Home Blog Page 183

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कैसी बातें नहीं करनी चाहिए?

गर्भावस्था महिला के लिए बहुत ही नाजुक समय होता है। और इस दौरान केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यदि महिला शारीरिक रूप से तो अपना ध्यान रखती है लेकिन मानसिक रूप से परेशान रहती है तो इसके कारण भी महिला और बच्चे पर नकारात्मक असर पड़ता है। साथ ही महिला क्या कर रही है, किस माहौल में रह रही है, किस तरह की बातें कर रही है या महिला कैसा सोच रही है इसका असर भी प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला व् बच्चे पर पड़ता है।

ऐसे में महिला यदि खुश रहती है अच्छा सोचती है तो इसका सकारात्मक प्रभाव बच्चे पर पड़ता है। लेकिन यदि महिला गलत सोचती है है गलत बातें करती है तो इसका नकारात्मक असर बच्चे पर पड़ता है। तो आज इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसी ही बातों के बारे में बात करने जा रहे हैं जो गर्भवती महिला को नहीं करनी चाहिए। ताकि बच्चे के विकास में किसी भी तरह की कमी न आए।

दूसरों की प्रेगनेंसी में हुई नकारात्मक बातें

हर एक महिला की प्रेगनेंसी अलग अलग होती है और ऐसा बिल्कुल नहीं होता है की जैसा एक प्रेग्नेंट महिला के साथ हो वैसा ही दूसरी प्रेग्नेंट महिला के साथ हो। ऐसे में यदि आपसे कोई अपनी प्रेगनेंसी के अच्छे एक्सपीरियंस शेयर करता है तो अच्छी बात है। लेकिन यदि कोई नेगेटिव बातें शेयर करता है जैसे की प्रेगनेंसी में कितनी दिक्कत हुई थी, तो आपको उनके बारे में बिल्कुल भी बात नहीं करनी चाहिए। क्योंकि यह सभी बातें प्रेगनेंसी के दौरान आपके तनाव का कारण बनती है जिससे केवल आप ही नहीं आपका बच्चा भी परेशान होता है।

अबॉरशन के बारे में

गर्भावस्था के दौरान महिला को गर्भपात के बारे में बिल्कुल भी बातें नहीं करनी चाहिए। क्योंकि यह सभी बातें महिला के दिमाग पर हावी हो सकती है जिसके कारण प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ सकती है। और इन बातों के बारे में सोचने से शुरूआती दिनों में गर्भपात होने का खतरा भी बढ़ जाता है। प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान केवल बच्चे के विकास को बेहतर करने की बातें ही करनी चाहिए।

डिलीवरी को लेकर नेगेटिव बातें

डिलीवरी का समय पास आने पर महिला को डर महसूस होना बहुत ही आम बात होती है। और इस डर का कारण महिला के दिमाग में चल रही बातें होती है। जैसे की महिला की डिलीवरी किस तरह से होगी, बच्चे को कोई दिक्कत तो नहीं होगी, आदि। ऐसे में महिला को डिलीवरी में क्या क्या दिक्कतें आएँगी इससे जुडी बातों के बारे में न तो सोचना चाहिए और न ही यह बातें करनी चाहिए।

जन्म के बाद शिशु को होने वाली दिक्कतों पर चर्चा

प्रेग्नेंट महिला को जन्म के बाद शिशु को होने वाली दिक्कतों को लेकर भी बातें नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इन सभी बातों से आपके बच्चे के विकास पर गलत असर पड़ता है और आपके बच्चे को परेशानी होने का खतरा रहता है। ऐसे में बच्चे को कोई दिक्कत न हो इसके लिए गर्भवती महिला अपना अच्छे से ध्यान रखे और केवल अपने शिशु के विकास के बारे में अच्छा सोचें।

किस तरह की बातें करें प्रेगनेंसी में?

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपने आप को फिट कैसे रखा जाये, किस तरह प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियों को कम करें, गर्भ में बच्चे का विकास कैसे बेहतर हो, प्रेगनेंसी के दौरान आपके दिल दिमाग में क्या चल रहा है केवल इन्ही के बारे में बातें करनी चाहिए। ताकि माँ व् बच्चे दोनों पर किसी भी तरह का नकारात्मक असर नहीं पड़े।

तो यह हैं कुछ बातें जो प्रेग्नेंट महिला को नहीं करनी चाहिए यदि प्रेग्नेंट महिला इन सभी बातों का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से माँ व् बच्चे दोनों को ही प्रेगनेंसी के दौरान मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। और यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आप भी केवल अच्छा ही सोचें और खुश रहें ताकि आपके बच्चे को भी गर्भ में खुश रहने में मदद मिल सके।

What should a woman not talk during pregnancy

क्यों होते हैं जुड़वां बच्चे

क्यों होते हैं जुड़वां बच्चे, जुड़वां बच्चे होने के कारण, आखिर क्यों होता है जुड़वां बच्चों का जन्म, जुड़वां बच्चे, Reason behind the birth of Twins, Cause of Twins

जुड़वां बच्चे की चाह बहुत से कपल रखते हैं, लेकिन किसी को शायद यह नहीं पता होता है की जुड़वां बच्चे होने का कारण क्या होता है। बहुत कम चांस होते हैं जब किसी महिला के गर्भ में दो शिशु होते हैं। और आपको यह जानकार भी हैरानी होगी की जुड़वां बच्चे भी दो तरह के होते हैं। एक जुड़वां बच्चे वो होते हैं जो बिल्कुल एक जैसे दिखते हैं और एक जुड़वां बच्चे वो होते हैं जो एक दूसरे से अलग अलग दिखते हैं। तो आज हम आपको जुड़वां बच्चे के होने के क्या क्या कारण होते हैं।

जुड़वां बच्चे

जुड़वां बच्चे दो तरह के होते हैं एक मैनोज़ाइगॉटिक और दूसरे डायज़ाइगॉटिक होते है अब जानते हैं की यह क्या होते हैं। और जुड़वां बच्चे होते कैसे हैं और किस बार पर निर्भर करते हैं।

डायज़ाइगॉटिक क्या होते हैं?

इस तरह के जुड़वां बच्चे एक दूसरे के जैसे बिल्कुल नहीं होते है, और ऐसा तब होता है जब स्पर्म द्वारा महिला के अंडाशय में एक ही समय पर दो अलग अलग अंडो का निषेचन होता है। और यह दोनों बच्चे गर्भशय में दो अलग अलग अंडो में विकसित होते हैं। अलग अलग अंडे में विकसित होने के कारण हो सकता है की दोनों शिशु एक दूसरे से भिन्न दिखते हैं।

मैनोज़ाइगॉटिक क्या होते हैं?

इस तरह के जुड़वां बच्चे बिल्कुल एक जैसे देखते हैं उनकी आदतें भी मिलती है। ऐसे बच्चे तब होते है जब पुरुष के स्पर्म द्वारा एक अंडे का निषेचन किया जाता है लेकिन उसमे एम्ब्रियो दो बनते हैं, और यह यह ही अंडे में रहते हैं इसीलिए एक जैसे होते है। इसीलिए जुड़वां बच्चों का होना पूरी तरह से निषेचन की क्रिया पर निर्भर करता है।

जुड़वां बच्चे होने के कारण

जुड़वां बच्चे होने के कई कारण हो सकते हैं यह आपकी उम्र से लेकर आपके अनुवांशिक लक्षण पर भी निर्भर करते है। साथ ही मेडिकल में आई सुविधाओं का इस्तेमाल करके भी आप चाहे तो जुड़वां बच्चों को जन्म दे सकती हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की जुड़वां बच्चों के होने के क्या क्या कारण होते हैं।

जेनेटिक्स पर निर्भर करता है

जुड़वां बच्चों का होना जेनेटिक्स पर निर्भर करता है, यानी की अनुवांशिक कारण यदि आपके परिवार में पहले भी कोई जुड़वां बच्चा हो, या आप भाई बहन जुड़वां हो, आपकी माता के परिवार में कोई जुड़वां बच्चे हो तो ऐसा होने के कारण जुड़वां बच्चे होने के चांस हो सकते है।

पहले हो चुके हो जुड़वां बच्चे

ऐसा भी हो सकता है की यदि आपकी पहली डिलीवरी के दौरान आपके जुड़वां बच्चे हुए हैं, तो ऐसा होने के कारण यदि आप दूसरी बार प्रेग्नेंट होती है तो इस दौरान भी आपके जुड़वां बच्चे को जन्म देने के चांस अधिक होते हैं।

उम्र अधिक होने के कारण

जैसे जैसे महिला की उम्र बढ़ती है तो उसके जुड़वां बच्चे होने के चांस भी बढ़ते हैं क्योंकि इस दौरान Follicle Stimulating Hormon- FSH के निर्माण में कमी आने लग जाती है। और यह हॉर्मोन इस दौरान ओवरिस में अंडो की संख्या बढ़ने लगती है। जिसके कारण हो सकता है की निषेचन की क्रिया पर भी असर पड़ता है जिसके कारण जुड़वां बच्चों के होने के चांस भी बढ़ जाते हैं।

गर्भनिरोधक गोलियां

जो महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती है ऐसा करने से उनके शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव आते हैं। और उसके बाद जब महिला गर्भवती होने का निर्णय लेती है तो ऐसे में उसके जुड़वां बच्चे के गर्भधारण करने के चांस अधिक होते हैं।

आई वी एफ

यह एक मेडिकल द्वारा दी गई एक ऐसी सुविधा है जिसके कारण निसंतान सदंपतियो को भी माँ बाप बनने का सुख मिलता है। ऐसे में यदि आप जुड़वां बच्चों को जन्म देना चाहती है तो आई वी एफ का इस्तेमाल करके आप अपनी इस चाहत को पूरा कर सकती हैं।

महिला की ऊंचाई और वजन पर भी करता है निर्भर

स्टडीज़ के अनुसार यदि किसी महिला की ऊंचाई और वजन अच्छा होता है और उसका बी एम आई 30 या उससे अधिक हो उनमें जुड़वां बच्चों को जन्म देने की क्षमता अधिक होती है। और ऐसी महिलाएं एक जैसे दिखने वाले बच्चों को जन्म देती हैं।

तो यह है जुड़वां बच्चों से जुडी कुछ बातें यदि आप भी जुड़वां बच्चों की चाह रखते हैं तो ऐसा हो सकता है लेकिन इसके लिए सही तरह से निषेचन की क्रिया का होना बहुत जरुरी होता है।

विडिओ जुड़वां बच्चों को प्रेग्नेंसी कैसे होती है?

एक दिन में बाल मुलायम और सिल्की हो जायेंगे! अगर आप ये करेंगे

बालों का सिल्की, मुलायम होना आपको पर्सनैल्टी को बढ़ा देता है, और वहीं यदि आपके बाल रूखे हो तो चाहे आप कितनी भी अच्छी लग रही है, फिर भी कमी रह ही जाती है, बालों की प्राकृतिक चमक खोने के कारण आपके साथ ऐसा होता है, और इसका कारण है बालों की अच्छे से केयर न करना, मसाज न करना, ज्यादा चेमिकल्स का इस्तेमाल करना, अपने आहार के प्रति लापवाही करना, नियमित बालों में शैंपू करना, इनके कारण बालों की चमक खो जाती है और बाल रूखे होने लगते है।

इन्हे भी पढ़े:- क्या आपके आधे से ज्यादा बाल झड़ गए हैं? तो ये करें बाल वापिस आ जायेंगे

lambe baal

हर महिला चाहती है चाहे उसके बाल लम्बे हो या छोटे, परन्तु बाल सिल्की और मुलायम होने चाहिए, जिसके कारण उनकी चमक बनी रहें और उनकी पर्सनैल्टी में भी निखार आएं, परन्तु कई बार ऐसा होता है की बालों से जुडी परेशानी होने के कारण आपके बाल रूखे हो जाते है, और इसका कारण होता है बालों में ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल करना, तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे है जिनको यदि आप अपने बालों को धोने से पहले भी इस्तेमाल करते है, तो भी आपके बाल सिल्की और मुलायम हो जाते है, साथ ही इनमे से कई उपाय ऐसे भी है जो आपके बालों से जुडी अन्य परेशानियों का समाधान करने में भी आपकी मदद करते है, तो आइये जानते है की वो टिप्स कौन से है।

मेयोनीज़ का इस्तेमाल करें:-

मेयोनीज़ का इस्तेमाल करने से आपके बालों को सिल्की होने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप मेयोनीज़ को अच्छे से मिक्स करें, और उसके बाद इसे अपने बालों में लगाएं, आप इसे मेहँदी की तरह जड़ से लेकर अपने पूरे बालों में लगाएं, और कम से कम आधे घंटे के लिए इसे बालों में रहने दें, और उसके बाद गुनगुने पानी का इस्तेमाल करके अपने बालों को धो लें, और शैम्पू का भी इस्तेमाल करें, एक ही बार में आपको इसका असर दिखाई देगा।

एलोवेरा जैल का इस्तेमाल करें:-

alovera

एलोवेरा जैल केवल आपकी स्किन को ही नमीयुक्त नहीं बनाता है, बल्कि इसके इस्तेमाल से आपके बालों को भी मुलायम और सिल्की बनने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एलोवेरा जैल को अच्छे से अपने बालों में लगाएं, और आप सीधा पेड़ से इसे काट कर अपने स्कैल्प से लेकर बालों में अच्छे से लगाएं, और थोड़ी देर बाद शैंपू से अपने बालों को धो दें, आपको फ़र्क़ महसूस होगा।

इन्हे भी पढ़े:- लम्बे बालों की चाह रखते है? तो अपनाएँ ये एक आसान नुस्खा

दही का इस्तेमाल करें:-

दही का इस्तेमाल करने से भी बालों को सिल्की और मुलायम बनाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए सिर धोने से दस मिनट पहले आप अपने बालों में दही अच्छे से लगाएं, या फिर आप लस्सी से भी बालों को धो सकते है, उसके दस मिनट बाद शैम्पू की मदद से अच्छे से अपने बालों को धो लें, ऐसा करने से आपके बालों पर इसका असर आपको साफ़ दिखाई देगा।

सिर धोने से पहले बालों में मसाज करें:-

बालों को पूरी तरह से पोषण देने से बालों की मजबूती और उसकी चमक बनी रहती है, और यदि आप सर धोने से एक रात पहले या दो से तीन घंटे पहले ही बालों में मसाज करते है, इसके कारण आपके सिर की कोशिकाओं में रक्त संचार अच्छे से होता है, जिसके कारण बालों को जड़ो से मजबूती मिलने के साथ बालों को पोषण भी मिलता है, और आप इसके लिए नारियल तेल, ओलिव ऑयल, बादाम तेल, कैस्टर ऑयल, आंवले के तेल का भी इस्तेमाल कर सकते है, और बालों में तेल लगाने के बाद अच्छे शैम्पू की मदद से अपने बालों को धो लें, ऐसा करने से आपके बालों को सिल्की और मुलायम बनने में मदद मिलती है।

गुड़हल के फूल का इस्तेमाल करें:-

gudhal ka ful

गुड़हल का इस्तेमाल करने से आपके बालों को सफ़ेद होने से बचाने में मदद मिलती है, साथ ही इसकी पत्तिया भी बहुत फायदेमंद होती है, इसके इस्तेमाल के लिए गुड़हल के फूलों को सुखाकर अच्छे से पीस लें, और उसके बाद इसमें तिल, बादाम या नारियल का तेल मिला लें, और बालों को धोने के एक घंटे पहले इसे अच्छे से अपने बालों में लगाएं, उसके बाद अपने बालों को शैम्पू की मदद से धो लें, इसके कारण आपके बालों को मुलायम और सिल्की होने में मदद मिलती है।

अंडे का पैक अपने बालों में लगाएं:-

यदि आपको अंडे की महक से एलर्जी हो तो आपको इस तरीके का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, इस उपाय को करने के लिए अंडे को फोड़ कर उसे अच्छे से अपने बालों में लगाएं उसके पीले भाग को अलग कर दें, इसे अपनी जड़ से लेकर अपने बालों में लगाएं, और अच्छे से अपने बालों को फोल्ड कर लें, और आधे घंटे तक इसे बालों में लगे रहने के बाद अपने बालों को अच्छे से शैम्पू से धो लें, इसके कारण भी आपके बालों को मुलायम होने के साथ चमकदार बनाने में भी मदद मिलती है।

बियर का इस्तेमाल करें:-

beer

बियर का इस्तेमाल करने से भी आप अपने बालों को सिल्की और मुलायम बना सकते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप अपने बालों को जड़ से लेकर बालों तक अच्छे से लगाएं, उसके बाद आप अपने हाथों से कम से कम पांच मिनट तक बालों की अच्छे से मसाज करें, और बाद में शैम्पू से अपने बालों को धो लें, इसके कारण आपके बालों में नमी आएगी, और बालों को सॉफ्ट होने में मदद मिलेगी, साथ ही आज कल मार्किट में बियर शैम्पू भी मिल जाते है, वो भी फायदेमंद होते है।

चुकंदर और केले का इस्तेमाल करें:-

चुकंदर को केले को अच्छे से पीस कर मैश कर लें, उसके बाद इस पेस्ट को अच्छे से अपने बालों और उसकी जड़ में लगाएं, और कम से कम आधे घंटे के लिए इसे अपने बालों में रहने दें, ऐसा करने के बाद अपने बालों को अच्छे से धो लें, ऐसा करने से भी आपको एक ही दिन में अपने बालों को मुलायम और सिल्की बनाने में मदद मिलती है।

सेब के सिरके का इस्तेमाल करें:-

सेब के सिरके का इस्तेमाल करने से भी आपके बालों को सिल्की और मुलायम बनाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप सेब के सिरके में थोड़ा सा पानी मिलाएं, और अच्छे से अपने बालों और स्कैल्प पर मसाज करें, ऐसा करने से आप चाहे तो इसमें थोड़ा सा निम्बू का रस भी मिला सकती है, इसके बाद आधे घंटे के लिए इसे अपने बालों में छोड़ दें, और उसके बाद ठन्डे पानी से अपने बालों को धो लें, ऐसा करने से आपको फायदा मिलता है, साथ ही यदि सिर में खुजली या डैंड्रफ की परेशानी है तो उससे भी निजात मिल जाता है।

बालों को सिल्की और मुलायम बनाने के अन्य तरीके:-

  • सेब को उबाल कर उसका पेस्ट बालों में लगाने से भी आपको फायदा मिलता है।
  • मेहँदी और दही का इस्तेमाल या मेहँदी और अंडे का इस्तेमाल करने से भी आपके बाल सिल्की और मुलायम बनते है।
  • केले, मक्खन, और बादाम को सही मात्रा में मिलाकर इसके पेस्ट को भी बालों में लगाने से आपको बालों को सिल्की और मुलायम बनाने में मदद मिलती है।
  • अंडे में ओलिव ऑयल मिलाकर लगाने से भी आपको बालों को सिल्की बनाने में मदद मिलती है।
  • मेथी और अंडे से बना पेस्ट बालों में अच्छे से लगाएं और उसके आधे घंटे बाद बालों को धो लें, इस उपाय को करने से भी आपके बालों को मुलायम बनने में मदद मिलती है।
  • एवोकाडो और केले या फिर अंडे के तरल भाग को मिलाकर बालों में लगाने से भी आपको फायदा मिलता है।
  • बालों को नियमित धोने से भी बालों की प्राकृतिक चमक खो जाती है, इसीलिए अपने बालों को मुलायम रखने के लिए बालों को हर दिन न धोएं।
  • जिलेटिन को एक चम्मच एक कटोरी में डाल कर इसमें थोड़ा सा गरम पानी मिलाएं, और अच्छे से इसे मिक्स करें, उसके बाद इस पेस्ट को अपने बालों में लगाएं, ऐसा करने से भी आपके बालों को मुलायम होने में मदद मिलती है।

तो ये कुछ टिप्स है जिनका इस्तेमाल करके आप बालों को एक ही दिन में मुलायम और चमदार बना सकते है, इसके अलावा आपको अपने बालों को अच्छे से पोषण देने के लिए अपने खान पान का ध्यान रखना चाहिए, और नमी को बरक़रार रखने के लिए पानी का उपयुक्त सेवन करना चाहिए, ऐसा करने से भी आप अपने बालों को मुलायम बना सकते है, और उन्हें हमेशा घना और चमकदार भी बना सकते है।

इन्हे भी पढ़े:- असमय बाल सफ़ेद होने की समस्या से निजात पाने के टिप्स

गर्भवती महिला को अमरुद खाना चाहिए या नहीं

गर्भवती महिला को अमरुद खाना चाहिए या नहीं, प्रेगनेंसी में अमरुद खाने के फायदे, प्रेगनेंसी में अमरुद खाएं या नहीं, गर्भवती महिला को अमरुद खाने के फायदे

गर्भवती महिला को अपने खान पान को लेकर बहुत सतर्क रहना पड़ता है, क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने के साथ ऐसी चीजों का सेवन करने की सलाह दी जाती है जो गर्भवती महिला और शिशु के विकास दोनों के लिए लाभदायक हो। ऐसे में कौन से फल कौन सी सब्जियां जिनका सेवन करना चाहिए, या नहीं करना चाहिए इसे लेकर महिला परेशान रहती है। तो आज हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान अमरुद का सेवन करना चाहिए या नहीं इस बारे में कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं, साथ ही प्रेगनेंसी के समय अमरुद का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं, और कौन से नुकसान होते हैं इस बारे में भी जानेंगे।

प्रेगनेंसी के दौरान अमरुद का सेवन करना चाहिए या नहीं

फोलेट, फाइबर, विटामिन सी, पोटैशियम आदि पोषक तत्वों से भरपूर अमरुद का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान अमरुद का सेवन गर्भवती महिला को करना चाहिए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की आप केवल अमरुद ही खाएं बल्कि दिन में एक अमरुद का सेवन आप कर सकती है, क्योंकि किसी भी चीज का सेवन यदि अधिक मात्रा में किया जाये तो वह आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है।

गर्भवती महिला को अमरुद का सेवन करने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला बहुत सी परेशानियों से गुजरती है, ऐसे में अमरुद का सेवन प्रेग्नेंट महिला को इन परेशानियों से बचाव करने में मदद करता है। जैसे की पोटैशियम की मात्रा भरपूर होने के कारण यह बॉडी में सोडियम के लेवल को बनाएं रखता है। जिससे महिला के ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल में रहने में मदद मिलती है, इसके अलावा प्रेगनेंसी में अमरुद का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं आइये जानते हैं।

पोषक तत्वों से होता है भरपूर

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है, ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिल सके। और अमरुद पोषक तत्वों से भरपूर होता हैं जो प्रेग्नेंट महिला और शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होता है।

इम्युनिटी बढ़ाता है

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान इन्फेक्शन या किसी अन्य किसी भी तरह के संक्रमण से बचने के लिए इम्युनिटी को मजबूत रखना बहुत जरुरी होता है, और अमरुद का सेवन करने से गर्भवती महिला की इम्युनिटी को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।

तनाव दूर करता है

तनाव प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। क्योंकि तनाव होने के कारण बॉडी कार्टिसोल बनाने लगती है, जिससे की गर्भाशय को नुकसान पहुँच सकता है। ऐसे में अमरुद का सेवन आपकी इस परेशानी का हल करने में मदद करता है क्योंकि अमरुद का सेवन करने से मन को शांत रखने के साथ तनाव को दूर करने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर कण्ट्रोल रहता है

हाई ब्लड प्रैशर की समस्या प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है। लेकिन अमरुद में मौजूद पोषक तत्व आपके ब्लड प्रैशर को प्रेगनेंसी के दौरान कण्ट्रोल में रखने में मदद करते हैं।

मॉर्निंग सिकनेस

ज्यादातर महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से परेशान रहती है, लेकिन यदि आप गर्भवती है और आप अमरुद का सेवन करती है, तो इसके मौजूद विटामिन सी आपकी इस परेशानी को दूर करके आपको फ्रेश महसूस करवाने में मदद करता है।

कब्ज़ से निजात

फाइबर से भरपूर अमरुद का सेवन करने से आंतो पर दबाव बना रहता है जिससे कब्ज़ जैसी परेशानी से प्रेगनेंसी के दौरान आपको बचाव करने में मदद मिलती है। और इससे आपकी पाचन क्रिया को भी बेहतर होने में मदद मिलती है।

ब्लड शुगर लेवल कण्ट्रोल रहता है

कई बार प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को गेस्टेशनल डाइबिटीज़ की समस्या से परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। लेकिन यदि गर्भवती महिला अमरुद का सेवन करती है तो ऐसा करने से ब्लड शुगर लेवल को कण्ट्रोल में रखने में मदद मिलती है।

ब्रैस्ट कैंसर से बचाता है

लाइकोपीन और विटामिन सी से भरपूर अमरुद का सेवन करने से बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद मिलती है। साथ ही इसके सेवन से शरीर में विषैले पदार्थो का जमाव भी नहीं होता है। साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट भी बहुत फायदेमंद होता है, जिससे ब्रैस्ट कैंसर जैसी समस्या से महिला का बचाव करने में मदद मिलती है।

एनीमिया से बचाव

खून की कमी होने के कारण गर्भवती महिला को एनीमिया की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है, साथ ही इससे डिलीवरी के दौरान परेशानी आने के साथ, शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। लेकिन अमरुद में मौजूद आयरन बॉडी में हीमोग्लोबिन की मात्रा को पूरा करने में मदद करता है, जिससे महिला को इन परेशानियों से बचाव करने में मदद मिलती है।

कैल्शियम भरपूर मिलता है

अमरुद में कैल्शियम भी भरपूर मात्रा में होता है जो की प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला की हड्डियों की मजबूती बढ़ाने के साथ शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

पाचन क्रिया होती है बेहतर

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाएं सीने में जलन, एसिडिटी, गैस की समस्या से परेशान रहती है। लेकिन यदि महिला अमरुद का सेवन करती है तो इन सब परेशानियों से निजात मिलने के साथ गर्भवती महिला को पाचन क्रिया को बेहतर करने में मदद मिलती है

शिशु के लिए है फायदेमंद

गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी महिला द्वारा किया गया अमरुद का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि यह गर्भ में पल रहे शिशु के तंत्रिका तंत्र, और मस्तिष्क के विकास को बढ़ावा देने में मदद करता है। क्योंकि इसके लिए फोलिक एसिड भरपूर मात्रा में चाहिए होता है और अमरुद में फोलिक एसिड भरपूर होता है।

प्रेगनेंसी में अमरुद खाने के नुकसान

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा अमरुद का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें फाइबर मौजूद होता है, और अधिक मात्रा में फाइबर का सेवन डायरिया जैसी परेशानी खड़ी कर सकता है। साथ ही यदि गर्भवती महिला को कोई ऐसी परेशानी है जिसमे फाइबर या पोटैशियम का सेवन नहीं करना चाहिए तो इसके सेवन से पहले आपको एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान अमरुद खाने से आपको कौन से फायदे मिलते हैं, और कौन कौन से नुकसान होते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को इन टिप्स का ध्यान रखना चाहिए, और प्रेगनेंसी के दौरान भरपूर पोषक तत्व युक्त आहार का सेवन करना चाहिए। साथ ही यदि आपको अमरुद का सेवन करने से किसी भी तरह की परेशानी होती है तो आपको इसके सेवन से परहेज करना चाहिए।

Hindi Video : Pregnancy me Amrud Khayen ya Nahi?

Guava In Pregnancy

गर्भवती महिलाओ को पेनकिलर लेना चाहिए या नहीं?

प्रेगनेंसी के समय महिला को अपने ऊपर दुगुना ध्यान देने की जरुरत होती है, क्योंकि महिला द्वारा की गई कोई भी लापरवाही सीधा उसके शिशु पर बुरा असर डाल सकती है, ऐसे में शिशु और महिला दोनों स्वस्थ रहे इसके लिए महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव के कारण कई बार महिलाओ को बहुत सी परेशानियां उत्त्पन्न हो जाती है, जैसे की पेट में दर्द होना, पेडू में दर्द होना, कमर में दर्द होना, सर चकराना और दर्द महसूस होना, कमजोरी, थकान, अवसाद, उल्टियां, गैस एसिडिटी होना आदि और ऐसा भी जरुरी नहीं होता है की हर महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ये परेशानियां होती है।

इन्हें भी पढ़ें:- गर्भावस्था में उल्टी और गैस की समस्या से निजात पाने के टिप्स

यह हर महिला के हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करता है, लेकिन जिन महिलाओ को यह समस्या हो जाती है, तो इससे निजात पाने के लिए महिलाएं पेनकिलर खाने के लिए सोचती हैं, जो की बिलकुल भी अच्छा नहीं होता है, क्योंकि स्ट्रांग केमिकल वाली दवाइयाँ, गर्भनाल के रास्ते खून में मिलकर शिशु के ब्लड में भी घुल जाती है, जिसके कारण शिशु मानसिक रूप से प्रभावित हो सकता है, प्रेगनेंसी में छोटी मोटी समस्या होना आम बात है लेकिन इसके निवारण के लिए अपने मन से कुछ भी करना आपके लिए और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए खासकर परेशानी का विषय बन सकता है,।

इसीलिए प्रेगनेंसी के समय यदि आपको बुखार है पेट में दर्द है या कोई भी समस्या है पहले तो इसके बारे में अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए फिर उनके द्वारा दी गई दवाइयों का सेवन आप कर सकती है, क्योंकि एक शोध में यह साफ़ हुआ है जो महिलाएं प्रेगनेंसी में पेन किलर का सेवन अधिक करती हैं उन्हें जन्म के समय विकार और शिशु के ुपत मानसिक रूप से बुरा प्रभाव पड़ सकता है, इसीलिए कुछ भी करने से पहले आपको डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में पेनकिलर लेने से महिला को और शिशु को क्या नुकसान हो सकते है।

इन्हें भी पढ़ें:- गर्भावस्था में सफ़ेद पानी (White discharge) आने की समस्या के कारण व् समाधान

जन्म के समय विकार उत्त्पन्न हो सकता है:-

यदि महिला अपनी प्रेगनेंसी में सधिक पेनकिलर का सेवन करती है तो इसके कारण डिलीवरी के समय महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है,और यदि आप चाहती हैं की आपको ऐसी कोई परेशानी न हो तो यदि आपको कुछ भी समस्या है तो पहले अपने डॉक्टर से शेयर करें।

शिशु मानसिक रूप से प्रभावित हो सकता है:-

जिन पेनकिलर्स का महिला सेवन करती है, यदि उनमे केमिकल अधिक होता है तो वह गर्भनाल के रास्ते रक्त में घुलकर शिशु तक पहुँच जाता है, जिसके कारण शिशु के मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण शिशु मानसिक रूप से अस्वस्थ पैदा हो सकता है।

तो इसीलिए प्रेगनेंसी में पेनकिलर्स को नहीं लेना चाहिए ताकि इससे शिशु और महिला दोनों को ही स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें, हार्मोनल बदलाव के कारण छोटी छोटी परेशानियां लगी रहती हैं, लेकिन यदि आपको असहज मेहसूस हो तो खुद कुछ करने से पहले तुरंत अपने डॉक्टर से राय लें।

इन्हें भी पढ़ें:- गर्भावस्था के दौरान होने वाले इन लक्षणों को न करें अनदेखा

वजन बढ़ाने (Weight Gain) के क्या तरीके है?

Weight Gain Tips : वजन का अधिक होना जितना आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक होता है उतना ही वजन का सामान्य से कम होना भी आपको परेशान करता है। ऐसे बहुत से लोग है जो अपने मोटापे से परेशान है और रोजाना अपने वजन को घटाने के लिए नए नए तरीके ढूंढ़ते हैं। ऐसे ही बहुत से लोग वजन के कम होने के कारण भी परेशान रहते है। क्योंकि हर एक व्यक्ति चाहता है की उसकी पर्सनैल्टी लोगो को आकर्षित करें, लेकिन यदि आप बहुत ज्यादा दुबले है तो इससे आपकी लुक पर बुरा असर पड़ता है। कई बार तो आपको इसके कारण हंसी का पात्र भी बनना पड़ता है।

वजन न बढ़ने के या आपके दुबले होने का सबसे बड़ा कारण होता है आपके शरीर में पोषक तत्वों की कमी, जिससे शरीर के अंगो का विकास अच्छे से नहीं हो पाता है, नतीजा आपका वजन कम हो जाता है। कई लोग ऐसा भी कहते है की हम बहुत खाते है लेकिन हमारे शरीर को वो लगता ही नहीं है पता नहीं कहा जाता है। और भी ऐसे कई कारण हो सकते है जिससे आपको दुबलेपन की समस्या हो सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की दुबलेपन के क्या कारण होते है, दुबलेपन से आपको क्या नुकसान हो सकते है, और आप अपने वजन को बढ़ाने के लिए क्या क्या कर सकते हो।

वजन कम होने के कारण क्या क्या नुकसान हो सकते है:-

  • कम वजन होने के कारण आपके इम्यून सिस्टम पर असर पड़ता है, जिसके कारण वह कमजोर होता है और आपको संक्रमण होने का ज्यादा खतरा रहता है।
  • दुबलेपन के कारण शरीर बहुत जल्दी थक जाता है।
  • इसके कारण आपकी लुक पर भी बुरा असर पड़ता है।
  • वजन कम होने के कारण उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियां कम होने लगती है जिसके कारण बीमारियों के फैलने का खतरा बहुत ज्यादा होता है।

वजन कम होने के क्या कारण होते हैं:-

  • व्यक्ति को आहार सम्बन्धी समस्या होने पर वजन न बढ़ने की समस्या हो सकती है, क्योंकि भोजन को सही मात्रा में न लेने के कारण बॉडी को पोषक तत्व भरपूर मात्रा में नहीं मिल पाते है।
  • मानसिक बिमारी यानी तनाव एक ऐसी परेशानी है जो व्यक्ति की सोच में परिवर्तन लाती है, जिसके कारण उसकी बॉडी पर भी बुरा असर पड़ता है।
  • जो व्यक्ति हाइपरथायराडिज़्म की बिमारी से ग्रस्त होते है वो भी दिन प्रतिदिन पतले होते है।
  • यदि कोई व्यक्ति कैंसर, ट्यूमर, आदि से जूझ रहा है, तो इसमें बॉडी में बहुत अधिक मात्रा में बहुत अधिक मात्रा में कैलोरी बर्न होती है, जिसके कारण वजन न बढ़ने की समस्या हो सकती है।
  • सीलिएक की बिमारी से ग्रस्त होने पर भी व्यक्ति पतला होता है, और ज्यादातर लोग इस बिमारी के बारे में जानते भी नहीं है की उन्हें यह बिमारी है, और इसका कारण ग्लूटन होता है। यह गेहूं में पाया जाने वाला प्रोटीन होता है। जिसके सेवन से छोटी आंतो को नुकसान पहुँचता है।
  • यदि आपके शरीर में किसी तरह का इन्फेक्शन है तो इसके कारण भी वजन कम होने की परेशानी हो सकती है जैसे एड्स, टी बी आदि।

वजन बढ़ाने के लिए ये उपाय करें:-

जिस तरह वजन को घटाने के लिए आपको नियमित मेहनत करनी पड़ती है, उसी तरह अपने वजन को बढ़ाने के लिए भी आपको अपने रुटीन में बदलाव लाना चाहिए, फिर चाहे वो खान पान में हो, या व्यायाम में, आदि। तो लीजिए कुछ टिप्स जानते हैं जिससे आपके वजन को तेजी से बढ़ाने में मदद मिलती है।

उच्च मात्रा में करें प्रोटीन और कैलोरी का सेवन:-

शरीर में कैलोरी की मात्रा का सही होना बहुत जरुरी होता है क्योंकि यह आपके वजन को बढ़ाने में मदद करती है। साथ ही वजन बढ़ाने के लिए प्रोटीन का सेवन भी उच्च मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि प्रोटीन में एमिनो एसिड मौजूद होता है, जो की आपकी मांसपेशियों को टोन करने के साथ उन्हें बढ़ाने में भी मदद करता है। और प्रोटीन के लिए आप अंडा, अंकुरित अनाज, मीट, मछली, दालें आदि का सेवन भरपूर मात्रा में कर सकते है।

योगासन करने से भी बढ़ा सकते है आसानी से वजन:-

योगासन करने से न केवल आप फिट रहते है बल्कि यह मांसपेशियों के विकास, तनाव को दूर करने, मेटाबोलिज्म को बढ़ाने, स्टेमिना को बढ़ाने में भी आपकी मदद करता है। साथ ही योगासन करने से आपकी मांसपेशियों का विकास भी बेहतर होता है। जिससे आपका वजन बढ़ने में मदद मिलती है इसके लिए आप पवनमुक्तासन, सर्वांगासन आदि कर सकते है। इन्हे करने से पेट सम्बन्धी समस्याओ से निजात मिलने के साथ आपको भूख को बढ़ाने में भी मदद मिलती है जिससे आपके वजन को बढ़ाया जा सकता है।

पोषक तत्वों का सेवन करें:-

वजन न बढ़ने का कारण आपका आहार में की जाने वाली लापरवाही भी हो सकती है। इसके लिए आपको अपने आहार को सही मात्रा में और सभी पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए। जिससे आपकी बॉडी को फिट रहने में मदद मिल सकें, खास कर वसा यह आपकी मांसपेशियों के विकास और उन्हें मजबूत रखने में मदद करता है। इसके लिए आप नट्स, अलसी के तेल, एवोकाडो के तेल, सालमन मछली, आदि का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए, यह आपकी बॉडी में स्वस्थ वसा की मात्रा को बढ़ाते हैं जिससे आपके वजन को बढ़ने में मदद मिलती है।

वजन बढ़ाने वाले सप्लीमेंट्स का सेवन करें:-

वजन बढ़ने के लिए योगासन, व्यायाम आदि के साथ आपको वजन बढ़ाने वाले सप्लीमेंट्स का से सेवन भी करना चाहिए। इससे बहुत जल्दी आपकी बॉडी को टोन होने में मदद मिलती है जैसे की आप प्रोटीन पाउडर का सेवन कर सकते है, आप नियमित इसे दूध में मिलाकर पीएं इससे बॉडी में प्रोटीन की मात्रा बढ़ेगी। जिससे आपके वजन को सही रखने में मदद मिलती है।

नींद भी करती है वजन बढ़ाने में मदद:-

बेहतर नींद आपकी मांसपेशियों के विकास में अहम योगदान करती है। इससे आपके वजन को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके लिए आपको रात को बेहतर नींद लेनी चाहिए, और यदि आप चाहे तो दिन में भी थोड़ी देर सो सकते है। इससे आपके वजन को बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही बेहतर नींद के लिए अपने सोने वाले स्थान की साफ़ सफाई आदि का उचित ध्यान रखें।

डार्क चॉकलेट का सेवन करें:-

डार्क चॉकलेट में कैलोरी उच्च मात्रा में होती है, ऐसे में यदि आपका वजन कम है और आपको चॉकलेट खाना पसंद है। तो वजन बढ़ाने के लिए आपको नियमित चॉकलेट का सेवन करना चाहिए। चॉकलेट का सेवन करने से आपके शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ती है जिससे आपके वजन को बढ़ाने में मदद मिलती है।

वजन बढ़ाने के लिए तनाव न लें खुश रहें:-

मानसिक तनाव आपके शरीर की गतिविधियों पर बहुत बुरा असर डालता है, क्योंकि आपकी बॉडी में सभी प्रक्रियाओ को करने का काम मस्तिष्क का होता है। ऐसे में तनाव में रहने भी आपके दुबलेपन का कारण हो सकता है। इसीलिए यदि आप चाहते हैं की आपका वजन सही रहें तो इसके लिए आपको तनाव से बचना चाहिए और खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए।

रेड मीट खाने से भी बढ़ता है वजन:-

वजन बढ़ाने के लिए रेड मीट का सेवन एक असरदार उपाय है, क्योंकि इसमें ल्युसीन पाया जाता है जिसमे एमिनो एसिड भरपूर मात्रा में होते है। जो की आपकी मांसपेशियों के विकास और उनकी वृद्धि करने में मदद करते है। यदि आप रेड मीट खा सकते है तो अपने वजन को बढ़ाने के लिए आप इसे अपने आहार में शामिल कर सकते है।

वजन बढ़ाने के अन्य उपाय:-

  • आपकी बॉडी में जितनी कैलोरी बर्न होती है आपको उससे ज्यादा कैलोरी का सेवन करना चाहिए, इससे आपका वजन बढ़ता है।
  • जब भी खाना खाते है तो उसके पहले या बीच में पानी का सेवन न करें इससे आपकी भूख कम होती है।
  • दिन में जितनी बार हो सके आहार का सेवन करें, इससे आपकी बॉडी को अधिक ऊर्जा मिलेगी और आपकी बॉडी का वजन बढ़ने लगेगा।
  • तनाव या किसी भी तरह की मानसिक परेशानी से बचें।
  • दूध व् दूध से बनी चीजों में प्रोटीन भरपूर होता है उनका सेवन करें, प्रोटीन के साथ स्वस्थ वसा, कार्बोहाइड्रेट आदि का सेवन भरपूर मात्रा में करें।
  • धूम्रपान न करें इसे करने से आपका वजन कम होता है।
  • बनाना शेक, व् अन्य वजन बढ़ाने वाले शेक का सेवन नियमित करें।
  • मसालों का सेवन करें इससे भी आपका वजन बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • व्यायाम करें, नियमीय व्यायाम भी आपकी मांसपेशियों को टोन करने में मदद करता है जिससे आपका वजन बढ़ने लगता है।
  • अपना एक रूटीन बनाएं की दिन में आपको क्या क्या खाना और क्या करना है इससे भी आप अपनी बॉडी को फिट रख सकते है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल यदि करते हैं तो इससे आपके वजन को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके अलावा आपको वजन बढ़ाने के लिए इनका नियमित इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे आपकी बॉडी को पोषण मिलेगा और धीरे धीरे आपको इसका असर दिखाई देने लगेगा। और यदि फिर भी आपका वजन नहीं बढ़ता है तो इसके लिए आपको एक बार डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए, क्योंकि इसका कारण शरीर में होने वाली कोई बिमारी भी हो सकती है। और यदि ऐसा है तो आप समय रहते उसका इलाज करवा सके।

दिनचर्या कैसी होनी चाहिए

दिनचर्या कैसी होनी चाहिए:-

दोस्तों आपकी दिनचर्या का सीधा असर आपकी लाइफ पर पड़ता हैं| क्योंकि इसका सीधा संपर्क आपके रिश्तों व् सफलता से होता हैं| आपकी दिनचर्या ही तय करती हैं, की आपके कार्यो का क्या परिणाम होगा| और आपकी दिनचर्या ही आपकी सोच को भी बनाने में मदद करते हैं| इसीलिए तो कहा जाता हैं की आपकी सकारात्मक सोच तभी बनती हैं, जब आपका दिमाग भी फ्रेश होता हैं| आपकी सफलता के साथ आपके शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना भी आपकी दिनचर्या पर ही निर्भर करता हैं|

अच्छी दिनचर्या एक सफल आदमी की निशानी होती हैं| यदि आप सुबह लेट सोकर उठते हैं, तो रात को सोने कभी आपका कोई समय नहीं होता हैं, साथ ही आपको आलस भी आ जाता हैं, न आपके खाने का समय होता हैं, न ही दिन भर आप ऊर्जा से भरे रहते हैं| वही वो लोग जो नियमित रूप से रोजाना सुबह उठते हैं, व्यायाम करते हैं, समय से नाश्ता करते हैं, संतुलित व् पोष्टिक आहार लेते हैं, समय से सोते हैं| वो लोग सारा दिन ऊर्जा का केंद्र बने रहते हैं, और साथ ही उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का अनुभव भी नहीं होता हैं|

आप खुद ही सोचिये यदि आपकी दिनचर्या पॉजिटिव होगी तो आपके सारे काम पॉजिटिव होते हैं, परंतु यदि आपकी दिनचर्या ही नेगिटिव होगी तो आप खुद ही सोचिये की क्या आप कुछ अच्छा सोच सकते हैं| इसीलिए हर व्यक्ति को अपनी दिनचर्या को सही रखना चाहिए| और यदि आप जिंदगी में कुछ करना चाहते हैं, और चाहते हैं की सफलता आपके रास्ते में हमेशा आपको मिले, ऐसे में जरुरी हैं की आप यदि आपकी दिनचर्या गलत होती हैं तो सबसे पहले आपको उसे सही करना चाहिए|

तो आइये जानते हैं की किस प्रकार आपको अपनी दिनचर्या बनानी चाहिए, जैसे की सबसे पहले तो अपनी बुरी आदतों को छोड़ना चाहिए, जैसे की यदि आप लेट उठते हैं, तो समय से उठना चाहिए| यदि आप हर काम को करने में आलस करते हैं,तो उसके बाद व्यायाम व योगा या फिर मैडिटेशन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए| ऐसी बहुत सी बाते हैं जिसका बदलाव आपको अपनी जिंदगी में लाना चाहिए| परंतु ऐसा नहीं हैं की ये बदलाव आपको कुछ देर के लिए लाना चाहिए बल्कि आपको नियमित रूप से ऐसा करना चाहिए|

आपकी दिनचर्या के लिए कुछ टिप्स:-

सुबह समय से उठना चाहिए:-

happy after sleeping

अपनी दिनचर्या को सही करने के लिए सबसे पहले समय से उठना चाहिए| यदि आप समय से उठ जाते हैं, तो आपको बहुत सी चीजो के लिए समय मिल जाता हैं, जो आपकी दिनचर्या को अहम बनाने में आपकी मदद कर सकती हैं| इसके अलावा यदि आप समय से उठ जाते हैं, तो आपको सुबह की प्रकृति का सूंदर नज़ारा लेने के साथ उससे होने वाले लाभ भी मिल जाते हैं| इसीलिए आपको जितना हो सकें समय से उठने की कोशिश करनी चाहिए| क्योंकि यदि दिन की शुरुआत ही अच्छी होगी, तो दिन भी अच्छा होगा|

व्यायाम व योगा करना चाहिए:-

yoga

सुबह जल्दी उठने के बाद आपको थोड़ा समय अपनी दिनचर्या में से व्यायाम और योगा के लिए भी निकालना चाहिए| और इसे नियमित रूप से अपनी दिनचर्या में शामिल भी करना चाहिए| व्यायामव योगा करने से आपको दिन भर के लिए ऊर्जा मिलती हैं| साथ ही आपको आलस नहीं आता हैं, आप तंदरुस्त रहते हैं, और ये आपके लिए सारा दिन ऊर्जा का स्त्रोत बना रहता हैं| आप चाहे तो मैडिटेशन का सहारा भी ले सकते हैं| इसीलिए आपको अपनी दिनचर्या में व्यायाम व् योगा को जरूर शामिल करना चाहिए|

संतुलित व् पोष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए:-

vegetables

जो लोग खाने के प्रति लापरवाही बरतते हैं, उन्हें कमजोरी व् थकान जैसी समस्या हो जाती हैं|इसीलिए यदि आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तो आपको तीनो समय भोजन करना चाहिए, और सुबह का नाश्ता आपको पेट भर कर करना चाहिए| क्योंकि वो आपको सारा दिन ऊर्जा देता हैं| खाने के साथ आपको फलो व् जूस आदि का सेवन भी करना चाहिए| साथ ही ज्यादा कैलोरी व् ज्यादा मसालेदार भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए| ऐसा करने से आपको मोटापे जैसी समस्या हो सकती हैं| इसीलिए संतुलित व् पोष्टिक आहार को अपनी दिनचर्या का अंग बनाएं|

पानी का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए:-

water

आपकी दिन भर की एनर्जी को बरक़रार रखने के लिए दिन में कम से कम आठ गिलास पानी का सेवन करना चाहिए| यदि आप चाहते हैं की आप अच्छे से अपनी दिनचर्या को कायम रख सकें और सारा दिन ऊर्जा से भरे रहें तो आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए| ये आपके शरीर में से विषैले पदार्थो को बाहर निकाल कर आपके शरीर कोस्वस्थ बनाएं रखने मेंमदद करता हैं| जिसके कारण आपकी पाँच क्रिया भी अच्छे से काम करती हैं| और यदि आप कही बाहर जाते हैं, तो पानी की बोतल हमेशा अपने पास रखना चाहिए|

सकारात्मक सोच रखनी चाहिए:-

इसके बाद यदि आप अपनी दिनचर्या को और भी अच्छा करना चाहते हैं| तो हमेशा सकारात्मक रहें, कभी भी गलत विचारो को अपने मन में पनपने न दें| हमेशा अच्छे ख्याल और अच्छी सोच को ही अपने साथ रखें| यदि आप हमेशा नकारात्मक विचारो को अपने मन में लाते हैं तो ऐसे में आपके साथ गलत ही होता हैं| इसीलिए गलत  विचारो को अपने मन में पनपने ही न दें| हमेशा हार एक बात को सकारात्मक तरीके से सोचें| और साथ ही अपने लक्ष्य की और ध्यान केंद्रित करें|

नशीले पदार्थो का सेवन नहीं करना चाहिए:-

alcohol

अच्छी दिनचर्या बनाना चाहते हैं, तो आपको नशे का सेवन नहीं करना चाहिए| साथ ही नशीले पदार्थो से दुरी बनाएं रखनी चाहिए| यदि आप इन सबका सेवन करते हैं तो ये आपको समय से पहले ही बीमारियों की चपेट में ले आते हैं| और साथ की आपको हमेशा नुक्सान की राह पर ही ले जाते हैं| इससे आपके जीवन का कोई मतलब नहीं रह जाता हैं| इसीलिए यदि आप अपनी दिनचर्या को सुधारना चाहते हैं, और ये चाहते हैं की आप हमेशा बढ़ते जाएँ तो यदि आप नशीले पदार्थो का सेवन करते हैं, तो आज से ही आपको उन्हें त्याग देना चाहिए|

समय से सोना चाहिए:-

sleep

कई लोगो की आदत होती है की वो समय से नहीं सोते हैं, या फिर देर रात तक लैपटॉप टीवी आदि देखते रहते हैं, ऐसे में यदि वो जल्दी भी उठ जाते हैं| तो उनके शरीर उन्हें ऊर्जा देने में सक्षम नहीं होता हैं| और साथ ही न वो अच्छे से किसी काम को कर पाते हैं| आप समय से सोयेंगे अपनी पूरी और भरपूर मात्रा में नींद लेंगे, तो इससे आपको मानसिक व् शारीरिक रूप से आराम मिलेगा| यदि आप चाहते हैं की आप अच्छे से अपनी दिनचर्या को पालन करें तो सबसे पहले सबको अपनी दिनचर्या में शामिल करें|

आपकी दिनचर्या कैसी होनी चाहिए, इन कामो को करें अपनी दिनचर्या में शामिल, आपकी दिनचर्या के लिए कुछ टिप्स, ऐसे करें दिन की शुरुआत, दिनचर्या को सही करने के लिए शामिल करें इन्हें अपनी लाइफ में, dincharya kaisi honi chahiye, apni dincharya me inhe shamil karen, in triko se bnayen apni dincharya, your routine should be like, aapka routine kaisa hona chahiye

 

समय से पहले शिशु जन्म नहीं ले इसके लिए प्रेगनेंसी के 7वें महीने में यह सावधानियां बरतें

गर्भावस्था के सैंतीसवें हफ्ते से पहले यदि बच्चे का जन्म हो जाता है तो उसे प्रीमैच्योर डिलीवरी यानि समय से पहले बच्चे का जन्म होना कहा जाता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के सैंतीसवें हफ्ते के बाद ही शिशु का जन्म होना सही होता है। क्योंकि यदि बच्चे का जन्म समय से पहले हो जाता है तो इस कारण बच्चे के वजन में कमी, बच्चे को सांस लेने में दिक्कत, इन्फेक्शन की समस्या, आदि अधिक होती है।

ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि महिला और बच्चे को इस परेशानी से बचने में मदद मिल सके। तो आइये अब जानते हैं कुछ ऐसे कारणों के बारे में जिनकी वजह से समय से पहले बच्चे का जन्म होता है और किस तरह महिला इस समस्या से बच सकती है।

समय से पहले बच्चे का जन्म होने का कारण

  • प्राइवेट पार्ट, गर्भाशय या अन्य संक्रमण होने के कारण।
  • गर्भ में एक से ज्यादा शिशु का होना।
  • प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स अधिक होना।
  • महिला द्वारा बरती गई लापरवाही के कारण।
  • गर्भ में बच्चे को किसी समस्या का होना।
  • प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग की समस्या होना।
  • गर्भाशय कमजोर होना।
  • पहले गर्भपात होना।
  • यदि पहली डिलीवरी समय से पहले होती है तो दूसरी डिलीवरी भी समय से पहले होने का खतरा अधिक होता है।
  • महिला का शरीर कमजोर होना।
  • प्रेगनेंसी के दौरान तनाव लेने के कारण भी ऐसा होता है।

प्रीमैच्योर डिलीवरी से बचने के उपाय

समय से पहले बच्चे का जन्म न हो इसके लिए प्रेगनेंसी के पहले महीने से ही महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं प्रीमैच्योर डिलीवरी से बचने के लिए सातवें महीने में महिला को क्या क्या करना चाहिए।

शरीर में पोषक तत्वों की कमी न हो

गर्भवती महिला को अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। और पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए जैसे की आयरन युक्त आहार खाएं ताकि शरीर में खून की कमी न हो, प्रोटीन युक्त आहार खाएं ताकि मसल्स को मजबूती मिलें, आदि। क्योंकि महिला शारीरिक रूप से जितना फिट रहती है उतना ही माँ व् बच्चे दोनों को प्रेगनेंसी में स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। और जितनी प्रेगनेंसी स्वस्थ होती है उतना ही इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा समय पर अपने आहार का सेवन भी करें।

खूब पानी पीएं

गर्भवती महिला को भरपूर पानी का सेवन करना चाहिए। क्योंकि यदि महिला के शरीर में पानी की कमी होती है तो इस कारण भी समय से पहले डिलीवरी होने का खतरा रहता है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए।

यूरिन नहीं रोकें

गर्भाशय का आकार बढ़ने के साथ बार बार यूरिन आने लगता है ऐसे में यदि आप यूरिन को रोककर रखते हैं तो इस कारण गर्भाशय पर दबाव बढ़ता है जिस वजह से समय से पहले बच्चे के जन्म का खतरा होता है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए महिला को यूरिन रोककर नहीं रखना चाहिए बल्कि जब भी यूरिन पास करने की इच्छा हो तो यूरिन पास जरूर करना चाहिए।

लापरवाही न करें

समय से पहले डिलीवरी न हो इससे बचने के लिए प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की लापरवाही न करें जैसे की भारी वजन न उठायें, यात्रा नहीं करें, भागादौड़ी नहीं करें, पेट के बल काम न करें, पेट पर चोट न लगने दें, ऐसी चीजें न खाएं जिससे गर्भाशय में संकुचन हो, मल्टीविटामिन्स लेने में लापरवाही नहीं करें, आदि। यदि आप इन सभी बातों का ध्यान रखते हैं तो ऐसा करने समय से पहले बच्चे के जन्म होने जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

वजन नियंत्रित रखें

अपने वजन को जरुरत से ज्यादा नहीं बढ़ने दें, क्योंकि इसके कारण गर्भाशय पर दबाव बढ़ सकता है जिस वजह से समय से पहले बच्चा होता है। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान अपने वजन को नियंत्रित रखें न तो वजन को जरुरत से ज्यादा होने दें और न ही कम होने दें।

तनाव नहीं लें

प्रेग्नेंट महिला का ज्यादा स्ट्रेस लेना भी समय से पहले डिलीवरी होने का कारण होता है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए जितना हो सके प्रेग्नेंट महिला को खुश रहना चाहिए।

दांतों से जुडी समस्या को अनदेखा नहीं करें

समय से पहले डिलीवरी होने की समस्या से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को दांतों या मसूड़ों से जुडी परेशानी को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा माना जाता है की प्रेगनेंसी के दौरान मसूड़ों से जुडी समस्या को अनदेखा करने से भी यह समस्या हो जाती है।

डॉक्टर के संपर्क में रहें

प्रीमैच्योर डिलीवरी से बचने के लिए जितना हो सके महिला को डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए। समय पर अपने टीके लगवाने चाहिए, टेस्ट करवाने चाहिए, आदि। ऐसा करने से यदि प्रेगनेंसी के दौरान कोई दिक्कत होती है तो साथ के साथ उसका इलाज हो जाता है। जिससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

तो यह है प्रीमैच्योर डिलीवरी से बचने के कुछ खास टिप्स, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन सभी बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको और आपके बच्चे को समय से पहले डिलीवरी होने की समस्या से बचने रहने में मदद मिल सके।

Ways to avoid Premature Delivery

गर्भावस्था में ब्रेड खाना कितना नुकसानदायक होता है

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए केवल खाना ही जरुरी नहीं होता है। बल्कि इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी होता है की महिला जो भी खाये वह पोषक तत्वों से भरपूर हो और महिला को उससे किसी भी तरह का नुकसान न हो। जैसे की ब्रेड, ब्रेड खाने से महिला का पेट तो भर जाता है लेकिन क्या ब्रेड खाने से गर्भवती महिला को कुछ फायदा मिलता है? तो आज इस आर्टिकल में हम आपसे ब्रेड के सेवन के बारे में बात करने जा रहे हैं की क्या गर्भवती महिला को ब्रेड का सेवन करना चाहिए या नहीं। और यदि महिला को सेवन करना चाहिए तो कौन से ब्रेड का सेवन करना चाहिए सफ़ेद या ब्राउन?

प्रेगनेंसी में ब्रेड का सेवन करना चाहिए या नहीं?

प्रेग्नेंट महिला की यदि कभी कुछ बनाने की इच्छा नहीं होती है या वैसे भी महिला रोज़ाना सुबह नाश्ते में ब्रेड का सेवन करती है। और वो भी सफ़ेद ब्रेड का सेवन करती है। तो महिला के लिए यह नुकसान दायक होता है क्योंकि सफ़ेद ब्रेड मैदे की बनी हुई होती है साथ ही इसमें ग्लूटेन भी मौजूद होता है। जिससे गर्भवती महिला को पोषक तत्व नहीं मिलते हैं साथ ही महिला को स्वास्थ्य सम्बंधित परेशानियां होने का खतरा भी रहता है। यदि आप भी प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद ब्रेड का सेवन कर रही है तो आज से ही इसका सेवन बंद कर दें।

प्रेगनेंसी में सफ़ेद ब्रेड खाने के नुकसान

  • मैदे का बने होने के कारण सफ़ेद ब्रेड का सेवन करने से महिला को पेट में गैस, कब्ज़ जैसी परेशानियां अधिक होती है।
  • सफ़ेद ब्रेड में ग्लूटेन भी मौजूद होता है जिससे गर्भवती महिला को कब्ज़ की समस्या अधिक होती है।
  • प्रेगनेंसी में सफ़ेद ब्रेड खाने से महिला का पेट लम्बे समय तक भरा रहता है जिसके कारण महिला का कुछ भी खाने का मन नहीं करता है और महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।

क्या प्रेगनेंसी में ब्राउन ब्रेड खा सकते हैं?

जी हाँ, यदि कभी प्रेग्नेंट महिला का ब्रेड खाने का मन करता है तो महिला को सफ़ेद की जगह महिला को ब्राउन ब्रेड का सेवन करना चाहिए क्योंकि ब्राउन ब्रेड आटे की बनी हुई होती है। साथ ही ब्राउन ब्रेड में पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा होते हैं इसीलिए यह गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद होती है। तो आइये अब जानते हैं प्रेगनेंसी में ब्राउन ब्रेड खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

  • ब्राउन ब्रेड में कार्बोहाइड्रेट मौजूद होता है ऐसे में गर्भवती महिला यदि इसका सेवन करती है तो इसे महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।
  • ब्राउन ब्रेड में प्रोटीन की मात्रा भी मौजूद होती है जो गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर विकास में मदद करती है।
  • कैल्शियम से भरपूर ब्राउन ब्रेड का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला की हड्डियों को मजबूती मिलने के साथ गर्भ में शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी फायदा मिलता है।
  • ब्राउन ब्रेड में मौजूद फाइबर ब्लड में शुगर की मात्रा को नियंत्रित रखने में मदद करता है जिससे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली शुगर की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • फाइबर से भरपूर ब्राउन ब्रेड का सेवन करने से गर्भवती महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रहने में भी मदद मिलती है।
  • ब्राउन ब्रेड खाने से गर्भवती महिला के शरीर में कोलेस्ट्रॉल को कण्ट्रोल में रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान ब्रेड का सेवन करने से जुड़े कुछ टिप्स, तो यदि आप भी प्रेगनेंसी के दौरान ब्रेड खाना चाहती है तो आपको सफ़ेद ब्रेड की बजाय ब्राउन ब्रेड का सेवन करना चाहिए। ताकि आपकी ब्रेड खाने की इच्छा भी पूरी हो जाये और आपको सफ़ेद ब्रेड खाने से होने वाले नुकसान से बचे रहने में मदद मिल सके।

सब कुछ ठीक है लेकिन प्रेगनेंसी नहीं हो रही है तो यह कारण हो सकते हैं?

माँ बनना हर महिला का सपना होता है और शादी होने के बाद हर महिला चाहती है की और एक प्यारे से बच्चे को जन्म दें। जो बच्चा उनकी जिंदगी में प्यार के और भी रंग भर देगा। लेकिन कुछ केस में महिला का गर्भधारण में होने में दिक्कतें आती है। लेकिन महिला को लगता है की सब कुछ ठीक है महिला और पुरुष दोनों पूरी तरह फिट हैं। ऐसे में यह जानना जरुरी होता है की फिर भी महिला गर्भवती क्यों नहीं हो रही है? ऐसे में महिला का गर्भ न ठहर पाने के कारण कुछ ऐसी गलतियां हो सकती है तो आप रोजाना करती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे कुछ कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपकी प्रेगनेंसी में रूकावट हो सकते हैं।

वजन

महिला का गर्भ न ठहर पाने का एक कारण महिला का वजन भी होता है। यदि किसी महिला का वजन जरुरत से ज्यादा होता है या बहुत कम होता है। तो इसके कारण प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। जिसके कारण कई बार महिला को प्रेग्नेंट होने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में यदि आप माँ बनने की तैयारी कर रही हैं तो आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आपका वजन न तो जरुरत से ज्यादा हो और न ही जरुरत से कम हो।

नींद में कमी

नींद में कमी के कारण भी प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। साथ ही बॉडी में हार्मोनल अंसतुलन भी हो जाता है। ऐसे में यदि आपको भी गर्भधारण नहीं हो रहा है तो इसका एक कारण आपका भरपूर नींद न लेना भी हो सकता है।

विटामिन डी की कमी

विटामिन डी भी महिला के गर्भधारण के लिए बहुत जरुरी होता है। ऐसे में यदि आप पर्याप्त धूप नहीं लेती है या विटामिन डी से भरपूर आहार नहीं लेती है। तो इसके कारण भी आपको कंसीव करने में दिक्कत हो सकती है। इसीलिए प्रेग्नेंट के लिए सभी जरुरी टेस्ट करवाने के साथ आपको विटामिन डी का भी एक टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।

सम्बन्ध बनाते समय की गई गलतियां

केवल शारीरिक व् मानसिक फिटनेस ही प्रेगनेंसी के लिए जरुरी नहीं होती है। बल्कि कई बार सम्बन्ध बनाते समय की गई गलतियां भी प्रेगनेंसी नहीं होने देती है। जैसे की सही तरीके से सम्बन्ध न बनाना जिसकी वजह से शुक्राणु अंडे तक नहीं पहुँच पाते हैं, सही समय पर सम्बन्ध न बनाना, सम्बन्ध बनाते समय एन्जॉय नहीं करना, किसी तरह की प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करना, बहुत ज्यादा या बहुत कम सम्बन्ध बनाना, आदि। सम्बन्ध बनाते समय की गई इन गलतियों के कारण भी महिला को प्रेगनेंसी नहीं हो पाती है।

गलत खान पान

यदि आप ऐसे आहार का अधिक सेवन करती हैं जो डिब्बाबंद होता है, प्लास्टिक में पैक किया होता है, आदि। तो ऐसे आहार में ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो आपकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं। और ऐसे आहार का सेवन अधिक करने से भी आपको प्रेगनेंसी में परेशानियां आ सकती है।

टाइट अंडर गारमेंट्स पहनना

जी हाँ यह सच है की टाइट अंडर गारमेंट का उपयोग भी गर्भधारण में बाधा पैदा कर सकता है। जैसे की पुरुष यदि टाइट अंडर गारमेंट्स पहनते हैं तो इसके कारण शुक्राणुओं की गुणवत्ता और संख्या प्रभावित होती है। वहीं महिलाओं में इस आदत के कारण प्राइवेट पार्ट में संक्रमण होने का खतरा रहता है। और दोनों के कारण ही आपको प्रेग्नेंट होने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

सम्बन्ध बनाने के बाद बाथरूम जाना

कुछ महिलाओं की आदत होती है की वो सम्बन्ध बनाने के तुरंत बाद अपने प्राइवेट पार्ट को साफ़ कर देती है। जिसकी वजह से शुक्राणु ज्यादा अंदर तक नहीं पहुँच पाते हैं और बहार निकल जाते हैं। और इस कारण महिला को गर्भधारण में समस्या हो सकती है।

नशा

महिला या पुरुष दोनों में से यदि कोई भी नशा करता है जैसे की धूम्रपान करता है, शराब पीता है या अन्य किसी भी तरह का नशा करता है तो इसकी वजह से भी प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। और इस कारण महिला का गर्भ ठहरने में दिक्कत हो सकती है।

बहुत ज्यादा व्यायाम

फिटनेस के लिए व्यायाम करना बहुत अच्छी बात है लेकिन यदि आप या आपका पार्टनर दोनों ज्यादा व्यायाम करते हैं। तो इसके कारण पुरुष के शुक्राणु की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ महिला की प्रजनन क्षमता भी बुरी तरह प्रभावित होती है जिसकी वजह से महिला का गर्भधारण नहीं हो पाता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला की प्रेगनेंसी में दिक्कत आ सकती है। ऐसे में आपको और आपके पार्टनर को बहुत कोशिश करने के बाद भी यदि प्रेगनेंसी नहीं हो रही है। तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से मिलना चाहिए और दोनों को अपनी जांच फिर करवानी चाहिए। ताकि महिला के गर्भ न ठहरने के सही कारण का पता लगाया जा सके। और यदि कोई शारीरिक परेशानी इसका कारण नहीं है तो आपको अपनी दिनचर्या में की जाने वाली गलतियों पर ध्यान देना चाहिए।