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क्या प्रेगनेंसी के 37 वीक में डिलीवरी हो सकती है?

यदि आपकी प्रेगनेंसी सेंतीस हफ्ते तक पहुँच चुकी है और आप और आपका बच्चा बिल्कुल स्वस्थ हैं तो आपको बहुत बहुत मुबारक हो। अब आप याद कीजिये वो पल जब आपने कंसीव किया था और आपका शिशु एक खसखस के बीज जितना था और आज आपका शिशु जन्म लेने के लिए तैयार हो चूका है। ऐसे में यह पल महिला के लिए बहुत ही खास और अनमोल होने के साथ तनाव से भरा भी हो सकता है।

क्योंकि इस दौरान जहां बच्चे के जन्म लेने की ख़ुशी मन में होती हो तो साथ ही डिलीवरी कैसे होगी और डिलीवरी के दौरान किसी तरह की दिक्कत तो नहीं होगी इसे लेकर महिला परेशान हो सकती है। आज इस आर्टिकल में हम आपसे क्या 37 वीक में डिलीवरी हो सकती है इस बारे में बात करने जा रहे हैं साथ ही प्रसव के लक्षणों के बारे में जानेंगे जिससे डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी के सैंतीसवें वीक में डिलीवरी हो सकती है या नहीं?

गर्भावस्था के दौरान महिला को इस बात का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है की महिला किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करें जिससे समय से पहले बच्चे के जन्म के होने का खतरा हो क्योंकि इसके कारण माँ और बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है।

ऐसे में डिलीवरी के सही समय की यदि बात की जाए तो प्रेगनेंसी के सैंतीसवें हफ्ते से लेकर बयालीसवें हफ्ते में डिलीवरी होना बिल्कुल सही होता है। तो प्रेगनेंसी के सैंतीसवें वीक में डिलीवरी हो सकती है या नहीं इसका जवाब है हाँ, प्रेगनेंसी के सैंतीसवें हफ्ते में डिलीवरी हो सकती है।

प्रसव के लक्षण

यदि महिला की डिलीवरी होने वाली है तो शरीर में बहुत से लक्षण महसूस होते हैं। जिनसे यह जानने में मदद मिलती है की महिला की डिलीवरी होने वाली हैं। और इन लक्षणों की जानकारी महिला को होनी चाहिए ताकि महिला को प्रसव को समझने में मदद मिल सके। तो आइये अब जानते हैं की प्रसव के क्या-क्या लक्षण होते हैं।

  • पानी की थैली का फटना यानी यदि महिला को प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद पानी अधिक मात्रा में रिसता हुआ महसूस हो तो यह इस बात की और इशारा करता है की डिलीवरी होने वाली है।
  • पेट में दर्द व् ऐंठन अधिक महसूस होना।
  • पीठ में दर्द महसूस होना।
  • प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंग होना।
  • पेल्विक एरिया पर दबाव बढ़ना।
  • ऐसा महसूस होना की बच्चा नीचे गिरने वाला है।
  • भावनात्मक रूप से बदलाव महसूस होना की डिलीवरी होने वाली है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के सैंतीसवें वीक में डिलीवरी हो सकती है या नहीं उससे जुडी जानकारी व् प्रसव के लक्षण, यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो आपको भी प्रसव की जानकारी होनी चाहिए ताकि डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिल सके। साथ ही नोर्मल डिलीवरी हो इसके लिए शरीर पर जोर नहीं डालें क्योंकि इससे माँ और बच्चे को परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के 3 से 6 महीने में क्या करना चाहिए क्या नहीं?

प्रेगनेंसी के नौ महीनों को तीन -तीन महीने की तीन तिमाहियों में बांटा गया है। पहली तिमाही महिला के जहां बहुत नाजुक होती है वहीँ दूसरी तिमाही में महिला की दिक्कतें थोड़ी कम हो जाती है लेकिन तीसरी तिमाही में महिला का वजन और बच्चे का विकास तेजी से होने के कारण महिला की दिक्कत थोड़ी बढ़ जाती है।

लेकिन यह भी सच है की महिला को प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने अपना अच्छे से ध्यान रखने की जरुरत होती है साथ ही महिला को इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है की महिला को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के 3 से 6 महीने में क्या करना चाहिए क्या नहीं इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी के दूसरे ट्राइमेस्टर में क्या करना चाहिए

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए यह तो आप सभी जानते हैं और शायद प्रेग्नेंट महिला को राय भी देते हैं। लेकिन इस दौरान क्या करना चाहिए आइये उसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

खाने पीने का ध्यान रखें

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि इस दौरान बच्चे के अंग बन चुके होते हैं और उनका विकास हो रहा होता है ऐसे में शिशु के विकास में कोई कमी नहीं हो साथ ही महिला की सेहत भी अच्छी रहे इसके लिए महिला को अपनी डाइट अच्छे से लेनी चाहिए। इसके अलावा महिला को हर दो घंटे में कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए ताकि शरीर में पोषक तत्वों की कमी और एनर्जी को बरकरार रहने में मदद मिल सकें।

अपनी डाइट में बदलाव करें

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में महिला कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकती है जिनका सेवन महिला पहली तिमाही में नहीं कर सकती थी जैसे की अंडा, ड्राई फ्रूट्स, चिकन, आदि। क्योंकि यह सभी खाद्य पदार्थ माँ व् बच्चे दोनों के लिए बहुत ज्यादा हेल्दी होते हैं।

भरपूर नींद लें

गर्भवती महिला को अपनी नींद में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए और भरपूर नींद लेनी चाहिए। क्योंकि भरपूर नींद लेने से गर्भवती महिला की शारीरिक परेशानियां को कम करने में मदद मिलती हैं, महिला स्ट्रेस फ्री रहती है साथ ही महिला को एक्टिव रहने में मदद मिलती है।

खुश रहें

गर्भवती महिला को खुश रहना चाहिए क्योकि खुश रहने से महिला को तनाव के कारण होने वाली दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा खुश रहने से गर्भ में शिशु के विकास पर भी अच्छा असर पड़ता है जिससे गर्भ में शिशु ज्यादा एक्टिव भी रहता है।

विटामिन्स का समय से सेवन करें

गर्भवती महिला को डॉक्टर्स द्वारा जिन विटामिन्स को लेने की सलाह दी गई है महिला को उन विटामिन्स का समय से सेवन करना चाहिए। इससे गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है। जिसेस माँ व् बच्चे को पोषक तत्वों की कमी के कारण होने वाली समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

डॉक्टर को समय से दिखाएं

प्रेग्नेंट महिला को डॉक्टर्स से अपने सभी चेकअप समय से करवाने चाहिए इससे महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है साथ ही यदि कोई दिक्कत होती है तो उसका भी समय से पता चल जाता है और समय से ही उसका इलाज हो जाता है।

थोड़ा बहुत व्यायाम भी करें

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में महिला को सारा दिन बेड़ पर रहकर आराम ही नहीं करना चाहिए बल्कि महिला को थोड़ी देर व्यायाम, योगासन, वाक आदि भी करना चाहिए। क्योंकि जितना महिला एक्टिव रहती है उतना ही गर्भ में शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

आरामदायक कपडे पहनें

प्रेगनेंसी के चौथे महीने और उसके बाद धीरे धीरे महिला का पेट बाहर की तरफ आने लगता है। ऐसे में महिला को ज्यादा टाइट कपडे नहीं पहनने चाहिए। क्योंकि इसकी वजह से महिला के पेट पर दबाव बढ़ सकता है। जिसकी वजह से महिला को परेशानी हो सकती है ऐसे में महिला को थोड़े खुले और आरामदायक कपडे पहनने चाहिए। जिससे महिला को दिक्कत नहीं हो साथ ही महिला को ज्यादा ऊँचे जूते चप्पल आदि भी नहीं पहनने चाहिए।

नए एक्सपीरियंस का अनुभव करें

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में महिला के गर्भ में पल रहा शिशु हलचल शुरू करने लगता है ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के दौरान इस समय अपने नए एक्सपीरियंस का अनुभव करना चाहिए और इन पलों को एन्जॉय करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के दूसरे ट्राइमेस्टर में क्या नहीं करना चाहिए

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में कुछ ऐसे काम भी हैं जो नहीं करने चाहिए क्योंकि उन्हें करने से माँ व् बच्चे को नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है। तो आइये अब जानते हैं की वो काम कौन से हैं।

भारी सामान नहीं उठाएं

प्रेग्नेंट महिला को भारी सामान नहीं उठाना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से महिला को ब्लीडिंग, पेट दर्द, कमर दर्द आदि की समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।

उठते बैठने में लापरवाही नहीं करें

महिला को उठने, बैठने, लेटने में लापरवाही नहीं करनी चाहिए जैसे की ज्यादा तेजी से या झटके से उठना या बैठना नहीं चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है।

नशे का सेवन नहीं करें

प्रेग्नेंट महिला को किसी भी तरह के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि गर्भवती महिले के नशे के सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी आ सकती है।

पेट के बल नहीं सोएं

गर्भवती महिला को पेट के बल नहीं सोना चाहिए क्योंकि पेट के बल सोने से गर्भ में शिशु पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही महिला को पेट में दर्द जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है।

ज्यादा टाइट कपड़ें नहीं पहने

प्रेग्नेंट महिला को ज्यादा टाइट कपडे नहीं पहनने चाहिए क्योंकि इसके कारण पेट पर दबाव पड़ सकता है जिसकी वजह से गर्भ में शिशु असहज महसूस कर सकता है।

पैर लटकाकर नहीं बैठें

गर्भवती महिला को लम्बे समय तक पैर लटकाकर नहीं बैठने चाहिए क्योंकि इसकी वजह से ब्लड फ्लो में दिक्कत आ सकती है जिसकी वजह से महिला को पैरों में सूजन की समस्या हो सकती है इसके अलावा महिला को लम्बे समय तक एक ही जगह पर खड़े रहकर भी काम नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से भी महिला को यह दिक्कत हो सकती है।

पेट के बल कोई काम नहीं करें

प्रेग्नेंट महिला को पेट के बल भी कोई काम नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से गर्भ में शिशु को परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।

ट्रैवेलिंग से बचें

गर्भावस्था के दौरान महिला को ट्रैवेलिंग से भी बचना चाहिए क्योंकि इसके कारण महिला को कमर दर्द, पैरों में दर्द, थकान, कमजोरी जैसी समस्या होने के साथ झटका आदि लगने की वजह से भी दिक्कत होने का खतरा हो सकता है। जिससे माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है।

खाने पीने में लापरवाही नहीं करें

प्रेग्नेंट महिला को खाने पीने में भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए क्योंकि यदि प्रेग्नेंट महिला अपने खाने पीने का ध्यान नहीं रखती है तो इसकी वजह से माँ व् बच्चा दोनों को ही सेहत सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। खाने के साथ महिला को दिन भर में पानी का भी भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि पानी की कमी के कारण भी माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कतें अधिक हो सकती है।

तो यदि आप भी माँ बनने वाली है और आपकी प्रेगनेंसी का दूसरी ट्राइमेस्टर चल रहा है तो आपको भी इन टिप्स को जरूर फॉलो करना चाहिए ताकि माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।

सातवें महीने में प्रेग्नेंट महिला को यह खाना शुरू कर देना चाहिए

गर्भावस्था के दौरान महिला के लिए बहुत जरुरी है की महिला अपने खान पान, रहन सहन का अच्छे से ध्यान रखें ताकि गर्भवती महिला और उसके होने वाले बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें। और गर्भावस्था का सातवें महीने में तो महिला को अपना और भी ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि इस दौरान महिला का शरीर डिलीवरी के लिए तैयार हो रहा होता है साथ ही गर्भ में शिशु के अंगों के बेहतर विकास के लिए भी यह जरुरी है की महिला अपना अच्छे से ध्यान रखें। और इसके लिए सबसे ज्यादा जरुरी है की महिला अपनी डाइट का ध्यान रखें।

क्योंकि खाने पीने से महिला के शरीर में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में रहते हैं जिससे महिला को ऊर्जा मिलती है साथ ही शिशु के विकास को भी तेजी से होने में मदद मिलती है। क्या आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपके भी प्रेगनेंसी के आखिरी महीने चल रहे हैं तो आपको भी अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की सातवें महीने में प्रेग्नेंट महिला को क्या- क्या खाना शुरू कर देना चाहिए।

कैल्शियम से भरपूर डाइट लें

प्रेगनेंसी के सातवें महीने से महिला को कैल्शियम से भरपूर चीजों का भरपूर करना चाहिए इससे महिला की हड्डियों को मजबूती मिलती है साथ ही शिशु का शारीरिक विकास भी अच्छे से होता है। और कैल्शियम के लिए गर्भवती महिला अंडा, दूध, पनीर, दही, छाछ आदि का सेवन कर सकती है।

फाइबर युक्त डाइट

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन बढ़ना, शरीर में हार्मोनल बदलाव होना आदि आम बात होती है। और इन सभी के कारण शरीर की क्रियाएं भी प्रभावित होती है। ऐसे में पाचन क्रिया पर भी इसका असर पड़ता है जिसकी वजह से महिलाओं को कब्ज़, गैस आदि परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को पेट सम्बन्धी समस्या अधिक न हो इसके लिए महिला को अपनी डाइट में फाइबर युक्त चीजों का शामिल करने के साथ हल्का व् पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेना चाहिए। फाइबर के लिए महिला ताजे फल, दालें, फलियां, सब्जियां आदि का सेवन कर सकती है।

विटामिन सी

शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण अधिकतर गर्भवती महिलाओं की प्रेगनेंसी के दौरान इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। और इम्युनिटी कमजोर होने के कारण माँ व् बच्चे दोनों को संक्रमण होने का भय हो जाता है। ऐसे में महिला को अपनी इम्युनिटी को मजबूत रखना चाहिए और इसके लिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान विटामिन सी से भरपूर डाइट का सेवन करना चाहिए। क्योंकि विटामिन सी युक्त डाइट लेने से महिला की इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद मिलती है। और विटामिन सी के लिए महिला संतरा, निम्बू, आंवला, किन्नू, व् अन्य विटामिन सी युक्त चीजों का सेवन कर सकती है।

फोलिक एसिड

गर्भवती महिला को फोलिक एसिड से भरपूर डाइट भी जरूर लेनी चाहिए क्योंकि फोलिक एसिड गर्भ में पल रहे शिशु के लिए एक अहम पोषक तत्व होता है। और यदि गर्भ में शिशु को फोलिक एसिड भरपूर नहीं मिलता है तो इसकी वजह से शिशु को शारीरिक व् मानसिक दोष का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तक फोलिक एसिड से भरपूर डाइट जरूर लेनी चाहिए। फोलिक एसिड के लिए गर्भवती महिला हरी पत्तेदार सब्जियां, अनार, सेब जैसे फलों का सेवन भरपूर मात्रा में कर सकती है।

प्रोटीन से भरपूर डाइट लें

गर्भवती महिला को प्रोटीन से भरपूर डाइट लेनी चाहिए क्योंकि प्रोटीन से भरपूर डाइट लेने से महिला को एनर्जी मिलती है साथ शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास को बेहतर करने में मदद मिलती है। और प्रोटीन के लिए गर्भवती महिला दालें, हरी सब्जियां, बीन्स, अंडा, आदि का सेवन कर सकती है।

क्या प्रेगनेंसी में गर्भ को कोई खतरा होता है?

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तक महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए क्योंकि प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला के लिए नाजुक ही होते है। ऐसे में यदि महिला का सातवां महीना होता है तो महिला को और भी ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि इस दौरान महिला का वजन पहले से ज्यादा हो जाता है साथ ही महिला का पेट भी बाहर की तरफ निकल जाता है।

ऐसे में यदि किसी कारण पेट को चोट पहुँचती है या महिला लापरवाही करती है तो ब्लीडिंग होने, समय से पहले डिलीवरी होने आदि का खतरा भी हो जाता है। ऐसे में सातवे महीने में कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखें चाहिए।

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला इन बातों का भी खास ध्यान रखें

  • प्रेग्नेंट महिला को अपने खान पान का सही समय से सेवन करना चाहिए और खान पान में किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
  • महिला को एक ही समय में पेट भर खाने की बजाय थोड़ा थोड़ा करके खाना चाहिए ताकि भोजन को आसानी से हज़म होने में मदद मिल सकें।
  • गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेनी चाहिए न की जंक फ़ूड, ज्यादा मसाले वाले आहार, बासी खाना, ठंडा खाना आदि का सेवन करना चाहिए इनमे पोषक तत्व मौजूद नहीं होते हैं।
  • महिला को समय पर अपनी जांच करवानी चाहिए और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का सेवन भी करना चाहिए।
  • प्रेग्नेंट महिला को समय पर सोना चाहिए और आरामदायक नींद के लिए महिला को प्रेगनेंसी पिलो का इस्तेमाल करना चाहिए यह मार्किट में आसानी से मिल जाता है।
  • किसी भी तरह की दिक्कत होने पर महिला को देरी न करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।
  • शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए।
  • अपने आप को एक्टिव रखना चाहिए न की सारा दिन बीमारों की तरह लेटे रहना चाहिए।
  • गर्भवती महिला को तनाव से बचना चाहिए और खुश रहना चाहिए।
  • महिला को पेट के बल कोई काम नहीं करना चाहिए।
  • गर्भ में शिशु की हलचल पर ध्यान रखना चाहिए और कभी हलचल महसूस न हो तो इसे अनदेखा भी नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ चीजें जिनका सेवन गर्भवती महिला को शुरुर कर देना चाहिए यदि महिला अपनी डाइट से जुड़े इन टिप्स का ध्यान रखती है। तो इससे महिला को डिलीवरी के दौरान ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है जिससे महिला डिलीवरी के दौरान होने वाले दर्द को सहन करने मदद मिलती है। साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है।

बेबी का सिर नीचे आने पर क्या-क्या होता है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला हर महीने शरीर में कुछ न कुछ बदलाव महसूस करती है जैसे की धीरे धीरे महिला का वजन बढ़ने लगता है, महिला की ब्रेस्ट साइज में बदलाव आता है, महिला के पेट का आकार बढ़ता जाता है, आदि। ऐसे की कुछ बदलाव महिला को शरीर में तब महसूस होते हैं जब गर्भ में शिशु अपने जन्म लेने की सही पोजीशन में आता है यानी की शिशु का सिर नीचे की तरफ हो जाता है। तो आइये अब जानते हैं की जब शिशु का सिर नीचे की तरफ होता है तो गर्भवती महिला क्या क्या बदलाव महसूस करती है।

कब करता है शिशु नीचे की तरफ सिर?

प्रेगनेंसी के चौंतीसवें से छतीसवें हफ्ते के आस पास नीचे खिसकने की कोशिश करने लगता है और कुछ बच्चे इस दौरान अपना सिर नीचे की तरफ कर भी लेते हैं। साथ ही कुछ बच्चे प्रसव के समय के करीब आने पर भी अपना सिर नीचे की तरफ करते हैं। ऐसे में बच्चे का सिर नीचे करना बच्चे की गर्भ में स्थिति पर निर्भर करता है। लेकिन जब बच्चा सिर नीचे की तरफ करता है तो महिला शरीर में कुछ लक्षणों को महसूस कर सकती है जिससे यह जानने में मदद मिलती है की बच्चे का सिर नीचे की तरफ हो गया है।

बच्चे के नीचे सिर करने के लक्षण

गर्भ में जब शिशु सिर नीचे की तरफ करता है तो महिला को शरीर में बहुत से लक्षण महसूस हो सकते हैं। जैसे की:

पेट व् सीने में हल्कापन महसूस होता है

बच्चे के नीचे की और खिसकने की वजह से महिला को पेट व् सीने में हल्कापन महसूस होता है। और इसकी वजह से महिला को सांस लेने में आसानी होती है।

पेट नीचे की तरफ लटका हुआ महसूस होता है

जब गर्भ में शिशु का सिर नीचे की तरफ होता है तब महिला का पेट जो पहले आगे की और ज्यादा निकला हुआ महसूस होता है वो अब नीचे की तरफ लटका हुआ महसूस होता है।

पेल्विक एरिया पर दबाव बढ़ जाता है

गर्भ में शिशु के नीचे की तरफ सिर करने पर पेट के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है और यह दबाव इतना ज्यादा होता है की कई बार महिला को ऐसा महसूस होता है की बच्चा गिरने वाला है। ऐसे में महिला को बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है।

पीठ में दर्द बढ़ जाता है

बच्चे का सिर नीचे की तरफ होने पर पेट नीचे की तरफ ज्यादा होने लगता है। जिसकी वजह से पेट के साथ पीठ की मांसपेशियों में भी खिंचाव अधिक महसूस होता है। और इस कारण महिला को पीठ में ज्यादा दर्द होने की समस्या हो सकती है।

यूरिन ज्यादा आने की समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान जब बच्चे का सिर नीचे की तरफ आता है तो इसके कारण पेट के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है जिस वजह से महिला को बहुत जल्दी जल्दी यूरिन पास करने की इच्छा हो सकती है।

बवासीर

कुछ महिलाओं को इस दौरान कब्ज़ की समस्या अधिक हो सकती है या वैसे भी पेट के नीचे की तरफ दबाव बढ़ने के कारण महिला को बवासीर जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में ध्यान रखें की यदि महिला को बवासीर की समस्या अधिक हो तो महिला को डॉक्टर से मिलना चाहिए।

भूख बढ़ सकती है

बच्चे की नीचे की तरफ होने पर महिला को सीने में हल्कापन महसूस होता है साथ पेट में भी हल्कापन महसूस होता है। जिसके कारण महिला की भूख बढ़ सकती है।

बच्चे का सिर नीचे की तरफ नहीं आने पर क्या करें?

ऐसा जरुरी नहीं है की सभी बच्चे डिलीवरी का समय आने पर अपने सिर नीचे की तरफ कर लें साथ ही ऐसा भी होता है की कुछ महिलाओं को शरीर में प्रसव के लक्षण भी महसूस नहीं होते हैं। यदि आपके साथ भी ऐसा होता है और डिलीवरी डेट भी निकल जाती है तो आपको ज्यादा इंतज़ार न करते हुए डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो बेबी के सिर के नीचे आने पर महिला को महसूस हो सकते हैं। यदि आपको भी प्रेगनेंसी में ऐसा महसूस हो तो समझ जाइये की आपका बच्चा अब जन्म लेने की वाला है। ऐसे में आपको अपना और ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती है और साथ ही लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहने की जरुरत होती है।

ब्रेस्ट में दूध नहीं आ रहा है? यह करें तुरंत आ जायेगा दूध

जिस तरह गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए शिशु माँ पर निर्भर करता है उसी तरह जन्म के बाद भी शिशु का बेहतर विकास हो इसके लिए जरुरी है की महिला शिशु को ब्रेस्टफीडिंग जरूर करवाएं। और कम से कम छह महीने तक शिशु को माँ के दूध के अलावा कुछ न देने की सलाह भी डॉक्टर्स द्वारा दी जाती है। लेकिन कुछ केस में होता है की महिला को ब्रेस्टमिल्क अच्छे से नहीं उतरता है जिसके कारण महिला शिशु को ब्रेस्टफीड नहीं करवा पाती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको ब्रेस्टमिल्क अच्छे से क्यों नहीं उतरता है और किस तरह महिला इस समस्या से निजात पा सकती है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

ब्रेस्टमिल्क नहीं आने के कारण

  • ज्यादा देर लेबर में रहने के कारण महिला को तनाव अधिक हो सकता है जिसकी वजह से ब्रेस्टमिल्क उतरने में देरी हो सकती है।
  • डिलीवरी के समय ब्लीडिंग अधिक होने के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
  • लेबर के दौरान दी जाने वाली पेन किलर के असर के कारण भी ऐसा हो सकता है।
  • समय से पहले डिलीवरी होने पर भी ऐसा होता है।
  • बच्चे के जन्म के कुछ घंटों के अंदर ही बच्चे को दूध पीला देना चाहिए लेकिन यदि आप ऐसा नहीं करती है तो इसकी वजह से दूध ऊपर चढ़ने लगता है जिसके कारण ब्रेस्टफीड अच्छे से न उतरने की समस्या हो सकती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान जो महिलाएं तनाव से ग्रसित होती हैं उन्हें यह समस्या हो सकती है।
  • अधिक उम्र में बच्चे को जन्म देने वाली महिला को भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • जो गर्भवती महिलाएं शुगर से पीड़ित होती है उन्हें भी यह समस्या हो सकती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान जो महिलाएं अपने लाइफस्टाइल पर ध्यान नहीं देती है और गलत चीजों का सेवन करती हैं उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • जो गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी से पहले बर्थ कण्ट्रोल पिल्स का सेवन करती है उनके शरीर में हार्मोनल असंतुलन होने के कारण भी यह समस्या हो सकती है।

ब्रेस्ट में दूध अच्छे से उतर सके उसके लिए यह करें

जिन महिलाओं को बच्चे के जन्म के बाद ब्रेस्टमिल्क अच्छे से नहीं उतरता है उन्हें घबराने की जरुरत नहीं हैं क्योंकि ऐसा बहुत सी महिलाओं के साथ होता है। और कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करने से आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है। जैसे की:

बच्चे को स्तनपान करवाते रहें

यदि आपका थोड़ा थोड़ा ब्रेस्टमिल्क उतर रहा है तो भी शिशु को स्तनपान करवाएं क्योंकि शिशु जब दूध पीने के लिए जोर लगाएगा। तो ऐसा करने से ब्रेस्ट के उत्तकों में फैलाव होगा जिससे ब्रेस्टमिल्क को अच्छे से उतरने में मदद मिलेगी। साथ ही ऐसा भी माना जाता है की जितना ज्यादा बच्चा माँ के करीब रहता है उतना ही ब्रेस्टमिल्क को बढ़ाने में मदद मिलती है।

ब्रेस्ट को प्रेस करें

ब्रेस्टमिल्क अच्छे से उतर सके इसके लिए महिला को पंप की मदद, अपने हाथों की मदद से ब्रेस्ट को दबाना चाहिए और दूध निकालने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसा करने से भी दूध को अच्छे से उतरने में मदद मिलती है।

स्तनों की मालिश

नवजात शिशु को माँ का दूध अच्छे से मिल सके और ब्रेस्टमिल्क अच्छे से आये इसके लिए महिला को अपने स्तनों की मालिश करनी चाहिए।

कंघी का इस्तेमाल करें

कंघी के अगले हिस्से की मदद से अपने ब्रेस्ट को थोड़ा थोड़ा प्रेस करें ऐसा करना एक्यूप्रेशर का काम करता है जिससे आपको फायदा मिल सकता है।

खान पान में उन चीजों को शामिल करें जिससे ब्रेस्टमिल्क का उत्पादन बढ़ें

यदि महिला को दूध अच्छे से नहीं उतर रहा हो तो महिला को अपनी डाइट में ऐसी चीजों को शामिल करना चाहिए जिससे दूध का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सके। जैसे की महिला को दूध पीना चाहिए, दालें खानी चाहिए, ड्राई फ्रूट्स खाने चाहिए, सौंफ, जीरा आदि का सेवन करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे ट्राई करने से ब्रेस्टमिल्क के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलती है। और शिशु को पर्याप्त दूध मिलता है। इसके अलावा यदि तब भी महिला को दूध नहीं उतरें तो महिला को अपनी मर्ज़ी से किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। ताकि आपको और बच्चे दोनों की सेहत को कोई नुकसान नहीं हो।

प्रेगनेंसी में नज़र उतारने के 5 तरीके

प्रेगनेंसी के दौरान महिला की तबियत थोड़ी ठीक ठाक ही रहती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव हो रहे होते हैं जिसकी वजह से महिला को शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि महिला की तबियत थोड़ी ज्यादा ढीली हो जाये, महिला सुस्त महसूस करें तो घर में मौजूद बड़े बुजुर्ग अपनी दादी नानी की कही बातों को याद करने लगते हैं।

और कहते हैं की महिला को किसी की बुरी नज़र लग गई है ऐसे में वो महिला की नज़र उतारते हैं और उनके नुस्खों का थोड़ा असर भी होता है। क्या आप भी नज़र लगने जैसी चीजों को मानते हैं? यदि हाँ तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे 5 घरेलू नज़र उतारने के नुस्खों के बारे में बताने जा रहे हैं जो प्रेग्नेंट महिला को लगी बुरी नज़र को उतारने में आपकी मदद करते हैं।

सूखी लाल मिर्च

सबसे पहले आप दो सूखी लाल मिर्च, थोड़े से सरसों के दाने, थोड़ा सा सेंधा नमक लें, अब उन्हें एक साथ इक्कठा कर लें। इक्कठा करने के बाद आप इसे महिला के सिर से लेकर पैर तक तीन बार घुमाएं और फिर इन्हे जला दें जैसे जैसे यह जलता जायेगा वैसे वैसे महिला की नज़र उतरती जाएगी। आप चाहे तो सात सूखी लाल मिर्च लेकर महिला के ऊपर से वारकर गैस पर भी जला सकती है इस तरीके को ट्राई करने से भी महिला की नज़र उतारने में मदद मिलती है।

रुई और तेल की मदद से उतारें नज़र

सबसे पहले आप रुई की बाती बनाएं उसके बाद इसे तेल में डुबोएं तेल में डुबोएं। फिर उस बाती को महिला के ऊपर से घुमाएं और उसे जला दें जैसे जैसे वह बाती जलती जायेगी। वैसे वैसे महिला पर लगी बुरी नज़र उतरती जाएगी।

झाड़ू

झाड़ू का इस्तेमाल करने से भी नज़र उतरी जा सकती है इसके लिए आप शनिवार के दिन महिला के ऊपर से सात बात उल्टे क्रम में झाड़ू घुमाएं। उसके बाद बिना पीछे देखे गेट के बीचों बीच जाकर तीन बार झाड़ू को नीचे धरती पर मारते हुए झटक दें। ऐसा करने से महिला की नज़र को उतारने में मदद मिलती है।

चप्पल या जूते की मदद से

इस तरीके का इस्तेमाल करने के लिए आप महिला के पैर के बाएं पैर की चप्पल या जूता लें। उसके बाद उसे महिला के ऊपर से सात बार उल्टी दिशा में घुमाएं। ऐसा करने के बाद आप उस चप्पल या जूते को गेट के बीचों बीच जाकर झटक दें। ऐसा करने से भी नज़र उतारने में मदद मिलती है।

नमक

एक मुट्ठी नमक लेकर महिला के ऊपर से सात बार घुमाएं और फिर उस नमक को बिना पीछे देखे हुए चलते पानी में प्रवाह कर दें। इस तरीके को ट्राई करने से भी नज़र उतारने में मदद मिलती है।

तो यह हैं वो नुस्खे जिन्हे ट्राई करने से नज़र उतारने में मदद मिलती है यदि आप भी चाहे तो नज़र उतारने के लिए इनमे से किसी भी तरीके को ट्राई कर सकते हैं। साथ ही इन तरीकों से केवल गर्भवती महिला की ही नहीं बल्कि बच्चे बड़े सभी की नज़र को उतारा जा सकता है।

Remedies to remove evil eye effect in pregnancy

बेबी बॉय कितने वीक में होता है?

प्रेगनेंसी महिला के लिए ऐसा समय होता है जब महिला अपने गर्भ में पल रहे शिशु को लेकर बहुत उत्सुक होती है और उसका जन्म कब होगा बस उस घडी का इंतज़ार करती है। साथ ही गर्भावस्था के दौरान हर महिला को अलग अलग अनुभव होते हैं, शरीर में बहुत से बदलाव महसूस होते हैं जिन्हे देखकर महिला को शिशु को लेकर चिंता भी होती है। की कहीं इनके कारण शिशु को दिक्कत तो नहीं होगी।

जबकि यह सब होना प्रेगनेंसी के दौरान होना बहुत आम बात होती है। इसके अलावा बहुत सी गर्भवती महिलाएं यह जानने की इच्छुक भी होती है की उनके गर्भ में जो शिशु पल रहा है वो लड़का है या लड़की है, डिलीवरी कौन से महीने में हो जाएगी, लड़का होगा तो डिलीवरी कब होगी, आदि। आज इस आर्टिकल में हम आपसे गर्भ में बेबी बॉय होने के संकेत क्या होते हैं साथ ही बेबी बॉय कितने वीक में होता है उसके बारे में बात करने जा रहे हैं।

बेबी बॉय होने के लक्षण

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर के अलग अलग लक्षण महसूस होते हैं जिन्हे देखकर यह अंदाजा लगा जा सकता है की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है। पुराने समय में भी महिला के शरीर में महसूस होने वाले लक्षणों को देखकर यह अंदाजा लगाया जाता होने वाला शिशु लड़का है या लड़की है। तो आइये अब जानते हैं वो लक्षण कौन से हैं।

  • गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को सीधे हाथ की तरफ पेट में शिशु का भार अधिक महसूस होता है तो इसका मतलब होता है की आपके गर्भ में बेबी बॉय हैं।
  • जिन प्रेग्नेंट महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस की समस्या कम होती है या नहीं होती है तो इसका मतलब है की लड़का होगा।
  • यदि शिशु का हार्ट बीट रेट 140 बीट्स प्रति मिनट होता है तो इसका मतलब होता है की गर्भ में बेटा है।
  • यदि आपका बेटा होने वाला होता है तो प्रेगनेंसी के दौरान आपकी स्किन पर दाग धब्बे की समस्या नहीं होती है, आपकी स्किन ग्लोइंग और बाल घने व् चमकदार हो जाते हैं।
  • जिन गर्भवती महिलाओं का खट्टा, मिर्च मसाले वाला, नमकीन आहार का खाने की इच्छा अधिक होती है उन महिलाओं के गर्भ में भी बेटा होने के चांस अधिक होते हैं।
  • जिन गर्भवती महिलाओं का पेट का आकार गोल और आगे की तरफ ज्यादा निकला हुआ और नीचे की तरफ झुका हुआ होता है तो यह लक्षण भी इस बात की और इशारा करता है की आपके गर्भ में शिशु बॉय है।
  • गर्भवती महिला के पैरों का बहुत ठंडा रहना गर्भ में लड़का होने का लक्षण होता है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला का दायां स्तन बाएं स्तन से भारी और आकार में थोड़ा बड़ा महसूस होता है तो यह भी गर्भ में बेबी बॉय होने का लक्षण होता है।

प्रेगनेंसी में कितने हफ़्तों में लड़के का जन्म होता है?

प्रेगनेंसी के दौरान सेंतीस से इकतालीसवें हफ्ते के बीच डिलीवरी होना बहुत सही होता है क्योंकि इस दौरान शिशु का विकास अच्छे से हो चूका होता है। साथ ही यह डिलीवरी के लिए सही समय होता है लेकिन यह बता पाना की गर्भ में लड़का होगा तो इतने समय में होगा और लड़की होगी तो इतने समय में होगी यह थोड़ा मुश्किल होता है। क्योंकि बच्चे का जन्म पूरी तरह से महिला के स्वास्थ्य के ऊपर निर्भर करता है।

क्योंकि यदि प्रेगनेंसी में कम्प्लीकेशन आ जाये तो कई बार अचानक से डिलीवरी करनी पड़ती है, यदि महिला को दिक्कत हो गई है तो समय से पहले बच्चे का जन्म भी हो जाता है और कई बार डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद भी डिलीवरी नहीं होती है। ऐसे में आप बेबी कब होगा इसका डॉक्टर द्वारा बताई गई तिथि से अनुमान लगा सकते हैं। क्योंकि हो सकता है की उस डेट के पहले बच्चा हो जाये या बाद में हो जाये या फिर उसी तारीख को हो जाये।

तो यह हैं बेबी बॉय होने के लक्षण व् कितने वीक में बेबी बॉय जन्म लेता है उससे जुड़े टिप्स। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी इन लक्षणों से अंदाजा लगा सकती हैं।

फटी एड़ियों को ठीक करने के घरेलू उपाय

फटी एड़ियां दिखने में बहुत ही भद्दी लगती है साथ ही फटी एड़ियों के कारण आपके पैरों की सुंदरता में भी कमी आती है। साथ ही यदि सही समय पर इनका इलाज़ नहीं किया जाये तो इसकी वजन से एड़ियों में दर्द, खून निकलने, सूजन महसूस होने जैसी समस्या भी बढ़ जाती है। साथ ही एड़ियां फटने का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि ऐसे कई कारण होते हैं जिसकी वजह से आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

लेकिन यह कोई ऐसी परेशानी नहीं है की जिसका कोई इलाज नहीं हो। बल्कि यदि आप जिस तरह अपने शरीर के अन्य अंगों की ख़ूबसूरती का ध्यान रखते हैं वैसे ही थोड़ा समय अपने पैरों को देते हैं तो आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिल जाती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको फटी एड़ियों की समस्या से निजात पाने के कुछ ऐसे ही आसान घरेलू नुस्खें बताने जा रहे हैं।

एड़ियां फटने के कारण

  • शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण यह समस्या हो सकती है।
  • यदि आप हमेशा नंगे पैर घूमते रहते हैं तो इसकी वजह से भी पैरों के तलवे पर बुरा असर पड़ता है जिसके कारण यह समस्या हो जाती है।
  • सर्दी के मौसम में या फिर जब शुष्क हवाएं चलती है तब स्किन बहुत प्रभावित होती है जिसकी वजह से आपको यह समस्या हो सकती है।
  • पैरों को ज्यादा देर तक गर्म पानी में रखने के कारण भी यह परेशानी हो सकती है।
  • गलत साइज के जूते चप्पल पहनने के कारण पैरों में दर्द महसूस होने के साथ एड़ियां फटने की समस्या भी हो जाती है।
  • जिन लोगो के शरीर में कैल्शियम की कमी होती है उन्हें यह परेशानी अधिक हो सकती है।
  • केमिकल युक्त चीजों का प्रयोग पैरों के लिए करने के कारण भी ऐसा हो सकता है।
  • शरीर में पानी की कमी होने के कारण भी यह समस्या हो सकती है।

फटी एड़ियों की समस्या से राहत पाने के टिप्स

यदि आपकी एड़ियां फट गई हैं तो यह कोई ऐसी परेशानी नहीं है की जिसका कोई इलाज़ नहीं हो बल्कि कुछ आसान घरेलू नुस्खों को ट्राई करने से आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं। जैसे की:

एलोवेरा जैल

स्किन सम्बन्धी परेशानियों से निजात पाने के लिए एलोवेरा जैल का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए आप रात को सोने से पहले थोड़ा पानी गर्म करके उसमे अपने पैरों को भिगोएं उसके बाद सूखे कपडे से पैरों को साफ़ करें। ऐसा करने के बाद एलोवेरा जैल को अपने पैरों पर लगाएं और मोज़े यानी जुराबे पहन लें। फिर सुबह उठकर साफ़ पानी से पैरों को धों लें एक हफ्ते तक नियमित ऐसा करें आपको अपने पैरों में बदलाव साफ नज़र आएगा।

नारियल तेल का इस्तेमाल करें

नारियल तेल का इस्तेमाल करने से भी फटी एड़ियों की समस्या से निजता मिलता है और आपकी एड़ियों की स्किन को कोमल रहने में मदद मिलती है। इसके लिए आप रात को सोने से पहले नारियल तेल को गुनगुना करके अपने पैरों की मसाज करें। उसके बाद मोज़े पहन लें फिर सुबह उठकर अपने पैरों को साफ पानी से धो लें। ऐसा कुछ दिनों तक लगातार करें आपको अपने पैरों में बदलाव साफ़ नज़र आएगा।

गुलाब जल और निम्बू

एक कटोरी में एक निम्बू का रस, दो चम्मच ग्लिसरीन, और दो से तीन चम्मच गुलाबजल मिलाएं। उसके बाद आधी बाल्टी गर्म पानी लें और ध्यान रखें की पानी उतना गर्म हो की आप उसमे पैरों को अच्छे से डुबोकर बैठ जाएँ। फिर उसके बाद आप इस मिश्रण को उस पानी में डाल दें, और थोड़ा सा बचा भी लें।

फिर पंद्रह से बीस मिनट तक पैरों को पानी में डुबोएं और फुट स्क्रबर की मदद से एड़ियों को साफ़ करें। ऐसा करने के बाद पैरों को बाहर निकालें और पैरों को सूखा लें। फिर अपनी एड़ियों पर इस मिश्रण को थोड़ा थोड़ा लगाएं। और मोज़े पहन लें और रातभर के लिए इसे पैरों पर भी छोड़ दें। सुबह उठकर साफ़ पानी से पैरों को धो लें ऐसा करने से भी आपको फटी एड़ियों को समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

शहद

आधी बाल्टी में गुनगुना पानी लें और उसमे एक कप शहद मिलाएं। फिर इसके बाद आप अपनी एड़ियों को स्क्रब करें। उसके बाद पैरों को साफ पानी से धो लें ऐसा कुछ दिनों तक रोजाना करें। ऐसा करने से आपको फटी एड़ियों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

पेट्रोलियम जेली का इस्तेमाल करें

फटी एड़ियों की समस्या से राहत के लिए पेट्रोलियम जेली का इस्तेमाल करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए आप पेट्रोलियम जेली को रातभर के लिए अपने पैरों और एड़ियों पर अच्छे से लगाकर छोड़ दें। सुबह उठकर पैरों को धो लें ऐसा कुछ दिनों तक रोजाना करें आपको इसका असर साफ़ दिखाई देगा।

दूध और शहद

फटी एड़ियों की समस्या से निजात पाने के लिए आप दूध व् शहद को मिलाकर एक पेस्ट बनाएं अब इस पेस्ट को अपनी एड़ियों पर लगाएं और सूखने के बाद पैरों को धो लें और अच्छे से साफ करें। ऐसा कुछ दिनों तक नियमित करें आपको फायदा जरूर मिलेगा।

केला

एक पका हुआ केला लेकर अच्छे से पीस लें उसके बाद इसे अच्छे से अपनी एड़ियों पर लगाएं और थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी का का इस्तेमाल करके पैरों को साफ़ कर लें। ऐसा कुछ दिनों तक रोजाना करें ऐसा करने से आपको फटी एड़ियों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

विटामिन इ के कैप्सूल

चार पांच विटामिन इ के कैप्सूल लें उसके बाद इन कैप्सूल को तोड़कर तेल निकाल लें फिर इस तेल से एड़ियों को अच्छे से मसाज करें और रातभर के लिए इसे पैरों पर ही छोड़ दें। सुबह उठकर पैरों को धो लें ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें या फिर एक हफ्ते तक रोजाना करें और जब फ़र्क़ दिखाई देने लगे तो हफ्ते में दो या तीन बार करें।

प्यूमिक स्टोन

प्यूमिक स्टोन आपको बाजार में आसानी से मिल जाता है। इस टिप्स के लिए सबसे पहले आप अपने पैरों को थोड़ी देर गुनगुने पानी में भिगोएं उसके बाद प्यूमिक स्टोन को अपनी एड़ियों पर रगड़ें और उस पर जमी डेड स्किन को उतार दें। फिर सूखे कपडे का इस्तेमाल करके पैरों को सुखाएं और मॉइस्चराइजर लगाएं। ऐसा हफ्ते में तीन से चार बार जरूर करें ऐसा करने से भी आपको फटी एड़ियों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

चावल का आटा

सबसे पहले अपने पैरों को थोड़ी दे गुगुने पानी में दस मिनट तक डुबोकर रखें और फिर उन्हें सूखे कपडे से साफ कर लें। ऐसा करने के बाद एक कटोरी में दो चम्मच चावल का आटा, निम्बू का रस, एक चम्मच शहद मिलाएं फिर इन सभी चीजों को अच्छे से मिक्स करके एक पेस्ट बनाएं और उससे अपनी एड़ियों पर स्क्रब करें। उसके बाद पैरों को धोकर सुखाकर उनपर मॉइस्चराइजर लगाएं। ऐसा हफ्ते में कम से कम दो बार जरूर करें ऐसा करने से आपको फटी एड़ियों की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

फटी एड़ियों से बचे रहने के अन्य उपाय

  • अपने पैरों की साफ़ सफाई का ध्यान रखें।
  • यदि आपकी नंगे पैर घूमने की आदत है तो आज ही इसे बदल दें और हमेशा चप्पल पहन कर रखें।
  • अपने पैरों पर नियमित रूप से मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें।
  • पानी का भरपूर सेवन करें शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें।
  • अपने साइज के जूते चप्पल पहने।
  • पैरों को हफ्ते में एक दिन किसी भी आयल से मसाज जरूर करें।
  • अपने खान पान में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करें।

तो यह हैं कुछ आसान घरेलू नुस्खें जिन्हे ट्राई करने से आपको फटी एड़ियों की समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है। यदि आपकी एड़ियां भी फटी हुई हैं तो इन सभी उपाय में से किसी एक उपाय को कुछ दिन तक नियमित रूप से करें आपको जरूर फायदा मिलेगा।

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प्रेगनेंसी में पीला पेशाब आने के साथ जलन व् बदबू महसूस होने पर क्या दिक्कत होती है?

गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जब महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव तेजी से हो रहे होते हैं और इन्ही हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही कुछ अलग लक्षण भी महिला को महसूस होते हैं जैसे की भूख बढ़ जाना या भूख में कमी हो जाना, अचानक से किसी चीज को खाने की इच्छा बढ़ जाना, गुस्सा आना, खुश हो जाना, आदि, और यह लक्षण प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सामान्य होते हैं। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान यूरिन के रंग में बदलाव आना भी एक सामान्य लक्षण होता है इस दौरान महिला के यूरिन का रंग थोड़ा पीला हो जाता है। ऐसा होने का कारण महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव या दवाइयों का सेवन हो सकता है।

ऐसे में किसी तरह की घबराने की बात नहीं होती है। लेकिन जब कोई लक्षण सामान्य से अधिक महसूस हो तो महिला को उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि वह महिला के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। जैसे की प्रेग्नेंट महिला के यूरिन का रंग यदि सामान्य से अधिक पीला महसूस हो साथ ही यूरिन करते समय महिला को जलन व् बदबू महसूस हो तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में पीला पेशाब आने के साथ जलन व् बदबू महसूस होने पर महिला को क्या दिक्कत हो सकती है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

UTI के कारण ऐसा हो सकता है

UTI का मतलब होता है यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, यदि गर्भवती महिला को यह समस्या होती है तो इसके कारण महिला के पेशाब का रंग सामान्य से अधिक पीला हो सकता है साथ ही पेशाब करते समय महिला को दर्द, जलन, बदबू आदि महसूस हो सकते हैं। और यदि महिला को पेशाब करते समय ऐसा महसूस होता है तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह परेशानी यदि बढ़ जाती है तो इससे महिला की मुश्किलें बढ़ सकती है।

वजाइनल इन्फेक्शन के कारण ऐसा हो सकता है

महिला के प्राइवेट पार्ट में यीस्ट, बैक्टेरिया आदि मौजूद होता है जो वजाइना को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। लेकिन यदि किसी कारण प्राइवेट पार्ट में यीस्ट या बैक्टेरिया बढ़ जाता है तो इस कारण यीस्ट इन्फेक्शन यानी वजाइनल इन्फेक्शन की समस्या हो जाती है। और इस कारण महिला को पेशाब के रंग में बदलाव, जलन, बदबू जैसी दिक्कत महसूस हो सकती है। ऐसे में इस लक्षण के महसूस होने पर भी गर्भवती महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।

स्टोन की समस्या होने के कारण ऐसा हो सकता है

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को यदि पेशाब के रंग में बदलाव, जलन, बदबू आदि महसूस होता है तो यह लक्षण महिला की किडनी में पथरी यानी स्टोन होने की तरफ भी इशारा करता है। ऐसे में यदि आपको पता है की आपको यह समस्या है तो ठीक है नहीं तो इस लक्षण के महसूस होने पर आपको एक बार डॉक्टर से जरूर चेक करवाना चाहिए।

हार्मोनल अंसतुलन भी हो सकता है इसका कारण

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला के शरीर में हार्मोनल अंसतुलन हो जाता है तो इस कारण भी महिला को पेशाब के रंग में बदलाव, जलन व् बदबू जैसी समस्या हो सकती है।

पानी की कमी के कारण

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला के पेशाब का रंग पीला आ रहा है लेकिन जलन या बदबू जैसा कुछ महसूस नहीं हो रहा है तो यह लक्षण इस और इशारा करता है की गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी है। और पानी की कमी होने के कारण महिला को यह दिक्कत हो रही है ऐसे में महिला को इस समस्या से बचाव के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी का सेवन करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला के पेशाब का रंग पीला दिखाई दे सकता है इसके अलावा गर्भवती महिला को यदि शरीर में कोई भी लक्षण ज्यादा महसूस हो या कोई दिक्कत हो तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि कई बार आपके अनदेखा करने से आपकी दिक्कत बढ़ सकती है।

गर्भावस्था में एक भी बाल नहीं झड़ेगा करने होंगे यह उपाय

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला अपने शरीर में कोई न कोई बदलाव जरूर महसूस करती है। जैसे की वजन बढ़ना, ब्रेस्ट में बदलाव आना, पेट का आकार बढ़ना, स्किन में बदलाव आना, बालों का अच्छा या बालों से जुडी समस्या होना, आदि। और यह सब बदलाव होना प्रेगनेंसी के दौरान बहुत आम बात होती है अधिकतर महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान इन परेशानियों का सामना करती है।

लेकिन कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान स्किन सम्बन्धी समस्या जैसे की चेहरे पर दाग धब्बे होना, मुहांसे होना या फिर बालों से जुडी समस्या जैसे की बालों में रूखापन आना, बालों का झड़ना आदि समस्या हो जाती है। और महिलाएं अपनी ख़ूबसूरती का कितना ध्यान रखती है यह तो आप जानते ही हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भावस्था में बालों के झड़ने की समस्या के उपचार बताने जा रहे हैं जिससे आपको प्रेगनेंसी के दौरान भी अपने बालों की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने में मदद मिलेगी।

गर्भावस्था में बाल झड़ने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला के बाल झड़ते हैं तो इसका कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि ऐसे कई कारण होते हैं जिनकी वजह से महिला को यह समस्या हो सकती है। तो आइये जानते हैं वह कौन से कारण होते हैं।

  • गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण ऐसा होना आम बात होती है।
  • थायरॉयड की समस्या से जूझ रही महिलाओं को यह समस्या होना आम बात होती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को यह परेशानी होने का कारण अनुवांशिक भी हो सकता है जैसे की आपकी माँ, दादी, नानी को यदि यह समस्या होती है तो आपको भी यह दिक्कत हो सकती है।
  • गर्भावस्था के दौरान महिला यदि किसी बीमारी से जुडी दवाइयों का सेवन कर रही होती है तो भी महिला को यह दिक्कत हो सकती है।
  • जी महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान स्ट्रेस का सामना करती है उन महिलाओं को भी यह दिक्कत हो सकती है।
  • नींद सही से न लेने के कारण भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • बालों में ऑइलिंग यानी की तेल न लगाने के कारण बाल रूखे पड़ने लगते हैं जिसकी वजह से महिला को यह समस्या हो सकती है।
  • बार बार शैम्पू बदलने के कारण, केमिकल, स्ट्रैटनर आदि का इस्तेमाल करने के कारण भी यह दिक्कत हो सकती है।

गर्भावस्था के दौरान बाल नहीं झड़ेगें अपनाएँ यह उपाय

गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी में बाल झड़ने की समस्या से परेशान रहती है तो नीचे बताये गए आसान टिप्स को फॉलो करने से महिला इस समस्या से निजात पा सकती है। तो आइये जानते हैं वो उपाय कौन से हैं।

शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं हो

जिस तरह शरीर को स्वस्थ रहने के लिए पोषक तत्वों की जरुरत होती है उसी तरह बालों को जड़ से मजबूत रखने के लिए उन्हें भी पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों की जरुरत होती है। ऐसे में गर्भवती महिला को अपनी डाइट में पोषक तत्वों को भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए। महिला जितनी अच्छी डाइट लेगी उतना ही बालों से जुडी, सेहत से जुडी, स्किन से जुडी सभी परेशानियों से महिला को बचे रहने में मदद मिलेगी।

मसाज करें

नारियल तेल, सरसों तेल को हल्का गुनगुना करके हफ्ते में दो तीन बार मालिश जरूर करें। इससे सिर में ब्लड फ्लो सही होता रहता है जिससे बालों को जड़ से मजबूती मिलती है और गर्भवती महिला को इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

तनाव लेने से बचें

गर्भवती महिला को बिल्कुल भी स्ट्रेस नहीं लेना चाहिए और खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि जितना महिला खुश रहती है। उतना ही गर्भवती महिला को शारीरिक व् मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के साथ बालों के झड़ने की समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

भरपूर नींद लें

प्रेग्नेंट महिला को भरपूर नींद लेनी चाहिए इससे गर्भवती महिला को शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद मिलती है साथ ही शरीर में सभी क्रियाओं को बेहतर तरीके से काम करने में भी मदद मिलती है। जिससे महिला को सेहत सम्बन्धी फायदे मिलने के साथ बालों से जुडी इस समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

प्याज का रस

हफ्ते में एक या दो बार बालों को धोने से पहले महिला को स्कैल्प में प्याज का रस लगाना चाहिए इससे बालों को पोषण मिलता है। जिससे बाल जड़ से मजबूत होते हैं और गर्भवती महिला को बालों के झड़ने की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

आंवला पाउडर

दो चम्मच नारियल या जैतून के तेल में एक चम्मच आंवला पाउडर डालें और इसे भूरा होने तक गर्म करें। उसके बाद तेल के ठंडा होने पर इससे बालों की जड़ तक अच्छे से मसाज करें फिर एक से दो घंटे बाद बालों को धो लें। ऐसा पंद्रह दिन में एक बार करें ऐसा करने से भी बालों के झड़ने की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

एलोवेरा जैल

बालों में एलोवेरा जैल लगाएं ऐसा बालों को धोने से एक घंटा पहले करें। ऐसा करने से बालों के झड़ने की समस्या से निजात मिलने के साथ बालों को शाइनी व् चमकदार बनाने में भी मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान बालों के झड़ने की समस्या से बचे रहने के कुछ आसान उपाय यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी आसान टिप्स को फॉलो करना चाहिए। क्योंकि इन टिप्स को फॉलो करने से आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान बालों के झड़ने की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

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