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डिलीवरी पेन शुरू होने के लक्षण

डिलीवरी का समय पास आने पर ऐसा नहीं होता है की एक दम से महिला को दर्द शुरू हो जाये। बल्कि दर्द शुरू होने से पहले बॉडी में कुछ लक्षण महसूस होते हैं जो यह बताते हैं की महिला को डिलीवरी पेन शुरू होने वाला है। और बच्चे का जन्म कभी भी हो सकता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम डिलीवरी पेन शुरू होने वाला है इसके कुछ लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिनके बारे में हर गर्भवती महिला को पता होना चाहिए। ताकि डिलीवरी के समय महिला को किसी भी तरह की दिक्कत न हो।

पेट में दर्द व् ऐंठन

यदि डिलीवरी का समय पास आने पर महिला को पेट में दर्द व् ऐंठन की समस्या अधिक होती है। जैसा का पीरियड्स के दौरान होता है। और धीरे धीरे यह दर्द बढ़ता जाता है। तो यह इस बात का संकेत होता है की महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने वाली है।

पीठ में दर्द

प्रेग्नेंट महिला को पहले थोड़ा थोड़ा व् फिर धीरे धीरे बढ़ता हुआ पीठ में दर्द होता है खासकर पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द होता है। और फिर यह दर्द धीरे धीरे जाँघों की तरफ बढ़ता है। तो ऐसा होना भी प्रसव पीड़ा शुरू होने का लक्षण होता है।

संकुचन

यदि गर्भवती महिला को गर्भाशय की मांसपशियों में खिंचाव महसूस होता है। और यह खिंचाव धीरे धीरे बढ़ता है तो इसका मतलब होता है की प्रसव पीड़ा शुरू होने वाली है और डिलीवरी होने वाली है। और इस लक्षण के महसूस होने पर गर्भवती महिला को बिना देरी करते हुए जितना जल्दी हो सके डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए।

प्राइवेट पार्ट से स्त्राव

पेट में दर्द के साथ प्राइवेट पार्ट से यदि महिला को सफ़ेद गाढ़ा चिपचिपा पदार्थ निकलता हुआ महसूस होता है तो महिला को तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए क्योंकि यह डिलीवरी होने का संकेत होता है। साथ ही यदि महिला को भूरे रंग का स्त्राव या खून का स्त्राव होता है तो भी महिला को डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

बच्चे की हलचल में कमी

बच्चे के जन्म लेने की सही पोजीशन में आने के बाद बच्चा गर्भ में थोड़ी कम मूवमेंट करता है। ऐसे में यदि आपको यह लक्षण महसूस हो तो इसका मतलब होता है की अब आपको डिलीवरी पेन कभी भी शुरू हो सकता है।

टॉयलेट जाने की इच्छा में बढ़ोतरी

यदि प्रेग्नेंट महिला की बार बार यूरिन पास करें की इच्छा अधिक हो रही है या दस्त जैसी परेशानी हो रही है। तो यह लक्षण भी इस बात की और इशारा करता है की महिला को डिलीवरी पेन कभी भी शुरू हो सकता है। साथ ही दस्त की परेशानी ज्यादा होने पर एक बार डॉक्टर से जरूर बात करें।

पेल्विक एरिया पर जोर पड़ना

प्रेग्नेंट महिला के पेट के निचले हिस्से पर यदि अधिक दबाव महसूस हो रहा है तो यह लक्षण इस बात की और इशारा करता है। की महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने वाली है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो यदि प्रेग्नेंट महिला को महसूस होते हैं तो यह इस बात की और इशारा करते हैं की महिला को प्रसव पीड़ा किसी भी समय शुरू हो सकती है। साथ ही यदि आपके शरीर में आपको प्रसव से जुड़ा कोई भी लक्षण महसूस नहीं होता है। तो ऐसे में इसे भी अनदेखा न करें बल्कि जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलें। क्योंकि डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद गर्भ में शिशु का रहना शिशु के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

आम खाने के फायदे : आम खाने के इन फ़ायदों से शायद अब तक अनजान हैं आप!!

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आम खाने के फायदे : भारत में अनेक प्रकार के फल जैसे अंगूर, सेब, केला, संतरा, अमरूद, लीची, अनार आदि पाए जाते हैं । जो हमारे शरीर में पहुँचकर किसी न किसी विटामिन की कमी की पूर्ति करते रहते हैं। इन सब फलों में से आम एक ऐसा फल है, जो स्वाद में उत्तम होने के साथ साथ तमाम तरह के गुणों से भी भरपूर है। बच्चे बूढ़े सबको ही आम पसंद होता है। इसलिए आम को फलों के राजा की उपाधि से नवाज़ा जाता रहा है।

भारतीय आम विश्व में अपने लज्जत और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है । आम उत्पादक देशों में भारत का स्थान सर्वप्रथम है । संसार के कुल आम के उत्पाद का 64 प्रतिशत भाग लगभग भारत पैदा करता है । भारत में आमों के दसहरी, लंग्डा, चौसा, अलफांसो, आम्रपाली, नीलम, तोतापरी, गोला, कलमी, सफेदा आदि नामों से लोग परिचित हैं ।

mango

# आम है गुणों की खान – 

आम में कई तरह के ज़रूरी पोषक तत्व (nutrients) पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व हमारे शरीर को ऊर्जा देने के साथ साथ हमें कई तरह की बीमारियों से भी बचाते हैं। पहले हम आम में पाए जाने वाले पोषक तत्वों के बारे में जानेंगे –

  • विटामिन-C – विटामिन-C एक ऐंटीआक्सिडंट है और हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत करता है।
  • विटामिन-A – विटामिन-A भी एक ऐंटीआक्सिडंट है और ये हमारी दृष्टि के लिए लाभदायक होता है।
  • विटामिन-B6 – विटामिन-B6 और बाक़ी के B-विटामिन हॉर्मोन प्रोडक्शन में मदद करता है और दिल के रोग से बचाता है।
  • Probiotic फ़ाइबर – पाचन तंत्र को सही रखता है।
  • कॉपर – कॉपर RBC यानि रेड ब्लड सेल्ज़ को बनाने में सहायता करता है और साथ ही शरीर में पाए जाने वाले एंज़ायम की क्रियाओं में को-फ़ैक्टर की भूमिका निभाता है।
  • पोटेशियम – कई बार हम भोजन में सोडीयम (नमक) की अधिक मात्रा को ग्रहण कर लेते हैं, जो कि हमारे लिए हानिकारक हो सकता है। शरीर में सोडीयम की अधिक मात्रा को बैलेन्स करने में पोटेशियम मदद करता है।
  • मैग्नीशियम – मैग्नीशियम 300 से अधिक एंज़ायम के साथ को-फ़ैक्टर का काम करता है और शरीर में होने वाली बायो-केमिकल रीऐक्शंज़ जैसे प्रोटीन सिन्थिसस, मसल और नर्व फ़ंक्शन, ब्लड ग्लूकोस और ब्लड प्रेशर कंट्रोल इत्यादि को रेग्युलेट करता है।

# आम हमें कई तरह की बीमारियों से बचाता है, जैसे

कैन्सर से दूर रखता है आम – 

विभिन्न शोध और अनुसंधानों से ये स्पष्ट हो चुका है कि आम में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट तत्व हमें पेट (colon) के कैन्सर, स्तन (breast) कैन्सर, प्रॉस्टेट कैन्सर, रक्त का कैन्सर (leukemia) इत्यादि से बचाते हैं। आम में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट तत्वों में quercetin, isoquercitrin, astragalin, fisetin, gallic acid और methylgallat के साथ साथ भरपूर मात्रा में एंज़ायमस भी पाए जाते हैं, जो कि हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देते हैं।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है आम – 

आम में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले फ़ाइबर, पेक्टिन और विटामिन-C, सीरम कॉलेस्ट्रॉल के लेवल को घटाने में मदद करते हैं, ख़ास करके लो डेन्सिटी लिपो प्रोटीन को, जो की सेहत के लिए बेहद हानिकारक है।

आँखों को स्वस्थ रखता है आम

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि आँखों को स्वस्थ रखने में विटामिन-A का महत्वपूर्ण योगदान होता है। आम में विटामिन-A भरपूर मात्रा में पाया जाता है और आम का सेवन करने से हमारी आँखें स्वस्थ रहती हैं। एक कप कटे हुए आम में हमारी दैनिक आवश्यकता का 25% विटामिन-A मौजूद होता है। आम का सेवन करने से हमारी आँखों की रोशनी तेज़ होती है, नाइट ब्लायंड्नेस की समस्या से बचाव होता है और ड्राई आइज़ की समस्या भी दूर होती है।

मधुमेह में भी लाभदायक है आम – 

आम के पत्ते हमारे ख़ून में इंसुलिन लेवल को सामान्य रखने में सहायक हो सकते हैं। एक पारम्परिक घरेलू उपाय के अनुसार आम के पत्तों को अच्छी तरह से धोकर पीने के पानी में 15-20 मिनट तक उबालिए, फिर उन्हें रात भर उसी पानी में रहने दीजिए। सुबह ख़ाली पेट आम के पत्तों का उबला हुआ पानी छान कर पी लीजिए। नियमित रूप से ये उपाय करने से मधुमेह रोगियों को निश्चित रूप से लाभ पहुँचेगा। आम के फल के low glycemic index (40-60) की वजह से वैसे भी कम मात्रा में आम खाने से ख़ून में शुगर लेवल नहीं बढ़ता है। परंतु अधिक मात्रा में आम खाना मधुमेह रोगियों के लिए हानिकारक हो सकता है।

पाचन शक्ति को बढ़ाता है आम

फलों में सिर्फ़ पपीता ही एक ऐसा फल नहीं होता, जिसमें कि प्रोटीन को तोड़ने वाले यानि कि पचाने वाले एंज़ायम पाए जाते हैं। और भी कई फलों में ये गुण पाया जाता है, जैसे कि आम। आम में पाया जाने वाला फ़ाइबर भी भोजन को पचाने और उसके निष्काशन में मदद करता है।

गरमी में राहत दिलाता है आम – 

हमारे देश भारत में शायद ही ऐसा कोई घर होगा, जहाँ गरमियों में आम पन्ना ना बनाया और पिया जाता हो। हरे या कच्चे आम से बनाया जाने वाला आम पन्ना, हमारे शरीर के तापमान को घटाकर, हीट स्ट्रोक से होने वाले नुक़सान से बचाता है। आम पन्ना बनाने के लिए दो चम्मच कच्चे आम के घोल (कच्चे आम को काट कर, उबाल कर और चीनी मिलाकर ठंडा करके तैयार किया हुआ) में, भुना हुआ ज़ीरा, सेंधा नमक व ठंडा पानी मिक्स करें। ऊपर से इसमें चार पाँच टुकड़े बर्फ़ के डालें व दो तीन पत्ती पुदीने की रख कर ठंडा ठंडा पिएँ। गरमी से राहत पाने का इससे बेहतर तरीक़ा नहीं हो सकता और ये हमारे पाचनतंत्र के लिए भी लाभदायक होता है।

इम्यून सिस्टम यानि प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत करता है आम – 

इम्यून सिस्टम यानि प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत करता है आम। हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है। आम में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले विटामिन-A और विटामिन-C के साथ साथ 25 तरह के carotenoids भी पाए जाते हैं, जो कि हमारे इम्यून सिस्टम यानि प्रतिरक्षा प्रणाली को स्वस्थ रखते हैं व मज़बूत करते हैं।

त्वचा के लिए वरदान है आम – 

त्वचा को स्वस्थ और सुंदर बनाए रखने के लिए, आम को आंतरिक और बाह्य दोनों तरीक़ों से इस्तेमाल किया जा सकता है। आम त्वचा के रोम छिद्रों को साफ़ करता है व मुँहासों से मुक्ति भी दिलाता है।

  • त्वचा के लिए बाह्य रूप से इस्तेमाल करने के लिए आम को अच्छे से मैश करके उसका पेस्ट बना लीजिए और अपने चेहरे पर लगा लीजिए। अकेला आम भी त्वचा के लिए काफ़ी होता है, पर अगर इसे ओट मील और बादाम के साथ मिला कर इस्तेमाल किया जाए तो त्वचा की एक्स्फ़ोलीएशन के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। दी चम्मच ओट्मील और दो चम्मच बादाम को पीस कर पाउडर बना लिजिए। अब इस पाउडर में एक पके हुए आम का गूदा मिला कर पेस्ट बना लीजिए। चेहरे के साथ साथ आप इसे पूरे शरीर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। त्वचा की एक्स्फ़ोलीएशन के लिए ये एक बेहतरीन उपाय है।
  • आम खाने से भी त्वचा को कई तरह के लाभ होते हैं। आम त्वचा सम्बंधी रोगों जैसे की मुँहासों से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। कच्चे आम की गुठली के अंदर से निकलने वाले बीज को कच्चा ही या फिर पकाकर खाने से भी त्वचा को लाभ पहुँचता है और शरीर को ऊर्जा मिलती है। आपने कभी ना कभी किसी बंदर को कच्चे आम से गुठली के अंदर का बीज निकाल कर खाते हुए तो ज़रूर देखा होगा, आयुर्वेद ज्ञाताओं का मानना है कि बंदरों को कभी ना ख़त्म होने वाली उनकी ऊर्जा और पेड़ों पर कूदने फाँदने की शक्ति इसी से मिलती है।

# ध्यान रखने योग्य बातें – 

  • जो लोग लेटेक्स ऐलर्जी (latex allergy) से ग्रसित होते हैं, उन्हें आम से रीऐक्शन हो सकता है। ये रीऐक्शन anacardic acid की वजह से होता है।
  • आम के छिलके व आम की टहनी और फल के बीच के भाग में पाया जाने वाला रस (mango sap) बेहद नुक़सानदायक होता है। इस रस में urushiol पाया जाता है, इससे त्वचा पर rashes हो सकते हैं व skin reaction भी हो सकता है।
  • आज कल आम को जल्दी पकाने के लिए calcium carbide का इस्तेमाल किया जाता है, जो की सेहत के लिए बेहद हानिकारक होता है। इसलिए ऐसे आम को खाने से पहले बहुत अच्छी तरह से धोना चाहिए या फिर पूरी रात पानी में डुबो के रखने ले बाद ही खाना चाहिए।

गर्भावस्था के दूसरे महीने में शिशु का विकास और गर्भवती महिला के शरीर में बदलाव

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गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए बहुत ही खास पल होता है। पुरे नौ महीनों तक वो कई नए-नए अनुभवों को महसूस करती हैं। पर ये भी सच है की इस दौरान गर्भवती महिलाओं को कई तरह की शारीरिक परेशानियों से जूझना पड़ता है। आज हम आपको बता रहे हैं की गर्भावस्था के दूसरे महीने में गर्भ के भीतर शिशु का विकास किस तरह होता है और दूसरे महीने में गर्भवती महिला के शरीर में क्या-क्या बदलाव होते हैं?

गर्भधारण के बाद गर्भवती महिलाएं अपना बहुत खास ध्यान रखने लगती है। पहले महीने में शिशु का आकार तिल के समान होता है और गर्भ में अंडे का प्रत्यारोपण मात्र होता है। गर्भधारण के पहले महीने में गर्भवती महिला में कुछ शुरुवाती लक्षण दिखते हैं जिससे पता चलता है की गर्भधारण हो गया है।

गर्भावस्था का दूसरा महीना और शिशु में विकास

दूसरे महीने से शिशु का विकास होना शुरू हो जाता है। दूसरे महीने के पहले सप्ताह से शिशु का दिल धड़कने लगता है जिसे आप इस महीने के अंतिम सप्ताह तक डॉक्टरी चेकअप में उल्ट्रासॉउन्ड की मदद से सुन सकती हैं।

गर्भावस्था के दूसरे महीने से शिशु अपना आकार लेने लगता है। इस महीने में शिशु के महत्वपूर्ण अंगों का आकार बनने लगता है, शिशु के हाथ, पैर, आँख, कान, नाक और मुंह की आकृतियां बनना शुरू हो जाती हैं। 

दूसरे महीने से शिशु के मस्तिष्क का विकास होना शुरू हो जाता है और शिशु के फेफड़ों का निर्माण शुरु हो जाता है। इस महीने से शिशु का वजन बढ़ने लगता है और शिशु की उँगलियाँ आकार लेने लगती हैं।

गर्भावस्था के दूसरे महीने में गर्भवती महिला के शरीर में बदलाव

दूसरे महीने में गर्भवती महिला के शरीर में भी कई बदलाव आते हैं। दूसरे महीने में गर्भवती महिला के गर्भाशय का आकार थोड़ा बड़ा हो जाता है ताकि गर्भ में शिशु का विकास सही तरह से हो सके, हार्मोनल बदलाव के कारण बार-बार यूरिन पास करने की इच्छा होता है, गर्भवती महिला को कुछ खाने का मन नहीं करता, प्राइवेट पार्ट में दर्द या खुजली की समस्या हो सकती है। शरीर में बदलाव होने के कारण कई महिलाओं को इस समय साँस लेने में तकलीफ हो सकती है। 

दूसरे महीने से गर्भवती महिला का वजन धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। उन्हें कई चीजों की गंध पसंद नहीं आती, कभी खाने का भी मन नहीं करता। जो भी चीजें देखती हैं वोमिटिंग होने की संभावना रहती है, एसिडिटी के कारण सीने में जलन की समस्या भी हो सकती है। दूसरे महीने में गर्भवती महिला को वोमिटिंग की समस्या बहुत अधिक होती हैं, जी मिचलाने लगता है, कई बार चक्कर भी आने लगते है।

खान पान में बदलाव होने के चलते महिलाओं को इस समय पेट से सम्बंधित समस्याए हो जाती हैं, कई महिलाओं की त्वचा के रंग में परिवर्तन आने लगते हैं, गर्भ में शिशु आने पर स्तनों में भारीपन भी महसूस होता है और पेट के निचले हिस्से में काफी दर्द हो सकता है। 

ऐसे में गर्भवती महिला को अपने खान-पान का खास ध्यान रखना चाहिए, समय पर आहार लेना चाहिए, डॉक्टर से चेकअप कराते रहना चाहिए, सही दिनचर्या अपनानी चाहिए और भरपूर आराम करना चाहिए। ताकि गर्भ में पल रहे शिशु का विकास सही तरीके से हो सके और गर्भवती महिला को भी प्रेग्नेंसी के दौरान कोई समस्या ना हो।

डिलीवरी के बाद महिला को क्या नहीं खाना चाहिए?

जिस तरह प्रेगनेंसी के दौरान महिला को उन खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए जिससे माँ व् बच्चे की सेहत को नुकसान हो। वैसे ही डिलीवरी के बाद भी महिला को उन खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए जिससे महिला की सेहत और शिशु के विकास पर किसी तरह का बुरा असर पड़े। क्योंकि डिलीवरी के बाद महिला का शरीर कमजोर हो जाता है साथ ही बच्चा भी अपने विकास के लिए माँ के दूध पर ही निर्भर करता है।

ऐसे में महिला यदि गलत चीजों का सेवन करती है तो इसके कारण महिला के स्वास्थ्य व् बच्चे के विकास दोनों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। तो आज इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसे ही खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन डिलीवरी के बाद महिला को नहीं करना चाहिए, ताकि माँ व् बच्चे दोनों को डिलीवरी के बाद भी स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

ज्यादा वसा युक्त आहार

डिलीवरी के बाद महिला का वजन पहले के मुकाबले बढ़ा हुआ होता है और डिलीवरी के तुरंत बाद महिला किसी तरह का व्यायाम भी नहीं कर सकती है। ऐसे में यदि महिला डिलीवरी के बाद बहुत ज्यादा तले हुए आहार का सेवन करती है तो इससे महिला का वजन और भी ज्यादा बढ़ सकता है क्योंकि बॉडी पर चर्बी जमने लगती है। और वजन बढ़ने के कारण महिला को बिमारी होने का व् सेहत सम्बन्धी और भी बहुत सी परेशानियों के होने का खतरा रहता है। इसीलिए डिलीवरी के बाद महिला को ऐसी कोई परेशानी न हो इससे बचने के लिए जितना हो सके महिला को ज्यादा वसा युक्त आहार का सेवन नहीं करना चाहिए।

ज्यादा मीठा

अधिक मीठा भी शरीर में कैलोरी की मात्रा को बढ़ाता है जिससे वजन बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है, जिसके कारण महिला को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में जरुरत से ज्यादा मीठी चीजों का सेवन भी महिला को डिलीवरी के बाद नहीं करना चाहिए।

एलर्जी वाली चीजें

यदि कोई ऐसी चीज है जिसे खाने से महिला को एलर्जी होती है, तो डिलीवरी के बाद महिला को ऐसी चीजों का सेवन करने से परहेज करना चाहिए। क्योंकि यदि आप ऐसी चीजों का सेवन करते हैं तो इसका असर ब्रेस्टमिल्क के जरिये शिशु तक पहुँचता है जिससे शिशु को एलर्जी होने का भी खतरा रहता है।

मसालेदार भोजन

महिला को डिलीवरी के बाद तेज मसालों वाले भोजन, जंक फ़ूड, बाहर के खाने आदि से भी परहेज करना चाहिए। क्योंकि ब्रेस्टमिल्क के साथ इनका असर बच्चे तक पहुँचता है जिससे शिशु की सेहत को नुकसान पहुँचता है।

गैस बनाने वाले आहार

कुछ ऐसी चीजें होती है जिसका सेवन करने से महिला को पेट में गैस, एसिडिटी, खट्टी डकार, सीने में जलन, कब्ज़, आदि की परेशानी होती है, ऐसे आहार का सेवन भी डिलीवरी के बाद महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसी चीजों का सेवन करने के कारण महिला के साथ बच्चे को भी पेट में गैस, कब्ज़ आदि की दिक्कत होती है।

कैफीन युक्त आहार व् नशीले पदार्थ

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कैफीन युक्त आहार, नशीले पदार्थ आदि का सेवन करने की मनाही होती है क्योंकि इससे बच्चे के शारीरिक के साथ मानसिक विकास पर बहुत बुरा असर पड़ता है। वैसे ही महिला को डिलीवरी के बाद भी कैफीन युक्त चीजे जैसे की चाय, कैफीन, चॉकलेट, आदि नशीले पदार्थ जैसे की धूम्रपान, अल्कोहल आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि डिलीवरी के बाद ब्रेस्टमिल्क के साथ इनका असर भी शिशु तक पहुँचता है। जिसकी वजह से शिशु के विकास में कमी आती है।

कच्चे अंडे व् कच्चा मास

डिलीवरी के बाद महिला को कच्चे अंडे व् कच्चे मास का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें बैड बैक्टेरिया मौजूद होता है जो डिलीवरी के बाद महिला के लिए सेहत सम्बन्धी परेशानी खड़ी करने के साथ बच्चे के लिए भी इन्फेक्शन जैसी समस्या से ग्रसित कर सकता है।

दवाइयां

डिलीवरी के बाद महिला जब तक शिशु को स्तनपान करवाती है तब तक महिला को अपनी मर्ज़ी से किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि आप जो भी खाती है उसका असर दूध के जरिये बच्चे तक पहुँचता है। और दवाइयां भी बच्चे के विकास पर बुरा असर डाल सकती है, साथ ही आप किसी मल्टीविटामिन को लेने की सोच रहे हैं तो भी इसके लिए एक बार डॉक्टर से जरूर पूछना चाहिए।

तो यह हैं कुछ आहार जो डिलीवरी के बाद महिला को नहीं खाने चाहिए। यदि महिला डिलीवरी के बाद इन सभी बातों का ध्यान रखती है तो इससे माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

माँ का दूध तुरंत बढ़ाने के लिए ये उपाय करें

किसी भी महिला के लिए शिशु को स्तनपान करवाना बहुत मह्त्वपूर्ण होता है। क्योंकि इससे न केवल महिला को मातृत्व का अहसास महसूस होता है, बल्कि नवजात शिशु और उसकी माँ को एक दूसरे से मानसिक रूप से जुड़ने में भी मदद मिलती है। साथ ही किसी भी नवजात शिशु के लिए माँ का दूध अमृत के समान होता है। क्योंकि इससे नवजात शिशु की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ शिशु के विकास को भी तेजी से होने लगता है। क्योंकि माँ के दूध में वो सभी मिनरल्स उच्च मात्रा में मौजूद होते है जो की शिशु का विकास होने के लिए चाहिए होते है।

लेकिन कई महिलाओ डिलीवरी के तुरंत बाद एक दम से दूध ज्यादा नहीं आता है। ऐसे में शिशु भूखा न रह जाए, और उसके विकास में किसी तरह की कमी न रह जाए, इसके लिए महिला तुरंत दूध के उत्पादन के लिए कई नुस्खों का इस्तेमाल करनी है। जिससे ब्रैस्ट में दूध की ग्रंथियों को खुलने में मदद मिलती है। और दूध के उत्पादन में वृद्धि होती है जिससे शिशु के लिए पर्याप्त दूध बनता है। तो आइये आज हम आपको ऐसे ही कुछ नुस्खे बताने जा रहे है जिससे ब्रैस्ट में दूध बढ़ाने में मदद मिलती है ।

माँ का दूध तुरंत बढ़ाने के उपाय:-

ब्रैस्ट की सफाई:-

कई बार ब्रैस्ट के आगे निप्पल में मौजूद सफ़ेद कील अच्छे से नहीं निकलते है, जिसके कारण शिशु के लिए दूध नहीं आ पाता है। इसके लिए जरुरी है की डिलीवरी के बाद नर्स से या आपके घर में मौजूद किसी महिला से गुनगुने पानी से अच्छे से अपने निप्पल की सफाई करवानी चाहिए। जिससे की वो कील अच्छे से निकल जाए और बच्चे के लिए दूध बन सकें।

पंप का इस्तेमाल करें:-

ब्रेस्टफीडिंग के लिए दूध को बढ़ाने के लिए आप पंप का इस्तेमाल कर सकते है। यह एक तरह की मशीन होती है जिसे हाथ व् बिजली दोनों के द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। इससे ब्रैस्ट पर दबाव पड़ता है जिसके कारण ब्रैस्ट में दूध की मात्रा को बढ़ाने में मदद मिलती है।

सफ़ेद जीरा और मिश्री:-

यदि महिला डिलीवरी के तुरंत बाद सुबह शाम एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच पीसी हुई मिश्री और एक चम्मच पीसा हुआ सफ़ेद जीरा पीती है। तो इससे तुरंत ही महिला के ब्रैस्ट में दूध आने लग जाता है। और दूध की मात्रा भी बढ़ती है ऐसा महिला को डिलीवरी के बाद से ही शुरू कर देना चाहिए। ताकि शुरू से ही आपको किसी तरह की परेशानी न हो।

अरंडी का तेल:-

अरंडी का तेल भी स्तन में दूध की वृद्धि को तेजी से बढ़ाने में मदद करता है। इसके लिए आप अपने हाथों पर थोड़ा सा अरंडी का तेल लेकर ब्रैस्ट को अच्छे से मसाज करें, इससे दूध की ग्रंथियों को खुलने में मदद मिलती है। जिससे ब्रैस्ट में दूध की वृद्धि भी होती है, लेकिन मसाज के बाद ब्रैस्ट को अच्छे से साफ़ करना न भूलें।

दलिया:-

दूध का दलिया खाने से न केवल महिला को डिलीवरी के बाद फिट होने में मदद मिलती है।बल्कि इससे शिशु के लिए स्तन में दूध की मात्रा को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। यदि महिला को शुरू में दूध अच्छे से नहीं उतरता है तो इसके लिए महिला को दिन में दो बार पेट भर कर दूध वाले दलिये का सेवन करना चाहिए।

कंघी का इस्तेमाल करें:-

एक साफ कंघी लेकर यदि आप अच्छे से अपनी ब्रैस्ट को उसकी तिलियों से प्रेस करते हैं। तो इससे ब्रैस्ट की मांसपेशियों और दूध की ग्रंथियों को खुलने में मदद मिलती है। जिससे ऐसा हलके हाथों से दिन में कई बार करें ऐसा करने से दूध को बढ़ाने में मदद मिलती है, यह काफी आसान तरीका होने के साथ असरदार भी होता है।

शिशु को भरपूर स्तनपान करवाएं:-

यदि आपको थोड़ा बहुत दूध भी स्तन में आता है, तो भी आपको थोड़े थोड़े समय बाद शिशु को स्तनपान करवाना चाहिए। क्योंकि जैसे जैसे शिशु दूध पीता है वैसे वैसे ब्रैस्ट में दूध की ग्रंथियों को खुलने में मदद मिलती है। जिससे स्तन में दूध की मात्रा को बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की दोनों स्तनों से शिशु को दूध पिलाना चाहिए।

मुलहठी:-

जिन महिलाओ को ब्रैस्ट में दूध नहीं उतरता है उन्हें जीरा और मुलहठी को बराबर मात्रा में पीस कर चूर्ण तैयार कर लेना चाहिए। और उसके बाद सुबह शाम एक चम्मच इसका सेवन दूध के साथ करना चाहिए। ऐसा दो से तीन तक करने पर भी आपको ब्रैस्ट में दूध आने लग जाता है। और यदि आपको कम दूध आता है तो यह दूध की मात्रा को बढ़ाने में भी फायदा करता है।

डॉक्टर की राय लें:-

कई बार ब्रैस्ट से जुडी किसी परेशानी करने के कारण भी ब्रैस्ट में दूध नहीं आता है। ऐसे में यदि बहुत कोशिश करने के बाद भी ब्रैस्ट से दूध नहीं आता है। तो इस बारे में आप डॉक्टर से भी राय ले सकते है। क्योंकि कई बार कुछ समस्या हो सकती है तो डॉक्टर इस समस्या का समाधान आपको बता सकते हैं जिससे आपके ब्रैस्ट से दूध आने की समस्या दूर होती है।

ब्रैस्ट मिल्क को बढ़ाने के लिए आहार:-

  • मेथी दाना को पीस कर उनका पाउडर तैयार कर लें, उसके बाद इसे अपने आहार में शामिल करें।
  • भुना हुआ जीरा को पीस कर पाउडर के रूप में अपनी सब्जियों और सलाद आदि में डालकर खाएं।
  • मदर्स टी पीने से भी स्तन में दूध की मात्रा को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • पपीता खाने से भी आपको उच्च मात्रा में फाइबर मिलते हैं जिससे आपको ब्रैस्ट मिल्क को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • दूध व् दूध युक्त आहार का सेवन करने से भी आपके ब्रैस्ट में दूध की मात्रा को बढ़ाया जा सकता है।
  • तुलसी का रस व् तुलसी के सूप में शहद मिलाकर पीने से फायदा मिलता है।
  • ड्राई फ्रूट का सेवन भी भरपूर मात्रा में करें जिससे आपको ब्रैस्ट में दूध की मात्रा बढ़ती है।
  • जई का दलिया खाने से भी आपको ब्रैस्ट मिल्क को बढ़ाने में फायदा मिलता है, और आपको इस दलिये में दूध डालकर खाना चाहिए।
  • दिन में थोड़े थोड़े समय बाद कुछ न कुछ खाते रहने चाहिए जिससे आपको भरपूर मिनरल्स मिल सकें।
  • करेले का सेवन करने से भी दूध का उत्पादन बढ़ता है।
  • लहसुन का सेवन करने से भी ब्रैस्ट मिल्क को बढ़ाया जा सकता है।

शिशु को माँ का दूध पिलाने के फायदे:-

  • इससे शिशु की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है, जिससे उसे रोगो से लड़ने के लिए सक्शन बनाने में मदद मिलती है।
  • बच्चे का शारीरिक विकास तेजी से होता है।
  • माँ का दूध न केवल बच्चे का शारीरिक विकास करता है बल्कि मानसिक रूप से भी शिशु की बुद्धि का विकास होता है।
  • बच्चे की हड्डियों को मजबूत करने में मदद मिलती है।
  • शिशु के विकास के लिए सभी जरुरी तत्व और मिनरल्स माँ के दूध से ही शिशु को मिलते है।

तो यदि आप भी डिलीवरी के बाद ब्रैस्ट में दूध न आने के कारण परेशान हैं। तो आप भी ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल कर सकते है। लेकिन यदि बहुत उपाय करने के बाद भी आपके ब्रैस्ट में दूध का उत्पादन नहीं हो पा रहा है तो आपको इसके लिए अपनी डॉक्टर से भी राय ले सकते है। क्योंकि ऐसा कई बार होता है की महिलाओ को दूध न आने की परेशानी भी होती है।

किस वजह से गर्भनाल शिशु गले में लिपट जाती है?

गर्भवस्था के दौरान गर्भनाल का सबसे अहम रोल होता है क्योंकि गर्भनाल ही वह माध्यम है जिसके जरिये शिशु तक पोषण पहुंचाया जाता है, शिशु को संक्रमण से सुरक्षित रखने में मदद मिलती है, रक्त व् ऑक्सीजन का प्रवाह भी गर्भनाल के माध्यम से ही शिशु में होता है। इसीलिए गर्भनाल को शिशु के लिए लाइफलाइन कहा जा सकता है। गर्भनाल में कोई नस नहीं होती है इसीलिए शिशु के जन्म के बाद आसानी से इसे काटकर शिशु से अलग कर दिया जाता है, क्योंकि जन्म के बाद शिशु अपने आप सांस ले सकता है, अपने आप दूध पी सकता है, अब उसे गर्भनाल की नहीं बल्कि अपने विकास के लिए माँ के दूध की जरुरत होती है।

लेकिन कई बार नौवें महीने के अल्ट्रासॉउन्ड में पता चलता है की शिशु की गर्भनाल उसके गले में लिपटी हुई है, तो ऐसे में महिला घबरा सकती है, या आपकी डॉक्टर आपको जल्द से जल्द सिजेरियन डिलीवरी के माध्यम से शिशु को जन्म देने के लिए प्रेरित कर सकती है। ऐसे में सबसे पहले तो महिला को घबराना नहीं चाहिए क्योंकि घबराने से आपकी समस्या का हल नहीं होगा। बस आपको डॉक्टर द्वारा बताई गए टिप्स का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि किसी भी तरह की शिशु या महिला को दिक्कत न हो। इसके अलावा महिला जो ज्यादा मूवमेंट करने की बजाय जितना हो सके आराम करना चाहिए।

शिशु गर्भनाल गले में क्यों लपेट लेता है?

प्रेगनेंसी एक ऐसा समय होता है जहां महिला द्वारा की गई गई लापरवाही के कारण महिला व् शिशु की सेहत पर गलत असर पड़ सकता है। और कई बार बिना किसी लापरवाही के भी आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है जैसे आज कल ऐसे बहुत से केस देखने को मिलते हैं जिसमे महिला को अल्ट्रासॉउन्ड के माध्यम से पता चलता है की शिशु ने गले में गर्भनाल लपेटी हुई है। और गर्भ में शिशु के साथ ऐसा होने के कई कारण हो सकते हैं, तो आइये अब जानते हैं की गर्भनाल को शिशु गले में क्यों लपेट लेता है।

समय पूर्व प्रसव

जो शिशु समय से पहले ही पैदा हो जाते हैं उन शिशु के गले में गर्भनाल लिपटे होने के चांस ज्यादा होते है। ऐसे में इस समस्या से बचने के लिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि महिला और शिशु को हर परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके, ।

लम्बी गर्भनाल

कुछ केस ऐसे भी होते हैं जिनमे गर्भनाल थोड़ी ज्यादा लम्बी होती है, और लम्बी होने के कारण शिशु जब गर्भ में मूवमेंट करता है। तो इसके कारण भी शिशु के गले में गर्भनाल लिपटने के चांस अधिक होते हैं।

शिशु की पोजीशन

प्रसव के दौरान शिशु का सिर सबसे पहले बाहर आता है लेकिन कई बार शिशु के अपनी सही पोजीशन में न आने के कारण या शिशु के उल्टा होने के कारण प्रसव के समय शिशु के पैर पहले बाहर आते हैं। ऐसा होने पर भी शिशु के गले में नाल लिपटने के चांस अधिक होते हैं।

ज्यादा एमनियोटिक फ्लूड

भ्रूण गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड में रहता है और शिशु को गर्भ में सुरक्षित रहने में लिए एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा का सही होना बहुत जरुरी होता है। लेकिन कई बार एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा बढ़ जाती है, ऐसा होने के कारण शिशु की मूवमेंट ज्यादा तेजी से हो सकती है जिसके कारण भी गर्भ में शिशु के गले में गर्भनाल लिपटने की सम्भावना बढ़ जाती है।

शिशु की हलचल

गर्भ में शिशु हलचल करता है, किक मारता है, घूमता हैं, और भी बहुत सी हरकतें करता है, ऐसे में कई बार घुमते घुमते शिशु गर्भनाल में लिपट भी जाता है। और उसमे से अपने आप को बाहर भी निकाल लेता है। और कुछ केस में डिलीवरी के समय पास आने पर यह परेशानी के रूप में सामने आता है, क्योंकि गर्भनाल का शिशु के गले में ज्यादा लिपट जाने शिशु तक ऑक्सीजन के प्रवाह को कम कर सकता है जिसके कारण शिशु को दिक्कत हो सकती है।

जुड़वाँ बच्चे

गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होने के कारण भी शिशु के गले में गर्भनाल लपेट लेने के चांस अधिक होते हैं। ऐसा जरुरी नहीं है की हर केस में हो, लेकिन जुड़वाँ बच्चे गर्भ में होने पर ऐसा होने के चांस अधिक होते हैं।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से शिशु गले में गर्भनाल लपेट लेता है, ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, और जैसे ही अल्ट्रासॉउन्ड के बाद आपको पता चलता है की गर्भ में शिशु ने अपने करतब दिखने शुरू कर दिए हैं तो उस समय जो डॉक्टर द्वारा सही आपको बताया जाये आपको वही करना चाहिए।

बाल पतले हो रहें हैं? घने करने के लिए ये करें

बाल पतले हो रहें हैं? घने करने के लिए ये करें; मजबूत, घने बाल हर महिला का सपना होता है, और बालों की अच्छी केयर करने के लिए महिलाएं बाजार से कई महंगे उत्पाद भी खरीद कर बालों के लिए इस्तेमाल करती हैं। लेकिन ये उत्पाद केमिकल से भरे हुए होने के कारण आपके बालों को फायदा कम और नुकसान ज्यादा पहुंचाते हैं। और यह काफी महंगे भी होते हैं इनके अधिक इस्तेमाल से आपको बालों के झड़ने की समस्या हो जाती है। और बालों के पतले होने की समस्या तब आती है जब आपके नए बालों की अच्छे से ग्रोथ न हो रही हो। क्या आप भी इस समस्या से निजात पाना चाहती है? क्या आप भी अपने बालों को मजबूत और घना बनाना चाहती हैं?

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यदि हाँ तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताते हैं जो आपके बालों को मजबूत और घना करने के साथ रेशमी और चमकदार बनाने में भी मदद करेंगे। और साथ ही इनका आपके बालों पर किसी तरह का कोई दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ेगा, साथ आपको इन्हे लिए अधिक खर्चा भी नहीं करना पड़ेगा। बस आपको इन टिप्स का इस्तेमाल कुछ दिनों तक करना होगा और इसका असर आपको अपने बालों पर साफ़ दिखाई देने लगेगा, तो आइये जानते हैं की बालों को घना करने के लिए आप कौन कौन से उपाय इस्तेमाल कर सकते हैं।

अंडे का प्रयोग करें:-

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बालों की मजबूती के लिए प्रोटीन की बहुत जरुरत होती है, और अंडे में प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यदि आप इसका इस्तेमाल करते हैं तो इससे आपके बालों को पोषण मिलता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप अपने बालों के हिसाब से एक या दो अंडे फोड़ लें और उसे अच्छे से फैट लें। उसके बाद तेल की तरह इसे अपने बालों की जड़ तक अच्छे से लगाएं, अंडे की बदबू से बचने के लिए आप बालों को शावर कैप से ढक लें। आधा घंटे तक रहने के बाद अपने बालों को शैम्पू से धो लें, हफ्ते में दो बार इस उपाय को कुछ दिनों तक नियमित करने से आपको अपने बालों में इसका असर साफ़ दिखाई देगा।

अंडे के छिलके को न फेकें:-

अंडे के साथ उसका छिलका भी आपके बालों को इस समस्या से बचाने में आपकी मदद करता है। इसके लिए अंडे के छिलको को अच्छे से पीस कर इसमें दो चम्मच हेयर ऑयल मिक्स करें। उसके बाद दो चम्मच पानी भी मिलाकर अच्छे से मिक्स करें। उसके बाद इसे अपने बालों में लगाकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें, इससे भी आपको बालों को घना बनाने में मदद मिलती है।

मेथी के बीजो का इस्तेमाल करें:-

इस तरीके का इस्तेमाल करने से न केवल आपको बालों को मोटा करने में मदद मिलेगी, बल्कि आपके नए बालों को भी उगने में फायदा होगा। क्योंकि मेथी के बीज आपकी जड़ से नए बालों को उगाने में मदद करते हैं। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक कप मेथी के बीज दो कप पानी में भिगोकर रात भर के लिए रख दे। उसके बाद सुबह उठकर इनका पेस्ट तैयार करें, और इसे अच्छे से जड़ तक अपने बालों में लगाएं। और आधे घंटे के लिए छोड़ दें, उसके बाद शैम्पू से अपने बालों को धो लें। यदि आप हफ्ते में एक बार भी इस तरीके का इस्तेमाल करते हैं तो आपको अपने बालों को घना बनाने में मदद मिलती है।

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एलोवेरा का प्रयोग करें:-

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एलोवेरा न केवल आपके बालों को मुलायम बनाने में मदद करता है बल्कि आपकी बालों से जुडी हर परेशानी का समाधान करने में आपकी मदद करता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एलोवेरा का गुद्दा निकाल कर अच्छे से पीस लें। और इसे अपने बालों में लगाने के बाद आधे घंटे के लिए छोड़ दें। उसके बाद बालों को धो लें, हफ्ते में दो से तीन बार इस उपाय को करने से आपके बालों को पोषण मिलता है। जिससे आपके बालों को झड़ने से निजात मिलने के साथ बालों को लम्बा और घना होने में भी मदद मिलती है।

प्याज के रस का इस्तेमाल करें:-

प्याज का रस भी बालों के लिए बहुत उपयोगी होता है क्योंकि यह भी आपके बालों को मजबूत बनाने के साथ बालों से जुडी बहुत सी परेशानियों का समाधान करने में मदद करता है। साथ ही इससे गंजेपन और आपके सर में नए बालों को उगाने में भी मदद मिलती है, और आपके बाल घने होते हैं। इसके इस्तेमाल के लिए आप दो बड़े प्याज़ छील कर उनका रस निकाल लें, उसके बाद इस रस को अच्छे से अपने बालों में जड़ तक लगाएं। फिर इसे अपने बालों में सूखने के लिए छोड़ दें, और लगभग आधे घंटे के बाद बालों को धो दें। हफ्ते में दो या तीन बार इसका इस्तेमाल करने से आपको इसका असर दिखाई देने लगेगा।

हिना का इस्तेमाल करें:-

आपके बालों को प्राकृतिक रूप से कलर करने के साथ आपके बालों को मोटा करने में भी हिना बहुत फायदेमंद होती है। आप हिना पाउडर या इसकी पत्तियों का इस्तेमाल करके बालों को घना बना सकती है। हिना की पत्तियों को पानी के साथ मिलाकर अच्छे से पेस्ट बना लें, उसके बाद इसे अपने बालों में अच्छे से लगाएं। सूखने के बाद साफा पानी से अपने बालों को धो दें, हफ्ते में दो बार इस उपाय को नियमित करने से आपको फायदा मिलेगा।

हिना पाउडर का इस्तेमाल करें:-

इस तरीके के इस्तेमाल के लिए आप अपने बालों के हिसाब से हिना पाउडर को पानी या फिर ग्रीन टी बनाकर उस पानी में भिगोकर रख दें। उसके बाद दूसरे दिन इसमें थोड़ा सा निम्बू का रस, और एक कच्चा अंडा डालकर अच्छे से मिक्स कर दें। उसके बाद इसे अच्छे से अपने बालों में लगाएं, और दो से तीन घण्टे के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद पानी से धो दें, महीने में दो बार इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपको अपने बालों में इसका फ़र्क़ साफ़ दिखाई देने लगेगा।

बालों को मोटा बनाने के ने उपाय:-

  • जैतून के तेल से हफ्ते में दो से तीन बार अच्छे से अपने बालों में मसाज करें, और सुबह उठकर अपने बालों को धो दें, इस तरीके का इस्तेमला करने से भी आपके बालों को मोटा होने में मदद मिलती है।
  • अरंडी का तेल और नारियल का तेल को बराबर मात्रा में मिक्स करके अच्छे से अपने बालों में मसाज करें, और उसके बाद सुबह उठकर धो दें, कुछ दिनों तक नियमित इस उपाय को करने से आपको फायदा मिलेगा।
  • भरपूर आहार लें, खासकर प्रोटीन युक्त क्योंकि बालों की मजबूती के लिए प्रोटीन सबसे ज्यादा जरुरी होता है।
  • गीले बालों में न तो कभी कंघी करें, और न ही कभी तेल लगाएं, साथ ही अपने बालों को ज्यादा टाइट भी न बांधे, क्योंकि इसके कारण भी आपके बाल झड़ने लगते हैं।
  • बालों के लिए आलू का रस इस्तेमाल करने से भी आपके बालों को मोटा होने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आलू का रस निकालकर अपने बालों में लगाएं और अपने बालों को सूखने के लिए छोड़ दें, और फिर अपने बालों को धो लें।
  • बालों के लिए अधिक केमिकल के इस्तेमाल के साथ इलेक्ट्रॉनिक ड्रायर, स्ट्रेटनर का इस्तेमाल करने से भी बचें, क्योंकि इनके अधिक इस्तेमाल से भी आपके बाल कमजोर होते हैं।

तो ये हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करके आप अपने बालों को घना बना सकते हैं और पतले बालों की समस्या से निजात पा सकते है। और आपको अपने बालों की अच्छे से केयर करनी भी चाहिए क्योंकि आपके खूबसूरत चेहरे के साथ आपके बाल भी आपकी पर्सनैल्टी को बढ़ाने में मदद करते हैं। तो यदि आप भी बालों के पतले हने की समस्या से परेशान हैं तो आपको भी इनमे से किसी भी टिप्स का इस्तेमाल करके इस समस्या से माधन मिल सकता है।

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प्रेगनेंसी में पेट दर्द से होने वाले नुकसान

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प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को तरह तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में महिला को कई बार पेट दर्द की समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है, शुरूआती दौर में जहां पेट दर्द का कारण कब्ज़ या पेट के आकार में होने वाले परिवर्तन के कारण ऐसा होता है। तो दूसरी और तीसरी तिमाही में भी कई बार हल्का फुल्का पेट दर्द होता है। लेकिन यह दर्द उतना ही होता है जितना की सहन किया जा सकें, और डॉक्टर्स भी इसके लिए किसी तरह की दवाई आदि नहीं देते हैं।

लेकिन यदि महिला को बहुत ज्यादा और असहनीय दर्द होता है तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, चाहे फिर वो प्रेगनेंसी के किसी भी महीने में क्यों न हो। क्योंकि पेट में दर्द होने पर महिला की मांसपेशियों में खिंचाव होने लगता है और दर्द ज्यादा होने पर पेट पर अधिक जोर पड़ता है जो की महिला के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में पेट दर्द के कारण क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं, लेकिन उससे पहले जानते हैं की पेट दर्द के क्या कारण हो सकते है।

प्रेगनेंसी में पेट दर्द के कारण

  • कब्ज़ के कारण।
  • गर्भ में शिशु का आकार बढ़ने के कारण मांसपेशियों में खिंचाव होने के कारण ऐसा होता है।
  • पेट पर जोर डालने के कारण।
  • प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने के कारण भी मांसपेशियों में संकुचन होने लगता है जिसके कारण ऐसा हो सकता है।

प्रेगनेंसी में पेट दर्द के कारण होने वाले नुकसान

गर्भपात हो सकता है

यदि प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में महिला के पेट में अधिक दर्द होता है, तो यह माहवारी का लक्षण हो सकता है। जिसके कारण महिला का गर्भपात भी हो सकता है। ऐसे में यदि हल्की ब्लीडिंग हो और दर्द तेजी से हो रहा हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

प्रीटर्म लेबर का संकेत

यदि आपको प्रेगनेंसी की दूसरी या तीसरी तिमाही में बहुत अधिक पेट में दर्द होता है, तो यह समय से पहले बच्चा होने का संकेत हो सकता है। जिसके कारण केवल शिशु पर ही नहीं बल्कि महिला पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। ऐसे में यदि दर्द होने पर आप जल्दी ही डॉक्टर से संपर्क कर लेती हैं, तो आपको होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो आपको प्रेगनेंसी में होने वाले पेट दर्द के कारण हो सकते हैं। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान यदि आपको किसी और तरह की भी परेशानी हो तो उसे आपको इग्नोर नहीं करना चाहिए, क्योंकि आपकी थोड़ी सी लापरवाही शिशु के साथ महिला की सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकती है।

सही समय पर होगी डिलीवरी न पहले न बाद में इन बातों का रखें ध्यान

माँ बनना इतना आसान नहीं होता है क्योंकि प्रेगनेंसी के नौ महीने महिला शारीरिक परेशानियों से जूझने के साथ महिला बहुत डर में भी होती है। क्योंकि कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स होने के कारण समय से पहले बच्चे की डिलीवरी होने का डर होता है तो कुछ महिला को डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद भी बॉडी में प्रसव के लक्षण महसूस नहीं होते हैं।

ऐसे में समय से पहले बच्चा हो जाये जा समय निकल जाने के बाद भी प्रसव का कोई लक्षण महसूस न हो दोनों में ही माँ व् बच्चे की सेहत को नुकसान पहुँचने का खतरा होता है। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को ऐसी कोई दिक्कत न हो, गर्भवती महिला और बच्चे को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिल सके, इसके लिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

अपने आहार में पोषक तत्वों की कमी न होने दें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला जो भी खाती है उसमे मौजूद पोषक तत्व महिला को फिट रखने के साथ बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं। जिससे प्रेग्नेंट महिला भी स्वस्थ रहती है और बच्चा भी स्वस्थ रहता है। और प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चा दोनों जितना स्वस्थ रहते हैं उतना ही प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स कम होती है। जिससे प्रेगनेंसी के साथ डिलीवरी को लेकर होने वाली दिक्कतों से भी महिला को बचे रहने में मदद मिलती है। इसीलिए गर्भवती महिला को विटामिन्स, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फोलेट व् अन्य मिनरल्स से भरपूर आहार का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करना चाहिए।

ब्लड की कमी न होने दे बॉडी में

खून की कमी यदि गर्भवती महिला के शरीर में होती है तो इससे माँ व् बच्चे दोनों की सेहत को नुकसान होता है। और खून की कमी के होने के कारण प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स, बच्चे के विकास में कमी होने के साथ, समय से पहले बच्चे का जन्म होने का खतरा होता है। साथ ही खून की कमी के कारण डिलीवरी के दौरान परेशानियां भी बढ़ती है। ऐसे में गर्भवती महिला को ऐसी कोई परेशानी न हो इससे बचने के लिए आयरन से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए और इसके लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, गाजर, बीन्स, आंवला, ड्राई फ्रूट्स, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

पानी का भरपूर सेवन करें

तरल पदार्थ के बॉडी में भरपूर होने से भी गर्भवती महिला को समय पूर्व प्रसव व् डिलीवरी लेट होने जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि पानी का भरपूर सेवन करने से बॉडी हाइड्रेट रहती है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियां कम होती है, गर्भ में बच्चा एमनियोटिक फ्लूड में होता है और पानी व् अन्य तरल पदार्थों का सेवन करने से गर्भ में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चा दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है और माँ व् बच्चा जब दोनों स्वस्थ होते हैं तो इससे डिलीवरी में आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स से बचे रहने के साथ समय से डिलीवरी होने के चांस होते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही न करें

गर्भावस्था के दौरान बरती गई लापरवाही के कारण समय से पहले बच्चे का जन्म होने के खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी को कोई भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। जैसे की पेट के बल किसी काम को नहीं करना चाहिए, झुककर किसी काम को नहीं करना चाहिए, सीढ़ियां अधिक नहीं चढ़नी चाहिए, भारी चीजों को नहीं उठाना चाहिए, आदि।

एक्टिव रहें

यदि प्रेग्नेंट महिला आलस करती है, सारा दिन सिर्फ सोती है, सारा दिन बैठी रहती है, बॉडी मूवमेंट बिल्कुल नहीं करती है, तो ऐसा करने से भी या तो प्रेग्नेंट महिला की कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ती है जिससे समय से पहले बच्चा होने का खतरा रहता है या फिर बॉडी मूवमेंट में कमी होने के कारण प्रसव का कोई लक्षण बॉडी में महसूस नहीं होता है। ऐसे में महिला को ऐसी कोई दिक्कत न हो इसके लिए गर्भवती महिला को थोड़ा एक्टिव रहना चाहिए जैसे की आराम करना जरुरी है लेकिन जितना जरुरी है उतना ही आराम करें, सारा दिन एक ही जगह बैठे रहने की बजाय थोड़ा व्यायाम करें सैर करें, आदि। क्योंकि प्रेग्नेंट महिला जितना एक्टिव रहती है उतना ही गर्भवती महिला इन परेशानियों से बची रहती है।

तनाव से बचें

गर्भवती महिला के तनाव लेने के कारण भी समय से पहले बच्चा या डिलीवरी देरी से होने जैसी परेशानियां होती है साथ ही इससे बच्चे के विकास में भी कमी आती है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को तनाव नहीं लेना चाहिए और खुश रहना चाहिए साथ ही अपनी प्रेगनेंसी के हर पल को खुलकर एन्जॉय करना चाहिए।

डॉक्टर से जांच

समय से पहले बच्चा, देरी से डिलीवरी या अन्य किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स बच्चे को न हो इससे बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को समय से डॉक्टर से अपनी जाँच करवाते रहना चाहिए।

तो यह हों कुछ टिप्स जिनका ध्यान प्रेग्नेंट महिला को पूरी प्रेगनेंसी के दौरान रखना चाहिए। ताकि न तो समय से पहले बच्चे का जन्म हो और न ही महिला को डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद किसी तरह की परेशानी हो।

लाल साग खाना कितना फायदेमंद है प्रेगनेंसी में जानिए

सरसों का साग खाना कितना फायदेमंद होता है यह तो आप जानते ही हैं। लेकिन सरसों के साग के साथ लाल साग खाना भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। और फोलिक एसिड, आयरन, फाइबर, विटामिन्स व् अन्य मिनरल्स से भरपूर होने के कारण लाल साग गर्भवती महिला के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। साथ ही यह बच्चे के विकास में भी मदद करता है तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान लाल साग खाने से कौन से फायदे मिलते हैं इस बारे में बताने जा रहे है।

फाइबर: प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला पाचन क्रिया से जुडी परेशानी, कब्ज़, एसिडिटी जैसी दिक्कतों से परेशान हो सकती है। लेकिन लाल साग का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला की इस दिक्कत को दूर करने में मदद मिल सकती है। क्योंकि लाल साग के फाइबर की मात्रा मौजूद होती है जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करती है।

इम्यून सिस्टम: बॉडी में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेग्नेंट महिला का इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ सकता है। जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को संक्रमण होने क खतरा बढ़ सकता है। लेकिन लाल साग का सेवन यदि गर्भवती महिला करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला के इम्यून सिस्टम को मजबूत होने में मदद मिलती है। क्योंकि लाल साग में एमिनो एसिड्स, विटामिन्स, पोटैशियम, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं।

आयरन: आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होने के कारण लाल साग बॉडी में हीमोग्लोबिन की मात्रा को पर्याप्त रखने में मदद करता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला यदि लाल साग का सेवन करती है तो इससे बॉडी में खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से महिला व् बच्चे दोनों को बचे रहने में मदद मिलती है।

कैल्शियम: लाल साग में कैल्शियम भी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है ऐसे में गर्भवती महिला को इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला की हड्डियों को मजबूत होने के साथ बच्चे की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद मिल सके।

फोलिक एसिड: बच्चे के विकास के लिए प्रेग्नेंट महिला को उन खाद्य पदार्थों का सेवन जरूर करना चाहिए। जिनमे फोलिक एसिड की मात्रा मौजूद होती है। ऐसे में लाल साग खाना गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि लाल साग में फोलिक एसिड मौजूद होता है। जो बच्चे के शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करता है।

बीमारियों से बचाव: थायरॉयड, गेस्टेशनल शुगर, बवासीर, अस्थमा जैसी शारीरिक परेशानियों के होने का खतरा गर्भवती महिला को हो सकता है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला लाल साग को अपनी डाइट में शामिल करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को इन सभी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेग्नेंट महिला को लाल साग का सेवन करने से मिलते हैं। ऐसे में इन फायदों के लिए प्रेग्नेंट महिला को लाल साग का सेवन जरूर करना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

लाल साग के फायदे (चौलाई साग) गर्भवती महिला के लिए Add Red Spinach in your meal during pregnancy