महीने में कई त्यौहार भी आते हैं जैसे की सावन सोमवार के व्रत, शिवरात्रि, सावन के अंत में रक्षाबंधन, आदि। वैसे ही सावन के दिनों में एक त्यौहार और भी आता है जो की बहुत ही खास होता है और कई जगह इस त्यौहार को बहुत ही ज्यादा धूमधाम से भी मनाया जाता है। और ये त्यौहार है हरियाली तीज, जो की सुहागन महिलाओं के लिए बहुत ही खास होता है। तो आइये अब हरियाली तीज के बारे में जानते हैं साथ ही गर्भवती महिलाओं को हरियाली तीज के व्रत में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

हरियाली तीज का व्रत क्या होता है?

हरियाली तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत खास होता है क्योंकि इस दिन महिलाएं पूरे सोलह श्रृंगार करके अपने पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत करती है। साथ ही कुँवारी लडकियां भी अच्छे पति की इच्छा को लेकर इस व्रत को करती है। और हरियाली तीज का पूरा व्रत भोलेबाबा और माँ पार्वती को समर्पित होता है क्योंकि ऐसा माना जाता है इसी दिन भोलेबाबा ने माँ पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।

इसीलिए इस दिन भोलेबाबा और माँ पार्वती की पूजा की जाती है और पूरे श्रद्धा भाव व् निष्ठा के साथ सुहागिन महिलाएं व् कुँवारी लडकियां व्रत भी रखती है। साथ ही हरियाली तीज के दिन कई जगह पर मेले भी लगाए जाते हैं। इसके अलावा इस दिन झूला झूलने, मेहँदी लगाने आदि का भी बहुत महत्व होता है साथ ही कई जगह पर महिलाएं फूलों की सजावट करके झूला तैयार करती है और उस पर झूला झूलती है।

कब है हरियाली तीज 2022 में?

हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज मनाई जाती है। और साल 2022 में हरियाली तीज 31 जुलाई 2022 दिन रविवार को मनाई जाएगी।

हरियाली तीज का शुभ मुहूर्त?

जो महिलाएं हरियाली पूजा करना चाहती है और व्रत रखती है वह सुबह 6 बजकर 32 मिनट से 8 बजकर 30 मिनट तक पूजा कर सकती है। इसके अलावा यदि महिलाएं उस समय पूजा नहीं कर पाती हैं तो वह प्रदोष काल में पूजा कर सकती हैं और उसका शुभ मुहूर्त शाम के समय 6 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।

हरियाली तीज के व्रत रखने के नियम

  • व्रत रखने का सबसे पहला नियम यही है की आप सुबह समय से उठकर नहा धोकर तैयार होकर हो जाएँ और पूरे सोलह श्रृंगार करें।
  • इसके बाद महिलाएं पूजा की तैयारी आरम्भ करें।
  • व्रत के दिन आपको अपनी सास या किसी अन्य बड़े को बायने के रूप में हरे कपडे, चूड़ियां, व् अन्य सुहाग का सामान देना चाहिए।
  • फिर जो महिलाएं हरियाली तीज का व्रत करती है वो भोलेबाबा और माँ पार्वती की पूजा करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • उसके बाद मंदिर में जाकर पूजा में भगवान शिव के धतूरा, बेलपत्र, सफेद फूल, जल, दूध, फल, आदि चढ़ाएं साथ ही इसके बाद माता पार्वती को श्रृंगार का सामान चढ़ाएं।
  • साथ ही पूजा आरती के बाद अपने पति की लम्बी की उम्र की कामना करें।
  • इसके अलावा जो महिलायें व्रत नहीं करती है उन्हें व्रत न रखने के बाद भी इस दिन पूजा जरूर करनी चाहिए क्योंकि इस दिन पूजा करने का भी खास महत्व होता है।

प्रेग्नेंट महिला हरियाली तीज का व्रत रखते समय इन बातों का ध्यान रखें

यदि गर्भवती महिला हरियाली तीज का व्रत रखती है तो महिला को व्रत रखने के साथ कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे गर्भवती महिला को व्रत रखने पर किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। तो आइये अब जानते हैं की महिला को किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

व्रत रखने से पहले डॉक्टर से राय लें

गर्भवती महिला के हालात की सही जानकारी एक डॉक्टर अच्छे से दे सकता है ऐसे में महिला को सबसे पहले डॉक्टर से राय लेनी चाहिए की क्या महिला को व्रत करना चाहिए या नहीं। यदि डॉक्टर हां कहता है तो आप व्रत कर सकती है नहीं तो आपको व्रत नहीं करना चाहिए।

प्लान बनाएं

गर्भवती महिला को व्रत रखने से पहले व्रत का एक प्लान बनाना चाहिए की महिला को व्रत के दौरान किस तरह अपना ध्यान रखना है, क्या हेल्दी खाना है, आराम करना है, क्या क्या चीजें नहीं करनी है, आदि। ऐसा करने से गर्भवती महिला को व्रत रखने पर होने वाली दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिलेगी। साथ ही गर्भ में शिशु को भी कोई दिक्कत नहीं होगी।

निर्जला व्रत नहीं रखें

प्रेग्नेंट महिला को निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से महिला के शरीर में पानी की कमी हो सकती है जिसकी वजह से महिला को कमजोरी, थकान व् अन्य शारीरिक परेशानियां होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में महिला को प्यासे नहीं रहना चाहिए और थोड़ी थोड़ी देर बाद पानी, जूस, नारियल पानी आदि पीते रहना चाहिए।

फलों का सेवन करें

व्रत रखने पर गर्भवती महिला को फलों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए ताकि शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं हो। जिससे महिला व् शिशु दोनों को हेल्दी रहने में मदद मिल सके।

ज्यादा मीठा नहीं खाएं

व्रत के दौरान मीठा खाने की इच्छा अधिक होती है ऐसे में गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की गर्भवती महिला व्रत रखने पर ज्यादा मीठा नहीं खाएं। क्योंकि इसकी वजह से ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है जिसकी वजह से माँ व् बच्चे दोनों को खतरा होने के चांस बढ़ जाते हैं।

चाय कॉफ़ी ज्यादा नहीं लें

व्रत रखने पर गर्भवती महिला की चाय कॉफी पीने की इच्छा में भी बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला चाय कॉफी अधिक नहीं लें क्योंकि इसकी वजह से महिला को गैस, एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। साथ ही चाय कॉफ़ी में कैफीन की भी अधिकता होती है जो माँ व् बच्चे दोनों की सेहत के लिए सही नहीं होती है।

ज्यादा भारी कपड़े व हील्स न पहनें

हरियाली तीज के दिन महिला को थोड़े खुले कपडे पहनने चाहिए जिसमे महिला आरामदायक महसूस कर सके। और ज्यादा भारी व् चुभने वाले कपडे और ज्यादा ऊँचे जूते चप्पल पहनने से भी महिला को बचना चाहिए।

आराम भी जरूर करें

गर्भवती महिला को को व्रत के साथ आराम भी जरूर करना चाहिए ताकि महिला को फ्रेश, रिलैक्स व् ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिल सकें।

ज्यादा भीड़भाड़ में नहीं जाएँ

हरियाली तीज के दिन गर्भवती महिला को ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से बचना चाहिए क्योंकि ऐसी जगह पर जाने से महिला को धक्का लगने का खतरा, गिरने का खतरा, इन्फेक्शन आदि होने का खतरा भी होता है।

झूला झूलने से बचें

माना की हरियाली तीज के दिन झूला झूलना बहुत ही शुभ माना जाता है लेकिन महिला को झूला झूलने से बचना चाहिए खासकर तेज झूला तो बिल्कुल नहीं झूलना चाहिए। सिर्फ शगुन के लिए चाहे तो महिला किसी मजबूत झूले पर दो मिनट के लिए बैठ सकती है।

डांस करने से बचें

गर्भवती महिला को इस दिन डांस करने से भी बचना चाहिए हाँ आप चाहे तो देख सकती है क्योंकि नाचते समय किसी तरह की लापरवाही होने का खतरा होता है। जिसकी वजह से माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है।

तो यह हैं हरियाली तीज से जुडी जानकारी, साथ ही गर्भवती महिला को इस दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। यदि आप भी गर्भवती हैं तो आपको भी हरियाली तीज के दिन अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

अंतिम महीनों में क्या करने से गर्भ को नुकसान हो सकता है?

गर्भावस्था के दिन महीने जैसे जैसे आगे बढ़ते हैं वैसे वैसे महिला का वजन बढ़ता है, पेट का आकार बढ़ता है, कुछ महिलाओं को पैरों में सूजन की समस्या अधिक होती है, वजन बढ़ने के कारण महिला को उठने बैठने सोने में परेशानी होती है, कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के अंतिम महीनों में भी उल्टी की समस्या अधिक होती है, तो कुछ महिलाएं प्रसव का समय पास आने पर तनाव का शिकार हो जाती हैं, आदि।

ऐसे में महिला को अपना और ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती है ताकि महिला या शिशु को कोई दिक्कत नहीं हो और माँ व् बच्चा पूरी तरह स्वस्थ रहें। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम गर्भवती महिला को कुछ ऐसे काम बताने जा रहे हैं जिन्हे अंतिम महीनों में करने से गर्भ को दिक्कत होने का खतरा रहता है। और वो सभी काम गर्भवती महिला को करने से बचना चाहिए।

पेट पर जोर डालने से

प्रेगनेंसी के अंतिम महीनों में महिला का पेट पूरी तरह बाहर आ जाता है। ऐसे में यदि किसी कारण पेट पर दबाव पड़ता है या जोर पड़ता है तो इसके कारण गर्भ में शिशु को दिक्कत होने का खतरा रहता है।

तनाव के कारण

प्रसव को लेकर यदि महिला टेंशन लेती है तो इसके कारण महिला को फायदा नहीं होता है बल्कि महिला की मुश्किलें बढ़ती है साथ ही गर्भ में शिशु के विकास में कमी आने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को टेंशन न लेने और खुश रहने की सलाह दी जाती है।

भारी सामान उठाने के कारण

प्रेगनेंसी के अंतिम महीनों में महिला को भारी सामान नहीं उठाना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से पेट पर जोर पड़ता है जिसकी वजह से महिला को ब्लीडिंग, पानी निकलने का खतरा बढ़ जाता है।

ट्रैवेलिंग

गर्भावस्था के आखिरी महीनों में यदि महिला ट्रैवेलिंग करती है तो इसकी वजह से झटका आदि लगने का खतरा होता है। और झटका लगने के कारण गर्भ को नुकसान पहुँचने का खतरा बढ़ जाता है।

नशे का सेवन

यदि प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी के अंतिम महीनों में किसी भी प्रकार के नशे का सेवन करती है तो इसकी वजह से गर्भ में शिशु का विकास रुक सकता है। जिसकी वजह से जन्म के समय शिशु के वजन में कमी या ने कोई परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।

सम्बन्ध बनाने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाना बिल्कुल सेफ होता है लेकिन प्रेगनेंसी के अंतिम महीनों में महिला का पेट बाहर आ चूका होता है। ऐसे में यदि कभी गलती से भी कोई गलती हो जाये तो इसके कारण गर्भ को नुकसान पहुँच सकता है। जैसे की पेट पर दबाव पड़ जाएँ, ज्यादा तेजी से सम्बन्ध बनाने पर, आदि।

कैफीन का अधिक सेवन करने पर

यदि प्रेगनेंसी के अंतिम महीनों में महिला कैफीन का अधिक सेवन करती है तो इसके कारण महिला को सिर दर्द, चक्कर, एसिडिटी जैसी समस्या बढ़ने के साथ शिशु के विकास में कमी आने का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में जितना हो सके प्रेगनेंसी के आखिरी महीनों में महिला को कैफीन युक्त पदार्थ जैसे की चाय, कॉफ़ी आदि का सेवन करने से बचना चाहिए।

ज्यादा शोर में जाने के कारण

गर्भ में शिशु की सुनने की क्षमता का विकास होता रहता है और धीरे धीरे शिशु बाहर की आवजों को सुनने भी लगता है। और प्रेगनेंसी के आखिर तक शिशु की सुनने की क्षमता का विकास अच्छे से हो चूका होता है ऐसे में महिला को ऐसी किसी भी जगह पर नहीं जाना चाहिए जहां पर ज्यादा शोर हो क्योंकि ऐसी जगह पर जाने से शिशु की सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।

ज्यादा टाइट कपड़े पहनने से

गर्भवती महिला को ज्यादा टाइट कपडे भी नहीं पहनने चाहिए। क्योंकि ज्यादा टाइट कपडे पहनने के कारण पेट पर दबाव बढ़ता है जिसकी वजह से गर्भ में शिशु को असहज महसूस हो सकता है।

ज्यादा ऊँचें जूते चप्पल पहनने के कारण

गर्भवती महिला को ज्यादा ऊँचे जूते चप्पल भी नहीं पहनने चाहिए क्योंकि ज्यादा ऊँचे चप्पल जूते पहनने के कारन गिरने का खतरा होता है जिसकी वजह से गर्भ को नुकसान पहुँच सकता है।

तो यह हैं कुछ काम जिन्हे अंतिम महीनों में करने से गर्भ को नुकसान हो सकता है, ऐसे में महिला को इन सभी कामों को करने से बचना चाहिए। ताकि गर्भ को किसी भी तरह का नुकसान नहीं हो और आपके प्रसव में भी किसी तरह की मुश्किलें नहीं आएं।

प्रेग्नेंट महिला को नज़र क्यों लग जाती है और नज़र उतारने के उपाय

आपने कई बार सुना होगा की लोग कहते हैं की नज़र लग गई है जिसकी वजह से उनकी सेहत खराब हो गई या कोई काम बिगड़ गया है, आदि। लेकिन क्या आपने सोचा है की आखिर ये नज़र लगना क्या होता है और इस समस्या से कैसे छुटकारा पाया जाता है। यदि नहीं तो आइये इस आर्टिकल में हम प्रेग्नेंट महिला को नज़र क्यों लग जाती है और किस तरह आप प्रेग्नेंट महिला की नज़र उतार सकते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

क्या होता है नज़र लगना?

नज़र लगने का अर्थ होता है की यदि आपकी तरक्की को देखकर या किसी अच्छे काम या बेहतर स्वास्थ्य को देखकर यदि आपको कोई टोक देता है। जैसे की वो आपको कह दे की क्या बात है बहुत पैसा आ रहा है लगता है काम बहुत अच्छा चल रहा है, या फिर आपके स्वास्थ्य को लेकर बोल दें की आपको तो कोई शारीरिक समस्या नहीं होती है आप तो हमेशा एक्टिव ही रहती है, आदि।

और उसके बोलने के बाद ही आपको शारीरिक परेशानी हो जाये, आपके बनते काम बिगड़ने लग जाए, आदि। यदि आपके साथ होने वाली अच्छाई यदि बुरे का रूप ले लेती है तो उसे नज़र लगना कहते हैं। और गर्भावस्था के दौरान तो महिला के अंदर बहुत से बदलाव आते हैं ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला को भी यदि किसी बात को लेकर टोक दे और महिला को दिक्कत होने लग जाये तो ऐसा माना जाता है की महिला को नज़र लग गई गई है।

प्रेग्नेंट महिला को नज़र लगने के लक्षण क्या हो सकते हैं?

  • महिला खाने पीने में आनाकानी करने लग जाती है।
  • एक्टिव रहने की बजाय महिला सुस्त हो जाती है।
  • महिला का मूड हमेशा गुस्से और चिड़चिड़ेपन वाला हो जाता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला पॉजिटिव बातों की जगह नेगेटिव बातों के बारे में सोचने लगती है।
  • हमेशा नींद ही आते रहना किसी काम को करने का मन नहीं करना।

क्यों लग जाती है गर्भवती महिला को नज़र?

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत से लोग देखते हैं मिलते हैं उसे राय देते हैं ऐसे में यदि महिला को यदि कोई किसी चीज के लिए टोक देता है या फिर बहुत ज्यादा तारीफ़ करता है और घूरता रहता है तो ऐसी बातों की वजह से कहा जाता है की महिला को नज़र लग जाती है। जैसे की:

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला के चेहरे पर एक अलग ही नूर आ जाता है और महिला का चेहरा चमकने लगता है ऐसे में महिला की सुंदरता को लेकर महिला को कोई टोक देता है तो इससे नज़र लग जाती है।
  • यदि महिला स्वस्थ होती है उसे ज्यादा दिक्कत नहीं होती है और यह बात वो किसी से कहती है और वो कहने लग जाते हैं की तुम तो सही हो तुम्हे कोई समस्या नहीं है हमे तो इतनी दिक्कत होती थी तो इस वजह से महिला के स्वास्थ्य को टोक लग जाती है।
  • महिला को खाते पीते यदि कोई टोक देता है तो इस वजह से भी महिला को नज़र लग जाती है।
  • इसके अलावा यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान भी अपनी फिटनेस को ध्यान रखती है और इसे लेकर यदि महिला को कोई कुछ बोल देता है तो भी महिला को नज़र लगने का खतरा होता है।

प्रेग्नेंट महिला को नज़र लग गई है तो अपनाएँ यह तरीके

यदि प्रेग्नेंट महिला को बुरी नज़र लग गई है तो कुछ आसान टिप्स को ट्राई करने से आपको महिला की नज़र उतारने में मदद मिलती है। जैसे की:

काला धागा पहनें

गर्भवती महिला को मंदिर से लाकर काला धागा हाथ, पैर या गले में पूरी प्रेगनेंसी के दौरान पहनकर रखना चाहिए। यदि प्रेग्नेंट महिला ऐसा करती है तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को बुरी नज़र से बचे रहने में मदद मिलती है।

हनुमान चालीसा पढ़ें

प्रेग्नेंट महिला को रोजाना हनुमान चालीसा पढ़ना चाहिए हनुमान चालीसा पढ़ने से उन्हें हर बुरी शक्ति से बचे रहने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को नज़र भी नहीं लगती है।

रोटी का उपाय करें

नजर दोष से बचने के लिए आप एक रोटी बनाएं और उस रोटी को तरफ से पकाएं और एक तरफ से कच्चा रहने दें। अब उस रोटी के सिके भाग पर सरसों का तेल लगाकर उस पर लाल मिर्च और नमक डाल दें। ऐसा करने के बाद उसे प्रेग्नेंट महिला के ऊपर से उस रोटी को सात बार फिराकर चुपचाप से इसे किसी चौराह पर रख आएं ध्यान रखें की पीछे मुड़कर नहीं देखें। ऐसी मान्यता है कि इस उपाय को करने से तुरंत ही नजर उतर जाती है।

फिटकरी का उपाय

एक फिटकरी का टुकड़ा लेकर गर्भवती महिला के सिर से लेकर पैर तक सात बार वार दें, ऐसा करने के बाद उस टुकड़े को आग में जला दें। जैसे जैसे यह टुकड़ा जलता जाएगा वैसे वैसे नज़र उतरती रहेगी।

लाल मिर्च

सात सूखी लाल मिर्च लेकर आप गर्भवती महिला के सिर से लेकर पैर तक वार दें अब उसे गैस पर रखकर जला दें। यदि आपको जलने की स्मैल नहीं आएगी तो सनझ जाइएगा की बहुत बुरी टोक थी। उसके बाद जैसे जैसे मिर्च जलती जायेगी वैसे वैसे नज़र उतरती जायेगी।

नमक राई करें

थोड़ा सा नमक और थोड़ी सी राई लेकर गर्भवती महिला के सिर से लेकर पैर तक वार दें ऐसा सात बार करें। ऐसा करने के बाद नमक और राई को चलते पानी में बहा दें ऐसा करने से नज़र उतर जाती है। आप चाहे तो नमक और लाल मिर्च का उपाय करके भी नज़र उतार सकते हैं।

पंडित से झाड़ा लगवाएं

आप चाहे तो अपने मंदिर में जाकर पंडित से तीन या पांच बार झाड़ा भी लगवा सकते हैं। ऐसा करने से भी नज़र उतर जाती है।

ज्योत करें

एक रुई की ज्योत बनाएं और उसे सरसों के तेल में डुबों दें अब इसे महिला के ऊपर से सात बार वर दें। फिर इसे किसी जगह पर लटकाएं और जला दें जैसे जैसे यह ज्योत जलती जाती है वैसे वैसे नज़र उतर जाती है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान नज़र लगने के कारण व् इस परेशानी से बचने के उपाय, यदि गर्भवती महिला को नज़र लग जाती है तो गर्भवती महिला इन आसान टिप्स को फॉलो करके नज़र उतार सकती है।

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प्रेगनेंसी में क्या खाने से शिशु गोरा या काला होता है?

हर गर्भवती महिला यही चाहती है की उसका होने वाला शिशु गोरा, सूंदर, हष्ट, पुष्ट व् दिमाग से तेज हो। ऐसे में जिस तरह स्वस्थ रहने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान खान पान का अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। वैसे ही ऐसा माना जाता है की प्रेगनेंसी के दौरान कुछ ऐसी चीजे होती है जिसे खाने से शिशु का रंग काला या गोरा होता है। क्या आप भी जानना चाहती है की प्रेगनेंसी में क्या खाने से शिशु गोरा होता है और क्या खाने से शिशु काला होता है? यदि हाँ तो आइये अब इस आर्टिकल में उसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

प्रेगनेंसी में क्या खाने से शिशु गोरा होता है?

गर्भावस्था के दौरान ऐसा एक नहीं बल्कि कई खाद्य पदार्थ होते हैं जिन्हे खाने से शिशु की रंगत पर असर पड़ता है। जिससे आपका होने शिशु गोरा व् सूंदर होता है। जैसे की:

संतरा

संतरे में विटामिन सी मौजूद होता है जो शिशु की रंगत को निखारने में मदद करता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान यदि संतरों का सेवन करती है तो इससे आपका शिशु गोरा होता है।

नारियल

ऐसा भी माना जाता है की प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला नारियल का सेवन करती है तो इससे भी शिशु की रंगत निखरती है। क्योंकि नारियल में पोटैशियम होता है जिससे शिशु की स्किन और बालों को फायदा मिलता है। जिससे आपकी गोरा व् क्यूट बेबी पाने की चाहत को पूरा होने में मदद मिलती है।

हरी सब्जियां

हरी सब्जियां आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होती है साथ ही इसमें विटामिन सी, पोटैशियम व् अन्य ऐसे पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। जो शिशु की स्किन के लिए फायदेमंद होते हैं और जिससे शिशु की त्वचा में निखार आता है।

केसर मिल्क

पुराने समय से ही गर्भवती महिला को केसर वाला दूध पीने की सलाह दी जाती है क्योंकि ऐसा माना जाता है की केसर मिल्क पीने से आपके होने वाले बच्चे को गोरा होने में मदद मिलती है।

अनार

अनार का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी पूरी होती है जिससे शिशु तक भी ब्लड फ्लो अच्छे से होता है। और शिशु के शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होने से भी शिशु की रंगत को निखारने में मदद मिलती है। अनार के अलावा गाजर, चुकंदर आदि का सेवन करने से भी आपको गोरा व् क्यूट बेबी को जन्म देने में मदद मिलती है।

बादाम

प्रेगनेंसी के दौरान बादाम का सेवन करना बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। साथ ही बादाम का सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत को निखारने में भी मदद मिलती है। इसके लिए महिला भीगे हुए बादाम, बादाम मिल्क, बादाम का छिलका उतारकर उन्हें पीसकर और दूध में मिलाकर उनका सेवन कर सकती है।

अंडा

गर्भावस्था के दौरान अंडे का सेवन माँ और बच्चे दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। साथ ही अंडे का सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत को निखारने में भी मदद मिलती है।

आंवले का मुरब्बा

गर्भावस्था के दौरान आंवलें के मुरब्बे का सेवन करना गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि आंवले के मुरब्बे में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। साथ ही ऐसा भी माना जाता है की आंवलें के मुरब्बे का सेवन करने से गर्भ में शिशु की रंगत को निखारने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में क्या खाने से बच्चा काला होता है?

वैसे तो बच्चे का काला होना या गोरा होने उसके जीन्स पर निर्भर करता है लेकिन फिर भी पुराने समय से ही ऐसा माना जाता है की शिशु की रंगत पर महिला के खान पान का असर भी पड़ता है। ऐसे में कुछ ऐसी चीजें भी है जिनका सेवन महिला को करने की मनाही होती है क्योंकि उनका सेवन करने से आपका शिशु काला होता है। जैसे की:

बैंगन

ऐसा माना जाता है की प्रेग्नेंट महिला को बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि बैंगन का सेवन करने से आपका शिशु का रंग काला होता है।

सुबह उठकर कोई भी काली चीज नहीं खाएं

प्रेग्नेंट महिला को सुबह उठकर ऐसी कोई भी चीज नहीं खानी चाहिए जिसका रंग काला हो क्योंकि ऐसा माना जाता है की सुबह उठकर महिला यदि काले रंग की चीजों का सेवन करती है तो इससे शिशु का रंग काला होता है।

आयरन युक्त डाइट

गर्भावस्था के दौरान जरुरत से ज्यादा महिला को आयरन युक्त डाइट भी नहीं लेनी चाहिए क्योंकि ऐसा माना जाता है की आयरन युक्त ज्यादा डाइट लेने की वजह से गर्भ में पल रहे शिशु का रंग काला होता है।

काले अंगूर

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को काले अंगूर का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा भी माना जाता है की काले अंगूर का सेवन करने से आपका होने वाला बच्चा भी काला होता है।

धूप में बैठना

खान पान के अलावा ऐसा भी माना जाता है जो गर्भवती महिलाएं धूप में ज्यादा बैठती है उसके कारण भी शिशु की रंगत पर असर पड़ता है जिसकी वजह से आपका होने वाला शिशु काला होता है।

तो यह है कुछ खाद्य पदार्थ जिन्हे प्रेगनेंसी के दौरान सेवन करने से आपका होने वाला शिशु गोरा या काला होता है। ऐसे में आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा यह केवल एक अनुमान है इसमें पूरी तरह सच्चाई है या नहीं इसका कोई प्रमाण मौजूद नहीं है। बस पुराने समय से ही लोग इन बातों को हमे बताते आ रहे हैं।

डिलीवरी के बाद नई माँ ऐसे रखें अपनी डाइट का ध्यान

माँ बनना किसी भी महिला के जीवन का सबसे अहम और खूबसूरत पल होता है और सभी महिलाएं कभी न कभी इस पल का इंतज़ार अपनी जिंदगी में जरूर करती है। प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपनी डाइट का, अपने रहन सहन का अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है ताकि माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें। लेकिन क्या आप जानते हैं की डिलीवरी के बाद भी नई माँ को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि जब महिला शिशु को जन्म देती है तो यह केवल बच्चे का नया जन्म ही नहीं होता है बल्कि इस दौरान माँ भी नया जन्म लेती है।

ऐसे में इस दौरान महिला का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है, महिला की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। और महिला के शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के लिए और जल्द से जल्द महिला के ठीक होने के लिए बहुत जरुरी होता है की महिला अपना अच्छे से ध्यान रखें। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको डिलीवरी के बाद नई माँ को अपनी डाइट का ध्यान कैसे रखना चाहिए, साथ ही अन्य किन- किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उसके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।

डिलीवरी के बाद महिला की डाइट से जुड़े टिप्स

यदि आप माँ बनने वाली है या अपने अभी अभी बच्चे को जन्म दिया है तो आपके लिए बहुत जरुरी है की आप अपने खान पान का ध्यान रखें। तो आइये अब जानते हैं की डाइट से जुडी किन किन बातों का ध्यान डिलीवरी के बाद महिला को रखना चाहिए।

हरी सब्जियों का भरपूर सेवन करें

डिलीवरी के बाद महिला को हरी सब्जियों का भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि इसमें आयरन, फाइबर, जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। इससे महिला के शरीर में खून की कमी पूरी होती है, पेट साफ़ रहता है, शरीर में एनर्जी को बरकरार रहने में मदद मिलती है, आदि। जिससे महिला जल्दी रिकवर होती है।

दूध पीएं

बच्चे के जन्म के बाद महिला को दूध का अधिक सेवन करना चाहिए। क्योंकि दूध में कैल्शियम, प्रोटीन जैसे पोषक तत्व अधिक होती है। जिससे महिला की हड्डियों व् मांसपेशियों को पोषण मिलता है साथ ही महिला का दूध भी अच्छे से उतरता है। लेकिन यदि आपकी सिजेरियन डिलीवरी है या नोर्मल डिलीवरी है तो आपको प्लेन दूध पीने से बचना चाहिए। क्योंकि इससे टाँके पक सकते हैं ऐसे में आप दूध में हलकी पत्ती डालकर उबालें और उसके बाद उसका सेवन करें।

ड्राई फ्रूट्स

डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के लिए महिला को ड्राई फ्रूट्स का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि ड्राई फ्रूट्स विटामिन्स मिनरल्स का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं। जो डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में आई कमजोरी को दूर करने में मदद करते हैं। आप चाहे तो ड्राई फ्रूट्स के लड्डू बनाकर उनका सेवन भी कर सकते हैं।

लड्डू खाएं

यह तो सभी को पता होगा की बच्चे के जन्म के बाद नई माँ को लड्डू जरूर खिलाएं जाते हैं और यह लड्डू घी, ड्राई फ्रूट्स, गोंद आदि से भरपूर होते हैं। ऐसे में यदि नई माँ लड्डू का सेवन करती हैं तो इससे महिला के शरीर को पोषण मिलता है जिससे महिला को जल्द से जल्द ठीक हो जाती है साथ ही दूध के जरिये बच्चे को भी यह सभी पोषक तत्व मिलते हैं। जिससे बच्चे का विकास भी बेहतर होता है।

गुड़

डिलीवरी के बाद महिला को खाना खाने के बाद या फिर आटे में गुड़ को पिघलाकर या फिर किसी अन्य रूप में ही गुड़ का सेवन भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि गुड़ में सेलेनियम और जिंक जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो महिला की इम्युनिटी को मजबूत करने व् शरीर में आयरन की मात्रा को सही रखने में मदद करते हैं।

दालें

बच्चे के जन्म के बाद महिला को अपनी डाइट में दालों को भी जरूर शामिल करना चाहिए क्योंकि दालें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन्स आदि का बेहतरीन स्त्रोत होती है। इससे गर्भवती महिला की इम्युनिटी बढ़ने के साथ ब्रेस्टमिल्क बढ़ाने में भी मदद मिलती है। यानी की माँ व् शिशु दोनों को पोषण मिलता है और इसके लिए महिला मूंग दाल, मसूर दाल, अरहर दाल आदि का सेवन कर सकती है।

अंडे और नॉन वेज

आप चाहे तो अंडे और नॉनवेज का सेवन भी कर सकती है क्योंकि अंडे और नॉन वेज दोनों में ही पोषक तत्व भरपूर मात्रा में शामिल होते हैं। जिससे महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

खजूर खाएं

डिलीवरी के बाद महिला को दूध के एक गिलास में पांच छह खजूर डालकर उसे उबाल लेना चाहिए और फिर उस खजूर का सेवन करना चाहिए और दूध पी लेना चाहिए। ऐसा करने से महिला के शरीर को पोषण मिलता है जिससे महिला को जल्द से जल्द ठीक होने में भी मदद मिलती है।

फ्रूट्स खाएं

नई माँ चाहे तो फ्रूट्स का सेवन भी कर सकती है क्योंकि फ्रूट्स भी पोषक तत्वों की खान होते हैं। ऐसे में यदि महिला फ्रूट्स का सेवन करती है तो इससे महिला को सभी तरह के पोषक तत्व मिलते हैं। जिससे महिला को जल्द से जल्द ठीक होने में मदद मिलती है।

पानी पीएं

डिलीवरी के बाद महिला को शरीर में पोषक तत्वों के साथ तरल पदार्थों की मात्रा को भी सही रखना चाहिए। क्योंकि कई बार शरीर में पानी की कमी के कारण भी शारीरिक परेशानियां बढ़ जाती है। इसके अलावा महिला को तीन चार गिलास गर्म पानी पीना चाहिए इससे शरीर की सिकाई हो जाती है। साथ ही शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ भी बाहर निकल जाते हैं और डिलीवरी के बाद यूरिन इन्फेक्शन जैसी परेशानी से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

डिलीवरी के बाद महिला को क्या नहीं खाना चाहिए

  • महिला को ज्यादा तेलीय व् मसालेदार भोजन नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • नई माँ को कच्चा, अधपका, बासी भोजन नहीं खाना चाहिए।
  • यदि आपकी सिजेरियन डिलीवरी है तो आपको ज्यादा घी तेल मसाले वाला भोजन भी नहीं खाना चाहिए।
  • महिला को ऐसे आहार नहीं खाने चाहिए जिनसे महिला को गैस बनती हो।
  • डिलीवरी के बाद महिला को ऐसी डाइट लेने से बचना चाहिए जिससे महिला को एलर्जी होने की समस्या हो।

डिलीवरी के बाद महिला को इन बातों का भी ध्यान रखना चाहिए?

  • महिला को भरपूर आराम करना चाहिए क्योंकि डिलीवरी के शुरूआती दिनों में महिला जितना ज्यादा से ज्यादा आराम करती है उतना ही महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है।
  • बच्चे के जन्म के बाद महिला को हैवी ब्लीडिंग होती है और यह ब्लीडिंग ज्यादा दिनों के लिए होती है ऐसे में महिला को अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यदि महिला साफ सफाई का ध्यान नहीं रखती है तो इसकी वजह से महिला को इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • महिला का वजन डिलीवरी के बाद बढ़ जाता है ऐसे में महिला को इसे लेकर टेंशन नहीं लेनी चाहिए और खाने पीने में लापरवाही नहीं करनी चाहिए क्योंकि यदि इस दौरान आप डाइट करती है तो आपके शरीर में कमजोरी रह जाती है और बाद में आपको शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
  • बच्चे के जन्म के बाद महिला को बच्चे की केयर को लेकर स्ट्रेस होना आम बात है लेकिन जितना ज्यादा महिला तनाव लेती है उतना ही महिला की दिक्कत बढ़ती है कम नहीं होती है। ऐसे में महिला को स्ट्रेस नहीं लेना चाहिए धीरे धीरे आपको सब कुछ करना आ जाता है।
  • उठते बैठते समय ध्यान रखना चाहिए ताकि टांको पर असर नहीं पड़े।
  • शिशु को ब्रेस्फीडिंग जरूर करवानी चाहिए क्योंकि यह माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होती है।
  • यदि आपकी सिजेरियन डिलीवरी है या फिर नोर्मल डिलीवरी में भी आपको टाँके आये हैं तो आपको टांकों की अच्छे से केयर करनी चाहिए ताकि उन्हें जल्दी से ठीक होने में मदद मिल सकें।
  • मालिश करवाएं इससे भी महिला के शरीर को पोषण मिलता है जिससे महिला जल्द से जल्द रिकवर करती है।

डिलीवरी के बाद डॉक्टर से कब मिलें?

  • जब आपके टाँके ठीक होने लगे तो डॉक्टर द्वारा बताए गए दिन पर आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए।
  • यदि आपको टांकों में दर्द हो रहा है, टाँके पक रहे हैं तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए।
  • पीरियड्स में फ्लो बहुत ज्यादा हो रहा है साथ ही पेट दर्द की समस्या अधिक हो रही है तो भी महिला को एक बार डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए।
  • कोई भी शारीरिक परेशानी जरुरत से ज्यादा हो रही है तो आपको एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।
  • बच्चे को कोई दिक्कत हो रही है तो भी एक बार डॉक्टर से मिलना चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान डिलीवरी के बाद महिला को जरूर रखना चाहिए। यदि महिला इन टिप्स का ध्यान रखती है तो इससे महिला को जल्द से जल्द फिट होने में मदद मिलती है। इसके अलावा डिलीवरी के बाद महिला को शिशु के साथ साथ अपनी केयर में भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए क्योंकि यदि एक को भी दिक्कत होती है तो दूसरा भी परेशान होता है।

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