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प्रेगनेंसी में ज्यादा या कम वजन होने से क्या दिक्क़ते आती है?

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गर्भावस्था में एक महिला को बहुत से शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुजरना पड़ता है। इस दौरान बहुत से हार्मोनल बदलाव भी होते है जिस कारण गर्भवती महिला का स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान सबसे बड़ा और साधारण बदलाव होता है महिला का वजन बढ़ना। पर गर्भवती महिला का वजन गर्भावस्था का सबसे अहम भी होता है। क्योंकि जरूरत से ज्यादा और कम दोनों ही तरह का वेट होने से नुक्सान होते है।

प्रेगनेंसी में आइडियल वेट कितना होना चाहिए?

आइये जानते है के एक नार्मल गर्भावस्था में एक महिला का कितना वेट बढ़ना चाहिए जिससे की उसकी प्रेगनेंसी में कोई परेशानी ना आये।

  • माना जाता है के एक नार्मल एंड हेल्दी प्रेगनेंसी के लिए एक महिला का 7 से 9 किलो वजन बढ़ना चाहिए।
  • यदि आपके गर्भ में जुड़वाँ बच्चे है तो नार्मल वेट 15 से 18 किलो तक बढ़ना चाहिए।
  • वैसे तो हर महिला की हर प्रेगनेंसी में अलग अलग वेट बढ़ता है।
  • क्योंकि वेट कितना बढ़ना चाहिए यह महिला की उम्र पर भी निर्भर करता है।
  • अच्छा रहता है अगर आप शुरुआत में ही अपने डॉक्टर से वेट के बारे में सलाह ले लें।

गर्भावस्था में ज्यादा वजन बढ़ने के नुकसान

यदि किसी महिला का प्रेगनेंसी में नार्मल से ज्यादा वेट बढ़ जाए तो यह वेट महिला और उसके बच्चे दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। आइये जानते है गर्भावस्था में ज्यादा वजन के क्या क्या नुक्सान है।

गर्भपात:

  • अक्सर यह देखने में आया है जिन महिलाओं का वजन एकदम से जरूरत से ज्यादा बढ़ता है उन्हें हमेशा गर्भपात होने का डर रहता है।
  • एक रिसर्च में यह सामने आया है के गर्भपात का सबसे बड़ा कारण गर्भवती महिलाओं का ज्यादा वजन होता है।
  • गर्भावस्था में अधिक वेट से गर्भवती महिला का ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है।
  • ब्लड प्रेशर ज्यादा होने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।

एक्टिव:

  • अधिक मोटापा या वजन गर्भवती महिला को एक्टिव नहीं रहने देता है।
  • ओवरवेट का असर माँ के साथ साथ उसके बच्चे पर भी पड़ता है।
  • ज्यादा वजन से माँ के साथ साथ शिशु भी सुस्त हो जाता है।

शुगर:

  • प्रेगनेंसी में ज्यादा वेट के कारण शुगर भी हो जाती है।
  • अगर किसी को जेस्टेशनल डायबिटीज है तो टाइप II डायबिटीज होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
  • ऐसे में शिशु को भी शुगर होने का भय रहता है।

हार्ट:

  • गर्भावस्था में ज्यादा वजन से हार्ट की समस्याएं बढ़ जाती है।
  • ज्यादा वजन वाली महिलाओं को हार्ट से संबंधित बीमारियों का खतरा रहता है।

डिलीवरी:

  • गर्भवती महिला के ओवरवेट होने से नार्मल डिलीवरी करना पॉसिबल नहीं हो पाता।
  • ऐसे में सी सेक्शन या सीजेरियन डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है।

गर्भावस्था में ओवरवेट होने से महिला को बेड रेस्ट पर रहना पड़ता जिसके कारण बाद बहुत से समस्याएं आती है।

प्रेगनेंसी में कम वजन होने से नुकसान

जैसा की हम पहले भी बता चुके है के आइडियल वजन ही माँ और बच्चे के लिए सेहतमंद होता है। आइये जानते है के गर्भवती महिलाओं का कम वजन क्या क्या समस्याएं लाता है।

शिशु का वजन:

  • यदि गर्भवती महिला का वजन कम है तो शिशु का वजन भी कम ही होगा।
  • ज्यादातर ऐसी स्तिथि में बच्चों का वजन 2.5 kg या उससे भी कम होता है।
  • कम वजन से माँ और शिशु दोनों ही कमजोर रह जाते है।

कुपोषण:

  • शिशु का कम वजन होने से कुपोषण की समस्या हो जाती है।
  • पोषण की कमी के कारण बच्चे का विकास अच्छे से नहीं हो पाता।
  • कुपोषित होने से बच्चे की इम्युनिटी भी कमजोर रह जाती है।
  • जिस कारण शिशु जल्दी ही बिमारियों से ग्रस्त हो जाता है।

बीमारियां:

  • गर्भवती महिला का कम वजन के कारण बच्चे को कई तरह की बीमारियां भी हो सकती है।
  • बहुत ज्यादा कम वजन होने से शिशु में विकलांगता भी आ सकती है।
  • आगे चलकर बच्चे को हाइपरटेंशन और मोटापा भी हो सकता है।
  • कम वजन वाली गर्भवती महिला के शिशु को हृदय रोग भी होने का खतरा बढ़ जाता है।

डिलीवरी:

  • जिन प्रेग्नेंट महिलाओं का वजन बहुत कम होता है उनकी प्री मैच्योर डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है।
  • मतलब शिशु नौ महीने से पहले ही जन्म ले लेता है।
  • कई बार प्री मैच्योर शिशु को बचाना भी आसान नहीं होता।

तो आपने देखा गर्भावस्था में महिला का सहीं वजन होना कितना आवश्यक है।  इसके लिए जरुरी है के गर्भावस्था के दौरान समय समय पर आप अपना वजन चेक करते रहे और अपने डॉक्टर से सलाह लेते रहे।

जन्म से लेकर एक महीने तक ऐसे रखें नवजात शिशु का ध्यान

जन्म के बाद बच्चे की केयर को लेकर अधिकतर महिलाएं परेशान हो जाती है की क्या करें क्या नहीं, खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बनती हैं वो बच्चे की केयर को लेकर ज्यादा परेशान हो सकती है। बच्चे के जन्म के बाद बच्चे को बहुत ज्यादा केयर की जरुरत होती है साथ ही इस दौरान बच्चा भी अपनी जरुरत के बारे में आपको नहीं बता पाता है। ऐसे में महिला को ही बच्चे की जरुरत का अच्छे से ध्यान रखना होता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको जन्म के एक महीने तक बच्चे का ध्यान कैसे रखना है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

टीकाकरण करवाएं समय से

जन्म से लेकर पहले एक महीने में बच्चे को बहुत से टीके लगते हैं, दवाई पिलाई जाती है। ताकि बच्चे का विकास अच्छे से हो सके और बच्चे को तरह की बिमारी व् संक्रमण से बचाने में मदद मिल सके। इसीलिए जन्म के बाद एक महीने तक शिशु का टीकाकरण समय से करवाना चाहिए।

बच्चे को हर दो घंटे में पिलाएं दूध

डॉक्टर्स के अनुसार शिशु को जन्म के बाद हर दो घंटे के बाद दूध पिलाना चाहिए, और ऐसे में यदि बच्चा दो या ढाई घंटे बाद भी भूख से नहीं रोता है तो आपको अपने बच्चे को उठाकर दूध पिलाना चाहिए। ताकि बच्चे के शरीर में पोषक तत्वों को बरकरार रहने में मदद मिल सके।

बोतल में दूध पिला रही हैं तो बरतें सावधानी

यदि किसी कारण आपका बच्चा आपका दूध नहीं पीता है और बोतल का दूध पीता है। तो बच्चे को बोतल में दूध पिलाने से पहले बोतल को अच्छे से धोना चाहिए या पानी में उबालना चाहिए। साथ ही दूध के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला पानी अच्छे से उबालकर गुनगुना रहने पर दूध पाउडर मिलाकर बच्चे को देना चाहिए।

बच्चे को दूध के अलावा और कुछ न दें

जन्म के बाद एक महीने तक ही नहीं बल्कि छह महीने तक बच्चे को दूध के अलावा कुछ और यहां तक की पानी भी नहीं देना चाहिए। क्योंकि इससे शिशु के विकास में कमी सकती है।

सारा दिन बच्चे को गोद में न उठायें

बच्चे बहुत प्यारे होते है साथ ही हम जानते हैं की घर के हर सदस्य को बच्चे को गोद में उठाने का कितना शोक होता है। लेकिन आपको इस बात का ध्यान रखना है की आप बच्चे को ज्यादा गोद में न उठायें क्योंकि इसके कारण बच्चा परेशानी का अनुभव करता है।

हर किसी के हाथ में बच्चे को न दें

बच्चे के जन्म के बाद थोड़ी सी भी लापरवाही के कारण बच्चे के संक्रमित होने का खतरा रहता है। ऐसे में आपको साफ़ सफाई का ध्यान रखने के साथ इस बात का भी ध्यान रखना है की आप हर किसी के हाथ में बच्चे को न दें। और महिला अपने हाथों की साफ़ सफाई का भी ध्यान रखें।

बच्चे को पूरा दिन उठाकर रखने की कोशिश न करें

छोटे बच्चे को खेलते हुए, हँसते हुए देखने का हर किसी का मन करता है लेकिन बच्चे के जन्म के बाद भी एक महीने तक शिशु का विकास हो रहा होता है। इसीलिए दिन में कम से कम बीस से इक्कीस घंटे तक बच्चा सो सकता है। लेकिन यदि आप जान बूझकर बच्चे को उठाकर रखने की कोशिश करते हैं तो इसकी वजह से बच्चे को दिक्कत हो सकती है।

बच्चे की नैपी का रखें ध्यान

नवजात की नैपी को बार बार चेक करते रहना चाहिए। क्योंकि यदि नवजात की नैपी गीली होती है और बच्चा उसी में लेटा रहता है तो इस वजह से बच्चे की स्किन पर रैशेस हो सकते हैं। जिसके कारण शिशु बहुत परेशान हो जाता है।

पूरा दिन डाइपर न पहनाएं

अधिकतर महिलाएं आजकल छोटे छोटे बच्चों को ही पूरा दिन डाइपर पहना कर रखती है जो की सही नहीं है। ऐसे में यदि आप भी ऐसा कर रही है तो आपको ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए खासकर जब बच्चा घर में ही हो। क्योंकि इसके कारण शिशु को परेशानी हो सकती है हाँ लेकिन जब कहीं बाहर जाना हो तो आप डाइपर का इस्तेमाल कर सकती है लेकिन तब भी बीच बीच में डाइपर चेक करते रहना चाहिए की कहीं डाइपर गीला तो नहीं है।

मालिश करें

जन्म के बाद शिशु के बेहतर शारीरिक विकास के लिए आपको बच्चे की मालिश भी जरूर करनी चाहिए, और बच्चे की मालिश आप शिशु के जन्म के दो या तीन दिन बाद ही शुरू कर सकती है।

बच्चे को नहलाते समय रखें ध्यान

जन्म के बाद शिशु को एक महीने तक नहलाते समय भी शिशु के लिए बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे की मौसम कैसा है ठंडा है या गर्मी है, शिशु की तबियत तो खराब नहीं है, पानी का तापमान, शिशु के नहलाने के तरीके का,आदि।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान रखने से नवजात का विकास बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। साथ ही महिला को इस बात का ध्यान भी रखना चाहिए की यदि आपको ऐसा लग रहा है की बच्चे को कोई दिक्कत है तो घर में ही इलाज न करना शुरू दें, बल्कि एक बार डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं।

पीरियड्स के समय खून के थक्के आने के कारण

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पीरियड्स महिला या लड़कियों को होने वाली एक आम परेशानी है जो हर महीने महिला या लड़कियों को होती है। हर महिला का मासिक धर्म चक्र एक जैसा हो ऐसा जरुरी नहीं होता है। पीरियड्स के दौरान महिला प्राइवेट पार्ट से ब्लड फ्लो होता है लेकिन कुछ महिलाओं को इस दौरान ब्लड के साथ थक्के भी निकल सकते हैं। ऐसे में घबराने की कोई बात नहीं होती है क्योंकि ऐसा होना आम बात होती है यह कोई बीमारी नहीं होती है। लेकिन हर महिला को खून के थक्के निकालने का एक ही कारण हो ऐसा भी जरुरी नहीं होता है। तो आइये अब जानते हैं की पीरियड्स में खून के थक्के निकालने के क्या क्या कारण होते हैं।

हार्मोनल असंतुलन

बॉडी में हार्मोनल अंसतुलन होने के कारण बहुत सी शारीरिक परेशानियां हो सकती है। ऐसे में पीरियड्स के दौरान ब्लड में थक्के आने का एक कारण बॉडी में हार्मोनल असंतुलन का होना हो सकता है।

गर्भपात

यदि महिला का अपने आप ही गर्भपात हो जाता है तो भी महिला को हैवी ब्लीडिंग होने के साथ खून के थक्के भी आ सकते हैं। या फिर महिला डॉक्टर से गर्भपात करवाती है तो भी ऐसा होता है इसमें घबराने की कोई बात नहीं होती है क्योंकि गर्भपात के बाद खून के थक्के आना बहुत आम बात होती है।

गर्भाशय में रसौली

जिन महिलाओं को गर्भाशय में रसौली की समस्या होती है उन्हें भी पीरियड्स के दौरान ब्लड के साथ ब्लड के थक्के भी आ सकते हैं। क्योंकि रसौली के कारण गर्भाशय से ब्लड फ्लो में रूकावट आ सकती है। जिसकी वजह से खून का फ्लो सही न होने के कारण खून के थक्के जमने लगते हैं और पीरियड्स के समय ब्लड के साथ थक्के भी आते हैं।

मेनोपॉज़

कुछ महिलाओं को मेनोपॉज़ की शुरुआत होने से कुछ समय पहले पीरियड्स के दौरान ब्लड के थक्के निकल सकते हैं। ऐसे में घबराने की कोई बात नहीं होती है क्योंकि यह मेनोपॉज़ के शुरूआती लक्षणों में से एक होता है।

गर्भाशय से जुडी समस्या

यदि कोई महिला गर्भाशय से जुडी किसी बिमारी से ग्रसित है तो भी महिला को पीरियड्स के दौरान ब्लड क्लॉटिंग की समस्या हो सकती है। यह परेशानी छोटी भी हो सकती है और बड़ी भी,zv  ऐसे में क्लॉटिंग की समस्या अधिक होने पर एक बार गर्भाशय की जांच डॉक्टर से जरूर करवानी चाहिए।

पीरियड्स में ब्लड के थक्के आने पर डॉक्टर से कब मिलें

यदि पीरियड्स के दौरान छोटे छोटे खून के थक्के आते हैं तो कोई बात नहीं लेकिन यदि थक्के बड़े बड़े आते हैं। साथ ही खून के थक्के आने के साथ महिला को थकान, कमजोरी की समस्या अधिक होती है। तो ऐसे में महिला को एक बार अपनी जाँच जरूर करवानी चाहिए क्योंकि यह किसी इन्फेक्शन या बॉडी में खून की कमी होने के कारण भी सकता है। इसके अलावा ब्लीडिंग की समस्या भी अधिक हो और ब्लीडिंग भी ज्यादा दिनों तक हो तो भी डॉक्टर से जरूर मिलें।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला या लड़कियों को पीरियड्स के दौरान खून के थक्के निकलते हैं। ऐसे में यदि आपको भी यदि यह परेशानी होती है तो आपको भी ध्यान रखना चाहिए की खून के थक्के कैसे हैं ताकि इसके कारण आपको सेहत सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सकें।

प्राइवेट पार्ट में किस तरह का इन्फेक्शन होता है? क्या है उपाय

प्राइवेट पार्ट में कई तरह के इन्फेक्शन होते है जैसे की यीस्ट इन्फेक्शन, खुजली व् जलन होना, रैशेस की समस्या होना, यूरिन में इन्फेक्शन होना, प्राइवेट पार्ट में सूजन होना आदि। और इसके कारण महिला को बहुत परेशानी होती है, क्योंकि कई बार अधिक दर्द व् जलन होने के साथ महिलाओ को यूरिन पास करने में भी परेशानी होती है, साथ ही उठने बैठने में भी समस्या होती है।

इन सब परेशानियों के होने के कई कारण हो सकते है जैसे की यदि आप अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान नहीं रखते है, पानी कम पीते है, प्राइवेट पार्ट के लिए ज्यादा सुगन्धित चीजों का इस्तेमाल करते है, सम्बन्ध बनाते समय सावधानी नहीं बरतते है, आदि। तो आइये आज हम आपको विस्तार से बताते है की प्राइवेट पार्ट में आपको कौन कौन सी समस्या हो सकती है और इससे बचने के लिए आप क्या कर सकते है।

प्राइवेट पार्ट में कौन कौन से इन्फेक्शन हो सकते है:-

यीस्ट इन्फेक्शन:-

इसका कारण आपके प्राइवेट पार्ट में बैड बैक्टेरिया का बढ़ना होता है। इसे खमीर संक्रमण भी कहते है, यदि खमीर यानी फंगस की समस्या आपके प्राइवेट पार्ट में होती है तो इसके कारण आपको यात इन्फेक्शन का सामना करना पड़ सकता है।

खुजली व् जलन की परेशानी होना:-

यदि आप अच्छे से अपने प्राइवेट पार्ट की साफ सफाई नहीं करते है, या गंदे कपडे पहनते है, पीरियड्स के दौरान लापरवाही करते है, तो इसके कारण आपको खुजली की समस्या हो सकती है। और अधिक खुजली जलन का कारण बनती है, क्योंकि साफ सफाई न रखने के कारण बैड बैक्टेरिया बढ़ जाता है जिसके कारण आपको इस परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।

यूरिन इन्फेक्शन:-

पानी की मात्रा शरीर में कम होने पर आपको यूरिन इन्फेक्शन की समस्या हो सकती है, ऐसे में कई बार यूरिन पास करते समय आपको दर्द व् जलन की समस्या भी हो सकती है। साथ ही आप यूरिन के रंग को देखकर यह भी जान सकते है की आपको कौन सी समस्या है।

सूजन होना:-

प्राइवेट पार्ट में सूजन होने के कई कारण हो सकते है, जैसे की यदि आप सम्बन्ध बनाते समय तेजी करते है, या फिर अधिक खुजली अधिक है, प्रेगनेंसी के दौरान, हार्मोनल बदलाव के कारण, एस्ट्रोजन की कमी के कारण, आदि। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए आपको अपने प्राइवेट पार्ट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

सूखापन होना:-

पानी की कमी के कारण, प्राइवेट पार्ट की त्वचा भी अपनी नमी खो देती है। जिसके कारण सूखापन होने लगता है, और इसके कारण आपको इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है। साथ ही इसके कारण आपको रैशेस आदि पड़ने की सम्भावना भी ज्यादा हो जाती है।

प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन को दूर करने के टिप्स:-

साफ़ सफाई का ध्यान रखें:-

योनि में होने वाले इन्फेक्शन का सबसे बड़ा कारण होता है, की आप अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान नहीं रखते है। जिसके कारण बैड बैक्टेरिया बढ़ने लगता है, और फंगस होने के कारण इन्फेक्शन की समस्या हो जाती है। इसीलिए आपको अपने प्राइवेट पार्ट को साफ़ रखना चाहिए, जितनी बार यूरिन पास करने जाते है अच्छे से सफाई करें, और अच्छे से सुखाने के बाद कपडे पहने।

पानी का भरपूर सेवन करें:-

शरीर में होने वाली पानी की कमी के कारण प्राइवेट पार्ट की स्किन में भी सूखापन होने लगता है। जिसके कारण आपको खुजली व् जलन भी हो सकती है। इसीलिए पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए, सूखापन दूर करने के साथ पानी का भरपूर सेवन करने से आपको यूरिन इन्फेक्शन की समस्या से बचने में भी मदद मिलती है।

ज्यादा सुगन्धित चीजों का इस्तेमाल न करें:-

प्राइवेट पार्ट के लिए यदि आप ज्यादा सुगन्धित चीजों का इस्तेमाल करनी हैं, या मासिक धर्म के दौरान पैड से जुडी लापवाही बरतती है, साबुन का या इत्र का अधिक इस्तेमाल करती है, तो इसके कारण भी बैड बैक्टेरिया बढ़ने की सम्भावना अधिक होती है। इसीलिए प्राइवेट पार्ट के लिए ज्यादा सुगन्धित चीजों का इस्तेमाल न करें, और पीरियड्स के दौरान हर छह से आठ घंटे बाद आपको अपने पैड को बदल लेना चाहिए।

टी ट्री ऑयल का इस्तेमाल करें:-

योनि में खुजली जलन, सूजन, इन्फेक्शन, आदि से बचाने के लिए टी ट्री ऑयल एक आसान और असरदार उपाय है। इसके लिए आप एक कप गर्म पानी में एक चम्मच टी ट्री ऑयल मिलाएं, और एक चम्मच जैतून का तेल मिलाएं। उसके बाद इससे दो से तीन बार अच्छे से अपने प्राइवेट पार्ट को साफ़ करें। ऐसा करने से आपको योनि से जुडी समस्याओ से राहत पाने में मदद मिलती है।

सम्बन्ध बनाते समय सुरक्षा का ध्यान रखें:-

कई बार इन्फेक्शन का कारण आपके पार्टनर को होने वाली समस्या भी हो सकता है। ऐसे मियादी आपके पार्टनर को यदि इन्फेक्शन है तो उसे फैलने से रोकने के लिए आपको सम्बन्ध बनाते समय सुरक्षा का इस्तेमाल करना चाहिए। यदि आप सुरक्षा का इस्तेमाल नहीं करते है, तो इसके कारण इन्फेक्शन के बढ़ने का खतरा अधिक रहता है।

कॉटन के कपडे पहने:-

यदि आप सिंथेटिक अंडरवियर पहनते है, तो यह आपके पसीने को सोख नहीं पाता है, जिसके कारण बैड बैक्टेरिया बढ़ने लगता है। और इसके कारण आपको खुजली की समस्या से भी परेशान होना पड़ सकता है। ऐसे में आपको कॉटन का साफ़ अंडरवियर पहनना चाहिए इससे आपका पसीना भी सोख लिया जाता है, साथ ही आपको खुजली व् जलन जैसी परेशानी भी नहीं होती है।

नीम के पानी का इस्तेमाल करें:-

नीम का इस्तेमाल एक प्राकृतिक औषधि के रूप में किया जाता है जो बैड बैक्टेरिया को खत्म करने में आपकी मदद करती है। ऐसे में आप नीम के पत्तों को पीस कर उनका लेप बनाकर प्राइवेट पार्ट में लगाएं, या नीम की निबोली को पानी में अच्छे से उबाल कर उससे अपने परिवाते पार्ट की सफाई करें, ऐसा दिन में दो बार करने से आपको राहत मिलेगी। और इस उपाय को जब तक करना चाहिए जब तक की आपका इन्फेक्शन ठीक न हो जाए।

दही है फायदेमंद:-

दही में मौजूद गुड़ बैक्टेरिया आपको बैड बैक्टेरिया की समस्या से बचाने में मदद करते है। साथ ही इससे आपको ठंडक भी मिलती है, जिससे आपको खुजली व् जलन की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। इसके लिए आपको अपने आहार में दही को सम्मिलित करना चाहिए, साथ ही आप रुई को दही में भिगोकर उसे भी अपने प्राइवेट पार्ट में लगा सकते है।

नारियल तेल का इस्तेमाल करें:-

नारियल तेल में मौजूद गुण आपको प्राइवेट पार्ट से जुडी परेशानियों से राहत दिलाने में मदद करते है। इसके लिए आप दिन में दो से तीन बार रुई की मदद से अच्छे से अपने प्राइवेट पार्ट में नारियल के तेल को लगाएं। ऐसा करने से आपको प्राइवेट पार्ट से जुडी इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। जैतून और मीठे बादाम के तेल का इस्तेमाल करने से भी आपको फायदा मिलता है।

तो आपको अपने प्राइवेट पार्ट की अच्छे से साफ सफाई का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको भी प्राइवेट पार्ट से जुडी इन परेशानियों का सामना न करना पड़े। और यदि आपको ये समस्या हो जाती है, तो ऐसे में आप ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल करके अपनी समस्या का समाधान भी कर सकते है।

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पति को अपनी प्रेग्नेंट पत्नी का ध्यान ऐसे रखना चाहिए

प्रेगनेंसी के लम्हे केवल माँ के लिए ही नहीं बल्कि पिता के लिए भी बहुत खास होते है, माँ बच्चे के गर्भ में होने का अहसास कर सकती है, तो पिता उसे महसूस कर सकता है, दोनों माता पिता ही अपने आने वाले शिशु के लिए कितने सपने संजोते है, और बहुत ही बेसब्री से शिशु को अपनी बाहों में थामने के लिए इंतज़ार कर रहे होते है, गर्भावस्था का समय महिला के लिए बहुत ही अलग और कई बार बहुत ही परेशान करने वाला होता है, क्योंकि इस दौरान महिला के शरीर में हॉर्मोन्स के परिवर्तन के कारण बहुत से बदलाव भी आते है, वो शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के हो सकते है।

जो महिलाएं माँ बनने का अनुभव ले रही होती है, खास कर जो पहली बार माँ बनती है, उनके लिए कई बार इस लम्हे को समझ पाना बहुत मुश्किल हो जाता है, और कई महिलाएं इन परिवर्तन के कारण परेशान होकर तनाव में भी आ जाती है, ऐसे में महिला के साथ इन लम्हो को बांटने और अपनी प्रेग्नेंट पत्नी का ख्याल रखने के लिए महिला के पति को कुछ जरूर करना चाहिए, जैसे की वो अपनी पत्नी के दिल की सभी इच्छाओ को पूरा करें, महिला का ध्यान दूसरी बातों में लगाएं, और भी ऐसे कुछ टिप्स है जिनसे प्रेग्नेंट पत्नी का ख्याल पति रख सकते है, तो आइये जानते है की वो टिप्स कौन कौन से है।

महिला के खान पान का रखें ध्यान:-

गर्भावस्था में महिला के टेस्ट में भी बदलाव आता है, ऐसे में महिला का कई बार खट्टा और कई बार तीखा, तो कभी मीठा खाने का दिल करता है, ऐसे में पति को अपनी पत्नी की इच्छा का ध्यान रखते हुए उसे पूरा करना चाहिए, ऐसा करने से उन्हें अपनी पत्नी को खुश करने का मौका मिलता है, जिससे महिला के खुश रहने का असर आपके बच्चे को भी स्वस्थ रखता है, पर कोशिश करें की ज्यादा बाहर का न खिलाएं।

महिला को सुबह शाम वॉक पर जाने के लिए प्रेरित करें:-

महिला को गर्भावस्था के दौरान कही बार जाने का मन हमेशा करता है, परंतु कई बार असहज महसूस होने के कारण या किसी और वजह से वो नहीं जाती है, ऐसे में उसे प्रकृति के दृश्य, और उससे मिलने वाले लाभ को लेने के लिए महिला के पति को सुबह और रात को खाना खाने के बाद थोड़ी देर के लिए जरूर घुमाना चाहिए, और यदि कभी महिला का जाने का मन नहीं होता है तो आपको उन्हें बाहर जाने के लिए प्रेरित करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण महिला के स्वास्थ्य को बेहतर रहने में मदद मिलती है, ऐसा करने से उसका स्वास्थ्य बेहतर रहते है, और उसका मन भी बदल जाता है।

उन्हें तनाव में न रहने दें:-

जो महिलाएं पहली बार माँ बनने जा रही होती है, कई बार उन्हें गर्भावस्था में होने वाले अनुभव समझ नहीं आते है, जिसके कारण वो मानसिक रूप से परेशान और तनाव में रहने लगती है, जो की उनके लिए घातक सिद्ध हो सकता है, इस समस्या से बचने के लिए आपको अपनी पत्नी के साथ समय बिताना चाहिए, उनके मन को कही और लगाना चाहिए, क्योंकि तनाव के कारण बहुत सी परेशानियां खड़ी हो सकती है, ऐसे में आप उन्हें किताबे पड़ कर सुना सकते है, खनिये कवितायें सुना सकते है।

उनके सामने टेंशन वाली बातें न करें:-

गर्भवासतः का समय महिला के लिए किसी जंग से कम नहीं होता है, ऐसे में गर्भवती महिला के पति को कोशिश करनी चाहिए की वो अपनी पत्नी के सामने किसी भी तरह की कोई टेंशन वाली बात न करें, और न ही उनसे इस विषय में कुछ शेयर करें, और उनके आस पास घर में रहने वाले लोगो को भी मना करना चाहिए, क्योंकि गर्भावस्था के समय टेंशन होने से महिला मानसिक तौर से परेशान हो सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान शिशु का वजन कितना होना चाहिए?

शिशु की केयर के लिए गर्भवती महिला को उसके जन्म तक का इंतज़ार नहीं करना पड़ता है क्योंकि जैसे ही शिशु गर्भ में आता है। वैसे ही वो अपने विकास के लिए अपनी माँ पर निर्भर करता है और गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से हो, शिशु का वजन सही रहे इसके लिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला अपने खान पान के साथ अन्य छोटी छोटी चीजों का अच्छे से ध्यान रखती है। गर्भ में पल रहे शिशु का वजन हर दिन, हर हफ्ते, हर महीने बढ़ता है, और अल्ट्रासाउंड स्कैन के बाद रिपोर्ट आने पर आपको गर्भ में शिशु का वजन पता भी चल जाता है।

ऐसे में यदि शिशु का वजन ठीक से बढ़ रहा होता है तो यह इस बात का संकेत होता है की गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ है। लेकिन यदि शिशु का वजन जितना होना चाहिए उससे कम होता है तो इस बारे में डॉक्टर आपको बता भी देते हैं। ताकि आप अपनी और ज्यादा अच्छे से केयर कर सके जिससे शिशु के वजन को गर्भ में सही तरीके से बढ़ने में मदद मिल सके। और जन्म के समय वजन में कमी के कारण होने वाली परेशानियों से शिशु को सुरक्षित रखने में मदद मिल सके।

गर्भ में शिशु का वजन कितना होना चाहिए

गर्भ में शिशु के वजन कितना होना चाहिए और हर महीने में शिशु का वजन कितना बढ़ता है। आइये आज हम इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताने जा रहे हैं।

दूसरे महीने में शिशु का वजन: दूसरे महीने में शिशु का वजन केवल एक ग्राम ही होता है।

तीसरे महीने में शिशु का वजन: तीसरे महीने में शिशु का वजन 2 ग्राम से 14 ग्राम तक बढ़ सकता है।

चौथे महीने में शिशु का वजन: छठे महीने में शिशु का वजन 23 ग्राम से 100 ग्राम तक बढ़ सकता है।

पांचवें महीने में शिशु का वजन: 140 ग्राम से 300 ग्राम तक शिशु का वजन प्रेगनेंसी के पांचवें महीने में बढ़ सकता है।

छठे महीने में शिशु का वजन: छठे महीने में शिशु का वजन 360 ग्राम से 650 ग्राम तक बढ़ सकता है।

सातवें महीने में शिशु का वजन: 750 ग्राम से 1.3 किलोग्राम तक शिशु का वजन प्रेगनेंसी के सातवें महीने में बढ़ सकता है।

आठवें महीने में शिशु का वजन: 1.5 किलोग्राम से लेकर 2 किलो 20 ग्राम तक शिशु का वजन प्रेगनेंसी के आठवें महीने में बढ़ सकता है।

नौवें महीने में शिशु का वजन: 2.5 किलोग्राम से लेकर 3.5 किलोग्राम या उससे थोड़ा ज्यादा भी शिशु का वजन प्रेगनेंसी के नौवें महीने में बढ़ सकता है। यह एक स्वस्थ शिशु का वजन है और इसी तरह से गर्भ में यदि शिशु का वजन बढ़ता है तो जन्म के समय शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

तो यह है शिशु का वजन हर महीने कितना होना चाहिए इससे जुडी जानकारी, ऐसे में यदि डॉक्टर से आपको बताते हैं की शिशु का वजन सही है तो आपको प्रेगनेंसी में उसी तरीके से अपना ध्यान रखना चाहिए। और यदि शिशु का वजन कम बताते हैं तो आपको अपना ख्याल और अच्छे तरीके से रखना चाहिए। ताकि शिशु का वजन सही रहने और शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

बच्चे की दिल, दिमाग और विकास को प्रभावित कर सकती है ये आदत

जैसे ही कोई महिला प्रेग्नेंट होती है उसके को घर परिवार वालों की ख़ुशी का पारावार नहीं रहता है। पूरा घर नन्हे मेहमान की प्रतीक्षा में लग जाते है और उसके कई सारे सपने भी बुनने लगते है। इस दौरान अक्सर गर्भवती महिला को ख़ुशी के साथ साथ तनाव भी होने लगता है। इस तनाव के कई कारण हो सकते है जैसे गर्भवती महिला के मानसिक और शारीरिक बदलाव या अन्य।

पर क्या आप जानते है के गर्भावस्था के दौरान आप जो भी करते है उसका सीधा असर आपको होने वाले शिशु पर भी पड़ता है। इसीलिए घर के बुजुर्ग हमे कई प्रकार की सलाह भी देते है की हमे क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। अक्सर बड़ों की दी हुई सलाह हमारे काम भी आती है। एक शोध के अनुसार यह पता चलता है के गर्भवस्था के दौरान जो महिला ज्यादा तनाव और चिड़चिड़ी हो जाती है उनके शिशु का अच्छे ढंग से मानसिक और शारीरिक विकास नहीं हो पाता है।

आइये जानते है गर्भावस्था के दौरान किन आदतों से शिशु का दिल, दिमाग और विकास प्रभावित हो सकता है।

तनाव और चिड़चिड़ापन

गर्भावस्था के पहले तिमाही में बहुत तेजी से हार्मोनल बदलाव होते है जिस कारण थकान, सर दर्द, उलटी, जी घबराना, मिचली, तनाव और चिड़चिड़ापन बहुत समान्य होती है। ऐसा जरुरी नहीं के हर महिला को इन सभी समस्याओं से गुजरना पड़ता है। कुछ महिलाओं को इनमे से कोई भी परेशानी नहीं होती और कुछ महिलाओं की हालत बहुत ज्यादा खराब हो जाती है।

शुरूआती महीनो की इन मुश्किलों के कारण कुछ गर्भवती महिलायें बहुत ज्यादा स्ट्रेस ले लेती है जिस वजह से सीधा असर उनके शिशु की ग्रोथ पर पड़ता है। ऐसे शिशु पर कई बार इतना मानसिक प्रभाव पड़ता है के उसकी सिखने और समझने की शक्ति अच्छे से विकसित नहीं हो पाती है।

ब्लड प्रेशर

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं को हाई ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम भी हो जाती है। ब्लड प्रेशर के ज्यादा बढ़ने से गर्भाशय तक ब्लड सहीं से नहीं पहुंच पाता जिस वजह से शिशु की ग्रोथ अच्छे से नहीं हो पाती। कई बार हाई ब्लड के कारण समय से पहले ही डिलीवरी होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त हाई ब्लड प्रेशर के दौरान नार्मल डिलीवरी भी सम्भव नहीं हो पाती है।

जिन महिलाओं को गर्भ धारण करने से पूर्व ही ब्लड प्रेशर की समस्या होती है उन्हें प्रेगनेंसी के दौरान और भी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसीलिए अपने डॉक्टर से पहले ही अपनी मेडिकल हिस्ट्री की बारे में बता दे। कुछ गर्भवती महिला को यह समस्या सिर्फ गर्भावस्था के नो महीनो में ही होती है। इसमें से भी शुरूआती तीन महीनो में ब्लड प्रेशर ज्यादा होता है। डिलीवरी के बाद हाई ब्लड प्रेशर अपने आप ही ठीक हो जाता है।

इन्फेक्शन या वायरल

गर्भावस्था के समय हमारी इम्युनिटी यानि की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से कमजोर हो जाती है। इसीलिए बदलते मौसम का असर सबसे पहले गर्भवती महिला को घेरता है। गर्भवती महिला को खांसी, जुकाम, वायरल या बुखार आदि होना अच्छा नहीं होता है। ज्यादा खांसी होने से शिशु हार्ट बीट पर भी असर पड़ता है। खाँसी के समय सिर्फ हमारी आंते ही नहीं खींचती बल्कि शिशु पर भी जोर पड़ता है। बुखार और जुकाम होने से शिशु का विकास धीमा हो जाता है।

वैसे तो बदलते मौसम में गर्भवती महिला को अच्छे तरीके से अपना ध्यान रखना चाहिए। अच्छे पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए जिससे आपकी इम्युनिटी स्ट्रांग हो सके। फिर भी अगर आपको कोई फ्लू या इन्फेक्शन हो जाता है तो तुरंत अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए। अगर समय पर दवा ना ली जाएँ और फ्लू या बैक्टीरिया का इलाज ना किया जाये तो शिशु को जन्म के समय कोई विकार हो सकता है।

डायबिटीज

कई बार गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं को हार्मोनल बदलावों के वजह से हाई ब्लड शुगर हो जाता है। इसके आलावा कई गर्भवती महिला की लापरवाही की कारण भी ऐसा हो जाता है। इस दौरान हमारे टेस्ट बड्स बदल जाते है जिस कारण हमारा अधिक मीठा खाने का मन करता है परन्तु अपने मुँह के स्वाद का ध्यान रखते रखते हम अपनी और शिशु की सेहत का ध्यान रखना भूल जाते है। अधिक मीठे के सेवन से भी ब्लड शुगर बढ़ जाता है।

गर्भावस्था के दौरान कोशिश करे के आप एक संतुलित और पौष्टिक भोजन का सेवन करें। किसी भी चीज की अधिकता इस दौरान आपके और शिशु के लिए हानिकारक हो सकती है। यदि फिर भी आपको डायबिटीज हो गयी है तो तुरंत अपने डॉक्टर से मिले और डॉक्टर द्वारा बताया गया पूर्ण इलाज करवाएं।

प्रेगनेंसी के दौरान इन सभी परेशानियों के लिए एक अच्छी दिनचर्या अपनाये और खुश रहे जिससे आपके शिशु में भी अच्छी आदतों, अच्छे व्यवहार का विकास हो सके। इस समय में खुश रहना बहुत जरुरी है इसीलिए हमेशा खुश रहे तनाव को अपने ऊपर हावी ना होने दे फिर भी अगर तनाव से निजात पाने में असमर्थ है तो योगा और मैडिटेशन अपनाये और अपने डॉक्टर से सलाह लें। बिमारियों से बचने के लिए संतुलित आहार, दूध, दही, फल और हरी सब्जियों सेवन जरूर करें।

गर्मियों में घमौरियां से बचने के टिप्स

गर्मियों में तेज धूप, पसीना, लू आदि के कारण स्किन से जुडी परेशानी होने का खतरा बहुत ज्यादा होती है। जैसे की स्किन पर टैनिंग का होना, सूखापन होना, और साथ ही स्किन पर घमौरियां जैसी परेशानी भी हो सकती है। घमौरियां के होने पर स्किन पर छोटे छोटे दाने निकलने लगते है जिसके कारण खुजली व् जलन की समस्या के कारण भी परेशान होना पड़ सकता है। और यह परेशानी बच्चे बड़े सभी को हो सकती है, लेकिन यह कोई ऐसी समस्या भी नहीं है की जिसका कोई इलाज न हो बल्कि गर्मियों में कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके इस समस्या से राहत पाई जा सकती है। तो लीजिये अब जानते हैं की गर्मियों में स्किन की ठंडक पहुंचाकर घमौरियों की समस्या से राहत पाने के लिए टिप्स कौन से हैं।

आइस पैक का इस्तेमाल

आसान होने के साथ आइस पैक घमौरियां से निजात पाने का एक असरदार नुस्खा है। इसके इस्तेमाल के लिए आप कॉटन के कपडे में आइस के टुकड़े बाँध लें, उसके बाद इसे घमौरियां पर पांच से सात मिनट के लिए दिन में दो से तीन बार लगाएं। इससे आपको बहुत जल्दी इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

हल्दी

हल्दी, मेथी, नमक में थोड़ा पानी या गुलाबजल मिलाकर एक उबटन तैयार करें। उसके बाद नहाने के पांच या सात मिनट पहले इसे घमौरियों पर लगाएं। उसके बाद साफ़ पानी से नहा लें, और बॉडी के सूखने के बाद पाउडर लगाएं इस उपाय को हफ्ते में एक या दो बार करने से ही राहत का अहसास होता है।

एलोवेरा

स्किन से जुडी परेशानियों से राहत पाने के लिए एलोवेरा का इस्तेमाल करने से फायदा मिलता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एलोवेरा जेल मार्किट से लाकर या एलोवेरा के पत्ते को तोड़कर ताजे रस को निकालकर घमौरियां पर लगाएं, इससे स्किन को ठंडक का अहसास होता जिससे घमौरियां से निजात पाने में मदद मिलती है।

मुल्तानी मिट्टी

घमौरियां से निजात पाने के लिए मुल्तानी मिट्टी भी एक बेहतरीन उपाय है। इस्सके इस्तेमाल के लिए दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी को पीसकर उसमे पानी मिलाकर एक पतला लेप तैयार करें, अब इसे घमौरियां पर लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें, इसके सूखने के बाद नहा लें। हफ्ते में दो बार इस उपाय को करने से आपको इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।

नारियल का तेल

एक कपूर को पीसकर नारियल के तेल में अच्छे से मिक्स कर लें अब इस मिक्सचर को घमौरियां पर लगाएं। उसके आधे घंटे बाद नहा लें, इस उपाय को करने से भी आपको इस परेशानी को खत्म करने में मदद मिलती है।

चन्दन पाउडर

एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर चन्दन पाउडर का इस्तेमाल करने से भी आपको घमौरियां से राहत पाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप चन्दन पाउडर में पानी या गुलाबजल डालकर इसे अच्छे से मिक्स कर लें, और एक पतला लेप तैयार करें। अब इस लेप को स्किन पर जहां घमौरियां है वहां लगाएं और सूखने के बाद इसे साफ़ कर लें, ऐसा करने से भी आपको घमौरियां से राहत पाने में मदद मिलती है।

सरसों का तेल

दो चम्मच सरसों के तेल में दो चम्मच पानी मिलाएं, उसके बाद इसे अच्छे से घमौरियां पर लगाएं। और आधे घंटे बाद इसे ठन्डे पानी से साफ कर दें, या नहा लें। ऐसा करने से भी घमौरियां खत्म हो जाता है।

संतरे का छिलका

संतरे के छिलके को सुखाकर इसे अच्छे से पीसकर पाउडर बना लें, उसके बाद इसमें गुलाबजल मिलाकर एक लेप बनाएं। अब इसे घमौरियां पर लगाएं उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें, और ठन्डे पानी से साफ़ कर लें।

नीम

औषधीय गुणों से भरपूर नीम के पत्तों को पानी में उबाल कर उस पानी को ठंडा करके उससे बॉडी को अच्छे से साफ करें। ऐसा करने से भी स्किन पर होने वाली घमौरियां की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

अनानास

अनानास के गुद्दे को पीसकर उसमे थोड़ा सा पानी मिलाकर स्किन पर लगाएं। थोड़ी देर बाद इसे साफ़ कर दें, इस उपाय को करने से भी आपको गर्मियों में होने वाली घमौरियां की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

गर्मियों में घमौरियां से राहत पाने के अन्य टिप्स

  • एक गिलास पानी में निम्बू का रस निचोड़ लें, उसके बाद खीरे के पतले स्लाइसेस काटकर रख दें। उसके बाद इन स्लाइसेस को घमौरियां पर लगाएं, और मसाज करें इससे भी घमौरियां से राहत पाने के साथ स्किन पर होने वाली जलन से भी राहत मिलती है।
  • कच्चे आम को धीमी आंच पर भूनकर, उसका गुद्दा निकाल लें, उसके बाद इसे पीस कर घमौरियां पर लगाएं। या आम पन्ना का सेवन करें इससे भी आपको घमौरियां से राहत मिलती है।
  • थोड़ी सी खसखस को पानी के साथ मिलाकर पीस लें, और लेप तैयार करें। अब इस लेप का इस्तेमाल घमौरियां के लिए करें।
  • देसी घी को घमौरियां पर लगाने से भी आपको घमौरियां से निजात मिलता है।
  • पाउडर लगाने से स्किन को ठंडक मिलती है, इससे भी स्किन पर घमौरियां, जलन, खुजली की समस्या से राहत मिलती है।
  • गर्मी के दिनों में टाइट कपडे, शरीर को चुभने वाले कपडे नहीं पहनने चाहिए, ऐसा करने से भी गर्मियों में घमौरियां से बचाव करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ उपाय जिनका इस्तेमाल करने से गर्मियों में होने वाली घमौरियां की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। इसके अलावा घमौरियां पर खुजली नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे आपकी परेशानी बढ़ सकती है।

पीरियड्स मिस होने से पहले ऐसे जाने आप गर्भवती हैं या नहीं?

पीरियड्स मिस होना प्रेगनेंसी होने का सबसे पहला लक्षण माना जाता है। क्योंकि महिलाएं पीरियड्स मिस होने के बाद ही प्रेगनेंसी टेस्ट करती है। लेकिन क्या आप जानती है की पीरियड्स मिस होने से पहले ही आप इस बात का अंदाजा लगा सकती है की आप गर्भवती हैं या नहीं। अब आप सोच रही होंगी ऐसा कैसे हो सकता है। तो इसके लिए आपको परेशान होने की जरुरत नहीं हैं। इसका पता आप अपनी बॉडी में होने वाले बदलाव से लगा सकती है। यदि महिला का गर्भ ठहर गया है तो निषेचन की प्रक्रिया के पूरे होते ही बॉडी में महिला को प्रेगनेंसी के कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं। क्योंकि अंडे के निषेचित होने के बाद ही बॉडी में हार्मोनल बदलाव शुरू हो जाते हैं।

पीरियड्स मिस होने से पहले बॉडी में प्रेगनेंसी के कौन से लक्षण दिखाई देते हैं

यदि पीरियड्स मिस होने से पहले की आप यह जानना चाहती है की आपका गर्भ ठहरा है या नहीं। तो इसका अंदाजा महिला बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव से लगा सकती है। तो आइये अब जानते हैं की पीरियड्स मिस होने से पहले बॉडी में प्रेगनेंसी के कौन से लक्षण महसूस हो सकते हैं।

थकान व् कमजोरी

  • यदि महिला को बहुत जल्दी थकान व् शरीर में कमजोरी महसूस हो रही है तो यह प्रेगनेंसी का लक्षण हो सकता है।
  • क्योंकि बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को थकान व् कमजोरी का अनुभव हो सकता है।
  • और यदि आपका गर्भ ठहर गया है तो बॉडी में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन का स्तर बढ़ने लगता है जिसके कारण कमजोरी अधिक महसूस हो सकती है।

भूख में बदलाव

  • बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की भूख व् स्वाद में भी फ़र्क़ महसूस हो सकता है।
  • जैसे की या तो आपको बिल्कुल कम भूख लगेगी या फिर आपकी भूख पहले से भी ज्यादा बढ़ सकती है।
  • इसके अलावा जीभ के स्वाद में भी फ़र्क़ महसूस हो सकता है जैसे की महिला का या तो मीठा या खट्टा खाने की इच्छा हो सकती है।

पीरियड्स मिस होने से पहले प्रेगनेंसी जानने का तरीका है स्तन में बदलाव

  • पीरियड्स मिस होने से पहले स्तन में यदि आपको कोई बदलाव महसूस होता है तो यह भी गर्भ ठहरने के कारण हो सकता है।
  • जैसे की स्तन में सूजन, भारीपन, स्तन में दर्द, आदि महसूस होना।

उल्टी व् जी मिचलाना

  • यदि महिला उल्टी आने का मन करें या जी मिचलाने की समस्या अधिक महसूस हो।
  • तो यह भी पीरियड्स मिस होने से पहले ही महिला के गर्भवती होने का लक्षण होता है।

रक्त के धब्बे

  • यदि महिला को पेट में हल्का फुल्का दर्द या पीरियड आने से पहले खून का दाग आदि लगने जैसी परेशानी हो।
  • तो यह भी महिला के गर्भ ठहरने की और इशारा करता है।

पीरियड्स मिस होने से पहले प्रेगनेंसी जानने का तरीका है पेट फूलना

  • यदि माहवारी मिस होने से पहले आपको कब्ज़, पेट में गैस आदि की समस्या होती है।
  • तो यह भी महिला के गर्भ ठहरने की और इशारा करता है।
  • क्योंकि यदि आपका गर्भ ठहर गया है तो इसका कारण बॉडी में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन का स्तर बढ़ना भी हो सकता है।

यूरिन पास करने की इच्छा

  • यदि पीरियड्स मिस होने से पहले ही आपकी बार बार यूरिन पास करने इच्छा बढ़ जाती है।
  • तो यह भी महिला के गर्भ ठहरने की और इशारा करता है।
  • क्योंकि बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की बार बार यूरिन पास करने की इच्छा हो सकती है।

पीरियड्स मिस होने से पहले प्रेगनेंसी जानने का तरीका है मूड में बदलाव

  • बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव का असर दिमाग पर भी पड़ता है।
  • ऐसे में महिला को गुस्सा व् चिड़चिड़ापन अधिक महसूस हो सकता है।
  • यदि आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो इसका कारण महिला का गर्भ ठहरना भी हो सकता है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो माहवारी के मिस होने से पहले बताते हैं की महिला का गर्भ ठहरा है या नहीं। यदि आपने भी बिना सुरक्षा के सम्बन्ध बनाया है और आपको बॉडी में ऐसे लक्षण महसूस हो रहे हैं। तो यह है महिला के प्रेग्नेंट होने की तरफ इशारा करते हैं।

लिप्स को पिंक करने के तरीके

Lips ko Pink Karne ke Tarike : होठों को महिलाओं की खूबसूरती का अभिन्न हिस्सा माना जाता है इसीलिए सभी इनकी खास देखभाल करती हैं। लेकिन कई बार इतनी देखभाल करने के बावजूद भी होंठ काले हो ही जाते हैं। जिन्हे छुपाने के लिए कोई लिपस्टिक का इस्तेमाल करती हैं तो कोई कलर्ड लिप बाम का। जो कुछ देर के लिए होठों को चमक को दे देते हैं लेकिन शाम ढलने तक होठों फिर से पहले जैसे हो जाते हैं।

कहने को ये कॉस्मेटिक्स प्रॉब्लम का इंस्टेंट सॉल्यूशन होते है लेकिन इनमे मिले केमिकल होठों की स्किन के लिए हानिकारक होते है। ये स्किन को डल, बेजान और रुखा बना देते है जिसके कारण होंठ पहले से भी अधिक काले दिखने लगते है। खुद ही सोचिये, जब आपने पहली बार लिपस्टिक का इस्तेमाल किया था तब आपके लिप्स कितने ब्लैक थे और अब जब आप रेगुलर लिपस्टिक का इस्तेमाल कर रही है तो आपके लिप्स कितने ब्लैक हैं?

जाहिर है, पहले से ज्यादा। मौसम चाहे गर्मियों का हो या सर्दियों का होठों की देखभाल हर मौसम में करना बहुत जरुरी होता है, खासकर उनके रंग की। होठों की प्राकृतिक खूबसूरती उनके रंग से ही निखरती है और अगर लिप्स पिंक हो जाएं तो क्या कहने? अगर आप भी अपने लिप्स को पिंक करना चाहती है तो यहाँ हम कुछ तरीके से रहे हैं जिनकी मदद से होठों को गुलाबी किया जा सकता है।

पिंक लिप्स करने के तरीके : Tips to Get Pink Lips

गुलाब की पंखुड़ियां – पिंक लिप्स के लिए गुलाब की पंखुड़ियों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इसके लिए गुलाब की पंखुड़ियों को थोड़ी सी ग्लिसरीन मिलाकर पेस्ट बना लें और उसे रोजाना रात को सोने से पहले अपने होठों पर लगाएं।

कच्चा दूध – कच्चा दूध भी लिप्स को पिंक कर सकता है। इसके लिए केसर को कच्चे दूध में मिलाकर पीस लें और उससे लिप्स की हलके हाथों से मालिश करें। आपके होठों मुलायम और सुन्दर हो जाएंगे।

अनार – पिंक लिप्स के लिए अनार भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए थोड़ी सी गाजर और अनार मिलाकर रस बनाएं और उसे होठों पर लगाएं। होंठ गुलाबी हो जाएंगे।

दूध की मलाई – यह होठों को मुलायम और पिंक करने में मदद करती है। प्रयोग के लिए थोड़ी सी मलाई में 1 चुटकी हल्दी मिलाएं और उससे होठों की मालिश करें। नियमित प्रयोग से होंठ पिंक होने लगेंगे।

शहद – दिन में 2 बार होठों पर शहद से मसाज करें। कुछ ही दिनों में होंठ गुलाबी और मुलायम होने लगेंगे।

नींबू का रस – नींबू के रस में ग्लिसरीन मिलाकर भी होठों को गुलाबी किया जा सकता है। इससे होठों का कालापन दूर होगा और प्राकृतिक रंगत वापस आ जाएगी। नियमित प्रयोग से होंठ मुलायम भी होंगे।

Vitamin E – ये आपको बाजार में आसानी से कैप्सूल के रूप में मिल जाएगा। कैप्सूल के अंदर से आयल निकालकर होठों पर आधे घंटे के लिए लगा लें और उसके बाद टिश्यू पेपर की मदद से उसे साफ़ कर लें और फिर कोई नेचुरल लिप बाम लगा लें।

पत्तों की ओस – सुबह-सुबह पत्तों पर पड़ी ओस को होठों पर लगाने से भी होठों की खूबसूरती बरकरार रहती है।

टमाटर – टमाटर का रस पीने और टमाटर खाने से भी होंठ गुलाबी और मुलायम होते हैं।

आइस क्यूब – टमाटर के रस, एलोवेरा, चुकंदर का रस, अनार का रस आदि की आइस क्यूब बनाकर उसे होठों पर रगड़ने से भी होंठ गुलाबी और मुलायम होते हैं।

नारियल का तेल – रात को सोते समय होठों पर नारियल का तेल लगाने से होंठ गुलाबी रहते है और इसके मॉइश्चरइजिंग गुण होठों को मुलायम बनाते हैं।

सरसों का तेल – सरसों के तेल में थोड़ी सी हल्दी मिला लें और रोजाना रात को सोने से पहले उस मिश्रण को अपनी नाभि पर लगाएं। फटे होठों की समस्या तो दूर होगी ही साथ-साथ होंठ मुलायम और गुलाबी भी होंगे।

चुकंदर का रस – नियमित रुप से चुकंदर का रस पीने और होठों पर लगाने से लिप्स पिंक और मुलायम होते हैं।

गुलाब जल – शहद में मलाई और गुलाबजल मिलाकर लगाने से भी लिप्स को पिंक किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल रात के समय करेंगे तो बेहतर होगा।

ये कुछ घरेलू उपाय है जिनकी मदद से होठों को पिंक किया जा सकता है। इसके अलावा एक बात का खास ध्यान रखें की अगर आपके होंठ पहले से ही किसी परेशानी से ग्रस्त हैं तो पहले उस परेशानी को दूर करें और उसके बाद इन उपायों का इस्तेमाल करें। इससे आपके लिप्स नेचुरल तरीके से पिंक होंगे।