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क्या आप प्रेगनेंसी में ऐसे सोते हैं? होगा बहुत नुकसान

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपने खाने, पीने, उठने, बैठने, सोने सभी चीजों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। तो लीजिये आज हम प्रेगनेंसी के दौरान किस तरह गर्भवती महिला को सोना चाहिए और किस तरह से सोना गर्भवती महिला और शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है इस बारे में बताने जा रहे हैं। गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला बहुत सी शारीरिक व् मानसिक परेशानियों का सामना कर सकती है। जिसके कारण गर्भवती महिला को सोने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है शुरूआती दौर में जहां बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को सोने में दिक्कत हो सकती है वहीँ आखिरी तिमाही में वजन बढ़ने के कारण महिला को सोने में दिक्कतें हो सकती है। लेकिन इन परेशानियों के होने पर भी महिला को अपने सोने की पोजीशन का ध्यान जरूर रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी में किस तरह सोना हो सकता है खतरनाक

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान भरपूर नींद लेनी चाहिए, क्योंकि भरपूर नींद लेने से गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन सोते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप किस पोजीशन में सो रही है क्योंकि कुछ ऐसी पोजीशन होती है जिसमे यदि गर्भवती महिला सोती है तो इससे गर्भवती महिला और शिशु दोनों को नुकसान पहुँच सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किस पोजीशन में नहीं सोना चाहिए।

उल्टा होकर

प्रेग्नेंट महिला को उल्टा होकर कभी नहीं सोना चाहिए क्योंकि पेट के बल सोने से गर्भ में पल रहे शिशु को दिक्कत हो सकती है। खासकर महिला का पेट बाहर आने पर तो गलती से भी ऐसी पोजीशन में महिला को नहीं सोना चाहिए।

सीधा होकर

प्रेगनेंसी पहली तिमाही तक गर्भवती महिला चाहे तो सीधा होकर सो सकती है। लेकिन महिला के पेट के बाहर आने पर महिला को सीधा होकर नहीं सोना चाहिए क्योंकि इससे पैरों तक ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है। साथ ही पहली तिमाही के बाद शिशु का वजन भी थोड़ा बढ़ने लग जाता है जिससे नसों पर दबाव पड़ सकता है और ब्लड फ्लो को पैरों तक अच्छे से होने में समस्या हो सकती है। जिसकी वजह से गर्भवती महिला को पैरों में सूजन की समस्या होने के साथ सोकर उठते समय चक्कर आने जैसी समस्या भी हो सकती है।

दाईं और करवट लेकर सोना

गर्भावस्था के दौरान महिला को दाईं और करवट लेकर सोने से भी बचना चाहिए क्योंकि दाईं और सोने से भी गर्भाशय का भार लिवर पर पड़ता है। जो प्रेगनेंसी के दौरान आपकी परेशानी को बढ़ा सकता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान महिला को किन पोजीशन में सोने से बचना चाहिए ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। साथ ही गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान सोते समय बाईं और करवट लेकर सोना चाहिए। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान सोने के लिए यह सबसे बेहतरीन पोजीशन हसि इससे महिला और शिशु को किसी तरह की दिक्कत भी नहीं होती है। साथ ही महिला को बेहतर नींद लेने में भी मद मिलती है।

चमचमाते सफ़ेद दांत पाने के तरीके!

आपके चेहरे पर आने वाली मुस्कुराहट किसी को भी अपनी और आकर्षित कर सकती है, और यदि आप दांत सफ़ेद और चमकदार हो तो ये आपके व्यक्तित्व में और भी चार चाँद लगा देते है, लेकिन यदि आपके दांत पीले है, या उनमे कैविटी, प्लॉक आदि जमा हुआ है, तो इसके कारण आपको शर्मिंदा होना पड़ सकता है, दांतों में होने वाले पीलेपन के कारण न केवल आपके आत्मविश्वास में कमी आती है, बल्कि इसके कारण आपकी ख़ूबसूरती और पर्सनैलिटी पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।

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यदि आपको पता है की आपके दांत पीले है, तो इसके कारण आपको बात करने, हंसने में भी डर लगता है की कही इसके कारण आपको शर्मिंदा न होना पड़ जाएँ, इसका कारण होता है दांतो की ढंग से साफ़ सफाई न करना, परन्तु ये कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसका कोई इलाज नहीं है, यदि आप अपने दांतों की साफ़ सफाई नियमित करते है तो इसके कारण आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके अलावा आज कल ऐसे बहुत से प्रोडक्ट भी आ गए है जो आपको इस समस्या का समाधान करने में मदद करते है, परन्तु ये आपको गारंटी नहीं देते है की इनसे आपके दांतों का पीलापन दूर हो ही जाएगा, तो आइये आज हम आपको इस समस्या से बचने के लिए कुछ आसान टिप्स बताते है जिनका इस्तेमाल करने से आपको दांतों का पीलापन दूर करने में मदद मिलती है, साथ ही दांतों को मोतियों जैसा चमदार भी बनाया जा सकता है, तो आइये जानते है की वो टिप्स कौन से है।

नारियल तेल का इस्तेमाल करें;-

नारियल तेल दांतों के लिए एक नेचुरल व्हाइटनर का काम करता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप नारताल तेल को मुँह में लें, और कम से कम पंद्रह मिनट के लिए इसे अपने मुँह में स्विश करें, याद रखें की नारियल तेल आपके सभी दांतों तक अच्छे से पहुचें, उसके बाद इसे थूक दें, और गुनगुने पानी से अच्छे से कुल्ला करें, हफ्ते में दो से तीन बार इस उपाय का इस्तेमाल करने से आपको अपने दांतो को मोतियों की तरह चमकाने में मदद मिलती है।

सेब के सिरके का इस्तेमाल करें:-

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सेब के सिरके के इस्तेमाल से आपके दांतों को सफ़ेद ही नहीं बल्कि आपके मसूड़ों को भी मजबूत करने में मदद मिलती है, क्योंकि ये आपके पी एच बैलेंस को सही करके आपके मुँह के बाद बैक्टेरिया को खत्म करने में मदद करता है, इसके इस्तेमाल के लिए नियमित ब्रश करने से पहले थोड़े से सिरके को लेकर अच्छे से अपने दांतों पर रगड़ें, और पांच से सात मिनट के बाद इसकी मदद से ही कुल्ला कर लें, और यदि आप इसे रोजाना ब्रश से पहले करते है, तो बहुत जल्दी ये आपके दांतों को सफ़ेद करने में मदद करती है।

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निम्बू के छिलके का इस्तेमाल करें:-

विटामिन सी के इस्तेमाल करने से आपको बहुत जल्दी अपने दांतों को सफ़ेद करने में मदद मिलती है, और निम्बू के छिलके में विटामिन सी उपरोक्त मात्रा में पाया जाता है, इसके इस्तेमाल के लिए नियमित रूप से निम्बू के चिके को अच्छे से अपने दांतों पर रगड़ें, थोड़े दिनों में ही ये अपना प्रभाव दिखायेगा, और आपके दांतों को सफ़ेद होने में माद्दा मिलेगी, साथ ही ये आपके मुँह में होने वाले बैक्टेरिया को भी जड़ से खत्म करने में मदद मिलती है।

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करें:-

बेकिंग सोडा दांतों के लिए प्राकृतिक रूप से क्लीन्ज़र का काम करता है, इसके इस्तेमाल के लिए थोड़ा सा बेकिंग सोडा अपने टूथपेस्ट में मिला लें, उसके बाद इसे अपने सभी दांतों पर अच्छे से लगाएं, और आधे घंटे के लिए इसे छोड़ दें, उसके बाद पानी की मदद से अच्छे से कुल्ला कर लें, ये आपके दांतों के बीच होने वाले सूक्ष्म जीवाणुओं को नष्ट करने के साथ आपके दांतों के पीलेपन को दूर करने में भी आपकी मदद करता है, और दांतों को सफ़ेद और चमदार बनाने में मदद करता है।

स्ट्रॉबेरी का प्रयोग करें;-

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स्ट्रॉबेरी भी दांतों के लिए टीथ व्हाइटनर का काम करती है, इसके पाया जाने वाला मैलिक एसिड आपके दांतों को सफ़ेद और चमकदार बनाने में आपकी मदद करता है, और आपके दांतों में होने वाली प्लॉक की समस्या को भी दूर करता है, इसके इस्तेमाल के लिए स्ट्रॉबेरी का पल्प निकालकर अच्छे से पीस लें, और उसमे थोड़ा सा बेकिंग सोडा मिलाएं, उसके बाद ब्रश करें, और अपने दांतो पर ऊँगली की मदद से इस पेस्ट को लगाकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दे, उसके बाद को कुल्ला करें, आपको जरूर इससे फायदा होगा।

तुलसी का प्रयोग करें;-

तुलसी को एक औषधि के रूप में आपके शरीर की बिमारियों को दूर करने के साथ आपकी स्किन, बालों से जुडी परेशानियों को भी दूर करने में मदद मिलती है, साथ ही तुलसी का इस्तेमाल करने से आपके दांतो को भी स्वस्थ और चमड़ारा बनाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए तुलसी के पत्तों को सूखा लें, उसके बाद इन्हे पीस कर इसे पाउडर के रूप में तैयार करें, और नियमित इसे अपने टूथपेस्ट में मिलाकर अपने दांतों में अच्छे से ब्रश करें, नियमित इसका इस्तेमाल करने के बाद कुछ ही दिनों में आपको इसका असर दिखने लगता है।

केले का प्रयोग करें;-

केले में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में होता है, केले के सेवन से आपको जितना फायदा होता है, उतना ही केले को अच्छे से पीस कर मैश करके नियमित अपने दांतों की मसाज करने से होता है, यदि आप ऐसा रोजाना करते है तो इसके कारण आपके दांतों के पीलेपन को दूर करके आपके दांतों को चमकदार बनाने में मदद मिलती है।

संतरे के छिलको का इस्तेमाल करें:-

संतरे के छिलको में भी विटामिन सी अधिक मात्रा में पाया जाता है जिसके कारण ये आपके दांतों को चमदार बनाने में आपकी मदद करता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप संतरे के छिलके और तुलसी के पत्तो को सुखाकर पीस कर पाउडर तैयार करें, इसके बाद नियमित ब्रश करने के बाद अपने दांतों पर इसकी मदद से मसाज करें, ऐसा करने से आपके दांतों को थोड़े ही दिनों में मोतियों जैसा चमकने में मदद मिलती है।

नीम का इस्तेमाल करें;-

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नीम के दातुन का इस्तेमाल बरसों से आपके दांतों को मजबूत और दांतों से जुडी परेशानियों को दूर करने के लिए किया जाता है, इसमें मौजूद एंटीसेप्टिक,एंटी बैक्टीरियल गुण आपके दांतो की हर समस्या को दूर करने में मदद करते हैं, इसी तरह आप नीम का इस्तेमाल करके दांतों के पीलेपन को दूर करके दांतों को चमकदार बना सकती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप नीम की पत्तियों को सुखाकर उनका इस्तेमाल पेस्ट में डालकर भी कर सकती है, या नीम की पत्तियों को पीसकर नियमित अपने दांतों की उससे मसाज करें, कुछ ही दिनों में आपको दांतों को चमकदार बनाने में मदद मिलती है।

दांतो को मोतियों जैसा चमकदार बनाने के अन्य तरीके:-

  • जैतून के तेल मे सेब के सिरके को अच्छे से मिक्स करें, और उसके बाद इस मिश्रण से ब्रश की मदद से अपने दांतों की साफ़ सफाई करें, ऐसा नियमित करने से आपके दांतों को चमकदार बनाने में मदद मिलती है।
  • नमक में कुछ बुँदे सरसों के तेल की मिला लें, और अच्छे से अपने दांतो की सफाई करें नियमित करने से आपको इससे जरूर फायदा होता है।
  • नमक में कुछ बुँदे निम्बू के रस की मिलाएं, और उसके बाद अपने दांतों की अच्छे से मसाज करें, ऐसा करने से निम्बू में मौजूद सिट्रिक एसिड आपको दांतों की साफ़ सफाई में मदद करता है, और आपके दांतों को चमकदार बनाने में मदद करता है।
  • गाजर का सेवन करने से भी आपके दांतो को चमकदार बनाने में मदद मिलती है।कैल्शियम युक्त आहार जैसे डेरी प्रोडक्ट, फल और सब्जियां, आदि का सेवन भी उपरोक्त मात्रा में करने से आपको फायदा मिलता है, क्योंकि दांतों को स्वस्थ और मजबूत बनाने के लिए कैल्शियम बहुत जरुरी होता है।
  • नशीले पदार्थ जैसे तम्बाकू, सिगरेट, रेड वाइन, अल्कोहल आदि का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए इसके कारण आपके दांत खराब हो जाते है।
  • नियमित अपने दांतों में दो बार ब्रश, और खाने के बाद कुल्ला जरूर करना चाहिए, ऐसा करने  से आपको दांतों से जुडी परेशानी से राहत मिलने में मदद मिलती है।
  • अधिक मात्रा में एंटीबायोटिक दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहियें क्योंकि ऐसा करने से भी आपके दांतो की चमक खराब हो जाती है।
  • और आपको अपने ब्रश को भी हर दो से तीन महीने में बदल लेना चाहिए।

तो ये कुछ उपाय है जिनका इस्तेमाल करके आप अपने दांतों को सफ़ेद और मोतियों जैसा चमकदार बना सकते है, इसके अलावा यदि आप नियमित दिन में दो बार ब्रश करते है, अपने दांतों की खाना खाने के बाद साफ़ सफाई करते है, तो आपको दांतो के साथ कोई समस्या नहीं होती है, लेकिन यदि आपको दांतों में पीलापन या कालापन है तो आप इनमे से किसी भी ट्रिक्स का इस्तेमाल करके फायदा उठा सकती है, और अपने दांतों को मोतियों जैसा चमकता हुआ बना सकती है।

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आजकल सब्जियों और फल खाने से पहले यह जरूर करें

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आजकल हम सभी जानते है के हमारे आसपास का वातावरण बहुत ही प्रदूषित हो गया है। हमारे आसपास बहुत से हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस पनपते है। यह बैक्टीरिया इतने सूक्ष्म होते है के हम चाहकर भी इन्हें नहीं देख पाते है। बढ़ते प्रदूषित माहौल में हम जो सब्जियों और फलों का सेवन करते है वह भी बैक्टीरिया रहित नहीं होता है।

बाजारों में फल और सब्जियाँ खुले में ही बिकते है। बस स्टैंड के आसपास ही सब्जियों और ठेले वाले बैठे होते है और वहीँ से बसे अन्य गाड़ियां गुजरती है, और फलों व सब्जियों पर धूल मिटटी और धुआँ छोड़ती जाती है। तो सोचियें इन फलों और सब्जियों में कितने अनगिनत हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस बैठे होते है जो हमे दीखते भी नहीं है और हमारे पेट जाकर हमारा ठीक करने के बजाय उसे नुक्सान पहुंचाते है।

बिमारियों से बचने और सेहतमंद रहने के लिए ही तो हम लोग सब्जियों और फलों का सेवन करते है। अगर इन्ही फलों और सब्जियों से हम बीमार पड़ेंगे तो क्या खाये। घबराए नहीं बस इनका उपयोग करने से पहले रखें कुछ खास बातों का ध्यान, ताकि फल और सब्जियों के द्वारा बैक्टीरिया हमारे शरीर में प्रवेश ना कर सके।

आइये जानते है के फल और सब्जियों को खाने से पहले क्या करना चाहिए जिससे उन पर मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया मर जाएँ।

  • वैसे तो सभी बड़े हमे ताजे फल और सब्जियों के सेवन करने के सलाह देते थे। पर अब वो समय नहीं रहा जब हम ताजे फलों का सेवन करें। कभी भी बाजार से लाये गए फल और सब्जी का तुरंत सेवन ना करें। बाजार से लायी गयी फल और सब्जी को घर के किसी सुरक्षित स्थान पर रख दीजिये और 12 से 24 घंटो बाद ही इन्हे उपयोग में लायें। ऐसा करने से कुछ कीटाणु और बैक्टीरिया 10 से 12 घंटो में खुद ही मर जाते है। इसीलिए दो दिन का समान एडवांस लेकर रखें।
  • सब्जियों और फलो को बाजार से लाते ही गर्म पानी से धोएं। गर्म पानी से धोने से भी कुछ बैक्टीरिया मर जाते है। 10 से 15 मिनट तक सब्जियों को गर्म पानी में दुवो कर रखें।
  • आलू और प्याज जैसी सब्जियों जिन्हे आप धो नहीं सकते उन्हें प्लास्टिक की पंनी से बाहर निकाल कर 1 से 2 दिन के लिए रख दें। 24 घंटो से पहले उसका इस्तेमाल ना करें।
  • कच्ची सब्जियों का सेवन ना करें। कच्ची चीजों में बैक्टीरिया लम्बे समय तक पनपता है और सब्जी के पकने से अधिक तापमान में बैक्टीरिया और वायरस मर जाते है। इसीलिए सब्जियों
  • फलों को हम पकाकर नहीं खा सकते है इसीलिए इन्हे अच्छे से गर्म पानी धो लें और 12 घंटो के बाद ही इनका सेवन करें।
  • घर पर रखी पहले के फल और सब्जियों का पहले सेवन करें। बाजार से लायी गयी ताजी चीजों का एक दिन बाद ही प्रयोग करें।
  • कभी पहले से कटे हुए फल और सब्जियों को ना खरीदे।

ध्यान रखिये हमारी थोड़ी सी सावधानी हमे और हमारे परिवार को हानिकारक बैक्टीरिया और इनसे होने वाली खतरनाक बिमारियों से भी बचाएगी और साथ ही जरुरी नुट्रिएंटस भी हमारे शरीर में पहुंचाने में मदद करेगी।

शादी से पहले क्यों लगाई जाती है दूल्हा दुल्हन को हल्दी

शादी के दौरान बहुत सी रस्मे निभाई जाती है जैसे की मेहँदी, हल्दी, कलीरे बांधना, आदि और हर रस्म का अपना अलग महत्व होता है। शादी की सबसे पहली रस्म होती है हल्दी, हल्दी की रस्म लड़के और लड़की दोनों के लिए ही होती है। और ऐसा भी कहा जाता है की बिना हल्दी लगाए शादी की रस्मे पूरी नहीं होती है। और घर वाले शादी में किसी भी तरह की कमी न रहे, और शादी के बाद लड़के और लड़की के जीवन में खुशहाली से भरपूर रहे इसीलिए हर रस्म को पूरे रीती रिवाज़ो के साथ निभाते है। इसके अलावा शादी में लड़के और लड़की को हल्दी लगाने के और भी बहुत से कारण होते हैं तो आइये अब जानते हैं की शादी में हल्दी लगाने के क्या कारण होते है।

शुभ होती है हल्दी

हल्दी के पीले रंग को शुभ शगुन माना जाता है, और हिन्दू रीती रिवाज़ के अनुसार शादी की शुरुआत शुभ करने के लिए हल्दी की रस्म से शुरुआत की जाती है। और यह दोनों लड़के और लड़की के लिए शुभ हो, और उन दोनों के जीवन की शुरुआत अच्छी हो इसीलिए दोनों को हल्दी लगाईं जाती है।

तनाव कम करती है

शादी के दौरान लड़के और लड़की दोनों के मन में ही तरह तरह के सवाल चल रहे होते हैं, जिसके कारण हो सकता है वो तनाव में आ जाये। ऐसे में हल्दी लगाने से यह उनके स्ट्रेस को भगाने का काम करती है जिससे उनके दिमाग को शांत रहने और फ्रैश फील करने में मदद मिलती है।

गंदगी होती है साफ़

हल्दी को चेहरे के साथ बॉडी पर लगाने से शरीर पर होने वाले विषैले पदार्थो को हटाकर बॉडी को खुशबूदार बनाने में मदद मिलती है। जिससे हल्दी की खुशबू उन्हें तरोताजा महसूस करवाने में मदद करती है।

ख़ूबसूरती को बढाती है

शादी का दिन दूल्हे और दुल्हन के लिए बहुत ही खास होता है और हर कोई उनकी को निहारता रहता है ऐसे में उनका खूबसूरत दिखना तो बनता है। और हल्दी लगाने से स्किन में निखार को बढ़ाने में भी मदद मिलती है जिससे उनकी ख़ूबसूरती में चार चाँद लग जाते है।

बुरी नज़र से बचाव

हल्दी लगाने का एक और कारण भी होता है ऐसा माना जाता है की इस समय लड़के और लड़की को बुरी नज़र लगने के चांस बहुत ज्यादा होते है। ऐसे में हल्दी लगाने से लड़के और लड़की को बुरी नज़र से बचाव करने में मदद मिलती है। और इसीलिए इस रस्म के बाद लड़के और लड़की को घर से बाहर जाने की अनुमति भी नहीं दी जाती है।

स्किन से जुडी परेशानियों को खत्म करने में मदद करती है

डार्क सर्कल, चेहरे पर होने वाले दाग धब्बे, त्वचा सम्बन्धी समस्या जैसे की सनटैन आदि को खत्म करने में भी हल्दी को लगाने से फायदा मिलता है, इसीलिए भी शादी के दौरान हल्दी लगाईं जाती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से शादी के दौरान लड़के और लड़की को शादी में हल्दी लगाईं जाती है। और हल्दी का उबटन बनाने के लिए हल्दी, चन्दन, गुलाबजल, दूध, पानी, आदि का इस्तेमाल किया जाता है, और उसके बाद लड़के और लड़की को हल्दी की रस्म में हल्दी लगाने के साथ सभी आशीर्वाद भी देते हैं।

पहले सिजेरियन डिलीवरी हुई है और दूसरी डिलीवरी नोर्मल हो इसके लिए क्या करें?

प्रेगनेंसी के नौ महीने में महिला बहुत से उतार चढ़ाव से गुजरती है। लेकिन फिर भी महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखती है, अपनी प्रेगनेंसी को एन्जॉय करती है, ताकि माँ और बच्चे दोनों को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। और उसके बाद जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है तो हर महिला के मन में यही बात चल रही होती है की उसकी डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन।

लेकिन अधिकतर महिलाएं यही चाहती की उनकी डिलीवरी नोर्मल हो परन्तु कुछ ऐसी मेडिकल कंडीशन हो जाती है जिनकी वजह से महिला को सिजेरियन डिलीवरी करवानी पड़ती है। लेकिन उसके बाद महिला जब दूसरी बार गर्भधारण के लिए ट्राई करती है तो महिला के मन में यह सवाल जरूर आता है की क्या दूसरी प्रेगनेंसी में भी महिला की सिजेरियन डिलीवरी होगी या नोर्मल।

पहले सिजेरियन डिलीवरी हुई है तो दूसरी डिलीवरी नोर्मल हो सकती है या नहीं?

यदि प्रेग्नेंट महिला की पहली डिलीवरी सिजेरियन हुई है तो अधिकतर महिलाएं यही सोचती है की उनकी दूसरी डिलीवरी भी सिजेरियन ही होगी। जबकि महिला का ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है क्योंकि ऐसा बिल्कुल नहीं है की यदि महिला की पहली डिलीवरी सिजेरियन हुई है तो महिला की दूसरी डिलीवरी नोर्मल नहीं होगी। या फिर महिला की पहली डिलीवरी नोर्मल हुई है तो दूसरी सिजेरियन नहीं हो सकती है।

बल्कि सच तो यह है की आपकी डिलीवरी का होना डिलीवरी का समय पास आने पर आपकी मेडिकल कंडीशन कैसी है इस बात पर निर्भर करता है। और यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखती है, कुछ टिप्स का ध्यान रखती है तो पहली डिलीवरी सिजेरियन होने के बाद भी महिला की दूसरी डिलीवरी नोर्मल हो सकती है।

पहली डिलीवरी सी सेक्शन से होने के बाद दूसरी डिलीवरी नोर्मल हो इसके लिए टिप्स

यदि आपने अपने पहले बच्चे को सी सेक्शन से जन्म दे दिया है और आप चाहती हैं। की आपकी दूसरी डिलीवरी नोर्मल हो तो इसके लिए आप कुछ बातों का ध्यान रखें। जैसे की:

पहली डिलीवरी सिजेरियन क्यों हुई हैं इन बातों को देखें

किन कारणों की वजह से आपकी पहली डिलीवरी सिजेरियन हुई है उन बातों का अच्छे से ध्यान रखें। और उन सभी दिक्कतों को दूसरी प्रेगनेंसी में दूर करने की कोशिश करें। यदि आप इन बातों का ध्यान रखती है। तो ऐसा करने से आपकी दूसरी डिलीवरी के नोर्मल होने के चांस बढ़ते हैं।

दूसरी प्रेगनेंसी में थोड़ा गैप रखें

यदि आप एक बच्चे को जन्म देने के आठ से दस महीने बाद ही दुबारा प्रेग्नेंट हो जाती है तो इससे आपकी नोर्मल डिलीवरी होने के चांस कम होते हैं। जबकि यदि आप पहली डिलीवरी के बाद पूरी तरह फिट हो जाती है, आपके घाव भर जाते हैं और दो से तीन साल बाद माँ बनने की ट्राई करती है तो आपकी नोर्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं।

अपनी शारीरिक फिटनेस का ध्यान रखें

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को शारीरिक रूप से फिट होने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है ऐसे में जब महिला को लगता है की महिला अब शारीरिक रूप से पूरी तरह से तैयार है, महिला के घाव भर चुकें हैं तब महिला को प्रेगनेंसी का निर्णय लेना चाहिए। और प्रेगनेंसी के दौरान भी अपने आप को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखना चाहिए ऐसा करने से महिला की नोर्मल डिलीवरी की सम्भावना बढ़ जाती है।

उम्र का रखें ध्यान

यदि आप चाहती है की आपकी डिलीवरी नोर्मल हो तो इसके लिए उम्र भी बहुत मायने रखती है क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ प्रेगनेंसी में जोखिम बढ़ने की सम्भावना अधिक होती है। ऐसे में आपको यदि चाहती है तो इसके लिए आपको अपनी उम्र का भी ध्यान रखना चाहिए।

खून की कमी न हो

खून की कमी का प्रेगनेंसी के दौरान होना नोर्मल डिलीवरी के चांस को कम करता है। ऐसे में यदि आप चाहती है की आपकी डिलीवरी नोर्मल हो तो इसके लिए आपको दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में खून की कमी को नहीं होने देना चाहिए।

कॉम्प्लीकेशन्स को करें दूर

यदि आपकी दूसरी प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की समस्या है तो आपको प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही उस परेशानी का इलाज करना चाहिए। ताकि आपकी प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की समस्या न हो और आपकी नोर्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ें। साथ ही आपको अपने डॉक्टर से नियमित जांच भी समय से करवाते रहना चाहिए।

शिशु का वजन

शिशु का वजन भी आपकी डिलीवरी के तरीके के लिए बहुत अहम होता है। ऐसे में यदि आप चाहती हैं की आपकी डिलीवरी नोर्मल हो तो इसके लिए नौवें महीने में इस बात का खास ध्यान रखें की आपके बच्चे के वजन सही हो।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान रखने से आपकी नोर्मल डिलीवरी होने में मदद मिलती है। ऐसे में यदि आपकी भी पहली डिलीवरी यदि सिजेरियन हुई है और आप चाहती है की आपकी दूसरी डिलीवरी नोर्मल हो तो आपको भी इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

जन्म के बाद शिशु को निमोनिया व् जॉन्डिस क्यों हो जाता है

जन्म के बाद शिशु को निमोनिया व् जॉन्डिस क्यों हो जाता है, जन्म के बाद शिशु को पीलिया होने के कारण, जन्म के बाद शिशु को निमोनिया होने के कारण, शिशु को जॉन्डिस होने के कारण

हर महिला चाहती है की जन्म के बाद उसका शिशु स्वस्थ रहे, और उसका हर तरह के संक्रमण से बचाव हो। ताकि शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में मदद मिल सके। लेकिन कई बार जन्म के बाद शिशु को जॉन्डिस यानी पीलिया या निमोनिया की समस्या हो जाती है। निमोनिया की समस्या जहां जहां शिशु के लिए ज्यादा नुकसानदायक हो सकती है, क्योंकि इसके कारण शिशु को सांस लेने में परेशानी का अनुभव होता है। वहीँ जॉन्डिस की समस्या जन्म के बाद अधिकतर शिशुओं में देखने को मिलती है।

ऐसे में आपको यदि महसूस हो की शिशु की रंगत सांवली या हल्की पड़ रही है, शिशु को सांस लेने में परेशानी हो रही है, बुखार, खांसी, जुखाम ज्यादा हो रहा है, तो ऐसे में आपको इसे नज़रअंदाज़ न करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। क्योंकि यह शिशु को जॉन्डिस या निमोनिया होने का संकेत हो सकता है। इसके अलावा आपको घर पर ही इसका कोई उपचार नहीं करना चाहिए, क्योंकि नवजात शिशु बहुत ही नाजुक होता है, ऐसे में कोई भी गलती उसके लिए बड़ी समस्या बन सकती है। तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की जन्म के बाद शिशु को निमोनिया या जॉन्डिस होने का क्या कारण होता है।

जन्म के बाद शिशु को निमोनिया होने के कारण

यदि शिशु को छाती या फेफड़ो में इन्फेक्शन हो जाता है, तो इसे निमोनिया कहते हैं। यह शिशु के एक या फिर दोनों फेफड़ो को भी प्रभावित कर सकता है। निमोनिया के होने पर शिशु के फेफड़ों में तरल पदार्थ भर जाता है, जिसके कारण सूजन की समस्या हो सकती है, और शिशु को खांसी, जुखाम होने के साथ सांस लेने में भी परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। यह समस्या अधिकतर सर्दियों में महीने में जो शिशु जन्म लेते हैं उनको ठण्ड लगने के कारण हो सकती है। इसका मुख्य कारण आर एस वी यानी रेस्पिरेटरी सिंसिशियल वायरस नामक विषाणु होता है।

यदि यह विषाणु जन्म के बाद शिशु के शरीर को प्रभावित करता है तो उसे यह समस्या हो सकती है, इसका एक या दो दिन में ज्यादा असर दिखने लगता है। क्योंकि सर्दी, खांसी, जुखाम, के साथ यदि शिशु सांस लेने में भी बहुत अधिक परेशानी का अनुभव करें, तो हो सकता है की शिशु के फेफड़ों में इन्फेक्शन हो गया है। और यह अधिक बढ़ने लगे तो जन्म के बाद शिशु की सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में यदि जन्म के बाद शिशु में आप इसके किसी भी लक्षण को देखते हैं तो इसे नज़रअंदाज़ न करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

जन्म के बाद शिशु को जॉन्डिस यानी पीलिया होने के कारण

जॉन्डिस जन्म के बाद शिशु को होने वाली एक आम समस्या है जो जन्म के बाद अधिकतर शिशुओं में देखने को मिलती है। बड़ो में पीलिया होने का कारण जहां लिवर की समस्या से जुड़ा होता है वहीँ शिशुओं को पीलिया होने का कारण शिशु के शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा का अधिक बनना होता है। इसे इंग्लिश में फिजियोलॉजिकल जॉन्डिस भी कहा जाता है, यह जन्म के एक या दो दिन बाद शिशु हो सकता है। बिलीरुबिन का बॉडी में बनने का कारण लाल रक्त कोशिकाओं का टूटना होता है, और नवजात शिशुओं में यह अधिक होता है। जन्म के बाद नवजात शिशु का लिवर बिलिरुबीन की प्रक्रिया को इतनी कुशलता से नहीं कर पाता है, जिसके कारण यह समस्या हो जाती है।

लेकिन जैसे ही शिशु दो या तीन हफ्ते का हो जाता है तो लिवर बिलिरुबीन की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से करने लग जाता है। यदि आपके शिशु को पीलिया हो गया है तो शिशु की त्वचा की रंगत हल्की, पीले रंग की दिखेगी, आंखों के सफेद हिस्से में पीलापन, नाखूनों, हथेलियों व पांवों के तलवों में पीलापन महसूस हो तो यह शिशु को पीलिया होने का लक्षण होता है। और ऐसे में आपको शिशु को तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए, क्योंकि कुछ शिशु का पीलिया तो आसानी से ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ शिशु पीलिया से गंभीर तरीके से भी ग्रसित हो जाते हैं। ऐसे में डॉक्टर की राय लेना ही बेहतर विकल्प होता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से जन्म के बाद शिशु को पीलिया व् निमोनिया की समस्या हो जाती है। ऐसे में यदि आपको भी जन्म के बाद शिशु में ऐसे ही लक्षण दिखाई दे तो इन्हे नज़रअंदाज़ न करते हुए आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

प्रेगनेंसी में सप्ताह में एक बार यह जरूर खाएं

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपने खान पान के प्रति बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। क्योंकि महिला द्वारा आहार में शामिल किया गया पोषक तत्वों से भरपूर आहार जहां गर्भवती महिला के स्वास्थ्य और शिशु के बेहतर विकास में मदद करता है। वहीँ यदि महिला अपने आहार का अच्छे से सेवन नहीं करती है, या कुछ ऐसी चीजों का सेवन करती है जो प्रेगनेंसी के दौरान नहीं खानी चाहिए तो उससे गर्भवती महिला और शिशु को नुकसान भी पहुँचता है। इसीलिए खाने पीने के बारे में अच्छे से जानकारी होने के साथ किस चीज का कितना सेवन प्रेगनेंसी के दौरान सही है यह भी पता होना जरुरी होता है। क्योंकि जरुरत से ज्यादा यदि किसी भी आहार का यदि प्रेग्नेंट महिला सेवन करती है तो उससे शिशु और महिला को नुकसान भी पहुँच सकता है।

प्रेग्नेंट महिला सप्ताह में एक बार यह जरूर खाएं

गर्भवती महिला को कुछ ऐसी खाने की चीजें भी हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान नियमित नहीं खानी चाहिए लेकिन हफ्ते में एक बार उनका सेवन जरूर करना चाहिए। ताकि उनका सेवन करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को फायदे मिल सके। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की ऐसी कौन सी चीजें है जिनका सेवन गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान हफ्ते में एक बार जरूर करना चाहिए।

मछली

गर्भावस्था के दौरान महिला को हफ्ते में एक बार मछली का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि मछली में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जैसे की मछली में आयरन भरपूर मात्रा में होता है जो गर्भवती महिला को खून की कमी की समस्या से सुरक्षित रखने में मदद करता है। साथ ही इसमें मौजूद प्रोटीन और ओमेगा 3 फैटी एसिड गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक के साथ मानसिक विकास को बेहतर करने में मदद करते हैं। लेकिन मछली का सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है की आप जिस किस्म की मछली खा रहे हैं उसमे मर्क्युरी की अधिकता नहीं होनी चाहिए क्योंकि उससे शिशु को नुकसान पहुँच सकता है।

चिकन

प्रेग्नेंट महिला यदि नॉन वेज का सेवन करती है तो हफ्ते में एक बार महिला को चिकन का सेवन भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि चिकन में मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करते हैं। जैसे की चिकन में विटामिन बी3, फोलेट, ओमेगा 3, ओमेगा 6, Choline मौजूद होता है जो शिशु के मानसिक विकास को बेहतर करने में मदद करते हैं। साथ ही यह महिला को आयरन की कमी से होने वाली परेशानियों, शुगर, कोलेस्ट्रॉल जैसी परेशानियों से सुरक्षित रखने में मदद करते है।

चॉकलेट

बहुत सी ऐसी गर्भवती महिलाएं होती है जिन्हे चॉकलेट खाने का बहुत शौक होता है लेकिन प्रेगनेंसी में चॉकलेट खाना चाहिए या नहीं इसे लेकर महिला परेशान रहती है। तो अब आपको इसके लिए परेशान होने की जरुरत नहीं है क्योंकि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी में हफ्ते में एक या दो दिन चॉकलेट का सेवन कर सकती है।क्योंकि चॉकलेट में आयरन, मैग्नीशियम, एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होते है। इसके अलावा चॉकलेट का सेवन करने से महिला को तनाव, ब्लड प्रेशर जैसी परेशानी से निजात पाने में भी मदद मिलती है।

कुछ नया और पोषक तत्वों से भरपूर

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव का असर महिला के जीभ के स्वाद पर भी पड़ता है जिसके कारण महिला का मुँह कड़वा व् फीका हो सकता है। ऐसे में भूख को बढ़ाने के लिए प्रेग्नेंट महिला हफ्ते में एक दिन कुछ नया अपनी पसंद का बनाकर खा सकती है लेकिन इस बात का ध्यान रखें की वो हेल्दी हो और उसमे मसालों का इस्तेमाल अधिक न हो, इससे गर्भवती महिला को अपनी जीभ के स्वाद को बदलने के साथ भूख को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। जो गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

तो यह हैं कुछ चीजें जो गर्भवती महिला को हफ्ते में एक बार जरूर खानी चाहिए, क्योंकि इनसे गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को फायदे मिलने में मदद मिलती है।

क्या गन्ने का जूस सेफ है प्रेगनेंसी में

गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जहां महिला का कुछ न कुछ अलग खाने या पीने की इच्छा हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं होता है की गर्भवती महिला अपनी मर्ज़ी से कुछ भी खा या पी सकती है। क्योंकि कुछ चीजे ऐसी होती हैं जो पोषक तत्वों से तो भरपूर होती है लेकिन गर्भावस्था में उनका सेवन नुकसान पहुंचा सकता है।

ऐसे में महिला कुछ भी खाने या पीने से पहले एक बार यह जरूर सोचती है की क्या प्रेगनेंसी में उस चीज को खाना या पीना सेफ है या नहीं? और ऐसा ही एक पेय पदार्थ है गन्ने का रस, जो की गर्मियों के मौसम में सब जगह आसानी से मिल जाता है। लेकिन उसके सेवन से पहले यह जानना बहुत जरुरी होता है की प्रेगनेंसी में गन्ने का रस पीना चाहिए या नहीं।

गर्भावस्था के गन्ने का रस पीएं या नहीं?

यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आपको गन्ने का जूस पीने की क्रेविंग हो रही है तो प्रेगनेंसी के दौरान आप गन्ने का रस पी सकती है। क्योंकि गन्ने के रस में विटामिन्स, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम आदि सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व महिला के साथ बच्चे के विकास के लिए भी फायदेमंद होते हैं।

लेकिन यदि आपको डाइबिटीज़ है, गन्ने का रस पीने से कोई दिक्कत होती है तो आपको गन्ने का रस नहीं पीना चाहिए। साथ ही गन्ने के रस का सेवन करते हुए एक बात का ध्यान रखें की साफ़ सुथरी जगह से ही आप इस रस का सेवन करें और ताजा बनवाने के बाद ही गन्ने का रस पीएं। ताकि इसके सेवन से आपको किसी तरह की सेहत सम्बन्धी परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में गन्ने का रस पीने के फायदे

गर्भवती महिला यदि गन्ने का जूस पीती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब उन फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

एंटी ऑक्सीडेंट

गन्ने का रस पीने से बॉडी को एंटी ऑक्सीडेंट मिलते हैं जो प्रेग्नेंट महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। जिससे गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान वायरल, फंगल, बैक्टेरियल इन्फेक्शन से बचे रहने में मदद मिलती है।

वजन

गन्ने का जूस पीने से मेटाबोलिज्म को बेहतर रहने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला के वजन को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है। लेकिन ध्यान रखें की जरुरत से ज्यादा भी इसका सेवन न करें। क्योंकि शुगर की मात्रा अधिक होने के कारण ज्यादा गन्ने का रस पीने से आपका वजन बढ़ भी सकता हैं।

कैल्शियम व् मैग्नीशियम

गन्ने के जूस में कैल्शियम व् मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। जो प्रेग्नेंट महिला की हड्डियों को मजबूत करने में मदद करता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को थकान, कमजोरी की समस्या से बचे रहने और ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है। साथ ही गन्ने का रस पीने से बच्चे के विकास के लिए भी पर्याप्त कैल्शियम व् मैग्नीशियम मिलता है जिससे बच्चे की हड्डियों व् दांतों के विकास को अच्छे से होने में मदद मिलती है।

यूरिन इन्फेक्शन से मिलता है आराम

बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान यूरिन इन्फेक्शन की समस्या से परेशान हो सकती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला गन्ने का रस पीती है तो इससे गर्भवती महिला को यूरिन इन्फेक्शन की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

प्रोटीन

प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करने से गर्भवती महिला की मांसपशियों को मजबूती मिलने के साथ बच्चे की कोशिकाओं के बेहतर विकास में मदद मिलती है। और यदि गर्भवती महिला गन्ने के रस का सेवन करती है तो महिला को भरपूर मात्रा में प्रोटीन मिलता है।

पाचन तंत्र

गन्ने के रस का सेवन करने से गर्भवती महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को कब्ज़ व् अन्य पेट सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है

बॉडी का प्राकृतिक डिटोक्सिफायर लीवर होता है जो बॉडी से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है लेकिन गर्भावस्था में शरीर में बड़े हुए विषैले पदार्थों व् हार्मोनल बदलाव के कारण लीवर कम सक्रिय रहता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला गन्ने के जूस का सेवन करती है तो गन्ने के जूस में मौजूद बिलीरुबिन लीवर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। जिससे बॉडी से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

मॉर्निंग सिकनेस

गर्भावस्था के दौरान महिला को मॉर्निंग सिकनेस की समस्या हो सकती है। लेकिन यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला गन्ने के जूस का सेवन करती है तो सुबह के समय जी मिचलाने, घबराहट, उल्टी आने, यानी मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से महिला को निजात पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को गन्ने के जूस का सेवन करने से हो सकते हैं। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और गन्ने के रस का सेवन करना चाहती है तो बिना किसी डर के सिमित मात्रा में कर सकती है।

मछली खाते समय मछली का काँटा गले में अटक जाये तो क्या करें

जिन लोगो फिश खाना पसंद होता है यदि उन्हें खाने में फिश मिल जाये तो उनके खाने का स्वाद दुगुना हो जाता है। और वो खाना खाते समय अच्छे से फिश को एन्जॉय करते हैं और फिश के साथ रोटी या चावल भूख से ज्यादा भी खा लेते हैं। साथ ही फिश खाना सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। लेकिन कई बार फिश खाते समय गले में काँटा अटक जाता है।

ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि फिश में छोटे छोटे कांटे होते हैं और अधिकतर फिश में यह मौजूद होते हैं। ऐसे में जिन लोगो को फिश पसंद होती है कई बार कांटे के डर से ही वो फिश का सेवन करना पसंद नहीं करते हैं। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको फिश में मौजूद कांटे से जुड़े कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं। जैसे की यदि आप कभी फिश खा रहे हो और अचानक से गले में काँटा अटक जाये तो गले में तकलीफ होने लगती है। ऐसे में कुछ आसान टिप्स को ट्राई करके आप गले में फंसे कांटे को निकाल सकते हैं। जैसे की

जोर से खांसी करें

जैसे ही गले में फिश का काँटा अटक जाए वैसे ही आप जोर जोर से खांसी लगने लग जाएँ। ऐसा करने से गले में अटका काँटा अंदर नहीं जायेगा बल्कि ऐसा करने से गले में फंसा काँटा निकल कर बाहर आ जायेगा।

गरारे करें (Gargle)

गले में काँटा फंसने पर गुनगुना पानी लेकर गरारे करने लग जाए ऐसा करने से पानी के साथ काँटा आसानी से बाहर आ जायेगा। आप चाहे तो तुरंत नोर्मल पानी का इस्तेमाल करके भी ऐसा कर सकते हैं।

ओलिव आयल (Olive Oil)

जैतून का तेल भी इस समस्या से बचने का आसान उपाय होता है यदि काँटा बाहर नहीं आता है तो एक या दो चम्मच ओलिव आयल पी जाएँ। ऐसा करने से कांटे के आस पास चिकनाई हो जाएगी जिससे कांटा पेट में चला जायेगा। यदि आप चाहे तो आयल पीने के बाद जोर से खांसी करें ऐसा करने से काँटा पेट के अंदर जाने की बजाय बाहर आ जायेगा।

ब्रेड (Bread)

गुनगुने पानी या गुनगुने दूध में ब्रेड डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस मिश्रण को पी जाएँ ऐसा करने से जैसे जैसे गले से यह मिश्रण नीचे जायेगा। काँटा भी इसके साथ ही पेट में चला जायेगा और आपको राहत मिलेगी।

केला (Banana)

केला भी गले में फंसे कांटे को निकालने के लिए एक असरदार उपाय है। इस तरीके का इस्तेमाल करने के लिए आप गले में कांटा फंसने पर केला खाएं केला जैसे ही गले से नीचे जायेगा तो काँटा केले में चिपक कर पेट में चला जायेगा।

चावल (Rice)

उबले हुए चावल का हाथ से बड़ा गोला बनाकर उसे खाएं जैसे चावल गले से नीचे जायेंगे तो इन चावलों में फंसकर काँटा भी नीचे की तरफ चला जायेगा। चावल के अलावा आप सुखी रोटी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

सिरका (Vinegar)

पानी और सिरके को बराबर मात्रा में मिलाकर गरारे करें और उस पानी को पी जाये। ऐसा करने से गले में अटका काँटा पेट के अंदर चला जायेगा।

डॉक्टर से मिलें

यदि यह उपाय करने के बाद भी आपके गले में से काँटा नहीं निकलता है और आपको गले में दिक्कत ज्यादा महसूस होती है। तो आपको एक बार डॉक्टर से मिलना चाहिए।

तो यदि आप भी फिश खाने के शौकीन हैं तो आपको भी इन टिप्स के बार में पता होना चाहिए। साथ ही एक बात का और ध्यान रखें की आप कोशिश करें की फिश किसी अच्छी जगह से लाएं और साफ करवाकर लाएं ताकि आप फिश को खाकर एन्जॉय कर सकें न की परेशान हो।

What to do when Fish bone stuck in the throat

डिलीवरी का तनाव कम करने के टिप्स

प्रेगनेंसी के दौरान महिला शारीरिक व् मानसिक रूप से बहुत से बदलाव का अनुभव करती है। और जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है वैसे वैसे महिला और ज्यादा तनाव में आ सकती है। ज्यादातर ऐसा उन महिलाओं के साथ होता है जो पहली बार माँ बन रही होती है। जैसे की डिलीवरी किस तरीके से होगी, डिलीवरी के दौरान बच्चे को कोई परेशानी तो नहीं होगी, डिलीवरी के समय बच्चे को कोई दिक्कत तो नहीं होगी, जैसे सवाल प्रेग्नेंट महिला के मन में लगातार घूम रहे होते हैं।

लेकिन ऐसे में महिला को तनाव लेने की बजाय अपने आप को शांत रखना चाहिए। क्योंकि तनाव लेने से महिला की मुश्किलें बढ़ती है और शांत रहने से महिला की दिक्कतों को कम करने में मदद मिलती है। तो आइये अब जानते हैं की डिलीवरी का तनाव कम करने के लिए महिला को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

दूसरों की बातों को न सुनें

जब आपकी डिलीवरी का समय पास आने वाला होगा तो हो सकता है की आपकी सहेलियां या रिश्तेदार कोई भी आपसे अपनी डिलीवरी के एक्सपीरियंस को शेयर करेगा। इसमें से कुछ एक्सपीरियंस अच्छे होंगे तो कुछ बुरे होंगे। ऐसे में आपको इस बात को अपने दिमाग पर हावी नहीं होने देना है की जैसा उनके साथ हुआ है वैसा आपके साथ भी होगा। ऐसे में आपको उनकी बातों को सुनकर भी अनसुना कर देना चाहिए। ताकि आपको तनाव न हो और आप बिल्कुल स्वस्थ रहें।

मैडिटेशन करें

डिलीवरी को लेकर तनाव को कम करने के लिए मैडिटेशन करना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि मैडिटेशन करने से महिला को मानसिक रूप से रिलैक्स रहने में मदद मिलती है। जिससे महिला फ्रैश व् ऊर्जा से भरपूर महसूस करती है और महिला को डिलीवरी को लेकर तनाव को कम करने में मदद मिलती है। मैडिटेशन के साथ आप योगासन भी कर सकती है क्योंकि योगासन भी प्रेग्नेंट महिला को शारीरिक व् मानसिक रूप से फिट रखने के लिए फायदेमंद होता है।

आराम करें

आराम करना गर्भवती महिला के लिए बहुत जरुरी होता है क्योंकि आराम करने से गर्भवती महिला को केवल शारीरिक रूप से ही आराम महसूस नहीं होता है बल्कि आराम करने से प्रेग्नेंट महिला मानसिक रूप से भी रिलैक्स महसूस करती है। ऐसे में डिलीवरी को लेकर तनाव को कम करने के लिए महिला को भरपूर आराम करना चाहिए।

हेल्थी डाइट

पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन भी डिलीवरी के समय होने वाले तनाव को कम करने में मदद करता है। क्योंकि पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने से गर्भवती महिला ऊर्जा से भरपूर और एक्टिव रहती है। जिससे गर्भावस्था के दौरान व् डिलीवरी के पास महिला को मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

परिवार के साथ समय बिताएं

जब प्रेग्नेंट महिला अकेली रहती है तो महिला के मन में न चाहते हुए भी बहुत सी बातें घूमते रहती है जिसकी वजह से महिला तनाव में आ जाती है। ऐसे में डिलीवरी को लेकर तनाव को कम करने के लिए जितना हो सके महिला को परिवार के साथ समय बिताना चाहिए। क्योंकि परिवार के साथ समय बिताने से आपके मन में दिमाग में उल्टे ख्याल आने बंद हो जाते हैं जिससे आपको तनाव से बचे रहने में मदद मिलती है।

अपने मन में आ रहे सवालों का जवाब ढूंढे

कई बार मन में चल रहे सवालों का जवाब न मिलने के कारण भी महिला डिलीवरी का समय पास आने पर तनाव ले लेती है। ऐसे में इस परेशानी के समाधान के लिए गर्भवती महिला के मन में जितने भी सवाल चल रहे हो तो उनके जवाब के लिए आप अपने परिवार, डॉक्टर आदि से बात करें और उनके जवाब लें। ताकि आपको डिलीवरी के दौरान किसी भी तरह का तनाव न हो।

खुश रहें

माँ बनना महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन लम्हा होता है ऐसे में महिला की डिलीवरी वो पल होता है जब वो अपने नन्हे मेहमान को अपनी लाइफ और इस दुनिया में स्वागत करती है। तो आप अपने बच्चे को इस दुनिया में बिना किसी परेशानी के लाना चाहती है तो ऐसे में जो भी आपको खुश रहना चाहिए। और डिलीवरी का समय पास आने पर यदि प्रेग्नेंट महिला खुश रहती है तो इससे डिलीवरी को लेकर होने वाले तनाव को कम करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान डिलीवरी का समय पास आने पर महिला को रखना चाहिए यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है। तो ऐसा करने से महिला को डिलीवरी को लेकर होने वाले तनाव को कम करने में मदद मिलती है।